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नामकरण संस्कार: जानिए, बच्चों के नाम कब और किस प्रकार से रखना शुभ होता है

नामकरण संस्कार: जानिए, बच्चों के नाम कब और किस प्रकार से रखना शुभ होता है

 

नामकरण संस्कार विधि
नामकरण संस्कार विधि

 

जातानन्तरमेव नामकरणं त्वेकादशाहे स्फुटं,

पुत्रस्यैव समाक्षरं तु युवते: कार्य ततो व्यत्ययम्।

शुद्धिर्जातकवच्च नाम्नि सकलैस्तद् द्वादशेषोडशे,

द्बाविंशेऽप्यथ विंशके हि विहितं जातिव्यस्थां बिना।।

 

अर्थात:-

 

जातकर्म संस्कार के पश्चात ग्याहरवें दिन बच्चे का नामकरण करना चाहिए, पुत्र का नाम सम संख्या अक्षरों वाला तथा पुत्री का नाम विषम संख्याक्षरों से रखना चाहिए।

 

मुहर्त व दिनादि का निश्चय जातकर्म के समान ही करना चाहिए अथवा बाहरवें, सोहलवें, बीसवें तथा बाइसवें दिन भी सूतक समाप्ति के बाद नामकरण कर सकते हैं, इसमें वर्ग भेद से काल भेद नही होता है अर्थात चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र) के लोगों पर यह नियम समान रूप से लागू है।

 

नामकरण सदैव सूतक समाप्त होने पर ही होता है, दस दिन बीत जाने पर सूतक समाप्त हो जाता है बहुत से आचार्यों ने दसवें, अठाहरवें या मसोपरांत भी कहे हैं अतः देश, काल व परंपरा अनुसार नामकरण का निश्चय करते हुए शुभ वार, तिथि, नक्षत्रादि का विचार कर रिक्ता तिथि अर्थात चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तथा अमावस्या को छोड़कर शेष सभी तिथियाँ किंतु तिथि क्षय न हो रही हो आदि का ध्यान रखना चाहिए यदि पूर्णा तिथि हो तो विशेष ठीक रहती है, उस दिन शुभ वार में, लग्न शुद्धि का विचार कर के दोपहर से पूर्व जातक का नामकरण करना चाहिए किंतु यदि उस दिन व्यतिपात योग, सक्रांति, रिक्ता तिथि, जया तिथि, भद्रा, ग्रहण, वैधृति योग, श्राद्ध दिन पड़ता हो तो नामकरण संस्कार की तिथि आगे बढ़ा देनी चाहिए यदि इन कारणों से उपरोक्त मुहर्त निकल जाए तो सूर्य के उत्तरायण समय व गुरु और शुक्र के अस्त समय को छोड़कर कभी भी शुभ दिन में नामकरण कर सकते हैं

देशकालोपघाताद्यै: कालातिक्रमणं यदि।

अनस्तगे भृगावीज्ये तत्कालं चोत्तरायणे।।

 

मुहर्त चिंतामणि में नामकरण संस्कार विधि के लिए कहा गया है कि

 

तज्ज़ातकर्मादि शिशोर्विधेयं पर्वाख्यरिक्तोनतिथौशुभेऽह्वि।

एकादशे द्वादशकेऽ पिघस्त्रे मृदुध्रुवक्षिप्रचरोडुषु स्यात्।।

 

अर्थात:- पर्व के दिन और रिक्ता तिथि को छोड़कर अन्य तिथियों में, शुभ दिन में, जन्मकाल से ११ वें व १२ वें दिन में, मृदुसंज्ञक, ध्रुवसंज्ञक, क्षिप्रसंज्ञक नक्षत्रों में, बच्चे का नामकरण करना शुभ रहता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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मीन लग्न और आप: जानिए, मीन लग्न वालों का व्यक्तित्व

