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मई 2020: तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

मई 2020: तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

तुला लग्न
तुला लग्न कुंडली

 

तुला लग्न व तुला राशि वालों के लिए मई 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का सप्तम स्थान से गोचर रहेगा फलस्वरूप नौकरी पेशा लोगों के लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी के स्वभाव में कुछ तेजी देखने को मिलेगी, यदि आप पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं तो सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, यदि आप नए कार्य की शुरुवात करते हैं तो जीवनसाथी को पार्टनर बना कर करें लाभ होगा 14 मई को सूर्य गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें व गर्म चीजों से परहेज करें, ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में तेजी रहेगी जिसके कारण ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, अष्टम भाव जीवनसाथी की वाणी को भी दर्शाता है क्योंकि सप्तम भाव जीवनसाथी का व अष्टम भाव उसकी वाणी का भाव है अतः जीवनसाथी की वाणी कुछ गर्माहट लिए हुए होगी जिस कारण से जीवनसाथी के साथ भी विवाद संभव रहेगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तनाव लेने से बचें, माह के शुरुवात में बुध का गोचर सप्तम भाव से रहेगा जिस कारण से कार्य के सिलसिले से यात्राओं के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के योग बनेंगे, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, संतान को कुछ कष्ट संभव रहेगा 9 मई को बुध गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है, तनाव लेने से बचें, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें 24 मई को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके भाग्य स्थान में जाएंगे फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी, धार्मिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा।

 

तुला राशिफल
तुला राशि

 

माह के शुरुवात में शुक्र का अष्टम भाव से गोचर रहेगा अतः वाहन सावधानी से चलाएं, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, लोग आपके पीठ-पीछे षड्यंत्र रचेंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें क्योंकि इस माह आपके हार्मोन्स काफी उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर सकते हैं, जिन्हें हार्मोन्स से जुड़ी कोई समस्या है वह भी अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, माह के शुरुवात में मंगल गुरु व शनि का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप आप घर परिवर्तन या घर में साज-सज्जा का कार्य करवा सकते हैं, भूमि सुख प्राप्त होने के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा किन्तु फिर भी उनके पैरों विशेषतः घुटनो व जोड़ों या कमर में दर्द की शिकायत रह सकती है, कार्यस्थल पर सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे 4 मई को मंगल गोचर बदलकर आपके पंचम भाव मे आ जाएंगे फलस्वरूप संतान का सहयोग प्राप्त होगा व संतान की उन्नति होगी, यदि आपके कोई बड़े भाई हैं तो उनकी भी उन्नति होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए मार्ग बनाने का प्रयास करेंगे, पेट में कोई समस्या संभव रहेगी, वाहन सावधानी से चलाएं।

 

तुला राशि
तुला राशि

 

कुल मिलाकर तुला लग्न व तुला राशि वालों के मई 2020 मिला-जुला रहेगा जिसमें मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, यदि आपका पार्टनरशिप से जुड़ा कार्य है तो उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, यदि आप नए कार्य की शुरुवात करना चाहते हैं तो जीवनसाथी को पार्टनर बनाकर करें लाभ होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, वाहन सावधानी से चलाएं, 7 मई से 24 मई तक लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें तथा यदि संभव हो तो सिर्फ अपने कार्य पर ही ध्यान दें, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, माह की 6, 8, 12, 13, 15, 17, 19, 20, 21, 22, 23 व 24 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि तुला लग्न व तुला राशि वाले व्यक्ति यदि दुर्गा सप्तशती का शुक्रवार से आरंभ कर नित्य पाठ करें व नित्य सूर्य को जल दें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470

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नाड़ी दोष व उसका परिहार

नाड़ी दोष व उसका परिहार

 

नाड़ी दोष:-

 

नाड़ी दोष क्या होता है
नाड़ी दोष क्या होता है

 

कुंडली मिलान की प्रकिया में अष्ट कूट का मिलान किया है वह अष्ट कूट क्रमशः वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी होते हैं इन अष्ट कूटों में प्रत्येक का अपना-अपना महत्व होता है, इस लेख में मैं नाड़ी पर चर्चा करता हूँ क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसको अधिकतर लोग नजरअंदाज कर देते हैं जब कि नाड़ी न मिलने पर दामपत्य जीवन में अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।

 

ज्योतिष ग्रंथों में नाड़ी तीन प्रकार की बताई गई है जो कि क्रमशः आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी के नाम से जानी जाती है अब प्रश्न यह उठता है कि यह कैसे ज्ञात किया जाए कि किस व्यक्ति का जन्म किस नाड़ी में हुआ है अतः इस पर मैं विस्तार से वर्णन करता हूँ।

