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मंगल का कर्क राशि से गोचर 4 जून 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras

मंगल का कर्क राशि से गोचर 4 जून 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras

 

मंगल का कर्क राशि से गोचरमंगल का कर्क राशि से गोचर
मंगल का कर्क राशि से गोचर

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार भूमि पुत्र मंगल, लोहितांग के नाम से भी जाने जाते हैं जो कि शिव जी के पसीने से उत्पन्न हुए थे और देवी पृथ्वी के आग्रह करने पर शिव जी ने उन्हें सौंपा था, मंगल ग्रह को नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाना जाता है जो कि शक्ति, पराक्रम व ऊर्जा के ग्रह हैं इनका वर्ण रक्त अर्थात लाल है यदि मंगल किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में हो तो कुज दोष जिसे हम सभी मंगल दोष के नाम से जानते हैं बनता है जो कि दामपत्य जीवन के लिए शुभ नही माना जाता है किंतु यदि यही मंगल राजयोगकारक हो जाए तो अनेक प्रकार शुभ प्रभावी हो जाता है, मेष व वृश्चिक मंगल की स्वराशि है अर्थात मेष व वृश्चिक राशि का स्वामित्व मंगल ग्रह के पास है, मंगल ग्रह मकर राशि में उच्च के तो कर्क राशि में नीच के हो जाते हैं “ऋषिकेश पंचांग (काशी)” के अनुसार मंगल ग्रह ४ जून २०२१ को नवमी तिथि शुक्रवार के दिन प्रातः ०५:२० पर मिथुन राशि को छोड़कर अपनी नीच राशि कर्क जो कि चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि है में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं मंगल के कर्क राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेंगे:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए मंगल प्रथम भाव अर्थात लग्न एवं अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के कर्क राशि से गोचर के दौरान माता-पिता के स्वास्थ्य में समस्याएं उत्पन्न हो सकती है अतः माता-पिता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यदि आप घर खरीदने या बदलने का सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय रुक जाएं, जिन व्यक्तियों को स्किन से जुड़ी समस्या या रक्त जनित कोई समस्या हो उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जीवनसाथी के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, व्यापारियों के लिए मंगल का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ उन्नति के अवसर प्रदान करने वाला रहेगा, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए मंगल सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद होने की संभावना रहेगी, आलस्य का त्याग करें, मंगल के इस गोचर काल के दौरान आप में क्रोध की अधिकता रहेगी व आप शीघ्र ही आवेश में आकर कोई ऐसा कार्य कर सकते हैं जिसका आपको बाद में अफसोस होगा अतः आवेश में आने से बचें, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी अतः तनाव लेने से बचें, जो व्यक्ति सेना, पुलिस, ईंधन, विज्ञान या वैध के कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, फोड़े-फुंसी व घाव के अतिरिक्त स्किन से जुड़ी एलर्जी एवं रक्त जनित कोई समस्या संभव रहेगी, भुजाओं में कुछ कमजोरी अनुभव हो सकती है, भाग्य वृद्धि हेतु अतिरिक्त परिश्रम करना होगा व अत्यधिक परिश्रम करने पर कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त होगी।

 

उपाय:- सिद्धकुंजिका स्तोत्र का नित्य पाठ करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए मंगल षष्ठ एवं एकादश भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान मिथुन राशि वाले व्यक्तियों को अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ जाएंगे व लोग आपके शत्रु बन जाएंगे, दवाईयों व शत्रुओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में कुछ कटुता आएगी जिस कारण से ससुराल पक्ष व जीवनसाथी के साथ विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा।

 

उपाय:- नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व चतुर्थी का व्रत करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए मंगल पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो आपके लग्न अर्थात प्रथम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपने क्रोध पर विशेष तौर पर नियंत्रण रखना होगा अन्यथा कलह-क्लेश व झगड़े-विवाद के साथ जेल यात्रा के योग बन सकते हैं, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी कुछ कटु अनुभव होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए मंगल यह गोचर काल मिला-जुला फल देने वाला रहेगा, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं व स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, मंगल का यह गोचर काल बेरोजगारों को नौकरी के अवसर प्रदान करने वाला रहेगा।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें व गाय को गुड़ खिलाएं।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो कि आपके द्वादश भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना चाहिए, माता व धर्म से जुड़े कार्यों पर धन व्यय होगा, इस गोचरकल के दौरान आपको कार्यक्षेत्र में बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होगी, धैर्य व संयम से कोई भी निर्णय लें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, कलह-क्लेश व झगड़े-झंझटों के कारण से आपका मन अशांत रहेगा हालांकि शत्रु आपका कुछ बिगाड़ नही पाएंगे फिर भी आपको घर-परिवार के साथ खुलकर जीवन का आनंद लेने में दिक्कतें आएंगी व आप खुद असहज अनुभव करेंगे, छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें।

 

उपाय:- नित्य गाय को रोटी और गुड़ खिलाएं व हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव अर्थात लाभ स्थान से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपने बड़े भाई के स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, आय में कुछ परिश्रम से वृद्धि के योग बनेंगे, स्वभाव में कुछ तेजी आएगी, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, संतान से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, स्थान परिवर्तन या नौकरी परिवर्तन हेतु किए जाने वाले प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, व्यय में वृद्धि होगी, किसी भी प्रकार के जुए व सट्टे में पैसा लगाने से बचें, पशु, हथियार, अग्नि एवं वाहनादि से चोट लगने की संभावना रहेगी।

 

उपाय:- नित्य गाय को रोटी व गुड़ खिलाएं।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान पिता को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र में अत्यधिक परिश्रम करने पर उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, किसी उच्चपदाधिकारी से मुलाकात संभव है, आपके जीवनसाथी की माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है साथ ही उनका स्वभाव भी कुछ चिड़चिड़ा सा अनुभव होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, इस गोचर काल दौरान आपको अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी विषय पर बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए क्योंकि मंगल का कर्म स्थान में नीच राशि से गोचर कुछ झंझटों को अचानक से उत्पन्न करने वाला रहेगा, प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी, जीवनसाथी के साथ विवाद संभव रहेगा।

 

