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Vastu

वास्तु क्या है:-

 

आप सभी लोगों ने वास्तु शास्त्र के बारे में सुना होगा लेकिन बहुत कम लोग ही “वास्तु” के बारे में जानते होंगे चलिए आज मैं आप लोगों को “वास्तु क्या होता है” इस विषय पर बताता हूँ:-

“वस्” धातु एवं “तुण्” प्रत्यय से “वास्तु” शब्द की निष्पत्ति होती है जिसका अर्थ है गृह निर्माण की ऐसी कला जो मनुष्य द्वारा निर्मित घर को विघ्न-प्राकृतिक उत्पादों एवं उपद्रवों से बचाती है।

वास्तु वस्तुतः:-

पृथ्वी, जल, आकाश, वायु और अग्नि इन पांच तत्वों के समानुपातिक सम्मिश्रण का नाम है इसके सही सम्मिश्रण से “बायो-इलेक्ट्रिक मैग्नेटिक एनर्जी” की उत्पत्ति होती है जिससे मनुष्य को उत्तम स्वास्थ, धन व ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।

“मत्स्य पुराण” की सूची में 18 वास्तु शास्त्र के उपदेशक आचार्यों की गढना इस प्रकार से की गई है:-

भृगुरत्रिवसिष्ठश्च विश्वकर्मा मयस्तथा।

नारदो नग्नजिच्चैव विशालाक्षः पुरन्दर:।।

ब्रह्माकुमारो नंदीश: शौनको गर्ग एव च।

वास्तुदेवोशनिरुद्धश्च तथा शुक्र बृहस्पति।।

१. भृगु, २. अत्रि, ३. वसिष्ठ, ४. विश्वकर्मा, ५. मय, . नारद, ७. नग्नजित, ८. विशालाक्ष, ९. पुरन्दर, १०. ब्रह्मा, ११. कुमार, १२. नंदीश, १३. शौनक, १४. गर्ग, १५. वासुदेव, १६. अनिरुद्ध, १७. शुक्र, १८. बृहस्पति इत्यादि 18 वास्तुशास्त्र के प्रवर्तक आचार्य कहे गए हैं।

वास्तुशास्त्र की उत्पत्ति मानव जीवन की साथर्कता एवं लोक कल्याण की भावना को लेकर की गई है शिल्पशास्त्र के मर्मज्ञ आदि विश्वकर्मा कहते हैं:-

वास्तुशास्त्र प्रवक्ष्यामि लोकानां हित काम्यया।

आरोग्य पुत्रलाभं च धनं धान्य लभेन्नरः।।

अर्थात:- इसके अध्यन में व्यक्ति को उत्तम स्वास्थ लाभ, आरोग्य प्राप्ति, पुत्र संतति का लाभ, धन-धान्य व उत्तम ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।
Astrologer:- Pooshark Jetly
Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)
9919367470

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मकर लग्न के लिए वर्ष 2020 कैसा रहेगा:-

मकर लग्न वालों के लिए वर्ष 2020, वर्ष 2019 से काफी अच्छा रहेगा लग्नेश का लग्न से गोचर करना शुभ रहेगा पिछले ढाई वर्ष को यदि देखा जाए तो आपके पैसे बहुत खर्च हुए, अकेलापन अनुभव हुआ, जीवनसाथी से काफी विवाद हुआ, दवाईयों पर धन व्यय हुआ, जिनकी उम्र अधिक थी उनको अस्पताल में एडमिट भी होना पड़ा किन्तु वर्ष 2020 में अब इन सब से राहत मिलेगी लग्न में अपनी खुद की राशि से गोचर कर शनि शश योग बना रहा है जिस कारण से शनि आपको मानसिक शांति का कुछ अनुभव कराएगा, साढ़ेसाती का प्रभाव आपके मस्तिष्क से होगा फिर भी शनि के स्वराशि गोचर करने से आपको लाभ मिलेगा 24, 25 और 26 जनवरी को थोड़ा सावधान रहें क्योंकि लग्न से ही शनि, सूर्य और चंद्र का गोचर रहेगा और लग्न पर ही अमावस्या भी लगेगी उसके बाद वर्ष 2020 उन्नति के मार्ग खुलते जाएंगे, आपके मन में नए विचार आएंगे, शनि की तीसरी दृष्टि तीसरे भाव पर रहेगी अतः आप के पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन यदि हैं तो उनकी भी उन्नति होगी, शनि की सातवीं दृष्टि सप्तम भाव पर है तो कार्य को लेकर भाग-दौड़ करनी पड़ेगी, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा, शनि दसवीं दृष्टि से दशम भाव को अपनी उच्च राशि में देख रहा है तो काम-धंधे के लिए यह ढाई वर्ष बहुत शुभ है, व्यापारियों के लिए अच्छा समय है, बिज़नेस में सफलता मिलेगी, नई नौकरी या नया काम शुरू हो सकता है।

