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बुध का चित्रा नक्षत्र में महागोचर: 21 सितंबर अर्धरात्रि प्रवेश, जानें सभी 27 नक्षत्रों पर नवतारा चक्र का प्रभाव व उपाय

ज्योतिष शास्त्र में बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क के कारक ग्रह ‘बुध देव’ का नक्षत्र परिवर्तन अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। “ऋषिकेश पंचांग” गणना के अनुसार, 21 सितंबर 2026 की अर्धरात्रि (मध्यरात्रि 03:38 AM) पर बुध देव मंगल के स्वामित्व वाले तेजस्वी ‘चित्रा नक्षत्र’ में प्रवेश करेंगे जहाँ 30 सितंबर 2026 की अर्धरात्रि (04:07 AM) तक रहेंगे। Astrology Sutras (ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी) के इस विशेष शोधपरक आलेख में हम ‘नवतारा चक्र’ (तारा बल सिद्धांत) के आधार पर बहुत ही सरल भाषा में जानेंगे कि आपके जन्म नक्षत्र पर बुध के इस गोचर का क्या असर होगा और यदि प्रभाव प्रतिकूल है तो उससे बचने के अचूक शास्त्रीय उपाय क्या हैं।

💡 सबसे पहले जानें: अपना जन्म नक्षत्र कैसे ज्ञात करें?

कई लोगों को अपना जन्म नक्षत्र पता नहीं होता। इसे जानना बहुत ही आसान है:

शास्त्रीय नियम: आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा (Moon) जिस नक्षत्र में स्थित (बैठा) होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है।

  • उदाहरण 1: यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र अश्विनी है।
  • उदाहरण 2: यदि चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र धनिष्ठा माना जाएगा।
  • उदाहरण 3: यदि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र रोहिणी होगा।

👉 बस अपनी जन्म कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र देखें और नीचे दी गई सूची में अपने नक्षत्र का सीधा प्रभाव पढ़ें!

🌌 1. ज्योतिषीय पृष्ठभूमि: बुध और चित्रा नक्षत्र का संबंध

चित्रा नक्षत्र के स्वामी भूमिपुत्र ‘मंगल’ हैं और इसके देवता देवताओं के शिल्पी ‘भगवान विश्वकर्मा’ हैं। बुध (बुद्धि व वाणी) जब मंगल (ऊर्जा व पराक्रम) के नक्षत्र में आते हैं, तो बुद्धि में गजब की फुर्ती और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता आती है। व्यापार में नई योजनाएं बनाने के लिए यह गोचर बहुत अनुकूल होता है।

📜 नवतारा चक्र का शास्त्रीय नियम (श्लोक व अर्थ)

ज्योतिष में जन्म नक्षत्र से गोचर नक्षत्र तक गिनती करके 9 ताराओं का निर्धारण किया जाता है:

नवतारा श्लोक शास्त्रीय अर्थ व विधान

“जन्मसम्पद्विपत्क्षेमप्रत्यरी साधको वधः।
मित्रं परममित्रं च ताराबलमिदं स्मृतम्॥”

फलदीपिका (अध्याय 21)

अर्थ: जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यरि, साधक, वध (निधन), मित्र और अतिमित्र—ये 9 ताराएं होती हैं। इनमें संपत, क्षेम, साधक, मित्र और अतिमित्र अत्यंत शुभ फल देती हैं, जबकि जन्म, विपत, प्रत्यरि और वध तारा में सावधानी रखनी चाहिए।

⭐ 2. सभी 27 नक्षत्रों पर बुध के चित्रा गोचर का संक्षिप्त विवरण

नीचे दी गई तालिका से एक नज़र में समझें कि आपका नक्षत्र किस तारा समूह में आता है:

