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11 मई 2020 शनि वक्री होकर करेंगे इन राशियों को प्रभावित जानें, किन राशि वालों पर वक्री शनि का क्या प्रभाव पड़ेगा— Astrology Sutras

11 मई 2020 शनि वक्री होकर करेंगे इन राशियों को प्रभावित जानें, किन राशि वालों पर वक्री शनि का क्या प्रभाव पड़ेगा— Astrology Sutras

 

शनि वक्री
शनि वक्री

 

11 मई 2020 को सोमवार के दिन प्रातः 9 बजकर 27 मिनट पर शनि वक्री होकर मकर राशि से गोचर करेंगे उस समय शनि का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण से गोचर रहेगा तथा शनि 142 दिन अर्थात 4 माह 18 दिन तक वक्री अवस्था में गोचर करने के बाद 29 सितंबर को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण के साथ पुनः मार्गी हो जाएंगे तो चलिए जानते हैं शनि के वक्री अवस्था में गोचर के दौरान किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

शनि वक्री
शनि वक्री

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ सिद्ध होगा जो लोग नौकरी परिवर्तन का लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं उनके लिए नौकरी परिवर्तन के अच्छे योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में व्यर्थ के विवाद से बचें, कार्य के सिलसिले से किसी छोटी यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना करेंगे, माता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद संभव रहेगा।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना कुछ तनाव वाला रह सकता है, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, परिवार व नौकरी के कारण से तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, आवेश में आकर कोई भी निर्णय लेने से बचें, यदि आपका भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है तो यह समय थोड़ा सतर्क रहें अन्यथा जेल यात्रा भी करनी पड़ सकती है, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय अच्छा सिद्ध होगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना ज्यादा शुभ नही रहेगा स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, दामपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह में कुछ विघ्न आ सकते हैं, जिनका विवाह हो गया है उनका ससुराल पक्ष के लोगों से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, जोड़ों, कमर व पैर में दर्द की शिकायत संभव रहेगी वाहन सावधानी से चलाएं।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा नही है अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, व्यापारियों के लिए भी यह अच्छा समय सिद्ध होगा, दामपत्य जीवन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा, जीवन मे। भागा-दौड़ी बनी रहेगी, भाग्य वृद्धि हेतु अत्यधिक प्रयास करना होगा, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, किसी संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा किसी पुराने रोग से छुटकारा मिल सकता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, अचानक यात्रा के योग बनेंगे, आवेश में आने से बचें, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा नही है अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान की उन्नति होगी व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए शनि का वक्री होना शुभ समाचार दे सकता है, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे थे वह अभी सितंबर तक रुक जाएं अन्यथा आय हेतु कड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद होंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा वाहन सुख प्राप्त होने के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, वाहन सावधानी से चलाएं, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, जटिल कार्यों को करने में रुचि बढ़ेगी, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना बेहद शुभ रहेगा पराक्रम में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में लोग आपके कार्य की सराहना करेंगे, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे, अत्यधिक परिश्रम करने पर एक बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, यात्राओं के योग बनेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होने के योग बनेंगे।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना मिला-जुला रहेगा दामपत्य जीवन में कलह-क्लेश हो सकते हैं, ससुराल पक्ष के लोगों से भी वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, आय वृद्धि हेतु अत्यधिक प्रयास करना होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, बड़े भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त होगा, पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे, जीवनसाथी से विचारों में भिन्नता रहेगी जिस कारण कुछ तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, कार्यक्षेत्र में उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, प्रमोशन के योग बन रहे हैं, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन के लिए प्रयास कर रहे हैं उनके लिए अच्छे योग बन रहे हैं, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना सामान्य रहेगा खर्चों में वृद्धि होगी, शत्रुओं से सावधान रहें, फिजूल की यात्राओं पर धन व्यय करने से बचें, वाहन सावधानी से चलाएं, कुटुंब से मतभेद संभव है, किसी को पैसा देने व लेने से बचें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा उच्च अधिकारियों से मुलाकात होगी व उनसे आपके संबंध मजबूत होंगे, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, विद्यार्थियों के लिए यह समय बहुत शुभ नही रहेगा, उदर में कोई रोग होने की संभावना रहेगी अतः खान-पान पर ध्यान दें, जटिल कार्यों को करने में रुचि बड़ेगी, वाहन सावधानी से चलाएं, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

 

विवाह भाव में विरक्ति कारक शनि
विवाह भाव में विरक्ति कारक शनि

 

