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चांडाल योग: अर्थ, इतिहास और करिअर पर प्रभाव | Astrology Sutras

ज्योतिष में चांडाल योग: एक सरल व्याख्या

ज्योतिष शास्त्र में ‘चांडाल योग’ को लेकर अक्सर गलतफहमियां रहती हैं और आधुनिक ज्योतिषी इसके सही अर्थ को नजरअंदाज कर देते हैं। इस कारण इसका व्यावहारिक महत्व कम हो गया है।

शब्द का अर्थ और इतिहास

​’चांडाल’ शब्द ‘चंद’ से बना है। इसका मतलब है- उग्र, गुस्सैल, या भावुक। यानी, चांडाल का अर्थ हुआ ऐसा व्यक्ति जिसके कर्म क्रूर या कठोर हों।

​प्राचीन काल में, अलग-अलग जातियों के मेल से जन्मे बच्चों (जैसे महाभारत के कर्ण) को समाज में अक्सर अपमान सहना पड़ता था। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण उनका स्वभाव कठोर हो जाता था। इसी कठोर स्वभाव के कारण उन्हें ‘चांडाल’ जैसे गुणों वाला कहा गया। बाद में, शूद्र पिता एवं ब्राह्मण माता की संतान को ‘चांडाल’ कहा जाने लगा। यही कारण है कि आज भी शनि ग्रह के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए इन्हीं लोगों को दान देने का नियम है।

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ज्योतिष में चांडाल योग कैसे बनता है?

ज्योतिष के प्रमुख ग्रंथों के अनुसार, कुंडली में यह योग मुख्य रूप से दो स्थितियों में बनता है:

1. जब शुक्र या चंद्रमा केंद्र में हों और राहु लग्न (पहले घर) में बैठा हो।
2. जब बृहस्पति (गुरु) के साथ राहु या केतु हों, और उन पर पापी ग्रहों की नजर हो, या बृहस्पति बहुत कमजोर हो।

इस योग का फल क्या होता है?

इस योग का सबसे मुख्य प्रभाव व्यक्ति के काम और करिअर पर पड़ता है।

पारिवारिक पेशे से दूरी: जिस व्यक्ति की कुंडली में चांडाल योग होता है, वह अपने पिता या पूर्वजों का काम नहीं अपनाता। उदाहरण के लिए, यदि पिता एक प्रसिद्ध डॉक्टर हैं, तो बेटा डॉक्टर नहीं बनेगा।

हर वर्ग पर लागू: यह नियम सिर्फ अच्छे कामों पर ही नहीं, बल्कि साधारण कार्यों पर भी लागू होता है, मतलब साधारण काम करने वाले का बेटा भी पिता का काम नहीं करेगा।

बृहस्पति का प्रभाव: यदि यह योग बृहस्पति (गुरु) के कारण बन रहा है, तो इसका असर और गहरा होता है। भले ही व्यक्ति अच्छे और संस्कारी परिवार (जैसे ब्राह्मण) में पैदा हुआ हो, वह अपने कुल की परंपराओं से हटकर काम करता है।

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अगर किसी की कुंडली में चांडाल योग है, तो यह पक्का है कि वह अपने पूर्वजों के नक्शेकदम पर नहीं चलेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वह गरीब या असफल होगा।

​अगर कुंडली मजबूत है, तो वह अपने पिता के क्षेत्र से अलग किसी दूसरे क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। यह योग सिर्फ इतना ही बताता है कि बच्चा अपने पिता के बिजनेस या नौकरी में जाएगा या नहीं।

जय श्री राम।

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23 January Birthday Personality: स्वभाव, करिअर व प्रेम

23 जनवरी को जन्मे व्यक्ति बहुमुखी प्रतिभा के धनी होते हैं, मूलांक 5 (2+3=5) होने के कारण से एक तरफ जहाँ बुध का प्रभाव रहता है तो वहीं, कुंभ राशि (Aquarius) होने के कारण से शनि का भी विशेष प्रभाव बना रहता है।

प्रमुख व्यक्तित्व (Key Personality)

23 जनवरी को जन्मे लोग ‘बुध’ से प्रभावित होते हैं, इसलिए इनका दिमाग बिजली की तरह तेज चलता है।

तर्कशक्ति और वाकपटुता: इनमें बोलने की कला जन्मजात होती है। ऐसे व्यक्ति अपनी बातों से किसी को भी अपना बना लेते हैं और तर्क-वितर्क में तो इनसे जीतना बहुत मुश्किल होता है।

हंसमुख और मिलनसार: ऐसे व्यक्ति स्वभाव से बहुत खुशमिजाज होते हैं। जहाँ भी जाते हैं, वहाँ का माहौल हल्का और खुशनुमा बना देते हैं, जिस कारण से लोग इनके साथ रहना पसंद करते हैं।

बदलाव पसंद: इन्हें एक ही तरह की दिनचर्या (Routine) से जल्दी बोरियत होने लगती है, जिस कारण से ऐसे व्यक्ति जीवन में हमेशा कुछ नया और रोमांचक करना चाहते हैं।

अनुकूलन क्षमता: 23 जनवरी को जन्में व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में माहिर होते हैं, चाहे कैसी भी मुश्किल हो, ये अपना रास्ता निकाल ही लेते हैं।

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करिअर और कार्यक्षेत्र (Suitable Career)

23 जनवरी को जन्में व्यक्तियों का मूलांक 5 (बुध) होता है, जो व्यापार और संचार (Communication) का ग्रह है, इसलिए ऐसे व्यक्ति उन क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं जहाँ बोलने और दिमाग लगाने की जरूरत हो।

उपयुक्त क्षेत्र: मार्केटिंग, सेल्स, बैंकिंग, शेयर बाजार, चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA), और पत्रकारिता (Journalism)।

व्यापारिक समझ: इनमें जन्मजात व्यापारी (Business Mind) के गुण होते हैं, जिस कारण से ऐसे व्यक्ति नौकरी की अपेक्षा अपना खुद का काम या बिजनेस करने में ज्यादा सफल रहते हैं।

संचार माध्यम: एंकरिंग, लेखन, पब्लिक स्पीकिंग या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में भी ये बहुत नाम कमाते हैं।

यात्रा से जुड़े कार्य: चूँकि इन्हें घूमना पसंद है, इसलिए टूरिज्म या ट्रेवल एजेंसी जैसे काम भी इनके लिए शुभ होते हैं।

आर्थिक स्थिति (Financial Status)

आर्थिक दृष्टिकोण से 23 जनवरी को जन्मे लोग काफी चतुर माने जाते हैं।

धन कमाने की कला: ऐसे व्यक्ति जानते हैं कि पैसा कैसे कमाया जाता है और पैसे से पैसा कैसे बनाया जाता है। इनकी आर्थिक स्थिति सामान्यतः अच्छी रहती है।

निवेश में रुचि: ऐसे व्यक्ति जोखिम लेने से नहीं डरते और अक्सर शेयर बाजार या सट्टेबाजी (Speculation) में किस्मत आजमाते हैं, जहाँ इन्हें लाभ भी मिलता है।

