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जानें लड़की का ससुराल व उसका पति कैसा होगा भाग१

जानें लड़की का ससुराल व उसका पति कैसा होगा भाग १

 

जानें विवाह कब होगा
जानें विवाह कब होगा

 

भाग:-१

 

सभी माता-पिता अपनी बेटी के विवाह को लेकर काफी चिंतित रहते हैं कि उसका विवाह कब होगा, पति कैसा होगा, ससुराल कैसा होगा, बेटी के ससुराल की दूरी क्या होगी व उसका किस दिशा में विवाह होगा और उनकी यह चिंता स्वभाविक भी है, हमारे महर्षियों ने इस पर अनेक विचार रखें जिनमे से मैं भृगु संहिता के कुछ सूत्र को आप सभी के साथ साझा कर रहा हूँ जिससे आप सभी यह सभी प्रश्नों के उत्तर बहुत ही सरलता से ज्ञात कर सकते हैं।

 

विवाह से जुड़े कुछ ज्योतिष के सूत्र
विवाह से जुड़े कुछ ज्योतिष के सूत्र

 

कुंडली के सप्तम भाव से विवाह का विचार किया जाता है सप्तम भाव में जो राशि होती है उस राशि के स्वामी को सप्तमाधिपति कहा जाता है इसके अतिरिक्त ज्योतिष में गुरु को लड़की के विवाह का कारक माना गया है, विभिन्न लग्नों के अनुसार सप्तमाधिपति अर्थात सप्तम भाव के स्वामी भी बदलते रहते हैं जिसकी सहायता से हम विवाह से जुड़े प्रत्येक संदर्भ पर विचार करते हैं तो चलिए जानते हैं एक-एक कर हर सूत्र के बारे में जिससे हम बहुत ही आसानी से लड़की के पति, पति की आयु, विवाह की दूरी व दिशा, पति की नौकरी, विवाह की आयु के बारे में ज्ञात कर सकते हैं:-

 

भृगु संहिता सूत्र
भृगु संहिता सूत्र

 

विवाह किस वर्ष में होगा:-

 

लग्न कुंडली व चंद्र कुंडली के सप्तम भाव में जो राशि हो उसमें 10 अंक को जोड़ देना चाहिए तदोपरांत जितने भी ग्रह सप्तम भाव को देखते हैं या सप्तम भाव में बैठे हो उन सभी के 4-4 अंको को जोड़ देना चाहिए अब जो योगफल आएगा उस योगफल में कन्या का विवाह होता है।

विशेष:-

उस योगफल की आयु के समय सप्तमाधिपति की महादशा या अंतर्दशा व गुरु का लग्न, तृतीय, पंचम, सप्तम, नवम या एकादश भाव से गोचर होना अनिवार्य है किन्तु गोचरस्थ शनि की लग्न व सप्तम पर दृष्टि न हो तो ही यह सूत्र फलित होता है।

 

ससुराल की दिशा:-

 

१. यदि सप्तम भाव में मेष, सिंह या धनु राशि हो एवं सूर्य और शुक्र ग्रह हो तो पूर्व दिशा में शादी होती है।

२. यदि सप्तम भाव में वृष, कन्या या मकर राशि हो और चंद्र, शनि ग्रह स्थित हो तो दक्षिण दिशा में विवाह होता है।

३. यदि सप्तम भाव में मिथुन, तुला या कुंभ राशि हो और मंगल, राहु, केतु ग्रह स्थित हो तो पश्चिम दिशा में विवाह होता है।

४. यदि सप्तम भाव में कर्क, वृश्चिक या मीन राशि हो और बुध तथा गुरु हो तो उत्तर दिशा में विवाह होता है।

विशेष:-

यदि लग्न कुंडली में सप्तम भाव में कोई भी ग्रह स्थित न हो साथ ही उस भाव पर किसी ग्रह की दृष्टि भी न हो, तो उस स्थिति में जो ग्रह कुंडली में सबसे अधिक बली अवस्था में हो उस ग्रह की राशि जिस दिशा की स्वामी होगी उस दिशा में विवाह होता है।

 

विवाह की आयु:-

 

१. यदि सप्तम भाव में बुध स्वराशि या उच्च राशि का होकर बैठा हो व पाप ग्रह से न तो युत व दृष्ट हो तो ऐसी स्थिति में विवाह 13 से 19 वर्ष की आयु में विवाह होता है।

२. यदि सप्तम भाव में मंगल स्वराशि का होकर स्थित हो व पापी ग्रह से युत या दृष्ट हो तो ऐसी स्थिति में विवाह 24 वर्ष के अंदर होता है।

३. यदि सप्तम भाव में शुक्र स्थित हो व पापी ग्रह से युत या दृष्ट हो तो ऐसी अवस्था में विवाह 24-29 वर्ष की आयु में होता है।

४. यदि सप्तम भाव में चंद्रमा स्वराशि स्थित होकर पापी ग्रह से प्रभावित हो, तो ऐसी स्थिति में विवाह 22-24 वर्ष की आयु में होता है।

