ज्योतिष शास्त्र में बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क के कारक ग्रह ‘बुध देव’ का नक्षत्र परिवर्तन अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। “ऋषिकेश पंचांग” गणना के अनुसार, 21 सितंबर 2026 की अर्धरात्रि (मध्यरात्रि 03:38 AM) पर बुध देव मंगल के स्वामित्व वाले तेजस्वी ‘चित्रा नक्षत्र’ में प्रवेश करेंगे जहाँ 30 सितंबर 2026 की अर्धरात्रि (04:07 AM) तक रहेंगे। Astrology Sutras (ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी) के इस विशेष शोधपरक आलेख में हम ‘नवतारा चक्र’ (तारा बल सिद्धांत) के आधार पर बहुत ही सरल भाषा में जानेंगे कि आपके जन्म नक्षत्र पर बुध के इस गोचर का क्या असर होगा और यदि प्रभाव प्रतिकूल है तो उससे बचने के अचूक शास्त्रीय उपाय क्या हैं।
💡 सबसे पहले जानें: अपना जन्म नक्षत्र कैसे ज्ञात करें?
कई लोगों को अपना जन्म नक्षत्र पता नहीं होता। इसे जानना बहुत ही आसान है:
शास्त्रीय नियम: आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा (Moon) जिस नक्षत्र में स्थित (बैठा) होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है।
- उदाहरण 1: यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र अश्विनी है।
- उदाहरण 2: यदि चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र धनिष्ठा माना जाएगा।
- उदाहरण 3: यदि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र रोहिणी होगा।
👉 बस अपनी जन्म कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र देखें और नीचे दी गई सूची में अपने नक्षत्र का सीधा प्रभाव पढ़ें!
🌌 1. ज्योतिषीय पृष्ठभूमि: बुध और चित्रा नक्षत्र का संबंध
चित्रा नक्षत्र के स्वामी भूमिपुत्र ‘मंगल’ हैं और इसके देवता देवताओं के शिल्पी ‘भगवान विश्वकर्मा’ हैं। बुध (बुद्धि व वाणी) जब मंगल (ऊर्जा व पराक्रम) के नक्षत्र में आते हैं, तो बुद्धि में गजब की फुर्ती और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता आती है। व्यापार में नई योजनाएं बनाने के लिए यह गोचर बहुत अनुकूल होता है।
📜 नवतारा चक्र का शास्त्रीय नियम (श्लोक व अर्थ)
ज्योतिष में जन्म नक्षत्र से गोचर नक्षत्र तक गिनती करके 9 ताराओं का निर्धारण किया जाता है:
⭐ 2. सभी 27 नक्षत्रों पर बुध के चित्रा गोचर का संक्षिप्त विवरण
नीचे दी गई तालिका से एक नज़र में समझें कि आपका नक्षत्र किस तारा समूह में आता है:
🔍 3. सभी 27 नक्षत्रों का विस्तृत व सरल फलादेश
अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार विस्तार से जानें कि बुध का चित्रा गोचर आपके जीवन में क्या बदलाव लाएगा:
1. चित्रा, धनिष्ठा एवं मृगशिरा नक्षत्र (जन्म तारा)
यदि आपका जन्म चित्रा, धनिष्ठा या मृगशिरा नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘जन्म तारा’ के चक्र में हो रहा है। इसके प्रभाव से आपके कार्यक्षेत्र में व्यस्तता और काम का दबाव बढ़ सकता है। विशेषकर चित्रा नक्षत्र वालों के सीधे जन्म नक्षत्र पर बुध का भ्रमण होने से अनिर्णय की स्थिति या सिरदर्द-तनाव रह सकता है। इस दौरान वाणी पर नियंत्रण रखें और बिना सोचे-समझें किसी बड़े सौदे पर हस्ताक्षर न करें।
2. हस्त, श्रवण एवं रोहिणी नक्षत्र (संपत् तारा)
यदि आपका जन्म हस्त, श्रवण या रोहिणी नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘संपत् तारा’ के चक्र में हो रहा है। जैसा कि नाम से स्पष्ट है, यह समय आपके लिए धन-धान्य और आर्थिक लाभ लेकर आएगा। रुका हुआ धन वापस मिलेगा, व्यापार में नया अनुबंध मिल सकता है और नौकरीपेशा जातकों की आय में वृद्धि के शुभ योग बनेंगे।
3. उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा एवं कृत्तिका नक्षत्र (विपत् तारा)
