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कुंभ राशि: जानिए, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

कुंभ राशि: जानिए, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

कुंभ राशि वाले व्यक्तियों का शरीर अपेक्षाकृत लंबा होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति पुष्पों और सुगंधित द्रव्यों के शौकीन होते हैं, कुंभ राशि वाले व्यक्ति कभी क्षय को प्राप्त होते हैं और कभी वृद्धि को कहने का आशय यह है कि कुंभ राशि वाले व्यक्तियों की आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव आता रहता है, कुंभ राशि वाले व्यक्ति दयालु, दानी, मिष्ठान भोजी, धर्म कार्य में जल्दी करने वाले, प्रियभाषी, आलसी, प्रसन्नचित्त, विलक्षण बुद्धि, मित्रों के प्रिय, शत्रुओं पर विजय पाने वाले, यात्रा प्रिय, अत्यंत कामी एवं सभा सोसाइटी में प्रेम रखने वाले होते हैं, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों का प्रायः गला लंबा, पैर तथा पैर के जोड़ और पीठ थोड़ी लंबे और मोटे होते हैं एवं पेट भारी, चौड़ा मुख तथा बाल रूखे होते हैं, ऐसे व्यक्तियों को किसी ऊंचे स्थान से गिरकर चोट लगने या जल से भय रहता है, काँख, पैर और मुख में तिल आदि का चिन्ह रहता है तथा कफ रोग से पीड़ा रहती है, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के प्रायः दो विवाह होते हैं या एकाधिक संबंध होते हैं, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों को विद्या विभाग, कला और राजनीति से जुड़े कार्यों में रुचि रहती गया, कुंभ राशि वाले व्यक्ति किसी गुप्त मंडली के सदस्य भी होते हैं।

 

कुंभ राशि वालों के लिए १, ५, १२, १५, २५, २८, ३५ व ४५ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में पीड़ा, वें वर्ष में अग्नि भय, १२ वें वर्ष में सर्प अथवा जल भय और २८ वें वर्ष में चोर द्वारा धन हानि होती है, यदि चंद्रमा शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो तथा आयुष्य भाव को कोई क्रूर ग्रह न देखते हैं तो कुंभ राशि वाले व्यक्तियों की औसत आयु ९० वर्ष तक की होती है किंतु अन्य ग्रंथकारों में अलग-अलग आयु के विषय पर मत है उनके अनुसार कुंभ राशि वाले व्यक्तियों की औसत आयु ९५ वर्ष तक की होती है, कुंभ राशि वाले व्यक्ति ३० वर्ष की आयु के बाद अच्छी उन्नति करते हैं किंतु इनके जीवन में कभी हानि तो कभी लाभ वाली स्थिति प्रायः बनी ही रहती है, कुंभ राशि वालों के लिए द्वितीया, तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथियाँ अशुभ होती है, शनिवार शुभफलदाई होता है, कुंभ राशि वाले व्यक्तियों के लिए वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला और मकर राशि वाले मित्र तथा मेष, कर्क, सिंह और वृश्चिक राशि वाले प्रायः इनके शत्रु रहते हैं, आश्विन मास, कृष्ण पक्ष, द्वितीया तिथि, गुरुवार, संध्याकाल समय एवं कृत्तिका नक्षत्र अनिष्टकारी रहता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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धनु राशि: जानिए, धनु राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

धनु राशि: जानिए, धनु राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

धनु राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
धनु राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

धनु राशि वाले व्यक्तियों की नाक, कान, चेहरा व कंठ अपेक्षाकृत बड़ा होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति किसी न किसी कार्य में लगे रहते हैं अर्थात एक जगह खाली नही बैठते तथा धनु राशि वाले व्यक्ति बोलने में बहुत प्रगल्भ और त्यागी होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों की लंबाई सामान्य से कुछ कम रहती है किंतु यदि लग्नेश लग्न में ही स्थित हो या गुरु की लग्न पर दृष्टि हो तो ऐसे व्यक्तियों का कद लंबा होता है, धनु राशि वाले व्यक्ति कुछ झुक कर चलते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति साहसी और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों को समझा कर ही अपने वश में किया जा सकता है अर्थात धनु राशि वाले व्यक्ति दाम, दंड और भेद से चिढ़ते हैं तथा प्रेम के लिए कुछ भी कर देते हैं, धनु राशि वाले व्यक्ति विद्वान, धार्मिक, जनप्रिय, देव भक्त, सभा में व्याख्यान देने वाले, श्रेष्ठ, पवित्र, काव्य कुशल, नाच-गाने के शौकीन, कुशल, कुल दीपक, दानी, भाग्यवान, सच्चे मित्र, निष्कपट, दयावान, स्पष्ट वक्ता, क्लेश सहन करने वाले, शांत स्वभाव, अल्प भोजी, निर्मल बुद्धि, कोमल भाषी, धनी, कार्य तत्पर, प्रीति से वशीभूत, फुर्तीले और भविष्य वक्ता होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों को बल से वश में नही किया जा सकता है, धनु राशि वाले व्यक्तियों के किसी अंग में तिल व मस्से के निशान रहते हैं तथा इनके पैर के तलवे छोटे होते हैं, धनु राशि वाले व्यक्तियों के तीन विवाह संभव होते हैं (कुंडली में बहु विवाह के योग होने पर) और संतान कम होती है, धनु राशि वाले व्यक्ति कई प्रकार के व्यवसाय को करने वाले तथा अनेक कारीगरी और कलाओं में प्रवीण होते हैं, बृहस्पति वार इनके लिए बेहद शुभ होता है और ऐसे व्यक्ति प्रायः व्यापार करते हैं।

