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What is Fate and Karma Theory? Decoding Destiny by Astrology Sutras

What is Fate and Karma Theory? A Deep Astrological Insight by Astrology Sutras

The question of human existence often circles back to one profound mystery: What is Fate!!! Is there a thing called fate? Or is it a screen behind which the clever, the unlawful, the weak-willed persons conceal their wrong doing by holding God or Karma responsible for their faults? Is fate a way of shedding responsibilities and claiming redressal for wrong doing by explanations that “Nature” or “Fate” compelled them to do what they did? Let’s look into this problem in the light of following facts:

  • The universe is complicatedly arranged and diligently run functioning. The operations run evenly because every component of this vast operation is assigned a specific task(s). Each human birth takes place to carry out its devoted task in accordance with its Karma. This allocation of task(s) is “Fate” or “Destiny”.
  • If events are not being determined in advance, they cannot be forecasted. The fact that something, some event, due to take place at a future date, can be predicted, gives credence to the existence of “Fate”.
  • The circumstances and the environment of the house where one is born are pre-determined. To be born with a silver spoon in the mouth or in poor, poverty-laden circumstances is “Fate” or “Destiny”.

Conclusion: There is a force, call it what you may, that shapes human lives. Hindu Astrology takes a giant intellectual step and identifies this force as Karma. The present is conditioned by the past Karma and the Karma, which we do in the present, shapes our future.


What is the Karma theory!!!

The Vedas teach us “Do Not Fear” because our God bless us in “Abhaya Mudra” which is fearless posture. Upanishads tells us “Moksha is not for Cowards”. We fear death, we fear misfortune, we fear the unknown and we fear everything. Karma theory puts things in a perspective where we begin to realize that we are the part of a properly conceived, meticulously planned and brilliantly executed “grand design”. We are acting out our roles as sketched out by the great designer.

The karma theory rests on three pillars and they are:

  • Reincarnation
  • Man’s inescapable propensity to do Karma; an action less existence is not possible.
  • Fruits of action have to be enjoyed/suffered. That is the only way in which the cycle of action and its results gets spent.

A man inevitably enjoys the good or bad results of his Karma, unspent they do not decrease even in eons. These 3 pillars very subtly but in a very perceptible fashion encourage the human beings to grip up and fight the “fear” and attain “Moksha”, without reincarnation there can b no Astrology. For Astrology is merely reading the karmic patterns which has a link with the past life(s) and also with the future life(s).

The karmic pattern is woven skillfully in a horoscope, so as to indicate the balance of Karma that he native is carrying as well as his mission or task in this life. How is it done? Let us see-

All of us are “a replica” of Universe. The five elements, fire, water, earth, air and ether (A very improper word for Aakash element) Constitutes the universe and we are also an amalgam of these five elements. It, therefore, stands to reason that we are a small part of a Grand Design, place in the fashion so that we can make our contribution. Each one of he humans has desires and wishes to fulfill them. Each one of us is motivated differently and reacts in a different manner to a given situation. It is outer manifestation of the Karmic pattern and the inner motivations to exhaust the fruits of past Karmas and to do Karma that lead to emancipation is seen in a horoscope when we divide it into four parts as under:

(A) Dharma (B) Artha (C) Kama (D) Moksha

In a horoscope houses 1st, 5th, 9th are the houses of Dharma; 2nd, 6th,10th are the Artha houses, 3rd, 7th, 11th are the Kama houses and 4th, 8th 12th are the Moksha houses.

The signs and planets occupying and influencing these houses indicate the Karma patterns. If the majority of planets are in Artha and Kama houses, the native’s inclinations and motivations are oriented in that direction. He has desires (Kama) and the money (Artha) and if they match at the right time in the native’s chronological growth, he can enjoy then to the full. This is the pattern, which is laid out in the horoscope. On the other hand, a native due to achieve emancipation would have a planetary distribution in his Dharma and Moksha segments. Various combinations are possible and that is why we see people having differing outlooks and Motivations.

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गुरु-शनि राशि परिवर्तन: ‘स्थान हानि’ और ‘स्थान वृद्धि’ का अद्भुत शास्त्रीय रहस्य

महर्षि पराशर कृत: गुरु-शनि राशि परिवर्तन और स्थान प्रभाव का अद्भुत विश्लेषण

Astrology Sutras के सभी पाठकों को जय श्री राम! महर्षि पराशर द्वारा रचित ‘बृहत् पराशर होरा शास्त्र’ (BPHS) ज्योतिष शास्त्र का आधार स्तंभ है। इसमें ग्रहों की स्थिति, उनके भाव फल और एक-दूसरे के राशियों में बैठने के परिणामों का अत्यंत सूक्ष्म वर्णन मिलता है।

आज हम ज्योतिष के उस गहरे सूत्र की चर्चा करेंगे जिसे अक्सर अनुभवी ज्योतिषी ही समझ पाते हैं—“गुरु शनि के घर में स्थान हानि करता है और शनि गुरु के घर में स्थान वृद्धि करता है।” यहाँ इसका विस्तृत विश्लेषण और शास्त्रीय तर्क प्रस्तुत हैं।

१. गुरु और शनि: एक विरोधाभासी संबंध

BPHS के अनुसार, बृहस्पति (गुरु) और शनि के बीच का संबंध ‘सम’ (Neutral) है। लेकिन ‘स्थान’ (घर) के आधार पर इनके फल बदल जाते हैं:

  • गुरु का स्वभाव: विस्तार, ज्ञान और जीव का कारक है। यह जहाँ बैठता है, वहाँ ‘आकाश तत्व’ के कारण भौतिक फलों में कभी-कभी कमी (स्थान हानि) कर देता है।
  • शनि का स्वभाव: संकोच, अनुशासन और कर्म का कारक है। यह जहाँ बैठता है, वहाँ स्थायित्व (Sustainability) प्रदान करता है।

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२. गुरु द्वारा शनि के घर में ‘स्थान हानि’ (सिद्धान्त)

ज्योतिष का सूत्र है: ‘स्थान हानि करो जीव’। जब गुरु शनि की राशियों (मकर और कुंभ) में होता है, तो स्थिति कुछ इस प्रकार होती है:

“मकरे नीचतां याति सुरपूज्यः सदा नृणाम्। स्वल्पो लाभो व्ययो भूयात् स्थानहानिः प्रजायते॥”

अर्थ: मकर राशि में गुरु ‘नीच’ का होकर अपनी विस्तार शक्ति खो देता है। फलस्वरूप, जातक को प्रतिष्ठा की कमी या उस भाव के सुख की हानि (स्थान हानि) सहनी पड़ती है।

३. शनि द्वारा गुरु के घर में ‘स्थान वृद्धि’ (सिद्धान्त)

इसके विपरीत, शनि जब गुरु की राशियों (धनु और मीन) में बैठता है, तो वह ‘स्थान वृद्धि’ करता है:

“चापे झषे च संस्थितः सौरिः शुभफलप्रदः। राज्यं कीर्तिं च कुरुते स्थानवृद्धिं च निश्चितम्॥”

अर्थ: धनु और मीन राशियों में स्थित शनि जातक को राज्य, कीर्ति और उस भाव की निश्चित वृद्धि कराता है।

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४. विस्तृत विवेचन और पराशरीय दृष्टिकोण

  • गुरु की ‘स्थान हानि’: गुरु ‘जीव’ है और शनि का घर ‘कठोर कर्म’ का। जब जीव संघर्षपूर्ण क्षेत्र में जाता है, तो उसे ‘स्थान हानि’ महसूस होती है।
  • शनि की ‘स्थान वृद्धि’: शनि जब गुरु के घर में होता है, तो वह ‘धर्म’ से जुड़ जाता है। यहाँ वह व्यक्ति को गंभीर विचारक और सफल प्रशासक बनाता है।

५. तालिका: गुरु-शनि का राशि प्रभाव

ग्रह राशि (स्वामी) प्रभाव परिणाम
गुरु मकर (शनि) नीच / स्थान हानि सुखों में कमी, संघर्ष, मान-हानि
शनि धनु (गुरु) शुभ / स्थान वृद्धि पद-प्रतिष्ठा, उन्नति, न्याय

६. निष्कर्ष

महर्षि पराशर का यह सूत्र सिखाता है कि ज्योतिष में केवल ‘मित्र-शत्रु’ नहीं, बल्कि ‘तत्व’ का मिलन मुख्य है। गुरु आकाश है जिसे सीमाएं पसंद नहीं, इसलिए वह शनि की सीमाओं में घुटता है। शनि अंधकार है जिसे ज्ञान मिलने पर वह सही दिशा में विकसित होता है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) – शास्त्र प्रमाण सहित

Q1: गुरु शनि के घर में स्थान हानि क्यों करता है?

बृहत् पराशर होरा शास्त्र के अनुसार, गुरु विस्तार (Expansion) का कारक है और शनि की राशियाँ (मकर, कुंभ) अनुशासन और सीमाओं (Limitations) की हैं। मकर में गुरु नीच का हो जाता है, जिससे उस भाव के भौतिक सुखों और फलों में कमी (स्थान हानि) होती है।

Q2: शनि गुरु के घर में स्थान वृद्धि क्यों करता है?

शनि जब गुरु की राशियों (धनु, मीन) में होता है, तो वह धर्म और ज्ञान से जुड़ जाता है। यहाँ शनि अपने अनुशासन के साथ गुरु के शुभ प्रभाव को ग्रहण करता है, जिससे उस भाव के फलों में स्थायित्व और वृद्धि (स्थान वृद्धि) होती है।

Q3: क्या मकर राशि का गुरु हमेशा बुरा फल देता है?