उतार-चढ़ाव: 23 जनवरी को जन्में व्यक्ति पैसे के मामले में हाथ थोड़ा खुला रखते है, जिस कारण से आय अच्छी होने के बावजूद, धन संचय करने के लिए इन्हें थोड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।

प्रेम व वैवाहिक जीवन (Love & Married Life)

प्रेम संबंधों में ये दिल से ज्यादा दिमाग का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन साथी के प्रति वफादार रहते हैं।

प्रेम जीवन: ऐसे व्यक्ति ऐसा जीवनसाथी चाहते हैं जो न केवल सुंदर हो, बल्कि बुद्धिमान भी हो, जिससे ये हर विषय पर बात कर सकें। इनका रिश्ता दोस्ती की नींव पर टिका होता है।

विवाह: इनका वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है, बशर्ते इनका साथी इनकी “आजादी” और “घूमने-फिरने” के शौक को समझे। 23 जनवरी को जन्में व्यक्ति अपने बच्चों के साथ भी दोस्त की तरह व्यवहार करते हैं।

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ताकत व कमजोरियाँ (Strengths & Weaknesses)

ताकत (Strengths)

तेज दिमाग: ऐसे व्यक्ति किसी भी समस्या का समाधान चुटकियों में खोज लेते हैं।

आकर्षण: इनका व्यक्तित्व बहुत चुंबकीय (Magnetic) होता है।

ऊर्जावान: ऐसे व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से बहुत सक्रिय रहते हैं।

कमजोरियाँ (Weaknesses)

अस्थिरता: इनका मन बहुत चंचल होता है, जिस कारण से अधिकतर मौके पर ये एक काम पूरा किए बिना दूसरे काम में लग जाते हैं।

अधीरता: इन्हें सब कुछ जल्दी चाहिए होता है, धैर्य की इनमें थोड़ी कमी होती है।

अविश्वसनीयता: कभी-कभी अपने चंचल स्वभाव के कारण ये वादे पूरे नहीं कर पाते, जिससे लोग इन्हें अविश्वसनीय समझने लगते हैं।

23 जनवरी को जन्में व्यक्तियों के लिए शुभ तत्व (Lucky Elements)

शुभ अंक (Lucky Number): 5, 14, 23, 1 और 6 भी शुभ हैं।
शुभ दिन (Lucky Day): बुधवार और शुक्रवार।
शुभ रंग (Lucky Color): हरा, सफेद और खाकी।
शुभ रत्न (Lucky Gemstone): पन्ना (Emerald)।

विशेष:- कोई भी रत्न बिना कुंडली दिखाए पहनने पर नुकसान भी करता है अतः कुंडली या हाथ दिखाकर एवं उचित परामर्श लेकर ही रत्न धारण करें।

23 जनवरी को जन्मे लोग “बहुमुखी प्रतिभा” (Versatile Genius) के प्रतीक होते हैं। यदि ये अपनी चंचलता पर काबू पा लें और किसी एक लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें, तो ये जीवन में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

जय श्री राम।

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Basant Panchami 2026: 23 जनवरी को है वसंत पंचमी, जानें सरस्वती पूजा का ‘कुंभ लग्न’ वाला श्रेष्ठ मुहूर्त।

23 जनवरी को बसंत पंचमी: भोर 2:29 से पुण्य काल

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को ‘बसंत पंचमी’ के रूप में मनाया जाता है, यह पर्व विद्या, ज्ञान और वाणी की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती को समर्पित है।

महत्व: यह पर्व भारतीय संस्कृति में ऋतु परिवर्तन, नवचेतना, सृजनशीलता, कला और बौद्धिक जागरण का प्रतीक है।

बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026: करें यह एक उपाय, मेष से मीन तक चमकेगी किस्मत

तिथि का समय (शुभ मुहूर्त):

  • पंचमी तिथि का आरंभ: 22 जनवरी की मध्यरात्रि के बाद (यानी 23 जनवरी की भोर) 01:17 बजे।
  • पंचमी तिथि की समाप्ति: 23 जनवरी की मध्यरात्रि 12:09 बजे तक प्रभावी रहेगी, इस प्रकार 23 जनवरी को पूरा दिन पंचमी तिथि विद्यमान रहेगी।

श्रेष्ठ मुहूर्त (पूजा का सबसे उत्तम समय)

 

समय: प्रातः 07:56 बजे से दोपहर 09:25 बजे तक कुंभ लग्न में।

विशेष संयोग: इस वर्ष बसंत पंचमी पर मकर राशि में सूर्य और मीन राशि में चंद्रमा का संयोग बन रहा है, साथ ही ‘पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र’ और ‘शिव योग’ का विशेष प्रभाव है।

यह समय ज्ञान, विद्या और बौद्धिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना गया है।

विशेष रूप से 23 जनवरी 2026 को प्रातः 07:56 बजे से दोपहर 01:59 बजे तक श्री सरस्वती पूजन और विद्यारंभ (पढ़ाई शुरू करने) के लिए श्रेष्ठ मुहूर्त प्राप्त है।

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शास्त्रीय नियम:

शास्त्रीय सिद्धांत ‘तिथिं समनु प्राप्त उदयं याति भास्कर:’ के अनुसार, चूँकि 23 जनवरी को पंचमी तिथि का संयोग सूर्योदय से हो रहा है, इसलिए यही दिन (23 जनवरी) बसंत पंचमी पर्व और श्री सरस्वती पूजन के लिए मुख्य रूप से मान्य रहेगा।

मध्यरात्रि के समय पंचमी तिथि शेष रहने से 24 जनवरी को सूर्योदय तक विद्यारंभ, ज्ञान-दान, जप-तप एवं पूजन आदि कर्म किए जा सकते हैं।

जय श्री राम।

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बसंत पंचमी: पौराणिक महत्व, धार्मिक आस्था और पीत वर्ण का रहस्य

बसंत पंचमी, जिसे ‘श्री पंचमी’, ‘ज्ञान पंचमी’ या ‘ऋषि पंचमी’ भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति में एक विशेष स्थान रखती है। यह केवल ऋतु परिवर्तन का उत्सव नहीं, बल्कि अज्ञान के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने का महापर्व है, इस वर्ष यह पावन पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा।

पौराणिक कथा: माँ सरस्वती का अवतरण

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी के दिन ही माता सरस्वती का जन्म (प्राकट्य) हुआ था, इसके पीछे सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा से जुड़ी एक रोचक कथा है।

सृष्टि में मौन: जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की, तो उन्होंने देखा कि चारों ओर सन्नाटा है। पेड़-पौधे, जीव-जंतु सब मौन थे, इस निस्तब्धता को देखकर ब्रह्मा जी ने अपने कमंडल से जल छिड़का।

वीणावादिनी का प्रकट होना: जल कणों के पड़ते ही एक चतुर्भुजी देवी प्रकट हुईं, जिनके हाथों में वीणा, पुस्तक और माला थी। ब्रह्मा जी के अनुरोध पर जैसे ही देवी ने वीणा के तार छेड़े, समस्त संसार में ध्वनि का संचार हो गया। जलधारा कोलाहल करने लगी, हवा सरसराने लगी और जीवों को वाणी मिल गई।

