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अगस्त 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

अगस्त 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

वृषभ लग्न
वृषभ लग्न

 

वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए अगस्त 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का तीसरे भाव से गोचर फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, माता छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, किसी बड़े अधिकारी से मुलाकात संभव रहेगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, आवेश में आने से बचें, 2 अगस्त को बुध गोचर बदलकर आपके तीसरे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माता का सहयोग प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, 16 अगस्त को सूर्य और 17 अगस्त को बुध गोचर बदलकर आपके चतुर्थ भाव में आ जाएंगे घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, किसी भी कारण से परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, जिनका कार्य बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, सौंदर्य प्रकाशन, धातु, तकनीकी क्षेत्र, कमीशन से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह माह अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र व राहु का द्वितीय स्थान से गोचर रहेगा अतः गलत तरह से धन अर्जित करने का प्रयास न करें, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें व महिलाओं से व्यर्थ विवाद न करें, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में गुरु व केतु का अष्टम भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, कोई भी रिस्क लेने से बचें, दवाईयों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो व गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का भाग्य स्थान से गोचर रहेगा अतः भाग्य का सहयोग प्राप्त करने हेतु अधिक प्रयास करना होगा, लंबी यात्राओं के योग बनेंगे, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, पैरों या जोड़ों में दर्द की शिकायत रह सकती है, माह के शुरुवात में मंगल का एकादश भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप आय में वृद्धि के योग बनेंगे, यात्राओं पर धन व्यय होगा, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, संतान से विवाद या संतान को कष्ट संभव रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, 16 अगस्त को मंगल गोचर बदलकर आपके द्वादश भाव में चले जाएंगे अतः जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, यात्राओं के योग बनेंगे, छोटे भाई-बहन से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, 1 से 4 अगस्त के मध्य व्यय में वृद्धि होगी, कर्ज देने व लेने से बचें, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, किसी के साथ व्यर्थ विवाद न करें, 5 से 8 व 16 से 18 अगस्त का समय आपके लिए अच्छा रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, जीवनसाथी से नजदीकियाँ बढ़ेंगी, कार्य क्षेत्र के लिए यह अच्छा समय रहेगा, 9 से 11 अगस्त के मध्य मानसिक तनाव रह सकता है, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय न लें, 12 से 15 अगस्त के मध्य आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, 19 से 21 अगस्त के मध्य धन लाभ के योग बनेंगे, मित्रों से मुलाकात संभव रहेगी व उनके साथ अच्छा समय बीतेगा, 22 से 25 अगस्त के मध्य स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होगी, कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें, क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, 26 से 28 अगस्त तक का समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा जिसमें मानसिक शांति अनुभव होगी, धन लाभ के योग बनेंगे, 29 से 31 अगस्त के मध्य पारिवारिक मिलन (किसी भी कारण से) संभव रहेगा, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 9, 15, 16, 22 व 29 अगस्त के दिन धन लाभ के अच्छे योग बनेंगे, 14 अगस्त के दिन विशेष सावधानी बरतें, तनाव लेने से बचें, किसी से भी व्यर्थ विवाद में न पड़ें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें व वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

कुल मिलाकर वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए अगस्त 2020 सामान्य रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा, व्यर्थ विवाद में न पड़ें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, सर दर्द, नेत्रों में चोट, दर्द या जलन की शिकायत संभव रहेगी, गुरु का अष्टम भाव से गोचर स्वास्थ्य, संतान व विद्या के लिए बहुत शुभ संकेतक नही है अतः थोड़ा सावधान रहें व कोई भी बड़े या महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच-विचार कर के ही करें तथा यदि आप नौकरी परिवर्तन का विचार कर रहे हैं तो नवंबर तक रुक जाए, माह की 1, 2, 3, 4, 9, 10, 11, 22, 23, 24 व 25 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि वृषभ लग्न व वृषभ राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल देकर अदित्यहिर्दय स्तोत्र व गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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ज्योतिष के 20 अनोखे अचूक व प्रमाणित सूत्र

ज्योतिष के 20 अनोखे अचूक व प्रमाणित सूत्र

 

ज्योतिष के कुछ अचूक व प्रमाणित सूत्र
ज्योतिष के कुछ अचूक व प्रमाणित सूत्र

 

१. लग्न के स्वामी अर्थात लग्नेश यदि द्वादश/बाहरवें भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के शत्रु बहुत अधिक होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों पर झूठा आरोप अवश्य ही लगता है तथा ऐसे व्यक्तियों के मन में आत्महत्या के विचार भी आते रहते हैं।

 

२. राहु की महादशा में यदि केतु की अंतर्दशा हो तो वह समय विशेष रूप से कष्टदाई होता है जिनमें उलझनें व समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती है।

 

३. दूसरे भाव में जो राशि हो उनके स्वामी अर्थात धनेश/द्वितीयेश यदि नवम व एकादश भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों का बाल्यकाल कष्टदाई होता है किंतु बाद का पूरा जीवन सुखमय होता है जिसमें जातक/जातिका को सभी सुख प्राप्त होते हैं।

