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जुलाई 2020: मिथुन लग्न व मिथुन राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जुलाई 2020: मिथुन लग्न व मिथुन राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मिथुन लग्न
मिथुन लग्न कुंडली

 

मिथुन लग्न व मिथुन राशि वालों के लिए जुलाई 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य, बुध व राहु का लग्न से गोचर रहेगा अतः किसी भी सरकारी कर्मचारी या सीनियर से व्यर्थ विवाद न करें, झूठ बोलने से बचें, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, खुद के स्वाभिमान पर थोड़ा नियंत्रण रखें 16 जुलाई को सूर्य गोचर बदलकर आपके दूसरे भाव में चले जाएंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, 6 व 13 जुलाई को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 11 जुलाई से कार्यक्षेत्र के लिए अच्छा समय रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का व्यय भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप सुख के साधनों, जीवनसाथी, महिलाओं, संतान पर धन व्यय होगा, संतान के स्वास्थ्य में परेशानी संभव रहेगी, यात्राओं के योग बनेंगे, जो लोग पढ़ाई के लिए बाहर जाना चाहते हैं उनके लिए यह अच्छा समय रहेगा माह के शुरुवात में मंगल का गोचर आपके दशम भाव से रहेगा फलस्वरूप मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, आपके कार्य से सीनियर खुश रहेंगे, माता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, संतान को कष्ट संभव रहेगा।

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

माह के शुरुवात में गुरु व केतु का सप्तम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप विवाह के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, मित्रों परिवारजनों पर अधिक विश्वास करने से बचें धोखा मिलने की संभावना रहेगी, 20 व 26 जुलाई को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 17 जुलाई को वाहन सावधानी से चलाएं एक्सीडेंट होने की संभावना रहेगी, माह के शुरुवात में शनि का अष्टम भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवनसाथी की वाणी थोड़ी कटु अनुभव होगी, जोड़ों व पैर में दर्द की शिकायत संभव है, 1 से 4 जुलाई आपके लिए अच्छा रहेगा भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, यात्राओं के योग बनेंगे, 5 से 18 जुलाई के मध्य अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं, तनाव लेने से बचें, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, 19 से 22 जुलाई तक का समय अच्छा रहेगा आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, 23 से 28 जुलाई का समय कार्यक्षेत्र के लिए अच्छा सिद्ध होगा, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, 29 व 30 जुलाई के दिन कोई भी निर्णय न लें और न ही कहीं हस्ताक्षर करें अन्यथा बड़ा नुकसान होने की संभावना रहेगी, 31 जुलाई के दिन बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने की संभावना रहेगी।

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

कुल मिलाकर मिथुन लग्न व मिथुन राशि वालों के लिए जुलाई 2020 मिला-जुला रहेगा जिसमें एक्सीडेंट होने के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, तनाव लेने से बचें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, 20, 21 व 22 जुलाई को आपके परिवार व आपके ससुराल पक्ष के लोगों के बीच तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, माह की 1 से 3, 5 से 18, 21, 29 व 30 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मिथुन लग्न व मिथुन राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व विष्णुसहस्त्र नाम और शनि स्तोत्र का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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सूर्य ग्रहण का कोरोना और विश्व पर प्रभाव

सूर्य ग्रहण का कोरोना और विश्व पर प्रभाव

 

सूर्य ग्रहण का कोरोना पर प्रभाव
सूर्य ग्रहण का कोरोना पर प्रभाव

 

29 अक्टूबर 2019 को गुरु ने गोचर बदलकर वृश्चिक से धनु राशि में प्रवेश किया था तथा शनि व केतु से गुरु की की युति हुई थी जिन पर राहु की पूर्ण दृष्टि थी यह गोचर अनेक प्रकार की विपदाओं व संकटों का संकेतक था उसके ठीक  2 माह बाद सूर्य व बुध भी धनु राशि में प्रविष्ट हुए थे तब कोरोना जैसी महामारी सामने आई थी उसके ठीक  1 माह बाद सूर्य गोचर बदलकर मकर राशि में प्रविष्ट हुए थे जिस कारण से परिस्थितियाँ कुछ नियंत्रण में थी लेकिन  24 जनवरी 2020 को शनि के मकर राशि में प्रविष्ट होते ही कोरोना का प्रकोप बड़ने लगा और 5 मई को शनि, 11 मई को शुक्र,14 मई को गुरु18 जून को बुध के वक्री होते ही कोरोना अपने चरम पर पहुँचने लगा तथा 5 जून को चंद्र ग्रहण (उपछाया ग्रहण), 21 जून को सूर्य ग्रहण व  5 जुलाई को पुनः चंद्र ग्रहण (उपछाया ग्रहण) लगने से गोचर में ग्रह एक लगातार पीड़ित होने लग गए।

 

