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भाग्यांक 4 शांति का प्रतीक है ऐसे व्यक्ति सहिष्णु, सौम्य, विपत्ति में भी धीरज न खोने वाले और गंभीर प्रकृति के होते हैं, इनका दिमाग शांत होता है और जरा-जरा सी बात में ये उफनते नही है यद्यपि लोगों के मन में इनके प्रति संदेह ही बना रहता है तथापि इनके कार्यो में कोई ऐसा दोष नही होता जिस कारण इन पर उंगली उठाई जा सके, नवीनता एवं शोध इनके जीवन के प्रमुख गुण हैं कुछ न कुछ नया हो, नवीनतम हो तथा जहां तक भी हो सके गहराई में पहुंचा जाए यही इनकी विशेषताएं होती हैं, ये मौलिक विचारों के धनी होते हैं तथा इनके प्रत्येक तर्क में नवीनता एवं वास्तविकता के दर्शन हो सकते हैं।
अंक ज्योतिष
भाग्यांक 4 वाले व्यक्तियों का कोई भी कार्य अव्यवस्थित नही होता, अपितु ये पूर्ण योजनाबद्ध रूप से आगे बढ़ते हैं भविष्य को पहचानने की इनमे अद्भुद क्षमता होती है तथा जो भी अनुमान ये लगाते हैं, वह आगे चलकर पूर्णतयः सही उतरता है ऐसे व्यक्ति भाग्यशाली कहे जा सकते हैं क्योंकि परिस्थितियां स्वतः ही कुछ इस प्रकार बनती चली जाती हैं कि ये अपना रास्ता बनाते हुए जीवन पथ पर अग्रसर होते रहते हैं, यद्यपि ये योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ते हैं, तथापि आर्थिक क्षेत्र में कभी-कभी पिछड़ जाते हैं इनका बजट हमेशा असंतुलित रहता है तथा जेब में पैसा नही टिकता, भावुक एवं सरल हिर्दय होने के कारण इनका काफी समय एवं द्रव्य लोकहित में ही समाप्त हो जाता है जो कि बजट असंतुलन का एक कारण यह भी होता है।
भाग्यांक 4 वाले व्यक्ति अधिकतर एकांतप्रिय होते हैं तथा अधिक घुलते-मिलते नही इसलिए इनके मित्र भी सीमित होते हैं तथा इनकी रुचियाँ भी एकांतिक होती हैं, सामान्यतः इनका स्वास्थ ठीक ही रहता है परंतु फिर भी ये स्वास्थ के प्रति हमेशा चौकन्ने भी बने रहते हैं, इनका आहार संतुलित होता है एवं रहन-सहन सीधा एवं सादगीपूर्ण होता है, शिक्षक, लैक्चरार, प्रोफ़ेसर, इंजीनियरिंग विभाग व लेखन आदि कार्य इनके व्यक्तित्व एवं उन्नति में विशेष सहायक होते हैं, यदि ये अधिक घुलने-मिलने एवं मित्र बनाने में सिद्धहस्त हों या बहिर्मुखी वृत्ति को यथासंभव उजागर बनाए रखें तो अधिक सफल हो सकते हैं।
ज्योतिष में एक बात जो बहुत ही अधिक प्रचलन में है कि उच्च के ग्रह हमेशा शुभ फल देते हैं व नीच के ग्रह हमेशा अशुभ फल देते है यह पूर्णतया सत्य नही है कभी-कभी उच्च के ग्रह भी अशुभ फल व संघर्ष देते हैं और नीच के ग्रह शुभ फल देकर जीवन में स्थायित्व प्रदान करते हैं तो चलिए जानते है कि किन परिस्थितियों में उच्च के ग्रह शुभ और नीच के ग्रह अशुभ नही होते है:-
१. यदि कुंडली में कोई ग्रह उच्च राशि के होकर बैठे हों किन्तु नवमांश में पाप वर्ग के हों, शत्रु राशि के हों, नीच राशि के हों, क्रूर ग्रह की राशि में हों, त्रिक भाव में हो, तो उनकी शुभता में कमी आती है तथा ऐसे ग्रह कुंडली में उच्च के होकर भी बहुत शुभ नही होते।
२. यदि कुंडली में त्रिक भाव के स्वामी उच्च के होकर विराजमान हो तो जीवन में संघर्ष बना रहता है तथा कड़े संघर्ष के उपरांत बड़ी सफलता प्राप्त होती है।
३. यदि कुंडली में अकारक ग्रह उच्च राशि के होकर बैठे हों तो वह शुभ नही होते ऐसे व्यक्तियों के जीवन में निरंतर संघर्ष की स्थिति बनी रहती है अब प्रश्न यह उठता है कि अकारक ग्रह कौन होते है तो ऐसे ग्रह जो त्रिकोण के स्वामी न हों तथा त्रिक भाव के स्वामी हों और लग्नेश के शत्रु हों ऐसे ग्रहों को अकारक ग्रह की संज्ञा दी गयी है।
४. यदि कुंडली में कोई ग्रह उच्च राशि का हो किन्तु भाव चलित में स्थान परिवर्तन करता हो तो इस परिस्थिति में भी उसके शुभ फल में कमी आ जाती है तथा ऐसे व्यक्ति जीवन में कड़े संघर्ष के उपरांत सफलता को प्राप्त करते हैं।
५. यदि कुंडली में कोई ग्रह नीच राशि का हो किन्तु नवमांश में शुभ वर्ग का हो, मित्र राशि का हो, स्वराशि या मूलत्रिकोण राशि का हो, उच्च राशि का हो, सौम्य ग्रह की राशि में हो, शुभ ग्रह से दृष्ट हो तो उसकी अशुभता में कमी आती है।
६. यदि कोई ग्रह त्रिक भाव का होकर लग्न कुंडली में नीच राशि का हो तो इस परिस्थिति में भी उसके अशुभ फल में कमी आ जाती है।
