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रक्षाबंधन क्यों मनाते हैं? जानिए वेद, पुराण व शास्त्रों के गुप्त रहस्य और सावन 2026 शुभ मुहूर्त

🔱 वैदिक धर्म व ज्योतिष अनुसंधान श्रावण मास पूर्णिमा विशेषांक २०२६

वेद, पुराण व धर्मशास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन का गूढ़ रहस्य एवं सावन 2026 शुभ मुहूर्त्त

लेखक: ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली | विषय: वैदिक रक्षा सूत्र, पौराणिक प्रमाण, उपाकर्म विधान और सावन पूर्णिमा के शास्त्रोक्त नियम व मुहूर्त्त।

सनातन धर्म की परंपरा में श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) केवल एक सामाजिक या पारिवारिक औपचारिकता नहीं है। आज जनमानस में यह धारणा बन चुकी है कि यह पर्व केवल भाई-बहन के परस्पर स्नेह और उपहार के आदान-प्रदान तक सीमित है। परंतु यदि हम अपने ऋषियों द्वारा रचित वेद, पुराण और धर्मशास्त्रों का गहराई से अनुशीलन करें, तो ज्ञात होता है कि रक्षाबंधन मूलतः ‘आत्म-सुरक्षा’, ‘दिव्य संकल्प’ और ‘असुरी प्रवृत्तियों पर दैवीय शक्तियों के विजय’ का महापर्व है।

ज्योतिष और तंत्र शास्त्र के दृष्टिकोण से श्रावण पूर्णिमा का दिन ऊर्जा के रूपांतरण और रक्षा कवच सिद्ध करने का सर्वोत्तम काल माना गया है। आइए, शास्त्रों के प्रामाणिक संदर्भों के साथ इस पावन पर्व के गूढ़ रहस्यों को समझें।

१. वेदों में रक्षा सूत्र: ‘रक्षाविधान’ और ‘कवच’ की अवधारणा

वेदों में रक्षाबंधन को लौकिक धागा न कहकर ‘रक्षा-मणि’ अथवा ‘अभिमंत्रित कवच’ कहा गया है। ऋग्वेद एवं अथर्ववेद में ऐसे कई सूक्त हैं जो यह स्पष्ट करते हैं कि जब किसी व्यक्ति को संकट, रोग, भय अथवा नकारात्मक ऊर्जा से बचाना होता था, तब वैदिक मन्त्रों से पूरित सूत्र उसकी दाईं कलाई पर बाँधा जाता था।

येनाबध्नन्मणिनमग्नये गन्धर्वाः पतिवेदने।
तं ते बध्नामि वर्चसे दीर्घायुत्वाय तेजसे॥

— अथर्ववेद (काण्ड २, सूक्त ३६, मन्त्र ७)

सरल भावार्थ: जिस प्रकार अग्नि और गंधर्वों ने अपने तेज व सामर्थ्य की रक्षा के लिए इस मंगलमय रक्षा-मणि (सूत्र) को धारण किया था, उसी प्रकार मैं तुम्हारी सर्वांगीण रक्षा, तेज, ओज और दीर्घायुष्य की अभिवृद्धि के लिए यह अभिमंत्रित रक्षा कवच बाँधता/बाँधती हूँ।

२. पुराणों में रक्षाबंधन: ४ प्रमुख पौराणिक कथाएं व शास्त्र प्रमाण

(क) भविष्य पुराण: देवराज इंद्र और इंद्राणी शची प्रसंग (रक्षाबंधन का मूल आरंभ)

पौराणिक काल में जब दैत्यराज वृत्रासुर के आतंक से त्रिलोकी कांप उठी और देवासुर संग्राम में देवता पराजित होने लगे, तब देवराज इंद्र अत्यंत व्यथित होकर देवगुरु बृहस्पति के पास गए। देवगुरु ने श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन एक विशेष रक्षा विधान संपन्न कराया। इंद्राणी शची ने गुरु द्वारा अभिमंत्रित रक्षा सूत्र को देवराज इंद्र की दाहिनी कलाई पर बाँधा। इस दिव्य कवच के प्रभाव से देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की। यह प्रसंग सिद्ध करता है कि रक्षा सूत्र केवल बहन द्वारा भाई को ही नहीं, बल्कि गुरु द्वारा शिष्य को और पत्नी द्वारा पति के विजय-संकल्प हेतु भी बाँधा जाता रहा है।