तारा वर्ग संबंधित जन्म नक्षत्र गोचर का मुख्य फल
1. जन्म तारा चित्रा, धनिष्ठा, मृगशिरा मानसिक भार, कार्य में भागदौड़
2. संपत् तारा हस्त, श्रवण, रोहिणी धन लाभ, व्यापार में वृद्धि
3. विपत् तारा उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, कृत्तिका खर्च, लेन-देन में सावधानी
4. क्षेम तारा पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, भरणी सुख-शांति, कार्य में सफलता
5. प्रत्यरि तारा अश्विनी, मघा, मूल विरोधी सक्रिय, वाद-विवाद से बचें
6. साधक तारा अश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती मनोकामना पूर्ति, बड़ी सफलता
7. वध (निधन) तारा पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद सेहत का ध्यान रखें, जोखिम न लें
8. मित्र तारा पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद मित्रों से सहयोग, मान-सम्मान
9. अतिमित्र तारा आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा अचानक भाग्योदय, शुभ समाचार

🔍 3. सभी 27 नक्षत्रों का विस्तृत व सरल फलादेश

अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार विस्तार से जानें कि बुध का चित्रा गोचर आपके जीवन में क्या बदलाव लाएगा:

1. चित्रा, धनिष्ठा एवं मृगशिरा नक्षत्र (जन्म तारा)

यदि आपका जन्म चित्रा, धनिष्ठा या मृगशिरा नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘जन्म तारा’ के चक्र में हो रहा है। इसके प्रभाव से आपके कार्यक्षेत्र में व्यस्तता और काम का दबाव बढ़ सकता है। विशेषकर चित्रा नक्षत्र वालों के सीधे जन्म नक्षत्र पर बुध का भ्रमण होने से अनिर्णय की स्थिति या सिरदर्द-तनाव रह सकता है। इस दौरान वाणी पर नियंत्रण रखें और बिना सोचे-समझें किसी बड़े सौदे पर हस्ताक्षर न करें।

2. हस्त, श्रवण एवं रोहिणी नक्षत्र (संपत् तारा)

यदि आपका जन्म हस्त, श्रवण या रोहिणी नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘संपत् तारा’ के चक्र में हो रहा है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह समय आपके लिए धन-धान्य और आर्थिक लाभ लेकर आएगा। रुका हुआ धन वापस मिलेगा, व्यापार में नया अनुबंध मिल सकता है और नौकरीपेशा जातकों की आय में वृद्धि के शुभ योग बनेंगे।

3. उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा एवं कृत्तिका नक्षत्र (विपत् तारा)

यदि आपका जन्म उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा या कृत्तिका नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘विपत् तारा’ के चक्र में हो रहा है। इस समय अचानक अप्रत्याशित खर्चे सामने आ सकते हैं। किसी भी व्यक्ति को उधार धन देने से बचें। साझेदारी के काम में पारदर्शिता रखें और यात्रा के दौरान अपने सामान का विशेष ध्यान रखें।

4. पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा एवं भरणी नक्षत्र (क्षेम तारा)

यदि आपका जन्म पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा या भरणी नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘क्षेम तारा’ के चक्र में हो रहा है। ‘क्षेम’ का अर्थ है कल्याण और सुरक्षा। यह गोचर आपके जीवन में मानसिक शांति, पारिवारिक प्रसन्नता और रुके हुए कार्यों को पूरा करने में मदद करेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा और घर में मांगलिक चर्चाएं होंगी।

5. अश्विनी, मघा एवं मूल नक्षत्र (प्रत्यरि तारा)

यदि आपका जन्म अश्विनी, मघा या मूल नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘प्रत्यरि तारा’ के चक्र में हो रहा है। ‘प्रत्यरि’ का अर्थ होता है विरोधी। इस समय कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या प्रतिस्पर्धियों से सतर्क रहें। आपकी सीधी बातों का लोग गलत मतलब निकाल सकते हैं। वाद-विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूरी बनाए रखें।

6. अश्लेषा, ज्येष्ठा एवं रेवती नक्षत्र (साधक तारा)

