जन्म कुंडली में ग्रहों से संबंधित दोषों से मुक्ति पाने का यह सर्वश्रेष्ठ अवसर है ईशान, ईश्वर, शिव, रुद्र, शंकर, महादेव आदि सभी ब्रह्म के ही पर्यायवाची शब्द हैं, ब्रह्म का विग्रह रूप शिव है तथा शिव की शक्ति शिवा है इसमें सतोगुण जगत पालन विष्णु हैं और रजोगुण सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं, श्वास वेद, सूर्य-चंद्र नेत्र, तीनों लोक और चौदह भुवन इनके वक्षस्थल हैं जिनके विशाल जटाओं में सभी नदियों, पर्वतों और तीर्थों का वास है जहाँ सृष्टि के सभी ऋषि, मुनि, योगी आदि तपस्यागत रहते हैं, वेद ब्रह्मा के विग्रह के रूप अपौरुकेय, अनादि अजन्मा, ईश्वर शिव के श्वास से विनिर्गत हुए हैं, इसलिए वेद मंत्रों के द्वारा शिव का पूजन-अर्चन, अभिषेक, जप, यज्ञ आदि कर के प्राणी इनकी कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है।
रुद्राभिषेक से लाभ:-
रुद्राभिषेक से लाभ
श्री महारुद्र जी का अभिषेक स्वम् के द्वारा करने या वेदपाठी विद्वानों द्वारा करवाने के बाद प्राणी को फिर किसी भी पूजा की आवश्यकता नही रहती है “शिव महापुराण” के अनुसार, वेदों का सारत्व “रुष्ट्राध्यायी” है, जिसमें ८ अध्यायों में १७६ मंत्र है, इन मंत्रों द्वारा त्रिगुण स्वरूपा रुद्र का पूजन अभिषेक किया जाता है, वेदों का सार है रुद्राष्टध्यायी जिसके प्रथम अध्याय के “शिव संकल्प सूत्र मंत्रों” से “श्री गणेश” का स्तवन किया गया है, द्वितीय अध्याय “पुरुष सूक्त” में “विष्णु जी” का स्तवन है, तृतीय अध्याय से “देवराज इंद्र” और चतुर्थ अध्याय में “सूर्य” का स्तवन किया जाता है, पंचम अध्याय स्वम् “रुद्र” रूप है इस अध्याय को “शतरुद्रीय” भी कहा जाता है, षष्ठ अध्याय में “शिव” के मस्तक पर विराजमान “सोम अर्थात चंद्र” का स्तवन है, इसी प्रकार सप्तम अध्याय में “मरुथ” और अष्टम अध्याय में “अग्नि देव” का स्तवन किया गया है, इसके साथ ही अन्य सभी देवी-देवताओं के स्तवन भी इन्ही पाठ मंत्रों में समाहित है।
एक-एक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए:-
मान्यता है शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर विल्वपत्र अर्पित करने से व्यापार में उन्नति होती है और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है, भाँग अर्पित करने से घर की अशांति दूर होती है, मंदार पुष्प अर्पित करने से नेत्र और हिर्दय विकार दूर रहते हैं, धतूरे के पुष्प अर्पित करने से विषैले जीवों के प्रभाव देवताओं के क्रोध से रक्षा होती है, शमी पत्र चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती, मारकेश और अशुभ ग्रह-गोचर से हानि नही होती है इसलिए “महाशिवरात्रि” व “मासशिवरात्रि” के दिन के एक-एक क्षण का सदुपयोग कर अपने मनोरथ को सिद्ध करने हेतु भूतनाथ भगवान “शिव” जी का विधिवत पूजन-अर्चन करना चाहिए।
मनोकामना पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक अत्यंत लाभकारी:-
“रुद्राभिषेक” में सृष्टि की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करने की शक्ति है अतः अपनी आवश्यकता अनुसार अलग-अलग पदार्थों से रुद्राभिषेक कर के प्राणी इच्छित फल प्राप्त कर सकता है, इनमें दुग्ध के द्वारा अभिषेक करने से उत्तम संतान की प्राप्ति, गन्ने के रस से यश कीर्ति व उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति, शहद के द्वारा अभिषेक करने से कर्ज मुक्ति, घी के द्वारा अभिषेक करने से व्यापार वृद्धि, दुग्ध और मिश्री को मिलाकर अभिषेक करने से उत्तम विद्या और प्रतियोगिता में सफलता, कुश और जल से अभिषेक से रोग मुक्ति आदि प्राप्त होती है इसके अतिरिक्त पंचामृत से अष्ट लक्ष्मी और तीर्थों का जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगोंवपर अभिषेक करने से प्राणी जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।
मनोकामनेश्वर महादेव
प्रति मास कृष्ण पक्षीय निशीथ काल व्यापिनी चतुर्दशी के दिन “मासिक शिवरात्रि व्रत” किया जाता है, समाज में फाल्गुन तथा श्रावण मास में पूजा विशेष प्रचलित है, “ईशान संहिता” के अनुसार फाल्गुन मास में ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था इसलिए उसे “महाशिवरात्रि” के नाम से जाना जाता है, जनश्रुतियों के अनुसार श्रवण मास में शिव जी ने संसार की रक्षा हेतु विषपान किया था और विष की विकलता में इधर-उधर भागने लगे तब सभी ने विष की गर्मी से राहत दिलाने हेतु शिव जी का गंगाजल से रुद्राभिषेक किया था तभी से गंगाजल द्वारा रुद्राभिषेक की परंपरा शुरू हुई थी, गंगाजल से शिव अभिषेक आराधना अत्यंत उत्तम माना गया है, गंगाजल के अतिरिक्त रत्नोंदक, इच्छु रस (गन्ने का रस), दुग्ध, पंचामृत (दुग्ध, दहीं, घी, शहद, शकर) आदि अनेक द्रव्यों से किया जाता है।
