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लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल

 

यदि कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति भाग्यवान होता है तथा इन्हें प्रायः चतुष्पात अर्थात गाय, भैंस, बकरी आदि के माध्यम से सुख प्राप्त होता है कहने का आशय यह है कि दूसरे भाव में यदि सूर्य हो और व्यक्ति यदि खेती बाड़ी करता हो तो बैलों की जोड़ी का सुख मिलता है और यदि व्यक्ति दूध विक्रेता है तो उसके पास अनेक मात्रा में गाय, भैंस व बकरी होंगी व उनसे लाभ होगा आदि फल होता है, यदि सूर्य कुंडली के दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति का द्रव्य अच्छे कामों में व्यय होता है तथा स्त्री के निमित्त से अपने कुटुंब में भी कलह-क्लेश होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों के वह सभी कार्य जिन्हें वो द्रव्य का निमित्त करना चाहते हैं उसमें इनको प्रायः नुकसान ही होता है, दूसरे भाव में यदि सूर्य हो तो व्यक्ति दंभी, कलह सहने वाला, मित्र विरोधी, पुत्रवान, वाणी दोष, नौकर-चाकर से युक्त, मुख रोगी व धन हानि आदि फल प्राप्त होते हैं, ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा में अड़चनें आती है साथ ही ऐसे व्यक्ति हठी व चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि सूर्य द्वितीय भाव में हो तो मनुष्य विद्या, विनय और धन से हीन होता है तथा उसकी वाणी में भी कुछ दोष रहता है, मानसागरी के अनुसार यदि दूसरे भाव में सूर्य हो तो:-

 

धनगतदिननाथे पुत्रदारै: विहीन:।
कृशतनु रतिदीनोरक्तनेत्र: कुकेश:।।
भवति च धनयुक्त: लोह ताम्रेण सत्यं।
न भवति ग्रहमेधी मानवो दुःखभागी।।

 

अर्थात यदि सूर्य दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति को स्त्री सुख व पुत्र सुख नही मिलता है तथा इनका शरीर दुबला-पतला होता है और इन्हें रति सुख नही मिलता, ऐसे व्यक्तियों की आँखे लाल व केश बुरे होते हैं किंतु व्यक्ति धनवान होता है साथ ही लोहे और ताँबे से संपन्न होता है तथा ऐसे व्यक्ति गृहस्थी होकर भी किसी एक स्थान में घर बनाकर नही रहते अतएव दुःखी होते हैं।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि लग्न कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य बैठा हो तो व्यक्ति धनी होता है किंतु इनके धन की हानि भी प्रायः होती रहती है, साथ ही यदि दूसरे भाव में सूर्य वृषभ, कन्या या मकर राशि का हो तो व्यक्ति कभी धन का संचय नही कर पाता चाहे उसके लिए भी वो जितना भी यत्न कर ले और ऐसे व्यक्ति स्वतंत्र व्यापार करने के इच्छुक होते हैं तथा नौकरी पसंद नही करते हैं किंतु यदि धनेश बलवान हो अर्थात वक्री, अस्त, मंदगामी व अतिचारी न हो और किसी पाप ग्रह से संबंध न बनाता हो तो ही यह इच्छाएं व्यक्ति की पूर्ण होती है परंतु पिता और पुत्र के मध्य वैचारिक मतभेद बने रहते हैं, वकीलों और डॉक्टरों के लिए यह सूर्य शुभफलदाई होता है, यदि किसी ज्योतिषी के द्वितीय भासव में सूर्य हो तो उनके बताए अशुभ फल शीघ्र ही अनुभव में आते हैं किंतु शुभ फल अनुभव में बहुत ही विलंब से अनुभव में आते हैं प्रायः ज्योतिषी को अपयश ही मिलता है, यदि दूसरे भाव में मिथुन, तुला व कुंभ का सूर्य हो तो व्यक्ति अत्यंत धनी होता है किंतु लोगों की सहानुभूति से वंचित रहता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति धन व्यय के विषय में कृपण होते हैं अर्थात कंजूस होते हैं, दूसरे भाव में सूर्य यदि कर्क, वृश्चिक व मीन राशि का हो तो व्यक्ति अधिकारी या किसी उच्च पद पर कार्य करने वाला होता है तथा दूसरे भाव में सूर्य यदि मेष, सिंह और धनु राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति बहुत स्वार्थी होता है तथा अपने आपको बड़ा आदमी बनाने की अदम्य इच्छा रखता है किंतु कार्य से मन चुराता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों को कार्य करना कम ही पसंद आता है, इसके अतिरिक्त यदि सूर्य दूसरे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के नेत्र, हाथ व पैर प्रायः गर्म ही रहते हैं और इन्हें उत्तम भोजन करने में बड़ी रुचि होती है, कपड़ों को स्वच्छ रखने में इनका विशेष ध्यान जाता है तथा इनके वार्ता करने के तरीकों में बड़पन्न झलकता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव अनुसार यदि वृश्चिक, धनु, मकर या कुंभ लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य बैठा हो और धन स्थान का स्वामी वक्री हो या १२-४-६-८-१२ वें स्थान में हो तो यह महा दरिद्र योग होता है यह योग जिन व्यक्ति की कुंडली में होता है उन्हें अत्यंत गरीबी को भी झेलना पड़ता है तथा कई बार इन्हें भोजन के लिए भी तरसना पड़ता है, साथ ही यदि दूसरे भाव में सूर्य हो और उसे शनि न देखता हो तो व्यक्ति धनी होता है किंतु यदि शनि से दृष्ट हो तो धन सामान्य मात्रा एवं शनि से दृष्ट हो किंतु अन्य ग्रहों से नही तो व्यक्ति निर्धन होता है, साधारण रूप से ऐसे व्यक्तियों का धन चोरी होने के योग होते हैं, १७ वें व २५ वें वर्ष में धनहानि संभव होती है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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बुध का मिथुन राशि से गोचर 26 मई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

