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अर्थात ब्रह्मा जी बोले– हे तात! आपने जो मुझसे पूछा था वह सृष्टि का वर्णन मैंने कर दिया अतः अब गुणों का स्वरूप कहता हूँ, उसे एकाग्रचित्त होकर सुनो।
सत्वगुण को प्रीति स्वरूप समझना चाहिए, वह प्रीति सुख से संपन्न होती है सरलता, सत्य, शौच, श्रद्धा, क्षमा, धैर्य, कृपा, लज्जा, शांति और संतोष इन लक्षणों से निश्चल सत्वगुण की प्रीति होती है, सत्वगुण का वर्ण श्वेत है यह सर्वदा धर्म के प्रति प्रीति उत्पन्न करता है, सत्-श्रद्धा का आविर्भाव करता है तथा असत्-श्रद्धा को समाप्त करता है, तत्त्वदर्शी मुनियों ने तीन प्रकार की श्रद्धा बताई है– सात्त्विकी, राजसी एवं तीसरी तामसी।
रक्तवर्णं रज: प्रोक्तमप्रीतिकरमद्भुतम्। अप्रीतिर्दु:खयोगत्वाद्भवत्येव सुनिश्चिता।। प्रद्वेषोऽथ तथा द्रोहो मत्सर: स्तंभ एव च। उत्कण्ठा च तथा निद्रा श्रद्धा तत्र च राजसी। मानो मदस्तथा गर्वो रजसा किल जायते। प्रत्येवयं रजस्त्वेतैर्लक्षणैश्च विचक्षणै:।।
अर्थात रजोगुण रक्तवर्ण वाला कहा गया है यह आश्चर्य एवं अप्रीति को उत्पन्न करता है दुःख से योग के कारण ही निश्चित रूप से अप्रीति उत्पन्न होती है जहाँ ईर्ष्या, द्रोह, मत्सर, स्तंभन, उत्कण्ठा एवं निद्रा होती है वहॉं राजसी श्रद्धा रहती है अभिमान, मद और गर्व ये सब भी राजसी श्रद्धा से ही उत्पन्न होते हैं अतः विद्वान् मनुष्यों को चाहिए कि वे इन लक्षणों द्वारा राजसी श्रद्धा समझ लें।
अर्थात तमोगुण का वर्ण कृष्ण होता है यह मोह और विषाद उत्पन्न करता है आलस्य, अज्ञान, निद्रा, दीनता, भय, विवाद, कायरता, कुटिलता, क्रोध, विषमता, अत्यंत नास्तिकता और दूसरों के दोषों को देखने का स्वभाव ये तीन तामसिक श्रद्धा के लक्षण हैं, तामसी श्रद्धा से युक्त ये सभी लक्षण परपीड़ादायक हैं।
अर्थात आत्मकल्याण की इच्छा रखने वालों को अपने में निरंतर सत्वगुण का विकास करना चाहिए, रजोगुण पर नियंत्रण रखना चाहिए तथा तमोगुण का नाश करना चाहिए, ये तीनों गुण एक-दूसरे का उत्कर्ष होने की दशा में परस्पर विरोध करने लगते हैं ये सभी एक-दूसरे के आश्रित हैं, निराश्रय होकर नही रहते, तीनों गुण सत्त्वगुण, रजोगुण तथा तमोगुण में से कोई एक अकेला कभी नही रह सकता ये सभी सदैव मिलकर रहते हैं इसलिए ये अन्योन्याश्रय संबंध वाले कहे गए हैं।
सत्त्वगुण, रजोगुण और तमोगुण के अन्योन्याश्रय संबंध होने का वर्णन अगले भाग में…..
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के अनुसार बुध के जन्म की कथा
बुध के जन्म की कथा
श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के प्रथम स्कंध के ग्याहरवें अध्याय में बुध के जन्म की सुंदर कथा मिलती है जिन्हें ४ भाग में प्रकाशित करूँगा तो चलिए जानते हैं कि श्रीमद्देवीभागवत महापुराण के अनुसार बुध के जन्म की क्या कथा है:-
ऋषय ऊचु:
कोऽसौ पुरुरवा राजा कोर्वशी देवकन्याका। कथं कष्टं च सम्प्राप्तं तेन राज्ञा महात्मना।। सर्वं कथानकं ब्रूहि लोमहर्षणजाधुना। श्रोतुकामा वयं सर्वे त्वन्मुखाब्जच्युतं रसम्।। अमृतादपि मिष्टा ते वाणी सूत रसात्मिका। न तृप्यामो वयं सर्वे सुधया च यथामरा:।।
अर्थात ऋषिगण बोले– हे सूत जी! वे राजा पुरुरवा कौन थे तथा वह देवकन्या उर्वशी कौन थी? उस मनस्वी राजा ने किस प्रकार संकट प्राप्त किया? हे लोमहर्षणतनय! आप इस समय पूरा कथानक विस्तारपूर्वक कहें हम सभी लोग आपके मुखारविंद से निःसृत रसमयी वाणी को सुनने के इच्छुक हैं, हे सूत जी! आपकी वाणी अमृत से भी बढ़कर मधुर एवं रसमयी है, जिस प्रकार देवगण अमृत पान से कभी तृप्त नही होते ठीक उसी प्रकार आपके कथा श्रवण से हम तृप्त नही होते।
अर्थात सूत जी बोले– हे मुनियों! अब आप लोग उस दिव्य तथा मनोहर कथा को सुनिए, जिसे मैंने परम श्रेष्ठ व्यासा जी के मुख से सुना है, मैं उसे अपनी बुद्धि के अनुसार कहूँगा।
सुर गुरु बृहस्पति की पत्नी का नाम “तारा” था, वह रूप-यौवन से संपन्न तथा सुंदर अंगों वाली थी एक बार वह सुंदरी अपने यजमान चंद्रमा के घर गईं उस रूप तथा यौवन से संपन्न चंद्रमुखी कामिनी को देखते ही चंद्रमा उस पर आसक्त हो गए तथा देवी तारा भी चंद्रमा को देखकर आसक्त हो गईं इस प्रकार दोनों तारा व चंद्रमा एक-दूसरे को देखकर प्रेमविभोर हो गए, ये दोनों प्रेमोन्मत्त एक-दूसरे को चाहने की इच्छा से युक्त हो विहार करने लगे इस प्रकार उनके कुछ दिन व्यतीत हुए तब बृहस्पति ने देवी तारा को घर लाने के लिए अपना एक शिष्य भेजा परंतु वह न आ सकी, जब चंद्रमा ने बृहस्पति के शिष्य को कई बार लौटाया तो बृहस्पति क्रोधित होकर चंद्रमा के पास स्वम् गए और चंद्रमा के घर जाकर उदार चित्त बृहस्पति ने अभिमान के साथ मुस्कुराते हुए उस चंद्रमा से कहा:-
अर्थात हे चंद्रमा! तुमने यह धर्मविरुद्ध कार्य क्यों किया और मेरी इस परम सुंदरी पत्नी को अपने घर में क्यों रख लिया? हे देव! मैं तुम्हारा गुरु हूँ और तुम मेरे यजमान हो तब हे मूर्ख! तुमने गुरु पत्नी को अपने घर में क्यों रख लिया? ब्रह्म हत्या करने वाला, सुवर्ण चुराने वाला, मदिरापान करने वाला, गुरूपत्नीगामी तथा पाँचवा इन पापियों के साथ संसर्ग रखने वाला– ये “महापातकी” है, तुम महापापी, दुराचारी एवं अत्यंत निन्दनीय हो यदि तुमने मेरी पत्नी के साथ अनाचर किया है तो तुम देवलोक में रहने योग्य नही हो, हे दुष्टात्मन्! असितापांगी मेरी इस पत्नी को छोड़ दो जिससे मैं इसे अपने घर ले जायूँ अन्यथा गुरु पत्नी का अपहरण करने वाले तुझको मैं श्राप दे दूँगा, इस प्रकार बोलते हुए स्त्री विरह से कातर तथा क्रोधाकुल देव गुरु बृहस्पति से रोहिणी पति चंद्रमा ने कहा:-
लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras
लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल
यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हो तो ग्रंथकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति धर्म-कर्म में निरत, श्रेष्ठ बुद्धि वाले, मातृकुल के विरोधी, पुत्रवान, सुखी और पुत्र तथा मित्रों से सुखी रहते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति सूर्य और शिव आदि देवताओं का पूजन करने वाले तथा पिता से विरोध करने वाले होते हैं, यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति उत्कृष्ट विषय और सूर्य मंडल की अद्भुत घटना वली से प्रेम रखने वाला, उदार, साधारण संपत्ति अर्जित करने वाला, अच्छी सूझ-बूझ वाला तथा पैतृक संपत्ति का त्याग करने वाले होते हैं साथ ही इन्हें प्रायः पहले और दसवें वर्ष में तीर्थ यात्रा का सौभाग्य भी प्राप्त होता है किंतु यदि सिंह राशि का सूर्य नवम भाव में हो तो प्रायः व्यक्ति के भाई नही होते या भाई से वैचारिक मतभेद रहते हैं या भाई को किसी प्रकार से स्वास्थ्य में समस्या रहती है तथा यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य अपनी मित्र राशि का हो तो व्यक्ति सात्विक, अनुष्ठान शील और धार्मिक होता है।
यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य अपनी उच्च राशि अर्थात मेष या मित्र राशि के होकर स्थित हो तो व्यक्ति के पिता दीर्घायु होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति धनवान और ईश्वर का भजन तथा भक्ति करने वाले होते हैं और इन्हें गुरु व देवताओं से अत्यधिक प्रेम रहता है किंतु यदि सूर्य लग्न कुंडली के नवम भाव में अपनी नीच राशि अर्थात तुला के होकर स्थित हों तो यह स्थिति भाग्य एवं धर्मानुष्ठान दोनो के लिए अनिष्टकर होता है और चिंता तथा विरक्ति प्रदान करता है, मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों को पिता व गुरु का पूर्ण सुख नही मिल पाता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को पुत्र एवं बांधवों से अवश्य ही सुख मिलता है साथ ही ऐसे व्यक्ति देव व ब्राह्मण के भक्त होते हैं, मानसागरी में कहा गया है कि:-
अर्थात यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति सत्यवक्ता, सुंदर केशों वाला, कुल के लोगों का हित चाहने वाला, देवताओं व ब्राह्मणों में श्रद्धा रखने वाला होता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों का बचपन में स्वास्थ्य प्रायः उतार-चढ़ाव युक्त तथा युवावस्था में स्थिरता होती है तथा ऐसे व्यक्ति धनाढ्य, दीर्घायु तथा रूपवान होते हैं, आचार्य वराहमिहिर के अनुसार यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में में सूर्य हो तो व्यक्ति सुखी होता है तथा इन्हें धन, पुत्र एवं शौर्य तीनों सुख प्राप्त होते हैं।
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव व मत के अनुसार यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति को केवल शुभ फल ही प्राप्त हों ऐसा नही होता है सभी ग्रंथकारों ने नवमस्थ सूर्य के कुछ शुभ तो कुछ अशुभ फल बताए हैं वैधनाथ जी ने तो यहाँ तक कहा है कि यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति धर्मान्तर कर लेता है जो कि अत्यंत अशुभ फल है वैधनाथ जी के मत के अनुसार व्यक्ति नवमस्थ सूर्य की अन्त: प्रेरणा से अपना परंपरागत श्रुति-स्मृति-प्रतिपादित धर्म जो छोड़कर विधर्मियों के धर्म को स्वीकार करता है ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यह फल तभी मिलते हैं जब नवम भाव का स्वामी पाप प्रभाव युक्त हो, यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हो व्यक्ति को जीवन के प्रथम भाग में दुःख तथा अंतिम भाग में सुख मिलता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को बुढापे में भी प्रायः कोई दुःख रहता है।
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य मिथुन, तुला या कुंभ राशि का हो तो व्यक्ति लेखक, प्रकाशक या प्राध्यापक हो सकते हैं, यदि मेष, सिंह व धनु राशि का सूर्य नवम भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति सेना, पुलिस या अन्य किसी प्रकार के सुरक्षा विभाग में कार्य करते हैं या फिर इंजीनियर होते हैं, यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य कर्क, वृश्चिक या मीन के हो तो व्यक्ति कवि, नाटककार, रसायन विद्या का संशोधक या धर्म से जुड़ा हुआ कार्य करने वाला होता है, यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य वृषभ, कन्या या मकर राशिगत हो तो व्यक्ति खेती या व्यापार का मालिक होता है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जीके अनुसार यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हों तो व्यक्ति धार्मिक, देवताओं व ब्राह्मणों का भक्त होता है किंतु ऐसे व्यक्ति बहुत भाग्यशाली नही होते, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति को स्त्री व पुत्र दोनो सुख उत्तम मिलते हैं तथा यदि सूर्य उच्च राशि मेष का हो तो पिता की अच्छी उन्नति व पिता से अत्यधिक प्रेम आदि फल भी मिलते हैं और ऐसे व्यक्तियों के पिता दीर्घायु होते हैं किंतु यदि सूर्य नवम भाव में नीच राशि तुला का हो तो व्यक्ति के पिता से वैचारिक मतभेद रहते हैं तथा पिता को कोई कष्ट अथवा पिता की मृत्यु आदि फल मिलते हैं।
आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन एवं ब्रह्मांड के आविर्भाव की कथा
भागवत महापुराण के अनुसार आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन एवं ब्रह्मांड के आविर्भाव की कथा
आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन एवं ब्रह्मांड के आविर्भाव की कथा
श्रीमद्देवी भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के द्वितीय अध्याय में व्यास जी कहते हैं कि:-
व्यास उवाच
यत्त्वया च महाबाहो पृष्टोऽहं कुरुसत्तम। तान्प्रश्नान्नारद: प्राह मया पृष्टो मुनिश्वरः।।
अर्थात व्यास जी बोले हे महाबाहो! हे कुरुश्रेष्ठ! आपने मुझसे जो प्रश्न पूछे हैं, उन्ही प्रश्नों को मेरे द्वारा मुनिराज नारद जी से पूछे जाने पर उन्होंने इस विषय पर ऐसा कहा था:-
नारद उवाच
व्यास किं ते ब्रवीम्यद्य पुरायं संशयो मम। उत्पन्नो हिर्दयेऽत्यर्थं संदेहसारपीड़ित:।।
अर्थात नारद जी बोले हे व्यास जी! मैं आपसे इस समय क्या कहूँ? प्राचीन काल में यही शंका मेरे भी मन में उत्पन्न हुई थी और संदेह को बहुलता से मेरा मन उद्वेलित हो गया था, हे व्यास जी! तदन्तर मैंने ब्रह्म लोक में अपने अमित तेजस्वी पिता ब्रह्मा जी के पास पहुँचकर यही प्रश्न पूछा था जो उत्तम प्रश्न आपने मुझसे पूछा है।
अर्थात हे पिता जी! इस संपूर्ण ब्रह्मांड का आविर्भाव कैसे हुआ? हे विभो! इसका निर्माण आपने किया है अथवा विष्णु ने अथवा शिव ने इसकी रचना की है? हे विश्वात्मन्! मुझे सही-सही बताइए, हे जगत्पते! सर्वश्रेष्ठ ईश्वर कौन है और किसकी आराधना करनी चाहिए?