मीन लग्न और आप: जानिए, मीन लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मीन लग्न वालों का व्यक्तित्व
मीन लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मीन लग्न वाले व्यक्तियों का शरीर सुंदर व सुडौल होता है तथा इनको पित्त की समस्या प्रायः बनी ही रहती है, मीन लग्न वाले व्यक्तियों को जल से अत्यधिक प्रेम होता है और प्रेमवश कभी-कभी जल का अत्यधिक सेवन भी करते हैं तथा विलासी होते हैं, इनको सुख, शांतिमय और भोग-विलास युक्त जीवन वाले सिध्दांत पर चलना पसंद होता है इस कारण मीन लग्न वाले व्यक्ति आँख मूंद कर पानी की तरह धन व्यय करते हैं तथा ऐसे व्यक्ति कुशल कवि और लेखक भी होते हैं साथ ही इनमें रुचि भी रखते हैं, मीन लग्न वाले व्यक्ति कभी भी समय फालतू में नष्ट नही करते अर्थात सदैव ही क्रियाशील रहते हैं कहने का आशय यह है कि मीन लग्न वाले व्यक्ति निरंतर कोई न कोई कार्य करते ही रहते हैं इनको खाली बैठकर समय बर्बाद करना नही पसंद होता है भले ही वह सचमुच में कार्य में व्यस्त न भी हो, अंग्रेजी भाषा में ऐसे जातकों के लिए एक कहावत है Busily Idle अर्थात बहुत समुचित होता है, मीन लग्न वाले व्यक्ति बहुत सी बातों को जानने वाले, हर बात की खबर रखने वाले, बहुत सी बातों में अंधविश्वासी, कीर्ति संपन्न, दक्ष, अल्पाहारी, चपल, धूर्त और धन समृद्धि वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों को बचपन एवं युवावस्था के प्रारंभ में अनेक दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ता है पर उनसे वह बच जाता है तथा इनके धन की हानि शत्रु द्वारा और पारस्परिक राग-द्वेष से होती है, मीन लग्न वाले व्यक्ति कहीं-कहीं पर साहसी तो कहीं-कहीं पर भीरु सिद्ध होते हैं, अनिश्चित विचार, दृढ़ संकल्प अथवा संकल्प विकल्प में पड़ कर बहुत सा अच्छा समय इनके हाथ से निकल जाता है, इन्हें संगीत, नाटक, चित्र, नृत्य तथा अन्य सुललित कलाओं में अभिरुचि और प्रेम होता है, मीन लग्न वाले व्यक्ति मेधावी, उत्तम स्मरण शक्ति वाले, बहुत सी कन्या वाले, स्त्री से प्रेम रखने वाले और प्रसिद्ध व कीर्तिशाली व्यक्ति से मित्रता रखने वाले होते हैं।

 

मीन लग्न की महिलाओं में उपरोक्त गुण के अतिरिक्त अन्य गुण जैसे रूपवती, सुंदर नेत्र व केश वाली, आज्ञाकारिणी, पति से अत्यधिक प्रेम रखने वाली, करुणामयी, पुत्र-पौत्रादि वाली तथा पूजा-पाठ में प्रेम रखने वाली होती है, मीन लग्न वाले व्यक्ति सदैव ही स्वास्थ्य के प्रति असावधान रहते हैं, इन्हें छूत-छात वाली बीमारी, पैर में ठंड लगने से कोई रोग आदि होने की संभावना रहती है, मादक तथा नशीली चीजों से इन्हें सख्त परहेज करना चाहिए, तनाव लेना इनके लिए हानिकारक होता है, मीन लग्न वालों की कुंडली में बृहस्पति और मंगल के संबंध बनने से राजयोग होता है, मंगल व चंद्रमा का संबंध भी उत्तम फल प्रदान करता है, बृहस्पति के साधारण फल होते हैं, मीन लग्न वालों के लिए शनि प्रवल मारक होता है उसके बाद शुक्र व मंगल मारक होते हैं किंतु मंगल स्वम् मारकेश नही होता, मीन लग्न वालों को शनि, सूर्य, शुक्र व बुध से शुभ फल नही मिलते किंतु यदि शनि द्वादश भाव में हो तो शुभ होता है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मतानुसार कुंडली के तृतीय, षष्ठ व एकादश में भी शनि हो तो व्यक्ति बड़ा धनी बनता है किंतु प्रायः दुःखी ही रहता है और यदि चंद्रमा द्वादश में हो तो प्रायः मीन लग्न वालों को कन्या संतति अधिक होती है किंतु एक पुत्र प्राप्ति के भी योग रहते हैं (कुंडली में ग्रहों की भूमिका के आधार पर), यदि वृश्चिक का नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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कुंभ लग्न और आप: जानिए, कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