 

धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ८, १३, १८, ४८ वर्ष अनिष्टकारी होते हैं प्रथम वर्ष में शरीर पीड़ा व १३ वें वर्ष में महा दुःख होता है यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो इन फलों में कमी होती है तथा तृतीय व अष्टम भाव भी बली हो तो धनु राशि वाले व्यक्तियों को १०० वर्ष की औसत आयु प्राप्त हो सकती है कुछ ग्रंथकारों नें यहाँ विभिन्न मत रखे हैं उनके अनुसार धनु राशि वाले व्यक्तियों की औसत आयु ८८ तो कुुुछ नेे ७५ तो कुछ ग्रंथकारों ने ८६ वर्ष बतलाया है, धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि अनिष्टकारी होती है, सोमवार का दिन बेहद अशुभ होता है, मेष, सिंह, कर्क और वृश्चिक राशि वाले व्यक्ति इनके मित्र, वृष, मिथुन, कन्या व तुला राशि वाले शत्रु होते हैं, आषाढ़ मास, कृष्ण पक्ष, उपरोक्त तिथियाँ, हस्त नक्षत्र व रात्रि का समय अनिष्टकारी होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्ति देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त किंतु चंचल स्वभाव और कृश शरीर वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों का कद सामान्यतः लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति खरीद-फरोख्त में होशियार, धैर्यवान, इंसाफ पसंद करने वाले तथा प्रायः दो नाम वाले होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्ति घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं, इनकी संतान प्रायः कम ही होती है साथ ही तुला राशि वालों का भाग्योदय कुछ विलंब के साथ होता है, तुला राशि वाले व्यक्ति भोगी, धार्मिक, चतुर, बुद्धिमान, कला में कुशल, राजा प्रिय, पितृ सेवी, वस्तुओं का संग्रह करने वाले, विद्वान, धनी, अत्यंत बोलने वाले, मित्रों से युक्त, संगीत, कविता व युद्ध के प्रेमी, सभा-सोसाइटी और कंपनी इत्यादि में रुचि रखने वाले, अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में अन्य किसी पर भरोसा रखने वाले, लंबे कद वाले, बलवान, उन्नत नासिका वाले और वायु प्रकृति से पीड़ित होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्तियों को सर, उदर एवं चर्म रोग संभव रहता है साथ ही इन्हें जल भय भी रहता है, तुला राशि वाले व्यक्ति स्त्री के अधीन, बहु स्त्री भोगी अर्थात दो विवाह करने वाले, कृषि करने में चतुर तथा क्रय-विक्रय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ३, ५, ६, १५, २५, २६, ३६, ४६ व ५६ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा रहती है, यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह देखते हैं और आयु सुख को करने वाले अन्य योग न बनते हो और उपर्युक्त बताए गए वर्षों को पार कर लें तो ८५ वर्ष की औसत आयु प्राप्त करते हैं कुछ ग्रंथकारों के अनुसार तुला राशि वाले व्यक्तियों की आयु ६५ वर्ष ११ माह की होती है तथा इन्हें मृत्यु उपरांत ख्याति अवश्य ही मिलती है, तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तिथि अनिष्टकारी होती है तथा मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों से मित्रता एवं कर्क व सिंह राशि वालों से शत्रुता रहती है, रत्नों में इनके लिए हीरा शुभदायी होता है, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, शुक्रवार व आश्लेषा नक्षत्र और दिन का प्रथम प्रहर इनके लिए अनिष्टकारी होता है।

 

जय श्री राम।

 

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सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों से जुड़ी मुख्य बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों की चेहरा कुछ बड़ा और ठोड़ी कुछ मोटी होती है, ऐसे व्यक्ति अभिमानी, पराक्रमी, स्थिर बुद्धि वाले और अपनी माता के विशेष प्यारे होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति वनों और पहाड़ों वाले जगहों पर घूमने के शौंकीन होते है साथ ही इनमें क्रोध की अधिकता रहती है, सिंह राशि वाले व्यक्ति धन-धान्य से युक्त, लक्ष्मीवान, विद्वान, सभी कलाओं में निपुण, अहंकारी, निष्ठुर, सत्यवादी, विदेश यात्रा पसंद करने वाले, शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले, तीक्ष्ण स्वभाव, उदार, मानसिक दुःख से पीड़ित, बुद्धिमान, निष्कपट, माता के प्रेमी, वस्त्र व सुगंधित द्रव्यों में रुचि रखने वाले, कला, संगीत व चित्र प्रेमी, उच्च पद प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील रहने वाले, किसी की अधीनता जल्द न स्वीकार करने वाले और कभी-कभी कुंडली में ग्रहों द्वारा चतुर्थ भाव को पीड़ित करने की अवस्था में बाल्यकाल में दो स्त्रियों द्वारा दुग्धपान कराए जाने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति शरीर से पुष्ट, पीठ पर तिल या मस्से से युक्त चिन्ह, पेट के वाम भाग में वात रोग, सर, दंत, गला एवं उदर रोग से पीड़ित, भूख-प्यास और मानसिक व्यथा से पीड़ित, स्त्रियों से शत्रुता व अनबन रखने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्तियों की संतान प्रायः कम होती है, चोर के माध्यम से सिंह राशि वालों को नुकसान उठाना पड़ता है तथा अग्नि से भय रहता है।

