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नरक चतुर्दशी एवं श्री हनुमान जन्मोत्सव 2026: 7 नवंबर को दुर्लभ महासंयोग, जानें शुभ मुहूर्त, यम दीपदान, अभ्यंग स्नान व संपूर्ण शास्त्रोक्त विधि

सनातन धर्म में पांच दिवसीय दीपोत्सव का द्वितीय दिवस ‘नरक चतुर्दशी’, ‘रूप चौदस’, ‘छोटी दीपावली’ तथा ‘श्री हनुमान जन्मोत्सव’ के परम पावन पर्व के रूप में मनाया जाता है। यह पावन तिथि सौंदर्य, आरोग्यता, यम-भय निवारण और अष्टसिद्धि-नवनिधि के दाता संकटमोचन हनुमान जी की कृपा प्राप्ति का दिव्य महापर्व है। वर्ष 2026 में यह महापर्व 07 नवंबर 2026 (शनिवार) को चित्रा नक्षत्र, प्रीति योग, कन्या राशि के चंद्रमा और सांध्यकालीन मेष लग्न के दुर्लभ महासंयोग में मनाया जाएगा।

Astrology Sutras (ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी) के इस विशेष शोधपरक आलेख में हम निर्णय सिन्धु, मुहूर्त चिन्तामणि, स्कन्द पुराण, अगस्त्य संहिता और वाल्मीकि रामायण के अकाट्य प्रमाणों के आलोक में जानेंगे तिथि का यथार्थ, प्रदोष व मेष लग्न में हनुमान पूजा का महामुहूर्त, 14 दीपकों से यम दीपदान, भोर में अभ्यंग स्नान का रहस्य और हनुमान जी की सिंदूर-चोला अर्पण सहित संपूर्ण शास्त्रोक्त पूजन विधि।

💡 7 या 8 नवंबर: तिथि निर्णय, हनुमान जन्मोत्सव एवं स्नान का शास्त्रोक्त समन्वय

ऋषिकेश पंचांग (काशी मान) के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी तिथि 07 नवंबर 2026 को दिन में 10:43 बजे प्रारंभ होगी और 08 नवंबर 2026 को दिन में 10:51 बजे समाप्त होगी।

  • प्रदोष व निशीथ व्यापिनी (07 नवंबर): निर्णय सिन्धु एवं अगस्त्य संहिता के अनुसार हनुमान जी का प्राकट्य कार्तिक चतुर्दशी के सांध्य/रात्रि काल में हुआ था तथा यम दीपदान भी प्रदोष काल में किया जाता है। 07 नवंबर को प्रदोष काल, मेष लग्न और मध्यरात्रि में पूर्ण चतुर्दशी विद्यमान है, अतः हनुमान जन्मोत्सव, यम दीपदान व 14 दीपकों का पूजन 07 नवंबर (शनिवार) को ही होगा।
  • अरुणोदय अभ्यंग स्नान (08 नवंबर की भोर): धर्मसिन्धु के अनुसार तैलाभ्यंग स्नान सूर्योदय पूर्व चतुर्दशी में किया जाता है। 08 नवंबर की भोर (अरुणोदय काल 05:00 से 06:31 AM) में चतुर्दशी तिथि विद्यमान रहेगी, अतः पवित्र अभ्यंग स्नान व यम तर्पण 08 नवंबर की प्रातः काल संपन्न किया जाएगा।

 सूक्ष्म पंचांग विवरण (ऋषिकेश पंचांग, काशी अनुसार)

07 नवंबर 2026 का सुनिश्चित गणितीय पंचांग मान निम्नलिखित है:

पंचांगीय अंग / विवरण सटीक समय व मान (ऋषिकेश पंचांग, काशी)
दिनांक एवं वार 07 नवंबर 2026, शनिवार
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी प्रारंभ 07 नवंबर 2026, दिन में 10:43 बजे से
चतुर्दशी तिथि समाप्त 08 नवंबर 2026, दिन में 10:51 बजे तक
सूर्योदय / सूर्यास्त (काशी) प्रातः 06:31 बजे / सायं 05:29 बजे
नक्षत्र संचरण चित्रा नक्षत्र (रात्रि शेष / 08 नवंबर भोर 06:20 तक)
योग संचरण प्रीति योग (रात्रि शेष / 08 नवंबर भोर 04:47 तक)
चन्द्र राशि कन्या राशि में संचरण
मेष लग्न (अत्यंत शुभ) सायं 04:25 बजे से 06:02 बजे तक
राहुकाल (वर्जित काल) प्रातः 09:16 बजे से 10:38 बजे तक
प्रदोष काल (संध्या वेला) सायं 05:29 बजे से रात्रि 08:05 बजे तक