काशी के ब्राह्मणों द्वारा रुद्राभिषेक करवाने हेतु आप नीचे दिए गए नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं:-
आचार्य प्रतीक जेतली:- 7905559687
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली:-9919367470, 7007245896
विक्रम संवत २०७८ के मासिक व महाशिवरात्रि व्रत की विस्तृत जानकारी हेतु इस link पर जाएं:-
होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम व मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या
होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या भाग-१
होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम व मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या
जैसा कि आप सब जानते हैं कि प्रत्येक कुंडली मे १२ भाव होते हैं और यदि इन भावों को तीन-तीन के समूह में चार भागों में बाँटा जाए तो विभाजन निम्न प्रकार से होता है:-
१.धर्म त्रिकोण भाव:- प्रथम, पंचम व नवम भाव को धर्म त्रिकोण भाव कहते हैं।
२.अर्थ त्रिकोण भाव:- द्वितीय, षष्ठ व दशम भाव को अर्थ त्रिकोण भाव कहते हैं।
३.काम त्रिकोण भाव:- तृतीय, सप्तम व एकादश भाव को काम त्रिकोण भाव कहते हैं।
४. मोक्ष त्रिकोण भाव:- चतुर्थ, अष्टम व द्वादश भाव को मोक्ष त्रिकोण भाव कहते हैं।
इन स्थानों पर जो ग्रह तथा नक्षत्र होंगे वह अपने स्वभावानुसार उस व्यक्ति के कर्मों की गति स्पष्ट करते हैं उदाहरणार्थ:- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में अशुभ या पापी ग्रह, अर्थ व काम अर्थात इच्छाओं के स्थान में बैठे हैं तो उस व्यक्ति की इच्छायें व प्रवृत्ति उसी तरफ अधिक होंगी और उसकी इच्छाएँ व अर्थ रूपये-पैसे संबंधी कार्य उसी समय पूरे होंगे जब उस कुण्डली की गणना के अनुसार उन ग्रहों का समय आयेगा वहीं दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति धर्म व मोक्ष की प्राप्ति चाहता है, तो उसकी कुण्डली की कुंडली मे शुभ ग्रह धर्म व मोक्ष वाले स्थानों में अवश्य ही बैठे होंगें।
कुंडली के धर्म त्रिकोण भाव
अब कुंडली के प्रत्येक भावों का विश्लेषण उपरोक्त प्रकार से करते हैं, जैसा कि आप सब जानते हैं कि इस संसार मे धर्म ही प्रधान है व्यक्ति धर्म का समुचित पालन करके ही जीवन के अंतिम उद्देश्य मोक्ष तक पहुँच सकता है
इस कारण से ही किसी भी कुंडली मे 1, 5, 9 स्थान को मूल त्रिकोण की संज्ञा दी गई है अतएव सर्वप्रथम धर्म भावों के बारे में विस्तार से जानते हैं:-
लग्न स्थान प्रथम धर्म त्रिकोण भाव:-
कुंडली का प्रथम धर्म त्रिकोण भाव
इस भाव से व्यक्ति की शरीर पुष्टि, वात-पित्त-कफ प्रकृति, त्वचा का रंग, यश-अपयश, पूर्वज, सुख-दुख, आत्मविश्वास, अहंकार, मानसिकता आदि को जाना जाता है इससे हमें शारीरिक आकृति, स्वभाव, वर्ण चिन्ह, व्यक्तित्व, चरित्र, मुख, गुण व अवगुण, प्रारंभिक जीवन विचार, यश, सुख-दुख, नेतृत्व शक्ति, व्यक्तित्व, मुख का ऊपरी भाग, के संबंध में ज्ञान मिलता है।
पंचम भाव द्वितीय त्रिकोण भाव:-
कुंडली का द्वितीय धर्म त्रिकोण भाव
इस भाव से संतति, बच्चों से मिलने वाला सुख, विद्या बुद्धि, उच्च शिक्षा, विनय-देशभक्ति, पाचन शक्ति, कला, रहस्य शास्त्रों की रुचि, अचानक धन-लाभ, प्रेम संबंधों में यशनौकरी परिवर्तन आदि का विचार किया जाता है इससे हमें विद्या, विवेक, लेखन, मनोरंजन, संतान, मंत्र-तंत्र, प्रेम, सट्टा, लॉटरी, अकस्मात धन लाभ, पूर्वजन्म, गर्भाशय, मूत्राशय, पीठ, प्रशासकीय क्षमता, आय जानी जाती है।
नवम भाव तृतीय धर्म त्रिकोण भाव:-
कुंडली का तृतीय धर्म त्रिकोण भाव
इस भाव से आध्यात्मिक प्रगति, भाग्योदय, बुद्धिमत्ता, गुरु, परदेश गमन, ग्रंथपुस्तक लेखन, तीर्थ यात्रा, भाई की पत्नी, दूसरा विवाह आदि के बारे में बताया जाता है इससे हमें धर्म, भाग्य, तीर्थयात्रा, संतान का भाग्य, साला-साली, आध्यात्मिक स्थिति, वैराग्य, आयात-निर्यात, यश, ख्याति, सार्वजनिक जीवन, भाग्योदय, पुनर्जन्म, मंदिर-धर्मशाला आदि का निर्माण कराना, योजना विकास कार्य, न्यायालय से संबंधित कार्य का विचार किया जाता है।
पोस्ट की लंबाई को ध्यान रखते हुए अगला भाग जल्द ही प्रकाशित होगा।
विक्रम संवत २०७८ के मासिक शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि
विक्रम संवत २०७८ के मासिक शिवरात्रि व्रत