 

४. यदि लग्न का स्वामी अर्थात लग्नेश दूसरे भाव में हो और दूसरे भाव का स्वामी अर्थात धनेश यदि लग्न में हो कहने का आशय यह है कि यदि लग्नेश और धनेश में स्थान परिवर्तन हो रहा हो तो ऐसे व्यक्तियों के पास धन की कभी कमी नही रहती तथा इन्हें कम प्रयत्न से धन की प्राप्ति हो जाती है।

 

५. यदि जन्म कुंडली में सूर्य एकादश भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के शत्रु बहुत अधिक होते हैं किंतु जातक/जातिका को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है अर्थात शत्रु उनका कुछ गलत नही कर पाते हैं।

 

६. यदि अष्टम भाव के स्वामी अर्थात अष्टमेश किसी भी भाव में बैठे हों और उन पर गुरु की दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति दीर्घायु होते हैं।

 

७. यदि स्त्री की कुंडली हो और कुंडली के दूसरे भाव में राहु किसी भी राशि का हो तो ऐसी स्त्री कभी भी स्वदेश में सुखी नही रह सकती अतः ऐसी जातिकाओं को परदेश अर्थात दूसरे राज्य या विदेश में जीवनयापन करना चाहिए।

 

८. यदि कुंडली के किसी भी भाव में शनि उच्च राशि के हों और उन पर मंगल की दृष्टि हो तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही वक्ता या नेता होता है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों के अंदर नेतृत्व क्षमता बहुत प्रवल होती है।

 

९. यदि शुक्र कुंडली के एकादश भाव में हों तो ऐसे व्यक्तिओं को विवाह उपरांत अच्छा धन लाभ होता है अर्थात ऐसे जातक/जातिका विवाह उपरांत धनी होते हैं।

 

१०. यदि किसी महिला की कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य व छठे/षष्ठ भाव में शनि हो तो ऐसे जातिका का विवाह किसी बड़े आदमी या किसी बड़े अधिकारी से होता है।

 

११. यदि कुंडली के अष्टम भाव में केतु हो तो जातक/जातिका को निःसंदेह अकास्मिक धन लाभ की प्राप्ति होती है साथ ही यदि कुंडली के अष्टम भाव में मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या व वृश्चिक राशि में केतु बैठा हो तो जातक/जातिका को पेट से जुड़ी समस्या बनी ही रहती है।

 

१२. यदि शनि वृषभ राशि के हों तो जातक/जातिका को क्रोध बहुत अधिक आता है तथा ऐसे जातक/जातिका की परेशानियाँ विवाह बाद बढ़ जाती है और आय में कमी तथा व्यय में वृद्धि होती है।

 

१३. यदि स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) का लग्न हो अर्थात यदि स्थिर लग्न हो और लग्न पर छठे भाव के स्वामी की दृष्टि हो तो ऐसे जातक/जातिका खूब धन के स्वामी अर्थात धनवान होते हैं।

 

१४. यदि एकादश भाव का स्वामी अर्थात लाभेश लग्न में हो तो ऐसे व्यक्तियों को हर 11वें दिन कोई न कोई लाभ अवश्य ही होता है।

 

१५. यदि शुक्र लग्न में हो तो व्यक्ति खुशमिजाज होता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों गाने का बहुत शौंक होता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों का आमोद-प्रमोद में अधिक मन लगता है।

 

१६. यदि शनि लग्न में हो और गुरु केंद्र में हो तो ऐसे व्यक्तियों को निःसंदेह पैतृक संपत्ति अवश्य ही प्राप्त होती है।

 

१७. यदि लग्न या पंचम या नवम भाव में बुध व चंद्र की युति हो तो जातक विद्वान व बुद्धिमान होता है या भविष्यवक्ता होता है।

 

१८. यदि चंद्रमा पर किसी भी उच्च के ग्रह की दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति धनवान होते हैं।

 

विशेष:- बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न अवश्य उठेगा कि यदि उच्च के शनि की दृष्टि चंद्र पर हो तो विष योग बनेगा जिसमें व्यक्तियों को बहुत परेशानिओं का सामना करना पड़ता है तो यहाँ यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैंने धनवान होगा ऐसा लिखा है और यह जरूरी नही कि व्यक्ति धनी और किंतु परेशान न रहे अतः ऐसे व्यक्ति परेशान रहेंगे किंतु धनवान भी होंगे।

 

१९. यदि सूर्य के दोनों तरफ कोई भी ग्रह हो (चंद्रमा को छोड़कर) तो व्यक्ति तेज बोलने वाला होता है तथा उसे हर कार्य में सफलता मिलती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को अच्छा धन लाभ भी होता है।

 

२०. यदि स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) का लग्न हो अर्थात यदि स्थिर लग्न हो और शुक्र केंद्र में हो तथा चंद्रमा त्रिकोण में गुरु से युत हो अर्थात चंद्रमा त्रिकोण में गुरु के साथ बैठा हो साथ ही शनि दशम भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति सुखी, भोगी, विद्वान, प्रभावशाली, मंत्री, एम. पी., एम. एल. ए. आदि होता है।

