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मेष लग्न और आप: जानिए, मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व
मेष लग्न वालों का व्यक्तित्व
मेष लग्न के व्यक्ति पुत्रवान, तेजस्वी, क्रोधी, वीर, कठोर चित्त, सृजनात्मकता स्वभाव अर्थात मन में हमेशा ही कुछ नया करने की चाह रखने वाले, भावुक, झगड़ालू, स्पष्ट वक्ता, साहसी, उद्दमी अर्थात मेहनती, वीर, मेधावी और सतत अर्थात किसी न किसी कार्य में संलग्न रहने वाले होते हैं, बचपन में इन्हें अनेक हानियों का सामना करना पड़ता है तथा मेष लग्न वाले व्यक्ति स्वतंत्रता प्रिय और उदार प्रकृति के होते हैं साथ ही मेष लग्न वाले व्यक्ति दूसरों की जरूरत पड़ने पर सब कुछ भूल कर उसकी सहायता भी पूरे दिल से करते हैं, मेष लग्न के व्यक्ति किसी भी कार्य को संपन्न करने में निर्भय एवं निःसंकोच होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति उच्च पद पर आसीन होते हैं तथा इनमें नेतृत्व करने की अद्भुद क्षमता होती है, मेष लग्न के व्यक्तियों के शरीर के किसी स्थान पर चिन्ह अवश्य होता है।
मेष लग्न वाले व्यक्ति झूठ बोलने में भी संकोच न करने वाले, कम खिल-खिला कर हँसने वाले, अभिमानी, शुभ आचरण वाले, गलत कार्यों से नफरत करने वाले, निष्कपट, महत्वाकांक्षी, बुद्धि व युक्ति लगाने में निपुण, युद्ध कला में कुशल, मुँहफट, सदैव लड़ने-झगड़ने को तैयार, सामने से वार करने वाले होते हैं, शास्त्रकारों का मत है कि यदि किसी महिला का जन्म मेष लग्न में हुआ हो तो ऐसी महिला सच बोलने वाली, स्पष्ट वक्ता, गन्दगी से नफरत करने वाली, कठोर चित्त, बदला लेने को सदैव तत्पर रहने वाली, कभी-कभी कठोर शब्दों का इस्तेमाल करने वाली, कफ से पीड़ित व अपने स्वजनों से प्रीति रखने वाली होती है।
मेष लग्न में जन्मे व्यक्तियों के लिए सूर्य सबसे अधिक सुखदाई ग्रह है, बृहस्पति भी सुखदाई ग्रह है किंतु सूर्य से कम शुभ होता है, साधारण नियम के अनुसार यदि नवमेश और दशमेश एक हों तो यह राजयोग होता है किंतु मेष लग्न की कुंडली पर यह सूत्र लागू नही होता क्योंकि पराशर ऋषि का मत है कि यदि दशमेश और एकादशेश एक ही ग्रह हों तो राजयोग भंग हो जाता है अतएव मेष लग्न वालों के लिए गुरु व शनि का संबंध अनिष्टकर होता है, मेष लग्न वालों के लिए शनि, बुध और शुक्र अशुभ ग्रह होते है, शनि और बुध प्रायः मारकेश होते हैं, शुक्र द्वितीयेश व सप्तमेश होने से मारक ग्रह बनता है किंतु प्रायः मृत्यु दायक नही होता है, मेष लग्न वालों के लिए यदि चंद्र और बृहस्पति, मंगल और राहु, शुक्र व राहु का यदि संबंध बने तो राजयोग होता है, मेष लग्न वालों के लिए मंगल अष्टमेश होने पर भी बहुत अधिक अशुभ नही होता है, यदि मेष लग्न पहले नवमांश में हो तो व्यक्ति अपने प्राकृतिक स्वभाव को विशेष रूप से प्रकट करता है।
मेष लग्न वाले व्यक्तियों की कुछ अन्य विशेष बातें:-
१. मेष लग्न वाले व्यक्ति की कुंडली में यदि लग्न में ही मंगल स्थित हो तो व्यक्ति अत्यधिक क्रोधी होता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों को बहुत जल्दी और छोटी-छोटी बातों पर भी क्रोध आता है।
२. यदि मंगल लग्न में ही हो तो व्यक्ति दुबला-पतला अर्थात दुर्बल होता है किंतु अपने प्रयासों से बलवान बन जाता है तथा इनके सिर या माथे पर चोट का चिन्ह भी रहता है।
३. मेष लग्न के व्यक्तियों को चेचक बीमारी की संभावना रहती है।
४. मेष लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः ज्वर, अग्नि व शस्त्र भय तथा मस्तिष्क जनित रोग की समस्या रहती है।
शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
वक्री शनि 27 मई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के फल
शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
“ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार” कर्म व न्याय के देवता शनि 27 मई 2021 गुरुवार को दिन के ०७:०९ पर मकर राशि व श्रवण नक्षत्र के द्वितीय चरण में वक्री हो जाएंगे तथा 29 सितंबर 2021 को रात्रि के ०१:२६ पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मार्गी हो जाएंगे, शनि न्याय, नियम, कर्मादि के ग्रह हैं जिनके वक्री होने से विभिन्न राशियों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ेगा तो चलिए जानते हैं विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के गोचर से क्या प्रभाव पड़ेगा।
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के लिए शनि दशम व एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से ही वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस दौरान कार्यक्षेत्र में कुछ अड़चनें आ सकती है, कार्यक्षेत्र में मन लगाकर दैनिक नियमों का पालन करते हुए कार्य करें, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, सामाजिक कार्यों को पूर्ण निष्ठा से करें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे जो कि अनिष्टकारी सिद्ध होंगी अतः यात्राओं को टालने का प्रयास करें, विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी अच्छा रहने वाला है, नियमों का पालन करें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए शनि नवम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर भाग्य स्थान से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे शनि विरक्ति का ग्रह है अतः इस दौरान धर्म-कर्म के क्षेत्र में मन में भटकाव रहेगा अतः पूजा-पाठ व जप-तप-दान आदि पूर्णतया नियम से करें, मन को एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, कार्यक्षेत्र के लिए शनि का वक्री अवस्था से गोचर शुभफलदाई रहेगा, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद खत्म होंगे, यदि आप पहले से घर लेने का सोच रहे हैं तो यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए शनि अष्टम व नवम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः सेहत का विशेष ख्याल रखें, कुछ देर ध्यान करें जिससे मन शांत रहेगा, भोजन आदि का विशेष ख्याल रखें, पशु-वाहन व हथियार से सावधानी बरतें, छोटे भाई-बहन व मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यक्षेत्र के लिहाज से शनि का वक्री अवस्था में गोचर मिला-जुला फल देगा, धर्म-कर्म व भाग्य में वृद्धि होगी, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी जिस कारण से कुछ तनाव रह सकता है अतः तनाव लेने से बचें।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए शनि सप्तम व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, दाम्पत्य जीवन की मर्यादाओं का पालन करें, इस दौरान आपको जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होता रहेगा, पैतृक संपत्ति प्राप्त होने या अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आप किसी नए कार्य का आरंभ करना चाहते हैं तो आपके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए शनि षष्ठ व सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से आप जीवनसाथी के वशीभूत हो सकते हैं कहने का आशय यह है कि इस दौरान आपके जीवनसाथी आप पर हावी होने का प्रयास करेंगे, यदि आपके कोर्ट-कचहरी में कोई मुकदमा चल रहा है तो यह समय आपके लिए अशुभ रहने वाला है, स्वास्थ्य के लिहाज से आपके लिए यह अच्छा समय रहेगा, जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं उनको अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग है।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए शनि पंचम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को और अधिक अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, प्रेमयों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन अप्रसन्न रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें विशेषतः उदर संबंधित जैसे अपच आदि की समस्या हो सकती है, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होने के कारण से आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने के योग हैं, विद्यार्थियों के लिए यह समय बहुत ही शुभ रहने वाला है।