मकर लग्न वाले व्यक्ति कर्म करने के लिए हमेशा तत्पर रहते हैं उनसे खाली नही बैठा जाता उनके काम करने का तरीका भी सबसे अलग होता है वो प्लानिंग कर के काम करते हैं और किसी भी काम को करने के लिए पराक्रम की जरूरत होती है पराक्रम मंगल है इसीलिए मंगल मकर राशि में उच्च का होता है अतः जब मंगल मकर राशि, मिथुन राशि, कर्क राशि, तुला राशि से गोचर करेगा तब भाग-दौड़ अधिक रहेगी, मंगल जब कर्क राशि, मकर राशि, धनु राशि से गोचर करेंगे तब दाम्पत्य जीवन में कुछ तनाव रहेगा, चन्द्र जब कर्क, मिथुन, सिंह, धनु व मकर राशि से गोचर करेंगे तब थोड़ा तनाव की स्थिति रहेगी बाकी पूरा वर्ष आपके लिए अच्छा रहेगा।

द्वादश भाव में अपनी मूल त्रिकोण राशि से गोचर कर रहा गुरु आपका झुकाव अध्यात्म की ओर करेगा क्योंकि मोक्ष कारक ग्रह गुरु, मोक्ष कारक ग्रह केतु के साथ मोक्ष त्रिकोण भाव से युति कर गोचर करेंगे, जब तक गुरु का द्वादश भाव से गोचर रहेगा तब तक धन व्यय होंगे उसके बाद खर्च से कुछ राहत और मिलेगी, मांगलिक कार्यक्रम, संतान, शिक्षा, यात्रा पर धन व्यय होंगे।

द्वादश भाव से गोचर कर रहे गुरु की पंचम दृष्टि चतुर्थ भाव में मेष राशि पर रहेगी अतः घर के माहौल में कुछ मधुरता आएगी व तनाव कम होगा, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, गुरु सातवीं दृष्टि से छठे भाव को देख रहा है अतः रोग व शत्रु पर विजय प्राप्त होगी फिर भी जब तक राहु छठे भाव से गोचर करेंगे तब तक स्वास्थ्य का ध्यान रखें छठे भाव से राहु का गोचर शत्रुओं का दमन करेगा किन्तु कोई गुप्त बीमारी दे सकता है जो विलम्ब से पकड़ में आए, गुरु की नवम दृष्टि अष्टम भाव में है तो गुप्त धन प्राप्ति के योग बनेंगे, कोई लंबे समय से चली आ रही बीमारी से छुटकारा मिलेगा, जो लोग विवाह के योग्य हैं उनके लिए 29 मार्च से 30 जून के समय विवाह के योग बनाएगा इस दौरान उनका विवाह होने के पूरे योग बनेंगे, खर्च से राहत मिलेगी, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, जो लोग संतान की चाह रखते हैं उनके लिए भी यह अच्छा समय है, भाग्य का भी पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, पिता के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

कुल मिलाकर मकर लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 काफी अच्छा रहेगा जिसमें उन्नति के मार्ग खुलेंगे, स्वास्थ्य में सुधार होगा, घर में मांगलिक कार्यक्रम होंगे, धार्मिक यात्रा व विदेश यात्रा के योग बनेंगे मेरे अनुसार यदि मकर लग्न के व्यक्ति प्रत्येक शनिवार शनि मंदिर में जाकर शनि देव को तेल का दीपक अर्पित कर शनि स्तोत्र का पाठ करें व विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करें तो बेहद शुभ रहेगा।

बाकी कौन सा महीना आपके लिए कैसा रहेगा और उस महीने में कौन सा दिन आपके लिए शुभ है व कौन सा अशुभ इसके लिए मैं हर महीने गोचरफल लिखूँगा अतः आप सभी जुड़े रहें व अपना अनुभव भी समय के साथ साझा करते रहें।

जय श्री राम।
Astrologer:- Pooshark Jetly
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धनु लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 कैसा रहेगा:-

