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Puja Sangrah

दारिद्र्यनाशनं सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रम्

।।श्री गणेशाय नमः।।
ॐ अस्य श्रीसिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रस्य हिरण्यगर्भ ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, सिद्धिलक्ष्मीर्देवता, मम समस्त दुःखक्लेशपीडादारिद्र्यविनाशार्थं सर्वलक्ष्मीप्रसन्नकरणार्थं
महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वतीदेवताप्रीत्यर्थं च
सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रजपे विनियोगः।
ॐ सिद्धिलक्ष्मी अङ्गुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं विष्णुहृदये तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ क्लीं अमृतानन्दे मध्यमाभ्यां नमः।
ॐ श्रीं दैत्यमालिनी अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ तं तेजःप्रकाशिनी कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मी वैष्णवी माहेश्वरी
करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
एवं हृदयादिन्यासः।
ॐ सिद्धिलक्ष्मी हृदयाय नमः।
ॐ ह्रीं वैष्णवी शिरसे स्वाहा।
ॐ क्लीं अमृतानन्दे शिखायै वौषट्।
ॐ श्रीं दैत्यमालिनी कवचाय हुम्।
ॐ तं तेजःप्रकाशिनी नेत्रद्वयाय वौषट्।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मीं वैष्णवीं फट्॥
अथ ध्यानम्
ब्राह्मीं च वैष्णवीं भद्रां षड्भुजां च चतुर्मुखाम्।
त्रिनेत्रां च त्रिशूलां च पद्मचक्रगदाधराम्॥१॥
पीताम्बरधरां देवीं नानालङ्कारभूषिताम्।
तेजःपुञ्जधरां श्रेष्ठां ध्यायेद्बालकुमारिकाम्॥२॥

ॐकारलक्ष्मीरूपेण विष्णोर्हृदयमव्ययम्।
विष्णुमानन्दमध्यस्थं ह्रींकारबीजरूपिणी॥३॥
ॐ क्लीं अमृतानन्दभद्रे सद्य आनन्ददायिनी।
ॐ श्रीं दैत्यभक्षरदां शक्तिमालिनी शत्रुमर्दिनी॥४॥

तेजः प्रकाशिनी देवी वरदा शुभकारिणी।
ब्राह्मी च वैष्णवी भद्रा कालिका रक्तशाम्भवी॥५॥
आकारब्रह्मरूपेण ॐ कारं विष्णुमव्ययम्।
सिद्धिलक्ष्मि परालक्ष्मि लक्ष्यलक्ष्मि नमोऽस्तुते॥६॥

सूर्यकोटिप्रतीकाशं चन्द्रकोटिसमप्रभम्।
तन्मध्ये निकरे सूक्ष्मं ब्रह्मरूपव्यवस्थितम्॥७॥
ॐ कारपरमानन्दं क्रियते सुखसम्पदा।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके॥८॥

प्रथमे त्र्यम्बका गौरी द्वितीये वैष्णवी तथा।
तृतीये कमला प्रोक्ता चतुर्थे सुरसुन्दरी॥९॥
पञ्चमे विष्णुपत्नी च षष्ठे च वैष्णवी तथा।
सप्तमे च वरारोहा अष्टमे वरदायिनी॥१०॥

नवमे खड्गत्रिशूला दशमे देवदेवता।
एकादशे सिद्धिलक्ष्मीर्द्वादशे ललितात्मिका॥११॥
एतत्स्तोत्रं पठन्तस्त्वां स्तुवन्ति भुवि मानवाः।
सर्वोपद्रवमुक्तास्ते नात्र कार्या विचारणा॥१२॥

एकमासं द्विमासं वा त्रिमासं च चतुर्थकम्।
पञ्चमासं च षण्मासं त्रिकालं यः पठेन्नरः॥१३॥
ब्राह्मणाः क्लेशतो दुःखदरिद्रा भयपीडिताः।
जन्मान्तरसहस्रेषु मुच्यन्ते सर्वक्लेशतः॥१४॥

