Loading...
Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल

मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल

 

मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव मे सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव मे सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के सप्तम भाव स्त्री व रोजगार स्थान पर अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली धनु राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका तेजस्वी कर्म की शक्ति के द्वारा गृहस्थ सुख को प्राप्त करेंगे तथा रोजगार के मार्ग में कठिन परिश्रम से बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे साथ ही भाई-बहन का भी उत्तम सुख प्राप्त करेंगे और सूर्य के सातवीं दृष्टि से प्रथम भाव अर्थात लग्न (देह स्थान) को अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका के जीवनसाथी के स्वभाव में कुछ तेजी और गर्मी रहेगी और भोगादिक पक्ष में शक्ति प्राप्त करेंगे तथा उन्नति हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे और समाज में अच्छा मान-सम्मान व प्रभाव प्राप्त करेंगे।

 

मिथुन लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के अष्टम भाव आयु-मृत्यु व पुरातत्व स्थान पर सूर्य के अपने शत्रु शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को भाई-बहन के सुख-संबंधों में कुछ हानि व कमी अनुभव होगी और पुरुषार्थ कर्म के मार्ग में असफलता व कमजोरी प्राप्त होगी तथा कठिन परिश्रम करने के कारण से जीवन में अशांति अनुभव होगी और अपने बाहुबल के कार्यों में निराशाओं के कारण से कभी-कभी जातक/जातिका हिम्मत हार जाएंगे और पुरातत्व संबंध की कुछ नीरसता युक्त शक्ति प्राप्त होगी साथ ही सूर्य के द्वितीय भाव धन व कुटुंब स्थान को मित्र चंद्र के स्वामित्व वाली कर्क राशि मे देखने के कारण से जातक/जातिका धन की वृद्धि करने के लिए थकान पाने वाले परिश्रम से सफलता प्राप्त करेंगे और उत्साह हीन कुटुंब का सुख प्राप्त करेंगे।

 

मिथुन लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के नवम भाव भाग्य व धर्म स्थान पर अपने शत्रु शनि के स्वामित्व वाली कुंभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को भाई-बहन का कुछ अरुचिकर सहयोग प्राप्त होगा और जातक/जातिका अपने पुरुषार्थ द्वारा भाग्य की वृद्धि करने में सफल रहेंगे और कुछ भेद भावना रखते हुए धर्म का पालन करेंगे एवं सूर्य के सातवीं दृष्टि से तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम स्थान को अपने स्वम् के स्वामित्व वाली सिंह राशि में देखने के कारण से भाग्य की कुछ अरुचिकर सहयोग शक्ति से पराक्रम द्वारा सफलता प्राप्त होगी तथा जातक/जातिका हिम्मत से काम लेंगे और पुरुषार्थ पर भाग्य की अपेक्षा अधिक विश्वास रखेंगे साथ ही भाई-बहन का कुछ सहयोग प्राप्त करेंगे तथा कुछ तेजस्वी कर्म द्वारा उन्नति प्राप्त करेंगे।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल

मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान पर सूर्य के अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली कन्या राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका पराक्रम शक्ति के द्वारा घरेलू सुख के साधनों में वृद्धि करने में सफल रहेंगे और भाई-बहन का सुख व सहयोग प्राप्त करेंगे और माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त करेंगे साथ ही भूमि व मकानादि का भी उत्तम सुख प्राप्त होगा और सूर्य के सातवीं दृष्टि से दशम भाव पिता व राज्य स्थान को अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली मीन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका पराक्रम शक्ति द्वारा पिता-स्थान में सफलता प्राप्त करेंगे और राज-समाज में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे तथा कारोबार के मार्ग में बड़ी सफ़लता प्राप्त करेंगे और सुख पूर्वक पराक्रम शक्ति द्वारा अर्थात परिश्रम से उन्नति प्राप्त करेंगे।

 

मिथुन लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के पंचम भाव विद्या व संतान स्थान पर अपनी नीच राशि व शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली तुला राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को संतान पक्ष में कुछ कष्ट अनुभव होगा और कठिन परिस्थितियों से होते हुए शिक्षा पूर्ण होगी तथा बाहुबल की पराक्रम शक्ति में कुछ कमजोरी अनुभव होगी साथ ही जातक/जातिका बोल-चाल में कुछ छिपाव शक्ति से काम लेंगे और सूर्य के सातवीं दृष्टि से एकादश भाव लाभ स्थान को सूर्य के अपने उच्च राशि व मित्र मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका बुद्धि और बाहुबल की शक्ति से धन वृद्धि करने में विशेष रूप से सफल होंगे साथ ही धन वृद्धि हेतु कुछ झूठ और छिपाव शक्ति से काम लेंगे क्योंकि बुद्धि स्थान पर सूर्य नीच राशि में स्थित होकर लाभ भाव को उच्च भावना से देख रहा है, इसलिए लाभ के मुकाबले में जातक/जातिका लाभ के मुकाबले में शब्द शक्ति के सत्य-असत्य की परवाह नही करेंगे और अच्छा धन लाभ प्राप्त करेंगे।

