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मई 2020: तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

तुला लग्न
तुला लग्न कुंडली

 

तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए मई 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का सप्तम स्थान से गोचर रहेगा फलस्वरूप नौकरी पेशा लोगों के लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी के स्वभाव में कुछ तेजी देखने को मिलेगी, यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, यदि आप नए कार्य की शुरुवात करते हैं तो जीवनसाथी को पार्टनर बना कर करें लाभ होगा 14 मई को सूर्य गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें व गर्म चीजों से परहेज करें, ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में तेजी रहेगी जिसके कारण ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, अष्टम भाव जीवनसाथी की वाणी को भी दर्शाता है क्योंकि सप्तम भाव जीवनसाथी का व अष्टम भाव उसकी वाणी का भाव है अतः जीवनसाथी की वाणी कुछ गर्माहट लिए हुए होगी जिस कारण से जीवनसाथी के साथ भी विवाद संभव रहेगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तनाव लेने से बचें, माह के शुरुवात में बुध का गोचर सप्तम भाव से रहेगा जिस कारण से कार्य के सिलसिले से यात्राओं के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के योग बनेंगे, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, संतान को कुछ कष्ट संभव रहेगा 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, तनाव लेने से बचें, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके भाग्य स्थान में जाएंगे फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा।

 

तुला राशिफल
तुला राशि

 

माह के शुरुवात में शुक्र का अष्टम भाव से गोचर रहेगा अतः वाहन सावधानी से चलाएं, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, लोग आपके पीठ-पीछे षड्यंत्र रचेंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें क्योंकि इस माह आपके हार्मोन्स काफी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर सकते हैं, जिन्हें हार्मोन्स से जुड़ी कोई समस्या है वह भी अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, माह के शुरुवात में मंगल गुरु व शनि का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप आप घर परिवर्तन या घर में साज-सज्जा का कार्य करवा सकते हैं, भूमि सुख प्राप्त होने के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा किन्तु फिर भी उनके पैरों विशेषतः घुटनो व जोड़ों या कमर में दर्द की शिकायत रह सकती है, कार्यस्थल पर सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे 4 मई को मंगल गोचर बदलकर आपके पंचम भाव मे आ जाएंगे फलस्वरूप संतान का सहयोग प्राप्त होगा व संतान की उन्नति होगी, यदि आपके कोई बड़े भाई हैं तो उनकी भी उन्नति होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए मार्ग बनाने का प्रयास करेंगे, पेट में कोई समस्या संभव रहेगी, वाहन सावधानी से चलाएं।

 

तुला राशि
तुला राशि

 

कुल मिलाकर तुला लग्न व तुला राशि वालों के मई 2020 मिला-जुला रहेगा जिसमें मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, यदि आपका पार्टनरशिप से जुड़ा कार्य है तो उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, यदि आप नए कार्य की शुरुवात करना चाहते हैं तो जीवनसाथी को पार्टनर बनाकर करें लाभ होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, वाहन सावधानी से चलाएं, 7 मई से 24 मई तक लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें तथा यदि संभव हो तो सिर्फ अपने कार्य पर ही ध्यान दें, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, माह की 6, 8, 12, 13, 15, 17, 19, 20, 21, 22, 23 व 24 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि तुला लग्न व तुला राशि वाले व्यक्ति यदि दुर्गा सप्तशती का शुक्रवार से आरंभ कर नित्य पाठ करें व नित्य सूर्य को जल दें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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मई 2020: कन्या लग्न व कन्या राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: कन्या लग्न व कन्या राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

कन्या लग्न
कन्या लग्न कुंडली

 

