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21 जून 2020: सूर्य ग्रहण जानें, देश के प्रमुख शहरों में ग्रहण समय और ग्रहण क्यों लगता है व ग्रहण काल में क्या करना चाहिए

21 जून 2020: सूर्य ग्रहण जानें, देश के प्रमुख शहरों में ग्रहण समय और ग्रहण क्यों लगता है व ग्रहण काल में क्या करना चाहिए

 

21 जून सूर्य ग्रहण
21 जून सूर्य ग्रहण

 

ग्रहण लगने का ज्योतिषीय कारण:-

 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब सूर्य व चंद्रमा गोचर में राहु व केतु से युति करते हैं और अंशात्मक रूप से उनमें का अंतर होता है तब ग्रहण लगता है क्योंकि उस अवस्था में सूर्य व चंद्र की छाया धरती को स्पर्श नही कर पाती है सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन तो चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन लगता है।

 

सूर्य ग्रहण
सूर्य ग्रहण

 

भारत के प्रमुख शहरों में ग्रहण समय:-

 

21 जून 2020 को लगने वाला सूर्य ग्रहण मिथुन राशि व मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा जिस कारण मिथुन लग्न व मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र में जन्मे व्यक्तियों को यह ग्रहण नही देखना चाहिए, भारत के प्रमुख शहरों में ग्रहण का समय कुछ इस प्रकार है:-

 

दिल्ली:- 10 बजकर 46 मिनट से 2 बजकर 17 मिनट तक

 

मुम्बई:- 10 बजकर 1 मिनट से 1 बजकर 28 मिनट तक

 

कलकत्ता:- 10 बजकर 46 मिनट से 2 बजकर 17 मिनट तक

 

बैंगलुरु:- 10 बजकर 1 मिनट से 1 बजकर 32 मिनट तक

 

लखनऊ:- 10 बजकर 27 मिनट से 1 बजकर 59 मिनट तक

 

राजकोट:- 9 बजकर 59 मिनट से 1 बजकर 26 मिनट तक

 

हरिद्वार:- 10 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 51 मिनट तक

 

वाराणसी (काशी):- 10 बजकर 31 मिनट से 2 बजकर 4 मिनट तक

 

जयपुर:- 10 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक

 

सीकर:- 10 बजकर 15 मिनट से 1 बजकर 43 मिनट तक

 

सालासर:- 10 बजकर 14 मिनट से 1 बजकर 44 मिनट तक

 

जोधपुर:- 10 बजकर 8 मिनट से 1 बजकर 36 मिनट तक

 

सूर्य ग्रहण में क्या करें:-

 

सूर्य ग्रहण के दौरान स्नान, जप व यज्ञ करना चाहिए तथा ग्रहण खत्म होने पर दान देने का विधान है सौर पुराण के अनुसार मनुष्य जितने भी दान अपने जीवनकाल में कर के पुण्य अर्जित करता है वह सभी पुण्य मनुष्य को सिर्फ ग्रहण बाद दान करने से ही मिल जाता है।

 

विशेष:-

 

मन्वर्थ मुक्तावली के अनुसार सूर्य ग्रहण के दौरान अदित्यहिर्दय स्तोत्र का पाठ अवश्य करना चाहिए।

 

सूर्य ग्रहण में क्या न करें:-

 

१. ग्रहण काल के दौरान मांगलिक कार्यक्रम निषेध माना गया है अतः सूर्य ग्रहण के दौरान कोई भी मांगलिक कार्यक्रम नही करना चाहिए।

 

२. शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल के दौरान मूर्ति स्पर्श वर्जित होता है।

 

३. शास्त्रों के अनुसार ग्रहण के दौरान अन्न व कटी हुई सब्जियों का त्याग करना चाहिए।

 

विशेष:-

 

घी, तेल, दूध, दहीं, मक्खन, पनीर, खोआ, दूध से बने सभी पदार्थ, अचार व मुरब्बों पर कुशा या तुलसी पत्ता रख देने यह सामग्रियाँ दूषित नही होती हैं।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470

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18 जून 2020: 3 ग्रहों के बाद अब बुध भी होंगे वक्री जानें बुध के वक्री होने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए—–Astrology Sutras

18 जून 2020: 3 ग्रहों के बाद अब बुध भी होंगे वक्री जानें बुध के वक्री होने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए—–Astrology Sutras

 

बुध मिथुन राशि में वक्री
बुध मिथुन राशि में वक्री

 

शनि, गुरु व शुक्र वर्तमान में वक्री अवस्था से गोचर कर रहे हैं और आज अर्थात 18 जून 2020 को प्रातः  9 बजकर 52 मिनट पर बुध भी वक्री हो जाएंगे तथा 12 जुलाई को पुनः मार्गी हो जाएंगे बुध बुद्धि, वाणी, चेतना, व्यापार, रेडियो, मोबाइल और त्वचा के कारक होते हैं अतः बुध के वक्री होने से विभिन्न राशियाँ भी प्रभावित होंगी तो चलिए जानते हैं बुध के वक्री अवस्था में गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तीसरे से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः बहुत सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें व जोखिम लेने से बचें, छोटे भाई-बहन के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें।

