Loading...
Categories
Gochar Fal Prediction Recent Post

मंगल का मीन राशि से गोचर 18 जून 2020 गुरुवार जानें किस राशि पर क्या पड़ेगा प्रभाव—-Astrology Sutras

मंगल का मीन राशि से गोचर 18 जून 2020 गुरुवार जानें किस राशि पर क्या पड़ेगा प्रभाव—-Astrology Sutras

 

मंगल का मीन राशि से गोचर
मंगल का मीन राशि से गोचर

 

मंगल ग्रह:-

 

मंगल का धनु राशि में प्रवेश
मंगल का धनु राशि में प्रवेश

 

भूमि पुत्र मंगल, लोहितांग के नाम से भी जाने जाते हैं जो कि शिव जी के पसीने से उत्पन्न हुए थे और देवी पृथ्वी के आग्रह करने पर शिव जी ने उन्हें सौंपा था, मंगल ग्रह को नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाना जाता है जो कि शक्ति, पराक्रम व ऊर्जा के ग्रह हैं इनका वर्ण रक्त अर्थात लाल है यदि मंगल किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में हो तो कुज दोष जिसे हम सभी मंगल दोष के नाम से जानते हैं बनता है जो कि दामपत्य जीवन के लिए शुभ नही माना जाता है किंतु यदि यही  मंगल राजयोगकारक हो जाए तो अनेक प्रकार शुभ प्रभावी हो जाता है।

 

मेष व वृश्चिक मंगल की स्वराशि है अर्थात मेष व वृश्चिक राशि का स्वामित्व मंगल ग्रह के पास है, मंगल ग्रह मकर राशि में उच्च के तो कर्क राशि में नीच के हो जाते हैं मंगल ग्रह के इस गोचर परिवर्तन का विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रभाव पड़ेगा तो चलिए जानते हैं  मंगल ग्रह के मीन राशि से गोचर के दौरान किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

गोचर काल की अवधि:-

मंगल ग्रह जो देवी पृथ्वी के पुत्र व नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाने जाते हैं 18 जून 2020 की रात को 8 बजकर 12 मिनट 1 सेकंड पर कुंभ राशि को छोड़कर मीन राशि में प्रवेश करेंगे जहाँ  16 अगस्त 2020 तक रहेंगे।

मंगल के मीन राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव:-

 

मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए मंगल प्रथम व अष्टम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः यात्राओं के योग बनेंगे, कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें अन्यथा किसी बड़ी परेशानी में पड़ सकते हैं, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आवेश में आने से बचें व क्रोध पर नियंत्रण रखें, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होगी, यदि आप नौकरी करना चाहते हैं तो 16 अगस्त तक रुक जाएं, 10 से 16 अगस्त के मध्य छोटे भाई-बहन के सहयोग से रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा जिससे तनाव कम होगा।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए मंगल सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप खर्चों में वृद्धि होगी, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा, अचानक बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, शेयर बाजार में पैसा निवेश करने के लिए अच्छा समय रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए मंगल षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, क्रोध पर नियंत्रण रखें, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना करेंगे, माता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन अप्रसन्न रहेगा, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए मंगल पंचम व दशम भाव अर्थात केंद्र व त्रिकोण के स्वामी होकर राजयोगकारक हो जाते हैं जो कि आपके नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य का सहयोग मिलेगा, उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यात्राओं के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें व फिजूल के खर्चों पर नियंत्रण रखें, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व नवम भाव अर्थात केंद्र व त्रिकोण के स्वामी होकर राजयोगकारक हो जाते हैं जो कि आपके अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः आय में वृद्धि होगी किंतु दवाईयों पर धन व्यय होने के भी योग बनेंगे अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में तेजी अनुभव होगी, पिता के स्वास्थ्य में भी परेशानी संभव है, जिन्हें रक्त जनित कोई समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, वाहन तीव्र गति से न चलाएं, तामसिक चीजों के सेवन से बचें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए मंगल तीसरे व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे अतः क्रोध पर नियंत्रण रखें, जीवनसाथी के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, किसी गलतफहमी के कारण से जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, भाई-बहन की उन्नति होगी, नौकरी पेशा लोगों के लिए मंगल का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, आवेश में आकर निर्णय लेने से बचें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे अतः शत्रुओं पर धन व्यय होगा किंतु शत्रुओं पर विजय भी प्राप्त होगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कोर्ट-कचहरी के मामलों में विजय प्राप्त होगी, वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी के स्वास्थ्य में भी समस्या रह सकती है, मंगल के इस गोचर काल के समय आपको मेहनत अधिक करनी पड़ेगी और मेहनत का पूर्ण फल भी प्राप्त होगा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अच्छा रहेगा।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल प्रथम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, प्रेमियों के मध्य वैचारिक मतभेद होने की संभावना रहेगी, किसी पुराने कर्ज से छुटकारा मिल सकता है, आय में वृद्धि होगी, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, गर्म चीजों के सेवन से परहेज करें व क्रोध पर नियंत्रण रखें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए मंगल पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप घर में किसी नए मेहमान का आगमन संभव रहेगा, माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, घर के माहौल में कुछ गर्माहट अनुभव होगी जिससे तनावपूर्ण स्थितियाँ भी उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आय में वृद्धि होगी, लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, यात्राओं के योग बनेंगे चाहे व कार्य के सिलसिले से हो या धार्मिक यात्रा हो, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, व्यापारियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः पराक्रम में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, भाई-बहन को कष्ट या उनसे विवाद संभव रहेगा, ज्वर या सर दर्द की समस्या हो सकती है, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होगी।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए मंगल तीसरे व दशम भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे अतः क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा आपके कार्यक्षेत्र व परिवार में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, आय में वृद्धि होगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, व्यापारियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान की उन्नति होगी, गर्म चीजों के सेवन से परहेज करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे अतः संयम रखें व धैर्य से हर कार्य को संपन्न रखें, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, प्रमोशन या पदोन्नति के योग बनेंगे, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी जिससे मन अप्रसन्न रहेगा अतः तनाव लेने से बचें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, वाहन सावधानी से चलाएं, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव है।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470

Categories
Gochar Fal Prediction Recent Post

जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य, बुध व राहु आपके तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः आवेश में आने से बचें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा 16 जुलाई को सूर्य गोचर बदलकर आपके चतुर्थ भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, तनाव लेने से बचें, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो या जिन्हें छाती में दर्द की समस्या रहती हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, संतान पर धन व्यय होगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें व जल्दबाजी में कोई भी निर्णय न लें क्योंकि इस माह आपके अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध हो सकते हैं अतः सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, कोई भी रिस्क लेने से बचें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा किंतु शनि के वक्री अवस्था में गोचर करने के कारण से मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से  बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, 1 से 4 जुलाई 12 जुलाई को विशेष सावधानी बरतें व इनमें कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें, धोखा मिल सकता है, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 5 से 10 जुलाई का समय आपके लिए अच्छा सिद्ध होगा इनमें जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, कोई नया अवसर प्राप्त हो सकता है, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात भी संभव रहेगी, 11 से 16 जुलाई का समय विशेष 12 जुलाई का समय अधिक शुभ नही है अतः यह समय थोड़ा सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 17 से 23 जुलाई के मध्य आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा व धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे या धार्मिक अनुष्ठान पर धन व्यय होगा, यह समय विद्यार्थियों के लिए बहुत शुभ रहेगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा, 24 से 31 जुलाई तक का समय कार्यक्षेत्र के लिए सामान्य रहेगा जिसमें कार्य को लेकर लंबे समय से जो तनाव था उसमें राहत मिलेगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो 15 अगस्त तक इंतजार कर लें।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा जिसमें पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से विवाद संभव रहेगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, आवेश में आने व तनाव लेने से बचें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, यदि आप लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो कुछ समय और रुक जाएं, कोई भी रिस्क लेने से बचें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है माह की 1, 2, 3, 4, 11, 12, 13, 14, 15 व 16 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि मंगलवार का व्रत कर हनुमान जी की उपासना करें व नित्य गाय को रोटी, गुड़ व चने की दाल खिलाएं तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470

Categories
पौराणिक कथाएं

खाटूश्याम मंदिर की स्थापना कब और कहाँ हुई:—-Astrology Sutras

खाटूश्याम मंदिर की स्थापना कब और कहाँ हुई:—-Astrology Sutras

 