कुंभ लग्न और आप: जानिए, कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व
कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कुंभ लग्न में जन्मे व्यक्तियों का शरीर तथा हिर्दय सुंदर होता है साथ है ऐसे व्यक्ति दयालु प्रकृति और परोपकार परायण होते हैं तथा दूसरों की भावना, विचार और मन की बातों को जानने के लिए सर्वदा यत्न करते हैं, दूसरों के दुःख को देखकर कुंभ लग्न वाले व्यक्ति रह नही पाते तथा दूसरों के दुःखो के निवारण हेतु उपाय में लगे रहते हैं तथा सुख व आनंद से जीवन व्यतीत करते हैं, कुंभ लग्न वाले व्यक्ति ईश्वर, धर्म तथा ज्ञान में अपनी रुचि रखते हैं और पाप व दुराचार से दूर रहना पसंद करते हैं, ऐसे व्यक्ति यशस्वी, धनी, मिलनसार, महान, सुगमता पूर्वक कार्य करने में निपुण, सर्व जन प्रिय, मित्रों से प्रीति रखने वाले और सबका मान-सम्मान करने वाले परंतु दंभी होते हैं साथ ही कुंभ लग्न वाले व्यक्ति अत्यंत कामी और कभी-कभी पर स्त्री गमन के इच्छुक होते हैं, बड़े लोगों से इनकी मित्रता रहती है और सभी लोगों में इनकी मान मर्यादा विशेष होती है, ठंडे जल का सेवन इन्हें अत्यधिक प्रिय होता है कुछ ग्रंथकारों में कुंभ लग्न को अच्छा नही माना है किंतु मेरा (ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली) यह मत व अनुभव है कि कुंभ लग्न वाले व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम भाग में किसी न किसी रूप का अपयश तथा लांछन व बड़ी हानि प्राप्त करते हैं किंतु धनी, दयालु, धार्मिक, विद्वान, सज्जन, कभी-कभी दुर्जन लोगों से मित्रता रखने वाले, स्त्रियों के वशीभूत व स्त्रियों में प्रीति रखने वाले, एकाधिक प्रेम-प्रसंग करने वाले, कुछ कठोर, अपने सुख व लाभ को सर्वप्रथम देखने वाले, मित्रों से युक्त, जीवन के मध्य भाग में अच्छी सफलता प्राप्त करने वाले व माता के प्रिय होते हैं।

 

कुंभ लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त पुत्रों की अपेक्षा पुत्रियों से अत्यधिक प्रेम करने वाली, आनंदमय जीवन तथा शुभ संगीत में जीवन व्यतीत करने वाली, अच्छे विचारों वाली, धार्मिका, जनों से प्रेम करने वाली और कृतज्ञा किंतु रुधिर रोगों से पीड़ित होती है, कुंभ लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः वात प्रकृति की समस्या व सिर दर्द, पेट दर्द, अपच, कोष्ट बद्धता तथा उदर जनित अनेक विकारों से ग्रसित ही रहते हैं, कुंभ लग्न वाले व्यक्तियों का रोग कुछ देर ही रहता है या फिर उनको एक ही रोग एकाधिक बार एक ही समय में हो जाता है या आजन्म रोग बना ही रहता है, इन्हें रुधिर का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा थोड़ा सा भी अस्वस्थ होने पर तुरंत औषधि लेनी चाहिए, स्वच्छ वायु, खुले स्थान का व्यायाम, सादा भोजन इनके लिए उत्तम रहता है, मानसिक व्यथा से बचना चाहिए तथा नेत्रों का पूर्ण सतर्कता से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि कुंभ लग्न वालों को नेत्र में समस्या प्रायः बनी ही रहती है।

 

कुंभ लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शुक्र अत्यधिक शुभ ग्रह व राजयोगकारक ग्रह होता है, मंगल भी इन्हें शुभ फल प्रदान करता है, कुंडली में मंगल व शुक्र का संबंध इनको उत्तम राजयोग तुल्य सुख प्रदान करता है, बुध व शनि साधारण फल देने वाले ग्रह होते है तथा बृहस्पति और चंद्रमा मारक ग्रह होते हैं किंतु बृहस्पति स्वम् मारक नही होता, यदि सूर्य और शुक्र लग्न में हो तथा राहु दशम भाव में हो तो व्यक्ति को बृहस्पति के अंदर राहु की अंतर्दशा में बेहद शुभ फल मिलते हैं तथा यदि सूर्य और बुध पंचम भाव में स्थित हो तो अच्छी उन्नति के योग बनाते हैं, मिथुन का नवमांश होने और व्यक्ति के प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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मकर लग्न और आप: जानिए, मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व