हे ब्रह्मन! वह सब बताइए और मेरे संदेहों को दूर करिए, हे निष्पाप! मैं असत्य तथा दुःख रूप संसार में डूबा हुआ हूँ, संदेहों से दोलायमान मेरा मन तीर्थों में, देवताओं में तथा अन्य साधनों में कहीं भी नही शांत हो पा रहा है, मैं किसका स्मरण करूँ, किसका यजन करूँ, कहाँ जायूँ, किसकी अर्चना करूँ और किसकी स्तुति करूँ? हे देव! मैं उस सर्वेश्वर परमात्मा को जानता भी नही हूँ, हे सत्यवतीतनय व्यास जी! मेरे द्वारा किए गए दुरूह प्रश्नों को सुनकर लोकपितामह ब्रह्मा जी ने तब मुझसे ऐसा कहा—
रागी कोऽपि न जानाति संसारेऽस्मिन्महामते। विरक्तश्च विजानाति निरीहो यो विमत्सरः।।
एकार्णवे पुरा जाते नष्टे स्थावरजङ्गमे। भूतमात्रे समुत्पन्ने सञ्जज्ञे कमलादहम्।।
अर्थात ब्रह्मा जी बोले हे पुत्र! तुमने आज एक दुरूह तथा उत्तम प्रश्न किया है, उसके विषय में मैं क्या कहूँ हे महाभाग! साक्षात् विष्णु जी द्वारा भी इसका निश्चित उत्तर दिया जाना संभव नही है, हे महामते! इस संसार के क्रियाकलापों में आसक्त कोई भी ऐसा नही है जो इस तत्व का ज्ञान रखता हो कोई विरक्त, निःस्पृह तथा विद्वेषरहित ही इसे जान सकता है।
प्राचीनकाल में जल प्रलय होने पर स्थावर-जंगमादिक प्राणियों के नष्ट हो जाने तथा मात्र पंचमहाभूतों की उत्पत्ति होने पर मैं कमल में आविर्भूत हुआ तथा उस समय मैंने सूर्य, चंद्र, वृक्षों तथा पर्वतों को नही देखा और कमल कर्णिका पर बैठा हुआ विचार करने लगा:-
कस्मादहं सुमुद्भूत: सलिलेऽस्मिन्महार्णवे। को मे त्राता प्रभु: कर्ता संहर्ता वा युगात्यये।।
अर्थात कि इस महासागर के जल में में मेरा प्रादुर्भाव किससे हुआ? मेरा निर्माण करने वाला, रक्षा करने वाला तथा युगांत के समय संहार करने वाला प्रभु कौन है? कहीं भूमि भी स्पष्ट नही दिखाई दे रही है, जिसके आधार पर यह जल टिका है तो फिर यह कमल कैसे उत्पन्न हुआ, जिसकी उत्पत्ति जल और पृथ्वी के संयोग से ही प्रसिद्ध है, आज मैं इस कमल का मूल आधार पंक अवश्य देखूँगा; और फिर उस पंक की आधार स्वरूपा भूमि भी अवश्य मिल जाएगी, इसमें संदेह नही है।
अर्थात:- ब्रह्मा जीबोले, हे महामते! तदन्तर मैं जल में नीचे उतरकर हजारों वर्षों तक पृथ्वी को खोजता रहा, किंतु जब उसे नही पाया तब आकाशवाणी हुई कि “तपस्या करो” तत्पश्चात मैं उसी कमल पर आसीन होकर हजारों वर्षों तक घोर तपस्या करता रहा, इसके बाद पुनः एक अन्य आकाशवाणी उत्पन्न हुई “सृष्टि करो” इसे मैंने साफ-साफ सुना उसे सुनकर व्याकुल चित्त वाला मैं सोचने लगा किसका सृजन करूँ और किस प्रकार करूँ, उसी समय:-
मधु-कैटभ नाम वाले दो भयानक दैत्य मेरे सम्मुख आ गए, उस महासागर में युद्ध के लिए तत्पर उन दोनों दैत्यों से मैं अत्यधिक भयभीत हो गया तत्पश्चात मैं उसी कमल की नाल का आश्रय लेकर जल के भीतर उतरा और वहाँ एक अत्यंत अद्भुत पुरुष को मैंने देखा।
अर्थात उनका शरीर मेघ के समान श्याम वर्ण वाला था, वे पीत वस्त्र धारण किए हुए थे और उनकी चार भुजाएं थीं, वे जगत्पति वनमाला से अलंकृत थे तथा शेषशय्या पर सो रहे थे, वे शंख, चक्र, गदा, पद्म आदि आयुध धारण किए हुए थे इस प्रकार मैंने शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए उन महाविष्णु को देखा।
हे नारद जी! योगनिद्रा के वशीभूत होने के कारण निष्पंद पड़े उन भगवान् अच्युत को शेषनाग के ऊपर सोया हुआ देखकर मुझे अद्भुत चिंता हुई और मैं सोचने लगा कि अब मैं क्या करूँ? तब मैंने निद्रास्वरूपा भगवती का स्मरण किया और मैं उनकी स्तुति करने लगा, मेरी स्तुति से वे कल्याणकारी भगवती विष्णु भगवान जी के शरीर से निकलकर आकाश में विराजमान हुईं, उस समय दिव्य आभूषणों से अलंकृत वे भगवती कल्पनाओं से परे विग्रह वाली प्रतीत हो रही थीं इस प्रकार विष्णु जी का शरीर तत्काल छोड़कर जब वे आकाश में विराजित हो गईं तब उनके द्वारा मुक्त किए गए अनंतात्मा वे जनार्दन उठ गए।
अर्थात तत्पश्चात उन्होंने पाँच हजार वर्षों तक युद्ध किया, पुनः उन महामाया भगवती के दृष्टिपात से मोहित किए गए उन दोनों दैत्यों को भगवान विष्णु ने अपनी जांघों को विस्तृत कर के उनका वध कर दिया, उसी समय जहाँ हम दोनों थे वहीं पर शंकर जी भी आ गए, तब हम तीनों ने गगन-मंडल में विराजमान उन मनोहर देवी को देखा, हम लोगों के द्वारा उन परम शक्ति की स्तुति किए जाने पर अपनी पवित्र कृपा दृष्टि से हम लोगों को प्रसन्न कर के उन्होंने वहाँ स्थित हम लोगों से कहा:-
अर्थात देवी बोलीं-हे ब्रह्मा, विष्णु, महेश! अब आप लोग सृष्टि, पालन एवं संहार के अपने-अपने कार्य प्रमाद रहित होकर कीजिए अब आप लोग अपना-अपना निवास बनाकर निर्भीकता पूर्वक रहिए क्योंकि उन दोनों महादैत्यों का संहार हो गया है अतः आप लोग अपनी विभूतियों से अण्डज, पिण्डज, उद्भिज्ज और स्वदेज चारों प्रकार की प्रजाओं का सृजन कीजिए।
तब ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने उन भगवती का वह मनोहर, सूखकर तथा मधुर वचन सुनकर उनसे कहा हे माता! हम लोग शक्तिहीन हैं, अतः इन प्रजाओं का सृजन कैसे करें? अभी विस्तृत पृथ्वी ही नही है और सभी ओर जल ही जल भरा हुआ है, सृष्टि कार्य के लिए आवश्यक पंचतत्व, गुण, तन्मात्राएँ और इन्द्रियाँ ये कुछ भी नही है हम लोगों के वचन सुनकर भगवती का मुखमंडल मुस्कान से भर उठा तथा उसी समय वहाँ आकाश से रमणी विमान आ पहुँचा तत्पश्चात् उन भगवती ने कहा हे देवताओं! आप लोग निर्भीक होकर इस विमान में इच्छानुसार बैठ जाएँ।
हे ब्रह्मा, विष्णु और शिव! मैं आप लोगों को आज इस विमान में एक अद्भुत दृश्य दिखाऊँगी, उनका यह वचन सुनकर हम तीनों उनकी बात स्वीकार कर के रत्नजटित, मोतियों की झालरों से शोभायान, घंटियों की ध्वनि से गुंजित तथा देव भवन के तुल्य उस रमणीक विमान पर संशय रहित भाव से चढ़कर बैठ गए तब भगवती ने हम जितेंद्रिय देवताओं को बैठा हुआ देखकर उस विमान को अपनी शक्ति से आकाशमण्डल में उड़ाया।
शेष इसके आगे की कथा अगले लेख में श्रीमद्देवी भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के तृतीय अध्याय भागवत महापुराण के अनुसार देवी लोक के दर्शन व ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी का आश्चर्यचकित होना में…….
मंगल का कर्क राशि से गोचर 4 जून 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras
मंगल का कर्क राशि से गोचर
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार भूमि पुत्र मंगल, लोहितांग के नाम से भी जाने जाते हैं जो कि शिव जी के पसीने से उत्पन्न हुए थे और देवी पृथ्वी के आग्रह करने पर शिव जी ने उन्हें सौंपा था, मंगल ग्रह को नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाना जाता है जो कि शक्ति, पराक्रम व ऊर्जा के ग्रह हैं इनका वर्ण रक्त अर्थात लाल है यदि मंगल किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में हो तो कुज दोष जिसे हम सभी मंगल दोष के नाम से जानते हैं बनता है जो कि दामपत्य जीवन के लिए शुभ नही माना जाता है किंतु यदि यही मंगल राजयोगकारक हो जाए तो अनेक प्रकार शुभ प्रभावी हो जाता है, मेष व वृश्चिक मंगल की स्वराशि है अर्थात मेष व वृश्चिक राशि का स्वामित्व मंगल ग्रह के पास है, मंगल ग्रह मकर राशि में उच्च के तो कर्क राशि में नीच के हो जाते हैं “ऋषिकेश पंचांग (काशी)” के अनुसार मंगल ग्रह ४ जून २०२१ को नवमी तिथि शुक्रवार के दिन प्रातः ०५:२० पर मिथुन राशि को छोड़कर अपनी नीच राशि कर्क जो कि चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि है में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं मंगल के कर्क राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेंगे:-
