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बुध वक्री 30 मई 2021: जानिए विभिन्न राशियों पर इसके प्रभाव–Astrology Sutras

बुध वक्री 30 मई 2021: जानिए विभिन्न राशियों पर इसके प्रभाव–Astrology Sutras

 

मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव
मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव

 

३० मई २०२१ को बुध मध्य रात्रि १:१६ मिनट पर मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे, बुध को वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में रहते हैं साथ ही बुध को अस्त होने का भी दोष नही लगता है तो चलिए जानते हैं बुध के वक्री अवस्था से मिथुन राशि में गोचर करने से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप पराक्रम में कुछ कमी आएगी तथा आप बिना विचार किए कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं जिससे आपको आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहेगी अतः कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-विचार कर ही लें, छोटे भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, बुआ के पक्ष में किसी के स्वास्थ्य की समस्या से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे जिस कारण से आपकी कहि हुई बात लोगों को बुरी लग सकती है अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, मोबाइल फोन हैंग होने या मोबाइल फोन में अन्य किसी प्रकार की समस्या आ सकती है, घर के महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच-विचार कर ही लें, ननिहाल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है, संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है अतः संतान के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवास्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप घर में किसी चर्चा को लेकर विचारों में भिन्नता के कारण से क्षणिक विवाद होने की संभावना रहेगी, मन में अनेक प्रकार के विचार आएंगे, बुद्धि व विवेक द्वारा लिए गए निर्णय कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्रदान करेंगे, माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, वाहन या किसी मशीनरी पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता आएगी, दूरसंचार, बैंकिंग, फाइनेंस आदि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप व्यय में वृद्धि होगी, यात्रा या छोटी बहन या बुआ पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, मन में स्थिरता का अभाव रहेगा, शत्रुओं पर बुद्धि-विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, बुध के वक्री होने से अकास्मिक खर्चों में वृद्धि तनाव का कारण बन सकता है, ननिहाल पक्ष से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध वक्री होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा, जीवनसाथी के साथ पूर्व से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, लोगों पर अधिक विश्वास करने से आपको बचना होगा अन्यथा किसी प्रकार से आर्थिक हानि हो सकती है, कोई संपत्ति क्रय करने के योग बनेंगे।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध दशम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष आदि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनकी उन्नति के प्रवल योग बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में अवश्य ही प्राप्त होगा, पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा किंतु माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, बुआ/मासी/बहन आदि के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी व धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, गुरु की सलाह इस दौरान आपके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार हेतु कुछ नए विचार मन में आएंगे, नव दमपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय हो सकता है, बड़ी बहन या बुआ के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है, जिनका कार्य ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस, धर्म, टीचिंग आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है उनके उन्नति हेतु नए अवसर बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में मिलेगा, स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहें, चर्म से जुड़ी कोई समस्या संभव है, मोबाइल/लैपटॉप आदि में कुछ परेशानी के कारण धन व्यय हो सकता है।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय रुक जाएं, पिता की उन्नति होगी व पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, व्यापारियों के कार्यक्षेत्र में कुछ वृद्धि होगी, जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष, धर्म आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात संभव है।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ भाव से वक्री अवास्था से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अधिक शुभ नही है अतः अपने प्रयासों में वृद्धि लाएं, बुआ व मासी के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी संभव है, नए मित्र बनेंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव रहेगी, गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता होगी हालांकि आपके प्रथम भाव से गुरु का गोचर है अतः कोई गंभीर समस्या उत्पन्न होती नही दिख रही है, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए यह समय सामान्य रहेगा, घर में किसी शुभ कार्य का आयोजन या किसी शुभ समाचार का आगमन संभव रहेगा, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान, यात्रा व परिवार पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, व्यापारियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, स्थान परिवर्तन संभव है, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य हो तो ग्रंथकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति विख्यात, गुणवान, बलवान, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले, सतोगुणी, उच्च अधिकारी या उच्च अधिकारी के बेहद खास, दंड देने का अधिकार रखने वाले, सुंदर वाहनों से युक्त, सुख विशिष्ट, तेजस्वी, बुद्धिमान, निष्पाप, अनेक वाहनों का सुख प्राप्त करने वाले व तेजस्वी होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यंत धनी होते हैं और इनके अनेक शत्रु होते हैं, यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो ऐसे व्यक्तियों के नेत्र में अवश्य ही पीड़ा रहती है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति विख्यात तथा यशस्वी राजा होता है साथ ही सर्वगुणसम्पन्न, संपत्तिवान तथा विजयी होता है, मानसागरी में लिखा है कि यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो:-

 

अरिगृहगतमानौ योगशीलोमतिस्थो निजजन हितकारी ज्ञातिवर्गप्रमोदी।
कृशतनु: गृहमेघी चारुमूर्ति: विलासी, भवति च रिपुजेता कर्मपूज्यो दृढांग।।

 