यदि आपका जन्म अश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘साधक तारा’ के चक्र में हो रहा है। यह आपके कार्यों को सिद्ध करने वाला समय है। चूंकि ये तीनों नक्षत्र स्वयं बुध देव के हैं, इसलिए आपकी बौद्धिक क्षमता, तर्क और योजनाएं शत-प्रतिशत सफल होंगी। परीक्षा, इंटरव्यू, लेखन और शोध से जुड़े जातकों को बड़ी सफलता मिलेगी।

7. पुष्य, अनुराधा एवं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (वध/निधन तारा)

यदि आपका जन्म पुष्य, अनुराधा या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘वध (निधन) तारा’ के चक्र में हो रहा है। ज्योतिष में इस तारा को कष्टप्रद माना जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार के शेयर मार्केट, सट्टेबाजी या भारी जोखिम भरे निवेश से बिल्कुल दूर रहें। वाहन सावधानी से चलाएं और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी छोटी परेशानी को नजरअंदाज न करें।

8. पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (मित्र तारा)

यदि आपका जन्म पुनर्वसु, विशाखा या पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘मित्र तारा’ के चक्र में हो रहा है। इस समय मित्रों, संबंधियों और वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलेगा। यदि कोई कार्य लंबे समय से अटका था, तो वह किसी मित्र की सहायता से बन जाएगा। आपकी वाणी में सौम्यता आएगी।

9. आर्द्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र (अतिमित्र तारा)

यदि आपका जन्म आर्द्रा, स्वाति या शतभिषा नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘अतिमित्र तारा’ के चक्र में हो रहा है। यह अत्यंत शुभ और भाग्योदयकारी स्थिति है। अचानक कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। विदेश से जुड़ा व्यापार, आईटी सेक्टर, मीडिया और कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काम करने वालों को पद-प्रतिष्ठा और बड़ा आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।

🛠️ 4. बुध के अशुभ प्रभाव निवारण हेतु अचूक शास्त्रीय उपाय

जिन जातकों के लिए बुध का यह गोचर जन्म, विपत, प्रत्यरि अथवा वध तारा में पड़ रहा है, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। नीचे दिए गए सरल शास्त्रीय उपाय करके आप इसके दुष्प्रभावों को पूरी तरह शांत कर सकते हैं:

सरल उपाय शास्त्रोक्त विधि व नियम
गणेश जी को दूर्वा अर्पण प्रत्येक बुधवार को भगवान श्रीगणेश को 21 गांठ दूर्वा (दूब) अर्पित करें और “ॐ गं गणपतये नमः” का 108 बार जप करें। यह वाणी दोष, व्यापारिक मंदी और मानसिक भ्रम को समाप्त करता है।
बुध बीज मंत्र जप बुधवार की सुबह स्नान के बाद “ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः” मंत्र की 1 माला (108 बार) तुलसी की माला या रुद्राक्ष से जपें।
गौ-माता को हरा चारा बुधवार के दिन देशी गाय को ताजा हरा चारा, पालक या रात भर भिगोई हुई हरी साबुत मूंग खिलाएं। इससे आर्थिक रुकावटें समाप्त होती हैं।
मंगल-बुध संतुलन दान चूंकि गोचर मंगल के चित्रा नक्षत्र में है, अतः बुधवार के दिन किसी जरूरतमंद को हरी मूंग के साथ थोड़े से गुड़ का दान करें। इससे बुद्धि और पराक्रम दोनों का संतुलन बना रहता है।

💡 5. बुध-चित्रा गोचर: रोचक फैक्ट्स व अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

