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विवाह मुहूर्त 2026: ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी से जानें शुभ मुहूर्त व शास्त्र सम्मत नियम

विवाह मुहूर्त 2026: केवल 50 शुभ लग्न! खरमास-अधिमास का संकट और ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी की गणना

॥ श्री गणेशाय नमः ॥
॥ ॐ नमः शिवाय ॥

विवाह मुहूर्त 2026 (Vivah Muhurat 2026 List): वर्ष 2026 (विक्रम संवत 2082-83) उन परिवारों के लिए थोड़ी चिंता का विषय बन गया है जिनके घर शहनाइयां बजने वाली हैं। अक्सर लोग मुझसे यह प्रश्न कर रहे हैं कि “गुरु जी, क्या वास्तव में इस साल विवाह के शुभ दिन बहुत कम हैं?”

यह बात शत-प्रतिशत सत्य है। जहाँ सामान्य वर्षों में विवाह के 80-90 मुहूर्त होते हैं, वहीं 2026 में ग्रहों की विचित्र चाल—विशेषकर गुरु-शुक्र के अस्त होने और अधिमास (पुरुषोत्तम मास) के कारण—केवल 50 शुद्ध विवाह मुहूर्त ही निकल रहे हैं। ‘मुहूर्त चिंतामणि’ स्पष्ट निर्देश देता है:

“गुरौ भार्गवे वा अस्तं गते, बाल्ये वार्धके वा… न कुर्यात् शुभकर्म तत्।”
अर्थात्: जब गुरु या शुक्र अस्त हों या बाल्य अवस्था में हों, तो विवाह आदि मंगल कार्य वर्जित हैं।

🪐 2026 में विवाह मुहूर्त कम क्यों हैं? (Planetary Analysis)

इस वर्ष पंचांग में तीन बड़ी खगोलीय घटनाएं घट रही हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना दांपत्य जीवन के लिए भारी पड़ सकता है:

  • बाल्यकाल दोष (जनवरी): नववर्ष की शुरुआत में शुक्र देव उदित तो हो रहे हैं, किंतु शक्तिहीन (बाल्यावस्था) होने के कारण जनवरी में विवाह वर्जित रहेगा। शहनाइयाँ 3 फरवरी बाद बजेंगी।
  • अधिमास का अवरोध: 17 मई से 15 जून 2026 तक ‘पुरुषोत्तम मास’ रहेगा। शास्त्र कहते हैं यह महीना केवल ‘हरि-भजन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ है, विवाह आदि मांगलिक कार्य वर्जित हैं।
  • ग्रहों का अस्त होना: जुलाई के बाद गुरु और शुक्र के अस्त होने से चातुर्मास से पहले ही विवाह बंद हो जाएंगे।
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📅 विवाह मुहूर्त 2026 लिस्ट (शुभ तिथियां)

सभी व्यक्तियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए, मैंने ऋषिकेश काशी पंचांग के आधार पर यह मुहूर्त्त तालिका (Table) तैयार की है। इसमें त्रिबल शुद्धि का पूरा ध्यान रखा गया है:

माह (Month) शुभ विवाह तिथियां (Dates) विशेष (Remarks)
फरवरी 2026 4, 5, 6, 10, 11, 12, 13, 14, 19, 20, 21, 24, 25, 26 ✨ सर्वश्रेष्ठ माह (Most Muhurats)
मार्च 2026 4, 5, 6, 9, 10, 11, 12, 13, 14 15 से खरमास शुरू
अप्रैल 2026 20, 21 अत्यल्प मुहूर्त
मई 2026 3, 5, 6, 7, 8
(12 मई को विवाह न करें – नक्षत्र वेध)
सावधानी बरतें
जून 2026 19, 20, 21, 22, 23, 24 अधिमास के बाद
जुलाई 2026 1 से 8 जुलाई तक चातुर्मास से पहले
नवंबर 2026 20, 21, 22, 23, 24 देवोत्थान एकादशी के बाद
दिसंबर 2026 1 से 12 दिसंबर वर्ष का समापन

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🔱 सुखी दांपत्य का रहस्य: विवाह से पहले भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद लेना अनिवार्य है। 2026 में महाशिवरात्रि पर बन रहा है दुर्लभ संयोग।

जरूर पढ़ें: महाशिवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त और 4 प्रहर की पूजा विधि (सम्पूर्ण जानकारी)

🔮 सलाह: क्या करें, क्या न करें?

  • गोधूलि वेला का भ्रम: कई लोग कहते हैं कि “गोधूलि बेला में मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती”। यह पूर्णतः गलत धारणा है। ‘नारद संहिता’ के अनुसार, यदि दिन में ग्रह दोष है, तो गोधूलि में भी विवाह नहीं करना चाहिए।
  • कुंडली मिलान: चूंकि इस वर्ष मुहूर्त अत्यंत सीमित हैं, इसलिए गुण मिलान में रत्ती भर भी कोताही न बरतें। नाड़ी दोष और भकूट दोष का परिहार विद्वान ज्योतिषी से अवश्य करवा लें।

।। जय श्री राम ।।

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अंक ज्योतिष: साप्ताहिक राशिफल (1-7 फरवरी 2026): जानें, किस मूलांक वालों की एकदम से बदलेगी किस्मत

साप्ताहिक अंक राशिफल: 1 फरवरी से 7 फरवरी 2026 | Weekly Numerology Prediction

।। ॐ सूर्याय नमः ।।

यह सप्ताह (1 फरवरी – 7 फरवरी) सूर्य (1) और केतु (7) के ऊर्जा चक्र के बीच गुजरेगा। चूँकि वर्ष का अंक 1 (2026 = 10 = 1) है और सप्ताह की शुरुआत भी 1 तारीख (सूर्य) से हो रही है, इसलिए यह सप्ताह नई शुरुआत, आत्म-विश्वास और सत्ता का प्रतीक है।

जानें, आपके मूलांक के लिए यह सप्ताह क्या संदेश लेकर आया है:

📅 फरवरी का पंचांग:

इस महीने महाशिवरात्रि और बसंत पंचमी जैसे बड़े त्यौहार आ रहे हैं। क्या आपने तिथियां नोट कर लीं?

