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वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
वृश्चिक राशि: जानिए, वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों की छाती व नेत्र अपेक्षाकृत थोड़े बड़े होते हैं, जांघ और पिंडलियाँ गोल होती है तथा इनके हाथ व पैर में पदम रेखा या अन्य कोई निशान अवश्य ही होता है, वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति बचपन में प्रायः बीमार रहते हैं तथा इन्हें पिता व गुरु का पूर्ण सुख नही मिल पाता है, वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति क्रूर क्रिया करने वाले और राजकुल में ऊँची पदवी धारण करने वाले अर्थात उच्चाधिकारी होते हैं, वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति क्रोधी, वैर निरत, कलही, मित्र द्रोही, पति द्रोही, संतोष हीन, दूसरों के कार्य में विघ्नकर्ता, पराक्रमी, चतुर, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले, श्वेत वस्त्र के अभिलाषी, मादक पदार्थों में रुचि रखने वाले, परिश्रमी, मुख, पेट, हथेली, छाती आदि जगहों पर तिल के चिन्ह से युक्त व दीर्घकालीन रोग से मृत्यु को प्राप्त करने वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों की स्त्री पतिव्रता और जातक कामाशक्त होता है, वृश्चिक राशि वालों को एक पुत्र व एक कन्या का सुख प्राप्त होता है, कुछ ग्रंथकारों के अनुसार वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों को दो स्त्रियां एवं चार भाई भी होते हैं तथा व्यापार से इन्हें विशेष लाभ होता है।
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, २, ३, ५, १२, १५, २२, २५, ३२ व ९२ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, ५ वें वर्ष में ज्वर भय, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा होती है तथा यदि चन्द्रमा शुभ ग्रहों से दृष्ट हो और कुंडली के आयु भाव पीड़ित न हो तो वृश्चिक राशि वालों की औसत आयु ९० वर्ष तथा कुछ ग्रंथकारों के अनुसार ८७ वर्ष तक की होती है, प्रतिपदा, षष्ठी एवं एकादशी तिथि वृश्चिक राशि वालों के लिए अशुभ होती है, मेष, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि वाले व्यक्तियों से अच्छी मित्रता तथा मिथुन और कन्या राशि वालों से इनकी शत्रुता रहती है, ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र व अर्धरात्रि का समय वृश्चिक राशि वालों के लिए अशुभ रहता है।
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्ति देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त किंतु चंचल स्वभाव और कृश शरीर वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों का कद सामान्यतः लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति खरीद-फरोख्त में होशियार, धैर्यवान, इंसाफ पसंद करने वाले तथा प्रायः दो नाम वाले होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्ति घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं, इनकी संतान प्रायः कम ही होती है साथ ही तुला राशि वालों का भाग्योदय कुछ विलंब के साथ होता है, तुला राशि वाले व्यक्ति भोगी, धार्मिक, चतुर, बुद्धिमान, कला में कुशल, राजा प्रिय, पितृ सेवी, वस्तुओं का संग्रह करने वाले, विद्वान, धनी, अत्यंत बोलने वाले, मित्रों से युक्त, संगीत, कविता व युद्ध के प्रेमी, सभा-सोसाइटी और कंपनी इत्यादि में रुचि रखने वाले, अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में अन्य किसी पर भरोसा रखने वाले, लंबे कद वाले, बलवान, उन्नत नासिका वाले और वायु प्रकृति से पीड़ित होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्तियों को सर, उदर एवं चर्म रोग संभव रहता है साथ ही इन्हें जल भय भी रहता है, तुला राशि वाले व्यक्ति स्त्री के अधीन, बहु स्त्री भोगी अर्थात दो विवाह करने वाले, कृषि करने में चतुर तथा क्रय-विक्रय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।
तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ३, ५, ६, १५, २५, २६, ३६, ४६ व ५६ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, ५ वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा रहती है, यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह देखते हैं और आयु सुख को करने वाले अन्य योग न बनते हो और उपर्युक्त बताए गए वर्षों को पार कर लें तो ८५ वर्ष की औसत आयु प्राप्त करते हैं कुछ ग्रंथकारों के अनुसार तुला राशि वाले व्यक्तियों की आयु ६५ वर्ष ११ माह की होती है तथा इन्हें मृत्यु उपरांत ख्याति अवश्य ही मिलती है, तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तिथि अनिष्टकारी होती है तथा मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों से मित्रता एवं कर्क व सिंह राशि वालों से शत्रुता रहती है, रत्नों में इनके लिए हीरा शुभदायी होता है, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, शुक्रवार व आश्लेषा नक्षत्र और दिन का प्रथम प्रहर इनके लिए अनिष्टकारी होता है।
कन्या राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी मुख्य बातें
कन्या राशि: जानिए, कन्या राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कन्या राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी मुख्य बातें
कन्या राशि वाले व्यक्ति सत्य में रत (सत्य का पालन करने वाले), प्रिय वचन बोलने वाले होते हैं साथ ही कन्या राशि वाले व्यक्तियों के नेत्रों में लज्जा रहती है, कन्या राशि वाले व्यक्ति शास्त्रों को जानने वाले, विद्वान, दूसरे के द्रव्यों व दूसरे के मकान का सुख भोगने वाले होते हैं तथा इनके कंधे कुछ ढीले होते हैं तथा इन्हें पुत्र संतति भी थोड़ी होती है, कन्या राशि वाले व्यक्ति कुटुंब और मित्रों को आनंद देने वाले, धनी, अनेक कलाओं में कुशल, गुरु भक्त, देव-ब्राह्मण भक्त, धर्म-कर्म का पालन करने वाले, शास्त्रज्ञ, बुद्धिमान, प्रियभाषी, अनेक शत्रुओं से युक्त, मेधावी, उन्नत शरीर तथा कुछ गौर वर्ण वाले होते हैं, कन्या राशि वाले व्यक्तियों के गले, बाहु, पीठ अथवा लिङ्ग स्थान में तिल आदि के चिन्ह होते हैं तथा व्यक्ति कफ प्रकृति वाला तथा उदर रोगी होता है साथ ही कन्या राशि वाले व्यक्ति अत्यधिक कामी होने के कारण विपरीत लिंगी के साथ अत्यधिक प्रसन्न रहते हैं, कन्या राशि वालों के मित्र अधिक होते हैं किंतु इन्हे मित्रों का पूर्ण सुख नही मिल पाता तथा ऐसे व्यक्तियों को औषधि एवं भोजन के पदार्थों के व्यवसाय से अधिक लाभ होता है इसके अतिरिक्त शिक्षक एवं प्रोफेसर आदि में भी इनकी अच्छी उन्नति होती है, कन्या राशि वाले व्यक्ति पराई संपत्ति को भोगने वाले और अपने अधीन व्यक्तियों द्वारा भाग्यशाली सिद्ध होते हैं।
कन्या राशि वालों के लिए २, ३, ५, ९, १२, १३, १५, २१, २२, ३० व ४२ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है तृतीय वर्ष में अग्नि भय, पांचवें वर्ष में नेत्र पीड़ा, ९ वें या १३ वें वर्ष में किसी पदार्थ एवं दरवाजा आदि गिरने से चोट का भय, १५ वें वर्ष में सर्प भय, २१ वें वर्ष में वृक्ष अथवा दीवार से चोट का भय और ३० वें वर्ष में बाण, शस्त्र अथवा किसी कीट से चोट आदि का भय रहता है, यदि चंद्रमा पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो या चंद्रमा अच्छी स्थिति में हो या कुंडली के तृतीय व अष्टम भाव में शनि या शुक्र शुभ स्थिति में हो तो ऊपर लिखी हुई घटनाओं से व्यक्ति जीवित रह जाता है तथा ७९-८० वर्ष की औसत आयु को प्राप्त करता है, कन्या राशि वालों के लिए चतुर्थी, नवमी, द्वादशी एवं त्रयोदशी तिथि तथा कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि अशुभ होती है, बुधवार शुभ तथा मंगलवार अशुभ होता है, चैत्र मास, कृष्ण पक्ष, चतुर्थी, नवमी, द्वादशी, त्रयोदशी व कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि अनिष्टकारी होती है।
सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
सिंह राशि वाले व्यक्तियों से जुड़ी मुख्य बातें
सिंह राशि वाले व्यक्तियों की चेहरा कुछ बड़ा और ठोड़ी कुछ मोटी होती है, ऐसे व्यक्ति अभिमानी, पराक्रमी, स्थिर बुद्धि वाले और अपनी माता के विशेष प्यारे होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति वनों और पहाड़ों वाले जगहों पर घूमने के शौंकीन होते है साथ ही इनमें क्रोध की अधिकता रहती है, सिंह राशि वाले व्यक्ति धन-धान्य से युक्त, लक्ष्मीवान, विद्वान, सभी कलाओं में निपुण, अहंकारी, निष्ठुर, सत्यवादी, विदेश यात्रा पसंद करने वाले, शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले, तीक्ष्ण स्वभाव, उदार, मानसिक दुःख से पीड़ित, बुद्धिमान, निष्कपट, माता के प्रेमी, वस्त्र व सुगंधित द्रव्यों में रुचि रखने वाले, कला, संगीत व चित्र प्रेमी, उच्च पद प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील रहने वाले, किसी की अधीनता जल्द न स्वीकार करने वाले और कभी-कभी कुंडली में ग्रहों द्वारा चतुर्थ भाव को पीड़ित करने की अवस्था में बाल्यकाल में दो स्त्रियों द्वारा दुग्धपान कराए जाने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति शरीर से पुष्ट, पीठ पर तिल या मस्से से युक्त चिन्ह, पेट के वाम भाग में वात रोग, सर, दंत, गला एवं उदर रोग से पीड़ित, भूख-प्यास और मानसिक व्यथा से पीड़ित, स्त्रियों से शत्रुता व अनबन रखने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्तियों की संतान प्रायः कम होती है, चोर के माध्यम से सिंह राशि वालों को नुकसान उठाना पड़ता है तथा अग्नि से भय रहता है।
सिंह राशि वालों के लिए १, ५, ७, २०, २१, २८, ३० और ३२ वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में प्रेत-पिशाच आदि बाधा से पीड़ा, पाँचवें वर्ष में अग्नि भय, सातवें वर्ष में ज्वर पीड़ा एवं विसूचिका रोग, २० वें वर्ष में सर्प भय, २१ वें वर्ष में पीड़ा, २८ वें वर्ष में अपवाद और ३२ वें वर्ष में पीड़ा होती है, यदि अष्टम, तृतीय, लग्न पर आशुभ ग्रहों का प्रभाव न हो और शनि या चंद्रमा या शुक्र में से कोई एक या दो या तीनों तृतीय व अष्टम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति की औसत आयु ८७ वर्ष तक रहती है वहीं कुछ ग्रंथकारों ने बताया है कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति की आयु १०० से ११७ वर्ष तक होती है, सिंह राशि वालों के लिए तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि अशुभ होती है, रविवार किसी भी कार्य के आरंभ हेतु शुभ होता है, मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले व्यक्ति सिंह राशि वालों के लिए शुभचिंतक व सहयोगी अर्थात अच्छे मित्र होते हैं किंतु तुला, मकर और कुंभ राशि वाले व्यक्तियों से प्रायः इनकी शत्रुता रहती है, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, तृतीया, पंचमी, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि, मंगलवार, दोपहर का समय सिंह राशि वालों के लिए अनिष्टकारी रहता है साथ ही सिंह राशि वाले व्यक्तियों को जल से भी मृत्यु भय होता है।
शनि जयंती 10 जून 2021: शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय
शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय
१० जून २०२१ को शनि जयंती पड़ रही है शनि को न्याय का देवता कहा गया है शनि हमें हमारे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं जिन लोगों की कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो उन्हें जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है उनके कार्यों में बाधाएं आती हैं तथा किसी भी काम में पूरी एकाग्रता नहीं बन पाती है समस्त नव ग्रहों में शनि बहुत धीमी गति से भ्रमण करते है जिस कारण उन्हें एक राशि पार करने में ढाई वर्ष लगते हैं वर्तमान में शनि मकर राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं।
जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होता है, उनके दैनिक जीवन में कुछ खास घटनाएं होने लगती हैं जिनसे हम बिना कुंडली देखे ही ये अंदाजा लगा सकते हैं कि शनि हमारी कुंडली में शुभ है या अशुभ तो आइए जानते हैं उन घटनाओं के बारे में:-
कुंडली में शनि के अशुभ होने की पहचान
१. जिसकी कुंडली में शनि अशुभ होता है उनके जूते-चप्पल बार-बार टूट जाते हैं या गुम हो जाते हैं।
२. यदि शनि अशुभ हो तो व्यक्ति नया ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाता है, पढ़ाई में मन नहीं लगता और इस क्षेत्र में उसे कोई उपलब्धि भी प्राप्त नहीं हो पाती है।
३. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ हो तो उसका विवाह होते ही ससुराल पक्ष में कोई हानि हो सकती है।
४. यदि कोई व्यक्ति घर बनवा रहा है और कोई अशुभ घटना घर बनवाते वक्त हो जाए तो यह शनि के अशुभ होने का संकेत है।
५. कुंडली में शनि अशुभ हो तो व्यक्ति का मन बुराई की ओर, कुसंगति, नशे की ओर झुकने लगता है।
६. शनि यदि अशुभ हो तो जमा धन का नाश होता है, कोई बीमारी हो जाती है और शरीर कमजोर होने लगता है।
७. कुंडली में शनि की विपरीत स्थिति के कारण व्यक्ति आलसी हो जाता है इस कारण उसके काम ठीक तरह से नहीं हो पाते हैं और सफलता दूर होती जाती है।
८. जब किसी व्यक्ति के चेहरे पर हमेशा थकान, तनाव दिखाई देने लगे तो यह भी शनि के अशुभ होने का संकेत है।
९. शनि यदि अशुभ हो तो जवानी में ही व्यक्ति के बाल सफेद हो जाते हैं और बाल झड़ने लगते हैं और व्यक्ति को जोड़ों में दर्द रहता है।
१०. शनि अशुभ होने पर आंखें कमजोर हो जाती हैं, कमर दर्द की शिकायत रहती है।
शनि जयंती पर करें यह विशेष उपाय निश्चित ही लाभ होगा:-
शनि जयंती के खास उपाय
१. काली उर्द, काला तिल, सरसों का तेल किसी निम्न वर्ग के प्राणी को दक्षिणा के साथ दान करें।
२. सरकारी अस्पतालों में दवाईयां दान करें।
३. हनुमान जी को तिल के तेल में सिंदूर घोलकर लगाएं तथा सुंदरकांड का पाठ करे व ११ बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।
४. २१ आम के पत्तों पर चंदन से “राम” लिखकर उन पत्तो को एक के ऊपर एक रखें उसके बाद उस आम के पत्ते को मौली से लपेटकर २१ गांठ लगाएं तथा शनि मंत्रों का १ माला जाप कर के उन पत्तों को किसी पीपल वृक्ष के पास रखें या नदी में प्रवाहित करें तथा पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दिया अर्पित कर के १०८ बार “नमः शिवाय” मन्त्र का जाप करें।
बहुत से लोग मेरे पास आते हैं कि उनके रिश्तेदारों को पीलिया नामक रोग हो गया है जो बहुत उपचार करने पर भी ठीक नही हो रहा अतः आज मैं इस लेख के माध्यम से पीलिया रोग को ठीक करने का महाशक्तिशाली शाबर मंत्र बताता हूँ:-
।।ॐ नमो बीर बैताल असराल नरसिंह देव तुषादि पीलिया कूँ मिटाती कारै झारै पीलिया रहे न नेक निशान जो कहीं रह जाए तो हनुमंत की आन मेरी भक्ति, गुरु की शक्ति, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।।
विधि:-