नामकरण: चूँकि उन्होंने संसार को स्वर और वाणी (सरस + वती) प्रदान की, इसलिए उनका नाम ‘सरस्वती’ पड़ा। यही कारण है कि बसंत पंचमी के दिन विशेष रूप से विद्या, संगीत और कला की देवी की पूजा की जाती है।

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पीले रंग का गहरा धार्मिक रहस्य

बसंत पंचमी पर पीला रंग पहनने और उपयोग करने के पीछे केवल परंपरा नहीं, बल्कि गहरा धार्मिक व ज्योतिषीय महत्व भी हैं:

सात्त्विकता का प्रतीक: हिंदू धर्म में पीले रंग को ‘सत्त्व गुण’ (पवित्रता और सत्य) का प्रतीक माना जाता है, यह रंग मस्तिष्क को सक्रिय करता है और मन में अच्छे विचारों का संचार करता है।

माँ सरस्वती को पीला रंग अत्यंत प्रिय है, इसलिए उन्हें प्रसन्न करने के लिए पीलें वस्त्र, पीले फूल (जैसे गेंदा) और पीला चंदन अर्पित किया जाता है।

भगवान विष्णु और बृहस्पति: पीला रंग भगवान विष्णु को भी प्रिय है (उन्हें ‘पीतांबरधारी’ कहा जाता है)। ज्योतिष शास्त्र में पीला रंग देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) का कारक है, जो ज्ञान और भाग्य के देवता हैं, अतः इस दिन पीला पहनने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है।

सौभाग्य का सूचक: भारतीय परंपरा में हल्दी और केसर को बेहद शुभ माना गया है। विवाह हो या पूजा, पीले रंग की उपस्थिति अनिवार्य है, बसंत पंचमी पर पीला पहनना आने वाले समय के लिए सुख-समृद्धि और सौभाग्य को आमंत्रित करना है।

सांस्कृतिक परंपराएँ और भोग

इस दिन केवल वस्त्र ही नहीं, बल्कि खान-पान में भी पीले रंग की प्रधानता होती है:

देवी का भोग: माँ सरस्वती को केसरिया भात (मीठे चावल), बेसन के लड्डू, बूंदी या राजभोग का नैवेद्य चढ़ाया जाता है।

अक्षरांभ संस्कार: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बच्चों की शिक्षा प्रारंभ करने (अक्षर ज्ञान या पाटी पूजन) के लिए बसंत पंचमी का दिन सबसे शुभ माना जाता है। इसे ‘विद्यारंभ संस्कार’ भी कहते हैं।

बसंत पंचमी 23 जनवरी 2026: करें यह एक उपाय, मेष से मीन तक चमकेगी किस्मत

बसंत पंचमी केवल एक तिथि नहीं, बल्कि ज्ञान, भक्ति और प्रकृति के संगम का उत्सव है। जहाँ एक ओर हम पीले वस्त्र धारण कर प्रकृति के साथ एकाकार होते हैं, वहीं दूसरी ओर माँ सरस्वती की आराधना कर बुद्धि और विवेक का वरदान माँगते हैं।

जय श्री राम।

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21 जनवरी को जन्मे लोगों का भविष्यफल: स्वभाव, करिअर और प्रेम जीवन।

21 जनवरी को जन्में व्यक्ति अत्यंत प्रभावशाली और स्वाभिमानी व्यक्तित्व लिए हुए होते हैं क्योंकि एक तरफ जहाँ मूलांक (2+1= 3) होने से गुरु का प्रभाव रहता है, तो वहीं जनवरी माह और कुंभ राशि (Aquarius) के प्रभाव के कारण ऐसे व्यक्तियों में शनि की गंभीरता और बृहस्पति का ज्ञान, दोनों का एक अनोखा संगम देखने को मिलता है, तो चलिए जानते हैं 21 जनवरी को जन्में व्यक्तियों के बारे में।

प्रमुख व्यक्तित्व (Key Personality)

21 जनवरी को जन्मे व्यक्ति ‘बृहस्पति’ (ज्ञान के देवता) से प्रभावित होते हैं, इसलिए इनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली और चुम्बकीय होता है।

स्वाभिमानी और महत्वाकांक्षी: ऐसे व्यक्ति स्वाभिमान से जीते हैं, और इन्हें किसी के अधीन रहना पसंद नहीं होता। इनके सपने बड़े होते हैं और उन्हें पूरा करने का दम भी रखते हैं।

सामाजिक और मिलनसार: इनका सामाजिक दायरा बहुत बड़ा होता है। अक्सर ऐसे व्यक्ति अपनी बातों और तर्कों से सामने वाले को बहुत जल्दी प्रभावित कर लेते हैं।

अनुशासित मगर स्वतंत्र: कुंभ राशि का प्रभाव होने के कारण 21 जनवरी को जन्में व्यक्ति विचारों से आधुनिक और स्वतंत्र होते हैं, लेकिन अपने जीवन में अनुशासन का कड़ाई से पालन करते हैं।

मददगार स्वभाव: दूसरों की मदद करना इनके स्वभाव में होता है। ये अच्छे सलाहकार साबित होते हैं।

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करिअर और कार्यक्षेत्र (Suitable Career)

21 जनवरी को जन्में व्यक्तियों का मूलांक 3 (बृहस्पति) है, जो ज्ञान और विस्तार का ग्रह है, इसलिए ये उन क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं जहाँ बौद्धिक क्षमता और प्रबंधन की आवश्यकता होती है।

उपयुक्त क्षेत्र: शिक्षण (Teaching), लेखन, पत्रकारिता, वकालत (Law), और बैंक या वित्त (Finance) से जुड़े कार्य।

नेतृत्व क्षमता: ये अच्छे मैनेजर, टीम लीडर या किसी संस्था के प्रमुख बन सकते हैं।

रचनात्मक कार्य: 21 जनवरी को जन्में व्यक्ति कुछ विशेष प्रयास से अभिनय, संगीत या कला के क्षेत्र में भी ऊंचा नाम कमाते हैं।

व्यापार: यदि व्यापार करते हैं, तो साझेदारी (Partnership) की बजाय स्वतंत्र रूप से काम करना इनके लिए ज्यादा फलदायी होता है।

आर्थिक स्थिति (Financial Status)

आर्थिक रूप से 21 जनवरी को जन्मे लोग काफी भाग्यशाली होते हैं। इनके जीवन के शुरुआती दौर में थोड़ा संघर्ष हो सकता है, लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है (विशेषकर 30 वर्ष के बाद), इनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होती जाती है। इनके पास एक से अधिक स्रोतों से धन कमाने की क्षमता होती है और 36-37 की आयु के बाद बड़े धन संचय करने में भी सफल रहते हैं, हालांकि शान-शौकत पर खर्च करने का शौक भी इन्हें विशेष रहता है।

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प्रेम व वैवाहिक जीवन (Love & Married Life)

प्रेम संबंधों के मामले में ऐसे व्यक्ति दिल से सच्चे और वफादार होते हैं, लेकिन इन्हें समझना हर किसी के बस की बात नहीं होती।