नहीं, मकर का गुरु नीच का होने के कारण भौतिक सुखों में ‘स्थान हानि’ तो करता है, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टि से यह जातक को अत्यंत विद्वान, गंभीर और कर्मठ भी बनाता है। हालांकि, सामाजिक मान-प्रतिष्ठा के लिए जातक को अपने जीवन में अधिक संघर्ष करना पड़ता है।

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Mahashivratri: वेदों का सत्य और 4 प्रहर पूजा का रहस्य (शास्त्र प्रमाण सहित) | Astrology Sutras

महाशिवरात्रि: वेदों का ‘परम सत्य’ और चार प्रहर की पूजा का गूढ़ रहस्य (शास्त्र प्रमाण सहित)

क्या आप सच में शिव को जानते हैं?
अधिकांश लोग महाशिवरात्रि को केवल ‘जल चढ़ाने’ या ‘उपवास रखने’ की परंपरा मानते हैं। लेकिन अगर हम वेदों और संहिताओं के पन्ने पलटें, तो पता चलता है कि यह रात्रि ब्रह्मांड की सबसे बड़ी घटना है। यह वह रात्रि है जब ‘निराकार’ ब्रह्म ने पहली बार ‘साकार’ (लिंग) रूप धारण किया था।

आज ‘Astrology Sutras’ आपको गूगल की सतही जानकारी से दूर, ऋषियों के अनुभव और शास्त्रों के प्रमाण की उस यात्रा पर ले जाएगा, जो आपके जीवन को रूपांतरित कर देगी।

📅 2026 में कब है महाशिवरात्रि?

शास्त्रों का ज्ञान तो यहाँ मिलेगा, लेकिन 2026 में बन रहे दुर्लभ ‘पंचग्रही योग’ और मुहूर्त की जानकारी के लिए यह आर्टिकल जरूर पढ़ें।


👉 यहाँ क्लिक करें: महाशिवरात्रि 2026 मुहूर्त और राशिफल

1. वैदिक उद्घोष: शिव ही ‘आनंद’ के स्रोत हैं

महाशिवरात्रि पर हर शिवालय में एक मंत्र गूंजता है, लेकिन 99% लोग इसका अर्थ नहीं जानते। यह मंत्र शुक्ल यजुर्वेद (16/41) का है, जो शिव के वास्तविक स्वरूप को परिभाषित करता है।

“नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शंकराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।”

— (शुक्ल यजुर्वेद, रुद्राष्टाध्यायी)

🔍 इस मंत्र का अद्भुत रहस्य (The Hidden Decoding):

इस एक पंक्ति में ऋषियों ने शिव के तीन स्तर समझाए हैं:

  • नमः शम्भवाय च: ‘शम्’ का अर्थ है कल्याण (Bliss) और ‘भु’ का अर्थ है होना। यानी, जो स्वयं कल्याण के स्रोत (Source) हैं, वे ‘शम्भु’ हैं।
  • नमः शंकराय च: ‘शम्’ (कल्याण) और ‘कर’ (करने वाला)। यानी, जो उस कल्याण को हम तक पहुंचाते हैं, वे ‘शंकर’ हैं।
  • नमः शिवाय च: जो न तो स्रोत हैं, न देने वाले, बल्कि वे स्वयं कल्याण स्वरूप (Pure Consciousness) हैं, वे ‘शिव’ हैं।
  • शिवतराय च: ‘तर’ का अर्थ है ‘उससे श्रेष्ठ कोई नहीं’। यानी जो परम पवित्र और मोक्षदाता हैं।

महाशिवरात्रि पर हम इसी ‘शम्भु’ तत्व से जुड़ते हैं जो हमारे भीतर आनंद का स्रोत है।

2. महाशिवरात्रि ही क्यों? (लिंगोद्भव का प्रमाण)

शिव पुराण और ईशान संहिता के अनुसार, इसी रात को भगवान शिव ‘अग्नि स्तंभ’ (Fire Pillar) के रूप में प्रकट हुए थे, जिसका न आदि था न अंत।

“फाल्गुनकृष्णचतुर्दश्याम् आदिदेवो महानिशि।
शिवलिंगतयोद्भूतः कोटिसूर्यसमप्रभः॥”

— (ईशान संहिता)

अर्थ: फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की महानिशा (मध्यरात्रि) में, आदिदेव भगवान शिव करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी ‘लिंग’ रूप में प्रकट हुए। अतः यह शिव का ‘जन्मदिन’ नहीं, बल्कि ‘प्राकट्य उत्सव’ (Manifestation) है।

3. चार प्रहर की पूजा: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष (Table View)

आम तौर पर भक्त सुबह मंदिर जाकर इतिश्री कर लेते हैं। लेकिन शिव धर्मोत्तर ग्रंथ के अनुसार, महाशिवरात्रि की असली पूजा “रात्रिकालीन” है। रात्रि के चार प्रहर जीवन के चार पुरुषार्थों को सिद्ध करते हैं।

प्रहर (समय) स्वरूप (तत्व) अभिषेक सामग्री फल (Benefit)
प्रथम
(6 PM – 9 PM)
ईशान्य
(पृथ्वी)
दूध 🥛 धर्म और सात्विकता
(मंत्र: ॐ हीं ईशानाय नमः)
द्वितीय
(9 PM – 12 AM)
अघोर
(जल)
दही 🥣 अर्थ (धन) और स्थिरता
(मंत्र: ॐ हीं अघोराय नमः)
तृतीय (निशीथ)
(12 AM – 3 AM)
वामदेव
(अग्नि)
देसी घी 🕯️ काम (इच्छा पूर्ति)
(मंत्र: ॐ हीं वामदेवाय नमः)
चतुर्थ
(3 AM – 6 AM)
सद्योजात
(वायु)
शहद 🍯 मोक्ष और मुक्ति
(मंत्र: ॐ हीं सद्योजाताय नमः)
🕉️
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4. बेलपत्र और रुद्राक्ष का रहस्य

  • बेलपत्र (बिल्वाष्टकम): “त्रिदलं त्रिगुणाकारं…” – तीन पत्तों वाला बेलपत्र केवल पत्ता नहीं, बल्कि सत्व, रज और तम (तीनों गुणों) का प्रतीक है। इसे चढ़ाकर हम अपने ‘अहंकार’ को शिव को सौंपते हैं।
  • रुद्राक्ष (देवी भागवत पुराण): महादेव कहते हैं— “मेरे आंसुओं से रुद्राक्ष बने।” इसे धारण करने से ‘अकाल मृत्यु’ का भय नहीं रहता।

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5. उपवास का वास्तविक अर्थ (स्कन्द पुराण)

लोग भूखे रहने को उपवास मानते हैं, लेकिन स्कन्द पुराण कहता है:

“उपावृत्तस्य पाप्येभ्यो यस्तु वासो गुणैः सह।
उपवासः स विज्ञेयः सर्वभोगविवर्जितः॥”

अर्थ: ‘उप’ (समीप) + ‘वास’ (रहना)। भोजन त्यागने का उद्देश्य केवल शरीर को हल्का रखना है ताकि आलस्य न आए और आप पूरी रात चैतन्य (Awake) रहकर शिव के समीप वास कर सकें।

🎯 निष्कर्ष: ‘Astrology Sutras’ का मत

वेदों और पुराणों का सार यही है कि महाशिवरात्रि कोई कर्मकांड नहीं, बल्कि “अंधकार से प्रकाश” की यात्रा है।

  • जब आप ‘नमः शम्भवाय’ कहते हैं, तो आप सुख मांग नहीं रहे, बल्कि सुख का ‘स्रोत’ बन रहे हैं।
  • इस महाशिवरात्रि, शिव को केवल लोटा भर जल न चढ़ाएं, बल्कि अपनी ‘आत्मा’ चढ़ाएं।

।। ॐ नमः शिवाय ।।

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अच्छी महादशा में बुरा फल क्यों? दशा के वाहन का ज्योतिष रहस्य – Astrology Sutras

दशा-वाहन

किसी भी जातक की दशा स्पष्ट करते समय उसके वाहन का भी विचार कर लेना चाहिए। वाहन-ज्ञान दशा प्रवेश काल से किया जाता है।

दशा-वाहन ज्ञात करने की विधि

जातक की जिस समय महादशा, अन्तर्दशा अथवा प्रत्यन्तर्दशा प्रारम्भ हो, उस दिन का नक्षत्र देखना चाहिए, फिर उसके जन्म नक्षत्र से दशारम्भ दिन के नक्षत्र तक गिनकर 9 से भाग देंना चाहिए।

  • शेष 1 बचे तो उस दशा का वाहन गधा
  • 2 बचे तो घोड़ा
  • 3 बचे तो हाथी
  • 4 बचे तो भैंसा
  • 5 बचे तो सियार
  • 6 बचे तो सिंह
  • 7 बचे तो कौवा
  • 8 बचे तो हंस
  • तथा 0 शेष बचे तो उस दशा का वाहन मयूर होता है।

उदाहरण:

सम्वत् 2026 फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को किसी व्यक्ति की बुध की महादशा प्रारम्भ हुई। उस दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र है। मान लो उस व्यक्ति के जन्म का नक्षत्र अश्विनी है। अतः अश्विनी से उत्तराभाद्रपद नक्षत्र तक गणना की, तो 26 संख्या आयी। इसमें 9 का भाग दिया—2 लब्धि तथा 8 शेष रहे, तो हंस वाहन होता है।

अतः उस व्यक्ति की बुध महादशा का वाहन हंस है। इसी प्रकार अन्तर्दशा तथा प्रत्यन्तर्दशा में भी समझना चाहिए।

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दशा-वाहन फल

वाहन गधा

यदि किसी जातक की दशा का वाहन गधा हो, तो उस दशा में जातक अपने ही किये कार्यों पर पछताता है, उससे समय-समय पर कुछ ऐसे कार्य हो जाते हैं, जो भविष्य में उसके लिए ही अहितकर साबित होते हैं। विद्याध्ययन में कमी, परीक्षा में असफलता, आर्थिक दृष्टि से हानि, धन-धान्य में कमी, कृषि-कार्यों में असफलता तथा वह घोर सांसारिक व्यक्ति होता है।