 

सिंह राशि वालों के लिए १, ५, ७, २०, २१, २८, ३० और ३२ वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में प्रेत-पिशाच आदि बाधा से पीड़ा, पाँचवें वर्ष में अग्नि भय, सातवें वर्ष में ज्वर पीड़ा एवं विसूचिका रोग, २० वें वर्ष में सर्प भय, २१ वें वर्ष में पीड़ा, २८ वें वर्ष में अपवाद और ३२ वें वर्ष में पीड़ा होती है, यदि अष्टम, तृतीय, लग्न पर आशुभ ग्रहों का प्रभाव न हो और शनि या चंद्रमा या शुक्र में से कोई एक या दो या तीनों तृतीय व अष्टम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति की औसत आयु ८७ वर्ष तक रहती है वहीं कुछ ग्रंथकारों ने बताया है कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति की आयु १०० से ११७ वर्ष तक होती है, सिंह राशि वालों के लिए तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि अशुभ होती है, रविवार किसी भी कार्य के आरंभ हेतु शुभ होता है, मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले व्यक्ति सिंह राशि वालों के लिए शुभचिंतक व सहयोगी अर्थात अच्छे मित्र होते हैं किंतु तुला, मकर और कुंभ राशि वाले व्यक्तियों से प्रायः इनकी शत्रुता रहती है, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, तृतीया, पंचमी, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि, मंगलवार, दोपहर का समय सिंह राशि वालों के लिए अनिष्टकारी रहता है साथ ही सिंह राशि वाले व्यक्तियों को जल से भी मृत्यु भय होता है।

 

जय श्री राम।

 

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शनि जयंती 10 जून 2021: शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय

शनि जयंती 10 जून 2021: शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय

 

शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय
शनि के अशुभ फल में कमी लाने हेतु करें यह खास उपाय

 

१० जून २०२१ को शनि जयंती पड़ रही है शनि को न्याय का देवता कहा गया है शनि हमें हमारे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं जिन लोगों की कुंडली में शनि की स्थिति अशुभ हो उन्हें जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता है उनके कार्यों में बाधाएं आती हैं तथा किसी भी काम में पूरी एकाग्रता नहीं बन पाती है समस्त नव ग्रहों में शनि बहुत धीमी गति से भ्रमण करते है जिस कारण उन्हें एक राशि पार करने में ढाई वर्ष लगते हैं वर्तमान में शनि मकर राशि में वक्री अवस्था में गोचर कर रहे हैं।

 

जिन लोगों की कुंडली में शनि अशुभ होता है, उनके दैनिक जीवन में कुछ खास घटनाएं होने लगती हैं जिनसे हम बिना कुंडली देखे ही ये अंदाजा लगा सकते हैं कि शनि हमारी कुंडली में शुभ है या अशुभ तो आइए जानते हैं उन घटनाओं के बारे में:-

 

कुंडली में शनि के अशुभ होने की पहचान
कुंडली में शनि के अशुभ होने की पहचान

 

१. जिसकी कुंडली में शनि अशुभ होता है उनके जूते-चप्पल बार-बार टूट जाते हैं या गुम हो जाते हैं।

 

२. यदि शनि अशुभ हो तो व्यक्ति नया ज्ञान प्राप्त नहीं कर पाता है, पढ़ाई में मन नहीं लगता और इस क्षेत्र में उसे कोई उपलब्धि भी प्राप्त नहीं हो पाती है।

 

३. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अशुभ हो तो उसका विवाह होते ही ससुराल पक्ष में कोई हानि हो सकती है।

 

४. यदि कोई व्यक्ति घर बनवा रहा है और कोई अशुभ घटना घर बनवाते वक्त हो जाए तो यह शनि के अशुभ होने का संकेत है।

 

५. कुंडली में शनि अशुभ हो तो व्यक्ति का मन बुराई की ओर, कुसंगति, नशे की ओर झुकने लगता है।

 

६. शनि यदि अशुभ हो तो जमा धन का नाश होता है, कोई बीमारी हो जाती है और शरीर कमजोर होने लगता है।

 

७. कुंडली में शनि की विपरीत स्थिति के कारण व्यक्ति आलसी हो जाता है इस कारण उसके काम ठीक तरह से नहीं हो पाते हैं और सफलता दूर होती जाती है।

 