मकर लग्न और आप: जानिए, मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व
मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मकर लग्न काल पुरुष के क्रम स्थान की राशि का लग्न होता है जिसके स्वामी शनि होते हैं अतः मकर लग्न वाले व्यक्ति सदैव क्रियाशील रहते हैं कहने का आशय यह है ऐसे व्यक्ति एक जगह खाली नही बैठते, मकर लग्न वालों जा स्वभाव थोड़ा रूखा होता है साथ ही इनके शरीर का निचला अर्ध भाग कुछ दुबला होता है तथा इन्हें कफ प्रकृति की समस्याएं प्रायः बनी ही रहती है, मकर लग्न वाले व्यक्ति बड़े उत्साही, परिश्रमी, खुले तौर से अपने विचार व्यक्त करने वाले, मिजाज के शक्की, कुछ अहंकारी व कभी-कभी भयक्रांत हो जाने वाले, पुण्य कर्मों में सदैव तत्पर, ईश्वर के प्रति असीम आस्था और अपने आश्रितों से कार्य लेने वाले होते हैं, मकर लग्न के व्यक्ति प्रत्येक कार्य बड़ी सावधानी तथा विचार कर करते है, अपने मित्र मंडली में प्रमुख बने रहने की इच्छा रखने वाले व अपनी ख्याति हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं, मकर लग्न वाले पुरुष प्रायः स्त्री वर्ग से दुःखी ही रहते हैं तथा प्रायः दुःख भोगते हैं और किसी-किसी अवसर में दानशील भी होते हैं।

 

मकर लग्न की व्यक्ति यदि महिला हैं तो उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त धार्मिक, सत्य प्रिया, विचारशीला, मितव्ययी, सुविख्यात, शत्रु रहिता तथा बहु पुत्रों वाली होती है, मकर लग्न वाले व्यक्तियों को चर्म रोग प्रायः दुःखी करता है तथा ठंडे पदार्थों के सेवन को सीमित मात्रा में करना चाहिए और अपने भोजन आदि व व्यायाम का सदैव ध्यान रखना चाहिए, मकर लग्न वालों के लिए शुक्र और बुध उत्तम फल देने वाले ग्रह होते हैं इनमे भी शुक्र विशेष शुभफलदाई होता है तथा राजयोगकारक ग्रह होने के कारण से राज योग तुल्य सुख प्रदान करता है, शुक्र और बुध का कुंडली में संबंध राजयोग समान फल देता है, बृहस्पति और चंद्रमा शुभ फल नही देते यह दोनों मारकेश भी होते हैं, शनि मारक ग्रह होकर भी मृत्यु नही देता, सूर्य भी मारक नही होता तथा सूर्य के साधारण फल मिलते हैं, यदि मकर लग्न वालों की कुंडली के लग्न में मंगल व सप्तम में चंद्र हो तो यह राजयोग होता है जिससे व्यक्ति अनेक प्रकार के सुखों को भोगता है परंतु यदि अष्टम भाव में बुध व लग्न में गुरु हो और उस पर शुक्र की दृष्टि न हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य तो अच्छा रहता है किंतु व्यक्ति स्वम् दरिद्र होता है, मकर का नवमांश रहने से व्यक्ति में प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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नव ग्रहों की प्रसन्नता हेतु नहाने पूर्व करें यह उपाय

नव ग्रहों की प्रसन्नता हेतु नहाने पूर्व करें यह उपाय

 

नव ग्रह की प्रसन्नता हेतु नहाने के पूर्व करें यह उपाय
नव ग्रह की प्रसन्नता हेतु नहाने के पूर्व करें यह उपाय

 

हमारे जीवन में नव ग्रहों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है सूर्यादि नव ग्रहों की शुभ स्थिति से व्यक्ति को अनेक प्रकार के सुख व वैभव की प्राप्ति होती है हमारे महर्षियों ने नव ग्रहों को प्रसन्न करने हेतु अनेक उपाय बताए हैं आज मैं उन्ही में से प्रत्येक ग्रहों को प्रसन्न करने के खास उपाय बता रहा हूँ जिन्हें आपको नहाने के पूर्व करना होता है तो चलिए जानते हैं उन उपायों के बारे में जिनसे हम नव ग्रहों को प्रसन्न कर सकते हैं:-

 