👉 यहाँ देखें: फरवरी 2026 के प्रमुख व्रत, पर्व व त्यौहार की पूरी लिस्ट


🔢 मूलांक 1 (जन्मतिथि: 1, 10, 19, 28)

(स्वामी: सूर्य)

  • सामान्य: यह सप्ताह आपके लिए ‘राजयोग’ जैसा प्रभाव लेकर आया है। सप्ताह की शुरुआत (1 तारीख) आपकी ही ऊर्जा से हो रही है। रुका हुआ आत्मविश्वास वापस लौटेगा।
  • करियर व धन: कार्यस्थल पर आपके नेतृत्व (Leadership) की प्रशंसा होगी। यदि पदोन्नति की बात चल रही थी, तो इस सप्ताह शुभ समाचार मिल सकता है। सरकारी कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी।
  • प्रेम व संबंध: जीवनसाथी के साथ अहंकार के टकराव (Ego Clash) से बचें।
  • स्वास्थ्य: आँखों और सिरदर्द की समस्या परेशान कर सकती है।

शुभ रंग: नारंगी (Orange) | शुभ दिन: रविवार

🔢 मूलांक 2 (जन्मतिथि: 2, 11, 20, 29)

(स्वामी: चन्द्रमा)

  • सामान्य: फरवरी (महीना 2) और आपका मूलांक 2—यह ‘द्विगुणी चन्द्रमा’ का प्रभाव बना रहा है। आप अत्यधिक भावुक (Emotional) रहेंगे। अंतर्ज्ञान (Intuition) बहुत प्रबल रहेगा।
  • करियर व धन: कला, संगीत या लेखन से जुड़े लोगों के लिए यह स्वर्णिम सप्ताह है। निवेश में जल्दबाजी न करें, मन डांवाडोल रह सकता है। किसी महिला मित्र के सहयोग से धन लाभ संभव है।
  • प्रेम व संबंध: पुराने गिले-शिकवे दूर होंगे। रिश्तों में मिठास आएगी।
  • स्वास्थ्य: कफ और सर्दी-जुकाम (Cold & Cough) से सावधान रहें। ठंडी चीजों से परहेज करें।

शुभ रंग: सफेद (White) | शुभ दिन: सोमवार

🔢 मूलांक 3 (जन्मतिथि: 3, 12, 21, 30)

(स्वामी: बृहस्पति)

  • सामान्य: ज्ञान और विस्तार का सप्ताह है। आपकी सलाह (Advice) दूसरों के लिए रामबाण सिद्ध होगी।
  • करियर व धन: शिक्षा, बैंकिंग और धर्म से जुड़े लोगों को विशेष सम्मान मिलेगा। रुका हुआ धन वापस आने के प्रबल योग हैं। कोई नया प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए मंगलवार (3 तारीख) सर्वश्रेष्ठ है।
  • प्रेम व संबंध: परिवार में किसी मांगलिक कार्य की योजना बनेगी। बड़ों का आशीर्वाद बना रहेगा।
  • स्वास्थ्य: लीवर या पेट से जुड़ी छोटी-मोटी दिक्कत हो सकती है। भोजन सात्विक रखें।

शुभ रंग: पीला (Yellow) | शुभ दिन: गुरुवार

🔮 पूषार्क जेतली जी से एक प्रश्न?

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🔢 मूलांक 4 (जन्मतिथि: 4, 13, 22, 31)

(स्वामी: राहु)

  • सामान्य: यह सप्ताह ‘अप्रत्याशित घटनाओं’ (Surprises) का है। जो सोचा नहीं था, वह हो सकता है। योजनाएं अचानक बदलनी पड़ सकती हैं।
  • करियर व धन: शेयर बाजार या तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों को अचानक लाभ हो सकता है। कार्यस्थल पर षड्यंत्र से बचें; अपनी गुप्त बातें किसी से साझा न करें।
  • प्रेम व संबंध: गलतफहमी के कारण रिश्तों में खटास आ सकती है। संवाद स्पष्ट रखें।
  • स्वास्थ्य: मानसिक तनाव और अनिद्रा (Insomnia) की समस्या हो सकती है। ध्यान (Meditation) अवश्य करें।

शुभ रंग: धुएं जैसा (Smoky Grey) | शुभ दिन: शनिवार

🔢 मूलांक 5 (जन्मतिथि: 5, 14, 23)

(स्वामी: बुध)

  • सामान्य: यह सप्ताह ‘संचार और यात्रा’ (Communication & Travel) का है। आपकी वाणी में गजब का आकर्षण होगा।
  • करियर व धन: बिज़नेस में नई डील फाइनल हो सकती है। मीडिया और मार्केटिंग से जुड़े लोगों के लिए समय शानदार है। धन का प्रवाह अच्छा रहेगा, लेकिन खर्च भी बढ़ेंगे।
  • प्रेम व संबंध: नए मित्र बनेंगे। प्रेम संबंधों में चंचलता बनी रहेगी।
  • स्वास्थ्य: नसों (Nerves) में खिंचाव या त्वचा संबंधी समस्या हो सकती है।

शुभ रंग: हरा (Green) | शुभ दिन: बुधवार

🔢 मूलांक 6 (जन्मतिथि: 6, 15, 24)

(स्वामी: शुक्र)

  • सामान्य: यह सप्ताह ‘विलासिता और सुख’ (Luxury) का है। आप खुद को सजाने-संवारने और घर की साज-सज्जा पर ध्यान देंगे।
  • करियर व धन: फैशन, ज्वेलरी या लग्जरी प्रोडक्ट्स के कारोबार में लाभ होगा। ऑफिस में माहौल खुशनुमा रहेगा। खर्चों पर नियंत्रण रखना जरूरी है।
  • प्रेम व संबंध: रोमांस के लिए यह सप्ताह सर्वश्रेष्ठ है। विवाह योग्य जातकों को अच्छा प्रस्ताव मिल सकता है।
  • स्वास्थ्य: शुगर (Diabetes) के मरीज अपना खास ख्याल रखें।

शुभ रंग: चमकीला सफेद/गुलाबी | शुभ दिन: शुक्रवार

🔱 शिव भक्तों के लिए विशेष:

आगामी महाशिवरात्रि पर ग्रहों का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यदि आप राहु-केतु या शनि दोष से परेशान हैं, तो यह आर्टिकल जरूर पढ़ें:

👉 महाशिवरात्रि 2026: शुभ मुहूर्त और 4 प्रहर की पूजा विधि (सम्पूर्ण जानकारी)

🔢 मूलांक 7 (जन्मतिथि: 7, 16, 25)

(स्वामी: केतु)