८. जब किसी व्यक्ति के चेहरे पर हमेशा थकान, तनाव दिखाई देने लगे तो यह भी शनि के अशुभ होने का संकेत है।

 

९. शनि यदि अशुभ हो तो जवानी में ही व्यक्ति के बाल सफेद हो जाते हैं और बाल झड़ने लगते हैं और व्यक्ति को जोड़ों में दर्द रहता है।

 

१०. शनि अशुभ होने पर आंखें कमजोर हो जाती हैं, कमर दर्द की शिकायत रहती है।

 

शनि जयंती पर करें यह विशेष उपाय निश्चित ही लाभ होगा:-

 

शनि जयंती के खास उपाय
शनि जयंती के खास उपाय

 

१. काली उर्द, काला तिल, सरसों का तेल किसी निम्न वर्ग के प्राणी को दक्षिणा के साथ दान करें।

 

२. सरकारी अस्पतालों में दवाईयां दान करें।

 

३. हनुमान जी को तिल के तेल में सिंदूर घोलकर लगाएं तथा सुंदरकांड का पाठ करे व ११ बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 

४. २१ आम के पत्तों पर चंदन से “राम” लिखकर उन पत्तो को एक के ऊपर एक रखें उसके बाद उस आम के पत्ते को मौली से लपेटकर २१ गांठ लगाएं तथा शनि मंत्रों का १ माला जाप कर के उन पत्तों को किसी पीपल वृक्ष के पास रखें या नदी में प्रवाहित करें तथा पीपल वृक्ष को सरसों के तेल का दिया अर्पित कर के १०८ बार “नमः शिवाय” मन्त्र का जाप करें।

 

५. छाया दान करें।

 

जय श्री राम।

 

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कोरोना और ज्योतिष जानिए ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

कोरोना और ज्योतिष जानिए ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

भाग:-१

 

कोरोना और ज्योतिष: जानिए, कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति
कोरोना और ज्योतिष: जानिए, कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

 

कोरोना एक ऐसी महामारी जिसने सिर्फ भारत ही नही अपितु पूरे विश्व में त्राहि-त्राहि मचा रखी है अनगिनत लोग इस महामारी के प्रभाव में आकर असमय ही काल के मुख में समा रहे हैं इस महामारी को लेकर हमारे पंचांगों ने पूर्व में ही सतर्क किया था कि “इस वर्ष (२०१९-२०२०) में विषाणु जनित महामारी का प्रकोप रहेगा।” किंतु यह महामारी इतनी भयानक होगी यह किसी ने नही सोचा था ३ मई २०२१ को प्रातः १० बजकर २१ मिनट पर मुझसे कई वर्षों से जुड़े एक सदस्य के मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि इस महामारी का अंत कब होगा और कब हम इन परिस्थितियों से बाहर आ सकेंगे तो उस समय के आधान लग्न व आजाद भारत की कुंडली की विवेचना करने का एक प्रयास करता हूँ।

 

इस विवेचना को लिखने से पूर्व सर्वप्रथम मैं अपने इष्ट व अपने आराध्य जिन्हें मैं अपने गुरु रूप में भी पूजता हूँ उनके (श्री हनुमान जी व बाबा महादेव) चरण कमलों में नमन करता हूँ व इस महामारी से मुक्ति की प्राथना करता हूँ और साथ ही यह प्राथना करता हूँ कि मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि बनाएं जिससे मैं इस महामारी पर सही विवेचना कर सकूँ🙏🏻

प्रश्न कुंडली से फलकथन:-

 

प्रश्न लग्न कुंडली
प्रश्न लग्न कुंडली

 