प्रेम जीवन: ये अपने साथी से बौद्धिक जुड़ाव (Intellectual Connection) चाहते हैं। इन्हें ऐसा पार्टनर पसंद आता है जो समझदार हो और इन्हें आजादी दे सके।

विवाह: इनका वैवाहिक जीवन सामान्यतः सुखमय रहता है। 21 जनवरी को जन्में व्यक्ति अपने परिवार और जीवनसाथी की बहुत परवाह करते हैं। हालांकि, कभी-कभी इनका अनुशासन प्रिय स्वभाव पार्टनर को थोड़ा परेशान कर सकता है, इसलिए इन्हें अपने व्यवहार में थोड़ी नरमी रखनी चाहिए।

ताकत व कमजोरियाँ (Strengths & Weaknesses)

ताकत (Strengths)

सकारात्मक सोच: कठिन परिस्थितियों में भी ये निराश नहीं होते।

निर्णय क्षमता: इनकी निर्णय लेने की क्षमता बहुत सटीक और त्वरित होती है।

ज्ञान: ऐसे व्यक्ति हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने के लिए तत्पर रहते हैं।

कमजोरियाँ (Weaknesses)

तानाशाही रवैया: कभी-कभी ये अपनी बात मनवाने के लिए थोड़े जिद्दी हो जाते हैं।

आलोचना न सह पाना: इन्हें अपनी आलोचना सुनना ज्यादा पसंद नहीं होता।

फिजूलखर्ची: कभी-कभी दिखावे के चक्कर में ये बजट से बाहर खर्च कर देते हैं।

21 जनवरी को जन्में व्यक्तियों के लिए शुभ तत्व (Lucky Elements)

शुभ अंक (Lucky Number): 3, 12, 21, 30।
शुभ दिन (Lucky Day): गुरुवार, शुक्रवार और मंगलवार।
शुभ रंग (Lucky Color): पीला, जामुनी और गुलाबी।
शुभ रत्न (Lucky Gemstone): पुखराज (Yellow Sapphire)।

विशेष:- कोई भी रत्न बिना कुंडली दिखाए पहनने पर नुकसान भी करता है अतः कुंडली या हाथ दिखाकर एवं उचित परामर्श लेकर ही रत्न धारण करें।

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21 जनवरी को जन्मे लोग “जीनियस” श्रेणी में आते हैं। यदि ये अपनी ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं और अपने जिद्दी स्वभाव पर थोड़ा नियंत्रण रखें, तो ये समाज में एक बहुत बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं।

जय श्री राम।

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T20 World Cup 2026: कौन जीतेगा फाइनल? ऋषिकेश पंचांग अनुसार सटीक भविष्यवाणी

T20 World Cup 2026 Prediction: ग्रह गोचर, आकाशीय स्थिति और विजेता की 100% सटीक ज्योतिषीय भविष्यवाणी

ग्रह गोचर और आकाशीय स्थिति (Rishikesh Panchang Data Analysis)

ऋषिकेश पंचांग द्वारा उपलब्ध विवरण अनुसार 7 फरवरी को सूर्य मकर, चंद्र दिन 02:23 से तुला राशि, मंगल मकर, बुध कुंभ, गुरु मिथुन, शुक्र कुंभ, शनि मीन व राहु कुंभ राशि में रहेंगे जहाँ काशी के सूर्योदय प्रातः 06:30 पर मिथुन गुरु स्पष्ट 25°15″18′ (वक्री), मीन शनि स्पष्ट 01°20″56′ और कुंभ राहु स्पष्ट 15°50″51′ रहेगा तो वहीं मकर मंगल स्पष्ट 17°35″22′, कुंभ बुध स्पष्ट 07°14″00′, कुंभ शुक्र स्पष्ट 02°09″39′ और मकर सूर्य स्पष्ट 23°49″49′ रहेगा।

फाइनल मैच 8 मार्च के दिन ग्रह स्थिति स्थिति ऋषिकेश पंचांग काशी अनुसार सूर्योदयकालीन ग्रह विवरण सूर्य कुंभ स्पष्ट 23°06″11′, चंद्र तुला राशि संपूर्ण दिन-रात्रि, कुंभ मंगल स्पष्ट 10°05″35′, कुंभ बुध स्पष्ट 24°51″26′ (वक्री), मिथुन गुरु स्पष्ट 23°31″45′ (मार्गी), मीन शुक्र स्पष्ट 08°19″20′, मीन शनि स्पष्ट 04°35″40′ और कुंभ राहु स्पष्ट 14°18″37 रहेगा।

📌 महत्वपूर्ण गोचर परिवर्तन:

गुरु 5 मार्च की रात्रि 07:02 पर मिथुन राशि में मार्गी हो रहे हैं और बुध 2 मार्च को कुंभ राशि में दिन 03:43 पर वक्री हो जाएंगे।

 


🔥 कुंभ राशि में ‘अंगारक योग’ और ‘जड़त्व योग’:

8 मार्च को कुंभ राशि में मंगल (10°05’35”) और राहु (14°18’37”) के बीच मात्र 4 डिग्री का अंतर है और साथ में वक्री बुध (24°51’26”) और सूर्य (23°06’11”) भी हैं।

प्रभाव: यह योग “अति-आक्रामकता” (Over-aggression), “बुद्धि भ्रम” (Confusion) और “विवाद” का निर्माण करता है जो टीम आवेश में खेलेगी, वह फाइनल में आत्मघाती निर्णय (Self-destructive decisions) लेगी साथ ही बुध का वक्री होना यह बताता है कि ‘रिव्यू’ (DRS) और ‘टॉस’ के निर्णय मैच पलटेंगे।

🏏 Cricket Astro Updates

टॉस, मैच और महा-भविष्यवाणी!

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✨ मीन राशि में ‘परम राजयोग’ (Venus Exalted + Saturn):

शुक्र मीन राशि में 08°19’20” पर है (शुक्र 27° तक उच्च का होता है, यह परम शक्तिशाली स्थिति है) साथ में शनि भी (04°35’40”) है, शुक्र “सौंदर्य और रणनीति” का कारक है और शनि “न्याय” का अतः यह युति 11वें या 10वें भाव वाले देश के लिए “एकतरफा जीत” (Jackpot Win) सुनिश्चित करती है।

🌟 मिथुन राशि में ‘मार्गी गुरु’ (Jupiter Direct):

5 मार्च को गुरु का 23°31’45” पर मार्गी होना दैवीय सहायता (Divine Luck) का सूचक है।

⚡ दो सबसे बड़ी घटनाएं टूर्नामेंट का रुख बदलेंगी:

  • बुध का वक्री होना (2 मार्च, कुंभ राशि): कुंभ राशि में बुध का वक्री होना और वहां पहले से मौजूद राहु और मंगल के साथ युति करना एक “विस्फोटक योग” बना रहा है।
  • गुरु का मार्गी होना (5 मार्च, मिथुन राशि): फाइनल से ठीक 3 दिन पहले देवगुरु बृहस्पति का मिथुन राशि में 23°31′ पर मार्गी (Direct) होना ‘गेम-चेंजर’ है।

🏏 टूर्नामेंट की शुरुआत (7 फरवरी):