साधक इस मंत्रानुष्ठान को हनुमान जी की मूर्ति के सामने 1,000 बार रोज लगातार 21 दिन तक जप कर सिद्ध कर ले और 21 वें दिन हनुमान जी को धूप, दीप, नैवेध, चोला चढ़ाए तत्पश्चात जब कभी भी कोई पीलिया ग्रस्त रोगी साधक के पास आए तो रोगी को बैठाकर कांसे की कटोरी में सरसों का तेल भरकर रोगी के सर पर रखे और हाथ में कुशा (एक प्रकार की घास) से तेल को हिलाते हुए मन्त्र को 21 बार बोले जब तेल पीला हो जाए तब कटोरी को रोगी के सर से नीचे उतार लें ऐसा कम से कम 3 दिन तक करें पीलिया रोग ठीक हो जाएगा रोग ठीक होने के बाद हनुमान जी को रोगी प्रसाद चढ़ाए व गाय को घास व पक्षियों को अनाज खिलाए।
विशेष:- साधक को इस उपाय के करने की दक्षिणा नही लेनी चाहिए।
सूर्य का वृषभ राशि से गोचर १४ मई २०२१: जानें विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
सूर्य का वृषभ राशि से गोचर
सूर्य १४ मई २०२१ की मध्य रात्रि ०३:०३ पर मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की मेष की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की वृषभ की सक्रांति लगेगी, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में लगभग ३० दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के वृषभ राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, अचानक धन लाभ होने के योग बनेंगे, दाहिने आँख में किसी प्रकार की कोई तकलीफ संभव है, कुटुंब से मतभेद संभव रहेगा, तामसिक चीजों के सेवन से परहेज करें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर पहले भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे अतः क्रोध पर नियंत्रण रखें, नव दंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, किसी संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, सर दर्द की समस्या रह सकती है।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, खर्चों में वृद्धि होगी, कार्यस्थल पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, नेत्र में चोट लगने के योग बनेंगे, गर्म चीजों व अधिक चिकनाई वाली चीजों के सेवन से परहेज करें।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे, आय में वृद्धि होगी, बड़े भाई का सहयोग प्राप्त होगा, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, रुका हुआ धन अचानक प्राप्त होने के योग बनेंगे, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, यदि आप सराफा व्यापारी है तो सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, प्रेमियों के लिए सूर्य का यह गोचर मिला-जुला रहेगा।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए सूर्य पहले भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, घर के वातावरण में तनाव वाला माहौल रह सकता है अतः तनाव लेने से बचें, लंबे समय से रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, इस समय नौकरी परिवर्तन हेतु किए गए प्रयास निकट भविष्य में लाभकारी सिद्ध होंगे, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, पराक्रम में वृद्धि होगी, उन्नति के नए मार्ग बनेंगे या एकाधिक आय के स्त्रोत बनेंगे, भाग्योदय हेतु अधिक प्रयास करना होगा, पिता व गुरु के साथ वैचारिक मतभेद संभव है, धार्मिक कार्यों में रुचि बड़ेगी।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप ससुराल पक्ष का सहयोग प्राप्त होगा किंतु ससुराल पक्ष से कुछ विवाद भी संभव रहेगा, जीवनसाथी से विवाद संभव है, तामसिक चीजों व मदिरा या अन्य नशों से परहेज करें अन्यथा किसी गंभीर बीमारी के प्रभाव में आने के योग बनेंगे, बड़े भाई से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, धार्मिक कार्यों दवाईयों पर धन व्यय होंगे।