⏰ पूजन, दीपदान एवं अभ्यंग स्नान के सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त

07 नवंबर 2026 को हनुमान जन्मोत्सव पूजन और यम दीपदान हेतु विभिन्न कालों के प्रामाणिक मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

अनुष्ठान / वेला सटीक समय अवधि महत्व एवं शास्त्रीय फल
मेष लग्न व प्रदोष महासंयोग सायं 05:29 से 06:02 तक श्री हनुमान जन्मोत्सव पूजन का सर्वश्रेष्ठ काल
प्रदोष काल यम दीपदान सायं 05:29 से 07:05 तक 14 दीपकों का प्रज्वलन व यम तर्पण
निशीथ काल (मध्यरात्रि साधना) रात्रि 11:38 से 12:31 तक हनुमान बाहुक, सुंदरकांड व तंत्र साधना
अरुणोदय अभ्यंग स्नान 08 नवंबर प्रातः 05:00 से 06:31 तक तिल तैल मालिश, अपामार्ग प्रक्षालन व स्नान

📜 शास्त्रों के अनुसार प्रमाण: श्लोक, ध्यान व अर्घ्य मंत्र

कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी पर हनुमान जन्मोत्सव, अभ्यंग स्नान और यम दीपदान के शास्त्रीय श्लोक निम्नलिखित हैं:

शास्त्रोक्त मूल श्लोक प्रमाणिक अर्थ एवं आध्यात्मिक संदर्भ

“आश्विने मासि मेषेऽर्के स्वात्यां भौमे दिने तथा।
कार्तिके कृष्णपक्षे तु चतुर्दश्यां कपीश्वरः॥”

अगस्त्य संहिता / स्कन्द पुराण

अर्थ: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को सांध्य काल में केसरीनंदन, वायुपुत्र भगवान कपीश्वर हनुमान जी का प्राकट्य माता अंजना के गर्भ से हुआ था।

“तैले लक्ष्मीर्जले गङ्गा दीपावल्याश्चतुर्दशीम्।
प्रातःस्नानं तु यः कुर्याद्यमलोकं न पश्यति॥”

स्कन्द पुराण (अभ्यंग स्नान श्लोक)

अर्थ: नरक चतुर्दशी की प्रातः काल तेल में साक्षात मां लक्ष्मी और समस्त जलों में मां गंगा का वास होता है। जो मनुष्य इस दिन तैलाभ्यंग स्नान करता है, उसे यमलोक की यातना नहीं देखनी पड़ती।

“सीतालोष्टसमायुक्त सकण्टकदलान्वित।
हर पापमपामार्ग भ्राम्यमाणः पुनः पुनः॥”

अपामार्ग प्रक्षालन मंत्र

अर्थ: हे कांटों और पत्तियों से युक्त अपामार्ग (चिरचिटा)! सिर के ऊपर बारंबार घुमाए जाने पर आप मेरे कायिक, वाचिक और मानसिक सभी प्रकार के पापों और नरक-भय का हरण करें।

🚩 कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी: श्री हनुमान जन्मोत्सव का रहस्य

उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा के अतिरिक्त कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को श्री हनुमान जन्मोत्सव मनाने की सुदीर्घ परंपरा है। वाल्मीकि रामायण एवं अगस्त्य संहिता के अनुसार जब भगवान सूर्यदेव के तेज और भगवान शिव के एकादश रुद्रावतार के रूप में पवनपुत्र का अवतरण हुआ, तब वह बेला कार्तिक चतुर्दशी की ही थी। इस दिन शनिवार का होना सोने पर सुहागा है, क्योंकि शनिवार स्वयं पवनपुत्र और शनिदेव की संयुक्त कृपा का दिन है। इस दिन सिंदूर और चमेली के तेल का लेपन करने से जातक की कुंडली के समस्त ग्रह दोष (विशेषकर शनि, मंगल व राहु की पीड़ा) तत्काल शांत हो जाते हैं।

