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मौनी अमावस्या 2022: मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार करें यह उपाय

मौनी अमावस्या 2022: मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार करें यह उपाय

मौनी अमावस्या 2022: मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार करें यह उपाय
मौनी अमावस्या 2022: मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार करें यह उपाय

 

माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या कहा जाता है इस वर्ष माघ मास की अमावस्या तिथि 31 जनवरी 2022 की दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर लग रही है जो कि 1 फरवरी 2022 के दिन में 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी अतः इस वर्ष मौनी अमावस्या 1 फरवरी 2022 को मनाई जाएगी।

मौनी अमावस्या के दिन काशी में दशाश्वमेध घाट या प्रयाग में त्रिवेणी संगम या समुद्र में मौन व्रत रखकर स्नान करना चाहिए, इस बार मौनी अमावस्या के दिन दुर्लभ संयोग बन रहा है क्योंकि मौनी अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ने से और भी विशेष हो जाती है क्योंकि धर्म शास्त्रों के अनुसार यदि मंगलवार के दिन अमावस्या पड़े तो उस दिन गंगा स्नान करने से करोड़ों सूर्य ग्रहण में स्नान करने के समान फल की प्राप्ति होती है, पापवार तथा अमावस्या की युति दुर्भिक्ष तथा प्रजा के लिए भयकारक होती है।

 

मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार करें यह उपाय:-

मौनी अमावस्या 2022: मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार करें यह उपाय
मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार करें यह उपाय

 

इस बार मौनी अमावस्या मंगलवार के दिन पड़ने से अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है इस दिन राशि अनुसार कुछ विशेष उपाय करने से मनोकामना की पूर्ति होती है साथ ही क्रूर ग्रहों के अशुभ फल में कमी आती है तो चलिए जानते हैं मनोकामना पूर्ति हेतु राशि अनुसार उपाय:-

 

मेष राशि:-

मेष राशि वाले जातक गाय को मसूर की दाल भीगा कर खिलाएं व ब्राह्मण को तिल और गेहूँ का दान करें साथ ही पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर संकटमोचन हनुमाष्टक का पाठ करना चाहिए।

वृषभ राशि:-

वृषभ राशि वाले जातक गाय को पके हुए चावल में चीनी मिलाकर खिलाएं व ब्राह्मण को जौं और चीनी का दान करें और पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।

मिथुन राशि:-

मिथुन राशि वाले जातक गाय को हरा चारा खिलाएं व ब्राह्मण को काला तिल, हरी दाल, तिलकुट आदि का दान करें और यदि संभव हो तो किन्नर को हरी चूड़ी व हरी साड़ी दान करना आपके लिए विशेष शुभ रहेगा।

कर्क राशि:-

कर्क राशि वाले जातकों को शकर व श्वेत मीठे का किसी ब्राह्मण को दान करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही सूर्यास्त बाद काले कुत्ते को पनीर/मलाई/खोया अर्थात कोई ताकत की चीज खिलाना आपके लिए बेहद शुभ रहेगा।

सिंह राशि:-

सिंह राशि वाले जातकों को सूर्यास्त बाद किसी भिखारी को काला जूता, गेहूँ व काले कंबल का दान करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही यदि संभव हो तो चाँदी का एक जोड़ा सर्प बहते पानी में प्रवाहित करना आपके लिए शुभ रहेगा।

कन्या राशि:-

कन्या राशि वाले जातकों के लिए सूर्यास्त बाद विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ कर बहते पानी में नारियल को प्रवाहित करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही यदि किसी ब्राह्मण को गेहूँ, जौं, तिलकुट, हरी दाल दान करना अत्यंत शुभ रहेगा।

तुला राशि:-

तुला राशि वाले जातकों को 12 वर्ष से छोटी कन्याओं को चॉकलेट/चिप्स आदि का दान करना बेहद शुभ रहेगा साथ ही किसी ब्राह्मण को आटा, चीनी, जौं, श्वेत तिल, कुशा, श्वेत मीठा आदि का दान करना बेहद शुभ रहेगा।

वृश्चिक राशि:-

वृश्चिक राशि वाले जातकों के लिए किसी भिखारी को काली चप्पल, काले कंबल आदि का दान करना शुभ रहेगा साथ ही किसी ब्राह्मण को मसूर की दाल, ताम्र का कोई पात्र, शकर व सुराही का दान करना बेहद शुभ रहेगा।

धनु राशि:-

धनु राशि वाले जातकों के लिए किसी ब्राह्मण को पीला मीठा, पीला वस्त्र, पीला मीठा आदि का दान करना व सूर्यास्त बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ कर बहते पानी में नारियल को प्रवाहित करना विशेष रूप से शुभ फलदायक रहेगा।

मकर राशि:-

मकर राशि वाले जातकों के लिए काली उर्द, किशमिश, शहद, आम का अचार, मेवा युक्त कोई नमकीन किसी भिखारी/जमादार/नौकर को दान करना व सूर्यास्त बाद पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर नव ग्रह स्तोत्र का पाठ करना बेहद शुभ रहेगा।