  • सामान्य: सप्ताह का अंत (7 तारीख) आपके अंक से होगा। यह सप्ताह ‘आत्म-मंथन’ (Introspection) का है। आप भीड़भाड़ से दूर एकांत पसंद करेंगे।
  • करियर व धन: शोध (Research) और ओकल्ट (Occult) से जुड़े कार्यों में सफलता मिलेगी। नौकरी में स्थान परिवर्तन या यात्रा का योग बन रहा है।
  • प्रेम व संबंध: आप अपनी दुनिया में खोए रहेंगे, जिससे पार्टनर को उपेक्षा महसूस हो सकती है।
  • स्वास्थ्य: पैरों में दर्द या जोड़ों की समस्या परेशान कर सकती है।

शुभ रंग: चितकबरा (Variegated) | शुभ दिन: रविवार

🔢 मूलांक 8 (जन्मतिथि: 8, 17, 26)

(स्वामी: शनि)

  • सामान्य: यह सप्ताह ‘कर्म और न्याय’ का है। मेहनत ज्यादा होगी, लेकिन उसका फल भी ठोस मिलेगा। शॉर्टकट अपनाने से बचें।
  • करियर व धन: प्रॉपर्टी या लोहे से जुड़े व्यापार में लाभ होगा। कोर्ट-कचहरी के मामलों में निर्णय आपके पक्ष में आ सकता है। आर्थिक स्थिति स्थिर रहेगी।
  • प्रेम व संबंध: रिश्तों में गंभीरता रहेगी। पुराने, परिपक्व रिश्ते मजबूत होंगे।
  • स्वास्थ्य: वात जनित रोग (गैस, गठिया) उभर सकते हैं।

शुभ रंग: नीला/काला | शुभ दिन: शनिवार

🔢 मूलांक 9 (जन्मतिथि: 9, 18, 27)

(स्वामी: मंगल)

  • सामान्य: ऊर्जा का स्तर बहुत ऊंचा रहेगा। आप हर काम को फटाफट निपटाना चाहेंगे। क्रोध पर काबू रखना इस सप्ताह की सबसे बड़ी चुनौती है।
  • करियर व धन: पुलिस, सेना या खेल जगत से जुड़े लोगों के लिए समय अनुकूल है। जमीन-जायदाद के सौदे से लाभ हो सकता है।
  • प्रेम व संबंध: आवेश में आकर पार्टनर को कुछ कड़वा न कहें। भाई-बहनों से सहयोग मिलेगा।
  • स्वास्थ्य: रक्त विकार (Blood issues) या चोट-चपेट लगने का भय है। वाहन सावधानी से चलाएं।

शुभ रंग: लाल (Red) | शुभ दिन: मंगलवार

📊 साप्ताहिक लकी मीटर (Quick View)

सभी मूलांक का शुभ रंग और दिन।

मूलांक (Root No) शुभ रंग (Lucky Color) शुभ दिन (Lucky Day)
1 🟠 नारंगी (Orange) रविवार
2 ⚪ सफेद (White) सोमवार
3 🟡 पीला (Yellow) गुरुवार
4 🌫️ स्लेटी (Smoky Grey) शनिवार
5 🟢 हरा (Green) बुधवार
6 🌸 गुलाबी/सफेद शुक्रवार
7 🦓 चितकबरा (Variegated) रविवार
8 🔵 नीला/काला शनिवार
9 🔴 लाल (Red) मंगलवार

✨ उपाय सभी के लिए:

इस सप्ताह सूर्य देव का प्रभाव प्रबल है। प्रतिदिन सुबह तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएं और “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का 11 बार जाप करें। इससे करियर में आ रही बाधाएं दूर होंगी।

।। शुभम भवतु ।।

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पौराणिक कथाएं

सुंदरकांड का नाम सुंदर क्यों है? जानिए इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

सुंदरकांड का नाम ‘सुंदर’ क्यों है? जानिए इसका आध्यात्मिक और ज्योतिषीय महत्व

वाल्मीकि रामायण के सात कांडों में ‘सुंदरकांड’ का स्थान सबसे विशिष्ट है। हालांकि, जहां अन्य कांडों के नाम स्थान या पात्रों पर आधारित हैं, वहीं दूसरी ओर इस कांड का नाम ‘सुंदर’ रखा गया है। इसलिए, अक्सर पाठकों के मन में यह सवाल उठता है कि आखिर इसमें ऐसा क्या है जो इसे ‘सुंदर’ बनाता है?

🌸 सुंदरकांड की सुंदरता: एक श्लोक में सार

“सुन्दरे सुन्दरो रामः सुन्दरे सुन्दरी कथा।
सुन्दरे सुन्दरी सीता सुन्दरे सुन्दरं वनम्॥”

“सुन्दरे सुन्दरं काव्यं सुन्दरे सुन्दरः कपिः।
सुन्दरे सुन्दरं मन्त्रं सुन्दरे किं न सुन्दरम्॥”

अर्थात, इसका अर्थ है कि इसमें श्री राम सुंदर हैं, तथा इसकी कथा भी सुंदर है। इसके अलावा, इसमें वर्णित अशोक वाटिका (वन) सुंदर है और इसके नायक हनुमान जी (कपि) भी सुंदर हैं। वास्तव में, सुंदरकांड में ऐसा क्या है जो सुंदर नहीं है?

🚩 नाम ‘सुंदर’ होने के 5 प्रमुख कारण

  1. क्योंकि हनुमान जी का नाम ‘सुंदर’ था: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता अंजनी उन्हें बचपन में प्यार से ‘सुंदर’ पुकारती थीं। इसलिए वाल्मीकि जी ने इसका नाम सुंदरकांड रखा।
  2. शोक का अंत: यद्यपि रामायण के अन्य भागों में संघर्ष है, किंतु सुंदरकांड वह मोड़ है जहाँ श्री राम को सीता माता का पता चलता है। अतः यह ‘शोक’ के बीच ‘आशा’ की किरण है।
  3. विभीषण की शरणागति: इसी क्रम में, इसी कांड में विभीषण जैसा भक्त राम की शरण में आता है।
  4. त्रिजटा का स्वप्न: साथ ही, अशोक वाटिका में त्रिजटा एक स्वप्न देखती है जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत है।
  5. हनुमान जी की चतुराई: अंततः, जिस प्रकार हनुमान जी ने बुद्धि से लंका को जलाया, वह अद्भुत है।

🔮 ज्योतिषीय दृष्टिकोण: सुंदरकांड का महत्व

इसके अतिरिक्त, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सुंदरकांड का पाठ ग्रहों की शांति के लिए अचूक उपाय है:

  • शनि और मंगल दोष निवारण: चूंकि सुंदरकांड में हनुमान जी के बल का वर्णन है, इसलिए इसका पाठ शनि की साढ़ेसाती में लाभ देता है।
  • आत्मविश्वास में वृद्धि: यदि आपकी कुंडली में आत्मविश्वास की कमी है, तो सुंदरकांड का पाठ मानसिक शक्ति प्रदान करता है।

🔗 और पढ़ें: हनुमान जी के अंशावतार शिव का महापर्व आ रहा है। जानें महाशिवरात्रि 2026 मुहूर्त और पूजा विधि यहाँ।

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जय श्री राम। जय हनुमान।

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शुक्र प्रदोष व्रत 30 जनवरी 2026 : व्रत विधि, नियम और उपाय | धन-विवाह के लिए

शुक्र प्रदोष व्रत: सौभाग्य, सुख-समृद्धि और आरोग्य का महासंगम (पौराणिक विश्लेषण)

साम्भसदा शिवाय नमः!
शास्त्रों में काल की गणना केवल समय नहीं, बल्कि ऊर्जा का प्रवाह है। जब त्रयोदशी तिथि का दिव्य योग शुक्रवार के साथ मिलता है, तो उसे ‘शुक्र प्रदोष’ या ‘भृगुवारा प्रदोष’ कहा जाता है। शिव पुराण और स्कंद पुराण के अनुसार, प्रदोष काल वह समय है जब महादेव कैलाश पर प्रसन्न मुद्रा में तांडव नृत्य करते हैं और ब्रह्मांड की समस्त शक्तियां उनमें समाहित होती हैं।

📜 पौराणिक प्रमाण और महात्म्य

  • शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): इसमें स्पष्ट उल्लेख है कि “त्रयोदशी व्रत करे हमेशा, तन नहिं राखे रहे कलेशा।” यह व्रत जन्म-जन्मांतर के शारीरिक और मानसिक कष्टों को भस्म कर देता है।
  • स्कंद पुराण: शुक्र प्रदोष को विशेष रूप से ‘ऐश्वर्य प्रदायक’ माना गया है। शुक्र (Venus) सुख और वैभव का कारक है, अतः यह व्रत दरिद्रता नाश के लिए अचूक अस्त्र है।
प्रदोष का प्रकार विशेष फल
सोम प्रदोष मानसिक शांति और आरोग्य
भौम प्रदोष ऋण मुक्ति (Loan Removal)
शुक्र प्रदोष 💰 अपार धन, वैभव और सुखी दांपत्य

🙏 शुक्र प्रदोष व्रत की शास्त्र सम्मत विधि

  • प्रातः काल: ब्रह्म मुहूर्त्त में उठकर सफेद वस्त्र धारण करें (सफेद रंग शुक्र और शिव दोनों को प्रिय है)।
  • प्रदोष काल पूजन: सूर्यास्त से 45 मिनट पूर्व और 45 मिनट बाद का समय ‘प्रदोष काल’ है। इस समय पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से अभिषेक करें।
  • भोग: महादेव को सफेद मिठाई, खीर या मखाने का भोग लगाएं।

❓ FAQs: जिज्ञासुओं के प्रश्न और शास्त्रीय उत्तर

प्रश्न 1: शुक्र प्रदोष व्रत के दिन क्या खाना चाहिए?
उत्तर: फलाहार में सफेद वस्तुएं (मखाना, साबूदाना, दूध) श्रेष्ठ हैं। तामसिक भोजन (प्याज-लहसुन) और नमक का त्याग करें। यदि स्वास्थ्य अनुमति न दे, तो सेंधा नमक ले सकते हैं।

प्रश्न 2: क्या पीरियड्स (Periods) में व्रत कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, व्रत का संकल्प मानसिक होता है। उपवास जारी रखें, परंतु मूर्ति स्पर्श न करें। मन ही मन ‘साम्भसदा शिवाय नमः’ का जप करें।

प्रश्न 3: क्या यह व्रत विवाह के लिए भी है?
उत्तर: जी हाँ! ‘लिंग पुराण’ के अनुसार, माता पार्वती ने शिव को पाने हेतु तप किया था। शुक्र प्रदोष पर गौरी-शंकर की पूजा से सुयोग्य वर की प्राप्ति होती है।

🔮 विशेष ज्योतिषीय परामर्श

शुक्र प्रदोष के दिन ‘शिवाष्टकम्’ का पाठ आपके शुक्र ग्रह को बलवान करता है।

धन प्राप्ति उपाय: यदि जीवन में धन की कमी है या दांपत्य कलह है, तो उत्तर दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाएं और 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जप करें।

🔗 यह भी पढ़ें: शिव पूजा का सबसे बड़ा दिन नजदीक है। जानें महाशिवरात्रि 2026 मुहूर्त और 4 प्रहर की पूजा विधि यहाँ।

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नमो नीलकंठाय, नमो महादेवाय!

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29 जनवरी को जन्में व्यक्तियों का रहस्य: व्यक्तित्व, करिअर व प्रेम जीवन

29 जनवरी को जन्मे लोगों का रहस्य: व्यक्तित्व, करिअर और प्रेम जीवन

29 जनवरी को जन्म लेने वाले व्यक्ति साहस और भावुकता के एक अद्भुत मिश्रण होते हैं। 29 जनवरी को जन्मे व्यक्तियों का मूलांक (2+9=11, 1+1=2) होता है, जिसके स्वामी ‘चंद्रमा’ हैं। अंक ज्योतिष में चंद्रमा को मन, कल्पना और शीतलता का कारक माना जाता है। हालाँकि, 29 तारीख में अंक 2 (चंद्रमा) के साथ अंक 9 (मंगल) की ऊर्जा भी समाहित है। चंद्रमा की ‘कोमलता’ और मंगल की ‘अग्नि’ का यह संयोग इन्हें दूसरों से बिल्कुल अलग और प्रभावशाली बनाता है। कुंभ राशि होने के कारण इन पर शनि का भी स्थायी प्रभाव रहता है।

🌟 प्रमुख व्यक्तित्व (Key Personality)

29 जनवरी को जन्मे लोग चंद्रमा और मंगल के प्रभाव के कारण एक “शांत योद्धा” की तरह होते हैं।