वाहन घोड़ा

जिस दशा प्रवेश काल का वाहन घोड़ा हो, तो वह दशा बलशाली मानी गयी है। इस दशा में व्यक्ति स्वस्थ, हृष्ट-पुष्ट तथा निरोग रहता है। यदि जातक रोगी भी हो, तो इस दशा में वह रोगमुक्त हो जाता है। इस दशा में उसे सुस्वाद भोजन मिलता है, राज्य-कार्यों में सफलता मिलती है तथा रुके हुए कार्य सम्पन्न हो जाते हैं। इस दशा में उत्तम वाहन प्राप्ति योग भी बनता है।

वाहन हाथी

जिस दशा का वाहन हाथी हो, वह उत्तम कोटि की दशा होती है। उस दशा में जातक राज्य से सम्मान प्राप्त करता है, घर में मंगल कार्य सम्पन्न होते हैं। आकस्मिक द्रव्य प्राप्ति होती है तथा जाति कार्यों में यश एवं सम्मान मिलता है। ऐसी दशा में विशेष उन्नति के अवसर उपस्थित होते हैं तथा मन एवं जीवन में प्रसन्नता बनी रहती है।

वाहन भैंसा

भैंसा वाहन जातक के लिए अशुभ कहा गया है। जिस दशा का वाहन भैंसा हो, वह दशा जातक की शक्ति को क्षीण करती है, मुकदमे वगैरह में पराजय मिलती है, घर में अमंगल, चित्त में खिन्नता एवं विचारों में निराशा बनी रहती है। अग्निभय व चोर भय से वह पीड़ित रहता है तथा नये-नये रोग उस पर आक्रमण करते रहते हैं।

वाहन सियार

दशारम्भ वाहन सियार हो, तो जातक की दशा में घर में कलह रहती है। स्त्री के स्वभाव में भिन्नता आती है तथा पत्नी की वजह से वह दुखी रहता है। रत्री को नयी-नयी व्याधियां घेरती हैं, जिससे वह पीड़ित रहती है तथा व्यर्थ का व्यय होता रहता है। इस दशा में कृषि कार्यों में असफलता प्राप्त होती है तथा मस्तिष्क में उलजलूल विचार एवं मन में खिन्नता बनी रहती है। व्यापारिक कार्यों में हानि की अधिक सम्भावना रहती है

वाहन सिंह

दशा प्रवेश वाहन सिंह हो, तो वह दशा उत्तम कोटि की व्यतीत होती है। आकस्मिक लाभ तथा व्यापार में फायदा होता है, मुकदमे में निश्चय ही सफलता मिलती है तथा शत्रु कुचक्र रचकर भी इसका बाल-बांका नहीं कर सकता। यदि रोगी हो, तो आरोग्य लाभ करता है तथा सभी दृष्टियों से यह दशा उत्कर्षेण व्यतीत होती है।

वाहन कौआ

दशा का वाहन कौआ हो, तो जातक के मन में, चित्त में चंचलता बनी रहती है। वह जो भी योजनाएं बनाता है, वे भविष्य में जाकर पूर्णतया सफल होती हैं। शत्रुओं पर वह हावी रहता है तथा उसके रुके हुए कई कार्य स्वतः ही सम्पन्न हो जाते हैं। उसकी संगति निम्न स्तर के लोगों से रहने के कारण समाज में अपमानित होता है तथा भाग्य की दृष्टि से कई उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं।

वाहन हंस

जिस दशा प्रवेश में वाहन हंस होता है, वह दशा उत्तम रूप से व्यतीत होती है। वह विद्वानों से पूज्य, गुणीजनों द्वारा सम्मानित एवं राज्य कार्य में सफलता प्राप्त करता है। समाज में उसके विचारों का आदर होता है तथा उच्च स्तरीय लोगों में उसकी जान-पहचान होती है। भाग्य की दृष्टि से भी वह दशा श्रेष्ठ रहती है।

वाहन मयूर

जिस दशारम्भ का वाहन मयूर या मोर हो, वह दशा सभी प्रकार के सुखों को देने वाली होती है। जातक जो भी कार्य प्रारम्भ करता है, वह समय पर सम्पन्न होता है, अधिकारीगण उसकी बात न्यायपूर्वक सुनते हैं तथा उसके सोचे हुए सभी कार्य पूर्ण होते हैं।

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वाहन से सम्बन्धित कुछ ज्ञातव्य बातें

ऊपर मैंने दशा-वाहन फल संक्षेप में स्पष्ट किया, लेकिन इस सम्बन्ध में निम्न तथ्य भी ध्यान में रखने चाहिएं:

महादशा का फल ¼ भाग, अन्तर्दशा वाहन का फल ½ भाग तथा प्रत्यन्तर्दशा वाहन का फल ¼ भाग समझना चाहिए। इस प्रकार से अन्तर्दशा वाहन पर विशेष विचार करना चाहिए।

तीनों दशाओं—महादशा, अन्तर्दशा, प्रत्यन्तर्दशा में से यदि दो दशाओं के वाहन श्रेष्ठ हों, तो वह समय अधिक अनुकूल तथा यदि दो दशाओं के वाहन अशुभ हों, तो वह समय प्रतिकूल समझना चाहिए।

जय श्री राम।

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चांडाल योग: अर्थ, इतिहास और करिअर पर प्रभाव | Astrology Sutras

ज्योतिष में चांडाल योग: एक सरल व्याख्या

ज्योतिष शास्त्र में ‘चांडाल योग’ को लेकर अक्सर गलतफहमियां रहती हैं और आधुनिक ज्योतिषी इसके सही अर्थ को नजरअंदाज कर देते हैं। इस कारण इसका व्यावहारिक महत्व कम हो गया है।

शब्द का अर्थ और इतिहास

​’चांडाल’ शब्द ‘चंद’ से बना है। इसका मतलब है- उग्र, गुस्सैल, या भावुक। यानी, चांडाल का अर्थ हुआ ऐसा व्यक्ति जिसके कर्म क्रूर या कठोर हों।

​प्राचीन काल में, अलग-अलग जातियों के मेल से जन्मे बच्चों (जैसे महाभारत के कर्ण) को समाज में अक्सर अपमान सहना पड़ता था। इस मानसिक प्रताड़ना के कारण उनका स्वभाव कठोर हो जाता था। इसी कठोर स्वभाव के कारण उन्हें ‘चांडाल’ जैसे गुणों वाला कहा गया। बाद में, शूद्र पिता एवं ब्राह्मण माता की संतान को ‘चांडाल’ कहा जाने लगा। यही कारण है कि आज भी शनि ग्रह के बुरे प्रभाव को दूर करने के लिए इन्हीं लोगों को दान देने का नियम है।

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ज्योतिष में चांडाल योग कैसे बनता है?

ज्योतिष के प्रमुख ग्रंथों के अनुसार, कुंडली में यह योग मुख्य रूप से दो स्थितियों में बनता है:

1. जब शुक्र या चंद्रमा केंद्र में हों और राहु लग्न (पहले घर) में बैठा हो।
2. जब बृहस्पति (गुरु) के साथ राहु या केतु हों, और उन पर पापी ग्रहों की नजर हो, या बृहस्पति बहुत कमजोर हो।

इस योग का फल क्या होता है?

इस योग का सबसे मुख्य प्रभाव व्यक्ति के काम और करिअर पर पड़ता है।

पारिवारिक पेशे से दूरी: जिस व्यक्ति की कुंडली में चांडाल योग होता है, वह अपने पिता या पूर्वजों का काम नहीं अपनाता। उदाहरण के लिए, यदि पिता एक प्रसिद्ध डॉक्टर हैं, तो बेटा डॉक्टर नहीं बनेगा।

हर वर्ग पर लागू: यह नियम सिर्फ अच्छे कामों पर ही नहीं, बल्कि साधारण कार्यों पर भी लागू होता है, मतलब साधारण काम करने वाले का बेटा भी पिता का काम नहीं करेगा।

बृहस्पति का प्रभाव: यदि यह योग बृहस्पति (गुरु) के कारण बन रहा है, तो इसका असर और गहरा होता है। भले ही व्यक्ति अच्छे और संस्कारी परिवार (जैसे ब्राह्मण) में पैदा हुआ हो, वह अपने कुल की परंपराओं से हटकर काम करता है।

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अगर किसी की कुंडली में चांडाल योग है, तो यह पक्का है कि वह अपने पूर्वजों के नक्शेकदम पर नहीं चलेगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वह गरीब या असफल होगा।

​अगर कुंडली मजबूत है, तो वह अपने पिता के क्षेत्र से अलग किसी दूसरे क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल कर सकता है। यह योग सिर्फ इतना ही बताता है कि बच्चा अपने पिता के बिजनेस या नौकरी में जाएगा या नहीं।

जय श्री राम।

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T20 World Cup 2026: कौन जीतेगा फाइनल? ऋषिकेश पंचांग अनुसार सटीक भविष्यवाणी

T20 World Cup 2026 Prediction: ग्रह गोचर, आकाशीय स्थिति और विजेता की 100% सटीक ज्योतिषीय भविष्यवाणी

ग्रह गोचर और आकाशीय स्थिति (Rishikesh Panchang Data Analysis)

ऋषिकेश पंचांग द्वारा उपलब्ध विवरण अनुसार 7 फरवरी को सूर्य मकर, चंद्र दिन 02:23 से तुला राशि, मंगल मकर, बुध कुंभ, गुरु मिथुन, शुक्र कुंभ, शनि मीन व राहु कुंभ राशि में रहेंगे जहाँ काशी के सूर्योदय प्रातः 06:30 पर मिथुन गुरु स्पष्ट 25°15″18′ (वक्री), मीन शनि स्पष्ट 01°20″56′ और कुंभ राहु स्पष्ट 15°50″51′ रहेगा तो वहीं मकर मंगल स्पष्ट 17°35″22′, कुंभ बुध स्पष्ट 07°14″00′, कुंभ शुक्र स्पष्ट 02°09″39′ और मकर सूर्य स्पष्ट 23°49″49′ रहेगा।