कुंभ राशि:-

कुंभ राशि वाले जातकों के लिए लौह से बने उत्पाद, काला तिल व सरसों तेल का दान करना शुभ रहेगा साथ ही सूर्यास्त बाद शनि स्तोत्र का पाठ करना विशेष रूप से शुभ फलदाई होगा।

मीन राशि:-

मीन राशि वाले जातकों के लिए विष्णु जी के मंदिर में पीली वस्तुओं का दान करना व शिवलिंग पर मधु से अभिषेक कर मधुराष्टकं का पाठ करना विशेष रूप से शुभ फलदाई रहेगा।

 

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जय श्री राम।
Astrologer:- Pooshark Jetly
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मौनी अमावस्या 2022 जानें, मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा व शुभ मुहर्त

मौनी अमावस्या 2022 जानें, मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा व शुभ मुहर्त

 

मौनी अमावस्या 2022 जानें, मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा व शुभ मुहर्त
मौनी अमावस्या 2022 जानें, मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा व शुभ मुहर्त

 

माघ मास की अमावस्या तिथि को मौनी अमावस्या भी कहते हैं इस वर्ष मौनी अमावस्या 1 फरवरी 2022 को पड़ रही है इस दिन मौन रहकर स्नान व जप करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है साथ ही इस दिन पीपल वृक्ष की परिक्रमा व विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से वैधव्य दोष दूर हो जाता है।

 

मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा:-

मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा
मौनी अमावस्या से जुड़ी पौराणिक कथा

 

पौराणिक कथा के अनुसार कांचीपुरी में एक ब्राह्मण अपनी पत्नी, 7 पुत्रों व 1 पुत्री के साथ रहता था उसकी पुत्री का नाम गुणवती था उस ब्राह्मण में अपने सभी पुत्रों का विवाह करने के पश्चात अपनी पुत्री के लिए सुयोग्य वर खोजने के लिए अपने ज्येष्ठ पुत्र को भेजा और उसकी कुंडली एक पंडित को दिखाई, पंडित ने कुंडली देखकर यह बताया कि आपकी पुत्री की कुंडली में वैधव्य योग प्रवल है अतः सप्तवदी होते-होते आपकी पुत्री विधुर हो जाएगी।

ब्राह्मण के द्वारा पंडित से इसका निवारण पूछने पर पंडित ने बताया कि यहाँ से कुछ ही दूरी पर सिंहल द्वीप के पास एक धोबिन सोमा रहती है आप उसको प्रसन्न कर अपनी पुत्री के विवाह पूर्व उनको यहाँ ले आएं वह आपकी पुत्री के वैधव्य दोष को दूर कर सकती है तत्पश्चात राजा का सबसे छोटा पुत्र अपनी बहन को साथ लेकर सिंहल द्वीप के लिए निकल गया और सागर तट पर एक विशाल वृक्ष के नीचे बैठकर वह दोनो सागर पार करने के उपाय के बारे में चिंतन करने लगे वहीं उसी वृक्ष के एक घोंसले में गिद्ध का एक परिवार रहता था जिनके बच्चे उन दोनों के क्रिया-कलापों को देख रहे थे सायंकाल गिद्ध के बच्चों की माँ आयी व उन्हें भोजन परोसने लगीं तो गिद्ध के बच्चों ने कहा कि नीचे दो मनुष्य प्रातःकाल से भूखे-प्यासे बैठे हैं जब तक वह भोजन नही कर लेते तब तक हम भी कुछ नही खाएंगे।

गिद्ध की माता राजा के पुत्र व पुत्री के पास जाकर बोलीं कि मैं आप दोनों की मंशा समझ गयी हूँ और मैं प्रातःकाल आप दोनों को सागर पार सिंहल द्वीप पर पहुँचा दूँगी अतः आप दोनों अभी भोजन कर कुछ देर विश्राम करें मैं आपके लिए कंद-मूल, फल ले आती हूँ रात्रि विश्राम के बाद गिद्ध माता ने राजा के पुत्र व पुत्री को सिंहल द्वीप पहुँचा दिया और वह दोनो नित्य प्रातःकाल सोमा के घर को झाड़ कर लीपने लगे, एक दिवस सोमा ने अपनी बहुओं से पूछा कि हमारे घर कौन बुहारता है, कौन लीपता-पोतता है तो सभी बहुएं कहने लगी कि हम ही नित्य घर को संवारते है किंतु सोमा को उन पर विश्वास नही हुआ और वह सत्य जानने की इच्छा से सम्पूर्ण रात्रि जाग कर प्रातःकाल की प्रतीक्षा करने लगी और सब कुछ प्रत्यक्ष देखकर सत्य से अवगत हुई।

तत्पश्चात सोमा का उन दोनों भाई-बहन से वार्ता करी और सारी बात जानकर उन्होंने उचित समय पर उनके घर आने का वचन दे दिया किंतु भाई-बहन उनसे साथ चलने का निवेदन करने लगे तो सोमा ने उनके निवेदन को स्वीकार कर अपनी बहुओं से कहा कि यदि मेरे आने के पूर्व यहाँ किसी की मृत्यु हो जाए तो उनका देह नष्ट न करना अपितु मेरे वापस आने की प्रतीक्षा करना और फिर सोमा राजा के पुत्र व पुत्री साथ उनके निवास स्थान कांचीपुरी पहुँच गयी।