 

उपाय:- नित्य गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित कर गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व संकठा चतुर्थी और विनायक चतुर्थी का व्रत करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध दूसरे भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कुछ परिश्रम के साथ सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे।

 

उपाय:- गणेश अथर्वशीर्ष का नित्य पाठ करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध लग्न से ही वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः तनाव लेने से बचें व स्वास्थ्य का ख्याल रखें, त्वचा संबंधित कोई समस्या संभव है, वाहन सुख प्राप्त हो सकता है, व्यय में वृद्धि होगी।

 

उपाय:- गणेश स्तोत्र का पाठ करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः खर्चों पर नियंत्रण बना कर रखें, किसी से व्यर्थ विवाद में न पड़ें व लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, किसी नए कार्य के आरंभ के लिए यह अच्छा समय रहेगा।

 

उपाय:- गणेश गायत्री मंत्र का नित्य जाप करें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध एकादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यात्राओं पर धन व्यय होगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, बुआ व बड़ी बहन के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

उपाय:- नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध दशम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः मन में किसी न किसी प्रकार का भय बना रह सकता है, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यस्थल पर व्यर्थ के विवाद में न पड़ें।

 

उपाय:- नित्य गणेश गायत्री मंत्र का जाप करें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः धार्मिक यात्राओं या धार्मिक कार्यों या कार्य के सिलसिले से की गई यात्राओं पर धन व्यय होगा, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, पिता के स्वास्थ्य में परेशानी संभव है, महिलाओं से व्यर्थ विवाद करने से बचें।

 

उपाय:- बुधवार के दिन कोई साग व शुक्रवार के दिन शकर मिश्रित चावल गाय को खिलाएं।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, व्यर्थ विवाद में न पड़ें व तनाव लेने से बचें, जीवनसाथी की वाणी में तेजी अनुभव होगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव है, निवेश करने से बचें।

 

उपाय:- संकठा चतुर्थी व विनायक चतुर्थी का व्रत करें व नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः विवाह में कुछ दिक्कतें आएंगी, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, कार्यस्थल पर किसी से क्षणिक विवाद होने के कारण से तनाव रह सकता है, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे।

 

उपाय:- नित्य गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित करें व अर्पित की हुई दूर्वा घास से कुछ अपने पर्स या जेब में रखें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः तनाव लेने से बचें, जिन्हें न्यूरो से संबंधित समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, मामा पक्ष से वैचारिक मतभेद संभव है।

 

उपाय:- गणेश चालीसा व शनि स्तोत्र का नित्य पाठ करें।

 

कुंभ राशि:

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, संतान को कष्ट संभव है, अपने सीनियर से व्यर्थ विवाद में न पड़ें।

 

उपाय:- राम रक्षा स्तोत्र का नित्य पाठ करें व गणेश गायत्री मंत्र का नित्य जाप करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः माता से विवाद संभव रहेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, किसी अपरिचित की बातों में आने से बचें।

 

उपाय:- गणेश सहस्त्रनाम का नित्य पाठ करें।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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मंगल का मीन राशि से गोचर 18 जून 2020 गुरुवार जानें किस राशि पर क्या पड़ेगा प्रभाव—-Astrology Sutras

मंगल का मीन राशि से गोचर 18 जून 2020 गुरुवार जानें किस राशि पर क्या पड़ेगा प्रभाव—-Astrology Sutras

 

मंगल का मीन राशि से गोचर
मंगल का मीन राशि से गोचर

 

मंगल ग्रह:-

 

मंगल का धनु राशि में प्रवेश
मंगल का धनु राशि में प्रवेश

 

भूमि पुत्र मंगल, लोहितांग के नाम से भी जाने जाते हैं जो कि शिव जी के पसीने से उत्पन्न हुए थे और देवी पृथ्वी के आग्रह करने पर शिव जी ने उन्हें सौंपा था, मंगल ग्रह को नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाना जाता है जो कि शक्ति, पराक्रम व ऊर्जा के ग्रह हैं इनका वर्ण रक्त अर्थात लाल है यदि मंगल किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में हो तो कुज दोष जिसे हम सभी मंगल दोष के नाम से जानते हैं बनता है जो कि दामपत्य जीवन के लिए शुभ नही माना जाता है किंतु यदि यही  मंगल राजयोगकारक हो जाए तो अनेक प्रकार शुभ प्रभावी हो जाता है।

 

मेष व वृश्चिक मंगल की स्वराशि है अर्थात मेष व वृश्चिक राशि का स्वामित्व मंगल ग्रह के पास है, मंगल ग्रह मकर राशि में उच्च के तो कर्क राशि में नीच के हो जाते हैं मंगल ग्रह के इस गोचर परिवर्तन का विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रभाव पड़ेगा तो चलिए जानते हैं  मंगल ग्रह के मीन राशि से गोचर के दौरान किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

