घर की नकारात्मक ऊर्जा व ऊपरी बाधा दूर करने के 7 अचूक उपाय
ऊर्जा दो प्रकार की होती है एक सकारात्मक और दूसरी नकारात्मक जो कि क्रमशः देव और असुर की श्रेणी में आती है बहुत से लोग मेरे पास आते हैं कि मेरे घर में किसी ने कुछ कर दिया है या मेरे घर पर किसी की नजर लग गयी है या मेरे घर में कभी-कभी किसी और के होने का भी अहसास होता है तो आज मैं इसी संदर्भ में कुछ सरल से उपाय बताता हूँ जिनसे आप घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर कर सकते हैं तो चलिए जानते हैं वह कौन से उपाय हैं जिन्हें करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है:-
घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के उपाय
१. हनुमान जी की पंचमुखी मूर्ति या फोटो को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नही होता है।
२. यदि आपके घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा हो तो गोहरी (गाय की सूखी गोबर) में हल्का सा गंगाजल गायत्री मंत्र पढ़कर छिड़क दें तदोपरान्त उसमें सेंधा नमक, फिटकरी व कपूर का छोटा टुकड़ा डालकर जला दें तथा उससे जो धुंआ निकले उससे पूरे घर को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए शुद्ध करें ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
३. घर के मध्य भाग में तुलसी का पौधा लगाकर नित्य उसका पूजन करने से भी घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
४. जिस घर में नित्य सुंदरकांड का पाठ व हनुमान जी की आरती होती है वहाँ नकारात्मक ऊर्जा वास नही करती है।
५. घर के दक्षिण भाग में सूर्यास्त बाद नित्य पितरों को दीपक अर्पित करने से भी पितरों के आशीर्वाद से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
६. नित्य घर में गंगाजल का छिड़काव करने से भी सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
७. नित्य पूजा घर में पूजन समय शंखनाद करने से भी सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा
मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरूवात में मंगल का लग्न से गोचर रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाएगा जिस पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी फलस्वरूप स्वास्थ्य में सुधार होगा, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, नई चुनातियों का सामना करना पड़ सकता है व इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, 10 सितंबर को मंगल वक्री हो जाएंगे अतः स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ अनुभव होगी, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है जिस कारण से मन अप्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु संतान के स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ संभव रहेगी, 2 सितंबर को बुध गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर बुद्धि व विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने के योग बनेंगे, 16 सितंबर को सूर्य भी गोचर बदलकर आपकी कुंडली के छठे भाव में आ जाएंगे अतः सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, ज्वर, सर दर्द, नेत्रों में जलन/दर्द की समस्या रह सकती है, 22 सितंबर को बुध पुनः गोचर बदलकर आपकी कुंडली के सप्तम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जिनका कार्य बैंकिंग व फाइनेंस से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यदि आप अपने प्रेमी/प्रेमिका को प्रपोज करना चाहते हैं तो 14, 19, 20 व 21 सितंबर का दिन आपके लिए शुभ रहेगा।
मेष राशिफल
माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा अतः मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए है उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, 23 सितंबर को राहु व केतु गोचर बदलकर क्रमशः दूसरे व अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं, वाहन सावधानी से चलाएं, तामसिक चीजों से परहेज करें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, 25 सितंबर को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 14 सितंबर को परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, 19 से 21 सितंबर का समय भी आपके लिए अच्छा रहेगा, किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा।
मेष राशिफल
कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा जिसमें किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है 10 सितंबर के बाद स्वास्थ्य का ख्याल रखें व क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 3, 4, 5, 17, 18, 21, 22 व 23 तिथियाँ अधिक शुभ नही है अतः इस दौरान कोई भी रिस्क लेने से बचें, मेरे अनुसार मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।
नजर दोष व उसके बचाव हेतु उपाय भाग: २—-Astrology Sutras
नजर दोष के उपाय
नजर दोष व उससे बचाव के लिए कुछ दिन पहले मैंने भाग: १ प्रकाशित किया था जिसे आज मैं आगे बढ़ाते हुए इसका दूसरा भाग प्रकाशित कर रहा हूँ जिसमें धर्म शास्त्र के अनुसार कुछ वैदिक उपाय बतायूँगा जिन्हें कर के भी नजर दोष से बचाव किया जा सकता है तो चलिए जानते हैं वह कौन से वैदिक उपाय हैं जिन्हें कर के हम नजर दोष को दूर कर सकते हैं:-
नजर दोष व उससे बचाव के उपाय भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं
१. नित्य बजरंग बाण, हनुमान बाहुक व हनुमान चालीसा का पाठ करने से नजर दोष नही लगती है।
२. चाँदी की चेन या पंचमुखी रुद्राक्ष की माला गले में धारण करने से नजर दोष से सुरक्षित रहा जा सकता है।
३. यदि नजर दोष के कारण से धन संचय या धनार्जन में समस्या आ रही हो तो घर की छत के उत्तर-पूर्व दिशा में तुलसी का पौधा लगाकर नित्य उसकी पूजा करने से नजर दोष दूर हो जाती है।
४. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके सर पर से सेंधा नमक 7 बार उतार कर पानी में डाल दें (यह क्रिया काँच के गिलास में करनी है) जैसे-जैसे सेंधा नमक पानी में घुलता जाएगा नजर दोष दूर होती जाएगी।
५. बहुत लोगों से मैंने सुना है नजर लगने के कारण से उल्टी हो रही है ऐसी स्थिति में एक पान के पत्ते में गुलाब की 7 पंखुड़ी रखकर अपने इष्ट देव का ध्यान कर नजर दोष को दूर करने की प्राथना कर के व्यक्ति (जिसे नजर दोष के कारण से उल्टी हो रही हो) को खिलाने से नजर दोष दूर हो जाती है व उल्टी बंद हो जाती है।
नजर दोष: जानें नजर दोष के कुछ लक्षण व उनके अचूक उपाय “भाग:-१“
६. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके ऊपर से 7 लाल मिर्च (डंठल वाली) को 9, 11 या 21 बार उतार कर आग में जला देने से नजर दोष से तत्काल राहत मिलता है।
७. जिस व्यक्ति को नजर लग गयी हो उसके सर के ऊपर से थोड़ा सा दूध 3 बार उतार कर मिट्टी में बर्तन में डालकर कुत्ते को पिलाने से नजर दोष दूर हो जाती है। (यह क्रिया शनिवार व राविवार को की जाती है।)
८. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके सर पर से नींबू को 7 बार उतार कर उसे 4 भाग में काट कर किसी भी चौराहे पर (चारों दिशाओं में) फेंक देने से नजर दोष दूर हो जाती है।
९. अकसर लोगों से सुनने में आता है कि उनके बच्चे पर किसी की नजर लग गयी है जिस कारण से वह बहुत अधिक रोने लगता है इस परिस्थिति में लाल मिर्च, अजवायन और पीली सरसों को मिट्टी के छोटे से बर्तन में जलाकर उसके धुएं को बच्चे के सर पर से पैर तक 7 बार देने से लाभ मिलता है। (यह क्रिया करते समय एक मंत्र का जाप किया जाता है वह मंत्र जानने हेतु आप 9919367470 या 7007245896 पर संपर्क कर सकते हैं।)
१०. यदि गर्भवती महिलाओं को नजर लग जाए तो इस परिस्थिति में गोबर, गुड़ और रुई को एक छोटे दिए में जलाकर कमरे (जिस कमरे में गर्भवती महिला रहती हो) के द्वार के बीच में जला देने से नजर दोष दूर हो जाती है।
नजर दोष: जानें नजर दोष के कुछ लक्षण व उनके अचूक उपाय “भाग:-१”
११. यदि नजर दोष के कारण से व्यक्ति को भोजन करने की इच्छा न करती हो या भूख लगना बंद हो गयी हो उनके सर पर से रोटी में तेल लगाकर 7 बार उतार को काले कुत्ते को खिलाने से नजर दोष दूर हो जाती है।
१२. एक गिलास पानी को नजर लगे व्यक्ति के सर पर से 7 या 11 बार उतारकर उसे नाली में बहा देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है।
१३. माचिस की 4 तीली को नजर लगे व्यक्ति के सर पर से 7 बार उतार कर पाँचवीं तीली से जला देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है।
१४. कपूर, फिटकरी, सेंधा नमक को व्यक्ति के सर पर से 7 बार उतार कर जला देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है।
१५. जिस व्यक्ति को नजर लगी हो उसके सर पर से राई, कपूर, फिटकरी को 7 बार उतारकर किसी चौराहे पर जाकर जला देने से भी नजर दोष से लाभ मिलता है। (यह उपाय मौन व्रत धारण कर के करना चाहिए तथा मन में इष्ट देव के किसी भी मंत्र का जाप कर उनसे प्राथना करनी चाहिए जब तक उपाय संपन्न न हो जाए तब तक पीछे मुड़कर भी नही देखना चाहिए।)