दूसरे दिवस जब राजा की पुत्री का विवाह कार्यक्रम आयोजित हुआ तो सप्तवदी होते ही राजा के जमाता की मृत्यु हो गयी तत्पश्चात सोमा ने अपने द्वारा संचित सभी पुण्यों को राजा की पुत्री को देकर उनके पति को पुनः जीवित कर दिया किंतु इसके फलस्वरूप सोमा के पुत्र, जमाता तथा पति की मृत्यु हो गयी।

सोमा ने पुष्प फल संचित करने के लिए मार्ग में पीपल वृक्ष के नीचे विष्णु जी का पूजन कर पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा की जिनसे सोमा के मृतक जन पुनः जीवित हो उठे।

 

मौनी अमावस्या स्नान शुभ मुहर्त:-

मौनी अमावस्या स्नान शुभ मुहर्त
मौनी अमावस्या स्नान शुभ मुहर्त

 

ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार माघ मास की अमावस्या तिथि 31 जनवरी 2022 की दोपहर 1 बजकर 15 मिनट से लग रही है जो कि 1 फरवरी 2022 के दिन में 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगी अतः सूर्योदयकलीन व्याप्त तिथि के अनुसार मौनी अमावस्या 1 फरवरी 2022 को मनाई जाएगी।

मौनी अमावस्या स्नान शुभ मुहर्त ब्रह्म मुहर्त प्रातः 5:34 से 6:22 में करना सर्वोत्तम रहेगा इसके बाद प्रातः 7:16 से 8:48 तक भी मौनी अमावस्या स्नान शुभ मुहर्त रहेगा व पीपल वृक्ष पूजन और विष्णु जी के पूजन का शुभ मुहर्त सायं 6:20 से 8:34 रहेगा।

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बुध का मिथुन राशि से गोचर 4 जुलाई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

बुध का मिथुन राशि से गोचर 4 जुलाई 2021: जानिए, विभिन्न राशियों में पड़ने वाले प्रभाव

 

बुध का मिथुन राशि से गोचर

 

वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में ही रहते हैं, बुध ०४ जुलाई को रात्रि के १० बजकर १८ मिनट पर वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में चले जाएंगे जहाँ २४ जुलाई की दिन में १० बजकर २१ मिनट ५८ सेकंड तक रहेंगे, बुध मिथुन व कन्या राशि के स्वामी होते हैं और कन्या राशि में ही उच्च के भी होते हैं मीन राशि बुध की नीच राशि होती है, बुध बुद्धि व विवेक के कारक होते हैं अतः बुध के कन्या राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव पड़ेंगे तो चलिए जानते हैं बुध के इस गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, शत्रुओं पर युक्ति व चतुराई के माध्यम से सफलता प्राप्त होगी, भाग्य की वृद्धि होगी, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, बहन-बुआ व मासी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव है।

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय व पंचम भाव के स्वामी होकर द्वितीय से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए स्त्रोत बनेंगे, जो लोग बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर श्रेष्ठम फल देने वाला रहेगा, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा अवसर रहेगा, कोरोना के कारण से जिनकी नौकरी छूट गयी थी उन्हें पुनः किसी नौकरी का अवसर प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा तथा दोनो अपनी समझ का परिचय देते हुए एक-दूसरे के साथ आनन्दमयी जीवन व्यतीत करेंगे।

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर लग्न से ही गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, अपनी युक्ति के बल पर आप कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर निर्मित करने में सफल होंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, अच्छा रहेगा, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, आकस्मिक धन लाभ के योग बनेंगे तथा आय में वृद्धि के पूर्ण योग प्राप्त होते हैं।

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कर्क राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर मिला-जुला फल देने वाला होगा फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, यात्रा हो सकती है, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, आपके फोन में बुध के इस गोचरकाल के दौरान कुछ समस्या रह सकती है, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी या उनके कार्यक्षेत्र का कुछ विस्तार होगा।