 

मिथुन लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान पर सूर्य के अपने मित्र मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में बैठा होने के कारण से पराक्रम शक्ति द्वारा जातक/जातिका को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी तथा विपक्षियों के सामने जातक/जातिका सदैव ही विजय प्राप्त करेंगे और प्रतियोगी परीक्षाओं को अपने पराक्रम द्वारा बड़ी ही सहजता से उत्तीर्ण करने में सफल रहेंगे किंतु भाई-बहन के सुख-संबंधों में कुछ वैमन्यस्ता प्राप्त करेंगे और सातवीं दृष्टि से सूर्य के द्वादश भाव अर्थात खर्च व बाहरी स्थान को अपने शत्रु शुक्र की वृषभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को खर्च के मार्ग में कुछ असंतोष रहेगा तथा बाहरी स्थानों में कुछ नीरसता प्राप्त होगी किंतु जातक/जातिका खर्च के मार्ग में शक्ति प्राप्त करने के लिए अत्यधिक कठिन परिश्रम करेंगे और खर्च हेतु धन की व्यवस्था करने में सफल रहेंगे।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

परिवार से सम्मान मिलेगा या अपमान–Astrology Sutras

परिवार से सम्मान मिलेगा या अपमान–Astrology Sutras

 

परिवार से सम्मान मिलेगा या अपमान
परिवार से सम्मान मिलेगा या अपमान

 

भाग:-१

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंडली का चतुर्थ भाव व्यक्ति की मानसिक स्थिति, सोच व पारिवारिक सुख को दर्शाता है और यदि चतुर्थेश पीड़ित होकर सप्तम भाव को देखता है तो माता के कारण से दाम्पत्य जीवन में कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं ग्रंथकारों का मत है कि:-

 

बंधुद्वेषी भवेन्नित्यं पापाक्रांते ग्रहे यदा।
नीचास्तखेतसंयुक्ते शुभदृग्योगवर्जिते।।

 

अर्थात:- यदि चतुर्थेश पाप ग्रहों से पीड़ित हो या नीच राशि का हो या शत्रु राशि का हो या अस्त ग्रहों से युत हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट या युत न हो तो व्यक्ति अपने जाति से द्वेष करता है।

 

चलिए इसको एक उदाहरण कुंडली से समझने का प्रयास करते हैं:-

 

उदाहरण कुंडली:-१
उदाहरण कुंडली:-१

 

इस कुंडली में उपरोक्त श्लोक के अनुसार चतुर्थेश सूर्य षष्ठ भाव में अपनी नीच राशि तुला में राहु व लग्नेश शुक्र से युत है यद्यपि यहाँ सूर्य का नीचभंग हो रहा है फिर भी सूर्य के अपने नीच राशि में स्थित होने के कारण से व मनोस्थिति के ग्रह सूर्य का षष्ठ भाव में जाना यह दर्शाता है कि व्यक्ति में द्वेष भावना अत्यधिक बली रहेगी और व्यक्ति प्रायः परेशान रहेंगे और इन्हें परिवार वालों के साथ तालमेल बैठाने में दिक्कतें आएंगी साथ ही लग्नेश का भी षष्ठ भाव में जाना भी इसी चीज को और बली करता है जिस कारण से व्यक्ति का स्वभाव भी लोगों से द्वेष करने वाला रहेगा और राहु से इन दोनों ग्रह (सूर्य व शुक्र) की युति होने के कारण से भ्रामक स्थितियों के कारण से व्यक्ति अपने परिवार से द्वेष करेगा और चिंतित रहेगा, अब यदि यहाँ बात इनके दाम्पत्य जीवन की करी जाए तो सप्तमेश मंगल सप्तम भाव में स्वराशि का चंद्र व गुरु से युत और शनि से दृष्ट है अतः इनके दामपत्य जीवन में भी कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी किंतु विवाह नही टूटेगा और जन्म स्थान से दूर जाकर व्यक्ति को बड़ी भारी सफलता प्राप्त होगी।

 

इसके अतिरिक्त अन्य ग्रंथकार का मत है कि:-

 

बहुपापसमायुक्ते बन्धौ नाथे तथैव हि।
तत्कारके तथैवात्र बंधूनां कुत्सितं वदेत्।

 

अर्थात:- यदि चतुर्थ भाव में बहुत से पाप ग्रह बैठे हों तथा चतुर्थेश और चतुर्थ का कारक भी पापयुक्त या पाप ग्रहों द्वारा दृष्ट हो तो इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अपने बंधुओं से सम्मानित नही होता; वह नीच, तुच्छ तथा कुत्सित समझा जाता है।

 

चलिए इसको भी एक उदाहरण कुंडली से समझने का प्रयास करते हैं:-

 

उदाहरण कुंडली:-२
उदाहरण कुंडली:-२

 