गोचर काल की अवधि:-

मंगल ग्रह जो देवी पृथ्वी के पुत्र व नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाने जाते हैं 18 जून 2020 की रात को 8 बजकर 12 मिनट 1 सेकंड पर कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे जहाँ  16 अगस्त 2020 तक रहेंगे।

मंगल के मीन राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव:-

 

मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए मंगल प्रथम व अष्टम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः यात्राओं के योग बनेंगे, कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें अन्यथा किसी बड़ी परेशानी में पड़ सकते हैं, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आवेश में आने से बचें व क्रोध पर नियंत्रण रखें, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होगी, यदि आप नौकरी करना चाहते हैं तो 16 अगस्त तक रुक जाएं, 10 से 16 अगस्त के मध्य छोटे भाई-बहन के सहयोग से रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा जिससे तनाव कम होगा।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए मंगल सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप खर्चों में वृद्धि होगी, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा, अचानक बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, शेयर बाजार में पैसा निवेश करने के लिए अच्छा समय रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए मंगल षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, क्रोध पर नियंत्रण रखें, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना करेंगे, माता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन अप्रसन्न रहेगा, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए मंगल पंचम व दशम भाव अर्थात केंद्र व त्रिकोण के स्वामी होकर राजयोगकारक हो जाते हैं जो कि आपके नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य का सहयोग मिलेगा, उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यात्राओं के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें व फिजूल के खर्चों पर नियंत्रण रखें, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व नवम भाव अर्थात केंद्र व त्रिकोण के स्वामी होकर राजयोगकारक हो जाते हैं जो कि आपके अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः आय में वृद्धि होगी किंतु दवाईयों पर धन व्यय होने के भी योग बनेंगे अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में तेजी अनुभव होगी, पिता के स्वास्थ्य में भी परेशानी संभव है, जिन्हें रक्त जनित कोई समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाहन तीव्र गति से न चलाएं, तामसिक चीजों के सेवन से बचें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए मंगल तीसरे व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे अतः क्रोध पर नियंत्रण रखें, जीवनसाथी के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, किसी गलतफहमी के कारण से जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, भाई-बहन की उन्नति होगी, नौकरी पेशा लोगों के लिए मंगल का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, आवेश में आकर निर्णय लेने से बचें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे अतः शत्रुओं पर धन व्यय होगा किंतु शत्रुओं पर विजय भी प्राप्त होगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय प्राप्त होगी, वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी के स्वास्थ्य में भी समस्या रह सकती है, मंगल के इस गोचर काल के समय आपको मेहनत अधिक करनी पड़ेगी और मेहनत का पूर्ण फल भी प्राप्त होगा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अच्छा रहेगा।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल प्रथम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, प्रेमियों के मध्य वैचारिक मतभेद होने की संभावना रहेगी, किसी पुराने कर्ज से छुटकारा मिल सकता है, आय में वृद्धि होगी, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, गर्म चीजों के सेवन से परहेज करें व क्रोध पर नियंत्रण रखें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए मंगल पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप घर में किसी नए मेहमान का आगमन संभव रहेगा, माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, घर के माहौल में कुछ गर्माहट अनुभव होगी जिससे तनावपूर्ण स्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आय में वृद्धि होगी, लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, यात्राओं के योग बनेंगे चाहे व कार्य के सिलसिले से हो या धार्मिक यात्रा हो, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, व्यापारियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः पराक्रम में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, भाई-बहन को कष्ट या उनसे विवाद संभव रहेगा, ज्वर या सर दर्द की समस्या हो सकती है, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होगी।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए मंगल तीसरे व दशम भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे अतः क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा आपके कार्यक्षेत्र व परिवार में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, आय में वृद्धि होगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, व्यापारियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान की उन्नति होगी, गर्म चीजों के सेवन से परहेज करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे अतः संयम रखें व धैर्य से हर कार्य को संपन्न रखें, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, प्रमोशन या पदोन्नति के योग बनेंगे, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी जिससे मन अप्रसन्न रहेगा अतः तनाव लेने से बचें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव है।

 

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जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य, बुध व राहु आपके तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः आवेश में आने से बचें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा 16 जुलाई को सूर्य गोचर बदलकर आपके चतुर्थ भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, तनाव लेने से बचें, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो या जिन्हें छाती में दर्द की समस्या रहती हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, संतान पर धन व्यय होगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें व जल्दबाजी में कोई भी निर्णय न लें क्योंकि इस माह आपके अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध हो सकते हैं अतः सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, कोई भी रिस्क लेने से बचें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा किंतु शनि के वक्री अवस्था में गोचर करने के कारण से मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से  बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, 1 से 4 जुलाई 12 जुलाई को विशेष सावधानी बरतें व इनमें कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें, धोखा मिल सकता है, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 5 से 10 जुलाई का समय आपके लिए अच्छा सिद्ध होगा इनमें जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, कोई नया अवसर प्राप्त हो सकता है, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात भी संभव रहेगी, 11 से 16 जुलाई का समय विशेष 12 जुलाई का समय अधिक शुभ नही है अतः यह समय थोड़ा सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 17 से 23 जुलाई के मध्य आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा व धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे या धार्मिक अनुष्ठान पर धन व्यय होगा, यह समय विद्यार्थियों के लिए बहुत शुभ रहेगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा, 24 से 31 जुलाई तक का समय कार्यक्षेत्र के लिए सामान्य रहेगा जिसमें कार्य को लेकर लंबे समय से जो तनाव था उसमें राहत मिलेगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो 15 अगस्त तक इंतजार कर लें।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा जिसमें पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से विवाद संभव रहेगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, आवेश में आने व तनाव लेने से बचें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, यदि आप लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो कुछ समय और रुक जाएं, कोई भी रिस्क लेने से बचें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है माह की 1, 2, 3, 4, 11, 12, 13, 14, 15 व 16 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि मंगलवार का व्रत कर हनुमान जी की उपासना करें व नित्य गाय को रोटी, गुड़ व चने की दाल खिलाएं तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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पौराणिक कथाएं

