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चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि के फल मैंने दो भागों में विभक्त किया था जिसके पहले भाग की link को मैं इस पोस्ट में उपलब्ध करा रहा हूँ साथ ही उसी विषय पर आगे चर्चा करते हुए शनि के चतुर्थ भाव में विभिन्न स्थितियों में स्थित होने के फल को विस्तार से समझाते हुए पूर्ण करता हूँ।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि उच्च राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि केवल कर्क लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को अनुशासित करने में लगे रहते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की चाह होती है कि उनके इच्छा अनुसार लोग कार्य करें ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति पक्षियों को बंधन में रखने से सुखी होते हैं ऐसे व्यक्तियों को भूमि व वाहन सुख प्राप्त होता है साथ ही इनको बहुत मजबूत विचारों वाले जीवनसाथी की प्राप्ति होती है, यदि उच्च नवांश का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति माँसाहारी होते हैं तथा माँसाहार भोजन करने में इन्हें बहुत आनंद आता है।

 

यदि शुभ वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति खेती से जुड़े कार्य से सुख की प्राप्ति करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जहाँ कच्चे माल को बनाने या खरीदने-बेचने का कार्य होता हो वहाँ अधिक सफल होते हैं, यदि पाप वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति नकारात्मक चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति दोषों को अपनाकर सुख का अनुभव करते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों को कोई भी निर्णय बहुत सोच समझकर लेना चाहिए।

 

चतुर्थ भाव में शनि
चतुर्थ भाव में शनि

 

यदि नीच राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि मकर लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति अधिकांश समय अकेले रहना पसंद करते हैं व इन्हें भूमि और वाहन का उत्तम सुख प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी उच्च पद पर नौकरी करते हैं, यदि नीच नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति बोलते कुछ व करते कुछ हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति वंचक होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति लोगों की मदद कर के सुख को अनुभव करते हैं।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि चतुर्थ भाव में मित्र राशि का शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों का कार्यस्थल पर अधिक मन लगता है व ऐसे व्यक्ति परिवार से अधिक अपने कार्य को महत्व देते हैं, यदि शत्रु राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को ठगने से सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे सभी कार्य जिसमें बुद्धि-विवेक द्वारा मुनाफा अधिक कमाया जा सकता है उन सभी कार्यों जैसे मार्केटिंग, बिज़नेस में अधिक सफल होते हैं।

 

यदि मित्र नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के घरेलू सुख में कुछ तनाव की स्थिति बनी रहती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख अवश्य प्राप्त होता है, शत्रु नवांश का शनि चतुर्थ भाव हो तो ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर धनार्जन करते हैं अब आज के समय में dog cannel खोलना वगैरह इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

 

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यदि वर्गोत्तम स्थिति का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को हानि पहुँचा कर सुख का अनुभव करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति कुछ इस तरह का कार्य करते हैं जिससे दूसरों को हानि या दुःख पहुँचे उदाहरण के तौर पर जैसे वकालत का कार्य क्योंकि इसमें व्यक्ति अपने पक्ष के व्यक्ति को विजय दिलवाकर उनसे सुख के साधन प्राप्त करता है किंतु उसके इस कृत्य से दूसरे पक्ष को कुछ हानि व दुःख पहुँचता है।

 

यदि स्वराशि शनि चतुर्थ भाव में हो जो कि तुलावृश्चिक लग्न की कुंडली में ही संभव है तो व्यक्ति रस पदार्थ बेचकर सुखी होता है कहने का आशय यह है कि ऐसा व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है जिससे दूसरों को सुख की अनुभूति हो साथ ही ऐसे व्यक्तियों भूमि सुख निश्चय ही प्राप्त होता है, यदि तुला लग्न की कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में हो तो अधिक लाभकारी होता है क्योंकि तुला लग्न की कुंडली में राजयोगकारक हो जाता है और दसवीं दृष्टि से लग्न को अपनी उच्च राशि में देखता है अतः तुला लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है व बड़ी सफलता दिलवाता है वहीं वृश्चिक लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों की परिश्रम अधिक करना पड़ेगा क्योंकि शनि तीसरे भाव अर्थात पराक्रम भाव का भी स्वामी होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यधिक परिश्रम कर के जीवन में बड़ी सफलता को प्राप्त करते हैं।