अलक्ष्मीर्लभते लक्ष्मीमपुत्रः पुत्रमुत्तमम्।
धन्यं यशस्यमायुष्यं वह्निचौरभयेषु च॥१५॥
शाकिनीभूतवेतालसर्वव्याधिनिपातके।
राजद्वारे महाघोरे सङ्ग्रामे रिपुसङ्कटे॥१६॥

सभास्थाने श्मशाने च कारागेहारिबन्धने।
अशेषभयसम्प्राप्तौ सिद्धिलक्ष्मीं जपेन्नरः॥१७॥
ईश्वरेण कृतं स्तोत्रं प्राणिनां हितकारणम्।
स्तुवन्ति ब्राह्मणा नित्यं दारिद्र्यं न च वर्धते॥१८॥

या श्रीः पद्मवने कदम्बशिखरे राजगृहे कुञ्जरे
श्वेते चाश्वयुते वृषे च युगले यज्ञे च यूपस्थिते।
शङ्खे देवकुले नरेन्द्रभवनी गङ्गातटे गोकुले
सा श्रीस्तिष्ठतु सर्वदा मम गृहे भूयात्सदा निश्चला॥१९॥

॥इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे ईश्वरविष्णुसंवादे
दारिद्र्यनाशनं सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

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Jealousy Levels by Zodiac: Handle With Care!

Jealousy means feeling upset when you think someone else might take your loved one’s attention. Everyone feels jealousy sometimes. But some zodiac signs feel it more than others. Let’s see who gets jealous the most and how to stop feeling too jealous.

Most Jealous Signs and How to Handle It

Scorpio:- Scorpios love deeply and want to trust. They get jealous if they feel left out.
How to handle:- Be honest with them. Tell them you love them and make them feel safe.

Cancer:- Cancers feel love very strongly and want to be sure they are loved back.
How to handle:- Spend time with them and show you care a lot.

Leo:- Leos like to be noticed and praised. They get jealous if ignored.
How to handle:- Give them attention and tell them they are special.

Middle-Level Jealousy Signs and How to Handle

Taurus:- Taurus likes steady love. They may feel jealous if they think they will lose you.
How to handle:- Talk about your feelings and keep promises.

Aries:- Aries wants to be first in your heart and may get jealous quickly.
How to handle:- Stay calm, be honest, and tell them they matter.

Virgo:- Virgos worry a lot. They get jealous if they feel unsure about the relationship.
How to handle:- Be clear and kind. Help them feel safe.

Least Jealous Signs and How to Handle

Sagittarius:- Sagittarius loves freedom. They don’t get jealous easily.
How to handle:- Give them space and be honest.

Aquarius:- Aquarius values independence and talks about feelings differently.
How to handle:- Speak clearly and respect their way.

Gemini:- Geminis like meeting people but aren’t usually jealous.
How to handle:- Keep talking to them and show you care.

Libra:- Libra likes peace and trusts their partner.
How to handle:- Be fair and solve problems together.

Capricorn:- Capricorn is careful with feelings and gets jealous slowly.
How to handle:- Show you are serious and dependable.

Pisces:- Pisces is loving and trusts easily. They get jealous less often.
How to handle:- Be gentle and give them attention.

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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्

देव्युवाच-

देवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!
करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक!॥
अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः॥

ईश्वर उवाच-

देवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम्।
सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम्॥
सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति मुक्तिदम्।
राजवश्यकरं दिव्यं गुह्याद्-गुह्यतरं परम्॥
दुर्लभं सर्वदेवानां चतुष्षष्टि कलास्पदम्।
पद्मादीनां वरान्तानां निधीनां नित्यदायकम्॥
समस्त देव संसेव्यं अणिमाद्यष्ट सिद्धिदम्।
किमत्र बहुनोक्तेन देवी प्रत्यक्षदायकम्॥
तव प्रीत्याद्य वक्ष्यामि समाहितमनाश्शृणु।
अष्टोत्तर शतस्यास्य महालक्ष्मिस्तु देवता॥
क्लीं बीज पदमित्युक्तं शक्तिस्तु भुवनेश्वरी।
अङ्गन्यासः करन्यासः स इत्यादि प्रकीर्तितः॥