अर्थात यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति योगी, मतिमान, अपने पक्ष के लोगों का हित चाहने वाला, अपने बंधु-बांधवों को खुश रखने वाला, दुबले-पतले शरीर वाला, सदा घर बनाकर गृहस्थी चलाने वाला, सुंदर तथा विलासी होता है, पाश्चात्य मत से यदि सूर्य षष्ठ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रायः अच्छा नही रहता और यदि सूर्य पीड़ित हो तो लंबे समय तक दवाईयों का खाने के योग बनते हैं और यदि सूर्य स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) का हो तो व्यक्ति को गले से संबंधित समस्या प्रायः बनी ही रहती है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य हो तो बहुत ही शुभ होता है ऐसे व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले, शत्रुओं पर विजय पाने वाले, मामा का सुख प्राप्त करने वाले होते हैं तथा इन्हें प्रायः गले, हिर्दय, कुक्षि, पीठ व मूत्रेन्दीय में कोई विकार रहता है, यदि सूर्य चर राशि का षष्ठ भाव में हो तो यकृत के रोग प्रायः बने रहते हैं तथा व्यक्ति की छाती कुछ दुर्बल होती है या शरीर पर कोई जख्म आदि से अत्यंत पीड़ा होती है, यदि लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में स्थित सूर्य पर शुब ग्रह की दृष्टि हो या सूर्य शुभ ग्रहों से युत हो तो व्यक्ति को नेत्र का रोग नही रहता और यदि षष्ठ भाव में सूर्य क्रूर ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो २० वें वर्ष में प्रायः नेत्र रोग होता है या पिता को कष्ट होता है और यदि षष्ठ भाव में सूर्य स्वग्रही हो या षष्ठ भाव का स्वामी शुभ स्थिति में हो उपरोक्त बताए गए रोगादि अशुभ फलों में कमी आती है साथ ही ऐसा अनेक बार अनुभव में आया है कि यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो वें वर्ष में पिता को कोई कष्ट रहता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो विष, शस्त्र, अग्निदाह, भूख, शत्रु आदि से प्रायः व्यक्ति को दुःख का अनुभव होता है और हिंसक जीवों या अन्य किसी कारण से शरीर पर चोटादि का चिन्ह होता है और यदि षष्ठ भाव में सूर्य व मंगल का संबंध बनाता हो तो चक्षु रोग, सूर्य व शनि का संबंध बनने से पिता-पुत्र में मतभेद के अतिरिक्त पत्थर पर गिरने से चोट या बिजली से कष्ट या पेट में वायु रोग से पीड़ा रहती है तथा यदि स्त्री राशि का सूर्य षष्ठ भाव में हो तो व्यक्ति प्रायः सुखी, प्रेमी और पवित्र होता है किंतु स्त्री राशि का षष्ठ भाव में स्थित सूर्य माता के लिए अशुभ होता है और यदि षष्ठ भाव में सूर्य पुरुष राशि का हो तो व्यक्ति सरकार या उच्च अधिकारी द्वारा उच्च पद की प्राप्ति करवाने के अतिरिक्त योगाभ्यासी होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यंत कामी, घमंडी, क्रोधी होते है और मामा पक्ष का कोई अनिष्ट व मौसी विधवा या पुत्रहीन होती है और ऐसा व्यक्ति अपने अधिकारियों से लड़ता रहता है किंतु यदि स्त्री राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति मीठा संवाद करने वाला होता है व मामा और मौसी पक्ष के लिए भी शुभ होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य हो तो शास्त्रकारों का मत है कि व्यक्ति सत्क्रिया शील, बुद्धिमान, अल्प संतान वाला, शरीर का मोटा, शिव-शक्ति की पूजा करने व उनमें रुचि रखने वाला, श्रेष्ठ कामों से विमुख, तथा सुत एवं धन से रहित होता है तथा ऐसे व्यक्तियों को वातस्थल में पीड़ा और पिता से भय होता है साथ ही यदि सूर्य स्थिर राशि (वृषभ, सिंह और वृश्चिक, कुंभ) का होकर पंचम भाव में हो तो व्यक्ति के प्रथम संतान की मृत्यु हो जाती है तथा यदि चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) का हो तो संतान का नाश नही होता है और यदि द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) का हो तो संतान का नाश होता है साथ ही यदि सूर्य स्वग्रही हो तो भी संतान का नाश होता है किंतु ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव व मत के अनुसार ऐसा तभी हो सकता है जब पंचम भाव और पंचमाधिपति दोनो पापकर्तरी में हो व क्रूर ग्रह या अशुभ भावों के स्वामी से दृष्ट हो लेकिन इस अवस्था में भी सिर्फ एक ही संतान (ज्येष्ठ संतान) का नाश होता है किंतु यदि पंचम भाव का स्वामी शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो या पंचमाधिपति यदि भाग्य स्थान में उच्च राशि का हो या पंचम भाव को शुभ ग्रह अपनी उच्च राशि में देखते हैं तो गर्भपात या संतान का नाश नही होता है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि पंचम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति सुखहीन, धनहीन, आयुहीन तथा पुत्रहीन होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों की बुद्धि अच्छी होती है और व्यक्ति जंगल व पहाड़ों में घूमने का शौकीन होता है वहीं मानसागरी में कहा गया है कि यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो:-

 

तनयगतदिनेशे शैशवे दुःखभागी न भवति धनभागी यौवने व्याधियुक्त:।
जनयति सुतमेकं चान्यगेहश्च शूर: चपलयतिविलासी क्रूरकर्मा कुचेता:।।

 

