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सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरूवात में मंगल का लग्न से गोचर रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाएगा जिस पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी फलस्वरूप स्वास्थ्य में सुधार होगा, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, नई चुनातियों का सामना करना पड़ सकता है व इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, 10 सितंबर को मंगल वक्री हो जाएंगे अतः स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ अनुभव होगी, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है जिस कारण से मन अप्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु संतान के स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ संभव रहेगी, 2 सितंबर को बुध गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर बुद्धि व विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने के योग बनेंगे, 16 सितंबर को सूर्य भी गोचर बदलकर आपकी कुंडली के छठे भाव में आ जाएंगे अतः सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, ज्वर, सर दर्द, नेत्रों में जलन/दर्द की समस्या रह सकती है, 22 सितंबर को बुध पुनः गोचर बदलकर आपकी कुंडली के सप्तम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जिनका कार्य बैंकिंग व फाइनेंस से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यदि आप अपने प्रेमी/प्रेमिका को प्रपोज करना चाहते हैं तो 14, 19, 20 व 21 सितंबर का दिन आपके लिए शुभ रहेगा।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा अतः मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए है उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, 23 सितंबर को राहु व केतु गोचर बदलकर क्रमशः दूसरे व अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं, वाहन सावधानी से चलाएं, तामसिक चीजों से परहेज करें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, 25 सितंबर को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 14 सितंबर को परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, 19 से 21 सितंबर का समय भी आपके लिए अच्छा रहेगा, किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा जिसमें किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है 10 सितंबर के बाद स्वास्थ्य का ख्याल रखें व क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 3, 4, 5, 17, 18, 21, 22 व 23 तिथियाँ अधिक शुभ नही है अतः इस दौरान कोई भी रिस्क लेने से बचें, मेरे अनुसार मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Astrology Sutras Remedies Recent Post कुछ अचूक टोटके व शाबर मंत्र

नजर दोष व उसके बचाव हेतु उपाय भाग: २—-Astrology Sutras

नजर दोष व उसके बचाव हेतु उपाय भाग: २—-Astrology Sutras

 

नजर दोष के उपाय
नजर दोष के उपाय

 

नजर दोष व उससे बचाव के लिए कुछ दिन पहले मैंने भाग: १ प्रकाशित किया था जिसे आज मैं आगे बढ़ाते हुए इसका दूसरा भाग प्रकाशित कर रहा हूँ जिसमें धर्म शास्त्र के अनुसार कुछ वैदिक उपाय बतायूँगा जिन्हें कर के भी नजर दोष से बचाव किया जा सकता है तो चलिए जानते हैं वह कौन से वैदिक उपाय हैं जिन्हें कर के हम नजर दोष को दूर कर सकते हैं:-

 

नजर दोष व उससे बचाव के उपाय भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं

https://astrologysutras.com/नजर-दोष-व-उसके-बचाव-हेतु-उप/

 

नजर दोष दूर करने के उपाय
नजर दोष दूर करने के उपाय

 

१. नित्य बजरंग बाण, हनुमान बाहुक व हनुमान चालीसा का पाठ करने से नजर दोष नही लगती है।

 

२. चाँदी की चेन या पंचमुखी रुद्राक्ष की माला गले में धारण करने से नजर दोष से सुरक्षित रहा जा सकता है।

 

३. यदि नजर दोष के कारण से धन संचय या धनार्जन में समस्या आ रही हो तो घर की छत के उत्तर-पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा लगाकर नित्य उसकी पूजा करने से नजर दोष दूर हो जाती है।

 

४. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके सर पर से सेंधा नमक 7 बार उतार कर पानी में डाल दें (यह क्रिया काँच के गिलास में करनी है) जैसे-जैसे सेंधा नमक पानी में घुलता जाएगा नजर दोष दूर होती जाएगी।

 

५. बहुत लोगों से मैंने सुना है नजर लगने के कारण से उल्टी हो रही है ऐसी स्थिति में एक पान के पत्ते में गुलाब की 7 पंखुड़ी रखकर अपने इष्ट देव का ध्यान कर नजर दोष को दूर करने की प्राथना कर के व्यक्ति (जिसे नजर दोष के कारण से उल्टी हो रही हो) को खिलाने से नजर दोष दूर हो जाती है व उल्टी बंद हो जाती है।

 

नजर दोष व उसके बचाव हेतु उपाय भाग:१—-Astrology Sutras

 

नजर दोष: जानें नजर दोष के कुछ लक्षण व उनके अचूक उपाय “भाग:-१

६. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके ऊपर से 7 लाल मिर्च (डंठल वाली) को 9, 11 या 21 बार उतार कर आग में जला देने से नजर दोष से तत्काल राहत मिलता है।