इस कुंडली में उपरोक्त श्लोक के अनुसार चतुर्थ भाव में दो पाप ग्रह सूर्य व शनि स्थित हैं जिनमें सूर्य अपनी नीच राशि और शनि अपनी उच्च राशि का है और चतुर्थेश तृतीय भाव में अपनी नीच राशि का स्थित है साथ ही चतुर्थ भाव का कारक ग्रह चंद्रमा अष्टम भाव में स्थित है जिस कारण से यह व्यक्ति अपने परिवार में अत्यंत दुखी व परिवार वालों द्वारा प्रताड़ित किए जाते थे यहाँ तक कि इनके परिवार वालों ने इन पर कई मुकदमें भी कर रखे थे जब यह व्यक्ति मेरे पास आए तो मैंने इनको एक ही सलाह दी कि आप मातृस्थान व पितृस्थान से जितने अधिक दूर रहेंगे उतनी अच्छी उन्नति करेंगे व सुखमय जीवन को व्यतीत करेंगे जिसके बाद यह व्यक्ति घर वालों से छुपकर विदेश गए और वहाँ उनको बड़ी सफलता मिली तथा आज सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं कुल मिलाकर यदि चतुर्थेश व चतुर्थ भाव और चतुर्थ भाव का कारक पीड़ित हो तो ऐसे व्यक्ति जब तक अपने परिवार वालों के साथ रहते हैं तब तक संघर्ष व अपमानजनक स्थितियों का सामना करते रहते हैं और इनको सुख न्यून के समान ही मिलता है।

 

यह तो बात थी कि कब परिवार वालों से अपमान मिलता है ठीक इसी प्रकार ग्रंथकारों ने कुछ ऐसे भी योग बताए हैं जिनमें परिवार से व्यक्ति को सम्मान की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति परिवार में भाग्यशाली समझा जाता है जिसे मैं अगले भाग में प्रकाशित करूँगा….

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल

मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के प्रथम भाव अर्थात लग्न (देह स्थान) पर सूर्य के अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को दैहिक परिश्रम द्वारा समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा साथ ही जातक/जातिका अपने प्रतिष्ठा की वृद्धि हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे और भाई-बहन का पूर्ण सहयोग प्राप्त करेंगे साथ ही जातक/जातिका साहसी होंगे और सातवीं दृष्टि से सप्तम भाव स्त्री व रोजगार स्थान को अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली धनु राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका गृहस्थ के भोगादिक पक्ष में पुरुषार्थ शक्ति द्वारा सफलता प्राप्त करेंगे और रोजगार के मार्ग में अत्यधिक परिश्रम से बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे और इसी सफलता के कारण से समाज में भाग्यशाली समझे जाएंगे साथ ही जातक/जातिका के देह के अंदर बड़ी हिम्मत और स्फूर्ति तथा क्रोध इत्यादि व्याप्त रहेगा।

 

मिथुन लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के द्वितीय भाव धन व कुटुम्ब स्थान पर अपने मित्र चंद्र की कर्क राशि में स्थित होने के कारण से भाई-बहन के सुख-संबंधों में कुछ कमी रहेगी तथा जातक/जातिका पुरुषार्थ द्वारा धन की वृद्धि करने में सफल रहेंगे और कुटुंब का सुख प्राप्त करेंगे और धन की वृद्धि करने के कारण से देह के पुरुषार्थ में कुछ कमी अनुभव होगी कहने का आशय यह है कि जातक/जातिका के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी या चिंता व्याप्त रहेगी और सातवीं दृष्टि से अष्टम भाव आयु-मृत्यु व पुरातत्व स्थान को अपने शत्रु शनि की मकर राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को जीवन की दिनचर्या में कुछ अशांति अनुभव होगी और पुरातत्व शक्ति का सहयोग कुछ अरुचिकर एवं असंतोष रूप में प्राप्त होगा और अत्यधिक परिश्रम से धन की वृद्धि करने में जातक/जातिका सफल होंगे।

 

मिथुन लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल:-

 

मिथुन लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम स्थान पर सूर्य के अपने स्वामित्व वाली सिंह राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका अत्यधिक पराक्रमी होंगे और पराक्रम शक्ति की सहायता से समाज में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे तथा भाई-बहन का उत्तम सुख व पूर्ण सहयोग प्राप्त करेंगे साथ ही अपने पराक्रम पर पूर्ण विश्वास रखेंगे और सातवीं दृष्टि से नवम भाव भाग्य व धर्म स्थान को अपने शत्रु शनि की कुंभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को भाग्य के प्रति कुछ असंतोष रहेगा और धर्म के मार्ग में कुछ मतभेद समझने की वजह से अपने अलग ढंग से धर्म का पालन करेंगे और बहादुर स्वभाव होने के कारण से भाग्य की कुछ कमजोरी समझते रहने पर भी परवाह नही करेंगे और अपनी पराक्रम शक्ति से कठिन से कठिन कार्यों को भी पूर्ण करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगे।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

वृषभ लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल

वृषभ लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल

 