 

जय श्री राम।

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अगस्त 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

अगस्त 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए अगस्त 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप घर के माहौल में कुछ तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो सकती है, माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, तनाव लेने से बचें, संतान पर धन व्यय होगा, 2 अगस्त को बुध गोचर बदलकर पंचम भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, प्रेमी/प्रेमिका के साथ व्यर्थ विवाद न करें, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, फाइनेंस व मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, 17 अगस्त को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके छठे भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यात्राओं के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रहेगी, उन्नति प्राप्त करने हेतु मेहनत अधिक करनी होगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, खर्चों में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में गुरु व केतु का नवम भाव से गोचर रहेगा अतः भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होता रहेगा, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, नवदंपत्तियों को कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, छोटी धार्मिक यात्रा के भी योग बनेंगे।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शुक्र व राहु का तीसरे भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपके छोटे भाई-बहन विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, यात्राओं के योग बनेंगे, जो लोग फाइनेंस, कला, सौंदर्य प्रकाशन, टीचिंग से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए यह अच्छा समय रहेगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें हालांकि गुरु की पंचम दृष्टि लग्न पर होने से कोई गंभीर समस्या नही रहेगी फिर भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, क्रोध पर नियंत्रण रखें, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, 16 अगस्त को मंगल गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे जिससे आपको काफी राहत अनुभव होगी, संतान प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, बुद्धि की शक्ति से उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, माता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, क्रोध पर नियंत्रण रखें, तामसिक चीजों से परहेज करें 2, 16 व 29 अगस्त को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 1 से 6 अगस्त तक का समय आपके लिए अच्छा रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, 7 से 16 अगस्त तक का समय तनावपूर्ण रहेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, 15 व 29 अगस्त का दिन प्रेमियों के लिए अच्छा रहेगा, धन लाभ के योग बनेंगे, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे प्रेम का इजहार या उन्हें शादी के लिए प्रपोज करना चाहते हैं तो यह दो दिन आपके लिए बेहद शुभ रहेगा, 17 से 30 अगस्त के मध्य बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए अगस्त 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में तनाव बना रहेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, 16 अगस्त के बाद से बड़ी राहत अनुभव होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, अचानक धन लाभ हो सकता है माह की 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15 व 16 इनमें भी 7 से 10 तक तिथियों में विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व शनिवार के दिन सूर्यास्त बाद शनि स्तोत्र का पाठ करते हुए सरसों के तेल का दीपक शनि देव को अर्पित करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ५

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ५

 

 

मेष लग्न कुंडली के विभिन्न राशियों में सूर्य का फल
मेष लग्न कुंडली के विभिन्न राशियों में सूर्य का फल

 

भाग:-१ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग १

 

मेष लग्न की कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल:-

 

मेष लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य
मेष लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य

 

नवम भाव से भाग्य, पिता व गुरु का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य के अपने मित्र गुरु के धनु राशि में बैठा होने के कारण से उच्च शिक्षा प्राप्ति के योग बनेंगे तथा बुद्धि बहुत तीव्र रहेगी और धर्म शास्त्र का अच्छा ज्ञान प्राप्त होगा साथ ही बुद्धि योग द्वारा भाग्य की महान वृद्धि के योग बनेंगे और संतान का उत्तम सहयोग प्राप्त होगा साथ ही वाणी के द्वारा बड़ा प्रभाव और यश प्राप्त होगा साथ ही ऐसे जातक/जातिका को ईश्वर और न्याय पर विश्वास रहेगा किंतु गुरु व पिता का पूर्ण सुख नही प्राप्त हो सकेगा व सातवीं दृष्टि से तीसरे भाव को भाई-बहन और पराक्रम स्थान को मित्र बुध के मिथुन राशि में देखने के कारण से भाई-बहन का सुख प्राप्त होगा और पराक्रम व पुरुषार्थ शक्ति के अंदर बुद्धि की योग्यता से बड़ी शक्ति और स्फूर्ति प्राप्त होगी।

 

भाग:-२ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग २

 

मेष लग्न की कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल:-

 

मेष लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य
मेष लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य

 

दशम भाव से पिता, राज्य, व्यापार, मान-प्रतिष्ठा का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य के अपने शत्रु शनि की मकर राशि में बैठा होने के कारण से पिता स्थान में कुछ वैमनस्यता युक्त शक्ति प्राप्त होगी तथा विद्या के पक्ष में कुछ अड़चनों का साथ राजभाषा की योग्यता प्राप्त होगी और जातक/जातिका दिमाग एवं विचारों के अंदर बड़ी भारी उत्तेजना, क्रोध तथा अहंभाव रखेंगे तथा संतान पक्ष के संबंध में कुछ अरूचिक सहयोग शक्ति प्राप्त होगी और सातवीं दृष्टि से मित्र चन्द्रमा के कर्क राशि में देखने के कारण से माता का उत्तम सुख और भूमि का अच्छा योग प्राप्त होगा और राज-समाज एवं कारोबार के मार्ग में बुद्धि योग से उन्नति प्राप्त होगी।

