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तुला लग्न और आप: जानिए, तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व
तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व
तुला लग्न में जन्मे व्यक्ति की आकृति कुछ लंबी व मुख सुंदर होता है तथा इनका कद भी सामान्यतः लंबा होता है, नेत्र ललित व दाँत विरल होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः सामान्य काठी अर्थात न बहुत मोटे और न बहुत दुबले होते हैं तथा यदि शुक्र या बृहस्पति लग्न में स्थित हों या लग्न को देखते हैं तो शरीर स्थूल होता है, विचार में तुला लग्न वाले व्यक्ति अव्यवस्थित चित्त तथा अनिश्चित विचार वाले होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों का चरित्र अव्यवस्थित होता है और ऐसे व्यक्ति खर्चीले स्वभाव के होते हैं, इनकी उदारता अत्यंत प्रशंसनीय होती है, तुला लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, सदा दूसरों की सहायता में तत्पर, मित्र बनाने में कुशल, चतुर, धार्मिक, मेधावी, सफाई में रहने वाले तथा घर-द्वार को साफ रखनेवक शौकीन, न्याय प्रिय, सत्यवादी, शांत और प्रफुल्लित चित्त, प्रत्येक कार्य को न्यायपूर्ण तरीके से करने वाले होते हैं किंतु इनकी क्रोधाग्नि बहुत जल्दी प्रज्वलित हो जाती है परंतु उतनी ही शीघ्रता से इनकी क्रोधाग्नि शांत भी हो जाती है, इनके मित्र और संरक्षक बहुत उच्च श्रेणी के प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति उच्चाधिकारी द्वारा सम्माननीय, विद्वान परंतु भीरु अर्थात डरपोक होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति वाणिज्य, न्यायकर्ता तथा पंचायती आदि प्रिय होते हैं और प्रायः इनके दो नाम होते हैं।
तुला लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त अहंकारी, क्रोधी, लालची, बदनाम और कृपण आदि होना ग्रंथकारों ने कहा है किंतु मेरे अनुभव के आधार पर ऐसी महिलाएं सुंदर, रूपवान, सुंदर नेत्र वाली, कमर पतली किंतु पैर मोटा और विलक्षण आकर्षक शक्ति वाली होती हैं यदि इनके चतुर्थ भाव में शुक्र हो तो कार्यस्थल पर इनके संबंध बनने की संभावना रहती है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों को कमर, गुर्दा, मूत्रस्थली आदि में समस्या रहती है अतः इन सभी स्थानों को शीत से बचाना इनके लिए लाभप्रद रहता है, शुद्ध जल व स्वच्छ वायु से इन्हें लाभ मिलता है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शनि अत्यंत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होते हैं जो इन्हें भूमि, वाहन, वायुयान यात्रा व संतान का उत्तम सुख प्रदान करते हैं, बुध भी तुला लग्न वालों के लिए उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है, यदि कुंडली में बुध और चंद्र या शनि और बुध का संबंध बनता हो तो व्यक्ति को राजयोग तुल्य सुख प्राप्त होता है, मंगल, सूर्य व बृहस्पति इनके लिए अशुभ ग्रह होते हैं किंतु यदि मंगल का शनि या बुध से संबंध बनता हो तो व्यक्ति के वैभव में वृद्धि होती है, सूर्य और बृहस्पति मृत्यु प्रदान करने वाले ग्रह अर्थात प्रवल मारकेश होते हैं, मंगल तुला लग्न वालों को मारकेश होकर भी नही मारता, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।
कन्या लग्न और आप: जानिए, कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व
कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व
कन्या लग्न में जन्मे व्यक्तियों के मुख की कांति से स्त्रीवर्गीय स्वभाव झलकता है इनके कंधे व बाहु थोड़े छोटे होते हैं तथा किस कार्य को कब और किस प्रकार से करना चाहिए यह कन्या लग्न के व्यक्ति विशेष रूप से जानते हैं, कन्या लग्न में जन्मे व्यक्ति सत्यवादी तथा न्याय प्रिय, दयालु, धैर्यवान और स्नेही होते हैं तथा बुद्धि व युक्ति लगाने में कुशल होते हैं किंतु व्यवहार में किसी दूसरे के सुख-दुःख की उपेक्षा नही करते हैं साथ ही दूसरों से कम लेने में भी नही हिचकिचाते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति किसी कार्य को करने में बड़े सावधान और चौकस रहते हैं तथा बिना विचारे कुछ भी नही करते साथ ही कन्या लग्न वाले व्यक्ति बातों को गुप्त रखने वाले और अपने भाव को दूसरों पर प्रकट नही करने वाले तथा वाणिज्य से जुड़े व्यवसाय में बड़े ही निपुण होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति मितव्ययी, सहनशील, दयालु, किसी भी कार्य को करने में दक्ष, धीर और साहसी होते हैं तथा अच्छे लोगों की सहायता व संरक्षता प्राप्त करने वाले होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति अन्य लोगों के पदार्थों और धन को भोगने वाले होते हैं परंतु ऐसे व्यक्ति कभी-कभी स्त्री विलास रसिक और इन्द्रिय लोलुप और विद्वान लोगों से प्रेम करने वाले होते हैं।