धनु लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 सामान्य रहेगा लग्न से गुरु का गोचर शुभ रहेगा, वर्ष 2019 में व्यय भाव से गुरु व लग्न से शनि का गोचर होने के कारण से कार्यक्षेत्र में जो संघर्ष करना पड़ा उससे राहत मिलेगी व अब उस संघर्ष का फल प्राप्त होगा, वर्ष 2020 में लग्न से गुरु का गोचर स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा रहेगा, लग्न से दो मोक्ष कारक ग्रह गुरु व केतु का गोचर अध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ाएगा।

लग्न से गोचर कर रहे गुरु की पंचम दृष्टि पंचम भाव पर रहेगी, पंचम भाव से विद्या, संतान, प्रेम का विचार किया जाता है अतः जिनका विवाह हो गया है और संतान की चाह रखते हैं उनके लिए यह अच्छा समय है संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए भी अच्छा समय है जिनकी पढ़ाई किसी कारण से अधूरी रह गयी थी उनके लिए अपनी पढ़ाई शुरू करने का यह अच्छा समय है, संतान के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा व उनकी उन्नति होगी, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो अपने प्रेम का इजहार करने के लिए यह अच्छा समय साबित होगा, गुरु की सप्तम दृष्टि सप्तम भाव पर है अतः जो लोग विवाह योग्य हो गए है और उनका विवाह नही हुआ है उनके विवाह के योग बनेंगे, नौकरी में उन्नति होगी, नए मित्र बनेंगे किन्तु सप्तम भाव से राहु का गोचर दाम्पत्य सुख में कुछ कमी करेगा जिस कारण से तनाव की स्थिति बनेगी, गुरु की नवम दृष्टि भाग्य भाव पर होने से भाग्य की वृद्धि होगी व भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, धर्म कार्य में रुझान बड़ेगा, घर में कोई मांगलिक कार्यक्रम हो सकते हैं।

29 मार्च 2020 को गुरु गोचर बदलकर मकर राशि में जाएंगे जहाँ खुद की राशि से गोचर कर रहे शनि से युति कर के नीचभंग राजयोग बनाएंगे जिस कारण से कुटुंब की वृद्धि होगी, शत्रुओ पर विजय प्राप्त होगी, यदि आप सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं तो 29 मार्च से 30 जून के समय बेहद शुभ है इस अवसर का लाभ उठाएं, स्वास्थ्य में सुधार होगा, व्यापारियों के लिए अच्छा समय साबित होगा, यदि आप बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं मुख्यतः कम्युनिकेशन से जुड़ा हुआ तो यह अच्छा अवसर है, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन की संभावनाएं बनेंगी, किसी उच्च स्तर के अधिकारी से मुलाकात हो सकती है, पिता की उन्नति होगी, पिता का सहयोग प्राप्त होगा।

24 जनवरी को शनि मकर राशि से गोचर करेंगे धन भाव से शनि का गोचर शुभ नही होता किन्तु ग्रंथकारों का मत है कि क्रूर से क्रूर ग्रह भी अपने भाव की रक्षा करते हैं अतः दूसरे भसव से गोचरस्थ शनि ज्यादा हानिकारक नही रहेगा फिर भी थोड़ा सतर्क रहें, कुटुंब से मतभेद हो सकता है, पशु, वाहन, हथियार से सावधान रहें, जोड़ो, पैर, कमर में दर्द की शिकायत हो सकती है जिनकी उम्र 55-60 के ऊपर है उन्हें विशेष ध्यान रखना चाहिए, आमदनी में वृद्धि होगी, बड़े भाई-बहन यदि है तो उनका सहयोग मिलेगा व उनकी भी उन्नति होगी, माता के स्वास्थ्य का ध्यान रखें।

कुल मिलाकर धनु लग्न वालों के लिए यह वर्ष सामान्य रहेगा जिसमें उनको मेहनत का पूर्ण फल मिलेगा, नजर दोष हो सकता है मेरे अनुसार यदि आप शनिवार के दिन शनि मंदिर जाकर तेल का दीपक अर्पित कर शनि स्तोत्र का पाठ करे, रुद्राक्ष धारण करें व अमावस्या के दिन नारियल बहते पानी में प्रवाहित करें तो शुभ रहेगा।