 

७. जिस व्यक्ति को नजर लग गयी हो उसके सर के ऊपर से थोड़ा सा दूध 3 बार उतार कर मिट्टी में बर्तन में डालकर कुत्ते को पिलाने से नजर दोष दूर हो जाती है। (यह क्रिया शनिवार व राविवार को की जाती है।)

 

८. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके सर पर से नींबू को 7 बार उतार कर उसे 4 भाग में काट कर किसी भी चौराहे पर (चारों दिशाओं में) फेंक देने से नजर दोष दूर हो जाती है।

 

९. अकसर लोगों से सुनने में आता है कि उनके बच्चे पर किसी की नजर लग गयी है जिस कारण से वह बहुत अधिक रोने लगता है इस परिस्थिति में लाल मिर्च, अजवायन और पीली सरसों को मिट्टी के छोटे से बर्तन में जलाकर उसके धुएं को बच्चे के सर पर से पैर तक 7 बार देने से लाभ मिलता है। (यह क्रिया करते समय एक मंत्र का जाप किया जाता है वह मंत्र जानने हेतु आप 9919367470 या 7007245896 पर संपर्क कर सकते हैं।)

 

१०. यदि गर्भवती महिलाओं को नजर लग जाए तो इस परिस्थिति में गोबर, गुड़ और रुई को एक छोटे दिए में जलाकर कमरे (जिस कमरे में गर्भवती महिला रहती हो) के द्वार के बीच में जला देने से नजर दोष दूर हो जाती है।

 

नजर दोष व उसके बचाव हेतु उपाय भाग:१—-Astrology Sutras

 

नजर दोष: जानें नजर दोष के कुछ लक्षण व उनके अचूक उपाय “भाग:-१”

११. यदि नजर दोष के कारण से व्यक्ति को भोजन करने की इच्छा न करती हो या भूख लगना बंद हो गयी हो उनके सर पर से रोटी में तेल लगाकर 7 बार उतार को काले कुत्ते को खिलाने से नजर दोष दूर हो जाती है।

 

१२. एक गिलास पानी को नजर लगे व्यक्ति के सर पर से 7 या 11 बार उतारकर उसे नाली में बहा देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है।

 

१३. माचिस की 4 तीली को नजर लगे व्यक्ति के सर पर से 7 बार उतार कर पाँचवीं तीली से जला देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है।

 

१४. कपूर, फिटकरी, सेंधा नमक को व्यक्ति के सर पर से 7 बार उतार कर जला देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है।

 

१५. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके सर पर से राई, कपूर, फिटकरी को 7 बार उतारकर किसी चौराहे पर जाकर जला देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है। (यह उपाय मौन व्रत धारण कर के करना चाहिए तथा मन में इष्ट देव के किसी भी मंत्र का जाप कर उनसे प्राथना करनी चाहिए जब तक उपाय संपन्न न हो जाए तब तक पीछे मुड़कर भी नही देखना चाहिए।)

 

नजर दोष व उसके बचाव हेतु उपाय भाग:१—-Astrology Sutras

नजर दोष: जानें नजर दोष के कुछ लक्षण व उनके अचूक उपाय “भाग:-१”

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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काशी में स्थित बटुक भैरव का हरियाली एवं जल बिहार श्रृंगार महादेव के बालरूप दर्शन कर भक्त हुए निहाल

काशी में स्थित बटुक भैरव का हरियाली एवं जल बिहार श्रृंगार महादेव के बालरूप दर्शन कर भक्त हुए निहाल

 

बाबा बटुक भैरव
बाबा बटुक भैरव

 

वाराणसी (काशी ) के कमच्छा क्षेत्र में महादेव के बालरूप बटुक भैरव जी का प्रसिद्ध मंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी हरियाली एवं जल बिहार श्रृंगार किया गया आज के दिन के बाबा के इस श्रृंगार की भक्तगण सदैव प्रतीक्षा करते हैं, हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी प्रातः 5 बजे बटुक भैरव जी का पंचामृत से स्नान करा कर मंगला आरती संपन्न की गई तथा रात्रि 9 बजे बटुक भैरव जी की महा आरती 1008 दीपों एवं सवा किलो कपूर के साथ संपन्न की गई तथा 51 डमरूओं के साथ आरती गान किया गया।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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सूर्य का सिंह राशि से गोचर 16 अगस्त 2020: जानें किन राशि वालों की चमक जाएगी किस्मत

सूर्य का सिंह राशि से गोचर 16 अगस्त 2020: जानें किन राशि वालों की चमक जाएगी किस्मत

 

सूर्य का सिंह राशि से गोचर
सूर्य का सिंह राशि से गोचर

 