५. यदि सप्तम भाव में गुरु स्वराशि का होकर स्थित हो व पापी ग्रह से युत व दृष्ट न हो तो ऐसी स्थिति में विवाह 26-29 वर्ष की आयु में होता है।

६. यदि सप्तम भाव में चर राशि अर्थात मेष, कर्क, तुला व मकर राशि हो व कोई भी शुभ ग्रह सप्तम भाव में स्थित हो साथ ही सप्तम भाव को दो या दो से अधिक ग्रह देखते हैं तो विवाह उचित आयु में हो जाता है।

७. यदि सप्तम भाव में बुध मिथुन व कन्या राशि का स्थित हो व उस पर किसी भी ग्रह की दृष्टि न हो तो ऐसी स्थिति में विवाह बाल्यावस्था में ही संपन्न होने के योग बनते हैं।

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसका भाग:-२ जल्द ही प्रकाशित करूँगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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शरीर पर उपस्थित मस्से का महत्व

शरीर पर उपस्थित मस्से का महत्व

 

तिल और मस्सों का रहस्य
तिल और मस्सों का रहस्य

 

जिस प्रकार से शरीर पर उपस्थित तिल का शुभाशुभ फल होता है व उनका अपना महत्व होता है ठीक उसी प्रकार शरीर पर उपस्थित मस्से का भी अपना एक अलग महत्व होता है व शरीर के अनेक भागों पर मस्से के होने के अलग-अलग फल हमारे शास्त्रों ने बताए हैं तो चलिए जानते हैं शरीर के किस स्थान पर मस्सा होने का क्या फल होता है:-

१. सिर पर मस्सा होने से धन लाभ होता है।

२. चेहरे के पृष्ठ भाग पर मस्सा हो तो व्यक्ति सौभाग्यशाली होता है।

३. मस्तिष्क पर मस्सा होने से व्यक्ति धनी होता है।

४. भौंह पर मस्से का होना दुर्भाग्य का सूचक होता है, यदि दोनों भौंहों के मध्य मस्सा हो तो ऐसा व्यक्ति दुष्ट होता है परंतु इनका परिचय क्षेत्र काफी बड़ा होता है, यदि महिला के भौंह पर मस्सा हो तो वह महिला जल्द ही वैधव्य को प्राप्त करती है।

५. पलक पर मस्से का होना अनेक प्रकार के दुःख की ओर संकेत करता है।

६. नेत्रों पर मस्सा प्रियजन से मिलाप होने का संकेत देता है।

७. मस्तिष्क, कनपटी या नेत्र हड्डी के जोड़ स्थान पर मस्सा हो तो ऐसा व्यक्ति सब कुछ त्याग कर सन्यासी होता हो जाता है।

८. यदि नाक व कान पर मस्सा हो तो ऐसा व्यक्ति आभूषण प्रिय होता है और ऐसे व्यक्ति धार्मिक प्रवत्ति के होते है।

९. यदि गाल पर मस्सा हो तो उसका पुत्र लुंज होता है।

१०. दाढ़ी पर मस्सा होना धन लाभ का सूचक होता है।

११. गले पर मस्से का होना व्यक्ति को खान-पान का शौकीन बनाता है।

 

शरीर पर तिल व मस्से और आपका व्यक्तित्व
शरीर पर तिल व मस्से और आपका व्यक्तित्व

 

१२. हिर्दय व वक्ष स्थल पर मस्से का होना पुत्र-सुख का सूचक होता है ऐसे व्यक्ति को संतान में एक पुत्र अवश्य ही प्राप्त होता है।

१३. पसली व उसके आस-पास का मस्सा दुःख का सूचक होता है।

१४. कंधे का मस्सा व्यक्ति को आकर्षक व्यक्तित्व परन्तु अकर्मण्य बनाता है।

१५. पीठ पर मस्से का होना दुःख और चिंताओं से मुक्ति प्रदान कराने का सूचक होता है।

१६. बाँह पर मस्से का होना शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का सूचक होता है ऐसे व्यक्ति प्रत्येक शत्रु का दमन करने में सक्षम होते हैं।

१७. कलाई का मस्सा व्यक्ति के स्वम् के लिए अशुभ होता है ऐसे व्यक्ति अकसर अपने आपको ही कष्ट देते रहते हैं।

१८. हाथ की अंगुलियों का मस्सा सौभाग्य का सूचक होता है।

१९. पेट पर मस्से का होना सर्जरी का सूचक होता है ऐसे व्यक्ति के जीवनकाल में कम से कम एक सर्जरी की संभावना बनी रहती है।