वर्तमान के गोचर का अध्यन किया जाए तो गोचर में सभी ग्रह दो सबसे क्रूर ग्रहों राहु व केतु के मध्य होने से पीड़ित चल रहे हैं तथा 21 जून 2020 को सिंह लग्न, मिथुन राशि व मृगशिरा नक्षत्र में लगने वाला यह सूर्य ग्रहण अशुभ होने से कोरोना के और तेजी के साथ बड़ने का संकेतक है, यह ग्रहण जिस समय लगेगा उस समय गोचर में सिंह लग्न होगा जिसके एकादश भाव में राहु, सूर्य, चंद्र व बुध की युति होगी तथा राहु, सूर्य व चंद्र मृगशिरा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में और बुध पुनर्वसु नक्षत्र के प्रथम चरण में होंगे यदि नवतारा चक्र का अध्यन करें तो मृगशिरा से पुनर्वसु “विपत्त” तारा के अंतर्गत आता है अतः बुध पर भी इस ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा अर्थात गोचर में सूर्य, बुध, चंद्र तीनों ग्रह राहु से पीड़ित रहेंगे तथा बुध वक्री अवस्था से गोचर करेंगे और अन्य ग्रहों में शुक्र, शनि व गुरु भी वक्री अवस्था से ही गोचर करेंगे जो कि शुभ स्थिति को नही दर्शाता है।

 

सूर्य ग्रहण का विश्व पर प्रभाव
सूर्य ग्रहण का भारत पर प्रभाव

 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी गोचर में ऐसी युति होती है तो वह देश, राजा, सेना व प्रजा के लिए शुभ नही होती अतः इस समय के गोचर के अनुसार अनेक प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं, आतंकवादी घटनाएं, घटने के साथ-साथ नेता-राजनेता व अभिनेता की मृत्यु और सेमनावर्ती देशों से युद्ध व रोगों का प्रचंड वेग से आगे बड़ने की संभावना है, इस ग्रहण का प्रभाव 3 माह व 10 से 12 दिन तक रहेगा अतः यह 3 माह व 12 दिन के मध्य भारत में कोरोना प्रचंड वेग से अपने चरम पर पहुँचेगा तथा भारत को अनेक प्रकार की विपदाओं व आपदाओं का सामना करना पड़ेगा तथा इसी समय में “तीसरे विश्व युद्ध” के आरंभ होने की भी संभावना बनेगी, 3 सितंबर 2020 को राहु व केतु गोचर बदलकर क्रमशः वृषभ (राहु)वृश्चिक (केतु) में प्रवेश करेंगे तदोपरांत कोरोना से कुछ राहत मिलना आरंभ होगा तथा नवंबर के अंतिम भाग में बड़ी राहत अनुभव होगी और जनवरी में सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करते ही कोरोना महामारी का पूर्णरूपेण अंत हो चुका होगा।

 

विशेष:-

 

शास्त्रों के अनुसार ग्रहण का प्रभाव ग्रहण लगने के 15 दिन पूर्व से दिखने लगता है पिछले कुछ दिनों में आए भूकंप, तूफान, कोरोना के मरीजों में वृद्धि, चीन से युद्ध का आरंभ यह सभी ग्रहण के अशुभ फल का संकेतक है।

 

आगे जैसी प्रभु इच्छा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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जुलाई 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जुलाई 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

वृषभ लग्न
वृषभ लग्न

 

वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य, बुध व राहु का दूसरे भाव से गोचर रहेगा अतः वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, नेत्रों में कोई समस्या रह सकती है, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, परिवार के सदस्यों से वैचारिक मतभेद के कारण से विवाद संभव रहेगा, तामसिक चीजों के सेवन करने से बचें 16 जुलाई को सूर्य गोचर बदलकर आपके तीसरे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, माता व छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व छोटे भाई-बहन की उन्नति भी होगी, किसी बड़े अधिकारी से मुलाकात संभव रहेगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, आवेश में आने से बचें, 5 जुलाई के दिन व्यर्थ विवाद करने से बचें तथा नेत्रों के प्रति विशेष सावधानी बरतें, 12 जुलाई को धन लाभ या किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, 13 जुलाई को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 14 जुलाई को बड़े अधिकारियों से मुलाकात संभव रहेगी किंतु उनसे बहुत अधिक लाभ की अपेक्षा न रखें अन्यथा निराशा हाथ लग सकती है, माह के शुरुवात में शुक्र का लग्न से ही गोचर रहेगा जिस कारण से कुछ परिश्रम के साथ सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, 17 जुलाई को प्रेमियों के लिए काफी अच्छा दिन रहेगा यदि आप किसी को प्रपोज करना चाहते हैं तो यह दिन आपके लिए काफी अच्छा रहेगा, वस्त्र, आभूषण क्रय करने के योग बनेंगे।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