वृषभ लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

वृषभ लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार दशम भाव पिता व राज्य स्थान पर सूर्य के अपने शत्रु शनि की कुंभ राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को कुछ नीरसता युक्त पिता का सुख प्राप्त होगा और कुछ कठिनाई के माध्यम से समाज में मान तथा प्रभाव प्राप्त होगा और कारोबार के मार्ग में बड़ी सफलता प्राप्त होगी किंतु सूर्य अंशों में जितना अधिक बली होगा उतनी कम उन्नति होगी परंतु सातवीं दृष्टि से सूर्य के चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान को अपने स्वामित्व वाली सिंह राशि में देखने के कारण से भूमि-मकानादि व माता का उत्तम सुख जातक/जातिका को प्राप्त होगा तथा घरेलू वातावरण में सुख शांति का माहौल रहेगा जिस कारण से जातक/जातिका सुखपूर्वक उन्नति प्राप्त करने हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे।

 

वृषभ लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार एकादश भाव लाभ स्थान पर सूर्य के अपने मित्र गुरु की मीन राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को जीवन में बड़ी भारी सफलता प्राप्त होगी और अच्छी आमदनी रहेगी साथ ही भूमि, वाहन, मकान एवं वायुयान यात्रा का उत्तम सुख प्राप्त होगा और माता का उत्तम सुख प्राप्त होगा साथ ही घरेलू वातारण में भी सुख शांति का माहौल रहेगा और सुखेश होकर सूर्य के लाभ स्थान में बैठने के कारण से जातक/जातिका सुख पूर्वक उन्नति प्राप्त करने हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे तथा सातवीं दृष्टि से सूर्य के पंचम भाव विद्या व संतान स्थान को मित्र बुध की कन्या राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को संतान का उत्तम सुख प्राप्त होगा तथा बुद्धि में उत्तेजना और उच्च शिक्षा प्राप्त होगी।

 

वृषभ लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार द्वादश भाव खर्च व बाहरी स्थान पर सूर्य के अपने उच्च राशि मेष में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका खर्चा बहुत करेंगे तथा बाहरी स्थानों में सुख पूर्वक बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे और जन्मस्थान से बाहर जातक/जातिका का भाग्योदय होगा किंतु घरेलू सुख संसाधनों में कुछ त्रुटि रहेगी और माता पक्ष में भी कुछ असंतोष बना रहेगा साथ ही भूमि-मकानादि के सुख संबंधों में हानि होगी और सातवीं दृष्टि से षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान को सूर्य के अपनी नीच तुला में देखने के कारण से जातक/जातिका शत्रु पक्ष में कुछ पेचीदी शक्ति के द्वारा विजय प्राप्त करेंगे और देह के उदर, नेत्र व मूत्रेन्दीय स्थानों में कुछ विकार रहेगा।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Gochar Fal Prediction Recent Post

21 जून 2021 शुक्र का कर्क राशि से गोचर इन राशि वालों के चमकेंगे सितारे–Astrology Sutras

21 जून 2021 शुक्र का कर्क राशि से गोचर इन राशि वालों के चमकेंगे सितारे–Astrology Sutras

 

शुक्र का कर्क राशि से गोचर
शुक्र का कर्क राशि से गोचर

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वैदिक ज्योतिष में शुक्र को कला, सौंदर्य, प्रेम व भौतिक सुखों का कारक माना गया है सामान्य शब्दों में यदि समझा जाए तो हर प्रकार के सुख जिनसे प्राप्त होते हैं उन सभी के कारक शुक्र होते हैं यह देव गुरु बृहस्पति के भाई तथा दैत्यों के आचार्य हैं तथा नवग्रहों में शुक्र इकलौते ऐसे ग्रह हैं जिन्हें मृत संजीवनी विद्या प्राप्त है जिस कारण से कुंडली के अष्टम भाव जहाँ सभी ग्रह प्रायः अशुभ फल ही देते हैं वहाँ शुक्र यदि स्थित हों तो मनुष्य को काल के मुख से भी निकाल लाते हैं, २१ जून २०२१ को एकादशी तिथि की रात्रि के १०:३५ पर शुक्र ग्रह कर्क राशि में पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र ग्रह के गोचर परिवर्तन से किन राशि वालों के सितारे चमकेंगे:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे चतुर्थ भाव में शुक्र दिग्बली भी हो जाते हैं अतः किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, यदि आप भूमि खरीदना या घर बदलना चाहते हैं तो शुक्र का यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ रहेगा किंतु कभी-कभी घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, अत्यधिक परिश्रम करने पर उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, प्रेमियों के जीवन में भावुकता के हावी होने के कारण से कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी, जो लोग कोरोना काल में बेरोजगार हो गए थे उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे।

 

उपाय:- शुक्रवार के दिन गाय को चावल और चीनी मिलाकर खिलाएं।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व बिगड़े हुए कार्य पूर्ण होंगे, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा किंतु भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, महिला शत्रुओं से सावधान रहें, छोटी यात्राएं के योग बनेंगे, शुक्र के इस गोचरकाल के दौरान आपके मन में एक प्रकार का असंतोष बना रहेगा तथा आपके मन में कुछ नया करने के विचार उत्पन्न होंगे।