 

माहाभारत ग्रंथ के अनुसार बर्बरीक जो कि अतिबलशाली भीम के पौत्र व घटोत्कच और मोरवी के पुत्र थे, बचपन से ही उनमें एक विलक्षण शक्ति थी तथा इन्होंने युद्ध कला अपनी माता तथा श्री कृष्ण से सीखा था, बर्बरीक ने माता की आज्ञा अनुसार नव दुर्गा की घोर तपस्या की व उनको प्रसन्न कर तीन अमोघ बाण प्राप्त किए जो कि कभी विफल नही हो सकते थे इस प्रकार बर्बरीक “तीन बाणधारी” के नाम से प्रसिद्ध हुए।

 

महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक की भी युद्ध में सम्मिलित होने की प्रवल इच्छा जागृत हुई व उन्होंने अपनी माता को वचन दिया कि जो भी पक्ष निर्बल होगा मैं उसकी तरफ से युद्ध करूँगा और नीले घोड़े पर सवार होकर कुरुक्षेत्र की रणभूमि की तरफ चल दिए उस समय श्री कृष्ण ध्यान में लीन थे और उन्होंने अपने योग विद्या से जब यह देखा तो ब्राह्मण रूप धारण कर के बर्बरीक के समक्ष पहुँच कर उन्हें रोक कर उनसे कुरुक्षेत्र की रणभूमि की तरफ जाने का कारण पूछा व बर्बरीक द्वारा यह बताए जाने पर कि वह युद्ध में भाग लेने जा रहे हैं उनकी हँसी उड़ाई और कहा कि केवल यह तीन बाण के साथ आप युद्ध कैसे कर सकेंगे इस पर बर्बरीक ने उत्तर दिया कि उनका एक बाण ही समस्त शत्रुओं का नाश करने के लिए काफी है और शत्रुओं का दमन करने के बाद उनका बाण वापस उनके तुणीर में आ जाएगा और यदि वह इन तीनों बाणों का एक साथ संघान किया तो तीनों बाणों की विध्वंसक शक्ति से समस्त ब्रह्मांड की नाश हो जाएगा, यह जानकर श्री कृष्ण जी ने उन्हें चुनौती दी कि इस पीपल वृक्ष के सभी सूखे पत्तों को भेद कर दिखाओ किंतु वही पत्ते भेदना है जो सूखे हों या उनमें छिद्र हो बर्बरीक ने श्री कृष्ण की चुनौती को स्वीकार किया और अपने एक ही बाण से उस पीपल वृक्ष के सभी सूखे व छिद्रित पत्तों को भेद दिया तत्पश्चात वह बाण श्री कृष्ण के चरणों के पास जाकर रुक गया तब बर्बरीक ने श्री कृष्ण जी से निवेदन किया कि एक पत्ता आपके पैर के नीचे बचा हुआ है अतः आप अपना पैर हटा लें अन्यथा यह बाण आपके पैर पर घात कर देगा क्योंकि दुर्गा जी से प्राप्त बरदान के अनुसार उनका कोई बाण लक्ष्य भेदे बिना वापस नही आता तब भी श्री कृष्ण जी के पैर न हटाने पर माँ दुर्गा प्रकट हुई व श्री कृष्ण जी से प्राथना की कि उनके वरदान की लाज रखने हेतु अपना पैर हटा लें तब श्री कृष्ण जी ने अपना पैर जैसे ही हटाया उस बाण ने उस बचे हुए पत्ते को भी भेद दिया तत्पश्चात श्री कृष्ण जी ने दुर्गा जी को यह वचन दिया कि उनके पैर का निचला हिस्सा आज से उनके शरीर का सबसे कमजोर भाग होगा तथा यही भाग उनके इस शरीर को त्याग कर परमधाम लौटने का कारण बनेगा।

 

 

 