ध्यानं

वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां
हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैः नानाविधैः भूषिताम् ।
भक्ताभीष्ट फलप्रदां हरिहर ब्रह्माधिभिस्सेवितां
पार्श्वे पङ्कज शङ्खपद्म निधिभिः युक्तां सदा शक्तिभिः॥

सरसिज नयने सरोजहस्ते धवल तरांशुक गन्धमाल्य शोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवन भूतिकरि प्रसीदमह्यम्॥

प्रकृतिं विकृतिं विद्यां सर्वभूत-हितप्रदाम्।
श्रद्धां विभूतिं सुरभिं नमामि परमात्मिकाम्॥१॥

वाचं पद्मालयां पद्मां शुचिं स्वाहां स्वधां सुधाम्।
धन्यां हिरण्ययीं लक्ष्मीं नित्यपुष्टां विभावरीम्॥२॥

अदितिं च दितिं दीप्तां वसुधां वसुधारिणीम्।
नमामि कमलां कान्तां कामाक्षीं क्रोधसम्भवाम् क्षीरोदसम्भवाम्॥३॥

अनुग्रहप्रदां बुद्धि-मनघां हरिवल्लभाम्।
अशोका-ममृतां दीप्तां लोकशोकविनाशिनीम्॥४॥

नमामि धर्मनिलयां करुणां लोकमातरम्।
पद्मप्रियां पद्महस्तां पद्माक्षीं पद्मसुन्दरीम्॥५॥

पद्मोद्भवां पद्ममुखीं पद्मनाभप्रियां रमाम्।
पद्ममालाधरां देवीं पद्मिनीं पद्मगन्धिनीम्॥६॥

पुण्यगन्धां सुप्रसन्नां प्रसादाभिमुखीं प्रभाम्।
नमामि चन्द्रवदनां चन्द्रां चन्द्रसहोदरीम्॥७॥

चतुर्भुजां चन्द्ररूपा-मिन्दिरा-मिन्दुशीतलाम्।
आह्लाद जननीं पुष्टिं शिवां शिवकरीं सतीम्॥८॥

विमलां विश्वजननीं तुष्टिं दारिद्र्यनाशिनीम्।
प्रीतिपुष्करिणीं शान्तां शुक्लमाल्याम्बरां श्रियम्॥९॥

भास्करीं बिल्वनिलयां वरारोहां यशस्विनीम्।
वसुन्धरा मुदाराङ्गां हरिणीं हेममालिनीम्॥१०॥

धनधान्यकरीं सिद्धिं स्त्रैणसौम्यां [सदासौम्यां] शुभप्रदाम्।
नृपवेश्मगतां नन्दां वरलक्ष्मीं वसुप्रदाम्॥११॥

शुभां हिरण्यप्राकारां समुद्रतनयां जयाम्।
नमामि मङ्गलां देवीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥१२॥

विष्णुपत्नीं, प्रसन्नाक्षीं नारायणसमाश्रिताम्।
दारिद्र्यध्वंसिनीं देवीं सर्वोपद्रववारिणीम्॥१३॥

नवदुर्गां महाकालीं ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकाम्।
त्रिकालज्ञानसम्पन्नां नमामि भुवनेश्वरीम्॥१४॥

लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराज तनयां श्रीरङ्गधामेश्वरीम्।
दासीभूत समस्तदेव वनितां लोकैक दीपाङ्कुराम्॥
श्रीमन्मन्द कटाक्ष लब्ध विभवद्-ब्रह्मेन्द्र गङ्गाधराम्।
त्वां त्रैलोक्य कुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥१५॥

मातर्नमामि! कमले! कमलायताक्षि!
श्री विष्णु हृत्-कमलवासिनि! विश्वमातः!
क्षीरोदजे कमल कोमल गर्भगौरि!
लक्ष्मी! प्रसीद सततं समतां शरण्ये॥१६॥

त्रिकालं यो जपेत् विद्वान् षण्मासं विजितेन्द्रियः।
दारिद्र्य ध्वंसनं कृत्वा सर्वमाप्नोत्-ययत्नतः।
देवीनाम सहस्रेषु पुण्यमष्टोत्तरं शतम्।
येन श्रिय मवाप्नोति कोटिजन्म दरिद्रतः॥१७॥

