Loading...
Categories
Puja Sangrah

देवउठनी एकादशी व्रत कथा

एक राजा थे जिनके राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखा करते थे प्रजा, नौकर-चाकरों से लेकर पशुओं तक को एकादशी के दिन अन्न नहीं दिया जाता था, एक दिन किसी दूसरे राज्य का एक व्यक्ति राजा के पास आकर बोला हे महाराज! कृपा करके मुझे नौकरी पर रख लीजिए मुझे नौकरी की अत्यंत आवश्यकता है तब राजा ने उसके सामने एक शर्त रखी कि रोज तो तुम्हें खाने को सब कुछ मिलेगा, पर एकादशी के दिन अन्न नहीं मिलेगा यदि शर्त मंजूर हो तो तुम काम पर आ सकते हो।

उस व्यक्ति को उस समय काम की बहुत जरूरत थी जिस कारण से उनसे हाँ कर दिया, पर एकादशी के दिन जब उसे फलाहार का सामान दिया गया तो वह राजा के सामने जाकर गिड़गिड़ाने लगा: महाराज! इससे मेरा पेट नहीं भरेगा और मैं भूखा ही मर जाऊंगा, मुझे अन्न दे दो, राजा ने उसे शर्त की बात याद दिलाई, पर वह अन्न छोड़ने को तैयार नहीं हुआ, तब राजा ने उसे आटा-दाल-चावल आदि दिए वह नित्य की तरह नदी पर पहुँचा और स्नान कर भोजन पकाने लगा और जब भोजन बन गया तो वह भगवान को बुलाने लगा- हे प्रभु! भोजन तैयार है आप आकर भोजन कर लीजिए।

उसके बुलाने पर पीताम्बर धारण किए भगवान चतुर्भुज रूप में आ पहुँचे तथा प्रेम से उसके साथ भोजन करने लगे, भोजनादि करके जब भगवान अंतर्धान हो गए तथा वह अपने काम पर चला गया, पंद्रह दिन बाद अगली एकादशी को वह राजा से कहने लगा कि महाराज, मुझे दुगुना सामान दीजिए, उस दिन तो मैं भूखा ही रह गया था, राजा ने जब कारण पूछा तो उसने बताया कि मेरे साथ भगवान भी खाते हैं इसलिए हम दोनों के लिए यह भोजन पर्याप्त नहीं पड़ता।

यह सुनकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ और वह बोला मैं नहीं मान सकता कि भगवान तुम्हारे साथ भोजन करते हैं, मैं तो इतना व्रत रखता हूँ, पूजा करता हूँ, पर भगवान ने मुझे कभी दर्शन नहीं दिए, राजा की बात सुनकर वह बोला, महाराज! यदि आपको मुझपर विश्वास नही है तो आप साथ चलकर देख लीजिए, राजा ने उसकी बात मान ली और राजा उसी जगह पर एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया, उस व्यक्ति ने भोजन बनाया तथा भगवान को शाम तक पुकारता रहा, परंतु भगवान नही आए, अंत में उसने कहा हे प्रभु! यदि आप आज नहीं आए तो मैं भी नदी में कूदकर अपने प्राण त्याग दूँगा, लेकिन भगवान नहीं आए, तब वह प्राण त्यागने के उद्देश्य से नदी की तरफ बढ़ने लगा, प्राण त्यागने की उसकी दृढ़ इच्छा शक्ति को भगवान ने जानकर उसे दर्शन दिए तथा साथ बैठकर भोजन करने लगे और अंत में अंतर्धान हो गए, यह सब देखकर राजा ने सोचा कि व्रत-उपवास से तब तक कोई फायदा नहीं होता, जब तक मन शुद्ध न हो अतः राजा ने भी पूर्ण निष्ठा के साथ व्रत-उपवास करने लगा जिसके फलस्वरूप राजा को अंत में स्वर्ग प्राप्त हुआ।