अर्थात यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति बचपन में दुःखी रहता है तथा इन्हें धन प्राप्ति नही होती है और यौवन में अनेक रोग से व्यक्ति पीड़ित होता है और इन्हें एक ही पुत्र होता है किंतु व्यक्ति शूर, चंचल बुद्धि वाला और विलासी होता है साथ ही ऐसा व्यक्ति बुरे कर्म करने वाला और बुरी सलाह देने वाला अर्थात दुष्ट होता है तो वहीं वैधनाथ जी ने पंचम भाव के सूर्य स्थित होने के शुभ फल बताए हैं उनके अनुसार “राजाप्रियः चंचलबुद्धियुक्त: प्रवासशील: सुतगेदिनेशे” अर्थात यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति राजा का प्यारा, चंचल बुद्धि वाला, पुत्र सुख प्राप्त करने वाला और परदेश जाने वाला होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति क्रोधी व मूर्ख होता है और व्यक्ति के ज्येष्ठ संतान चाहे वह पुत्र हो या पुत्री के लिए मारक होता है किंतु यदि ज्येष्ठ संतान की कुंडली में आयुष्य के योग हैं तो ऐसे व्यक्तियों की ज्येष्ठ संतान से नही बनती या ज्येष्ठ संतान को कोई रोग रहता है या व्यक्ति अपनी ज्येष्ठ संतान से दूर रहता है या फिर ज्येष्ठ संतान के साथ वैमनस्य, अनबन तथा नित्यप्रति कलह होता रहता है साथ ही ऐसा व्यक्ति दूसरों को ठगने से आनंद की प्राप्ति करता है और प्रमादी अर्थात असावधान और बेफिक्र अर्थात और अपने में मस्त रहता है साथ ही ऐसे व्यक्ति की मृत्यु प्रायः हिर्दय, फेफड़े, किडनी व मस्तिष्क पीड़ा से होती है और इन्हें धर्म में कम ही रुचि रहती है, यवनमत में भी कुछ इसी प्रकार का उल्लेख मिलता है यवनमत कि अनुसार यदि पंचम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति मूर्ख, कम संतति वाला, क्रोधी, नास्तिक और धार्मिक कार्यों में विघ्न करने वाला होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि पंचम भाव में सूर्य जल राशि का हो तो ऐसे व्यक्तियों के बच्चे कमजोर और बीमार होते हैं तथा यदि पंचम भाव में स्थित सूर्य की चंद्र, गुरु व शुक्र से युति या दृष्टि संबंध न हो तो प्रायः संतान की मृत्यु हो जाती है या संतान को मृत्यु तुल्य कष्ट रहता है, यदि पंचम भाव में सूर्य कर्क, वृश्चिक या मीन राशि का हो तो व्यक्ति को शारीरिक कष्ट और दुःख होता है तथा यदि पंचम भाव में सूर्य वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुंभ राशि का हो तो व्यक्ति बुरी बुद्धि, बुरे कर्म, क्रोधी व बुरी संगति वाला होता है किंतु यदि सूर्य शुभ ग्रह से संबंध रखता हो तो अशुभ फलों में कमी होती है और ऐसे व्यक्ति कंजूस और स्वार्थी होते हैं, यदि पंचम भाव में सूर्य मेष, सिंह व धनु राशि का हो तो व्यक्ति को उच्च शिक्षा प्राप्त होती है व संतान कुछ दिक्कतों व सर्जरी के साथ होती है तथा कुछ ग्रंथकारों का मत है कि यदि मेष का सूर्य पंचम में हो तो संतान नही होती किंतु ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि पंचमाधिपति शुभ ग्रह हो और दिग्बली हो या भाग्येश पंचम भाव में स्थित हो या पंचम का स्वामी भाग्य स्थान या एकादश भाव में हो या पंचम भाव पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो व्यक्ति को संतान अवश्य ही होती है, यदि सिंह राशि का सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति को संतान तो अवश्य होती है किंतु संतान की शीघ्र ही मृत्यु हो जाती है या मृत्यु तुल्य कष्ट होता है या संतान विवाह उपरांत स्वम् घर छोड़ कर चली जाती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के लिए संतान शुभफलदाई नही होती और संतान का भाग्योदय भी जन्मस्थान व पितृस्थान से दूर ही होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों की संतान व्यवहार कुशल होती है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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शुक्र का मिथुन राशि से गोचर 28 मई 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras

शुक्र का मिथुन राशि से गोचर 28 मई 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