फाइनल मैच 8 मार्च के दिन ग्रह स्थिति स्थिति ऋषिकेश पंचांग काशी अनुसार सूर्योदयकालीन ग्रह विवरण सूर्य कुंभ स्पष्ट 23°06″11′, चंद्र तुला राशि संपूर्ण दिन-रात्रि, कुंभ मंगल स्पष्ट 10°05″35′, कुंभ बुध स्पष्ट 24°51″26′ (वक्री), मिथुन गुरु स्पष्ट 23°31″45′ (मार्गी), मीन शुक्र स्पष्ट 08°19″20′, मीन शनि स्पष्ट 04°35″40′ और कुंभ राहु स्पष्ट 14°18″37 रहेगा।

📌 महत्वपूर्ण गोचर परिवर्तन:

गुरु 5 मार्च की रात्रि 07:02 पर मिथुन राशि में मार्गी हो रहे हैं और बुध 2 मार्च को कुंभ राशि में दिन 03:43 पर वक्री हो जाएंगे।

 


🔥 कुंभ राशि में ‘अंगारक योग’ और ‘जड़त्व योग’:

8 मार्च को कुंभ राशि में मंगल (10°05’35”) और राहु (14°18’37”) के बीच मात्र 4 डिग्री का अंतर है और साथ में वक्री बुध (24°51’26”) और सूर्य (23°06’11”) भी हैं।

प्रभाव: यह योग “अति-आक्रामकता” (Over-aggression), “बुद्धि भ्रम” (Confusion) और “विवाद” का निर्माण करता है जो टीम आवेश में खेलेगी, वह फाइनल में आत्मघाती निर्णय (Self-destructive decisions) लेगी साथ ही बुध का वक्री होना यह बताता है कि ‘रिव्यू’ (DRS) और ‘टॉस’ के निर्णय मैच पलटेंगे।

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टॉस, मैच और महा-भविष्यवाणी!

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✨ मीन राशि में ‘परम राजयोग’ (Venus Exalted + Saturn):

शुक्र मीन राशि में 08°19’20” पर है (शुक्र 27° तक उच्च का होता है, यह परम शक्तिशाली स्थिति है) साथ में शनि भी (04°35’40”) है, शुक्र “सौंदर्य और रणनीति” का कारक है और शनि “न्याय” का अतः यह युति 11वें या 10वें भाव वाले देश के लिए “एकतरफा जीत” (Jackpot Win) सुनिश्चित करती है।

🌟 मिथुन राशि में ‘मार्गी गुरु’ (Jupiter Direct):

5 मार्च को गुरु का 23°31’45” पर मार्गी होना दैवीय सहायता (Divine Luck) का सूचक है।

⚡ दो सबसे बड़ी घटनाएं टूर्नामेंट का रुख बदलेंगी:

  • बुध का वक्री होना (2 मार्च, कुंभ राशि): कुंभ राशि में बुध का वक्री होना और वहां पहले से मौजूद राहु और मंगल के साथ युति करना एक “विस्फोटक योग” बना रहा है।
  • गुरु का मार्गी होना (5 मार्च, मिथुन राशि): फाइनल से ठीक 3 दिन पहले देवगुरु बृहस्पति का मिथुन राशि में 23°31′ पर मार्गी (Direct) होना ‘गेम-चेंजर’ है।

🏏 टूर्नामेंट की शुरुआत (7 फरवरी):

उच्च राशि का मंगल (Exalted Mars in Capricorn): मंगल मकर राशि में 17°35′ पर अत्यंत शक्तिशाली है अतः टूर्नामेंट की शुरुआत में गेंदबाजों (Bowlers) का दबदबा रहेगा और लो-स्कोरिंग मैच एवं आक्रामक खेल देखने को मिल सकता है, छोटी टीमें बड़ी टीमों को कड़ी टक्कर देंगी।

🏆 टूर्नामेंट का मध्य और अंत (फाइनल – 8 मार्च):

कुंभ राशि में ग्रहों का जमावड़ा (Stellium in Aquarius): फाइनल के समय सूर्य, मंगल, वक्री बुध और राहु—ये चार ग्रह कुंभ (वायु तत्व) राशि में होंगे साथ ही फाइनल के दिन चंद्रमा तुला राशि (वायु तत्व) में होगा और मिथुन राशि का गुरु: गुरु भी वायु तत्व (मिथुन) में है।

वायु त्रिकोण (Grand Air Trine): फाइनल के दिन कुंभ राशि में (सूर्य, मंगल, बुध, राहु), तुला राशि में (चंद्रमा) और मिथुन राशि में (गुरु) के बीच एक शक्तिशाली ‘वायु त्रिकोण’ बन रहा है।

प्रभाव: फाइनल मैच अत्यंत रोमांचक और हाई-स्कोरिंग होगा, बल्लेबाजों का बोलबाला रहेगा और गेंद हवा में ज्यादा रहेगी विशेष पहली पारी में (Sixes/Fours)।


🌍 देशों की कुंडली का ‘लग्न’ और ‘राशि’ आधारित विश्लेषण

स्वतंत्र भारत की कुंडली (वृषभ लग्न – Taurus Ascendant) और अन्य देशों के इंटरनेट पर प्राप्त विवरण के आधार पर यह गणना की गई है:

🇮🇳 भारत (INDIA)

लग्न: वृषभ (Taurus), नाम राशि कन्या (Virgo) का प्रभाव।

8 मार्च की गणना: भारत के वृषभ लग्न के लिए, शुक्र (लग्नेश) अपनी उच्च राशि मीन में 11वें भाव (House of Gains) में बैठे है साथ ही शनि (योगकारक – 9वें और 10वें घर का स्वामी) भी 11वें भाव में शुक्र के साथ है अतः जब लग्नेश (Self) और भाग्येश (Luck) दोनों ‘लाभ भाव’ में उच्च अवस्था में मिलते हैं, तो इसे “महालक्ष्मी योग” और “अखंड साम्राज्य योग” कहते हैं, परिणामस्वरूप भारत का पक्ष 97% से 99% मजबूत रहेगा और गुरु (धन भाव में मार्गी) धन और प्रतिष्ठा दोनों दिलाएंगे, लेकिन नॉकआउट चरण में ‘वक्री बुध’ के कारण अंतिम क्षणों में निर्णय (Decision Making) में सावधानी भी विशेष रखनी होगी अन्यथा सुपर 8 की शुरुवात में ही भारी हार के कारण से थोड़ा खतरा अनुभव होगा।

🇦🇺 ऑस्ट्रेलिया (AUSTRALIA)

ऑस्ट्रेलिया का लग्न तुला (Libra) मानते हुए क्योंकि ​1 जनवरी 1901 को जब सिडनी (Sydney) में ‘कॉमनवेल्थ ऑफ ऑस्ट्रेलिया’ की घोषणा आधिकारिक रूप से लागू हुई थी उस समय तुला लग्न पूर्व क्षितिज पर उदित था अतः यदि तुला लग्न मानें तो कुंभ राशि (5वां घर – बुद्धि) में मंगल+राहु+वक्री बुध का “विस्फोट” हो रहा है, इसका अर्थ है “गलत रणनीति”। ऑस्ट्रेलिया ग्रुप स्टेज में अपनी ही बनाई योजना में फंस सकता है, शुक्र (लग्नेश) छठे घर (शत्रु भाव) में है, यह संघर्ष दिखाता है, लेकिन जीत के लिए लग्नेश का केंद्र या त्रिकोण में होना आवश्यक था।

परिणाम: ग्रुप स्टेज से बाहर होंगे। मंगल-राहु की युति अंतिम 4 ओवरों में इनके गेंदबाजों की दिशा भ्रमित (Lose Line & Length) कर सकती है।

🇵🇰 पाकिस्तान (PAKISTAN)

पाकिस्तान की कुंडली मेष (Aries) लग्न की है और मेष लग्न के लिए, उनका स्वामी मंगल (10°), राहु (14°) के मुख में फंसा हुआ है (कष्ट में है)। जिस कारण से इसे “पाप-कर्तरी” दोष भी लग रहा है।

परिणाम: टीम का प्रदर्शन सामान्य या निराशाजनक रहेगा और आंतरिक कलह एवं खराब कप्तानी के कारण आलोचना झेलते हुए ग्रुप स्टेज पार करेंगे लेकिन सफर सुपर 8 में जल्दी खत्म हो जाएगा।

🏴󠁧󠁢󠁥󠁮󠁧󠁿 इंग्लैंड (ENGLAND) & 🇿🇦 दक्षिण अफ्रीका (SOUTH AFRICA)

इंग्लैंड का यदि कुंभ लग्न माना जाए तो उनकी अपनी ही राशि (कुंभ) में सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध का “ग्रहण” लगा है। यह उनके प्रमुख खिलाड़ियों के चोटिल होने (Injury) का संकेत है, सेमीफाइनल तक पहुंचने की प्रबल दावेदार, लेकिन सेमीफाइनल में ग्रह कमजोर होने से सफर यहीं खत्म होता लगता है विशेष खतरा भारत से रहेगा।

दक्षिण अफ्रीका का यदि मीन लग्न माना जाए तो मीन राशि के शनि और शुक्र उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने কুলिय प्रेरित करेंगे, और सुपर 8 तक भारत जैसी टीम को कड़ी चुनौती देने में सफल रहेंगे, लेकिन कुंभ राशि का ‘पाप प्रभाव’ उनके 12वें भाव (व्यय/हानि) को सक्रिय कर रहा है अतः अहम मौके पर सेमीफाइनल मैच ‘गंवा’ देंगे (Choke)।