सप्तम भाव से हम विवाह, जीवनसाथी, मित्र, साझेदारी, नौकरी का विचार करते हैं जहाँ बैठा हुआ विरक्ति का कारक शनि इन सभी को प्रभावित करता है, सप्तम भाव में शनि को दिग्बल भी प्राप्त होता है अतः सप्तम भाव में स्थित शनि दामपत्य जीवन के लिए बहुत शुभ नही कहा गया है ऐसे व्यक्तियों के दामपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है, ऐसे व्यक्ति अपने जीवनसाथी के प्रति जिम्मेदारियों को तो भली भांति समझते हैं किंतु शनि विरक्ति का कारक होने के कारण से किस प्रकार प्रेम किया जाए या किस कारण से प्रेम का इजहार किया जाए उनके लिए समझ पाना थोड़ा मुश्किल होता है ऐसे व्यक्ति जीवनसाथी की खुशी को अपना कर्तव्य समझकर उनकी खुशी के लिए सब करते तो हैं किंतु इनमें आंतरिक इच्छा की कमी रहती है सप्तम भाव में स्थित शनि व्यक्ति को मेहनती बनाता है तथा ऐसे व्यक्ति अपने लक्ष्य को पाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं जिस कारण से भी इनके दामपत्य जीवन में वो रस नही रहता जो कि सामान्यतः होना चाहिए, शनि मंद गति से चलने वाला ग्रह है जिस कारण से सप्तम भाव में स्थित शनि विवाह में देरी कराता है किंतु यदि दूसरे ग्रहों का सप्तम भाव से अच्छा संबंध बन रहा हो तो विवाह जल्दी होता है, मेरे अनुभव के अनुसार सप्तम भाव में स्थित शनि तलाक नही होने देता किंतु यदि अन्य ग्रहों से तलाक होने के योग बनते हैं तो बहुत मुश्किल से तलाक हो पाता है, सप्तम भाव में स्थित शनि सीमित संख्या में मित्रों का होना भी दर्शाता है कहने का आशय यह है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि सप्तम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के मित्र कम होते हैं अर्थात सीमित होते हैं, ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा अपनी जिम्मेदारियों को निभाना जानते हैं और उन्हें रिश्तों को संजो कर रखना भी आता है।

 

विशेष:-

 

बहुत से लोगों का मानना रहता है कि सप्तम भाव में स्थित शनि हो तो विवाह नही होता किंतु मेरे मत व अनुभव के अनुसार सप्तम भाव में बैठा शनि विवाह में देरी करवाता है किंतु विवाह अवश्य ही होता है।

 

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल
सप्तम भाव में स्थित शनि का फल

 

सप्तम भाव में स्थित शनि तीसरी दृष्टि से नवम भाव में रहेगी जो कि यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों की धर्म-आध्यात्म में अच्छी रुचि रहती है साथ ही ऐसे व्यक्ति जीवन की शुरुवात में कुछ संघर्ष करते हुए जीवन के उत्तरार्ध में अच्छा जीवन जीते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों को भाग्योदय हेतु कड़ा संघर्ष करना पड़ता है, शनि की सप्तम दृष्टि लग्न पर पड़ेगी जो कि यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति अधिकतर अकेले रहना पसंद करते हैं व कम बोलते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचते हैं तथा इनके मित्र भी सीमित संख्या में होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति कर्म को भाग्य से अधिक तवज्जो देते हैं, शनि की दशम दृष्टि चतुर्थ भाव पर पड़ेगी जो कि यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति घर से बाहर रहना अधिक पसंद करते हैं तथा इनका अधिकतर समय कार्यस्थल पर ही बीतता है ऐसे व्यक्तियों के घर के वातावरण में गर्म माहौल रहता है।

 

इसका दूसरा भाग जल्द ही प्रकाशित करूँगा जिसमें शनि के विभिन्न स्थितियों में सप्तम भाव पर स्थित होने के फल बतायूँगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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रोग भाव में स्थित शनि का फल

रोग भाव में स्थित शनि का फल

 

षष्ठ भाव में स्थित शनि का फल
षष्ठ भाव में स्थित शनि का फल

 