 

हमारे ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नाड़ी में 9 नक्षत्र आते हैं जिसका निर्धारण व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित हो उसके आधार पर किया जाता है जिन्हें मैं विस्तार से लिख रहा हूँ।

 

जानें विवाह कब होगा

 

नाड़ियों में आने वाले नक्षत्र:-

१. आदि नाड़ी:-

 

अश्विनी, आद्रा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर आदि नाड़ी प्राप्त होती है।

 

२. मध्य नाड़ी:-

 

भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, घनिष्ठा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर मध्य नाड़ी प्राप्त होती है।

 

३. अंत्य नाड़ी:-

 

कृतिका, रोहिणी, श्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण और रेवती नक्षत्र में जन्म लेने पर अंत्य नाड़ी प्राप्त होती है।

 

नाड़ी दोष के परिहार:-

 

उक्त नाड़ी विचार में आदि व अंत्य नाड़ी में से कोई एक नाड़ी ही दोनों की हो तो कुछ विद्वानों का मत है कि रज्जूकूट अनुकूल हो, राशिकूट शुभ हो, दोनों का राशि स्वामी एक हो या दोनों राशियों में मैत्री हो तो नाड़ी दोष विशेष अनिष्टकारक नही होता है।

 

विशेष:-

 

मध्य नाड़ी एक हो तो पुरुष की मृत्यु तथा आदि अंत्य में स्त्री की मृत्यु होती है।

 

नक्षत्रानुसार नाड़ी दोष परिहार:-

 

नाड़ी दोष परिहार
नाड़ी दोष परिहार

 

१. विशाखा, अनुराधा, घनिष्ठा, रेवती, हस्त, स्वाती, आद्रा, पूर्वाभाद्रपद इन 8 नक्षत्रों में से किसी भी नक्षत्र में वर, कन्या या दोनों में से एक का ही जन्म हो तो विवाह शुभ होता है अर्थात नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है।

२. उत्तराभाद्रपद, रेवती, रोहिणी, विशाखा, आद्रा, श्रवण, पुष्य और मघा इन 8 नक्षत्रों में भी वर व कन्या का जन्म नक्षत्र पड़े तो नाड़ी दोष शांत हो जाता है, भरणी, मृगशिरा, शतभिषा, हस्त, पूर्वाषाढ़ा व श्लेषा इन नक्षत्रों में भी नाड़ी दोष नही रहता है।

३. वर व कन्या की एक राशि हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हो तो नाड़ी दोष नही होता है, एक नक्षत्र में भी चरण भेद होने पर अत्यावश्यकता में विवाह किया जा सकता है।

४. कृतिका, रोहिणी, घनिष्ठा, शतभिषा, पुष्य, श्लेषा ये नक्षत्र एक ही राशि में पड़ते हैं, तब भी इन जोड़े नक्षत्रों में यदि वर व कन्या के नक्षत्र हो तो इन्हें छोड़ना चाहिए।

५. रोहिणी, आद्रा, मघा, विशाखा, पुष्य, श्रवण, रेवती, उत्तराभाद्रपद में से किसी एक नक्षत्र में ही दोनो का जन्म हो तब भी नाड़ी दोष नही रहता, नक्षत्र चरण भेद आवश्यक है।

 

नक्षत्रेक्ये पादभेदे शुभम् स्यात।।

पराशरः प्राह नवांशभेदादेकर्क्षराश्योरपि सौमनस्यम्।।

एकक्षै चैकपादे च विवाह: प्राणहानिद:।।

दम्पत्योरेकपादे तु वर्षान्ते मरणं ध्रुवम्।।

 

अर्थात:-

चरण व नक्षत्र दोनों एक होने का फल मृत्यु है, नाड़ी कूट सर्व शिरोमणि प्रधान है, इसके गुण 8 माने जाते हैं।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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ग्रहों के कारकतत्व भाग १

ग्रहों के कारकतत्व भाग १

 

ग्रहों के कारकतत्व
ग्रहों के कारकतत्व

 

सूर्य:-

 

तांबा, सोना, पिता, धैर्य, शौर्य, आत्मा, प्रकाश, जंगल, मंदिर, हवन, उत्साह, शक्ति, पहाड़ में यात्रा, भगवान शिव से संबंधित कार्यों का कारक होता है।

 

चंद्र:-

 