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥

— भविष्य पुराण (उत्तर पर्व, अध्याय १३७)

गूढ़ भावार्थ: जिस सत्य और धर्म-संकल्प रूपी रक्षा सूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि को बाँधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें आबद्ध करता हूँ। हे रक्षा सूत्र! तुम अपने रक्षा-धर्म से कभी विचलित न होना और धारक की निरंतर रक्षा करना।

(ख) श्रीमद्भागवत पुराण: राजा बलि और माता महालक्ष्मी का पावन संबंध

श्रीमद्भागवत के अष्टम स्कंध में वर्णन आता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि में संपूर्ण त्रिलोकी नाप ली। बलि की अनन्य भक्ति और सर्वस्व दान से प्रसन्न होकर भगवान ने उनसे वर मांगने को कहा। बलि ने प्रभु से पाताल लोक में सदैव अपने समक्ष रहने का वर मांग लिया। जब भगवान वैकुंठ छोड़कर पाताल के द्वारपाल बन गए, तब माता लक्ष्मी अत्यंत चिंतित हुईं। देवर्षि नारद के परामर्श पर माता लक्ष्मी ने श्रावण पूर्णिमा के दिन राजा बलि को रक्षा सूत्र बाँधकर भाई बनाया और उपहार स्वरूप अपने स्वामी श्रीहरि को पुनः प्राप्त किया।

(ग) महाभारत: भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी का आत्मीय रक्षा सूत्र

महाभारत सभा पर्व के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से पापी शिशुपाल का वध किया, तब चक्र के वेग से प्रभु की तर्जनी उंगली कट गई और रक्त बहने लगा। द्रौपदी ने बिना एक क्षण गंवाए अपनी रेशमी साड़ी का पल्लू फाड़कर श्रीकृष्ण की उंगली पर बाँध दिया। भगवान श्रीकृष्ण ने उस समय द्रौपदी को भगिनी (बहन) स्वीकार किया। कालांतर में द्युत सभा में चीरहरण के समय भगवान ने उस रक्षा सूत्र के संकल्प को निभाते हुए द्रौपदी की लाज बचाई।

(घ) यमराज और यमुना का अमरत्व प्रसंग

पुराणों में एक प्रसंग यह भी आता है कि श्रावण पूर्णिमा के दिन यमुना जी ने अपने भ्राता यमराज को रक्षा सूत्र बाँधकर उनकी दीर्घायु की कामना की थी। यमराज ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो भाई श्रावण पूर्णिमा के दिन अपनी बहन से रक्षा सूत्र बंधवाएगा, उसे अकाल मृत्यु और यम के भय से मुक्ति प्राप्त होगी।

३. धर्मशास्त्रों में ‘श्रावणी उपाकर्म’ का वैज्ञानिक व दार्शनिक आधार

निर्णयसिंधु, धर्मसिंधु और हेमाद्रि ग्रंथों के अनुसार, श्रावण पूर्णिमा केवल रक्षा सूत्र बाँधने का दिन नहीं है, बल्कि यह श्रावणी उपाकर्म (संस्कृत दिवस) का महापर्व है। इस दिन तीन प्रमुख वैदिक कर्म किए जाते हैं:

  • हेमाद्रि स्नान व प्रायश्चित संकल्प: वर्षभर में हुए जाने-अनजाने दोषों के क्षय हेतु पंचगव्य व औषधीय द्रव्यों से स्नान।
  • सप्तर्षि एवं पितृ तर्पण: ज्ञान की अखंड परंपरा को अक्षुण्ण रखने वाले पूज्य ऋषियों और पितरों का जल व कुश से तर्पण।
  • यज्ञोपवीत (जनेऊ) परिवर्तन व वेदारंभ: नवीन अभिमंत्रित जनेऊ धारण करना तथा स्वाध्याय का पावन संकल्प लेना।

४. रक्षाबंधन 2026: तिथि, भद्रा काल एवं शास्त्र सम्मत शुभ मुहूर्त

वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का महापर्व शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणना के अनुसार वर्ष 2026 का रक्षाबंधन अत्यंत शुभ योगों में आ रहा है क्योंकि इस वर्ष भद्रा का साया सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगा, जिससे पूरे दिन राखी बाँधने के लिए निर्विघ्न और शुभ समय उपलब्ध रहेगा।