कुंडली के छठे भाव से हम रोग, शत्रु, ऋण, संघर्ष, मामा का विचार करते हैं जहाँ बैठा शनि इन सभी को प्रवाभित करता है ग्रंथकारों के अनुसार यदि शनि छठे भाव में स्थित हो तो शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, अचानक धन प्राप्त होने के योग बनते हैं, छठे भाव में स्थित शनि दामपत्य जीवन के लिए भी अच्छा होता है कुल मिलाकर लगभग सभी ग्रंथकारों ने छठे भाव में शनि को शुभ बताया है, मानसागर के अनुसार यदि नीच राशि का शनि छठे भाव में स्थित हो तो वह उसके कुल के लिए अच्छा नही होता अर्थात ऐसे व्यक्तियों का कुल सीमित रह जाता है, मेरे अनुभव के अनुसार यदि शनि छठे भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को कोई ऐसी बीमारी अवश्य रहती है जो उनके वंश में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हो जैसे रक्त जनित कोई विकार, डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर आदि-आदि, यदि शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवन के शुरुवात में काफी उतार-चढ़ाव रहता है तथा अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्त होती है और जीवन के उत्तरार्ध में ऐसे व्यक्तियों के पास अच्छा धन रहता है, छठे भाव में स्थित शनि की तीसरी दृष्टि अष्टम भाव में होती है आयुष्य कारक ग्रह शनि की आयु भाव में दृष्टि आयु की वृद्धि करती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति दीर्घायु होते है किंतु यदि शनि अष्टम भाव में मेष, वृश्चिक, कर्क, सिंह राशि को देखते हों तो आयु सुख में कमी रहती है, छठे भाव में स्थित शनि की सप्तम दृष्टि द्वादश भाव में होती है द्वादश भाव विदेश यात्रा का भाव होता है जहाँ शनि की दृष्टि विदेश यात्रा के योग बनाती है, ऐसे व्यक्ति धन कम खर्च करते हैं अर्थात ऐसे व्यक्ति कंजूस होते हैं कहने का आशय यह है कि द्वादश भाव में शनि खर्चों/व्यय में कमी करता है किंतु यही शनि यदि द्वादश भाव या छठे भाव का स्वामी होकर छठे भाव में बैठा हो तो ऐसा व्यक्ति परिवार, शत्रुओं, यात्राओं, दवाईयों पर धन व्यय कराता है, छठे भाव में स्थित शनि की दसवीं दृष्टि तीसरे भाव में पड़ती है जो यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति पराक्रमी होते हैं व उन्नति प्राप्त करने हेतु निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं और खुद की मेहनत से भाग्य की वृद्धि व उन्नति को प्राप्त करते हैं।

 

Saturn in sixth house
Saturn in sixth house

 

यदि उच्च राशि का शनि छठे भाव में हो जो कि वृषभ लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्तियों को भाग्योदय हेतु कड़ा संघर्ष करना पड़ता है तथा ऐसे व्यक्तियों के प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की संभावना और अधिक हो जाती है साथ ही ऐसे व्यक्ति शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं ऋषि कश्यप के अनुसार यदि उच्च राशि का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के शत्रु अधिक होते हैं, यदि उच्च नवांश का शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति विरोधियों पर विजय प्राप्त करते हैं।

 

यदि शुभ वर्ग का शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति विनम्र स्वभाव वाले होते हैं तथा यदि यही शनि लग्नेश को देखे तो ऐसे व्यक्तियों का स्वभाव अति विनम्र होता है, यदि पाप वर्ग का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की कृषि कर्म में रुचि होती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति भूमि के नीचे से उत्पन्न होने वाली चीजों जैसे कृषि, तेल, खनिज से जुड़े कार्यों में अधिक रुचि रखते हैं साथ ही बिजली, लौह, वाहन से जुड़ा कार्य भी करते हैं।

 

यदि नीच राशि का शनि छठे भाव में जो कि वृश्चिक लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्तियों की परिवार के सदस्यों से बहुत कम बनती है ऋषि कश्यप के अनुसार ऐसे व्यक्ति खल स्वभाव के होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति नकारात्मक बातों को पहले सोचते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों में बदले की भावना भी रहती है, यदि नीच नवांश का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति क्रूर स्वभाव के होते हैं तथा इनकी सबके साथ नही बनती है।

 

रोग भाव में स्थित शनि का फल
रोग भाव में स्थित शनि का फल

 

यदि मित्र राशि का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति वर्णसंकर होते हैं अब प्रश्न यह उठता है कि वर्णसंकर क्या होता है, जब दो अलग-अलग कुल या जाति के व्यक्ति विवाह करते हैं तो उनसे जो संतान उत्पन्न होती है उसे वर्णसंकर कहा जाता है आज के समय में यह काफी प्रचलित भी है क्योंकि आज के समय में यह देखने में आता है कि एक वर्ण का व्यक्ति दूसरे वर्ण के व्यक्ति से प्रेम विवाह करते हैं इसको इस तरह से भी समझ सकते हैं कि जब दो अलग कम्युनिटी के लोग विवाह करते हैं तो उनकी संतान वर्णसंकर होती है, यदि मित्र नवांश का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति प्रायः व्यापारी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की व्यापार में अधिक रुचि होती है और यदि ऐसे व्यक्ति नौकर भी करते हैं तो उनका कार्य सेल्स व मार्केटिंग से जुड़ा होता है।

 