भृगुवारे शतं धीमान् पठेत् वत्सरमात्रकम्।
अष्टैश्वर्य मवाप्नोति कुबेर इव भूतले॥
दारिद्र्य मोचनं नाम स्तोत्रमम्बापरं शतम्।
येन श्रिय मवाप्नोति कोटिजन्म दरिद्रतः॥१८॥

भुक्त्वातु विपुलान् भोगान् अन्ते सायुज्यमाप्नुयात्।
प्रातःकाले पठेन्नित्यं सर्व दुःखोप शान्तये।
पठन्तु चिन्तयेद्देवीं सर्वाभरण भूषिताम्॥१९॥

।।इति श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णं।।

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सूर्य षष्ठी 2025: जानिए व्रत का महत्व, तिथि‑मुहूर्त और संतान की मंगलकामना हेतु विशेष उपाय

सूर्य षष्ठी जिसे लोलार्क षष्ठी, ललही छठ व डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है यह चार दिवसीय पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन नहाय-खाय से इस महापर्व की शुरुवात होती है जो कि वर्ष 2025 में 25 अक्टूबर से होगी और इसी दिन से सूर्य षष्ठी व्रत का भी आरंभ हो जाएगा।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड के अनुसार, राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी की कोई संतान नही थी तब महर्षि कश्यप की सलाह पर दोनों दंपत्तियों ने सूर्य षष्ठी व्रत किया जिससे ब्रह्मा की मानस पुत्री देवी षष्ठी अर्थात छठी माता प्रसन्न होकर राजा प्रियव्रत व रानी मालिनी को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था वहीं महाभारत काल में भी द्रौपदी के द्वारा भी सूर्य षष्ठी का उल्लेख है जिसके फलस्वरूप द्रौपदी व पांडवों को कष्टों से मुक्ति मिली थी।

सूर्य षष्ठी पर्व विवरण:-

25 अक्टूबर 2025 सूर्य षष्ठी तीन दिवसीय व्रत आरंभ व नहाय-खाय की रस्म।

26 अक्टूबर 2025 सूर्य षष्ठी व्रत दूसरा दिन व खरना।

27 अक्टूबर 2025 सूर्य षष्ठी शाम सूर्यास्त के समय अर्थात अस्तांचल सूर्य को अर्घ देना।

27 अक्टूबर सूर्यास्त शाम 05:36 (काशी)

28 अक्टूबर 2025 सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ व सूर्य षष्ठी व्रत की पारणा।

28 अक्टूबर 2025 सूर्योदय 06:25 (काशी)।

सूर्य षष्ठी विशेष उपाय:-

संतान की मंगलकामना हेतु विशेष उपाय
संतान की मंगलकामना हेतु विशेष उपाय

1. संतान की उन्नति व भाग्य वृद्धि हेतु ताँबे के सूर्य यंत्र को घर के पूजा स्थल पर स्थापित कर नित्य धूप-दीप अर्पित कर सूर्य मंत्र का जप करें।
2. सूर्य षष्ठी के दिन सूखा नारियल, बादाम, किशमिश सूर्य मंदिर में संतान के भाग्य वृद्धि की कामना से सेवा के लिए देना उत्तम रहेगा।
3. संतान के स्वास्थ लाभ व दीर्घायु हेतु गाय को रोटी-गुड़ खिलाएं व पानी पिलाएं।
4. यदि संतान की भाग्य वृद्धि व उत्तम स्वास्थ्य हेतु किसी भिखारी को गेहूँ, लाल दाल व किशिमिश का दान करें।
5. समाज में मान व प्रतिष्ठा हेतु आदित्य हिर्दय स्तोत्र का पाठ करें व किसी 1 ब्राह्मण को भोजन करवाएं।

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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की साफ-सफाई के कुछ नियम जिनका ध्यान रखने से घर में सुख शांति बनी रहती है

वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में रोज साफ-सफाई होती है वहाँ देवी लक्ष्मी का वास होता है अतः घर की साफ-सफाई हेतु वास्तु शास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन किया जाए तो घर में सुख व समृद्धि के रास्ते खुल जाते हैं क्योंकि घर में रखी हर वस्तु का घर के सदस्यों की तरक्की, सेहत व मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है।