२०. नाभि पर मस्से का होना चोरी व अग्नि से धन नाश का सूचक होता है।

२१. घुटने पर मस्से का होना गठिया रोग या शत्रुओं से पराजित होने का सूचक होता है।

२२. पिंडलियों पर मस्से का होना गठिया रोग व दुर्घटना से चोट लगने का सूचक होता है।

२३. ऐड़ी पर मस्से का होना चरित्र हनन का सूचक होता है।

विशेष:-

पुरुषों के शरीर पर मस्सा, तिल का दक्षिण भाग पर होना शुभ तथा नारियों के लिए बाएं भाग पर होना शुभ माना जाता है।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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शरीर पर स्थित और आपका व्यक्तित्व भाग-२

शरीर पर स्थित और आपका व्यक्तित्व भाग-२

शरीर पर तिल और आपका व्यक्तित्व
शरीर पर तिल और आपका व्यक्तित्व

 

शरीर पर स्थित तिल और आपका व्यक्तित्व भाग:-१ की link मैं आप सभी को इस पोस्ट की शुरुवात व अंत दोनों जगह उपलब्ध करा रहा हूँ:-

शरीर पर स्थित तिल और आपका व्यक्तित्व

 

भाग:-२

 

तस्या: शुभ वग्ममरालपदक्ष्य राज्यावृतं कृष्णावंशाल शुक्लम्र।

प्रास्पन्दतैक नयन सुकैशया, मीनाहत नइममिताभिताग्राम।।

सुन्दरकान्डे त्रिशा: सर्गा।।२।।

(श्रीमद वाल्मीकि रामायणै)

 

भावार्थ:-

सुंदर केशों वाली सीता, बांकी बनौलियों से घिरा हुआ परम मनोहर काला तिल, श्वेत और विशाल बायाँ नेत्र फड़कने लगा जैसे कि मानो मीन के आघात से लाल रक्त हिलने लगा हो, आर्या सीता को अशोक वाटिका में, शोकाकुल स्थिति में उपर्युक्त शकुन हुआ, जिससे उनका शोक जाता रहा, मन शांत हो गया और हिर्दय हर्ष से चहक उठा।

तिलों का अपना विशेष महत्व है, शकुन-अपशकुन के अतिरिक्त शरीर के विभिन्न अंगों में स्थित होने से विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त होते हैं, मस्सा और तिल के बारे में “वराहमिहिर” जी ने बताया है कि यदि मस्सा शरीर के वर्ण का ही या उज्जवल हो तो ब्राह्मण जाति के लोगों के लिए शुभ होता है तथा क्षत्रिय वर्ग के लिए श्वेत या लालिमा युक्त मस्सा शुभ होता है, वैश्य वर्ग के लिए पीला, श्वेत और लालिमा युक्त मस्सा शुभ होता है, काला मस्सा केवल शूद्र जाति के लिए शुभ होता है।

 

शरीर पर तिल के निशान का महत्व
शरीर पर तिल के निशान का महत्व

 

कमर का तिल:-

 

कमर पर तिल वाले व्यक्ति हमेशा हाजिर जबाब पाए जाते हैं, इनका दिमाग तेज होता है व ऐसे व्यक्ति अपने बाहुबल से उन्नति प्राप्त करते हैं।

 

कूल्हों का तिल:-

 

कूल्हों का तिल व्यक्ति को सहनशील बनाता है ऐसे व्यक्ति हर परिस्थिति का सामना बखूबी कर लेते हैं व ऐसे व्यक्ति जल्दी हार मानकर नही बैठते हैं।

 

पीठ का तिल:-

 

पीठ में तिल का निशान होना बहुत शुभ नही होता अतः ऐसे व्यक्तियों को सोच-समझ कर ही किसी भी समारोह में शामिल होना चाहिए किन्तु पीठ पर तिल या मस्सा शत्रुओं से मुक्ति दिलाता है, ऐसे व्यक्ति सरल हिर्दय के होते हैं साथ रणनीति बनाने में भी निपुण होते हैं।

 

कलाई का तिल:-

 

कलाई पर तिल व्यक्ति को किफायती बनाता है परंतु उसे किसी बंधन (केवल जेल ही नही अपितु सामाजिक बंधन भी) में बाँध सकता है, ऐसे व्यक्ति पर आँख बंद कर के विश्वास नही किया जा सकता, यदि ऐसा तिल महिला की कलाई पर है तो एक विवाह और पुरुष की कलाई पर है तो दो विवाह का सूचक होता है।

 

महिलाओं की कलाई पर तिल का होना उन्हें खुद-गर्ज व मतलब-परस्त बनाता है परंतु ऐसी महिलाएं अच्छी अभिनेत्री या काम निकालने के लिए ड्रामे बाज भी होती हैं, महिलाओं की बाईं कलाई पर तिल धन-दौलत दिलाता है, ऐसी स्त्रियाँ घरेलू काम में दक्ष व निपुण होती हैं, पुरुषों की बाईं कलाई पर तिल होना उन्हें खुददार व्यक्तित्व देता है ऐसे लोग सफल जीवन व्यतीत करते हैं।

 

पेट पर तिल:-

 

