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रुद्राभिषेक करने का फल

रुद्राभिषेक करने का फल

 

रुद्राभिषेक करने का फल
रुद्राभिषेक करने का फल

 

जन्म कुंडली में ग्रहों से संबंधित दोषों से मुक्ति पाने का यह सर्वश्रेष्ठ अवसर है ईशान, ईश्वर, शिव, रुद्र, शंकर, महादेव आदि सभी ब्रह्म के ही पर्यायवाची शब्द हैं, ब्रह्म का विग्रह रूप शिव है तथा शिव की शक्ति शिवा है इसमें सतोगुण जगत पालन विष्णु हैं और रजोगुण सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं, श्वास वेद, सूर्य-चंद्र नेत्र, तीनों लोक और चौदह भुवन इनके वक्षस्थल हैं जिनके विशाल जटाओं में सभी नदियों, पर्वतों और तीर्थों का वास है जहाँ सृष्टि के सभी ऋषि, मुनि, योगी आदि तपस्यागत रहते हैं, वेद ब्रह्मा के विग्रह के रूप अपौरुकेय, अनादि अजन्मा, ईश्वर शिव के श्वास से विनिर्गत हुए हैं, इसलिए वेद मंत्रों के द्वारा शिव का पूजन-अर्चन, अभिषेक, जप, यज्ञ आदि कर के प्राणी इनकी कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है।

 

 

रुद्राभिषेक से लाभ:-

 

रुद्राभिषेक से लाभ
रुद्राभिषेक से लाभ

 

श्री महारुद्र जी का अभिषेक स्वम् के द्वारा करने या वेदपाठी विद्वानों द्वारा करवाने के बाद प्राणी को फिर किसी भी पूजा की आवश्यकता नही रहती है “शिव महापुराण” के अनुसार, वेदों का सारत्व “रुष्ट्राध्यायी” है, जिसमें ८ अध्यायों में १७६ मंत्र है, इन मंत्रों द्वारा त्रिगुण स्वरूपा रुद्र का पूजन अभिषेक किया जाता है, वेदों का सार है रुद्राष्टध्यायी जिसके प्रथम अध्याय के “शिव संकल्प सूत्र मंत्रों” से “श्री गणेश” का स्तवन किया गया है, द्वितीय अध्याय “पुरुष सूक्त” में “विष्णु जी” का स्तवन है, तृतीय अध्याय से “देवराज इंद्र” और चतुर्थ अध्याय में “सूर्य” का स्तवन किया जाता है, पंचम अध्याय स्वम् “रुद्र” रूप है इस अध्याय को “शतरुद्रीय” भी कहा जाता है, षष्ठ अध्याय में “शिव” के मस्तक पर विराजमान “सोम अर्थात चंद्र” का स्तवन है, इसी प्रकार सप्तम अध्याय में “मरुथ” और अष्टम अध्याय में “अग्नि देव” का स्तवन किया गया है, इसके साथ ही अन्य सभी देवी-देवताओं के स्तवन भी इन्ही पाठ मंत्रों में समाहित है।

 

 

 

एक-एक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए:-

 

 

मान्यता है शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर विल्वपत्र अर्पित करने से व्यापार में उन्नति होती है और सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है, भाँग अर्पित करने से घर की अशांति दूर होती है, मंदार पुष्प अर्पित करने से नेत्र और हिर्दय विकार दूर रहते हैं, धतूरे के पुष्प अर्पित करने से विषैले जीवों के प्रभाव देवताओं के क्रोध से रक्षा होती है, शमी पत्र चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती, मारकेश और अशुभ ग्रह-गोचर से हानि नही होती है इसलिए “महाशिवरात्रि” व “मासशिवरात्रि” के दिन के एक-एक क्षण का सदुपयोग कर अपने मनोरथ को सिद्ध करने हेतु भूतनाथ भगवान “शिव” जी का विधिवत पूजन-अर्चन करना चाहिए।

 

मनोकामना पूर्ति हेतु रुद्राभिषेक अत्यंत लाभकारी:-

 

 

 

“रुद्राभिषेक” में सृष्टि की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करने की शक्ति है अतः अपनी आवश्यकता अनुसार अलग-अलग पदार्थों से रुद्राभिषेक कर के प्राणी इच्छित फल प्राप्त कर सकता है, इनमें दुग्ध के द्वारा अभिषेक करने से उत्तम संतान की प्राप्ति, गन्ने के रस से यश कीर्ति व उत्तम जीवनसाथी की प्राप्ति, शहद के द्वारा अभिषेक करने से कर्ज मुक्ति, घी के द्वारा अभिषेक करने से व्यापार वृद्धि, दुग्ध और मिश्री को मिलाकर अभिषेक करने से उत्तम विद्या और प्रतियोगिता में सफलता, कुश और जल से अभिषेक से रोग मुक्ति आदि प्राप्त होती है इसके अतिरिक्त पंचामृत से अष्ट लक्ष्मी और तीर्थों का जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है तथा सभी द्वादश ज्योतिर्लिंगोंवपर अभिषेक करने से प्राणी जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।

 

मनोकामनेश्वर महादेव
मनोकामनेश्वर महादेव

 

प्रति मास कृष्ण पक्षीय निशीथ काल व्यापिनी चतुर्दशी के दिन “मासिक शिवरात्रि व्रत” किया जाता है, समाज में फाल्गुन तथा श्रावण मास में पूजा विशेष प्रचलित है, “ईशान संहिता” के अनुसार फाल्गुन मास में ज्योतिर्लिंग का प्रादुर्भाव हुआ था इसलिए उसे “महाशिवरात्रि” के नाम से जाना जाता है, जनश्रुतियों के अनुसार श्रवण मास में शिव जी ने संसार की रक्षा हेतु विषपान किया था और विष की विकलता में इधर-उधर भागने लगे तब सभी ने विष की गर्मी से राहत दिलाने हेतु शिव जी का गंगाजल से रुद्राभिषेक किया था तभी से गंगाजल द्वारा रुद्राभिषेक की परंपरा शुरू हुई थी, गंगाजल से शिव अभिषेक आराधना अत्यंत उत्तम माना गया है, गंगाजल के अतिरिक्त रत्नोंदक, इच्छु रस (गन्ने का रस), दुग्ध, पंचामृत (दुग्ध, दहीं, घी, शहद, शकर) आदि अनेक द्रव्यों से किया जाता है।

 