मुख्य प्रश्न प्रामाणिक ज्योतिषीय उत्तर
बुध और मंगल का संबंध कैसा है? वैदिक ज्योतिष में बुध और मंगल में सम-शत्रुता का संबंध माना जाता है। मंगल ऊर्जा और आक्रामकता के प्रतीक हैं, जबकि बुध बुद्धि के। जब बुध मंगल के चित्रा नक्षत्र में आते हैं, तो जातक की वाणी में तर्क के साथ-साथ तीखापन आ जाता है।
शेयर बाजार व व्यापार पर क्या असर होगा? चित्रा नक्षत्र तकनीकी और निर्माण का प्रतीक है। बुध के यहां आते ही आईटी, सॉफ्टवेयर, रियल एस्टेट और धातु उद्योग के शेयरों में तेज हलचल और अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
क्या नवतारा का फल चंद्र राशि से अलग होता है? हाँ। राशि गोचर केवल 12 राशियों के व्यापक स्तर पर देखा जाता है, जबकि ‘नवतारा चक्र’ सीधे आपके जन्म नक्षत्र (डिग्री स्तर) पर काम करता है। इसलिए यह गणना राशि फल की तुलना में अत्यधिक सूक्ष्म और शत-प्रतिशत सटीक मानी जाती है।

निष्कर्ष: बुध का चित्रा नक्षत्र में यह गोचर कर्म और बुद्धि का सुंदर समन्वय है। अपने तारा चक्र को समझकर सही निर्णय लें और प्रतिकूल फल वाले जातक बताए गए सरल उपाय अवश्य करें।

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बुध का मकर राशि से गोचर 2026: इन राशि वालों को होगा जबरदस्त लाभ

बुध, जिसे ज्योतिष में “ग्रहों का राजकुमार” और बुद्धि, वाणी, व्यापार व तर्क का कारक माना जाता है, जब कर्मफल दाता शनि की राशि मकर (Capricorn) में प्रवेश करते है, तो इसका प्रभाव अत्यंत विशिष्ट होता है, 2026 की शुरुआत में यह गोचर न केवल संचार और व्यापार को प्रभावित करेगा बल्कि मकर राशि में पहले से मौजूद सूर्य के साथ मिलकर ‘बुधादित्य राजयोग’ का निर्माण भी करेगा, साथ ही सूर्य, मंगल व शुक्र के साथ मिलकर चतुर्ग्रही योग बनाएगा।

बुध गोचर 2026 की तिथि और समय (Date and Time)

“ऋषिकेश पंचांग” (काशी) के अनुसार, बुध 15 जनवरी की रात्रि शेष अर्थात 16 जनवरी की भोर 4 बजकर 09 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे जहाँ सूर्य, मंगल, शुक्र पहले से ही गोचर कर रहे है और बुध का इनके साथ चतुर्ग्रही योग बनाना निश्चय ही बड़े बदलावों को दर्शाता है।

मकर राशि में बुध का प्रभाव

गोचर नियमों (Transit Sutras) के अनुसार, किसी भी ग्रह का फल उस राशि के स्वामी के साथ उसके संबंधों पर निर्भर करता है।

मित्रवत संबंध: मकर राशि के स्वामी शनि (Saturn) होते है एवं बुध और शनि आपस में ‘मित्र’ माना जाता है इसलिए, यह गोचर सामान्यतः शुभ फलदायी रहेगा।

पृथ्वी तत्व का संयोग: मकर एक ‘पृथ्वी तत्व’ (Earth Element) की राशि है और बुध ‘बुद्धि’ है जब बुद्धि में स्थिरता (पृथ्वी) आती है, तो व्यक्ति की निर्णय क्षमता (Decision Making) व्यावहारिक (Practical) और तर्कसंगत हो जाती है जिस कारण से यह समय हवाई किले बनाने का नहीं, बल्कि ठोस योजनाओं को लागू करने का होता है।

बुधादित्य योग: इस समय सूर्य भी मकर राशि में हैं और 16 जनवरी को जैसे ही बुध मकर राशि में प्रवेश करेंगे सूर्य और बुध की युति से ‘बुधादित्य योग’ बनेगा जो सरकारी कार्यों, मान-सम्मान और करिअर में उन्नति के लिए श्रेष्ठ रहेगा।