उपाय:- नित्य श्री सूक्त का पाठ करें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल प्रथम भाव अर्थात लग्न व षष्ठ भाव के स्वामी होकर नवम भाव अर्थात भाग्य भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान शत्रु आपकी उन्नति में बाधक बनने का प्रयास करेंगे, पिता के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है, भाई-बहन के मध्य वैचारिक मतभेद उत्पन्न होंगे, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा, तनाव लेने से बचें, मंगल के इस गोचरकाल के दौरान आपके किए गए प्रत्येक प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, आलस्य का त्याग करें, मन को क्षणिक सुख देने वाले साधनों तथा वाहनादि पर धन व्यय होगा, उच्चपदाधिकारी व्यक्ति से मुलाकात संभव है जिनसे निकट भविष्य में आपके अटके हुए कार्य पूर्ण होंगे।

 

उपाय:- प्रत्येक मंगलवार हनुमान बाहुक व सुंदरकांड का पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए मंगल पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको शत्रुओं से सतर्क रहना चाहिए तथा शीघ्र ही किसी की बातों में आने व लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचना चाहिए, यात्राओं के योग बनेंगे, इस गोचरकल के दौरान यात्रा, दवा व परिवार पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, फोड़े-फुंसी, घाव, अग्नि भय, ज्वरादि की समस्या रह सकती है, खान-पान का विशेष ख्याल रखें व तेज मिर्च-मसाले वाले भोजन से परहेज करें, यदि आपने कहीं ऋण के लिए आवेदन किया हुआ है तो वह स्वीकृत हो जाएगा, दाम्पत्य जीवन में अनेक अवसर पर विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, जीवनसाथी के उदर व कमर के निचले हिस्सों में या एलर्जी की समस्या रह सकती है।

 

उपाय:- नित्य विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें व गाय को गुड़ खिलाएं।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस गोचरकाल के दौरान छोटे भाई-बहन के विवाह हेतु यदि कहीं बात चल रही है तो उसमें अचानक से कोई बाधा आ सकती है, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा काम त्रिकोण में अग्नि तत्व ग्रह के जल तत्व राशि से गोचर करने के कारण से जीवनसाथी के साथ क्षणिक विवाद होने की संभावना रहेगी, ससुराल पक्ष के लोगों से विवाद संभव रहेगा, जो लोग पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं उनके लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तेज ज्वर, सिर में पीड़ा, मूत्रेन्दीय संबंधित कोई समस्या संभव रहेगी, व्यापारियों के लिए मंगल का यह गोचर उन्नति के नए अवसर प्रदान करने वाला रहेगा, आप इस दौरान स्पष्ट रूप से वार्ता करने पर विश्वास रखेंगे जिस कारण से अनेक अवसर ओर आपकी कही हुई बातें लोगों को बुरी लग सकती है, उदर में कोई समस्या संभव है अतः तेज मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, वाहन सावधानी से चलाएं।

 

उपाय:- मंगलवार के दिन गाय को मसूर की दाल भीगा कर खिलाएं।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान आपको अपने क्रोध व वाणी पर विशेष रूप से नियंत्रण रखना चाहिए, सरकारी कर्मचारियों विशेषतः सुरक्षा बलों के साथ व्यर्थ विवाद में पड़ने से बचें अन्यथा जेल यात्रा के योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, विपरीत परिस्थितियों में कड़े संघर्ष के उपरांत उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, अकास्मिक व्यय में वृद्धि होने से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होगी अतः तनाव लेने से बचें, दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, स्वास्थ्य के लिहाज से मंगल का यह गोचर आपके लिए सामान्य रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, मामा पक्ष में किसी को स्वास्थ्य जनित समस्या रह सकती है।

 

उपाय:- गाय को रोटी व गुड़ नित्य खिलाएं।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी किंतु अनेक अवसर पर विवादपूर्ण स्थितियाँ भी उत्पन्न होंगी, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, विद्यार्थियों का मन शिक्षा की जगह खेल-कूद या अन्य किसी मनोरंजन के साधनों पर लगेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें व शांत होकर धैर्य से काम लें, उदर जनित कोई समस्या संभव रहेगी, ससुराल पक्ष व जीवनसाथी की वाणी में कुछ तेजी अनुभव होगी जिस कारण उनसे विवाद होने की संभावना रहेगी, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी।

 

उपाय:- नित्य शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक करें व मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर अर्पित कर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो ग्रंथकारों का मत है कि व्यक्ति दुबला, मझोले कद वाला, भूरे रंग के केश और नेत्र से युक्त, चंचल, भय युत, स्त्री सहवास तथा सुख भोगने में आसक्त, स्त्रियों से विरोध करने वाला तथा स्त्रियों से अनादर पाने वाला, परस्त्री प्रेमी एवं परगृही भोजी होता है तथा ऐसे व्यक्तियों की प्रायः दो स्त्रियाँ होती है और विवाह विलंब से होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति धनहीन, राज कोप से दुःखी तथा कदन्न भोजी होते हैं तथा यदि ऐसे व्यक्तियों का शीघ्र विवाह हो तो १४ वें या ३४ वे वर्ष में स्त्री का नाश और २५ वें वर्ष में परदेश यात्रा होती है, यदि सप्तम भाव में सिंह राशि का सूर्य हो तो एक स्त्री होती है किंतु यदि सूर्य पर शत्रु ग्रह की दृष्टि हो अथवा सूर्य शत्रु ग्रह के साथ अथवा पाप ग्रह से युक्त हो तो बहुत सी स्त्रियाँ होती है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति राजा से विरोध रखता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों के आचरण से राजा इनके विरुद्ध हो जाते हैं और ऐसा व्यक्ति राजा द्वारा दंड को प्राप्त करने वाला होता है जिससे ऐसे व्यक्तियों की प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है साथ ही ऐसे व्यक्ति पैदल चलते हैं और ऐसे व्यक्ति स्त्रीहीन या स्त्रियों से विरोध सहने वाला तथा स्त्री के अभाव में पुरुष धर्म-अर्थ और काम से वंचित रहता है, मानसागरी में कहा गया है कि यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो:-

 

युवतिभवन संस्थे भास्करे स्त्रीविलसी, न भवति सुखभागी चंचल: पापशील:।
उदरसमशरीरो नातिदीर्घो न ह्रस्व:, कपिलनयनरूप: पिंगकेश: कुमुर्ति:।।

 