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध धनेश व लाभेश होकर लाभ स्थान से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उनको पुनः नए अवसर प्राप्त होंगे, जिन व्यक्तियों का कार्य बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, एल. आई. सी. व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम बना रहेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध पहले व दशम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कन्या राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, बेरोजगारों तथा कोरोना के चलते जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी मिलने के पूर्ण योग बनते हैं, व्यापारियों के मुनाफे में वृद्धि होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों व जीवनसाथी के लिए बुध का यह गोचर क्षणिक विवाद के योग बना रहा है अतः एक-दूसरे को समझने का प्रयास करें व अपने प्रेमी और जीवनसाथी को कुछ समय दें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, नौकरी व व्यवसाय में उन्नति होगी।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए नवम व द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार तुला राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, धर्मिक यात्राओं के योग हैं या धर्म-कर्म आदि में धन व्यय होने के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रेमियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई होगा तथा उनके प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, दाम्पत्य जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव संभव रहेगा।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम व एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी किंतु स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहें, स्थान परिवर्तन के योग हैं, जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर आर्थिक दृष्टिकोण से बेहद शुभ रहने वाला होगा, प्रेमियों के लिहाज से बुध का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ प्रेम संबंधों में मधुरता लाने वाला होगा, विद्यार्थियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम व दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार धनु राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर बेहद ही शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र का विस्तार, नौकरी में उन्नति, मित्रों से लाभ, पिता का सहयोग व मन में प्रसन्नता का अनुभव आदि शुभ फल प्राप्त होंगे, कोरोना के कारण जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें नौकरी के नए अवसर प्राप्त होंगे, आय में वृद्धि होगी, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, प्रेमियों के मध्य प्रेम में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देगा, अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए षष्ठ और नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मकर राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्य फल देने वाला होगा फलस्वरूप भाग्य की शक्ति व चतुराई युक्त युति के द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को उनकी मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, जिनको स्वास्थ्य की समस्या लम्बे समय से चली आ रही थी उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा आपके गुप्त शत्रु आप पर हावी होने का पूर्ण प्रयास करेंगे, प्रेमियों के मध्य तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, विद्यार्थियों के लिए बुध का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंभ राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप जो लोग ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस एल.आई.सी., टीचिंग व दूरसंचार माध्यम आदि से जुड़े हुए हैं उनके लिए बुध का यह गोचर उन्नतिकारक होगा, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, प्रेमियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, विद्यार्थियों को कुछ नया सीखने को मिलेगा जिसमें वो रुचि भी लेंगे, धर्म-आध्यात्म की ओर झुकाव बढेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है, किसी अप्रिय घटना घटित होने की संभावना रहेगी।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मीन राशि वालों के लिए बुध का यह गोचर सामान्यतः शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, नौकरी में उन्नति होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से प्रस्ताव आ सकता है, जो लोग प्रेम विवाह करना चाहते हैं उनके लिए भी यह गोचर शुभ रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा व आय में वृद्धि होगी, घर में किसी महिला मेहमान के आने की संभावना रहेगी।

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ग्रह दोष और वास्तु दोष को दूर करते हैं यह 5 पौधे–Astrology Sutras

ग्रह दोष और वास्तु दोष को दूर करते हैं यह 5 पौधे–Astrology Sutras

 

ग्रह दोष और वास्तु दोष दूर करते हैं यह 5 पौधे
ग्रह दोष और वास्तु दोष दूर करते हैं यह 5 पौधे

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वास्तु शास्त्र में पौधों का विशेष महत्व है आज हम आप सभी को 5 ऐसे पौधों के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें लगाने से वास्तु दोष व ग्रह दोष दोनों दूर हो जाते हैं तो चलिए जानते हैं उन पौधों के बारे में:-

 

पारिजात:-

 

पारिजात
पारिजात

 

धर्म शास्त्रों में भी पारिजात पौधे के महत्व का विस्तृत वर्णन है अनेक धर्म-शास्त्रों के अनुसार पारिजात वृक्ष को मनोकामना पूर्ति वाला वृक्ष बताया गया है वास्तु शास्त्र के अनुसार पारिजात का पौधा घर में लगाने से सभी देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है व घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास रहता है जो भी व्यक्ति पारिजात के पौधे को नित्य जल व पुष्प अर्पित करते हैं उन्हें धन की कभी कमी नही होती व उनका जीवन सुखदाई रहता है।

 

तुलसी:-

 

तुलसी
तुलसी

 

धर्म-शास्त्रों में तुलसी का भी विशेष महत्व बताया गया है वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में तुलसी का वृक्ष लगाने से ग्रह दोष व वास्तु दोष स्वतः ही नष्ट हो जाते हैं तथा घर में सुख-समृद्धि की वृद्धि होती है साथ ही जो व्यक्ति नित्य प्रातः बेला व सूर्यास्त के समय तुलसी वृक्ष को जल, पुष्प व दीप अर्पित करते हैं उन पर माता लक्ष्मी की असीम कृपा रहती है।

 

शमी:-

 

शमी
शमी

 

शमी वृक्ष को लेकर अनेक लोगों के मन में भ्रामक स्थितियाँ देखने को मिलती है कारण शमी वृक्ष के देवता शनि देव होते हैं किंतु यह कहना कि शमी वृक्ष घर में नही लगाना चाहिए सर्वथा अनुचित है वास्तु शास्त्र के अनुसार यदि घर के मुख्य द्वार के बाईं तरफ़ शमी वृक्ष लगाकर नित्य जल, पुष्प व सरसों के तेल का दीपक अर्पित किया जाए तो व्यक्ति पर शनि देव की विशेष कृपा रहती है तथा घर में नकारात्म ऊर्जा प्रवेश नही कर पाती है।

 

आंवला:-

 

आंवला
आंवला

 

वास्तु शास्त्र में आंवले के वृक्ष को भी अत्यंत शुभ माना गया है धर्म-शास्त्रों के अनुसार आंवले के वृक्ष में देवी-देवताओं का वास होता है धर्म-शास्त्रों के अनुसार आंवला वृक्ष विष्णु जी को अति प्रिय है इस वृक्ष को यदि घर में लगाकर नित्य इनकी पूजा की जाए तो व्यक्ति पर विष्णु जी की असीम कृपा बनी रहती है तथा घर में कभी धन की कमी नही होती है।