३ मई २०२१ को प्रातः १०:२१पर कर्क लग्न जो कि चर लग्न है प्राप्त होता है जिनके स्वामी अर्थात लग्नेश चंद्रमा सप्तम भाव जिसे मारक स्थान भी कहते हैं वहाँ शनि के साथ स्थित होकर विष योग का सृजन कर रहे हैं साथ ही मंगल व राहु से दृष्ट भी हैं अतः इस वर्ष भी कोरोना महामारी को लेकर मन में तनाव, भय का संचार होता रहेगा चूँकि कर्क लग्न की कुंडली में मंगल राजयोगकारक हो जाता है अतः मंगल का सप्तम भाव को अपनी उच्च राशि मकर में देखने के कारण से भारत तकनीकी क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ेगा हालांकि बात कोरोना महामारी की हो रही है तो मंगल व राहु की दृष्टि सप्तम भाव पर आने से मारक स्थान पर एक साथ चार अशुभ योगों (शनि-चंद्र से विष योग, राहु-शनि से पिशाच योग, शनि-मंगल से द्वंद योग व राहु-चंद्र से ग्रहण योग) का बनना विपत्तियों व संघर्षों का सूचक है अतः इस वर्ष भारत को कोरोना महामारी के साथ-साथ अन्य बीमारियों व अनेक प्रकार की विपत्तियों जैसे आतंकवादी घटनाएं, भूकम्प, आग से जान-माल की हानि, तूफान आदि का सामना निकट भविष्य में करना पड़ सकता है हालांकि गुरु भाग्येश होकर अष्टम भाव में बैठे हैं तो यह कुछ हद तक विपरीत परिस्थितियों में कड़े संघर्ष व कुछ कठोर नियमों के साथ राहत प्रदान करने के योग बनाएंगे किंतु कर्क लग्न की कुंडली में गुरु षष्ठेश भी होते हैं अतः गुरु का अष्टम में होना लोगों को स्वास्थ्य जनित समस्याएं देता रहेगा, धन भाव का स्वामी सूर्य दशम भाव में दिग्बली होकर अपनी उच्च राशि मेष में अस्त ग्रह शुक्र के साथ बैठे हैं और चतुर्थ भाव में नीचभंग राजयोग बनने के कारण से भारत दवा व वैक्सीन के क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ेगा और भारत के आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह स्थिति शुभ रहेगी जिससे भारत की GDP में पिछले वर्ष की तुलना में कुछ वृद्धि होगी चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र के प्रथम चरण से गोचर होने के कारण व वर्तमान में चन्द्र में मंगल की अंतर्दशा होने के कारण से अभी इस बीमारी से बड़ी राहत मिलती नही दिख रही है वर्तमान में १ मार्च २०२१ से १७ अगस्त २०२१ तक गोचर में राहु का प्रभाव काफी अधिक रहने वाला है जिस कारण से इन समय में कोरोना महामारी में अप्रत्याशित वृद्धि होती रहेगी हालांकि अन्य ग्रहों का गोचर में संचार बीच-बीच में ठीक होते रहने के कारण से लोग तेजी से स्वस्थ होते रहेंगे, अगस्त के मध्य भाग में राहु का प्रभाव गोचर में कम होने से कोरोना महामारी में कुछ कमी देखने को मिलेगी किंतु जल्द ही अर्थात १७ अक्टूबर २०२१ की रात्रि के ३ बजकर २७ मिनट पर सूर्य अपनी नीच राशि तुला से गोचर करेंगे व १८ अक्टूबर २०२१ को शुक्र दिन में ७ बजकर ४० मिनट से ज्येष्ठा नक्षत्र और शनि मार्गी अवस्था में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण से गोचर करेंगे उस समय शुक्र व केतु की युति पुनः कोरोना वृद्धि का सूचक रहेगी जिसमें कोरोना में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी जिसे संसार कोरोना की तीसरी लहर के नाम से जानेगा।

 

निष्कर्ष:-

 

१३ फरवरी २०२२ को सूर्य दिन में ७ बजकर ३३ मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तब कोरोना महामारी में कुछ राहत अनुभव होगी हालांकि बीच-बीच में गोचर में ग्रहों की स्थिति ठीक होने पर कोरोना महामारी में कुछ अप्रत्याशित कमी भी देखने को मिल सकती है किंतु १३ फरवरी २०२२ से पूर्व इससे पूर्णतया लाभ मिलता नही दिख रहा है।

 

आर्टिकल की लंबाई को ध्यान में रखते हुए आजाद भारत की कुंडली से कोरोना महामारी पर विवेचना अपने अगले आर्टिकल में प्रकाशित करूँगा।

 

जय श्री राम।

 

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सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार 25 मुख्य स्वप्नों के अर्थ

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार 25 मुख्य स्वप्नों के अर्थ

 

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्नों के अर्थ
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्नों के अर्थ

 

सामुद्रिक शास्त्र में स्वप्नों के अनेक फल बतलाए गए हैं वेद व पुराणों में भी स्वप्न फल का उल्लेख मिलता है विशेष रूप से अग्नि पुराण में शकुन-अपशकुन के बारे में विस्तृत वर्णन है, रात्रि के 4 प्रहर के अनुसार निद्रा की 4 प्रकार की अवस्थाएं होती हैं इनमें से रात्रि के अंतिम प्रहर में आने वाले स्वप्न का विशेष अर्थ होता है आज के इस लेख में मैं ऐसे ही कुछ स्वप्नों का अर्थ बताने जा रहा हूँ जिनसे आप भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं अर्थात शकुन-अपशकुन का विचार कर सकते हैं:-

 

१. यदि व्यक्ति को स्वप्न में हरे भरे खेत-खलियान आदि दिखाई दें तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

२. यदि व्यक्ति को स्वप्न में कोई मृत व्यक्ति कपड़ा या कोई फल देता दिखाई देता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

३. यदि कोई विवाहित व्यक्ति स्वप्न में अंडा देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला बताया गया है।

 

४. यदि अविवाहित व्यक्ति स्वप्न में अंडा देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि व्यक्ति को निकट भविष्य में शुभ समाचार प्राप्त होने वाला है।

 

५. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में किसी कुम्हार को घड़ा बनाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह स्वप्न उक्त व्यक्ति के लिए समृद्धिदायक रहता है।

 

६. यदि स्वप्न में गधे की चीख सुनाई दे तो सामुद्रिक शास्त्र में इसे शुभ नही माना गया है ऐसे व्यक्ति पर किसी प्रकार के कष्ट या विपत्ति की संभावना रहती है।

 