यदि आपका जन्म उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा या कृत्तिका नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘विपत् तारा’ के चक्र में हो रहा है। इस समय अचानक अप्रत्याशित खर्चे सामने आ सकते हैं। किसी भी व्यक्ति को उधार धन देने से बचें। साझेदारी के काम में पारदर्शिता रखें और यात्रा के दौरान अपने सामान का विशेष ध्यान रखें।
4. पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा एवं भरणी नक्षत्र (क्षेम तारा)
यदि आपका जन्म पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा या भरणी नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘क्षेम तारा’ के चक्र में हो रहा है। ‘क्षेम’ का अर्थ है कल्याण और सुरक्षा। यह गोचर आपके जीवन में मानसिक शांति, पारिवारिक प्रसन्नता और रुके हुए कार्यों को पूरा करने में मदद करेगा। स्वास्थ्य उत्तम रहेगा और घर में मांगलिक चर्चाएं होंगी।
5. अश्विनी, मघा एवं मूल नक्षत्र (प्रत्यरि तारा)
यदि आपका जन्म अश्विनी, मघा या मूल नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘प्रत्यरि तारा’ के चक्र में हो रहा है। ‘प्रत्यरि’ का अर्थ होता है विरोधी। इस समय कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों या प्रतिस्पर्धियों से सतर्क रहें। आपकी सीधी बातों का लोग गलत मतलब निकाल सकते हैं। वाद-विवाद और कोर्ट-कचहरी के मामलों से दूरी बनाए रखें।
6. अश्लेषा, ज्येष्ठा एवं रेवती नक्षत्र (साधक तारा)
यदि आपका जन्म अश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘साधक तारा’ के चक्र में हो रहा है। यह आपके कार्यों को सिद्ध करने वाला समय है। चूंकि ये तीनों नक्षत्र स्वयं बुध देव के हैं, इसलिए आपकी बौद्धिक क्षमता, तर्क और योजनाएं शत-प्रतिशत सफल होंगी। परीक्षा, इंटरव्यू, लेखन और शोध से जुड़े जातकों को बड़ी सफलता मिलेगी।
7. पुष्य, अनुराधा एवं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (वध/निधन तारा)
यदि आपका जन्म पुष्य, अनुराधा या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘वध (निधन) तारा’ के चक्र में हो रहा है। ज्योतिष में इस तारा को कष्टप्रद माना जाता है। इसलिए किसी भी प्रकार के शेयर मार्केट, सट्टेबाजी या भारी जोखिम भरे निवेश से बिल्कुल दूर रहें। वाहन सावधानी से चलाएं और स्वास्थ्य संबंधी किसी भी छोटी परेशानी को नजरअंदाज न करें।
8. पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (मित्र तारा)
यदि आपका जन्म पुनर्वसु, विशाखा या पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘मित्र तारा’ के चक्र में हो रहा है। इस समय मित्रों, संबंधियों और वरिष्ठ अधिकारियों का भरपूर सहयोग मिलेगा। यदि कोई कार्य लंबे समय से अटका था, तो वह किसी मित्र की सहायता से बन जाएगा। आपकी वाणी में सौम्यता आएगी।
9. आर्द्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र (अतिमित्र तारा)
यदि आपका जन्म आर्द्रा, स्वाति या शतभिषा नक्षत्र में हुआ है: तो बुध का यह गोचर आपके ‘अतिमित्र तारा’ के चक्र में हो रहा है। यह अत्यंत शुभ और भाग्योदयकारी स्थिति है। अचानक कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। विदेश से जुड़ा व्यापार, आईटी सेक्टर, मीडिया और कम्युनिकेशन के क्षेत्र में काम करने वालों को पद-प्रतिष्ठा और बड़ा आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।
🛠️ 4. बुध के अशुभ प्रभाव निवारण हेतु अचूक शास्त्रीय उपाय
जिन जातकों के लिए बुध का यह गोचर जन्म, विपत, प्रत्यरि अथवा वध तारा में पड़ रहा है, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। नीचे दिए गए सरल शास्त्रीय उपाय करके आप इसके दुष्प्रभावों को पूरी तरह शांत कर सकते हैं:
💡 5. बुध-चित्रा गोचर: रोचक फैक्ट्स व अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
निष्कर्ष: बुध का चित्रा नक्षत्र में यह गोचर कर्म और बुद्धि का सुंदर समन्वय है। अपने तारा चक्र को समझकर सही निर्णय लें और प्रतिकूल फल वाले जातक बताए गए सरल उपाय अवश्य करें।