 

उपाय:- श्री सूक्त का पाठ करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप महिलाओं पर धन व्यय होगा, दाम्पत्य जीवन में कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, संतान की उन्नति होगी व सेहत में सुधार होगा, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, सुख-संसाधनों पर धन व्यय होगा, शत्रुओं पर कुछ धन की शक्ति व चतुराई युक्त पराक्रम से विजय प्राप्त होगी, शेयर बाजार मे निवेश करने से बचें।

 

उपाय:- शुक्रवार के दिन दूध और चावल कुछ दक्षिणा के साथ किसी महिला को दान करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप चतुराई द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, माता का सहयोग प्राप्त होगा, शुक्र के गोचरकाल में अकास्मिक कम से कम २ बार धन लाभ होने की संभावना रहेगी, किसी संपत्ति को क्रय करने के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है, कोरोना काल में जिन लोगों की नौकरी चली गयी थी उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी।

 

उपाय:- नित्य श्री सूक्त व सुंदरकांड का पाठ करें तथा मंगलवार के दिन गाय को गुड़ खिलाएं।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन एवं नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होगी, महिलाओं व सुख-संसाधनों से जुड़ी वस्तुओं पर धन व्यय होगा, प्रेमियों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, शुक्र के इस गोचरकाल के दौरान आप आध्यात्मिक सुखों की जगह भौतिक सुखों को अधिक महत्व देंगे, बाईं नेत्रों में समस्या संभव है, वाहन सावधानी से चलाएं अन्यथा बड़ी दुर्घटना के योग बनेंगे।

 

उपाय:- नित्य दुर्गा कवच का पाठ करें साथ ही छोटी कन्याओं को शुक्रवार के दिन चॉकलेट-चिप्स दान करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कन्या राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, भाग्य का पूर्ण सहयोग मिलेगा, आपकी वाणी का लोगों पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ेगा, महिलाओं से लाभ प्राप्त होगा व किसी महिला के सहयोग से आय वृद्धि के माध्यम बनेंगे, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी व शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, परिवार व दवाईयों पर धन व्यय होगा, तनाव लेने से बचें अन्यथा दिल से जुड़ी कोई समस्या उत्पन्न हो सकती है, स्थान परिवर्तन या नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, बड़े भाई-बहन से विवाद या उनके स्वास्थ्य में कोई समस्या रह सकती है।

 

उपाय:- नित्य श्री सूक्त का पाठ करें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार तुला राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न और अष्टम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा कुछ झंझटों के साथ कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, जो लोग घर लेने का लंबे समय से विचार कर रहे हैं उनके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, वाहनादि का सुख प्राप्त होगा, वाहन सावधानी से चलाएं, पिता को किसी प्रकार का कष्ट या पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, उदर, गले व मुख में किसी प्रकार की समस्या संभव है, वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, मानसिक व्यथा रहेगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा।

 

उपाय:- नित्य गाय को चावल और चीनी मिलाकर खिलाएं व सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर भाग्य स्थान से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी व महिलाओं से लाभ होगा, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, कोरोना काल में जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें पुनः उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, दाम्पत्य जीवन सामान्य रहेगा, जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग मिलेगा, आवेश में आने से बचें, पराक्रम में वृद्धि होगी, घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ समय बिताना आपको अच्छा लगेगा, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, मन अस्थिर रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें।

 

उपाय:- नित्य दुर्गा कवच का पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ और एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यह ऐसा समय रहेगा जिसमें आपके स्वास्थ्य में समस्या तो आएंगी किंतु वह उतनी ही तीव्रता से ठीक भी होंगी, आप इस दौरान अत्यधिक कामातुर हो सकते हैं, ससुराल पक्ष से संबंधों में मधुरता आएगी, वाणी पर नियंत्रण रखें, दाम्पत्य जीवन अच्छा रहेगा किंतु किसी गलतफहमी के चलते कभी-कभी तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, आय में वृद्धि होगी, यात्राओं के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें।

 

उपाय:- नित्य श्री सूक्त का पाठ करें व छोटी कन्याओं को शुक्रवार के दिन चॉकलेट-चिप्स दान करें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर कुंडली के राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो कि आपके सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, कोरोना काल में जिनकी नौकरी चली गयी थी उनको उन्नति के पुनः अवसर प्राप्त होंगे, पराक्रम में वृद्धि होगी, कोई भी निर्णय सोच-समझ कर ही लें, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, नेत्रों व उदर में कोई समस्या संभव है, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

