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मई 2020: कन्या लग्न व कन्या राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: कन्या लग्न व कन्या राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

कन्या लग्न
कन्या लग्न कुंडली

 

कन्या लग्नकन्या राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह की शुरुवात में सूर्यबुध का गोचर अष्टम भाव से रहेगा सूर्य का अष्टम भाव से उच्च राशि का गोचर विपरीत राजयोग बनाएगा जिस कारण से अचानक कोई सफलता प्राप्त होने के योग बनेंगे, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, जीवनसाथी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव रहेगी अतः उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखें, अष्टम भाव जीवनसाथी के वाणी का भी भाव है अतः उनके वाणी में कुछ तेजी रहेगी साथ ही अष्टम भाव आपके ससुराल अर्थात जीवनसाथी के परिवार को दर्शाता है जहाँ से सूर्य का गोचर उनसे विवाद करा सकता है अतः तनाव लेने से बचें, माह के शुरुवात में बुध का भी अष्टम भाव से गोचर रहेगा जिस कारण से आपके स्वास्थ्य में परेशानी व तनाव बना रह सकता है 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके भाग्य स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, भाग्य का सहयोग मिलेगा, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी 14 मई को सूर्य भी गोचर बदलकर आपके नवम भाव अर्थात भाग्य स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके दशम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, माता का सहयोग प्राप्त होगा, जिनका कार्य बैंक, फाइनेंस, टीचिंग से जुड़ा हुआ है उनके लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

माह के शुरुवात में शुक्र का भाग्य स्थान से गोचर रहेगा जो कि आपके लिए बेहद शुभ रहेगा अतः भाग्य की वृद्धि होगी, किसी महिला से धन लाभ होगा या किसी महिला के सहयोग से उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, आपके जीवनसाथी के यदि छोटे भाई-बहन हैं तो उनकी उन्नति होगी किन्तु उनके स्वास्थ्य में भी कुछ समस्या रह सकती है, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में गुरु, मंगलशनि का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के लिए कहीं बात चल सकती है, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी यह समय काफी अच्छा रहेगा, संतान का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति होगी, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे 4 मई को मंगल गोचर बदलकर छठे भाव में आ जाएंगे अष्टम भाव के स्वामी का छठे भाव से गोचर स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत अच्छा नही कहा जा सकता अतः अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें रक्त जनित कोई समस्या हो तथा जिनकी उम्र 55-60 के ऊपर हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विपरीत परिस्थितियों से होते हुए अचानक बड़ी सफलता प्राप्त होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सरकारी कर्मचारियों से फालतू विवाद में न पड़ें, 14 मई से 17 जून तक वाहन सावधानी से चलाएं।

 

कन्या राशिफल
कन्या राशि

 

कुल मिलाकर कन्या लग्नकन्या राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह के योग बनेंगे, तनाव लेने से बचें व व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, किसी महिला से धन लाभ या महिला के सहयोग से उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, यदि आपका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं तो संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, जिनकी उम्र 55-60 के अधिक है और रक्त से जुड़ी समस्या है वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, फालतू विवाद में न पड़ें, माह की 2, 3, 11, 13, 14, 15, 21, 22, 23 व 28 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि कन्या लग्नकन्या राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सुंदरकांड का पाठ करें व नित्य सूर्य को जल देकर आदित्य हिर्दय स्तोत्र का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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मई 2020: कर्क लग्न व कर्क राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: कर्क लग्न व कर्क राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

कर्क लग्न

 

कर्क लग्नकर्क राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का दशम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, धनेश का कर्म भाव में उच्च राशि से गोचर काम-धंधे में बड़ी सफलता दिलवाएगा, यदि आप दवा, फाइनेंस, बैंक, टीचिंग, इंश्योरेन्स से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं सूर्य का यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ रहेगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी 14 मई 2020 को सूर्य गोचर बदलकर आपके लाभ स्थान में चले जाएंगे जहाँ लाभेश शुक्र पहले से ही स्वराशि गोचर रहे हैं फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, अचानक धन लाभ होगा, महिलाओं से धन लाभ या किसी महिला के सहयोग से लंबे समय से रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपके बड़े भाई-बहन हैं तो उनकी उन्नति होगी व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, माह की शुरुवात में बुध आपके दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, कार्य के सिलसिले से छोटी यात्रा के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ का ख्याल रखें 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके लाभ स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप किसी महत्पूर्ण कार्य को लेकर कोई तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, छोटे भाई-बहन यदि हैं तो उनकी उन्नति होगी, यदि आपके छोटे भाई-बहन विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कुछ बात चल सकती है, यात्राओं पर धन व्यय होगा 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके द्वादश भाव में आ जाएंगे जिस कारण से अचानक लंबी यात्राओं के योग बनेंगे, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें क्योंकि राहु भ्रम है जिस कारण आपके मन में यात्रा के अनगिनत लाभ आएंगे अतः यदि संभव हो तो इन यात्राओं को टालें, व्यर्थ के विवाद से बचें, शत्रुओं से या अन्य किसी कारण से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें।

 

कर्क राशिफल
कर्क राशि

 