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Astrology Sutras/Logics

शादी से पहले कुंडली में ‘नाड़ी दोष’ क्यों है खतरनाक? (जानें मृत्यु योग का सच और अचूक परिहार)

नाड़ी दोष व उसका परिहार

नाड़ी दोष:-

कुंडली मिलान की प्रकिया में अष्ट कूट का मिलान किया है वह अष्ट कूट क्रमशः वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी होते हैं इन अष्ट कूटों में प्रत्येक का अपना-अपना महत्व होता है, इस लेख में मैं नाड़ी पर चर्चा करता हूँ क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसको अधिकतर लोग नजरअंदाज कर देते हैं जब कि नाड़ी न मिलने पर दामपत्य जीवन में अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।

ज्योतिष ग्रंथों में नाड़ी तीन प्रकार की बताई गई है जो कि क्रमशः आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी के नाम से जानी जाती है अब प्रश्न यह उठता है कि यह कैसे ज्ञात किया जाए कि किस व्यक्ति का जन्म किस नाड़ी में हुआ है अतः इस पर मैं विस्तार से वर्णन करता हूँ।

हमारे ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नाड़ी में 9 नक्षत्र आते हैं जिसका निर्धारण व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित हो उसके आधार पर किया जाता है जिन्हें मैं विस्तार से लिख रहा हूँ।

🚩 सनातन धर्म का अद्भुत रहस्य:

👉 यहाँ पढ़ें: नवरात्रि 9 दिन की ही क्यों होती है?

नाड़ियों में आने वाले नक्षत्र:-

नाड़ियों में 27 नक्षत्रों का विभाजन (आदि, मध्य, अंत्य) - Nakshatra in Nadi Astrology
आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी में 27 नक्षत्रों का शास्त्र-सम्मत विभाजन।

१. आदि नाड़ी:-

अश्विनी, आद्रा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर आदि नाड़ी प्राप्त होती है।

२. मध्य नाड़ी:-

भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, घनिष्ठा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर मध्य नाड़ी प्राप्त होती है।

३. अंत्य नाड़ी:-

कृतिका, रोहिणी, श्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण और रेवती नक्षत्र में जन्म लेने पर अंत्य नाड़ी प्राप्त होती है।

नाड़ी दोष के परिहार:-

उक्त नाड़ी विचार में आदि व अंत्य नाड़ी में से कोई एक नाड़ी ही दोनों की हो तो कुछ विद्वानों का मत है कि रज्जूकूट अनुकूल हो, राशिकूट शुभ हो, दोनों का राशि स्वामी एक हो या दोनों राशियों में मैत्री हो तो नाड़ी दोष विशेष अनिष्टकारक नही होता है।

विशेष:-

मध्य नाड़ी एक हो तो पुरुष की मृत्यु तथा आदि अंत्य में स्त्री की मृत्यु होती है।

✨ कुंडली का एक और भयानक दोष:

👉 यहाँ पढ़ें: मंगल दोष के लक्षण और अचूक उपाय

नक्षत्रानुसार नाड़ी दोष परिहार:-

नक्षत्रानुसार नाड़ी दोष परिहार और अचूक उपाय - Nadi Dosh Cancellation Rules
विशिष्ट नक्षत्रों के संयोग से नाड़ी दोष का कट जाना (दोष परिहार)।
  • विशाखा, अनुराधा, घनिष्ठा, रेवती, हस्त, स्वाती, आद्रा, पूर्वाभाद्रपद इन 8 नक्षत्रों में से किसी भी नक्षत्र में वर, कन्या या दोनों में से एक का ही जन्म हो तो विवाह शुभ होता है अर्थात नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है।
  • उत्तराभाद्रपद, रेवती, रोहिणी, विशाखा, आद्रा, श्रवण, पुष्य और मघा इन 8 नक्षत्रों में भी वर व कन्या का जन्म नक्षत्र पड़े तो नाड़ी दोष शांत हो जाता है, भरणी, मृगशिरा, शतभिषा, हस्त, पूर्वाषाढ़ा व श्लेषा इन नक्षत्रों में भी नाड़ी दोष नही रहता है।
  • वर व कन्या की एक राशि हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हो तो नाड़ी दोष नही होता है, एक नक्षत्र में भी चरण भेद होने पर अत्यावश्यकता में विवाह किया जा सकता है।
  • कृतिका, रोहिणी, घनिष्ठा, शतभिषा, पुष्य, श्लेषा ये नक्षत्र एक ही राशि में पड़ते हैं, तब भी इन जोड़े नक्षत्रों में यदि वर व कन्या के नक्षत्र हो तो इन्हें छोड़ना चाहिए।
  • रोहिणी, आद्रा, मघा, विशाखा, पुष्य, श्रवण, रेवती, उत्तराभाद्रपद में से किसी एक नक्षत्र में ही दोनो का जन्म हो तब भी नाड़ी दोष नही रहता, नक्षत्र चरण भेद आवश्यक है।
नक्षत्रेक्ये पादभेदे शुभम् स्यात।।
पराशरः प्राह नवांशभेदादेकर्क्षराश्योरपि सौमनस्यम्।।
एकक्षै चैकपादे च विवाह: प्राणहानिद:।।
दम्पत्योरेकपादे तु वर्षान्ते मरणं ध्रुवम्।।

अर्थात:-

चरण व नक्षत्र दोनों एक होने का फल मृत्यु है, नाड़ी कूट सर्व शिरोमणि प्रधान है, इसके गुण 8 माने जाते हैं।

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📌 FAQ: नाड़ी दोष से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: नाड़ी कितने प्रकार की होती है?

उत्तर: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नाड़ी तीन प्रकार की होती है— आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी।

प्रश्न 2: नाड़ी दोष कब लगता है?

उत्तर: विवाह के समय कुंडली मिलान (अष्टकूट मिलान) में जब वर और कन्या दोनों की नाड़ी एक ही (समान) होती है, तब नाड़ी दोष लगता है।

प्रश्न 3: क्या एक नाड़ी होने पर विवाह किया जा सकता है?

उत्तर: यदि वर व कन्या की राशि एक हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो, या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हों, या नक्षत्र चरण में भेद हो, तो नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है और विवाह संभव है।

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अप्रैल 2020: तुला लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

अप्रैल 2020: तुला लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

 

तुला लग्न
तुला लग्न कुंडली

 

तुला लग्न वालों के लिए अप्रैल 2020 अच्छा रहेगा माह की शुरुवात में लग्नेश शुक्र का अष्टम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप लंबे समय से चली आ रही बीमारी से राहत मिलेगी, ससुराल पक्ष में कोई शुभ कार्य हो सकता है, जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे, आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, अष्टम भाव सप्तम से दूसरा भाव होने के कारण से पत्नी की वाणी का भी भाव होता है अतः जीवनसाथी के वाणी का लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा, माह के शुरुवात में सूर्य आपके छठे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, यदि आपने कर्ज के लिए निवेदन किया हुआ है तो आपका कर्ज स्वीकृत हो सकता है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, नेत्रों में जलन या नेत्रों में चोट या सर दर्द की शिकायत हो सकती है अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें 13 अप्रैल को सूर्य गोचर बदलकर आपके सप्तम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, आय में वृद्धि होगी, मित्रों से लाभ प्राप्त होगा, यदि आपके बड़े भाई-बहन हैं तो उनसे लाभ प्राप्त होगा, माह के शुरुवात में बुध आपके पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे विवाह करना चाहते हैं तो प्रेम विवाह के लिए घर में बात करने का यह अच्छा समय सिद्ध होगा, संतान की उन्नति होगी, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, 7 अप्रैल को बुध गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, यात्राओं के योग बनेंगे, सरकारी कर्मचारियों से फालतू विवाद में न पड़ें, पेट जनित कोई पीड़ा संभव रहेगी, वाणी पर नियंत्रण रखें, 25 अप्रैल को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके सप्तम भाव में आ जाएंगे जिससे दामपत्य जीवन में मधुरता आएगी, बुद्धि व विवेक द्वारा कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त होगी, जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, कार्य के सिलसिले से यात्राएं होगी।