काशी के ब्राह्मणों द्वारा रुद्राभिषेक करवाने हेतु आप नीचे दिए गए नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं:-

 

आचार्य प्रतीक जेतली:- 7905559687

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली:- 9919367470, 7007245896

विक्रम संवत २०७८ के मासिक व महाशिवरात्रि व्रत की विस्तृत जानकारी हेतु इस link पर जाएं:-

 

विक्रम संवत २०७८ के मासिक शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि

विक्रम संवत 2078 के मासिक शिवरात्रि व्रत व पूजन विधि।

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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वट सावित्री व्रत ९ जून २०२१ जानिए शुभ मुहर्त तथा व्रत व पूजन विधि

वट सावित्री व्रत ९ जून २०२१ जानिए शुभ मुहर्त तथा व्रत व पूजन विधि

 

वट सावित्री व्रत शुभ मुहर्त व पूजनऔर व्रत विधि
वट सावित्री व्रत शुभ मुहर्त व पूजनऔर व्रत विधि

 

ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत होता है वट सावित्री व्रत त्रयोदशी से तीन दिनों का व्रत होता है, इस व्रत में अमावस्या सूर्यास्तकाल से पूर्व तीन मुहर्त व्यापिनी विद्धा ग्राह्म है, इस वर्ष ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी दिन में १:११तक है तथा इसके बाद अमावस्या लग जाती है जो सूर्यास्तकाल से पूर्व तीन मुहर्त से भी अधिक मिल रही है अतः दिनांक ९ जून बुधवार को ही वट सावित्री व्रत होगा व व्रत का आरंभ ७ जून २०२१ सोमवार से होगा, वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा का विधान है इसके साथ ही महिलाएं सत्यवान, सावित्री और यमराज की पूजा भी करती हैं व्रती महिलाओं को इस दिन सत्यवान और सावित्री की कथा विशेष तौर पर पढ़ना और सुनना चाहिए।

 

वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं
वट सावित्री व्रत की हार्दिक शुभकामनाएं

 

वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री:-

 

वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री
वट सावित्री व्रत पूजन सामग्री

 

सत्यवान-सावित्री की मूर्ति, धूप, मिट्टी का दीपक, घी, फूल, फल, २४ पूरियां, २४ बरगद फल (आटे या गुड़ के) बांस का पंखा, लाल धागा, कपड़ा, सिंदूर, जल से भरा हुआ पात्र और रोली इत्यादि।

वट सावित्री व्रत व पूजन विधि:-

 

वट सावित्री व्रत पूजन विधि
वट सावित्री व्रत पूजन विधि

 

सर्वप्रथम व्रती महिलाओं को सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण कर १६ श्रृंगार करना चाहिए तथा अपने इष्ट देव के समक्ष व्रत करने का संकल्प लेना चाहिए तदोपरांत बरगद पेड़ का पूजन करना चाहिए पूजन में २४ बरगद के फल (आटे या गुड़ के) व २४ पूड़ियों को अपने आंचल में रखकर वट वृक्ष का पूजन करना चाहिए पूजा में १२ पूड़ियों व १२ बरगद फल (आटे या गुड़ के) को हाथ में लेकर वट वृक्ष पर अर्पित करना चाहिए।

 

तत्पश्चात एक लोटा शुद्ध जल चढ़ाएं व वृक्ष पर हल्दी, रोली और अक्षत से स्वास्तिक बनाकर पूजन करें साथ ही धूप-दीप दान करने के बाद कच्चे सूत को लपेटते हुए १२ बार बरगद वृक्ष की परिक्रमा करनी चाहिए एक परिक्रमा के बाद एक चने का दाना भी छोड़ते रहना चाहिए व वट वृक्ष की परिक्रमा पूरी होने के बाद सत्‍यवान और सावित्री की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए फिर १२ कच्चे धागे वाली माला वृक्ष पर चढ़ाकर दूसरी स्वम् पहन लेनी चाहिए तदोपरान्त ६ बार माला को वृक्ष से बदलें और अंत में एक माला वृक्ष को चढ़ाएं और एक अपने गले में पहन लें तत्पश्चात संध्याकाल व्रत खोलने से पूर्व ११ चने के दाने और वट वृक्ष की लाल रंग की कली को पानी से निगलकर अपना व्रत खोलना चाहिए।

 

वट सावित्री व्रत शुभ मुहर्त:-

 

वट सावित्री व्रत शुभ मुहर्त
वट सावित्री व्रत शुभ मुहर्त

 

इस वर्ष ९ जून २०२१ को वट सावित्री व्रत के दिन चतुर्दशी तिथि दिन के १:११ तक तदोपरांत अमावस्या तिथि रहेगी साथ ही इस दिन कृत्तिका नक्षत्र दिन के ०९:११ तक तदोपरांत रोहिणी नक्षत्र रहेगा साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग संपूर्ण दिन-रात्रि रहने से यह एक अद्भुद संयोग रहेगा अतः ९ जून २०२१ को संपूर्ण दिन-रात्रि पूजन का शुभ मुहर्त रहेगा इसके अतिरिक्त दिन में ५:१४ से ५:३६, १०:०८ से १२:२२ व सायं काल में ४:५५ से ७:२२ तक का मुहर्त अत्यंत शुभ रहेगा।

 

जय श्री राम।

 

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खग्रास चंद्र ग्रहण २६ मई २०२१ जानिए किन राशियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव

खग्रास चंद्र ग्रहण २६ मई २०२१ जानिए किन राशियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव

 

खग्रास चंद्रग्रह जानें राशिफल
खग्रास चंद्रग्रह जानें राशिफल

 

विक्रम संवत २०७८ “आनंद संवत्सर” का प्रथम ग्रहण खग्रास चंद्र ग्रहण वैशाख शुक्ल १५ (पूर्णिमा) बुधवार २६ मई २०२१ को चंद्रोदय के समय आंशिक रूप से भारत के सुदूर पूर्वोत्तर भाग और पश्चिम बंगाल के कुछ भाग के साथ उत्तर-दक्षिण अमेरिका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका, प्रशांत महासागर व हिन्द महासागर में दिखाई देगा इनके अतिरिक्त विश्व के अन्य किसी भाग में यह ग्रहण नही दिखाई देगा अतः इन जगहों पर ही ग्रहण व सूतक का मान रहेगा अन्य किसी स्थान पर नही इस ग्रहण का ग्रासमान १.०१६ रहेगा।

 