अर्थात यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति को स्त्री का भोग-उपभोग मिलता है किंतु वह सुखी नही होता है तथा ऐसे व्यक्ति अस्थिर स्वभाव के और पापकर्म कर्ता होते हैं साथ ही इनके उदर और देह एक बराबर होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति न तो बहुत लंबा होता है और न ही बहुत छोटा होता है, ऐसे व्यक्तियों का रूप-रंग और आँखें कपिल होती हैं तथा केश कुछ पीले होते है मानसागरी के अनुसार सप्तम का सूर्य पति-पत्नी का सौमनस्य कायम रखता है अन्यथा व्यक्ति को स्त्री का उपभोग अच्छा मिलता है तो वहीं वराहमिहिर जी ने कहा है कि यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो “स्त्रीभी: गत: परिभवं मगदे पतंगे” अर्थात स्त्रियों से तिरस्कार अर्थात अनादर पाने वाला और स्त्रियों का घृणापात्र होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सप्तम भाव में सूर्य मेष, सिंह व मकर राशि का हो तो ही उपरोक्त ग्रंथकारों द्वारा बताए गए अशुभ फल प्राप्त होते हैं, यदि सप्तम भाव में सूर्य मिथुन, तुला या कुंभ राशि का हो तो व्यक्ति शिक्षा विभाग में अच्छी प्रगति करता है साथ ही कानून का विशेषज्ञ होता है और संगीत, नाट्य व रेडियो आदि साधनों में प्रगति करता है ऐसे व्यक्तियों को एक या दो ही संतान होती है, यदि मेष, सिंह या धनु राशि का सूर्य सप्तम भाव में हो तो प्रायः व्यक्ति के दो विवाह होते हैं या एक ही विवाह बहुत विलंब से होता है तथा ऐसे व्यक्ति स्वतंत्रता प्रिय होते हैं अर्थात ऐसे व्यक्ति नौकरी करना पसंद नही करते हैं, यदि सप्तम भाव में सूर्य वृषभ, कन्या या मकर राशि का हो तो ऐसे व्यक्तियों को व्यापार में अच्छा लाभ होता है और ऐसे व्यक्ति जनपद या विधानसभा चुनाव में भी विजयी होते हैं, यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य कर्क, वृश्चिक या मीन राशि का हो तो व्यक्ति वैध/डॉक्टर होता है या विज्ञान विषयक पदवी को प्राप्त करता है या किसी नहर का अधिकारी होता है, यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर या मीन राशि का हो तो व्यक्ति ५० वें वर्ष तक अच्छी उन्नति प्राप्त करता है किंतु इसके उपरांत संघर्ष करता है, पुरुष राशि का सूर्य यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति के जीवन में प्रायः उतार-चढ़ाव बने रहते हैं और ५०-५२ वर्ष की आयु के पास उनके जीवनसाथी की मृत्यु हो जाती है या मृत्यु तुल्य कष्ट प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है साथ ही इन्हें संतान कम ही होती है किंतु स्त्री राशि का सूर्य लग्न कुंडली के सप्तम भाव में हो तो संतान अधिक होती है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति की पत्नी प्रभावशालिनी, व्यवहार और बर्ताव में अच्छी, विपत्ति के समय पति का साथ देने वाली, अतिथि सत्कार करने वाली, दयालु, नौकरों से अच्छा काम निकाल लेने वाली और धन प्रिया और रूपवती होती है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य मेष, सिंह, धनु और मीन राशि का हो तो व्यक्ति को प्रायः अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है और प्रेम विवाह होने के बाद भी पति-पत्नी में संबंध विच्छेद हो जाता है या पत्नी अपने पति को उनके श्वसुर के घर पर रहने को या पति के श्वसुर द्वारा दिए गए घर पर रहने को मजबूर करती है।

 

विशेष:-

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार आज से कई वर्ष पूर्व यवनराज्य सत्ता में अविवाहित लड़कियों का अपहरण हो जाने के कारण से कन्याओं का विवाह “अष्टवर्षा भवेद् गौरी दशवर्षा च रोहिणी” के अनुसार १०-१२ वर्ष में हो जाता था शायद इसी कारण से विभिन्न ग्रंथकारों ने सप्तमस्थ सूर्य के अशुभ फल को बताया है यहाँ एक विचारीय विषय यह है कि क्या केवल सप्तम भाव में सूर्य को देखकर यह फलकथन कहना उचित होता है? ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार भृगुसूत्र में बताया गया है कि यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो विवाह देरी से होता है क्या यह पूर्णतया तर्क संगत लगता है?? यह एक विचारणीय विषय है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव के अनुसार यदि सिंह राशि का सूर्य सप्तम भाव में हो या सप्तम भाव को शुभ बली ग्रह देखते हों तो एक ही विवाह होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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बुध वक्री 30 मई 2021: जानिए विभिन्न राशियों पर इसके प्रभाव–Astrology Sutras

बुध वक्री 30 मई 2021: जानिए विभिन्न राशियों पर इसके प्रभाव–Astrology Sutras

 

मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव
मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव

 

३० मई २०२१ को बुध मध्य रात्रि १:१६ मिनट पर मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे, बुध को वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में रहते हैं साथ ही बुध को अस्त होने का भी दोष नही लगता है तो चलिए जानते हैं बुध के वक्री अवस्था से मिथुन राशि में गोचर करने से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप पराक्रम में कुछ कमी आएगी तथा आप बिना विचार किए कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं जिससे आपको आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहेगी अतः कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-विचार कर ही लें, छोटे भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, बुआ के पक्ष में किसी के स्वास्थ्य की समस्या से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे जिस कारण से आपकी कहि हुई बात लोगों को बुरी लग सकती है अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, मोबाइल फोन हैंग होने या मोबाइल फोन में अन्य किसी प्रकार की समस्या आ सकती है, घर के महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच-विचार कर ही लें, ननिहाल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है, संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है अतः संतान के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवास्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप घर में किसी चर्चा को लेकर विचारों में भिन्नता के कारण से क्षणिक विवाद होने की संभावना रहेगी, मन में अनेक प्रकार के विचार आएंगे, बुद्धि व विवेक द्वारा लिए गए निर्णय कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्रदान करेंगे, माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, वाहन या किसी मशीनरी पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता आएगी, दूरसंचार, बैंकिंग, फाइनेंस आदि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप व्यय में वृद्धि होगी, यात्रा या छोटी बहन या बुआ पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, मन में स्थिरता का अभाव रहेगा, शत्रुओं पर बुद्धि-विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, बुध के वक्री होने से अकास्मिक खर्चों में वृद्धि तनाव का कारण बन सकता है, ननिहाल पक्ष से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध वक्री होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा, जीवनसाथी के साथ पूर्व से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, लोगों पर अधिक विश्वास करने से आपको बचना होगा अन्यथा किसी प्रकार से आर्थिक हानि हो सकती है, कोई संपत्ति क्रय करने के योग बनेंगे।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध दशम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष आदि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनकी उन्नति के प्रवल योग बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में अवश्य ही प्राप्त होगा, पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा किंतु माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, बुआ/मासी/बहन आदि के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी व धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, गुरु की सलाह इस दौरान आपके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार हेतु कुछ नए विचार मन में आएंगे, नव दमपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय हो सकता है, बड़ी बहन या बुआ के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है, जिनका कार्य ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस, धर्म, टीचिंग आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है उनके उन्नति हेतु नए अवसर बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में मिलेगा, स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहें, चर्म से जुड़ी कोई समस्या संभव है, मोबाइल/लैपटॉप आदि में कुछ परेशानी के कारण धन व्यय हो सकता है।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय रुक जाएं, पिता की उन्नति होगी व पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, व्यापारियों के कार्यक्षेत्र में कुछ वृद्धि होगी, जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष, धर्म आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात संभव है।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ भाव से वक्री अवास्था से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अधिक शुभ नही है अतः अपने प्रयासों में वृद्धि लाएं, बुआ व मासी के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी संभव है, नए मित्र बनेंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव रहेगी, गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता होगी हालांकि आपके प्रथम भाव से गुरु का गोचर है अतः कोई गंभीर समस्या उत्पन्न होती नही दिख रही है, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए यह समय सामान्य रहेगा, घर में किसी शुभ कार्य का आयोजन या किसी शुभ समाचार का आगमन संभव रहेगा, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान, यात्रा व परिवार पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, व्यापारियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, स्थान परिवर्तन संभव है, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Mobile:- 9919367470, 7007245896