अन्न, खेती, जल, गाय, माता का कुशल, फल, पुष्प, मोती, चांदी, वस्त्र, सफेद वस्तु, मुलायम वस्तु, यश, काँसा, दूध, दहीं, स्त्री प्राप्ति, सुखपूर्वक भोजन, रूप (सुंदरता) का कारक होता है।

 

मंगल:-

 

शारीरिक और मानसिक ताकत, पृथ्वी से उत्पन्न होने वाले पदार्थ, भाई-बहन के गुण, रण, साहस, रसोई की अग्नि, सोना, अस्त्र, चोर, शत्रु, उत्साह, दूसरे पुरुष की स्त्री में रति, मिथ्या भाषण, वीर्य (ताकत, पराक्रम), चित का उत्साह, उदारता, बहादुरी, चोट, सेनाधिपत्य का कारक होता है।

 

बुध:-

 

पांडित्य, बोलने की शक्ति, कला, निपुणता, विद्वानों द्वारा स्तुति, मामा, विद्या में बुद्धि का योग, यज्ञ, भगवान विष्णु से संबंधित धार्मिक कार्य, शिल्प, बन्धु, युवराज, मित्र, भांजा, भांजी, चतुरता आदि का कारक होता है।

 

गुरु:-

 

ज्ञान, अच्छे गुण, पुत्र, मंत्री, आचरण, चरित्र, आचार्यत्व (पढ़ाना या दीक्षा लेना), वेद शास्त्र, सदगति, देवताओं और ब्राह्मणों की भक्ति, यज्ञ, तपस्या, श्रद्धा, खजाना, विद्वता, सम्मान, दया, यदि किसी स्त्री की कुंडली हो तो उसके पति का विचार आदि का कारक गुरु होता है।

 

शुक्र:-

 

संपत्ति, सवारी, वस्त्र, भूषण, नाचने, गाने तथा बाजे के योग, सुगंधित पुष्प, रति (स्त्री-पुरुष प्रसंग), शैया (पलंग) और उससे संबंधित व्यापार, मकान, वैभव, विलास, विवाह या अन्य शुभ कर्म, उत्सव, यदि किसी पुरुष की कुंडली हो तो उसकी पत्नी का विचार आदि शुक्र के कारक होते हैं।

 

विशेष:-  वृहस्पति अर्थात गुरु पति का कारक और शुक्र पत्नी का कारक होता है, शुक्र स्त्री का कारक होने के नाते यह भी देखा जा सकता है कि उक्त जातक का स्त्रियों के साथ कैसे संबंध रहेगा।

 

शनि:-

 

आयु, मरण, भय, अपमान, पतन, बीमारी, दुख, दरिद्रता, बदनामी, पाप, मजदूरी, अपवित्रता, निंदा, मन का साफ न होना, मारने का सूतक, स्थिरता, भैस, आलस्य, कर्जा, लोहे की वस्तु, नौकरी, दासता, जेल जाना, खेती के साधन आदि शनि के कारक होते हैं।

 

शनि ग्रह से जुड़ी विस्तृत जानकारी व उनके सभी कारक तत्वों को जानने हेतु इस link पर जाएं।

शनि ग्रह से आखिर क्यों डरते हैं लोग, जाने शनि को– शनि ग्रह की सम्पूर्ण जानकारी:-

 

राहु:-

 

शोध करने की प्रवृ्ति, निष्ठुर वाणी युक्त, विदेश में जीवन, यात्रा, अकाल मृत्यु, इच्छाएं, त्वचा पर दाग, चर्म रोग, सरीसृ्प, सांप और सांप का जहर, विष, महामारी, अनैतिक महिला से संबन्ध, दादा, नानी, व्यर्थ के तर्क, भडकाऊ भाषण, बनावटीपन, विधवापन, दर्द और सूजन, डूबना, अंधेरा, दु:ख पहुंचाने वाले शब्द, निम्न जाति, दुष्ट स्त्री, जुआरी, विधर्मी, चालाकी, संक्रीण सोच, पीठ पीछे बुराई करने वाले, पाखण्डी।

 

केतु:-

 

शोध, निष्ठुर वाणी, चर्म रोग, अतिशूल, दु:ख, चण्डीश्वर, कुत्ता, वायु विकार, क्षयरोग , ब्रह्मज्ञान, संसार से विरक्त, गणेशादि देवताओं की उपासना और मोक्ष का कारक है।

 

सभी ग्रहों के विभिन्न राशियों में अलग-अलग चीजों के कारक होते हैं जिनको मैं आगे भाग में विस्तार से बतायूँगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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