होली 2022: जानिए, होलिका दहन व रंगभरी एकादशी शुभ मुहर्त व होलाष्टक में वर्जित कार्य

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार रंगों का त्यौहार होली सनातन धर्म का प्रमुख त्यौहार है जो कि होलिका दहन से आरंभ होती है, होलिका दहन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है इस वर्ष 17 मार्च 2022 को दिन के 1 बजकर 02 मिनट से पूर्णिमा तिथि लगेगी जो कि 18 मार्च को दिन के 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगी अतः होलिका दहन 17 मार्च 2022 को किया जाएगा व 18 मार्च 2022 को होली का पर्व काशी में व काशी से अन्यत्र होली 19 मार्च 2022 को मनाया जाएगा, जिस प्रकार से श्रावणी को ऋषि पूजन, विजयादशमी को देवी पूजन व दीपावली को देवी पूजन के बाद भोजन किया जाता है ठीक उसी प्रकार से होलिका व्रत करने वालों को होलिका दहन की ज्वाला देखने के बाद भोजन करना चाहिए।

 

होलिका दहन शुभ मुहर्त:-

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी 17 मार्च को दिन के 1 बजकर 02 मिनट तक है तदोपरांत पूर्णिमा तिथि लग रही है जो कि अगले दिन अर्थात 18 मार्च को दिन के 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगी अतः होलिका दहन गुरुवार, 17 मार्च 2022 को भद्रा रात्रि 12 बजकर 57 मिनट के बाद होगा और इसके दूसरे दिन सायंकाल में प्रतिपदा के लाभ से काशी में होली, सायं चतु:षष्टि यात्रा तथा दर्शन शुक्रवार 18 मार्च 2022 को तथा काशी से अन्यत्र होली वसंतोत्सव चैत्र कृष्ण प्रतिपदा शनिवार 19 मार्च 2022 को मनाई जाएगी।

 

होलाष्टक में वर्जित कार्य:-

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार होलाष्टक के दिनों में विवाह, किसी भी प्रकार की संपत्ति का क्रय-विक्रय, भूमि पूजन, गृहप्रवेश, षोडश (सोलह) संस्कार, यज्ञ, नए व्यवसाय का आरंभ, यात्रा को धर्म शास्त्रों में वर्जित बताया गया है अतः होलाष्टक के दिनों में यह कार्य करने से बचना चाहिए साथ ही नव वधू जिनकी प्रथम होली है है उनका होलिका दहन देखना व दर्शन करना भी धर्मशास्त्रों में वर्जित बताया गया है।

 

रंगभरी एकादशी:-

 

 

 

फाल्गुन मास की एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी मनाई जाती है वर्ष 2022 में एकादशी तिथि 13 मार्च 2022 को दिन के 8 बजकर 40 मिनट से आरंभ होगी जो कि 14 मार्च को दिन के 10 बजकर 24 मिनट तक रहेगी सूर्योदयकलीन एकादशी तिथि 14 मार्च को प्राप्त होने के कारण से रंगभरी एकदशी 14 मार्च 2022 को मनाई जाएगी, रंगभरी एकादशी के दिन के आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है जिस कारण से इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

 

रंगभरी एकादशी पूजन शुभ मुहर्त:-

14 मार्च 2022 को प्रातः 10 बजकर 24 मिनट से पूर्व पुष्य नक्षत्र में रंगभरी एकादशी पूजन शुभ मुहर्त प्राप्त होता है।

रंगभरी एकादशी पूजन विधि:-

धर्म शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव जी माता पार्वती जी का गौना करा कर उन्हें सर्वप्रथम काशी लेकर आए थे अतः इस दिन प्रातः नित्य क्रिया से निवृत्त होकर हाथ में जल, पुष्प, अक्षत, सुपाड़ी लेकर सर्वप्रथम पूजन का संकल्प लेना चाहिए तदोपरांत अबीर, गुलाल, चंदन, बिल्वपत्र शिवलिंग पर अर्पित कर भगवान शिव व माता पार्वती जी की स्तुति करनी चाहिए।

रंगभरी एकादशी विशेष उपाय:-

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार जिन व्यक्तियों के दाम्पत्य जीवन में समस्याएं चल रही हों उन्हें रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव जी का मधु से रुद्राभिषेक कराना चाहिए इससे दाम्पत्य जीवन में आ रही परेशानियों से मुक्ति मिलती है व पति-पत्नी के बीच प्रेम बना रहता है।

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly
Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)
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Email:- pooshark@astrologysutras.com, info@astrologysutras.com

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