पंचांगीय तत्व / विवरण तिथि व सटीक समय (28 अगस्त 2026)
पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त 2026, प्रातः 08:32 बजे से
पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त 2026, प्रातः 09:19 बजे तक
उदयातिथि अनुसार रक्षाबंधन पर्व शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
भद्रा काल की स्थिति 27 अगस्त की रात्रि 08:55 पर भद्रा समाप्त हो रही है अतः 28 अगस्त (बाधारहित दिवस) है।
सर्वश्रेष्ठ प्रातःकालीन मुहूर्त (पूर्णिमा युक्त) प्रातः 05:52 बजे से प्रातः 07:10 बजे तक
अपराह्न (दोपहर) शुभ मुहूर्त (अभिजीत/विजय) दोपहर 01:30 बजे से अपराह्न 04:15 बजे तक
प्रदोष काल (संध्याकालीन मुहूर्त) सायं 05:30 बजे से रात्रि 07:20 बजे तक
⚠️ शास्त्र नियम (निर्णयसिंधु): ‘भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा’ — अर्थात भद्रा काल में रक्षाबंधन और होलिका दहन कदापि नहीं करना चाहिए। वर्ष 2026 में भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो रही है, अतः प्रातःकाल राखी बाँधना अत्यंत कल्याणकारी व शास्त्र सम्मत है।

५. ज्योतिर्विद सम्मत: रक्षा सूत्र बाँधने की प्रामाणिक विधि

  1. दिशा विचार: भाई का मुख पूर्व (East) या उत्तर (North) दिशा की ओर तथा बहन का मुख पश्चिम की ओर होना चाहिए।
  2. पूजा थाल: थाली में शुद्ध कुमकुम/रोली, अक्षत (अखंड चावल), रक्षा सूत्र, दीपक, दूर्वा, मिष्ठान और दक्षिणा सजाएं।
  3. तिलक विधान: अनामिका उंगली से भाई के आज्ञा चक्र (मस्तक) पर रोली का तिलक कर अक्षत लगाएं।
  4. रक्षा सूत्र बंधन: भाई की दाहिनी कलाई पर तीन गांठें लगाते हुए ‘येन बद्धो बली राजा…’ मंत्र का उच्चारण करें।
  5. आरती व संकल्प: भाई की मंगल आरती उतारें, मिष्ठान खिलाएं और भाई अपनी बहन को उपहार व सुरक्षा का संकल्प दें।

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राहु-केतु का कष्टकारी गोचर लाभ हेतु करें यह उपाय

राहु और केतु का वर्तमान गोचर अनेक प्रकार से कष्टदाई रहा है क्योंकि इस बार केतु का गोचर वृश्चिक अर्थात अग्नि तत्व ग्रह मंगल की राशि से था जिस कारण से राहु को सदैव ही नियंत्रण में रखने वाला केतु इस बार स्वम् नियंत्रण के बाहर था जिसको नियंत्रित राहु कर रहे हैं।

राहु के पास सर तो केतु के पास धर अर्थात शरीर है वैदिक ज्योतिष में राहु को अशुभ फल देने वाला ग्रह बताया गया है तो वहीं केतु को शुभ फल देने वाला ग्रह बताया गया है किंतु केतु, राहु के ठीक सामने अर्थात राहु से सप्तम में स्थित होने के कारण से वह भी अशुभ फल देने वाला ग्रह बन जाता है और इस बार राहु के पूर्ण अशुभ फल केतु भी प्रदान कर रहे हैं।

राहु-केतु का कष्टकारी गोचर
राहु-केतु का कष्टकारी गोचर

 

राहु व केतु के गोचर परिवर्तन के समय धनु लग्न व वृश्चिक राशि थी जहाँ चंद्रमा का अष्टमेश होकर अपनी नीच राशि में बैठना व पीड़ित होना समस्याओं को और बढ़ाने का सूचक था, ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है “चंद्रमा मनसो जात:” अर्थात चंद्रमा मन का कारक होता है जिस कारण से राहु व केतु के इस कष्टकारी गोचर के कारण से स्वास्थ्य जनित समस्याएं व मानसिक अशांति बनी रही किंतु यह स्थिति अब जल्द ही सामान्य होने लगेगी 9 अप्रैल 2022 की मध्य रात्रि 4 बजकर 21 मिनट को राहु व केतु का गोचर परिवर्तन होगा इसके बाद से स्थिति कुछ सामान्य होने लगेगी जिसका असर कोरोना पर भी देखने को मिलेगा।