प्रति मास कृष्ण पक्षीय निशीथ काल व्यापिनी चतुर्दशी के दिन मासिक शिवरात्रि व्रत किया जाता है समाज में फाल्गुन तथा श्रावण मास पूजा विशेष प्रचलित है “ईशान संहिता” के अनुसार फाल्गुन मास में ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था:-
शिवलिङ्गतयोद्भूतः कोटि सूर्य समप्रभः।
इसलिए उसे महाशिवरात्रि के नाम से जाना जाता है जनश्रुतियों के अनुसार श्रावण मास में शिव जी ने संसार की रक्षा हेतु विषपान किया था और विष की विकलता में इधर-उधर भागने लगे तब सभी ने विष की गर्मी से बचाने हेतु शिव जी का गंगाजल से रुद्राभिषेक किया था तभी से गंगाजल द्वारा रुद्राभिषेक की परंपरा शुरू हुई थी, गंगाजल से शिव अभिषेक आराधना में सर्वोत्तम माना जाता है गंगाजल के अतिरिक्त रत्नोदक, इक्षुरस (गन्ने का रस), दुग्ध, पंचामृत (दूध, दहीं, घी, चीनी, शहद) आदि अनेक द्रव्यों से किया जाता है।
वृहद् धर्मपुरण अ. ५७ में तो यहाँ तक लिखा है कि शिवलिङ्ग में सभी देवताओं का पूजन करें:-
शिवलिङ्गSपि सर्वेषां देवानां पूजनं भवेत्।
सर्वलोक मये यस्याच्छिव शक्तिविर्भु: प्रभु:।।
पंचाक्षर मन्त्र:-“नमः शिवाय”
षडाक्षर मंत्र:-“ॐ नमः शिवाय”
मासशिवरात्रि व्रत
मासिक शिवरात्रि व्रत तारीखें
१.वैशाख९ मई २०२१(रविवार)
२.ज्येष्ठ८ जून २०२१(मंगलवार)
३.आषाढ़८ जुलाई २०२१(गुरुवार)
४.श्रावण (विशेष)६ अगस्त २०२१(शुक्रवार)
५.भाद्रपद५ सितंबर २०२१(रविवार)
६.आश्विन४ अक्टूबर २०२१(सोमवार)
७.कार्तिक२ नवंबर २०२१(मंगलवार)
८.मार्गशीर्ष२ दिसंबर २०२१(गुरुवार)
९.पौष१ जनवरी २०२२(शनिवार)
१०.माघ३० जनवरी २०२२(रविवार)
११.फाल्गुन महाशिवरात्रि (विशेष)१ मार्च २०२२(मंगलवार)
१२.चैत्र३० मार्च २०२२(बुधवार)
शिवरात्रि पूजन विधि:-
शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि
सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्य क्रिया से निवृत्त होकर स्नानादि कर के भगवान शिव का जलाभिषेक व पंचामृत स्नान करना चाहिए तदोपरांत चंदन, भस्म, रोली, जौं, काला तिल, अक्षत शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए तथा जनेऊ, बड़ी सुपाड़ी, वस्त्र, इत्र, गुलाब के पुष्प, विल्वपत्र, दूर्वा, भांग व धतूरा अर्पित करना चाहिए उसके बाद नैवेध अर्पित कर शिव जी का पूजन करना चाहिए और आरती कर पूजा संपन्न करनी चाहिए, अभीष्ट लाभ हेतु रुद्राभिषेक, रुद्रार्चन कर सकते हैं।
विक्रम संवत 2078 में वर्षा विचार जानें आनंद संवत्सर में कब होगी वर्षा
विक्रम संवत २०७८ में वर्षा होने के योग
आर्द्राप्रवेशाङ्ग के विचार से वर्षा मध्यम है, चक्रवात व तूफान का प्रकोप रहेगा, पूर्वोत्तर पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा उत्तम, पूर्वी भाग में सामान्य वर्षा, देश के पश्चिम व मध्य भाग में वर्षा की कमी होगी, दक्षिण भाग में वायु का प्रकोप होगा, जल संकट संभव है।
शारदधानयोत्तपत्ति के विचार से उत्पादन संतोषप्रद रहेगा, फसलों के मूल्य सामान्य रहेंगे, पूर्वोत्तर तथा दक्षिण पश्चिम कृषि को क्षति होगी, ग्रैष्मिकधानयोत्तपत्ति के विचार से रवी की फसल का उत्पादन उत्तम रहेगा, फसलों को रोगादि का भय होगा, दक्षिण भाग में कृषि को क्षति होगी, फसलों के मूल्यों में वृद्धि होगी।
वर्षा विज्ञान:-
वर्षा विज्ञान
सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में जिस दिन वर्षा होवे उसके ऊपर लिखे दिन तक जलवृष्टि उत्तम ढंग से न होगी।
उदाहरण:-
यदि रोहिणी नक्षत्र का सूर्य आने के पाँचवें दिन वर्षा हो गयी तो ३१ दिन तक सुंदर ढंग से जल वृष्टि न हो सकेगी, जिस दिशा से बादल रोहिणी नक्षत्र में आते हुए दृष्टिगोचर होगा उसी दिन में जलवृष्टि की आगे न्यूनता रहेगी।
वर्षा विचार:-
आर्द्रा (२२ जून दिन १/५१ पर)
आर्द्रा का केवल तृतीय चरण निर्जल है शेष सभी चरण सजल है अतः तारीख २२ से २८ जून व तारीख ३ से ५ जुलाई तक वर्षा होगी।
पुनर्वसु (६ जुलाई दिन ३/३२ पर)
पुनर्वसु नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण निर्जल है और प्रथम व द्वितीय चरण सजल है अतः तारीख ६ से १२ जुलाई तक वर्षा होगी।
पुष्य (तारीख २० जुलाई सायं ५/० पर)
पुष्य नक्षत्र का केवल द्वितीय चरण सजल है शेष सभी चरण निर्जल है अतः तारीख २२ से २६ जुलाई तक वर्षा होगी।
आश्लेषा (तारीख ३ अगस्त सायं ५/२४ पर)
आश्लेषा नक्षत्र का केवल द्वितीय चरण सजल है शेष सभी चरण निर्जल है अतः तारीख ६ से ११ अगस्त तक वर्षा होगी।
मघा (तारीख १७ अगस्त सायं ४/०८ पर)
मघा नक्षत्र का केवल द्वितीय चरण सजल है शेष सभी चरण निर्जल है अतः तारीख २० से २३ अगस्त तक वर्षा होगी।
पूर्वाफाल्गुनी (तारीख ३१ अगस्त दिन १२/३२ पर)