 

भाग:-३ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ३

 

मेष लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल:-

 

मेष लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य

 

एकादश भाव से बड़े भाई, आमदनी, लाभ का विचार किया जाता है एकादश भाव में क्रूर या गर्म ग्रह अत्यधिक शक्तिशाली फल का दाता हो जाता है जहाँ सूर्य के अपने शत्रु शनि के कुंभ राशि में बैठा होने के कारण से आमदनी के मार्ग में विशेष उन्नति के लिए बड़ा भारी परिश्रम करना होगा और बुद्धि योग के द्वारा विशेष सफलता प्राप्ति के भी योग बनेंगे तथा आमदनी के मार्ग में बड़ा प्रभाव रहेगा तथा सातवीं दृष्टि से पंचम भाव को अपने खुद की सिंह राशि में देखने के कारण से उच्च शिक्षा प्राप्ति के योग बनेंगे और संतान का उत्तम सुख भी प्राप्त होगा साथ ही ऐसे जातक/जातिका स्वार्थ सिद्धि के मार्ग में बड़ी दृढ़ता और तत्परता तथा वाणी की कटुता से सफलता प्राप्त करेंगे।

 

भाग:-४ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ४

 

मेष लग्न की कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल:-

 

मेष लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य
मेष लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य

 

द्वादश भाव से खर्च व बाहरी स्थान का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य के अपने मित्र गुरु की मीन राशि में बैठा होने के कारण से जातक/जातिका खर्च की विशेष संचालन शक्ति बुद्धि योग द्वारा प्राप्त करेंगे और बाहरी स्थानों का अच्छा संबंध प्राप्त करेंगे किंतु व्यय स्थान में बैठे होने के दोष के कारण से विद्या के पक्ष में कुछ कमजोरी रहेगी और संतान पक्ष में कुछ कमी और परेशानी तथा हानि के योग बनेंगे तथा दिमाग में कुछ तनाव और परेशानी रहेगी व सातवीं दृष्टि से छठे/षष्ठ भाव को मित्र बुध की कन्या राशि में देखने के कारण से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी और शत्रु पक्ष में सद्भावनाओं के द्वारा प्रभाव की शक्ति और निर्भयता प्राप्त होगी।

जय श्री राम।

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सूर्य का कर्क राशि से गोचर 16 जुलाई 2020: जानें किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा

सूर्य का कर्क राशि से गोचर 16 जुलाई 2020: जानें किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा

 

सूर्य का कर्क राशि से गोचर
सूर्य का कर्क राशि से गोचर

 

सूर्य 16 जुलाई 2020 को प्रातः 10 बजकर 31 मिनट 59 सेकंड पर मिथुन राशि को छोड़कर कर्क राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की मिथुन की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की कर्क की सक्रांति लगेगी तथा सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन हो जाएंगे, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में 30 दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के कर्क राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आपके कार्य में कुछ अड़चन आ सकती है फिर भी आपका मनोबल नही टूटेगा तथा कुछ विलंब के साथ आपके कार्य पूर्ण होने के योग बनेंगे, नए कार्य की शुरुवात होगी, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए सूर्य का यह गोचर लाभप्रद सिद्ध होगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें अन्यथा घर के माहौल में कुछ तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे क्रोध पर नियंत्रण रखें, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आपके किए गए प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, कान में दर्द या चोट लगने की संभावना रहेगी, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, आय वृद्धि के स्त्रोत बनेंगे।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, तामसिक व गर्म चीजों के सेवन से परहेज करें, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, आंखों में जलन या दर्द या चोट लगने की संभावना रहेगी, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होकर लग्न अर्थात प्रथम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, रुके हुए कार्य पूर्ण होने के योग बनेंगे, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा विशेषतः 20 से 22 जुलाई पिता व सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद न करें, दामपत्य जीवन मिला-जुला रहेगा, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, जिन्हें पूर्व से ही स्वास्थ्य की कोई समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल

 

 

 

 

 

 

 

 

 

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य पहले भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप किसी भी कार्य को पूर्ण निष्ठा से नही कर सकेंगे, किसी भी कार्य में मन नही लगेगा, स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें, चोट लगने की भी संभावना रहेगी, पिता के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, खर्चों में वृद्धि होगी, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, कोई भी निर्णय भावनाओं में आकर न लें, कार्यस्थल पर आप प्रशंसा पाने का प्रयास करेंगे जिस कारण से आप अपने कार्य को सही तरह से संपादन नही कर सकेंगे।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप खर्चों में वृद्धि होगी, बड़े भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव है, यात्राओं के योग बनेंगे, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे, पार्टनरशिप में जिनका कार्य है उनके लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, संतान की स्वास्थ्य में समस्या संभव है।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे आपकी कुंडली में सूर्य लाभेश होकर दशम भाव से गोचर करेंगे जहाँ उन्हें दिग्बल भी प्राप्त होता है अतः काम-धंधे के लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे, पिता को कष्ट संभव है, माता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे अतः भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा व भाग्य की शक्ति से उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, व्यापारियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, ससुराल पक्ष व जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, धन हानि के योग बनेंगे, खर्चों में वृद्धि होगी, किसी को कर्ज देने व किसी से कर्ज लेने से बचें, कुल मिलाकर धनु राशि वालों को इस गोचरकाल पूर्ण सतर्क रहना होगा, उपाय में नित्य सूर्य को जल दें तो लाभ होगा।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से विवाद संभव है, कार्यस्थल पर व्यर्थ विवाद करने से बचें व पूर्ण सतर्कता और निष्ठा के साथ अपने कार्य को करें, मित्रों से विवाद संभव है, जीवनकाल के स्वास्थ्य में समस्या भी संभव रहेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं से सावधान रहें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा व उनके स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, बड़े भाई के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान को कष्ट संभव रहेगा व संतान से विवाद संभव रहेगा, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें, बुद्धि व विवेक द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा।