माह के शुरुवात में मंगल, गुरुशनि आपके सप्तम भाव से गोचर करेंगे जहाँ गुरुशनि का नीचभंग राजयोग बनेगा फलस्वरूप यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं आपके विवाह की बात चल सकती है, जिनका विवाह पहले ही पक्का हो चुका है उनके लिए सितंबर बाद विवाह के योग बनेंगे क्योंकि द्वादश भाव से राहु का गोचर विवाह के लिए सहयोग नही करता, जिनके दामपत्य जीवन में लंबे समय से तनाव चला रहा है उनके दामपत्य जीवन में मधुरता आएगी, नौकरी पेशा लोगों के लिए भी यह माह काफी अच्छा रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें (विशेषतः जब चंद्रमा मिथुन, कर्क, धनु, मकर, कुंभ राशि से गोचर करें।), 4 मई को मंगल गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप किसी प्रियजन से कष्ट/दुःख मिलने के योग बनते हैं क्योंकि पंचम भाव प्रेम व संतान का भाव होता है और अष्टम भाव दुःख का भाव है अतः पंचमेश का अष्टम भाव से गोचर प्रेमी/प्रेमिका या संतान से मतभेद या अन्य किसी प्रकार से दुःख/कष्ट मिलने के योग बनाएगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे क्योंकि कर्मेश अष्टम भाव मतलब खुद से एकादश भाव से गोचर करेंगे, अचानक धन लाभ हो सकता है, जिनकी कुंडली में मंगल या केतु में से कोई एक या दोनों ग्रह या राहु छठे भाव या अष्टम भाव में बैठे हैं वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, जिन्हें रक्त जनित कोई विकार हो या हिर्दय जनित कोई विकार हो वह भी अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, जिनकी जन्म कुंडली के अष्टम भाव में मंगलराहु की युति हो और शनि की उन पर दृष्टि हो या मंगलशनि की युति हो और राहु की उन पर दृष्टि हो या राहुशनि की युति हो और मंगल की उन पर दृष्टि हो उनके लिए सर्जरी के योग बनेंगे, तामसिक चीजों के सेवन से बचें व वाणी पर नियंत्रण रखें, माह के शुरुवात में केतु का छठे भाव से गोचर रहेगा अतः लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें व छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, द्वादश भाव से राहु का गोचर अनिद्रा अर्थात नींद सही से पूरी न हो पाने की समस्या दे सकता है, आपके bed room में किसी ग़लतफहमी के कारण तनाव रह सकता है, अनैतिक संबंध बनाने से बचें अन्यथा जेल यात्रा भी करनी पड़ सकती है।

 

कर्क राशिफल
कर्क राशि

 

कुल मिलाकर कर्क लग्नकर्क राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, आय में वृद्धि होगी, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिनको रक्त जनित या हिर्दय से जुड़ी समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, जो लोग टीचिंग, फाइनेंस, इंश्योरेंस, बैंक, दवा से जुड़े कार्य करते हैं उनके लिए यह माह बेहद शुभ रहेगा, किसी महिला के सहयोग से लंबे समय से रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा, यदि आप कोई नया कार्य शुरू करना चाहते हैं तो अभी सितंबर 2020 तक इंतजार कर लें, संतान से कष्ट संभव है, माह की 1, 10, 11, 14, 15, 16, 25, 26, 27 व 28 तिथियों में विशेष सावधानी रखें, मेरे अनुसार यदि कर्क लग्नकर्क राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सुंदरकांड का पाठ करें व अमावस्या के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर के बहते पानी में नारियल प्रवाहित करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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मई 2020: वृषभ लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: वृषभ लग्न वालों के लिए कैसा रहेगा

 

वृषभ लग्न
वृषभ लग्न

 

वृषभ लग्न वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य आपके द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, सरकारी कार्य की वजह से तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, नेत्रों में जलन या दर्द या सर दर्द की शिकायत रह सकती है, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें 14 मई 2020 को सूर्य गोचर बदलकर लग्न में आ जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा व माता का सहयोग भी प्राप्त होगा, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माह के शुरुवात में बुध का गोचर आपके व्यय भाव से रहेगा अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, तनाव लेने से बचें, विद्यार्थियों के लिए भी यह समय थोड़ा कमजोर रह सकता है, खर्चों में वृद्धि होगी 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे फलस्वरूप संतान की उन्नति होगी व संतान का पूर्ण सहयोग भी प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार की प्राप्ति हो सकती है, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे क्योंकि पंचमेश का लग्न से गोचर रहेगा व पंचमेश और पंचम भाव दोनों पर गुरु की दृष्टि रहेगी, मन प्रसन्न रहेगा 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके धन भाव में चले जाएंगे जहाँ राहु पहले से ही गोचर कर रहे हैं अतः इस समय वाणी पर नियंत्रण रखें व बहुत सोच-समझकर ही निर्णय लें, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशि

 

माह के शुरुवात में मंगल, गुरु व शनि का लग्न पर से गोचर रहेगा फलस्वरूप भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, गुरु-मंगल व गुरु-शनि से बना नीचभंग राजयोग बेहद शुभ रहेगा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे 4 मई 2020 को मंगल गोचर बदलकर आपके दशम भाव में चले जाएंगे जो कि आपके लिए बेहद शुभ रहेगा यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, आपके पार्टनर कुछ ऐसे निर्णय लेंगे जो कि आपके बिज़नेस के लिए बेहद शुभ रहेगा, यदि आप कोई नया बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं तो पत्नी को साझेदार बनाकर करें लाभ होगा, 4 मई से 30 जुलाई के मध्य आपको वाहन सुख प्राप्त होने के अच्छे योग बनते दिख रहे हैं, माह के शुरुवात में शुक्र का लग्न से गोचर मालव्य योग बना रहा है जो कि बेहद शुभ रहेगा फलस्वरूप आपके स्वास्थ्य में सुधार होगा, मन प्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, शत्रुओं से सावधान रहें, माह के मध्य भाग में लग्नेश, सुखेश व पंचमेश की लग्न में युति व मंगल और गुरु की दृष्टि रहने से घर में कोई शुभ कार्य होने के योग बनेंगे, घर में किसी नए मेहमान का आगमन संभव है, शुभ समाचार की प्राप्ति होगी, अचानक यात्रा करनी पड़ सकती है, कोर्ट-कचहरी के चक्कर में न पड़ें साथ ही शत्रुओं से सावधान रहें, अष्टम से केतु का गोचर ससुराल पक्ष से विवाद करा सकता है, वाहन सावधानी से चलाएं, पैरों में चोट व दर्द की शिकायत भी रह सकती है।