ग्रहण काल के दिन पूर्णिमा तिथि, तथा अनुराधा नक्षत्र रहेगा साथ ही इस दिन चंद्रमा का गोचर वृश्चिक राशि से रहेगा तो चलिए जानते हैं इस गोचर का विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के यह यह ग्रहण अष्टम भाव पर लगेगा जिस कारण से स्वास्थ्य जनित समस्याएं उत्पन्न हो सकती है अतः स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें, मानसिक तनाव में वृद्धि होगी, जीवनसाथी या किसी महिला पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, महिलाओं से सतर्क रहें अन्यथा महिलाओं द्वारा अपमानित होने के योग बनेंगे।

 

उपाय:- सुंदरकांड का पाठ करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए यह ग्रहण सप्तम भाव में होने से अशुभ है अतः स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहें, जीवनसाथी से विवाद संभव है, कुटुंब में मतभेद रहने से मन अशांत रहेगा, भाग्य में कड़े संघर्ष उपरांत वृद्धि होगी, रोजगार के क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को बेहद सतर्कता बरतनी होगी चूँकि गुरु का आपकी राशि से दशम में गोचर है अतः कुछ संघर्ष के उपरांत रोजगार के क्षेत्र में लाभ भी होगा, माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें रक्त जनित समस्याएं हैं वह और भी सतर्क रहें, आपकी राशि के मारक स्थान पर लगने वाला यह गोचर सुख-शांति की हानि व रोग, व्याधि और पीड़ा में वृद्धि वाला रहेगा।

 

उपाय:- दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए यह ग्रहण षष्ठ भाव में होगा अतः मिथुन राशि वालों को भी स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सतर्क रहना होगा, कुंडली के षष्ठ भाव से रोग, शत्रु व ऋण का विचार किया जाता है अतः इस ग्रहण के प्रभाव से इन तीनों में वृद्धि होगी चूँकि गोचरस्थ गुरु की लग्न, तृतीय व पंचम भाव पर दृष्टि है अतः किसी प्रकार के अनिष्ट की संभावना कम है फिर भी सतर्क रहें, निकट भविष्य में किसी यात्रा के संकेत मिल रहें जो कि अनिष्टकारी रहने वाली है अतः यात्रा को टालने का प्रयास करें, मामा पक्ष को कष्ट संभव है, मन व्यथित रह सकता है, ठंडी चीजों से परहेज करें।

 

उपाय:- गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए यह ग्रहण पंचम भाव से रहेगा अतः संतान को कष्ट संभव है, विद्यार्थियों के लिए यह समय शुभ नही रहेगा, प्रेमी-प्रेमिकाओं में विवाद की संभावना रहेगी, मन व्यथित रहेगा, दाम्पत्य जीवन में विवाद संभव है, बड़ी बहन से विवाद संभव है, अचानक किसी महिला से लाभ प्राप्त होगा।

 

उपाय:- विल्वाष्टकम् का पाठ करें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए यह ग्रहण चतुर्थ भाव से रहेगा अतः घर के सुख-संबंधों में कुछ कमी रहेगी, यदि आपके घर में वास्तु दोष है तो यह ग्रहण प्रत्येक प्रकार से अनिष्टकारी सिद्ध हो सकता है, माता-पिता को कष्ट संभव है, धोखा मिलने की संभावना रहेगी अतः किसी पर अधिक विश्वास करने से बचें, कार्यक्षेत्र में चतुराई के माध्यम से कुछ कड़े संघर्ष उपरांत बड़ी सफलता मिलने के पूर्ण योग है अतः इस अवसर का लाभ अवश्य उठाएं।

 

उपाय:- आदित्य हिर्दय स्तोत्र का पाठ करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए यह ग्रहण तृतीय भाव से रहेगा अतः छोटे भाई-बहन को कष्ट संभव है, तृतीय भाव से आयुष्य का भी विचार किया जाता है अतः कन्या राशि वालों के स्वास्थ्य में समस्याएं रह सकती है, कार्य के सिलसिले से निकट भविष्य में यात्राओं के योग बनेंगे, पंचम भाव पर शुक्र, राहु, बुध व सूर्य की युति यात्राओं के अवसर, संतान सुख, महिलाओं से लाभ, स्थान परिवर्तन के साथ भाग्य वृद्धि के योग बनाएंगे ही गुरु की दशम भाव पर दृष्टि कार्यक्षेत्र में उन्नतिदायक रहेगी किंतु मन व्यथित रहेगा, बड़े भाई-बहन को कष्ट संभव है।

 

उपाय:- गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें व गणेश गायत्री की 1 माला मंत्र जाप करें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के धन व कुटुंब भाव से यह ग्रहण रहेगा अतः कुटुंब में कुछ मतभेद रहेंगे व धन संचय में कठिनाई आएंगी, वाणी पर नियंत्रण रखें, शुक्र के अष्टम से गोचर के कारण से आयुष्य की रक्षा होगी किंतु राहु का अष्टम भाव से गोचर स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा नही है अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें विशेषतः पेट, नासिक व गर्दन में समस्याएं रह सकती हैं जिन व्यक्तियों को थाइरॉइड या हार्मोन्स में असंतुलन की समस्या हो उनको इस ग्रहण से विशेष कष्ट प्राप्त होने के योग बन रहे हैं अतः स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें।

 

उपाय:- सिद्धकुंजिका स्तोत्र व नवचंडी का पाठ करें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए लग्न से यह ग्रहण रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें तथा मन में नियंत्रण को बनाएं रखें, इस ग्रहण के प्रभाव के कारण से तनाव में वृद्धि व चोटादि लगने के योग बन रहे हैं, जीवनसाथी से विवाद संभव है किंतु आप चतुराई से परिस्थितियों को नियंत्रण में ला सकेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, नौकरी पेशा लोगों को कुछ समस्याओं के साथ संघर्ष करने पर सफलता प्राप्त होगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें।

 

उपाय:- हनुमान बाहुक व सुंदरकांड का नित्य पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के द्वादश भाव से यह ग्रहण रहेगा अतः व्यर्थ मन व्यथित रहने से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, अनिष्टकारी यात्राओं के योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, भाग्य में व्रद्धि होगी, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, किसी महिला द्वारा तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी।

 