जय श्री हरि🙏🏻

Categories
Festivals

देवउठनी एकादशी 2025: जानिए शुभ मुहूर्त्त व व्रत एवं पूजन विधि

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाते हैं जिसे हरि प्रोबिधिनी एकादशी भी कहते हैं, इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से बाहर आते हैं जिससे चातुर्मास का अंत भी होता है तथा सभी मांगलिक कार्यक्रम जैसे विवाह व गृहप्रवेश जैसे कृत्य शुरू हो जाते हैं, साथ ही इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है, देवउठनी एकादशी का विधिवत व्रत व तुलसी विवाह और दान-पुण्य करने वाले के जीवन में सुख, शांति व समृद्धि बनी रहती है।

देवउठनी एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त्त व पूजा विधि

“ऋषिकेश पंचांग” (काशी) अनुसार वर्ष 2025 में कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि 31 अक्टूबर की अर्ध रात्रि 04:03 पर लग रही है जो कि 1 नवंबर की ही अर्ध रात्रि 02:56 पर खत्म हो जाएगी अतः देवउठनी एकादशी व्रत व पूजा 1 नवंबर के दिन रहेगा और एकादशी व्रत पारणा 2 नवंबर को दोपहर 01:45 से 03:15 के मध्य करना अतिलाभकारी रहेगा।

पूजन व व्रत विधि

सर्वप्रथम स्नानादि कर पवित्र एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर मन में गणेश जी का ध्यान कर गुरु वंदना करें पश्चात विष्णु जी और लक्ष्मी जी का ध्यान कर उन्हें गंगा जल या किसी पवित्र नदी के जल और पंचामृत से स्नान करवा कर पुनः जल से स्नान करवाएं औऱ तुलसी के पत्ते, पीले पुष्प, चंदन का तिलक और पीले मीठे का भोग व घी का दीपक अर्पित कर के विष्णु चालीसा, लक्ष्मी चालीसा, एकादशी व्रत कथा का पाठ कर विष्णु जी व लक्ष्मी जी के मंत्रों का जप करना चाहिए और इसके बाद तुलसी पूजन व तुलसी विवाह करवा कर सम्पूर्ण दिन-रात्रि व्रत का पालन करें और गरीबों को मिठाई (पीला मीठा) और केला दान करें।

Categories
Astrology Sutras/Logics EN

The Top 4 Zodiac Geniuses Who Shine With High IQs

Are you curious which zodiac signs are the smartest? Astrology suggests that some signs are known for having very high IQs and sharp minds. These signs are great thinkers, quick learners, and creative problem solvers. Let’s meet the top 4 zodiac signs famous for their intelligence!

Aquarius:- The Innovative Thinker

Aquarius is known for being a true genius. They think differently from others and love to come up with new ideas. Aquarian’s are curious and always explore new things. Their minds work fast, and they enjoy solving problems in creative ways. They are often inventors, scientists, or artists who want to change the world.

Gemini:- The Quick Learner

Gemini is very smart and adaptable. They learn new things quickly and can talk about many different subjects. Geminis love to share knowledge and communicate well with others. Their lively and curious nature helps them stay sharp and always ready to face new challenges.

Virgo:- The Detail-Oriented Thinker

Virgos are very good at paying attention to small details others might miss. They think carefully and like to organize their thoughts clearly. Virgos are practical and logical, which makes them excellent problem solvers. They do well in jobs that need accuracy, like research and science.

Scorpio:- The Deep Thinker

Scorpio has a strong and focused mind. They want to understand the truth behind things and are very good at digging deep to find answers. Scorpios have sharp instincts and a great ability to solve difficult problems. Their intelligence often helps them in careers like psychology, investigation, or research.

Why These Signs Are So Smart

These four zodiac signs stand out for their different types of intelligence. Aquarius shines with creativity and vision. Gemini impresses with quick thinking and communication. Virgo excels in detailed analysis and logic. Scorpio amazes with deep insight and focus. Together, they show how unique qualities can make each sign a genius in its own way.