 

जय श्री राम।

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मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ४

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ४

 

 

मेष लग्न कुंडली के विभिन्न राशियों में सूर्य का फल
मेष लग्न कुंडली के विभिन्न राशियों में सूर्य का फल

 

भाग:-१ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग १

 

मेष लग्न की कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल:

 

मेष लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य
मेष लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य

 

सप्तम भाव से विवाह, जीवनसाथी, पार्टनरशिप, नौकरी, मित्रता का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य के अपने नीच राशि अर्थात तुला में बैठा होने के कारण से कठिन परिस्थितियों से होते हुए शिक्षा पूर्ण होने के योग बनेंगे तथा जातक/जातिका बुद्धि और विवेक की लघुता से कार्य करेंगे और संतान पक्ष में भी कुछ कमजोरी अनुभव होगी कहने का आशय यह है कि संतान को कष्ट या कुछ मुश्किल से संतान सुख प्राप्ति के योग बनेंगे तथा स्त्री के सुख-स्थान में परेशानी अनुभव होगी साथ ही रोजगार के मार्ग में दिक्कतों से एवं दिमागी परिश्रम से सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे व सातवीं दृष्टि से प्रथम भाव अर्थात लग्न को अपनी उच्च राशि मेष में देखने के कारण से देह के कद में कुछ लम्बाई प्राप्त होगी तथा हिर्दय में कुछ छिपा हुआ स्वाभिमान विशेष रहेगा और बुद्धि की युक्ति से मान एवं प्रभाव प्राप्त होगा।

 

भाग:-२ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग २

 

मेष लग्न की कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल:-

 

मेष लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य
मेष लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य

 

अष्टम भाव से आयु, ससुराल, गूढ़ रहस्य, जीवनसाथी की वाणी का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य अपने मित्र मंगल की वृश्चिक राशि में बैठा होने के कारण से शिक्षा कठिन परिस्थितियों से होते हुए पूर्ण होगी तथा संतान पक्ष से कुछ कष्ट अनुभव होगा कहने का आशय यह है कि संतान सुख कुछ कष्ट से प्राप्त होगा या संतान से विवाद बना रहेगा या संतान को कोई कष्ट संभव रहेगा और दिमाग में कुछ परेशानियाँ रहेंगी तथा जीवन की दिनचर्या में प्रभाव रहेगा और और आयुष्य की वृद्धि होगी साथ ही पुरातत्व संबंध में बुद्धि योग द्वारा प्रभाव और चमत्कार रहेगा व सातवीं दृष्टि से दूसरे भाव धन और कुटुंब स्थान में अपने शत्रु शुक्र की वृषभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका धन के कोष की वृद्धि करने में बहुत प्रयत्नशील रहेंगे किंतु फिर भी धन और कुटुंब की तरफ से कुछ असंतोष युक्त शक्ति प्राप्त होगी।

 

भाग:-३ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ३

 

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पंचमहापुरुष योग— Astrology Sutras

पंचमहापुरुष योग— Astrology Sutras

 

पंचमहापुरुष योग
पंचमहापुरुष योग

 

ज्योतिष में सबसे प्रसिद्ध योगों में पंचमहापुरुष योग का विशेष महत्व है हम सभी जानते हैं कि ज्योतिष में 9 ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की गढ़ना की जाती है जिनमें राहु और केतु को छाया ग्रह की संज्ञा दी गयी है तथा सूर्य और चंद्र को आत्मा व मन का कारक कहा गया है और यह ग्रह स्वम् प्रकाशमान है इनके अतिरिक्त शेष ग्रह (मंगल, बुध, गुरु, शुक्र व शनि) के केंद्र (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम व दशम भाव को केंद्र कहते हैं) में स्वराशि या उच्च राशि में बैठे होने से एक अन्य योग का सृजन होता है जिसे पंचमहापुरुष योग कहा जाता है इन पंचमहापुरुष योग के नाम रूचक योग, शश योग, भद्र योग, मालव्य योग व शश योग है जो कि क्रमशः मंगल, शनि, बुध, शुक्र और गुरु से बनते हैं अब ऊपर बताए गए पंचमहापुरुष योग में से किसी एक में उत्पन्न व्यक्ति का स्वरूप या भाग्योदय कैसे होगा बताता हूँ।