साफ-सफाई का समय:-

वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्यास्त के बाद और ब्रह्म मुहूर्त्त में झाड़ू नही लगाना चाहिए और यदि किसी कारण से घर की साफ-सफाई करनी पड़े तो सफाई में निकले कचरे को सुबह सूर्योदय के बाद घर से बाहर फेकना चाहिए।

घर के सभी कोनों की सफाई:-

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का ईशान कोण और वायव्य कोण और उत्तर दिशा हमेशा साफ और खाली रहना चाहिए क्योंकि इन स्थानों पर धन के देवता कुबेर का वास होता है ।

छत या बालकनी की सफाई:-

घर की छत और बालकनी पर कभी भी कबाड़ या टूटी-फूटी चीजें नही रखनी चाहिए ऐसा करने से घर में दरिद्रता और बीमारी आती है।

बाथरूम की साफ-सफाई:-

वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम को हमेशा साफ रखना चहिए और बाथरूम में कहीं भी मकड़ी के जाल नही होने चाहिए क्योंकि घर का बाथरूम गंदा होने पर भी वास्तु दोष उत्पन्न होता है।

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शिवकृतम् दुर्गास्तोत्रम्

रक्ष रक्ष महादेवि दुर्गे दुर्गतिनाशिनि।
मां भक्तमनुरक्तं च शत्रुग्रस्तं कृपामयि॥१॥

विष्णुमाये महाभागे नारायणि सनातनि।
ब्रह्मस्वरूपे परमे नित्यानन्दस्वरूपिणी॥२॥

त्वं च ब्रह्मादिदेवानामम्बिके जगदम्बिके।
त्वं साकारे च गुणतो निराकारे च निर्गुणात्॥३॥

मायया पुरुषस्त्वं च मायया प्रकृतिः स्वयम्।
तयोः परं ब्रह्म परं त्वं बिभर्षि सनातनि॥४॥

वेदानां जननी त्वं च सावित्री च परात्परा।
वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः सर्वसम्पत्स्वरूपिणी॥५॥

मर्त्यलक्ष्मीश्च क्षीरोदे कामिनी शेषशायिनः।
स्वर्गेषु स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं राजलक्ष्मीश्च भूतले॥६॥

नागादिलक्ष्मीः पाताले गृहेषु गृहदेवता।
सर्वसस्यस्वरूपा त्वं सर्वैश्वर्यविधायिनी॥७॥

रागाधिष्ठातृदेवी त्वं ब्रह्मणश्च सरस्वती।
प्राणानामधिदेवी त्वं कृष्णस्य परमात्मनः॥८॥

गोलोके च स्वयं राधा श्रीकृष्णस्यैव वक्षसि।
गोलोकाधिष्ठाता देवी वृन्दावनवने वने॥९॥

श्रीरासमण्डले रम्या वृन्दावनविनोदिनी।
शतश‍ृङ्गाधिदेवी त्वं नाम्ना चित्रावलीति च॥१०॥

दक्षकन्या कुत्र कल्पे कुत्रकल्पे च शैलजा।
देवमाता दितिस्त्वं च सर्वाधारा वसुन्धरा॥११॥

त्वमेव गङ्गा तुलसी त्वं च स्वाहा स्वधा सती।
त्वदंशांशांशकलया सर्वदेवादियोषितः॥१२॥

स्त्रीरूपं चापि पुरुषं देवि त्वं च नपुंसकम् ।
वृक्षाणां वृक्षरूपा त्वं सृष्टौ चाङ्कुररूपिणी॥१३॥

वह्नौ च दाहिका शक्तिर्जले शैत्यस्वरूपिणी।
सूर्ये तेजस्वरूपा च प्रभारूपा च सन्ततम्॥१४॥

गन्धरूपा च भूमौ च आकाशे शब्दरूपिणी।
शोभास्वरूपा चन्द्रे च पद्मसङ्घे च निश्चितम्॥१५॥

सृष्टौ सृष्टिस्वरूपा च पालने परिपालिका।
महामारी च संहारे जले च जलरूपिणी १६॥

क्षुत् त्वं दया त्वं निद्रा त्वं तृष्णा त्वं बुद्धिरूपिणी।
तुष्टिस्त्वं चपि पुष्टिस्त्वं श्रद्धा त्वं च क्षमा स्वयम्॥१७॥