 

तुला राशि
तुला राशि

 

माह के शुरुवात में गुरु, मंगल व शनि का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा जहाँ शनि व गुरु का नीचभंग राजयोग बनेगा साथ ही मंगल भी अपनी उच्च राशि से गोचर करेंगे फलस्वरूप जो लोग घर लेना चाहते हैं उनके लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, वाहन प्राप्ति के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, नौकरी परिवर्तन व प्रमोशन के योग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होगी, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, माह के शुरुवात में राहु का नवम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी के भाई-बहन के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, तीसरे भाव से केतु का गोचर भाई-बहन से वैचारिक मतभेद का सूचक होता है अतः फालतू विवाद से बचें व आवेश में आकर निर्णय न लें, यदि आपके छोटे भाई-बहन हैं तो उनकी उन्नति होगी, संतान से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

कुल मिलाकर तुला लग्न वालों के लिए अप्रैल 2020 अच्छा रहेगा जिसमें भूमि/वाहन के योग बनेंगे, प्रमोशन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, आवेश में आने से बचें, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नए मित्र बनेंगे, माह की 5 से 8, 13 से 16 व 25, 27, 30 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि तुला लग्न के व्यक्ति दुर्गा सप्तशती का नित्य पाठ करें व नित्य गाय को हरा चारा और गुड़ दें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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मूलांक 2: क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

मूलांक 2: क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

 

 

मूलांक 2 से संबंधित व्यक्ति अधिक कल्पनाशील, भावुक, सहिर्दय, सरलचित्त एवं कोमल मन वाले होते हैं, ये नई से नई कल्पनाओं की सृष्टि में रमे रहते हैं, मूलांक 2 वाले व्यक्ति न तो अधिक समय तक किसी कार्य में स्थिर रहते हैं और न ही किसी एक बात पर लंबे समय तक सोच-विचार कर सकते हैं क्योंकि इन्हें नित नए विचार सूझते रहते हैं और ये उन्हें क्रियान्वित करने के लिए जूझते हुए दिखाई देते हैं, मूलांक 2 वाले व्यक्ति शारीरिक रूप से सबल नही होते हैं, ये मूलतः बुद्धिजीवी होते हैं शरीरजीवी नही इसलिए शरीर की अपेक्षा मस्तिष्क से अधिक सबल एवं स्वस्थ होते हैं।

 

सौंदर्य के प्रति मूलांक 2 वाले व्यक्ति रुचि परिष्कृत होती है, प्रेम और सौंदर्य के क्षेत्र में ये महारथी कहे जा जाते हैं, दूसरों को सम्मोहित करने की कला में ये प्रवीण होते हैं, अपरिचित से अपरिचित व्यक्ति को भी परिचित बना लेना इनके बाएं हाथ का खेल होता है, मूलांक 2 वाले व्यक्तियों में प्रायः आत्मविश्वास की कमी रहती है फलस्वरूप ये कोई भी निर्णय तुरंत नही ले पाते हैं चाहे छोटी से छोटी बात हो या चाहे बड़ी से बड़ी समस्या ये उसमें उलझे रहते हैं, यह कार्य करूँ या न करूँ इस बात पर तुरंत निर्णय ले पाना इनके बस की बात नही होती, मूलांक 2 के व्यक्ति स्वभाव से शंकालु होते हुए भी दूसरों के हित का पूरा ध्यान रखते हैं, “ना” कहना इनके वश की बात नही होती है, दूसरों के मन की बात को जान लेने में ये प्रवीण होते हैं एवं ललित कलाओं में इनकी जन्म से ही रुचि होती है।

मूलांक 2 वाले व्यक्तियों के लिए शुभ तारीखें:-

मूलांक 2 वालों के लिए प्रत्येक माह की 2, 11, 20 और 29 तारीखें शुभ होती हैं।

मूलांक 2 वालों के लिए शुभ वर्ष:-

मूलांक 2 वाले व्यक्तियों के लिए 1, 10, 19, 28, 37, 46, 55, 64 एवं 73वां वर्ष भाग्योन्नति कारक कहा जा सकता है, शास्त्रों में 7 अंक को भी मूलांक 2 का मित्र कहा गया है अतः 7, 16, 25, 34, 43, 52 तथा 61वां वर्ष भी इनके लिए श्रेष्ठ रहता है, इसके अतिरिक्त 2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65 तथा 74वां वर्ष भी इनके लिए अतियुक्तम कहे जा सकते हैं।