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए शनि चतुर्थ व पंचम के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे साथ ही लग्न को अपनी उच्च राशि तुला में देखने के कारण से यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, किसी संपत्ति को क्रय करने का विचार बना रहे हैं तो इस समय में खरीदना आपके लिए शुभ रहेगा, पारिवारिक निर्णयों को लेते वक्त थोड़ा सतर्क रहें, माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए इस समय बेहद शुभ रहेगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि तृतीय व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा स्थान परिवर्तन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, यदि आप कोई संपत्ति खरीदना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए शुभ रहेगा, आय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, शनि के मार्गी अवस्था में पुनः आने पर ही कार्यक्षेत्र में बदलाव करना शुभ रहेगा, छोटे भाई-बहन का ख्याल रखें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए शनि द्वितीय व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह वक्री गोचर काल आपके लिए शुभ रहेगा नए मित्र बनेंगे व नए मित्रों से लाभ भी होगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त होगा, आय के साथ व्यय में भी वृद्धि होगी, आध्यात्मिक उन्नति के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में बदलाव करने का सोच रहे हैं तो शनि के मार्गी होने तक रुक जाएं।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए शनि प्रथम तथा द्वितीय भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस वक्री गोचर काल आपको सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए, दैनिक दिनचर्या का पालन करें, मिर्च-मसले वाले व्यंजनों से परहेज करें, कार्यक्षेत्र में अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, अहंकार करने से बचें, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें अन्यथा दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग बनेंगे।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए शमी प्रथम व द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे कारण वश व्यय में वृद्धि होगी, दान (सरसों तेल व काली उर्द) करें लाभ होगा, धर्म-कर्म से मन हटेगा अतः धर्म-कर्म के प्रति समर्पित रहें, आध्यात्म की ओर झुकाव रहेगा, स्वास्थ्य में पहले से बेहतर अनुभव करेंगे किंतु स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव है।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए शनि एकादश व द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, आपका धन आपके कार्य की वृद्धि में व्यय हो सकता है, मान-सम्मान व ख्याति में वृद्धि होगी, स्थान परिवर्तन करना बेहद शुभ रहेगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, मन एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह वक्री गोचर काल बेहद शुभ रहेगा, विद्यार्थियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, संतान को कष्ट संभव है, संतान को समझने का प्रयास करें अन्यथा तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी।
बहुत से व्यक्तियों के मन में यह प्रश्न रहता है कि मेरे बच्चे के किसी मास में दाँत निकलने का क्या फल होगा इस विषय पर मुहर्त चिंतामणि के संस्कार प्रकरण में कहा गया है:-
मासे चेत्प्रथमे भवेत्सदशनो बालो विनश्येत् स्वम्।
हन्यात् स क्रमतोSनुजातभगिनीमात्रग्रजान्द्वयादिके।।