  • विलक्षण आकर्षण: इनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली और आकर्षक होता है। ये लोग भीड़ में अपनी अलग पहचान बनाने में माहिर होते हैं।
  • भावुक लेकिन साहसी: अंक 2 के कारण ये दिल से बहुत कोमल होते हैं, लेकिन अंक 9 (मंगल) इन्हें कठिन समय में चट्टान की तरह दृढ़ रहने की शक्ति देता है।
  • रचनात्मक सोच: इनकी कल्पना शक्ति बहुत ऊँची होती है। ये लोग लीक से हटकर सोचने वाले (Out-of-the-box thinkers) होते हैं।
विशेष गुण रेटिंग प्रभाव
बुद्धिशक्ति 95% 🧠 विलक्षण
साहस 90% 💪 उच्च
भावुकता 85% ❤️ गहरा
नेतृत्व 80% 🚩 प्रभावी

⚠️ जरूरी जानकारी: क्या आपकी कुंडली में भी है कोई दोष? जानिए चांडाल योग क्या है? इसके निर्माण और प्रभाव की पूरी जानकारी यहाँ।

💼 करिअर और कार्यक्षेत्र (Suitable Career)

मूलांक 2 सृजन का अंक है। मंगल की ऊर्जा इन्हें प्रशासनिक क्षेत्रों में भी सफल बनाती है।

  • उपयुक्त क्षेत्र: सेना, पुलिस, प्रशासन, कला, लेखन और मनोविज्ञान (Psychology)।
  • कला और मीडिया: चंद्रमा की कृपा से ये लोग सफल अभिनेता, कवि या चित्रकार के रूप में ख्याति प्राप्त करते हैं।

💰 आर्थिक स्थिति और प्रेम जीवन

आर्थिक रूप से ये लोग भाग्यशाली माने जाते हैं। इनके पास धन का आगमन निरंतर बना रहता है। प्रेम के मामले में ये लोग बहुत ही समर्पित और “परफेक्ट पार्टनर” साबित होते हैं।

🔍 और पढ़ें: इस साल महाशिवरात्रि पर पूजा का क्या है शुभ समय? पढ़ें महाशिवरात्रि 2026 मुहूर्त और प्रामाणिक पूजा विधि

💎 शुभ तत्व (Lucky Elements)

  • शुभ अंक: 2, 9, 1, 7 और 11
  • शुभ दिन: सोमवार, मंगलवार और गुरुवार
  • शुभ रंग: सफेद, क्रीम और हल्का लाल
  • शुभ रत्न: मोती (Pearl) या मूनस्टोन

*विशेष: बिना कुंडली दिखाए रत्न धारण न करें।*


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महाशिवरात्रि 2026: 15 या 16 फरवरी, कब रखें व्रत? जानें निर्णय सिंधु के अनुसार सही मुहूर्त्त और 4 प्रहर की गुप्त पूजा विधि

महाशिवरात्रि 2026: वो ‘महारात्रि’ जब शिव साकार हुए! तिथि, निशीथ काल और 4 प्रहर की गुप्त पूजा विधि

क्या महाशिवरात्रि केवल एक त्यौहार है? नहीं, यह वो कालरात्रि है जब ‘निराकार’ परब्रह्म पहली बार ‘साकार’ शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे।

शिव महापुराण के विद्येश्वर संहिता के अनुसार, फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ही भगवान शिव ‘ज्योतिर्लिंग’ (अग्नि स्तंभ) के रूप में पृथ्वी पर अवतरित हुए थे। लेकिन हर साल भक्तों के मन में एक ही संशय रहता है—“व्रत 15 को रखें या 16 को?”

यदि आप निर्णय सिंधु और धर्मसिंधु के प्रामाणिक मत को मानकर सही मुहूर्त्त में पूजा करना चाहते हैं और शिवत्व को प्राप्त करना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए ‘संजीवनी’ है। आइए जानते हैं वर्ष 2026 में महाशिवरात्रि का शास्त्र सम्मत मुहूर्त्त और चार प्रहर की वो विधि जो दुर्लभ है।


विशेष ज्योतिषीय जानकारी: क्या आप जानते हैं कि कई बार शिव भक्ति के बाद भी जीवन में संघर्ष बना रहता है? यदि आप जानना चाहते हैं कि आपकी अच्छी महादशा में भी बुरा फल क्यों मिल रहा? तो ग्रहों की इस गुप्त गणना को एक बार जरूर पढ़ें।

महाशिवरात्रि 2026: निर्णय सिंधु क्या कहता है? (Date & Logic)

शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है—“निशीथव्यापिनी ग्राह्या”

अर्थात्, जिस तिथि में चतुर्दशी अर्द्धरात्रि (निशीथ काल) को स्पर्श करती है, उसी दिन महाशिवरात्रि का व्रत किया जाना चाहिए। वर्ष 2026 के ऋषिकेश पंचांग गणना के अनुसार:

  • चतुर्दशी तिथि आरंभ: 15 फरवरी 2026 (रविरार) शाम 04 जकर 23 मिनट पर
  • व्रत की तिथि: 15 फरवरी 2026 (रविवार)
  • क्यों? क्योंकि 15 फरवरी की रात को ही चतुर्दशी तिथि ‘निशीथ काल’ (मध्यरात्रि) में विद्यमान रहेगी।
  • विशेष संयोग: रविवार (सूर्य का दिन) और शिवरात्रि का मिलन ‘आरोग्य’ और ‘तेज’ प्रदान करने वाला है।

शुभ मुहूर्त्त जब शिव की शक्ति चरम पर होगी (Shubh Muhurat)

शिव पूजा में सबसे महत्वपूर्ण समय ‘निशीथ काल’ होता है। मान्यता है कि इसी सूक्ष्म समय में भगवान शिव ‘लिंग’ रूप में प्रकट हुए थे।

पूजा का चरण शुभ समय (Muhurat)
निशीथ काल (मध्यरात्रि) रात 12:09 बजे से 01:01 बजे तक (15 Feb की रात)
महाशिवरात्रि पारण समय 16 फरवरी, सुबह 06:58 बजे से दोपहर 03:24 बजे तक

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चार प्रहर की पूजा: शिव महापुराण का गुप्त रहस्य

अधिकतर लोग केवल एक बार पूजा करके इतिश्री कर लेते हैं। लेकिन ईशान संहिता और स्कन्द पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात को चार प्रहर (Four Quarters) में बांटा गया है। हर प्रहर में शिव के अलग-अलग स्वरूपों का अभिषेक करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।

प्रथम प्रहर (शाम 6:00 से 9:00 बजे)

  • द्रव्य: दूध (Milk) से अभिषेक। 🥛
  • फल: वंश वृद्धि और आरोग्य।
  • मंत्र: ॐ ह्रीं ईशानाय नमः।

द्वितीय प्रहर (रात 9:00 से 12:00 बजे)

  • द्रव्य: दही (Curd) से अभिषेक। 🥣
  • फल: धन और पशुधन की प्राप्ति।
  • मंत्र: ॐ ह्रीं अघोराय नमः।

तृतीय प्रहर (रात 12:00 से 3:00 बजे) – सबसे महत्वपूर्ण

  • द्रव्य: घी (Ghee) से अभिषेक। 🕯️
  • फल: मोक्ष और शत्रु नाश।
  • मंत्र: ॐ ह्रीं वामदेवाय नमः।

चतुर्थ प्रहर (सुबह 3:00 से 6:00 बजे)

  • द्रव्य: शहद (Honey) से अभिषेक। 🍯
  • फल: पाप मुक्ति और अखंड सौभाग्य।
  • मंत्र: ॐ ह्रीं सद्योजाताय नमः।

शिवलिंग पर क्या न चढ़ाएं? (शास्त्र चेतावनी)

भक्ति में कई बार हम अनजाने में गलती कर बैठते हैं। शिव पुराण के अनुसार, ये 3 चीजें शिवलिंग पर वर्जित हैं:

  1. केतकी का फूल: ब्रह्मा जी के झूठ का साक्षी होने के कारण शिव ने इसे त्याग दिया था।
  2. हल्दी: यह सौंदर्य का प्रतीक है और शिव वैरागी हैं।
  3. तुलसी दल: तुलसी जी का विवाह शालिग्राम (विष्णु) से हुआ है, अतः शिव पूजा में इनका प्रयोग वर्जित है।

निष्कर्ष: 2026 में शिव को कैसे मनाएं?

महाशिवरात्रि केवल उपवास नहीं, ‘उप-वास’ (ईश्वर के समीप निवास) है। 15 फरवरी 2026 की रात को जागकर (जागरण) यदि आप ऊपर बताई गई चार प्रहर की पूजा करते हैं, तो लिंग पुराण के अनुसार, आपके कई जन्मों के पाप भस्म हो जाते हैं।

हर हर महादेव! 🙏

⚠️ नोट (Disclaimer): यह जानकारी धार्मिक ग्रंथों और ऋषिकेश पंचांग गणना पर आधारित है। व्यक्तिगत साधना और मुहूर्त्त के लिए अपने कुल पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।
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28 जनवरी को जन्में लोगों का व्यक्तित्व, प्रेम और करिअर

28 जनवरी जन्मदिन विशेष: जब ‘सूर्य’ के तेज में मिलता है ‘शनि’ का न्याय! (28 January Birthday Personality)

क्या आपका जन्म 28 जनवरी को हुआ है? यदि हाँ, तो आप साधारण नहीं हैं। ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से 28 जनवरी एक अत्यंत प्रभावशाली और जटिल तिथि है।

अंक ज्योतिष (Numerology) के अनुसार, 28 तारीख का मूलांक 1 (2+8=10=1) होता है, जिसके स्वामी ग्रहों के राजा ‘सूर्य’ (Sun) हैं। दूसरी ओर, वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जनवरी का यह समय कुंभ राशि (Aquarius) के अंतर्गत आता है, जिसके स्वामी कर्मफल दाता ‘शनि’ (Saturn) हैं।

ज्योतिष में सूर्य ‘पिता’ है और शनि ‘पुत्र’, लेकिन दोनों में वैचारिक मतभेद है। आपके व्यक्तित्व में यही द्वंद्व (Conflict) देखने को मिलता है—आपके अंदर एक राजा (सूर्य) भी है और एक सेवक (शनि) भी। आइए, ग्रहों की इस स्थिति के आधार पर आपके जीवन का सटीक विश्लेषण करते हैं।


व्यक्तित्व विश्लेषण: ‘राजा’ जैसी सोच, ‘फकीर’ जैसी मस्ती

मेरे ज्योतिषीय अनुभव में मैंने पाया है कि 28 जनवरी को जन्मे जातक “Self-Made” (स्वनिर्मित) व्यक्तित्व के धनी होते हैं।

  • 👑 नेतृत्व क्षमता (Atma Karak Surya): मूलांक 1 होने के कारण आपकी आत्मा में ‘नेतृत्व’ (Leadership) बसा है। आप किसी के अधीन (Under) काम करना पसंद नहीं करते। आप वहां खुश रहते हैं जहाँ निर्णय लेने का अधिकार आपके पास हो।
  • ⚖️ न्यायप्रिय और गंभीर (Saturn Effect): शनि के प्रभाव के कारण आप छिछले स्वभाव के नहीं हैं। आप कम बोलते हैं, लेकिन जो बोलते हैं वह ठोस होता है। आप अन्याय के खिलाफ खड़े होने वाले व्यक्ति हैं।
  • 🔥 आंतरिक संघर्ष (Inner Conflict): सूर्य आपको ‘महत्वाकांक्षी’ बनाता है, जबकि शनि आपको ‘वैरागी’ (Detached) बनाता है। इसीलिए कभी-कभी आप बहुत ज्यादा पाने की चाह रखते हैं, और कभी सब कुछ छोड़ देने का मन करता है।

आजीविका और आर्थिक योग (Career & Financial Yogas)

कुंडली में सूर्य ‘राजसत्ता’ का कारक है और शनि ‘जनता’ का। इसलिए 28 जनवरी को जन्मे लोग उन क्षेत्रों में विशेष सफल होते हैं जहाँ अधिकार (Authority) और तकनीक (Technology) का मिलन हो।

  • सर्वोत्तम क्षेत्र: प्रशासनिक सेवा (IAS/IPS/PCS), राजनीति (Politics), उच्च तकनीकी इंजीनियरिंग, और बड़े स्टार्टअप्स (Startups)।
  • सफलता का समय: शनि ‘विलंब’ का कारक है, इसलिए आपको सफलता तुरंत नहीं मिलती। मेरे विश्लेषण के अनुसार, आपके जीवन का भाग्योदय 28वें वर्ष के बाद होता है।
  • धन योग: आप कंजूस नहीं हैं, लेकिन धन खर्च करने में विवेकपूर्ण हैं। शनि आपको धीरे-धीरे अपार संपत्ति का स्वामी बनाता है।

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प्रेम संबंध और दांपत्य जीवन (Love & Relationships)

प्रेम संबंधों में 28 जनवरी के जातकों को समझना टेढ़ी खीर है।

  • स्वाभिमान बनाम प्रेम: सूर्य के कारण आपके अंदर स्वाभिमान (Self-respect) बहुत ज्यादा है। यदि साथी ने आपकी उपेक्षा की, तो आप रिश्ता तोड़ने में देर नहीं लगाते।
  • वफादारी: शनि आपको वफादार बनाता है। आप ‘फ्लर्ट’ करने वाले नहीं, बल्कि ‘निभाने’ वाले व्यक्ति हैं। आपका प्रेम प्रदर्शनकारी (Show off) नहीं, बल्कि गहरा होता है।

आपकी ताकत और गुप्त कमजोरियां

✅ ताकत (Strengths)

  • इच्छाशक्ति (Will Power): एक बार जो ठान लिया, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं।
  • दूरदर्शिता (Visionary): आप भविष्य को आज ही देख लेने की क्षमता रखते हैं।

❌ कमजोरियां (Weaknesses)

  • अहंकार (Ego): सूर्य का नकारात्मक प्रभाव आपको कभी-कभी अहंकारी बना देता है, जिससे आपके अपने लोग दूर हो जाते हैं।
  • एकांतवास: शनि के कारण आप अक्सर दुनिया से कटकर अकेले रहना पसंद करने लगते हैं, जो डिप्रेशन का कारण बन सकता है।


भाग्यवर्धक उपाय (Remedies for Success)

एक ज्योतिषी होने के नाते, मैं आपको निम्नलिखित उपाय करने की सलाह देता हूँ, जिससे सूर्य और शनि का संतुलन बना रहे:

शुभ अंक (Lucky Numbers) 1, 10, 19, 28 (सूर्य प्रधान) और 8 (शनि प्रधान)
शुभ दिन (Lucky Days) रविवार (मान-सम्मान के लिए), शनिवार (धन के लिए)
वैदिक उपाय प्रतिदिन ‘सूर्य अर्घ्य’ दें और शनिवार को ‘पीपल के वृक्ष’ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
शुभ रत्न (Gemstone) माणिक्य (Ruby)(चेतावनी: रत्न धारण करने से पहले कुंडली का विश्लेषण अनिवार्य है।)
🌟 ज्योतिष विशेष: आने वाला महापुण्य काल

यदि आप अपने जीवन के पापों और पितृ दोषों से मुक्ति चाहते हैं, तो 29 जनवरी को आने वाली ‘जया एकादशी’ का व्रत आपके लिए अत्यंत फलदायी होगा।

जया एकादशी मुहूर्त और कथा यहाँ पढ़ें 👉


28 जनवरी को जन्में जातक “सूर्यपुत्र” के समान तेजस्वी होते हैं। यदि आप अपने ‘क्रोध’ पर नियंत्रण रखें और अपने सहकर्मियों (Subordinates) का सम्मान करें, तो आप निश्चित रूप से जीवन में उच्च पद प्राप्त करेंगे।

शुभम भवतु! (आपका कल्याण हो) 🕉️

जय श्री राम।

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Jaya Ekadashi 29 January 2026: पिशाच योनि से मुक्ति का मुहूर्त | Astrology Sutras

पिशाच योनि से मुक्ति: जया एकादशी 2026 व्रत, मुहूर्त और वह कथा जो रोंगटे खड़े कर देगी

क्या आप जानते हैं कि शास्त्रों में एक ऐसा गुप्त व्रत है जो इंसान को मृत्यु के बाद ‘भूत-प्रेत’ या ‘पिशाच’ बनने की दुर्गति से बचा सकता है? जी हां, माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी (Jaya Ekadashi) को साधारण एकादशी न समझें। इसे ‘अजा’ और ‘भीष्म एकादशी’ भी कहते हैं, लेकिन इसकी असली महिमा इसकी “पिशाच मोचनी” शक्ति में छिपी है।

जो लोग जाने-अनजाने हुए पापों के बोझ से दबे हैं या जिन्हें अपने पूर्वजों की सद्गति की चिंता है, उनके लिए यह व्रत किसी दिव्य औषधि से कम नहीं है। चलिए जानते हैं साल 2026 में जया एकादशी की सही तारीख, सटीक मुहूर्त और वह रहस्यमयी कथा जिसे सुनने मात्र से सात जन्मों के पाप कट जाते हैं।


जया एकादशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त (सटीक गणना)

वर्ष 2026 में जया एकादशी का संयोग बहुत ही खास है क्योंकि यह 29 जनवरी, गुरुवार को पड़ रही है। गुरुवार भगवान विष्णु का ही दिन है, जिससे इस व्रत का फल अनंत गुना बढ़ गया है।

विवरण समय और तारीख
व्रत की मुख्य तारीख 29 जनवरी 2026 (गुरुवार)
एकादशी तिथि प्रारंभ 28 जनवरी 2026, दोपहर 02 बजे से
एकादशी तिथि समाप्त 29 जनवरी 2026, सुबह 11:39 बजे तक
व्रत पारण (खोलने) का समय 30 जनवरी 2026, सुबह 07:10 से 09:20 बजे तक

*नोट: शास्त्रों के अनुसार व्रत हमेशा उदया तिथि में रखा जाता है, इसलिए 29 जनवरी को ही व्रत करना श्रेष्ठ है।


पिशाच योनि का श्राप: वह रोंगटे खड़े कर देने वाली कथा

पद्म पुराण में स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को यह कथा सुनाई थी। यह कहानी बताती है कि कैसे एक छोटी सी गलती इंसान को स्वर्ग से सीधे नर्क (पिशाच योनि) में ढकेल सकती है।

इंद्र का कोप और श्राप: प्राचीन काल में स्वर्ग की सभा में गंधर्व ‘माल्यवान’ और अप्सरा ‘पुष्पवती’ एक-दूसरे के मोहपाश में बंध गए। प्रेम में डूबे इन दोनों का सुर और ताल बिगड़ गया, जिसे देवराज इंद्र ने अपना अपमान समझा। क्रोधित इंद्र ने श्राप दिया— “जाओ, तुम दोनों मृत्युलोक में पिशाच बनकर तड़पो!”

हिमालय की भीषण ठंड और भूख: श्राप के कारण दोनों हिमालय की पहाड़ियों पर पिशाच रूप में जा गिरे। वहां न भोजन था, न नींद। वे भूख-प्यास और हाड़ कंपा देने वाली ठंड से तड़पते रहे। लेकिन कहते हैं न कि जिसका रक्षक ईश्वर हो, उसका कोई क्या बिगाड़ेगा!

अनजाने में हुआ चमत्कार: संयोगवश वह दिन जया एकादशी का था। अत्यधिक दुख और ठंड के कारण उन्होंने न कुछ खाया और न ही रात भर सो सके। अनजाने में ही उनका ‘निर्जला उपवास’ और ‘रात्रि जागरण’ हो गया। अगले दिन द्वादशी को उनके प्राण निकल गए और भगवान विष्णु के दूत उन्हें सीधे बैकुंठ ले गए। यह इस व्रत की शक्ति है कि अनजाने में करने पर भी इसने उन्हें पिशाच योनि से मुक्त कर दिया।


जया एकादशी व्रत की गुप्त पूजा विधि

यदि आप इस व्रत का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो 29 जनवरी को इन नियमों का पालन जरूर करें:

  • दशमी नियम: 28 जनवरी को सूर्यास्त के बाद भोजन न करें और पूरी तरह सात्विक रहें।
  • विष्णु पूजन: सुबह पीले वस्त्र पहनकर भगवान विष्णु को पीले फूल और चन्दन अर्पित करें।
  • विशेष भोग: माघ मास की महिमा के अनुसार, इस दिन भगवान को तिल और गुड़ का भोग अवश्य लगाएं। यह राहु-केतु के दोषों को भी शांत करता है।
  • रात्रि जागरण: रात को सोएं नहीं, बल्कि विष्णु सहस्रनाम या “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का जाप करें।

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क्यों करें यह व्रत?

जया एकादशी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, यह अपनी आत्मा के ‘रीबूट’ (Reboot) होने का समय है। यदि आपके घर में पितृ दोष है, अकाल मृत्यु का भय है या किसी की आत्मा भटक रही है, तो उनके निमित्त यह व्रत करने से उन्हें तुरंत पिशाच योनि से मुक्ति मिलती है।

निष्कर्ष: इस कथा को पढ़ने या सुनने मात्र से ‘अग्निष्टोम यज्ञ’ के समान पुण्य मिलता है। 29 जनवरी 2026 को इस अवसर को हाथ से न जाने दें।

जय श्री हरि! 🙏

(Disclaimer: यह जानकारी सामान्य मान्यताओं पर आधारित है। विशेष परामर्श के लिए आप अपनी कुंडली का विश्लेषण करा सकते हैं।)

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Maghi Purnima 2026: सूर्य-चंद्र का दुर्लभ महासंयोग! 1 फरवरी को करें ये काम, मिलेगा अक्षय पुण्य

माघी पूर्णिमा 2026: सूर्य और चंद्रमा का दुर्लभ महासंयोग! इस बार स्नान-दान से चमकेगी किस्मत

हिन्दू धर्म में माघ महीने की पूर्णिमा का विशेष महत्व है, लेकिन वर्ष 2026 की माघी पूर्णिमा सामान्य नहीं है। इस बार ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी बन रही है जो इस दिन को “अक्षय फलदायी” (कभी न खत्म होने वाला पुण्य) बना रही है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस वर्ष पूर्णिमा पर सूर्य और चंद्रमा का एक दुर्लभ योग बन रहा है, जो श्रद्धालुओं को आरोग्य, धन और मानसिक शांति प्रदान करेगा।


📅 कब है माघी पूर्णिमा और शुभ मुहूर्त? (Shubh Muhurat)

माघ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि का आरंभ और समापन इस प्रकार है:

  • पूर्णिमा आरंभ: 1 फरवरी, प्रातः 05:19 बजे से
  • पूर्णिमा समापन: 2 फरवरी, भोर 03:46 बजे तक
  • विशेष: उदया तिथि के अनुसार, माघी पूर्णिमा का स्नान और दान 1 फरवरी (रविवार) को मान्य होगा।

🌟 क्यों खास है इस बार की पूर्णिमा? (The Rare Sun-Moon Yoga)

अक्सर पूर्णिमा आती है और चली जाती है, लेकिन इस बार तीन महा-संयोग एक साथ बन रहे हैं:

  • सूर्य-चंद्र योग: पूर्णिमा तिथि के स्वामी ‘चंद्रमा’ हैं और रविवार का दिन ‘सूर्य देव’ का है। 1 फरवरी को रविवार होने के कारण सूर्य (आत्मा) और चंद्रमा (मन) का अद्भुत मिलन हो रहा है। यह योग मान-सम्मान और मानसिक शांति देता है।
  • पुष्य नक्षत्र का प्रभाव: इस दिन मघा नक्षत्र की जगह अत्यंत शुभ ‘पुष्य नक्षत्र’ का योग बन रहा है। पुष्य नक्षत्र में किया गया कोई भी कार्य “अक्षय” (जिसका कभी नाश न हो) माना जाता है।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग आपकी पूजा और दान का फल कई गुना बढ़ा देगा।
  • शुक्र का उदय: 1 फरवरी की शाम 06 बजकर 05 मिनट पर शुक्र पश्चिम दिशा में उदित होंगे।

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🙏 माघी पूर्णिमा पर क्या करें? (Rituals for Wealth & Health)

अगर आप जीवन में तनाव या आर्थिक तंगी महसूस कर रहे हैं, तो इस दिन ये 3 काम जरूर करें:

  • पवित्र स्नान: यदि गंगा या प्रयागराज जाना संभव न हो, तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काला तिल मिलाकर स्नान करें। इससे शनि और चंद्र दोष दूर होते हैं।
  • भगवान विष्णु की पूजा: माघी पूर्णिमा पर श्री हरि विष्णु की पूजा का विधान है। उन्हें पीले पुष्प, तुलसी दल, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। ‘विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करना इस दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  • सूर्य को अर्घ्य: चूंकि यह रविवार है, इसलिए स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल चढ़ाएं। इससे ‘आरोग्य’ (Health) और ‘तेज’ की प्राप्ति होती है।

💍 शहनाई का इंतज़ार खत्म: शुरू होंगे मांगलिक कार्य

माघी पूर्णिमा का दिन केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि खुशियों की शुरुआत का भी दिन है।

काफी समय से अस्त चल रहे शुक्र तारा (Venus) का उदय इसी दिन 1 फरवरी की शाम 06:05 बजे होगा।
शुक्र के उदय होते ही विवाह, मुंडन, और गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों पर लगी रोक हट जाएगी और शहनाइयां गूंजने लगेंगी।


निष्कर्ष (Conclusion)

इस माघी पूर्णिमा को साधारण न समझें। सूर्य और चंद्रमा का यह आशीर्वाद आपके जीवन के अंधकार को मिटाने के लिए आ रहा है। 1 फरवरी को सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और अपनी क्षमता अनुसार दान (विशेषकर तिल या गर्म कपड़े) जरूर करें।

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