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह में दिक्कतें आएंगी, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें तो हालात काफी हद तक आपके पक्ष में होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्ति हेतु अत्यधिक प्रयत्न करना होगा, किसी पुरुष के सहयोग से अधूरे कार्य पूर्ण होंगे।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, अचानक धन लाभ होने से किसी पुराने ऋण से मुक्ति मिलेगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, संतान को कष्ट संभव है, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, बड़े भाई से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें व अधिक कार्य करने से बचें, प्रेमियों के लिए सूर्य का यह गोचर सामान्य रहेगा।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, नौकरी हेतु प्रयासरत लोगों को निकट भविष्य में अच्छी नौकरी प्राप्त हो सकती है, जीवनसाथी से विवाद संभव है, छाती या श्वास नली में इन्फेक्शन या अन्य किसी कारण से कष्ट संभव है।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, पराक्रम बड़ा रहेगा अर्थात आप मेहनत से पीछे नही हटेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, भाग्य में वृद्धि होगी।
कर्क राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कर्क राशि: जानिए, कर्क राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कर्क राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कर्क राशि वाले व्यक्ति स्त्री निर्जित अर्थात स्त्रियों से जीता हुआ या स्त्रियों के वशीभूत , स्थूल गले वाला और मित्रवान होता है, ऐसे व्यक्ति धनवान होते हैं तथा इनके पास एक से अधिक मकान होते हैं (चतुर्थ भाव पर शुभ ग्रहों का संबंध होने पर ही यह योग फलित होगा।) साथ ही ऐसे व्यक्तियों की कमर मोटी किंतु कद छोटा होता है, कर्क राशि में जन्मे व्यक्ति बुद्धिमान और जलविहार के शौंकीन होते हैं तथा अपेक्षाकृत तेज चलते हैं, इनको थोड़े पुत्र होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति कुटिल भी होते हैं, कर्क राशि वाले व्यक्ति परोपकारी, वस्तुओं के संग्रह में कुशल, गुणी, माता-पिता व गुरु के भक्त, सुगंधित वस्त्रुओं के प्रति आकर्षिक होने वाले, जल क्रीड़ा प्रेमी, मित्रों में प्रिय, वाटिका प्रेमी, दयालु, मिलनसार, प्रेमी एवं अधिकारी होते हैं, इनके शरीर के बाएं भाग में अग्नि भय और मस्तक पीड़ा से व्यथा होती है, ऊंचे स्थान से गिरकर चोट लगने की संभावना भी रहती है या अग्नि, जल से चोट तथा किसी उच्च अधिकारी द्वारा दोषी निश्चय किया जाने का भय रहता है, इनका कद मंझोला और गाल पुष्ट होते हैं, कर्क राशि वाले व्यक्ति सुंदर तथा कफ प्रकृति और स्त्री के वशीभूत रहते हैं, कर्क राशि वाले व्यक्तियों के जीवनसाथी उनके प्रति समर्पित किंतु कुछ बंधन सा अनुभव करने वाले और इसी कारण से विवादपूर्ण स्थिति के उत्पन्न होने से मानसिक तनाव लेने वाले होते हैं, स्त्री संतति की अधिकता रहती है साथ ही कर्क राशि वालों की संतानों में कोई एक संतान विशेष उन्नति प्राप्त करने वाली होती है साथ ही ऐसे व्यक्ति अपनी इच्छा के विरुद्ध विपरीत लिंगी व्यक्ति से संबंध बनाने वाले और उससे भयभीत रहने वाले होते हैं, कर्क राशि वालों की व्यवसाय के माध्यम से अधिक उन्नति होती है किंतु धन को लेकर चिंता हमेशा बनी रहती है, कर्क राशि वाले व्यक्ति जलाशय के समीप निवास करने की चाह रखने वाले या जल की यात्रा करने के शौंकीन या तरल पदार्थों के व्यापारी और गणित एवं ज्योतिष के प्रेमी होते हैं।