उच्च राशि का मंगल (Exalted Mars in Capricorn): मंगल मकर राशि में 17°35′ पर अत्यंत शक्तिशाली है अतः टूर्नामेंट की शुरुआत में गेंदबाजों (Bowlers) का दबदबा रहेगा और लो-स्कोरिंग मैच एवं आक्रामक खेल देखने को मिल सकता है, छोटी टीमें बड़ी टीमों को कड़ी टक्कर देंगी।

🏆 टूर्नामेंट का मध्य और अंत (फाइनल – 8 मार्च):

कुंभ राशि में ग्रहों का जमावड़ा (Stellium in Aquarius): फाइनल के समय सूर्य, मंगल, वक्री बुध और राहु—ये चार ग्रह कुंभ (वायु तत्व) राशि में होंगे साथ ही फाइनल के दिन चंद्रमा तुला राशि (वायु तत्व) में होगा और मिथुन राशि का गुरु: गुरु भी वायु तत्व (मिथुन) में है।

वायु त्रिकोण (Grand Air Trine): फाइनल के दिन कुंभ राशि में (सूर्य, मंगल, बुध, राहु), तुला राशि में (चंद्रमा) और मिथुन राशि में (गुरु) के बीच एक शक्तिशाली ‘वायु त्रिकोण’ बन रहा है।

प्रभाव: फाइनल मैच अत्यंत रोमांचक और हाई-स्कोरिंग होगा, बल्लेबाजों का बोलबाला रहेगा और गेंद हवा में ज्यादा रहेगी विशेष पहली पारी में (Sixes/Fours)।


🌍 देशों की कुंडली का ‘लग्न’ और ‘राशि’ आधारित विश्लेषण

स्वतंत्र भारत की कुंडली (वृषभ लग्न – Taurus Ascendant) और अन्य देशों के इंटरनेट पर प्राप्त विवरण के आधार पर यह गणना की गई है:

🇮🇳 भारत (INDIA)

लग्न: वृषभ (Taurus), नाम राशि कन्या (Virgo) का प्रभाव।

8 मार्च की गणना: भारत के वृषभ लग्न के लिए, शुक्र (लग्नेश) अपनी उच्च राशि मीन में 11वें भाव (House of Gains) में बैठे है साथ ही शनि (योगकारक – 9वें और 10वें घर का स्वामी) भी 11वें भाव में शुक्र के साथ है अतः जब लग्नेश (Self) और भाग्येश (Luck) दोनों ‘लाभ भाव’ में उच्च अवस्था में मिलते हैं, तो इसे “महालक्ष्मी योग” और “अखंड साम्राज्य योग” कहते हैं, परिणामस्वरूप भारत का पक्ष 97% से 99% मजबूत रहेगा और गुरु (धन भाव में मार्गी) धन और प्रतिष्ठा दोनों दिलाएंगे, लेकिन नॉकआउट चरण में ‘वक्री बुध’ के कारण अंतिम क्षणों में निर्णय (Decision Making) में सावधानी भी विशेष रखनी होगी अन्यथा सुपर 8 की शुरुवात में ही भारी हार के कारण से थोड़ा खतरा अनुभव होगा।

🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया (AUSTRALIA)

ऑस्ट्रेलिया का लग्न तुला (Libra) मानते हुए क्योंकि ​1 जनवरी 1901 को जब सिडनी (Sydney) में ‘कॉमनवेल्थ ऑफ ऑस्ट्रेलिया’ की घोषणा आधिकारिक रूप से लागू हुई थी उस समय तुला लग्न पूर्व क्षितिज पर उदित था अतः यदि तुला लग्न मानें तो कुंभ राशि (5वां घर – बुद्धि) में मंगल+राहु+वक्री बुध का “विस्फोट” हो रहा है, इसका अर्थ है “गलत रणनीति”। ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज में अपनी ही बनाई योजना में फंस सकता है, शुक्र (लग्नेश) छठे घर (शत्रु भाव) में है, यह संघर्ष दिखाता है, लेकिन जीत के लिए लग्नेश का केंद्र या त्रिकोण में होना आवश्यक था।

परिणाम: ग्रुप स्टेज से बाहर होंगे। मंगल-राहु की युति अंतिम 4 ओवरों में इनके गेंदबाजों की दिशा भ्रमित (Lose Line & Length) कर सकती है।

🇵🇰 पाकिस्तान (PAKISTAN)

पाकिस्तान की कुंडली मेष (Aries) लग्न की है और मेष लग्न के लिए, उनका स्वामी मंगल (10°), राहु (14°) के मुख में फंसा हुआ है (कष्ट में है)। जिस कारण से इसे “पाप-कर्तरी” दोष भी लग रहा है।

परिणाम: टीम का प्रदर्शन सामान्य या निराशाजनक रहेगा और आंतरिक कलह एवं खराब कप्तानी के कारण आलोचना झेलते हुए ग्रुप स्टेज पार करेंगे लेकिन सफर सुपर 8 में जल्दी खत्म हो जाएगा।

🏴󠁧󠁢󠁥󠁮󠁧󠁿 इंग्लैंड (ENGLAND) & 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका (SOUTH AFRICA)

इंग्लैंड का यदि कुंभ लग्न माना जाए तो उनकी अपनी ही राशि (कुंभ) में सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध का “ग्रहण” लगा है। यह उनके प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने (Injury) का संकेत है, सेमीफाइनल तक पहुंचने की प्रबल दावेदार, लेकिन सेमीफाइनल में ग्रह कमजोर होने से सफर यहीं खत्म होता लगता है विशेष खतरा भारत से रहेगा।

दक्षिण अफ्रीका का यदि मीन लग्न माना जाए तो मीन राशि के शनि और शुक्र उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने কুলिय प्रेरित करेंगे, और सुपर 8 तक भारत जैसी टीम को कड़ी चुनौती देने में सफल रहेंगे, लेकिन कुंभ राशि का ‘पाप प्रभाव’ उनके 12वें भाव (व्यय/हानि) को सक्रिय कर रहा है अतः अहम मौके पर सेमीफाइनल मैच ‘गंवा’ देंगे (Choke)।

🇳🇿 न्यूजीलैंड (NEW ZEALAND)

मीन राशि से शनि का गोचर और लग्नेश गुरु (Jupiter) 5 मार्च को मिथुन राशि (चौथे भाव) में मार्गी होना यह घरेलू सुख और टीम की एकता के लिए अच्छा है, मीन राशि (मीन) में उच्च का शुक्र (Exalted Venus) और शनि विराजमान होने व शुक्र के “मालव्य महापुरुष योग” बनाने से न्यूजीलैंड को टूर्नामेंट में सबसे बेहतरीन “फिल्डिंग” और “अनुशासित खेल” (Disclipined Cricket) वाली टीम बनाएगा लेकिन 12वें भाव (कुंभ राशि) में मंगल, राहु, सूर्य और वक्री बुध का “विस्फोटक योग” बन रहा है 12वां भाव “हानि और व्यय” का है।