७. यदि स्वप्न में व्यक्ति खुद को चावल खाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्ति को अत्यधिक परिश्रम करने पर भी जो कार्य सिद्धि में वह लगा हुआ है उसमें असफलता प्राप्त होगी।

 

८. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति चांदी को गलाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह मित्रों से बैर, हानि, चिंता और दुख का सूचक है।

 

९. यदि स्वप्न में चांदी की खान दिखाई दे तो सम्मान हानि का सूचक होती है।

 

१०. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति खुद को रोटी बनाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह स्वप्न किसी गंभीर बीमारी का सूचक होती है अतः ऐसे व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य हेतु बेहद सतर्क रहना चाहिए।

 

११. यदि कोई विवाहित महिला स्वयं में खुद को बच्चे के लिए स्वेटर बनाते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बतलाया गया है कि उक्त महिला को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

१२. यदि किसी विवाहित व्यक्ति को स्वप्न में सुंदर व नवजात बालक दिखाई दे तो स्वप्न शास्त्र में बताया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

१३. स्वप्न में चारों तरफ हरियाली या हरे-भरे खेत देखना भी सामुद्रिक शास्त्र में संतान सुख को बताया गया है।

 

१४. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्न में श्वेत महल, श्वेत तोरण, श्वेत रंग से रंगी छत दिखाई दे तो व्यक्ति को शीघ्र ही धन व संतान या दोनों का सुख प्राप्त होता है।

 

१५. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्न में अपने नाखून बड़े हुए देखना भी धन व संतान सुख का सूचक है।

 

१६. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति दर्पण में अपना मुख देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार ऐसे व्यक्ति को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होता है।

 

१७. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्न में तिल, चावल, सरसों, जौ, अन्न, कलश, शंख, स्वर्ण के गहने आदि देखना समृद्धि का सूचक बतलाया गया है।

 

१८. स्वप्न में खोई हुई वस्तु की प्राप्ति को देखना भी सुख व समृद्धि का सूचक होता है।

 

१९. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में मकान मालिक द्वारा किराये की मांग करते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही स्वम् के मकान का सुख प्राप्त होने वाला है यह स्वप्न सुख व समृद्धि का सूचक होता है।

 

२०. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति नाक को साफ करते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बतलाया गया है कि निकट भविष्य में उक्त व्यक्ति के आय में वृद्धि होगी तथा आय के नए साधन भी प्राप्त होंगे।

 

२१. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में किसी बच्चे को गोद में लेते हुए देखते हैं तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही अप्रत्याशित धन लाभ होने की संभावना रहती है।

 

२२. स्वप्न में भालू को पेड़ पर चढ़ते हुए देखना मनचाहा जीवनसाथी मिलने का सूचक होता है।

 

२३. यदि स्वप्न में सर पर सर्प दंश होते हुए दिखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बतलाया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र की उच्च पद की प्राप्ति होगी।

 

२४. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति खुद को गधे पर बैठे हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही उच्च पद की प्राप्ति होने वाली है।

 

२५. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में गधे की पीठ पर खुद को सामान रखते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में इसे अत्यंत शुभ बताया गया है इस स्वप्न का अर्थ सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति व नए मित्र की प्राप्ति होती है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या भाग-१

होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या भाग-१

 

होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम व मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या
होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम व मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या

 

जैसा कि आप सब जानते हैं कि प्रत्येक कुंडली मे १२ भाव होते हैं और यदि इन भावों को तीन-तीन के समूह में चार भागों में बाँटा जाए तो विभाजन निम्न प्रकार से होता है:-

 

१. धर्म त्रिकोण भाव:-  प्रथम, पंचम व नवम भाव को धर्म त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

२. अर्थ त्रिकोण भाव:-  द्वितीय, षष्ठ व दशम भाव को अर्थ त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

३. काम त्रिकोण भाव:-  तृतीय, सप्तम व एकादश भाव को काम त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

४. मोक्ष त्रिकोण भाव:-  चतुर्थ, अष्टम व द्वादश भाव को मोक्ष त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

इन स्थानों पर जो ग्रह तथा नक्षत्र होंगे वह अपने स्वभावानुसार उस व्यक्ति के कर्मों की गति स्पष्ट करते हैं उदाहरणार्थ:- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में अशुभ या पापी ग्रह, अर्थ व काम अर्थात इच्छाओं के स्थान में बैठे हैं तो उस व्यक्ति की इच्छायें व प्रवृत्ति उसी तरफ अधिक होंगी और उसकी इच्छाएँ व अर्थ रूपये-पैसे संबंधी कार्य उसी समय पूरे होंगे जब उस कुण्डली की गणना के अनुसार उन ग्रहों का समय आयेगा वहीं दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति धर्म व मोक्ष की प्राप्ति चाहता है, तो उसकी कुण्डली की कुंडली मे शुभ ग्रह धर्म व मोक्ष वाले स्थानों में अवश्य ही बैठे होंगें।

 

कुंडली के धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली के धर्म त्रिकोण भाव

 