१. सूर्य को प्रसन्न करने हेतु पानी में लाल चंदन, मुलेठी, इलायची, केसर या गुलाब के फूल डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से सूर्य के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

२. चंद्रमा को प्रसन्न करने हेतु नहाने के पानी में श्वेत चंदन, श्वेत पुष्प, कपूर या इत्र आदि डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से व्यक्ति का मन स्थिर रहता है तथा चंद्रमा के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

३. मंगल को प्रसन्न करने हेतु लाल चंदन, हींग या गुलाब की पंखुड़ियाँ डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से मंगल के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

४. बुध को प्रसन्न करने हेतु जल में जायफल, चंदन, गोरोचन, दूर्वा घास या अक्षत डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से बुध के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।

 

५. गुरु को प्रसन्न करने हेतु जल में हल्दी, केसर, पीला चंदन या पीले पुष्प डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से गुरु के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

६. शुक्र को प्रसन्न करने के लिए जल में कच्चा दूध, इलायची, श्वेत चंदन या श्वेत पुष्प डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से शुक्र के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

७. शनि को प्रसन्न करने हेतु जल में काला तिल, सौंफ या सरसों तेल की कुछ बूंदे डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से शनि के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

८. राहु को प्रसन्न करने हेतु जल में दूर्वा घास, कस्तूरी, लोबान या गज दंत आदि डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से राहु के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

९. केतु को प्रसन्न करने हेतु जल में लाल चंदन, सरसों के दाने या कुशा डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से केतु के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

जय श्री राम।

 

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धनु लग्न और आप: जानिए, धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व

धनु लग्न और आप: जानिए, धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व
धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

धनु लग्न वाले व्यक्तियों का गला लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति सादा और स्पष्ट विचार वाले होते हैं साथ ही न्याय और सत्य के लिए खूब परिश्रम करते हैं, धनु लग्न वाले व्यक्ति निष्काम कर्म करते हैं तथा किसी विषय को बहुत आसानी से और बहुत जल्दी समझ जाते हैं, ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान तथा कई भाषाओं को जानने वाले होते हैं और अपनी मेघा तथा गुण द्वारा शीघ्र ही उन्नति करते हैं, ऐसे व्यक्ति उदार प्रकृति के होते हैं तथा ज्ञान के विषयों में उनकी बड़ी रुचि रहती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति नित्य नया ज्ञान पाने को ललाहित रहते हैं और ऐसे व्यक्ति बिना किसी प्रकार के आडंबर तथा दिखलावटी बातों के शांतिमय जीवन व्यतीत करना पसंद करते हैं, लोगों की सेवा में ऐसे व्यक्ति अपना जीवन समर्पित किए रहते हैं सिर्फ इतना ही नही जरूरत पड़ने पर ऐसे व्यक्ति दूसरे के लिए अपने समस्त सुखों का भी त्याग कर देते हैं, धनु लग्न वाले व्यक्ति अपने नौकरों व आश्रितों पर विशेष दया भाव रखते है, धनु लग्न वाले व्यक्ति सत्यवादी, भाग्यवान, सुंदर, विद्वान, ज्ञानी, नवीन ज्ञान सीखने को तत्पर, भ्रमित, देव व ब्राह्मण भक्त, सत्यवादी, कटु वचन बोलने में भी न झिकझिकाने वाले, बुद्धिमानों में बड़े पक्षपाती, बुद्धिमान, योग्य, अपने कुल वंश तथा जाति में ख्याति प्राप्त करने वाले तथा व्यंग वचन बोलने वाले होते हैं।

 