बुध का मिथुन राशि से गोचर 26 मई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

 

बुध का मिथुन राशि से गोचर
बुध का मिथुन राशि से गोचर

 

वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में ही रहते हैं, बुध २६ मई की प्रातः ०६ बजकर ४४ मिनट पर वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में चले जाएंगे जहाँ २४ जुलाई की दिन में १० बजकर २१ मिनट 58 सेकंड तक रहेंगे, बुध मिथुन व कन्या राशि के स्वामी होते हैं और कन्या राशि में ही उच्च के भी होते हैं मीन राशि बुध की नीच राशि होती है, बुध बुद्धि व विवेक के कारक होते हैं अतः बुध के कन्या राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव पड़ेंगे तो चलिए जानते हैं बुध के इस गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, शत्रुओं पर युक्ति व चतुराई के माध्यम से सफलता प्राप्त होगी, भाग्य की वृद्धि होगी, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, बहन-बुआ व मासी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव है।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय व पंचम भाव के स्वामी होकर द्वितीय से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए स्त्रोत बनेंगे, जो लोग बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर श्रेष्ठम फल देने वाला रहेगा, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा अवसर रहेगा, कोरोना के कारण से जिनकी नौकरी छूट गयी थी उन्हें पुनः किसी नौकरी का अवसर प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा तथा दोनो अपनी समझ का परिचय देते हुए एक-दूसरे के साथ आनन्दमयी जीवन व्यतीत करेंगे।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर लग्न से ही गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, अपनी युक्ति के बल पर आप कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर निर्मित करने में सफल होंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, अच्छा रहेगा, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, आकस्मिक धन लाभ के योग बनेंगे तथा आय में वृद्धि के पूर्ण योग प्राप्त होते हैं।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कर्क राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर मिला-जुला फल देने वाला होगा फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, यात्रा हो सकती है, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, आपके फोन में बुध के इस गोचरकाल के दौरान कुछ समस्या रह सकती है, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी या उनके कार्यक्षेत्र का कुछ विस्तार होगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध धनेश व लाभेश होकर लाभ स्थान से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उनको पुनः नए अवसर प्राप्त होंगे, जिन व्यक्तियों का कार्य बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध पहले व दशम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कन्या राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, बेरोजगारों तथा कोरोना के चलते जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी मिलने के पूर्ण योग बनते हैं, व्यापारियों के मुनाफे में वृद्धि होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों व जीवनसाथी के लिए बुध का यह गोचर क्षणिक विवाद के योग बना रहा है अतः एक-दूसरे को समझने का प्रयास करें व अपने प्रेमी और जीवनसाथी को कुछ समय दें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, नौकरी व व्यवसाय में उन्नति होगी।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए नवम व द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार तुला राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, धर्मिक यात्राओं के योग हैं या धर्म-कर्म आदि में धन व्यय होने के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रेमियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई होगा तथा उनके प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, दाम्पत्य जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव संभव रहेगा।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम व एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी किंतु स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहें, स्थान परिवर्तन के योग हैं, जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद शुभ रहने वाला होगा, प्रेमियों के लिहाज से बुध का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ प्रेम संबंधों में मधुरता लाने वाला होगा, विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम व दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार धनु राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार, नौकरी में उन्नति, मित्रों से लाभ, पिता का सहयोग व मन में प्रसन्नता का अनुभव आदि शुभ फल प्राप्त होंगे, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी के नए अवसर प्राप्त होंगे, आय में वृद्धि होगी, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, प्रेमियों के मध्य प्रेम में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देगा, अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए षष्ठ और नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मकर राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप भाग्य की शक्ति व चतुराई युक्त युति के द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, जिनको स्वास्थ्य की समस्या लम्बे समय से चली आ रही थी उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा आपके गुप्त शत्रु आप पर हावी होने का पूर्ण प्रयास करेंगे, प्रेमियों के मध्य तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर उन्नतिकारक होगा, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, प्रेमियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, विद्यार्थियों को कुछ नया सीखने को मिलेगा जिसमें वो रुचि भी लेंगे, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है, किसी अप्रिय घटना घटित होने की संभावना रहेगी।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मीन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, नौकरी में उन्नति होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से प्रस्ताव आ सकता है, जो लोग प्रेम विवाह करना चाहते हैं उनके लिए भी यह गोचर शुभ रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी, घर में किसी महिला मेहमान के आने की संभावना रहेगी।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