अब कुंडली के प्रत्येक भावों का विश्लेषण उपरोक्त प्रकार से करते हैं, जैसा कि आप सब जानते हैं कि  इस संसार मे धर्म ही प्रधान है व्यक्ति धर्म का समुचित पालन करके ही जीवन के अंतिम उद्देश्य मोक्ष तक पहुँच सकता है
इस कारण से ही किसी भी कुंडली मे 1, 5, 9 स्थान को मूल त्रिकोण की संज्ञा दी गई है अतएव सर्वप्रथम धर्म भावों के बारे में विस्तार से जानते हैं:-

 

लग्न स्थान प्रथम धर्म त्रिकोण भाव:-

 

कुंडली का प्रथम धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली का प्रथम धर्म त्रिकोण भाव

 

इस भाव से व्यक्ति की शरीर पुष्टि, वात-पित्त-कफ प्रकृति, त्वचा का रंग, यश-अपयश, पूर्वज, सुख-दुख, आत्मविश्वास, अहंकार, मानसिकता आदि को जाना जाता है इससे हमें शारीरिक आकृति, स्वभाव, वर्ण चिन्ह, व्यक्तित्व, चरित्र, मुख, गुण व अवगुण, प्रारंभिक जीवन विचार, यश, सुख-दुख, नेतृत्व शक्ति, व्यक्तित्व, मुख का ऊपरी भाग, के संबंध में ज्ञान मिलता है।

पंचम भाव द्वितीय त्रिकोण भाव:-

 

कुंडली का द्वितीय धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली का द्वितीय धर्म त्रिकोण भाव

 

इस भाव से संतति, बच्चों से मिलने वाला सुख, विद्या बुद्धि, उच्च शिक्षा, विनय-देशभक्ति, पाचन शक्ति, कला, रहस्य शास्त्रों की रुचि, अचानक धन-लाभ, प्रेम संबंधों में यशनौकरी परिवर्तन आदि का विचार किया जाता है इससे हमें विद्या, विवेक, लेखन, मनोरंजन, संतान, मंत्र-तंत्र, प्रेम, सट्टा, लॉटरी, अकस्मात धन लाभ, पूर्वजन्म, गर्भाशय, मूत्राशय, पीठ, प्रशासकीय क्षमता, आय जानी जाती है।

नवम भाव तृतीय धर्म त्रिकोण भाव:-

 

कुंडली का तृतीय धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली का तृतीय धर्म त्रिकोण भाव

 

इस भाव से आध्यात्मिक प्रगति, भाग्योदय, बुद्धिमत्ता, गुरु, परदेश गमन, ग्रंथपुस्तक लेखन, तीर्थ यात्रा, भाई की पत्नी, दूसरा विवाह आदि के बारे में बताया जाता है इससे हमें धर्म, भाग्य, तीर्थयात्रा, संतान का भाग्य, साला-साली, आध्यात्मिक स्थिति, वैराग्य, आयात-निर्यात, यश, ख्याति, सार्वजनिक जीवन, भाग्योदय, पुनर्जन्म, मंदिर-धर्मशाला आदि का निर्माण कराना, योजना विकास कार्य, न्यायालय से संबंधित कार्य का विचार किया जाता है।

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान रखते हुए अगला भाग जल्द ही प्रकाशित होगा।

 

जय श्री राम।

 

ज्योतिर्विद प्रवीण सिंह परमार

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राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-४ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

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राहु व केतु राशि परिवर्तन
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भाग:-४

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-१ जानिए किन राशियों पर राहु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 20290: राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद ही नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु गोचर परिवर्तन से किन-किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी।

 