शुक्र का मिथुन राशि से गोचर
शुक्र का मिथुन राशि से गोचर

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार जीवन में जितने भी सुख-संसाधन होते हैं उन सब का विचार शुक्र ग्रह से किया जाता है शुक्र ग्रह प्रेम, विवाह, शैय्या सुख व अनेक चीजों के कारक होते हैं वृषभ इनकी स्वराशि, तुला मूलत्रिकोण, मीन उच्च राशि व कन्या नीच राशि होती है, ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार २८ मई २०२१ को प्रातः ०४:४५ पर शुक्र वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के इस गोचर परिवर्तन से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे महान चातुर्य का कारक ग्रह का पराक्रम भाव से गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम के द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है, पड़ोस के किसी विपरीत लिङ्ग व्यक्ति के प्रति आकर्षण हो सकता है, स्वास्थ्य उत्तम रहेगा फिर भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें क्योंकि मेष राशि वालों के लिए शुक्र मारक ग्रह होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकती है, छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उन्हें नए अवसर प्राप्त होंगे, महिलाओं संग वाद-विवाद से बचें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व षष्ठ भाव के स्वामी होकर धन व कुटुंब स्थान अर्थात द्वितीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, चतुराई युक्त नीतियों से धन संचय करने में सहायता मिलेगी किंतु किसी महिला या दवाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें हालांकि शत्रु आपका अहित नही कर सकेंगे किंतु व्यर्थ में तनाव व धन व्यय में वृद्धि के सूचक हो सकते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर अच्छा रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक व चतुराई के द्वारा उन्नति के योग बनेंगे, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यात्राओं के योग बनेंगे, किसी महिला के कारण से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यात्राओं के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, नए मित्र बनेंगे, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, जिन्हें हार्मोन्स या शुगर या अन्य किसी प्रकार की रक्त संबंधित समस्या हो वह शुक्र के इस गोचर दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से व्यय में वृद्धि होगी, महिलाओं, सुख देने वाले संसाधनों, वाहन या अन्य किसी संपत्ति पर धन व्यय होने के योग हैं, फैशन से जुड़ी चीजों पर भी धन व्यय होने के योग बनेंगे, माता व बड़ी बहन के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, शत्रुओं से सावधान रहें व किसी भी महिला के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, शुक्र के इस गोचर के दौरान आप चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त करने में सफल होंगे, महिलाओं विशेषकर बहन व माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपके पड़ोस में कोई ऐसी महिला हो जो उच्च पद पर आसीन हो तो उनसे भी लाभ मिलने की संभावना बनेगी, छोटे भाई-बहन यदि विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व ज्यादा चटपटे या गर्म पदार्थों के सेवन से परहेज करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर कर्म स्थान अर्थात दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर आपके लिए प्रत्येक प्रकार से शुभफलदाई सिद्ध होगा कारोबार में उन्नति होगी, आय में वृद्धि होगी, किसी महिला के माध्यम से भाग्य में वृद्धि होगी, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उनको नए अवसर प्राप्त होंगे, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व अष्टम भाव के स्वामी होकर भाग्य स्थान से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य में वृद्धि होगी व महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा किंतु किसी महिला के कारण से भाग्योन्नति में अड़चनें आएंगी, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, स्वास्थ्य में सुधार होगा फिर भी स्वास्थ्य हेतु सचेत रहें, पिता को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, धार्मिक कार्यों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अर्थात शुक्र आपके लिए प्रवल मारक होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे अतः शुक्र के इस गोचर काल के दौरान आपको स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा हालांकि अष्टम भाव से शुक्र का गोचर आयुष्य पर संकट नही देता फिर भी जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी चिंता का कारण बन सकती है, दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, दवाईयों व महिलाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, महिलाओं के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें, ससुराल पक्ष के किसी महिला के स्वास्थ्य में कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा कार्यक्षेत्र का विस्तार करने में सफल होंगे, जिनका कार्य सौंदर्य प्रकाशन, टीचिंग, ज्योतिष, लेखक आदि से जुड़ा हुआ है उनके लिए शुक्र का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ उन्नति प्रदान करने वाला होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, महिलाओं से सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, दाम्पत्य जीवन में कुछ झगड़े-झंझटों के योग बनते हैं किंतु आप उन पर अपनी चतुराई से विजय प्राप्त करने व दाम्पत्य जीवन को मधुर बनाने में सफल होंगे, कार्यक्षेत्र में अवरोध उत्पन्न होंगे जिन्हें आप चतुराई से दूर करने में सफल होंगे, पुराने मित्रों से मुलाकात या वार्ता संभव रहेगी जिससे आपको प्रसन्नता की अनुभूति होगी, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा क्योंकि आपकी राशि के लिए शुक्र रोग, रिपु व ऋण के भाव का स्वामी होता है, जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें हार्मोन्स या रक्त विकार से जुड़ी समस्या हो उनको अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा, भाग्य की वृद्धि होगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, महिलाओं से लाभ होगा, बड़ी बहन के ससुराल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या संभव है।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, अचानक किसी यात्रा के योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार, दवाईयों, संतान, माता-पिता व महिलाओं पर धन व्यय होगा, किसी अपरिचित व्यक्ति की बातों में आने से बचें, सुख प्रदान करने वाले संसाधनों पर भी धन व्यय होगा, जिन्हें हिर्दय, रक्त विकार, हार्मोन्स या उदर संबंधित समस्या हो वह अपने स्वास्थ्यबक प्रति पूर्ण सतर्क रहें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर प्रत्येक प्रकार से आपके लिए शुभफलदाई रहने वाला होगा नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा, घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, भाग्य में वृद्धि होगी, विद्यार्थियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा, संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा, जो लोग धार्मिक कार्यों से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह शुक्र का गोचर उन्नति के नए अवसर प्रदान करेगा, जीवनसाथी से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे व दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी तथा जीवनसाथी के साथ किसी रोमैंटिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनवपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन प्रसन्न रहेगा, कार्यस्थल पर अनैतिक संबंध बनने के योग है अतः अनैतिक संबंध बनाने से बचें अन्यथा निकट भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, घर में किसी सदस्य के स्वास्थ्य में समस्या चिंता का मुख्य कारण बनेगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, संतान से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त करने हेतु आपको धैर्य रखते हुए चतुराई भरे बड़े पराक्रम से सफलता प्राप्त होगी।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो शास्त्रकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति दुबले, मानसिक चिंता से ग्रस्त, अकारण विवाद प्रिय, आत्मीय जनों से घृणा करने वाले, घमंडी, कपटी, संग्राम में निश्चल, बहुत स्त्री वाले, प्रतिष्ठित, विख्यात तथा सुख, धन, यान आदि रहित, पिता के धन को खर्च करने वाले व भ्रमणशील होते हैं और ऐसे व्यक्तियों के बन्धु-बांधव और वाहनादि के नाश का भी भय होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को शोभायुक्त अधिकार अवश्य प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्ति परदेश या विदेश में वास करते हैं तथा इनका चित्त किसी भी समय शांत नही रहता है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य सुखहीन, बंधुहीन, भूमिहीन, मित्र रहित तथा भवनहीन होता है, ऐसे व्यक्तियों को राजसेवा प्राप्त होती है तथा ऐसे व्यक्ति संपत्ति को नष्ट करने वाले होते हैं, आचार्य वराहमिहिर जी ने कहा है कि “विसुख: पीड़ित मानस: चतुर्थे” अर्थात चतुर्थ भाव का सूर्य हो तो व्यक्ति सुखहीन तथा अशांत चित्त वाला होता है मानसागरी में लिखा है:-

 

विविधजनविहारी बंधुसंस्थ: दिनेशो भवति च मृदुचेता: गीतवाद्यानुरक्त:।
समरशिरसि युद्धे नास्ति भंग: कदाचित्त प्रचुरधनकलत्री पाठीवानां प्रियश्च।।

 

अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य लोकप्रिय तथा सर्वजनप्रिय होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति कोमल हिर्दय वाले होते हैं और इनका प्रेम गीत व वाद्यकलाओं में होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति युद्ध में आगे होकर लड़ते हैं और कभी पीठ नही दिखाते साथ ही ऐसे व्यक्तियों को स्त्री सुख और विपुल धन सुख मिलता है और ऐसे व्यक्ति राजप्रिय होते हैं।