उपाय:- राम रक्षा स्तोत्र व विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ करें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के एकादश भाव से यह ग्रहण रहेगा अतः निकट भविष्य में आय को लेकर अस्थिरता बनने के योग बनेंगे जिसमें अचानक से धन लाभ होगा वहीं अचानक धन हानि या धन व्यय के योग बनेंगे, धन संचय में कुछ त्रुटि रहेगी, संतान व बड़ी बहन, माता, मामी, बुआ को कष्ट संभव रहेगा, विद्यार्थियों के लिए भी यह ग्रहण अत्यधिक शुभदायक नही रहेगा।

 

उपाय:- मधुराष्टकं व राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए यह ग्रहण दशम भाव में रहेगा अतः पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कार्यक्षेत्र व पिता के स्वास्थ्य को लेकर तनाव में वृद्धि होगी, घर के सुख-संबंधों में कुछ त्रुटि रहेगी, यदि आपके घर में किसी प्रकार का वास्तु दोष है तो यह ग्रहण प्रत्येक प्रकार से अनिष्टकारी सिद्ध होगा, बड़े भाई से पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा व जो व्यक्ति पुलिस, चिकित्सा, विज्ञान, रसायन आदि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह ग्रहण शुभफलदाई रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।

 

उपाय:- हनुमान बाहुक व सुंदरकांड का पाठ करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए यह ग्रहण नवम भाव से रहेगा अतः छोटे भाई-बहन के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, संतान को कष्ट संभव है, विद्यार्थियों की शिक्षा में अवरोध उत्पन्न हो सकते हैं, तृतीय भाव से आयुष्य का भी विचार करते हैं वहाँ शुक्र, राहु, बुध व सूर्य की युति स्वास्थ्य में अचानक से किसी समस्या को उत्पन्न कर सकती है, धन व्यय में वृद्धि होगी, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थिति उत्पन्न होगी, किसी महिला के स्वास्थ्य में अचानक समस्या उत्पन्न होने के कारण से तनाव बना रहेगा।

 

उपाय:- विष्णु सहस्रनाम व राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें।

 

जय श्री राम।

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कोरोना और ज्योतिष: जानिए ज्योतिष शास्त्र व धर्म शास्त्र के अनुसार कुछ ऐसे उपाय जिनसे कोरोना से बचा जा सकता है

कोरोना और ज्योतिष: जानिए ज्योतिष शास्त्र व धर्म शास्त्र के अनुसार कुछ ऐसे उपाय जिनसे कोरोना से बचा जा सकता है

 

कोरोना से बचाव हेतु ज्योतिष शास्त्र व धर्म शास्त्र के कुछ अचूक उपाय
कोरोना से बचाव हेतु ज्योतिष शास्त्र व धर्म शास्त्र के कुछ अचूक उपाय

 

पिछले लेख में मैंने अपने इष्ट, आराध्य व अपने गुरु (श्री हनुमान जी व बाबा महादेव) की कृपा से कोरोना महामारी पर सूक्ष्म विवेचना की थी जिसमें मुझे यह ज्ञात हुआ था कि कोरोना महामारी का प्रकोप २०२१ पूर्ण वर्ष रहेगा तथा २० अगस्त २०२१ और १३ फरवरी २०२२ को गोचर में ग्रहों की स्थिति सुधरने पर इनमे कुछ कमी दिखाई देगी व १३ फरवरी २०२२ के बाद कोरोना से काफी हद तक राहत मिलती दिख रही है चूँकि आजाद भारत की कुंडली (जिसका फलादेश शीघ्र ही उपलब्ध करायूँगा।) के अध्यन से यह ज्ञात होता है कि वर्ष २०२२ भी अनेक प्रकार की विपत्तियों, बीमारियों, चोरी व अग्नि से जान-माल की हानि, उपद्रव, हिंसा, चक्रवात वाला होगा क्योंकि आजाद भारत की कुंडली के द्वादश भाव से राहु व षष्ठ भाव से केतु का गोचर रहने वाला होगा।

 

कोरोना एक ऐसी बीमारी है जो कि किसी भी प्रकार से समझ नही आ रही यदि विज्ञान के नजरिए से भी देखें तो जाँच में इस बीमारी के शरीर में होने का नही पता चलता बल्कि इस बीमारी से शरीर में जो बदलाव हुए हैं उनके बारे में पता चलता है कारण यह कि कोरोना महामारी राहु द्वारा जनित है मुझे पता है यहाँ बहुत से लोग यह प्रश्न जरूर उठाएंगे कि गोचर में शनि, केतु व गुरु की युति के समय इस बीमारी का उद्गम हुआ था तो मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि मैं इस बात को नही नकार रहा कि यह बीमारी उपरोक्त ग्रहों की गोचर में युति से उत्पन्न हुई है, मैंने अपने पूर्व के लेख जिसमें मैंने राहु व केतु के गोचर परिवर्तन के विषय पर लेख लिखा था कि इस गोचर की सबसे विचित्र बात यह रहने वाली है कि हमेशा राहु को नियंत्रण में करने वाला ग्रह केतु इस बार खुद नियंत्रण के बाहर रहेगा जिसे नियंत्रित इस बार राहु करेंगे अतः इस बीमारी के उत्पन्न होने का मुख्य कारण राहु ही हैं चूँकि राहु अपने गुरु, शुक्र की राशि वृषभ से गोचर कर रहे हैं तो और भी बली अवस्था में गोचर रहे हैं और प्रश्न कुंडली (जिसका फलादेश पूर्व के आर्टिकल में किया था।) उसके हिसाब से मारक स्थान पर एक साथ अशुभ योग का बनना कोरोना से भयावह स्थिति उत्पन्न करने की ओर दर्शा रहा था अतः कल की प्रश्न कुंडली को ध्यान में रखते हुए व साथ ही धर्मशास्त्रों के कुछ अचूक उपायों को मैं आप सभी के समक्ष रखता हूँ जिन्हें करने से आपको निश्चय ही लाभ होगा।

 

विशेष:-

 

“कर्म प्रधान विश्व रचि राखा।”

“जो जस करहिं सो तसि फल चाखा।।”

 

अर्थात:- यह ब्रह्मांड कर्म प्रधान है जो व्यक्ति जिस प्रकार के कर्म करता है उसको उसी के अनुरूप फल की प्राप्ति होती है।

 

कहने का आशय यह है कि इन उपायों के साथ आपको स्वम् की सुरक्षा भी करनी होगी तभी यह उपाय कारगर सिद्ध होगा।

 