कन्या लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हो तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त बुद्धिमती, सुशीला, मिलनसार, उदार, धार्मिक और दानशीला होती हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मानसिक अवस्थाओं पर पूर्ण ध्यान रखना चाहिए, उदर जनित रोग से यह प्रायः पीड़ित और दुःखी रहते हैं अतएव उत्तम भोजन करना इनके लिए श्रेयस्कर होता है, सांसारिक बातों में उपद्रव होने से भी इनके स्वास्थ्य पर प्रायः बुरा परिणाम होता है, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शुक्र और बुध शुभफलदाई होते हैं और इनमें भी शुक्र बेहद शुभ होता है तथा बुध व शुक्र के कुंडली में संबंध बनने पर उत्तम राजयोग के समान फल की प्राप्ति होती है, शनि थोड़े अंशों का हो तो शुभ होता है, यदि केतु व चंद्र की लगन में युति हो तो शुभफलदाई होती है परंतु मारक स्थितियाँ भी उत्पन्न करता है, सूर्य मृत्यु तुल्य कष्ट तो देता है किंतु मृत्यु नही देता, बृहस्पति और चंद्र इनकी कुंडली में शुभ फल नही देते हैं, मंगल, चंद्र और बृहस्पति सहायक (कारक) ग्रह होते हैं, शुक्र भी कभी-कभी मार्केशव्हो जाता है, धनु लग्न का यदि नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।
सिंह लग्न और आप: जानिए, सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व
सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व
सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के मुख की आकृति चौड़ी और हड्डी पुष्ट होती है, इनकी आँखे सुंदर और भाव प्रकट करने वाली और आकर्षक होती हैं ऐसे व्यक्ति नेत्रों के इशारे से भी अपनी बातें बड़ी सरलता से प्रकट कर लेते हैं तथा इनका जीवन आनंदमयी रहता है, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों पर शत्रुओं कभी हावी नही हो पाते तथा उनको कोई हानि नही पहुँचा पाते, सिंह लग्न वाले व्यक्ति निष्कपट और मनसा, स्पष्टवादी व पवित्रता का पालन करने वाले होते हैं और नीच कर्म से घृणा करते हैं तथा धैर्यवान और उदार होते हैं किंतु किसी के अधीन रहकर कार्य नही कर सकते इन्हें स्वतंत्रता प्रिय होती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति जिस कार्य को करते हैं उसे पूरी ईमानदारी एयर निपुणता के साथ करते हैं साथ ही अपनी मर्यादा के पालन में सर्वदा तत्पर रहते हैं और मित्रता में अटल तथा विश्वास पात्र होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति केवल दयालु ही नही होते अपितु सत्य की रक्षा के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं तथा दुःख के समय में अपनी सूझ-बूझ को काम में लाकर दुःख का निवारण करने में भी समर्थ होते हैं और शत्रुओं से झगड़ा जल्द नही करते अपितु धैर्य व युक्ति से उनसे मुक्ति पाने हेतु प्रयास भी करते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मेहनत का पूर्ण फल नही मिल पाता है किंतु समाज में अपने गुणों व व्यवहार के कारण से मान-सम्मान की प्राप्ति इन्हें अवश्य ही मिलती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति अपनी आज्ञा तथा रुचि के अनुसार अन्य मनुष्यों को चलाने में कुशल होते हैं तथा एक अच्छे नेता या राजनेता बनकर देश व समाज का कल्याण करने में भी सक्षम होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति या तो स्वम् का व्यवसाय करते हैं या किसी उच्च पद पर आसीन रहकर सेवा करते हैं, जीवन के उत्तरार्ध में इन्हें बड़ी सफलता प्राप्त होती है।