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के लिए मंगल प्रथम भाव अर्थात लग्न एवं अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के कर्क राशि से गोचर के दौरान माता-पिता के स्वास्थ्य में समस्याएं उत्पन्न हो सकती है अतः माता-पिता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यदि आप घर खरीदने या बदलने का सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय रुक जाएं, जिन व्यक्तियों को स्किन से जुड़ी समस्या या रक्त जनित कोई समस्या हो उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जीवनसाथी के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, व्यापारियों के लिए मंगल का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ उन्नति के अवसर प्रदान करने वाला रहेगा, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी।
उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए मंगल सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद होने की संभावना रहेगी, आलस्य का त्याग करें, मंगल के इस गोचर काल के दौरान आप में क्रोध की अधिकता रहेगी व आप शीघ्र ही आवेश में आकर कोई ऐसा कार्य कर सकते हैं जिसका आपको बाद में अफसोस होगा अतः आवेश में आने से बचें, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी अतः तनाव लेने से बचें, जो व्यक्ति सेना, पुलिस, ईंधन, विज्ञान या वैध के कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, फोड़े-फुंसी व घाव के अतिरिक्त स्किन से जुड़ी एलर्जी एवं रक्त जनित कोई समस्या संभव रहेगी, भुजाओं में कुछ कमजोरी अनुभव हो सकती है, भाग्य वृद्धि हेतु अतिरिक्त परिश्रम करना होगा व अत्यधिक परिश्रम करने पर कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त होगी।
उपाय:- सिद्धकुंजिका स्तोत्र का नित्य पाठ करें।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए मंगल षष्ठ एवं एकादश भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जीके अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान मिथुन राशि वाले व्यक्तियों को अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ जाएंगे व लोग आपके शत्रु बन जाएंगे, दवाईयों व शत्रुओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में कुछ कटुता आएगी जिस कारण से ससुराल पक्ष व जीवनसाथी के साथ विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा।
उपाय:- नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व चतुर्थी का व्रत करें।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए मंगल पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो आपके लग्न अर्थात प्रथम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपने क्रोध पर विशेष तौर पर नियंत्रण रखना होगा अन्यथा कलह-क्लेश व झगड़े-विवाद के साथ जेल यात्रा के योग बन सकते हैं, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी कुछ कटु अनुभव होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए मंगल यह गोचर काल मिला-जुला फल देने वाला रहेगा, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं व स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, मंगल का यह गोचर काल बेरोजगारों को नौकरी के अवसर प्रदान करने वाला रहेगा।
उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें व गाय को गुड़ खिलाएं।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो कि आपके द्वादश भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना चाहिए, माता व धर्म से जुड़े कार्यों पर धन व्यय होगा, इस गोचरकल के दौरान आपको कार्यक्षेत्र में बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होगी, धैर्य व संयम से कोई भी निर्णय लें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, कलह-क्लेश व झगड़े-झंझटों के कारण से आपका मन अशांत रहेगा हालांकि शत्रु आपका कुछ बिगाड़ नही पाएंगे फिर भी आपको घर-परिवार के साथ खुलकर जीवन का आनंद लेने में दिक्कतें आएंगी व आप खुद असहज अनुभव करेंगे, छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें।
उपाय:- नित्य गाय को रोटी और गुड़ खिलाएं व हनुमान चालीसा का पाठ करें।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव अर्थात लाभ स्थान से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपने बड़े भाई के स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, आय में कुछ परिश्रम से वृद्धि के योग बनेंगे, स्वभाव में कुछ तेजी आएगी, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, संतान से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, स्थान परिवर्तन या नौकरी परिवर्तन हेतु किए जाने वाले प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, व्यय में वृद्धि होगी, किसी भी प्रकार के जुए व सट्टे में पैसा लगाने से बचें, पशु, हथियार, अग्नि एवं वाहनादि से चोट लगने की संभावना रहेगी।
उपाय:- नित्य गाय को रोटी व गुड़ खिलाएं।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान पिता को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र में अत्यधिक परिश्रम करने पर उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, किसी उच्चपदाधिकारी से मुलाकात संभव है, आपके जीवनसाथी की माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है साथ ही उनका स्वभाव भी कुछ चिड़चिड़ा सा अनुभव होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, इस गोचर काल दौरान आपको अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी विषय पर बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए क्योंकि मंगल का कर्म स्थान में नीच राशि से गोचर कुछ झंझटों को अचानक से उत्पन्न करने वाला रहेगा, प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी, जीवनसाथी के साथ विवाद संभव रहेगा।
उपाय:- नित्य श्री सूक्त का पाठ करें।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल प्रथम भाव अर्थात लग्न व षष्ठ भाव के स्वामी होकर नवम भाव अर्थात भाग्य भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान शत्रु आपकी उन्नति में बाधक बनने का प्रयास करेंगे, पिता के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है, भाई-बहन के मध्य वैचारिक मतभेद उत्पन्न होंगे, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा, तनाव लेने से बचें, मंगल के इस गोचरकाल के दौरान आपके किए गए प्रत्येक प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, आलस्य का त्याग करें, मन को क्षणिक सुख देने वाले साधनों तथा वाहनादि पर धन व्यय होगा, उच्चपदाधिकारी व्यक्ति से मुलाकात संभव है जिनसे निकट भविष्य में आपके अटके हुए कार्य पूर्ण होंगे।