बाकी कौन सा महीना आपके लिए कैसा रहेगा और उस महीने में कौन सा दिन आपके लिए शुभ है व कौन सा अशुभ इसके लिए मैं हर महीने गोचरफल लिखूँगा अतः आप सभी जुड़े रहें व अपना अनुभव भी समय के साथ साझा करते रहें।

जय श्री राम।
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वृश्चिक लग्न के लिए वर्ष 2020 कैसा रहेगा:-

वृश्चिक लग्न के लिए वर्ष 2020 बहुत अच्छा रहेगा पिछले साढ़े सात वर्ष से तुला, वृश्चिक और धनु राशि से गोचर कर रहे शनि के कारण से जो समस्याएं आईं अब उनका अंत होगा पिछले ढाई वर्ष से जो आपने धनार्जन व धन संचय के लिए संघर्ष किया अब उसका अंत होगा, दूसरे धन भाव से अपनी मूल त्रिकोण राशि धनु से गोचर कर रहा गुरु आमदनी में वृद्धि, प्रमोशन और नए काम की शुरुवात देगा यदि लंबे समय से कोई गंभीर बीमारी चल रही है तो उसका अंत होगा, कुटुंब की वृद्धि होगी, दूसरे भाव से गोचर कर रहा केतु आप के द्वारा बोली गयी बात को सच करेगा अतः थोड़ा सोच कर बोलें, घर में मांगलिक कार्यक्रम होंगे, कोई गंभीर बीमारी नही होगी तथा शत्रुओं से विजय प्राप्त होगी।

24 जनवरी 2020 को शनि गोचर बदलकर मकर राशि में जाएंगे और 29 मार्च को गुरु भी गोचर बदलकर मकर राशि में जाकर नीचभंग राजयोग बनाएंगे उस दौरान आपके कार्य क्षेत्र में उन्नति होगी, छोटे भाई-बहन यदि हैं तो उनका सहयोग प्राप्त होगा, विवाह के योग बनेंगे, नए मित्र बनेंगे, आमदनी में वृद्धि होगी, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, पिता का सहयोग प्राप्त होगा तथा धर्म के कार्यों में रुचि होगी।

आपकी कुंडली के अष्टम भाव से राहु का गोचर भी है अष्टम भाव से गोचर कर रहा राहु बहुत शुभ नही होता अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें 29 मार्च से 30 जून के बीच स्वास्थ्य में कोई परेशानी हो सकती है बाकी समय आपका स्वस्थ्य उत्तम रहेगा क्योंकि गुरु की दृष्टि छठे व अष्टम दोनों भावों पर रहेगी, अष्टम भाव जीवनसाथी के कुटुंब अर्थात परिवार को दर्शाता है अतः जीवनसाथी के परिवार की तरफ से कोई तनाव हो सकता है, अष्टम भाव गुप्त भाग को भी दर्शाता है अतः थोड़ा सावधान रहें विशेषतः यदि आप महिला है तो आपको विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, अष्टम से गोचर कर रहा राहु गले, पेट, मुँह की भी समस्या दे सकता है चूँकि गुरु के दूसरे भाव में बैठकर छठे, आठवें व एकादश भाव को देखने के कारण से कोई बहुत गंभीर बीमारी नही होगी फिर भी सतर्क रहें और तामसिक चीजों का यदि सेवन करते हैं तो उन्हें बंद कर दें।

तीसरे भाव में आया हुआ शनि भी शुभ है ग्रंथकारों का भी मत है कि तीसरे भाव से शनि की शुभ यात्रा शुरू होती है क्योंकि शनि धन भाव को छोड़कर अब तक आपके द्वारा किए जा रहे प्रयास को सार्थक करेगा और भाई-बहन के संबंध को मधुर करेगा लेकिन शनि की तीसरी दृष्टि पंचम भाव में होने से संतान को थोड़ा कष्ट संभव है यदि आपकी कुंडली में पंचम भाव का स्वामी जिसे पंचमाधिपति भी कहते हैं (गुरु होता है) पर भी शनि की दृष्टि है तो यह योग और भी प्रबल हो जाता है, जो लोग संतान की चाह रखते हैं उनको कन्या संतान प्राप्ति के योग बनते दिख रहे हैं, जो विद्यार्थी तकनीकी क्षेत्र से पढ़ाई कर रहे हैं उनके लिए यह समय उत्तम रहेगा, धार्मिक यात्रा हो सकती है, विदेश यात्रा के भी योग बनते दिख रहे हैं, वाहन खरीदने के योग बन रहे हैं, घर में डेकोरेशन या मरम्मत का कार्य हो सकता है।