If your zodiac sign is one of these, you might already know how clever you are! And if not, remember that everyone has special talents waiting to shine.

Categories
Astrology Sutras/Logics EN

Meet the 8 Zodiac Signs That Refuse to Quit on Their Dreams

Dreams keep us going, and some zodiac signs show amazing strength and determination when working toward theirs. If you want to know which signs never give up, here are eight that stand out for their drive and passion.

Capricorn:- The Patient Climber

Capricorns are like steady mountain climbers. They work hard, stay focused, and plan carefully. Even when the road is long or tough, they stay calm and keep going until they reach the top.

Aquarius:- The Visionary Dreamer

Aquarius loves thinking big and doing things differently. They believe in creating change and don’t let others’ doubts stop them. Their creativity and independent spirit help them reach their dreams in their own unique way.

Pisces:- The Hopeful Creator

Pisces are emotional and imaginative. Their dreams often connect to their feelings and inner growth. Even when life gets hard, they find strength in kindness, creativity, and faith in a better future.

Aries:- The Fearless Warrior

Aries is bold, energetic, and always ready for a challenge. They take risks and never back down. Once they set their mind on something, they pursue it with courage and passion.

Taurus:- The Steadfast Achiever

Taurus moves slowly but never stops. They are patient, loyal, and determined. Once they choose a goal, they stick with it until they succeed. Their persistence makes them one of the strongest signs.

Leo:- The Ambitious Performer

Leo shines with confidence and loves to stand out. Their energy and optimism push them to chase their dreams with excitement. Even after setbacks, they recover quickly and keep going strong.

Scorpio:- The Intense Reformer

Scorpio feels deeply and focuses completely on what matters most to them. Their willpower and resilience help them overcome any obstacle. When they want something, they give it everything they’ve got.

Sagittarius:- The Optimistic Explorer

Sagittarius is driven by adventure and curiosity. They believe anything is possible with enough hope and effort. Their positive attitude helps them stay motivated, no matter how long the journey.

Why These Signs Keep Going

These eight signs all share one thing: belief in their dreams. Whether it’s Capricorn’s patience, Aries’ boldness, or Pisces’ imagination, each of them shows how determination and faith can lead to success.

Categories
Puja Sangrah

सोलह सोमवार व्रत-कथा और उद्यापन विधि

सोलह सोमवार व्रत भगवान शिव व माँ गौरी की कृपा प्राप्त करने का मुख्य व्रत है जिससे जीवन में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि, वैवाहिक खुशहाली और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है विशेषकर अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं अपने दाम्पत्य जीवन में मधुरता तथा पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत का पालन करती हैं ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस व्रत को श्रावण मास से प्रारंभ करना उत्तम रहता है।

व्रत विधि

श्रावण माह की प्रतिपदा तिथि के दिन स्नानादि कर के शिव जी व माँ गौरी के समक्ष एक घी का दीपक अर्पित कर शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत से स्नान करवा कर भोग अर्पित करना चाहिए और हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, व्रत उद्देश्य बोलकर सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लेना चाहिए और नित्य शिव जी व माँ गौरी की पूजा करनी चाहिए तथा प्रथम सोमवार से 16 सोमवार का व्रत आरंभ करना चाहिए जो कि 4 माह तक चलता है।