 

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लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल

 

सूर्य यदि प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो ऐसे व्यक्ति प्रायः रूप में विचित्र, नेत्रों की समस्या से युक्त, कंठ या गुदा में ब्रण अथवा तिल युक्त, शूरवीर, क्षमाशील, घृणा रहित, कुशाग्र बुद्धि, उदार प्रकृति, साहसी व आत्मसम्मानी होते हैं परंतु ऐसे व्यक्ति निर्दयी, क्रोधी और क्रोध में कुछ भी कर गुजरने वाले होते हैं और उनको वात व पित्त के प्रकोप से पीड़ा रहती है तथा ऐसे व्यक्ति आकार में लंबे, गर्म शरीर वाले और थोड़े केश वाले होते हैं तथा ऐसे व्यक्तियों को अपनी बाल्यावस्था में अनेक पीड़ायें भोगनी पड़ती है और सर पर चोटादि लगने की संभावना रहती है, १५ वें वर्ष में अंग पीड़ा और वर्ष की आयु में ज्वर पीड़ा होती है यदि लग्न में सूर्य के साथ अन्य पापग्रह भी हों या सूर्य लग्न में नीच राशि का बैठा हो जो कि तुला लग्न की कुंडली में ही संभव है या शत्रु राशि के लग्न में स्थित हो तो सूर्य के अनिष्ट फल होते हैं।

 

लग्न में मेष राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति नेत्र रोगी परंतु धनवान और कीर्तिमान होता है तथा यदि सूर्य को मित्र बली ग्रह देखते हों तो व्यक्ति विद्वान भी होता है, लग्न में तुला राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति निर्धन तथा मानरहित होता है किंतु यदि सूर्य शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो अशुभता में कमी आती है, मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में यहाँ तक कहा है कि यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में तुला राशि का सूर्य हो तो मनुष्य दरिद्र ही रहता है और उसके पुत्र नष्ट हो जाते हैं, यदि लग्न में सूर्य मकर या सिंह राशि हो तो व्यक्ति रतौंधी एवं हिर्दय रोग से पीड़ित होता है किंतु यदि सिंह का नवमांश भी हो और वहाँ भी प्रथम भाव अर्थात लग्न में ही सूर्य बैठे तो व्यक्ति किसी स्थान का मालिक होता है तथा शुभ ग्रह देखते हैं तो निरोगी होता है, यदि कर्क राशि का सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो व्यक्ति रोगी किंतु ज्ञानी होता है, यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति कार्य करने में आलसी, क्रोधी, प्रचंड, लंबा, मानी अर्थात घमंडी, शूर, क्रूर, जल्दी क्षमा न करने वाला होता है और ऐसे व्यक्तियों के नेत्र कुछ रूखे होते हैं, मानसागरी के अनुसार:-

 

“सवितरि तनुसंस्थे शैशव व्याधियुक्तो नयनगदसुदुःखी नीचसेवानुरक्त:।

न भवति गृह मेधी दैवयुक्तो मनुष्यो भ्रमति विकलमूर्ति: पुत्र पौत्रे: विहीन:।।”

 

अर्थात यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति बाल्यावस्था में रोगी होता है तथा उसके नेत्रों में विकार रहता है साथ ही ऐसे व्यक्ति नीच लोगों की नौकरी करते हैं और एक जगह घर बसाकर नही रह पाते और हमेशा घूमते-फिरते रहते हैं तथा इन्हें पुत्र व पौत्र का सुख नही मिल पाता है तो वहीं वैधनाथ जी का मत है कि यदि सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो उसकी संतति कम होती है और ऐसे व्यक्ति जन्म से ही सुखी, निर्दय, कम खाने वाले, चक्षुरोगी, सुशील, सुहावनी आँखों वाले, सब कामों में यशस्वी तथा बलवान होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो व्यक्ति युद्ध में आगे होकर लड़ने वाला, स्वतंत्रता में अधिक उन्नति करने वाला, पित्त, वायु व रक्तविकार के रोगों से पीड़ित व चर्म रोगी होता है इसके अतिरिक्त यदि स्त्री राशि का सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो सुखदाई होता है तथा पुरुष राशि का सूर्य यदि प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो थोड़ा दुःखदाई होता है साथ ही यदि धनु लग्न हो और प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति विद्वान, धर्मशास्त्रों को जानने वाला व उच्चाधिकारी होता है किंतु स्त्री सुख से वंचित रहता है या इसी तरह के अन्य किसी दुःख से पीड़ित होता है, यदि कर्क लग्न हो और प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति साधारण धनी, स्त्री सुख युक्त तथा संतति संपन्न होता है किंतु यशस्वी नही होता कहने का आशय यह है कि इस स्थिति में व्यक्ति के पास धन अच्छा रहता है किंतु व्यक्ति ऊँचे पद पर आसीन नही हो पाता है तथा दक्षिणायण का सूर्य इनके लिए शुभ होता है व उत्तरायण का सूर्य प्रायः लड़ाई-झगड़े, अपना स्वामित्व स्थापित करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है साधारण शब्दों में प्रथम भाव में यदि सूर्य शुभ स्थिति में हो तो अच्छा फल देता है किंतु स्वास्थ्य समस्याएं भी देता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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नामकरण संस्कार: जानिए, बच्चों के नाम कब और किस प्रकार से रखना शुभ होता है