 

मनी प्लांट:-

 

मनी प्लांट
मनी प्लांट

 

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के दक्षिण-पूर्व दिशा में मनी प्लांट लगाना चाहिए यह जितनी तेजी से बढ़ा होता है घर में उतनी ही तीव्रता से सुख व समृद्धि की भी वृद्धि होती है साथ ही घर में सकारात्मक ऊर्जा का सदैव ही वास रहता है तथा घर के मुखिया की चिंताओं में कमी आती है।

 

जय श्री राम।

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गुरु वक्री 2 जुलाई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

गुरु वक्री 2 जुलाई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

गुरु कुंभ राशि में वक्री
गुरु कुंभ राशि में वक्री

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वैदिक ज्योतिष में गुरु को सबसे शुभ ग्रह माना गया गुरु विवाह, संतान व धन, भाग्य का कारक माना गया है गुरु एक राशि में 13 माह तक गोचर करते हैं “ऋषिकेश पंचांग” के अनुसार देव गुरु बृहस्पति 2 जुलाई 2021 को दिन के ०८:२३ पर वक्री अवास्था में गोचर करना आरंभ कर देंगे और 10 अक्टूबर 2021 को मध्य रात्रि ०३:०३ पर पुनः मार्गी हो जाएंगे इस प्रकार गुरु 3 माह 8 दिवस तक वक्री अवस्था में गोचर करेंगे तो चलिए जानते हैं गुरु के वक्री अवास्था से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए गुरु नवम व द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से वक्री अवस्था गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं व परिवार पर धन व्यय होगा, घर के किसी बुजुर्ग सदस्य के स्वास्थ्य की समस्या चिंता का कारण बन सकती है, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा, जिन व्यक्तियों की शिक्षा में किसी कारण वश रुकावटें आ गईं थी उनकी शिक्षा पुनः आरंभ होगी, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, आय में मामूली वृद्धि होगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, भाई-बहन से अनेक अवसर पर विवाद हो सकते हैं, जिन व्यक्तियों का विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उन्हें संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, पार्टनरशिप में किसी कार्य को आरंभ करने से बचें।

 

उपाय:- नित्य गाय को केला खिलाएं।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए गुरु अष्टम व एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप कारोबार के क्षेत्र में कुछ झंझटों के साथ सफलता प्राप्त होगी, पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता बनी रह सकती है, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, यदि आपको हिर्दय या रक्त से संबंधित कोई समस्या हो तो अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहें, घर में किसी मेहमान के आगमन की संभावना रहेगी, यदि आप घर खरीदने का विचार कर रहे हैं तो अगस्त के मध्य भाग से सितंबर माह के मध्य भाग तक का समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा किंतु इस दौरान आपके माता जी के स्वभाव में कुछ तेजी रह सकती है, गुरु के वक्री अवस्था के दौरान सोच-विचार कर ही कोई निर्णय लेना आपके लिए उचित रहेगा, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी।

 

उपाय:- विष्णु सहस्त्रनाम का नित्य पाठ करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए गुरु सप्तम व दशम भाव के स्वामी होकर नवम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, गुरु के वक्री अवस्था के दौरान आप धर्म का उचित रूप से पालन नही कर सकेंगे, बुद्धि व विवेक द्वारा लिए गए निर्णयों से लाभ मिलेगा किंतु आवेश में आने से बचें, स्वास्थ्य सामान्यतः ठीक रहेगा फिर भी स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें व वाहन सावधानी से चलाएं, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, दाम्पत्य जीवन भी अधिकांश ठीक रहेगा किंतु किसी तीसरे व्यक्ति की बातों में आने से बचें, खान-पान का विशेष ख्याल रखें अन्यथा वजन बढ़ने की संभावना रहेगी जिस कारण से पैरों में दर्द की शिकायत रह सकती है।

 

उपाय:- नित्य गाय को आटे में हल्दी डालकर खिलाएं।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए गुरु षष्ठ व नवम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस दौरान आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहना चाहिए, अत्यधिक चिकनाई व मिर्च-मसाले वाले भोजन से परहेज करें, जिन व्यक्तियों को हिर्दय या रक्त से संबंधित कोई समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहें, गर्भवती महिलाओं को भी इस दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए, कार्य क्षेत्र में विपरीत परिस्थियों का सामना करना पड़ सकता है किंतु धैर्य व संयम रखने से आय वृद्धि के योग बनेंगे, घर के बुजुर्गों, संतान व पिता पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, घर में किसी मेहमान के आगमन की संभावना रहेगी।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए गुरु पंचम व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः गुरु के वक्री अवस्था से गोचर आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहना चाहिए हालांकि गुरु की लग्न पर दृष्टि रहने से कोई गंभीर समस्या नही होगी किंतु यदि आपको हिर्दय या रक्त या किडनी से संबंधित कोई समस्या है तो आपको अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्कता बरतनी चाहिए, दाम्पत्य जीवन में कलह पूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, बातों को दिल पर लेने से बचें।

 