पेट पर तिल वाले व्यक्ति सज्जन पुरुष होते हैं, ऐसे व्यक्ति को ऐसी स्त्री से विवाह करना चाहिए जिसके विचार व व्यवहार में पुरुष के लिए लाभकारी सामंजस्य हो जिससे जीवन खुशहाल रहे।

 

बगल में तिल:-

 

बाईं ओर बगल का तिल, चिन्ह संघर्ष का सूचक है, दाईं ओर का तिल बहुत सतर्क व सावधान होने की चेतावनी देता है, यदि सावधानी न बरती तो ऐसे व्यक्तियों को अधिक नुकसान उठाना पड़ता है।

 

तिल के निशान का फलकथन

 

अंगुलियों का तिल:-

 

किसी भी अंगुली पर तिल का होना व्यक्ति को बेईमान व परिश्रम से दिल चुराने का संकेत देता है।

 

हाथ पर तिल:-

 

महिलाओं के हाथों में तिल धन-दौलत, प्रतिष्ठा व मान-सम्मान प्रदान करवाता है परंतु पुरुषों के हाथ में तिल एक से अधिक विवाह के योग बनाता है जीवन रेखा, भाग्य रेखा व मस्तक के योग से बने त्रिकोण या घनागार का तिल पुरुषों को भाग्यवान, धनवान व राजयोग प्रदान करवाता है।

 

घुटनों पर तिल या मस्सा:-

 

दाईं ओर के घुटने पर पाया जाने वाला तिल या मस्सा खुशहाल जीवन व अच्छे भाग्य का प्रतीक होता है, इनका स्वभाव भी अच्छा होता है परंतु बाएं घुटने का तिल या मस्सा व्यक्ति को बेहद फिजूल खर्च करने वाला बनाता है किंतु ऐसे व्यक्ति व्यापार, व्यवहार व व्यवसाय में बहुत सूज-बूझ से कार्य करते हैं।

 

भाग:- १ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं।

शरीर पर स्थित तिल और आपका व्यक्तित्व

जल्द ही इसका तीसरा भाग प्रकाशित करूँगा जिस पर मस्से के बारे में लिखूँगा।

 

जय श्री राम।

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शरीर पर स्थित तिल और आपका व्यक्तित्व

शरीर पर स्थित तिल और आपका व्यक्तित्व

 

भाग:-१

 

शरीर पर तिल और आपका व्यक्तित्व
शरीर पर तिल और आपका व्यक्तित्व

 

हमारे शरीर पर पाए जाने वाले तिल व मस्से विभिन्न प्रकार के होते हैं जिसमें गोलाकार मस्से उत्तम प्रकार के व्यक्तित्व के परिचायक हैं, नुकीले और तिरछे तिल व मस्से अच्छे नही होते हैं यदि तिलों का रंग हल्का भूरा है तो उसे सौभाग्य का प्रतीक मानते हैं, शरीर पर पाया जाने वाला प्रत्येक तिल अपनी अलग-अलग विशेषता और महत्व रखता है, अत्यधिक काले तिल को जीवन में कठिनाई और समस्याओं का प्रतीक माना गया है शरीर पर पाए जाने वाले तिलों की स्थिति से आप अपने व दूसरों के स्वभाव व व्यवहार का सरलता से अनुमान लगा सकते हैं:-

 

तिल के निशान का फलकथन
तिल के निशान का फलकथन

 

माथे पर तिल:-

 

माथे पर, सीधी तरफ तिल महिलाओं की सफलता, ऐश्वर्य व प्रतिष्ठा का प्रतीक है ऐसे व्यक्ति को क्रोध अधिक आता है व बहुत तीव्र गति से आता है, ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वासी होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति धनवान भी होते हैं परंतु फिजूल खर्चों पर अपना धन भी व्यय करते रहते हैं, यदि तिल या मस्सा बाईं ओर हो तो वह समस्याओं व कठिनाइयों का प्रतीक होता है।

 

आँख का तिल:-

 

आँख के ऊपर का तिल व्यक्ति के ठंडे स्वभाव का प्रतीक है किंतु ऐसे व्यक्ति धोखेबाज भी होते हैं।

 

भौंह का तिल:-

 

भौंह का तिल व्यक्ति के जीवन में संघर्ष परंतु सफलता बताता है, ऐसे व्यक्ति को अपने घर में तथा घर के बाहर भी सफलता मिलती हैं, आँख के बाहरी कोने का तिल व्यक्ति के ईमानदार होने का सूचक होता है तथा बाईं ओर का तिल आराम का सूचक होता है।

 

नाक का तिल:-

 

नाक पर स्थित तिल व्यक्ति को सरल चित्त बनाता है ऐसे व्यक्ति जीवन में सफल भी होते हैं, इनका विवाह अच्छी जगह, अच्छे खानदान में होता है, अचानक ऐसे व्यक्तियों को कल्पना से अधिक धन प्राप्त होता है, नाक के सीधी (दाईं) ओर का तिल यात्राओं की सूचना देता है, नाक पर बाई ओर का तिल बताता है कि ऐसा व्यक्ति विश्वास के काबिल नही होता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति धोखा-धड़ी में निपुण होते हैं, नाक की नोक का तिल अत्यधिक क्रोध व झगड़ालू प्रवृत्ति का सूचक होता है।