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र का प्रथम व द्वितीय चरण सजल है शेष तृतीय व चतुर्थ चरण निर्जल है अतः तारीख ३१ अगस्त से ६ सितंबर व तारीख ७ से १० सितंबर तक वर्षा होगी।
उत्तराफाल्गुनी (तारीख १४ सितंबर प्रातः ६/२३ पर)
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का केवल तृतीय चरण सजल व शेष चरण निर्जल है अतः तारीख २१ से २४ सितंबर तक आँधी-तूफान व उमस के साथ वर्षा होगी।
हस्त (तारीख २७ सितंबर रात्रि ९/३२ पर)
हस्त नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण सजल व शेष प्रथम व द्वितीय चरण निर्जल है अतः तारीख ५ से १० अक्टूबर तक वायु के साथ अच्छी वर्षा होगी।
चित्रा (तारीख ११ अक्टूबर दिन ९/५४ पर)
चित्रा नक्षत्र का प्रथम व द्वितीय चरण सजल व शेष तृतीय व चतुर्थ चरण निर्जल है अतः तारीख ११ से १७ व २३ अक्टूबर को वर्षा होगी।
स्वाती (तारीख २४ अक्टूबर रात्रि ०७/३३ पर)
स्वाती नक्षत्र का तृतीय व चतुर्थ चरण सजल व शेष प्रथम व द्वितीय चरण निर्जल है अतः तारीख १ से ६ नवंबर तक अच्छी वर्षा होगी।
विक्रम संवत 2078 में वर्ष प्रवेश लग्न से भारत का भविष्य
विक्रम संवत २०७८ के वर्ष प्रवेश लग्न से भारत में घटित होने वाली प्रमुख घटनाएं
विक्रम संवत 2078 में वर्ष प्रवेश लग्न से भारत का भविष्य
भारत के प्रवेश वर्ष प्रवेश लग्न के विचार से वर्ष प्रवेश लग्न मेष व द्रव्येश शुक्र है अतः मनोरंजन जगत एवं श्रृंगार संबधी व्यापार में थोड़ा लाभ होगा, पराक्रमेश बुध के होने से भारत की नीतियों से अंतराष्ट्रीय क्षेत्र में सफलता प्राप्त होगी, सुखेश चंद्रमा के होने के कारण से लोक कल्याण के कार्य से जनता सुखी रहेगी तथा बुध के कष्टेश होने के कारण से अनावश्यक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, मारकेश मंगल के होने के कारण से कई जगह अहिंसक उपद्रव होंगे व भाग्येश गुरु के होने के कारण से शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति होगी, कर्मेश शनि से कानून व्यवस्था अच्छी दीर्घकालिक योजनाओं का शुभारंभ होगा, आयेश शनि के होने से राष्ट्रीय कोष में वृद्धि होगी तथा व्ययेश गुरु के होने के कारण से शिक्षा, ऊर्जा व योग के क्षेत्र में विस्तार होगा।
अनेक ग्रंथों में सूर्यादि सभी ग्रहों के विभिन्न स्थानों में फल बताएं गए हैं पिछले लेख में मैंने भृगु सूत्र आधारित सूर्य के प्रथम भाव व द्वितीय में फल को बताया था अतः उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सूर्य के तृतीय भाव में फल को लिख रहा हूँ:-
भृगु सूत्र आधारित प्रथम भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-
१. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को अनुजों (छोटे भाइयों) का अभाव रहता है साथ ही बड़ा भाई तो होता है किंतु बड़े भाई के सुखों में त्रुटि रहती है और ऐसे व्यक्तियों को उम्र के ४, ५, ८ अथवा १२वें वर्ष में कुछ पीड़ा होती है।
२. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य पाप ग्रह से युक्त होकर बैठा हो तो व्यक्ति क्रूर कर्मों को करने वाला होता है तथा उसके दो भ्राता होते हैं साथ ही ऐसा व्यक्ति पराक्रमी तथा लड़ाई-झगड़े से न घबराने वाला और कीर्तिमान व अपने द्वारा अर्जित धन का भोग करने वाला होता है।
३. यदि तृतीय भाव में सूर्य शुभ ग्रहों से युक्त हो तो व्यक्ति के सहोदर भाइयों की अच्छी उन्नति व वृद्धि होती है।
४. यदि तृतीय भाव में सूर्य हो और तृतीयेश/पराक्रमेश बली अवस्था में बैठा हो या तृतीय भाव में सूर्य स्वराशि स्थित हो तो व्यक्ति अत्यंत पराक्रमी, खुद के पराक्रम से संपूर्ण सुख भोगने वाला, उच्च पद पर आसीन होने वाला, राजा या उच्चाधिकारी द्वारा सम्मानित होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाई दीर्घायु होते हैं।
५. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और तृतीयेश/पराक्रमेश पाप ग्रहों से युक्त व दृष्ट हों तो व्यक्ति आलस्य करने वाला व पाप कर्म करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाइयों का नाश होता है।
६. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनवान, भोगी तथा सुखी होता है।
भृगु सूत्र आधारित द्वितीय भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-
अनेक ग्रंथों में सूर्यादि सभी ग्रहों के विभिन्न स्थानों में फल बताएं गए हैं पिछले लेख में मैंने भृगु सूत्र आधारित सूर्य के प्रथम भाव में फल को बताया था अतः उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सूर्य के द्वितीय भाव में फल को लिख रहा हूँ:-