७. यदि कोई ग्रह नीच राशि का होकर किसी ऐसे ग्रह से दृष्ट या युत हो जो उस ग्रह की उच्च राशि, स्वराशि, मूलत्रिकोण राशि हो तो इस परिस्थिति में भी नीच राशि स्थित ग्रह के अशुभ फल में कमी आ जाती है।
८. यदि कोई अकारक ग्रह (ऐसे ग्रह जो लग्न के मित्र न हो व त्रिकोण के स्वामी न हो साथ ही त्रिक भाव के स्वामी हों) नीच राशि के होकर स्थित हों तो इस परिस्थिति में भी उस ग्रह के अशुभ फल में कमी आ जाती है।
९. यदि नीच राशि में स्थित ग्रह की नवमांश में वर्गोत्तम स्थिति हो तो इस परिस्थिति में भी उस ग्रह के अशुभ फल में कमी आ जाती है अब प्रश्न यह उठता है कि वर्गोत्तम स्थिति कैसे देखी जाती है, ऐसे ग्रह जो लग्न कुंडली व नवमांश दोनों में एक ही राशि में स्थित हो तो उन्हें वर्गोत्तम ग्रह कहते हैं।
१०. यदि नीच राशि में स्थित ग्रह अंशों में कमजोर हो कहने का तात्पर्य कि ऐसे ग्रह जो 0° से 4° व 24° से 30° के मध्य हो तो उसकी अशुभता में कमी आ जाती है।
११. यदि उच्च राशि में स्थित ग्रह अंशों में कमजोर हो कहने का तात्पर्य कि ऐसे ग्रह जो 0° से 4° व 24° से 30° के मध्य हो तो उसकी शुभता में कमी आ जाती है।
१२. यदि नीच राशि में स्थित ग्रह पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो इस परिस्थिति में भी उस ग्रह के अशुभ फल में कमी आ जाती है ठीक इसी प्रकार यदि उच्च राशि में स्थित ग्रह पर क्रूर या शत्रु ग्रह की दृष्टि हो तो उस परिस्थिति में उच्च ग्रह के शुभ फल में कमी आ जाती है।
१३. यदि उच्च राशि में स्थित ग्रह पर क्रूर ग्रह व शत्रु ग्रह की दृष्टि हो तो उच्च राशि में स्थित ग्रह के शुभ फल में कमी आ जाती है।
१४. यदि उच्च राशि में स्थित ग्रह केंद्र या त्रिकोण के स्वामी होकर त्रिक भाव (6, 8 व 12 भाव को त्रिक भाव कहते हैं) में स्थित हो तो उच्च राशि में स्थित ग्रह की शुभता में कमी आ जाती है।
१५. यदि नीच राशि में स्थित ग्रह एकादश भाव में स्थित हो व शुभ ग्रह (गुरु व शुक्र) द्वारा देखा जाता हो तो इस परिस्थिति में भी नीच राशि में स्थित ग्रह के अशुभ फल में कमी आ जाती है।
मीन लग्न वालों के लिए मार्च 2020 अच्छा रहने वाला है माह के शुरुवात में लग्नेश गुरु का दशम भाव से गोचर हंस योग बनाएगा और उसके साथ में मंगल व केतु की युति प्रमोशन के योग बनाएगी, मीन लग्न वालों के लिए मंगल धनेश व भाग्येश होते हैं जो कि कर्म स्थान से गोचर करेंगे साथ ही मंगल को दशम भाव में दिग्बल भी प्राप्त होता है अतः मंगल इस माह आपके मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि कराएंगे, भाग्येश का कर्म स्थान से गोचर भाग्य की सहायता से कारोबार में उन्नति के मार्ग खोलेंगे तथा आय में वृद्धि के योग बनाएंगे, गुरु मतलब ज्ञान अर्थात ज्ञान का ग्रह आपके कर्म स्थान से गोचर आपके ज्ञान के माध्यम से आपका लोहा मनवाएगा, 10 मार्च से 28 मार्च के मध्य प्रमोशन मिलने के अच्छे योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए भी यह माह काफी अच्छा जाएगा, चतुर्थ भाव से राहु का गोचर मानसिक शांति को भंग कर सकता है अतः नित्य कुछ देर ध्यान करें, यदि आप घर लेने की सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय इंतजार करें क्योंकि जैसा मैंने पिछले माह के गोचरफल में भी बताया था कि चतुर्थ से राहु का गोचर वास्तु दोष वाला घर आपको दिलवा सकता है यदि घर लेना बहुत जरूरी हो तो अच्छे वास्तु परामर्श से सलाह कर के ही लें।
मीन राशि
माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का गोचर आपके द्वादश भाव से रहेगा जिस कारण से यात्राओं के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें चूँकि मंगल, गुरु व केतु की युति कर्म स्थान में और सूर्य की छठे भाव पर दृष्टि है तो वह आपका नुकसान नही कर पाएंगे परंतु फिर भी उनसे सतर्क रहें, जीवनसाथी के साथ विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः फालतू विवाद को टालने का प्रयास करें, कार्य के सिलसिले से कोई यात्रा होने के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, 14 मार्च को सूर्य गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे फलस्वरूप स्वास्थ्य में कोई परेशानी हो सकती है, सर दर्द की