श्री कृष्ण जी इस बात को भली-भांति जानते थे इस महायुद्ध में कौरवों की हार निश्चित है और यदि बर्बरीक को न रोका गया तो यह युद्ध अधर्म के विजय का कारण बन सकता है अतः ब्राह्मण रूपी श्रीं कृष्ण जी ने बर्बरीक से दान माँगने की इच्छा रखी तो बर्बरीक ने उन्हें दान देने का वचन देते हुए दान माँगने को कहा तब श्री कृष्ण जी ने दान रूप में बर्बरीक से उनका शीश माँगा इस पर बर्बरीक चिंतन में पड़ गए और श्री कृष्ण जी के उनकी चिंता का कारण पूछने पर उन्होंने श्री कृष्ण जी से कहा कि मेरी इस युद्ध के साक्षी बनने की प्रवल इच्छा थी इस पर श्री कृष्ण जी ब्राह्मण रूप को त्याग कर अपने वास्तविक रूप में आ गए और बर्बरीक को समझाते हुए कहा कि इस महायुद्ध में धर्म के विजय हेतु तुम्हारे शीश का दान अनिर्वाय है तथा श्री कृष्ण जी ने बर्बरीक को आशीर्वाद दिया कि उनका यह दान अनंत काल तक याद रखा जाएगा तथा उनकी इस महायुद्ध को देखने की इच्छा भी जरूर पूरी होगी इस आशीर्वाद को प्राप्त कर बर्बरीक अत्यंत प्रसन्न हुए व अपना शीश श्री कृष्ण के चरणों में अर्पित कर दिया तत्पश्चात श्री कृष्ण जी ने उनके शीश को युद्धभूमि के समीप एक पर्वत पर स्थापित कर दिया जहाँ से बर्बरीक इस महाभारत युद्ध के प्रत्यक्ष साक्षी बनें।

 

महाभारत युद्ध की समाप्ति के बाद पांडवों में अहंकार की उत्पत्ति देखकर श्री कृष्ण जी मुस्कुराए और पांडवों को उस पर्वत पर ले गए जहाँ “महादानी” बर्बरीक का शीश स्थित था व उन्होंने बर्बरीक से निवेदन किया कि वह ही निर्णय लें कि पाँचों पांडव में से इस युद्ध के विजय का श्रेय किसको देना चाहिए इस पर बर्बरीक खूब हँसे और बोले कि कौन पांडव मैंने तो कुरुक्षेत्र में केवल श्री कृष्ण जी और उनके सुदर्शन चक्र को ही देखा श्री कृष्ण जी ने अकेले ही समस्त अधर्मियों का अंत किया अतः इस युद्ध में विजय श्री कृष्ण की ही हुई है इस बात से श्री कृष्ण जी प्रसन्न होकर बर्बरीक को आशीर्वाद देते हैं कि आज से तुम “श्याम” नाम से जाने जाओगे क्योंकि जो हारे का सहारा हो वही “श्याम” है अतः कलयुग में सभी लोग तुम्हारी मेरे नाम “श्याम” से पूजा करेंगे व जो भक्त तुम्हारी पूजा करेगा उसके सारे कष्ट दूर होंगे व उन्हें हर कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

 

 

 

 

बर्बरीक के खाटूश्याम नाम का रहस्य:-

 

बर्बरीक का शीश श्री कृष्ण जी द्वारा  “खाटू नगर” के पर्वत पर स्थित किया गया था जिस कारण से उन्हें खाटूश्याम के नाम से भी जाना जाता है।

 

क्यों की जाती है खाटूश्याम की पूजा:-

 

स्कंद पुराण के अनुसार:-

 

तत्सतथेती तं प्राह केशवो देवसंसदि।

शिरस्ते पूजयिषयन्ति देव्या: पूज्यो भविष्यसि।।

(स्कंद पुराण, कौ. ख. ६६.६५)

 

भावार्थ:- हे वीर! ठीक है तुम्हारे शीश की पूजा होगी और तुम देवरूप में पूजित होकर प्रिसिद्धि को प्राप्त करोगे।

 

खाटूश्याम जी का यह मंदिर राजस्थान राज्य के सीकर जिले में स्थित है तथा इनके प्रमुख देवता श्री कृष्ण जी और प्रमुख उत्सव फाल्गुन महोत्सव है इनके अन्य नाम खाटू नरेश, मोर्विनंदन व मोरछड़ी धारक है, मोर पंखों से बनी छड़ी को हमेशा अपने पास रखने के कारण से इनका नाम मोरछड़ी कहलाया।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470