परिणाम: न्यूजीलैंड टूर्नामेंट में बहुत ही शानदार और तकनीकी खेल दिखाएगा (Top 4 contender) लेकिन नॉकआउट मैच फाइनल में, विशेषकर पहली पारी अंतिम ओवरों में, 12वें भाव का राहु उनके हाथ से जीता हुआ मैच छीन लेगा, जिस कारण से उनकी पारी लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ सकती है।

🇱🇰 श्रीलंका (SRI LANKA)

श्रीलंका का पारंपरिक लग्न कुंभ (Aquarius) माना जाता है और कुंभ लग्न होने के कारण, 8 मार्च को उनकी ही राशि (Lagna) में चार बड़े ग्रह—सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध बैठे हैं और लग्न में मंगल (10°05′) और राहु (14°18′) की युति मस्तिष्क को अस्थिर करती है।

वक्री बुध का प्रभाव: लग्नेश शनि दूसरे भाव (मीन) में है, लेकिन बुद्धि का कारक बुध लग्न में वक्री है।

परिणाम: श्रीलंका की टीम “आत्मघाती क्रिकेट” (Self-Destructive Cricket) खेलेगी और किसी बड़े मैच में 200+ रन बना सकती हैं तो किसी मैच में 100 के अंदर आउट भी हो सकती हैं, खिलाड़ियों के बीच तालमेल की कुछ कमी मुख्य समय पर देखने को मिल सकती है और वक्री बुध के कारण कप्तान मैदान पर गलत फील्ड प्लेसमेंट कर सकते है जिस कारण से श्रीलंका कुछ बड़े उलटफेर कर सकती है, लेकिन मंगल-राहु की युति उन्हें टूर्नामेंट के सुपर-8 से ही बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

🏏 Cricket Astro Updates

टॉस, मैच और महा-भविष्यवाणी!

मैच का रुख पलटने वाले ग्रहों के अद्भुत खेल और 100% सटीक ज्योतिषीय भविष्यवाणियों की लाइव अपडेट्स के लिए Astrology Sutras के VIP WhatsApp ग्रुप से आज ही जुड़ें।

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🇧🇩 बांग्लादेश (BANGLADESH)

बांग्लादेश का धनु (Sagittarius) प्रभावी माना जाता है। कुंभ राशि (तीसरे घर – पराक्रम/साहस) में मंगल और राहु का होना “अत्यधिक साहस” देता है और लग्नेश गुरु 7वें भाव (विपक्ष के घर) में है और मार्गी है, तीसरे भाव का राहु और मंगल बांग्लादेश को “जायंट किलर” (Giant Killer) बना सकता है और बांग्लादेश द्वारा किसी एक बड़ी टीम (संभवतः पाकिस्तान या इंग्लैंड) का खेल बिगाड़ने की संभावना दिखती है लेकिन, लग्नेश गुरु का 7वें भाव (सप्तम) में होना यह दर्शाता है कि विपक्षी टीम हमेशा उन पर हावी रहेगी, साथ ही मीन राशि (चौथा भाव) में शनि-शुक्र का होना उनके देश में आंतरिक दबाव (Fans Pressure) को दर्शाता है, लेकिन बांग्लादेश वर्ल्डकप खेले संभावना थोड़ी कम ही दिखती है।

परिणाम: बांग्लादेश का प्रदर्शन सामान्य से अच्छा रहेगा, और वह आक्रामक खेल खेलने की कोशिश करेंगे, साथ ही “नागिन डांस” जैसे विवाद (मंगल-राहु प्रभाव) फिर हो सकते हैं। लेकिन बांग्लादेश सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर रहेगी, लेकिन यह भी है कि जिस ग्रुप में होंगे, वहां का समीकरण (Points Table) बिगाड़ देंगे।

👑 कप्तानों पर विशेष दृष्टि (Rishikesh Panchang अनुसार)

  • सूर्यकुमार यादव (भारत कप्तान): उनकी कुंडली में गुरु का प्रभाव है। 5 मार्च को गुरु का मार्गी होना उनके “निर्णय लेने की क्षमता” को अभेद्य (Unbeatable) बना देगा।
  • मिचेल मार्श/अन्य कप्तान: वक्री बुध और राहु का कुंभ में होना विपक्षी कप्तानों की बुद्धि को “स्थिर” नहीं रहने देगा, जिस कारण से वह टॉस जीतकर गलत फैसला ले सकते हैं।

🏆 भविष्यवाणी (Final Prediction)

ऋषिकेश पंचांग के सूर्योदयकालीन स्पष्ट ग्रहों की गहन गणना यह स्पष्ट करती है कि 8 मार्च 2026 को “सितारे” पूरी तरह से भारत के पक्ष में हैं।

निर्णायक तर्क:
भारत (वृषभ लग्न) के लिए लग्नेश शुक्र का 11वें भाव में उच्च होना किसी भी अन्य देश के योग से 100 गुना अधिक शक्तिशाली है।

विपक्षी (न्यूज़ीलैंड/इंग्लैंड):
कुंभ राशि में बने ‘मंगल-राहु’ के विध्वंसक योग के कारण मानसिक दबाव में टूट सकते हैं।

🏆 विजेता:

सभी नियमों और सूक्ष्म गणनाओं के अनुसार, T20 विश्व कप 2026 की ट्रॉफी “भारत (INDIA)” द्वारा उठाने की प्रबल संभावना बनती है।

(नोट: फाइनल मैच में भारत टॉस हार सकता है, लेकिन मैच निश्चित रूप से जीतेगा।)

आगे हरि इच्छा बलबान🙏🏻

⚠️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): ज्योतिष संभावनाओं पर आधारित होती है अतः क्रिकेट अनिश्चिताओं का खेल है अतः इस लेख को आधार मानकर शेयर, जुए, सट्टे आदि में पैसे न निवेश करें, यदि आप ऐसा करते हैं और आपको नुकसान होता है, तो इस परिस्थिति में आप स्वम् जिम्मेदार होंगे, इसमें वेबसाइट Astrology Sutras, और ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी की कोई जिम्मेदारी या जबाबदेही नही रहेगी। जय श्री राम।

❓ T20 वर्ल्ड कप 2026 ज्योतिषीय भविष्यवाणी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. Q1: ज्योतिषीय गणना के अनुसार T20 विश्व कप 2026 कौन जीतेगा?

    ऋषिकेश पंचांग की सूर्योदयकालीन ग्रह स्थिति और वृषभ लग्न (भारत) में बन रहे “महालक्ष्मी योग” के अनुसार, भारत (INDIA) के यह ट्रॉफी जीतने की प्रबल संभावना है।

    Q2: फाइनल मैच (8 मार्च 2026) के दिन ग्रहों की स्थिति कैसी रहेगी?