समस्या रह सकती है, अत्यधिक स्वाभिमानी होने से बचें क्योंकि लग्न से सूर्य का गोचर आपके अंदर कहीं न कहीं अहंकार की उत्पत्ति करेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का धन भाव से गोचर धन अधिक व्यय कराएगा, दवाइयों पर धन व्यय हो सकता है, जीवनसाथी/माता के स्वास्थ्य में परेशानी रह सकती है 28 मार्च को शुक्र गोचर बदलकर आपके तीसरे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप आप मेहनत अधिक करेंगे, किसी पड़ोस के विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित हो सकते हैं, ससुराल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में परेशानी संभव हो सकती है, 22 मार्च को मंगल गोचर बदलकर आपके लाभ स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप आपको मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है और मेहनत का पूर्ण फल आपको प्राप्त होगा, बड़े भाई यदि हाँ तो उनकी उन्नति होगी, 30 मार्च को गुरु भी गोचर बदलकर आपके लाभ स्थान में आकर नीचभंग राजयोग बनाएंगे विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, (इसको विस्तार से अगली पोस्ट अप्रैल 2020 के गोचरफल में लिखूँगा), प्रेमियों के लिए अच्छा दिन रहेगा, लाभ स्थान से शनि का गोचर रहने के कारण से आय वृद्धि हेतु थोड़ा परिश्रम करना पड़ेगा, जीवन में भागा-दौड़ी रहेगी, धन अधिक व्यय होगा, यात्राओं पर धन व्यय होगा, पशु व वाहन से सावधान रहें।
कुल मिलाकर मीन लग्न वालों के लिए मार्च 2020 अच्छा रहने वाला है जिसमें प्रमोशन के योग बनेंगे, आय में वृद्धि होगी, समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा, कार्यक्षेत्र पर शत्रु आपके पीठ-पीछे षडयंत्र रचेंगे, जीवनसाथी से विवाद हो सकता है, दवाइयों पर धन व्यय होगा, माह की 8 और 9 तारीख व चन्द्र जब भी 6, 8 व 12 भाव से गोचर करें तब विशेष सावधान रहें, मेरे अनुसार यदि मीन लग्न के व्यक्ति नित्य विष्णुसहस्त्र नाम का पाठ करें व कुष्ठ रोगियों की सेवा करें तो लाभ प्राप्त होगा।
सुंदर्शन चक्र को ज्योतिष में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है जब भी आप कुंडली देखते होंगे तो उसमें सभी वर्गों के साथ एक सुदर्शन चक्र भी बना होता है आखिर सुदर्शन चक्र क्या है व इसको ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान क्यों प्राप्त है यह जानने की जिज्ञासा सब में रहती है तो चलिए अब मैं आप सभी को सुदर्शन चक्र के बारे में विस्तृत जानकारी देता हूँ:-
सुदर्शन चक्र:-
सुदर्शन चक्र
एक केंद्र बिंदु से तीन वृत्त बनाकर उसमें तुल्य भाग से 12 रेखाएं खींचने पर सुदर्शन चक्र बनता है, इस चक्र को बनाने के लिए हमे तीन प्रकार की कुंडलियों की जरूरत पड़ती है:-
१. लग्न कुंडली, २. चंद्र कुंडली, ३. सूर्य कुंडली
इन तीनो कुंडलियों के सभी ग्रहों को उनकी स्थिति अनुसार एक साथ ऊपर से नीचे (पहले लग्न कुंडली उसके बाद चंद्र कुंडली व सबसे आखिर में सूर्य कुंडली) रखने पर सुदर्शन चक्र के माध्यम से हमे एक भाव में ३-३ राशियां प्राप्त होती हैं, इसमें लग्न-चंद्र और सूर्य प्रथम भाव में पड़ते हैं उसी को तनु भाव मानकर आगे क्रमशः धन-सहज आदि सभी भाव होते हैं, इसमें प्रत्येक भाव में ग्रहों की स्थिति वश फल विचार होता है, इसमें तनु भाव में सूर्य शुभ व अन्य भाव में अशुभ होता है, पाप ग्रह यदि उच्च या स्वराशि के हों तो अशुभ नही होते, इस प्रकार ग्रहों को शुभ-अशुभ समझकर ग्रहों के योग-दृष्टि अनुसार फल कथन होता है।
१. जो भाव अपने स्वामी या शुभ ग्रह से युत-दृष्ट हो उस भाव की वृद्धि एवं जो भाव पाप ग्रहों से युत-दृष्ट हो उसकी हानि होती है।
२. यदि किसी भी भाव पर कोई ग्रह स्थित नही हो तो ऐसी स्थिति में उस भाव पर जिस ग्रह की दृष्टि हो उस ग्रह के फल उस भाव पर मिलते हैं।
३. जिसमें केवल शुभ ग्रह हों उसका फल शुभ, जिसमें केवल अशुभ ग्रह हों उसका फल अशुभ व जिसमें शुभ व अशुभ दोनों ग्रह हों उसका सामान्य फल होता है ठीक इसी प्रकार से ग्रहों की दृष्टि के भी फल होते हैं।
४. दृष्टि फल में जिस ग्रह की दृष्टि अधिक बली होगी उस ग्रह के शुभ-अशुभ अनुसार फल मिलते हैं।