सूर्य 16 अगस्त 2020 को रात्रि के 7 बजकर 27 मिनट पर कर्क राशि को छोड़कर अपनी  स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की कर्क की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की सिंह की सक्रांति लगेगी, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में 30 दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के सिंह राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

सूर्य के सिंह राशि में गोचर से पड़ने वाले प्रभाव
सूर्य के सिंह राशि में गोचर से पड़ने वाले प्रभाव

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान की उन्नति होगी व संतान का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, प्रेमियों के मध्य क्षणिक विवाद संभव रहेगा, आय सामान्य रहेगी, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता का सहयोग मिलेगा, दामपत्य जीवन सामान्य रहेगा, प्रमोशन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें व तामसिक चीजों से परहेज करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात संभव है, यात्राओं के योग बनेंगे, आवेश में आकर कोई भी निर्णय लेने से बचें, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे आय वृद्धि के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, वाहन सावधानी से चलाएं, नेत्रों में जलन, दर्द या चोट लगने की संभावना रहेगी, अचानक धन लाभ हो सकता है।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य पहले भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप देह में स्फूर्ति बनी रहेगी, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, सर दर्द या ज्वर होने की संभावना रहेगी।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे यात्राओं के योग बनेंगे, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद न करें, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, सर दर्द, ज्वर, नेत्रों में जलन, दर्द या चोट लगने की संभावना रहेगी, आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, मित्रों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा व उनसे लाभ भी होगा, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, बड़े भाई-बहन यदि हैं तो उनका पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, नए कार्य की शुरुवात हो सकती है।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे दशम भाव में सूर्य को दिग्बल प्राप्त होने के कारण से सूर्य अत्यधिक शक्तिशाली फल का दाता बन जाता है फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त हो सकती है, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, प्रमोशन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, क्रोध पर नियंत्रण रखें, माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या रह सकती है।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव है, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, सांतान प्राप्ति के योग बनेंगे, भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव है।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप पैतृक संपत्ति प्राप्त होने के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी के वाणी व स्वभाव में तेजी अनुभव होगी जिस कारण उनसे क्षणिक विवाद संभव है, गर्म चीजों के सेवन से परहेज करें, पेट की समस्या हो सकती है।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप दामपत्य जीवन मिला-जुला रहेगा, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, जिनकी उम्र 55 वर्ष से अधिक है वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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अंतर्दशा निकालने की सबसे सरल विधि—-Astrology Sutras

अंतर्दशा निकालने की सबसे सरल विधि—-Astrology Sutras

 

दशा और आपके प्रश्न
दशा और आपके प्रश्न

 

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।

 

प्रत्येक ग्रह की दशा में ९ ग्रह की अंतर्दशा होती है जैसे सूर्य की महादशा में पहली अंतर्दशा सूर्य की, दूसरी चंद्र की, तीसरी मंगल की, चतुर्थ राहु की, पांचवीं गुरु की, छठी शनि की, सातवीं बुध की, आठवीं केतु की व नौवीं शुक्र की इसी प्रकार अन्य ग्रहों में भी समझना चाहिए आशय यह है कि जिस ग्रह की दशा हो उससे सूर्य, चंद्र, भौम के क्रमानुसार अन्य नवग्रहों की अन्तर्दशाएँ होती हैं।

 

अंतर्दशा निकालने का एक सबसे सरल नियम यह है कि दशा-दशा का परस्पर गुणा कर १० से भाग देने से लब्ध मास और शेष को ३ से गुणा करने से दिन होंगे

 

विंशोत्तरी दशा वर्ष:-

 

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।

 

१. सूर्य:- ६ वर्ष
२. चंद्र:- १० वर्ष
३. मंगल:- ७ वर्ष
४. राहु:- १८ वर्ष
५. गुरु:- १६ वर्ष
६. शनि:- १९ वर्ष
७. बुध:- १७ वर्ष
८. केतु:- ७ वर्ष
९. शुक्र:- २० वर्ष

 

उदहारण:-

 

सूर्य की दशा में अंतर्दशा निकालनी हो तो सूर्य के दशा वर्ष का सूर्य के ही दशा वर्षों से गुणा किया तो:-

 

६×६= ३६

३६÷१०= ३ मास, शेष ६

६×३= 18 दिन

अर्थात ३ मास १८ दिन सूर्य की अंतर्दशा रहेगी।

 

इसी तरह सूर्य की दशा मे अन्य ग्रहों की अंतर्दशा:-

 

चंद्रमा:-

 

६×१०= ६०, ६०÷१०=मास

 

मंगल:-

 

६×७= ४२, ४२÷१०= मास शेष , २×३= ६ दिन अर्थात मास दिन

राहु:-

 