यदि वर्गोत्तम शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति धार्मिक स्वभाव वाले होते हैं कहने का आशय यह है कि इनकी धर्म-कर्म में अच्छी रुचि होती है तथा ऐसे व्यक्ति धर्म से जुड़े कार्य करना अधिक पसंद करते हैं, यदि शत्रु नवांश का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान कठोर स्वभाव वाली होती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की पहली संतान की वाणी कटु होती है।

 

यदि स्वराशि शनि छठे भाव में हो जो कि सिंह लग्न व कन्या लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसा व्यक्ति हास्य विनोद करने वाला तथा अभिनेता होता है तथा यह संभावना कन्या लग्न की कुंडली में अधिक होती है, यदि सिंह लग्न की कुंडली में शनि छठे भाव में स्वराशि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के दामपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है तथा इन्हें कोई न कोई रोग प्रायः लगा ही रहता है साथ ही यदि सिंह लग्न की कुंडली में स्वराशि शनि पीड़ित हो तो व्यक्ति के रोगी होने की संभावना और अधिक हो जाती है वहीं यदि कन्या लग्न की कुंडली में स्वराशि शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षा में सफल होकर उन्नति को प्राप्त करते हैं कहने का आशय यह है कि इनके प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की संभावना अधिक हो जाती है तथा किसी प्रतियोगिता में सफल होकर उन्नति को प्राप्त करते हैं।

 

जय श्री राम।

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9 मई 2020 बुध का वृषभ राशि से गोचर जानें बुध के इस गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा

9 मई 2020 बुध का वृषभ राशि से गोचर जानें बुध के इस गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा

 

शुक्र का वृषभ राशि से गोचर

 

वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में ही रहते हैं, बुध 9 मई को प्रातः 9 बजकर 46 मिनट 58 सैकंड पर मेष राशि को छोड़कर मीन राशि में चले जाएंगे जहाँ 24 मई तक रहेंगे, बुध मिथुन व कन्या राशि के स्वामी होते हैं और कन्या राशि में ही उच्च के भी होते हैं मीन राशि बुध की नीच राशि होती है, बुध बुद्धि व विवेक के कारक होते हैं अतः बुध के वृषभ राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव पड़ेंगे तो चलिए जानते हैं बुध के इस गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तीसरे व छठे भाव के स्वामी होकर दूसरे से गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं से सावधान रहें, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, किसी पुरानी चिंता से मुक्ति मिलने के योग बनेंगे।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध दूसरे व पंचम भाव के स्वामी होकर लग्न भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, वाणी के प्रभाव द्वारा मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों के लिए बुध का यह गोचर अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध पहले व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर व्यय भाव से गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, माता से वैचारिक मतभेद संभव है, यात्राओं के योग बनेंगे, तनाव लेने से बचें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश व तीसरे भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, आय में वृद्धि होगी, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, अचानक यात्राओं के योग बनेंगे, प्रेमियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध दूसरे व एकादश भाव के स्वमी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप उन्नति के नए मार्ग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, माता की वाणी में कुछ तेजी अनुभव होगी, घर में अचानक तनाव का माहौल उत्पन्न हो सकता है अतः तनाव लेने से बचें, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, व्यापारियों के लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध पहले व दसवें घर के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी, उन्नति के नए मार्ग प्राप्त होंगे, लंबे समय से रुके कार्य पूर्ण होने के योग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, छोटे भाई-बहन की वाणी के कारण से मन में अशांति अनुभव होगी, छोटी यात्राएं होने के योग बनेंगे, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप विपरीत परिस्थितियों से होते हुए उन्नति के मार्ग खुलेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, धार्मिक यात्राएं हो सकती हैं, ससुराल पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, यदि आपका व्यवसाय पार्टनरशिप में है तो बुध का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, नए मित्र बनेंगे, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम व दशम भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे अतः जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद होंगे, तनाव लेने से बचें, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह गोचर अच्छा रहेगा, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, कार्यस्थल पर फालतू विवाद से बचें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए बुध छठे व नवम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किन्तु संतान पक्ष से किसी प्रकार का कष्ट भी संभव रहेगा, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, बड़े भाई-बहन से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम व अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, संतान का सहयोग मिलेगा, माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव रहेगी, ससुराल पक्ष से संबंध मधुर होंगे, पिता से वैचारिक मतभेद संभव है, कार्यक्षेत्र में सीनियर का सहयोग प्राप्त होगा।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ व सातवें भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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सूर्य: एक परिचय व सूर्य जनित रोग

सूर्य ग्रह: एक विस्तृत परिचय, स्वभाव और सूर्य जनित रोग (Sun Analysis in Hindi)