उपाय:- नित्य गाय को चावल और चीनी मिलाकर खिलाएं।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव में बैठेंगे फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचरकाल बेहद शुभ रहेगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, भूमि, वाहन या किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यदि आप नया घर लेने का विचार कर रहे हैं या घर बदलना चाहते हैं तो अभी रुक जाएं और यदि बहुत ही आवश्यक हो तो किसी अच्छे वास्तु सलाहकार से परामर्श अवश्य करें, अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, यदि आप मंत्र साधना करना चाहते हैं तो उसके आरंभ हेतु यह बहुत अच्छा समय रहेगा।

 

उपाय:- 2 मंगलवार व 2 शुक्रवार दुर्गा जी को 16 श्रृंगार का सामान अर्पित करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मीन राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे स्वास्थ्य के प्रति बेहद सतर्क रहें, कोई भी निर्णय बहुत सोच-विचार कर ही लें, इस दौरान आपके द्वारा लिए हुए अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध हो सकते हैं, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, संतान को कष्ट संभव रहेगा, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहें अन्यथा बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर शुभदायी रहेगा, प्रेमियों के मध्य तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न होगा, आय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।

 

उपाय:- नित्य दुर्गा कवच व सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

वृषभ लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम और नवम भाव में सूर्य का फल

वृषभ लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम और नवम भाव में सूर्य का फल

 

वृषभ लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

वृषभ लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सप्तम भाव स्त्री व रोजगार स्थान पर सूर्य के अपने मित्र मंगल की वृश्चिक राशि में बैठा होने के कारण से जातक/जातिका को माता व जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा तथा रोजगार के मार्ग में बड़ी सफलता प्राप्त होगी साथ ही भूमि व वाहन का उत्तम सुख प्राप्त होगा और सातवीं दृष्टि से प्रथम भाव अर्थात लग्न (देह का स्थान) में अपने शत्रु शुक्र की वृषभ राशि में देखने के कारण से देह की सुंदरता में कुछ कमी रहेगी और गृहस्थ के अंदर की सुख सामग्रियों में कुछ त्रुटि प्रतीत होती रहेगी साथ ही गृहस्थी संचालन के कार्यों के कारण से देह को आराम कम मिलेगा इसलिए हिर्दय में कुछ अशांति रहेगी।

 

वृषभ लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार अष्टम भाव आयु-मृत्यु व पुरातत्व स्थान पर सूर्य के अपने मित्र गुरु की धनु राशि में बैठा होने के कारण से जातक/जातिका को माता सुख में कमी अनुभव होगी और जन्म भूमि से वियोग रहेगा तथा भूमि-मकानादि में बड़ी कमी रहेगी और घरेलू सुख शांति के मार्ग में बड़ा असंतोष रहेगा किंतु सुखेश सूर्य के अष्टम भाव में स्थित होने के कारण से आयु का सुख प्राप्त होगा और जातक/जातिका की दिनचर्या का लोगों पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा तथा पुरातत्व शक्ति का लाभ मिलेगा और सातवीं दृष्टि से द्वितीय भाव धन व कुटुंब स्थान पर अपने मित्र बुध की मिथुन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका धन की वृद्धि के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगे और धन की वृद्धि करने में सफल रहेंगे साथ ही कुटुंब का भी पूर्ण सुख प्राप्त होगा।

 

वृषभ लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार नवम भाव भाग्य व धर्म स्थान पर सूर्य के अपने शत्रु शनि की मकर राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को माता का सुख कुछ त्रुटियों व नीरसता के साथ प्राप्त होगा और भाग्य की शक्ति से भूमि व मकान का सुख प्राप्त होगा साथ ही घरेलू सुख अधिकांश अच्छा रहेगा साथ ही जातक/जातिका धर्म का भी पालन करेंगे किंतु कभी-कभी भाग्य से असंतोष भी रहेगा और सातवीं दृष्टि से तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम स्थान को सूर्य के अपने मित्र चंद्र की कर्क राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका भाग्य व पराक्रम के सम्मिलित प्रयास से जीवन में बड़ी सफलता और भाई-बहन का पूर्ण सहयोग प्राप्त करेंगे।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Gochar Fal Prediction Recent Post

सूर्य का मिथुन राशि से गोचर 15 जून 2021 यह 5 राशि वाले थे बेहद सावधान–Astrology Sutras

सूर्य का मिथुन राशि से गोचर 15 जून 2021 यह 5 राशि वाले थे बेहद सावधान–Astrology Sutras

 

सूर्य का मिथुन राशि से गोचर
सूर्य का मिथुन राशि से गोचर

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य 15 जून 2021 मंगलवार को दिन के १२:५० पर अपने शत्रु शुक्र की स्वामित्व वाली वृषभ राशि को छोड़कर अपने मित्र बुध की स्वामित्व वाली मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे जिससे वृषभ की सक्रांति खत्म होकर मिथुन की सक्रांति आरंभ होगी, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में ३० दिवस तक गोचर करते हैं जिससे विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार के प्रभाव पड़ते हैं तो चलिए जानते हैं सूर्य के मिथुन राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहने वाला है जिन विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में रुक गयी थी उनकी शिक्षा पुनः आरंभ होने के योग बनेंगे, वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, छोटी यात्राओं पर धन व्यय होंगे, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी व भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, जो लोग प्रेम विवाह करना चाहते हैं किंतु मन में किसी प्रकार के भय के कारण से परिवार में बात नही कर पा रहे उनके लिए सूर्य का यह गोचर 20 जून के बाद विशेष रूप से शुभफलदाई रहेगा, यदि आप किसी को प्रपोज करना चाहते हैं तो आपके लिए सूर्य का यह गोचर शुभ रहेगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा व भाग्य की सहायता से कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव के साथ उन्नति होगी या कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे।