🇳🇿 न्यूजीलैंड (NEW ZEALAND)

मीन राशि से शनि का गोचर और लग्नेश गुरु (Jupiter) 5 मार्च को मिथुन राशि (चौथे भाव) में मार्गी होना यह घरेलू सुख और टीम की एकता के लिए अच्छा है, मीन राशि (मीन) में उच्च का शुक्र (Exalted Venus) और शनि विराजमान होने व शुक्र के “मालव्य महापुरुष योग” बनाने से न्यूजीलैंड को टूर्नामेंट में सबसे बेहतरीन “फिल्डिंग” और “अनुशासित खेल” (Disclipined Cricket) वाली टीम बनाएगा लेकिन 12वें भाव (कुंभ राशि) में मंगल, राहु, सूर्य और वक्री बुध का “विस्फोटक योग” बन रहा है 12वां भाव “हानि और व्यय” का है।

परिणाम: न्यूजीलैंड टूर्नामेंट में बहुत ही शानदार और तकनीकी खेल दिखाएगा (Top 4 contender) लेकिन नॉकआउट मैच फाइनल में, विशेषकर पहली पारी अंतिम ओवरों में, 12वें भाव का राहु उनके हाथ से जीता हुआ मैच छीन लेगा, जिस कारण से उनकी पारी लड़खड़ाते हुए आगे बढ़ सकती है।

🇱🇰 श्रीलंका (SRI LANKA)

श्रीलंका का पारंपरिक लग्न कुंभ (Aquarius) माना जाता है और कुंभ लग्न होने के कारण, 8 मार्च को उनकी ही राशि (Lagna) में चार बड़े ग्रह—सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध बैठे हैं और लग्न में मंगल (10°05′) और राहु (14°18′) की युति मस्तिष्क को अस्थिर करती है।

वक्री बुध का प्रभाव: लग्नेश शनि दूसरे भाव (मीन) में है, लेकिन बुद्धि का कारक बुध लग्न में वक्री है।

परिणाम: श्रीलंका की टीम “आत्मघाती क्रिकेट” (Self-Destructive Cricket) खेलेगी और किसी बड़े मैच में 200+ रन बना सकती हैं तो किसी मैच में 100 के अंदर आउट भी हो सकती हैं, खिलाड़ियों के बीच तालमेल की कुछ कमी मुख्य समय पर देखने को मिल सकती है और वक्री बुध के कारण कप्तान मैदान पर गलत फील्ड प्लेसमेंट कर सकते है जिस कारण से श्रीलंका कुछ बड़े उलटफेर कर सकती है, लेकिन मंगल-राहु की युति उन्हें टूर्नामेंट के सुपर-8 से ही बाहर का रास्ता दिखा सकता है।

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🇧🇩 बांग्लादेश (BANGLADESH)

बांग्लादेश का धनु (Sagittarius) प्रभावी माना जाता है। कुंभ राशि (तीसरे घर – पराक्रम/साहस) में मंगल और राहु का होना “अत्यधिक साहस” देता है और लग्नेश गुरु 7वें भाव (विपक्ष के घर) में है और मार्गी है, तीसरे भाव का राहु और मंगल बांग्लादेश को “जायंट किलर” (Giant Killer) बना सकता है और बांग्लादेश द्वारा किसी एक बड़ी टीम (संभवतः पाकिस्तान या इंग्लैंड) का खेल बिगाड़ने की संभावना दिखती है लेकिन, लग्नेश गुरु का 7वें भाव (सप्तम) में होना यह दर्शाता है कि विपक्षी टीम हमेशा उन पर हावी रहेगी, साथ ही मीन राशि (चौथा भाव) में शनि-शुक्र का होना उनके देश में आंतरिक दबाव (Fans Pressure) को दर्शाता है, लेकिन बांग्लादेश वर्ल्डकप खेले संभावना थोड़ी कम ही दिखती है।

परिणाम: बांग्लादेश का प्रदर्शन सामान्य से अच्छा रहेगा, और वह आक्रामक खेल खेलने की कोशिश करेंगे, साथ ही “नागिन डांस” जैसे विवाद (मंगल-राहु प्रभाव) फिर हो सकते हैं। लेकिन बांग्लादेश सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर रहेगी, लेकिन यह भी है कि जिस ग्रुप में होंगे, वहां का समीकरण (Points Table) बिगाड़ देंगे।

👑 कप्तानों पर विशेष दृष्टि (Rishikesh Panchang अनुसार)

  • सूर्यकुमार यादव (भारत कप्तान): उनकी कुंडली में गुरु का प्रभाव है। 5 मार्च को गुरु का मार्गी होना उनके “निर्णय लेने की क्षमता” को अभेद्य (Unbeatable) बना देगा।
  • मिचेल मार्श/अन्य कप्तान: वक्री बुध और राहु का कुंभ में होना विपक्षी कप्तानों की बुद्धि को “स्थिर” नहीं रहने देगा, जिस कारण से वह टॉस जीतकर गलत फैसला ले सकते हैं।

🏆 भविष्यवाणी (Final Prediction)

ऋषिकेश पंचांग के सूर्योदयकालीन स्पष्ट ग्रहों की गहन गणना यह स्पष्ट करती है कि 8 मार्च 2026 को “सितारे” पूरी तरह से भारत के पक्ष में हैं।

निर्णायक तर्क:
भारत (वृषभ लग्न) के लिए लग्नेश शुक्र का 11वें भाव में उच्च होना किसी भी अन्य देश के योग से 100 गुना अधिक शक्तिशाली है।

विपक्षी (न्यूज़ीलैंड/इंग्लैंड):
कुंभ राशि में बने ‘मंगल-राहु’ के विध्वंसक योग के कारण मानसिक दबाव में टूट सकते हैं।

🏆 विजेता:

सभी नियमों और सूक्ष्म गणनाओं के अनुसार, T20 विश्व कप 2026 की ट्रॉफी “भारत (INDIA)” द्वारा उठाने की प्रबल संभावना बनती है।

(नोट: फाइनल मैच में भारत टॉस हार सकता है, लेकिन मैच निश्चित रूप से जीतेगा।)

आगे हरि इच्छा बलबान🙏🏻

⚠️ डिस्क्लेमर (Disclaimer): ज्योतिष संभावनाओं पर आधारित होती है अतः क्रिकेट अनिश्चिताओं का खेल है अतः इस लेख को आधार मानकर शेयर, जुए, सट्टे आदि में पैसे न निवेश करें, यदि आप ऐसा करते हैं और आपको नुकसान होता है, तो इस परिस्थिति में आप स्वम् जिम्मेदार होंगे, इसमें वेबसाइट Astrology Sutras, और ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी की कोई जिम्मेदारी या जबाबदेही नही रहेगी। जय श्री राम।

❓ T20 वर्ल्ड कप 2026 ज्योतिषीय भविष्यवाणी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  1. Q1: ज्योतिषीय गणना के अनुसार T20 विश्व कप 2026 कौन जीतेगा?

    ऋषिकेश पंचांग की सूर्योदयकालीन ग्रह स्थिति और वृषभ लग्न (भारत) में बन रहे “महालक्ष्मी योग” के अनुसार, भारत (INDIA) के यह ट्रॉफी जीतने की प्रबल संभावना है।

    Q2: फाइनल मैच (8 मार्च 2026) के दिन ग्रहों की स्थिति कैसी रहेगी?

    उस दिन सूर्य, मंगल, राहु और वक्री बुध कुंभ राशि में होंगे। साथ ही चंद्रमा तुला और गुरु मिथुन राशि में रहकर एक शक्तिशाली “वायु त्रिकोण” बनाएंगे, जिससे मैच अत्यधिक हाई-स्कोरिंग और रोमांचक होगा।

    Q3: बुध के वक्री होने का मैच पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

    2 मार्च को कुंभ राशि में बुध का वक्री होना यह दर्शाता है कि कप्तानों के टॉस और DRS (रिव्यू) के निर्णय मैच का रुख पूरी तरह से पलट सकते हैं।

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18 जनवरी को जन्में लोगों का व्यक्तित्व: स्वभाव, करियर और लव लाइफ (January 18 Birthday Personality)

18 जनवरी को जन्में लोग: “बर्फ और आग” का अद्भुत संगम

18 जनवरी को जन्में व्यक्ति शनि (Saturn) और मंगल (Mars) की ऊर्जा का एक दुर्लभ मिश्रण होते हैं इनकी सूर्य राशि मकर होती है जिनके स्वामी शनि होते हैं तो मूलांक (1+8= 9) होने से मंगल का भी विशेष प्रभाव रहता है इसलिए, इन लोगों में ‘शनि का अनुशासन’ और ‘मंगल का जोश’ दोनों देखने को मिलता है।

प्रमुख विशेषताएं (Key Personality Traits)

महत्वाकांक्षी और निडर (Ambitious & Fearless): 18 जनवरी को जन्में लोग जन्मजात योद्धा होते हैं ये जीवन में बड़ी चुनौतियों से नहीं डरते अकसर जहाँ दूसरे लोग हार मान लेते हैं वहाँ से इनकी शुरुआत होती है।

बाहर से सख्त, अंदर से नरम (Fire & Ice Personality): मकर राशि होने के कारण ये बाहर से बहुत गंभीर और सख्त दिख सकते हैं, लेकिन अंदर से ऐसे व्यक्ति बहुत भावुक और परवाह करने वाले होते हैं साथ ही इनके व्यक्तित्व में एक चुम्बकीय आकर्षण (Charisma) होता है जो लोगों को अपनी ओर खींचता है।

स्वाभिमानी (Self-Respecting): 18 जनवरी को जन्में व्यक्ति किसी के अधीन काम करना पसंद नहीं करते इन्हें अपने नियमों पर चलना पसंद होता है और यदि कोई इनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाए तो ये उसे आसानी से माफ़ नहीं करते।