 

वृषभ राशिफल

 

कुल मिलाकर वृषभ लग्न वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें यात्राओं के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, संतान की उन्नति होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, घर में कोई शुभ कार्य हो सकता है, वाहन खरीदने के योग बनेंगे, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे, यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो उन्नति के नए मार्ग प्राप्त होंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, वाणी पर नियंत्रण रखें, कोर्ट-कचहरी के चक्कर में पड़ने से बचें व सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें यदि आपका कोई सरकारी भुगतान जैसे बिजली बिल या टैक्स बचा हुआ है तो उसको जल्दी भर दें अन्यथा तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 1 से 7, 10, 11, 17 व 19 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि वृषभ लग्न के व्यक्ति नित्य दुर्गा कवच व गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें तो बेहद शुभ रहेगा।

 

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चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि के फल मैंने दो भागों में विभक्त किया था जिसके पहले भाग की link को मैं इस पोस्ट में उपलब्ध करा रहा हूँ साथ ही उसी विषय पर आगे चर्चा करते हुए शनि के चतुर्थ भाव में विभिन्न स्थितियों में स्थित होने के फल को विस्तार से समझाते हुए पूर्ण करता हूँ।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि उच्च राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि केवल कर्क लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को अनुशासित करने में लगे रहते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की चाह होती है कि उनके इच्छा अनुसार लोग कार्य करें ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति पक्षियों को बंधन में रखने से सुखी होते हैं ऐसे व्यक्तियों को भूमि व वाहन सुख प्राप्त होता है साथ ही इनको बहुत मजबूत विचारों वाले जीवनसाथी की प्राप्ति होती है, यदि उच्च नवांश का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति माँसाहारी होते हैं तथा माँसाहार भोजन करने में इन्हें बहुत आनंद आता है।

 

यदि शुभ वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति खेती से जुड़े कार्य से सुख की प्राप्ति करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जहाँ कच्चे माल को बनाने या खरीदने-बेचने का कार्य होता हो वहाँ अधिक सफल होते हैं, यदि पाप वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति नकारात्मक चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति दोषों को अपनाकर सुख का अनुभव करते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों को कोई भी निर्णय बहुत सोच समझकर लेना चाहिए।

 

चतुर्थ भाव में शनि
चतुर्थ भाव में शनि

 

यदि नीच राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि मकर लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति अधिकांश समय अकेले रहना पसंद करते हैं व इन्हें भूमि और वाहन का उत्तम सुख प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी उच्च पद पर नौकरी करते हैं, यदि नीच नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति बोलते कुछ व करते कुछ हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति वंचक होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति लोगों की मदद कर के सुख को अनुभव करते हैं।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि चतुर्थ भाव में मित्र राशि का शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों का कार्यस्थल पर अधिक मन लगता है व ऐसे व्यक्ति परिवार से अधिक अपने कार्य को महत्व देते हैं, यदि शत्रु राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को ठगने से सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे सभी कार्य जिसमें बुद्धि-विवेक द्वारा मुनाफा अधिक कमाया जा सकता है उन सभी कार्यों जैसे मार्केटिंग, बिज़नेस में अधिक सफल होते हैं।

 

यदि मित्र नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के घरेलू सुख में कुछ तनाव की स्थिति बनी रहती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख अवश्य प्राप्त होता है, शत्रु नवांश का शनि चतुर्थ भाव हो तो ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर धनार्जन करते हैं अब आज के समय में dog cannel खोलना वगैरह इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

 

Astrology Sutras

 

यदि वर्गोत्तम स्थिति का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को हानि पहुँचा कर सुख का अनुभव करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति कुछ इस तरह का कार्य करते हैं जिससे दूसरों को हानि या दुःख पहुँचे उदाहरण के तौर पर जैसे वकालत का कार्य क्योंकि इसमें व्यक्ति अपने पक्ष के व्यक्ति को विजय दिलवाकर उनसे सुख के साधन प्राप्त करता है किंतु उसके इस कृत्य से दूसरे पक्ष को कुछ हानि व दुःख पहुँचता है।

 

यदि स्वराशि शनि चतुर्थ भाव में हो जो कि तुलावृश्चिक लग्न की कुंडली में ही संभव है तो व्यक्ति रस पदार्थ बेचकर सुखी होता है कहने का आशय यह है कि ऐसा व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है जिससे दूसरों को सुख की अनुभूति हो साथ ही ऐसे व्यक्तियों भूमि सुख निश्चय ही प्राप्त होता है, यदि तुला लग्न की कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में हो तो अधिक लाभकारी होता है क्योंकि तुला लग्न की कुंडली में राजयोगकारक हो जाता है और दसवीं दृष्टि से लग्न को अपनी उच्च राशि में देखता है अतः तुला लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है व बड़ी सफलता दिलवाता है वहीं वृश्चिक लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों की परिश्रम अधिक करना पड़ेगा क्योंकि शनि तीसरे भाव अर्थात पराक्रम भाव का भी स्वामी होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यधिक परिश्रम कर के जीवन में बड़ी सफलता को प्राप्त करते हैं।