जब भी मंगल मेष, मिथुन और तुला राशि से गोचर करेंगे तब थोड़ा सावधान रहें वह समय बहुत अच्छा नही रहेगा जिसमें जोखिम भरे कार्य भी करने पड़ सकते हैं, क्रोध पर नियंत्रण रखें व आवेश में आने से बचें मेरे अनुसार यदि वृश्चिक लग्न के व्यक्ति अमावस्या के दिन बहते पानी में नारियल प्रवाहित करें व नित्य सुंदरकांड का पाठ करें तो काफी अच्छा रहेगा। 

बाकी कौन सा महीना आपके लिए कैसा रहेगा और उस महीने में कौन सा दिन आपके लिए शुभ है व कौन सा अशुभ इसके लिए मैं हर महीने गोचरफल लिखूँगा अतः आप सभी जुड़े रहें व अपना अनुभव भी समय के साथ साझा करते रहें।

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तुला लग्न के लिए वर्ष 2020 कैसा रहेगा:-

तुला लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 अच्छा रहेगा तीसरे भाव से गुरु का गोचर भाई-बहन से सहयोग दिलाएगा और उनसे आपके संबंध मधुर होंगे, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, विवाह के योग बनेंगे व जिनका विवाह हो गया है उनका जीवनसाथी के साथ संबंध और मधुर बनेंगे, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा।

29 मार्च को गुरु गोचर बदलकर चतुर्थ भाव में आ जाएंगे जहाँ शनि पहले से स्थित हैं अतः इस दौरान प्रमोशन हो सकता है, घर व वाहन प्राप्ति के योग बनेंगे, स्वास्थ्य में सुधार होगा, यात्राएं होंगी, कोई नया कार्य शुरू हो सकता है।

यदि आप किसी से प्रेम करते हैं तो 10 जनवरी से 16 फरवरी आपके लिए बेहद शुभ है इस दौरान आप अपने प्रेम का इजहार कर सकते हैं, जिनका विवाह हो चुका है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए भी यह समय काफी अच्छा रहेगा, विद्यार्थियों के लिए यह समय अच्छा होगा, जिनकी संतान है उनके संतान की उन्नति होगी, आय में वृद्धि के योग बनेंगे।

चतुर्थ भाव से राजयोगकारक शनि का अपनी राशि से गोचर बेहद शुभ रहेगा वाहन व भूमि सुख के योग बनाएगा, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, शनि की तीसरी दृष्टि छठे भाव पर है अतः शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए भी अच्छा समय रहेगा, कार्य को लेकर भाग-दौड़ करनी पड़ सकती है, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

नवम से राहु का गोचर गुप्त रूप से धर्म का पालन कराएगा, विदेश या जन्म स्थान के बाहर से लाभ होगा, अचानक से भाग्योदय होगा, शुक्र जब भी मीन, वृषभ या मेष से गोचर करेगा तब थोड़ी समस्या हो सकती है और जब शुक्र वक्री होगा तब थोड़ा सतर्क रहें, यदि आप कर्ज के लिए कहीं आवेदन किए हुए हैं तो जब शुक्र मीन राशि से गोचर करेंगे तब आपको कर्ज मिल जाएगा, मीन का शुक्र आपको ईर्ष्यालु बना सकता है, किसी महिला के द्वारा शत्रु पर विजय प्राप्त होगी।

कुल मिलाकर तुला लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 अच्छा रहने वाला है जिसमें आप भविष्य को अच्छा बनाने का सोच सकते हैं मेरे अनुसार यदि आप लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करें व अमावस्या के दिन बहते पानी में नारियल प्रवाहित करते हैं तो लाभ प्राप्त होगा।

बाकी कौन सा महीना आपके लिए कैसा रहेगा और उस महीने में कौन सा दिन आपके लिए शुभ है व कौन सा अशुभ इसके लिए मैं हर महीने गोचरफल लिखूँगा अतः आप सभी जुड़े रहें व अपना अनुभव भी समय के साथ साझा करते रहें।

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ग्रहों की नैसर्गिक मित्रता व शत्रुता:-

 