खाटूश्याम मंदिर की स्थापना कब और कहाँ हुई:—-Astrology Sutras

खाटूश्याम मंदिर की स्थापना कब और कहाँ हुई:—-Astrology Sutras

 

 

माहाभारत ग्रंथ के अनुसार बर्बरीक जो कि अतिबलशाली भीम के पौत्र व घटोत्कच और मोरवी के पुत्र थे, बचपन से ही उनमें एक विलक्षण शक्ति थी तथा इन्होंने युद्ध कला अपनी माता तथा श्री कृष्ण से सीखा था, बर्बरीक ने माता की आज्ञा अनुसार नव दुर्गा की घोर तपस्या की व उनको प्रसन्न कर तीन अमोघ बाण प्राप्त किए जो कि कभी विफल नही हो सकते थे इस प्रकार बर्बरीक “तीन बाणधारी” के नाम से प्रसिद्ध हुए।

 

महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक की भी युद्ध में सम्मिलित होने की प्रवल इच्छा जागृत हुई व उन्होंने अपनी माता को वचन दिया कि जो भी पक्ष निर्बल होगा मैं उसकी तरफ से युद्ध करूँगा और नीले घोड़े पर सवार होकर कुरुक्षेत्र की रणभूमि की तरफ चल दिए उस समय श्री कृष्ण ध्यान में लीन थे और उन्होंने अपने योग विद्या से जब यह देखा तो ब्राह्मण रूप धारण कर के बर्बरीक के समक्ष पहुँच कर उन्हें रोक कर उनसे कुरुक्षेत्र की रणभूमि की तरफ जाने का कारण पूछा व बर्बरीक द्वारा यह बताए जाने पर कि वह युद्ध में भाग लेने जा रहे हैं उनकी हँसी उड़ाई और कहा कि केवल यह तीन बाण के साथ आप युद्ध कैसे कर सकेंगे इस पर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि उनका एक बाण ही समस्त शत्रुओं का नाश करने के लिए काफी है और शत्रुओं का दमन करने के बाद उनका बाण वापस उनके तुणीर में आ जाएगा और यदि वह इन तीनों बाणों का एक साथ संघान किया तो तीनों बाणों की विध्वंसक शक्ति से समस्त ब्रह्मांड की नाश हो जाएगा, यह जानकर श्री कृष्ण जी ने उन्हें चुनौती दी कि इस पीपल वृक्ष के सभी सूखे पत्तों को भेद कर दिखाओ किंतु वही पत्ते भेदना है जो सूखे हों या उनमें छिद्र हो बर्बरीक ने श्री कृष्ण की चुनौती को स्वीकार किया और अपने एक ही बाण से उस पीपल वृक्ष के सभी सूखे व छिद्रित पत्तों को भेद दिया तत्पश्चात वह बाण श्री कृष्ण के चरणों के पास जाकर रुक गया तब बर्बरीक ने श्री कृष्ण जी से निवेदन किया कि एक पत्ता आपके पैर के नीचे बचा हुआ है अतः आप अपना पैर हटा लें अन्यथा यह बाण आपके पैर पर घात कर देगा क्योंकि दुर्गा जी से प्राप्त बरदान के अनुसार उनका कोई बाण लक्ष्य भेदे बिना वापस नही आता तब भी श्री कृष्ण जी के पैर न हटाने पर माँ दुर्गा प्रकट हुई व श्री कृष्ण जी से प्राथना की कि उनके वरदान की लाज रखने हेतु अपना पैर हटा लें तब श्री कृष्ण जी ने अपना पैर जैसे ही हटाया उस बाण ने उस बचे हुए पत्ते को भी भेद दिया तत्पश्चात श्री कृष्ण जी ने दुर्गा जी को यह वचन दिया कि उनके पैर का निचला हिस्सा आज से उनके शरीर का सबसे कमजोर भाग होगा तथा यही भाग उनके इस शरीर को त्याग कर परमधाम लौटने का कारण बनेगा।

 

 

 