मेष से मीन: सभी 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

मेष राशि (Aries)

मेष राशि वालों के लिए बुध तीसरे और छठे भाव के मालिक बनकर आपकी राशि से दशम भाव (कर्म भाव) से गोचर करेंगे फलस्वरूप यह ‘कुल दीपक योग’ की तरह कार्य करेगा क्योंकि दशम भाव में पहले ही राशि मालिक और सूर्य का संबंध शुभ होने से लाभ होगा फिर भी बुध के शत्रु ग्रहों के साथ संबंध बनाने से थोड़ी चिंता व चर्म या उदर से जुड़ी समस्या रह सकती है, कार्यक्षेत्र में आपकी वाणी का प्रभाव बढ़ेगा साथ ही मैनेजमेंट, बैंकिंग, मीडिया, पत्रकारिता, मास कम्युनिकेशन, अकाउंटिंग और फाइनेंस से जुड़े जातकों के लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा और जो लोग काफी समय से नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें इस दौरान मनपसंद नौकरी मिलने की अच्छी संभावना रहेगी साथ ही सहयोगियों का कुछ साथ भी प्राप्त होगा एवं काम के सिलसिले में छोटी-छोटी यात्राएं बार-बार करनी पड़ सकती हैं, जिससे थोड़ी थकान या सेहत से जुड़ी परेशानी हो सकती है, अपने उच्च अधिकारियों से संवाद करते समय स्पष्टता रखें।

उपाय:- नित्य हनुमान जी को किशमिश का भोग और घी का दीपक अर्पित कर के हनुमान चालीसा का पाठ करें।

वृषभ राशि (Taurus)

वृषभ राशि वालों के लिए बुध दूसरे व पांचवें भाव के स्वामी बनकर आपकी राशि से नवम भाव (भाग्य भाव) से गोचर करेंगे फलस्वरूप नवम भाव में बुध धार्मिक यात्राओं और उच्च शिक्षा के योग बनाएंगे और यदि आप विदेश में पढ़ाई या व्यापार का प्लान कर रहे हैं, तो यह समय आपके लिए अनुकूल रह सकता है, पिता व गुरु का सम्मान करने से भाग्य का सहयोग मिलता रहेगा और इस दौरान आपका पूरा ध्यान इस बात पर रहेगा कि अपनी जमा-पूंजी को कैसे बढ़ाया जाए साथ ही आप केवल ख्याली पुलाव नहीं पकाएंगे, बल्कि पैसा कमाने के लिए जो भी अच्छे मौके मिलेंगे, उनका तुरंत फायदा उठाएंगे चूंकि भाग्य का सहयोग बना रहेगा जिस कारण से आप अच्छी कमाई करने के साथ-साथ पैसों की बचत (Savings) करने में भी सफल रहेंगे और पुराने निवेश से भी आपको अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना रहेगी, आप अपने काम में ईमानदारी और सही नियमों (Principles) का पालन करेंगे जिससे आपकी एक अलग पहचान बनेगी साथ ही कार्य के सिलसिले से यात्राएं भी संभव रहेगी।

उपाय:- शुक्रवार के दिन लक्ष्मी जी को सफेद फूल और फसेड मीठे का भोग व घी का दीपक अर्पित कर के श्री सूक्त का पाठ करें।

मिथुन राशि (Gemini)