उपाय:- गुरुवार के दिन हल्दी की गाँठ दाहिने हाथ की भुजा पर बांधें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए गुरु चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप स्थान परिवर्तन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, तनाव लेने से बचें, गुरु के वक्री अवस्था से गोचर के दौरान आपकी सेहत थोड़ी नाजुक रह सकती है अतः खान-पान का विशेष ख्याल रखें, परिवार व बुजुर्गों पर धन व्यय हो सकता है, अचानक किसी यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, आय में वृद्धि होगी, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, किसी उच्चाधिकारी या श्रेष्ठ जन की कृपा प्राप्त होगी, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा किंतु अनेक अवसर पर बाधाएं भी उत्पन्न होंगी।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए गुरु तृतीय व षष्ठ भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, इस दौरान गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना चाहिए, संतान को कष्ट संभव है, आय में वृद्धि होगी व भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, बड़े भाई-बहन व पिता की उन्नति होगी, विद्यार्थियों के लिए गुरु का वक्री होना मिला-जुला फल देगा जिस कारण से शिक्षा में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न हो सकता है, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, ज्योतिष, शिक्षा से जुड़ी वस्तुएं आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए गुरु का वक्री होना शुभफलदाई रहेगा, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, पिता के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है अतः उनके स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

उपाय:- प्रत्येक गुरुवार के दिन गाय को चने की दाल भीगाकर खिलाएं।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु दूसरे व पंचम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, बुद्धि व विवेक द्वारा उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, कार्य के सिलसिले से यात्रा संभव रहेगी, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, यात्राओं पर धन व्यय होगा, गुरु के वक्री होने के कारण से आपके स्वास्थ्य में कुछ हल्का उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, चिकनाई व मिर्च-मसाले वाले पदार्थों से परहेज करें, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी व इनसे जुड़े कार्य करने वाले व्यक्तियों को उन्नति के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे।

 

उपाय:- प्रत्येक गुरुवार विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए गुरु प्रथम भाव अर्थात लग्न व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, गुरु के वक्री अवस्था से गोचर के दौरान माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, गुरु के वक्री गोचरकाल में आपके स्वास्थ्य में कुछ सुधार होगा फिर भी अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें, लंबे समय से चली आ रही बीमारियों से राहत अनुभव होगी, मन प्रसन्न रहेगा किंतु व्यय की अधिकता के कारण से चिंता बनी रहेगी।

 

उपाय:- प्रत्येक गुरुवार गुरु मंत्र का 108 की संख्या में जप करें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए गुरु तृतीय व द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप व्यय में वृद्धि होगी व यात्राओं के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन की संभावना रहेगी, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी, बेरोजगारों को नौकरी के अवसर प्राप्त हो सकते हैं, नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे।

 

उपाय:- प्रत्येक गुरुवार गाय को केला खिलाएं।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए गुरु द्वितीय व एकादश भाव के स्वामी होकर आपके प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप स्वास्थ्य अच्छा रहेगा किंतु धन के कारणों से मन में कुछ चिंता बनी रहेगी, तनाव लेने से बचें, आय में वृद्धि व उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे जिनका लाभ आपको निकट भविष्य में अवश्य ही प्राप्त होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान की उन्नति होगी, भाग्य का सहयोग प्राप्त होता रहेगा किंतु मन में किसी प्रकार की चिंता बनी रहेगी जिस कारण से आप गुरु के वक्री गोचरकाल में उन्नति हेतु कुछ अधिक ही प्रयासरत रहेंगे, कभी-कभी अत्यधिक तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न हो सकता है अतः नित्य कुछ देर ध्यान करें जिससे आपका मन शांत रह सके।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए गुरु प्रथम भाव अर्थात लग्न व दशम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस दौरान आप व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें व खर्चों पर नियंत्रण रखें, यात्राएं, परिवार व बुजुर्गों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी फिर भी मन में किसी प्रकार की चिंता बनी रहेगी, माता के स्वास्थ्य में लाभ होगा, किसी मेहमान के घर आगमन की संभावना रहेगी, स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें व चिकनाई और मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करें, तनाव लेने से बचें, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी व इनसे जुड़े कार्य करने वाले व्यक्तियों की उन्नति होगी।

 

उपाय:- प्रत्येक गुरुवार मधुराष्टकं का पाठ करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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कन्या लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल

कन्या लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

कन्या लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल
कन्या लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

कन्या लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल:-

 

कन्या लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल
कन्या लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के प्रथम भाव अर्थात लग्न (देह स्थान) पर मित्र बुध के स्वामित्व वाली कन्या राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका खर्चा अधिक करेंगे और जन्म स्थान के बाहर बड़ी भारी सफलता व मान-सम्मान और यश प्राप्त करेंगे किंतु सूर्य के व्ययेश होने के दोष के कारण से देह में दुर्बलता रहेगी और खर्च में कुछ परेशानी अनुभव होगी तथा सूर्य के सातवीं दृष्टि से सप्तम भाव स्त्री व रोजगार स्थान को मित्र गुरु के स्वामित्व वाली मीन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को दाम्पत्य सुख में कुछ कमजोरी या परेशानी मिलेगी और रोजगार के मार्ग में कुछ हानि तथा कुछ कमी रहेगी।