ज्योतिष व धर्म शास्त्र के अनुसार कोरोना बीमारी से बचाव हेतु उपाय:-

 

१. नित्य शिवलिंग पर जल मिश्रित दुग्धाभिषेक कर चावल, काला तिल, विल्वपत्र, दूर्वा, तुलसी, पुष्प एक साथ अर्पित करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना चाहिए इससे शनि व राहु के अशुभ फल में कमी तो आएगी ही साथ ही आयुष्य की भी रक्षा होगी।

 

२. नित्य शनि व राहु के मंत्रों का २१-२१ बार जप करने से भी शनि व राहु के अशुभ फल को कुछ कम कर इस बीमारी से बचा जा सकता है।

 

३. धर्म शास्त्रों के अनुसार पंचगव्य (दूध, दहीं, घी, गोबर व गौमूत्र से निर्मित होने के कारण से इसे पंचगव्य कहा गया है।) का सेवन करने से बड़ी से बड़ी बीमारी को सही किया जा सकता है।

 

४. पद्म पुराण के अनुसार जो व्यक्ति नित्य सुंदरकांड का पाठ करता है वह सभी प्रकार के रोग, व्याधि व पीड़ा से मुक्त रहता है।

 

५. हनुमान बाहुक व बजरंगबाण के पाठ से सभी प्रकार के रोग, व्याधि व पीड़ा का अंत हो जाता है।

 

६. दुर्गा कवच, सुदर्शन कवच, राम रक्षा स्तोत्र, आदित्य हिर्दय स्तोत्र का पाठ व्यक्ति को हर ओर से रक्षित करता है।

 

७. गुरुवार के दिन गाय को चने की दाल व केला खिलाने से भी कोरोना से काफी राहत अनुभव होगी।

 

विशेष:-

 

जिनके घर-परिवार के सदस्य या रिशेदार कोरोना ग्रसित हो गए हों व स्थिति निरंतर बिगड़ती जा रही हो ऐसी स्थिति में अविलंब कुंडली दिखाकर अशुभ ग्रह के उपाय करने चाहिए किंतु उससे भी पूर्व उक्त व्यक्ति के लिए तत्काल राहु व शनि के मन्त्र जाप को करवाना चाहिए।

 

जय श्री राम।

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कोरोना और ज्योतिष जानिए ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

कोरोना और ज्योतिष जानिए ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

भाग:-१

 

कोरोना और ज्योतिष: जानिए, कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति
कोरोना और ज्योतिष: जानिए, कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

 

कोरोना एक ऐसी महामारी जिसने सिर्फ भारत ही नही अपितु पूरे विश्व में त्राहि-त्राहि मचा रखी है अनगिनत लोग इस महामारी के प्रभाव में आकर असमय ही काल के मुख में समा रहे हैं इस महामारी को लेकर हमारे पंचांगों ने पूर्व में ही सतर्क किया था कि “इस वर्ष (२०१९-२०२०) में विषाणु जनित महामारी का प्रकोप रहेगा।” किंतु यह महामारी इतनी भयानक होगी यह किसी ने नही सोचा था ३ मई २०२१ को प्रातः १० बजकर २१ मिनट पर मुझसे कई वर्षों से जुड़े एक सदस्य के मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि इस महामारी का अंत कब होगा और कब हम इन परिस्थितियों से बाहर आ सकेंगे तो उस समय के आधान लग्न व आजाद भारत की कुंडली की विवेचना करने का एक प्रयास करता हूँ।

 

इस विवेचना को लिखने से पूर्व सर्वप्रथम मैं अपने इष्ट व अपने आराध्य जिन्हें मैं अपने गुरु रूप में भी पूजता हूँ उनके (श्री हनुमान जी व बाबा महादेव) चरण कमलों में नमन करता हूँ व इस महामारी से मुक्ति की प्राथना करता हूँ और साथ ही यह प्राथना करता हूँ कि मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि बनाएं जिससे मैं इस महामारी पर सही विवेचना कर सकूँ🙏🏻

प्रश्न कुंडली से फलकथन:-

 

प्रश्न लग्न कुंडली
प्रश्न लग्न कुंडली

 

३ मई २०२१ को प्रातः १०:२१पर कर्क लग्न जो कि चर लग्न है प्राप्त होता है जिनके स्वामी अर्थात लग्नेश चंद्रमा सप्तम भाव जिसे मारक स्थान भी कहते हैं वहाँ शनि के साथ स्थित होकर विष योग का सृजन कर रहे हैं साथ ही मंगल व राहु से दृष्ट भी हैं अतः इस वर्ष भी कोरोना महामारी को लेकर मन में तनाव, भय का संचार होता रहेगा चूँकि कर्क लग्न की कुंडली में मंगल राजयोगकारक हो जाता है अतः मंगल का सप्तम भाव को अपनी उच्च राशि मकर में देखने के कारण से भारत तकनीकी क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ेगा हालांकि बात कोरोना महामारी की हो रही है तो मंगल व राहु की दृष्टि सप्तम भाव पर आने से मारक स्थान पर एक साथ चार अशुभ योगों (शनि-चंद्र से विष योग, राहु-शनि से पिशाच योग, शनि-मंगल से द्वंद योग व राहु-चंद्र से ग्रहण योग) का बनना विपत्तियों व संघर्षों का सूचक है अतः इस वर्ष भारत को कोरोना महामारी के साथ-साथ अन्य बीमारियों व अनेक प्रकार की विपत्तियों जैसे आतंकवादी घटनाएं, भूकम्प, आग से जान-माल की हानि, तूफान आदि का सामना निकट भविष्य में करना पड़ सकता है हालांकि गुरु भाग्येश होकर अष्टम भाव में बैठे हैं तो यह कुछ हद तक विपरीत परिस्थितियों में कड़े संघर्ष व कुछ कठोर नियमों के साथ राहत प्रदान करने के योग बनाएंगे किंतु कर्क लग्न की कुंडली में गुरु षष्ठेश भी होते हैं अतः गुरु का अष्टम में होना लोगों को स्वास्थ्य जनित समस्याएं देता रहेगा, धन भाव का स्वामी सूर्य दशम भाव में दिग्बली होकर अपनी उच्च राशि मेष में अस्त ग्रह शुक्र के साथ बैठे हैं और चतुर्थ भाव में नीचभंग राजयोग बनने के कारण से भारत दवा व वैक्सीन के क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ेगा और भारत के आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह स्थिति शुभ रहेगी जिससे भारत की GDP में पिछले वर्ष की तुलना में कुछ वृद्धि होगी चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र के प्रथम चरण से गोचर होने के कारण व वर्तमान में चन्द्र में मंगल की अंतर्दशा होने के कारण से अभी इस बीमारी से बड़ी राहत मिलती नही दिख रही है वर्तमान में १ मार्च २०२१ से १७ अगस्त २०२१ तक गोचर में राहु का प्रभाव काफी अधिक रहने वाला है जिस कारण से इन समय में कोरोना महामारी में अप्रत्याशित वृद्धि होती रहेगी हालांकि अन्य ग्रहों का गोचर में संचार बीच-बीच में ठीक होते रहने के कारण से लोग तेजी से स्वस्थ होते रहेंगे, अगस्त के मध्य भाग में राहु का प्रभाव गोचर में कम होने से कोरोना महामारी में कुछ कमी देखने को मिलेगी किंतु जल्द ही अर्थात १७ अक्टूबर २०२१ की रात्रि के ३ बजकर २७ मिनट पर सूर्य अपनी नीच राशि तुला से गोचर करेंगे व १८ अक्टूबर २०२१ को शुक्र दिन में ७ बजकर ४० मिनट से ज्येष्ठा नक्षत्र और शनि मार्गी अवस्था में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण से गोचर करेंगे उस समय शुक्र व केतु की युति पुनः कोरोना वृद्धि का सूचक रहेगी जिसमें कोरोना में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी जिसे संसार कोरोना की तीसरी लहर के नाम से जानेगा।