माह के शुरुवात में मंगल का एकादश भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप आय में वृद्धि के योग बनेंगे, यात्राओं पर धन व्यय होगा, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, संतान से विवाद या संतान को कष्ट संभव रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, माह के शुरुवात में शनि का भाग्य स्थान से गोचर रहेगा अतः भाग्य का सहयोग प्राप्त करने हेतु अधिक प्रयास करना होगा, लंबी यात्राओं के योग बनेंगे, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, पैरों या जोड़ों में दर्द की शिकायत रह सकती है, माह के शुरुवात में केतु व गुरु का भाग्य स्थान से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, कोई भी रिस्क लेने से बचें, दवाईयों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो व गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, 20 व 26 जुलाई को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 1 जुलाई से 5 जुलाई तक कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें, खर्चों में वृद्धि होगी, 6 से 12 जुलाई के मध्य बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, 13 से 18 जुलाई तक का समय परिवार वालों के साथ अच्छे से बीतेगा जिससे मन प्रसन्न रहेगा व आनंद की अनुभूति होगी किंतु वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा व्यर्थ के विवाद भी हो सकते हैं, 19 से 23 जुलाई के मध्य भाई-बहन व पड़ोसियों से संबंध मधुर होंगे, 21 जुलाई के दिन पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, 24 से 27 जुलाई तक का समय परिवार वालों के साथ आनंद से बीतेगा, 28 से 31 जुलाई तक का समय विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए अच्छा रहेगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए काफी अच्छा रहेगा, संतान को कष्ट संभव रहेगा।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

कुल मिलाकर वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए जुलाई  2020 सामान्य रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, किसी बड़े अधिकारी से मुलाकात संभव रहेगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, सर दर्द, नेत्रों में चोट, दर्द या जलन की शिकायत संभव रहेगी, प्रेमियों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, गुरु का अष्टम भाव से केतु के साथ गोचर स्वास्थ्य, संतान व विद्या के लिए बहुत शुभ संकेतक नही है अतः थोड़ा सावधान रहें माह की  1 से 5 व 14, 17, 21 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि वृषभ लग्न व वृषभ राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल देकर अदित्यहिर्दय स्तोत्र व राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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21 जून 2020: सूर्य ग्रहण जानें, देश के प्रमुख शहरों में ग्रहण समय और ग्रहण क्यों लगता है व ग्रहण काल में क्या करना चाहिए

21 जून 2020: सूर्य ग्रहण जानें, देश के प्रमुख शहरों में ग्रहण समय और ग्रहण क्यों लगता है व ग्रहण काल में क्या करना चाहिए

 

21 जून सूर्य ग्रहण
21 जून सूर्य ग्रहण

 

ग्रहण लगने का ज्योतिषीय कारण:-

 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य व चंद्रमा गोचर में राहु व केतु से युति करते हैं और अंशात्मक रूप से उनमें का अंतर होता है तब ग्रहण लगता है क्योंकि उस अवस्था में सूर्य व चंद्र की छाया धरती को स्पर्श नही कर पाती है सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन तो चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगता है।

 

सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण

 

भारत के प्रमुख शहरों में ग्रहण समय:-

 

21 जून 2020 को लगने वाला सूर्य ग्रहण मिथुन राशि व मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा जिस कारण मिथुन लग्न व मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों को यह ग्रहण नही देखना चाहिए, भारत के प्रमुख शहरों में ग्रहण का समय कुछ इस प्रकार है:-

 

दिल्ली:- 10 बजकर 46 मिनट से 2 बजकर 17 मिनट तक

 

मुम्बई:- 10 बजकर 1 मिनट से 1 बजकर 28 मिनट तक

 

कलकत्ता:- 10 बजकर 46 मिनट से 2 बजकर 17 मिनट तक

 

बैंगलुरु:- 10 बजकर 1 मिनट से 1 बजकर 32 मिनट तक

 

लखनऊ:- 10 बजकर 27 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक

 

राजकोट:- 9 बजकर 59 मिनट से 1 बजकर 26 मिनट तक

 

हरिद्वार:- 10 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 51 मिनट तक

 

वाराणसी (काशी):- 10 बजकर 31 मिनट से 2 बजकर 4 मिनट तक

 

जयपुर:- 10 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक

 

सीकर:- 10 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक

 

सालासर:- 10 बजकर 14 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक

 

जोधपुर:- 10 बजकर 8 मिनट से 1 बजकर 36 मिनट तक

 

सूर्य ग्रहण में क्या करें:-

 

सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान, जप व यज्ञ करना चाहिए तथा ग्रहण खत्म होने पर दान देने का विधान है सौर पुराण के अनुसार मनुष्य जितने भी दान अपने जीवनकाल में कर के पुण्य अर्जित करता है वह सभी पुण्य मनुष्य को सिर्फ ग्रहण बाद दान करने से ही मिल जाता है।

 

विशेष:-

 

मन्वर्थ मुक्तावली के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान अदित्यहिर्दय स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।

 

सूर्य ग्रहण में क्या न करें:-

 

१. ग्रहण काल के दौरान मांगलिक कार्यक्रम निषेध माना गया है अतः सूर्य ग्रहण के दौरान कोई भी मांगलिक कार्यक्रम नही करना चाहिए।

 

२. शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल के दौरान मूर्ति स्पर्श वर्जित होता है।

