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राहु और शनि से बनने वाला अशुभ योग: जानिए कौन सा है यह अशुभ योग व उसके फल और उपाय

राहु और शनि से बनने वाला अशुभ योग: जानिए कौन सा है यह अशुभ योग व उसके फल और उपाय

 

शनि व राहु से बनने वाला पिशाच योग
शनि व राहु से बनने वाला पिशाच योग

 

शनि और राहु इन दोनों को वैदिक ज्योतिष में पाप ग्रह की श्रेणी में रखा गया है जब यह दो ग्रह आपस में संबंध बनाते हैं तो पिशाच नामक योग बनता है अब प्रश्न यह उठता है कि किस प्रकार से शनि व राहु संबंध बनाएं तो यह योग बनता है उससे पूर्व हमारे लिए यह जानना आवश्यक है कि आखिर शनि व राहु से ही क्यों पिशाच योग बनता है व पिशाच योग का क्या अर्थ है इसके लिए हमें पहले शनि व राहु को समझना होगा शनि व राहु रात्रि बली होते हैं शनि का वर्ण श्याम है और शनि अंधेरे का ग्रह है और राहु एक माया अर्थात जादू है जब भी शनि और राहु के बीच संबंध बनता है तो एक नकारात्मक शक्ति का सृजन होता है जिसे पराशरी ज्योतिष में “पिशाच योग” की संज्ञा प्राप्त है।

 

राहु व शनि के चार प्रकार से संबंध बनने पर व्यक्ति को पिशाच योग का फल प्राप्त होता है वह इस प्रकार है:-

 

१. शनि व राहु एक साथ युति कर के किसी भी भाव में स्थित हों।

 

२. शनि व राहु एक दूसरे को परस्पर देखतें हों।

 

३. शनि की राहु या राहु की शनि पर दृष्टि हो।

 

४. गोचर वश जब शनि जन्म के राहु या राहु जन्म के शनि पर से गोचर करता हो।

 

इन चार प्रकार के शनि व राहु के मध्य संबंध बनने पर पिशाच योग बनता है अब प्रश्न यह उठता है कि इस पिशाच योग के क्या होते हैं तो चलिए मैं विभिन्न भावों में बनने वाले पिशाच योग के फल को बताता हूँ:-

 

पिशाच योग
पिशाच योग

 

१. यदि लग्न में शनि व राहु की युति हो तो ऐसे व्यक्ति के ऊपर तांत्रिक क्रियाओं का अधिक प्रभाव रहता है तथा ऐसे व्यक्ति हमेशा चिंतित रहते हैं और इनके मस्तिष्क में नकारात्मक विचार सबसे पहले आते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों को कोई न कोई रोग निरंतर बना रहता है।

 

२. यदि द्वितीय भाव में शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के घर वाले ही उसके शत्रु रहते हैं तथा इनको हर कार्य में बाधाओं का सामना करना पड़ता है और इनकी वाणी में कुछ दोष रहता है साथ ही धन संचय में कठिनाई व जुए-सट्टे आदि में धन हानि होती है तथा ऐसे व्यक्ति नशीले पदार्थों या तामसिक पदार्थों या दोनों का सेवन करते हैं।

 

३. यदि तृतीय भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसे व्यक्ति अधिकतर भ्रमित रहते हैं व ऐसे व्यक्तियों का छोटा भाई नही होता या छोटे भाई को किसी प्रकार कोई कष्ट रहता है कहने का आशय यह है कि तृतीय भाव का पिशाच योग छोटे भाई के सुख की हानि करता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को समय-समय पर भारी उतार-चढ़ाव के समय से गुजरना पड़ता है साथ ही यदि पंचमेश पर भी शनि या राहु की या दोनों की दृष्टि हो या युति हो तो ऐसे व्यक्तियों को संतान नही होती या होकर मर जाती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों को संतान सुख नही प्राप्त होता है।

 

४. यदि चतुर्थ भाव में शनि व राहु की युति हो तो यह और भी खराब स्थिति होती है क्योंकि चतुर्थ भाव भूमि, मकान, माता व सुख का भाव होता है अतः ऐसी स्थिति में व्यक्तियों को माता का पूर्ण सुख नही मिल पाता तथा इनके घर में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव रहता है प्रायः ऐसे व्यक्तियों के घर में वास्तु दोष अवश्य ही रहता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को मकान का सुख भी मुश्किल से ही प्राप्त होता है क्योंकि शनि निर्माण का कारक होता है और राहु माया, भ्रम व बाधाओं का कारक होता है ऐसे व्यक्ति जब भी किसी मकान का निर्माण आरंभ करवाते है तो उनके परिवार में रोग, व्याधि व पीड़ा प्रायः बनी रहती है या ऐसे व्यक्तियों को बड़ा आर्थिक नुकसान सहन करना पड़ता है।

 

५. यदि पंचम भाव में शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के मस्तिष्क में नकारात्मक विचार आते रहते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा भी कठिन परिस्थितियों से होते हए पूर्ण होती है व बड़े भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट रहता है तथा ऐसे व्यक्तियों की संतान को कष्ट रहता है और यदि पंचमेश का भी शनि व राहु या दोनों में से किसी एक से भी संबंध बनता हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान हीन अर्थात देह के किसी भाग में दुर्बलता लिए हुए होती है या होकर मर जाती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों को संतान सुख नही प्राप्त होता है।

 

६. यदि षष्ठ भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसे व्यक्तियों के छुपे हुए शत्रु अधिक होते हैं षष्ठ भाव से रोग, रिपु और ऋण का विचार करते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों की बीमारी का रहस्य जल्दी ज्ञात नही हो पाता और किसी जुए व सट्टे में हारने या नशे के कारण से धन हानि व ऋण की वृद्धि होती है ऐसे व्यक्तियों को हिर्दय घात होने या अन्य किसी प्रकार की दिल की बीमारी, रक्त जनित विकार, एक्सीडेंट से देह के किसी भाग में कमजोरी की संभावना रहती है और मामा पक्ष से विवाद बना रहता है।