६×१८= १०८, १०८÷१०= १० मास शेष ८, ८×३= २४ दिन अर्थात १० मास २४ दिन

 

गुरु:-

 

६×१६= ९६, ९६÷१०= ९ मास शेष ६, ६×३= १८ दिन अर्थात मास १८ दिन

 

शनि:-

 

६×१९= ११४, ११४÷१०= ११ मास शेष , ४×३= १२ दिन अर्थात ११ मास १२ दिन

 

बुध:-

 

६×१७= १०२, १०२÷१०= १० मास शेष , २×३= ६ दिन अर्थात १० मास दिन

 

केतु:-

 

६×७= ४२, ४२÷१०= ४ मास शेष , २×३= ६ दिन अर्थात मास दिन

 

शुक्र:-

 

६×२०= १२०, १२०÷१०= १२ मास अर्थात वर्ष

 

इसी तरह से अन्य ग्रहों की दशा में भी अंतर्दशा निकाली जाती है।

 

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।

 

 

जय श्री राम।

 

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दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras

 

दशा और आपके प्रश्न
दशा और आपके प्रश्न

 

जन्म के समय किस ग्रह की दशा थी और कितनी दशा भोग्य थी यह ज्ञात करने की सबसे सरल विधि को प्रस्तुत करता हूँ जो कि ज्योतिष के विद्यार्थियों के लिए तो वरदान साबित होगी ही साथ ही जनसामान्य भी इसको सरलता से ज्ञात कर सकेंगे तो सबसे पहले हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि व्यक्ति का जन्म किस ग्रह की दशा में हुआ है।

 

किस ग्रह की दशा में हुआ व्यक्ति का जन्म:-

 

दशा ज्ञात करने की विधि
दशा ज्ञात करने की विधि

 

व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होंगे उस नक्षत्र के स्वामी की दशा में व्यक्ति का जन्म होता है।

 

नक्षत्र व उनके स्वामी का विवरण इस प्रकार है:-

 

१. कृतिका, उत्तराफाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा के स्वामी सूर्य होते हैं जिनकी दशा 6 वर्ष की होती है।

 

२. रोहिणी, हस्त और श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा होते है जिनकी दशा 10 वर्ष की होती है।

 

३. मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल होते हैं जिनकी दशा 7 वर्ष की होती है।

 

४. आर्द्रा, स्वाती और शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु होते हैं जिनकी दशा 18 वर्ष की होती है।

 

५. पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी गुरु होते हैं जिनकी दशा 16 वर्ष की होती है।

 

६. पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनि होते हैं जिनकी दशा 19 वर्ष की होती है।

 

७. आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध होते हैं जिनकी दशा 17 वर्ष की होती है।

 

८. मघा, मूल और अश्विनी नक्षत्र के स्वामी केतु होते हैं जिनकी दशा 7 वर्ष की होती है।

 

९. पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा और भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र होते हैं जिनकी दशा 20 वर्ष की होती है।

 

दशा का भोग्यकाल ज्ञात करने की सरल विधि:-

 

दशा का भोग्यकाल ज्ञात करने की सरल विधि
दशा का भोग्यकाल ज्ञात करने की सरल विधि

 

जन्म के समय किसी ग्रह की कितनी दशा भोग्य थी यह ज्ञात करने के लिए सर्वप्रथम यह देखिए कि जन्म के समय किस नक्षत्र में है और जन्म के बाद कितने समय/घड़ी तक उस नक्षत्र में रहेगा, जितने समय/घड़ी तक चंद्रमा उस नक्षत्र में और रहेगा उन घड़ियों/समय को महादशा के मान से गुणा कर के 60 से भाग देने पर हमें यह ज्ञात हो जाता है कि दशा का भोग्यकाल कितना रहेगा।

 

उदाहरण:-

 

मान लीजिए जन्म के समय पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ व उसके 20 घड़ी शेष थे ऊपर मैंने बताया है कि पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी गुरु होते हैं जिनकी दशा 16 वर्ष की होती है अतः अब हम गुरु की कितनी दशा मनुष्य जन्म के बाद भोगेगा यह निकालते है:-

 

 20×16           16
                    ———— =    ——— = 5 शेष 4
    60               6

 

अर्थात 5 वर्ष 4 माह और वह व्यक्ति जन्म के बाद गुरु की दशा भोगेगा।

 

जय श्री राम।

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ज्योतिष के 20 अनोखे अचूक व प्रमाणित सूत्र

ज्योतिष के 20 अनोखे अचूक व प्रमाणित सूत्र

 

ज्योतिष के कुछ अचूक व प्रमाणित सूत्र
ज्योतिष के कुछ अचूक व प्रमाणित सूत्र

 