 

३. शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान अन्न व कटी हुई सब्जियों का त्याग करना चाहिए।

 

विशेष:-

 

घी, तेल, दूध, दहीं, मक्खन, पनीर, खोआ, दूध से बने सभी पदार्थ, अचार व मुरब्बों पर कुशा या तुलसी पत्ता रख देने यह सामग्रियाँ दूषित नही होती हैं।

 

जय श्री राम।

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18 जून 2020: 3 ग्रहों के बाद अब बुध भी होंगे वक्री जानें बुध के वक्री होने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए—–Astrology Sutras

18 जून 2020: 3 ग्रहों के बाद अब बुध भी होंगे वक्री जानें बुध के वक्री होने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए—–Astrology Sutras

 

बुध मिथुन राशि में वक्री
बुध मिथुन राशि में वक्री

 

शनि, गुरु व शुक्र वर्तमान में वक्री अवस्था से गोचर कर रहे हैं और आज अर्थात 18 जून 2020 को प्रातः  9 बजकर 52 मिनट पर बुध भी वक्री हो जाएंगे तथा 12 जुलाई को पुनः मार्गी हो जाएंगे बुध बुद्धि, वाणी, चेतना, व्यापार, रेडियो, मोबाइल और त्वचा के कारक होते हैं अतः बुध के वक्री होने से विभिन्न राशियाँ भी प्रभावित होंगी तो चलिए जानते हैं बुध के वक्री अवस्था में गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तीसरे से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः बहुत सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें व जोखिम लेने से बचें, छोटे भाई-बहन के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें।

 

उपाय:- नित्य गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित कर गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व संकठा चतुर्थी और विनायक चतुर्थी का व्रत करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध दूसरे भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कुछ परिश्रम के साथ सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे।

 

उपाय:- गणेश अथर्वशीर्ष का नित्य पाठ करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध लग्न से ही वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः तनाव लेने से बचें व स्वास्थ्य का ख्याल रखें, त्वचा संबंधित कोई समस्या संभव है, वाहन सुख प्राप्त हो सकता है, व्यय में वृद्धि होगी।

 

उपाय:- गणेश स्तोत्र का पाठ करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः खर्चों पर नियंत्रण बना कर रखें, किसी से व्यर्थ विवाद में न पड़ें व लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, किसी नए कार्य के आरंभ के लिए यह अच्छा समय रहेगा।

 

उपाय:- गणेश गायत्री मंत्र का नित्य जाप करें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध एकादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यात्राओं पर धन व्यय होगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, बुआ व बड़ी बहन के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

उपाय:- नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध दशम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः मन में किसी न किसी प्रकार का भय बना रह सकता है, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यस्थल पर व्यर्थ के विवाद में न पड़ें।

 

उपाय:- नित्य गणेश गायत्री मंत्र का जाप करें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः धार्मिक यात्राओं या धार्मिक कार्यों या कार्य के सिलसिले से की गई यात्राओं पर धन व्यय होगा, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, पिता के स्वास्थ्य में परेशानी संभव है, महिलाओं से व्यर्थ विवाद करने से बचें।

 

उपाय:- बुधवार के दिन कोई साग व शुक्रवार के दिन शकर मिश्रित चावल गाय को खिलाएं।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, व्यर्थ विवाद में न पड़ें व तनाव लेने से बचें, जीवनसाथी की वाणी में तेजी अनुभव होगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव है, निवेश करने से बचें।

 

उपाय:- संकठा चतुर्थी व विनायक चतुर्थी का व्रत करें व नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः विवाह में कुछ दिक्कतें आएंगी, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, कार्यस्थल पर किसी से क्षणिक विवाद होने के कारण से तनाव रह सकता है, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे।

 

उपाय:- नित्य गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित करें व अर्पित की हुई दूर्वा घास से कुछ अपने पर्स या जेब में रखें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः तनाव लेने से बचें, जिन्हें न्यूरो से संबंधित समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, मामा पक्ष से वैचारिक मतभेद संभव है।

 

उपाय:- गणेश चालीसा व शनि स्तोत्र का नित्य पाठ करें।

 

कुंभ राशि:

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, संतान को कष्ट संभव है, अपने सीनियर से व्यर्थ विवाद में न पड़ें।

 

उपाय:- राम रक्षा स्तोत्र का नित्य पाठ करें व गणेश गायत्री मंत्र का नित्य जाप करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः माता से विवाद संभव रहेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, किसी अपरिचित की बातों में आने से बचें।

 

उपाय:- गणेश सहस्त्रनाम का नित्य पाठ करें।

 