 

कन्या लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल:-

 

कन्या लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल
कन्या लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के द्वितीय भाव धन व कुटुंब स्थान पर अपनी नीच राशि व शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली तुला राशि में स्थित होने के कारण से धन के कोष में भारी कमी और कष्ट के कारण जातक/जातिका को प्राप्त होंगे साथ ही सूर्य को व्ययेश व नीच राशि में होने दोनो का दोष होने से प्रवल दोष है अतः जातक/जातिका को धन व जन की हानि प्राप्त होगी और धन की शक्ति के लिए बाहरी स्थान का कुछ कमजोर संबंध प्राप्त होगा अर्थात अत्यधिक परिश्रम करने पर भी पूर्ण फल नही मिलेगा साथ ही दवाईयों व व्यर्थ की यात्राओं पर धन व्यय होगा और खर्च स्थान में कुछ परेशानी व कमजोरी प्राप्त होगी तथा सातवीं दृष्टि से सूर्य के अष्टम भाव आयु-मृत्यु व पुरातत्व स्थान को अपनी उच्च राशि व मित्र मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को जीवन में यश, प्रभाव और पुरातत्व शक्ति प्राप्त होगी।

 

कन्या लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल:-

 

कन्या लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल
कन्या लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम स्थान पर अपने मित्र मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका पराक्रम शक्ति द्वारा खर्च का संचालन सुंदरता से करेंगे किंतु भाई-बहन के संबंधों में कमजोरी प्राप्त करेंगे और दैहिक पुरुषार्थ के स्थान में कुछ कमजोरी अनुभव करेंगे परंतु तृतीय भाव में गरम ग्रह बलवान हो जाता है इसलिए पुरुषार्थ शक्ति के संबंध में तथा खर्च के संबंध में बड़ी हिम्मत शक्ति प्राप्त होगी और सातवीं दृष्टि से सूर्य के नवम भाव भाग्य व धर्म स्थान को अपने शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को भाग्य स्थान में कुछ कमजोरी अनुभव होगी।

 

जय श्री राम।

 

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सिंह लग्न के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल

सिंह लग्न के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल

 

सिंह लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव मे सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव मे सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

सिंह लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के दशम भाव पिता व राज्य स्थान पर शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को पिता का कुछ वैमन्यस्ता के साथ सुख प्राप्त होगा तथा राज-समाज में मान और प्रभाव प्राप्त होगा किंतु उन्नति के मार्ग में कुछ नीरसता अनुभव होगी परंतु जातक/जातिका उन्नति हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे और देह में प्रभाव शक्ति प्राप्त करेंगे तथा सातवीं दृष्टि से सूर्य के चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान को मित्र मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में देखने के कारण से माता के स्थान में जातक/जातिका सुंदर रुचि रखेंगे और सुख के साधनों की प्राप्ति हेतु विशेष कार्य करेंगे।

 

सिंह लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के एकादश भाव लाभ स्थान पर अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका दैहिक परिश्रम द्वारा विशेष लाभ प्राप्त करेंगे तथा देह में विशेष शक्ति प्राप्त करेंगे और आमदनी के मार्ग में विशेष सफलता प्राप्त करेंगे और सदैव सभी कार्यों में अपने निजी लाभ और स्वार्थ का विशेष ख्याल रखेंगे तथा सूर्य के सातवीं दृष्टि से पंचम भाव विद्या व संतान स्थान को मित्र गुरु के स्वामित्व वाली धनु राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को उच्च शिक्षा प्राप्त होगी और संतान का उत्तम सुख प्राप्त होगा साथ ही जातक/जातिका हमेशा स्वार्थ युक्त बातें करेंगे और जातक/जातिका की वाणी में कुछ गर्मी व तेजी रहेगी।

 

सिंह लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल:-

 

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के द्वादश भाव खर्च व बाहरी स्थान पर मित्र चंद्र के स्वामित्व वाली कर्क राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका खर्चा अधिक करेंगे और देह में कुछ कमजोरी व दुबलापन प्राप्त करेंगे तथा बाहरी स्थान में भ्रमण करेंगे और हिर्दय में अशांति अनुभव करेंगे तथा खर्च के मार्ग में आमदनी की परवाह नही करेंगे और सातवीं दृष्टि से षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान को आने शत्रु शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका कुछ झंझटों से होते हुए धन व पराक्रम शक्ति द्वारा अनेक प्रकार की दिक्कतों पर विजय प्राप्त करेंगे।

 

जय श्री राम।

 

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सिंह लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल

सिंह लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल

 

सिंह लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बननेसेबताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