 

उपाय:- नित्य अदित्यहिर्दय स्तोत्र का पाठ करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा एवं माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे किंतु मन में किसी प्रकार का भय व्याप्त रहेगा, दाम्पत्य जीवन में उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, छोटे भाई-बहन से क्षणिक विवाद या वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, गर्म चीजों व अत्यधिक मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करें, वाणी में कुछ तेजी रहेगी जिस कारण से आपके बनते कार्य बिगड़ सकते हैं अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, प्रेमियों के मध्य क्षणिक विवाद प्रायः बने रहेंगे, पराक्रम में वृद्धि होगी किंतु आपका पराक्रम अनुचित कार्यों में अधिक होने की संभावना है अतः मन को एकाग्र कर सही जगह पर पराक्रम करें।

 

उपाय:- नित्य सूर्य को जल अर्पित करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तृतीय भाव के स्वामी होकर लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, बुद्धि व विवेक द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे किंतु क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा व अनेक कार्यों में अरुचि बनने लगेगी, सिर दर्द या ज्वरादि की पीड़ा संभव है, किसी भी जगह धन निवेश करने या किसी को उधार देने से बचें, मन व्यथित रहेगा, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, पशु-वाहन, अग्नि व हथियार से सावधानी बरतें, अत्यधिक तेल व मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करें, आय सामान्य रहेगी, छुपे हुए शत्रुओं से बेहद साबधान रहें।

 

उपाय:- नित्य सूर्य कवच का पाठ करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कर्क राशि वालों के लिए सूर्य द्वितीय भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप व्यय में वृद्धि होगी, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद करने से बचें, पिता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, शत्रुओं पर कुछ धन की शक्ति से विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, शिक्षा में कुछ व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं, परिवार एवं दवाईयों पर धन व्यय होगा, दाम्पत्य जीवन में कुछ तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा।

 

उपाय:- नित्य गाय को गुड़ खिलाएं।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए सूर्य सूर्य प्रथम भाव अर्थात लग्न के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप दैहिक परिश्रम व बुद्धि-विवेक द्वारा उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे व आय में वृद्धि होगी, संतान की उन्नति होगी, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है तथा प्रेम विवाह के इच्छुक व्यक्तियों के लिए भी सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, नवदम्पत्तियों या जो लोग संतान की चाह रखते हैं उन्हें संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, वाहन सावधानी से चलाएं व सरकारी कर्मचारियों विशेषतः पुलिस, आर्मी, वैध, जमादार आदि लोगों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है।

 

उपाय:- नित्य गाय को रोटी व गुड़ खिलाएं।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे दशम भाव में सूर्य दिग्बल प्राप्त करते हैं साथ ही गुरु की दृष्टि भी सूर्य पर रहने से कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव के साथ उन्नति होगी, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं उनके लिए या तो नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे या आय में वृद्धि होगी, कोरोना काल में जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें पुनः उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, दवाईयों व परिवार पर धन व्यय होगा, माता से वैचारिक मतभेद या माता के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी संभव रहेगी, पिता की उन्नति होगी।

 

उपाय:- नित्य सूर्य को जल दें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य की शक्ति द्वारा कुछ झंझटों के साथ उन्नति व आय वृद्धि के योग बनेंगे किंतु मन में कुछ असंतोष व्याप्त रहेगा तथा मन व्यथित रहेगा, उदर, मुख व गले में किसी प्रकार की समस्या संभव रहेगी, पिता की उन्नति होगी, वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, घर में कलह की स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, वाहन सावधानी से चलाएं।

 

उपाय:- शिव जी को नित्य विल्वपत्र पर रक्त चंदन से राम लिखकर अर्पित करें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में बदलाव व स्थान परिवर्तन के साथ उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, उदर व ज्वरादि या नेत्रों में जलन/ज्योति मंद पड़ना, सिर दर्द आदि की पीड़ा संभव है, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, जिन्हें पूर्व से ही स्वास्थ्य में कोई समस्या हो उनके लिए सूर्य का यह गोचर थोड़ी विकट स्थिति उत्पन्न कर सकता है किंतु गुरु की दृष्टि होने के कारण से बहुत अधिक चिंता की बात नही रहेगी, ससुराल पक्ष से व जीवनसाथी के साथ विवाद संभव रहेगा व जीवनसाथी की वाणी में कुछ तेजी अनुभव होगी।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवनसाथी की उन्नति होगी व जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, उदर व गुदा से संबंधित कोई समस्या संभव रहेगी, ससुराल पक्ष से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, किसी भी विषय पर निर्णय लेने से अच्छे से सोच-विचार अवश्य करें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा।