शान्तिस्त्वं च स्वयं भ्रान्तिः कान्तिस्त्वं कीर्तिरेव च।
लज्जा त्वं च तथा माया भुक्तिमुक्तिस्वरूपिणी॥१८॥

सर्वशक्तिस्वरूपा त्वं सर्वसम्पत्प्रदायिनी।
वेदेऽनिर्वचनीया त्वं त्वां न जानाति कश्चन॥१९॥

सहस्रवक्त्रस्त्वां स्तोतुं न शक्तः सुरेश्वरि।
वेदाः न शक्ताः को विद्वान् न च शक्ता सरस्वती॥२०॥

स्वयं विधाता शक्तो न न च विष्णुः सनातनः।
किं स्तौमि पञ्चवक्त्रेण रणत्रस्तो महेश्वरि।
कृपां कुरु महामाये मम शत्रुक्षयं कुरु॥२१॥

॥इति शिवकृतम् दुर्गास्तोत्रम् सम्पूर्णम्॥

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नवंबर 2025 के प्रमुख व्रत, पर्व और त्यौहार

1 नवंबर 2025:- प्रबोधिनी एकादशी व्रत सभी के लिए, भद्रा दिन में 03:30 से रात्रि 02:56 तक, पंचक, भीष्मपंचक प्रारंभ।

2 नवंबर 2025:- मीन राशि के चंद्रमा दिन 08:12 पर, पंचक।

3 नवंबर 2025:- सोम प्रदोष व्रत, मूल प्रारंभ दिन में 11:58 पर, पंचक।

4 नवंबर 2025:- मेष राशि के चंद्र व पंचक समाप्ति दिन 11:49 पर, श्रीवैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत, श्री काशी विश्वनाथ प्रतिष्ठा दिवस, श्री विश्वनाथ जी को तुलसी चढ़ाना, भद्रा प्रारंभ रात्रि 09:33 पर, मूल।

5 नवंबर 2025:- स्नान-दान-व्रत की पूर्णिमा, भीष्म पंचक समाप्ति, श्री गुरुनानक जयंती, देव दीपावली घाटों पर, दीपोत्सव व दीपदान (काशी), भद्रा समाप्ति दिन 08:25 पर।

6 नवंबर 2025:- वृषभ राशि के चंद्र दिन 02:17 पर, कार्तिक व्रत की पारणा।

7 नवंबर 2025:- भद्रा रात्रि 01:21 से प्रारंभ।

8 नवंबर 2025:- मिथुन राशि के चंद्र शाम 04:36 पर, श्री संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत, सौभाग्य सुंदरी व्रत, भद्रा समाप्ति दिन 12:13 पर।

9 नवंबर 2025:- यायीजयोग।

10 नवंबर 2025:- कर्क राशि के चंद्र रात्रि 07:41 पर, श्री अन्नपूर्णा जी का 17 दिवसीय व्रत आरंभ, भद्रा रात्रि शेष 06:21 से।

11 नवंबर 2025:- भद्रा शाम 05:42 तक।

12 नवंबर 2025:- सिंह राशि के चंद्र रात्रि 12:21 पर, श्री भैरवाष्टमी व्रत, श्री काल भैरव जी का वार्षिक श्रृंगार व जन्मोत्सव, मूल।

13 नवंबर 2025:- मूल समाप्ति रात्रि 11:50 पर।

14 नवंबर 2025:- भद्रा दिन 03:55 से अर्ध रात्रि 03:47 तक।

15 नवंबर 2025:- कन्या राशि के चंद्र दिन 07:23 पर, उत्पन्ना एकादशी व्रत सभी के लिए।

16 नवंबर 2025:- सूर्य की वृश्चिक संक्रांति, हेमन्त ऋतु प्रारंभ, श्री स्वामी कार्तिकेय जी की स्थापना व पूजन (बंगाल)।

17 नवंबर 2025:- तुला राशि के चंद्र शाम 04:49 पर, श्री सोम प्रदोष व्रत, श्री स्वामी कार्तिकेय जी की मूर्ति विसर्जन।