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

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शादी से पहले कुंडली में ‘नाड़ी दोष’ क्यों है खतरनाक? (जानें मृत्यु योग का सच और अचूक परिहार)

नाड़ी दोष व उसका परिहार

नाड़ी दोष:-

कुंडली मिलान की प्रकिया में अष्ट कूट का मिलान किया है वह अष्ट कूट क्रमशः वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी होते हैं इन अष्ट कूटों में प्रत्येक का अपना-अपना महत्व होता है, इस लेख में मैं नाड़ी पर चर्चा करता हूँ क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसको अधिकतर लोग नजरअंदाज कर देते हैं जब कि नाड़ी न मिलने पर दामपत्य जीवन में अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।

ज्योतिष ग्रंथों में नाड़ी तीन प्रकार की बताई गई है जो कि क्रमशः आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी के नाम से जानी जाती है अब प्रश्न यह उठता है कि यह कैसे ज्ञात किया जाए कि किस व्यक्ति का जन्म किस नाड़ी में हुआ है अतः इस पर मैं विस्तार से वर्णन करता हूँ।

हमारे ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नाड़ी में 9 नक्षत्र आते हैं जिसका निर्धारण व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित हो उसके आधार पर किया जाता है जिन्हें मैं विस्तार से लिख रहा हूँ।

🚩 सनातन धर्म का अद्भुत रहस्य:

👉 यहाँ पढ़ें: नवरात्रि 9 दिन की ही क्यों होती है?

नाड़ियों में आने वाले नक्षत्र:-

नाड़ियों में 27 नक्षत्रों का विभाजन (आदि, मध्य, अंत्य) - Nakshatra in Nadi Astrology
आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी में 27 नक्षत्रों का शास्त्र-सम्मत विभाजन।

१. आदि नाड़ी:-

अश्विनी, आद्रा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर आदि नाड़ी प्राप्त होती है।

२. मध्य नाड़ी:-

भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, घनिष्ठा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर मध्य नाड़ी प्राप्त होती है।

३. अंत्य नाड़ी:-

कृतिका, रोहिणी, श्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण और रेवती नक्षत्र में जन्म लेने पर अंत्य नाड़ी प्राप्त होती है।

नाड़ी दोष के परिहार:-

उक्त नाड़ी विचार में आदि व अंत्य नाड़ी में से कोई एक नाड़ी ही दोनों की हो तो कुछ विद्वानों का मत है कि रज्जूकूट अनुकूल हो, राशिकूट शुभ हो, दोनों का राशि स्वामी एक हो या दोनों राशियों में मैत्री हो तो नाड़ी दोष विशेष अनिष्टकारक नही होता है।

विशेष:-

मध्य नाड़ी एक हो तो पुरुष की मृत्यु तथा आदि अंत्य में स्त्री की मृत्यु होती है।

✨ कुंडली का एक और भयानक दोष:

👉 यहाँ पढ़ें: मंगल दोष के लक्षण और अचूक उपाय

नक्षत्रानुसार नाड़ी दोष परिहार:-

नक्षत्रानुसार नाड़ी दोष परिहार और अचूक उपाय - Nadi Dosh Cancellation Rules
विशिष्ट नक्षत्रों के संयोग से नाड़ी दोष का कट जाना (दोष परिहार)।
  • विशाखा, अनुराधा, घनिष्ठा, रेवती, हस्त, स्वाती, आद्रा, पूर्वाभाद्रपद इन 8 नक्षत्रों में से किसी भी नक्षत्र में वर, कन्या या दोनों में से एक का ही जन्म हो तो विवाह शुभ होता है अर्थात नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है।
  • उत्तराभाद्रपद, रेवती, रोहिणी, विशाखा, आद्रा, श्रवण, पुष्य और मघा इन 8 नक्षत्रों में भी वर व कन्या का जन्म नक्षत्र पड़े तो नाड़ी दोष शांत हो जाता है, भरणी, मृगशिरा, शतभिषा, हस्त, पूर्वाषाढ़ा व श्लेषा इन नक्षत्रों में भी नाड़ी दोष नही रहता है।
  • वर व कन्या की एक राशि हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हो तो नाड़ी दोष नही होता है, एक नक्षत्र में भी चरण भेद होने पर अत्यावश्यकता में विवाह किया जा सकता है।
  • कृतिका, रोहिणी, घनिष्ठा, शतभिषा, पुष्य, श्लेषा ये नक्षत्र एक ही राशि में पड़ते हैं, तब भी इन जोड़े नक्षत्रों में यदि वर व कन्या के नक्षत्र हो तो इन्हें छोड़ना चाहिए।
  • रोहिणी, आद्रा, मघा, विशाखा, पुष्य, श्रवण, रेवती, उत्तराभाद्रपद में से किसी एक नक्षत्र में ही दोनो का जन्म हो तब भी नाड़ी दोष नही रहता, नक्षत्र चरण भेद आवश्यक है।
नक्षत्रेक्ये पादभेदे शुभम् स्यात।।
पराशरः प्राह नवांशभेदादेकर्क्षराश्योरपि सौमनस्यम्।।
एकक्षै चैकपादे च विवाह: प्राणहानिद:।।
दम्पत्योरेकपादे तु वर्षान्ते मरणं ध्रुवम्।।

अर्थात:-

चरण व नक्षत्र दोनों एक होने का फल मृत्यु है, नाड़ी कूट सर्व शिरोमणि प्रधान है, इसके गुण 8 माने जाते हैं।

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📌 FAQ: नाड़ी दोष से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: नाड़ी कितने प्रकार की होती है?