श्री कृष्ण जी इस बात को भली-भांति जानते थे इस महायुद्ध में कौरवों की हार निश्चित है और यदि बर्बरीक को न रोका गया तो यह युद्ध अधर्म के विजय का कारण बन सकता है अतः ब्राह्मण रूपी श्रीं कृष्ण जी ने बर्बरीक से दान माँगने की इच्छा रखी तो बर्बरीक ने उन्हें दान देने का वचन देते हुए दान माँगने को कहा तब श्री कृष्ण जी ने दान रूप में बर्बरीक से उनका शीश माँगा इस पर बर्बरीक चिंतन में पड़ गए और श्री कृष्ण जी के उनकी चिंता का कारण पूछने पर उन्होंने श्री कृष्ण जी से कहा कि मेरी इस युद्ध के साक्षी बनने की प्रवल इच्छा थी इस पर श्री कृष्ण जी ब्राह्मण रूप को त्याग कर अपने वास्तविक रूप में आ गए और बर्बरीक को समझाते हुए कहा कि इस महायुद्ध में धर्म के विजय हेतु तुम्हारे शीश का दान अनिर्वाय है तथा श्री कृष्ण जी ने बर्बरीक को आशीर्वाद दिया कि उनका यह दान अनंत काल तक याद रखा जाएगा तथा उनकी इस महायुद्ध को देखने की इच्छा भी जरूर पूरी होगी इस आशीर्वाद को प्राप्त कर बर्बरीक अत्यंत प्रसन्न हुए व अपना शीश श्री कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया तत्पश्चात श्री कृष्ण जी ने उनके शीश को युद्धभूमि के समीप एक पर्वत पर स्थापित कर दिया जहाँ से बर्बरीक इस महाभारत युद्ध के प्रत्यक्ष साक्षी बनें।

 

महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद पांडवों में अहंकार की उत्पत्ति देखकर श्री कृष्ण जी मुस्कुराए और पांडवों को उस पर्वत पर ले गए जहाँ “महादानी” बर्बरीक का शीश स्थित था व उन्होंने बर्बरीक से निवेदन किया कि वह ही निर्णय लें कि पाँचों पांडव में से इस युद्ध के विजय का श्रेय किसको देना चाहिए इस पर बर्बरीक खूब हँसे और बोले कि कौन पांडव मैंने तो कुरुक्षेत्र में केवल श्री कृष्ण जी और उनके सुदर्शन चक्र को ही देखा श्री कृष्ण जी ने अकेले ही समस्त अधर्मियों का अंत किया अतः इस युद्ध में विजय श्री कृष्ण की ही हुई है इस बात से श्री कृष्ण जी प्रसन्न होकर बर्बरीक को आशीर्वाद देते हैं कि आज से तुम “श्याम” नाम से जाने जाओगे क्योंकि जो हारे का सहारा हो वही “श्याम” है अतः कलयुग में सभी लोग तुम्हारी मेरे नाम “श्याम” से पूजा करेंगे व जो भक्त तुम्हारी पूजा करेगा उसके सारे कष्ट दूर होंगे व उन्हें हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

 

 

 

 

बर्बरीक के खाटूश्याम नाम का रहस्य:-

 

बर्बरीक का शीश श्री कृष्ण जी द्वारा  “खाटू नगर” के पर्वत पर स्थित किया गया था जिस कारण से उन्हें खाटूश्याम के नाम से भी जाना जाता है।

 

क्यों की जाती है खाटूश्याम की पूजा:-

 

स्कंद पुराण के अनुसार:-

 

तत्सतथेती तं प्राह केशवो देवसंसदि।

शिरस्ते पूजयिषयन्ति देव्या: पूज्यो भविष्यसि।।

(स्कंद पुराण, कौ. ख. ६६.६५)

 

भावार्थ:- हे वीर! ठीक है तुम्हारे शीश की पूजा होगी और तुम देवरूप में पूजित होकर प्रिसिद्धि को प्राप्त करोगे।

 

खाटूश्याम जी का यह मंदिर राजस्थान राज्य के सीकर जिले में स्थित है तथा इनके प्रमुख देवता श्री कृष्ण जी और प्रमुख उत्सव फाल्गुन महोत्सव है इनके अन्य नाम खाटू नरेश, मोर्विनंदन व मोरछड़ी धारक है, मोर पंखों से बनी छड़ी को हमेशा अपने पास रखने के कारण से इनका नाम मोरछड़ी कहलाया।

 

जय श्री राम।

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सूर्य का मिथुन राशि से गोचर 14 जून 2020: जानें किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा—Astrology Sutras

सूर्य का मिथुन राशि से गोचर 14 जून 2020: जानें किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा—Astrology Sutras

 

 