 

सूर्य के चतुर्थ भाव के अनेक शास्त्रकारों ने अपने-अपने मत रखे हैं जिनमे समानता का अभाव देखने को मिलता है कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल तो कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के निकृष्ट फल बताए हैं चलिए एक और ग्रंथकार के मत को देखते हैं वैधनाथ जी ने चतुर्थ भाव के फल में लिखा है कि “हिर्दय रोगी धन-धान्य-बुद्धि रहित: क्रूर: सुखस्थे रवौ” अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति हिर्दय के रोग से पीड़ित और धन-धान्य व बुद्धि से हीन और क्रूर होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार चतुर्थ भासव से व्यक्ति के सुखों व माता का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य (क्रूर ग्रह) बैठा हो तो उससे यह तो निश्चित हो जाता है कि व्यक्ति को जीवन में सुख प्राप्ति हेतु अत्यंत परिश्रम करना पड़ता है ऊपर अनेक ग्रंथकारों के मत पर चर्चा की गई है जिसमें मानसागरी ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल को बताया है तो वहीं अन्य ग्रंथकारों ने इसे निकृष्ट फल देने वाला बताया है किंतु मेरे अनुभव में अब तक यही आया है कि यदि चतुर्थ भाव में सूर्य यदि वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि का हो तो अशुभ फल मिलते हैं और यदि चतुर्थ भाव में सूर्य मेष या कर्क राशि का हो तो व्यक्ति संशयी, म्लान चेहरे वाला और वैश्यागामी होता है किंतु चतुर्थ भाव में सूर्य यदि मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर और मीन राशि का हो तो शुभ फल मिलते हैं, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्तियों को बचपन में अनेक प्रकार के कष्ट होते हैं किंतु २८ से ५० वर्ष की आयु में व्यक्ति अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करता है, लग्न कुंडली के यदि चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति पहली अवस्था में दुःखी, मध्य में सुख व वृद्धावस्था में पुनः दुःखी होता है तथा विभिन्न ग्रंथकारों द्वारा बताए गए अशुभ फल कुछ विशेष राशियों जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है या सूर्य के अन्य क्रूर से संबंध बनाने पर ही मिलता है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव व मत के अनुसार यदि चतुर्थ भाव के स्वामी बली ग्रहों से युक्त हो या चतुर्थ भाव का स्वामी केंद्र अथवा त्रिकोण में हो या सूर्य चतुर्थ भाव में सिंह राशि का हो तो ऐसी स्थिति में सूर्य के शुभ फल मिलते हैं तथा व्यक्ति को वाहनादि का सुख प्राप्त होता है किंतु यदि चतुर्थ भाव का स्वामी भी पीड़ित हो प्रायः सभी सुखों का नाश होता है।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में हो तो शास्त्रकारों का मत है कि ऐसा व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि वाला, पराक्रमी, बली, प्रिय भाषी अर्थात मधुर वचन बोलने वाला, साफ मन वाला अर्थात स्वच्छ चित्त वाला, वाहन व नौकरों से सुशोभित व तेजस्वी होता है और इनके भाईयों की संख्या प्रायः कम ही होती है, यदि तृतीय भाव में सूर्य हो तो अग्रज भाई का नाश होता है व सहोदर भाई की अल्पता और चचेरे भाई बहु संख्यक होते हैं, ऐसे व्यक्ति धनवान और द्रव्य विशिष्ट होते हैं उसे वें वर्ष में पशु से भय और २० वें वर्ष में अर्थ की प्राप्ति होती है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति बलवान, शूरवीर, धनी और उदार होता है किंतु अपने (संबंधी) लोगों से शत्रुता रखता है, मानसागरी में कहा गया है कि यदि लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य हो तो:-

 

सहजभुवनसंस्थे भास्करे भ्रातृनाश: प्रियजन हितकारी पुत्रधाराभियुक्त:।

भवति च धनयुक्तो धैर्ययुक्त: सहिष्णु: विपुल धनविहारी नागरीप्रीतिकारी।।

 

अर्थात यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो उसके भाइयों का नाश होता है किंतु ऐसे व्यक्ति अपने प्रियजनों का हित चाहने वाले होते हैं और इन्हें स्त्री व पुत्र दोनो सुख प्राप्त होते हैं, ऐसे व्यक्ति धनवान, धैर्यवान तथा दूसरों का उत्कर्ष देखकर प्रसन्न होने वाले होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति अतिव्ययी होते हैं तथा सुंदर लड़कियों का इनके प्रति आकर्षण रहता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति अत्यंत धनी, समाज सेवा हेतु सदैव तत्पर, दयालु, उदार, अत्यधिक धन खर्च करने वाला, अत्यंत आकर्षक शक्ति वाला, प्रतापी, पराक्रमी, तीर्थ यात्रा करने वाला, शत्रुओं पर विजयी किंतु अग्रज के सुखों से वंचित रहता है, वृहत्त्पराशर होराशास्त्र में लिखा है कि “अग्रेजातं रवि: हन्ति” अर्थात तृतीय भाव का सूर्य बड़े भाई के लिए मारक होता है, यदि तृतीय भाव में सूर्य यदि मेष राशि का हो तो व्यक्ति दुर्बल विचारों वाला, आलसी, शरीर को कष्ट न देने वाला, बातूनी, निरुधमी और उपद्रवकारी होता है किंतु शेष पुरुष राशि का सूर्य यदि तृतीय भाव में हो तो व्यक्ति शांत, विचारशील, बुद्धिमान, सामाजिक, शिक्षासंबंधी तथा राजकीय कार्यों में भाग लेने वाला, नेता, स्थानीय स्तर पर स्वराज्य संस्था चलाने वाला, लोकल बोर्ड आदि में चुनाव लड़ने वाला, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष पद की प्राप्ति करने वाला, बड़ी कम्पनियों में उच्च पद पर आसीन, तथा राजा के समान कर्म व पराक्रम करने वाला होता है और इनके नीचे कार्यरत व्यक्ति इनसे प्रसन्न रहते हैं, पुरुष राशि का तृतीय भावगत सूर्य बड़े भाई के लिए मारक होता है जिस कारण से प्रायः बड़े भाई की मृत्यु २२ वें वर्ष तक हो जाती है किंतु यदि बड़े भाई की जन्म कुंडली में दीर्घायु योग हों तो ऐसी अवस्था में बड़े भाई की मृत्यु नही होती अपितु कुछ कष्ट बने रहते हैं या दोनो भाईयों में वैचारिक मतभेद होते रहते हैं तथा दोनो भाईयों के एक ही स्थान पर रहने से उन्नति न होती व घर के वातावरण में तनावपूर्ण माहौल बना ही रहता है, यदि पुरुष राशि का सूर्य तृतीय भाव में हो तो संपत्ति विभाजन शांतिपूर्ण तरह से हो जाता है किंतु यदि स्त्री राशि का सूर्य तृतीय भाव में हो तो संपत्ति विभाजन के लिए कोर्ट में मुकदमें चलते हैं, यदि तृतीय भाव में सूर्य मिथुन, तुला व धनु राशि का हो तो व्यक्ति लेखक, प्रकाशक, प्रोफेसर और वकील होता है या इनमें रुचि रखता है, यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो प्रायः व्यक्ति अपने माता-पिता का या तो सबसे बड़ी संतान होती है या फिर वह इकलौती संतान होती है, स्त्री राशि का सूर्य यदि तृतीय भाव में हो शुभ फल मिलते हैं किंतु संपत्ति विभाजन के लिए कोर्ट में मुकदमा लड़ते हैं।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल

 

यदि कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति भाग्यवान होता है तथा इन्हें प्रायः चतुष्पात अर्थात गाय, भैंस, बकरी आदि के माध्यम से सुख प्राप्त होता है कहने का आशय यह है कि दूसरे भाव में यदि सूर्य हो और व्यक्ति यदि खेती बाड़ी करता हो तो बैलों की जोड़ी का सुख मिलता है और यदि व्यक्ति दूध विक्रेता है तो उसके पास अनेक मात्रा में गाय, भैंस व बकरी होंगी व उनसे लाभ होगा आदि फल होता है, यदि सूर्य कुंडली के दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति का द्रव्य अच्छे कामों में व्यय होता है तथा स्त्री के निमित्त से अपने कुटुंब में भी कलह-क्लेश होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों के वह सभी कार्य जिन्हें वो द्रव्य का निमित्त करना चाहते हैं उसमें इनको प्रायः नुकसान ही होता है, दूसरे भाव में यदि सूर्य हो तो व्यक्ति दंभी, कलह सहने वाला, मित्र विरोधी, पुत्रवान, वाणी दोष, नौकर-चाकर से युक्त, मुख रोगी व धन हानि आदि फल प्राप्त होते हैं, ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा में अड़चनें आती है साथ ही ऐसे व्यक्ति हठी व चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि सूर्य द्वितीय भाव में हो तो मनुष्य विद्या, विनय और धन से हीन होता है तथा उसकी वाणी में भी कुछ दोष रहता है, मानसागरी के अनुसार यदि दूसरे भाव में सूर्य हो तो:-

 

धनगतदिननाथे पुत्रदारै: विहीन:।
कृशतनु रतिदीनोरक्तनेत्र: कुकेश:।।
भवति च धनयुक्त: लोह ताम्रेण सत्यं।
न भवति ग्रहमेधी मानवो दुःखभागी।।

 

अर्थात यदि सूर्य दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति को स्त्री सुख व पुत्र सुख नही मिलता है तथा इनका शरीर दुबला-पतला होता है और इन्हें रति सुख नही मिलता, ऐसे व्यक्तियों की आँखे लाल व केश बुरे होते हैं किंतु व्यक्ति धनवान होता है साथ ही लोहे और ताँबे से संपन्न होता है तथा ऐसे व्यक्ति गृहस्थी होकर भी किसी एक स्थान में घर बनाकर नही रहते अतएव दुःखी होते हैं।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि लग्न कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य बैठा हो तो व्यक्ति धनी होता है किंतु इनके धन की हानि भी प्रायः होती रहती है, साथ ही यदि दूसरे भाव में सूर्य वृषभ, कन्या या मकर राशि का हो तो व्यक्ति कभी धन का संचय नही कर पाता चाहे उसके लिए भी वो जितना भी यत्न कर ले और ऐसे व्यक्ति स्वतंत्र व्यापार करने के इच्छुक होते हैं तथा नौकरी पसंद नही करते हैं किंतु यदि धनेश बलवान हो अर्थात वक्री, अस्त, मंदगामी व अतिचारी न हो और किसी पाप ग्रह से संबंध न बनाता हो तो ही यह इच्छाएं व्यक्ति की पूर्ण होती है परंतु पिता और पुत्र के मध्य वैचारिक मतभेद बने रहते हैं, वकीलों और डॉक्टरों के लिए यह सूर्य शुभफलदाई होता है, यदि किसी ज्योतिषी के द्वितीय भासव में सूर्य हो तो उनके बताए अशुभ फल शीघ्र ही अनुभव में आते हैं किंतु शुभ फल अनुभव में बहुत ही विलंब से अनुभव में आते हैं प्रायः ज्योतिषी को अपयश ही मिलता है, यदि दूसरे भाव में मिथुन, तुला व कुंभ का सूर्य हो तो व्यक्ति अत्यंत धनी होता है किंतु लोगों की सहानुभूति से वंचित रहता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति धन व्यय के विषय में कृपण होते हैं अर्थात कंजूस होते हैं, दूसरे भाव में सूर्य यदि कर्क, वृश्चिक व मीन राशि का हो तो व्यक्ति अधिकारी या किसी उच्च पद पर कार्य करने वाला होता है तथा दूसरे भाव में सूर्य यदि मेष, सिंह और धनु राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति बहुत स्वार्थी होता है तथा अपने आपको बड़ा आदमी बनाने की अदम्य इच्छा रखता है किंतु कार्य से मन चुराता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों को कार्य करना कम ही पसंद आता है, इसके अतिरिक्त यदि सूर्य दूसरे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के नेत्र, हाथ व पैर प्रायः गर्म ही रहते हैं और इन्हें उत्तम भोजन करने में बड़ी रुचि होती है, कपड़ों को स्वच्छ रखने में इनका विशेष ध्यान जाता है तथा इनके वार्ता करने के तरीकों में बड़पन्न झलकता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव अनुसार यदि वृश्चिक, धनु, मकर या कुंभ लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य बैठा हो और धन स्थान का स्वामी वक्री हो या १२-४-६-८-१२ वें स्थान में हो तो यह महा दरिद्र योग होता है यह योग जिन व्यक्ति की कुंडली में होता है उन्हें अत्यंत गरीबी को भी झेलना पड़ता है तथा कई बार इन्हें भोजन के लिए भी तरसना पड़ता है, साथ ही यदि दूसरे भाव में सूर्य हो और उसे शनि न देखता हो तो व्यक्ति धनी होता है किंतु यदि शनि से दृष्ट हो तो धन सामान्य मात्रा एवं शनि से दृष्ट हो किंतु अन्य ग्रहों से नही तो व्यक्ति निर्धन होता है, साधारण रूप से ऐसे व्यक्तियों का धन चोरी होने के योग होते हैं, १७ वें व २५ वें वर्ष में धनहानि संभव होती है।