18 नवंबर 2025:- मास शिवरात्रि व्रत, भद्रा दिन में 07:02 से रात्रि 07:58 तक।

19 नवंबर 2025:- वृश्चिक राशि के चंद्रमा रात्रि शेष 04:07 पर, श्राद्ध की अमावस्या।

20 नवंबर 2025:- स्नान-दान की अमावस्या।

21 नवंबर 2025:- मूल प्रारंभ दिन 01:22 पर।

22 नवंबर 2025:- धनु राशि के चंद्र दिन 03:52 पर, मूल।

23 नवंबर 2025:- मूल समाप्ति दिन 05:21 पर, भद्रा प्रारंभ अर्ध रात्रि 05:37 पर।

24 नवंबर 2025:- मकर राशि के चंद्र रात्रि 02:17 पर, श्री वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत, भद्रा समाप्ति शाम 06:18 पर।

25 नवंबर 2025:- श्री राम विवाहोत्सव, जानकी मंगल।

26 नवंबर 2025:- श्री चम्पा षष्ठी, श्री अन्नपूर्णा जी के व्रत की समाप्ति व धान का श्रृंगार (काशी)।

27 नवंबर 2025:- कुंभ राशि के चंद्र व पंचक प्रारंभ दिन 09:32 पर, भद्रा प्रारंभ रात्रि 07:24 पर।

28 नवंबर 2025:- भद्रा समाप्ति प्रातः 07:04 पर, पंचक।

29 नवंबर 2025:- मीन राशि के चंद्र शाम 04:03 पर, नन्दा नवमी, पंचक।

30 नवंबर 2025:- भद्रा प्रारंभ रात्रि 03:15 पर, मूल प्रारंभ रात्रि 08:12 पर, पंचक।

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अक्षय नवमी 2025: जानिए अक्षय नवमी का महत्व व शुभ मुहूर्त्त

कार्तिक माह में देवउठनी एकादशी से दो दिन पहले पड़ने वाली नवमी को आंवला नवमी, इच्छा नवमी और अक्षय नवमी के नाम से जाना जाता है, इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ आंवले के पेड़ की भी पूजा की जाती है अक्षय का अर्थ ही है कभी न नष्ट होने वाला अतः अक्षय नवमी पर किए गए दान-पुण्य, व्रत व अन्य शुभ कार्यों से अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती है।

अक्षय नवमी शुभ मुहूर्त्त

“ऋषिकेश पंचांग (काशी)” अनुसार वर्ष 2025 में कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 29 अक्टूबर की मध्य रात्रि 04:52 पर लगेगी जो कि 30 अक्टूबर की मध्य रात्रि 04:41 तक रहेगी अतः अक्षय नवमी 30 अक्टूबर को मनाई जाएगी इस दिन प्रातः 07:46 से 10:02 तक वृश्चिक लग्न और श्रवण नक्षत्र में पूजन मुहूर्त्त है।

इसके अतिरिक्त स्थिर लग्न कुंभ दोपहर 01:56 से 03:27 और वृषभ लग्न शाम 06:32 से रात्रि 08:28 का समय भी पूजन के लिए उत्तम है।

अक्षय नवमी का महत्व

धर्म शास्त्रों के अनुसार मान्यता है कि अक्षय नवमी के दिन किया गया पुण्य, दान या जप-तप कभी नष्ट नहीं होता तथा इस दिन आंवले के वृक्ष के नीचे बैठकर भोजन पकाकर करने से उत्तम स्वास्थ्य प्राप्त होता है और सुख-समृद्धि के रास्ते बनते हैं।​

अक्षय नवमी के दिन आंवले वृक्ष, भगवान विष्णु व माता लक्ष्मी के साथ तुलसी की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति, अक्षय पुण्य फल और सौभाग्य की प्राप्ति होती है साथ ही आर्थिक स्थिरता भी बनी रहती है।

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Diwali 2025: जानिए, दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त्त व राशि अनुसार दीपावली विशेष उपाय