 

गाल पर तिल:-

 

यदि महिला के दाएं गाल पर तिल हो तो अच्छा होता है जिससे उन्हें अच्छा घर-बार मिलता है, उनका मित्रों/सहेलियों में सम्मान होता है, यदि तिल महिला के बाईं गाल पर लाल रंग का हो तो उसे धन दौलत मिलती है परंतु यदि इसी भाग पर काला तिल हो तो मन-पसंद जगह पर विवाह होता है और यदि गाल के दोनों तरफ तिल हो तो उन्हें प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है।

 

शरीर पर तिल के निशान का महत्व
शरीर पर तिल के निशान का महत्व

 

होंठ पर तिल:-

 

महिलाओं के ऊपरी होंठ पर तिल उन्हें खुशहाल जीवन व धन प्रदान करता है, वैसे भी ऐसी महिला हंसमुख स्वभाव वाली होती हैं, महिलाओं के निचले होंठ पर तिल का होना अशुभ होता है।

 

कानों पर तिल:-

 

कानों पर तिल का होना धन-दौलत से संपन्न किन्तु घुमक्कड़ प्रवृत्ति के व्यक्तित्व की निशानी होती है ऐसे लोगों को प्रसिद्धि भी प्राप्त होती है, यदि तिल कान के अंदर स्थित है तो यह व्यक्ति की ऐश-परस्ती, मौज-मस्ती परंतु धोखा व फरेब पसंदी का सूचक है परंतु, महिलाओं के कानों पर तिल का होना अच्छे घर-बार व धन-दौलत का प्रतीक होता है।

 

गर्दन पर तिल:-

 

गर्दन पर तिल का होना अच्छा होता है यह तिल जीवन भर खुशहाली व धन-दौलत प्रदान करता है।

 

सीने पर तिल:-

 

सीने का तिल बुद्धिमत्ता व उत्तम सोच-विचार का सूचक होता है, महिलाओं के दाएं पुश्त पर तिल अधिक संतान की इच्छा बताता है ऐसे तिल वाली स्त्रियों की मृत्यु अक्सर अपने पति से पहले हुआ करती है, ऐसे व्यक्ति आराम-तलब व झगड़ालू भी होते हैं, यदि तिल बाईं तरह है तो ऐसे व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं परंतु उनका भाग्य हमेशा उत्तम ही रहता है।

 

ठोड़ी पर तिल:-

 

पुरुष की ठोड़ी पर तिल उसके अच्छे भाग्य का सूचक होता है, “शास्त्रों के अनुसार श्री राम चन्द्र जी के ठोड़ी पर भी तिल था” जिन स्त्रियों के ठोड़ी पर तिल हो वो अकसर अधिक संतान की इच्छा रखा करती हैं।

 

पसलियों पर तिल:-

 

जिन लोगों की पसलियों पर तिल होता है उनको सफलता पाने के लिए अत्यधिक परिश्रम करना पड़ता है।

 

कंधों पर तिल:-

 

ऐसे लोग फितरती, घूमने-फिरने के लिए हमेशा बेचैन रहते हैं ऐसे व्यक्तियों का अधिक समय तक एक ही स्थान पर टिक पाना संभव नही होता है, सैर-सपाटा और अधिकतर यात्राएं करते रहते हैं, यदि तिल दाएं कंधे पर हो तो अच्छी जगह, अच्छे खानदान में विवाह का सूचक होता है, पुरुषों के बाएं कंधे पर तिल उसे मस्त-मौला स्वभाव का बनाता है परंतु ऐसे व्यक्ति विषम परिस्थितियों में भी प्रसन्नचित्त पाए जाते हैं और घबराहट इनसे दूर भागती है।

 

“पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इस लेख को दो भागों में प्रकाशित करूँगा।”

 

जय श्री राम।

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भाग्यांक 9: जानें क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

भाग्यांक 9: जानें क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

 

भाग्यांक 9
भाग्यांक 9

 

भाग्यांक 9 के व्यक्ति दृढ़ इच्छाशक्ति के एवं साहसी होते हैं, क्रोध इनकी नाक पर रहता है और ये जरा-जरा सी बात पर तुनक जाते हैं या विरोध कर बैठते हैं इनका सबसे बड़ा गुण तार्किकता होता है भले ही वह तर्क सत्य के लिए हो या असत्य के लिए, ये जिस ओर भी रहते हैं वह पक्ष स्वतः ही प्रवल हो जाता है, परन्तु यह गुण कभी-कभी सीमा भी लांघ जाता है और मामूली बातों के लिए भी ये जिद्द करने लग जाते हैं, साधारण कुल में जन्म लेकर और विपरीत परिस्थितियों में पलकर भी ये व्यक्ति महान बनते हैं, नही शब्द तो इनके शब्दकोश में ही नही है हर बात के लिए संघर्ष करना और तब तक करते रहना जब तक कि सफलता न मिल जाए, इनका लक्ष्य होता है।