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शुक्र का मिथुन राशि से गोचर 28 मई 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras

शुक्र का मिथुन राशि से गोचर 28 मई 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

शुक्र का मिथुन राशि से गोचर
शुक्र का मिथुन राशि से गोचर

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार जीवन में जितने भी सुख-संसाधन होते हैं उन सब का विचार शुक्र ग्रह से किया जाता है शुक्र ग्रह प्रेम, विवाह, शैय्या सुख व अनेक चीजों के कारक होते हैं वृषभ इनकी स्वराशि, तुला मूलत्रिकोण, मीन उच्च राशि व कन्या नीच राशि होती है, ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार २८ मई २०२१ को प्रातः ०४:४५ पर शुक्र वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के इस गोचर परिवर्तन से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे महान चातुर्य का कारक ग्रह का पराक्रम भाव से गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम के द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है, पड़ोस के किसी विपरीत लिङ्ग व्यक्ति के प्रति आकर्षण हो सकता है, स्वास्थ्य उत्तम रहेगा फिर भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें क्योंकि मेष राशि वालों के लिए शुक्र मारक ग्रह होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकती है, छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उन्हें नए अवसर प्राप्त होंगे, महिलाओं संग वाद-विवाद से बचें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व षष्ठ भाव के स्वामी होकर धन व कुटुंब स्थान अर्थात द्वितीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, चतुराई युक्त नीतियों से धन संचय करने में सहायता मिलेगी किंतु किसी महिला या दवाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें हालांकि शत्रु आपका अहित नही कर सकेंगे किंतु व्यर्थ में तनाव व धन व्यय में वृद्धि के सूचक हो सकते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर अच्छा रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक व चतुराई के द्वारा उन्नति के योग बनेंगे, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यात्राओं के योग बनेंगे, किसी महिला के कारण से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यात्राओं के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, नए मित्र बनेंगे, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, जिन्हें हार्मोन्स या शुगर या अन्य किसी प्रकार की रक्त संबंधित समस्या हो वह शुक्र के इस गोचर दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से व्यय में वृद्धि होगी, महिलाओं, सुख देने वाले संसाधनों, वाहन या अन्य किसी संपत्ति पर धन व्यय होने के योग हैं, फैशन से जुड़ी चीजों पर भी धन व्यय होने के योग बनेंगे, माता व बड़ी बहन के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, शत्रुओं से सावधान रहें व किसी भी महिला के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, शुक्र के इस गोचर के दौरान आप चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त करने में सफल होंगे, महिलाओं विशेषकर बहन व माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपके पड़ोस में कोई ऐसी महिला हो जो उच्च पद पर आसीन हो तो उनसे भी लाभ मिलने की संभावना बनेगी, छोटे भाई-बहन यदि विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व ज्यादा चटपटे या गर्म पदार्थों के सेवन से परहेज करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर कर्म स्थान अर्थात दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर आपके लिए प्रत्येक प्रकार से शुभफलदाई सिद्ध होगा कारोबार में उन्नति होगी, आय में वृद्धि होगी, किसी महिला के माध्यम से भाग्य में वृद्धि होगी, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उनको नए अवसर प्राप्त होंगे, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व अष्टम भाव के स्वामी होकर भाग्य स्थान से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य में वृद्धि होगी व महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा किंतु किसी महिला के कारण से भाग्योन्नति में अड़चनें आएंगी, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, स्वास्थ्य में सुधार होगा फिर भी स्वास्थ्य हेतु सचेत रहें, पिता को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, धार्मिक कार्यों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अर्थात शुक्र आपके लिए प्रवल मारक होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे अतः शुक्र के इस गोचर काल के दौरान आपको स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा हालांकि अष्टम भाव से शुक्र का गोचर आयुष्य पर संकट नही देता फिर भी जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी चिंता का कारण बन सकती है, दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, दवाईयों व महिलाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, महिलाओं के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें, ससुराल पक्ष के किसी महिला के स्वास्थ्य में कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा कार्यक्षेत्र का विस्तार करने में सफल होंगे, जिनका कार्य सौंदर्य प्रकाशन, टीचिंग, ज्योतिष, लेखक आदि से जुड़ा हुआ है उनके लिए शुक्र का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ उन्नति प्रदान करने वाला होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, महिलाओं से सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, दाम्पत्य जीवन में कुछ झगड़े-झंझटों के योग बनते हैं किंतु आप उन पर अपनी चतुराई से विजय प्राप्त करने व दाम्पत्य जीवन को मधुर बनाने में सफल होंगे, कार्यक्षेत्र में अवरोध उत्पन्न होंगे जिन्हें आप चतुराई से दूर करने में सफल होंगे, पुराने मित्रों से मुलाकात या वार्ता संभव रहेगी जिससे आपको प्रसन्नता की अनुभूति होगी, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा क्योंकि आपकी राशि के लिए शुक्र रोग, रिपु व ऋण के भाव का स्वामी होता है, जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें हार्मोन्स या रक्त विकार से जुड़ी समस्या हो उनको अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा, भाग्य की वृद्धि होगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, महिलाओं से लाभ होगा, बड़ी बहन के ससुराल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या संभव है।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, अचानक किसी यात्रा के योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार, दवाईयों, संतान, माता-पिता व महिलाओं पर धन व्यय होगा, किसी अपरिचित व्यक्ति की बातों में आने से बचें, सुख प्रदान करने वाले संसाधनों पर भी धन व्यय होगा, जिन्हें हिर्दय, रक्त विकार, हार्मोन्स या उदर संबंधित समस्या हो वह अपने स्वास्थ्यबक प्रति पूर्ण सतर्क रहें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर प्रत्येक प्रकार से आपके लिए शुभफलदाई रहने वाला होगा नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा, घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, भाग्य में वृद्धि होगी, विद्यार्थियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा, संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा, जो लोग धार्मिक कार्यों से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह शुक्र का गोचर उन्नति के नए अवसर प्रदान करेगा, जीवनसाथी से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे व दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी तथा जीवनसाथी के साथ किसी रोमैंटिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनवपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन प्रसन्न रहेगा, कार्यस्थल पर अनैतिक संबंध बनने के योग है अतः अनैतिक संबंध बनाने से बचें अन्यथा निकट भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, घर में किसी सदस्य के स्वास्थ्य में समस्या चिंता का मुख्य कारण बनेगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, संतान से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त करने हेतु आपको धैर्य रखते हुए चतुराई भरे बड़े पराक्रम से सफलता प्राप्त होगी।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो शास्त्रकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति दुबले, मानसिक चिंता से ग्रस्त, अकारण विवाद प्रिय, आत्मीय जनों से घृणा करने वाले, घमंडी, कपटी, संग्राम में निश्चल, बहुत स्त्री वाले, प्रतिष्ठित, विख्यात तथा सुख, धन, यान आदि रहित, पिता के धन को खर्च करने वाले व भ्रमणशील होते हैं और ऐसे व्यक्तियों के बन्धु-बांधव और वाहनादि के नाश का भी भय होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को शोभायुक्त अधिकार अवश्य प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्ति परदेश या विदेश में वास करते हैं तथा इनका चित्त किसी भी समय शांत नही रहता है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य सुखहीन, बंधुहीन, भूमिहीन, मित्र रहित तथा भवनहीन होता है, ऐसे व्यक्तियों को राजसेवा प्राप्त होती है तथा ऐसे व्यक्ति संपत्ति को नष्ट करने वाले होते हैं, आचार्य वराहमिहिर जी ने कहा है कि “विसुख: पीड़ित मानस: चतुर्थे” अर्थात चतुर्थ भाव का सूर्य हो तो व्यक्ति सुखहीन तथा अशांत चित्त वाला होता है मानसागरी में लिखा है:-

 

विविधजनविहारी बंधुसंस्थ: दिनेशो भवति च मृदुचेता: गीतवाद्यानुरक्त:।
समरशिरसि युद्धे नास्ति भंग: कदाचित्त प्रचुरधनकलत्री पाठीवानां प्रियश्च।।

 

अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य लोकप्रिय तथा सर्वजनप्रिय होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति कोमल हिर्दय वाले होते हैं और इनका प्रेम गीत व वाद्यकलाओं में होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति युद्ध में आगे होकर लड़ते हैं और कभी पीठ नही दिखाते साथ ही ऐसे व्यक्तियों को स्त्री सुख और विपुल धन सुख मिलता है और ऐसे व्यक्ति राजप्रिय होते हैं।

 

सूर्य के चतुर्थ भाव के अनेक शास्त्रकारों ने अपने-अपने मत रखे हैं जिनमे समानता का अभाव देखने को मिलता है कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल तो कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के निकृष्ट फल बताए हैं चलिए एक और ग्रंथकार के मत को देखते हैं वैधनाथ जी ने चतुर्थ भाव के फल में लिखा है कि “हिर्दय रोगी धन-धान्य-बुद्धि रहित: क्रूर: सुखस्थे रवौ” अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति हिर्दय के रोग से पीड़ित और धन-धान्य व बुद्धि से हीन और क्रूर होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार चतुर्थ भासव से व्यक्ति के सुखों व माता का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य (क्रूर ग्रह) बैठा हो तो उससे यह तो निश्चित हो जाता है कि व्यक्ति को जीवन में सुख प्राप्ति हेतु अत्यंत परिश्रम करना पड़ता है ऊपर अनेक ग्रंथकारों के मत पर चर्चा की गई है जिसमें मानसागरी ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल को बताया है तो वहीं अन्य ग्रंथकारों ने इसे निकृष्ट फल देने वाला बताया है किंतु मेरे अनुभव में अब तक यही आया है कि यदि चतुर्थ भाव में सूर्य यदि वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि का हो तो अशुभ फल मिलते हैं और यदि चतुर्थ भाव में सूर्य मेष या कर्क राशि का हो तो व्यक्ति संशयी, म्लान चेहरे वाला और वैश्यागामी होता है किंतु चतुर्थ भाव में सूर्य यदि मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर और मीन राशि का हो तो शुभ फल मिलते हैं, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्तियों को बचपन में अनेक प्रकार के कष्ट होते हैं किंतु २८ से ५० वर्ष की आयु में व्यक्ति अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करता है, लग्न कुंडली के यदि चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति पहली अवस्था में दुःखी, मध्य में सुख व वृद्धावस्था में पुनः दुःखी होता है तथा विभिन्न ग्रंथकारों द्वारा बताए गए अशुभ फल कुछ विशेष राशियों जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है या सूर्य के अन्य क्रूर से संबंध बनाने पर ही मिलता है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव व मत के अनुसार यदि चतुर्थ भाव के स्वामी बली ग्रहों से युक्त हो या चतुर्थ भाव का स्वामी केंद्र अथवा त्रिकोण में हो या सूर्य चतुर्थ भाव में सिंह राशि का हो तो ऐसी स्थिति में सूर्य के शुभ फल मिलते हैं तथा व्यक्ति को वाहनादि का सुख प्राप्त होता है किंतु यदि चतुर्थ भाव का स्वामी भी पीड़ित हो प्रायः सभी सुखों का नाश होता है।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल

 