१. लग्न के स्वामी अर्थात लग्नेश यदि द्वादश/बाहरवें भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के शत्रु बहुत अधिक होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों पर झूठा आरोप अवश्य ही लगता है तथा ऐसे व्यक्तियों के मन में आत्महत्या के विचार भी आते रहते हैं।

 

२. राहु की महादशा में यदि केतु की अंतर्दशा हो तो वह समय विशेष रूप से कष्टदाई होता है जिनमें उलझनें व समस्याएं काफी हद तक बढ़ जाती है।

 

३. दूसरे भाव में जो राशि हो उनके स्वामी अर्थात धनेश/द्वितीयेश यदि नवम व एकादश भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों का बाल्यकाल कष्टदाई होता है किंतु बाद का पूरा जीवन सुखमय होता है जिसमें जातक/जातिका को सभी सुख प्राप्त होते हैं।

 

४. यदि लग्न का स्वामी अर्थात लग्नेश दूसरे भाव में हो और दूसरे भाव का स्वामी अर्थात धनेश यदि लग्न में हो कहने का आशय यह है कि यदि लग्नेश और धनेश में स्थान परिवर्तन हो रहा हो तो ऐसे व्यक्तियों के पास धन की कभी कमी नही रहती तथा इन्हें कम प्रयत्न से धन की प्राप्ति हो जाती है।

 

५. यदि जन्म कुंडली में सूर्य एकादश भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के शत्रु बहुत अधिक होते हैं किंतु जातक/जातिका को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है अर्थात शत्रु उनका कुछ गलत नही कर पाते हैं।

 

६. यदि अष्टम भाव के स्वामी अर्थात अष्टमेश किसी भी भाव में बैठे हों और उन पर गुरु की दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति दीर्घायु होते हैं।

 

७. यदि स्त्री की कुंडली हो और कुंडली के दूसरे भाव में राहु किसी भी राशि का हो तो ऐसी स्त्री कभी भी स्वदेश में सुखी नही रह सकती अतः ऐसी जातिकाओं को परदेश अर्थात दूसरे राज्य या विदेश में जीवनयापन करना चाहिए।

 

८. यदि कुंडली के किसी भी भाव में शनि उच्च राशि के हों और उन पर मंगल की दृष्टि हो तो ऐसा व्यक्ति निश्चय ही वक्ता या नेता होता है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों के अंदर नेतृत्व क्षमता बहुत प्रवल होती है।

 

९. यदि शुक्र कुंडली के एकादश भाव में हों तो ऐसे व्यक्तिओं को विवाह उपरांत अच्छा धन लाभ होता है अर्थात ऐसे जातक/जातिका विवाह उपरांत धनी होते हैं।

 

१०. यदि किसी महिला की कुंडली के तीसरे भाव में सूर्य व छठे/षष्ठ भाव में शनि हो तो ऐसे जातिका का विवाह किसी बड़े आदमी या किसी बड़े अधिकारी से होता है।

 

११. यदि कुंडली के अष्टम भाव में केतु हो तो जातक/जातिका को निःसंदेह अकास्मिक धन लाभ की प्राप्ति होती है साथ ही यदि कुंडली के अष्टम भाव में मेष, वृषभ, मिथुन, कन्या व वृश्चिक राशि में केतु बैठा हो तो जातक/जातिका को पेट से जुड़ी समस्या बनी ही रहती है।

 

१२. यदि शनि वृषभ राशि के हों तो जातक/जातिका को क्रोध बहुत अधिक आता है तथा ऐसे जातक/जातिका की परेशानियाँ विवाह बाद बढ़ जाती है और आय में कमी तथा व्यय में वृद्धि होती है।

 

१३. यदि स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) का लग्न हो अर्थात यदि स्थिर लग्न हो और लग्न पर छठे भाव के स्वामी की दृष्टि हो तो ऐसे जातक/जातिका खूब धन के स्वामी अर्थात धनवान होते हैं।

 

१४. यदि एकादश भाव का स्वामी अर्थात लाभेश लग्न में हो तो ऐसे व्यक्तियों को हर 11वें दिन कोई न कोई लाभ अवश्य ही होता है।

 

१५. यदि शुक्र लग्न में हो तो व्यक्ति खुशमिजाज होता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों गाने का बहुत शौंक होता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों का आमोद-प्रमोद में अधिक मन लगता है।

 

१६. यदि शनि लग्न में हो और गुरु केंद्र में हो तो ऐसे व्यक्तियों को निःसंदेह पैतृक संपत्ति अवश्य ही प्राप्त होती है।

 

१७. यदि लग्न या पंचम या नवम भाव में बुध व चंद्र की युति हो तो जातक विद्वान व बुद्धिमान होता है या भविष्यवक्ता होता है।