सोलह सोमवार व्रत पौराणिक कथा

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण ने सोलह सोमवार के व्रत का पालन किया तो उसे देवी पार्वती की कृपा प्राप्त हुई और उसके घर सुंदर पुत्र का जन्म हुआ, पुत्र ने भी यही व्रत किया और उसे राजगद्दी मिली और इसके बाद राजा ने अपनी रानी के साथ नियमित रूप से यह व्रत किया एक दिन रानी ने आलस्यवश मंदिर नहीं जाकर पूजा सामग्री नौकर के हाथ भेज दी, जिससे राजा को आकाशवाणी हुई कि या तो रानी को त्याग दें या तुम्हारा सर्वनाश हो जाएगा इस आकाशवाणी से चिंतित होकर राजा ने रानी को महल से निकाल दिया जिस कारण से रानी अनेक वर्षों तक भटकती रही और उसने सोलह सोमवार व्रत पूर्ण निष्ठा से किया जिससे उसके सत्कर्मों को देखकर भगवान शिव की कृपा हुई और रानी को सभी सुख पुनः प्राप्त हुआ।

सोलह सोमवार व्रत उद्यापन विधि

16 सोमवार व्रत पूर्ण हो जाने के बाद 17 वें सोमवार के दिन सुबह स्नानादि कर भगवान शिव व माँ गौरी की पूजा करनी चाहिए तथा “ॐ रुद्राय नमः” मंत्र का जप करना चाहिए साथ ही शिव जी का रुद्राभिषेक व ब्राह्मण को भोजनादि दान करना चाहिए।

Categories
पौराणिक कथाएं

अक्षय नवमी से जुड़ी पौराणिक कथाएं

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि के दिन माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण कर रही थीं तभी उनके मन में भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा एक साथ करने का विचार आया जिससे प्रेरित होकर माँ लक्ष्मी ने आंवले वृक्ष को भगवान विष्णु और भगवान शिव का प्रतीक मानकर पूर्ण विधि-विधान से पूजा करी, उनकी पूजा से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों प्रकट हुए और माँ लक्ष्मी ने आंवले वृक्ष के नीचे ही दोनों देवताओं के लिए भोजन पका कर दोनों देवताओं को परोसा और बाद में स्वयं भी भोजन किया तभी से यह मान्यता है कि अक्षय नवमी पर आंवले के वृक्ष की पूजा और वृक्ष के नीचे भोजन करने से भक्त को भगवान विष्णु, शिव जी और माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

वहीं ऐसी मान्यता भी है कि इस दिन सत्त युग व द्वापर युग का आरंभ हुआ था जिस कारण से अक्षय नवमी को सत्य, धर्म और नए युग के आरंभ का प्रतीक माना जाता है और इस दिन के स्नान-दान-व्रत से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।

राजा आंवल्या की कथा

आंवलया राजा की कथा एक लोकप्रिय पौराणिक कथा है, जो आंवला नवमी से जुड़ी है और इसके महत्व को सरलता से समझाती है इस कथा के अनुसार, एक समय की बात है कि एक राजा थे, जिसे आंवलया राजा कहा जाता था क्योंकि उसने यह प्रण किया था कि वह रोजाना सवा मन आंवले का दान करने के बाद ही भोजन करेगा जो उसकी धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी भी थी अतः राजा अपने इस प्रण का सख्ती से पालन करता था और अपने प्रजा में भी दान करता था।​

राजा के बेटे और बहू को यह बात पसंद नही थी, क्योंकि वह सोचते थे कि इतना अधिक दान करने से राज्य का खजाना जल्द खत्म हो जाएगा जिस कारण से उन दोनों ने राजा को दान न देने सलाह दी, राजा को यह बात सुनकर बहुत दुख हुआ और उन्होंने रानी के साथ मिलकर अपना महल छोड़ जंगल चले जाने का फैसला किया, जंगल में दोनों सात दिन तक भूखे-प्यासे रहे क्योंकि राजा ने अपने प्रण का पालन करते हुए दान किए बिना भोजन नहीं किया उनकी इस तपस्या और दृढ़ता को देखकर भगवान विष्णु ने उन पर कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन दया कर जंगल में ही उनके लिए महल, बाग-बगीचे और आंवले के पेड़ उन्हें वरदान में दिए, जो उनके पुराने राज्य से भी भव्य था।​