उपाय:- प्रत्येक मंगलवार हनुमान बाहुक व सुंदरकांड का पाठ करें।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वालों के लिए मंगल पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको शत्रुओं से सतर्क रहना चाहिए तथा शीघ्र ही किसी की बातों में आने व लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचना चाहिए, यात्राओं के योग बनेंगे, इस गोचरकल के दौरान यात्रा, दवा व परिवार पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, फोड़े-फुंसी, घाव, अग्नि भय, ज्वरादि की समस्या रह सकती है, खान-पान का विशेष ख्याल रखें व तेज मिर्च-मसाले वाले भोजन से परहेज करें, यदि आपने कहीं ऋण के लिए आवेदन किया हुआ है तो वह स्वीकृत हो जाएगा, दाम्पत्य जीवन में अनेक अवसर पर विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, जीवनसाथी के उदर व कमर के निचले हिस्सों में या एलर्जी की समस्या रह सकती है।
उपाय:- नित्य विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें व गाय को गुड़ खिलाएं।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस गोचरकाल के दौरान छोटे भाई-बहन के विवाह हेतु यदि कहीं बात चल रही है तो उसमें अचानक से कोई बाधा आ सकती है, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा काम त्रिकोण में अग्नि तत्व ग्रह के जल तत्व राशि से गोचर करने के कारण से जीवनसाथी के साथ क्षणिक विवाद होने की संभावना रहेगी, ससुराल पक्ष के लोगों से विवाद संभव रहेगा, जो लोग पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं उनके लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तेज ज्वर, सिर में पीड़ा, मूत्रेन्दीय संबंधित कोई समस्या संभव रहेगी, व्यापारियों के लिए मंगल का यह गोचर उन्नति के नए अवसर प्रदान करने वाला रहेगा, आप इस दौरान स्पष्ट रूप से वार्ता करने पर विश्वास रखेंगे जिस कारण से अनेक अवसर ओर आपकी कही हुई बातें लोगों को बुरी लग सकती है, उदर में कोई समस्या संभव है अतः तेज मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, वाहन सावधानी से चलाएं।
उपाय:- मंगलवार के दिन गाय को मसूर की दाल भीगा कर खिलाएं।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान आपको अपने क्रोध व वाणी पर विशेष रूप से नियंत्रण रखना चाहिए, सरकारी कर्मचारियों विशेषतः सुरक्षा बलों के साथ व्यर्थ विवाद में पड़ने से बचें अन्यथा जेल यात्रा के योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, विपरीत परिस्थितियों में कड़े संघर्ष के उपरांत उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, अकास्मिक व्यय में वृद्धि होने से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होगी अतः तनाव लेने से बचें, दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, स्वास्थ्य के लिहाज से मंगल का यह गोचर आपके लिए सामान्य रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, मामा पक्ष में किसी को स्वास्थ्य जनित समस्या रह सकती है।
उपाय:- गाय को रोटी व गुड़ नित्य खिलाएं।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी किंतु अनेक अवसर पर विवादपूर्ण स्थितियाँ भी उत्पन्न होंगी, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, विद्यार्थियों का मन शिक्षा की जगह खेल-कूद या अन्य किसी मनोरंजन के साधनों पर लगेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें व शांत होकर धैर्य से काम लें, उदर जनित कोई समस्या संभव रहेगी, ससुराल पक्ष व जीवनसाथी की वाणी में कुछ तेजी अनुभव होगी जिस कारण उनसे विवाद होने की संभावना रहेगी, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी।
उपाय:- नित्य शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक करें व मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर अर्पित कर हनुमान चालीसा का पाठ करें।
लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras
लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल
यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो ग्रंथकारों का मत है कि व्यक्ति दुबला, मझोले कद वाला, भूरे रंग के केश और नेत्र से युक्त, चंचल, भय युत, स्त्री सहवास तथा सुख भोगने में आसक्त, स्त्रियों से विरोध करने वाला तथा स्त्रियों से अनादर पाने वाला, परस्त्री प्रेमी एवं परगृही भोजी होता है तथा ऐसे व्यक्तियों की प्रायः दो स्त्रियाँ होती है और विवाह विलंब से होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति धनहीन, राज कोप से दुःखी तथा कदन्न भोजी होते हैं तथा यदि ऐसे व्यक्तियों का शीघ्र विवाह हो तो १४ वें या ३४ वे वर्ष में स्त्री का नाश और २५ वें वर्ष में परदेश यात्रा होती है, यदि सप्तम भाव में सिंह राशि का सूर्य हो तो एक स्त्री होती है किंतु यदि सूर्य पर शत्रु ग्रह की दृष्टि हो अथवा सूर्य शत्रु ग्रह के साथ अथवा पाप ग्रह से युक्त हो तो बहुत सी स्त्रियाँ होती है।
मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति राजा से विरोध रखता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों के आचरण से राजा इनके विरुद्ध हो जाते हैं और ऐसा व्यक्ति राजा द्वारा दंड को प्राप्त करने वाला होता है जिससे ऐसे व्यक्तियों की प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है साथ ही ऐसे व्यक्ति पैदल चलते हैं और ऐसे व्यक्ति स्त्रीहीन या स्त्रियों से विरोध सहने वाला तथा स्त्री के अभाव में पुरुष धर्म-अर्थ और काम से वंचित रहता है, मानसागरी में कहा गया है कि यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो:-
युवतिभवन संस्थे भास्करे स्त्रीविलसी, न भवति सुखभागी चंचल: पापशील:। उदरसमशरीरो नातिदीर्घो न ह्रस्व:, कपिलनयनरूप: पिंगकेश: कुमुर्ति:।।
अर्थात यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति को स्त्री का भोग-उपभोग मिलता है किंतु वह सुखी नही होता है तथा ऐसे व्यक्ति अस्थिर स्वभाव के और पापकर्म कर्ता होते हैं साथ ही इनके उदर और देह एक बराबर होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति न तो बहुत लंबा होता है और न ही बहुत छोटा होता है, ऐसे व्यक्तियों का रूप-रंग और आँखें कपिल होती हैं तथा केश कुछ पीले होते है मानसागरी के अनुसार सप्तम का सूर्य पति-पत्नी का सौमनस्य कायम रखता है अन्यथा व्यक्ति को स्त्री का उपभोग अच्छा मिलता है तो वहीं वराहमिहिर जी ने कहा है कि यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो “स्त्रीभी: गत: परिभवं मगदे पतंगे” अर्थात स्त्रियों से तिरस्कार अर्थात अनादर पाने वाला और स्त्रियों का घृणापात्र होता है।