सिंह लग्न की यदि कोई महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त दुबली, पतली, कफ प्रकृति से पीड़ित, झगड़ालू, बचपन में शरीर के गुप्त भागों में वाहनादि द्वारा चोट से ग्रसित तथा तर्क में कुशल होती हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के दाम्पत्य जीवन में प्रायः उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को गर्म पदार्थों व मादक पदार्थों का सेवन कभी नही करना चाहिए, उत्तेजना और जल्दबाजी में कार्य करना इनके लिए कष्टप्रद रहता है, प्रायः इन्हें ज्वर आदि की समस्या भी रहती है जिसका सही समय पर औषधि सेवन कर इलाज करना अत्यंत आवश्यक होता है अन्यथा ज्वर की पीड़ा अति कष्टदाई रहती है, सिंह लग्न वालों के लिए मंगल विशेष शुभ ग्रह व राजयोगकारक ग्रह होते हैं, गुरु और मंगल का यदि कुंडली में संबंध बनें तो यह राजयोग समान फल देने वाला होता है, बृहस्पति और शुक्र का संबंध भी इनके लिए शुभ होता है किंतु अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति नही हो पाती है, चन्द्रमा का साधारण फल इन्हें मिलता है जिसके कारण इनके खर्चे अनियंत्रित रहते हैं और इनका मन जल्दी स्थिर नही हो पाता इनके मस्तिष्क में नित्य नए विचार आते रहते हैं, सिंह लग्न वालों के लिए शनि कष्टप्रद और बुध मारकेश होते हैं तथा सूर्य व बुध का संबंध बनाने से कार्य कुशल होते हैं, मंगल और शनि का द्वादश भाव में संबंध बने तो शनि की दशा के अंदर मंगल की अंतर्दशा आने पर इनके वैभव की उन्नति होती है, राहु व केतु यदि मारक भाव में बैठे हों तो अनिष्टकारी अर्थात मृत्युदाई होते हैं, बृहस्पति और शुक्र का संबंध इनके लिए राजयोग नही होता है, यदि सिंह का नवमांश हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।
कर्क लग्न में जन्मे व्यक्ति न अधिक लंबे और न अधिक नाटे अर्थात मझोला कद वाले होते हैं इनकी गर्दन मोटी, मुख गोल और शरीर स्थूल अर्थात सामान्यतः मोटा होता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, आनंद और विलास प्रिय, सुंदर वस्तुओं को चाहने वाले, साफ-सफाई पसंद करने वाले, सत्य प्रिय, उत्तम भोजन की चाह रखने वाले, आभूषण आदि में रुचि रखने वाले, मधुर वाणी से सबको मोहित करने वाले, भ्रमण शील, प्रभावशाली, यशस्वी कर्तव्य परायण और श्रेष्ठ जन अर्थात गुरु तथा धार्मिक पुरुषों के प्रति भक्ति भाव रखने वाले होते हैं, कर्क लग्न वालों प्रायः आडंबर युक्त अर्थात ठाट-बाट वाला रहन-सहन पसंद होता है और यह धार्मिक होते हुए भी कपटी होने में रुचि रखते हैं तथा सिद्धांत रहित होते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में अस्थिरता बनी ही रहती है कहने का आशय यह है कि कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में उतार-चढ़ाव बना ही रहता है तथा यह जितनी तीव्रता से शिखर पर पहुँचते हैं उतनी ही तीव्रता से इनका पतन भी हो जाता है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों का मन अस्थिर रहता है तथा इन्हें सर्दी-जुकाम, कफ, ज्वर, मलेरिया, उदर संबंधित विकार अर्थात पाकस्थली के बिगड़ने से समस्या, अपच आदि की समस्या प्रायः बनी रहती है तथा कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर समस्या पर औषधि तुरंत लेना पसंद करते हैं जिसकी अधिक मात्रा से भी इनके उदर के किडनी में समस्या संभव होती है अतः कर्क लग्न वालों को अत्यधिक औषधि की अपेक्षा घरेलू उपचार पर अधिक ध्यान देना चाहिए, कर्क लग्न वाकई व्यक्ति अपने जीवनसाथी व संतानों से अत्यधिक प्रेम करते हैं तथा कभी-कभी इनका प्रेम इतना अधिक होने लगता है कि इनकी संतान व जीवनसाथी को उलझन अनुभव होती है जिस कारण से इनके घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने लगती है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो वह प्रत्येक बात पर टोक लगाने वाली होती है किंतु ऐसी महिला सुंदरी, शीलवती, विश्वसनीय, शांतिमयी, प्रभावशालिनी, अपने स्वजनों से अत्यधिक प्रेम करने वाली, सुखमयी और बहु संतान वाली होती हैं।