मिथुन राशि वालों के लिए बुध पहले व चतुर्थ भाव के स्वामी बनकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अष्टम भाव में शुभ ग्रह का गोचर मिला-जुला फल देने वाला होता है अतः यह समय ‘शोध’ (Research) और गुप्त विद्याओं के लिए उत्तम है, लेकिन त्वचा या नसों से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति सचेत रहें और अपनी वाणी में कटुता न आने दें अन्यथा घर में छोटी-छोटी बातों पर गलतफहमियां पैदा हो सकती हैं, जो बड़ी बहस या विवाद का रूप ले सकती हैं जिससे इससे घर का माहौल खराब हो सकता है, ऑफिस में अचानक कुछ बदलाव हो सकते हैं, जिससे आपके ऊपर काम का प्रेशर बढ़ेगा अतः घबराएं नहीं, क्योंकि यही वह समय है जब आप अपनी लीडरशिप (नेतृत्व क्षमता) साबित कर पाएंगे और इस मेहनत के बदले आपको प्रमोशन या नई नौकरी के अच्छे अवसर भी आगे चलकर मिल सकते हैं।

उपाय:- गणेश चालीसा का नित्य पाठ करें।

कर्क राशि (Cancer)

कर्क राशि वालों के लिए बुध तीसरे व बाहरवें भाव के स्वामी बनकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे व्यापार में साझेदारी (Partnership) के लिए यह समय लाभप्रद है किंतु जीवनसाथी के साथ तार्किक बहस हो सकती है, लेकिन इससे रिश्तों में स्पष्टता आएगी और ‘बुधादित्य योग’ के कारण से समाज में पद-प्रतिष्ठा बढ़ेगी, कागजी कार्रवाई (Documentation) में सावधानी बरतें आप धन तो कमाएंगे, लेकिन खर्चों में भी वृद्धि की संभावना दिखती है जिस कारण से आय और खर्च के बीच तालमेल बैठाने में आपको थोड़ी मुश्किल आ सकती है और किसी कीमती वस्तु के खोने व चोरी होने से भी कुछ नुकसान हो सकता है हालांकि कार्यक्षेत्र में आपको नए अवसर प्राप्त होंगे व समझदारी के साथ लिए गए निर्णयों से लाभ होगा साथ ही संभावना है कि कुछ लोगों का ट्रांसफर (Transfer) हो या नौकरी बदलनी पड़ सकती है जिस कारण से शुरुआत में आप इस बदलाव से ज्यादा खुश या संतुष्ट न रहें, प्रेम जीवन में अगर आप अपने पार्टनर से प्यार से बात करेंगे और तालमेल बनाकर चलेंगे तो रिश्ता बहुत शानदार रहेगा और पूर्व की गलतफहमियां दूर होंगी, स्वास्थ्य के लिहाज से समय ठीक है मौसमी बदलावों से स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें।

उपाय:- राम चालीसा व हनुमत स्तवन का नित्य पाठ करें।

सिंह राशि (Leo)

सिंह राशि वालों के लिए बुध दूसरे व ग्याहरवें भाव के स्वामी बनकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे फलवरूप वाद-विवाद में विजय प्राप्त होगी, वकीलों और कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स (Competitive Exams) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए यह समय बेहतरीन है, ननिहाल पक्ष से संबंध मधुर रखें, आप अपनी लगातार मेहनत के दम पर अपने काम में बड़ी कामयाबी हासिल कर पाने में सफल हो सकते हैं साथ ही आप काम में आने वाली मुश्किलों का सामना भी कर पाने में सफल रहेंगे, आर्थिक दृष्टिकोण से समय अच्छा है लेकिन फिर भी अपनी कुछ जरूरतों को पूरा करने के लिए आपको लोन लेना पड़ सकता है।

उपाय:- नित्य संकटमोचन हनुमाष्टक का पाठ करें।

कन्या राशि (Virgo)