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सप्तम भाव में सूर्य मेष, सिंह व मकर राशि का हो तो ही उपरोक्त ग्रंथकारों द्वारा बताए गए अशुभ फल प्राप्त होते हैं, यदि सप्तम भाव में सूर्य मिथुन, तुला या कुंभ राशि का हो तो व्यक्ति शिक्षा विभाग में अच्छी प्रगति करता है साथ ही कानून का विशेषज्ञ होता है और संगीत, नाट्य व रेडियो आदि साधनों में प्रगति करता है ऐसे व्यक्तियों को एक या दो ही संतान होती है, यदि मेष, सिंह या धनु राशि का सूर्य सप्तम भाव में हो तो प्रायः व्यक्ति के दो विवाह होते हैं या एक ही विवाह बहुत विलंब से होता है तथा ऐसे व्यक्ति स्वतंत्रता प्रिय होते हैं अर्थात ऐसे व्यक्ति नौकरी करना पसंद नही करते हैं, यदि सप्तम भाव में सूर्य वृषभ, कन्या या मकर राशि का हो तो ऐसे व्यक्तियों को व्यापार में अच्छा लाभ होता है और ऐसे व्यक्ति जनपद या विधानसभा चुनाव में भी विजयी होते हैं, यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य कर्क, वृश्चिक या मीन राशि का हो तो व्यक्ति वैध/डॉक्टर होता है या विज्ञान विषयक पदवी को प्राप्त करता है या किसी नहर का अधिकारी होता है, यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर या मीन राशि का हो तो व्यक्ति ५० वें वर्ष तक अच्छी उन्नति प्राप्त करता है किंतु इसके उपरांत संघर्ष करता है, पुरुष राशि का सूर्य यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति के जीवन में प्रायः उतार-चढ़ाव बने रहते हैं और ५०-५२ वर्ष की आयु के पास उनके जीवनसाथी की मृत्यु हो जाती है या मृत्यु तुल्य कष्ट प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है साथ ही इन्हें संतान कम ही होती है किंतु स्त्री राशि का सूर्य लग्न कुंडली के सप्तम भाव में हो तो संतान अधिक होती है।
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति की पत्नी प्रभावशालिनी, व्यवहार और बर्ताव में अच्छी, विपत्ति के समय पति का साथ देने वाली, अतिथि सत्कार करने वाली, दयालु, नौकरों से अच्छा काम निकाल लेने वाली और धन प्रिया और रूपवती होती है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य मेष, सिंह, धनु और मीन राशि का हो तो व्यक्ति को प्रायः अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है और प्रेम विवाह होने के बाद भी पति-पत्नी में संबंध विच्छेद हो जाता है या पत्नी अपने पति को उनके श्वसुर के घर पर रहने को या पति के श्वसुर द्वारा दिए गए घर पर रहने को मजबूर करती है।
विशेष:-
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार आज से कई वर्ष पूर्व यवनराज्य सत्ता में अविवाहित लड़कियों का अपहरण हो जाने के कारण से कन्याओं का विवाह “अष्टवर्षा भवेद् गौरी दशवर्षा च रोहिणी” के अनुसार १०-१२ वर्ष में हो जाता था शायद इसी कारण से विभिन्न ग्रंथकारों ने सप्तमस्थ सूर्य के अशुभ फल को बताया है यहाँ एक विचारीय विषय यह है कि क्या केवल सप्तम भाव में सूर्य को देखकर यह फलकथन कहना उचित होता है? ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार भृगुसूत्र में बताया गया है कि यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो विवाह देरी से होता है क्या यह पूर्णतया तर्क संगत लगता है?? यह एक विचारणीय विषय है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव के अनुसार यदि सिंह राशि का सूर्य सप्तम भाव में हो या सप्तम भाव को शुभ बली ग्रह देखते हों तो एक ही विवाह होता है।
मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव
बुध वक्री 30 मई 2021: जानिए विभिन्न राशियों पर इसके प्रभाव–Astrology Sutras
मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव
३० मई २०२१ को बुध मध्य रात्रि १:१६ मिनट पर मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे, बुध को वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में रहते हैं साथ ही बुध को अस्त होने का भी दोष नही लगता है तो चलिए जानते हैं बुध के वक्री अवस्था से मिथुन राशि में गोचर करने से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप पराक्रम में कुछ कमी आएगी तथा आप बिना विचार किए कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं जिससे आपको आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहेगी अतः कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-विचार कर ही लें, छोटे भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, बुआ के पक्ष में किसी के स्वास्थ्य की समस्या से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे जिस कारण से आपकी कहि हुई बात लोगों को बुरी लग सकती है अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, मोबाइल फोन हैंग होने या मोबाइल फोन में अन्य किसी प्रकार की समस्या आ सकती है, घर के महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच-विचार कर ही लें, ननिहाल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है, संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है अतः संतान के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवास्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप घर में किसी चर्चा को लेकर विचारों में भिन्नता के कारण से क्षणिक विवाद होने की संभावना रहेगी, मन में अनेक प्रकार के विचार आएंगे, बुद्धि व विवेक द्वारा लिए गए निर्णय कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्रदान करेंगे, माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, वाहन या किसी मशीनरी पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता आएगी, दूरसंचार, बैंकिंग, फाइनेंस आदि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप व्यय में वृद्धि होगी, यात्रा या छोटी बहन या बुआ पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, मन में स्थिरता का अभाव रहेगा, शत्रुओं पर बुद्धि-विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, बुध के वक्री होने से अकास्मिक खर्चों में वृद्धि तनाव का कारण बन सकता है, ननिहाल पक्ष से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए बुध वक्री होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा, जीवनसाथी के साथ पूर्व से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, लोगों पर अधिक विश्वास करने से आपको बचना होगा अन्यथा किसी प्रकार से आर्थिक हानि हो सकती है, कोई संपत्ति क्रय करने के योग बनेंगे।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए बुध दशम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष आदि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनकी उन्नति के प्रवल योग बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में अवश्य ही प्राप्त होगा, पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा किंतु माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, बुआ/मासी/बहन आदि के स्वास्थ्य में सुधार होगा।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी व धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, गुरु की सलाह इस दौरान आपके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार हेतु कुछ नए विचार मन में आएंगे, नव दमपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय हो सकता है, बड़ी बहन या बुआ के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है, जिनका कार्य ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस, धर्म, टीचिंग आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है उनके उन्नति हेतु नए अवसर बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में मिलेगा, स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहें, चर्म से जुड़ी कोई समस्या संभव है, मोबाइल/लैपटॉप आदि में कुछ परेशानी के कारण धन व्यय हो सकता है।