कर्क लग्न वाले व्यक्ति स्त्री सहवास में समर्थ तथा मिष्ठान प्रिय होते हैं और इनमें कामुकता अधिक रहती है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के मन में अपने सगे संबंधियों के प्रति सद्द्भाव रहता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति जिन्हें चाहते हैं उन्ही की बातों को तवज्जो देते हैं तथा जिसकी बात उनको नही पसंद आती है उसकी बात का अनुसरण नही करते हैं और उसके परामर्श को घृणा की दृष्टि से देखते है तथा उन व्यक्तियों पर अविश्वास रखते हैं केवल इतना ही नही अपितु ऐसे व्यक्तियों की संगति का भी परित्याग कर देते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर विषय की उपयोगिता और मोल का अनुमान उचित रीति से करने में निपुण होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः (कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुसार) प्रवासी रहते हैं परंतु गृह में रहने के इच्छुक होते हैं।
कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के लिए मंगल सबसे उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है जो कि इस कुंडली का राजयोगकारक ग्रह भी होता है और यदि व्यक्ति की कुंडली में मंगल पंचम, नवम या दशम भाव में हो तो यह राजयोग के समान फल देने वाली स्थितियों को निर्मित करता है, बृहस्पति भी कर्क लग्न वालों के लिए शुभ होता है तथा बृहस्पति यदि लग्न या नवम में हो तो बहुत शुभ देता है साथ ही यदि कुंडली में मंगल व गुरु में संबंध बने तो यह स्थिति व्यक्ति को उत्तम राजयोग देती है, शुक्र, शनि व बुध कर्क लग्न वालों के लिए बेहद अशुभ ग्रह होते हैं, सूर्य मारक भाव का स्वामी अर्थात मारकेश होकर भी मृत्यु नही देता है, चंद्रमा लग्नेश होने के नाते शुभ होता है तथा यदि लग्न में गुरु व चंद्र स्थित हों तो व्यक्ति अत्यंत धनी व अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करने वाला होता है, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति प्राकृतिक स्वभाव को पूर्ण रूप से दिखाता है।
मिथुन लग्न और आप: जानिए, मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व
मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व
मिथुन लग्न के व्यक्तियों के हाथ-पैर लंबे व दुबले और नेत्र सुंदर होते हैं जिनके चेहरे से तीक्ष्णता और प्रसन्नता व्यक्त होती रहती है, ऐसे व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि वाले, उत्तम वक्ता, अत्यंत मेहनती, वार्तालाप में कुशल, प्रत्येक बात की छान-बीन करने वाले, सुगमता से समझने वाले, बातों का मर्म व तत्व समझने वाले, कला व कौशल प्रेमी, बहस करने में निपुण व अपने तर्क रखने में कुशल, किसी कार्य में ज्यादा समय तक स्थिर न रहने वाले, कठिन से कठिन विषयों की व्याख्या सुगमता पूर्वक और स्पष्ट रूप से करने वाले, योग्यतापूर्ण लेख लिखने वाले, वाद-विवाद में निपुण, बुद्धिमान, चतुर कार्य कुशल, क्रोधी, कला तथा विज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले, असंयमी तथा अधीर होने के कारण अस्वस्थ रहने वाले, कमजोर मनोबल वाले, संबंधियों से सहायता प्राप्त करने वाले व कई भाषाओं के जानकार होते हैं, बात-चीत में मुहावरे व कहावत आदि का प्रयोग करने वाले, कविताएं एवं शायरी करने वाले, गम्भीरता पूर्वक विचार करने वाले, तर्क में चतुर, दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने वाले और नृत्य व संगीत में आनंद लेने वाले होते हैं।
मिथुन लग्न वाले व्यक्ति धनी, दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने वाले, परिवर्तन पसंद करने वाले, अच्छे व्यापारी, अच्छे ज्योतिषी, अपनी किस्मत स्वम् लिखने वाले, मित्र व संबंधियों की सहायता से भाग्योदय प्राप्त करने वाले, आत्मविश्वास की कमी के कारण चिंताग्रस्त रहने वाले, रोगपीडित, धन लोभी, लड़ाकू, स्त्री सुख भोगी, गुरुजनों के आज्ञापालक, ब्राह्मणों के सेवक, चुगलखोर, परदेश अथवा विदेश से धनार्जन करने वाले, कुटिल स्त्रियों के कारण या मित्रों पर धन व्यय करने वाले, सज्जनता व दुर्जनता दोनो का समन्वय रखने वाले, दांव-पेंच में निपुण, विरोधियों को षड्यंत्र से शांत रखने वाले, सामने से वार न करने वाले, सौंदर्य उपासक, विपरीत लिंग के प्रति विशेष आकर्षण रखने वाले, हमेशा कार्य को 2 प्रकार से करने का प्रयास करने वाले होते हैं तथ इनके मन में विचारों की अस्थिरता रहती है, यदि मिथुन लग्न की कन्या हो तो उपरोक्त फल के अतिरिक्त कठोर बात करने वाली, स्वभाव की कड़ी, अतिव्ययी अर्थात खर्चीले स्वभाव वाली और वायु तथा कफ प्रकृति से पीड़ित रहने वाली होती है, मिथुन लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः फेफड़े व स्नायु रोग की संभावना रावल रहती है अतः इनको उत्तेजना देने वाली क्रियाओं से बचना चाहिए साथ ही समयानुसार स्वम् को बदलना, बातों से पलट जाना इनका विशेष गुड़ होता है।