उत्तर: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नाड़ी तीन प्रकार की होती है— आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी।

प्रश्न 2: नाड़ी दोष कब लगता है?

उत्तर: विवाह के समय कुंडली मिलान (अष्टकूट मिलान) में जब वर और कन्या दोनों की नाड़ी एक ही (समान) होती है, तब नाड़ी दोष लगता है।

प्रश्न 3: क्या एक नाड़ी होने पर विवाह किया जा सकता है?

उत्तर: यदि वर व कन्या की राशि एक हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो, या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हों, या नक्षत्र चरण में भेद हो, तो नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है और विवाह संभव है।

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ग्रहों के कारकतत्व भाग १

ग्रहों के कारकतत्व भाग १

 

ग्रहों के कारकतत्व
ग्रहों के कारकतत्व

 

सूर्य:-

 

तांबा, सोना, पिता, धैर्य, शौर्य, आत्मा, प्रकाश, जंगल, मंदिर, हवन, उत्साह, शक्ति, पहाड़ में यात्रा, भगवान शिव से संबंधित कार्यों का कारक होता है।

 

चंद्र:-

 

अन्न, खेती, जल, गाय, माता का कुशल, फल, पुष्प, मोती, चांदी, वस्त्र, सफेद वस्तु, मुलायम वस्तु, यश, काँसा, दूध, दहीं, स्त्री प्राप्ति, सुखपूर्वक भोजन, रूप (सुंदरता) का कारक होता है।

 

मंगल:-

 

शारीरिक और मानसिक ताकत, पृथ्वी से उत्पन्न होने वाले पदार्थ, भाई-बहन के गुण, रण, साहस, रसोई की अग्नि, सोना, अस्त्र, चोर, शत्रु, उत्साह, दूसरे पुरुष की स्त्री में रति, मिथ्या भाषण, वीर्य (ताकत, पराक्रम), चित का उत्साह, उदारता, बहादुरी, चोट, सेनाधिपत्य का कारक होता है।

 

बुध:-

 

पांडित्य, बोलने की शक्ति, कला, निपुणता, विद्वानों द्वारा स्तुति, मामा, विद्या में बुद्धि का योग, यज्ञ, भगवान विष्णु से संबंधित धार्मिक कार्य, शिल्प, बन्धु, युवराज, मित्र, भांजा, भांजी, चतुरता आदि का कारक होता है।

 

गुरु:-

 

ज्ञान, अच्छे गुण, पुत्र, मंत्री, आचरण, चरित्र, आचार्यत्व (पढ़ाना या दीक्षा लेना), वेद शास्त्र, सदगति, देवताओं और ब्राह्मणों की भक्ति, यज्ञ, तपस्या, श्रद्धा, खजाना, विद्वता, सम्मान, दया, यदि किसी स्त्री की कुंडली हो तो उसके पति का विचार आदि का कारक गुरु होता है।

 

शुक्र:-

 

संपत्ति, सवारी, वस्त्र, भूषण, नाचने, गाने तथा बाजे के योग, सुगंधित पुष्प, रति (स्त्री-पुरुष प्रसंग), शैया (पलंग) और उससे संबंधित व्यापार, मकान, वैभव, विलास, विवाह या अन्य शुभ कर्म, उत्सव, यदि किसी पुरुष की कुंडली हो तो उसकी पत्नी का विचार आदि शुक्र के कारक होते हैं।

 

विशेष:-  वृहस्पति अर्थात गुरु पति का कारक और शुक्र पत्नी का कारक होता है, शुक्र स्त्री का कारक होने के नाते यह भी देखा जा सकता है कि उक्त जातक का स्त्रियों के साथ कैसे संबंध रहेगा।

 

शनि:-

 

आयु, मरण, भय, अपमान, पतन, बीमारी, दुख, दरिद्रता, बदनामी, पाप, मजदूरी, अपवित्रता, निंदा, मन का साफ न होना, मारने का सूतक, स्थिरता, भैस, आलस्य, कर्जा, लोहे की वस्तु, नौकरी, दासता, जेल जाना, खेती के साधन आदि शनि के कारक होते हैं।

 

शनि ग्रह से जुड़ी विस्तृत जानकारी व उनके सभी कारक तत्वों को जानने हेतु इस link पर जाएं।

शनि ग्रह से आखिर क्यों डरते हैं लोग, जाने शनि को– शनि ग्रह की सम्पूर्ण जानकारी:-

 

राहु:-

 

शोध करने की प्रवृ्ति, निष्ठुर वाणी युक्त, विदेश में जीवन, यात्रा, अकाल मृत्यु, इच्छाएं, त्वचा पर दाग, चर्म रोग, सरीसृ्प, सांप और सांप का जहर, विष, महामारी, अनैतिक महिला से संबन्ध, दादा, नानी, व्यर्थ के तर्क, भडकाऊ भाषण, बनावटीपन, विधवापन, दर्द और सूजन, डूबना, अंधेरा, दु:ख पहुंचाने वाले शब्द, निम्न जाति, दुष्ट स्त्री, जुआरी, विधर्मी, चालाकी, संक्रीण सोच, पीठ पीछे बुराई करने वाले, पाखण्डी।

 

केतु:-

 