मीन राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मीन राशि: जानिए, मीन राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मीन राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मीन राशि वाले व्यक्ति सुंदर होते हैं विशेष तौर पर इनकी दृष्टि बहुत सुंदर होती है, ऐसे लोग विद्वान, कृतज्ञ, अपनी स्त्री में संतुष्ट रहने वाले अर्थात अन्य स्त्री प्रसंग से रहित, भाग्यवान व जल से उत्पन्न पदार्थों (आज-कल के समय में समुद्र पार या नदी पार से आने-जाने वाले पदार्थों को जल से उत्पन्न पदार्थ मानने चाहिए।) द्वारा धन लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं साथ ही शत्रुओं को परास्त कर उन पर विजय प्राप्त करने वाले होते हैं, मीन राशि वाले व्यक्ति धनी, मान्य, नम्र स्वभाव, भोगी, प्रसन्नचित्त, माता-पिता, देवता-गुरु भक्त, उदार, चतुर, निर्मल बुद्धि, शत्रु विजयी, निष्कपट, ईमानदार, विद्वान, उत्तम वाचाल करने वाले, सहज ही उदास हो जाने वाले, कभी-कभी मादक द्रव्य एवं दुष्टाचार की ओर झुकाव वाले व उत्तम रूपवान वाले होते हैं, किसी ऊँचे स्थान से गिरकर चोट लगने का भय भी इन्हें रहता है साफ ही ऐसे व्यक्तियों को कफ की समस्या भी रहती है, मीन राशि वाले व्यक्तियों की कुंडली में यदि बहु विवाह योग हो तो इनके ४ विवाह होते हैं, मीन राशि वाले व्यक्ति स्त्री के वशीभूत और स्त्री से प्रीति युक्त होते हैं।
मीन राशि वाले व्यक्तियों के लिए ५, ८, १०, १९, २२, २४, २७ व ५३ वां वर्ष अनिष्टकारी रहता है ५ वें वर्ष में जल भय, ८ वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, २२ वें वर्ष में महती पीड़ा और २४ वें वर्ष में पूर्व दिशा की यात्रा से कष्ट होता है, यदि चंद्रमा शुभ ग्रह से दृष्ट या युक्त और अष्टम व तृतीय भाव बली हो तो मीन राशि वालों की औसत आयु ९० वर्ष तक की रहती है, द्वितीया, पंचमी, दशमी एवं पूर्णिमा तिथि कष्टप्रद होती है, मीन राशि वालों के लिए मेष, कर्क, सिंह एवं धनु राशि वाले मित्र, वृष, तुला, मकर व कुंभ शत्रु तथा कन्या और मिथुन सम होते हैं, बुधवार अनिष्टकारी होता है, बृहस्पतिवार बेहद शुभ रहता है, मीन राशि वाले व्यक्ति यदि किसी यात्रा पर जा रहे हों और उन्हें वृद्ध मनुष्य रास्ते में दिखाई दे तो उनकी सेवा किए बिना आगे जाना अशुभ रहता है, आश्विन मास, कृष्ण पक्ष, द्वितीया तिथि, बृहस्पतिवार व कृत्तिका नक्षत्र, सांयकाल का समय अरिष्टकारी होता है।
कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कुंभ राशि: जानिए, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कुंभ राशि वाले व्यक्तियों का शरीर अपेक्षाकृत लंबा होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति पुष्पों और सुगंधित द्रव्यों के शौकीन होते हैं, कुंभ राशि वाले व्यक्ति कभी क्षय को प्राप्त होते हैं और कभी वृद्धि को कहने का आशय यह है कि कुंभ राशि वाले व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव आता रहता है, कुंभ राशि वाले व्यक्ति दयालु, दानी, मिष्ठान भोजी, धर्म कार्य में जल्दी करने वाले, प्रियभाषी, आलसी, प्रसन्नचित्त, विलक्षण बुद्धि, मित्रों के प्रिय, शत्रुओं पर विजय पाने वाले, यात्रा प्रिय, अत्यंत कामी एवं सभा सोसाइटी में प्रेम रखने वाले होते हैं, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों का प्रायः गला लंबा, पैर तथा पैर के जोड़ और पीठ थोड़ी लंबे और मोटे होते हैं एवं पेट भारी, चौड़ा मुख तथा बाल रूखे होते हैं, ऐसे व्यक्तियों को किसी ऊंचे स्थान से गिरकर चोट लगने या जल से भय रहता है, काँख, पैर और मुख में तिल आदि का चिन्ह रहता है तथा कफ रोग से पीड़ा रहती है, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के प्रायः दो विवाह होते हैं या एकाधिक संबंध होते हैं, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों को विद्या विभाग, कला और राजनीति से जुड़े कार्यों में रुचि रहती गया, कुंभ राशि वाले व्यक्ति किसी गुप्त मंडली के सदस्य भी होते हैं।