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करिअर और आर्थिक जीवन (Career & Financial Life)

मंगल और शनि के प्रभाव के कारण, ऐसे उन क्षेत्रों में बहुत सफल होते हैं जहाँ पावर और अनुशासन की जरूरत होती है।

उपयुक्त करिअर: सेना, पुलिस, प्रशासन (IAS/IPS), राजनीति, इंजीनियरिंग, और रियल एस्टेट।

18 जनवरी को जन्में व्यक्ति अच्छे Team Leader और Manager साबित होते हैं।

आर्थिक स्थिति: शुरुआती जीवन में इन्हें संघर्ष करना पड़ सकता है, लेकिन 30-35 की उम्र के बाद इनकी आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत हो जाती है, ऐसे व्यक्ति मेहनत की कमाई पर भरोसा करते हैं और बुढ़ापे तक काफ़ी संपत्ति बना लेते हैं।

प्रेम और वैवाहिक जीवन (Love & Marriage Compatibility)

रिश्तों में वफादारी: प्रेम के मामले में ये थोड़े रूढ़िवादी (Conservative) हो सकते हैं, ऐसे व्यक्ति फ्लर्ट करना पसंद नहीं करते और गंभीर रिश्तों की तलाश में रहते हैं।

चुनौतियाँ: इनका गुस्सैल स्वभाव (मंगल के कारण) कभी-कभी वैवाहिक जीवन में तनाव पैदा कर सकता है जिस कारण से इन्हें ऐसे साथी की जरूरत होती है जो शांत स्वभाव का हो।

बेस्ट मैच: वृषभ (Taurus), कन्या (Virgo) और कर्क (Cancer) राशि वाले लोग इनके लिए सबसे अच्छे जीवनसाथी साबित होते हैं।

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ताकत और कमजोरियाँ (Strengths & Weaknesses)

ताकत (Strength)

फौलादी इच्छाशक्ति (The Iron Will): 18 जनवरी को जन्में व्यक्ति “कभी न मरने वाली भावना” (Never-say-die spirit) के साथ पैदा होते हैं, अक्सर ऐसे व्यक्ति जितना तेजी से नीचे गिरते हैं, उतनी ही तेजी से संभलकर उठते भी हैं क्योंकि मकर राशि जहाँ गिरकर संभलने का धैर्य देती है, वहीं मंगल दोबारा लड़ने का साहस देता है, ऐसे व्यक्ति उन कामों को करना अधिक पसंद करते हैं जिन्हें दुनिया “असंभव” कहती है।

मूक महत्वाकांक्षा (Silent Ambition): ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार 18 जनवरी को जन्में व्यक्ति “पहाड़ी बकरी” (Mountain Goat) के तरह होते हैं, जो धीरे-धीरे लेकिन निश्चित रूप से पहाड़ की चोटी पर पहुँचती है अर्थात बड़ी उन्नति प्राप्त करते हैं, ऐसे व्यक्ति अपनी योजनाओं को गुप्त रखते हैं तथा एक ‘लॉन्ग टर्म विजन’ बनाकर उसके प्रति पूर्ण रूप से समर्पित रहते हैं।

संगठन और प्रशासन (Organizational Genius): शनि “व्यवस्था” का कारक होता है अतः अव्यवस्था (Chaos) के बीच व्यवस्था बनाने में ऐसे व्यक्ति माहिर होते हैं, चाहे वह घर का बजट हो या किसी बड़ी कंपनी का मैनेजमेंट, ऐसे व्यक्ति चीजों को सिस्टम में लाना जानते हैं और अधिकतर लोग भी संकट के समय आपकी तरफ देखते हैं क्योंकि आप परिस्थितियों से घबराते नहीं, बल्कि समाधान निकालते हैं।

कमजोरियाँ (Weaknesses)

आंतरिक द्वंद्व (The Internal Conflict): ऐसे व्यक्तियों के अंदर एक युद्ध सा चलता रहता है, मंगल कहता है— “अभी करो, तुरंत करो!” और शनि कहता है— “रुको, सोचो और फिर करो।” जिस कारण से कारण ऐसे व्यक्ति अक्सर मानसिक तनाव (Mental Anxiety) और अनिद्रा का शिकार हो जाते हैं साथ ही कभी-कभी बाहर से बहुत शांत दिखते होने पर भी, अंदर से ज्वालामुखी की तरह उबल रहे होते हैं, यह दमित ऊर्जा (Repressed Energy) स्वास्थ्य के लिए कई बार बड़ी दिक्कतें देने वाली भी होती हैं।

क्षमा न कर पाना (Unforgiving Nature): मंगल एक “योद्धा” है, और एक योद्धा अपने शत्रुओं को नहीं भूलता जिस कारण से यदि कोई आपके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचा दे, तो आप उसे शायद ही कभी माफ़ करते हैं, आप बदला लेने की भावना नहीं रखते तो भी, उस व्यक्ति के लिए अपने दिल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर देते हैं, यह स्वभाव कभी-कभी आपको अपनों से दूर भी कर देता है।

अत्यधिक भौतिकवाद (Materialistic Tendencies): मकर राशि पृथ्वी तत्व (Earth Sign) है जिस कारण से कभी-कभी ऐसे व्यक्ति सफलता को केवल ‘पैसे’ और ‘पद’ से तोलने लगते हैं और करिअर की दौड़ में अक्सर अपने परिवार, भावनाओं और छोटी-छोटी खुशियों को नजरअंदाज करते हैं।

18 जनवरी को जन्में व्यक्तियों के शुभ तत्व (Lucky Elements for Jan 18 Born)

शुभ रंग: गहरा लाल (Maroon) और नीला।
शुभ दिन: मंगलवार और शनिवार।
शुभ अंक: 9, 18, 27 और 8।
शुभ रत्न (Gemstone): नीलम (Blue Sapphire) या गार्नेट (Garnet)।

विशेष:- कोई भी रत्न बिना कुंडली दिखाए पहनने पर नुकसान भी करता है अतः कुंडली या हाथ दिखाकर एवं उचित परामर्श लेकर ही रत्न धारण करें।

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18 जनवरी को जन्में व्यक्ति “Self-Made” होते हैं इनका जीवन संघर्षों से भरा रहता है लेकिन हर संघर्ष के बाद एक बड़ी उन्नति भी प्राप्त होती है साथ ही ऐसे व्यक्ति समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाते हैं और अक्सर उच्च पदों पर पहुँचते हैं।

जय श्री राम।

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मंगल का मकर राशि में महा-गोचर | अपनी उच्च राशि में मंगल जानें, किसे मिलेगा जबरदस्त लाभ

भूमि पुत्र मंगल, लोहितांग के नाम से भी जाने जाते हैं शिव जी के पसीने से उत्पन्न हुए थे और देवी पृथ्वी के आग्रह करने पर शिव जी ने उन्हें सौंपा था, मंगल ग्रह को नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाना जाता है जो कि शक्ति, पराक्रम व ऊर्जा के ग्रह हैं इनका वर्ण रक्त अर्थात लाल है यदि मंगल किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में हो तो कुज योग जिसे हम सभी मंगल दोष के नाम से जानते हैं बनता है जो कि दामपत्य जीवन के लिए शुभ नही माना जाता है किंतु यदि यही मंगल राजयोगकारक हो जाए तो अनेक प्रकार शुभ प्रभावी हो जाता है, मेष व वृश्चिक मंगल की स्वराशि है अर्थात मेष व वृश्चिक राशि का स्वामित्व मंगल ग्रह के पास है, मंगल ग्रह मकर राशि में उच्च के तो कर्क राशि में नीच के हो जाते हैं “ऋषिकेश पंचांग (काशी)” के अनुसार मंगल ग्रह 15 जनवरी 2026 गुरुवार को दिन 12 बजकर 45 मिनट पर अपनी उच्च राशि मकर जो कि शनि के स्वामित्व वाली राशि है में प्रवेश करेंगे और इस गोचरकाल में बुध, सूर्य व शुक्र के साथ संबंध बनाएंगे तो चलिए जानते हैं मंगल के मकर राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव।

मेष राशि (Aries)

मेष राशि के जातकों के लिए मंगल पहले (लग्न) और आठवें भाव के स्वामी बनकर दसवें भाव से गोचर करेंगे दसवां भाव कर्म भाव होता है जिससे करिअर, समाज में मान-प्रतिष्ठा, पिता का होता है हालांकि यह भाव स्वास्थ्य और जीवन में आने वाली अचानक बाधाओं को भी दर्शाता है और दसवें भाव में मंगल दिग्बल भी प्राप्त करते है।

करिअर: नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय बहुत अच्छा रहेगा और आपको आपकी मेहनत का फल भी मिलेगा तथा उन्नति के नए अवसर भी प्राप्त होंगे, जो लोग नई नौकरी की तलाश में हैं उन्हें अच्छे अवसर मिलेंगे विशेष रूप से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय शुभ समाचार ला सकता है और काम के सिलसिले से आपको यात्राएं करनी पड़ सकती हैं, जो भविष्य में आपके लिए फायदेमंद साबित होंगी।

व्यापार: व्यापारियों के लिए यह समय मिले-जुले परिणाम लेकर आएगा कभी आपको अच्छा मुनाफा होगा तो कभी स्थिति सामान्य रहेगी, बाज़ार में आपके प्रतिद्वंद्वी (Competitors) आपको कड़ी टक्कर दे सकते हैं इसलिए आपको सतर्क रहना शुभ रहेगा और सफलता पाने के लिए आपको अपनी पुरानी बिजनेस रणनीतियों में बदलाव करना होगा तभी आप बड़ी उन्नति प्राप्त करने में सफल होंगे।