धनु लग्न वाले व्यक्ति बड़े-बड़े अधिकारियों व बड़े व्यक्तियों से मित्रता रखते हैं, यदि किसी महिला का धनु लग्न हो तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त दयालुता में अभिरुचि, करुणामय चित्त वाली, उदार व हिर्दय से अत्यंत कोमल आदि गुणों से युक्त होती हैं, धनु लग्न वाले व्यक्तियों को कार्य के बीच-बीच में थोड़ा विश्राम अवश्य लेना चाहिए, नित्य व्यायाम से इन्हें सर्वदा लाभ होता है तथा यह स्वस्थ रहते हैं, धनु लग्न वाले व्यक्तियों को रुधिर विकार के अतिरिक्त दुर्घटना, शरीर पटलर चोट लगने व घोड़ों से विशेष रूप से बचकर रहना चाहिए, धनु लग्न वालों के लिए सूर्य और मंगल बहुत ही शुभ फल देने वाले ग्रह होते हैं, सूर्य और बुध का परस्पर संबंध बनने से राजयोग तुल्य सुख मिलता है, शुक्र अनिष्टकारी ग्रह तो बृहस्पति बेहद शुभफलदाई ग्रह होता है किंतु कभी-कभी बृहस्पति बुरा फल भी देता है, यदि शनि कुंडली के एकादश भाव में हो तो अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं, धनु लग्न वालों को चंद्रमा अष्टमेश होकर भी शुभ फल देता है कारण चंद्रमा इस कुंडली के लग्नेश बृहस्पति का मित्र है और चंद्रमा को अष्टमेश होने का दोष नही लगता है किंतु मेरे (जोतिर्विद पूषार्क जेतली) के अनुभव के अनुसार धनु लग्न वालों के लिए चंद्रमा साधारण फल अर्थात कभी अच्छा तो कभी बुरा फल देता है विशेषतः यदि चंद्रमा द्वादश भाव में स्थित हो और उसको शुभ ग्रह न देखते हों तो इस स्थिति में चंद्रमा अत्यंत अनिष्टकारी होकर अपनी दशा में मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट अवश्य ही देता है और यदि चंद्रमा की दशा जीवनकाल में न पड़ती हो तो कुंडली में जो क्रूर ग्रह अत्यधिक बली होगा उसकी या बुध की दशा में चंद्र की अंतर्दशा आने पर मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट होता है, सिंह का नवमांश होने और व्यक्ति में प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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वृश्चिक लग्न और आप: जानिए, वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व

वृश्चिक लग्न और आप: जानिए, वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व
वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृश्चिक लग्न काल पुरुष के अष्टम भाव अर्थात मृत्यु व गूढ़ रहस्यों का भाव की राशि है जो कि मोक्ष के त्रिकोण की राशि है अर्थात वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति ज्ञानी, विद्वान, अनेक शास्त्रों को जानने वाले, देव, गुरु व पिता भक्त, क्लेश सहने वाले, मृत्यु से भी परे वाली सोच रखने वाली अर्थात कठिन से कठिन या असंभव भरी किसी निराशाजनक स्थिति में भी पूर्ण क्षमता के साथ अपनी युक्ति के बल पर विजय प्राप्त करने वाले होते हैं, इनका हिर्दय निर्मल व धार्मिक होता है, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों का रूप सुंदर और जाँघे व पैर गोल आकृति के होते हैं, इनके दोनो हाथ व पैर के अंगूठों में भी किसी प्रकार का अंतर देखा जा सकता है, इनके कलाई, छाती, लिङ्ग में तिल आदि चिन्ह व उदर या अन्य किसी भाग पर मस्से का चिन्ह रहता है, वृश्चिक लग्न का स्वामी सेनापति मंगल होता है अतः वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों का शरीर पुष्ट होता है, ऐसे व्यक्ति अत्यधिक सतर्क रहते हैं किंतु झगड़ालू होते हैं, विवाद में वह पक्ष-विपक्ष की बात तथा अपनी हानि का भी विचार नही कर दृढ़ता तथा संलग्नता पूर्वक झगड़े में लग जाते हैं, ऐसे व्यक्तियों को क्रोध अति शीघ्र आता है और झगड़े के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति काने को काना कह कर पुकारने में भी तनिक नही हिचकिचाते क्योंकि वृश्चिक लग्न के व्यक्ति सच्ची बात को स्पष्ट रूप से कहने वाले होते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों को बदला चुकाए बिना रहना मुश्किल होता है, ऐसे व्यक्ति अपने उचित अथवा अनुचित ध्येय के लिए अथक परिश्रम करते हैं और गुरुजनों से भी हठ कर बैठते हैं, वृश्चिक लग्न के व्यक्ति कभी उच्च पद पर नियुक्त होने से अथवा अन्य किसी कारणों से प्रायः उच्च पद के व्यक्ति होते हैं और इनका बर्ताव व व्यवहार भयावह होता है।

 

वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति अपने शत्रुओं पर भी जल्दी प्रहार नही करते किंतु जब यह प्रहार करते हैं तो बड़े से बड़े शत्रु भी इनके आगे टिक नही पाते क्योंकि ऐसे व्यक्ति पूर्ण रणनीति के साथ आक्रमण करते हैं जिस प्रकार से बिच्छु के डंक से बचना लगभग असंभव होता है ठीक उसी प्रकार वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों के आक्रमण से बचना मुश्किल होता है, वृश्चिक लग्न के व्यक्तियों का दिल साफ होता है तथा अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण तरह से जीवन जीना इन्हें पसंद होता है, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों के माता-पिता के मध्य प्रायः विवाद होते ही रहते हैं तथा इन्हें भी कई प्रकार के क्लेश सहन करने पड़ते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति अत्यंत रूखे और जोशीले होते हैं, इनमे सहन शक्ति काफी अधिक होती है तथा ऐसे व्यक्ति अपने क्रोध को अंत समय तक संभालने का पूर्ण प्रयास करते हैं किंतु परिस्थिति वश कई बार इनका क्रोध ज्वालामुखी रूप में बाहर आता है और अगले ही पल वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति अपने क्रोध को शांत कर अपनी गलतियों के प्राश्चित हेतु लग जाते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति स्त्री प्रिय होते है साथ ही यदि कोई महिला वृश्चिक लग्न हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त सुंदर, आज्ञाकारी, भाग्यवती, सुशीला, सच्ची, अनंदप्रिया और अच्छे चाल-चलन वाली होती है, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः उदर संबंधित समस्याएं बनी रहती है तथा इन्हें कंठ व फेफड़ों को सुरक्षित रखना चाहिए, मल-मूत्रादि की साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए, छूत वाली बीमारी वाले लोगों से भी दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।

 

वृश्चिक लग्न वालों के लिए सूर्य और चंद्र शुभ फल देने वाले ग्रह होते हैं इन दोनों का किसी भी प्रकार से संबंध बनना राजयोग तुल्य सुख देता है, बुध व बृहस्पति का योग धन वृद्धि व ख्याति के योग बनाती है, बृहस्पति भी शुभ फल देने वाला ग्रह होता है, बुध, शुक्र व शनि शुभ फल नही देते हैं, सिंह का नवमांश रहने से व्यक्ति के प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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तुला लग्न और आप: जानिए, तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

तुला लग्न और आप: जानिए, तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व
तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

तुला लग्न में जन्मे व्यक्ति की आकृति कुछ लंबी व मुख सुंदर होता है तथा इनका कद भी सामान्यतः लंबा होता है, नेत्र ललित व दाँत विरल होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः सामान्य काठी अर्थात न बहुत मोटे और न बहुत दुबले होते हैं तथा यदि शुक्र या बृहस्पति लग्न में स्थित हों या लग्न को देखते हैं तो शरीर स्थूल होता है, विचार में तुला लग्न वाले व्यक्ति अव्यवस्थित चित्त तथा अनिश्चित विचार वाले होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों का चरित्र अव्यवस्थित होता है और ऐसे व्यक्ति खर्चीले स्वभाव के होते हैं, इनकी उदारता अत्यंत प्रशंसनीय होती है, तुला लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, सदा दूसरों की सहायता में तत्पर, मित्र बनाने में कुशल, चतुर, धार्मिक, मेधावी, सफाई में रहने वाले तथा घर-द्वार को साफ रखनेवक शौकीन, न्याय प्रिय, सत्यवादी, शांत और प्रफुल्लित चित्त, प्रत्येक कार्य को न्यायपूर्ण तरीके से करने वाले होते हैं किंतु इनकी क्रोधाग्नि बहुत जल्दी प्रज्वलित हो जाती है परंतु उतनी ही शीघ्रता से इनकी क्रोधाग्नि शांत भी हो जाती है, इनके मित्र और संरक्षक बहुत उच्च श्रेणी के प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति उच्चाधिकारी द्वारा सम्माननीय, विद्वान परंतु भीरु अर्थात डरपोक होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति वाणिज्य, न्यायकर्ता तथा पंचायती आदि प्रिय होते हैं और प्रायः इनके दो नाम होते हैं।

 