🛠️ श्री हनुमान जी की संपूर्ण प्रामाणिक पूजन एवं चोला अर्पण विधि

सायं 05:29 से 06:02 के मध्य (मेष लग्न व प्रदोष काल) लाल वस्त्र धारण कर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशासन पर बैठें:

  1. संकल्प: हाथ में जल, अक्षत, पुष्प और सिक्का लेकर संकल्प करें—“मम सकल-संकट-निवारणार्थं श्रीसीताराम-प्रीत्यर्थं च श्रीहनुमत्पूजनमहं करिष्ये।”
  2. पवित्र स्नान व आसन: श्री हनुमान जी की प्रतिमा या चित्र को गंगाजल मिश्रित जल से स्नान कराएं।
  3. सिंदूर व चमेली का चोला: चमेली के शुद्ध तेल में शुद्ध नारंगी सिंदूर घोलें। सर्वप्रथम भगवान के चरणों में अनामिका उंगली से सिंदूर अर्पित करें, तदुपरांत संपूर्ण विग्रह पर चोला चढ़ाएं। इसके ऊपर चांदी का वर्क अर्पित करें।
  4. जनेऊ व वस्त्र: हनुमान जी को लाल लंगोट अथवा पीला वस्त्र एवं शुद्ध सूत का जनेऊ (यज्ञोपवीत) धारण कराएं।
  5. आक व तुलसी माला: 108 आक (मदार) के पुष्पों अथवा तुलसी पत्तों पर लाल चंदन से ‘श्रीराम’ लिखकर उसकी माला हनुमान जी के गले में पहनाएं।
  6. दिव्य नैवेद्य: शुद्ध घी में बनी बेसन की बूंदी, बूंदी के लड्डू, रोट और बनारसी मीठा पान (गुलकंद, सौंफ, कत्था युक्त, बिना चूना-सुपारी) का भोग लगाएं।
  7. स्तोत्र पाठ: चमेली के तेल का पंचमुखी दीपक जलाकर श्री हनुमान चालीसा, बजरंग बाण अथवा सुंदरकांड का सस्वर पाठ करें।
  8. आरती: कर्पूर अथवा घृत के दीप से “आरती कीजै हनुमान लला की…” गाकर आरती उतारें और परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

🪔 नरक चतुर्दशी के 4 प्रमुख शास्त्रोक्त कृत्य

शास्त्रोक्त कृत्य विधि एवं धार्मिक महत्व
1. यम दीपदान (14 दीपक) 07 नवंबर की संध्या प्रदोष काल में 14 मिट्टी के दीपक सरसों के तेल से जलाए जाते हैं। एक बड़ा चौमुखा दीपक मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त रखा जाता है और शेष 13 दीपक तुलसी, तिजोरी, जलस्थान और छत पर रखे जाते हैं।
2. तैलाभ्यंग स्नान (रूप चौदस) 08 नवंबर की भोर में पूरे शरीर पर तिल के तेल व बेसन-हल्दी के उबटन की मालिश करके स्नान करने से शारीरिक कांति बढ़ती है और नरक का भय मिटता है।
3. अपामार्ग प्रक्षालन स्नान करते समय अपामार्ग (चिरचिटा) के पौधे को सिर के ऊपर 3 या 7 बार घड़ी की दिशा (क्लॉकवाइज) में घुमाकर दक्षिण दिशा में फेंकने से समस्त नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।
4. यम तर्पण (पितृ शांति) स्नान के पश्चात दक्षिण मुख होकर जल में काले तिल और कुशा लेकर यमराज के 14 नामों (यम, धर्मराज, मृत्यु, अंतक, वैवस्वत आदि) से जलांजलि देने से पितरों की तृप्ति होती है।

📖 नरकासुर वध की पौराणिक कथा: श्रीकृष्ण और सत्यभामा का पराक्रम

प्रागज्योतिषपुर का असुर राजा नरकासुर ब्रह्मा जी के वरदान से अहंकारी हो गया था। उसने देवमाता अदिति के दिव्य कुंडल छीन लिए और इंद्र का छत्र हरण कर लिया। इतना ही नहीं, उसने देवताओं, गंधर्वों और ऋषियों की 16,100 रूपवती कन्याओं को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया था। देवताओं के त्राहिमाम करने पर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पटरानी सत्यभामा के साथ गरुड़ पर सवार होकर नरकासुर पर आक्रमण किया।