५. यदि कोई भाव ऐसा हो जिस पर न तो कोई ग्रह बैठा है और न ही उस भाव पर किसी ग्रह हो तब उस भाव में स्थित राशि के स्वामी के अनुसार फल का विचार किया जाता है।
पोस्ट की लंबाई को देखते हुए शेष भाग को अगली पोस्ट में जल्द ही प्रकाशित करूँगा।
मकर लग्न वालों के लिए मार्च का महीना बेहद शुभ रहने वाला है माह के शुरुवात में आपकी कुंडली के राजयोगकारक ग्रह शुक्र का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा जिस कारण से आपके घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माता से संबंध मधुर होंगे, यदि आप घर खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह माह काफी अच्छा रहेगा क्योंकि द्वादश भाव से गोचर कर रहे गुरु की पंचम दृष्टि आपके चतुर्थ भाव पर रहेगी जो कि आपके लिए घर व वाहन के अच्छे योग बनाएगी, घर में कोई शुभ कार्य हो सकता है, नौकरी पेशा लोगों के कार्य की सीनियर सराहना करेंगे व प्रमोशन की भी बात चल सकती है, कार्य क्षेत्र में काफी समय से जो दिक्कतें आ रही थी उनसे कुछ राहत मिलेगी व जीवन में कुछ स्थायित्व आना शुरू होगा क्योंकि शुक्र की सप्तम दृष्टि आपके कर्म स्थान पर है जो कि शुक्र की मूलत्रिकोण राशि है साथ ही शनि की दसवीं दृष्टि भी कर्म स्थान पर शनि की उच्च राशि पर है इसलिए आप ईमानदारी से ही अपना कार्य करें और उन्नति प्राप्त करने हेतु कोई छोटा रास्ता न खोजें क्योंकि शनि का नाम ही मंद है अतः शनै-शनै अर्थात धीरे-धीरे अब आपके जीवन में स्थायित्व आना शुरू होगा, व्यापारियों के लिए यह माह बेहद शुभ रहेगा यदि आप शनि या शुक्र ग्रह से जुड़ा कोई कार्य करते हैं तो यह माह आपके लिए उन्नति के नए अवसर लेकर आएगा, माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का गोचर आपके धन भाव से रहेगा जिस कारण से कुछ झंझटों के साथ आय में वृद्धि होगी व दवाईयों पर धन व्यय होगा, भाग्येश का धन भाव से गोचर भाग्य की सहायता से आय वृद्धि के योग बनाएगा किन्तु बुध षष्ठेश व सूर्य अष्टमेश का भी दोष लेकर दूसरे भाव से गोचर कर रहे हैं अतः धन को लेकर कुछ चिंता रहेगी, दूसरे भाव से कुटुंब का भी विचार किया जाता है अतः कुटुंब से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे 14 मार्च को सूर्य गोचर बदलकर आपके तीसरे भाव में आ जाएंगे फल स्वरूप आपके छोटे भाई-बहन यदि हैं तो उनके स्वभाव में तेजी आएगी व उनके स्वास्थ्य में कुछ परेशानी संभव हो सकती है, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, रुके हुए कार्य पूर्ण होने के मार्ग कुछ हद तक खुलते नजर आएंगे।
मकर राशि
माह के शुरुवात में गुरु, मंगल व केतु का गोचर आपके द्वादश भाव से रहेगा द्वादश भाव में अपनी मूल त्रिकोण राशि से गोचर कर रहा गुरु यात्राओं के योग बनाएगा, धार्मिक यात्रा हो सकती है, यदि आप कोई जमीन खरीदना चाहते हैं तो 21 मार्च तक का इंतजार कर लें क्योंकि मंगल अर्थात भूमि और द्वादश भाव व्यय भाव है जहाँ वह (मंगल) केतु से युत है अतः आपको उसमें कुछ नुकसान हो सकता है या धोखा मिल सकता है, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, पिछले ढाई वर्षों से आपने खर्च बहुत अधिक किया व आपको अकेलापन अनुभव हुआ साथ ही आपके मन में एक असंतोष हमेशा बना रहा चूँकि अब शनि आपके लग्न से गोचर कर रहे हैं तो इन सब से कुछ राहत मिलेगी किन्तु गुरु का अभी व्यय भाव से गोचर आपके धन परिवार, बुजुर्ग व संतान पर खर्च कराता रहेगा 30 मार्च 2020 को गुरु गोचर बदलकर आपके लग्न में आ जाएंगे जिस कारण से आपको खर्चों में कुछ राहत मिलती दिखेगी (इसको मैं अपनी अगली पोस्ट अप्रैल 2020 के गोचरफल में विस्तार से लिखूँगा), शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, 28 मार्च को शुक्र गोचर बदलकर आपके पंचम भाव में आ जाएंगे पंचम भाव से विद्या, संतान, प्रेम का विचार किया जाता है अतः संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो आपके प्रेम संबंध मजबूत होंगे, प्रेम विवाह के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, आय में वृद्धि होगी।