जय श्री राम।

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जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य, बुध व राहु आपके तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः आवेश में आने से बचें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा 16 जुलाई को सूर्य गोचर बदलकर आपके चतुर्थ भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, तनाव लेने से बचें, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो या जिन्हें छाती में दर्द की समस्या रहती हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, संतान पर धन व्यय होगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें व जल्दबाजी में कोई भी निर्णय न लें क्योंकि इस माह आपके अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध हो सकते हैं अतः सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, कोई भी रिस्क लेने से बचें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा किंतु शनि के वक्री अवस्था में गोचर करने के कारण से मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से  बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, 1 से 4 जुलाई 12 जुलाई को विशेष सावधानी बरतें व इनमें कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें, धोखा मिल सकता है, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 5 से 10 जुलाई का समय आपके लिए अच्छा सिद्ध होगा इनमें जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, कोई नया अवसर प्राप्त हो सकता है, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात भी संभव रहेगी, 11 से 16 जुलाई का समय विशेष 12 जुलाई का समय अधिक शुभ नही है अतः यह समय थोड़ा सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 17 से 23 जुलाई के मध्य आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा व धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे या धार्मिक अनुष्ठान पर धन व्यय होगा, यह समय विद्यार्थियों के लिए बहुत शुभ रहेगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा, 24 से 31 जुलाई तक का समय कार्यक्षेत्र के लिए सामान्य रहेगा जिसमें कार्य को लेकर लंबे समय से जो तनाव था उसमें राहत मिलेगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो 15 अगस्त तक इंतजार कर लें।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा जिसमें पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से विवाद संभव रहेगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, आवेश में आने व तनाव लेने से बचें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, यदि आप लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो कुछ समय और रुक जाएं, कोई भी रिस्क लेने से बचें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है माह की 1, 2, 3, 4, 11, 12, 13, 14, 15 व 16 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि मंगलवार का व्रत कर हनुमान जी की उपासना करें व नित्य गाय को रोटी, गुड़ व चने की दाल खिलाएं तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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खाटूश्याम मंदिर की स्थापना कब और कहाँ हुई:—-Astrology Sutras

खाटूश्याम मंदिर की स्थापना कब और कहाँ हुई:—-Astrology Sutras

 

 

माहाभारत ग्रंथ के अनुसार बर्बरीक जो कि अतिबलशाली भीम के पौत्र व घटोत्कच और मोरवी के पुत्र थे, बचपन से ही उनमें एक विलक्षण शक्ति थी तथा इन्होंने युद्ध कला अपनी माता तथा श्री कृष्ण से सीखा था, बर्बरीक ने माता की आज्ञा अनुसार नव दुर्गा की घोर तपस्या की व उनको प्रसन्न कर तीन अमोघ बाण प्राप्त किए जो कि कभी विफल नही हो सकते थे इस प्रकार बर्बरीक “तीन बाणधारी” के नाम से प्रसिद्ध हुए।

 

महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक की भी युद्ध में सम्मिलित होने की प्रवल इच्छा जागृत हुई व उन्होंने अपनी माता को वचन दिया कि जो भी पक्ष निर्बल होगा मैं उसकी तरफ से युद्ध करूँगा और नीले घोड़े पर सवार होकर कुरुक्षेत्र की रणभूमि की तरफ चल दिए उस समय श्री कृष्ण ध्यान में लीन थे और उन्होंने अपने योग विद्या से जब यह देखा तो ब्राह्मण रूप धारण कर के बर्बरीक के समक्ष पहुँच कर उन्हें रोक कर उनसे कुरुक्षेत्र की रणभूमि की तरफ जाने का कारण पूछा व बर्बरीक द्वारा यह बताए जाने पर कि वह युद्ध में भाग लेने जा रहे हैं उनकी हँसी उड़ाई और कहा कि केवल यह तीन बाण के साथ आप युद्ध कैसे कर सकेंगे इस पर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि उनका एक बाण ही समस्त शत्रुओं का नाश करने के लिए काफी है और शत्रुओं का दमन करने के बाद उनका बाण वापस उनके तुणीर में आ जाएगा और यदि वह इन तीनों बाणों का एक साथ संघान किया तो तीनों बाणों की विध्वंसक शक्ति से समस्त ब्रह्मांड की नाश हो जाएगा, यह जानकर श्री कृष्ण जी ने उन्हें चुनौती दी कि इस पीपल वृक्ष के सभी सूखे पत्तों को भेद कर दिखाओ किंतु वही पत्ते भेदना है जो सूखे हों या उनमें छिद्र हो बर्बरीक ने श्री कृष्ण की चुनौती को स्वीकार किया और अपने एक ही बाण से उस पीपल वृक्ष के सभी सूखे व छिद्रित पत्तों को भेद दिया तत्पश्चात वह बाण श्री कृष्ण के चरणों के पास जाकर रुक गया तब बर्बरीक ने श्री कृष्ण जी से निवेदन किया कि एक पत्ता आपके पैर के नीचे बचा हुआ है अतः आप अपना पैर हटा लें अन्यथा यह बाण आपके पैर पर घात कर देगा क्योंकि दुर्गा जी से प्राप्त बरदान के अनुसार उनका कोई बाण लक्ष्य भेदे बिना वापस नही आता तब भी श्री कृष्ण जी के पैर न हटाने पर माँ दुर्गा प्रकट हुई व श्री कृष्ण जी से प्राथना की कि उनके वरदान की लाज रखने हेतु अपना पैर हटा लें तब श्री कृष्ण जी ने अपना पैर जैसे ही हटाया उस बाण ने उस बचे हुए पत्ते को भी भेद दिया तत्पश्चात श्री कृष्ण जी ने दुर्गा जी को यह वचन दिया कि उनके पैर का निचला हिस्सा आज से उनके शरीर का सबसे कमजोर भाग होगा तथा यही भाग उनके इस शरीर को त्याग कर परमधाम लौटने का कारण बनेगा।