१.यदि कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति प्रायः मुख के रोगों से पीड़ित रहता है साथ ही उसके जीवन के २५ वें वर्ष में राजदंड के कारण (न्यायालय की आज्ञा से) से धन की हानि होती है यह सामान्य फल है किंतु यदि सूर्य अपनी उच्च राशि (मेष) या स्वराशि (सिंह)का होकर द्वितीय भाव में स्थित हो तो मुख रोग तथा राजदंड से धन का नाश नही होता है।
२.यदि द्वितीय भाव में सूर्य के साथ पाप ग्रह बैठे हों तो व्यक्ति नेत्र रोगी होता है साथ ही थोड़ा विद्वान तथा रोगी शरीर वाला होता है।
३.यदि द्वितीय भाव में स्थित सूर्य पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनी होता है और उसकी कुंडली के अनेक दोषों (बुरे फल) का नाश हो जाता है तथा उसके नेत्रों में भी कोई रोग नही होता है।
४.यदि द्वितीय भाव में सूर्य अपनी उच्च राशि (मेष) या स्वराशि (सिंह) का होकर स्थित हो तो ऐसा व्यक्ति बहुत धनवान होता है और उसे प्रचुर सम्पन्नता तथा वैभव की प्राप्ति होती है।
५.यदि द्वितीय भाव में सूर्य के साथ बुध भी स्थित हो तो व्यक्ति शीघ्रता पूर्वक बोलता है (यहाँ मूल में पवनवाक शब्द का प्रयोग हुआ है इसका अर्थ है कि जैसे तेज हवा चलती है ठीक उसी प्रकार तेज रफ्तार से बातचीत करने वाला)।
६.यदि द्वितीय भाव में सूर्य स्थित हो व द्वितीय भाव का स्वामी स्वराशि या उच्च राशि में स्थित हो तो व्यक्ति वाग्मी (वार्तालाप में कुशल) होता है साथ ही इस योग में जन्मा व्यक्ति विविध विज्ञानों एवं कलाओं में निष्णात होता है ऐसा व्यक्ति ज्ञानवान तथा अच्छे नेत्र दृष्टि वाला होता है और राजयोग का पूर्ण सुख प्राप्त करता है।
राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 20290: राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद ही नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु गोचर परिवर्तन से किन-किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी।
राहु व केतु का 12 राशियों पर प्रभाव
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर सामान्य रहेगा क्योंकि वर्तमान में अभी शनि के साढ़ेसाती का दूसरा चरण भी आपकी राशि पर चल रहा है हालांकि तुला, मकर व कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का उतना अशुभ प्रभाव नही पड़ता है किंतु यदि चंद्रमा का किसी भी प्रकार से शनि से संबंध बने तो साढ़ेसाती परेशानी देती है अन्यथा इन तीन राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती उतनी अशुभ नही होती हालांकि हम यहाँ राहु व केतु के गोचर परिवर्तन पर चर्चा कर रहे है अतः प्रेम संबंधों में कमी आएगी, प्रेमी व प्रेमिका से विवाद होते रहेंगे तथा यदि आप दोनों के मध्य काफी समय से विवाद चल रहा है तो वह विवाद संबधों को विच्छेद करा कर समाप्त होगा, प्रेमियों के मध्य गलतफहमियों के चलते विवाद होंगे, संतान को कष्ट, संतान से विवाद, संतान की शिक्षा में बाधाएं आएंगी, विद्यार्थियों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा शिक्षा में व्यवधान आएंगे, विद्यार्थियों के मन में क्या करें व क्या न करें को लेकर मन में संशय बना रहेगा, कुछ देर ध्यान करें इससे मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी हालांकि लाभ के लिहाज से यह गोचर शुभ सिद्ध होगा फलस्वरूप लाभ के अन्य माध्यम बनेंगे, लाभ में वृद्धि होगी, लंबे समय से कार्यक्षेत्र में (चाहे वह नौकरी पेशा व्यक्ति हों या व्यापारी) उन्नति के मार्ग में जो बाधाएं आ रही थी वह दूर होंगी, शेयर बाजार, जुआ व सट्टे से अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लाभ होगा आपकी वाणी का लोगों पर अच्छा प्रभाव भी पड़ेगा तथा उन्नति के अवसर भी प्राप्त होंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, पिता से वैचारिक मतभेद व पिता के स्वास्थ्य में समस्या रहेगी, भ्रम की स्थितियाँ बनेंगी, मकर राशि वाले जातक/जातिकाओं के लिए इस गोचर काल की सबसे बड़ी समस्या भ्रामक स्थिति रहेगी अतः धैर्य व संयम से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच समझ कर लें तथा आवेश में आने से बचें यदि आपने भ्रामक स्थिति न बनने दी तो राहु व केतु का यह गोचर आपके लिए शुभ सिद्ध होगा, आय में वृद्धि होगी, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा है तो आपको बुद्धि व विवेक से हर कार्य करना होगा क्योंकि राहु आपके चित्त को शांत नही होने देंगे जिससे बनते कार्य बिगड़ेंगे, वहिं केतु आपको सही दिशा में प्रयत्न नही करने देंगे जिससे व्यापार व दामपत्य जीवन के सुख में बाधाएं आएंगी, यह गोचर आपके लिए 48% शुभ तथा 52% अशुभ रहेगा।