यदि कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति भाग्यवान होता है तथा इन्हें प्रायः चतुष्पात अर्थात गाय, भैंस, बकरी आदि के माध्यम से सुख प्राप्त होता है कहने का आशय यह है कि दूसरे भाव में यदि सूर्य हो और व्यक्ति यदि खेती बाड़ी करता हो तो बैलों की जोड़ी का सुख मिलता है और यदि व्यक्ति दूध विक्रेता है तो उसके पास अनेक मात्रा में गाय, भैंस व बकरी होंगी व उनसे लाभ होगा आदि फल होता है, यदि सूर्य कुंडली के दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति का द्रव्य अच्छे कामों में व्यय होता है तथा स्त्री के निमित्त से अपने कुटुंब में भी कलह-क्लेश होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों के वह सभी कार्य जिन्हें वो द्रव्य का निमित्त करना चाहते हैं उसमें इनको प्रायः नुकसान ही होता है, दूसरे भाव में यदि सूर्य हो तो व्यक्ति दंभी, कलह सहने वाला, मित्र विरोधी, पुत्रवान, वाणी दोष, नौकर-चाकर से युक्त, मुख रोगी व धन हानि आदि फल प्राप्त होते हैं, ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा में अड़चनें आती है साथ ही ऐसे व्यक्ति हठी व चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि सूर्य द्वितीय भाव में हो तो मनुष्य विद्या, विनय और धन से हीन होता है तथा उसकी वाणी में भी कुछ दोष रहता है, मानसागरी के अनुसार यदि दूसरे भाव में सूर्य हो तो:-

 

धनगतदिननाथे पुत्रदारै: विहीन:।
कृशतनु रतिदीनोरक्तनेत्र: कुकेश:।।
भवति च धनयुक्त: लोह ताम्रेण सत्यं।
न भवति ग्रहमेधी मानवो दुःखभागी।।

 

अर्थात यदि सूर्य दूसरे भाव में हो तो व्यक्ति को स्त्री सुख व पुत्र सुख नही मिलता है तथा इनका शरीर दुबला-पतला होता है और इन्हें रति सुख नही मिलता, ऐसे व्यक्तियों की आँखे लाल व केश बुरे होते हैं किंतु व्यक्ति धनवान होता है साथ ही लोहे और ताँबे से संपन्न होता है तथा ऐसे व्यक्ति गृहस्थी होकर भी किसी एक स्थान में घर बनाकर नही रहते अतएव दुःखी होते हैं।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि लग्न कुंडली के दूसरे भाव में सूर्य बैठा हो तो व्यक्ति धनी होता है किंतु इनके धन की हानि भी प्रायः होती रहती है, साथ ही यदि दूसरे भाव में सूर्य वृषभ, कन्या या मकर राशि का हो तो व्यक्ति कभी धन का संचय नही कर पाता चाहे उसके लिए भी वो जितना भी यत्न कर ले और ऐसे व्यक्ति स्वतंत्र व्यापार करने के इच्छुक होते हैं तथा नौकरी पसंद नही करते हैं किंतु यदि धनेश बलवान हो अर्थात वक्री, अस्त, मंदगामी व अतिचारी न हो और किसी पाप ग्रह से संबंध न बनाता हो तो ही यह इच्छाएं व्यक्ति की पूर्ण होती है परंतु पिता और पुत्र के मध्य वैचारिक मतभेद बने रहते हैं, वकीलों और डॉक्टरों के लिए यह सूर्य शुभफलदाई होता है, यदि किसी ज्योतिषी के द्वितीय भासव में सूर्य हो तो उनके बताए अशुभ फल शीघ्र ही अनुभव में आते हैं किंतु शुभ फल अनुभव में बहुत ही विलंब से अनुभव में आते हैं प्रायः ज्योतिषी को अपयश ही मिलता है, यदि दूसरे भाव में मिथुन, तुला व कुंभ का सूर्य हो तो व्यक्ति अत्यंत धनी होता है किंतु लोगों की सहानुभूति से वंचित रहता है क्योंकि ऐसे व्यक्ति धन व्यय के विषय में कृपण होते हैं अर्थात कंजूस होते हैं, दूसरे भाव में सूर्य यदि कर्क, वृश्चिक व मीन राशि का हो तो व्यक्ति अधिकारी या किसी उच्च पद पर कार्य करने वाला होता है तथा दूसरे भाव में सूर्य यदि मेष, सिंह और धनु राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति बहुत स्वार्थी होता है तथा अपने आपको बड़ा आदमी बनाने की अदम्य इच्छा रखता है किंतु कार्य से मन चुराता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों को कार्य करना कम ही पसंद आता है, इसके अतिरिक्त यदि सूर्य दूसरे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के नेत्र, हाथ व पैर प्रायः गर्म ही रहते हैं और इन्हें उत्तम भोजन करने में बड़ी रुचि होती है, कपड़ों को स्वच्छ रखने में इनका विशेष ध्यान जाता है तथा इनके वार्ता करने के तरीकों में बड़पन्न झलकता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव अनुसार यदि वृश्चिक, धनु, मकर या कुंभ लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य बैठा हो और धन स्थान का स्वामी वक्री हो या १२-४-६-८-१२ वें स्थान में हो तो यह महा दरिद्र योग होता है यह योग जिन व्यक्ति की कुंडली में होता है उन्हें अत्यंत गरीबी को भी झेलना पड़ता है तथा कई बार इन्हें भोजन के लिए भी तरसना पड़ता है, साथ ही यदि दूसरे भाव में सूर्य हो और उसे शनि न देखता हो तो व्यक्ति धनी होता है किंतु यदि शनि से दृष्ट हो तो धन सामान्य मात्रा एवं शनि से दृष्ट हो किंतु अन्य ग्रहों से नही तो व्यक्ति निर्धन होता है, साधारण रूप से ऐसे व्यक्तियों का धन चोरी होने के योग होते हैं, १७ वें व २५ वें वर्ष में धनहानि संभव होती है।

 

जय श्री राम।

 

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बुध का मिथुन राशि से गोचर 26 मई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

बुध का मिथुन राशि से गोचर 26 मई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

 

बुध का मिथुन राशि से गोचर
बुध का मिथुन राशि से गोचर

 

वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में ही रहते हैं, बुध २६ मई की प्रातः ०६ बजकर ४४ मिनट पर वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में चले जाएंगे जहाँ २४ जुलाई की दिन में १० बजकर २१ मिनट 58 सेकंड तक रहेंगे, बुध मिथुन व कन्या राशि के स्वामी होते हैं और कन्या राशि में ही उच्च के भी होते हैं मीन राशि बुध की नीच राशि होती है, बुध बुद्धि व विवेक के कारक होते हैं अतः बुध के कन्या राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव पड़ेंगे तो चलिए जानते हैं बुध के इस गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, शत्रुओं पर युक्ति व चतुराई के माध्यम से सफलता प्राप्त होगी, भाग्य की वृद्धि होगी, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, बहन-बुआ व मासी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव है।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय व पंचम भाव के स्वामी होकर द्वितीय से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए स्त्रोत बनेंगे, जो लोग बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर श्रेष्ठम फल देने वाला रहेगा, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा अवसर रहेगा, कोरोना के कारण से जिनकी नौकरी छूट गयी थी उन्हें पुनः किसी नौकरी का अवसर प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा तथा दोनो अपनी समझ का परिचय देते हुए एक-दूसरे के साथ आनन्दमयी जीवन व्यतीत करेंगे।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर लग्न से ही गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, अपनी युक्ति के बल पर आप कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर निर्मित करने में सफल होंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, अच्छा रहेगा, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, आकस्मिक धन लाभ के योग बनेंगे तथा आय में वृद्धि के पूर्ण योग प्राप्त होते हैं।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कर्क राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर मिला-जुला फल देने वाला होगा फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, यात्रा हो सकती है, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, आपके फोन में बुध के इस गोचरकाल के दौरान कुछ समस्या रह सकती है, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी या उनके कार्यक्षेत्र का कुछ विस्तार होगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध धनेश व लाभेश होकर लाभ स्थान से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उनको पुनः नए अवसर प्राप्त होंगे, जिन व्यक्तियों का कार्य बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध पहले व दशम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कन्या राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, बेरोजगारों तथा कोरोना के चलते जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी मिलने के पूर्ण योग बनते हैं, व्यापारियों के मुनाफे में वृद्धि होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों व जीवनसाथी के लिए बुध का यह गोचर क्षणिक विवाद के योग बना रहा है अतः एक-दूसरे को समझने का प्रयास करें व अपने प्रेमी और जीवनसाथी को कुछ समय दें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, नौकरी व व्यवसाय में उन्नति होगी।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए नवम व द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार तुला राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, धर्मिक यात्राओं के योग हैं या धर्म-कर्म आदि में धन व्यय होने के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रेमियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई होगा तथा उनके प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, दाम्पत्य जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव संभव रहेगा।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम व एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी किंतु स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहें, स्थान परिवर्तन के योग हैं, जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद शुभ रहने वाला होगा, प्रेमियों के लिहाज से बुध का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ प्रेम संबंधों में मधुरता लाने वाला होगा, विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम व दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार धनु राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार, नौकरी में उन्नति, मित्रों से लाभ, पिता का सहयोग व मन में प्रसन्नता का अनुभव आदि शुभ फल प्राप्त होंगे, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी के नए अवसर प्राप्त होंगे, आय में वृद्धि होगी, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, प्रेमियों के मध्य प्रेम में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देगा, अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए षष्ठ और नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मकर राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप भाग्य की शक्ति व चतुराई युक्त युति के द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, जिनको स्वास्थ्य की समस्या लम्बे समय से चली आ रही थी उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा आपके गुप्त शत्रु आप पर हावी होने का पूर्ण प्रयास करेंगे, प्रेमियों के मध्य तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर उन्नतिकारक होगा, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, प्रेमियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, विद्यार्थियों को कुछ नया सीखने को मिलेगा जिसमें वो रुचि भी लेंगे, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है, किसी अप्रिय घटना घटित होने की संभावना रहेगी।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मीन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, नौकरी में उन्नति होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से प्रस्ताव आ सकता है, जो लोग प्रेम विवाह करना चाहते हैं उनके लिए भी यह गोचर शुभ रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी, घर में किसी महिला मेहमान के आने की संभावना रहेगी।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

 

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

 

Mobile:- 9919367470, 7007245896

 

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लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल

 

सूर्य यदि प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो ऐसे व्यक्ति प्रायः रूप में विचित्र, नेत्रों की समस्या से युक्त, कंठ या गुदा में ब्रण अथवा तिल युक्त, शूरवीर, क्षमाशील, घृणा रहित, कुशाग्र बुद्धि, उदार प्रकृति, साहसी व आत्मसम्मानी होते हैं परंतु ऐसे व्यक्ति निर्दयी, क्रोधी और क्रोध में कुछ भी कर गुजरने वाले होते हैं और उनको वात व पित्त के प्रकोप से पीड़ा रहती है तथा ऐसे व्यक्ति आकार में लंबे, गर्म शरीर वाले और थोड़े केश वाले होते हैं तथा ऐसे व्यक्तियों को अपनी बाल्यावस्था में अनेक पीड़ायें भोगनी पड़ती है और सर पर चोटादि लगने की संभावना रहती है, १५ वें वर्ष में अंग पीड़ा और वर्ष की आयु में ज्वर पीड़ा होती है यदि लग्न में सूर्य के साथ अन्य पापग्रह भी हों या सूर्य लग्न में नीच राशि का बैठा हो जो कि तुला लग्न की कुंडली में ही संभव है या शत्रु राशि के लग्न में स्थित हो तो सूर्य के अनिष्ट फल होते हैं।

 

लग्न में मेष राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति नेत्र रोगी परंतु धनवान और कीर्तिमान होता है तथा यदि सूर्य को मित्र बली ग्रह देखते हों तो व्यक्ति विद्वान भी होता है, लग्न में तुला राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति निर्धन तथा मानरहित होता है किंतु यदि सूर्य शुभ ग्रहों से दृष्ट हो तो अशुभता में कमी आती है, मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में यहाँ तक कहा है कि यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में तुला राशि का सूर्य हो तो मनुष्य दरिद्र ही रहता है और उसके पुत्र नष्ट हो जाते हैं, यदि लग्न में सूर्य मकर या सिंह राशि हो तो व्यक्ति रतौंधी एवं हिर्दय रोग से पीड़ित होता है किंतु यदि सिंह का नवमांश भी हो और वहाँ भी प्रथम भाव अर्थात लग्न में ही सूर्य बैठे तो व्यक्ति किसी स्थान का मालिक होता है तथा शुभ ग्रह देखते हैं तो निरोगी होता है, यदि कर्क राशि का सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो व्यक्ति रोगी किंतु ज्ञानी होता है, यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति कार्य करने में आलसी, क्रोधी, प्रचंड, लंबा, मानी अर्थात घमंडी, शूर, क्रूर, जल्दी क्षमा न करने वाला होता है और ऐसे व्यक्तियों के नेत्र कुछ रूखे होते हैं, मानसागरी के अनुसार:-