 

 

 

श्री कृष्ण जी इस बात को भली-भांति जानते थे इस महायुद्ध में कौरवों की हार निश्चित है और यदि बर्बरीक को न रोका गया तो यह युद्ध अधर्म के विजय का कारण बन सकता है अतः ब्राह्मण रूपी श्रीं कृष्ण जी ने बर्बरीक से दान माँगने की इच्छा रखी तो बर्बरीक ने उन्हें दान देने का वचन देते हुए दान माँगने को कहा तब श्री कृष्ण जी ने दान रूप में बर्बरीक से उनका शीश माँगा इस पर बर्बरीक चिंतन में पड़ गए और श्री कृष्ण जी के उनकी चिंता का कारण पूछने पर उन्होंने श्री कृष्ण जी से कहा कि मेरी इस युद्ध के साक्षी बनने की प्रवल इच्छा थी इस पर श्री कृष्ण जी ब्राह्मण रूप को त्याग कर अपने वास्तविक रूप में आ गए और बर्बरीक को समझाते हुए कहा कि इस महायुद्ध में धर्म के विजय हेतु तुम्हारे शीश का दान अनिर्वाय है तथा श्री कृष्ण जी ने बर्बरीक को आशीर्वाद दिया कि उनका यह दान अनंत काल तक याद रखा जाएगा तथा उनकी इस महायुद्ध को देखने की इच्छा भी जरूर पूरी होगी इस आशीर्वाद को प्राप्त कर बर्बरीक अत्यंत प्रसन्न हुए व अपना शीश श्री कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया तत्पश्चात श्री कृष्ण जी ने उनके शीश को युद्धभूमि के समीप एक पर्वत पर स्थापित कर दिया जहाँ से बर्बरीक इस महाभारत युद्ध के प्रत्यक्ष साक्षी बनें।

 

महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद पांडवों में अहंकार की उत्पत्ति देखकर श्री कृष्ण जी मुस्कुराए और पांडवों को उस पर्वत पर ले गए जहाँ “महादानी” बर्बरीक का शीश स्थित था व उन्होंने बर्बरीक से निवेदन किया कि वह ही निर्णय लें कि पाँचों पांडव में से इस युद्ध के विजय का श्रेय किसको देना चाहिए इस पर बर्बरीक खूब हँसे और बोले कि कौन पांडव मैंने तो कुरुक्षेत्र में केवल श्री कृष्ण जी और उनके सुदर्शन चक्र को ही देखा श्री कृष्ण जी ने अकेले ही समस्त अधर्मियों का अंत किया अतः इस युद्ध में विजय श्री कृष्ण की ही हुई है इस बात से श्री कृष्ण जी प्रसन्न होकर बर्बरीक को आशीर्वाद देते हैं कि आज से तुम “श्याम” नाम से जाने जाओगे क्योंकि जो हारे का सहारा हो वही “श्याम” है अतः कलयुग में सभी लोग तुम्हारी मेरे नाम “श्याम” से पूजा करेंगे व जो भक्त तुम्हारी पूजा करेगा उसके सारे कष्ट दूर होंगे व उन्हें हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

 

 

 

 

बर्बरीक के खाटूश्याम नाम का रहस्य:-

 

बर्बरीक का शीश श्री कृष्ण जी द्वारा  “खाटू नगर” के पर्वत पर स्थित किया गया था जिस कारण से उन्हें खाटूश्याम के नाम से भी जाना जाता है।

 

क्यों की जाती है खाटूश्याम की पूजा:-

 

स्कंद पुराण के अनुसार:-

 

तत्सतथेती तं प्राह केशवो देवसंसदि।

शिरस्ते पूजयिषयन्ति देव्या: पूज्यो भविष्यसि।।

(स्कंद पुराण, कौ. ख. ६६.६५)

 

भावार्थ:- हे वीर! ठीक है तुम्हारे शीश की पूजा होगी और तुम देवरूप में पूजित होकर प्रिसिद्धि को प्राप्त करोगे।

 

खाटूश्याम जी का यह मंदिर राजस्थान राज्य के सीकर जिले में स्थित है तथा इनके प्रमुख देवता श्री कृष्ण जी और प्रमुख उत्सव फाल्गुन महोत्सव है इनके अन्य नाम खाटू नरेश, मोर्विनंदन व मोरछड़ी धारक है, मोर पंखों से बनी छड़ी को हमेशा अपने पास रखने के कारण से इनका नाम मोरछड़ी कहलाया।