 

रूचक योग:-

 

रूचक योग
रूचक योग

 

यदि मंगल केंद्र में मेष, वृश्चिक व मकर राशि के होकर बैठे हो तो रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मा व्यक्ति बड़े चेहरे वाला, बहुत साहस से धन प्राप्त करने वाला, शूर, बली और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्ति अभिमानी भी होते हैं, मंत्रेश्वर महाराज जी ने कहा है कि ऐसा व्यक्ति अभिमानी प्रकृति का होता है और सेनापति हो (सेनापति से तात्पर्य उच्च पदाधिकारी समझना चाहिए), अपने गुणों के कारण से प्रसिद्ध, कीर्तिमान और प्रत्येक उद्योग में विजयी हो, मानसागरी में कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति दीर्घायु, स्वच्छ कांति वाले, साहसी, नीले केश वाले, हाथ-पैर सुडौल, शंख समान कंठ वाले (अर्थात उनकी आवाज कुछ तेज होती है मतलब तेज बोलते हैं), दुष्ट, ब्राह्मण व गुरुओं के आगे विनयी, जनता से प्रेम रखने वाले व पैर से ऊपर किंतु कटि से नीचे दुबले होते हैं तथा इनके शरीर पर किसी चोट या जलने का निशान अवश्य होता है और इन्हें 70 वर्ष की आयु प्राप्त होती है।

 

भद्र योग:-

 

भद्र योग
भद्र योग

 

यदि बुध केंद्र में मिथुन या कन्या राशि के होकर बैठे हो तो भद्र नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मा व्यक्ति कुशाग्र अर्थात तेज बुद्धि वाला और विद्वान होता है तथा विद्वान आदमी व बड़े अधिकारी भी इनकी प्रशंसा करते हैं, ऐसे व्यक्ति भाषण देने में चतुर होते हैं साथ ही वैभवशाली और उच्च अधिकारी होते हैं मंत्रेश्वर महाराज ने कहा है कि ऐसा व्यक्ति शुद्ध हो (शरीर, वस्त्र, रहन-सहन स्वच्छ हो) तथा अत्यंत वैभवशाली होता है, मानसागरी के अनुसार भद्र योग में जन्मा व्यक्ति सिंह के समान मुख और हाथी सी चाल वाला, पुष्ट वक्ष स्थल और गोलाकार सुडौल दोनों बाहुवाला, दोनों बाहुओं को फैलाने से जितना हो उतना लंबा, कामी, सत्वगुणी तथा योग का ज्ञाता, हाथ व ऐसे व्यक्तियों के पैर में शंख, तलवार, हाथी, गदा, फूल, वाण, चक्र, कमल, पताका, हल आदि के निशान होते हैं तथा इनकी दोनों भृकुटि सुंदर व धार्मिक होता है, भद्र योग में जन्मा व्यक्ति धन को तराजू पर तौलता है तथा कान्यकुब्ज क्षेत्र का राजा होकर पुत्र-स्त्री से सुखी और 80 वर्ष की आयु को प्राप्त करने वाला होता है।

 

हंस योग:-

 

हंस योग
हंस योग

 

यदि गुरु केंद्र में कर्क, धनु व मीन राशि के होकर बैठे हो तो हंस नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मे व्यक्ति के हाथ और पैरों में शंख, कमल, मत्स्य और अंकुश के चिन्ह होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति उत्तम भोजन करने वाले और सज्जन लोगों से प्रशंसा प्राप्त करने वाले होते हैं तथा इनका अरुण मुख, ऊँची नासिका, सुंदर पैर, हंस के समान शरीर, गौर वर्ण, लाल नख, हंस के समान स्वर होते है व इन्हें कफ की समस्या भी रहती है मंत्रेश्वर महाराज जी कहते हैं कि हंस योग में जन्मे व्यक्ति का शरीर देखने बहुत शुभ (सुंदर, सौम्य) होता है, मानसागरी के अनुसार हंस योग में जन्मा व्यक्ति जल में विहार करने वाला, अत्यंत कामी, स्त्री से कभी तृप्त न होने वाला, अड़सठ अंगुल ऊँचा शरीर वाला और 60 वर्ष की आयु को प्राप्त करने वाला होता है।

 

मालव्य योग:-

 

मालव्य योग
मालव्य योग

 

यदि शुक्र केंद्र में वृषभ, तुला व मीन राशि के होकर बैठे हों तो मालव्य नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मा व्यक्ति धैर्यवान और पुष्ट अंग वाला, उत्तम भोजन करने वाला, विद्वान, पुत्र और स्त्रियों से सुख प्राप्त करने वाला, यशस्वी, सुडौल शरीर व पतले होंठ वाला होता है मंत्रेश्वर महाराज जी कहते हैं मालव्य योग में जन्मा व्यक्ति प्रसन्नमुख, शांतचित्त और अच्छी सवारियों (मोटर आदि) का भोक्ता होता है मानसागरी के अनुसार मालव्य योग में जन्मा व्यक्ति पतली कमर वाला, चंद्रमा के समान कांति वाला, सर्वत्र पराक्रमी, घुटनों तक लंबी बाहु वाला, 13 अंगुल की मुँह की लंबाई वाला और 70 वर्ष की आयु तक राज्य करने वाला होता है।