सिंह लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के सप्तम भाव स्त्री व रोजगार स्थान पर अपने शत्रु शनि की कुंभ राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को स्त्री पक्ष में कुछ वैमन्यस्ता युक्त सुख प्राप्त होगा और रोजगार के पक्ष में कठिन परिश्रम से सफलता प्राप्त होगी तथा स्त्री और गृहस्थ के कुछ नीरसता का अनुभव होगा किंतु फिर भी गृहस्थिक मार्ग के भोगादिक पक्ष में आत्मीयता बनी रहेगी और सूर्य के सातवीं दृष्टि से प्रथम भाव अर्थात लग्न (देह स्थान) को अपने स्वम् के स्वामित्व वाली सिंह राशि में देखने के कारण से देह में शक्ति रहेगी तथा मन में स्वाभिमान रहेगा तथा जातक/जातिका गृहस्थ धर्म के संचालन मार्ग में कुछ ऊँचा नाम करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगे व सफलता प्राप्त करेंगे।

 

सिंह लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के अष्टम भाव आयु-मृत्यु व पुरातत्व स्थान पर अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली मीन राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को देह स्थान में कुछ परेशानी अनुभव होगी तथा बाहरी स्थानों से अच्छी उन्नति होगी और जातक/जातिका जीवन निर्वाह की शक्ति को तथा कुछ पुरातत्व संबंध को स्वम् अपनी दैहिक शक्ति के योग से प्राप्त करेंगे और अपने जीवन की दिनचर्या में प्रभाव प्राप्त करेंगे साथ ही सूर्य के सातवीं दृष्टि से द्वितीय भाव धन व कुटुंब स्थान को अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली कन्या राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका धन की वृद्धि करने के लिए बड़ा भारी प्रयत्न करेंगे और धन-जन के मार्ग में कुछ सफलता प्राप्त करेंगे किंतु जातक/जातिका की वाणी में तेजी अनुभव होगी व जातक/जातिका क्रोधी स्वभाव के रहेंगे।

 

सिंह लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के नवम भाव भाग्य व धर्म स्थान पर अपनी उच्च राशि व मित्र मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को भाग्य की बड़ी शक्ति प्राप्त होगी जिस कारण से भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा और देह में बड़ी भारी प्रभाव शक्ति प्राप्त होगी तथा जातक/जातिका धर्म और ईश्वर में पूर्ण विश्वास रखेंगे और भाग्यवान समझे जाएंगे किंतु देह में स्थूलता प्राप्त करेंगे साथ ही सूर्य के सातवीं दृष्टि से तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम स्थान को अपनी नीच राशि व शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली तुला राशि में देखने के कारण से भाई-बहन के सुख-संबंधों में असंतोष रहेगा और जातक/जातिका पराक्रम स्थान में लापरवाही करेंगे और पुरुषार्थ की अपेक्षा भाग्य को बड़ा मानेंगे और कभी-कभी किसी छोटे कार्य को करेंगे।

 

जय श्री राम।

 

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सिंह लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल

सिंह लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

सिंह लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव मे सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव मे सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।

 

सिंह लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान पर अपने मित्र मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा और जातक/जातिका सुख-संसाधनों में वृद्धि करने में सफल रहेंगे और देह में आनंद की अनुभूति होगी व देह में सुंदरता रहेगी तथा सूर्य के सातवीं दृष्टि से दशम भाव पिता व राज्य स्थान पर सूर्य के अपने शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका पिता स्थान के संबंधों में वैमन्यस्ता या मतभेद रखेंगे और राज-समाज के स्थान में कुछ प्रभाव बना पाने में सफल होंगे तथा किसी कारोबार को ऊँचा उठाने के प्रयत्नशील रहेंगे।

 

सिंह लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के पंचम भाव विद्या व संतान स्थान पर अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली धनु राशि में स्थित होने के कारण से संतान का उत्तम सुख प्राप्त होगा तथा उच्च शिक्षा प्राप्त होगी और जातक/जातिका की बुद्धि के अंदर दूरदर्शिता तथा आत्मज्ञान की शक्ति रहेगी और बुद्धि योग द्वारा समाज में मान, इज्जत व यश प्राप्त करेंगे किंतु दिमाग के अंदर तेजी रखेंगे अर्थात अत्यंत क्रोधी होंगे और सूर्य के सातवीं दृष्टि से एकादश भाव लाभ स्थान को अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका बुद्धि योग द्वारा खूब लाभ प्राप्त करेंगे तथा आत्मिक बल के द्वारा आमदनी में वृद्धि करेंगे किंतु मन में अहंभाव भी रखेंगे।

 

सिंह लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल:-

 

सिंह लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल
सिंह लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान पर शत्रु शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को स्वास्थ्य संबंधित कुछ समस्याएं रहेंगी तथा कुछ परतंत्रता एवं कुछ रोग प्रायः बना रहेगा और दैहिक सुंदरता में कुछ कमी रहेगी किंतु जातक/जातिका शत्रुओं और दिक्कतों की परवाह नही करेंगे तथा बड़ी हिम्मत शक्ति द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे तथा अपने को कुछ घिराव के अंदर समझते हुए भी प्रभाव शक्ति से काम लेंगे और प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने की संभावना में वृद्धि होगी साथ ही सूर्य के सप्तम दृष्टि से द्वादश भाव खर्च व बाहरी स्थान को मित्र चंद्र के स्वामित्व वाली कर्क राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका खर्चा बहुत करेंगे और बाहरी स्थानों में अच्छी उन्नति करेंगे।

 

जय श्री राम।

 

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