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। वराहमिहिर जी ने सूर्य को शहद के समान लाल रंग का बताया है। जब कड़ी धूप में सूर्य को देखें तो ऐसा ही प्रतीत होता है, और यदि सूक्ष्म दृष्टि से धूप को देखें तो यह कुछ पीले-लाल रंग का दिखाई देता है।

जिन व्यक्तियों का सूर्य प्रधान होता है, उनकी दृष्टि बहुत तेज होती है। उनकी आंखों के कोने में लाल-लाल रेखाएं अधिक होती हैं और उनका शरीर चौकोर होता है।

🔥 सूर्य का प्रभाव:

सूर्य रूखा और उष्ण (गर्म) है, अतः ऐसे व्यक्तियों का पित्त प्रकृति का होना स्वभाविक है। सूर्य प्रधान व्यक्ति के शरीर पर केश/बाल बहुत कम होते हैं।

(विशेष: यदि सूर्य स्त्री राशि में हो तो केश नहीं होते, परंतु यदि सूर्य पुरुष राशि में हो तो केश होते हैं।)

सूर्य ग्रह के कारक और स्वरूप

सूर्य तो पूर्ण ब्रह्म है, अतः इसका निवास स्थान मंदिर व देवगृह ही होता है।

  • धातु: तांबा (Copper)
  • ऋतु: ग्रीष्म ऋतु का स्वामी
  • दिशा: पूर्व दिशा (East)
  • वर्ण: क्षत्रिय वर्ण
  • गुण: सत्वगुणी (विशेष: सूर्य पाप फल भी देता है, अतः इसे रजोगुणी भी मानना चाहिए।)

मंत्रेश्वर महाराज जी के अनुसार: सूर्य पित्त प्रधान है और यह अस्थियों (हड्डियों) से बलवान है। इसकी भुजाएं लंबी-मोटी हैं तथा इसका देह चौकोर होता है। इसके वस्त्र लाल होते हैं।

💎 सूर्य का शुभ फल कब मिलेगा?

आपकी कुंडली में सूर्य की दशा शुरू होते समय सूर्य का दशा वाहन क्या था? अभी दशा वाहन केल्क्युलेटर से 2 मिनट में जानकारी प्राप्त करें।

विस्तृत जानकारी: [दशा वाहन कैलकुलेटर…अभी चेक करें।]

कुंडली में सूर्य कब बली होता है? (Strength of Sun)

ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य निम्नलिखित अवस्थाओं में अत्यंत बलवान होता है:

  • उच्च राशि: मेष (Aries)
  • स्वराशि: सिंह (Leo)
  • वार: रविवार (Sunday)
  • समय: दिन के मध्य भाग अर्थात दोपहर में।
  • अवस्था: राशि में प्रवेश करते समय (एक राशि से दूसरी राशि में जाते समय)।
  • स्थिति: मित्र ग्रहों के अंशों में और कुंडली के दशम भाव में (दिग्बली)।
  • अयन: जब सूर्य उत्तरायण हो। (नोट: कुछ विद्वानों के अनुसार सूर्य दक्षिणायन में भी बली होते हैं।)
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संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग २

संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग २

 

पंचम भाव में स्थित शनि का फल
पंचम भाव में स्थित शनि का फल

 

भाग १ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग १

 

 

यदि पंचम भाव में उच्च राशि का शनि स्थित हो जो कि मिथुन लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति की संतान ईर्ष्यालु होती है अर्थात दूसरों से वैर करने वाली होती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों की कुंडली में उच्च शिक्षा प्राप्ति के योग होते हैं व आय की शुरुवात करने के लिए अर्थात नौकरी पाने हेतु कुछ संघर्ष करना पड़ता है, यदि उच्च नवांश का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान अधिकतर बीमार रहती है।

 

यदि पंचम भाव में शुभ वर्ग का शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान कृतघ्न होती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति अपने संतान के लिए सब कुछ त्याग कर देते हैं अर्थात सब चीजों का बलिदान कर देते हैं किंतु उनको संतान से वो सम्मान नही मिल पाता है, यदि पाप वर्ग का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान अकसर किसी न किसी रोग से पीड़ित रहती है।

 

पंचम भाव में स्थित शनि
पंचम भाव में स्थित शनि

 

यदि नीच राशि का शनि पंचम भाव में हो जो कि धनु लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति अपनी बौद्धिक क्षमता से अच्छा धनार्जन करते है साथ ही एक बार जीवन में धन वृद्धि हेतु कड़ा संघर्ष करते हैं तथा ऐसे व्यक्ति कहानियाँ बहुत बनाते हैं अर्थात बातें बनाना व बातों को दूसरों के समक्ष कुछ इस प्रकार रखते है कि वह एक कहानी की तरह होती है इसके अतिरिक्त पंचम भाव में नीच राशि का शनि संतान सुख में कमी का भी सूचक होता है, यदि नीच नवांश का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान जल्द ही प्रौढ़ हो जाती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की संतान जल्द ही गंभीर स्वभाव की हो जाती है और उन पर कम उम्र में ही जिम्मेदारियां आ जाती है।