कर्क राशि वालों के लिए १, ३, १२, २१, ३१, ३२, ४१, ५१, ६१ वां वर्ष आशुभ रहता है प्रथम वर्ष में रोग, तृतीय वर्ष में लिंग स्थान में पीड़ा, ३१ वें वर्ष में सर्प भय तथा ३२ वें वर्ष में रोग का भय रहता है, कुंडली में शुभ योग होने पर कर्क राशि वालों की औसत आयु ८५ वर्ष तो कुछ ग्रंथों के अनुसार ८८ से ९६ तक होती है, द्वितीया, सप्तमी एवं द्वादशी तिथियाँ इनके लिए अशुभ होती है, सिंह, मिथुन और कन्या राशि वाले व्यक्ति इनके लिए अच्छे और मेष, वृषभ, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ व मीन राशि वाले व्यक्ति साधारण मित्र होते हैं साथ ही कर्क राशि वालों के लिए माघ मास, शुक्ल पक्ष, नवमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र व शुक्रवार अनिष्टकारी होता है।
मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मिथुन राशि: जानिए, मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बाते
मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के नेत्र काले व बाल कुछ घुंघराले होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति स्त्री विलास में बहुत अनुरक्त रहते हैं परंतु बुद्धिमान भी होते हैं और दूसरे की मंशा को बड़ी सहजता से समझ जाते हैं, मिथुन राशि वालों की नाक ऊंची होती है और इन्हें नाच-गाना अत्यंत प्रिय होता है, ऐसे व्यक्ति अपने मकान में (कमरे के अंदर) ही रहना अधिक पसंद करते हैं अर्थात मेष राशि वालों की तरह इन्हें भ्रमण पसंद नही होता है, मिथुन राशि वाले व्यक्ति ग्रामीण स्त्रियों के लिए चतुर, विद्वान, दृढ़ मित्र, मिष्ठान के प्रेमी, सुशील, कम बोलने वाले, कुटुंब के प्रति समर्पित, कौतुक प्रेमी, रति प्रिय, गुणी, भोगी, दानी, धार्मिक कार्यों में रुचि रखने वाले, चतुर, शास्त्रों के ज्ञाता, शांतचित्त परंतु मिश्रित स्वभाव वाले, कुशाग्र बुद्धि वाले, पुस्तक प्रेमी, मानसिक एवं शारीरिक कार्य में तत्पर रहने वाले, सर्व प्रिय व सर्व प्रेमी, गौरव युक्त, दूत कर्म करने वाले, अधिक भोजन करने वाले, रूपवान और हास्यशील होते हैं, मिथुन राशि वाले व्यक्तियों की आँखे गुलाबी रंग की होती है और शरीर पर तिल, लहसन आदि का निशान रहता है, ऐसे व्यक्ति काम शास्त्र में निपुण अतएव स्त्री सुखों व स्त्रियों का इच्छुक होते हैं जिस कारण से कभी-कभी इनकी दो शादी भी होती है किंतु संतानों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहती है, मिथुन राशि वाले व्यक्ति भाग्यवान होते है और कदापि ही (अशुभ ग्रहों के योग के कारण) धनहीन होते हैं, ऐसे व्यक्तियों को अचानक किसी अपरिचित स्थान से धन मिलना संभव होता है और ऐसे व्यक्तियों के एक से अधिक व्यवसाय होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की आय एकाधिक माध्यमों से होती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के व्यवसाय में परिवर्तन भी होता रहता है।
५, ८, १०, १६, १८, २०, २८, ५२ व ९४ वें वर्ष अनिष्टकारी होते हैं, ५ वें वर्ष में वृक्ष, १६ वें वर्ष में शत्रु, १८ वें वर्ष में कर्ण पीड़ा, २० वें वर्ष में अत्यंत पीड़ा और ४८ वें वर्ष में मृत्यु तुल्य कष्ट होता है, मिथुन राशि वाले व्यक्ति बाल्यावस्था में अति सुखी, मध्यमावस्था में अल्प सुखी और वृद्धावस्था में दुःखी होते हैं, यदि चंद्रमा की शुभ दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्तियों की औसत आयु ८० वर्ष तक की रहती है, प्रतिपदा, सप्तमी और द्वादशी तिथि मिथुन राशि वालों के लिए अनिष्टकारी होती है, वृषभ, सिंह, कन्या व तुला राशि वाले व्यक्तियों से इन्हें सहयोग प्राप्त होता रहता है, कर्क राशि वालों से इनकी शत्रुता रहती है, मिथुन राशि वालों के लिए पन्ना अत्यंत शुभकारी रहता है किंतु वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, द्वादशी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र एवं दोपहर का समय इनके लिए अनिष्टकारी रहता है।