 

राहु-केतु के कुछ अचूक उपाय:-

राहु-केतु के कुछ विशेष उपाय
राहु-केतु के कुछ विशेष उपाय

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार राहु व केतु का यह गोचर अनेक प्रकार से विपत्तियों को उत्पन्न करने वाला था जिसमें प्राकृतिक आपदाओं व महामारी के प्रकोप का सभी जनमानस को सामना करना पड़ा साथ ही कारोबार में अड़चन व अन्य किसी भी माध्यम से मानसिक अशांति और अंदर कुछ घिराव के कारण से हानि व पराक्रम की हानि का सामना जनमानस को करना पड़ा अतः आज मैं आप सभी को कुछ ऐसे उपाय बता रहा हूँ जिनको करने से आप सभी को अवश्य ही लाभ प्राप्त होगा।

उपाय:-

१. 4 अमावस्या नियम से सूर्यास्त बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर नारियल को बहते पानी में प्रवाहित करें।

२. नित्य शिवलिंग पर जल मिश्रित दुग्धाभिषेक करें तदोपरांत चावल मिश्रित काला तिल “ॐ नमः शिवाय:” मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग पर अर्पित करें और विल्वपत्र अर्पित करते हुए विलवाष्टकम् का पाठ करें।

३. 4 शनिवार नियम से काली उर्द, शहद, किशमिश, आम का मीठा अचार व मेवा युक्त कोई नमकीन कुछ दक्षिणा के साथ किसी भिखारी/जमादार/नौकर को दान करें।

४. बुधवार के दिन कबूतर को दाना डालें।

५. बुधवार व अमावस्या तिथि के दिन सूर्यास्त बाद कुत्ते को कोई ताकत की चीज जैसे दूध/पनीर/खोआ आदि खिलाएं।

जय श्री राम।

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बसंत पंचमी 5 फरवरी 2022: जानिए शुभ मुहर्त

बसंत पंचमी 5 फरवरी 2022: जानिए शुभ मुहर्त

 

बसंत पंचमी 5 फरवरी 2022: जानिए शुभ मुहर्त
बसंत पंचमी 5 फरवरी 2022: जानिए शुभ मुहर्त

 

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, बसंत पंचमी के नाम से विख्यात है इस वर्ष माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि ४ फरवरी को प्रातः ०६:४३ पर लग रही है जो कि जो कि ५ फरवरी की प्रातः ०६:४५ तक रहेगी बसंत पंचमी की पूजा दिन के मध्य भाग में करी जाती है और ५ फरवरी को दिन के मध्य भाग में पंचमी तिथि मिल रही है और ६ फरवरी को दिन के मध्य भाग में षष्ठी तिथि मिल रही है अतः इस वर्ष बसंत पंचमी जिसे श्री पंचमी भी कहते हैं ५ फरवरी २०२२ को मनाई जाएगी।

धर्म शास्त्रों के अनुसार बसंत पंचमी को श्री पंचमी भी कहा जाता है इस दिन अबूझ मुहर्त होने के कारण से किसी भी मांगलिक कार्यक्रम को करने के साथ किसी नई वस्तु का क्रय या किसी नए कार्य का आरंभ भी किया जा सकता है बसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी माता सरस्वती के पूजन का विधान है इस दिन माता सरस्वती की पूजा करने से अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है तथा जिन विद्यार्थियों की शिक्षा में अवरोध उत्पन्न हो रहे हों उन्हें बसंत पंचमी के दिन माता सरस्वती की विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए।

सुखद दाम्पत्य जीवन हेतु करें यह उपाय

 

सुखद दाम्पत्य जीवन हेतु करें यह उपाय
सुखद दाम्पत्य जीवन हेतु करें यह उपाय

 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बसंत पंचमी के दिन कामदेव के मंत्र “ॐ नमो भगवते कामदेवाय, यस्य यस्य दृश्यो भवामि, यश्च यश्च मम मुखम पछ्यति तत मोहयतु स्वाहा” मंत्र का 1 माला जप करने व कामदेव और देवी रति की पूजा करने से दाम्पत्य जीवन में मधुरता आती है।

 

पूजा शुभ मुहर्त

 