 

अंक ज्योतिष
अंक ज्योतिष

 

बाधाओं, संकटों एवं तकलीफों में भी भाग्यांक 9 वाले व्यक्ति अपनी राह निकाल ही लेते हैं, इनको जीवन में पारिवारिक सहयोग नही के बराबर ही मिलता है, परंतु फिर भी ये हिम्मत नही हारते, घबराते नही और न ही पीछे हटते हैं, इनके जीवन का मूल मंत्र ही आगे बढ़ना होता है और ये निरंतर आगे बढ़ते रहते हैं और तभी संतुष्ट होते हैं जब अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लें अपरिचित से अपरिचित व्यक्ति से भी मित्रता कर लेने में भी भाग्यांक 9 वाले व्यक्ति निपुण होते हैं और रक्त सम्बंधित, पेट जनित रोग से परेशान रहते हैं, हार्ट अटैक, रक्त चाप की बीमारी भी इन्हें हो सकती हैं और ये व्यक्ति जीवन को जीने की कला जानते हैं और उसमें सफल भी होते हैं, मशीनरी उधोग, मैनेजर, शोध आदि के कार्यों में भाग्यांक 9 वालों की रुचि होती है, इनका गृहस्थ जीवन ठीक नही कहा जा सकता क्योंकि पति-पत्नी में परस्पर कलह होते रहते हैं, दोनों सामान्यतः दो दिशाओं की ओर चलने वाले होते हैं और एक-दूसरे की भावनाओ को समझ नही पाते, अतः इनको अपने क्रोध और हठी स्वभाव पर नियंत्रण रखना चाहिए।

 

कुल मिलाकर भाग्यांक 9 के व्यक्ति भाग्य के धनी होते हैं इसमें कोई संदेह नही है।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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भाग्यांक 8: जानें क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

भाग्यांक 8: जानें क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

 

भाग्यांक 8
भाग्यांक 8

 

भाग्यांक 8 वाले व्यक्ति न तो जीवन में खतरा उठाने की सोचते हैं और न ही किसी ऐसे काम में हाथ डालते हैं जिसमें खतरा हो या गंभीर जिम्मेदारी हो, वे अपने जीवन को आराम से जीने में विश्वास रखते हैं, ऐसे व्यक्ति में गोपनीयता जैसी कोई बात नही होती, इनके पेट में कभी कोई बात नही पचती कहने का आशय यह है कि जो भी रहस्य इनको पता होगा व शीघ्रातिशीघ्र लोगों को बताने को आतुर रहते हैं अतः ये महत्वपूर्ण एव गोपनीय प्रतिष्ठानों में सफल नही हो पाते हैं, फक्कड़, मौजी स्वभाव और सब कुछ लुटाकर भी मस्त रहने वाले भाग्यांक 8 के दीवानों की दुनिया ही निराली होती है, मौज में आ गए तो पहने हुए वस्त्र भी उतार कर दे देते हैं और यदि चिढ़ गए तो एक रुपया भी खर्च नही करते हैं, भाग्यांक 8 वाले व्यक्ति खुद को कुछ इस प्रकार प्रदर्शित करते हैं जैसे ये अत्यधिक व्यस्त हों, इनके जीवन में वास्तविकता कम व दिखावा अधिक होता है।

 

अंक ज्योतिष
अंक ज्योतिष

 

भाग्यांक 8 वाले व्यक्ति ‘Short Cut Man’ कहलाते हैं, लम्बा-चौड़ा हिसाब इन्हें पसंद नही होता क्योंकि गणित के आंकड़ों में इनका मन नही रमता है, व्यर्थ के वाद-विवादों में भाग्यांक 8 वाले व्यक्ति नही उलझते, कल क्या होगा इसकी चिंता इन्हें नही होती बस केवल आज में ही जीना इन्हें पसंद होता है, आर्थिक दृष्टि से भाग्यांक 8 वाले व्यक्ति “खाऊ-खरचू” कहलाते हैं खाया और उड़ाया इनके जीवन का मंत्र होता है फलस्वरूप संग्रह की वृत्ति इनमें नही पनपती और न तो ये धन संचय में विश्वास रखते हैं, मित्रों की दृष्टि से ये सौभाग्यशाली होते हैं और जीवन में मित्रों की कृपा पर ही जीवित रहते हैं, भाग्यांक 8 वालों का स्वास्थ्य सुंदर, दृढ़ और आकर्षक होता है पर साथ ही लापरवाही भी इनके इर्द-गिर्द मंडराती रहती है, इंश्योरेंस, खनिज कार्य तथा उन सभी कार्यों अधिकाधिक जनसंपर्क हो उसमें भाग्यांक 8 वाले व्यक्ति अधिक सफल होते हैं, इन लोगों को चाहिए कि व्यर्थ की बातों में समय न गंवाएं और ऐसा प्रदर्शन भी न करें जिसमें लापरवाही झलकती हो, यदि भाग्यांक 8 वाले व्यक्ति अपने आप पर नियंत्रण रखें तो निश्चय ही सफल होकर उन्नति की ओर अग्रसर हो सकते हैं।