नामकरण संस्कार: जानिए, बच्चों के नाम कब और किस प्रकार से रखना शुभ होता है

 

नामकरण संस्कार विधि
नामकरण संस्कार विधि

 

जातानन्तरमेव नामकरणं त्वेकादशाहे स्फुटं,

पुत्रस्यैव समाक्षरं तु युवते: कार्य ततो व्यत्ययम्।

शुद्धिर्जातकवच्च नाम्नि सकलैस्तद् द्वादशेषोडशे,

द्बाविंशेऽप्यथ विंशके हि विहितं जातिव्यस्थां बिना।।

 

अर्थात:-

 

जातकर्म संस्कार के पश्चात ग्याहरवें दिन बच्चे का नामकरण करना चाहिए, पुत्र का नाम सम संख्या अक्षरों वाला तथा पुत्री का नाम विषम संख्याक्षरों से रखना चाहिए।

 

मुहर्त व दिनादि का निश्चय जातकर्म के समान ही करना चाहिए अथवा बाहरवें, सोहलवें, बीसवें तथा बाइसवें दिन भी सूतक समाप्ति के बाद नामकरण कर सकते हैं, इसमें वर्ग भेद से काल भेद नही होता है अर्थात चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र) के लोगों पर यह नियम समान रूप से लागू है।

 

नामकरण सदैव सूतक समाप्त होने पर ही होता है, दस दिन बीत जाने पर सूतक समाप्त हो जाता है बहुत से आचार्यों ने दसवें, अठाहरवें या मसोपरांत भी कहे हैं अतः देश, काल व परंपरा अनुसार नामकरण का निश्चय करते हुए शुभ वार, तिथि, नक्षत्रादि का विचार कर रिक्ता तिथि अर्थात चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तथा अमावस्या को छोड़कर शेष सभी तिथियाँ किंतु तिथि क्षय न हो रही हो आदि का ध्यान रखना चाहिए यदि पूर्णा तिथि हो तो विशेष ठीक रहती है, उस दिन शुभ वार में, लग्न शुद्धि का विचार कर के दोपहर से पूर्व जातक का नामकरण करना चाहिए किंतु यदि उस दिन व्यतिपात योग, सक्रांति, रिक्ता तिथि, जया तिथि, भद्रा, ग्रहण, वैधृति योग, श्राद्ध दिन पड़ता हो तो नामकरण संस्कार की तिथि आगे बढ़ा देनी चाहिए यदि इन कारणों से उपरोक्त मुहर्त निकल जाए तो सूर्य के उत्तरायण समय व गुरु और शुक्र के अस्त समय को छोड़कर कभी भी शुभ दिन में नामकरण कर सकते हैं

देशकालोपघाताद्यै: कालातिक्रमणं यदि।

अनस्तगे भृगावीज्ये तत्कालं चोत्तरायणे।।

 

मुहर्त चिंतामणि में नामकरण संस्कार विधि के लिए कहा गया है कि

 

तज्ज़ातकर्मादि शिशोर्विधेयं पर्वाख्यरिक्तोनतिथौशुभेऽह्वि।

एकादशे द्वादशकेऽ पिघस्त्रे मृदुध्रुवक्षिप्रचरोडुषु स्यात्।।

 

अर्थात:- पर्व के दिन और रिक्ता तिथि को छोड़कर अन्य तिथियों में, शुभ दिन में, जन्मकाल से ११ वें व १२ वें दिन में, मृदुसंज्ञक, ध्रुवसंज्ञक, क्षिप्रसंज्ञक नक्षत्रों में, बच्चे का नामकरण करना शुभ रहता है।

 

जय श्री राम।

 

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कुंभ लग्न और आप: जानिए, कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

कुंभ लग्न और आप: जानिए, कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व
कुंभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कुंभ लग्न में जन्मे व्यक्तियों का शरीर तथा हिर्दय सुंदर होता है साथ है ऐसे व्यक्ति दयालु प्रकृति और परोपकार परायण होते हैं तथा दूसरों की भावना, विचार और मन की बातों को जानने के लिए सर्वदा यत्न करते हैं, दूसरों के दुःख को देखकर कुंभ लग्न वाले व्यक्ति रह नही पाते तथा दूसरों के दुःखो के निवारण हेतु उपाय में लगे रहते हैं तथा सुख व आनंद से जीवन व्यतीत करते हैं, कुंभ लग्न वाले व्यक्ति ईश्वर, धर्म तथा ज्ञान में अपनी रुचि रखते हैं और पाप व दुराचार से दूर रहना पसंद करते हैं, ऐसे व्यक्ति यशस्वी, धनी, मिलनसार, महान, सुगमता पूर्वक कार्य करने में निपुण, सर्व जन प्रिय, मित्रों से प्रीति रखने वाले और सबका मान-सम्मान करने वाले परंतु दंभी होते हैं साथ ही कुंभ लग्न वाले व्यक्ति अत्यंत कामी और कभी-कभी पर स्त्री गमन के इच्छुक होते हैं, बड़े लोगों से इनकी मित्रता रहती है और सभी लोगों में इनकी मान मर्यादा विशेष होती है, ठंडे जल का सेवन इन्हें अत्यधिक प्रिय होता है कुछ ग्रंथकारों में कुंभ लग्न को अच्छा नही माना है किंतु मेरा (ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली) यह मत व अनुभव है कि कुंभ लग्न वाले व्यक्ति अपने जीवन के अंतिम भाग में किसी न किसी रूप का अपयश तथा लांछन व बड़ी हानि प्राप्त करते हैं किंतु धनी, दयालु, धार्मिक, विद्वान, सज्जन, कभी-कभी दुर्जन लोगों से मित्रता रखने वाले, स्त्रियों के वशीभूत व स्त्रियों में प्रीति रखने वाले, एकाधिक प्रेम-प्रसंग करने वाले, कुछ कठोर, अपने सुख व लाभ को सर्वप्रथम देखने वाले, मित्रों से युक्त, जीवन के मध्य भाग में अच्छी सफलता प्राप्त करने वाले व माता के प्रिय होते हैं।

 

कुंभ लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त पुत्रों की अपेक्षा पुत्रियों से अत्यधिक प्रेम करने वाली, आनंदमय जीवन तथा शुभ संगीत में जीवन व्यतीत करने वाली, अच्छे विचारों वाली, धार्मिका, जनों से प्रेम करने वाली और कृतज्ञा किंतु रुधिर रोगों से पीड़ित होती है, कुंभ लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः वात प्रकृति की समस्या व सिर दर्द, पेट दर्द, अपच, कोष्ट बद्धता तथा उदर जनित अनेक विकारों से ग्रसित ही रहते हैं, कुंभ लग्न वाले व्यक्तियों का रोग कुछ देर ही रहता है या फिर उनको एक ही रोग एकाधिक बार एक ही समय में हो जाता है या आजन्म रोग बना ही रहता है, इन्हें रुधिर का विशेष ध्यान रखना चाहिए तथा थोड़ा सा भी अस्वस्थ होने पर तुरंत औषधि लेनी चाहिए, स्वच्छ वायु, खुले स्थान का व्यायाम, सादा भोजन इनके लिए उत्तम रहता है, मानसिक व्यथा से बचना चाहिए तथा नेत्रों का पूर्ण सतर्कता से ध्यान रखना चाहिए क्योंकि कुंभ लग्न वालों को नेत्र में समस्या प्रायः बनी ही रहती है।

 

कुंभ लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शुक्र अत्यधिक शुभ ग्रह व राजयोगकारक ग्रह होता है, मंगल भी इन्हें शुभ फल प्रदान करता है, कुंडली में मंगल व शुक्र का संबंध इनको उत्तम राजयोग तुल्य सुख प्रदान करता है, बुध व शनि साधारण फल देने वाले ग्रह होते है तथा बृहस्पति और चंद्रमा मारक ग्रह होते हैं किंतु बृहस्पति स्वम् मारक नही होता, यदि सूर्य और शुक्र लग्न में हो तथा राहु दशम भाव में हो तो व्यक्ति को बृहस्पति के अंदर राहु की अंतर्दशा में बेहद शुभ फल मिलते हैं तथा यदि सूर्य और बुध पंचम भाव में स्थित हो तो अच्छी उन्नति के योग बनाते हैं, मिथुन का नवमांश होने और व्यक्ति के प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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मकर लग्न और आप: जानिए, मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व