पूजा शुभ मुहर्त
पूजा शुभ मुहर्त

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार बसंत पंचमी/सरस्वती पूजन/कामदेव पूजन शुभ मुहर्त प्रातः ०६:४० से १२:११ तक रहेगा जिसकी कुल अवधि ५ घंटे ३१ मिनट रहेगी इसमें भी विशेष प्रातः ०८:२५ से ०९:५३ कुंभ लग्न (स्थिर लग्न) में पूजन करना अत्यंत शुभ रहेगा।

नोट:- यदि किसी कारण वश ऊपर बताए गए मुहर्त में पूजा न कर सकें तो बसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहर्त रहने के कारण किसी भी समय माता सरस्वती की पूजा कर सकते हैं।

 

बसंत पंचमी का सूक्ष्म पंचांग “ऋषिकेश पंचांग” (काशी अनुसार)

 

बसंत पंचमी सूक्ष्म पंचांग
बसंत पंचमी सूक्ष्म पंचांग

 

दिनमान:- २७:२३
तिथि:- चतुर्थी प्रातः ०६:४३ तक तदोपरांत पंचमी
नक्षत्र:- उत्तराभाद्रपद रात्रि ०७:०५ तक तदोपरांत रेवती
योग:- सिद्ध रात्रि ०८:४३ तक तदोपरांत साध्य
करण:- विष्टि उपरांत वव
चंद्र:- मेष
सूर्योदय:- ०६:३१
सूर्यास्त:- ०५:२९
चन्द्रास्त:- ०९:५५

 

५ फरवरी के कुछ विशेष योग

बसंत पंचमी, तक्षक पूजा, रतिकाम महोत्सव, भद्रा प्रातः ०६:४३ तक, पंचक, सरस्वती पूजन।

जय श्री राम।
Astrologer:- Pooshark Jetly
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मई 2020: मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मकर लग्न गोचरफल
मकर लग्न 

 

मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः जो लोग लंबे समय से वाहन खरीदना चाहते हैं उनके लिए वाहन प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनाव का माहौल रहा सकता है, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, कार्यस्थल पर आपके ऊपर कार्य का अतिरिक्त बोझ रहने के कारण से थकान अनुभव होगी, आलस्य का त्याग करें, किसी उच्च अधिकारी या सरकारी कर्मचारी से व्यर्थ के विवाद से बचें 14 मई को सूर्य गोचर बदलकर पंचम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, गर्म चीजों के सेवन से बचें अन्यथा उदर संबंधित कोई परेशानी रह सकती है, संतान का स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा सा हो सकता है, माह के शुरुवात में बुध का गोचर चतुर्थ भाव में रहेगा फलस्वरूप मामा पक्ष के कारण से घर में कुछ तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है, मन में एक असंतोष रह सकता है, माता का सहयोग प्राप्त होगा 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके पंचम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए मार्ग बनाने में सफल होंगे, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें चूँकि शुक्र के स्वराशि गोचर व गुरु की पंचम भाव में दृष्टि के कारण से ज्यादा दिक्कत की बात नही है फिर भी स्वास्थ्य को लेकर थोड़ा सचेत रहें, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु उनके स्वास्थ्य में कुछ समस्या भी रह सकती है, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों के लिए अच्छा समय रहेगा 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके छठे भाव में चलें जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, मामा पक्ष से संबंध मधुर होंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा।

 

मकर राशिफल
मकर राशि

 

माह के शुरुवात में शुक्र का गोचर आपके पंचम भाव से रहेगा शुक्र आपकी कुंडली में राजयोगकारक होकर पंचम भाव से स्वराशि गोचर करेंगे फलस्वरूप आपको अपने किसी करीबी मित्र से प्रेम हो सकता है, प्रेम संबंधों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, आय में वृद्धि होगी, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी व जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे, जो लोग कला, सौंदर्य से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा, शुक्र का यह गोचर लगभग 4 माह तक आपके पंचम भाव से रहेगा फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर आपके प्रेम संबंधों व जीवनसाथी के साथ आपके संबंधों में मधुरता लाएगा व उनसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद खत्म होंगे, माह के शुरुवात में राहु का छठे भाव से गोचर रहेगा अतः छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें व व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, सर दर्द, नेत्रों में तकलीफ की भी समस्या रह सकती है, माह के शुरुवात में शनि लग्न से स्वराशि गोचर कर शश नामक योग बनाएंगे साथ ही गुरु की शनि से युति नीचभंग राजयोग का निर्माण करेंगी और लग्न से ही मंगल का अपनी उच्च राशि मकर से गोचर रूचक नामक योग बनाएगा फलस्वरूप पिछले काफी समय से चली आ रही समस्याओं से राहत मिलेगी, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके लिए विवाह के योग बनेंगे, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे विवाह करना चाहते हैं तो प्रेम विवाह के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, बेरोजगार लोगों को नौकरी प्राप्त होगी, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, आपके कार्य से सीनियर खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, घर में कोई शुभ कार्य भी हो सकता है 9 मई को मंगल गोचर बदलकर आपके दूसरे भाव में आ जाएंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, गर्म चीजों के सेवन से बचें व वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी की वाणी थोड़ी तेजी अनुभव होगी, भाग्य में वृद्धि होगी।