कुंभ राशि वालों के लिए १, ५, १२, १५, २५, २८, ३५ व ४५ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में पीड़ा, ५ वें वर्ष में अग्नि भय, १२ वें वर्ष में सर्प अथवा जल भय और २८ वें वर्ष में चोर द्वारा धन हानि होती है, यदि चंद्रमा शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तथा आयुष्य भाव को कोई क्रूर ग्रह न देखते हैं तो कुंभ राशि वाले व्यक्तियों की औसत आयु ९० वर्ष तक की होती है किंतु अन्य ग्रंथकारों में अलग-अलग आयु के विषय पर मत है उनके अनुसार कुंभ राशि वाले व्यक्तियों की औसत आयु ९५ वर्ष तक की होती है, कुंभ राशि वाले व्यक्ति ३० वर्ष की आयु के बाद अच्छी उन्नति करते हैं किंतु इनके जीवन में कभी हानि तो कभी लाभ वाली स्थिति प्रायः बनी ही रहती है, कुंभ राशि वालों के लिए द्वितीया, तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथियाँ अशुभ होती है, शनिवार शुभफलदाई होता है, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के लिए वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला और मकर राशि वाले मित्र तथा मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक राशि वाले प्रायः इनके शत्रु रहते हैं, आश्विन मास, कृष्ण पक्ष, द्वितीया तिथि, गुरुवार, संध्याकाल समय एवं कृत्तिका नक्षत्र अनिष्टकारी रहता है।
मकर राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मकर राशि: जानिए, मकर राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मकर राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
मकर राशि वाले व्यक्तियों के शरीर के नीचे का भाग (कमर से पैर तक) कृश होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों में सत्व (शारीरिक, मानसिक तथा आत्मिक शक्ति) काफी होता है, ऐसे व्यक्ति दूसरों की बात मानते है किंतु स्वभाव से आलसी होते हैं, मकर राशि वाले व्यक्ति धर्म ध्वज होते हैं अर्थात ऐसे व्यक्तियों का बाहरी आवरण बहुत धार्मिकता का होता है, मकर राशि वाले लोग घूमने के शौकीन, भाग्यवान किंतु लज्जाहीन एवं वात रोग से पीड़ित रहते हैं, मकर राशि वाले व्यक्ति धीर, विद्वान, राजा का प्रिय, दयावान, सत्य वक्ता, दानी, अलसी, गान विद्या निपुण, क्रोधी, दंभी, बातों को न भूलने वाला अर्थात श्रुतिधर, भाग्यवान, काव्य कुशल, लोभी, दृढ़ प्रतिज्ञ, ख्यातिमान परंतु कोई सुविख्यात और कोई कुविख्यात होता है साथ ही यदि कुंडली में अच्छे योग हों तो व्यक्ति की बड़ी ख्याति होती है अथवा व्यक्ति उच्चपदाधिकारी होता है, मकर राशि वाले व्यक्ति स्वम् के स्वभाव के कारण स्वम् के लिए लोगों को शत्रु बना लेते हैं जिससे इनको बड़ी हानि होने की संभावना रहती है, मकर राशि वाले व्यक्तियों का सुंदर रूप, मोटा शरीर, कमर भाग पतला, सुंदर नेत्र, काले केश, गर्दन में तिल का चिन्ह व जल से भय युक्त होते हैं, मकर राशि वाले जातक अपनी स्त्री और संतानों से अत्यंत प्रेम करते हैं किंतु ऐसे व्यक्तियों की स्त्री उनके विपरीत कुल की या स्वभाव से बिल्कुल विपरीत और उम्र में कुछ बड़ी होती है अथवा जातक ऐसी स्त्रियों के साथ अनैतिक संबंध बनाने वाला (कुंडली में अशुभ योग होने पर ही यह फल होता है।) तथा अपने कुल में उत्तम वृत्ति का करने वाला होता है।
मकर राशि वालों के लिए ३, ५, ७, १०, १३, २०, २३, २५ व ३५ वर्ष अनिष्टकारी होता है, ५ वें वर्ष में पीड़ा, ७ वें वर्ष में जल भय, १० वें वर्ष में वृक्ष अथवा ऊंचे स्थान से गिरकर चोट का भय, १२ वें वर्ष में शस्त्र भय, २० वें वर्ष में ज्वर बाधा, २५ वें वर्ष में हाथ व पैरों में पीड़ा तथा ३५ वें वर्ष में बाएं अंग में अग्नि से भय होता है, यदि चंद्रमा शुभ दृष्ट हो तथा अन्य किसी प्रकार के आयु बाधक योग ग्रह न बनाते हों तो व्यक्ति की औसत आयु ९० वर्ष तक की रहती है कुछ ग्रंथकारों के अनुसार औसत आयु ९३ वर्ष बतलाई गयी है, चतुर्थी, नवमी व पूर्णिमा तिथि इनके लिए अशुभ होती है, शनिवार सदा ही शुभफलदाई रहता है, वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला और कुंभ राशि वाले इनके मित्र व मेष, कर्क, सिंह तथा वृश्चिक राशि वाले इनके शत्रु रहते हैं।
धनु राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
धनु राशि: जानिए, धनु राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