कन्या लग्नकन्या राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह की शुरुवात में सूर्यबुध का गोचर अष्टम भाव से रहेगा सूर्य का अष्टम भाव से उच्च राशि का गोचर विपरीत राजयोग बनाएगा जिस कारण से अचानक कोई सफलता प्राप्त होने के योग बनेंगे, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, जीवनसाथी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव रहेगी अतः उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखें, अष्टम भाव जीवनसाथी के वाणी का भी भाव है अतः उनके वाणी में कुछ तेजी रहेगी साथ ही अष्टम भाव आपके ससुराल अर्थात जीवनसाथी के परिवार को दर्शाता है जहाँ से सूर्य का गोचर उनसे विवाद करा सकता है अतः तनाव लेने से बचें, माह के शुरुवात में बुध का भी अष्टम भाव से गोचर रहेगा जिस कारण से आपके स्वास्थ्य में परेशानी व तनाव बना रह सकता है 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके भाग्य स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, भाग्य का सहयोग मिलेगा, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी 14 मई को सूर्य भी गोचर बदलकर आपके नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके दशम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, माता का सहयोग प्राप्त होगा, जिनका कार्य बैंक, फाइनेंस, टीचिंग से जुड़ा हुआ है उनके लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

माह के शुरुवात में शुक्र का भाग्य स्थान से गोचर रहेगा जो कि आपके लिए बेहद शुभ रहेगा अतः भाग्य की वृद्धि होगी, किसी महिला से धन लाभ होगा या किसी महिला के सहयोग से उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, आपके जीवनसाथी के यदि छोटे भाई-बहन हैं तो उनकी उन्नति होगी किन्तु उनके स्वास्थ्य में भी कुछ समस्या रह सकती है, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में गुरु, मंगलशनि का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के लिए कहीं बात चल सकती है, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय काफी अच्छा रहेगा, संतान का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति होगी, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे 4 मई को मंगल गोचर बदलकर छठे भाव में आ जाएंगे अष्टम भाव के स्वामी का छठे भाव से गोचर स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत अच्छा नही कहा जा सकता अतः अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें रक्त जनित कोई समस्या हो तथा जिनकी उम्र 55-60 के ऊपर हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विपरीत परिस्थितियों से होते हुए अचानक बड़ी सफलता प्राप्त होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सरकारी कर्मचारियों से फालतू विवाद में न पड़ें, 14 मई से 17 जून तक वाहन सावधानी से चलाएं।

 

कन्या राशिफल
कन्या राशि

 

कुल मिलाकर कन्या लग्नकन्या राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह के योग बनेंगे, तनाव लेने से बचें व व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, किसी महिला से धन लाभ या महिला के सहयोग से उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, यदि आपका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं तो संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, जिनकी उम्र 55-60 के अधिक है और रक्त से जुड़ी समस्या है वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, फालतू विवाद में न पड़ें, माह की 2, 3, 11, 13, 14, 15, 21, 22, 23 व 28 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि कन्या लग्नकन्या राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सुंदरकांड का पाठ करें व नित्य सूर्य को जल देकर आदित्य हिर्दय स्तोत्र का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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मई 2020: वृषभ लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: वृषभ लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

 

वृषभ लग्न
वृषभ लग्न

 

वृषभ लग्न वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य आपके द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, सरकारी कार्य की वजह से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, नेत्रों में जलन या दर्द या सर दर्द की शिकायत रह सकती है, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें 14 मई 2020 को सूर्य गोचर बदलकर लग्न में आ जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा व माता का सहयोग भी प्राप्त होगा, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माह के शुरुवात में बुध का गोचर आपके व्यय भाव से रहेगा अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, तनाव लेने से बचें, विद्यार्थियों के लिए भी यह समय थोड़ा कमजोर रह सकता है, खर्चों में वृद्धि होगी 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे फलस्वरूप संतान की उन्नति होगी व संतान का पूर्ण सहयोग भी प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे क्योंकि पंचमेश का लग्न से गोचर रहेगा व पंचमेश और पंचम भाव दोनों पर गुरु की दृष्टि रहेगी, मन प्रसन्न रहेगा 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके धन भाव में चले जाएंगे जहाँ राहु पहले से ही गोचर कर रहे हैं अतः इस समय वाणी पर नियंत्रण रखें व बहुत सोच-समझकर ही निर्णय लें, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशि

 