काशी में स्थित बटुक भैरव का हरियाली एवं जल बिहार श्रृंगार महादेव के बालरूप दर्शन कर भक्त हुए निहाल
बाबा बटुक भैरव
वाराणसी (काशी ) के कमच्छा क्षेत्र में महादेव के बालरूप बटुक भैरव जी का प्रसिद्ध मंदिर है जहाँ प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी हरियाली एवं जल बिहार श्रृंगार किया गया आज के दिन के बाबा के इस श्रृंगार की भक्तगण सदैव प्रतीक्षा करते हैं, हर वर्ष की भाँति इस वर्ष भी प्रातः 5 बजे बटुक भैरव जी का पंचामृत से स्नान करा कर मंगला आरती संपन्न की गई तथा रात्रि 9 बजे बटुक भैरव जी की महा आरती 1008 दीपों एवं सवा किलो कपूर के साथ संपन्न की गई तथा 51 डमरूओं के साथ आरती गान किया गया।
सूर्य का सिंह राशि से गोचर 16 अगस्त 2020: जानें किन राशि वालों की चमक जाएगी किस्मत
सूर्य का सिंह राशि से गोचर
सूर्य16 अगस्त 2020 को रात्रि के 7 बजकर 27 मिनट पर कर्क राशि को छोड़कर अपनी स्वराशि सिंह में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की कर्क की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की सिंह की सक्रांति लगेगी, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में 30 दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के सिंहराशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-
सूर्य के सिंह राशि में गोचर से पड़ने वाले प्रभाव
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान की उन्नति होगी व संतान का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, प्रेमियों के मध्य क्षणिक विवाद संभव रहेगा, आय सामान्य रहेगी, वाणी पर नियंत्रण रखें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता का सहयोग मिलेगा, दामपत्य जीवन सामान्य रहेगा, प्रमोशन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें व तामसिक चीजों से परहेज करें।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात संभव है, यात्राओं के योग बनेंगे, आवेश में आकर कोई भी निर्णय लेने से बचें, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे आय वृद्धि के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, वाहन सावधानी से चलाएं, नेत्रों में जलन, दर्द या चोट लगने की संभावना रहेगी, अचानक धन लाभ हो सकता है।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए सूर्य पहले भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप देह में स्फूर्ति बनी रहेगी, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, सर दर्द या ज्वर होने की संभावना रहेगी।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे यात्राओं के योग बनेंगे, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद न करें, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, सर दर्द, ज्वर, नेत्रों में जलन, दर्द या चोट लगने की संभावना रहेगी, आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, मित्रों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा व उनसे लाभ भी होगा, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, बड़े भाई-बहन यदि हैं तो उनका पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, नए कार्य की शुरुवात हो सकती है।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे दशम भाव में सूर्य को दिग्बल प्राप्त होने के कारण से सूर्य अत्यधिक शक्तिशाली फल का दाता बन जाता है फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त हो सकती है, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, प्रमोशन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, क्रोध पर नियंत्रण रखें, माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या रह सकती है।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव है, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, सांतान प्राप्ति के योग बनेंगे, भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव है।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप पैतृक संपत्ति प्राप्त होने के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी के वाणी व स्वभाव में तेजी अनुभव होगी जिस कारण उनसे क्षणिक विवाद संभव है, गर्म चीजों के सेवन से परहेज करें, पेट की समस्या हो सकती है।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप दामपत्य जीवन मिला-जुला रहेगा, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, जिनकी उम्र 55 वर्ष से अधिक है वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा।
दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।
प्रत्येक ग्रह की दशा में ९ ग्रह की अंतर्दशा होती है जैसे सूर्य की महादशा में पहली अंतर्दशा सूर्य की, दूसरी चंद्र की, तीसरी मंगल की, चतुर्थ राहु की, पांचवीं गुरु की, छठी शनि की, सातवीं बुध की, आठवीं केतु की व नौवीं शुक्र की इसी प्रकार अन्य ग्रहों में भी समझना चाहिए आशय यह है कि जिस ग्रह की दशा हो उससे सूर्य, चंद्र, भौम के क्रमानुसार अन्य नवग्रहों की अन्तर्दशाएँ होती हैं।
अंतर्दशा निकालने का एक सबसे सरल नियम यह है कि दशा-दशा का परस्पर गुणा कर १० से भाग देने से लब्ध मास और शेष को ३ से गुणा करने से दिन होंगे।
दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सबसे सरल विधि जानें, कैसे ज्ञात किया जाए कि व्यक्ति का जन्म किस दशा में हुआ है व उस दशा का भोग्यवर्ष क्या होगा।
१. सूर्य:- ६ वर्ष २. चंद्र:- १० वर्ष ३. मंगल:- ७ वर्ष ४. राहु:- १८ वर्ष ५. गुरु:- १६ वर्ष ६. शनि:- १९ वर्ष ७. बुध:- १७ वर्ष ८. केतु:- ७ वर्ष ९. शुक्र:- २० वर्ष
उदहारण:-
सूर्य की दशा में अंतर्दशा निकालनी हो तो सूर्य के दशा वर्ष ६ का सूर्य के ही दशा वर्षों से गुणा किया तो:-
६×६= ३६
३६÷१०= ३ मास, शेष ६
६×३= 18 दिन
अर्थात ३ मास १८ दिन सूर्य की अंतर्दशा रहेगी।
इसी तरह सूर्य की दशा मे अन्य ग्रहों की अंतर्दशा:-
चंद्रमा:-
६×१०= ६०, ६०÷१०= ६ मास।
मंगल:-
६×७= ४२, ४२÷१०= ४ मास शेष २, २×३= ६ दिन अर्थात ४ मास ६दिन।
राहु:-
६×१८= १०८, १०८÷१०= १० मास शेष ८, ८×३= २४ दिन अर्थात १० मास २४ दिन।
दशा व उसका भोग्यकाल निकालने की सरल विधि—-Astrology Sutras
दशा और आपके प्रश्न
जन्म के समय किस ग्रह की दशा थी और कितनी दशा भोग्य थी यह ज्ञात करने की सबसे सरल विधि को प्रस्तुत करता हूँ जो कि ज्योतिष के विद्यार्थियों के लिए तो वरदान साबित होगी ही साथ ही जनसामान्य भी इसको सरलता से ज्ञात कर सकेंगे तो सबसे पहले हम यह जानने का प्रयास करते हैं कि व्यक्ति का जन्म किस ग्रह की दशा में हुआ है।
किस ग्रह की दशा में हुआ व्यक्ति का जन्म:-
दशा ज्ञात करने की विधि
व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित होंगे उस नक्षत्र के स्वामी की दशा में व्यक्ति का जन्म होता है।
नक्षत्र व उनके स्वामी का विवरण इस प्रकार है:-
१. कृतिका, उत्तराफाल्गुनी और उत्तराषाढ़ा के स्वामी सूर्य होते हैं जिनकी दशा 6 वर्ष की होती है।
२. रोहिणी, हस्त और श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा होते है जिनकी दशा 10 वर्ष की होती है।
३. मृगशिरा, चित्रा और धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल होते हैं जिनकी दशा 7 वर्ष की होती है।
४. आर्द्रा, स्वाती और शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु होते हैं जिनकी दशा 18 वर्ष की होती है।
५. पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी गुरु होते हैं जिनकी दशा 16 वर्ष की होती है।
६. पुष्य, अनुराधा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनि होते हैं जिनकी दशा 19 वर्ष की होती है।
७. आश्लेषा, ज्येष्ठा और रेवती नक्षत्र के स्वामी बुध होते हैं जिनकी दशा 17 वर्ष की होती है।
८. मघा, मूल और अश्विनी नक्षत्र के स्वामी केतु होते हैं जिनकी दशा 7 वर्ष की होती है।
९. पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा और भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र होते हैं जिनकी दशा 20 वर्ष की होती है।
दशा का भोग्यकाल ज्ञात करने की सरल विधि:-
दशा का भोग्यकाल ज्ञात करने की सरल विधि
जन्म के समय किसी ग्रह की कितनी दशा भोग्य थी यह ज्ञात करने के लिए सर्वप्रथम यह देखिए कि जन्म के समय किस नक्षत्र में है और जन्म के बाद कितने समय/घड़ी तक उस नक्षत्र में रहेगा, जितने समय/घड़ी तक चंद्रमा उस नक्षत्र में और रहेगा उन घड़ियों/समय को महादशा के मान से गुणा कर के 60 से भाग देने पर हमें यह ज्ञात हो जाता है कि दशा का भोग्यकाल कितना रहेगा।
उदाहरण:-
मान लीजिए जन्म के समय पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ व उसके 20 घड़ी शेष थे ऊपर मैंने बताया है कि पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी गुरु होते हैं जिनकी दशा 16 वर्ष की होती है अतः अब हम गुरु की कितनी दशा मनुष्य जन्म के बाद भोगेगा यह निकालते है:-
20×16 16 ———— = ——— = 5 शेष 4 60 6
अर्थात 5 वर्ष 4 माह और वह व्यक्ति जन्म के बाद गुरु की दशा भोगेगा।