 

शश योग:-

 

शश योग

 

यदि शनि केंद्र में तुला, मकर व कुंभ राशि के होकर बैठे हो तो शश नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्म लिए व्यक्ति अत्यंत प्रभावशाली, उच्च पदाधिकारी, बलवान, धनी और सुखी होते हैं मंत्रेश्वर महाराज जी कहते हैं कि शश योग में जन्मा व्यक्ति किसी ग्राम के मालिक हों या नृप (बहुत से मनुष्यों के स्वामी) अर्थात उच्च पदाधिकारी होते हैं तथा ऐसे व्यक्तियों की मातहती में अच्छे-अच्छे लोग काम करते हैं तथा शश योग में जन्मे व्यक्तियों का आचरण उत्तम नही होता और ऐसे व्यक्ति अन्य पुरुषों की स्त्रियों में आसक्त रहते हैं मानसागरी के अनुसार शश योग में जन्मे व्यक्ति छोटे मुँह और दाँत वाले, क्रोधी, दुष्ट, वन-पर्वत, किला और नदी के प्रिय, मेहमानों के प्रिय, मध्यम कद के और प्रसिद्ध होते हैं साथ ही विविध सेनाओं को इकट्ठा करने में लगे रहने वाले, धातु कर्म में कुशल, चंचल नेत्र वाले, माता के भक्त, दूसरों के दोष ढूँढने वाले, हाथ व पैर में पलंग, शंख, बाण, शस्त्र, माला, वीणा के समान रेखा वाले और 70 वर्ष तक शासन करने वाले होते हैं।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी के अनुसार यदि चंद्र कुंडली से भी केंद्र में उपर्युक्त पाँचों ग्रह स्वराशि या उच्च राशि बैठे हों तो भी पंचमहापुरुष योग बनता है कहने का आशय यह है कि जैसे जन्म लग्न से केंद्र का विचार करते हैं ठीक वैसे ही चंद्र कुंडली से भी विचार करना चाहिए, यदि कोई एक ग्रह उपर्युक्त प्रकार से योगकारक हो तो मनुष्य भाग्यवान होता है, यदि दो ग्रह योग बनावें तो राजा के समान सुख की प्राप्ति होती है, यदि तीन ग्रह योग बनावे तो व्यक्ति राजा या उच्च अधिकारी होता है, यदि चार ग्रह योग बनावे तो महाराजा समान सुख प्राप्त होता है तथा यदि किसी की कुंडली में रूचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश ये पाँचों योग हो वह इनसे भी उच्च पदवी प्राप्त करता है।

 

मानसागरी के अनुसार मंगल, बुध, गुरु, शुक्र या शनि के केंद्र में अपनी उच्च या स्वराशि में स्थित होने से जो पंचमहापुरुष योग बनते हैं किंतु यदि जो ग्रह यह योग बना रहे हों वह सूर्य या चंद्र के साथ हो तो ऐसे महापुरुष योग के प्रभाव से जातक/जातिका राजा या राजतुल्य नही होते परंतु उसकी दशा या अंतर्दशा में केवल शुभ फल की प्राप्ति होती है।

 

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मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ३

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग ३

 

मेष लग्न कुंडली के विभिन्न राशियों में सूर्य का फल
मेष लग्न कुंडली के विभिन्न राशियों में सूर्य का फल

 

भाग:-१ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग १

 

मेष लग्न की कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल:-

 

मेष लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य
मेष लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य

 

पंचम भाव से विद्या, संतान, बौद्धिक क्षमता, प्रेम का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य के अपने स्वराशि अर्थात स्वम् की राशि सिंह में बैठा होने के कारण से अच्छी शिक्षा प्राप्ति के योग बनते हैं और बुद्धि व वाणी की महान तेजी के कारण से ऐसे व्यक्ति समाज बड़ा भारी प्रभाव रखते हैं व संतान का उत्तम सुख व कम से कम एक पुत्र का सुख प्राप्त करते हैं किंतु ऐसे व्यक्तियों में अहंकार भी बना रहता है जिस कारण से अपनी बुद्धि की योग्यता के सम्मुख दूसरों की बुद्धि को तुच्छ समझते हैं तथा सातवीं दृष्टि से एकादश भाव जो कि लाभ भाव है को अपने शत्रु शनि की कुंभ राशि में देखने के कारण से आमदनी के मार्ग में विशेष प्रयत्न करने के बाद भी लाभ प्राप्ति की तरफ से कुछ असंतोष रहेगा किंतु ऐसे व्यक्ति लाभ के मार्ग में कुछ कटु भाषण से कार्य सम्पादन करते हैं।

 

भाग:-२ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

 

मेष लग्न की कुंडली के विभिन्न भावों में सूर्य का फल भाग २

 