शोध, निष्ठुर वाणी, चर्म रोग, अतिशूल, दु:ख, चण्डीश्वर, कुत्ता, वायु विकार, क्षयरोग , ब्रह्मज्ञान, संसार से विरक्त, गणेशादि देवताओं की उपासना और मोक्ष का कारक है।

 

सभी ग्रहों के विभिन्न राशियों में अलग-अलग चीजों के कारक होते हैं जिनको मैं आगे भाग में विस्तार से बतायूँगा।

 

जय श्री राम।

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ग्रह व उनके भाग्योदय वर्ष: जानें कौन से ग्रह किस आयु में कराते हैं भाग्योदय

ग्रह व उनके भाग्योदय वर्ष: जानें कौन से ग्रह किस आयु में कराते हैं भाग्योदय

 

ग्रह व उनके भाग्योदय वर्ष
ग्रह व उनके भाग्योदय वर्ष

 

सूर्य:-

यह सिंह राशि का स्वामी होता है मेष के 10 अंश पर उच्च स्थान और तुला के 10 अंश पर नीच का होता है यह भाग्योदय 22वें वर्ष में करवाता है इसका रत्न माणिक होता है।

चंद्र:-

यह कर्क राशि का स्वामी होता है वृषभ के 3 अंश पर उच्चवृश्चिक के 3 अंश पर नीच का होता है यह भाग्योदय 24वें वर्ष में करवाता है इसका रत्न मोती होता है।

मंगल:-

यह मेष और वृश्चिक राशि का स्वामी होता है मकर के 28 अंश पर उच्चकर्क के 28 अंश पर नीच का होता है यह 28 वें वर्ष में भाग्योदय करवाता है इसका रत्न मूँगा होता है।

बुध:-

यह मिथुन और कन्या का स्वामी होता है कन्या के 15 अंश पर उच्च और मीन के 15 अंश पर नीच का होता है यह 32वें वर्ष में भाग्योदय करवाता है इसका रत्न पन्ना होता है।

गुरु:-

यह धनु और मीन राशि का स्वामी होता है कर्क के 5 अंश पर उच्च और मकर के 5 अंश पर नीच का होता है यह 16वें वर्ष में भाग्योदय करवाता है इसका रत्न पोखराज होता है।

शुक्र:-

यह वृषभ और तुला राशि का स्वामी होता है मीन के 15 अंश पर उच्च और कन्या के 15 अंश पर नीच का होता है यह 25वें वर्ष में भाग्योदय करवाता है इसका रत्न हीरा होता है।

शनि:-

यह मकर और कुंभ राशि का स्वामी होता है तुला के 20 अंश पर उच्च और मेष के 20 अंश पर नीच का होता है यह 36वें वर्ष में भाग्योदय करवाता है इसका रत्न नीलम होता है।

राहु:-

यह कन्या राशि का स्वामी होता है मिथुन इसकी उच्च कुंभ त्रिकोण संध्याबली, और वृश्चिक नीच राशि होती है कुछ ज्योतिषियों का मत है कि धनु में भी राहु शुरू के 15 अंश तक उच्च का होता है और वृश्चिक में 16 अंश से 30 अंश तक नीच का होता है यह 42वें वर्ष में भाग्योदय करवाता है इसका रत्न गोमेद होता है।

केतु:-

यह मीन राशि का स्वामी होता है धनु में उच्च संध्याबली, सिंह त्रिकोण राशि और मिथुन नीच राशि होती है यह 48वें वर्ष में भाग्योदय करवाता है इसका रत्न लहसुनिया होता है।

जब कोई भी ग्रह खुद की राशि मे बैठता है तो उसे “स्वग्रही” बोलते हैं।

जय श्री राम।

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चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल

 

कुंडली का चतुर्थ भाव सुख, माता, वाहन, भूमि, मानसिक स्थिति, घर के वातावरण, छाती, प्रारंभिक शिक्षा को दर्शाता है जहाँ बैठा शनि इन सभी को प्रभावित करता है क्योंकि शनि विरक्ति का कारक है चतुर्थ भाव में बैठा शनि व्यक्ति को बचपन में रोग-पीड़ा देने वाला कहा गया है ऐसे व्यक्तियों के बचपन में छाती में दर्द की शिकायत रहती है साथ ही चतुर्थ भाव में स्थित शनि बचपन में सीमित संसाधन देता है जो कि समय व परिश्रम के साथ-साथ बढ़ते जाते हैं, चतुर्थ भाव में स्थित शनि घर से दूर ले जाकर अच्छी उन्नति दिलवाता है ऐसे व्यक्तियों की कुंडली में यदि विदेश यात्रा के योग हैं तो वह और भी प्रवल हो जाता है, बहुत से ग्रंथकारों का मत है कि यदि शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख नही मिल पाता किन्तु मेरा ऐसा मत व अनुभव है कि यदि शनि चतुर्थ भाव में अपनी उच्च राशि, स्वराशि व मूलत्रिकोण राशि अर्थात तुला, मकर व कुंभ राशि में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख अवश्य ही प्राप्त होता है, चतुर्थ भाव में स्थित शनि व्यक्ति का झुकाव आध्यात्म की ओर बढ़ाता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों की कुंडली में प्रवज्या योग जिसे सन्यास योग भी कहा जाता है उसकी संभावना अधिक हो जाती है कहने का आशय यह है कि यदि शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसा व्यक्ति धर्म-कर्म में अधिक रुचि रखता है, चतुर्थ भाव से घर के वातावरण का भी विचार किया जाता है जहाँ स्थित शनि अकसर घर के माहौल को गरम रखता है कहने का आशय यह है कि यदि चतुर्थ भाव में शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को मानसिक शांति जल्दी या ज्यादा समय तक अनुभव नही होती ऐसे व्यक्तियों के घर में कलह होते रहते हैं या अन्य किसी कारण से मन दुःखी रहता है।