सूर्य 14 जून 2020 की रात्रि के 11 बजकर  52 मिनट 58 सेकंड पर वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की वृषभ की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की मिथुन की सक्रांति लगेगी, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में 30 दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के मिथुन राशि  से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, पिता के स्वास्थ्य में समस्या संभव रहेगी, पराक्रम में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, लंबे समय से रुके कार्य पूर्ण होंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, व्यापारियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, यदि आप धन कहीं निवेश करना चाहते हैं तो उसके लिए यह अच्छा समय रहेगा, फालतू विवाद में न पड़ें, नेत्रों में जलन या दर्द की समस्या रह सकती है, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, माता का सहयोग मिलेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होकर पहले भाव से गोचर करेंगे अतः जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यात्राओं के योग बनेंगे, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, किसी अप्रिय घटना के घटित होने से मन अप्रसन्न रहेगा, पैसा निवेश करने या किसी को उधार देने से बचें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कुल मिलाकर सूर्य का यह गोचर आपके लिए मिला-जुला रहेगा।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः खर्चों में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कोई भी निर्णय सोच-समझ कर ही लें, व्यर्थ के विवाद में न पड़ें, सरकारी कर्मचारियों से फालतू विवाद में न पड़ें तथा यदि बिजली बिल या कोई कर बाकी हो तो उसे भर दें अन्यथा अचानक से कोई समस्या खड़ी हो सकती है, मित्रों व वरिष्ठ अधिकारियों से विवाद संभव रहेगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य प्रथम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त होगा, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं उन्हें कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के लिए सूर्य का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, संतान की उन्नति होगी।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे अतः कार्य के सिलसिले से यात्राओं के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र के लिए सूर्य का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा, लंबे समय से रुके कार्य पूर्ण होंगे, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, दामपत्य जीवन में मधुरता आएगी, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तनाव लेने से बचें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप परिश्रम से भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होगी फिर भी मन में एक असंतोष बना रहेगा, पिता व गुरु से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, छुपे शत्रुओं से सावधान रहें, मित्रों व परिवार के सदस्यों से विवाद संभव रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कोई भी निर्णय या कहीं भी पैसा लगाने से पहले अच्छे से सोच-विचार कर लें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, ज्वर व सर दर्द की शिकायत संभव रहेगी, खान-पान पर नियंत्रण रखें अन्यथा पाचन क्रिया में कुछ गड़बड़ी संभव हो सकती है, जीवनसाथी की वाणी में तेजी अनुभव होगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, यदि आप नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो कुछ समय और इंतजार कर लें अन्यथा अचानक से कोई समस्या आ सकती है।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप पेट व गुदा से संबंधित कोई परेशानी संभव रहेगी, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, क्रोध पर नियंत्रण रखें, कार्यक्षेत्र में कुछ तनावपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ सकता है अतः तनाव लेने से बचें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें कुल मिलाकर धनु राशि वालों को सूर्य के इस गोचर काल के दौरान सतर्क रहना चाहिए व शांत मन से सभी समस्याओं के सामाधान के बारे में विचार करना चाहिए उपाय के तौर पर सूर्य को नित्य जल देकर अदित्यहिर्दय स्तोत्र का पाठ करें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विपरीत परिस्थितियों से होते हुए सफलता प्राप्त होगी, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, त्वचा से संबंधित कोई परेशानी संभव है।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः शत्रुओं से सावधान रहें, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें, किसी को भी कर्ज देने या किसी से भी कर्ज लेने से बचें, किसी पर भी अधिक विश्वास करने से बचें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे/षष्ठ भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, कार्यक्षेत्र में अतिरिक्त कार्यभार रह सकता है, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें व स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

जय श्री राम।

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मृत्यु भाव में आयु कारक शनि का फल

मृत्यु भाव में आयु कारक शनि का फल भाग:-१

 

अष्टम भाव में स्थित शनि का फल
अष्टम भाव में स्थित शनि का फल

 