मेष लग्न की कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल:-

 

मेष लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य
मेष लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य

 

षष्ठ भाव से रोग, शत्रु, प्रतियोगी परीक्षा, मामा की स्थिति का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य अपने मित्र बुध की कन्या राशि में बैठा होने के कारण से विद्या ग्रहण करने में कुछ दिक्कतें रहेंगी किंतु बुद्धि और विद्या के द्वारा बड़ा भारी प्रभाव प्राप्त होगा और संतान पक्ष के अंदर कुछ परेशानी रहेगी, छठे भाव में गर्म ग्रह (सूर्य को गर्म ग्रह कहा जाता है) बड़ा शक्तिशाली फल का दाता हो जाता है इसलिए शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व प्रतियोगी परीक्षाओं को निकालने की शक्ति प्राप्त होगी तथा सातवीं दृष्टि से द्वादश भाव खर्च व बाहरी स्थान को अपने मित्र गुरु की मीन राशि में देखने के कारण से व्यय/खर्चों में वृद्धि होगी और बुद्धि योग द्वारा बाहरी स्थानों से सफलता व मान प्राप्ति के योग बनेंगे।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मृत्यु योग के प्रकार, उनकी आयु तथा जानें कौन ग्रह किसके मारकेश होते हैं

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मृत्यु योग के प्रकार, उनकी आयु तथा जानें कौन ग्रह किसके मारकेश होते हैं

 

आयु के कुछ योग
आयु के कुछ योग

 

ज्योतिष शास्त्र की मान्यतानुसार व्यक्ति की आयु का निर्णय गर्भ में ही हो जाता है वैदिक ज्योतिष में जीवन अवधि के कठिन विषय पर व्यापक चिंतन किया गया है।

 

बृहत पाराशर होरा शस्त्र में महर्षि पराशर कहते हैं:-

 

बालारिष्ट योगारिष्टमल्पध्यंच दिर्घकम।
दिव्यं चैवामितं चैवं सत्पाधायुः प्रकीतितम॥

 

अर्थात:- आयु का सटीक ज्ञान तो देवों के लिए भी दुर्लभ है फिर भी बालारिष्ट, योगारिष्ट, अल्प, मध्य, दीर्घ, दिव्य व अस्मित ये सात प्रकार की आयु होती हैं इसके अलावा लग्नेश, राशीश, अष्टमेश व चंद्र नीच, शत्रु राशि के हों व 6, 8, 12 भाव आदि में चले जाएं चंद्र नीच के अलावा अमावस्या युक्त हो तथा इन पर राहु, केतु का प्रभाव हो तो भी मारक योग बन जाता है जो कि मृत्यु का कारण बनते हैं।

 

१. बालारिष्ट योग में व्यक्ति की अधिकतम आयु 8 वर्ष तक की हो सकती है।

 

२.योगारिष्ट योग में व्यक्ति की अधिकतम आयु  20 वर्ष तक की हो सकती है।

 

३. अल्पायु योग में व्यक्ति की अधिकतम आयु 32 वर्ष तक की हो सकती है।

 

४. मध्यमायु योग में व्यक्ति की अधिकतम आयु 64 वर्ष तक की हो सकती है।

 

५. दीर्घायु योग में व्यक्ति की आयु अधिकतम 120 वर्ष तक की हो सकती है।

 

६. दिव्य योग में व्यक्ति की आयु अधिकतम 1000 वर्ष तक की हो सकती है।

 

७. अस्मित योग में व्यक्ति की अधिकतम आयु की कोई सीमा नहीं होती है।

 

ज्योतिष में जीवन अवधि का विचार सामान्यतः अष्टम भाव से किया जाता है इसके साथ ही अष्टमेश, कारक शनि, लग्न-लग्नेश, राशि-राशीश, चंद्रमा, कर्मभाव व कर्मेश, व्यय भाव व व्ययेश तथा इसके अलावा प्रत्येक लग्न के लिए मारक अर्थात् शत्रु ग्रह, द्वितीय, सप्तम, तृतीय एवं अष्टम भाव तथा इनके स्वामियों तथा शुभ एवं अशुभ पाप ग्रहों द्वारा डाले जाने वाले प्रभाव पर भी विचार करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सामान्यतः आयु में कमी करके मृत्यु का योग ‘मारक’ ग्रह देते हैं इस तरह से शब्ध “मारक” या “मारकेश” का अर्थ होता है मारने वाला या मृत्यु देने वाले ग्रह जो आयु में कमी कर मृत्यु देता है सामान्यतः मारकेश ग्रह वह होता है जो लग्नेश से शत्रुता रखता है मंगल व बुध एक दूसरे के लिए मारकेश हैं, सूर्य व शनि एक दूसरे के लिए मारकेश हैं, शनि व चंद्र एक दूसरे के लिए मारकेश हैं, शुक्र व मंगल एक दूसरे के लिए मारकेश हैं, गुरु व बुध एक दूसरे के लिए मारकेश हैं, राहू व केतू छाया ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल व बृहस्पति के लिए मारकेश हैं।

 

जय श्री राम।

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