राजा और रानी ने फिर से आंवले का दान किया और खुशहाल होकर नए राज्य में रहने लगे वहीं, राजा के बेटे-बहू का दुर्भाग्य आया क्योंकि उनके बुरे कर्मों के कारण उनका राज्य छीन लिया गया और वे दाने-दाने को मोहताज हो गए अंत में पुत्र और बहू को अपनी भूल का एहसास हुआ और वह लौटकर अपने माता-पिता के पास आकर दान और सत्कर्मों का महत्व समझ कर वह भी दान-पुण्य करने लगे।

इस प्रकार, आंवलया राजा की कथा धर्म, त्याग और दान की महत्ता को दर्शाती है, जो अक्षय नवमी के त्यौहार की धार्मिक महत्ता बताती है।

Categories
Puja Sangrah

रामरक्षास्तोत्रम्

विनियोग:

अस्य श्रीरामरक्षास्तोत्रमंत्रस्य बुधकौशिक ऋषि: श्रीसीतारामचंद्रो देवता अनुष्टुप् छन्द: सीता शक्ति: श्रीमान् हनुमान् कीलकं श्रीरामचंद्रप्रीत्यर्थे श्रीरामरक्षास्तोत्र पाठे विनियोग:।

ध्यानम्

ध्यायेदाजानुबाहुं धृतशरधनुषं बद्धपद्मासनस्थं

पीतं वासो वसानं नवकमलदलस्पर्धिनेत्रं प्रसन्नम्।

वामाङ्‌कारूढसीतामुखकमलमिलल्लोचनं नीरदाभं

नानालङ्‌कारदीप्तं दधतमुरुजटामण्डनं रामचंद्रम्॥

॥इति ध्यानम्॥

चरितं रघुनाथस्य शतकोटिप्रविस्तरम्।

एकैकमक्षरं पुंसां महापातकनाशनम्॥१॥

ध्यात्वा नीलोत्पलश्यामं रामं राजीवलोचनम्।

जानकीलक्ष्मणोपेतं जटामुकुटमण्डितम्॥२॥

सासितूणधनुर्बाणपाणिं नक्तं चरान्तकम्।

स्वलीलया जगत्त्रातुमाविर्भूतमजं विभुम्॥३॥

रामरक्षां पठेत्प्राज्ञ: पापघ्नीं सर्वकामदाम्।

शिरो मे राघव: पातु भालं दशरथात्मज:॥४॥

कौसल्येयो दृशौ पातु विश्वामित्रप्रिय: श्रुती।

घ्राणं पातु मखत्राता मुखं सौमित्रिवत्सल:॥५॥

जिह्वां विद्यानिधि: पातु कण्ठं भरतवंदित:।

स्कन्धौ दिव्यायुध: पातु भुजौ भग्नेशकार्मुक:॥६॥

करौ सीतापति: पातु हृदयं जामदग्न्यजित्।

मध्यं पातु खरध्वंसी नाभिं जाम्बवदाश्रय:॥७॥

सुग्रीवेश: कटी पातु सक्थिनी हनुमत्प्रभु:।

ऊरू रघुत्तम: पातु रक्ष:कुलविनाशकृत्॥८॥

जानुनी सेतुकृत्पातु जङ्घे दशमुखान्तक:।

पादौ बिभीषणश्रीद: पातु रामोSखिलं वपु:॥९॥

एतां रामबलोपेतां रक्षां य: सुकृती पठॆत्।

स चिरायु: सुखी पुत्री विजयी विनयी भवेत्॥१०॥

पातालभूतलव्योम चारिणश्छद्‌मचारिण:।

न द्र्ष्टुमपि शक्तास्ते रक्षितं रामनामभि:॥११॥

रामेति रामभद्रेति रामचंद्रेति वा स्मरन्।