कुल मिलाकर मकर लग्न वालों के लिए मार्च 2020 अच्छा रहेगा जिसमें प्रमोशन की भी बात चल सकती है, कार्य क्षेत्र में काफी समय से जो दिक्कतें आ रही थी उनसे कुछ राहत मिलेगी, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माता से संबंध मधुर होंगे, यदि आप घर खरीदना चाहते हैं तो उसके लिए भी यह माह काफी अच्छा रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, फालतू विवाद में न पड़ें, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, जब भी चन्द्र आपके 6, 8, 12 भावों से गोचर करेंगे तब स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें व तनाव लेने से बचें, मेरे अनुसार यदि मकर लग्न के व्यक्ति नित्य शनि स्त्रोत का पाठ करें व सूर्य को जल दें तो बेहद शुभ रहेगा।
शुक्र का मेष राशि से गोचर 29 फरवरी 2020: जाने किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा किन राशि वालों को चमकेगी किस्मत
शुक्र का मेष राशि से गोचर 29 फरवरी 2020
वैदिक ज्योतिष में शुक्र को कला, वैभव, सौंदर्य, प्रेम, भौतिक सुख, का कारक माना गया है सामान्य शब्दों में समझा जाए तो हर प्रकार के सुख जिनसे प्राप्त होते हैं उन सभी के कारक शुक्र होते हैं यह देव गुरु वृहस्पति के भाई व दैत्यों के आचार्य हैं नव ग्रहों में एकमात्र शुक्र ही है जिन्हें मृत संजीवनी विद्या का ज्ञान है, 28 फरवरी 2020 की मध्य को रात्रि 1 बजकर 30 मिनट 59 सेकंड पर शुक्र गोचर बदलकर मेष राशि में गोचर करेंगे जिसके कारण से विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त होंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के मेष राशि से गोचर के दौरान किन राशियों को क्या फल प्राप्त होंगे:-
शुक्र का गोचर परिवर्तन
मेष राशि:-
मेष राशि वालों के लिए शुक्र दूसरे व सातवें भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे जिस कारण से धन की वृद्धि हेतु थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी व उस मेहनत का पूर्ण फल भी प्राप्त होगा, कुटुंब का सहयोग भी प्राप्त होगा, जीवनसाथी आपको नियंत्रित करने का प्रयास करेंगे, बेरोजगार लोगों को नौकरी प्राप्त होगी, प्रमोशन को लेकर बात चल सकती है।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशि
वृषभ राशि वालों के शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व छठे भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, यात्राओं के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, फिजूल खर्चों को टालने का प्रयास करें।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशि
मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र द्वादश व पंचम भाव के स्वामी होकर लाभ स्थान से गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान की उन्नति होगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, घर में नए मेहमान का आगमन संभव है, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उन्हें कन्या संतति की प्राप्ति हो सकती है, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा।
कर्क राशि:-
कर्क राशि
कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व एकादश भाव के होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप माता का सहयोग प्राप्त होगा, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव होगा, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, किसी महिला के सहयोग से कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, आय में वृद्धि होगी, नौकरी पेशा लोगों को मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, किसी महिला के प्रति आपका ध्यान आकर्षित होगा, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा।
सिंह राशि:-
सिंह राशि
सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तीसरे व दशम भाव के स्वामी होकर भाग्य भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी, यदि आपकी कोई बहन है और विवाह योग्य हो गयी हैं तो उनके विवाह के योग बनेंगे, कार्य के सिलसिले से यात्राएं होंगी जो कि लाभदायक सिद्ध होगी, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की बात चल सकती है, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना करेंगे, यदि आपके भाई-बहन विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह की बात चल सकती है।