राहु व केतु का 12 राशियों पर प्रभाव
राहु व केतु का 12 राशियों पर प्रभाव

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर सामान्य रहेगा क्योंकि वर्तमान में अभी शनि के साढ़ेसाती का दूसरा चरण भी आपकी राशि पर चल रहा है हालांकि तुला, मकर व कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का उतना अशुभ प्रभाव नही पड़ता है किंतु यदि चंद्रमा का किसी भी प्रकार से शनि से संबंध बने तो साढ़ेसाती परेशानी देती है अन्यथा इन तीन राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती उतनी अशुभ नही होती हालांकि हम यहाँ राहु व केतु के गोचर परिवर्तन पर चर्चा कर रहे है अतः प्रेम संबंधों में कमी आएगी, प्रेमी व प्रेमिका से विवाद होते रहेंगे तथा यदि आप दोनों के मध्य काफी समय से विवाद चल रहा है तो वह विवाद संबधों को विच्छेद करा कर समाप्त होगा, प्रेमियों के मध्य गलतफहमियों के चलते विवाद होंगे, संतान को कष्ट, संतान से विवाद, संतान की शिक्षा में बाधाएं आएंगी, विद्यार्थियों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा शिक्षा में व्यवधान आएंगे, विद्यार्थियों के मन में क्या करें व क्या न करें को लेकर मन में संशय बना रहेगा, कुछ देर ध्यान करें इससे मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी हालांकि लाभ के लिहाज से यह गोचर शुभ सिद्ध होगा फलस्वरूप लाभ के अन्य माध्यम बनेंगे, लाभ में वृद्धि होगी, लंबे समय से कार्यक्षेत्र में (चाहे वह नौकरी पेशा व्यक्ति हों या व्यापारी) उन्नति के मार्ग में जो बाधाएं आ रही थी वह दूर होंगी, शेयर बाजार, जुआ व सट्टे से अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लाभ होगा आपकी वाणी का लोगों पर अच्छा प्रभाव भी पड़ेगा तथा उन्नति के अवसर भी प्राप्त होंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, पिता से वैचारिक मतभेद व पिता के स्वास्थ्य में समस्या रहेगी, भ्रम की स्थितियाँ बनेंगी, मकर राशि वाले जातक/जातिकाओं के लिए इस गोचर काल की सबसे बड़ी समस्या भ्रामक स्थिति रहेगी अतः धैर्य व संयम से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच समझ कर लें तथा आवेश में आने से बचें यदि आपने भ्रामक स्थिति न बनने दी तो राहु व केतु का यह गोचर आपके लिए शुभ सिद्ध होगा, आय में वृद्धि होगी, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा है तो आपको बुद्धि व विवेक से हर कार्य करना होगा क्योंकि राहु आपके चित्त को शांत नही होने देंगे जिससे बनते कार्य बिगड़ेंगे, वहिं केतु आपको सही दिशा में प्रयत्न नही करने देंगे जिससे व्यापार व दामपत्य जीवन के सुख में बाधाएं आएंगी, यह गोचर आपके लिए 48% शुभ तथा 52% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- सुंदरकांड व बटुक भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करें तथा जिनकी कुंडली में चंद्रमा शनि से संबंध रखता हो वह इन उपायों के साथ प्रत्येक शनिवार को 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें लाभ होगा।

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-२ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-२ जानिए, कर्क से कन्या राशि वालों के लिए राहु-केतु का यह गोचर कितना शुभ रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा हो उनके लिए मुश्किलें ज्यादा रहेंगी अतः घर में कलह-क्लेश होंगे, मानसिक अशांति अनुभव होगी, कार्यक्षेत्र में हानि संभव है, नौकरी पेशा लोग बहुत ही सतर्कता के साथ कार्य करें, आपको अपने प्रियजनों का सहयोग कम मिलेगा, वाणी में तेजी रहेगी अतः वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें, धैर्य व संयम से कार्य करें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं से सावधान रहें, किसी से ऋण लेने से बचें, जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध नही है उनके लिए यह गोचर कुछ राहत देगा, कार्यक्षेत्र में विकास होगा, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, जिनका कार्य कमीशन, फाइनेंस, बैंकिंग, टीचिंग से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह गोचर लाभप्रद सिद्ध होगा हालाँकि घर में कलह-क्लेश होते रहेंगे फिर भी चंद्रमा का शनि से संबंध न होने के कारण से आपकी सोच-विचार करने की शक्ति जागृत रहेगी, राजनीति से या सामाजिक वर्ग से जुड़े लोग अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण करें तथा शराब, माँसाहार का सेवन न करें क्योंकि इनका सेवन आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला सिद्ध होगा, शत्रुओं से सावधान रहें, यह गोचर आपके लिए 50% शुभ तथा 50% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- हनुमान जी, गणेश जी व भैरव जी की नित्य पूजा करें व गणेश अथर्वशीर्ष, संकटमोचन हनुमाष्टक और भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करने से लाभ होगा।

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-३ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020: *भाग:-३* राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु के गोचर परिवर्तन से तुला, वृश्चिक व धनु राशि में से किन पर राहु की कृपा बरसेगी व आपको क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए तथा उपाय।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर शुभ रहेगा बशर्ते आपकी कुंडली में राहु पीड़ित अवस्था में हो फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, भाग्य में वृद्धि होगी व भाग्य का पूर्ण सहयोग भी प्राप्त होगा, व्यापार में भी लाभ होगा व व्यापार की वृद्धि होगी, नए कार्य की शुरुवात होने के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आप क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, हॉकी, पुलिस, आर्मी से जुड़े हुए हैं तो यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ सिद्ध होगा, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, दामपत्य जीवन में क्षणिक विवाद होते रहेंगे, बड़े भाई-बहन का सम्मान करें, मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी अतः अपने विवेक से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझ कर ही लें, दिमाग आपका तेजी से कार्य करेगा, आपके ज्ञान में भी वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, रुका हुआ धन प्राप्त होगा व ऐसे सभी कार्य जो लंबे समय से रुके हुए हैं अब पूर्ण होंगे, सरकारी नौकरी की जो लोग लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं उन्हें सरकारी नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, यात्राएं चाहे लंबी हो या छोटी लाभप्रद सिद्ध होंगी, धर्म का पालन करें व अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, बीते समय में आपको जो भी नुकसान हुए अब उनकी भरपाई होने के योग बनेंगे, यह गोचर आपके लिए 80% शुभ व 20% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- दशांश करें यहाँ दशांश का तात्पर्य अपने कमाई का दसवाँ हिस्सा किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम में दान करने से हैं तथा शिव जी की पूजा व शिव परिवार की सेवा करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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