 

“सवितरि तनुसंस्थे शैशव व्याधियुक्तो नयनगदसुदुःखी नीचसेवानुरक्त:।

न भवति गृह मेधी दैवयुक्तो मनुष्यो भ्रमति विकलमूर्ति: पुत्र पौत्रे: विहीन:।।”

 

अर्थात यदि लग्न अर्थात प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति बाल्यावस्था में रोगी होता है तथा उसके नेत्रों में विकार रहता है साथ ही ऐसे व्यक्ति नीच लोगों की नौकरी करते हैं और एक जगह घर बसाकर नही रह पाते और हमेशा घूमते-फिरते रहते हैं तथा इन्हें पुत्र व पौत्र का सुख नही मिल पाता है तो वहीं वैधनाथ जी का मत है कि यदि सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो उसकी संतति कम होती है और ऐसे व्यक्ति जन्म से ही सुखी, निर्दय, कम खाने वाले, चक्षुरोगी, सुशील, सुहावनी आँखों वाले, सब कामों में यशस्वी तथा बलवान होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो व्यक्ति युद्ध में आगे होकर लड़ने वाला, स्वतंत्रता में अधिक उन्नति करने वाला, पित्त, वायु व रक्तविकार के रोगों से पीड़ित व चर्म रोगी होता है इसके अतिरिक्त यदि स्त्री राशि का सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो सुखदाई होता है तथा पुरुष राशि का सूर्य यदि प्रथम भाव अर्थात लग्न में हो तो थोड़ा दुःखदाई होता है साथ ही यदि धनु लग्न हो और प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति विद्वान, धर्मशास्त्रों को जानने वाला व उच्चाधिकारी होता है किंतु स्त्री सुख से वंचित रहता है या इसी तरह के अन्य किसी दुःख से पीड़ित होता है, यदि कर्क लग्न हो और प्रथम भाव में सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति साधारण धनी, स्त्री सुख युक्त तथा संतति संपन्न होता है किंतु यशस्वी नही होता कहने का आशय यह है कि इस स्थिति में व्यक्ति के पास धन अच्छा रहता है किंतु व्यक्ति ऊँचे पद पर आसीन नही हो पाता है तथा दक्षिणायण का सूर्य इनके लिए शुभ होता है व उत्तरायण का सूर्य प्रायः लड़ाई-झगड़े, अपना स्वामित्व स्थापित करने की प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है साधारण शब्दों में प्रथम भाव में यदि सूर्य शुभ स्थिति में हो तो अच्छा फल देता है किंतु स्वास्थ्य समस्याएं भी देता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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नामकरण संस्कार: जानिए, बच्चों के नाम कब और किस प्रकार से रखना शुभ होता है

नामकरण संस्कार: जानिए, बच्चों के नाम कब और किस प्रकार से रखना शुभ होता है

 

नामकरण संस्कार विधि
नामकरण संस्कार विधि

 

जातानन्तरमेव नामकरणं त्वेकादशाहे स्फुटं,

पुत्रस्यैव समाक्षरं तु युवते: कार्य ततो व्यत्ययम्।

शुद्धिर्जातकवच्च नाम्नि सकलैस्तद् द्वादशेषोडशे,

द्बाविंशेऽप्यथ विंशके हि विहितं जातिव्यस्थां बिना।।

 

अर्थात:-

 

जातकर्म संस्कार के पश्चात ग्याहरवें दिन बच्चे का नामकरण करना चाहिए, पुत्र का नाम सम संख्या अक्षरों वाला तथा पुत्री का नाम विषम संख्याक्षरों से रखना चाहिए।

 

मुहर्त व दिनादि का निश्चय जातकर्म के समान ही करना चाहिए अथवा बाहरवें, सोहलवें, बीसवें तथा बाइसवें दिन भी सूतक समाप्ति के बाद नामकरण कर सकते हैं, इसमें वर्ग भेद से काल भेद नही होता है अर्थात चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य व शूद्र) के लोगों पर यह नियम समान रूप से लागू है।

 

नामकरण सदैव सूतक समाप्त होने पर ही होता है, दस दिन बीत जाने पर सूतक समाप्त हो जाता है बहुत से आचार्यों ने दसवें, अठाहरवें या मसोपरांत भी कहे हैं अतः देश, काल व परंपरा अनुसार नामकरण का निश्चय करते हुए शुभ वार, तिथि, नक्षत्रादि का विचार कर रिक्ता तिथि अर्थात चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तथा अमावस्या को छोड़कर शेष सभी तिथियाँ किंतु तिथि क्षय न हो रही हो आदि का ध्यान रखना चाहिए यदि पूर्णा तिथि हो तो विशेष ठीक रहती है, उस दिन शुभ वार में, लग्न शुद्धि का विचार कर के दोपहर से पूर्व जातक का नामकरण करना चाहिए किंतु यदि उस दिन व्यतिपात योग, सक्रांति, रिक्ता तिथि, जया तिथि, भद्रा, ग्रहण, वैधृति योग, श्राद्ध दिन पड़ता हो तो नामकरण संस्कार की तिथि आगे बढ़ा देनी चाहिए यदि इन कारणों से उपरोक्त मुहर्त निकल जाए तो सूर्य के उत्तरायण समय व गुरु और शुक्र के अस्त समय को छोड़कर कभी भी शुभ दिन में नामकरण कर सकते हैं

देशकालोपघाताद्यै: कालातिक्रमणं यदि।

अनस्तगे भृगावीज्ये तत्कालं चोत्तरायणे।।

 

मुहर्त चिंतामणि में नामकरण संस्कार विधि के लिए कहा गया है कि

 

तज्ज़ातकर्मादि शिशोर्विधेयं पर्वाख्यरिक्तोनतिथौशुभेऽह्वि।

एकादशे द्वादशकेऽ पिघस्त्रे मृदुध्रुवक्षिप्रचरोडुषु स्यात्।।

 

अर्थात:- पर्व के दिन और रिक्ता तिथि को छोड़कर अन्य तिथियों में, शुभ दिन में, जन्मकाल से ११ वें व १२ वें दिन में, मृदुसंज्ञक, ध्रुवसंज्ञक, क्षिप्रसंज्ञक नक्षत्रों में, बच्चे का नामकरण करना शुभ रहता है।

 

जय श्री राम।

 

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