मूलांक 2 वालों के लिए शुभ दिन:-

मूलांक 2 वालों के लिए सोमवार सबसे शुभ दिन होता है।

मूलांक 2 वालों के लिए शुभ रंग:-

मूलांक 2 वालों के लिए श्वेत अर्थात सफेद रंग बेहद शुभ होता है अतः इन्हें किसी भी शुभ कार्य में जाते समय सफेद वस्त्र अवश्य पहनना चाहिए।

मूलांक 2 वालों के लिए रत्न:-

मूलांक 2 वालों के लिए मोती सबसे शुभ रत्न होता है अतः इन्हें जीवन में शीघ्र सफलता हेतु बाजरे का मोती अवश्य धारण करना चाहिए।

मूलांक 2 वालों के लिए प्रधान देवता:-

मूलांक 2 वालों के चंद्र प्रधान देवता होते हैं अतः इन्हें नित्य चंद्र मंत्र “ॐ सोमाय नम:” का जाप करना चाहिए।

मूलांक 2 वालों के लिए अशुभ तिथि:-

मूलांक 2 वालों के लिए प्रत्येक मास की 5, 14 व 23 तारीख अशुभ होती है अतः इन तारीखों में इन्हें कोई भी शुभ कार्य नही करना चाहिए।

मूलांक 2 वालों के लिए अशुभ वर्ष:-

मूलांक 2 वालों के लिए 5, 14, 23, 32, 41, 50, 59, 68, 77 व 86 वर्ष अशुभ होते हैं अतः इन वर्षों में इन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly
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सूर्य का गोचर परिवर्तन 13 फरवरी 2020

सूर्य का गोचर परिवर्तन 13 फरवरी 2020

सूर्य 13 फरवरी 2020 को दोपहर के 3 बजकर 5 मिनट पर मकर राशि को छोड़कर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की मकर की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की कुंभ की सक्रांति लगेगी, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में 30 दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के विभिन्न राशियों में गोचर के दौरान पड़ने वाले प्रभाव:-

मेष राशि:-

 

मेष राशि वालों के लिए सूर्य पंचम भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके लाभ स्थान से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में आय की वृद्धि होगी, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

वृषभ राशि:-

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके दशम भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में आपके रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, अचानक धन लाभ होगा, पिता की उन्नति होगी, भूमि/वाहन सुख प्राप्त हो सकता है।

मिथुन राशि:-

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके नवम भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में आपको मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, पिता से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, संतान को कष्ट संभव है, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी, आवेश में आकर निर्णय लेने से बचें, फालतू विवाद में न पड़ें।

कर्क राशि:-

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, दवाईयों पर धन व्यय होगा, शत्रुओं से सावधान रहें, सरकारी कर्मचारियों से विवाद में न उतरें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, जिनका काम भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

सिंह राशि:-

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य पहले भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके सप्तम भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में जीवनसाथी से विवाद हो सकते हैं, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, यदि नौकरी परिवर्तन या नया कार्य शुरू करना चाहते हैं तो उसको कुछ समय के लिए टाल दें, पैसा चोरी हो सकता है, क्रोध पर नियंत्रण रखें।

कन्या राशि:-

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके छठे भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, धार्मिक यात्रा हो सकती है, लंबे समय से चली आ रही बीमारी से छुटकारा मिलेगा, मन प्रसन्न रहेगा।

तुला राशि:-

तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में तनाव लेने से बचें, संतान को कष्ट संभव है, फालतू विवाद से बचें, आय की वृद्धि होगी, जीवनसाथी से विवाद हो सकता है, वाणी पर नियंत्रण रखें।

वृश्चिक राशि:-

वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर के माहौल में तनाव की स्थिति रहेगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालें, अधिक सोचने से बचें, माता से विवाद संभव है, पिता की उन्नति होगी, तनाव लेने से बचें।