 

मकर राशिफल
मकर राशि

 

कुल मिलाकर मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें किसी नए कार्य की शुरुवात करने के लिए मन में विचार आ सकते हैं, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, माता का सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, माह की 2, 3, 8, 10, 11, 17, 19, 22, 25, 26, 29 व 30 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मकर लग्न व मकर राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य मधुराष्टकं का पाठ करें व मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Mobile:- 9919367470

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संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग १

संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग १

 

पंचम भाव में स्थित शनि का फल
पंचम भाव में स्थित शनि का फल

 

जन्म कुंडली के पंचम भाव से हम बुद्धि, विद्या, संतान, उदर, बौद्धिक क्षमता, पिछले जन्म का विचार करते हैं अतः इन भावों में स्थित शनि का स्थित होना इन सभी को प्रभावित करता है मेरे अनुभव में यह भी आया है कि यदि शनि पंचम भाव में अकेला बैठा हो तो ऐसे व्यक्तियों को उदर अर्थात पेट से जुड़ी कोई न कोई समस्या अवश्य रहती है अतः इन लोगों को तामसिक चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, बहुत से ग्रंथकारों का मत है कि पंचम भाव में शनि स्थित हो तो वह शिक्षा में किसी न किसी प्रकार के व्यवधान को भी दर्शाता है किंतु विभिन्न राशियों या विभिन्न स्थितियों में शनि के पंचम भाव में स्थित होने पर इसके फल विभिन्न होते हैं मेरे अनुभव में आया है कि यदि शनि पंचम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों की जटिल कार्यों को करने में अच्छी रुचि होती है मतलब ऐसे व्यक्ति उस काम को करना अधिक पसंद करते हैं जिसमें शारीरिक की जगह मानसिक मेहनत अधिक हो अर्थात ऐसे सभी कार्य जो तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हुए होते हैं, यदि वायु तत्व राशि जैसे मिथुन, तुला व कुंभ राशि का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति पढ़ाई में बहुत अच्छे होते हैं, पंचम भाव में स्थित शनि संतान संबंधित परेशानियों का सूचक होता है ऐसे व्यक्तियों को संतान कुछ विलंब से होती है।

 

पंचम भाव में स्थित शनि

 

पंचम भाव में बैठे शनि की तीसरी दृष्टि सप्तम भाव में होती है सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी, रोमांस, मित्रता, नौकरी, पार्टनरशिप का भाव होता है जहाँ शनि की दृष्टि इन सभी को प्रभावित करती है ऐसे व्यक्तियों का विवाह कुछ विलंब से होता है या शीघ्र विवाह होने की स्थिति में दामपत्य जीवन में आपसी ताल-मेल बैठाने में परेशानियाँ आती है, ऐसे व्यक्तियों के मित्र सीमित संख्या में होते है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के दामपत्य जीवन में रोमांस कम व गंभीरता अधिक देखी जाती है, ऐसे व्यक्तियों को जीवन के शुरुवात व 36-37 वर्ष की आयु में कड़ा संघर्ष करना पड़ता है व जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता प्राप्त होती है, पंचम भाव में स्थित शनि की सप्तम दृष्टि एकादश भाव व दसवीं दृष्टि दूसरे भाव में पड़ती है अर्थात धन से जुड़े दोनों भाव शनि के प्रभाव में रहते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों की आर्थिक उन्नति मंद गति अर्थात धीरे-धीरे होती है व ऐसे व्यक्ति यदि शनि से जुड़े कार्य जैसे लोहे, चमड़े, भूमिगत से जुड़े कार्य या हथियार, वाहन से जुड़े कार्य में अधिक सफल होते हैं, मेरे अनुभव में यह भी आया है कि पंचम भाव में बैठा शनि संकुचित मात्रा अर्थात टुकड़ों में धन देता है कहने का आशय यह है कि कभी इनके पास काफी पैसा आ जाता है तो कभी एकदम सूना सा पड़ जाता है अर्थात पंचम भाव का शनि धन संचय में समस्याएं देता है साथ ही पंचम भाव से हम बुद्धि व दूसरे भाव से वाणी का विचार करते है पंचम भाव में बैठा शनि इन दोनों ही भावों को प्रवाभित करता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों की वाणी थोड़ी कटु होती है क्योंकि शनि एक रूखा ग्रह है जिस कारण से आपके द्वारा बोली गयी बात नकारात्मकता लिए हुए होती है और उसको कहने का तरीका थोड़ा रूखा होता है।