अष्टम भाव मृत्यु, पतन, गूढ़ विद्या, पैतृक संपत्ति, दुःख का भाव होता है ऐसी  स्थिति में शनि का अष्टम भाव में बैठना इन सभी को प्रभावित करता है शनि आयु का कारक होता है अतः अष्टम भाव में स्थित शनि आयु की वृद्धि करता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों की अप्रत्याशित मृत्यु नही होती कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की अचानक से मृत्यु नही होती है साथ ही अष्टम भाव में स्थित शनि मंद गति से उन्नति का सूचक होता है क्योंकि अष्टम में बैठा शनि हमारी कुंडली के तीन मुख्य भावों दशम भाव, द्वितीय भाव व पंचम भाव को देखता है जिस कारण से ऐसे व्यक्तियों की उन्नति मंद गति से होती है, ऐसे व्यक्तियों को पैतृक संपत्ति कुछ संघर्ष के उपरांत प्राप्त होती है तथा कुटुंब में मतभेद बना रहता है जिस कारण से ऐसे व्यक्तियों को तनावपूर्ण स्थितियों का भी सामना करना पड़ता है, अष्टम भाव में स्थित शनि आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ाता है तथा ऐसे व्यक्तियों को धर्म-आध्यात्म में अच्छी रुचि रहती है, अष्टम भाव में स्थित शनि की तीसरी दृष्टि दशम भाव पर पड़ती है जिस कारण से ऐसे व्यक्तियों को अत्यधिक परिश्रम कर के ही बड़ी सफलता प्राप्त होती है तथा ऐसे व्यक्ति संघर्ष करते हुए व विपरीत परिस्थितियों से होते हुए सफल होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति छोटे कार्य से शुरुवात कर के बड़ी उन्नति को प्राप्त करते हैं, अष्टम भाव में स्थित शनि की सप्तम दृष्टि दूसरे भाव अर्थात धन भाव पर पड़ती है जो यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति यदि शनि ग्रह से जुड़ा कार्य करते हैं तो शीघ्र सफलता की संभावना बढ़ जाती है परंतु यदि शनि अशुभ भावों का स्वामी हो तो ऐसे व्यक्तियों को शनि से जुड़े कार्य को करने से बचना चाहिए साथ ही ऐसे व्यक्तियों के कुटुंब/परिवार में तनावपूर्ण स्थितियाँ अकसर बनी रहती है, अष्टम भाव में स्थित शनि की दसवीं दृष्टि पंचम भाव में पड़ती है जो यह दर्शाता है कि विपरीत परिस्थितियों से हुए शिक्षा पूर्ण होगी तथा ऐसे व्यक्तियों के संतान को किसी प्रकार का कष्ट रहता है या संतान विलंब से या कुछ कठिनाइयों के साथ प्राप्य होती है, यहाँ एक बात और ध्यान देने योग्य यह है कि अष्टम भाव, पंचम भाव से चतुर्थ होता है अर्थात यह भाव विद्या के सुख का भाव है अतः मेरे मत व अनुभव के अनुसार ऐसे व्यक्तियों का कार्यक्षेत्र उनकी विद्या से अलग होता है कहने का आशय यह है कि अधिकतर कुंडलियों में यह देखने मे आया है कि ऐसे व्यक्ति जो विद्या अर्जित करते हैं वह काम नही कर पाते हैं, अष्टम भाव में स्थित शनि चर्म रोग का भी सूचक होता है।

 

अष्टम भाव और शनि

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेष लग्न की कुंडली में यदि अष्टम भाव में शनि स्थित हो तो व्यक्ति मेहनती होता है तथा आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह स्थिति शुभ होती है अर्थात कर्म और आर्थिक दृष्टिकोण से शनि की अष्टम भाव में स्थिति मेष लग्न वालों के लिए शुभ होती है किंतु ऐसे व्यक्तियों को संतान विलंब से प्राप्त होती है, यदि वृषभ लग्न की कुंडली में शनि अष्टम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को कार्य क्षेत्र में कुछ परिश्रम के साथ सफलता प्राप्ति के योग बनते हैं तथा पिता सुख में कुछ कमी रहती है किंतु कर्म और आर्थिक दृष्टिकोण से यह स्थिति शुभ होती है वृषभ लग्न के व्यक्तियों की कुंडली के अष्टम भाव में स्थित शनि कुछ विलंब के साथ संतान सुख देता है, यदि मिथुन लग्न की कुंडली में शनि अष्टम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को परिवार का पूर्ण सहयोग नही प्राप्त हो पाता तथा ऐसे व्यक्ति धन का सही तरह से इस्तेमाल नही कर पाते और कुछ परेशानी के साथ संतान सुख प्राप्त करते हैं किंतु आयु में वृद्धि होती है, यदि कर्क लग्न की कुंडली में शनि अष्टम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी का रुझान अपने परिवार की तरफ अधिक रहता है और यदि लग्नेश चंद्रमा पर भी शनि की दृष्टि हो तो यह स्थिति और अधिक खराब हो जाती है तथा ऐसे व्यक्तियों के कार्यक्षेत्र में व्यवधान अधिक आते हैं साथ ही धनार्जन में भी अनेक बाधाएं आती हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों की वाणी कुछ कटुता लिए होती है और संतान सुख में कुछ कमी अनुभव होती है किंतु यदि दसवें, दूसरे व पंचम भाव पर मंगल की भी दृष्टि हो तो यह स्थिति कुछ हद तक शुभप्रद होती है तथा इन समस्याओं में कुछ कमी आती है।

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसका दूसरा भाग जल्द ही प्रकाशित करूँगा।

 

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जून 2020: मीन लग्न व मीन राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जून 2020: मीन लग्न व मीन राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मीन लग्न
मीन लग्न

 

मीन लग्न व मीन राशि वालों के लिए जून 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य व शुक्र का तीसरे भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में अधिक प्रयास करना होगा व मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, छोटे भाई-बहन के स्वास्थ्य का ख्याल रखें व उनसे व्यर्थ विवाद न करें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, 14 जून को सूर्य गोचर बदलकर चतुर्थ भाव में चले जाएंगे जहाँ राहु व बुध पहले से ही गोचर कर रहे हैं अतः घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, यदि आप नया घर लेने का सोच रहे हैं तो सितंबर तक रुक जाएं क्योंकि चतुर्थ भाव से राहु का गोचर वास्तु दोष से निर्मित घर दिलवा सकता है, यदि माता जी को न्यूरो से संबंधित या हिर्दय से संबंधित कोई समस्या हो तो उनके स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, 18 जून को बुध वक्री हो जाएंगे तब थोड़ा विशेष सावधानी बरतें, घर मे किसी मेहमान का आगमन भी संभव रहेगा, 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण आपके लिए अधिक शुभ नही है अतः उस दिन कोई भी रिस्क लेने से बचें, माह के शुरुवात में केतु का दशम भाव से गोचर अचानक कोई बड़ी सफलता दिलवा सकता है, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः यात्राओं के योग बनेंगे, स्थान पदिवर्तन के योग बनेंगे, खर्चों में वृद्धि होगी, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, गर्म चीजों व बाहर के बने व्यंजनों से परहेज करें, 18 जून को मंगल गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे अतः क्रोध पर नियंत्रण रखें, यदि आपके या आपके माता के स्वास्थ्य में कोई समस्या हो तो होमियोपैथिक दवाओं की तरफ रुख करें अन्यथा सर्जरी के योग बनेंगे, भाग्य का सहयोग मिलेगा, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा।