आर्थिक स्थिति: आर्थिक स्थिति के लिहाज से भी यह समय कमाई के लिए अच्छा है लेकिन साथ ही आपके खर्चे भी बढ़ेंगे और शेयर बाजार, लॉटरी आदि से लाभ की संभावना बन सकती है या अचानक धन लाभ प्राप्ति का कोई माध्यम बन सकता है जिसकी सहायता से आप अपनी पुरानी जरूरतों को पूरा कर पाने में सफल रहेंगे।

प्रेम जीवन: प्रेम संबंधों के लिए यह समय अच्छा रहेगा आपके और आपके साथी के बीच का रिश्ता और मजबूत होता दिखता है साथ ही आप अपने पार्टनर के प्रति पूरी तरह वफादार रहेंगे जिससे उनका भरोसा आप पर बढ़ेगा और रिश्ता मजबूत होगा।

स्वास्थ्य: सेहत के नज़रिए से कोई बड़ी बीमारी आपको परेशान नहीं करेगी लेकिन काम के अधिक बोझ के कारण आपको सिरदर्द या मानसिक थकान जैसी छोटी-मोटी दिक्कतें हो सकती हैं।

उपाय: प्रतिदिन “ॐ भौमाय नमः” मंत्र का 27 बार जाप करें।

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वृषभ राशि (Taurus)

वृषभ राशि वालों के लिए मंगल सातवें और बारहवें भाव के स्वामी बनकर नौवें भाव (भाग्य स्थान) से गोचर करेंगे नौवां भाव धर्म, लंबी यात्रा और भाग्य का होता है।

करिअर: नौकरी करने वालों के लिए यह समय बदलाव का है क्योंकि बाहरवें के मालिक का भाग्य स्थान से गोचर परिवर्तन का सूचक होता है आप अपनी पुरानी नौकरी छोड़कर किसी नई और बेहतर जगह ज्वाइन कर सकते हैं क्या कुछ नौकरी परिवर्तन से जुड़ी योजना बना सकते हैं लेकिन अगर आप प्रमोशन (पदोन्नति) की उम्मीद कर रहे हैं तो संभव है कि अभी थोड़ा इंतज़ार करना पड़ सकता है।

व्यापार: व्यापारियों के लिए यह समय थोड़ा नाजुक हो सकता है जिस कारण से उम्मीद के मुताबिक मुनाफा होने की संभावना कम रहेगी तथा बिजनेस पार्टनर के साथ अनबन होने से व्यापार में नुकसान उठाना पड़ सकता है इसलिए शांति व धैर्य से काम लें।

प्रेम जीवन: घर के बड़ों और जीवनसाथी के साथ रिश्तों में खटास आ सकती है और आपके अत्यधिक स्वाभिमान के कारण से घरेलू वातावरण में तनावपूर्ण स्थिति सी बन सकती है।

स्वास्थ्य: आपको अपनी सेहत से ज्यादा अपने जीवनसाथी (पार्टनर) की सेहत की चिंता रहेगी और उनकी बीमारी पर आपका पैसा खर्च हो सकता है, जिससे आप तनाव (Stress) में आ सकते हैं अतः मन की शांति के लिए योग और ध्यान का सहारा लें।

उपाय: प्रतिदिन “ॐ दुर्गाय नमः” मंत्र का 42 बार जाप करें।

मिथुन राशि (Gemini)

मिथुन राशि के लिए मंगल छठे और ग्यारहवें भाव के स्वामी बनकर आठवें भाव से गोचर करेंगे आठवां भाव अचानक होने वाली घटनाओं, आयु-मृत्यु और रुकावटों का होता है।

करिअर: कार्यक्षेत्र में आपकी तरक्की की रफ़्तार थोड़ी धीमी हो सकती है जिस कारण से आपको मेहनत का उतना फल नहीं मिल पाएगा और नौकरी बदलने या नई नौकरी खोजने में भी अड़चनें आ सकती हैं, हालांकि विदेश या बाहरी स्थान से जुड़े काम या विदेश में नौकरी के अवसर आपको मिल सकते हैं।

व्यापार: व्यापारियों को इस समय थोड़ा सावधानी बरतनी चाहिए विशेष कोई भी नई डील करते समय सतर्क रहें क्योंकि उससे उम्मीद के मुताबिक फायदा होने की संभावना थोड़ी कम ही दिखती है, आपके विरोधी (Competitors) इस समय आप पर हावी होने की कोशिश कर सकते हैं।

आर्थिक स्थिति: भाग्य का साथ कम मिलने की वजह से आय-व्यय के बीच संतुलन बैठाने में थोड़ी परेशानी अनुभव हो सकती है साथ ही अचानक खर्च वृद्धि के कारण से मन में कुछ चिंता भी अनुभव हो सकती है।

प्रेम जीवन: रिश्तों के मामले में, आपसी समझ (Understanding) की कमी देखने को मिल सकती है, जीवनसाथी या करीबी लोगों के साथ तालमेल बैठाने में दिक्कत आएगी जिससे रिश्ते की डोर थोड़ी कमजोर हो सकती है।

स्वास्थ्य: कोई बड़ी बीमारी तो नहीं होती दिखती लेकिन छोटी-मोटी समस्याएं जैसे सिरदर्द, आंखों में जलन या बदन दर्द आपको परेशान कर सकता है।

उपाय: प्रतिदिन “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 21 बार जाप करें।

कर्क राशि (Cancer)

कर्क राशि वालों के लिए मंगल पांचवें और दसवें भाव (केंद्र और त्रिकोण) का स्वामी बनकर राजयोग कारक ग्रह बन जाते हैं तथा आपकी राशि से सातवें भाव में गोचर करेंगे सातवां भाव विवाह और साझेदारी (Partnership) का होता है।

करिअर: नौकरीपेशा लोगों के लिए यह समय अच्छा रहेगा और उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे साथ ही बॉस और सहकर्मी आपके काम की तारीफ करेंगे, जिससे आपको प्रमोशन (पदोन्नति) मिलने की संभावनाएं मजबूत होंगी तथा विदेश से भी काम के अवसर आ सकता है।

व्यापार: बिजनेस करने वालों के लिए भी यह समय अच्छा रहेगा और कुछ नई योजनाओं का मन में आगमन होगा जिनसे आपको लाभ भी होगा साथ ही आप अपने सिद्धांतों पर चलकर व्यापार करेंगे जिससे आपके विरोधी आपके सामने टिक नहीं पाएंगे।

आर्थिक स्थिति: इस समय आपको अच्छा धन लाभ होने की संभावना दिखती है लेकिन इसके साथ ही खर्चे भी बढ़ेंगे मतलब जितना पैसा आएगा उतना ही खर्च भी हो सकता है।

प्रेम जीवन: दांपत्य जीवन के लिए यह समय अच्छा रहेगा जीवनसाथी के साथ आपका तालमेल अच्छा रहेगा और घर में कोई मांगलिक कार्य (शादी, पूजा, उत्सव) हो सकता है या उसकी कोई नींव पड़ सकती है।

स्वास्थ्य: सेहत के लिहाज से कोई बड़ी परेशानी नहीं दिखती लेकिन आपके अंदर ऊर्जा और उत्साह की थोड़ी कमी महसूस हो सकती है और सुस्ती छाई रह सकती है।

उपाय: प्रतिदिन “ॐ राहवे नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें।

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सिंह राशि (Leo)

सिंह राशि के लिए मंगल चौथे और नौवें भाव (केंद्र और त्रिकोण) का स्वामी बनकर राजयोग कारक ग्रह बन जाते हैं तथा आपकी राशि से छठे भाव से गोचर करेंगे छठा भाव रोग, ऋण और शत्रु का होता है लेकिन यहां मंगल शत्रुओं का नाश करता है और शत्रुहंता योग बनाता है।

करिअर: नौकरी पेशा लोगों के लिए यह गोचर अच्छा है आपको नई और बेहतरीन नौकरी के ऑफर मिल सकते हैं, जो लोग विदेश जाकर काम करना चाहते हैं उनका सपना पूरा हो सकता है साथ ही कार्यस्थल पर आपका प्रभाव भी बढ़ेगा।

व्यापार: खुद का बिजनेस करने वालों को उन्नति के नए रास्ते मिलेंगे और आप अपने प्रतिस्पर्धियों को पछाड़कर आगे निकल जाएंगे साथ ही जो लोग आउटसोर्सिंग (Outsourcing) का काम करते हैं उन्हें जबरदस्त धन लाभ होगा।

आर्थिक स्थिति: आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी एवं भाग्य का पूरा सहयोग मिलेगा जिससे आप न केवल अच्छा पैसा कमाएंगे बल्कि उसे भविष्य के लिए बचा भी पाने में सफल रहेंगे।

प्रेम जीवन: जीवनसाथी के साथ आपका रिश्ता मधुर रहेगा और आप दोनों के बीच प्यार बढ़ेगा, परिवार में कोई शुभ आयोजन हो सकता है जिससे घर का माहौल खुशनुमा रहेगा।

स्वास्थ्य: सेहत के लिहाज से यह समय अच्छा आप खुद को ऊर्जावान (Energetic) और जोश से भरा हुआ महसूस करेंगे, खान-पान का ध्यान रखें।

उपाय: प्रतिदिन “ॐ भास्कराय नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें।

कन्या राशि (Virgo)

कन्या राशि वालों के लिए मंगल तीसरे और आठवें भाव के स्वामी बनकर पांचवें भाव से गोचर करेंगे पांचवां भाव संतान, बुद्धि और प्रेम का होता है।

करिअर: कार्यस्थल पर माहौल थोड़ा तनावपूर्ण रह सकता है और आपको ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है जो आपको पसंद न हों, कुछ लोगों को नौकरी छूटने का डर सता सकता है या ऑफिस में आपके मान-सम्मान में कमी आ सकती है।