मकर लग्न और आप: जानिए, मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व
मकर लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मकर लग्न काल पुरुष के क्रम स्थान की राशि का लग्न होता है जिसके स्वामी शनि होते हैं अतः मकर लग्न वाले व्यक्ति सदैव क्रियाशील रहते हैं कहने का आशय यह है ऐसे व्यक्ति एक जगह खाली नही बैठते, मकर लग्न वालों जा स्वभाव थोड़ा रूखा होता है साथ ही इनके शरीर का निचला अर्ध भाग कुछ दुबला होता है तथा इन्हें कफ प्रकृति की समस्याएं प्रायः बनी ही रहती है, मकर लग्न वाले व्यक्ति बड़े उत्साही, परिश्रमी, खुले तौर से अपने विचार व्यक्त करने वाले, मिजाज के शक्की, कुछ अहंकारी व कभी-कभी भयक्रांत हो जाने वाले, पुण्य कर्मों में सदैव तत्पर, ईश्वर के प्रति असीम आस्था और अपने आश्रितों से कार्य लेने वाले होते हैं, मकर लग्न के व्यक्ति प्रत्येक कार्य बड़ी सावधानी तथा विचार कर करते है, अपने मित्र मंडली में प्रमुख बने रहने की इच्छा रखने वाले व अपनी ख्याति हेतु सदैव प्रयत्नशील रहते हैं, मकर लग्न वाले पुरुष प्रायः स्त्री वर्ग से दुःखी ही रहते हैं तथा प्रायः दुःख भोगते हैं और किसी-किसी अवसर में दानशील भी होते हैं।

 

मकर लग्न की व्यक्ति यदि महिला हैं तो उपरोक्त गुणों के अतिरिक्त धार्मिक, सत्य प्रिया, विचारशीला, मितव्ययी, सुविख्यात, शत्रु रहिता तथा बहु पुत्रों वाली होती है, मकर लग्न वाले व्यक्तियों को चर्म रोग प्रायः दुःखी करता है तथा ठंडे पदार्थों के सेवन को सीमित मात्रा में करना चाहिए और अपने भोजन आदि व व्यायाम का सदैव ध्यान रखना चाहिए, मकर लग्न वालों के लिए शुक्र और बुध उत्तम फल देने वाले ग्रह होते हैं इनमे भी शुक्र विशेष शुभफलदाई होता है तथा राजयोगकारक ग्रह होने के कारण से राज योग तुल्य सुख प्रदान करता है, शुक्र और बुध का कुंडली में संबंध राजयोग समान फल देता है, बृहस्पति और चंद्रमा शुभ फल नही देते यह दोनों मारकेश भी होते हैं, शनि मारक ग्रह होकर भी मृत्यु नही देता, सूर्य भी मारक नही होता तथा सूर्य के साधारण फल मिलते हैं, यदि मकर लग्न वालों की कुंडली के लग्न में मंगल व सप्तम में चंद्र हो तो यह राजयोग होता है जिससे व्यक्ति अनेक प्रकार के सुखों को भोगता है परंतु यदि अष्टम भाव में बुध व लग्न में गुरु हो और उस पर शुक्र की दृष्टि न हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य तो अच्छा रहता है किंतु व्यक्ति स्वम् दरिद्र होता है, मकर का नवमांश रहने से व्यक्ति में प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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नव ग्रहों की प्रसन्नता हेतु नहाने पूर्व करें यह उपाय

नव ग्रहों की प्रसन्नता हेतु नहाने पूर्व करें यह उपाय

 

नव ग्रह की प्रसन्नता हेतु नहाने के पूर्व करें यह उपाय
नव ग्रह की प्रसन्नता हेतु नहाने के पूर्व करें यह उपाय

 

हमारे जीवन में नव ग्रहों की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है सूर्यादि नव ग्रहों की शुभ स्थिति से व्यक्ति को अनेक प्रकार के सुख व वैभव की प्राप्ति होती है हमारे महर्षियों ने नव ग्रहों को प्रसन्न करने हेतु अनेक उपाय बताए हैं आज मैं उन्ही में से प्रत्येक ग्रहों को प्रसन्न करने के खास उपाय बता रहा हूँ जिन्हें आपको नहाने के पूर्व करना होता है तो चलिए जानते हैं उन उपायों के बारे में जिनसे हम नव ग्रहों को प्रसन्न कर सकते हैं:-

 

१. सूर्य को प्रसन्न करने हेतु पानी में लाल चंदन, मुलेठी, इलायची, केसर या गुलाब के फूल डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से सूर्य के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

२. चंद्रमा को प्रसन्न करने हेतु नहाने के पानी में श्वेत चंदन, श्वेत पुष्प, कपूर या इत्र आदि डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से व्यक्ति का मन स्थिर रहता है तथा चंद्रमा के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

३. मंगल को प्रसन्न करने हेतु लाल चंदन, हींग या गुलाब की पंखुड़ियाँ डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से मंगल के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

४. बुध को प्रसन्न करने हेतु जल में जायफल, चंदन, गोरोचन, दूर्वा घास या अक्षत डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से बुध के अशुभ प्रभावों में कमी आती है।

 

५. गुरु को प्रसन्न करने हेतु जल में हल्दी, केसर, पीला चंदन या पीले पुष्प डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से गुरु के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

६. शुक्र को प्रसन्न करने के लिए जल में कच्चा दूध, इलायची, श्वेत चंदन या श्वेत पुष्प डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से शुक्र के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

७. शनि को प्रसन्न करने हेतु जल में काला तिल, सौंफ या सरसों तेल की कुछ बूंदे डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से शनि के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