 

१८. यदि चंद्रमा पर किसी भी उच्च के ग्रह की दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्ति धनवान होते हैं।

 

विशेष:- बहुत से लोगों के मन में यह प्रश्न अवश्य उठेगा कि यदि उच्च के शनि की दृष्टि चंद्र पर हो तो विष योग बनेगा जिसमें व्यक्तियों को बहुत परेशानिओं का सामना करना पड़ता है तो यहाँ यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैंने धनवान होगा ऐसा लिखा है और यह जरूरी नही कि व्यक्ति धनी और किंतु परेशान न रहे अतः ऐसे व्यक्ति परेशान रहेंगे किंतु धनवान भी होंगे।

 

१९. यदि सूर्य के दोनों तरफ कोई भी ग्रह हो (चंद्रमा को छोड़कर) तो व्यक्ति तेज बोलने वाला होता है तथा उसे हर कार्य में सफलता मिलती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को अच्छा धन लाभ भी होता है।

 

२०. यदि स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) का लग्न हो अर्थात यदि स्थिर लग्न हो और शुक्र केंद्र में हो तथा चंद्रमा त्रिकोण में गुरु से युत हो अर्थात चंद्रमा त्रिकोण में गुरु के साथ बैठा हो साथ ही शनि दशम भाव में हो तो ऐसा व्यक्ति सुखी, भोगी, विद्वान, प्रभावशाली, मंत्री, एम. पी., एम. एल. ए. आदि होता है।

 

जय श्री राम।

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अगस्त 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

अगस्त 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए अगस्त 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप घर के माहौल में कुछ तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो सकती है, माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, तनाव लेने से बचें, संतान पर धन व्यय होगा, 2 अगस्त को बुध गोचर बदलकर पंचम भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, प्रेमी/प्रेमिका के साथ व्यर्थ विवाद न करें, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, फाइनेंस व मार्केटिंग क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, 17 अगस्त को बुध पुनः गोचर बदलकर आपके छठे भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यात्राओं के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी रहेगी, उन्नति प्राप्त करने हेतु मेहनत अधिक करनी होगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, खर्चों में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में गुरु व केतु का नवम भाव से गोचर रहेगा अतः भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होता रहेगा, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, नवदंपत्तियों को कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, छोटी धार्मिक यात्रा के भी योग बनेंगे।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शुक्र व राहु का तीसरे भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपके छोटे भाई-बहन विवाह योग्य हो गए हैं तो विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, यात्राओं के योग बनेंगे, जो लोग फाइनेंस, कला, सौंदर्य प्रकाशन, टीचिंग से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए यह अच्छा समय रहेगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें हालांकि गुरु की पंचम दृष्टि लग्न पर होने से कोई गंभीर समस्या नही रहेगी फिर भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, क्रोध पर नियंत्रण रखें, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, 16 अगस्त को मंगल गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे जिससे आपको काफी राहत अनुभव होगी, संतान प्राप्ति के अच्छे योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, बुद्धि की शक्ति से उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, माता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, क्रोध पर नियंत्रण रखें, तामसिक चीजों से परहेज करें 2, 16 व 29 अगस्त को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 1 से 6 अगस्त तक का समय आपके लिए अच्छा रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, 7 से 16 अगस्त तक का समय तनावपूर्ण रहेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, 15 व 29 अगस्त का दिन प्रेमियों के लिए अच्छा रहेगा, धन लाभ के योग बनेंगे, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे प्रेम का इजहार या उन्हें शादी के लिए प्रपोज करना चाहते हैं तो यह दो दिन आपके लिए बेहद शुभ रहेगा, 17 से 30 अगस्त के मध्य बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए अगस्त 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में तनाव बना रहेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, 16 अगस्त के बाद से बड़ी राहत अनुभव होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, अचानक धन लाभ हो सकता है माह की 7, 8, 9, 10, 11, 12, 13, 14, 15 व 16 इनमें भी 7 से 10 तक तिथियों में विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व शनिवार के दिन सूर्यास्त बाद शनि स्तोत्र का पाठ करते हुए सरसों के तेल का दीपक शनि देव को अर्पित करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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पंचमहापुरुष योग— Astrology Sutras

पंचमहापुरुष योग— Astrology Sutras

 

पंचमहापुरुष योग
पंचमहापुरुष योग

 