 

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संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग १

 

 

यदि मित्र राशि का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान मेहनती होती है तथा अपने बाहुबल से उन्नति को प्राप्त करती है, यदि मित्र नवांश का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान पशु पालने की शौंकीन होती है अर्थात ऐसे व्यक्तियों की संतान को पालतू पशु से अत्यधिक प्रेम रहता है।

 

यदि वर्गोत्तम स्थिति का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों को संतान सुख अवश्य ही प्राप्त होता है किंतु पौत्र प्राप्ति में बाधा आती है।

 

यदि शत्रु राशि का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के कम पुत्र होते हैं या पुत्र सुख में कमी होती है इस स्थिति में अधिकतर ऐसे व्यक्तियों को कन्या संतति की प्राप्ति होती है।

 

यदि स्वराशि शनि पंचम भाव में स्थित हो जो कि कन्या व तुला लग्न की कुंडली में ही संभव है यदि कन्या लग्न की कुंडली में पंचम भाव में शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा के समय कोई न कोई संघर्ष अवश्य रहता है जो कि समय के साथ कम होता जाता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को प्रतियोगी परीक्षाओं से लाभ मिलता है व उन परीक्षाओं को निकालकर जीवन में सफल होते हैं, यदि तुला लग्न की कुंडली में शनि पंचम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों की बौद्धिक क्षमता बहुत अच्छी होती है किंतु इनका मन स्थिर नही रहता साथ ही इन्हें नींद की भी किसी न किसी प्रकार की समस्या रहती है अतः इन्हें योग व ध्यान अवश्य करना चाहिए व पूरी नींद लेनी चाहिए साथ ही ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्तियों को पुत्र अवश्य ही प्राप्त होते हैं या ऐसे व्यक्तियों को ऐसी संतान प्राप्त होती है जो अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से समझ कर उनका निर्वहन करती है।

भाग १ पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं

संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग १

 

 

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मई 2020: मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मकर लग्न गोचरफल
मकर लग्न 

 

मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः जो लोग लंबे समय से वाहन खरीदना चाहते हैं उनके लिए वाहन प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनाव का माहौल रहा सकता है, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, कार्यस्थल पर आपके ऊपर कार्य का अतिरिक्त बोझ रहने के कारण से थकान अनुभव होगी, आलस्य का त्याग करें, किसी उच्च अधिकारी या सरकारी कर्मचारी से व्यर्थ के विवाद से बचें 14 मई को सूर्य गोचर बदलकर पंचम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, गर्म चीजों के सेवन से बचें अन्यथा उदर संबंधित कोई परेशानी रह सकती है, संतान का स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा सा हो सकता है, माह के शुरुवात में बुध का गोचर चतुर्थ भाव में रहेगा फलस्वरूप मामा पक्ष के कारण से घर में कुछ तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है, मन में एक असंतोष रह सकता है, माता का सहयोग प्राप्त होगा 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके पंचम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए मार्ग बनाने में सफल होंगे, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें चूँकि शुक्र के स्वराशि गोचर व गुरु की पंचम भाव में दृष्टि के कारण से ज्यादा दिक्कत की बात नही है फिर भी स्वास्थ्य को लेकर थोड़ा सचेत रहें, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु उनके स्वास्थ्य में कुछ समस्या भी रह सकती है, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों के लिए अच्छा समय रहेगा 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके छठे भाव में चलें जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, मामा पक्ष से संबंध मधुर होंगे, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा।

 

मकर राशिफल
मकर राशि

 