माह के शुरुवात में मंगल, गुरु व शनि का लग्न पर से गोचर रहेगा फलस्वरूप भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, गुरु-मंगल व गुरु-शनि से बना नीचभंग राजयोग बेहद शुभ रहेगा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे 4 मई 2020 को मंगल गोचर बदलकर आपके दशम भाव में चले जाएंगे जो कि आपके लिए बेहद शुभ रहेगा यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, आपके पार्टनर कुछ ऐसे निर्णय लेंगे जो कि आपके बिज़नेस के लिए बेहद शुभ रहेगा, यदि आप कोई नया बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं तो पत्नी को साझेदार बनाकर करें लाभ होगा, 4 मई से 30 जुलाई के मध्य आपको वाहन सुख प्राप्त होने के अच्छे योग बनते दिख रहे हैं, माह के शुरुवात में शुक्र का लग्न से गोचर मालव्य योग बना रहा है जो कि बेहद शुभ रहेगा फलस्वरूप आपके स्वास्थ्य में सुधार होगा, मन प्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, शत्रुओं से सावधान रहें, माह के मध्य भाग में लग्नेश, सुखेश व पंचमेश की लग्न में युति व मंगल और गुरु की दृष्टि रहने से घर में कोई शुभ कार्य होने के योग बनेंगे, घर में किसी नए मेहमान का आगमन संभव है, शुभ समाचार की प्राप्ति होगी, अचानक यात्रा करनी पड़ सकती है, कोर्ट-कचहरी के चक्कर में न पड़ें साथ ही शत्रुओं से सावधान रहें, अष्टम से केतु का गोचर ससुराल पक्ष से विवाद करा सकता है, वाहन सावधानी से चलाएं, पैरों में चोट व दर्द की शिकायत भी रह सकती है।

 

वृषभ राशिफल

 

कुल मिलाकर वृषभ लग्न वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें यात्राओं के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, संतान की उन्नति होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, घर में कोई शुभ कार्य हो सकता है, वाहन खरीदने के योग बनेंगे, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे, यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो उन्नति के नए मार्ग प्राप्त होंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, वाणी पर नियंत्रण रखें, कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ने से बचें व सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें यदि आपका कोई सरकारी भुगतान जैसे बिजली बिल या टैक्स बचा हुआ है तो उसको जल्दी भर दें अन्यथा तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 1 से 7, 10, 11, 17 व 19 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि वृषभ लग्न के व्यक्ति नित्य दुर्गा कवच व गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें तो बेहद शुभ रहेगा।

 

जय श्री राम।

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चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि के फल मैंने दो भागों में विभक्त किया था जिसके पहले भाग की link को मैं इस पोस्ट में उपलब्ध करा रहा हूँ साथ ही उसी विषय पर आगे चर्चा करते हुए शनि के चतुर्थ भाव में विभिन्न स्थितियों में स्थित होने के फल को विस्तार से समझाते हुए पूर्ण करता हूँ।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि उच्च राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि केवल कर्क लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को अनुशासित करने में लगे रहते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की चाह होती है कि उनके इच्छा अनुसार लोग कार्य करें ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति पक्षियों को बंधन में रखने से सुखी होते हैं ऐसे व्यक्तियों को भूमि व वाहन सुख प्राप्त होता है साथ ही इनको बहुत मजबूत विचारों वाले जीवनसाथी की प्राप्ति होती है, यदि उच्च नवांश का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति माँसाहारी होते हैं तथा माँसाहार भोजन करने में इन्हें बहुत आनंद आता है।

 

यदि शुभ वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति खेती से जुड़े कार्य से सुख की प्राप्ति करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जहाँ कच्चे माल को बनाने या खरीदने-बेचने का कार्य होता हो वहाँ अधिक सफल होते हैं, यदि पाप वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति नकारात्मक चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति दोषों को अपनाकर सुख का अनुभव करते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों को कोई भी निर्णय बहुत सोच समझकर लेना चाहिए।

 

चतुर्थ भाव में शनि
चतुर्थ भाव में शनि

 

यदि नीच राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि मकर लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति अधिकांश समय अकेले रहना पसंद करते हैं व इन्हें भूमि और वाहन का उत्तम सुख प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी उच्च पद पर नौकरी करते हैं, यदि नीच नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति बोलते कुछ व करते कुछ हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति वंचक होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति लोगों की मदद कर के सुख को अनुभव करते हैं।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि चतुर्थ भाव में मित्र राशि का शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों का कार्यस्थल पर अधिक मन लगता है व ऐसे व्यक्ति परिवार से अधिक अपने कार्य को महत्व देते हैं, यदि शत्रु राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को ठगने से सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे सभी कार्य जिसमें बुद्धि-विवेक द्वारा मुनाफा अधिक कमाया जा सकता है उन सभी कार्यों जैसे मार्केटिंग, बिज़नेस में अधिक सफल होते हैं।