कन्या राशि:-
कन्या राशि
कन्या राशि वालों के लिए शुक्र दूसरे व नवम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाइयों पर धन व्यय होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न होगी अतः तनाव लेने से बचें, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, आय में वृद्धि होगी, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, अपनी वाणी के प्रभाव से आय वृद्धि के नए स्त्रोत बनाने में सफल होंगे, अचानक धन लाभ होगा।
तुला राशि:-
तुला राशि
तुला राशि वालों के लिए शुक्र लग्न व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, यदि आप पार्टनरशिप में काम करते हैं तो उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के स्वास्थ्य में कोई परेशानी आपकी चिंता का कारण बन सकती है, नौकरी पेशा लोगों को कुछ बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है जिससे आप तनावग्रस्त रह सकते हैं किंतु बुद्धि व विवेक द्वारा आप इन बाधाओं से जल्दी पार पा लेंगे, नए मित्र बनेंगे।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सातवें व द्वादश भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, कोई गुप्त संबंध बन सकता है, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, नौकरी पेशा लोगों को मेहनत अधिक करनी पड़ सकती है, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, महिलाओं से फालतू विवाद में न पड़ें अन्यथा अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, पुराने कर्ज से मुक्ति मिलेगी, जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।
धनु राशि:-
धनु राशि
धनु राशि वालों के लिए शुक्र एकादश व छठे भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, प्रमोशन के योग बनेंगे, यदि आपकी कोई कन्या संतान है तो उनकी उन्नति होगी, प्रेमियों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद अच्छा रहेगा, प्रेम विवाह के लिए यदि आप प्रयास कर रहे हैं तो इस माह आपके प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, संतान को कष्ट संभव रहेगा, फालतू विवाद से बचें।
मकर राशि:-
मकर राशि
मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक हो जाते हैं जो कि आपके चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, वाहन, भूमि खरीदने के योग बनेंगे, जीवन में स्थायित्व आएगा, प्रेमियों के लिए यह माह काफी अच्छा रहेगा, किसी महिला के सहयोग से भाग्य की वृद्धि होगी, विद्यार्थोयों के लिए यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, जिनका विवाह हो गया है व संतान की इच्छा रखते हैं उन्हें कन्या संतति की प्राप्ति होगी, घर में कोई शुभ काम होने के योग बनेंगे।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक हो जाते हैं जो कि आपके तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, लंबे समय से रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, घर में खुशियों का माहौल रहेगा, नौकरी पेशा लोगों की प्रमोशन मिल सकता है, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा व मित्रों या परिवार वालों के साथ धार्मिक यात्रा पर जा सकते हैं, कोई महिला आपकी उन्नति में सहायक सिद्ध होगी, विवाह के योग बनेंगे, आय में वृद्धि होगी, मन प्रसन्न रहेगा, बहन का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा।
मीन राशि:-
मीन राशि
मीन राशि वालों के लिए शुक्र तीसरे व अष्टम भाव के स्वामी होकर धन भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप स्वास्थ्य में कुछ परेशानी संभव है, दवाइयों पर धन व्यय होगा, शत्रुओं से सावधान रहें, आय में वृद्धि होगी, सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए अच्छा समय रहेगा, भाई-बहन की उन्नति होगी, किसी तीसरे व्यक्ति के कारण कुटुंब से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, पैतृक संपत्ति प्राप्त हो सकती है।