मिथुन लग्न वालों के लिए शुक्र सबसे शुभ ग्रह होता है, चन्द्रमाA, सूर्य व मंगल इनके लिए अशुभ ग्रह रहता है, शुक्र व बुध का संबंध यदि कुंडली में हो तो उत्तम भाग्योदय होता है, शनि व गुरु का संबंध होना अनिष्टकारी रहता है, यदि केतु के दूसरे, सप्तम अथवा द्वादश भाव में चंद्रमा के साथ हो तो केतु की दशा में चंद्र की अंतर्दशा मृत्यु अथवा मृत्यु तुल्य कष्ट अवश्य ही देती है ठीक इसी प्रकार यदि राहु द्वितीय भाव में गुरु के साथ हो तो राहु की दशा में गुरु की अंतर्दशा अनिष्ट करती है किंतु यदि सूर्य और बुध तृतीय भाव में हों तो बुध की दशा में सूर्य की अंतर्दशा शुभ फलदाई होती है, यदि चन्द्रमा द्वितीय स्थान में हो तो शुक्र की दशा में भाग्योन्नति होती है, राहु की दशा में रोग और बन्धनादि का भय रहता है किंतु मृत्यु नही होती है।
वृषभ लग्न और आप: जानिए, वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व
वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व
वृषभ लग्न वाले व्यक्ति तीव्र इच्छा शक्ति वाले, स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले, प्रकृति प्रेमी, प्रेम में विश्वास रखने वाले, विश्वसनीय, गोल मुख, छोटी गर्दन किंतु मोटी और पुष्ट जंघा वाले होते हैं साथ ही इनके चेहरे पर छोटी सी मुस्कान सदैव ही बनी रहती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्ति प्रायः दुबले होते हैं तथा इनके कंधे बलिष्ठ और उन्नत एवं बाहु छोटे एवं गठीले होते हैं, इनके चेहरे से सदैव ही प्रसन्नता का आभास होता है, वृषभ लग्न के व्यक्ति संगीत, मनोहर वस्तु और भ्रमण अर्थात घूमने-फिरने के प्रेमी होते है तथा इनका स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा किंतु शांति प्रिय, अत्यंत कामी, धीर, बड़े से बड़े दुःख में भी धैर्य रखने वाले, दयालु, धर्मानुरागी, कलात्मक दृष्टि वाले तथा कलात्मक वस्तुओं का संग्रह करने वाले और प्रत्येक बात में अपना विचार व्यक्त करने वाले होते हैं, दूसरों के परामर्श पर चलना इन्हें नही रास आता, ऐसे व्यक्ति सदाशय, विद्या विवाद में चतुर, भाग्यवान, चतुराई में निपुण, विद्वान, विभिन्न मंत्रों को जानने वाले, देवता व ब्राह्मण भक्त, भौतिक सुखों का इच्छुक, स्वादिष्ट भोजन करने वाले, अधिकांश खाली बैठे रहने वाले किंतु इनको कोई कार्य मिल जाए तो उसे पूर्ण किए बिना न रुकने वाले, शांत चित्त वाले किंतु क्रोध में तहस-नहस कर देने वाले, शत्रु विजयी, जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं और यदि वृषभ लग्न की स्त्रियां अच्छी पत्नी सिद्ध होती है तथा घर को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम और अनुशासित होती हैं।
वृषभ लग्न के व्यक्ति चित्त के बड़े गंभीर होते हैं तथा दूसरों को अपने विचार ज्ञात नही होने देते हैं साथ ही वृषभ लग्न के व्यक्ति उतावलेपन में कभी कोई कार्य नही करते हैं तथा शांतिमय जीवन को जीने में विश्वास रखते हैं, इनके मित्रों की संख्या काफी अधिक होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों का भाग्य अचानक से होता है तथा इन्हें भूमि, वाहन व वायुयान यात्रा का उत्तम सुख प्राप्त होता है, वृषभ लग्न के व्यक्तियों का बचपन अनेक यातनाओं व पीड़ाओं से युक्त किंतु उत्तरार्ध में सभी समस्याओं व संकटों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति व सुख को प्राप्त करते हैं, वृषभ लग्न के व्यक्ति अपने कष्टों को छिपाने में निपुण तथा गृहस्थी का खर्च चलाने हेतु कोल्हू के बैल की भांति दिन-रात कार्य में जुटे रहते हैं साथ ही यदि किसी महिला का वृषभ लग्न हो तो वह बुद्धिमती, विदुषी, सुशीला, विश्वसनीय और कला कौशल को जानने वाली होती है और अपने पुरुष की आज्ञाकारिणी होकर पुरुष पर अपना अधिकार जताने वाली होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः कंठ, गले, छाती, मुख, उदर आदि की समस्या रहती है तथा उत्तेजक भोजन इनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अतः वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को नित्य व्यायाम व सादे भोजन को करना लाभप्रद रहता है।