 

जय श्री राम।

 

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बुध का मिथुन राशि से गोचर 26 मई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

बुध का मिथुन राशि से गोचर 26 मई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

 

बुध का मिथुन राशि से गोचर
बुध का मिथुन राशि से गोचर

 

वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में ही रहते हैं, बुध २६ मई की प्रातः ०६ बजकर ४४ मिनट पर वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में चले जाएंगे जहाँ २४ जुलाई की दिन में १० बजकर २१ मिनट 58 सेकंड तक रहेंगे, बुध मिथुन व कन्या राशि के स्वामी होते हैं और कन्या राशि में ही उच्च के भी होते हैं मीन राशि बुध की नीच राशि होती है, बुध बुद्धि व विवेक के कारक होते हैं अतः बुध के कन्या राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव पड़ेंगे तो चलिए जानते हैं बुध के इस गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, शत्रुओं पर युक्ति व चतुराई के माध्यम से सफलता प्राप्त होगी, भाग्य की वृद्धि होगी, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, बहन-बुआ व मासी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव है।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय व पंचम भाव के स्वामी होकर द्वितीय से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए स्त्रोत बनेंगे, जो लोग बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर श्रेष्ठम फल देने वाला रहेगा, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा अवसर रहेगा, कोरोना के कारण से जिनकी नौकरी छूट गयी थी उन्हें पुनः किसी नौकरी का अवसर प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा तथा दोनो अपनी समझ का परिचय देते हुए एक-दूसरे के साथ आनन्दमयी जीवन व्यतीत करेंगे।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर लग्न से ही गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, अपनी युक्ति के बल पर आप कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर निर्मित करने में सफल होंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, अच्छा रहेगा, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, आकस्मिक धन लाभ के योग बनेंगे तथा आय में वृद्धि के पूर्ण योग प्राप्त होते हैं।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कर्क राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर मिला-जुला फल देने वाला होगा फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, यात्रा हो सकती है, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, आपके फोन में बुध के इस गोचरकाल के दौरान कुछ समस्या रह सकती है, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी या उनके कार्यक्षेत्र का कुछ विस्तार होगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध धनेश व लाभेश होकर लाभ स्थान से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उनको पुनः नए अवसर प्राप्त होंगे, जिन व्यक्तियों का कार्य बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध पहले व दशम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कन्या राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, बेरोजगारों तथा कोरोना के चलते जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी मिलने के पूर्ण योग बनते हैं, व्यापारियों के मुनाफे में वृद्धि होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों व जीवनसाथी के लिए बुध का यह गोचर क्षणिक विवाद के योग बना रहा है अतः एक-दूसरे को समझने का प्रयास करें व अपने प्रेमी और जीवनसाथी को कुछ समय दें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, नौकरी व व्यवसाय में उन्नति होगी।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए नवम व द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार तुला राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, धर्मिक यात्राओं के योग हैं या धर्म-कर्म आदि में धन व्यय होने के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रेमियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई होगा तथा उनके प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, दाम्पत्य जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव संभव रहेगा।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम व एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी किंतु स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहें, स्थान परिवर्तन के योग हैं, जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद शुभ रहने वाला होगा, प्रेमियों के लिहाज से बुध का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ प्रेम संबंधों में मधुरता लाने वाला होगा, विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम व दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार धनु राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार, नौकरी में उन्नति, मित्रों से लाभ, पिता का सहयोग व मन में प्रसन्नता का अनुभव आदि शुभ फल प्राप्त होंगे, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी के नए अवसर प्राप्त होंगे, आय में वृद्धि होगी, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, प्रेमियों के मध्य प्रेम में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देगा, अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए षष्ठ और नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मकर राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप भाग्य की शक्ति व चतुराई युक्त युति के द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, जिनको स्वास्थ्य की समस्या लम्बे समय से चली आ रही थी उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा आपके गुप्त शत्रु आप पर हावी होने का पूर्ण प्रयास करेंगे, प्रेमियों के मध्य तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर उन्नतिकारक होगा, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, प्रेमियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, विद्यार्थियों को कुछ नया सीखने को मिलेगा जिसमें वो रुचि भी लेंगे, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है, किसी अप्रिय घटना घटित होने की संभावना रहेगी।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मीन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, नौकरी में उन्नति होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से प्रस्ताव आ सकता है, जो लोग प्रेम विवाह करना चाहते हैं उनके लिए भी यह गोचर शुभ रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी, घर में किसी महिला मेहमान के आने की संभावना रहेगी।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