जीवन में पूर्ण महत्त्वाकांक्षा पाले हुए भाग्यांक 3 वाले व्यक्ति अपने दिल में धरती से उठकर आसमान को चूम लेने का हौसला संजोए हुए रहते हैं परंतु परिस्थितियाँ कुछ इस प्रकार इनके इर्द-गिर्द बनी रहती है कि ये चाह कर भी ऊँचे नही उठ पाते, अत्यधिक श्रम एवं संघर्ष तथा न्यूनतम उपलब्धि इनके जीवन में बनी रहती है, संकट एवं विरोधी वातावरण के बीच भी ये रास्ता निकालने में सक्षम होते हैं इन्हें ऐसा कोई काम पसंद नही जो ठंडा हो, लिजलिजा हो या जिसमें उफान न हो, शांत रूप से बैठे रहना इन्हें सहन नही होता इन्हें काम चाहिए, श्रम चाहिए, संघर्ष चाहिए और कुछ न कुछ ऐसी उपलब्धि चाहिए जो इन्हें ऊँचा उठा सके व उन्नत कर सके, आर्थिक क्षेत्र में ये धीरे-धीरे उन्नति करते हैं परंतु जितनी भी करते हैं वह ठोस होती है, संयोग कुछ ऐसा होता है कि जो कुछ 4-6महीने में इकट्ठा होता है वह एक ही आकास्मिक झटका आ जाने पर समाप्त हो जाता है।
अंक ज्योतिष
भाग्यांक 3 वालों के जीवन में मित्रता की जगह धन का महत्व अधिक होता है ये जीवन में धन को ही सर्वोपरि महत्व देते हैं परंतु फिर भी सामाजिक होते हैं तथा सामाजिक कर्तव्यों का निर्वाह भी भली प्रकार करते हैं, भाग्यांक 3 वालों का स्वास्थ्य सामान्यतः ठीक रहता है परंतु जरा सी भी तबीयत खराब होने पर उसे बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं, पेट संबंधित परेशानियाँ जैसे अपच, गैस्ट्रिक, ट्रबल आदि इन्हें बनी ही रहती है, भाग्यांक 3 वालों में निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण की शक्ति प्रवल होती है, अधिक से अधिक देखने एवं समझने की भावना इनमें रहती है, कपड़े की दुकान, हौजरी, रेडीमेड माल, एजेंसी तथा रुपयों के लेन-देन का व्यापार अथवा कमीशन संबंधी कार्यों में इनका भाग्योदय जल्दी होता है, छोटी से छोटी बातों पर तुनक जाना तथा उदास हो जाना इन्हें शोभा नही देता अतः ये इस ओर से सावधान रहें तो जीवन में अधिक सफल हो सकते हैं।
भाग्यांक2 वाले व्यक्ति उत्तम वक्ता होते हैं, ये इतने व्यवस्थित एवं सुंदर ढंग से बोलते हैं कि सामने वाले को अपना लोहा मनवाकर ही छोड़ते हैं परंतु साथ ही इनमें एक दुर्गुण भी होता है वह जिद्दी भावना एवं बहस करते रहने की आदत चाहे कुछ भी बात न हो या मामूली सी बात हो ये हर बात को कुछ ऐसा रूप दे देते हैं कि वह विवाद का विषय हो जाती है और फिर ये उनमें बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं, इनके तर्कों में वजन होता है तथा बात कहने के ढंग में प्रभाव इसलिए भाग्यांक 2 वाले व्यक्ति जल्दी ही लोकप्रिय भी हो जाते हैं, भाग्यांक 2 के व्यक्ति जिम्मेदारी कम ही स्वीकार करते हैं इनके प्रियजन ही इनकी सार-सांभर रखने वाली ही इनकी चिंता करती है ये स्वम् निश्चिंत एवं बेपरवाह रहते हैं।
अंक ज्योतिष
भाग्यांक 2 वाले व्यक्ति स्वभाव से रसिक, वृत्ति से विनोदशील एवं कार्यों से श्रेष्ठ माने जाते हैं इनका सार्वजनिक जीवन एक प्रकार का होता है और व्यक्तिगत जीवन दूसरे प्रकार का होता है व्यक्तिगत जीवन में ये जितने स्वच्छंद होते हैं, सार्वजनिक जीवन में उतने ही जिम्मेदार एवं कर्तव्यपरायण होते हैं यदि इनके व्यक्तिगत जीवन को छोड़ दिया जाए तो इनके सार्वजनिक जीवन पर कोई उंगली नही उठा सकता, भाग्यांक 2 वाले व्यक्ति एकांतप्रिय नही रहते अपितु सार्वजनिक जीवन में घुले-मिले रहते हैं, इनकी आय के स्त्रोत एक से अधिक होते हैं तथा दूसरों से पैसा कैसे प्राप्त किया जा सकता है यह भी इन्हें बखूबी आता है, इस प्रकार इनकी धन संग्रह वृत्ति बढ़ी-चढ़ी होती है तथा धन संग्रह करने की कला में ये पारंगत होते हैं।
भाग्यांक 2 वाले व्यक्तियों के मित्रों की संख्या बहुत होती है और समाज के प्रत्येक वर्ग के लोगों से इनकी मित्रता रहती है, बच्चों में बच्चे तथा बड़ों में बड़े यही हो जाना इनकी प्रमुख विशेषता होती है, ये वैधक, चिकित्सा, डॉक्टरी, पशुपालन, मुर्गीखाना, सौंदर्य भंडार तथा जमीन संबंधी कार्यों से अधिक लाभ उठा सकते हैं, उतावलापन, हड़बड़ी तथा लापरवाही इनकी विशेष कमजोरी होती है अतः इनसे जितना अधिक बचा जाएगा भाग्यांक 2 वालों के लिए उतना ही श्रेयस्कर रहेगा।