वृषभ लग्न वालों के लिए शनि बहुत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होता है तथा यही शनि 36 वर्ष की आयु के आस-पास कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव के साथ या अत्यंत संघर्ष उपरांत बड़ी उन्नति प्रदान करने वाला ग्रह होता है इसी प्रकार सूर्य भी इनके लिए शुभ ग्रह होता है, मंगल, चंद्र और गुरु इनके लिए अशुभ ग्रह अर्थात मारकेश होते हैं, वृषभ लग्न वालों की कुंडली में यदि सूर्य व बुध या शनि व बुध का संबंध हो तो यह राजयोग समान सुख प्रदान करने वाला योग होता है, यदि नवमांश के पंचम भाव में वृषभ राशि हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव विशेष रूप से प्रकट होता है।
मेष लग्न और आप: जानिए, मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व
मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व
मेष लग्न के व्यक्ति पुत्रवान, तेजस्वी, क्रोधी, वीर, कठोर चित्त, सृजनात्मकता स्वभाव अर्थात मन में हमेशा ही कुछ नया करने की चाह रखने वाले, भावुक, झगड़ालू, स्पष्ट वक्ता, साहसी, उद्दमी अर्थात मेहनती, वीर, मेधावी और सतत अर्थात किसी न किसी कार्य में संलग्न रहने वाले होते हैं, बचपन में इन्हें अनेक हानियों का सामना करना पड़ता है तथा मेष लग्न वाले व्यक्ति स्वतंत्रता प्रिय और उदार प्रकृति के होते हैं साथ ही मेष लग्न वाले व्यक्ति दूसरों की जरूरत पड़ने पर सब कुछ भूल कर उसकी सहायता भी पूरे दिल से करते हैं, मेष लग्न के व्यक्ति किसी भी कार्य को संपन्न करने में निर्भय एवं निःसंकोच होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति उच्च पद पर आसीन होते हैं तथा इनमें नेतृत्व करने की अद्भुद क्षमता होती है, मेष लग्न के व्यक्तियों के शरीर के किसी स्थान पर चिन्ह अवश्य होता है।
मेष लग्न वाले व्यक्ति झूठ बोलने में भी संकोच न करने वाले, कम खिल-खिला कर हँसने वाले, अभिमानी, शुभ आचरण वाले, गलत कार्यों से नफरत करने वाले, निष्कपट, महत्वाकांक्षी, बुद्धि व युक्ति लगाने में निपुण, युद्ध कला में कुशल, मुँहफट, सदैव लड़ने-झगड़ने को तैयार, सामने से वार करने वाले होते हैं, शास्त्रकारों का मत है कि यदि किसी महिला का जन्म मेष लग्न में हुआ हो तो ऐसी महिला सच बोलने वाली, स्पष्ट वक्ता, गन्दगी से नफरत करने वाली, कठोर चित्त, बदला लेने को सदैव तत्पर रहने वाली, कभी-कभी कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने वाली, कफ से पीड़ित व अपने स्वजनों से प्रीति रखने वाली होती है।
मेष लग्न में जन्मे व्यक्तियों के लिए सूर्य सबसे अधिक सुखदाई ग्रह है, बृहस्पति भी सुखदाई ग्रह है किंतु सूर्य से कम शुभ होता है, साधारण नियम के अनुसार यदि नवमेश और दशमेश एक हों तो यह राजयोग होता है किंतु मेष लग्न की कुंडली पर यह सूत्र लागू नही होता क्योंकि पराशर ऋषि का मत है कि यदि दशमेश और एकादशेश एक ही ग्रह हों तो राजयोग भंग हो जाता है अतएव मेष लग्न वालों के लिए गुरु व शनि का संबंध अनिष्टकर होता है, मेष लग्न वालों के लिए शनि, बुध और शुक्र अशुभ ग्रह होते है, शनि और बुध प्रायः मारकेश होते हैं, शुक्र द्वितीयेश व सप्तमेश होने से मारक ग्रह बनता है किंतु प्रायः मृत्यु दायक नही होता है, मेष लग्न वालों के लिए यदि चंद्र और बृहस्पति, मंगल और राहु, शुक्र व राहु का यदि संबंध बने तो राजयोग होता है, मेष लग्न वालों के लिए मंगल अष्टमेश होने पर भी बहुत अधिक अशुभ नही होता है, यदि मेष लग्न पहले नवमांश में हो तो व्यक्ति अपने प्राकृतिक स्वभाव को विशेष रूप से प्रकट करता है।
मेष लग्न वाले व्यक्तियों की कुछ अन्य विशेष बातें:-
१. मेष लग्न वाले व्यक्ति की कुंडली में यदि लग्न में ही मंगल स्थित हो तो व्यक्ति अत्यधिक क्रोधी होता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों को बहुत जल्दी और छोटी-छोटी बातों पर भी क्रोध आता है।
२. यदि मंगल लग्न में ही हो तो व्यक्ति दुबला-पतला अर्थात दुर्बल होता है किंतु अपने प्रयासों से बलवान बन जाता है तथा इनके सिर या माथे पर चोट का चिन्ह भी रहता है।