 

चतुर्थ भाव में शनि
चतुर्थ भाव में शनि

 

चतुर्थ भाव वाहन सुख को भी दर्शाता है जहाँ स्थित शनि वाहन सुख प्रदान करता है किंतु ऐसे व्यक्तियों के वाहन में कोई न कोई समस्या अकसर बनी ही रहती है चाहे वो स्क्रैच की हो या अन्य कोई खराबी की हो, चतुर्थ भाव में स्थित शनि माता के स्वास्थ्य में भी परेशानी देता रहता है ऐसे व्यक्तियों की माता थोड़ी जिद्दी स्वभाव की होती हैं व उनके पैरों, कमर व जोड़ों में दर्द की शिकायत प्रायः देखी जा सकती है, चतुर्थ भाव व्यक्ति के प्रारंभिक शिक्षा को भी दर्शाता है अतः चतुर्थ भाव में बैठा शनि ऐसे व्यक्तियों की प्रारंभिक शिक्षा को भी प्रभावित करता है ऐसे व्यक्तियों की या तो शिक्षा कुछ विलंब से शुरू होती है या फिर ऐसे व्यक्ति अपनी योग्यता के अनुसार परीक्षा में अंक नही प्राप्त कर पाते हैं ऐसे व्यक्तियों को अपने टैलेंट को दिखाने के लिए प्रेरित करना पड़ता है तथा इनका टैलेंट लोगों के सामने आने में समय लगता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति खुद के टैलेंट को ही जल्दी नही पहचान पाते हैं, यदि चतुर्थ भाव में शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को वात व पित्त रोग होने की संभावना बढ़ जाती है, इसके अतिरिक्त यदि शनि चतुर्थ भाव में हो तो भृगु सूत्र के अनुसार ऐसे व्यक्तियों की माता को काफी कष्ट रहता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों की कुंडली में दो माता के योग बनते हैं किंतु इसके लिए अन्य ग्रहों की स्थिति पर भी ध्यान देना आवश्यक होता है।

 

 

चतुर्थ भाव में बैठे शनि की तीसरी दृष्टि छठे भाव पर पड़ती है जो यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं अर्थात शत्रु इनको कोई हानि नही पहुँचा पाते हैं इसके अतिरिक्त ऐसे व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं में भी सफल होते हैं, चतुर्थ भाव में बैठे शनि की सातवीं दृष्टि दशम भाव अर्थात कर्म स्थान पर पड़ती है जो यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों को जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त करने हेतु कड़ा संघर्ष करना पड़ता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों को कड़े परिश्रम से भी बड़ी सफलता व उन्नति प्राप्त होती है, मेरा ऐसा मत व अनुभव है कि यदि चतुर्थ भाव में शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति जीवनकाल में एक बार बहुत ऊँचे शिखर पर अवश्य ही पहुँचते हैं, इसके अतिरिक्त चतुर्थ भाव में स्थित शनि की दसवीं दृष्टि लग्न पर पड़ती है जो कि यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों के चेहरे पर किसी प्रकार का कोई निशान (चाहे वह तिल का हो या मस्से का या किसी चोट का या अन्य किसी प्रकार का) रहता है अब यहाँ ध्यान से देखने वाली बात यह है कि चतुर्थ भाव में स्थित शनि कुंडली के छठे भाव जो कि रोग व पीड़ा का भाव है और लग्न जो कि आपका शरीर है दोनों को देखता है साथ ही चतुर्थ भाव में स्थित होने से मानसिक शांति भंग होने के भी योग बना रहा होता है अतः ऐसे व्यक्तियों को कोई ऐसा रोग रहता है जो कि लंबे समय तक चलता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों की कुंडली में लंबे समय तक दवाईयाँ खाने के योग बनते हैं।

 

अब जानते हैं कि विभिन्न स्थितियों में चतुर्थ भाव में स्थित शनि किस प्रकार के फल देंगे:-…….

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसका दूसरा भाग जल्द ही प्रकाशित करूँगा।

 

जय श्री राम।

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जानें लड़की का ससुराल व उसका पति कैसा होगा भाग २

जानें लड़की का ससुराल व उसका पति कैसा होगा भाग २

 

जानें विवाह कब होगा
जानें विवाह कब होगा

 

भाग:-२

भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं

जानें लड़की का ससुराल व उसका पति कैसा होगा भाग१

 

भाग:-१ में मैंने कन्या का विवाह किस वर्ष में होगा, ससुराल की दिशा क्या होगी, विवाह की आयु क्या होगी पर भृगु संहिता के कुछ सूत्रों को अपने अनुभव के साथ समझाने का प्रयास किया था आज उसी विषय को आगे बढ़ाते हुए कुछ अन्य बातों पर भी चर्चा करते हैं जिससे आप सभी को कन्या के विवाह को लेकर अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नही रहेगी व आप बहुत ही सरल विधि से कुछ महत्पूर्ण बातों को इन सूत्रों से ज्ञात कर सकेंगे तो चलिए कुछ अन्य सूत्रों पर चर्चा शुरू करते हैं:-

 

ससुराल की दूरी क्या होगी:-

१. जन्म कुंडली के सप्तम भाव में यदि स्थिर राशियाँ जैसे वृष, सिंह, वृश्चिक व कुंभ राशि हो तो जातिका का विवाह 120 किलोमीटर के अंदर ही होता है।