नरो न लिप्यते पापैः र्भुक्तिं मुक्तिं च विन्दति॥१२॥

जगज्जैत्रैकमन्त्रेण रामनाम्नाभिरक्षितम्।

य: कण्ठे धारयेत्तस्य करस्था: सर्वसिद्धय:॥१३॥

वज्रपंजरनामेदं यो रामकवचं स्मरेत्।

अव्याहताज्ञ: सर्वत्र लभते जयमंगलम्॥१४॥

आदिष्टवान् यथा स्वप्ने रामरक्षामिमां हर:।

तथा लिखितवान् प्रात: प्रबुद्धो बुधकौशिक:॥१५॥

आराम: कल्पवृक्षाणां विराम: सकलापदाम्।

अभिरामस्त्रिलोकानां राम: श्रीमान् स न: प्रभु:॥१६॥

तरुणौ रूपसंपन्नौ सुकुमारौ महाबलौ।

पुण्डरीकविशालाक्षौ चीरकृष्णाजिनाम्बरौ॥१७॥

फलमूलाशिनौ दान्तौ तापसौ ब्रह्मचारिणौ।

पुत्रौ दशरथस्यैतौ भ्रातरौ रामलक्ष्मणौ॥१८॥

शरण्यौ सर्वसत्वानां श्रेष्ठौ सर्वधनुष्मताम्।

रक्ष:कुलनिहन्तारौ त्रायेतां नो रघुत्तमौ॥१९॥

आत्तसज्जधनुषाविषुस्पृशा – वक्षयाशुगनिषङ्गसङि‌गनौ।

रक्षणाय मम रामलक्ष्मणावग्रत: पथि सदैव गच्छताम्॥२०॥

संनद्ध: कवची खड्‌गी चापबाणधरो युवा।

गच्छन्‌ मनोरथान्नशच राम: पातु सलक्ष्मण:॥२१॥

रामो दाशरथि: शूरो लक्ष्मणानुचरो बली।

काकुत्स्थ: पुरुष: पूर्ण: कौसल्येयो रघूत्तम:॥२२॥

वेदान्तवेद्यो यज्ञेश: पुराणपुरुषोत्तम:।

जानकीवल्लभ: श्रीमानप्रमेयपराक्रम:॥२३॥

इत्येतानि जपन्नित्यं मद्‌भक्त: श्रद्धयान्वित:।

अश्वमेधाधिकं पुण्यं संप्राप्नोति न संशय:॥२४॥

रामं दूर्वादलश्यामं पद्‌माक्षं पीतवाससम्।

स्तुवन्ति नामभिर्दिव्यैर्न ते संसारिणो नराः॥२५॥

रामं लक्ष्मण-पूर्वजं रघुवरं सीतापतिं सुंदरम्

काकुत्स्थं करुणार्णवं गुणनिधिं विप्रप्रियं धार्मिकम्।

राजेन्द्रं सत्यसंधं दशरथतनयं श्यामलं शान्तमूर्तिम्

वन्दे लोकाभिरामं रघुकुलतिलकं राघवं रावणारिम्॥२६॥

रामाय रामभद्राय रामचंद्राय वेधसे।

रघुनाथाय नाथाय सीताया: पतये नम:॥२७॥

श्रीराम राम रघुनन्दन राम राम।

श्रीराम राम भरताग्रज राम राम।

श्रीराम राम रणकर्कश राम राम।

श्रीराम राम शरणं भव राम राम॥२८॥

श्रीरामचन्द्रचरणौ मनसा स्मरामि।

श्रीरामचन्द्रचरणौ वचसा गृणामि।

श्रीरामचन्द्रचरणौ शिरसा नमामि।

श्रीरामचन्द्रचरणौ शरणं प्रपद्ये॥२९॥

माता रामो मत्पिता रामचन्द्र: स्वामी रामो मत्सखा रामचन्द्र:।

सर्वस्वं मे रामचन्द्रो दयालु र्नान्यं जाने नैव जाने न जाने॥३०॥

दक्षिणे लक्ष्मणो यस्य वामे च जनकात्मजा।
पुरतो मारुतिर्यस्य तं वन्दे रघुनंदनम्॥३१॥