 

यदि मित्र नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के घरेलू सुख में कुछ तनाव की स्थिति बनी रहती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख अवश्य प्राप्त होता है, शत्रु नवांश का शनि चतुर्थ भाव हो तो ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर धनार्जन करते हैं अब आज के समय में dog cannel खोलना वगैरह इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

 

Astrology Sutras

 

यदि वर्गोत्तम स्थिति का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को हानि पहुँचा कर सुख का अनुभव करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति कुछ इस तरह का कार्य करते हैं जिससे दूसरों को हानि या दुःख पहुँचे उदाहरण के तौर पर जैसे वकालत का कार्य क्योंकि इसमें व्यक्ति अपने पक्ष के व्यक्ति को विजय दिलवाकर उनसे सुख के साधन प्राप्त करता है किंतु उसके इस कृत्य से दूसरे पक्ष को कुछ हानि व दुःख पहुँचता है।

 

यदि स्वराशि शनि चतुर्थ भाव में हो जो कि तुलावृश्चिक लग्न की कुंडली में ही संभव है तो व्यक्ति रस पदार्थ बेचकर सुखी होता है कहने का आशय यह है कि ऐसा व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है जिससे दूसरों को सुख की अनुभूति हो साथ ही ऐसे व्यक्तियों भूमि सुख निश्चय ही प्राप्त होता है, यदि तुला लग्न की कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में हो तो अधिक लाभकारी होता है क्योंकि तुला लग्न की कुंडली में राजयोगकारक हो जाता है और दसवीं दृष्टि से लग्न को अपनी उच्च राशि में देखता है अतः तुला लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है व बड़ी सफलता दिलवाता है वहीं वृश्चिक लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों की परिश्रम अधिक करना पड़ेगा क्योंकि शनि तीसरे भाव अर्थात पराक्रम भाव का भी स्वामी होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यधिक परिश्रम कर के जीवन में बड़ी सफलता को प्राप्त करते हैं।

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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शादी से पहले कुंडली में ‘नाड़ी दोष’ क्यों है खतरनाक? (जानें मृत्यु योग का सच और अचूक परिहार)

नाड़ी दोष व उसका परिहार

नाड़ी दोष:-

कुंडली मिलान की प्रकिया में अष्ट कूट का मिलान किया है वह अष्ट कूट क्रमशः वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी होते हैं इन अष्ट कूटों में प्रत्येक का अपना-अपना महत्व होता है, इस लेख में मैं नाड़ी पर चर्चा करता हूँ क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसको अधिकतर लोग नजरअंदाज कर देते हैं जब कि नाड़ी न मिलने पर दामपत्य जीवन में अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।

ज्योतिष ग्रंथों में नाड़ी तीन प्रकार की बताई गई है जो कि क्रमशः आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी के नाम से जानी जाती है अब प्रश्न यह उठता है कि यह कैसे ज्ञात किया जाए कि किस व्यक्ति का जन्म किस नाड़ी में हुआ है अतः इस पर मैं विस्तार से वर्णन करता हूँ।

हमारे ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नाड़ी में 9 नक्षत्र आते हैं जिसका निर्धारण व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित हो उसके आधार पर किया जाता है जिन्हें मैं विस्तार से लिख रहा हूँ।

🚩 सनातन धर्म का अद्भुत रहस्य:

👉 यहाँ पढ़ें: नवरात्रि 9 दिन की ही क्यों होती है?