धनु लग्न वालों के लिए मार्च 2020 बहुत अच्छा रहने वाला है माह के शुरुवात में लग्नेश गुरु का लग्न से गोचर हंस योग का निर्माण करेगा अतः उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, विद्यार्थियों के लिए मार्च 2020 का महीना काफी अच्छा रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह के लिए बात चल सकती है, पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा व भाग्य की शक्ति से रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, पंचमेश मंगल भी केतु व गुरु से युति कर के लग्न से गोचर कर रहे हैं फलस्वरूप आप अपने ज्ञान, बुद्धि व विवेक द्वारा आय वृद्धि के नए माध्यम बनाएंगे, स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ विवाद हो सकता है, अपने क्रोध पर नियंत्रण रखें, धनु लग्न वालों के लिए पिछले 5 वर्ष काफी संघर्ष भरे रहे क्योंकि द्वादश भाव व लग्न से गोचर करते हुआ शनि ने आपको अकेलापन अनुभव कराया, फिजूल के खर्चों पर धन व्यय हुआ किन्तु अब शनि आपके धन भाव में अपनी खुद की मकर राशि से गोचर कर रहे है साथ ही लग्न से गुरु का गोचर है अतः ईश्वर की कृपा आप पर बनेगी, आय के नए स्त्रोत बनेंगे, 22 मार्च को मंगल गोचर बदलकर आपके धन भाव में अपनी उच्च राशि से गोचर करेंगे अतः इस दौरान अपनी वाणी पर नियंत्रण रखें, जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में कोई जोखिम भरा निर्णय न लें क्योंकि शनि व मंगल की युति द्वंद योग का निर्माण करती है चूँकि शनि अपनी ही राशि से गोचर कर रहे हैं व मंगल भी अपनी उच्च राशि से गोचर करेंगे इसलिए अधिक नुकसान नही होगा, तामसिक चीजों व अत्यधिक मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करें।
दैनिक राशिफल धनु राशि
माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का गोचर आपके तीसरे भाव से रहेगा फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी, कोई धार्मिक यात्रा भी संभव है, किसी पड़ोसी या करीब के रिश्तेदार आपकी शादी के लिए रिश्ता ला सकते हैं, यदि आपके कोई छोटे भाई-बहन हैं तो उनकी उन्नति होगी, यदि आपका कार्य बैंक, फाइनेंस, मार्केटिंग से जुड़ा हुआ है तो यह महीना आपके लिए बहुत अच्छा सिद्ध होगा, 14 मार्च को सूर्य गोचर बदलकर आपके चतुर्थ स्थान में आ जाएंगे फलस्वरूप माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, वाहन का सुख भी प्राप्त हो सकता है, मान-सम्मान में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में शुक्र आपके पंचम भाव से गोचर करेंगे पंचम भाव प्रेम को भी दर्शाता है अतः प्रेमियों के लिए यह महीना अच्छा रहेगा, यदि आप किसी को प्रपोज करना चाहते हैं तो यह समय काफी अच्छा रहेगा, जो लोग प्रेम विवाह करना चाहते हैं उनके प्रेम विवाह के योग बनेंगे क्योंकि पंचम से गोचर कर रहे शुक्र पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी, जिनका कार्य सौंदर्य प्रकाशन, वाहन, भूमि से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह माह काफी अच्छा रहेगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे, 28 मार्च को शुक्र गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे अतः किसी महिला से फालतू विवाद में न पड़े अन्यथा अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, गर्भवती महिलाएं इस समय थोड़ा विशेष ध्यान रखें चूँकि 30 मार्च को गुरु भी गोचर बदलकर आपके छठे भाव को देखेंगे अतः यह स्थिति ज्यादा दिन की नही होगी, यदि आप महिला है तो इस माह के अंतिम भाग में हार्मोन्स से जुड़ी समस्या हो सकती है या अंदर से कुछ कमजोरी अनुभव हो सकती है, जिनकी उम्र 55-60 या इससे अधिक है उन्हें जोड़ों, कमर, पैर में दर्द की शिकायत रह सकती है, वाहन सावधानी से चलाएं।
कुल मिलाकर धनु लग्न वालों के लिए मार्च 2020 अच्छा रहेगा जिसमें उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, छोटे भाई-बहन यदि हैं तो उनकी उन्नति होगी, यदि आप विवाह योग्य हो गए है तो विवाह की बात चल सकती है, वाणी पर नियंत्रण रखें, प्रेमियों के लिए यह माह काफी अच्छा रहेगा, प्रेम विवाह के योग बनेंगे, संतान सुख प्राप्त होगा, वाहन सावधानी से चलाएं, जब भी चंद्र 6, 8, 12 भावों से गोचर करेंगे तब स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, मेरे अनुसार यदि धनु लग्न के व्यक्ति नित्य विष्णु सहस्त्रनाम का नित्य पाठ करें व रुद्राक्ष की माला धारण करें तो बेहद शुभ रहेगा।