तुला लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त अहंकारी, क्रोधी, लालची, बदनाम और कृपण आदि होना ग्रंथकारों ने कहा है किंतु मेरे अनुभव के आधार पर ऐसी महिलाएं सुंदर, रूपवान, सुंदर नेत्र वाली, कमर पतली किंतु पैर मोटा और विलक्षण आकर्षक शक्ति वाली होती हैं यदि इनके चतुर्थ भाव में शुक्र हो तो कार्यस्थल पर इनके संबंध बनने की संभावना रहती है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों को कमर, गुर्दा, मूत्रस्थली आदि में समस्या रहती है अतः इन सभी स्थानों को शीत से बचाना इनके लिए लाभप्रद रहता है, शुद्ध जल व स्वच्छ वायु से इन्हें लाभ मिलता है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शनि अत्यंत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होते हैं जो इन्हें भूमि, वाहन, वायुयान यात्रा व संतान का उत्तम सुख प्रदान करते हैं, बुध भी तुला लग्न वालों के लिए उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है, यदि कुंडली में बुध और चंद्र या शनि और बुध का संबंध बनता हो तो व्यक्ति को राजयोग तुल्य सुख प्राप्त होता है, मंगल, सूर्य व बृहस्पति इनके लिए अशुभ ग्रह होते हैं किंतु यदि मंगल का शनि या बुध से संबंध बनता हो तो व्यक्ति के वैभव में वृद्धि होती है, सूर्य और बृहस्पति मृत्यु प्रदान करने वाले ग्रह अर्थात प्रवल मारकेश होते हैं, मंगल तुला लग्न वालों को मारकेश होकर भी नही मारता, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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कन्या लग्न और आप: जानिए, कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

कन्या लग्न और आप: जानिए, कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व
कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कन्या लग्न में जन्मे व्यक्तियों के मुख की कांति से स्त्रीवर्गीय स्वभाव झलकता है इनके कंधे व बाहु थोड़े छोटे होते हैं तथा किस कार्य को कब और किस प्रकार से करना चाहिए यह कन्या लग्न के व्यक्ति विशेष रूप से जानते हैं, कन्या लग्न में जन्मे व्यक्ति सत्यवादी तथा न्याय प्रिय, दयालु, धैर्यवान और स्नेही होते हैं तथा बुद्धि व युक्ति लगाने में कुशल होते हैं किंतु व्यवहार में किसी दूसरे के सुख-दुःख की उपेक्षा नही करते हैं साथ ही दूसरों से कम लेने में भी नही हिचकिचाते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति किसी कार्य को करने में बड़े सावधान और चौकस रहते हैं तथा बिना विचारे कुछ भी नही करते साथ ही कन्या लग्न वाले व्यक्ति बातों को गुप्त रखने वाले और अपने भाव को दूसरों पर प्रकट नही करने वाले तथा वाणिज्य से जुड़े व्यवसाय में बड़े ही निपुण होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति मितव्ययी, सहनशील, दयालु, किसी भी कार्य को करने में दक्ष, धीर और साहसी होते हैं तथा अच्छे लोगों की सहायता व संरक्षता प्राप्त करने वाले होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति अन्य लोगों के पदार्थों और धन को भोगने वाले होते हैं परंतु ऐसे व्यक्ति कभी-कभी स्त्री विलास रसिक और इन्द्रिय लोलुप और विद्वान लोगों से प्रेम करने वाले होते हैं।

 

कन्या लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हो तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त बुद्धिमती, सुशीला, मिलनसार, उदार, धार्मिक और दानशीला होती हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मानसिक अवस्थाओं पर पूर्ण ध्यान रखना चाहिए, उदर जनित रोग से यह प्रायः पीड़ित और दुःखी रहते हैं अतएव उत्तम भोजन करना इनके लिए श्रेयस्कर होता है, सांसारिक बातों में उपद्रव होने से भी इनके स्वास्थ्य पर प्रायः बुरा परिणाम होता है, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शुक्र और बुध शुभफलदाई होते हैं और इनमें भी शुक्र बेहद शुभ होता है तथा बुध व शुक्र के कुंडली में संबंध बनने पर उत्तम राजयोग के समान फल की प्राप्ति होती है, शनि थोड़े अंशों का हो तो शुभ होता है, यदि केतु व चंद्र की लगन में युति हो तो शुभफलदाई होती है परंतु मारक स्थितियाँ भी उत्पन्न करता है, सूर्य मृत्यु तुल्य कष्ट तो देता है किंतु मृत्यु नही देता, बृहस्पति और चंद्र इनकी कुंडली में शुभ फल नही देते हैं, मंगल, चंद्र और बृहस्पति सहायक (कारक) ग्रह होते हैं, शुक्र भी कभी-कभी मार्केशव्हो जाता है, धनु लग्न का यदि नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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