कन्या राशि वालों के लिए बुध पहले व दसवें भाव के स्वमो बनकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यह समय शेयर बाजार, सट्टेबाजी और रचनात्मक कार्यों के लिए अनुकूल हो सकता है एवं विद्यार्थियों की एकाग्रता (Concentration) भी बढ़ेगी हालांकि, यह समय आपको कुछ बुरी आदतों जैसे नशे आदि की तरफ भी ले जा सकता है जो उन्नति में बाधा बन सकते हैं लेकिन, फिर भी आपका सारा ध्यान अपने काम पर केंद्रित रहेगा और कार्य के सिलसिले से यात्रा के भी योग बनेंगे, आर्थिक दृष्टिकोण से देखें तो बुध का यह गोचर आपके लिए स्थिर और लाभदायक रहेगा और यदि आप व्यापार करते हैं तो आपको अच्छा लाभ मिलने की संभावना रहेगी, प्रेमियों के लिए यह समय उत्तम रहेगा व प्रेम संबंधो में प्रगाढ़ता आएगी, स्वास्थ्य के लिहाज से भी बुध का यह गोचर अच्छा रहेगा व आप अंदर से भी खुद को कुछ ऊर्जावान अनुभव करेंगे।

उपाय:- बुधवार के दिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

तुला राशि (Libra)

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम व द्वादश भाव के स्वामी बनकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा व घर में सुख-सुविधाओं की वस्तुओं की खरीदारी करने के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा साथ ही यह समय आपको ‘भूमि-भवन’ से जुड़े निर्णयों के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करेगा, भाग्य का सहयोग मिलने के कारण से कार्यक्षेत्र में उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे व किसी यात्रा पर जाने की भी संभावना रहेगी, आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह समय उत्तम रहेगा व आय वृद्धि के नए साधन प्राप्त होंगे व आपकी बचत खाते में भी कुछ वृद्धि होगी, प्रेमियों के लिए भी यह समय अच्छा रहने से प्रेम संबंध मधुर रहेंगे हालांकि कुछ गलतफहमी के कारण से कुछ क्षणिक विवाद संभव है अतः दूसरे की बातों में आने से बचें।

उपाय:- नित्य शिव जी को घी का दीपक अर्पित कर के मधुराष्टकं का पाठ करें।

वृश्चिक राशि (Scorpio)

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम व एकादश भाव के स्वामी बनकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आपकी कम्युनिकेशन स्किल्स (Communication Skills) बहुत प्रभावशाली रहेगी व मीडिया, लेखन और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को बड़ी सफलता मिल सकती है औए छोटी दूरी की यात्राएं लाभदायक रहेंगी, भाई-बहनों के साथ व्यर्थ के विवाद से बचें, अचानक धन लाभ के योग बनते दिखते हैं व व्यापारी वर्ग को किसी नए रणनीति के तहत उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे और आर्थिक स्थिति में भी सुधार होगा साथ ही भाग्य का सहयोग मिलने से कोई पुराना रुका कार्य पूर्ण होने से मन में कुछ प्रसन्नता अनुभव होगी और स्वास्थ्य भी उत्तम रहेगा व प्रेमियों के बीच नजदीकियाँ बढ़ेंगी।

धनु राशि (Sagittarius)

धनु राशि वालों के लिए बुध सातवें व दसवें भाव के स्वामी बनकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आपकी वाणी में मिठास और तर्क दोनों का समावेश रहेगा और धन संचय (Savings) के लिए भी यह समय उत्तम रहेगा, पारिवारिक व्यवसाय में लाभ के योग बन रहे हैं, हालांकि बुध का संबंध मंगल के साथ भी रहेगा अतः कारोबार के मार्ग में थोड़ा विशेष प्रयास करना पड़ेगा साथ ही खर्चों की वृद्धि के कारण से भी थोड़ी चिंता धन संचय को लेकर मन में बन सकती है, कर्ज लेने से बचें, प्रेम जीवन में आपको पार्टनर के साथ असहमति का सामना करना पड़ सकता है इसलिए रिश्ते में ख़ुशियाँ बनाए रखने के लिए आपसी सामंजस्य बनाकर रखना होगा, स्वास्थ्य के मामले में आपको पेट, पैरों में दर्द और दांत से जुड़ी समस्या परेशान कर सकती है।