 

निष्कर्ष:-

 

१३ फरवरी २०२२ को सूर्य दिन में ७ बजकर ३३ मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तब कोरोना महामारी में कुछ राहत अनुभव होगी हालांकि बीच-बीच में गोचर में ग्रहों की स्थिति ठीक होने पर कोरोना महामारी में कुछ अप्रत्याशित कमी भी देखने को मिल सकती है किंतु १३ फरवरी २०२२ से पूर्व इससे पूर्णतया लाभ मिलता नही दिख रहा है।

 

आर्टिकल की लंबाई को ध्यान में रखते हुए आजाद भारत की कुंडली से कोरोना महामारी पर विवेचना अपने अगले आर्टिकल में प्रकाशित करूँगा।

 

जय श्री राम।

 

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स्वप्न में इन चीजों का दिखना देता है धन लाभ के संकेत—Astrology Sutras

स्वप्न में इन चीजों का दिखना देता है धन लाभ के संकेत—Astrology Sutras

 

स्वप्न में इन चीजों का दिखना देता है धन लाभ के संकेत
स्वप्न में इन चीजों का दिखना देता है धन लाभ के संकेत

 

सामुद्रिक शास्त्र में अनेक प्रकार के स्वप्नों के अर्थ बताए गए हैं स्वप्न मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं एक जो इष्ट फल को बताते हैं और द्वितीय जो अशुभ फलों को बताते हैं आज के इस लेख में मैं आप सभी को कुछ ऐसे स्वप्नों के बारे में बताने जा रहा हूँ जो कि शीघ्र धन लाभ को दर्शाते हैं तो चलिए जानते हैं वह कौन से स्वप्न है जो शीघ्र धन लाभ को दर्शाते हैं:-

 

१. यदि स्वप्न में आपके दाहिने हाथ पर सफेद सर्प काटते हुए दिखाई दे तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्ति को 10 दिन के अंदर ही धन लाभ होता है।

 

२. यदि स्वप्न में दूध दिखाई दे तो ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही धन लाभ होता है।

 

३. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में वट वृक्ष या फलों से लदे हुए किसी भी वृक्ष पर खुद को चढ़ते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्ति को शीघ्र ही धन लाभ होता है।

 

४. यदि व्यक्ति स्वप्न में खुद को बैल के रथ पर अकेला बैठे हुए देखे और उसके बाद तुरंत ही वह अपनी निद्रा से बाहर आ जाए तो ऐसे व्यक्ति को निश्चय ही शीघ्र धन लाभ होता है।

 

५. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में खुद को किसी वाहन, आसन, बिछौने या पालकी में चलते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्ति को चहूँ ओर अर्थात हर तरफ से धन लाभ होता है।

 

६. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में पान का बीड़ा, कपूर, अगरबत्ती, श्वेत चंदन, श्वेत पुष्प देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार ऐसे व्यक्ति को शीघ्र ही किसी संपत्ति का लाभ होता है।

 

७. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में अनार, गेहूँ का ढेर देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही धन लाभ होता है।

 

जय श्री राम।

 

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सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार 25 मुख्य स्वप्नों के अर्थ

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार 25 मुख्य स्वप्नों के अर्थ

 

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्नों के अर्थ
सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्नों के अर्थ

 

सामुद्रिक शास्त्र में स्वप्नों के अनेक फल बतलाए गए हैं वेद व पुराणों में भी स्वप्न फल का उल्लेख मिलता है विशेष रूप से अग्नि पुराण में शकुन-अपशकुन के बारे में विस्तृत वर्णन है, रात्रि के 4 प्रहर के अनुसार निद्रा की 4 प्रकार की अवस्थाएं होती हैं इनमें से रात्रि के अंतिम प्रहर में आने वाले स्वप्न का विशेष अर्थ होता है आज के इस लेख में मैं ऐसे ही कुछ स्वप्नों का अर्थ बताने जा रहा हूँ जिनसे आप भविष्य में घटित होने वाली घटनाओं अर्थात शकुन-अपशकुन का विचार कर सकते हैं:-

 

१. यदि व्यक्ति को स्वप्न में हरे भरे खेत-खलियान आदि दिखाई दें तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

२. यदि व्यक्ति को स्वप्न में कोई मृत व्यक्ति कपड़ा या कोई फल देता दिखाई देता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

३. यदि कोई विवाहित व्यक्ति स्वप्न में अंडा देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में ऐसे व्यक्तियों को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला बताया गया है।

 

४. यदि अविवाहित व्यक्ति स्वप्न में अंडा देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि व्यक्ति को निकट भविष्य में शुभ समाचार प्राप्त होने वाला है।

 

५. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में किसी कुम्हार को घड़ा बनाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह स्वप्न उक्त व्यक्ति के लिए समृद्धिदायक रहता है।

 