ज्योतिष में सबसे प्रसिद्ध योगों में पंचमहापुरुष योग का विशेष महत्व है हम सभी जानते हैं कि ज्योतिष में 9 ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु) की गढ़ना की जाती है जिनमें राहु और केतु को छाया ग्रह की संज्ञा दी गयी है तथा सूर्य और चंद्र को आत्मा व मन का कारक कहा गया है और यह ग्रह स्वम् प्रकाशमान है इनके अतिरिक्त शेष ग्रह (मंगल, बुध, गुरु, शुक्र व शनि) के केंद्र (प्रथम, चतुर्थ, सप्तम व दशम भाव को केंद्र कहते हैं) में स्वराशि या उच्च राशि में बैठे होने से एक अन्य योग का सृजन होता है जिसे पंचमहापुरुष योग कहा जाता है इन पंचमहापुरुष योग के नाम रूचक योग, शश योग, भद्र योग, मालव्य योग व शश योग है जो कि क्रमशः मंगल, शनि, बुध, शुक्र और गुरु से बनते हैं अब ऊपर बताए गए पंचमहापुरुष योग में से किसी एक में उत्पन्न व्यक्ति का स्वरूप या भाग्योदय कैसे होगा बताता हूँ।

 

रूचक योग:-

 

रूचक योग
रूचक योग

 

यदि मंगल केंद्र में मेष, वृश्चिक व मकर राशि के होकर बैठे हो तो रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मा व्यक्ति बड़े चेहरे वाला, बहुत साहस से धन प्राप्त करने वाला, शूर, बली और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्ति अभिमानी भी होते हैं, मंत्रेश्वर महाराज जी ने कहा है कि ऐसा व्यक्ति अभिमानी प्रकृति का होता है और सेनापति हो (सेनापति से तात्पर्य उच्च पदाधिकारी समझना चाहिए), अपने गुणों के कारण से प्रसिद्ध, कीर्तिमान और प्रत्येक उद्योग में विजयी हो, मानसागरी में कहा गया है कि ऐसे व्यक्ति दीर्घायु, स्वच्छ कांति वाले, साहसी, नीले केश वाले, हाथ-पैर सुडौल, शंख समान कंठ वाले (अर्थात उनकी आवाज कुछ तेज होती है मतलब तेज बोलते हैं), दुष्ट, ब्राह्मण व गुरुओं के आगे विनयी, जनता से प्रेम रखने वाले व पैर से ऊपर किंतु कटि से नीचे दुबले होते हैं तथा इनके शरीर पर किसी चोट या जलने का निशान अवश्य होता है और इन्हें 70 वर्ष की आयु प्राप्त होती है।

 

भद्र योग:-

 

भद्र योग
भद्र योग

 

यदि बुध केंद्र में मिथुन या कन्या राशि के होकर बैठे हो तो भद्र नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मा व्यक्ति कुशाग्र अर्थात तेज बुद्धि वाला और विद्वान होता है तथा विद्वान आदमी व बड़े अधिकारी भी इनकी प्रशंसा करते हैं, ऐसे व्यक्ति भाषण देने में चतुर होते हैं साथ ही वैभवशाली और उच्च अधिकारी होते हैं मंत्रेश्वर महाराज ने कहा है कि ऐसा व्यक्ति शुद्ध हो (शरीर, वस्त्र, रहन-सहन स्वच्छ हो) तथा अत्यंत वैभवशाली होता है, मानसागरी के अनुसार भद्र योग में जन्मा व्यक्ति सिंह के समान मुख और हाथी सी चाल वाला, पुष्ट वक्ष स्थल और गोलाकार सुडौल दोनों बाहुवाला, दोनों बाहुओं को फैलाने से जितना हो उतना लंबा, कामी, सत्वगुणी तथा योग का ज्ञाता, हाथ व ऐसे व्यक्तियों के पैर में शंख, तलवार, हाथी, गदा, फूल, वाण, चक्र, कमल, पताका, हल आदि के निशान होते हैं तथा इनकी दोनों भृकुटि सुंदर व धार्मिक होता है, भद्र योग में जन्मा व्यक्ति धन को तराजू पर तौलता है तथा कान्यकुब्ज क्षेत्र का राजा होकर पुत्र-स्त्री से सुखी और 80 वर्ष की आयु को प्राप्त करने वाला होता है।

 

हंस योग:-

 

हंस योग
हंस योग

 

यदि गुरु केंद्र में कर्क, धनु व मीन राशि के होकर बैठे हो तो हंस नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मे व्यक्ति के हाथ और पैरों में शंख, कमल, मत्स्य और अंकुश के चिन्ह होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति उत्तम भोजन करने वाले और सज्जन लोगों से प्रशंसा प्राप्त करने वाले होते हैं तथा इनका अरुण मुख, ऊँची नासिका, सुंदर पैर, हंस के समान शरीर, गौर वर्ण, लाल नख, हंस के समान स्वर होते है व इन्हें कफ की समस्या भी रहती है मंत्रेश्वर महाराज जी कहते हैं कि हंस योग में जन्मे व्यक्ति का शरीर देखने बहुत शुभ (सुंदर, सौम्य) होता है, मानसागरी के अनुसार हंस योग में जन्मा व्यक्ति जल में विहार करने वाला, अत्यंत कामी, स्त्री से कभी तृप्त न होने वाला, अड़सठ अंगुल ऊँचा शरीर वाला और 60 वर्ष की आयु को प्राप्त करने वाला होता है।