उपाय:- विष्णु सहस्रनाम का नित्य पाठ करें।

मकर राशि (Capricorn)

मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ व भाग्य भाव के स्वामी बनकर आपकी ही राशि अर्थात पहले भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आपके व्यक्तित्व में निखार आएगा और आप चीजों का विश्लेषण (Analysis) बहुत गहराई से करेंगे साथ ही आपको समाज में अच्छा मान-सम्मान भी प्राप्त होगा और आपका झुकाव अध्यात्म के प्रति बढ़ेगा जिससे आपको हर भाग्य का निरंतर सहयोग प्राप्त होता रहेगा, कारोबार के मार्ग में आप निडरता से कार्य करेंगे साथ ही आपका प्रयास काम में परफेक्शन (perfection) लाने पर अधिक रहेगा जिससे आपको कार्यक्षेत्र में सराहना भी मिलेगी और यदि आप खुद को मिलने वाले अवसरों का लाभ उठा पाने में सफल रहे तो आपको विशेष लाभ होगा, कारोबार के लिहाज से भी यह समय अच्छा रहेगा व आय में वृद्धि के माध्यम बनेंगे जिससे आर्थिक स्थिति में भी कुछ सुधार देखने को मिलेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें व नशीले पदार्थों का विशेष त्याग करें, चर्म (skin), पेट, मुंह व जोड़ों में दर्द की शिकायत रह सकती है।

उपाय:- नित्य कृष्ण चालीसा का पाठ करें।

कुंभ राशि (Aquarius)

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम व अष्टम भाव के स्वामी बनकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप खर्चों में वृद्धि व ज्ञान का विस्तार और यात्राओं के योग बनेंगे, मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) में काम करने वालों को विदेश जाने का मौका मिल सकता है, बजट बनाकर चलें और आँखों का ध्यान रखें, संभव है कि आपके मन में किसी प्रकार की आंतरिक सुरक्षा को लेकर चिंता बने जिससे आपका कार्य भी प्रभावित होता दिखता है अतः अपने कार्यक्षेत्र में कार्य पर पूरा ध्यान केंद्रित करें साथ ही धैर्य व संयम से काम लें, व्यापारियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा व आय में वृद्धि के माध्यम बनेंगे साथ ही कार्य के सिलसिले से कोई यात्रा भी संभव रहेगी जिससे खर्चों में भी कुछ वृद्धि होगी, प्रेम जीवन में थोड़ा उतार-चढ़ाव दिखता है जिस कारण से आपकी पार्टनर के साथ बहस हो सकती है जो आपसी समझ की कमी का परिणाम होगा, पैरों में दर्द या चोट, आंखों में चोट/दर्द/ज्योति मंद पड़ना, सर दर्द आदि की समस्या थोड़ी रह सकती है।

उपाय:- नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व कुछ देर नित्य ध्यान करें।

मीन राशि (Pisces)

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी बनकर ग्याहरवें भाव से गोचर करेंगे फलवरूप आय के एक से अधिक स्रोत बन सकते हैं साथ ही दोस्तों और बड़े भाई-बहनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा एवं विभिन्न क्षेत्रों में नए प्रोजेक्ट्स और अवसर मिलेंगे जिससे कारोबार के क्षेत्र में उन्नति व आर्थिक स्थिति में सुधार होगा और नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के रास्ते खुलेंगे, भाग्य का निरंतर सहयोग पाने हेतु बड़ों का सम्मान करें, आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह समय उत्तम रहेगा और निवेश के माध्यम से लाभ होगा, प्रेमियों के लिए बुध का यह गोचर अच्छा रहेगा और प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी साथ ही पार्टनर के साथ नजदीकियाँ भी बढ़ेंगी, स्वास्थ्य का ध्यान रखें व अधिक चिकनाई वाले व्यंजनों से थोड़ा परहेज करें।

उपाय:- विष्णु चालीसा का नित्य पाठ करें।

जय श्री राम।