    उस दिन सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध कुंभ राशि में होंगे। साथ ही चंद्रमा तुला और गुरु मिथुन राशि में रहकर एक शक्तिशाली “वायु त्रिकोण” बनाएंगे, जिससे मैच अत्यधिक हाई-स्कोरिंग और रोमांचक होगा।

    Q3: बुध के वक्री होने का मैच पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

    2 मार्च को कुंभ राशि में बुध का वक्री होना यह दर्शाता है कि कप्तानों के टॉस और DRS (रिव्यू) के निर्णय मैच का रुख पूरी तरह से पलट सकते हैं।

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विपरीत राजयोग: धनवान व राजा के समान सुख देने वाला राजयोग

ज्योतिष में बहुत से योग पर चर्चा करी गयी है उनमें से एक विपरीत राजयोग भी है जिसके बारे में अधिकतर लोग जानते हैं जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि विपरीत राजयोग अर्थात विपरीत भी है और राजयोग भी है इस योग में जन्मा व्यक्ति अनेक विपरीत परिस्थितियों से होते हुए बड़ी सफलता प्राप्त करते हैं व राजा के समान सभी सुखों का अनुभव करते हैं तो चलिए जानते हैं विपरीत राजयोग कब बनता है और उसके कुछ महत्वपूर्ण नियम क्या है?

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विपरीत राज योग कुंडली के विपरीत भावों से बनते हैं कुंडली के ३, ६, ८ व १२ भावों को विपरीत भाव कहा गया है जब इन भावों के स्वामी एक-दूसरे के भाव में बैठें तो विपरीत राजयोग बनता है लेकिन इस राजयोग के कुछ नियम हैं जिनमे ही यह योग अपना पूर्ण फल दिखाता है विपरीत राज योग तीन प्रकार हर्ष, सरल और विमल होते हैं तो चलिए जानते हैं उन नियमों के बारे में:-

१. षष्ठ भाव का मालिक जब अष्टम या द्वादश भाव में बैठे हो और पाप/अशुभ ग्रह के साथ युति किए हों या षष्ठ भाव के मालिक को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो हर्ष विपरीत राजयोग होता है।

२. अष्टम भाव का स्वामी जब षष्ठ और द्वादश भाव में बैठा हो और पाप/अशुभ ग्रह के साथ युति किए हों या षष्ठ भाव के मालिक को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो सरल विपरीत राजयोग होता है।

३. द्वादश भाव का स्वामी जब षष्ठ या अष्टम भाव में बैठें हों और पाप/अशुभ ग्रह के साथ युति किए हों या षष्ठ भाव के मालिक को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो यह विमल विपरीत राजयोग बनाता है।

विपरीत राजयोग कुछ महत्वपूर्ण नियम:-

 

विपरीत राजयोग के कुछ महत्वपूर्ण नियम
विपरीत राजयोग के कुछ महत्वपूर्ण नियम

 

१. यदि ३, ६, ८, १२ स्थान के मालिक अशुभ स्थान में शुभ ग्रह के साथ बैठे या शुभ ग्रह की दृष्टि उन पर हो तो विपरीत राजयोग नही बनता।

२. यदि विपरीत राजयोग बन रहा हो लेकिन लग्नेश कमजोर हो और लग्नेश की लग्न पर दृष्टि न हो तो विपरीत राजयोग के शुभ फल नही होते है।

३. ३, ६ या ८ भाव में कोई ग्रह नीच राशि में बैठे हों और लग्नेश लग्न को देखते हैं तो विपरीत राजयोग बनता है।

४. ६, ८ या १२ भावों के स्वामी नीच राशि में बैठे हों या शत्रु राशि में बैठे हों या अस्त हों और लग्न को देखते हों तो विपरीत राजयोग बनता है।

५. ६, ८ व १२ भाव के मालिक यदि अपनी नीच राशि में बैठकर लग्न को देखते हों साथ ही लग्नेश लग्न को देखते हों तो विपरीत राजयोग बनता है।

विपरीत राजयोग में जन्मा व्यक्ति अनेक प्रकार के संघर्षों व विपरीत परिस्थितियों को पार करते हैं धनवान व राजा के समान सुख प्राप्त करता है साथ ही समाज में अच्छी मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करता है, चलिए इस योग को कुछ उदाहरण कुंडली से समझते हैं।

 

डॉ० राजेन्द्र प्रसाद जी लग्न कुंडली
डॉ० राजेन्द्र प्रसाद जी लग्न कुंडली

 

डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद जी की कुंडली में अष्टम भाव के मालिक ग्रह षष्ठ स्थान में शनि के साथ बैठकर सरल विपरीत राजयोग बना रहा है और सूर्य की दृष्टि भी चंद्रमा पर है एवं लग्नेश गुरु की दृष्टि लग्न पर है जो कि पूर्ण विपरीत राजयोग बना रहे है सरल विपरीत राजयोग होने के कारण से डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद बहुत सरल हिर्दय के व्यक्ति रहे और 2 बार राष्ट्रपति बने।

 

क्वीन विक्टोरिया लग्न कुंडली
क्वीन विक्टोरिया लग्न कुंडली

 

Queen Victoria जी की कुंडली में अष्टमेश गुरु भाग्य स्थान पर नीच राशि में बैठकर लग्न को देख रहे हैं (महत्वपूर्ण नियम संख्या ४ देखें) और विपरीत राजयोग बना रहे हैं जिसके फलस्वरूप विक्टोरिया जी १३ वर्ष की उम्र में महारानी बनी और ५६ वर्षों तक शासन किया।

 

चलिए एक और कुंडली से विपरीत राजयोग को समझने का प्रयास करते हैं:-

 

इंदिरा गाँधी लग्न कुंडली
इंदिरा गाँधी लग्न कुंडली

 

इस कुंडली में अष्टमेश शनि लग्न में शत्रु राशि में बैठे हैं और षष्ठ स्थान के मालिक गुरु लाभ स्थान पर शत्रु राशि में हैं साथ ही चंद्रमा लग्नेश बनकर लग्न को देख रहे हैं जो कि विपरीत राजयोग को दर्शाता है यह इंदिरा गांधी जी की कुंडली है परिचय की आवश्यकता नही, समझाने का मतलब यह है कि यदि लग्नेश बली हो तभी विपरीत राजयोग का पूर्ण फल मिलता है।

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly
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Email:- astrologerpoosharkjetly@astrologysutras.com, pooshark@astrologysutras.com, info@astrologysutras.com
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वार्षिक राशिफल 2023: जानिए मिथुन लग्न व मिथुन राशि वालों के लिए 2023 कैसा रहेगा–Astrology Sutras

वार्षिक राशिफल 2023 मिथुन लग्न व मिथुन राशि
वार्षिक राशिफल 2023 मिथुन लग्न व मिथुन राशि

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन लग्न व मिथुन राशि वालों के लिए वर्ष 2023 सामान्य रूप से मिश्रित फल देने वाला रहेगा वर्ष के आरंभ में गुरु का कर्म स्थान और शनि का अष्टम स्थान से गोचर रहेगा जिस कारण से दामपत्य जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव बने रहेंगे व कार्यक्षेत्र में भी किसी प्रकार का तनाव रह सकता है लेकिन शनि और मंगल जनवरी के मध्य भाग में शुभ होकर कुछ राहत देने वाले रहेंगे 30 दिसंबर दाम्पत्य जीवन में सुधार होना धीरे-धीरे शुरू होने के योग रहेंगे, 19 फरवरी 2023 को शनि गोचर बदलकर भाग्य स्थान में आ जाएंगे जो कि शुभ रहेंगे, 22 फरवरी से 15 अप्रैल का समय विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए शुभ रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं और लंबे समय से विवाह हेतु प्रयासरत है उनके विवाह हेतु कहीं बात पक्की होने के योग रहेंगे, 19 अप्रैल को गुरु गोचर बदलकर मेष राशि में आ जाएंगे जहाँ राहु पहले से ही बैठे हुए हैं और शनि की भी दृष्टि गुरु और राहु पर लाभ स्थान में रहने के कारण से आय को लेकर मन में कुछ चिंता सी अनुभव हो सकती है साथ ही बड़े भाई-बहन से विचारों में भिन्नता या उनके स्वास्थ्य में कुछ उतार-चढ़ाव रह सकता है।