 

उपाय:- नित्य सूर्य को जल दें तथा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप स्वास्थ्य में निरंतर उतार-चढ़ाव बना रहेगा व दवाईयों पर धन व्यय होगा, कार्यक्षेत्र में अचानक से बाधाएं उत्पन्न होंगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन के लिए विचार कर रहे हैं तो अभी कुछ समय रूक जाएं, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पढ़ें, ससुराल पक्ष से व जीवनसाथी के साथ विवाद संभव रहेगा, जीवनसाथी के स्वभाव में कुछ तेजी अनुभव होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सूर्य का यह गोचरकल बेहद शुभ रहेगा।

 

उपाय:- नित्य गाय को रोटी, गुड़ व हरा चारा खिलाएं।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, जो लोग संतान की चाह रखते हैं उन्हें संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यक्षेत्र में बुद्धि व विवेक द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, संतान की उन्नति होगी, क्रोध व वाणी में तेजी रहेगी अतः इन दोनों पर विशेष नियंत्रण रखें, माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव रहेगी।

 

उपाय:- रविवार के दिन ताँबे के पात्र से सूर्य को अर्घ्य दें तथा सूर्य कवच का नित्य पाठ करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मीन राशि वालों के लिए सूर्य षष्ठ भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने के कारण से मन व्यथित रहेगा, परिवार में किसी के स्वास्थ्य की समस्या चिंता का कारण बन सकती है हालांकि गुरु की दृष्टि होने के कारण से कोई बड़ी संकटपूर्ण स्थिति उत्पन्न नही होगी, कार्यक्षेत्र में कुछ झंझटों के साथ उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, आय के साथ व्यय में भी वृद्धि होगी।

 

उपाय:- नित्य गायत्री मंत्र की 1 माला जप करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

वृषभ लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल

वृषभ लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

वृषभ लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव मे सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव मे सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

वृषभ लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान पर अपनी स्वामित्व वाली सिंह राशि में बैठा होने के कारण से माता, भूमि, मकान एवं वाहनादि का उत्तम सुख प्राप्त होगा किंतु जातक/जातिका के दिखावे का लोगों पर अधिक प्रभाव पड़ेगा किंतु वास्तविक शांति की कुछ कमी जातक/जातिका को प्रतीत होगी और सूर्य के सातवीं दृष्टि से दशम भाव पिता व राज्य स्थान को शत्रु शनि की कुंभ राशि में देखने के कारण से पिता के सुख-संबंधों में कुछ नीरसता अनुभव होगी तथा समाज में मान-सम्मान हेतु मन में कुछ असंतोष रहेगा और जातक/जातिका व्यापार के मार्ग में कुछ झंझटों से झुझते हुए बड़ी भारी सफलता व सम्मान और इज्जत प्राप्त करेंगे।

 

वृषभ लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ लग्न कुंडली के पंचम भाव विद्या व संतान स्थान में सूर्य के अपने मित्र बुध की कन्या राशि में बैठा होने के कारण से जातक/जातिका उच्च शिक्षा प्राप्त करेंगे व उत्तम संतान सुख प्राप्त करेंगे साथ ही बुद्धि के द्वारा बड़ी गंभीरता से विचार कर ही कोई निर्णय लेंगे और बुद्धि योग के द्वारा ही घरेलू सुख का विशेष आनंद प्राप्त करेंगे और भूमि व माता का उत्तम सुख प्राप्त करेंगे एवं सूर्य के सप्तम दृष्टि से एकादश भाव लाभ स्थान को अपने मित्र गुरु की मीन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका बुद्धि योग द्वारा आमदनी के मार्ग में बड़ी भारी सफलता प्राप्त करेंगे।

 

वृषभ लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल:-

 

वृषभ लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ लग्न कुंडली के षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान पर सूर्य के अपनी नीच राशि तुला में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को माता के स्थान में हानि प्राप्त होगी तथा जन्म भूमि से वियोग रहेगा और मकानादि भूमि की कमी रहेगी साथ ही कुछ झंझट युक्त मार्गों से घरेलू सुख प्राप्त होगा और शत्रु पक्ष से मन मे अशांति रहेगी किंतु सूर्य के गरम ग्रह होने के कारण से षष्ठ भाव पर नीच राशि का होते हुए भी जातक/जातिका अंततः शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने में सफल रहेंगे और सातवीं दृष्टि से सूर्य के द्वादश भाव बाहरी स्थान को अपनी उच्च राशि मेष में देखने के कारण से जातक/जातिका खर्चा बहुत करेंगे और बाहरी स्थान का उत्तम सुखदायक संबंध प्राप्त करेंगे तथा बड़े खर्चे कर के जीवन के सभी सुख के साधन प्राप्त करेंगे।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com