ग्रहों को दो भागों में बाटा गया है पहला दैवीय दूसरा राक्षस।

सूर्य, चन्द्र, मंगल और गुरु दैवीय राशियों के अंतर्गत आते हैं।

शुक्र, शनि, राहु और केतु राक्षस राशियों के अंतर्गत आते हैं।

जब भी कोई दैवीय ग्रह, राक्षस ग्रह के राशि मे आते हैं तो उनके शुभ फल में कमी आ जाती है ठीक उसी प्रकार जब कोई राक्षस ग्रह, दैवीय ग्रह की राशि में आते हैं तो उनके शुभ फल में कमी आती है।

बुध इकलौता ऐसा ग्रह है जो जिस ग्रह की राशि पर बैठता है उसके आचरण को अपना कर अपने फल देता है मतलब बुध यदि असुर ग्रह के राशि में बैठा है तो असुर प्रवति अपनाकर फल देगा और अगर दैवीय ग्रह की राशि पर विराजमान है तो दैवीय प्रवति अपनाकर अपने फल देगा।

बुध कभी भी चंद्र और गुरु से संबंध रखकर अच्छे फल नही देता लेकिन गुरु बुध का पिता होने के नाते बुध को शुभता प्रदान करता है किंतु बुध गुरु को अपना शत्रु मानता है।

गुरु सबसे ज्यादा शुभ फल लग्न पर बैठ कर देता है क्योंकि लग्न पर बैठा गुरु पंचम, सप्तम और नवम भाव को देखता है।

शुक्र हमेशा वाहरवें भाव मे सबसे ज्यादा शुभ फल देता है क्योंकि वाहरवां भाव विष्णु जी का पैर होता है जहां लक्ष्मी जी बैठकर विष्णु जी का पैर दबा रही होती हैं इसी कारण वाहरवें भाव को शैया सुख भी कहा जाता है।

शुक्र सबसे ज्यादा खराब फल दूसरे और सातवें भाव मे देता है क्योंकि दोनों ही मारक स्थान होते हैं और शुक्र भोग-विलास का कारक होता है जिस कारण व्यक्ति केवल भोग-विलास के चक्कर मे पढ़कर अपने जीवन को खत्म कर देता है।
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कन्या लग्न के लिए वर्ष 2020 कैसा रहेगा:-

कन्या लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 काफी अच्छा रहने वाला है चतुर्थ भाव से गुरु व केतु का गोचर हंस नामक योग बनाएगा जिस कारण से घर में सुख-शांति व खुशियाँ आएंगी, यदि लंबे समय से घर खरीदने का सोच रहे हैं तो यह अच्छा समय है भूमि व मकान का सुख मिलेगा, गुरु की पंचम दृष्टि अष्टम भाव पर है जिस कारण से स्वास्थ्य में सुधार होगा व अध्यात्म की ओर झुकाव रहेगा, गुरु की सप्तम दृष्टि दसवें भाव पर है जिस कारण से प्रमोशन मिल सकता है, जो लोग बिज़नेस करते हैं उनके लिए भी यह समय बहुत अच्छा रहेगा, दसवें भाव से राहु का भी गोचर हो रहा है जो कि बेहद शुभ है अतः आप आपके कार्यस्थल पर लोग आपके कार्य से खुश रहेंगे, बड़े अधिकारियों के साथ मिलना-जुलना हो सकता है, गुरु की नवम दृष्टि व्यय भाव पर रहेगी अतः यात्राओं के योग बनेंगे, विदेश यात्रा भी हो सकती है, धर्म के कार्यों में खर्चा हो सकता है।

29 मार्च 2020 को गुरु गोचर बदलकर मकर राशि में आएंगे और वहाँ स्वग्रही शनि के साथ युति कर के नीचभंग राजयोग बनाएंगे तथा वहाँ 30 जून 2020 तक रहेंगे अतः जो लोग संतान प्राप्ति की इच्छा रखते हैं उनके लिए यह बहुत अच्छा समय है, विद्यार्थियों के लिए उत्तम समय रहेगा, जो लोग CA, MBA की पढ़ाई कर रहे हैं उनको अच्छे अंक प्राप्त होंगे, आमदनी में वृद्धि होगी, बड़े भाई-बहन यदि हैं तो उनका सहयोग प्राप्त होगा, यदि किसी से प्रेम करते हैं तो अपने प्रेम का इजहार करने का भी यह अच्छा समय रहेगा।