८. राहु को प्रसन्न करने हेतु जल में दूर्वा घास, कस्तूरी, लोबान या गज दंत आदि डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से राहु के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

९. केतु को प्रसन्न करने हेतु जल में लाल चंदन, सरसों के दाने या कुशा डालकर स्नान करना चाहिए ऐसा करने से केतु के अशुभ फलों में कमी आती है।

 

जय श्री राम।

 

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धनु लग्न और आप: जानिए, धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व

धनु लग्न और आप: जानिए, धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व
धनु लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

धनु लग्न वाले व्यक्तियों का गला लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति सादा और स्पष्ट विचार वाले होते हैं साथ ही न्याय और सत्य के लिए खूब परिश्रम करते हैं, धनु लग्न वाले व्यक्ति निष्काम कर्म करते हैं तथा किसी विषय को बहुत आसानी से और बहुत जल्दी समझ जाते हैं, ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान तथा कई भाषाओं को जानने वाले होते हैं और अपनी मेघा तथा गुण द्वारा शीघ्र ही उन्नति करते हैं, ऐसे व्यक्ति उदार प्रकृति के होते हैं तथा ज्ञान के विषयों में उनकी बड़ी रुचि रहती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति नित्य नया ज्ञान पाने को ललाहित रहते हैं और ऐसे व्यक्ति बिना किसी प्रकार के आडंबर तथा दिखलावटी बातों के शांतिमय जीवन व्यतीत करना पसंद करते हैं, लोगों की सेवा में ऐसे व्यक्ति अपना जीवन समर्पित किए रहते हैं सिर्फ इतना ही नही जरूरत पड़ने पर ऐसे व्यक्ति दूसरे के लिए अपने समस्त सुखों का भी त्याग कर देते हैं, धनु लग्न वाले व्यक्ति अपने नौकरों व आश्रितों पर विशेष दया भाव रखते है, धनु लग्न वाले व्यक्ति सत्यवादी, भाग्यवान, सुंदर, विद्वान, ज्ञानी, नवीन ज्ञान सीखने को तत्पर, भ्रमित, देव व ब्राह्मण भक्त, सत्यवादी, कटु वचन बोलने में भी न झिकझिकाने वाले, बुद्धिमानों में बड़े पक्षपाती, बुद्धिमान, योग्य, अपने कुल वंश तथा जाति में ख्याति प्राप्त करने वाले तथा व्यंग वचन बोलने वाले होते हैं।

 

धनु लग्न वाले व्यक्ति बड़े-बड़े अधिकारियों व बड़े व्यक्तियों से मित्रता रखते हैं, यदि किसी महिला का धनु लग्न हो तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त दयालुता में अभिरुचि, करुणामय चित्त वाली, उदार व हिर्दय से अत्यंत कोमल आदि गुणों से युक्त होती हैं, धनु लग्न वाले व्यक्तियों को कार्य के बीच-बीच में थोड़ा विश्राम अवश्य लेना चाहिए, नित्य व्यायाम से इन्हें सर्वदा लाभ होता है तथा यह स्वस्थ रहते हैं, धनु लग्न वाले व्यक्तियों को रुधिर विकार के अतिरिक्त दुर्घटना, शरीर पटलर चोट लगने व घोड़ों से विशेष रूप से बचकर रहना चाहिए, धनु लग्न वालों के लिए सूर्य और मंगल बहुत ही शुभ फल देने वाले ग्रह होते हैं, सूर्य और बुध का परस्पर संबंध बनने से राजयोग तुल्य सुख मिलता है, शुक्र अनिष्टकारी ग्रह तो बृहस्पति बेहद शुभफलदाई ग्रह होता है किंतु कभी-कभी बृहस्पति बुरा फल भी देता है, यदि शनि कुंडली के एकादश भाव में हो तो अत्यंत शुभ फल प्राप्त होते हैं, धनु लग्न वालों को चंद्रमा अष्टमेश होकर भी शुभ फल देता है कारण चंद्रमा इस कुंडली के लग्नेश बृहस्पति का मित्र है और चंद्रमा को अष्टमेश होने का दोष नही लगता है किंतु मेरे (जोतिर्विद पूषार्क जेतली) के अनुभव के अनुसार धनु लग्न वालों के लिए चंद्रमा साधारण फल अर्थात कभी अच्छा तो कभी बुरा फल देता है विशेषतः यदि चंद्रमा द्वादश भाव में स्थित हो और उसको शुभ ग्रह न देखते हों तो इस स्थिति में चंद्रमा अत्यंत अनिष्टकारी होकर अपनी दशा में मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट अवश्य ही देता है और यदि चंद्रमा की दशा जीवनकाल में न पड़ती हो तो कुंडली में जो क्रूर ग्रह अत्यधिक बली होगा उसकी या बुध की दशा में चंद्र की अंतर्दशा आने पर मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट होता है, सिंह का नवमांश होने और व्यक्ति में प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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वृश्चिक लग्न और आप: जानिए, वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व