६. यदि स्वप्न में गधे की चीख सुनाई दे तो सामुद्रिक शास्त्र में इसे शुभ नही माना गया है ऐसे व्यक्ति पर किसी प्रकार के कष्ट या विपत्ति की संभावना रहती है।

 

७. यदि स्वप्न में व्यक्ति खुद को चावल खाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि ऐसे व्यक्ति को अत्यधिक परिश्रम करने पर भी जो कार्य सिद्धि में वह लगा हुआ है उसमें असफलता प्राप्त होगी।

 

८. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति चांदी को गलाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह मित्रों से बैर, हानि, चिंता और दुख का सूचक है।

 

९. यदि स्वप्न में चांदी की खान दिखाई दे तो सम्मान हानि का सूचक होती है।

 

१०. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति खुद को रोटी बनाते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार यह स्वप्न किसी गंभीर बीमारी का सूचक होती है अतः ऐसे व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य हेतु बेहद सतर्क रहना चाहिए।

 

११. यदि कोई विवाहित महिला स्वयं में खुद को बच्चे के लिए स्वेटर बनाते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बतलाया गया है कि उक्त महिला को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

१२. यदि किसी विवाहित व्यक्ति को स्वप्न में सुंदर व नवजात बालक दिखाई दे तो स्वप्न शास्त्र में बताया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होने वाला है।

 

१३. स्वप्न में चारों तरफ हरियाली या हरे-भरे खेत देखना भी सामुद्रिक शास्त्र में संतान सुख को बताया गया है।

 

१४. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्न में श्वेत महल, श्वेत तोरण, श्वेत रंग से रंगी छत दिखाई दे तो व्यक्ति को शीघ्र ही धन व संतान या दोनों का सुख प्राप्त होता है।

 

१५. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्न में अपने नाखून बड़े हुए देखना भी धन व संतान सुख का सूचक है।

 

१६. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति दर्पण में अपना मुख देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार ऐसे व्यक्ति को शीघ्र ही संतान सुख प्राप्त होता है।

 

१७. सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार स्वप्न में तिल, चावल, सरसों, जौ, अन्न, कलश, शंख, स्वर्ण के गहने आदि देखना समृद्धि का सूचक बतलाया गया है।

 

१८. स्वप्न में खोई हुई वस्तु की प्राप्ति को देखना भी सुख व समृद्धि का सूचक होता है।

 

१९. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में मकान मालिक द्वारा किराये की मांग करते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही स्वम् के मकान का सुख प्राप्त होने वाला है यह स्वप्न सुख व समृद्धि का सूचक होता है।

 

२०. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति नाक को साफ करते हुए देखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बतलाया गया है कि निकट भविष्य में उक्त व्यक्ति के आय में वृद्धि होगी तथा आय के नए साधन भी प्राप्त होंगे।

 

२१. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में किसी बच्चे को गोद में लेते हुए देखते हैं तो सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही अप्रत्याशित धन लाभ होने की संभावना रहती है।

 

२२. स्वप्न में भालू को पेड़ पर चढ़ते हुए देखना मनचाहा जीवनसाथी मिलने का सूचक होता है।

 

२३. यदि स्वप्न में सर पर सर्प दंश होते हुए दिखे तो सामुद्रिक शास्त्र में बतलाया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र की उच्च पद की प्राप्ति होगी।

 

२४. यदि स्वप्न में कोई व्यक्ति खुद को गधे पर बैठे हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में बताया गया है कि उक्त व्यक्ति को शीघ्र ही उच्च पद की प्राप्ति होने वाली है।

 

२५. यदि कोई व्यक्ति स्वप्न में गधे की पीठ पर खुद को सामान रखते हुए देखता है तो सामुद्रिक शास्त्र में इसे अत्यंत शुभ बताया गया है इस स्वप्न का अर्थ सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति व नए मित्र की प्राप्ति होती है।

 

जय श्री राम।

 

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चैत्र नवरात्रि 2021: जानें माता की सवारी, घट स्थापना शुभ मुहर्त व पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि 2021: जानें माता की सवारी, घट स्थापना शुभ मुहर्त व पूजन विधि

 

चैत्र नवरात्रि 2021 जानें पूजन विधि व शुभ मुहर्त
चैत्र नवरात्रि 2021 जानें पूजन विधि व शुभ मुहर्त

 

शक्ति की अधिष्ठात्री माता जगदंबा की आराधना का विशेष पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा माना गया है धर्म शास्त्रों के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी इस वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल 2021 को प्रातः 6 बजकर 59 मिनट पर लग रही है जो कि 13 अप्रैल 2021 को प्रातः 8 बजकर 47 मिनट तक रहेगी इस बार चैत्र शुक्ल पक्ष 15 दिनों का होने से इस बार नवरात्र 9 दिनों का अर्थात 13 से 21 अप्रैल तक रहेगा वासंतिक नवरात्र में नौ दुर्गा के साथ नौ गौरी के दर्शन का विशेष महत्व होता है इस बार माता अश्व पर आगमन कष्टकारी व गमन मानव कंधे पर होने से सुखदाई व चतुर्दिक लाभकारी रहेगा।

 

महानिशा पूजन:-

 

चैत्र नवरात्रि 2021 महानिशा पूजन
चैत्र नवरात्रि 2021 महानिशा पूजन

 

महानिशा पूजन सप्तमी युक्त अष्टमी में करने का विधान है निशीथ व्यापिनी अष्टमी योग 19 अप्रैल की रात्रि को मिल रहा है जिसमें महानिशा पूजन आदि किया जाएगा, महाअष्टमी व्रत 20 अप्रैल को रखा जाएगा वहीं चैत्र शुक्ल नवमी 21 की शाम 6 बजकर 59 मिनट तक है इस दिन महानवमी व श्री रामनवमी के व्रत के साथ दोपहर में श्री राम का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा, नवरात्रि का होम आदि 21 की शाम 6 बजकर 59 मिनट से कर लेना श्रेयष्कर रहेगा क्योंकि संध्या के 7 बजे दशमी लग जाएगी, नवरात्र व्रत का पारण 22 अप्रैल को किया जाएगा।

 

आगमन व प्रस्थान विधान:-

 

चैत्र नवरात्रि 2021 आगमन व गमन विधान
चैत्र नवरात्रि 2021 आगमन व गमन विधान

 

शास्त्रों में कहा गया है:-

 

“शशिसूर्ये गजारुढ़ा, शनिभौमे तुरंगमे।”