 

जय श्री राम।

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सूर्य का मिथुन राशि से गोचर 14 जून 2020: जानें किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा—Astrology Sutras

सूर्य का मिथुन राशि से गोचर 14 जून 2020: जानें किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा—Astrology Sutras

 

 

सूर्य 14 जून 2020 की रात्रि के 11 बजकर  52 मिनट 58 सेकंड पर वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की वृषभ की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की मिथुन की सक्रांति लगेगी, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में 30 दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के मिथुन राशि  से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, पिता के स्वास्थ्य में समस्या संभव रहेगी, पराक्रम में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, लंबे समय से रुके कार्य पूर्ण होंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, व्यापारियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, यदि आप धन कहीं निवेश करना चाहते हैं तो उसके लिए यह अच्छा समय रहेगा, फालतू विवाद में न पड़ें, नेत्रों में जलन या दर्द की समस्या रह सकती है, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, माता का सहयोग मिलेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होकर पहले भाव से गोचर करेंगे अतः जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यात्राओं के योग बनेंगे, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, किसी अप्रिय घटना के घटित होने से मन अप्रसन्न रहेगा, पैसा निवेश करने या किसी को उधार देने से बचें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कुल मिलाकर सूर्य का यह गोचर आपके लिए मिला-जुला रहेगा।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः खर्चों में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कोई भी निर्णय सोच-समझ कर ही लें, व्यर्थ के विवाद में न पड़ें, सरकारी कर्मचारियों से फालतू विवाद में न पड़ें तथा यदि बिजली बिल या कोई कर बाकी हो तो उसे भर दें अन्यथा अचानक से कोई समस्या खड़ी हो सकती है, मित्रों व वरिष्ठ अधिकारियों से विवाद संभव रहेगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य प्रथम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त होगा, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं उन्हें कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के लिए सूर्य का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, संतान की उन्नति होगी।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे अतः कार्य के सिलसिले से यात्राओं के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र के लिए सूर्य का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा, लंबे समय से रुके कार्य पूर्ण होंगे, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, दामपत्य जीवन में मधुरता आएगी, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तनाव लेने से बचें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप परिश्रम से भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होगी फिर भी मन में एक असंतोष बना रहेगा, पिता व गुरु से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, छुपे शत्रुओं से सावधान रहें, मित्रों व परिवार के सदस्यों से विवाद संभव रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कोई भी निर्णय या कहीं भी पैसा लगाने से पहले अच्छे से सोच-विचार कर लें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, ज्वर व सर दर्द की शिकायत संभव रहेगी, खान-पान पर नियंत्रण रखें अन्यथा पाचन क्रिया में कुछ गड़बड़ी संभव हो सकती है, जीवनसाथी की वाणी में तेजी अनुभव होगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, यदि आप नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो कुछ समय और इंतजार कर लें अन्यथा अचानक से कोई समस्या आ सकती है।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप पेट व गुदा से संबंधित कोई परेशानी संभव रहेगी, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, क्रोध पर नियंत्रण रखें, कार्यक्षेत्र में कुछ तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है अतः तनाव लेने से बचें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें कुल मिलाकर धनु राशि वालों को सूर्य के इस गोचर काल के दौरान सतर्क रहना चाहिए व शांत मन से सभी समस्याओं के सामाधान के बारे में विचार करना चाहिए उपाय के तौर पर सूर्य को नित्य जल देकर अदित्यहिर्दय स्तोत्र का पाठ करें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विपरीत परिस्थितियों से होते हुए सफलता प्राप्त होगी, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, त्वचा से संबंधित कोई परेशानी संभव है।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः शत्रुओं से सावधान रहें, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें, किसी को भी कर्ज देने या किसी से भी कर्ज लेने से बचें, किसी पर भी अधिक विश्वास करने से बचें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे/षष्ठ भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, कार्यक्षेत्र में अतिरिक्त कार्यभार रह सकता है, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें व स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

जय श्री राम।

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मृत्यु भाव में आयु कारक शनि का फल

मृत्यु भाव में आयु कारक शनि का फल भाग:-१

 

अष्टम भाव में स्थित शनि का फल
अष्टम भाव में स्थित शनि का फल

 