वृश्चिक लग्न और आप: जानिए, वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व
वृश्चिक लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृश्चिक लग्न काल पुरुष के अष्टम भाव अर्थात मृत्यु व गूढ़ रहस्यों का भाव की राशि है जो कि मोक्ष के त्रिकोण की राशि है अर्थात वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति ज्ञानी, विद्वान, अनेक शास्त्रों को जानने वाले, देव, गुरु व पिता भक्त, क्लेश सहने वाले, मृत्यु से भी परे वाली सोच रखने वाली अर्थात कठिन से कठिन या असंभव भरी किसी निराशाजनक स्थिति में भी पूर्ण क्षमता के साथ अपनी युक्ति के बल पर विजय प्राप्त करने वाले होते हैं, इनका हिर्दय निर्मल व धार्मिक होता है, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों का रूप सुंदर और जाँघे व पैर गोल आकृति के होते हैं, इनके दोनो हाथ व पैर के अंगूठों में भी किसी प्रकार का अंतर देखा जा सकता है, इनके कलाई, छाती, लिङ्ग में तिल आदि चिन्ह व उदर या अन्य किसी भाग पर मस्से का चिन्ह रहता है, वृश्चिक लग्न का स्वामी सेनापति मंगल होता है अतः वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों का शरीर पुष्ट होता है, ऐसे व्यक्ति अत्यधिक सतर्क रहते हैं किंतु झगड़ालू होते हैं, विवाद में वह पक्ष-विपक्ष की बात तथा अपनी हानि का भी विचार नही कर दृढ़ता तथा संलग्नता पूर्वक झगड़े में लग जाते हैं, ऐसे व्यक्तियों को क्रोध अति शीघ्र आता है और झगड़े के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति काने को काना कह कर पुकारने में भी तनिक नही हिचकिचाते क्योंकि वृश्चिक लग्न के व्यक्ति सच्ची बात को स्पष्ट रूप से कहने वाले होते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों को बदला चुकाए बिना रहना मुश्किल होता है, ऐसे व्यक्ति अपने उचित अथवा अनुचित ध्येय के लिए अथक परिश्रम करते हैं और गुरुजनों से भी हठ कर बैठते हैं, वृश्चिक लग्न के व्यक्ति कभी उच्च पद पर नियुक्त होने से अथवा अन्य किसी कारणों से प्रायः उच्च पद के व्यक्ति होते हैं और इनका बर्ताव व व्यवहार भयावह होता है।

 

वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति अपने शत्रुओं पर भी जल्दी प्रहार नही करते किंतु जब यह प्रहार करते हैं तो बड़े से बड़े शत्रु भी इनके आगे टिक नही पाते क्योंकि ऐसे व्यक्ति पूर्ण रणनीति के साथ आक्रमण करते हैं जिस प्रकार से बिच्छु के डंक से बचना लगभग असंभव होता है ठीक उसी प्रकार वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों के आक्रमण से बचना मुश्किल होता है, वृश्चिक लग्न के व्यक्तियों का दिल साफ होता है तथा अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण तरह से जीवन जीना इन्हें पसंद होता है, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों के माता-पिता के मध्य प्रायः विवाद होते ही रहते हैं तथा इन्हें भी कई प्रकार के क्लेश सहन करने पड़ते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति अत्यंत रूखे और जोशीले होते हैं, इनमे सहन शक्ति काफी अधिक होती है तथा ऐसे व्यक्ति अपने क्रोध को अंत समय तक संभालने का पूर्ण प्रयास करते हैं किंतु परिस्थिति वश कई बार इनका क्रोध ज्वालामुखी रूप में बाहर आता है और अगले ही पल वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति अपने क्रोध को शांत कर अपनी गलतियों के प्राश्चित हेतु लग जाते हैं, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्ति स्त्री प्रिय होते है साथ ही यदि कोई महिला वृश्चिक लग्न हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त सुंदर, आज्ञाकारी, भाग्यवती, सुशीला, सच्ची, अनंदप्रिया और अच्छे चाल-चलन वाली होती है, वृश्चिक लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः उदर संबंधित समस्याएं बनी रहती है तथा इन्हें कंठ व फेफड़ों को सुरक्षित रखना चाहिए, मल-मूत्रादि की साफ-सफाई का भी विशेष ख्याल रखना चाहिए, छूत वाली बीमारी वाले लोगों से भी दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।

 

वृश्चिक लग्न वालों के लिए सूर्य और चंद्र शुभ फल देने वाले ग्रह होते हैं इन दोनों का किसी भी प्रकार से संबंध बनना राजयोग तुल्य सुख देता है, बुध व बृहस्पति का योग धन वृद्धि व ख्याति के योग बनाती है, बृहस्पति भी शुभ फल देने वाला ग्रह होता है, बुध, शुक्र व शनि शुभ फल नही देते हैं, सिंह का नवमांश रहने से व्यक्ति के प्राकृतिक गुणों का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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