३. मेष लग्न के व्यक्तियों को चेचक बीमारी की संभावना रहती है।
४. मेष लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः ज्वर, अग्नि व शस्त्र भय तथा मस्तिष्क जनित रोग की समस्या रहती है।
शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
वक्री शनि 27 मई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के फल
शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
“ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार” कर्म व न्याय के देवता शनि 27 मई 2021 गुरुवार को दिन के ०७:०९ पर मकर राशि व श्रवण नक्षत्र के द्वितीय चरण में वक्री हो जाएंगे तथा 29 सितंबर 2021 को रात्रि के ०१:२६ पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मार्गी हो जाएंगे, शनि न्याय, नियम, कर्मादि के ग्रह हैं जिनके वक्री होने से विभिन्न राशियों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ेगा तो चलिए जानते हैं विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के गोचर से क्या प्रभाव पड़ेगा।
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के लिए शनि दशम व एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से ही वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस दौरान कार्यक्षेत्र में कुछ अड़चनें आ सकती है, कार्यक्षेत्र में मन लगाकर दैनिक नियमों का पालन करते हुए कार्य करें, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, सामाजिक कार्यों को पूर्ण निष्ठा से करें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे जो कि अनिष्टकारी सिद्ध होंगी अतः यात्राओं को टालने का प्रयास करें, विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी अच्छा रहने वाला है, नियमों का पालन करें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए शनि नवम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर भाग्य स्थान से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे शनि विरक्ति का ग्रह है अतः इस दौरान धर्म-कर्म के क्षेत्र में मन में भटकाव रहेगा अतः पूजा-पाठ व जप-तप-दान आदि पूर्णतया नियम से करें, मन को एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, कार्यक्षेत्र के लिए शनि का वक्री अवस्था से गोचर शुभफलदाई रहेगा, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद खत्म होंगे, यदि आप पहले से घर लेने का सोच रहे हैं तो यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए शनि अष्टम व नवम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः सेहत का विशेष ख्याल रखें, कुछ देर ध्यान करें जिससे मन शांत रहेगा, भोजन आदि का विशेष ख्याल रखें, पशु-वाहन व हथियार से सावधानी बरतें, छोटे भाई-बहन व मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यक्षेत्र के लिहाज से शनि का वक्री अवस्था में गोचर मिला-जुला फल देगा, धर्म-कर्म व भाग्य में वृद्धि होगी, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी जिस कारण से कुछ तनाव रह सकता है अतः तनाव लेने से बचें।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए शनि सप्तम व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, दाम्पत्य जीवन की मर्यादाओं का पालन करें, इस दौरान आपको जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होता रहेगा, पैतृक संपत्ति प्राप्त होने या अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आप किसी नए कार्य का आरंभ करना चाहते हैं तो आपके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए शनि षष्ठ व सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से आप जीवनसाथी के वशीभूत हो सकते हैं कहने का आशय यह है कि इस दौरान आपके जीवनसाथी आप पर हावी होने का प्रयास करेंगे, यदि आपके कोर्ट-कचहरी में कोई मुकदमा चल रहा है तो यह समय आपके लिए अशुभ रहने वाला है, स्वास्थ्य के लिहाज से आपके लिए यह अच्छा समय रहेगा, जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं उनको अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग है।