अष्टम भाव मृत्यु, पतन, गूढ़ विद्या, पैतृक संपत्ति, दुःख का भाव होता है ऐसी  स्थिति में शनि का अष्टम भाव में बैठना इन सभी को प्रभावित करता है शनि आयु का कारक होता है अतः अष्टम भाव में स्थित शनि आयु की वृद्धि करता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों की अप्रत्याशित मृत्यु नही होती कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की अचानक से मृत्यु नही होती है साथ ही अष्टम भाव में स्थित शनि मंद गति से उन्नति का सूचक होता है क्योंकि अष्टम में बैठा शनि हमारी कुंडली के तीन मुख्य भावों दशम भाव, द्वितीय भाव व पंचम भाव को देखता है जिस कारण से ऐसे व्यक्तियों की उन्नति मंद गति से होती है, ऐसे व्यक्तियों को पैतृक संपत्ति कुछ संघर्ष के उपरांत प्राप्त होती है तथा कुटुंब में मतभेद बना रहता है जिस कारण से ऐसे व्यक्तियों को तनावपूर्ण स्थितियों का भी सामना करना पड़ता है, अष्टम भाव में स्थित शनि आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ाता है तथा ऐसे व्यक्तियों को धर्म-आध्यात्म में अच्छी रुचि रहती है, अष्टम भाव में स्थित शनि की तीसरी दृष्टि दशम भाव पर पड़ती है जिस कारण से ऐसे व्यक्तियों को अत्यधिक परिश्रम कर के ही बड़ी सफलता प्राप्त होती है तथा ऐसे व्यक्ति संघर्ष करते हुए व विपरीत परिस्थितियों से होते हुए सफल होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति छोटे कार्य से शुरुवात कर के बड़ी उन्नति को प्राप्त करते हैं, अष्टम भाव में स्थित शनि की सप्तम दृष्टि दूसरे भाव अर्थात धन भाव पर पड़ती है जो यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति यदि शनि ग्रह से जुड़ा कार्य करते हैं तो शीघ्र सफलता की संभावना बढ़ जाती है परंतु यदि शनि अशुभ भावों का स्वामी हो तो ऐसे व्यक्तियों को शनि से जुड़े कार्य को करने से बचना चाहिए साथ ही ऐसे व्यक्तियों के कुटुंब/परिवार में तनावपूर्ण स्थितियाँ अकसर बनी रहती है, अष्टम भाव में स्थित शनि की दसवीं दृष्टि पंचम भाव में पड़ती है जो यह दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों से हुए शिक्षा पूर्ण होगी तथा ऐसे व्यक्तियों के संतान को किसी प्रकार का कष्ट रहता है या संतान विलंब से या कुछ कठिनाइयों के साथ प्राप्य होती है, यहाँ एक बात और ध्यान देने योग्य यह है कि अष्टम भाव, पंचम भाव से चतुर्थ होता है अर्थात यह भाव विद्या के सुख का भाव है अतः मेरे मत व अनुभव के अनुसार ऐसे व्यक्तियों का कार्यक्षेत्र उनकी विद्या से अलग होता है कहने का आशय यह है कि अधिकतर कुंडलियों में यह देखने मे आया है कि ऐसे व्यक्ति जो विद्या अर्जित करते हैं वह काम नही कर पाते हैं, अष्टम भाव में स्थित शनि चर्म रोग का भी सूचक होता है।

 

अष्टम भाव और शनि

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेष लग्न की कुंडली में यदि अष्टम भाव में शनि स्थित हो तो व्यक्ति मेहनती होता है तथा आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह स्थिति शुभ होती है अर्थात कर्म और आर्थिक दृष्टिकोण से शनि की अष्टम भाव में स्थिति मेष लग्न वालों के लिए शुभ होती है किंतु ऐसे व्यक्तियों को संतान विलंब से प्राप्त होती है, यदि वृषभ लग्न की कुंडली में शनि अष्टम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को कार्य क्षेत्र में कुछ परिश्रम के साथ सफलता प्राप्ति के योग बनते हैं तथा पिता सुख में कुछ कमी रहती है किंतु कर्म और आर्थिक दृष्टिकोण से यह स्थिति शुभ होती है वृषभ लग्न के व्यक्तियों की कुंडली के अष्टम भाव में स्थित शनि कुछ विलंब के साथ संतान सुख देता है, यदि मिथुन लग्न की कुंडली में शनि अष्टम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को परिवार का पूर्ण सहयोग नही प्राप्त हो पाता तथा ऐसे व्यक्ति धन का सही तरह से इस्तेमाल नही कर पाते और कुछ परेशानी के साथ संतान सुख प्राप्त करते हैं किंतु आयु में वृद्धि होती है, यदि कर्क लग्न की कुंडली में शनि अष्टम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी का रुझान अपने परिवार की तरफ अधिक रहता है और यदि लग्नेश चंद्रमा पर भी शनि की दृष्टि हो तो यह स्थिति और अधिक खराब हो जाती है तथा ऐसे व्यक्तियों के कार्यक्षेत्र में व्यवधान अधिक आते हैं साथ ही धनार्जन में भी अनेक बाधाएं आती हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों की वाणी कुछ कटुता लिए होती है और संतान सुख में कुछ कमी अनुभव होती है किंतु यदि दसवें, दूसरे व पंचम भाव पर मंगल की भी दृष्टि हो तो यह स्थिति कुछ हद तक शुभप्रद होती है तथा इन समस्याओं में कुछ कमी आती है।

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसका दूसरा भाग जल्द ही प्रकाशित करूँगा।

 

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