उपाय:- सुंदरकांड व बटुक भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करें तथा जिनकी कुंडली में चंद्रमा शनि से संबंध रखता हो वह इन उपायों के साथ प्रत्येक शनिवार को 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें लाभ होगा।
राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-२ जानिए, कर्क से कन्या राशि वालों के लिए राहु-केतु का यह गोचर कितना शुभ रहेगा।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा हो उनके लिए मुश्किलें ज्यादा रहेंगी अतः घर में कलह-क्लेश होंगे, मानसिक अशांति अनुभव होगी, कार्यक्षेत्र में हानि संभव है, नौकरी पेशा लोग बहुत ही सतर्कता के साथ कार्य करें, आपको अपने प्रियजनों का सहयोग कम मिलेगा, वाणी में तेजी रहेगी अतः वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें, धैर्य व संयम से कार्य करें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं से सावधान रहें, किसी से ऋण लेने से बचें, जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध नही है उनके लिए यह गोचर कुछ राहत देगा, कार्यक्षेत्र में विकास होगा, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, जिनका कार्य कमीशन, फाइनेंस, बैंकिंग, टीचिंग से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह गोचर लाभप्रद सिद्ध होगा हालाँकि घर में कलह-क्लेश होते रहेंगे फिर भी चंद्रमा का शनि से संबंध न होने के कारण से आपकी सोच-विचार करने की शक्ति जागृत रहेगी, राजनीति से या सामाजिक वर्ग से जुड़े लोग अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण करें तथा शराब, माँसाहार का सेवन न करें क्योंकि इनका सेवन आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला सिद्ध होगा, शत्रुओं से सावधान रहें, यह गोचर आपके लिए 50% शुभ तथा 50% अशुभ रहेगा।
उपाय:- हनुमान जी, गणेश जी व भैरव जी की नित्य पूजा करें व गणेश अथर्वशीर्ष, संकटमोचन हनुमाष्टक और भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करने से लाभ होगा।
राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020: *भाग:-३* राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु के गोचर परिवर्तन से तुला, वृश्चिक व धनु राशि में से किन पर राहु की कृपा बरसेगी व आपको क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए तथा उपाय।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर शुभ रहेगा बशर्ते आपकी कुंडली में राहु पीड़ित अवस्था में हो फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, भाग्य में वृद्धि होगी व भाग्य का पूर्ण सहयोग भी प्राप्त होगा, व्यापार में भी लाभ होगा व व्यापार की वृद्धि होगी, नए कार्य की शुरुवात होने के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आप क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, हॉकी, पुलिस, आर्मी से जुड़े हुए हैं तो यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ सिद्ध होगा, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, दामपत्य जीवन में क्षणिक विवाद होते रहेंगे, बड़े भाई-बहन का सम्मान करें, मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी अतः अपने विवेक से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझ कर ही लें, दिमाग आपका तेजी से कार्य करेगा, आपके ज्ञान में भी वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, रुका हुआ धन प्राप्त होगा व ऐसे सभी कार्य जो लंबे समय से रुके हुए हैं अब पूर्ण होंगे, सरकारी नौकरी की जो लोग लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं उन्हें सरकारी नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, यात्राएं चाहे लंबी हो या छोटी लाभप्रद सिद्ध होंगी, धर्म का पालन करें व अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, बीते समय में आपको जो भी नुकसान हुए अब उनकी भरपाई होने के योग बनेंगे, यह गोचर आपके लिए 80% शुभ व 20% अशुभ रहेगा।
उपाय:- दशांश करें यहाँ दशांश का तात्पर्य अपने कमाई का दसवाँ हिस्सा किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम में दान करने से हैं तथा शिव जी की पूजा व शिव परिवार की सेवा करें।
शुक्र का कर्क राशि से गोचर 1 सितंबर 2020: जानें किस राशि वालों पर क्या प्रभाव पड़ेगा व किन राशि वालों की चमकेगी किस्मत
शुक्र का कर्क राशि से गोचर