धनु राशि:-

धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होते है जो कि आपके तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात हो सकती है व उनसे आपके संबंध मजबूत होंगे, छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, आय की वृद्धि होगी, समाज मे मान-सम्मान प्राप्त होगा।

मकर राशि:-

मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होते हैं जो कि आप दूसरे भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में फालतू विवाद से बचें, कार्य में अड़चनें पैदा हो सकती है, मेहनत अधिक करनी होगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें चूँकि गुरु की दृष्टि छठे व आठवें भाव मे होगी तो स्वास्थ्य को लेकर कोई गंभीर समस्या नही होगी, वाणी पर नियंत्रण रखें, दवाईयों पर धन व्यय होगा।

 

कुंभ राशि:-

कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके पहले भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में तनाव लेने से बचें व स्वास्थ्य का ख्याल रखें, पेट दर्द या नेत्रों में कोई समस्या संभव है, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, जिनको रक्त विकार हो या दिल की बीमारी हो उन्हें स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

मीन राशि:-

मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे भाव के स्वामी होते हैं जो कि आपके द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः इस अवधि में वाहन सावधानी से चलाएं व स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, यात्राओं के योग बनेंगे, बुखार की समस्या हो सकती है, तनाव लेने से बचें, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, संतान की उन्नति होगी।

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ग्रह के बड़े बदलाव की ओर संकेत जल्द शुरू होगा तृतीय विश्व युद्ध

ग्रहों के बड़े बदलाव का संकेत: क्या जल्द शुरू होगा तृतीय विश्व युद्ध? जानें भारत और रूस का भविष्य

यदि वर्ष 2020 से गोचर का अध्ययन किया जाए तो 36 वर्ष बाद शनि पुनः अपनी राशि मकर में प्रवेश कर रहे हैं। साथ ही इसी वर्ष राहु और केतु का भी एक बड़ा राशि परिवर्तन हो रहा है तथा इस बार गुरु भी अपनी नीच राशि में गोचर करते हुए भी पूरे गोचर काल ‘नीचभंग राजयोग’ का फल देंगे। केतु का वृश्चिक राशि से होने वाला गोचर प्राकृतिक आपदा, आग, भूकंप, तूफान, एक्सीडेंट देखने को मिलेंगे, वहीं राहु का वृषभ राशि से गोचर शुभ रहने वाला है। यदि तिथियों को देखा जाए तो 2020 का जोड़ 4 प्राप्त होता है जो कि राहु का अंक होता है अर्थात 2020 राहु के प्रभाव में रहेगा और राहु का वायु तत्व राशि से गोचर अनेक प्राकृतिक आपदा की ओर संकेत कर रहा है जो कि हमें वर्ष 2020 में देखने को भी मिलेगा।

 

1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2029 तक समय बहुत बड़े बदलाव लेकर आएगा जिसमें भी फरवरी 2022 विशेष माह सिद्ध होगा। यह वही माह रहेगा जो कि इतिहास के पन्नों में लिखा जाएगा क्योंकि इसी माह से रूस का यूक्रेन/अमेरिका/चीन के मध्य युद्ध का आरंभ होगा जो कि आगे ईरान-इजराइल/अमेरिका युद्ध के साथ तृतीय विश्व युद्ध में तब्दील होता जाएगा। इस बार दो महाशक्तियों के मध्य का युद्ध बहुत बड़े बदलाव लेकर आएगा। अभी अमेरिका विश्व विजेता के रूप में सभी के समक्ष है तथा विश्व के देशों में सबसे शक्तिशाली देश है, किंतु यह बदलाव अमेरिका के पतन व रूस के उत्थान का समय होगा जिसमें अमेरिका की तरफ से ब्रिक्स (BRICS) देशों से भी दुश्मनी लेना शामिल हो सकता है। हालांकि रूस— यूक्रेन, अमेरिका व चाइना को युद्ध में हराकर विश्व विजेता बनेगा तथा क्षेत्र विस्तार को लेकर समस्त विश्व में युद्ध के हालात बनेंगे जिसमें रूस सबसे आगे रहेगा तथा रूस के पास ऐसी शक्तियाँ होंगी जिनसे जीत पाना पूरे विश्व में किसी के लिए भी संभव नही होगा।