 

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ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार 29 जनवरी से 26 फरवरी, 8 मई से 29 जून, 1 नवंबर से 28 नवंबर और 15 दिसंबर से 31 दिसंबर का समय कुछ मिले-जुले फल देने वाला रहेगा यदि संभव हो तो इस समय में किसी भी शुभ कार्य हेतु या नौकरी परिवर्तन या कोई बड़ा निर्णय लेने से बचें तो अधिक शुभ रहेगा 8 मई से 29 जून के मध्य किसी करीबी मित्र से या कार्यक्षेत्र में किसी मित्र द्वारा धोखा मिलने के योग रहेंगे, 30 अक्टूबर तक केतु का पंचम स्थान से गोचर समय-समय पर कुछ चिंता देने वाला रहेगा लेकिन अचानक से किसी बड़ी सफलता के प्राप्त होने के योग रहेंगे, अप्रैल से अक्टूबर 2022 के मध्य संतान से विचारों में भिन्नता या संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या रह सकती है साथ ही प्रेमियों के मध्य भी कुछ तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है।

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन लग्न व मिथुन राशि वाले जो व्यक्ति लंबे समय से किसी प्रॉपर्टी को खरीदने का विचार कर रहे हैं लेकिन किसी न किसी कारण से नही ले पा रहे हैं उनके लिए प्रॉपर्टी खरीदने के अच्छे योग रहेंगे, अक्टूबर 2023 में राहु और केतु का गोचर परिवर्तन शुभ रहेगा कर्म स्थान से राहु का गोचर कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता के योग बनाएगा तो वहीं चतुर्थ स्थान से केतु का गोचर यात्रा के योग को दर्शाता है, माता जी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के योग बनेंगे, नवदम्पत्तियों को वर्ष के मध्य भाग के बाद संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, जो लोग प्रेम विवाह के लिए प्रयास कर रहे हैं वर्ष के मध्य भाग के बाद उनके विवाह पक्का होने के योग रहेंगे, 22 फरवरी से 15 अप्रैल, 31 मार्च से 6 जून और 19 अक्टूबर से 5 नवंबर के समय विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए बहुत शुभ रहेगा, जो लोग दादा-दादी या नाना-नानी बनने की प्रतीक्षा कर रहे हैं उन्हें इस वर्ष शुभ समाचार प्राप्त होगा, वर्ष के मध्य व अंतिम भाग में घर में किसी शुभ कार्य के होने के योग रहेंगे, 31 मार्च से 6 जून और 8 से 24 जुलाई के मध्य बड़ा लाभ मिलने के योग रहेंगे, जो लोग नौकरी परिवर्तन का प्लान कर रहे हैं या किसी नए कारोबार का आरंभ करना चाहते हैं उनके लिए यह बहुत शुभ समय रहेगा, 27 जुलाई के बाद का समय विवाहित व्यक्तियों के लिए अच्छा रहेगा व पुराने चले आ रहे तनाव खत्म होंगे, 2 जनवरी से 13 जनवरी, 28 फरवरी से 26 मार्च और 24 अप्रैल से 15 मई के समय बुध अस्त रहेंगे अतः इस समय में जीवन में कुछ उलझने अनुभव हो सकती हैं वर्ष पर्यंत गणेश संकटनाशन स्त्रोत्र का पाठ करना बेहद शुभ रहेगा।

आगे हरि इच्छा प्रवल🙏

जय श्री राम।
Astrologer Pooshark Jetly
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Mobile:- 9919367470, 7007245896
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Yearly Horoscope 2023: Know how 2023 will be for Gemini Ascendant and Gemini people

Yearly Horoscope Of Gemini Ascendant & Gemini People
Yearly Horoscope Of Gemini Ascendant & Gemini People

 

According to astrologer Pooshark Jetly ji, the year 2023 will give generally mixed results for the Gemini Ascendant and Gemini people, in the beginning of the year, Jupiter will transit through the work place and Saturn will transit through the eighth house, due to which there will be some ups and downs in married life and there can be some kind of tension in the workplace too, but Saturn and Mars will be auspicious in the middle of January and will give some relief. Improvement in married life will start gradually from 30th December, Shani transit will change on 19 February 2023 and will come to the place of fortune which will be auspicious, Time from February 22 to April 15 will be auspicious for students and lovers, people who have become marriageable and have been trying for marriage for a long time, there will be chances of getting something confirmed for their marriage, on April 19, Jupiter transit will change to Aries, where Rahu is already sitting And due to Saturn is giving his aspect on Guru and Rahu in the Income house, there may be some worry in the mind regarding income, as well as there may be difference of views with elder brother and sister or some ups and downs in their health.

 

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According to astrologer Pooshark Jetly, 29 January to 26 February, 8 May to 29 June, 1 November to 28 November and 15 December to 31 December will give mixed results. It will be more auspicious if you avoid taking any major decision or job change. Between May 8 and June 29, there will be chances of being cheated by a close friend or a friend in the workplace, till October 30, the transit of Ketu through the fifth house will give some worries time to time, but suddenly there will be some big success. Between April and October 2023, there may be difference of opinion with the child or there may be some problem in the health of the child, as well as some stressful situations may arise between the lovers. People with Gemini Ascendant and Gemini Sign who have been thinking of buying a property for a long time but are not able to do so due to one or the other reason, there will be good chances of buying a property, the transit of Rahu and Ketu in October 2023 is auspicious. The transit of Rahu will be from the place of work, will create the sum of great success in the field of work and the transit of Ketu from the fourth place shows the yoga of travel, Take care of the health of the mother, those who have become marriageable, there will create the yogas for their marriage, newly married couples will get good news related to children after middle of the year. Those who are trying for love marriage, after the middle part of the year, their marriage will be confirmed. February 22 to April 15, March 31 to June 6 and October 19 to November 5 will be very auspicious for students and lovers, those who are waiting to become grandparents will get good news this year In the middle and last part of the year, there will be chances of some auspicious work in the house, there will be chances of getting big benefits between March 31 to June 6 and July 8 to 24, those who are planning to change jobs or start a new business. This will be a very auspicious time for them. The time after July 27 will be good for married people and old tension will end, Mercury will be retrograde from January 2 to January 13, February 28 to March 26 and April 24 to May 15, so there will be some problems in life during this time. You may experience entanglement, it will be very auspicious to recite Ganesh Sankatnashan Stotra throughout the year.

Hail Of Lord Rama.

Astrologer Pooshark Jetly
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