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय रुक जाएं, पिता की उन्नति होगी व पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, व्यापारियों के कार्यक्षेत्र में कुछ वृद्धि होगी, जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष, धर्म आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात संभव है।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ भाव से वक्री अवास्था से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अधिक शुभ नही है अतः अपने प्रयासों में वृद्धि लाएं, बुआ व मासी के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी संभव है, नए मित्र बनेंगे।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव रहेगी, गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता होगी हालांकि आपके प्रथम भाव से गुरु का गोचर है अतः कोई गंभीर समस्या उत्पन्न होती नही दिख रही है, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए यह समय सामान्य रहेगा, घर में किसी शुभ कार्य का आयोजन या किसी शुभ समाचार का आगमन संभव रहेगा, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान, यात्रा व परिवार पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, व्यापारियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, स्थान परिवर्तन संभव है, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।
शुक्र का मिथुन राशि से गोचर 28 मई 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
शुक्र का मिथुन राशि से गोचर
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार जीवन में जितने भी सुख-संसाधन होते हैं उन सब का विचार शुक्र ग्रह से किया जाता है शुक्र ग्रह प्रेम, विवाह, शैय्या सुख व अनेक चीजों के कारक होते हैं वृषभ इनकी स्वराशि, तुला मूलत्रिकोण, मीन उच्च राशि व कन्या नीच राशि होती है, ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार २८ मई २०२१ को प्रातः ०४:४५ पर शुक्र वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के इस गोचर परिवर्तन से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे महान चातुर्य का कारक ग्रह का पराक्रम भाव से गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम के द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है, पड़ोस के किसी विपरीत लिङ्ग व्यक्ति के प्रति आकर्षण हो सकता है, स्वास्थ्य उत्तम रहेगा फिर भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें क्योंकि मेष राशि वालों के लिए शुक्र मारक ग्रह होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकती है, छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उन्हें नए अवसर प्राप्त होंगे, महिलाओं संग वाद-विवाद से बचें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व षष्ठ भाव के स्वामी होकर धन व कुटुंब स्थान अर्थात द्वितीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, चतुराई युक्त नीतियों से धन संचय करने में सहायता मिलेगी किंतु किसी महिला या दवाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें हालांकि शत्रु आपका अहित नही कर सकेंगे किंतु व्यर्थ में तनाव व धन व्यय में वृद्धि के सूचक हो सकते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर अच्छा रहेगा।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक व चतुराई के द्वारा उन्नति के योग बनेंगे, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यात्राओं के योग बनेंगे, किसी महिला के कारण से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यात्राओं के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, नए मित्र बनेंगे, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, जिन्हें हार्मोन्स या शुगर या अन्य किसी प्रकार की रक्त संबंधित समस्या हो वह शुक्र के इस गोचर दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहें।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से व्यय में वृद्धि होगी, महिलाओं, सुख देने वाले संसाधनों, वाहन या अन्य किसी संपत्ति पर धन व्यय होने के योग हैं, फैशन से जुड़ी चीजों पर भी धन व्यय होने के योग बनेंगे, माता व बड़ी बहन के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, शत्रुओं से सावधान रहें व किसी भी महिला के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, शुक्र के इस गोचर के दौरान आप चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त करने में सफल होंगे, महिलाओं विशेषकर बहन व माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपके पड़ोस में कोई ऐसी महिला हो जो उच्च पद पर आसीन हो तो उनसे भी लाभ मिलने की संभावना बनेगी, छोटे भाई-बहन यदि विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व ज्यादा चटपटे या गर्म पदार्थों के सेवन से परहेज करें।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर कर्म स्थान अर्थात दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर आपके लिए प्रत्येक प्रकार से शुभफलदाई सिद्ध होगा कारोबार में उन्नति होगी, आय में वृद्धि होगी, किसी महिला के माध्यम से भाग्य में वृद्धि होगी, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उनको नए अवसर प्राप्त होंगे, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व अष्टम भाव के स्वामी होकर भाग्य स्थान से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य में वृद्धि होगी व महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा किंतु किसी महिला के कारण से भाग्योन्नति में अड़चनें आएंगी, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, स्वास्थ्य में सुधार होगा फिर भी स्वास्थ्य हेतु सचेत रहें, पिता को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, धार्मिक कार्यों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अर्थात शुक्र आपके लिए प्रवल मारक होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे अतः शुक्र के इस गोचर काल के दौरान आपको स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा हालांकि अष्टम भाव से शुक्र का गोचर आयुष्य पर संकट नही देता फिर भी जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी चिंता का कारण बन सकती है, दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, दवाईयों व महिलाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, महिलाओं के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें, ससुराल पक्ष के किसी महिला के स्वास्थ्य में कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा कार्यक्षेत्र का विस्तार करने में सफल होंगे, जिनका कार्य सौंदर्य प्रकाशन, टीचिंग, ज्योतिष, लेखक आदि से जुड़ा हुआ है उनके लिए शुक्र का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ उन्नति प्रदान करने वाला होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, महिलाओं से सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, दाम्पत्य जीवन में कुछ झगड़े-झंझटों के योग बनते हैं किंतु आप उन पर अपनी चतुराई से विजय प्राप्त करने व दाम्पत्य जीवन को मधुर बनाने में सफल होंगे, कार्यक्षेत्र में अवरोध उत्पन्न होंगे जिन्हें आप चतुराई से दूर करने में सफल होंगे, पुराने मित्रों से मुलाकात या वार्ता संभव रहेगी जिससे आपको प्रसन्नता की अनुभूति होगी, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा क्योंकि आपकी राशि के लिए शुक्र रोग, रिपु व ऋण के भाव का स्वामी होता है, जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें हार्मोन्स या रक्त विकार से जुड़ी समस्या हो उनको अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा, भाग्य की वृद्धि होगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, महिलाओं से लाभ होगा, बड़ी बहन के ससुराल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या संभव है।