माह के शुरुवात में शुक्र का गोचर आपके पंचम भाव से रहेगा शुक्र आपकी कुंडली में राजयोगकारक होकर पंचम भाव से स्वराशि गोचर करेंगे फलस्वरूप आपको अपने किसी करीबी मित्र से प्रेम हो सकता है, प्रेम संबंधों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, आय में वृद्धि होगी, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी व जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर होंगे, जो लोग कला, सौंदर्य से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा, शुक्र का यह गोचर लगभग 4 माह तक आपके पंचम भाव से रहेगा फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर आपके प्रेम संबंधों व जीवनसाथी के साथ आपके संबंधों में मधुरता लाएगा व उनसे लंबे समय से चले आ रहे विवाद खत्म होंगे, माह के शुरुवात में राहु का छठे भाव से गोचर रहेगा अतः छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें व व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, सर दर्द, नेत्रों में तकलीफ की भी समस्या रह सकती है, माह के शुरुवात में शनि लग्न से स्वराशि गोचर कर शश नामक योग बनाएंगे साथ ही गुरु की शनि से युति नीचभंग राजयोग का निर्माण करेंगी और लग्न से ही मंगल का अपनी उच्च राशि मकर से गोचर रूचक नामक योग बनाएगा फलस्वरूप पिछले काफी समय से चली आ रही समस्याओं से राहत मिलेगी, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके लिए विवाह के योग बनेंगे, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे विवाह करना चाहते हैं तो प्रेम विवाह के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, बेरोजगार लोगों को नौकरी प्राप्त होगी, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, आपके कार्य से सीनियर खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, घर में कोई शुभ कार्य भी हो सकता है 9 मई को मंगल गोचर बदलकर आपके दूसरे भाव में आ जाएंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, गर्म चीजों के सेवन से बचें व वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी की वाणी थोड़ी तेजी अनुभव होगी, भाग्य में वृद्धि होगी।

 

मकर राशिफल
मकर राशि

 

कुल मिलाकर मकर लग्न व मकर राशि वालों के लिए मई 2020 अच्छा रहेगा जिसमें किसी नए कार्य की शुरुवात करने के लिए मन में विचार आ सकते हैं, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, माता का सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, माह की 2, 3, 8, 10, 11, 17, 19, 22, 25, 26, 29 व 30 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मकर लग्न व मकर राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य मधुराष्टकं का पाठ करें व मंगलवार और शनिवार के दिन सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

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मई 2020: तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

तुला लग्न
तुला लग्न कुंडली

 

तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए मई 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का सप्तम स्थान से गोचर रहेगा फलस्वरूप नौकरी पेशा लोगों के लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी के स्वभाव में कुछ तेजी देखने को मिलेगी, यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, यदि आप नए कार्य की शुरुवात करते हैं तो जीवनसाथी को पार्टनर बना कर करें लाभ होगा 14 मई को सूर्य गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें व गर्म चीजों से परहेज करें, ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में तेजी रहेगी जिसके कारण ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, अष्टम भाव जीवनसाथी की वाणी को भी दर्शाता है क्योंकि सप्तम भाव जीवनसाथी का व अष्टम भाव उसकी वाणी का भाव है अतः जीवनसाथी की वाणी कुछ गर्माहट लिए हुए होगी जिस कारण से जीवनसाथी के साथ भी विवाद संभव रहेगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तनाव लेने से बचें, माह के शुरुवात में बुध का गोचर सप्तम भाव से रहेगा जिस कारण से कार्य के सिलसिले से यात्राओं के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के योग बनेंगे, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, संतान को कुछ कष्ट संभव रहेगा 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, तनाव लेने से बचें, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके भाग्य स्थान में जाएंगे फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा।

 

तुला राशिफल
तुला राशि

 

माह के शुरुवात में शुक्र का अष्टम भाव से गोचर रहेगा अतः वाहन सावधानी से चलाएं, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, लोग आपके पीठ-पीछे षड्यंत्र रचेंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें क्योंकि इस माह आपके हार्मोन्स काफी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर सकते हैं, जिन्हें हार्मोन्स से जुड़ी कोई समस्या है वह भी अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, माह के शुरुवात में मंगल गुरु व शनि का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप आप घर परिवर्तन या घर में साज-सज्जा का कार्य करवा सकते हैं, भूमि सुख प्राप्त होने के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा किन्तु फिर भी उनके पैरों विशेषतः घुटनो व जोड़ों या कमर में दर्द की शिकायत रह सकती है, कार्यस्थल पर सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे 4 मई को मंगल गोचर बदलकर आपके पंचम भाव मे आ जाएंगे फलस्वरूप संतान का सहयोग प्राप्त होगा व संतान की उन्नति होगी, यदि आपके कोई बड़े भाई हैं तो उनकी भी उन्नति होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए मार्ग बनाने का प्रयास करेंगे, पेट में कोई समस्या संभव रहेगी, वाहन सावधानी से चलाएं।

 

तुला राशि
तुला राशि

 

कुल मिलाकर तुला लग्न व तुला राशि वालों के मई 2020 मिला-जुला रहेगा जिसमें मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, यदि आपका पार्टनरशिप से जुड़ा कार्य है तो उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, यदि आप नए कार्य की शुरुवात करना चाहते हैं तो जीवनसाथी को पार्टनर बनाकर करें लाभ होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, वाहन सावधानी से चलाएं, 7 मई से 24 मई तक लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें तथा यदि संभव हो तो सिर्फ अपने कार्य पर ही ध्यान दें, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, माह की 6, 8, 12, 13, 15, 17, 19, 20, 21, 22, 23 व 24 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि तुला लग्न व तुला राशि वाले व्यक्ति यदि दुर्गा सप्तशती का शुक्रवार से आरंभ कर नित्य पाठ करें व नित्य सूर्य को जल दें तो लाभ होगा।