कार्तिक कृष्ण अमावस्या को प्रदोषकाल में दीपावली का पर्व मनाया जाता है साथ ही इस दिन दीपदान और लक्ष्मी पूजन आदि कर्म किया जाता है, वर्ष 2025 में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी 20 अक्टूबर 2025 सोमवार को दोपहर 02:55 तक है इसके बाद अमावस्या तिथि लग रही है जो अगले दिन मंगलवार 21 अक्टूबर 2025 की शाम 04:26 तक रहेगी।

धर्मसिन्धु के अनुसार:-

“पूर्वत्रैव प्रदोषव्यापतौ लक्ष्मीपूजनादौ पूर्वा”

अर्थात प्रदोष व्यापिनी अमावस्या में दीपदान व लक्ष्मीपूजनादि कृत्य करना चाहिए इस वर्ष प्रदोष व्यापिनी अमावस्या 20 अक्टूबर को मिल रही है जो संपूर्ण रात्रि रहेगी अतः इस वर्ष दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा।

दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त्त:-

दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त्त
दीपावली पूजन शुभ मुहूर्त्त

दीपावली पूजन का मुख्यकाल प्रदोषकाल होता है जिसमें स्थिर लग्न की प्रधानता होती है अतः वृषभ, सिंह व कुंभ लग्न में दीपावली, लक्ष्मी, गणेश व कुबेरादि देवताओं का पूजन करना चाहिए।

प्रथम मुहूर्त्त वृषभ लग्न में शाम 07:10 से रात्रि 09:06 तक है।

द्वितीय मुहूर्त्त अर्धरात्रि सिंह लग्न में रात्रि 01:38 से 03:52 तक है।

तृतीय मुहूर्त्त 21 अक्टूबर को दोपहर 02:56 से 04:05 तक है।

 

राशि अनुसार दीपावली विशेष उपाय:-

जानिए राशि अनुसार दीपावली विशेष उपाय
जानिए राशि अनुसार दीपावली विशेष उपाय

 

 

 

 

 

 

 

 

 

मेष राशि:- मेष राशि वाले व्यक्तियों के लिए गुड़, मसूर दाल, लाल या पीला मीठा व केले का दान किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ रहेगा।

वृषभ राशि:- वृषभ राशि वाले व्यक्तियों के लिए चावल, चीनी, दहीं व खीर का किसी जरूरतमंद को दान करना शुभ रहेगा साथ ही दहीं का तिलक भी मस्तक पर करने से मन शांत होगा।

मिथुन राशि:- मिथुन राशि वाले व्यक्तियों के लिए हरे वस्त्र व हरी दाल किसी ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

कर्क राशि:- कर्क राशि वाले व्यक्तियों को किसी महिला को खीर एवं किसी ब्राह्मण को केले का दान करना शुभ रहेगा।

सिंह राशि:- सिंह राशि वाले व्यक्तियों के लिए गेहूँ, गुड़ और वस्त्र किसी भिखारी को दान करना शुभ रहेगा।

कन्या राशि:- कन्या राशि वाले व्यक्तियों के लिए साबुत धनिया, कांसे का बर्तन व हरी सब्जियों का किसी जरूरतमंद को दान करना शुभ रहेगा।

तुला राशि:- तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए किसी विद्यार्थी को पुस्तक, पेन, पेंसिल और चॉकलेट का दान करना शुभ रहेगा।

वृश्चिक राशि:- वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों के लिए चने की दाल, गुड़, किशमिश का किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ रहेगा।

धनु राशि:- धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए पीले वस्त्र, केसर युक्त खीर व केले का किसी ब्राह्मण को दान करना शुभ रहेगा।

मकर राशि:- मकर राशि वाले व्यक्तियों के लिए काली दाल, कंबल व सरसों का तेल किसी जरूरतमंद को दान करना शुभ रहेगा।

कुंभ राशि:- कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के लिए चप्पल, हरी सब्जी, काली दाल, अनाज व सरसों का तेल किसी वृद्ध व्यक्ति या जरूरतमंद को दान करना शुभ रहेगा।

मीन राशि:- मीन राशि वाले व्यक्तियों के लिए हल्दी, बेसन, पीला मीठा, कंबल व केला कुसी ब्राह्मण को दान करना शुभ रहेगा।

Astrologer Pooshark Jetly

(Founder of Astrology Sutras)