 

जय श्री राम।

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अप्रैल 2020: मीन लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

अप्रैल 2020: मीन लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मीन लग्न
मीन लग्न

 

मीन लग्न वालों के लिए अप्रैल 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का लग्न से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, ज्वर या नेत्रों में कोई तकलीफ संभव रहेगी, 13 अप्रैल को सूर्य गोचर बदलकर दूसरे भाव से अपनी उच्च राशि मेष से गोचर करेंगे फलस्वरूप अचानक से रुका हुआ धन मिलने के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें क्योंकि छोटी सी लापरवाही आपका धन दवाईयों पर व्यय कराएगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, माह के शुरुवात में बुध का गोचर आपके द्वादश भाव से रहेगा अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, कार्य के सिलसिले से छोटी यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, 7 अप्रैल को बुध गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, घर के किसी सदस्य के स्वास्थ्य को लेकर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, मित्रों से लाभ होगा, 25 अप्रैल को बुध पुनः गोचर बदलकर दूसरे भाव में जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, आपकी वाणी लोगों को कटु लगने के कारण से विवाद की स्थिति उत्पन्न होगी अतः घर-परिवार या जहाँ अधिक लोग एकत्रित हों वहाँ बहुत सोच-समझ कर ही बोलें, आय में वृद्धि होगी।

 

मीन राशिफल
मीन राशि

 

माह के शुरुवात में शुक्र का तीसरे भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप छोटे भाई-बहन का पूर्ण सहयोग मिलेगा व उनकी उन्नति भी होगी, नए मित्र बनेंगे व मित्रों के साथ अच्छा समय बीतेगा, भाग्य की वृद्धि होगी, यदि आपके छोटे भाई-बहन विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, माह के शुरुवात में गुरु, शनि व मंगल का एकादश भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, बड़े भाई-बहन का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं तो अप्रैल, मई, जून यह तीन माह आपके लिए अच्छा सिद्ध होगा, संतान की उन्नति होगी, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, प्रेमियों के लिए यह माह प्रेम विवाह के योग बनाएगा, वाहन सावधानी से चलाएं, जिनकी उम्र 55-60 से अधिक है वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो यह माह आपके अच्छा सिद्ध होगा, यदि आप शेयर मार्केट या कहीं पैसा लगाना चाहते हैं तो यह माह आपके लिए शुभ रहेगा, माह के शुरुवात में राहु का गोचर आपके चतुर्थ भाव से रहेगा जिस कारण से घर के माहौल में कभी-कभी अशांति अनुभव होगी, यदि आप घर लेना चाहते हैं तो सितंबर तक रुक जाएं क्योंकि चतुर्थ भाव से राहु का गोचर वास्तु दोष से निर्मित घर दिलवाता है, माह के शुरुवात में दशम भाव से केतु का गोचर रहेगा फलस्वरूप मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे।

 

राशिफल

 

कुल मिलाकर मीन लग्न वालों के लिए अप्रैल 2020 सामान्य रहेगा जिसमे अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, नए मित्र बनेंगे, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, प्रेम विवाह के योग बनेंगे, यदि आपके छोटे भाई-बहन विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, ज्वर, नेत्रों में तकलीफ, सर दर्द, वाहन से चोट, जोड़ों, कमर व पैर में दर्द की शिकायत के योग बनेंगे अतः स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आय में वृद्धि होगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, माह की 5, 6, 7, 8, 10, 12, 15, 17, 18, 19, 25 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मीन लग्न के व्यक्ति नित्य विष्णु सहस्रनाम व सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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भाग्यांक 7: जानें क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

भाग्यांक 7: जानें क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

 

भाग्यांक 7
भाग्यांक 7

 

भाग्यांक 7 एक चुनौती भरा अंक है, जो दिलेर है, साहसी है, हिम्मत से ओत-प्रोत है ऐसे व्यक्ति जीवन को चुनौती के रूप में देखना पसंद करते है और चुनौती हो हर समय स्वीकार करने के लिए तैयार रहते हैं इनका एक ही लक्ष्य होता है अपने गंतव्य की ओर बढ़ते रहना, फिर भले ही मार्ग में कितनी ही बाधाएं, परेशानी एवं संकट आए ये व्यक्ति पीछे हटना पसंद नही करते, निराशा इनको छू नही सकती, हां यह बात अवश्य है कि जितने अधिक संघर्ष यह झेलते हैं उतने शायद ही अन्य कोई भाग्यांक का व्यक्ति झेलता होगा, परिस्थितयां प्रतिपल इनकी परीक्षा लेती रहती है, पर यह अपने लक्ष्य को सामने रखते हैं और अंत में उसमे सफलता प्राप्त कर लेते हैं, अपने कार्य में किसी का हस्तक्षेप ये स्वीकार नही करते, इनके दिमाग में यह ठीक प्रकार से व्यवस्थित होता है कि इन्हें किस समय क्या करना है और चाहे दूसरे कुछ भी कहें, कैसी भी सलाह दें, ये अपनी ही धुन में रहते हैं और वही करते हैं जो इनके दिमाग मे होता है।