“गुरौ शुक्रे च डोलायाम, बुधे नौका प्रकीर्तिता।।”

 

अर्थात नवरात्र के प्रथम दिन रविवार या सोमवार हो तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं, यदि प्रथम दिन शनिवार या मंगलवार हो तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं, प्रथम दिन गुरुवार या शुक्रवार हो तो माता पालकी से आती हैं, प्रथम दिन बुधवार हो तो माता नौका पर सवार होकर आती हैं तथा इसी प्रकार माता का गमन रविवार व सोमवार को भैंसा पर, मंगलवार व शनिवार को मुर्गा पर, बुधवार व शुक्रवार को हाथी पर और गुरुवार को मानव कंधे पर होता है।

 

घट स्थापना वेला:-

 

चैत्र नवरात्रि 2021 घट स्थापना वेला
चैत्र नवरात्रि 2021 घट स्थापना वेला

 

घट स्थापना के लिए प्रातः वेला शुभ मानी गयी है इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल 2021 को प्रातः 6 बजकर 59 मिनट पर लग रही है जो कि 13 अप्रैल 2021 को प्रातः 8 बजकर 47 मिनट तक रहेगी अतः 13 अप्रैल को प्रातः 5 बजकर 43 मिनट से 8 बजकर 47 मिनट तक घट स्थापना करना बेहद शुभ रहेगा।

 

इसके अतिरिक्त द्विस्वभाव मिथुन लग्न में दिन के 09:46 से 12:00 बजे तक एवं अभिजित समय दोपहर 12:07 से 12:55 तक भी घट् स्थापना की जा सकती है चौघड़ियों के हिसाब से घट् स्थापना करने वाले दिन के 09:20 से दोपहर बाद 14:05 बजे तक भी चर, लाभ व अमृत के चौघड़ियों में घट् स्थापना कर सकते हैं।

 

चौघड़ियों के हिसाब से घट् स्थापना:-

 

चर :- 09:20 से 10:55 तक
लाभ :- 10:55 से 12:39 तक
अमृत :- 12:39 से 14:05 तक

 

श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया था देवी माँ की आराधना का निर्देश:-

 

श्री कृष्ण जी का अर्जुन को निर्देश
श्री कृष्ण जी का अर्जुन को निर्देश

 

आत्मा की शक्ति को देवी कहते हैं समस्त भूत, भौतिक जगत को प्रकाशित करने वाली चेतना शक्ति ही पराम्बा भगवती दुर्गा हैं वैसे तो इनकी उपासना हर दिन होती है और त्रिदेव जगत की रक्षा हेतु इनकी आराधना करते हैं, महाभारत युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए स्वम् भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को देवी माता पराम्बा की उपासना का निर्देश दिया था, वासंतिक नवरात्र शास्त्रों में वर्णित है, नौ रात्रियों का समूह होने से इसे नवरात्र कहा जाता है।

 

पूजन विधान:-

 

चैत्र नवरात्रि 2021 पूजन विधि
चैत्र नवरात्रि 2021 पूजन विधि

 

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि विशेष पर प्रातः नित्य कर्मादि-स्नानादि कर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प, जल लेकर संकल्पित होकर ब्रह्मा जी का आवहान करना चाहिए आगमन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेध, ताम्बूल, नमस्कार पुष्पांजलि व प्रार्थना आदि उपचारों से पूजन करना चाहिए, नवीन पंचांग से नव वर्ष के राजा, मंत्री, सेनाध्यक्ष, धनाधीप, दुर्गाधीप, संवत्सर निवास और फलाधीप आदि का फल श्रवण, निवास स्थान को ध्वजा, पताका व तोरण आदि से सुशोभित करना चाहिए।

 

जय श्री राम।

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Astrology Sutras/Logics Recent Post कुछ अचूक टोटके व शाबर मंत्र

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 अचूक उपाय

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 अचूक उपाय

 

माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 अचूक उपाय
माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के 7 अचूक उपाय

 

प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं धर्म शास्त्रों के अनुसार यदि देवी लक्ष्मी रुष्ठ हो जाएं तो घर सुख-शांति नही रहती अतः आज मैं आप सभी को देवी लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के 7 ऐसे अचूक उपाय बता रहा हूँ जिन्हें करने से माता लक्ष्मी शीघ्र प्रसन्न हो जाती हैं व घर में सुख-शांति और धन-संपदा बनी रहती है तो चलिए जानते हैं उन 7 अचूक उपाय के बारे में:-

 

१. घर के ईशान कोण में ताम्रपत्र, रजत पत्र या भोजपत्र पर श्री यंत्र की प्राण प्रतिष्ठा कर के श्री यंत्र की नित्य पूजा करने से माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

 

२. सुबह स्नानादि कर के देवी लक्ष्मी जी को दहीं का भोग लगाना चाहिए व कहीं भी जाते समय दहीं रूपी प्रसाद को सेवन करना चाहिए ऐसा करने से माता लक्ष्मी जी की कृपा से सभी कार्य शीघ्र पूर्ण होते हैं।

 

३. नित्य लक्ष्मी जी को गाय के देसी घी से बने हुए दो मुँह वाले दीपक को अर्पित कर श्री सूक्त का पाठ करने से देवी लक्ष्मी जी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

 

४. पूर्णिमा के दिन चावल, दूध, शकर किसी गरीब महिला या भिकारी को दान करने से देवी माता लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त होती है।

 

५. धर्म शास्त्रों के अनुसार शंख, गोबर व आंवले में लक्ष्मी जी का वास होता है अतः नित्य स्नानादि कर लक्ष्मी जी की मूर्ति/प्रतिमा/श्री यंत्र के समक्ष इन्हें स्थापित कर इनका भी विधिवत पूजन करने से लक्ष्मी माता की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 

६. देवी लक्ष्मी जी को नित्य कमल पुष्प अर्पित कर श्री सूक्त का पाठ करने व किसी गरीब को भोजन कराने से माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

 

७. लक्ष्मी जी की मूर्ति के साथ शिवलिंग पर एक साथ विल्वपत्र अर्पित करने से लक्ष्मी जी व शिव जी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

 

विशेष:-

 

इन सभी उपायों के साथ नारी सम्मान सर्वोपरि है जहाँ नारी का सम्मान नही होता वहाँ लक्ष्मी जी का कभी वास नही होता अतः नारी का सम्मान हमेशा करना चाहिए।

 

जय श्री राम।

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