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, अचानक किसी यात्रा के योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार, दवाईयों, संतान, माता-पिता व महिलाओं पर धन व्यय होगा, किसी अपरिचित व्यक्ति की बातों में आने से बचें, सुख प्रदान करने वाले संसाधनों पर भी धन व्यय होगा, जिन्हें हिर्दय, रक्त विकार, हार्मोन्स या उदर संबंधित समस्या हो वह अपने स्वास्थ्यबक प्रति पूर्ण सतर्क रहें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर प्रत्येक प्रकार से आपके लिए शुभफलदाई रहने वाला होगा नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा, घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, भाग्य में वृद्धि होगी, विद्यार्थियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा, संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा, जो लोग धार्मिक कार्यों से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह शुक्र का गोचर उन्नति के नए अवसर प्रदान करेगा, जीवनसाथी से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे व दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी तथा जीवनसाथी के साथ किसी रोमैंटिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनवपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन प्रसन्न रहेगा, कार्यस्थल पर अनैतिक संबंध बनने के योग है अतः अनैतिक संबंध बनाने से बचें अन्यथा निकट भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, घर में किसी सदस्य के स्वास्थ्य में समस्या चिंता का मुख्य कारण बनेगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, संतान से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त करने हेतु आपको धैर्य रखते हुए चतुराई भरे बड़े पराक्रम से सफलता प्राप्त होगी।
लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras
लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो शास्त्रकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति दुबले, मानसिक चिंता से ग्रस्त, अकारण विवाद प्रिय, आत्मीय जनों से घृणा करने वाले, घमंडी, कपटी, संग्राम में निश्चल, बहुत स्त्री वाले, प्रतिष्ठित, विख्यात तथा सुख, धन, यान आदि रहित, पिता के धन को खर्च करने वाले व भ्रमणशील होते हैं और ऐसे व्यक्तियों के बन्धु-बांधव और वाहनादि के नाश का भी भय होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को शोभायुक्त अधिकार अवश्य प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्ति परदेश या विदेश में वास करते हैं तथा इनका चित्त किसी भी समय शांत नही रहता है।
मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य सुखहीन, बंधुहीन, भूमिहीन, मित्र रहित तथा भवनहीन होता है, ऐसे व्यक्तियों को राजसेवा प्राप्त होती है तथा ऐसे व्यक्ति संपत्ति को नष्ट करने वाले होते हैं, आचार्य वराहमिहिर जी ने कहा है कि “विसुख: पीड़ित मानस: चतुर्थे” अर्थात चतुर्थ भाव का सूर्य हो तो व्यक्ति सुखहीन तथा अशांत चित्त वाला होता है मानसागरी में लिखा है:-
अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य लोकप्रिय तथा सर्वजनप्रिय होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति कोमल हिर्दय वाले होते हैं और इनका प्रेम गीत व वाद्यकलाओं में होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति युद्ध में आगे होकर लड़ते हैं और कभी पीठ नही दिखाते साथ ही ऐसे व्यक्तियों को स्त्री सुख और विपुल धन सुख मिलता है और ऐसे व्यक्ति राजप्रिय होते हैं।
सूर्य के चतुर्थ भाव के अनेक शास्त्रकारों ने अपने-अपने मत रखे हैं जिनमे समानता का अभाव देखने को मिलता है कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल तो कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के निकृष्ट फल बताए हैं चलिए एक और ग्रंथकार के मत को देखते हैं वैधनाथ जी ने चतुर्थ भाव के फल में लिखा है कि “हिर्दय रोगी धन-धान्य-बुद्धि रहित: क्रूर: सुखस्थे रवौ” अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति हिर्दय के रोग से पीड़ित और धन-धान्य व बुद्धि से हीन और क्रूर होता है।
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार चतुर्थ भासव से व्यक्ति के सुखों व माता का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य (क्रूर ग्रह) बैठा हो तो उससे यह तो निश्चित हो जाता है कि व्यक्ति को जीवन में सुख प्राप्ति हेतु अत्यंत परिश्रम करना पड़ता है ऊपर अनेक ग्रंथकारों के मत पर चर्चा की गई है जिसमें मानसागरी ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल को बताया है तो वहीं अन्य ग्रंथकारों ने इसे निकृष्ट फल देने वाला बताया है किंतु मेरे अनुभव में अब तक यही आया है कि यदि चतुर्थ भाव में सूर्य यदि वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि का हो तो अशुभ फल मिलते हैं और यदि चतुर्थ भाव में सूर्य मेष या कर्क राशि का हो तो व्यक्ति संशयी, म्लान चेहरे वाला और वैश्यागामी होता है किंतु चतुर्थ भाव में सूर्य यदि मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर और मीन राशि का हो तो शुभ फल मिलते हैं, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्तियों को बचपन में अनेक प्रकार के कष्ट होते हैं किंतु २८ से ५० वर्ष की आयु में व्यक्ति अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करता है, लग्न कुंडली के यदि चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति पहली अवस्था में दुःखी, मध्य में सुख व वृद्धावस्था में पुनः दुःखी होता है तथा विभिन्न ग्रंथकारों द्वारा बताए गए अशुभ फल कुछ विशेष राशियों जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है या सूर्य के अन्य क्रूर से संबंध बनाने पर ही मिलता है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव व मत के अनुसार यदि चतुर्थ भाव के स्वामी बली ग्रहों से युक्त हो या चतुर्थ भाव का स्वामी केंद्र अथवा त्रिकोण में हो या सूर्य चतुर्थ भाव में सिंह राशि का हो तो ऐसी स्थिति में सूर्य के शुभ फल मिलते हैं तथा व्यक्ति को वाहनादि का सुख प्राप्त होता है किंतु यदि चतुर्थ भाव का स्वामी भी पीड़ित हो प्रायः सभी सुखों का नाश होता है।