व्यापार: व्यापारियों के लिए यह समय अधिक शुभ नहीं है किसी प्रकार का नुकसान होने की आशंका है और कंपीटीटर्स (प्रतियोगियों) से आपको कड़ी चुनौती मिलेगी, इस समय व्यापार से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला थोड़ा सोच-विचार कर लें।

आर्थिक स्थिति: खर्चे बढ़ सकते हैं और किसी पुरानी जिम्मेदारियों को पूरा करने में आपका काफी पैसा खर्च हो सकता है जिससे आप पर कर्ज भी थोड़ा हो सकता है।

प्रेम जीवन: पार्टनर के साथ दूरियां आ सकती हैं एक-दूसरे के साथ नजदीकी बनाए रखने में आपको कठिनाई महसूस होगी,हालांकि विवाहित लोगों के दाम्पत्य जीवन में सुधार होगा व नजदीकियाँ बढ़ेंगी।

स्वास्थ्य: पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे अपच (Digestion issues) और रात को नींद न आने की समस्या हो सकती है साथ ही आंखों में जलन की शिकायत भी हो सकती है।

उपाय: कोई 1 मंगलवार केसर के दूध से भगवान रूद्र (शिव जी) का रुद्राभिषेक करवाएं।

तुला राशि (Libra)

तुला राशि के लिए मंगल दूसरे और सातवें भाव के स्वामी बनकर चौथे भाव में गोचर करेंगे चौथा भाव सुख, माता और घर का होता है।

आर्थिक स्थिति: कमाई के लिहाज से यह समय औसत (Average) रहेगा पैसा आएगा, लेकिन एक के बाद एक खर्चे भी सामने खड़े रहेंगे, जिससे बचत करना थोड़ा मुश्किल रह सकता है।

करिअर: प्रोफेशनल लाइफ सामान्य रहेगी और आपको अपनी मेहनत का फल जरूर मिलेगा, प्रमोशन के योग बन रहे हैं साथ ही आपकी काम करने की क्षमता में भी सुधार होगा।

व्यापार: व्यापारियों को ठीक-ठाक मुनाफा होगा आप अपनी होशियारी और बुद्धिमानी से काम लेंगे साथ ही किसी नए व्यापार की शुरुआत करने का विचार भी मन में आ सकता है।

प्रेम जीवन: घर-परिवार में या लव लाइफ में थोड़ी अशांति रह सकती हैआपसी समझ की कमी के कारण जीवनसाथी के साथ रिश्ते को मधुर बनाए रखने में मुश्किल आ सकती है।

स्वास्थ्य: सेहत थोड़ी नरम रह सकती है शरीर में ऊर्जा की कमी महसूस होगी, दांतों में दर्द या आंखों से जुड़ी कोई समस्या हो सकती है।

उपाय: शुक्रवार के दिन माता लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।

वृश्चिक राशि (Scorpio)

वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल लग्न (पहले) और छठे भाव के स्वामी बनकर तीसरे भाव से गोचर क्रेमगे तीसरा भाव पराक्रम और साहस का होता है।

करिअर: नौकरी में आगे बढ़ने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ समय है खास तौर पर जो लोग सरकारी नौकरी या पब्लिक सेक्टर में हैं उनके लिए यह समय बहुत शुभ है, प्रमोशन और एक्स्ट्रा इनकम (Incentive) मिलने की पूरी संभावना है।

व्यापार: व्यापारियों को इस दौरान अच्छा खासा मुनाफा होगा साथ ही आपकी सर्विस और काम करने के तरीके से आपके क्लाइंट बहुत खुश होंगे और आप अपनी काबिलियत के दम पर एक से ज्यादा काम या व्यापार शुरू करने की योजना बना सकते हैं।

आर्थिक स्थिति: धन कमाने और उसे बचाने दोनों के लिए यह समय अनुकूल है आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

प्रेम जीवन: लव लाइफ अच्छी रहेगी आप और आपके पार्टनर एक-दूसरे का हर मोड़ पर साथ देंगे और रिश्ता मजबूत होगा।

स्वास्थ्य: स्वास्थ्य के लिहाज से यह समय बढ़िया रहेगा आप खुद को बहुत एक्टिव और ऊर्जा से भरा हुआ महसूस करेंगे।

उपाय: प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करें।

धनु राशि (Sagittarius)

धनु राशि के लिए मंगल पांचवें और बारहवें भाव के स्वामी बनकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे दूसरा भाव धन और वाणी का होता है।

करिअर: करियर के लिहाज से समय अच्छा है आपको प्रमोशन या सैलरी बढ़ने की खुशखबरी मिल सकती है, लेकिन इसमें थोड़ी देरी भी संभव है, आपको साइट पर जाकर या ऑफिस के काम से कहीं बाहर जाकर काम करने (Onsite opportunity) का मौका मिल सकता है।

व्यापार: व्यापारियों को अच्छा लाभ मिलेगा और भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा जिससे व्यापार में उन्नति होगी और कई नए अवसर प्राप्त होंगे।

आर्थिक स्थिति: पैसे कमाने के लिए यह समय बहुत अच्छा है आप न केवल अच्छा पैसा कमाएंगे बल्कि बचत भी कर पाएंगे, जो लोग विदेश में नौकरी कर रहे हैं उन पर लक्ष्मी जी की विशेष कृपा रहेगी।

प्रेम जीवन: जीवनसाथी के साथ आपका रिश्ता बहुत मधुर रहेगा और आप दोनों एक-दूसरे की बातों को अच्छे से समझेंगे, जिससे रिश्तों में खुशियां बनी रहेंगी।

स्वास्थ्य: कुल मिलाकर सेहत ठीक रहेगी लेकिन परिवार के किसी सदस्य या खुद की सेहत पर अचानक चिंता थोड़ी अनुभव हो सकती है।

उपाय: गुरुवार के दिन भगवान शिव की पूजा करें।

मकर राशि (Capricorn)

मकर राशि वालों के लिए मंगल चौथे और ग्यारहवें भाव के स्वामी बनकर लग्न (पहले) भाव से गोचर करेंगे प्रथम भाव देह अर्थात शरीर, मस्तिष्क का होता है।

करिअर: करिअर में स्थिति सामान्य रहेगी हो सकता है आप अपनी प्रतिभा पूरी तरह न दिखा पाएं, बॉस या सीनियर अधिकारियों से आपको वो तारीफ नहीं मिलेगी जिसकी आप उम्मीद कर रहे थे।

व्यापार: व्यापारियों के लिए समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है जिस कारण से कभी लाभ तो कभी हानि संभव रहेगी तथा इस उतार-चढ़ाव के कारण व्यापार को संभालना थोड़ा मुश्किल लग सकता है।

आर्थिक स्थिति: खर्चे बढ़ने के कारण आर्थिक स्थिति पर दबाव पड़ सकता है, परिवार की जिम्मेदारियों को पूरा करने में काफी पैसा खर्च होगा।

प्रेम जीवन: जीवनसाथी के साथ तालमेल बिगड़ सकता है अहंकार (Ego) के कारण बेवजह की बहस हो सकती है इसलिए वाणी पर संयम रखें।

स्वास्थ्य: सेहत का ध्यान रखें पैरों में दर्द या आंखों में जलन की समस्या आपको परेशान कर सकती है।

उपाय: शनिवार के दिन शनि चालीसा का पाठ करें।

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कुंभ राशि (Aquarius)

कुंभ राशि के लिए मंगल तीसरे और दसवें भाव के स्वामी बनकर बारहवें भाव से गोचर करेंगे, बारहवां भाव खर्च और विदेश का होता है।

करिअर: नौकरी में आपको वो लाभ नहीं मिल पाएगा जिसकी आपने उम्मीद की थी, काम का दबाव और तनाव रह सकता है।

व्यापार: बिजनेस करने वालों को सावधानी बरतनी होगी गलत रणनीतियों या फैसलों के कारण थोड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

आर्थिक स्थिति: यह समय आर्थिक रूप से थोड़ा कठिन हो सकता है खर्चे अचानक बढ़ने के कारण से आय-व्यय संतुलन बैठाने में दिक्कत अनुभव हो सकती है।

प्रेम जीवन: किसी गलतफहमी की वजह से पार्टनर की नज़रों में आपकी छवि खराब हो सकती है अतः रिश्तों में पारदर्शिता बनाए रखें।

स्वास्थ्य: सेहत के मामले में समय उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है, पैरों में दर्द या नींद न आने की समस्या हो सकती है।

उपाय: प्रतिदिन “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का 21 बार जाप करें।

मीन राशि (Pisces)

मीन राशि के लिए मंगल दूसरे और नौवें भाव के स्वामी बनकर ग्यारहवें भाव में गोचर करेंगे ग्यारहवां भाव लाभ और इच्छा पूर्ति का होता है।

करिअर: नौकरीपेशा लोगों के लिए समय अच्छा है प्रमोशन और सैलरी बढ़ने (Increment) के योग हैं और काम के सिलसिले में की गई यात्राएं सफल रहेंगी, आपको हर काम में भाग्य का साथ मिलेगा।

व्यापार: व्यापारियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा आप जबरदस्त मुनाफा कमाएंगे और अपने विरोधियों (Competitors) पर भारी पड़ेंगे।

आर्थिक स्थिति: धन की कोई कमी नहीं रहेगी और कमाई के नए जरिए बनेंगे साथ आप कुकब पैसा जोड़ (Save) पाएंगे जिससे आपकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत रहेगी।

प्रेम जीवन: लव लाइफ अच्छी रहेगी पार्टनर के साथ आपका रिश्ता और गहरा और मजबूत होगा साथ ही आप एक-दूसरे के साथ खुश रहेंगे।

स्वास्थ्य: सेहत के मामले में भी यह समय अच्छा है आप एकदम फिट, तंदुरुस्त और जोश से भरे रहेंगे।

उपाय: मंगलवार के दिन दुर्गा जी को किशमिश का भोग व घी का दीपक अर्पित कर के दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

जय श्री राम।