 

अंक ज्योतिष
अंक ज्योतिष

 

भाग्यांक 7 वालों की इच्छाशक्ति प्रवल होती है, कठिनाईयों में भी ये मुस्कुराते रहते हैं, विपत्तियों में ये चमचमाते हैं एवं संघर्षों में कुंदन की तरह निखरकर चकाचौंध पैदा कर देते हैं, जीवन को किस तरह से जीना चाहिए यह इन्हें बखूबी आता है, इनका स्वास्थ प्रायः ठीक रहता है, लेकिन पेट संबंधित बीमारियां यदा-कदा बनी रहती है, मित्रों से इन्हें विशेष लाभ नही होता, यद्दपि ये मित्रों के लिए अपना सर्वस्व त्यागने को तैयार रहते हैं, आर्थिक दृष्टि से ये जीवन के 28वें साल के बाद से जमते हैं तथा 36वें साल में इनका भाग्योदय होता है तथा इसके बाद भाग्यांक 7 वाले व्यक्ति आर्थिक रूप से निरंतर समृद्ध होते रहते हैं, ऐसे सभी कार्य जो उच्चस्तरीय हों, यथा बैंकिंग, योगसाधना, ज्ञान, बागवानी, विश्वविद्यालय आदि इनके अनुकूल रहते हैं तथा इन क्षेत्रों में ये अपेक्षाकृत शीघ्र सफल होते हैं, यद्दपि ये परिश्रम करने में पूर्ण विश्वास रखते हैं फिर भी ये मूडी होते हैं जो कि इनकी सबसे बड़ी कमजोरी होती है जिस कारण इनका समय-समय पर अपव्यय होता है अतः ये अपनी इस कमजोरी को दूर कर लें तो जल्द ही उन्नति प्राप्त कर सकते हैं।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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भाग्यांक 6: क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

भाग्यांक 6: क्या कहता है आपका व्यक्तित्व

 

भाग्यांक 6
भाग्यांक 6

 

भाग्यांक 6 विश्वास का अंक है साथ ही भाग्यांक 6 एक अच्छे मित्र और सलाहकार का अंक है, ऐसे व्यक्ति भावुक होते हुए भी व्यवहार कुशल होते है, भाग्यांक 6 वाले व्यक्ति सब कुछ समझते हुए भी नासमझ या बेखबर बने रहते है तथा हारते-हारते अंत में कोई ऐसी चाल चल जाते है कि पूरी बाजी ही एकदम से पलट जाती है और लोग हैरान होकर देखने लगते है, ऐसे व्यक्ति व्यवसाय में अधिक सफल होते है और यदि किसी की साझेदारी में व्यापार-व्यवसाय करते हैं तो अधिक सफल होते हैं, मित्रों में ये अधिक लोकप्रिय होते हैं और दूसरों से काम निकालने में चतुर होते हैं साथ ही ये अपने विचारों को दूसरे पर थोपने में लगे रहते हैं इनकी कोशिश यही रहती है कि लोग इनकी बात सुने ही नही बल्कि माने भी और उसका पालन भी करें अपनी बात मनवाने के लिए ये किसी भी स्तर तक जा सकते हैं।

 

अंक ज्योतिष
अंक ज्योतिष

 

व्ययशील होने के कारण ऐसे व्यक्ति जरूरत से ज्यादा खर्च कर डालते हैं और जिस समय खर्च करते हैं उस समय दिल खोलकर धन लुटा देते हैं इसलिए इनमे व्यवस्था का अभाव रहता है तथा आर्थिक पक्ष में व्यवस्था या नियंत्रण नही रह पाता, भाग्यांक 6 वालों को मित्रों का पूर्ण सहयोग मिलता है साथ ही मित्रों से धोखा भी मिलता है फिर भी ये अपने मित्रों से लाभ प्राप्त करते रहते हैं, इनको सजावट, जवाहरात, एजेंसी, होटल, सौंदर्य प्रसाधन सामग्री, रंगमंच आदि कार्यों में सफलता मिलती है और इन्ही कार्यो से ही शीघ्र भाग्योदय होता है, स्वास्थ के प्रति सावधानी व व्यय पर नियंत्रण बना कर रखना इनके लिए बहुत जरूरी होता है जिससे ये भाग्य वृद्धि कर सकें।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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