 

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

 

Mobile:- 9919367470, 7007245896

 

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लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल

 

सूर्य यदि प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो ऐसे व्यक्ति प्रायः रूप में विचित्र, नेत्रों की समस्या से युक्त, कंठ या गुदा में ब्रण अथवा तिल युक्त, शूरवीर, क्षमाशील, घृणा रहित, कुशाग्र बुद्धि, उदार प्रकृति, साहसी व आत्मसम्मानी होते हैं परंतु ऐसे व्यक्ति निर्दयी, क्रोधी और क्रोध में कुछ भी कर गुजरने वाले होते हैं और उनको वात व पित्त के प्रकोप से पीड़ा रहती है तथा ऐसे व्यक्ति आकार में लंबे, गर्म शरीर वाले और थोड़े केश वाले होते हैं तथा ऐसे व्यक्तियों को अपनी बाल्यावस्था में अनेक पीड़ायें भोगनी पड़ती है और सर पर चोटादि लगने की संभावना रहती है, १५ वें वर्ष में अंग पीड़ा और वर्ष की आयु में ज्वर पीड़ा होती है यदि लग्न में सूर्य के साथ अन्य पापग्रह भी हों या सूर्य लग्न में नीच राशि का बैठा हो जो कि तुला लग्न की कुंडली में ही संभव है या शत्रु राशि के लग्न में स्थित हो तो सूर्य के अनिष्ट फल होते हैं।

 

लग्न में मेष राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति नेत्र रोगी परंतु धनवान और कीर्तिमान होता है तथा यदि सूर्य को मित्र बली ग्रह देखते हों तो व्यक्ति विद्वान भी होता है, लग्न में तुला राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति निर्धन तथा मानरहित होता है किंतु यदि सूर्य शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो अशुभता में कमी आती है, मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में यहाँ तक कहा है कि यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में तुला राशि का सूर्य हो तो मनुष्य दरिद्र ही रहता है और उसके पुत्र नष्ट हो जाते हैं, यदि लग्न में सूर्य मकर या सिंह राशि हो तो व्यक्ति रतौंधी एवं हिर्दय रोग से पीड़ित होता है किंतु यदि सिंह का नवमांश भी हो और वहाँ भी प्रथम भाव अर्थात लग्न में ही सूर्य बैठे तो व्यक्ति किसी स्थान का मालिक होता है तथा शुभ ग्रह देखते हैं तो निरोगी होता है, यदि कर्क राशि का सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो व्यक्ति रोगी किंतु ज्ञानी होता है, यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति कार्य करने में आलसी, क्रोधी, प्रचंड, लंबा, मानी अर्थात घमंडी, शूर, क्रूर, जल्दी क्षमा न करने वाला होता है और ऐसे व्यक्तियों के नेत्र कुछ रूखे होते हैं, मानसागरी के अनुसार:-

 

“सवितरि तनुसंस्थे शैशव व्याधियुक्तो नयनगदसुदुःखी नीचसेवानुरक्त:।

न भवति गृह मेधी दैवयुक्तो मनुष्यो भ्रमति विकलमूर्ति: पुत्र पौत्रे: विहीन:।।”

 

अर्थात यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति बाल्यावस्था में रोगी होता है तथा उसके नेत्रों में विकार रहता है साथ ही ऐसे व्यक्ति नीच लोगों की नौकरी करते हैं और एक जगह घर बसाकर नही रह पाते और हमेशा घूमते-फिरते रहते हैं तथा इन्हें पुत्र व पौत्र का सुख नही मिल पाता है तो वहीं वैधनाथ जी का मत है कि यदि सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो उसकी संतति कम होती है और ऐसे व्यक्ति जन्म से ही सुखी, निर्दय, कम खाने वाले, चक्षुरोगी, सुशील, सुहावनी आँखों वाले, सब कामों में यशस्वी तथा बलवान होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो व्यक्ति युद्ध में आगे होकर लड़ने वाला, स्वतंत्रता में अधिक उन्नति करने वाला, पित्त, वायु व रक्तविकार के रोगों से पीड़ित व चर्म रोगी होता है इसके अतिरिक्त यदि स्त्री राशि का सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो सुखदाई होता है तथा पुरुष राशि का सूर्य यदि प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो थोड़ा दुःखदाई होता है साथ ही यदि धनु लग्न हो और प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति विद्वान, धर्मशास्त्रों को जानने वाला व उच्चाधिकारी होता है किंतु स्त्री सुख से वंचित रहता है या इसी तरह के अन्य किसी दुःख से पीड़ित होता है, यदि कर्क लग्न हो और प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति साधारण धनी, स्त्री सुख युक्त तथा संतति संपन्न होता है किंतु यशस्वी नही होता कहने का आशय यह है कि इस स्थिति में व्यक्ति के पास धन अच्छा रहता है किंतु व्यक्ति ऊँचे पद पर आसीन नही हो पाता है तथा दक्षिणायण का सूर्य इनके लिए शुभ होता है व उत्तरायण का सूर्य प्रायः लड़ाई-झगड़े, अपना स्वामित्व स्थापित करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है साधारण शब्दों में प्रथम भाव में यदि सूर्य शुभ स्थिति में हो तो अच्छा फल देता है किंतु स्वास्थ्य समस्याएं भी देता है।

 

जय श्री राम।

 

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