लोकाभिरामं रणरङ्गधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।

कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥३२॥

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।

वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥३३॥

कूजन्तं रामरामेति मधुरं मधुराक्षरम्।

आरुह्य कविताशाखां वन्दे वाल्मीकिकोकिलम्॥३४॥

आपदामपहर्तारं दातारं सर्वसंपदाम्।

लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नमाम्यहम्॥३५॥

भर्जनं भवबीजानामर्जनं सुखसंपदाम्।

तर्जनं यमदूतानां रामरामेति गर्जनम्॥३६॥

रामो राजमणि: सदा विजयते रामं रमेशं भजे

रामेणाभिहता निशाचरचमू रामाय तस्मै नम:।

रामान्नास्ति परायणं परतरं रामस्य दासोऽस्म्यहं

रामे चित्तलय: सदा भवतु मे भो राम मामुद्धर॥३७॥

राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे।

सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥३८॥

॥इति श्रीबुधकौशिकविरचितं श्रीरामरक्षास्तोत्रं संपूर्णम्॥

॥श्री सीतारामचंद्रार्पणमस्तु॥

Categories
Astrology Sutras/Logics EN

Do Soulmates Still Exist?

Today, many people meet and talk through phones and social media. But one question never changes — do soulmates still exist?

For a long time, people have believed that the stars help two special people meet each other. Even now, many still hope to find a love that feels meant to be. But how can you know if the person you love is really your soulmate?

The Stars and the Universe

Some people believe that the universe brings two souls together. Astrology, which studies the stars and planets, helps us understand these connections.
If your and your partner’s birth charts match well, it can mean you share a deep bond. When your sun, moon, and rising signs fit nicely, it shows emotional and spiritual harmony.

Special Signs

Sometimes you meet someone in a way that feels magical — like it was meant to happen. You might see repeating numbers, have strange dreams, or meet by surprise.
These small but special things can be signs from the universe that you are close to your soulmate.

Strong Connection

Soulmate love feels different from normal attraction. It feels deep and peaceful. When you meet, you might feel like you already know this person.
It’s not just about looks — it’s about a connection between hearts. Trust your feelings; sometimes your heart knows before your mind does.

Growing Together

A soulmate doesn’t make life perfect, but they help you grow. They support you, help you heal from the past, and make you a better person.
Even in hard times, you both stay strong together because of love and trust. You learn, change, and move forward — always side by side.

Categories
कुछ अचूक टोटके व शाबर मंत्र

बंद व्यापार चालू करने का अचूक उपाय

मेरे पास बहुत से लोग आते हैं कि उनका कारोबार  एकदम बंद पड़ा हुआ है, आमदनी कुछ भी नही हो पाती तो आज मैं आप सभी को ऐसा उपाय बताने जा रहा हूँ जिनको करने से आपके व्यापार की बरकत होने लगेगी और आय की वृद्धि होगी।

मंत्र

।।जल खोलूँ, जल-हल खोलूँ, खोलूँ बंद-व्यापार, आवे धन अपार, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा, हनुमत वचन, जुग-जुग साचा।।

मंत्र विधि:-

साबुत काली उर्द के चार या आठ दाने लेकर एक साफ लाल कपड़े पर रख लें और गंगा जल से इन्हें शुद्ध कर धूप, दीप जलाकर 108 बार ऊपर बताए गए मंत्र का जाप करें और फिर उसकी एक पोटली बनाकर लाल धागे से बांध कर अपनी तिजोरी में रख दें।

नित्य दुकान में गणेश-लक्ष्मी पूजन के बाद इस पोटली की भी पूजा करें हनुमान जी कृपा से आपका बंद व्यापार शुरू हो जाएगा।

यह मंत्र शुक्ल पक्ष के किसी भी रविवार या मंगलवार के दिन प्रयोग कर सकते हैं।

जय श्री राम।