धनु राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
धनु राशि वाले व्यक्तियों की नाक, कान, चेहरा व कंठ अपेक्षाकृत बड़ा होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति किसी न किसी कार्य में लगे रहते हैं अर्थात एक जगह खाली नही बैठते तथा धनु राशि वाले व्यक्ति बोलने में बहुत प्रगल्भ और त्यागी होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों की लंबाई सामान्य से कुछ कम रहती है किंतु यदि लग्नेश लग्न में ही स्थित हो या गुरु की लग्न पर दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्तियों का कद लंबा होता है, धनु राशि वाले व्यक्ति कुछ झुक कर चलते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति साहसी और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों को समझा कर ही अपने वश में किया जा सकता है अर्थात धनु राशि वाले व्यक्ति दाम, दंड और भेद से चिढ़ते हैं तथा प्रेम के लिए कुछ भी कर देते हैं, धनु राशि वाले व्यक्ति विद्वान, धार्मिक, जनप्रिय, देव भक्त, सभा में व्याख्यान देने वाले, श्रेष्ठ, पवित्र, काव्य कुशल, नाच-गाने के शौकीन, कुशल, कुल दीपक, दानी, भाग्यवान, सच्चे मित्र, निष्कपट, दयावान, स्पष्ट वक्ता, क्लेश सहन करने वाले, शांत स्वभाव, अल्प भोजी, निर्मल बुद्धि, कोमल भाषी, धनी, कार्य तत्पर, प्रीति से वशीभूत, फुर्तीले और भविष्य वक्ता होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों को बल से वश में नही किया जा सकता है, धनु राशि वाले व्यक्तियों के किसी अंग में तिल व मस्से के निशान रहते हैं तथा इनके पैर के तलवे छोटे होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों के तीन विवाह संभव होते हैं (कुंडली में बहु विवाह के योग होने पर) और संतान कम होती है, धनु राशि वाले व्यक्ति कई प्रकार के व्यवसाय को करने वाले तथा अनेक कारीगरी और कलाओं में प्रवीण होते हैं, बृहस्पति वार इनके लिए बेहद शुभ होता है और ऐसे व्यक्ति प्रायः व्यापार करते हैं।
धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ८, १३, १८, ४८ वर्ष अनिष्टकारी होते हैं प्रथम वर्ष में शरीर पीड़ा व १३ वें वर्ष में महा दुःख होता है यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो इन फलों में कमी होती है तथा तृतीय व अष्टम भाव भी बली हो तो धनु राशि वाले व्यक्तियों को १०० वर्ष की औसत आयु प्राप्त हो सकती है कुछ ग्रंथकारों नें यहाँ विभिन्न मत रखे हैं उनके अनुसार धनु राशि वाले व्यक्तियों की औसत आयु ८८ तो कुुुछ नेे ७५ तो कुछ ग्रंथकारों ने ८६ वर्ष बतलाया है, धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि अनिष्टकारी होती है, सोमवार का दिन बेहद अशुभ होता है, मेष, सिंह, कर्क और वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति इनके मित्र, वृष, मिथुन, कन्या व तुला राशि वाले शत्रु होते हैं, आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष, उपरोक्त तिथियाँ, हस्त नक्षत्र व रात्रि का समय अनिष्टकारी होता है।
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
वृश्चिक राशि: जानिए, वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों की छाती व नेत्र अपेक्षाकृत थोड़े बड़े होते हैं, जांघ और पिंडलियाँ गोल होती है तथा इनके हाथ व पैर में पदम रेखा या अन्य कोई निशान अवश्य ही होता है, वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति बचपन में प्रायः बीमार रहते हैं तथा इन्हें पिता व गुरु का पूर्ण सुख नही मिल पाता है, वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति क्रूर क्रिया करने वाले और राजकुल में ऊँची पदवी धारण करने वाले अर्थात उच्चाधिकारी होते हैं, वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति क्रोधी, वैर निरत, कलही, मित्र द्रोही, पति द्रोही, संतोष हीन, दूसरों के कार्य में विघ्नकर्ता, पराक्रमी, चतुर, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले, श्वेत वस्त्र के अभिलाषी, मादक पदार्थों में रुचि रखने वाले, परिश्रमी, मुख, पेट, हथेली, छाती आदि जगहों पर तिल के चिन्ह से युक्त व दीर्घकालीन रोग से मृत्यु को प्राप्त करने वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों की स्त्री पतिव्रता और जातक कामाशक्त होता है, वृश्चिक राशि वालों को एक पुत्र व एक कन्या का सुख प्राप्त होता है, कुछ ग्रंथकारों के अनुसार वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों को दो स्त्रियां एवं चार भाई भी होते हैं तथा व्यापार से इन्हें विशेष लाभ होता है।