पंचम भाव से शनि का गोचर भी शुभ रहेगा ग्रंथकारों का मत है कि गोचर से पंचम में आया हुआ शनि बहुत शुभ नही होता किन्तु स्वग्रही होने के कारण से उसकी अशुभता में कमी आएगी, कन्या संतान प्राप्त हो सकती है, कार्य को लेकर भाग-दौड़ रहा सकती है, मित्रों से धोखा मिल सकता है, आमदनी में वृद्धि होगी, कुटुंब से मतभेद हो सकते हैं, वाणी पर थोड़ा नियंत्रण रखें।

कन्या लग्न वालों के लिए कुल मिलाकर यह वर्ष काफी अच्छा रहेगा धार्मिक यात्रा भी हो सकती है, आमदनी में वृद्धि के योग बनेंगे, यात्राएं होंगी, जब बुध कुंभ, मेष व सिंह राशि से गोचर करेंगे तब स्वास्थ्य को लेकर थोड़ा सावधान रहें, तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है उसमें भी विशेष जब चंद्र भी इन्ही राशियों से गोचर करे तब और सावधान रहें, नवंबर के अंतिम भाग में गुरु पुनः मकर राशि में आ जाएंगे तब आय वृद्धि के और भी नए स्त्रोत बनेंगे, संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए उत्तम समय रहेगा, मेरे अनुसार यदि कन्या लग्न के व्यक्ति पोखराज धारण करें व गणेश स्तोत्र का पाठ करें तो बेहद शुभ रहेगा।

बाकी कौन सा महीना आपके लिए कैसा रहेगा और उस महीने में कौन सा दिन आपके लिए शुभ है व कौन सा अशुभ इसके लिए मैं हर महीने गोचरफल लिखूँगा अतः आप सभी जुड़े रहें व अपना अनुभव भी समय के साथ साझा करते रहें।

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सिंह लग्न के लिए वर्ष 2020 कैसा रहेगा:-

सिंह लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 काफी अच्छा रहेगा, नवम भाव से गुरु का गोचर बेहद शुभ रहेगा जो लोग संतान की चाह रखते हैं उनके लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, जिनका विवाह नही हुआ है उनके विवाह के योग बनेंगे क्योंकि गुरु की पंचम दृष्टि नवम भाव पर है साथ ही भाग्य का भी सहयोग प्राप्त होगा और जीवन में स्थिरता आएगी, एकादश भाव से राहु का गोचर है जिस पर गुरु की पूर्ण दृष्टि है अतः अचानक से धन लाभ के योग बनेंगे, स्वास्थ्य भी अच्छा रहेगा जिनको कोई बीमारी लंबे समय से चली आ रही है उसमें राहत मिलेगी, बड़े भाई-बहन यदि हैं तो उनका सहयोग प्राप्त होगा।

29 मार्च को गुरु गोचर बदलकर छठे भाव में अपनी नीच राशि में जाएंगे गोचर से छठे भाव में गया हुआ गुरु शुभ नही माना जाता है फिर भी पहले से छठे भाव में शनि के खुद की राशि से गोचर होने के कारण से नीचभंग राजयोग का फल प्राप्त होगा तथा 29 मार्च से 30 जून के बीच शत्रुओं पर आप हावी रहेंगे किन्तु इस दौरान आपके खर्चे बहुत होंगे, परिवार के सदस्यों पर धन खर्च होने के योग बनेंगे, स्वास्थ्य में परेशानी हो सकती है किन्तु कार्य क्षेत्र में उन्नति के योग भी बनेंगे, यदि प्रमोशन की बात चल रही है तो प्रमोशन होगा, व्यापारियों के लिए अच्छा समय रहेगा, कुटुंब का सहयोग मिलेगा।

छठे भाव से गोचर कर रहे शनि की तीसरी दृष्टि अष्टम भाव पर है अतः पशु व वाहन से थोड़ा सावधान रहें, जिनका काम बिजली से संबंधित है उन्हें भी साबधानी बरतनी चाहिए, पार्टनरशिप में यदि व्यापार करते है तो पार्टनर से बनाकर चलें नही तो नुकसान उठाना पड़ सकता है, जीवनसाथी के स्वास्थ्य में परेशानी हो सकती है, शनि सातवीं दृष्टि से द्वादश भाव (खर्च स्थान) को देख रहा है तो यात्राओं के योग बनेंगे, जीवन में काफी भागा-दौड़ी रहेगी, धर्म की ओर झुकाव अधिक रहेगा, शनि की दसवीं दृष्टि तीसरे भाव पर अपनी उच्च राशि में है जिस कारण से छोटे भाई-बहन का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, आवेश में आने से बचें नही तो फालतू के विवाद होंगे, शत्रुओं पर हावी रहेंगे, आपकी मेहनत से आपके सीनियर खुश रहेंगे।