२. यदि सप्तम भाव में चंद्र, शुक्र व गुरु स्थित हो तो जातिका का विवाह जन्म स्थान के नजदीक ही होता है।

३. जन्म कुंडली के सप्तम भाव में यदि चर राशियाँ जैसे मेष, कर्क, तुला व मकर हो तो जातिका का विवाह 120 से 300 किलोमीटर के अंदर ही होता है।

४. जन्म कुंडली के सप्तम भाव में यदि द्विस्वभाव राशियाँ जैसे मिथुन, कन्या, धनु, मीन हो तो जातिका का विवाह 70 से 130 किलोमीटर के मध्य होता है।

५. यदि सप्तमाधिपति अर्थात सप्तम भाव में जो राशि हो उसका स्वामी सप्तम भाव से द्वादश भाव के मध्य कहीं भी स्थित हो तो जातिका का विवाह विदेश में होता है या लड़का विवाह उपरांत पत्नी के साथ विदेश चला जाता है।

विशेष:-

यहाँ विदेश का आशय सिर्फ देश के बाहर से ही नही अपितु एक राज्य से दूसरे राज्य को भी समझना चाहिए उदाहरण के लिए यदि लड़का उत्तरप्रदेश का रहने वाला है तो विवाह उपरांत व अपनी पत्नी के साथ किसी अन्य राज्य जैसे मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र या अन्य किसी भी राज्य में भी जा सकता है।

 

विवाह से जुड़े कुछ ज्योतिष के सूत्र
विवाह से जुड़े कुछ ज्योतिष के सूत्र

 

पति कैसा होगा:-

१. यदि शुभ ग्रह जैसे चंद्र, बुध, गुरु व शुक्र सप्तम भाव के स्वामी हों या सप्तम भाव में स्थित हों या सप्तम भाव को देखते हैं तो पति सम आयु या 1 से 5 वर्ष के अंतर वाला गोरा व दिखने में सुंदर होगा।

२. यदि पापी ग्रह सूर्य, मंगल, शनि, राहु व केतु सप्तम भाव को देखते हों या सप्तम भाव में स्थित हों कहने का आशय यह है कि सप्तम भाव यदि पापी ग्रह के प्रभाव में हो तो पति 5 वर्ष या उससे अधिक बड़ा होता है।

३. यदि शनि सप्तम भाव में अपनी उच्च राशि का होकर स्थित हो तो पति पतला व सुंदर और लड़की से 6 से 8 वर्ष तक बड़ा हो सकता है और यदि शनि सप्तम भाव में नीच राशि का हो तो पति श्याम वर्ण का व आयु में काफी बड़ा होता है।

विशेष:-

यदि सप्तम भाव में सिंह राशि हो तो पति सुंदर, आकर्षक चेहरे वाला, गोल मुख वाला, क्रोधी, ज्ञानी, चेहरे पर अर्थात ललाट पर एक अलग ही तेज लिए होता है, यदि सप्तम भाव में कर्क राशि हो तो पति सुंदर, सुडौल, मध्यम कद वाला, प्रेम वात्सल्य से भरपूर, व शांत स्वभाव का होता है, यदि सप्तम भाव पर मेष या वृश्चिक राशि हो तो पति क्रोधी, सत्यवादी, छोटे कद वाला, नियम का पालन करने वाला, जिद्दी, शूरवीर व भ्रात प्रेमी होता है, यदि वृष या तुला राशि सप्तम भाव में हो तो पति सुंदर, ज्ञानी, शांत चित्त वाला व मध्यम कद वाला होता है, यदि सप्तम भाव में धनु या मीन राशि हो तो व्यक्ति सुंदर, विद्वान, गुरु व पिता भक्त, धार्मिक, मध्यम कद वाला होता है, यदि मिथुन व कन्या राशि सप्तम भाव में हो तो पति ज्ञानी, चतुर, सुंदर, अकसर भ्रमित रहने वाला, वाचाल अधिक करने वाला होता है।

भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं

जानें लड़की का ससुराल व उसका पति कैसा होगा भाग१

 

भृगु संहिता सूत्र
भृगु संहिता सूत्र

 

पति की नौकरी:-

कन्या की लग्न कुंडली का सप्तम भाव पति का व चतुर्थ भाव सप्तम से दशम होने के कारण से पति का राज्य भाव होता है, यदि कन्या की कुंडली का चतुर्थ भाव बली हो या चतुर्थ भाव का स्वामी सूर्य, चन्द्र, मंगल, गुरु, शुक्र को देखता हो साथ ही यह ग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, गुरु व शुक्र) केंद्र या त्रिकोण में बैठे हों तो पति की अच्छी नौकरी होती है या विवाह बाद पति की अच्छी उन्नति होती है।

पति की आयु:-

१. कन्या की जन्म कुंडली का द्वितीय भाव उसके पति के आयु का भाव होता है क्योंकि द्वितीय भाव सप्तम भाव से अष्टम होता है और अष्टम भाव से आयु का विचार किया जाता है, यदि दूसरे भाव का स्वामी शुभ स्थिति में हो या द्वितीय स्थान को देख रहा हो तो पति दीर्घायु होता है।

२. यदि द्वितीय भाव में शनि स्वग्रही, मित्र राशि, मूलत्रिकोण राशि या उच्च राशि का स्थित हो या गुरु द्वितीय भाव, सप्तम भाव को देख रहा हो तो उस स्थिति में भी पति दीर्घायु होकर 75 वर्ष की आयु प्राप्त करता है।

भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं

जानें लड़की का ससुराल व उसका पति कैसा होगा भाग१

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