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, २, ३, ५, १२, १५, २२, २५, ३२ व ९२ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, ५ वें वर्ष में ज्वर भय, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा होती है तथा यदि चन्द्रमा शुभ ग्रहों से दृष्ट हो और कुंडली के आयु भाव पीड़ित न हो तो वृश्चिक राशि वालों की औसत आयु ९० वर्ष तथा कुछ ग्रंथकारों के अनुसार ८७ वर्ष तक की होती है, प्रतिपदा, षष्ठी एवं एकादशी तिथि वृश्चिक राशि वालों के लिए अशुभ होती है, मेष, कर्क, सिंह, धनु और मीन राशि वाले व्यक्तियों से अच्छी मित्रता तथा मिथुन और कन्या राशि वालों से इनकी शत्रुता रहती है, ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार, हस्त नक्षत्र व अर्धरात्रि का समय वृश्चिक राशि वालों के लिए अशुभ रहता है।
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्ति देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त किंतु चंचल स्वभाव और कृश शरीर वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों का कद सामान्यतः लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति खरीद-फरोख्त में होशियार, धैर्यवान, इंसाफ पसंद करने वाले तथा प्रायः दो नाम वाले होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्ति घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं, इनकी संतान प्रायः कम ही होती है साथ ही तुला राशि वालों का भाग्योदय कुछ विलंब के साथ होता है, तुला राशि वाले व्यक्ति भोगी, धार्मिक, चतुर, बुद्धिमान, कला में कुशल, राजा प्रिय, पितृ सेवी, वस्तुओं का संग्रह करने वाले, विद्वान, धनी, अत्यंत बोलने वाले, मित्रों से युक्त, संगीत, कविता व युद्ध के प्रेमी, सभा-सोसाइटी और कंपनी इत्यादि में रुचि रखने वाले, अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में अन्य किसी पर भरोसा रखने वाले, लंबे कद वाले, बलवान, उन्नत नासिका वाले और वायु प्रकृति से पीड़ित होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्तियों को सर, उदर एवं चर्म रोग संभव रहता है साथ ही इन्हें जल भय भी रहता है, तुला राशि वाले व्यक्ति स्त्री के अधीन, बहु स्त्री भोगी अर्थात दो विवाह करने वाले, कृषि करने में चतुर तथा क्रय-विक्रय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।
तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ३, ५, ६, १५, २५, २६, ३६, ४६ व ५६ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, ५ वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा रहती है, यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह देखते हैं और आयु सुख को करने वाले अन्य योग न बनते हो और उपर्युक्त बताए गए वर्षों को पार कर लें तो ८५ वर्ष की औसत आयु प्राप्त करते हैं कुछ ग्रंथकारों के अनुसार तुला राशि वाले व्यक्तियों की आयु ६५ वर्ष ११ माह की होती है तथा इन्हें मृत्यु उपरांत ख्याति अवश्य ही मिलती है, तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तिथि अनिष्टकारी होती है तथा मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों से मित्रता एवं कर्क व सिंह राशि वालों से शत्रुता रहती है, रत्नों में इनके लिए हीरा शुभदायी होता है, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, शुक्रवार व आश्लेषा नक्षत्र और दिन का प्रथम प्रहर इनके लिए अनिष्टकारी होता है।