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

माह के शुरुवात में गुरु व शनि का एकादश भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, जो लोग तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हुए है या शनि से जुड़ा कोई व्यापार करते हैं तो लाभ होगा, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए काफी अच्छा रहेगा, 30 जून को गुरु गोचर बदलकर पुनः आपके दशम भाव में आ जाएंगे अतः उस दिन थोड़ा सावधान रहें व कोई भी रिस्क लेने से बचें।

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

कुल मिलाकर मीन लग्न व मीन राशि वालों के लिए सामान्य रहेगा जिसमें विवाह के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, संतान की उन्नति होगी, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन व माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, बाहर के बने व्यंजन व गर्म चीजों के सेवन से बचें, क्रोध पर नियंत्रण रखें, लोगों की बातों में आने से बचें, तनाव लेने से बचें, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, माह की 2, 3, 5, 11, 12, 21, 25, 26, 27 व 30 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मीन लग्न  व मीन राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व श्री सूक्त का पाठ करें और नित्य गाय को कोई साग और गुड़ खिलाएं तो लाभ होगा।

 

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जून 2020: कुंभ लग्न व कुंभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जून 2020: कुंभ लग्न व कुंभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

 

कुंभ लग्न
कुंभ लग्न

 

कुंभ लग्न व कुंभ राशि वालों  के लिए जून 2020 अच्छा रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य व शुक्र  का चतुर्थ स्थान से गोचर रहेगा फलस्वरूप नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग बनेंगे, माता का सहयोग प्राप्त होगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, माता की वाणी में तेजी अनुभव होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, 14 जून  को सूर्य  गोचर बदलकर पंचम भाव में चले जाएंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, माह के शुरुवात में बुध व राहु का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप कड़े संघर्ष के उपरांत बड़ी सफलता प्राप्त होगी, विद्यार्थियों के लिए यह माह मिला-जुला रहेगा, प्रेमियों के बीच वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, 18 जून  को बुध  वक्री हो जाएंगे अतः थोड़ा सावधान रहें व बाहर के बने हुए सामान खाने से बचें, माह के शुरुवात में मंगल का लग्न से गोचर रहेगा फलस्वरूप बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आप लंबे समय से प्रमोशन या नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो यह माह आपके लिए अच्छा सिद्ध होगा, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, कर्म स्थान का स्वामी मंगल  लग्न से गोचर करेंगे अतः बेरोजगार लोगों को कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, क्रोध पर नियंत्रण रखें, 18 जून को मंगल  गोचर बदलकर आपके दूसरे भाव में चले जाएंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा वाणी के कारण कुछ दिक्कतें व तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, तामसिक चीजों के सेवन से बचें, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

 

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि व गुरु  का द्वादश भाव से गोचर नीचभंग राजयोग  बनाएगा और यह दोनों ही ग्रह वक्री अवस्था से गोचर करेंगे अतः छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, तनाव लेने से बचें, लोग पीठ-पीछे आपके खिलाफ षड्यंत्र रचेंगे अतः लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, यात्राओं के योग बनेंगे, खर्चों में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, 3 से 18 जून  के मध्य धन लाभ के योग बनेंगे व 19 से 30 जून  के मध्य बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, वाहन सुख प्राप्त हो सकता है, भाग्य का पूर्ण सहयोग 26 जून  तक नही प्राप्त हो सकेगा अतः अपना प्रयास जारी रखें, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, 21 से 24 जून  तक विशेष सावधानी बरतें व तनाव लेने से बचें तथा स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें।

 

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुल मिलाकर कुंभ लग्न व कुंभ राशि  वालों के लिए जून 2020 अच्छा रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें व बाहर के बने पदार्थ खाने से बचें, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, वाहन सूख प्राप्त होने के योग बनेंगे, माह की 1, 5, 9, 10, 21, 22, 23, 24, 28 व 29 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि कुंभ लग्न व कुंभ राशि  वाले व्यक्ति यदि नित्य शनि स्त्रोत्र का पाठ करें व शिवलिंग पर दुग्ध मिश्रित जल से अभिषेक कर चावल मिश्रित काला तिल “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते हुए अर्पित करें और अमावस्या के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर के बहते पानी में नारियल प्रवाहित करें तो लाभ होगा।

 

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