चूँकि नरकासुर को पृथ्वी माता के अंश से उत्पन्न स्त्री के हाथों मृत्यु का वरदान था, अतः भगवान श्रीकृष्ण ने देवी सत्यभामा (जो भूदेवी का अवतार थीं) को सारथी बनाकर युद्ध कराया। कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन सत्यभामा के सहयोग से भगवान श्रीकृष्ण ने सुदर्शन चक्र से दुष्ट नरकासुर का वध किया और सभी 16,100 कन्याओं को बंधनमुक्त कराया।

असुर के रक्त और कालिख को धोने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने भोर में तेल से स्नान (अभ्यंग स्नान) किया। नरकासुर के वध की प्रसन्नता में ब्रजवासियों और नगरवासियों ने असंख्य दीप प्रज्वलित कर विजयोत्सव मनाया। इसी स्मृति में कार्तिक चतुर्दशी को ‘नरक निवारण चतुर्दशी’ कहा जाता है।

⚠️ क्या करें और क्या न करें: शास्त्रोक्त नियम

क्या अवश्य करें? (परम कल्याणकारी) क्या कदापि न करें? (सर्वथा वर्जित)
1. सायं काल प्रदोष में 14 दीपकों का यम दीपदान करें।
2. हनुमान जी को चोला व चमेली का तेल अर्पित करें।
3. भोर में तिल तेल मालिश कर सूर्योदय से पूर्व स्नान करें।
4. घर के पुराने कबाड़ और दरिद्रता को बाहर निकालें।
5. ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ व ‘हनुमान चालीसा’ का जप करें।
1. सूर्योदय के बाद देर तक न सोएं (दरिद्रता का वास होता है)।
2. घर में क्लेश, कटु वचन या किसी का अपमान न करें।
3. यम दीपक को घर की चौखट के अंदर न रखें (सदा बाहर रखें)।
4. दक्षिण दिशा में पैर करके शयन न करें।
5. मांसाहार, मदिरा या तामसिक भोजन का पूर्ण त्याग रखें।

💬 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Google FAQs)

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न प्रामाणिक शास्त्रीय समाधान
हनुमान जन्मोत्सव की पूजा 7 नवंबर को करें या 8 को? हनुमान जी का प्राकट्य सांध्य काल/रात्रि में हुआ था। 07 नवंबर को प्रदोष काल में मेष लग्न (सायं 05:29 से 06:02) और रात्रि में चतुर्दशी तिथि विद्यमान है। अतः हनुमान जन्मोत्सव पूजन 07 नवंबर (शनिवार) को ही शास्त्रसम्मत है।
रूप चौदस का अभ्यंग स्नान किस दिन किया जाएगा? अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पूर्व चतुर्दशी तिथि में विहित है। 08 नवंबर की भोर में प्रातः 05:00 से 06:31 बजे तक चतुर्दशी तिथि रहेगी। अतः मुख्य रूप चौदस स्नान 08 नवंबर की सुबह होगा।
नरक चतुर्दशी पर 14 दीपक ही क्यों जलाए जाते हैं? कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को 14 लोकों की शांति और धर्मराज यमराज के 14 स्वरूपों के निमित्त 14 दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं, जिससे 14 प्रकार के नरकों से आत्मा की रक्षा होती है।
यम का चौमुखा दीपक किस दिशा में रखना चाहिए? यम दीपक सदैव घर की मुख्य चौखट के बाहर, अनाज की ढेरी पर दक्षिण दिशा (यमराज की दिशा) की ओर मुख करके रखना चाहिए।

निष्कर्ष: नरक चतुर्दशी 2026 तन के सौंदर्य, मन की शुद्धि और आत्मिक अभय का पावन संगम है। 07 नवंबर को प्रदोष काल व मेष लग्न में की गई हनुमान जी की आराधना और यम दीपदान आपके परिवार को समस्त भय, रोग और बाधाओं से मुक्त कर चिरंजीवी सुख प्रदान करता है।

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श्री हनुमान जन्मोत्सव 2026: शिव पुराण व वाल्मीकि रामायण के अनुसार जन्म रहस्य, शुभ मुहूर्त और शनि-राहु के उपाय