 

अब बात करते हैं विभिन्न स्थितियों में शनि के पंचम भाव में बैठने का क्या फल होता है…..

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसका दूसरा भाग जल्द ही लिखूँगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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मई 2020: कन्या लग्न व कन्या राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: कन्या लग्न व कन्या राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

कन्या लग्न
कन्या लग्न कुंडली

 

कन्या लग्नकन्या राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह की शुरुवात में सूर्यबुध का गोचर अष्टम भाव से रहेगा सूर्य का अष्टम भाव से उच्च राशि का गोचर विपरीत राजयोग बनाएगा जिस कारण से अचानक कोई सफलता प्राप्त होने के योग बनेंगे, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, जीवनसाथी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव रहेगी अतः उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखें, अष्टम भाव जीवनसाथी के वाणी का भी भाव है अतः उनके वाणी में कुछ तेजी रहेगी साथ ही अष्टम भाव आपके ससुराल अर्थात जीवनसाथी के परिवार को दर्शाता है जहाँ से सूर्य का गोचर उनसे विवाद करा सकता है अतः तनाव लेने से बचें, माह के शुरुवात में बुध का भी अष्टम भाव से गोचर रहेगा जिस कारण से आपके स्वास्थ्य में परेशानी व तनाव बना रह सकता है 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके भाग्य स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, भाग्य का सहयोग मिलेगा, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी 14 मई को सूर्य भी गोचर बदलकर आपके नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके दशम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, माता का सहयोग प्राप्त होगा, जिनका कार्य बैंक, फाइनेंस, टीचिंग से जुड़ा हुआ है उनके लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

माह के शुरुवात में शुक्र का भाग्य स्थान से गोचर रहेगा जो कि आपके लिए बेहद शुभ रहेगा अतः भाग्य की वृद्धि होगी, किसी महिला से धन लाभ होगा या किसी महिला के सहयोग से उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, आपके जीवनसाथी के यदि छोटे भाई-बहन हैं तो उनकी उन्नति होगी किन्तु उनके स्वास्थ्य में भी कुछ समस्या रह सकती है, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में गुरु, मंगलशनि का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के लिए कहीं बात चल सकती है, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय काफी अच्छा रहेगा, संतान का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति होगी, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे 4 मई को मंगल गोचर बदलकर छठे भाव में आ जाएंगे अष्टम भाव के स्वामी का छठे भाव से गोचर स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत अच्छा नही कहा जा सकता अतः अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें रक्त जनित कोई समस्या हो तथा जिनकी उम्र 55-60 के ऊपर हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विपरीत परिस्थितियों से होते हुए अचानक बड़ी सफलता प्राप्त होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सरकारी कर्मचारियों से फालतू विवाद में न पड़ें, 14 मई से 17 जून तक वाहन सावधानी से चलाएं।

 

कन्या राशिफल
कन्या राशि

 

कुल मिलाकर कन्या लग्नकन्या राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह के योग बनेंगे, तनाव लेने से बचें व व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, किसी महिला से धन लाभ या महिला के सहयोग से उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, यदि आपका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं तो संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, जिनकी उम्र 55-60 के अधिक है और रक्त से जुड़ी समस्या है वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, फालतू विवाद में न पड़ें, माह की 2, 3, 11, 13, 14, 15, 21, 22, 23 व 28 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि कन्या लग्नकन्या राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सुंदरकांड का पाठ करें व नित्य सूर्य को जल देकर आदित्य हिर्दय स्तोत्र का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

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