सितंबर 2020 को राहु एकादश भाव अर्थात लाभ स्थान को छोड़कर कर्म स्थान में आएंगे जिस कारण से आमदनी के स्तोत्र बढ़ेंगे, कार्य में उन्नति प्राप्त होगी, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, बिज़नेस में स्थायित्व या नौकरी में प्रमोशन होगा, अचानक कोई यात्रा हो सकती है, कुटुंब से या साँस से विचारों में भिन्नता आने के कारण तनाव रह सकता है, तामसिक चीजों से परहेज करें, गैस की शिकायत हो सकती है, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें चूँकि वो आपका कुछ अमंगल नही कर सकेंगे फिर भी पहले से सावधान ज्यादा अच्छा है, माता के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी हो सकती है।

कुल मिलाकर सिंह लग्न वालों के लिए वर्ष 2020 काफी अच्छा रहेगा व वर्ष 2019 में जो संघर्ष किया उसका फल 2020 में प्राप्त होगा, मेरे अनुसार सिंह लग्न वाले व्यक्ति यदि नित्य संकटमोचन हनुमाष्टक का पाठ करें, प्रत्येक सोमवार किसी गरीब महिला को दूध दान करें व सूर्य को नित्य जल दें तो काफी लाभ मिलेगा जिनके विवाह में बाधाएं आ रही है वो व्यक्ति इन उपाय के साथ-साथ प्रत्येक शनिवार को शनि जी का दर्शन करें व सरसों के तेल का दीपक अर्पित कर शनि स्तोत्र का पाठ करें तो निश्चय ही प्रभु कृपा से काफी लाभ होगा।

बाकी कौन सा महीना आपके लिए कैसा रहेगा और उस महीने में कौन सा दिन आपके लिए शुभ है व कौन सा अशुभ इसके लिए मैं हर महीने गोचरफल लिखूँगा अतः आप सभी जुड़े रहें व अपना अनुभव भी समय के साथ साझा करते रहें।

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लग्न क्या है:-

आप सभी जब किसी ज्योतिषी के पास जाते हैं तो वह बताते हैं कि आपका जन्म इस लग्न में हुआ है तो आखिर वह लग्न क्या है मैं आप सभी को लग्न क्या होता है सबसे आसान शब्दों में बताता हूँ:-

व्यक्ति के जन्म के समय जो राशि पूर्व दिशा की ओर उदित हो रही हो उसे लग्न कहते हैं।

एक लग्न की समय अवधि 2 घंटे रहती है अतः 2 घंटे पश्चात लग्न बदल जाता है कुंडली के सभी भावों में लग्न सबसे महत्वपूर्ण होता है इससे व्यक्ति के स्वभाव, चरित्र, रुचि और विशेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है, कुंडली के प्रथम भाव को लग्न कहा जाता है जिससे व्यक्ति की कद-काठी, रुचि, व्यक्तित्व, चरित्र, दिलचस्पी, स्वभाव, मुखमंडल अर्थात चेहरे की बनावट, दिमाग का स्तर आदि के बारे में बताया जा सकता है।

लग्न में केंद्र व त्रिकोण दोनों का समावेश रहता है जिस कारण से लग्न अर्थात प्रथम भाव, बाकी सभी भावों में सबसे अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, लग्न के स्वामी को हम लग्नेश के नाम से जानते हैं जैसे घर का मुखिया, घर के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण होता है और घर का संचालन किस तरह से हो रहा उस पर निर्भर करता है ठीक उसी प्रकार लग्न व लग्नेश की स्थिति पर कुंडली के अधिकांश फल निर्भर होते हैं प्रत्येक लग्न के लिए कुछ ग्रह शुभ तो कुछ अशुभ होते है जिनकी स्थिति पर ही कुंडली के विभिन्न योगों का फलित होना निर्भर होता है।

कौन से ग्रह किस लग्न के लिए शुभ होते हैं और कौन से अशुभ इसको मैं अगले लेख में समझायूँगा अतः आप सभी हमसे जुड़े रहें व अपना अनुभव भी समय-समय और साझा करते रहें।
Astrologer:- Pooshark Jetly
Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)
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