वैदिक ज्योतिष में शुक्र को कला, वैभव, सौंदर्य, प्रेम, भौतिक सुख, का कारक माना गया है सामान्य शब्दों में समझा जाए तो हर प्रकार के सुख जिनसे प्राप्त होते हैं उन सभी के कारक शुक्र होते हैं यह देव गुरु वृहस्पति के भाई व दैत्यों के आचार्य हैं नव ग्रहों में एकमात्र शुक्र ही है जिन्हें मृत संजीवनी विद्या का ज्ञान है, 1 सितंबर 2020 मंगलवार को 2 बजकर 2 मिनट 01 सेकंड पर शुक्र गोचर बदलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे जिसके कारण से विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त होंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के कर्क राशि से गोचर के दौरान किन राशियों को क्या फल प्राप्त होंगे:-
शुक्र के कर्क राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव:-
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के लिए शुक्र दूसरे व सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा साथ ही घर के में माहौल में खुशी का वातावरण रहने से मन प्रसन्न रहेगा, प्रेमियों के जीवन में भावुकता हावी हो सकती है अतः भावनाओ पर नियंत्रण रखें, सर्दी-जुकाम की समस्या रह सकती है।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे, संगीत, कला के प्रति रुझान बढ़ेगा, आपके मन में कुछ नया करने की चाह उत्पन्न होगी, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ कहीं घूमना जाने का सोच रहे हैं तो शुक्र का यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ सिद्ध होगा जिससे संबंधों में मधुरता आएगी, पुराने मित्रों व करीबी लोगों से मुलाकात संभव है, विद्यार्थियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर काफी अच्छा रहेगा।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, शिक्षा के क्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होंगी, परिवार का माहौल अच्छा रहने से मन प्रसन्न रहेगा, यदि आप किसी पारिवारिक व्यवसाय या साझेदारी में कोई व्यवसाय करते हैं तो शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ होगा, वाणी का लोगों पर प्रभाव पड़ेगा, यात्राओं के योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, नेत्रों में किसी प्रकार की समस्या संभव है, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, खाने-पीने व यात्राओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप बौद्धिक क्षमता से उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे व कला और संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, जिनका कार्य मीडिया, सौंदर्य उत्पादों से जुड़ा हुआ है उनके लिए शुक्र का यह गोचर काफी अच्छा रहेगा, परिवार में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, शुक्र के इस गोचर के दौरान आप भौतिक सुखों को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहेंगे, स्वास्थ्य के लिहाज से भी शुक्र का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा फिर भी बाहर की चीजों का सेवन करने से परहेज करें।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तीसरे व दसवें भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे द्वादश भाव में शुक्र शुभ फल देता है क्योंकि काल पुरुष के द्वादश भाव में ही शुक्र उच्च के होते हैं फलस्वरूप जो लोग विदेशों से जुड़ा व्यापार करते हैं या विदेशी कंपनियों में काम करते हैं उनके लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, विदेश/परदेश यात्रा के भी योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, किसी महिला या सुख के संसाधनों पर धन व्यय होगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, शुक्र के इस गोचर काल के दौरान आप आध्यात्मिक सुखों की जगह भौतिक सुखों को अधिक प्रधानता देंगे, बाईं नेत्र में किसी प्रकार की समस्या संभव है, स्वास्थ्य का भी विशेष ख्याल रखें।