श्री हनुमान जन्मोत्सव 2026: जन्म रहस्य, पूजा विधि व शनि-राहु उपाय

सनातन धर्म में चैत्र मास की पूर्णिमा का दिन कोई साधारण दिन नहीं है, बल्कि यह उस महाशक्ति के प्राकट्य का दिन है जो कलियुग के एकमात्र जाग्रत और प्रत्यक्ष देवता हैं— संकटमोचन श्री हनुमान जी। हर वर्ष चैत्र पूर्णिमा को ‘श्री हनुमान जन्मोत्सव’ (Hanuman Janmotsav) पूरे विश्व में अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

इंटरनेट पर हनुमान जी के जन्म को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं, लेकिन शास्त्रों का वास्तविक सत्य क्या है? Astrology Sutras के इस विशेष और गहन शोध लेख में आज हम वाल्मीकि रामायण और शिव महापुराण के प्रामाणिक श्लोकों के साथ हनुमान जी के जन्म का रहस्य, 2026 का शुभ मुहूर्त, अचूक पूजा विधि और शनि, राहु व केतु (Shani, Rahu, Ketu) जैसे क्रूर ग्रहों को शांत करने के दुर्लभ वैदिक उपाय जानेंगे।


📜 1. शिव महापुराण और वाल्मीकि रामायण: क्या है हनुमान जी के जन्म का असली रहस्य?

हनुमान जी केवल एक वानर नहीं, बल्कि स्वयं देवाधिदेव महादेव के ‘ग्यारहवें रुद्रावतार’ (11th Rudra Avatar) हैं। शिव महापुराण (शतरुद्र संहिता) में इसका अत्यंत सुंदर वर्णन मिलता है।

✨ शिव महापुराण का प्रामाणिक श्लोक

“एकादशस्तु रुद्रो वै हनुमान् महाकपिः।
अवतीर्णः सहायार्थं रामस्य परमात्मनः॥”

हिंदी अर्थ: ग्यारहवें रुद्र ही महाकपि श्री हनुमान हैं। परमात्मा श्री राम की सहायता करने और उनके कार्यों को सिद्ध करने के लिए ही भगवान शिव ने हनुमान जी के रूप में अवतार लिया।

वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में जाम्बवान जी हनुमान जी को उनके जन्म का स्मरण कराते हुए कहते हैं: “मारुतस्यौरसः पुत्रस्तेजसा मारुतोपमः” अर्थात आप वायु देव के औरस पुत्र हैं और तेज में उन्हीं के समान हैं। जब माता अंजना घोर तपस्या कर रही थीं, तब भगवान शिव के तेज (वीर्य) को वायु देव ने उनके कान के माध्यम से माता अंजना के गर्भ में स्थापित किया था। इसी कारण इन्हें ‘पवनपुत्र’ और ‘शंकर सुवन’ कहा जाता है।

⏰ 2. श्री हनुमान जन्मोत्सव 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि

वर्ष 2026 में चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि 2 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को पड़ रही है। गुरुवार भगवान विष्णु (श्री राम) का दिन है, इसलिए इस दिन हनुमान जी की पूजा का फल अनंत गुना बढ़ जाएगा।

हनुमान जन्मोत्सव 2026 का शुभ मुहूर्त

📅 पर्व की तिथि:

2 अप्रैल 2026, गुरुवार (चैत्र पूर्णिमा)

🌅 प्रातःकालीन पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त:

सुबह 06:25 बजे से सुबह 08:02 बजे तक मेष लग्न में।

🕛 अभिजित मुहूर्त (महा-पूजन):

दोपहर 11:55 से 12:45 तक

🙏 3. 100% शास्त्रोक्त हनुमान जन्मोत्सव पूजा विधि

हनुमान जी अत्यंत सरल देवता हैं, लेकिन वे ‘ब्रह्मचर्य’ और ‘पवित्रता’ के कठोर आग्रही हैं। जन्मोत्सव के दिन इस वैदिक विधि से पूजा करें:

  • स्नान और वस्त्र: प्रातःकाल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और लाल या पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • चोला चढ़ाना (Chola Offering): हनुमान जी को चमेली के तेल (Jasmine Oil) में घुला हुआ सिंदूर (चोला) चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है। इससे जीवन के सभी संकट टल जाते हैं।
  • विशेष श्रृंगार और भोग: भगवान को लाल पुष्प, जनेऊ, और तुलसी की माला अर्पित करें। भोग में बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़-चना और मीठा पान अवश्य चढ़ाएं। (तुलसी दल के बिना हनुमान जी भोग स्वीकार नहीं करते)।
  • पाठ: श्री राम रक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें और अंत में आरती करें।

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🪐 4. क्रूर ग्रहों (शनि, राहु, केतु) की शांति के अचूक वैदिक उपाय

वाल्मीकि रामायण और नवग्रह पुराण के अनुसार, जिस भक्त पर हनुमान जी की कृपा हो जाती है, शनि, राहु और केतु जैसे मायावी व क्रूर ग्रह उसका बाल भी बांका नहीं कर सकते। हनुमान जन्मोत्सव के दिन इन अचूक उपायों को करने से नवग्रह शांत हो जाते हैं:

नवग्रह शांति हेतु हनुमान जी के महा-उपाय

⚖️ शनि दोष और साढ़ेसाती से मुक्ति:

हनुमान जन्मोत्सव के दिन काले उड़द के 11 दाने, थोड़ा सा सिंदूर और चमेली का तेल एक दीपक में डालकर हनुमान जी के सम्मुख जलाएं। इसके बाद 11 बार ‘श्री हनुमान चालीसा’ का पाठ करें। शनि देव स्वयं रक्षा करेंगे।

🌑 राहु दोष (भ्रम, अचानक नुकसान और रोग) की शांति:

राहु के प्रकोप से बचने के लिए हनुमान जन्मोत्सव के दिन हनुमान मंदिर के शिखर पर ‘लाल तिकोना ध्वज’ (Red Flag) फहराएं और भगवान को मीठा पान (लौंग सहित) अर्पित करें। राहु का दुष्प्रभाव तुरंत समाप्त हो जाएगा।

🌪️ केतु दोष (नज़र दोष, काले जादू और तंत्र-मंत्र) से रक्षा:

केतु की शांति के लिए इस दिन ‘बजरंग बाण’ का पाठ अत्यंत अचूक है। साथ ही किसी काले कुत्ते को मीठी रोटी खिलाने से केतु जनित सभी बाधाएं दूर होती हैं।

📿 5. हनुमान जी को प्रसन्न करने का महा-सिद्ध ध्यान मंत्र

पूजा के समय और संकट की घड़ी में वाल्मीकि रामायण के इस श्लोक का जाप व्यक्ति को सभी भयों से मुक्त कर देता है:

“मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥”

हिंदी अर्थ: जिनका मन और वेग वायु के समान है, जिन्होंने अपनी इंद्रियों को जीत लिया है, जो बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ हैं, वानर सेना के मुख्य और वायु पुत्र हैं, उन श्री रामदूत हनुमान की मैं शरण लेता हूँ।


❓ FAQ: आपके मन में उठ रहे सवाल

Q1: हनुमान जी की पूजा में महिलाओं को क्या नहीं करना चाहिए?

चूंकि हनुमान जी परम ब्रह्मचारी हैं, इसलिए महिलाओं को हनुमान जी की मूर्ति को साक्षात स्पर्श (विशेषकर चरण और सिंदूर लेपन) नहीं करना चाहिए। वे दूर से प्रणाम कर सकती हैं और पाठ कर सकती हैं।

Q2: क्या घर में हनुमान जी की मूर्ति या तस्वीर रखनी चाहिए?

जी हाँ, लेकिन घर में हनुमान जी की बैठी हुई, राम दरबार वाली या आशीर्वाद देती हुई तस्वीर लगानी चाहिए। सीना चीरती हुई या लंका दहन वाली क्रोधी तस्वीर घर में नहीं लगानी चाहिए।

Q3: जन्मोत्सव या जयंती? सही शब्द क्या है?

हनुमान जी चिरंजीवी हैं (अजर-अमर हैं)। ‘जयंती’ शब्द उनके लिए उपयोग होता है जो अब इस संसार में नहीं हैं। इसलिए हमेशा ‘हनुमान जन्मोत्सव’ कहना ही शास्त्र सम्मत है।

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नोट: यह लेख शिव महापुराण, वाल्मीकि रामायण और वैदिक ज्योतिष के प्रामाणिक श्लोकों व उपायों के आधार पर तैयार किया गया है।