✋ हस्तरेखा शास्त्र का अद्भुत रहस्य

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🇮🇳 भारत पर विश्व युद्ध से पड़ने वाले प्रभाव:

यदि तृतीय विश्व युद्ध का भारत पर क्या प्रभाव पड़ेगा यह विचार करें तो भारत की कुंडली जो कि 15 अगस्त 1947 को दोपहर 12 बजे की कुंडली है, उसके अनुसार शुरुवात में भारत प्रत्यक्ष रूप से इस युद्ध में भाग नही लेगा और उम्मीद बहुत कम ही है कि भारत अप्रत्यक्ष रूप से भी इस युद्ध में भाग ले। कुछ मौके पर पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान के कारण युद्ध की स्थिति सी बनेगी, लेकिन भारत एकतरफा युद्ध करेगा जिस कारण से पाकिस्तान भी हार मानेगा, फिर भी यदि किसी कारण वश भारत को इस तृतीय विश्व युद्ध  में भाग लेना पड़ा तो भारत विश्व विजेता बनकर उभरेगा तथा आर्थिक दृष्टिकोण से भारत पूरे विश्व में सबसे अधिक शक्तिशाली बनकर उभरेगा। यह 1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2029 तक का समय रूस, भारत व चाइना के उत्थान का समय सिद्ध होगा जिनमे इन तीनों देश में काफी विकास देखने को मिलेगा। जिसमें भारत नंबर 1 बनकर विश्व पर शासन करेगा तथा भारत की आर्थिक स्थिति पूरे विश्व में सबसे मजबूत रहेगी।

⚔️ भारत-चीन सीमा विवाद:

 

भारत-चीन सीमा विवाद पर सबकी नजरें हैं क्योंकि युद्ध के हालात बनते जा रहे हैं और अक्टूबर 2020 तक युद्ध होने के भी योग बन रहे हैं। किंतु मैं आप सभी को यह ज्ञात करा दूँ कि भारत और चीन के मध्य युद्ध की संभावना बहुत कम है और यदि होता भी है तो भारत विजयी होगा तथा इस बार भारत के किसी भी हिस्से पर चीन कब्जा नही कर सकेगा।

🇷🇺 रूस के राष्ट्रपति पर सूक्ष्म भविष्यवाणी:

आने वाले 10 वर्ष रूस के राष्ट्रपति के बहुत शुभ रहने वाला है अतः अभी 10 वर्षों तक रूस में सत्ता परिवर्तन की कोई संभावना दूर-दूर तक नही बन रही और इन 10 वर्षों में रूस उन्नति व विकास के नए अध्याय लिखेगा और विश्व का सबसे शक्तिशाली देश बनकर उभरेगा और रूस व भारत के बीच मित्रता एक नए मुकाम तक पहुँचेगी।

आगे जैसी प्रभु इच्छा🙏🏻

जय श्री राम।

❓ विश्व युद्ध और ग्रहीय बदलाव से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: ज्योतिष के अनुसार तृतीय विश्व युद्ध (WW3) के हालात कब से बन रहे हैं?

ग्रहीय गणना के अनुसार 1 जनवरी 2020 से 31 दिसंबर 2029 का समय दुनिया में महा-बदलाव का है। विशेष रूप से फरवरी 2022 से रूस-यूक्रेन युद्ध के साथ ही विश्व युद्ध जैसी स्थितियों की नींव पड़ सकती है।

Q2: यदि विश्व युद्ध होता है तो भारत पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

15 अगस्त 1947 की भारत की कुंडली के अनुसार, भारत शुरुआत में इस युद्ध से दूरी बनाए रखेगा। लेकिन यदि युद्ध में उतरना पड़ा, तो भारत विजयी होकर नंबर 1 आर्थिक महाशक्ति और विश्व विजेता के रूप में उभरेगा।

Q3: आने वाले समय में विश्व का सबसे शक्तिशाली देश कौन बनेगा?

भविष्यवाणी के अनुसार, अमेरिका का वर्चस्व धीरे-धीरे कम होगा और रूस (Russia) विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति बनकर उभरेगा। रूस और भारत की मित्रता भी एक नए मुकाम पर पहुंचेगी।

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