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए शुक्र दूसरे व नवम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे जो कि बेहद शुभ रहेगा फलस्वरूप धन लाभ होने के योग बनेंगे, नौकरी पेशा व व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर अच्छा सिद्ध होगा, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, परिवार के सदस्यों के साथ संबंध मधुर होंगे व घर के वातावरण में खुशियों का माहौल रहेगा, बड़ी बहन या किसी महिला से लाभ मिलने की संभावना रहेगी, लंबे समय से आपको जो स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं थी उनसे राहत मिलेगी, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, मनोरंजन देने वाले साधनों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए शुक्र पहले व अष्टम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात संभव है, नौकरी पेशा लोगों के लिए प्रमोशन के योग बनेंगे, व्यापार वृद्धि हेतु भी आप कोई योजना बना सकते हैं जिससे आपको भविष्य में लाभ होगा, आपकी वाणी से लोग प्रभावित होंगे जिससे आपके रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे व आपके लोगों से संबंध भी मधुर होंगे, विद्यार्थियों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, पिता से चले आ रहे वैचारिक मतभेद समाप्त होंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर होगा फलस्वरूप आध्यात्म के प्रति आपका रुझान अधिक बड़ेगा, किसी ज्ञानी व्यक्ति से आपकी मुलाकात संभव रहेगी, धर्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, दामपत्य जीवन अच्छा रहेगा, घर में बड़ों-बुजुर्गों के साथ समय बिताना आपको अच्छा लगेगा व उनके साथ आपका अच्छा समय भी बीतेगा, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए भी शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, जो लोग संगीत, कला, सौंदर्य प्रकाशन से जुड़े हुए हैं उनके लिए भी शुक्र का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा, यात्राओं के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, शुक्र के इस गोचर के दौरान आपके शत्रु सक्रिय रहेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, किसी भी महिला से व्यर्थ विवाद न करें, स्वास्थ्य के लिहाज से शुक्र का यह गोचर अच्छा सिद्ध होगा क्योंकि शुक्र ही इकलौता ऐसा ग्रह है जिसे मृत संजीवनी का ज्ञान है और अष्टम भाव आयु का विचार है अतः आपके स्वास्थ्य में सुधार होगा व लंबे समय से चली आ रही बीमारी से राहत मिलेगी फिर भी अधिक मिर्च-मसाले, तामसिक चीजों से परहेज करें अन्यथा पेट/उदर से संबंधित परेशानी संभव है, दामपत्य जीवन अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ संबंधों को मजबूत करने और उन्हें समझने का यह अच्छा समय रहेगा क्योंकि अष्टम भाव जीवनसाथी की वाणी का भी भाव है जहाँ शुक्र जैसा सौम्य ग्रह वाणी में मधुरता देता है, किसी को उधार पैसा देने से बचें।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, जो लोग साझेदारी में व्यापार करते हैं उनके लिए शुक्र का यह गोचर काफी अच्छा रहेगा, दामपत्य जीवन अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, मित्रों से मुलाकात संभव है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, प्रेमियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर अच्छा सिद्ध होगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे विवाह करना चाहते हैं तो यह समय अपने पार्टनर को प्रपोज करने के लिए शुभ रहेगा, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रमोशन के भी योग बनेंगे, आपका व्यक्तित्व आकर्षक रहेगा जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, अधिक मिर्च-मसालों से बने पदार्थों से परहेज करें, कार्यक्षेत्र में अचानक से किसी समस्या के आने से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी अतः तनाव लेने से बचें व कार्य पर ध्यान दें, पिता के स्वास्थ्य में भी समस्या संभव है अतः पिता के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें, किसी महिला से व्यर्थ विवाद में पड़ें, शुक्र के इस गोचर के दौरान आपके शत्रु सक्रिय रहेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, मामा पक्ष से विवाद संभव रहेगा, अचानक यात्राओं के योग बनेंगे व यात्राओं पर धन व्यय होगा, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, शुक्र का यह गोचर आपके लिए अधिक शुभ नही है अतः नित्य लक्ष्मी चालीसा व श्रीसूक्त का पाठ करें।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए शुक्र तीसरे व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, बुद्धि बल द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, रचनात्मक कार्यों के प्रति झुकाव बड़ेगा, जो छात्र शोध कार्यों में लगे हैं उनके लिए भी शुक्र का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा, संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, प्रेम जीवन में मधुरता आएगी किंतु अपने प्रेमी से अधिक वायदे करने से बचें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा।