आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) से शक्ति उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो रहा है। इस वर्ष ऋषिकेश पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि के साथ-साथ पूरे दिन चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग की व्याप्ति बन रही है। धर्मशास्त्रों में सामान्यतः चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग में घटस्थापना को वर्जित माना गया है, जिसके कारण श्रद्धालुओं और आचार्यों के मन में संशय उत्पन्न होना स्वाभाविक है।
Astrology Sutras (ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी) के इस विशेष शोधपरक आलेख में हम निर्णय सिन्धु, मुहूर्त चिन्तामणि, धर्मसिन्धु तथा देवी पुराण के अकाट्य प्रमाणों के आलोक में इस संशय का प्रामाणिक समाधान, घटस्थापना का सर्वश्रेष्ठ अभिजित मुहूर्त, 9 दिवसीय नवदुर्गा भोग विधान और मातामह श्राद्ध समन्वय की संपूर्ण शास्त्रोक्त विधि प्रस्तुत कर रहे हैं।
11 अक्टूबर 2026: पंचांगीय विवरण (ऋषिकेश पंचांग अनुसार)
ऋषिकेश पंचांग (काशी मान) के अनुसार कलश स्थापना दिवस का सूक्ष्म गणितीय विवरण निम्नलिखित है:
📜 चित्रा नक्षत्र एवं वैधृति योग: निषेध और शास्त्रोक्त परिहार
धर्मशास्त्रों में सामान्य स्थिति में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का निषेध करते हुए कहा गया है:
⚖️ शास्त्रोक्त अपवाद एवं अकाट्य समाधान (निर्णय सिन्धु व मुहूर्त चिन्तामणि)
यदि प्रतिपदा पूरे दिन हो और चित्रा नक्षत्र तथा वैधृति योग भी अहोरात्र (पूरे दिन) व्याप्त रहे, तब क्या किया जाए? इसके लिए ‘निर्णय सिन्धु’ और ‘मुहूर्त चिन्तामणि’ स्पष्ट निर्देश देते हैं:
अकाट्य शास्त्रीय व्यवस्था के 3 प्रमुख स्तंभ:
- प्रारंभिक अंश का त्याग: दोपहर तक चित्रा नक्षत्र के पूर्वार्ध और वैधृति के प्रथम अंश का स्वतः व्यतीत हो जाना दोष को समाप्त करता है।
- अभिजित मुहूर्त सर्वदोषनाशक: मध्याह्न 11:37 से 12:23 के मध्य भगवान विष्णु का चक्र स्वरूप अभिजित मुहूर्त समस्त कुयोगों को भस्म कर देता है।
- द्विस्वभाव धनु लग्न: मध्याह्न काल में स्थिर व द्विस्वभाव धनु लग्न (11:15 से 13:21) विद्यमान रहेगा, जिसमें कलश स्थापना करने से अभीष्ट कार्य में अक्षय स्थिरता और विजय प्राप्त होती है।
⏰ शारदीय नवरात्रि 2026: कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त
11 अक्टूबर 2026 को घटस्थापना के लिए सुनिश्चित शास्त्रसम्मत मुहूर्त निम्नलिखित हैं:
विशेष निर्देश: यदि चित्रा नक्षत्र व वैधृति योग संपूर्ण दिन हो तो धर्मशास्त्रों ने अभिजित मुहूर्त (11:37 AM – 12:23 PM) को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है।
🛠️ शास्त्रोक्त घटस्थापना (कलश स्थापना) संपूर्ण विधि व वैदिक मंत्र
आवश्यक पूजन सामग्री:
मिट्टी की वेदी या चौड़ा पात्र, सप्तमृत्तिका (या शुद्ध बालू/मिट्टी), सप्तधान्य (जौ, गेहूं, तिल आदि), तांबे या पीतल का कलश, गंगाजल, शुद्ध जल, सुपारी, सिक्का, दूर्वा, पल्लव (आम या अशोक के 5 पत्ते), जटा वाला नारियल, लाल वस्त्र/कलावा, मौली, रोली, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य।
क्रमबद्ध स्थापन विधान:
“ॐ ओषधयः संवदन्ते सोमेन सह राज्ञा। यस्मै कृणोति ब्राह्मणस्तं राजन् पारयामसि॥”
“कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः। मूले त्वस्य स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥”
“गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति। नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरु॥”
शास्त्रोक्त नियम: नारियल का मुख सदैव अपनी ओर होना चाहिए। अधोमुख होने से शत्रुवृद्धि और ऊर्ध्वमुख होने से धनहानि का दोष लगता है।
“तन्त्वा यामि ब्रह्मणा वन्दमानस्तदा शास्ते यजमानो हविर्भिः। अहेडमानो वरुणेह बोध्युरुशंस मा न आयुः प्र मोषीः॥” कलश पर “ॐ भूर्भुवः स्वः वरुणाय नमः, कलशदेवताभ्यो नमः” कहकर पुष्प अर्पित करें।
“शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदाम्। शत्रुबुद्धिविनाशिवाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥”
🌸 नवदुर्गा: 9 दिवसीय पूजन क्रम, स्वरूप एवं भोग विधान
11 अक्टूबर से 19 अक्टूबर 2026 तक मां भगवती के नौ स्वरूपों की तिथि, स्वरूप और प्रिय नैवेद्य की संपूर्ण सूची:
💬 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (Google FAQs)
निष्कर्ष: 11 अक्टूबर 2026 को शारदीय नवरात्रि पर संपूर्ण भक्ति-भाव से अभिजित मुहूर्त (11:37 AM से 12:23 PM) में मां जगदम्बा की घटस्थापना करें। शास्त्रोक्त विधान से किया गया पूजन संपूर्ण परिवार के लिए मंगल, समृद्धि और आरोग्यता लेकर आता है।