नाड़ियों में आने वाले नक्षत्र:-

नाड़ियों में 27 नक्षत्रों का विभाजन (आदि, मध्य, अंत्य) - Nakshatra in Nadi Astrology
आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी में 27 नक्षत्रों का शास्त्र-सम्मत विभाजन।

१. आदि नाड़ी:-

अश्विनी, आद्रा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर आदि नाड़ी प्राप्त होती है।

२. मध्य नाड़ी:-

भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, घनिष्ठा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर मध्य नाड़ी प्राप्त होती है।

३. अंत्य नाड़ी:-

कृतिका, रोहिणी, श्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण और रेवती नक्षत्र में जन्म लेने पर अंत्य नाड़ी प्राप्त होती है।

नाड़ी दोष के परिहार:-

उक्त नाड़ी विचार में आदि व अंत्य नाड़ी में से कोई एक नाड़ी ही दोनों की हो तो कुछ विद्वानों का मत है कि रज्जूकूट अनुकूल हो, राशिकूट शुभ हो, दोनों का राशि स्वामी एक हो या दोनों राशियों में मैत्री हो तो नाड़ी दोष विशेष अनिष्टकारक नही होता है।

विशेष:-

मध्य नाड़ी एक हो तो पुरुष की मृत्यु तथा आदि अंत्य में स्त्री की मृत्यु होती है।

✨ कुंडली का एक और भयानक दोष:

👉 यहाँ पढ़ें: मंगल दोष के लक्षण और अचूक उपाय

नक्षत्रानुसार नाड़ी दोष परिहार:-

नक्षत्रानुसार नाड़ी दोष परिहार और अचूक उपाय - Nadi Dosh Cancellation Rules
विशिष्ट नक्षत्रों के संयोग से नाड़ी दोष का कट जाना (दोष परिहार)।
  • विशाखा, अनुराधा, घनिष्ठा, रेवती, हस्त, स्वाती, आद्रा, पूर्वाभाद्रपद इन 8 नक्षत्रों में से किसी भी नक्षत्र में वर, कन्या या दोनों में से एक का ही जन्म हो तो विवाह शुभ होता है अर्थात नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है।
  • उत्तराभाद्रपद, रेवती, रोहिणी, विशाखा, आद्रा, श्रवण, पुष्य और मघा इन 8 नक्षत्रों में भी वर व कन्या का जन्म नक्षत्र पड़े तो नाड़ी दोष शांत हो जाता है, भरणी, मृगशिरा, शतभिषा, हस्त, पूर्वाषाढ़ा व श्लेषा इन नक्षत्रों में भी नाड़ी दोष नही रहता है।
  • वर व कन्या की एक राशि हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हो तो नाड़ी दोष नही होता है, एक नक्षत्र में भी चरण भेद होने पर अत्यावश्यकता में विवाह किया जा सकता है।
  • कृतिका, रोहिणी, घनिष्ठा, शतभिषा, पुष्य, श्लेषा ये नक्षत्र एक ही राशि में पड़ते हैं, तब भी इन जोड़े नक्षत्रों में यदि वर व कन्या के नक्षत्र हो तो इन्हें छोड़ना चाहिए।
  • रोहिणी, आद्रा, मघा, विशाखा, पुष्य, श्रवण, रेवती, उत्तराभाद्रपद में से किसी एक नक्षत्र में ही दोनो का जन्म हो तब भी नाड़ी दोष नही रहता, नक्षत्र चरण भेद आवश्यक है।
नक्षत्रेक्ये पादभेदे शुभम् स्यात।।
पराशरः प्राह नवांशभेदादेकर्क्षराश्योरपि सौमनस्यम्।।
एकक्षै चैकपादे च विवाह: प्राणहानिद:।।
दम्पत्योरेकपादे तु वर्षान्ते मरणं ध्रुवम्।।

अर्थात:-

चरण व नक्षत्र दोनों एक होने का फल मृत्यु है, नाड़ी कूट सर्व शिरोमणि प्रधान है, इसके गुण 8 माने जाते हैं।

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📌 FAQ: नाड़ी दोष से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: नाड़ी कितने प्रकार की होती है?

उत्तर: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नाड़ी तीन प्रकार की होती है— आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी।

प्रश्न 2: नाड़ी दोष कब लगता है?

उत्तर: विवाह के समय कुंडली मिलान (अष्टकूट मिलान) में जब वर और कन्या दोनों की नाड़ी एक ही (समान) होती है, तब नाड़ी दोष लगता है।

प्रश्न 3: क्या एक नाड़ी होने पर विवाह किया जा सकता है?

उत्तर: यदि वर व कन्या की राशि एक हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो, या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हों, या नक्षत्र चरण में भेद हो, तो नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है और विवाह संभव है।