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए शनि पंचम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को और अधिक अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, प्रेमयों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन अप्रसन्न रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें विशेषतः उदर संबंधित जैसे अपच आदि की समस्या हो सकती है, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होने के कारण से आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने के योग हैं, विद्यार्थियों के लिए यह समय बहुत ही शुभ रहने वाला है।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए शनि चतुर्थ व पंचम के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे साथ ही लग्न को अपनी उच्च राशि तुला में देखने के कारण से यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, किसी संपत्ति को क्रय करने का विचार बना रहे हैं तो इस समय में खरीदना आपके लिए शुभ रहेगा, पारिवारिक निर्णयों को लेते वक्त थोड़ा सतर्क रहें, माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए इस समय बेहद शुभ रहेगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि तृतीय व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा स्थान परिवर्तन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, यदि आप कोई संपत्ति खरीदना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए शुभ रहेगा, आय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, शनि के मार्गी अवस्था में पुनः आने पर ही कार्यक्षेत्र में बदलाव करना शुभ रहेगा, छोटे भाई-बहन का ख्याल रखें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए शनि द्वितीय व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह वक्री गोचर काल आपके लिए शुभ रहेगा नए मित्र बनेंगे व नए मित्रों से लाभ भी होगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त होगा, आय के साथ व्यय में भी वृद्धि होगी, आध्यात्मिक उन्नति के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में बदलाव करने का सोच रहे हैं तो शनि के मार्गी होने तक रुक जाएं।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए शनि प्रथम तथा द्वितीय भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस वक्री गोचर काल आपको सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए, दैनिक दिनचर्या का पालन करें, मिर्च-मसले वाले व्यंजनों से परहेज करें, कार्यक्षेत्र में अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, अहंकार करने से बचें, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें अन्यथा दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग बनेंगे।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए शमी प्रथम व द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे कारण वश व्यय में वृद्धि होगी, दान (सरसों तेल व काली उर्द) करें लाभ होगा, धर्म-कर्म से मन हटेगा अतः धर्म-कर्म के प्रति समर्पित रहें, आध्यात्म की ओर झुकाव रहेगा, स्वास्थ्य में पहले से बेहतर अनुभव करेंगे किंतु स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव है।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए शनि एकादश व द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, आपका धन आपके कार्य की वृद्धि में व्यय हो सकता है, मान-सम्मान व ख्याति में वृद्धि होगी, स्थान परिवर्तन करना बेहद शुभ रहेगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, मन एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह वक्री गोचर काल बेहद शुभ रहेगा, विद्यार्थियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, संतान को कष्ट संभव है, संतान को समझने का प्रयास करें अन्यथा तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी।
बहुत से व्यक्तियों के मन में यह प्रश्न रहता है कि मेरे बच्चे के किसी मास में दाँत निकलने का क्या फल होगा इस विषय पर मुहर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में कहा गया है:-
मासे चेत्प्रथमे भवेत्सदशनो बालो विनश्येत् स्वम्।
हन्यात् स क्रमतोSनुजातभगिनीमात्रग्रजान्द्वयादिके।।