 

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संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग १

संतान भाव में नपुंसक ग्रह शनि भाग १

 

पंचम भाव में स्थित शनि का फल
पंचम भाव में स्थित शनि का फल

 

जन्म कुंडली के पंचम भाव से हम बुद्धि, विद्या, संतान, उदर, बौद्धिक क्षमता, पिछले जन्म का विचार करते हैं अतः इन भावों में स्थित शनि का स्थित होना इन सभी को प्रभावित करता है मेरे अनुभव में यह भी आया है कि यदि शनि पंचम भाव में अकेला बैठा हो तो ऐसे व्यक्तियों को उदर अर्थात पेट से जुड़ी कोई न कोई समस्या अवश्य रहती है अतः इन लोगों को तामसिक चीजों से परहेज करने की सलाह दी जाती है, बहुत से ग्रंथकारों का मत है कि पंचम भाव में शनि स्थित हो तो वह शिक्षा में किसी न किसी प्रकार के व्यवधान को भी दर्शाता है किंतु विभिन्न राशियों या विभिन्न स्थितियों में शनि के पंचम भाव में स्थित होने पर इसके फल विभिन्न होते हैं मेरे अनुभव में आया है कि यदि शनि पंचम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों की जटिल कार्यों को करने में अच्छी रुचि होती है मतलब ऐसे व्यक्ति उस काम को करना अधिक पसंद करते हैं जिसमें शारीरिक की जगह मानसिक मेहनत अधिक हो अर्थात ऐसे सभी कार्य जो तकनीकी क्षेत्र से जुड़े हुए होते हैं, यदि वायु तत्व राशि जैसे मिथुन, तुला व कुंभ राशि का शनि पंचम भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति पढ़ाई में बहुत अच्छे होते हैं, पंचम भाव में स्थित शनि संतान संबंधित परेशानियों का सूचक होता है ऐसे व्यक्तियों को संतान कुछ विलंब से होती है।

 

पंचम भाव में स्थित शनि

 

पंचम भाव में बैठे शनि की तीसरी दृष्टि सप्तम भाव में होती है सप्तम भाव विवाह, जीवनसाथी, रोमांस, मित्रता, नौकरी, पार्टनरशिप का भाव होता है जहाँ शनि की दृष्टि इन सभी को प्रभावित करती है ऐसे व्यक्तियों का विवाह कुछ विलंब से होता है या शीघ्र विवाह होने की स्थिति में दामपत्य जीवन में आपसी ताल-मेल बैठाने में परेशानियाँ आती है, ऐसे व्यक्तियों के मित्र सीमित संख्या में होते है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के दामपत्य जीवन में रोमांस कम व गंभीरता अधिक देखी जाती है, ऐसे व्यक्तियों को जीवन के शुरुवात व 36-37 वर्ष की आयु में कड़ा संघर्ष करना पड़ता है व जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता प्राप्त होती है, पंचम भाव में स्थित शनि की सप्तम दृष्टि एकादश भाव व दसवीं दृष्टि दूसरे भाव में पड़ती है अर्थात धन से जुड़े दोनों भाव शनि के प्रभाव में रहते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों की आर्थिक उन्नति मंद गति अर्थात धीरे-धीरे होती है व ऐसे व्यक्ति यदि शनि से जुड़े कार्य जैसे लोहे, चमड़े, भूमिगत से जुड़े कार्य या हथियार, वाहन से जुड़े कार्य में अधिक सफल होते हैं, मेरे अनुभव में यह भी आया है कि पंचम भाव में बैठा शनि संकुचित मात्रा अर्थात टुकड़ों में धन देता है कहने का आशय यह है कि कभी इनके पास काफी पैसा आ जाता है तो कभी एकदम सूना सा पड़ जाता है अर्थात पंचम भाव का शनि धन संचय में समस्याएं देता है साथ ही पंचम भाव से हम बुद्धि व दूसरे भाव से वाणी का विचार करते है पंचम भाव में बैठा शनि इन दोनों ही भावों को प्रवाभित करता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों की वाणी थोड़ी कटु होती है क्योंकि शनि एक रूखा ग्रह है जिस कारण से आपके द्वारा बोली गयी बात नकारात्मकता लिए हुए होती है और उसको कहने का तरीका थोड़ा रूखा होता है।

 

अब बात करते हैं विभिन्न स्थितियों में शनि के पंचम भाव में बैठने का क्या फल होता है…..

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान में रखते हुए इसका दूसरा भाग जल्द ही लिखूँगा।

 

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