 

मालव्य योग:-

 

मालव्य योग
मालव्य योग

 

यदि शुक्र केंद्र में वृषभ, तुला व मीन राशि के होकर बैठे हों तो मालव्य नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्मा व्यक्ति धैर्यवान और पुष्ट अंग वाला, उत्तम भोजन करने वाला, विद्वान, पुत्र और स्त्रियों से सुख प्राप्त करने वाला, यशस्वी, सुडौल शरीर व पतले होंठ वाला होता है मंत्रेश्वर महाराज जी कहते हैं मालव्य योग में जन्मा व्यक्ति प्रसन्नमुख, शांतचित्त और अच्छी सवारियों (मोटर आदि) का भोक्ता होता है मानसागरी के अनुसार मालव्य योग में जन्मा व्यक्ति पतली कमर वाला, चंद्रमा के समान कांति वाला, सर्वत्र पराक्रमी, घुटनों तक लंबी बाहु वाला, 13 अंगुल की मुँह की लंबाई वाला और 70 वर्ष की आयु तक राज्य करने वाला होता है।

 

शश योग:-

 

शश योग

 

यदि शनि केंद्र में तुला, मकर व कुंभ राशि के होकर बैठे हो तो शश नामक पंचमहापुरुष योग बनता है इस योग में जन्म लिए व्यक्ति अत्यंत प्रभावशाली, उच्च पदाधिकारी, बलवान, धनी और सुखी होते हैं मंत्रेश्वर महाराज जी कहते हैं कि शश योग में जन्मा व्यक्ति किसी ग्राम के मालिक हों या नृप (बहुत से मनुष्यों के स्वामी) अर्थात उच्च पदाधिकारी होते हैं तथा ऐसे व्यक्तियों की मातहती में अच्छे-अच्छे लोग काम करते हैं तथा शश योग में जन्मे व्यक्तियों का आचरण उत्तम नही होता और ऐसे व्यक्ति अन्य पुरुषों की स्त्रियों में आसक्त रहते हैं मानसागरी के अनुसार शश योग में जन्मे व्यक्ति छोटे मुँह और दाँत वाले, क्रोधी, दुष्ट, वन-पर्वत, किला और नदी के प्रिय, मेहमानों के प्रिय, मध्यम कद के और प्रसिद्ध होते हैं साथ ही विविध सेनाओं को इकट्ठा करने में लगे रहने वाले, धातु कर्म में कुशल, चंचल नेत्र वाले, माता के भक्त, दूसरों के दोष ढूँढने वाले, हाथ व पैर में पलंग, शंख, बाण, शस्त्र, माला, वीणा के समान रेखा वाले और 70 वर्ष तक शासन करने वाले होते हैं।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी के अनुसार यदि चंद्र कुंडली से भी केंद्र में उपर्युक्त पाँचों ग्रह स्वराशि या उच्च राशि बैठे हों तो भी पंचमहापुरुष योग बनता है कहने का आशय यह है कि जैसे जन्म लग्न से केंद्र का विचार करते हैं ठीक वैसे ही चंद्र कुंडली से भी विचार करना चाहिए, यदि कोई एक ग्रह उपर्युक्त प्रकार से योगकारक हो तो मनुष्य भाग्यवान होता है, यदि दो ग्रह योग बनावें तो राजा के समान सुख की प्राप्ति होती है, यदि तीन ग्रह योग बनावे तो व्यक्ति राजा या उच्च अधिकारी होता है, यदि चार ग्रह योग बनावे तो महाराजा समान सुख प्राप्त होता है तथा यदि किसी की कुंडली में रूचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश ये पाँचों योग हो वह इनसे भी उच्च पदवी प्राप्त करता है।

 

मानसागरी के अनुसार मंगल, बुध, गुरु, शुक्र या शनि के केंद्र में अपनी उच्च या स्वराशि में स्थित होने से जो पंचमहापुरुष योग बनते हैं किंतु यदि जो ग्रह यह योग बना रहे हों वह सूर्य या चंद्र के साथ हो तो ऐसे महापुरुष योग के प्रभाव से जातक/जातिका राजा या राजतुल्य नही होते परंतु उसकी दशा या अंतर्दशा में केवल शुभ फल की प्राप्ति होती है।

 

जय श्री राम।

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