 

७. यदि सप्तम भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है क्योंकि सप्तम भाव से रोजगार, जीवनसाथी, दाम्पत्य जीवन, मित्र, साझेदारी आदि का विचार किया है अतः इस भाव में शनि व राहु की युति होने पर व्यक्ति को अपने मित्रों व साझेदारियों से धोखा मिलने की संभावना रहती है तथा किसी दूसरे व्यक्ति के कारण से घर के वातावरण में कलह का माहौल बना रहता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को किसी महिला के कारण से अपमानजनक स्थितियों का भी सामना करना पड़ता है और रोजगार के मार्ग में अनेक प्रकार की परेशानियों का सामना करते हुए धैर्य व संयम रखते हुए सफलता प्राप्त होती है।

 

८. अष्टम भाव से ससुराल, आयु, मृत्यु, पुरातत्व, रहस्मई कार्य, गूढ़ विद्या, जीवनसाथी की वाणी आदि का विचार किया जाता है अतः ऐसे स्थिति में अष्टम भाव में यदि शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के दाम्पत्य जीवन में कलह की स्थितियाँ प्रायः बनी रहती है ध्यान देने योग्य बात यह है वहाँ बैठे इन दोनों ग्रह की सप्तम दृष्टि द्वितीय भाव जो आपका कुटुंब व वाणी का भाव है पर दृष्टि होती है अतः ऐसे व्यक्तियों का दाम्पत्य जीवन न्यून होता और यदि सप्तमेश अर्थात सप्तम भाव का स्वामी भी इनसे संबंध बनाता हो या त्रिक भाव में बैठा हो तो ऐसी स्थिति में दाम्पत्य जीवन को बचाना और भी मुश्किल हो जाता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को जीवन में कई बार शल्य चिकित्सा भी करानी पड़ सकती है तथा ऐसे व्यक्तियों को उदर व मूत्र विकार भी रहता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों की आयुष्य पर भी अनेक बार संकट आते हैं व ऐसे व्यक्तियों के अनैतिक संबंध बनने की भी संभावना रहती है।

 

९. यदि नवम भाव में शनि व राहु की युति हो तो ऐसा व्यक्ति धर्म के विपरीत आचरण करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाग्य में निरंतर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों के पिता को भी किसी प्रकार का कष्ट रहता है किंतु यदि भाग्येश की दृष्टि नवम भाव पर हो तो व्यक्ति को कड़े संघर्ष उपरांत सफलता प्राप्त होती है।

 

१०. यदि दशम भाव में शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के घरेलू सुख में कुछ कमी व माता-पिता को कष्ट रहता है तथा ऐसे व्यक्तियों के कारोबार में निरंतर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं साथ ही किसी राजा या उच्चाधिकारी से दंड भी प्राप्त होने की संभावना रहती है।

 

११. एकादश भाव को लाभ भाव भी कहा जाता है ज्योतिष का एक सर्वमान्य नियम है कि एकादश भाव में क्रूर से क्रूर ग्रह भी शुभ फल प्रदान करते है क्योंकि एकादश भाव का दूसरा नाम ही लाभ भाव है इस स्थिति में यदि शनि व राहु की युति एकादश भाव में हो तो व्यक्ति को जुए-सट्टे व किसी गलत कार्य द्वारा धन की प्राप्ति होती है किंतु ऐसे व्यक्तियों के भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट अवश्य ही रहता है तथा ऐसे व्यक्तियों को संतान का पूर्ण सुख नही प्राप्त हो पाता है।

 

१२. द्वादश भाव में यदि शनि व राहु की युति हो तो व्यक्ति के अनैतिक संबंध बनने की अधिक संभावना रहती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के गृहस्थ सुख में कुछ कमी रहती है तथा ऐसे व्यक्तियों को जीवन में कई बार धोखा मिलता है तथा किसी असाध्य रोग से पीड़ा होती है।

 

नोट:-

 

१. शनि व राहु की युति के अतिरिक्त उपरोक्त बताए गए अन्य प्रकार से संबंध बनाने पर भी प्राप्त होते हैं।

 

२. यदि शनि व राहु की युति या प्रतियुति (शनि से सप्तम भाव में राहु या राहु से सप्तम भाव में शनि हो) शनि की मकर या कुंभ राशि में हो तो स्थितियाँ धैर्य के साथ अत्यधिक प्रयास करने पर नियंत्रण में आ जाती है।

 

३. कुंडली के प्रथम अर्थात लग्न से सप्तम तक के भाव रात्रि बली होते हैं अतः इन भावों में शनि व राहु का संबंध बनना अत्यधिक कष्टदाई होता है।

 

मैंने द्वादश भावों में पिशाच योग बनने के फल को विस्तार से बताया है अब प्रश्न यह उठता है कि इस दोष के क्या उपाय होते हैं तो सर्वप्रथम मैं यहाँ यह स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि किसी भी प्रकार के दोष का उपाय पूर्ण विधि व शास्त्रोचित तरह से करने पर ही लाभ मिलता है अतः मैं यहाँ कुछ उपाय बता रहा हूँ जिन्हें करने से निश्चय ही लाभ प्राप्त होगा:-

 

१. दुर्गा सप्तशती का विधि पूर्वक पाठ व दशांश कराने से पिशाच योग के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

 

२. नित्य संकटमोचन हनुमाष्टक व सुंदरकांड का पाठ करने से पिशाच योग के दुष्प्रभाव से मुक्ति मिलती है।

३. शनि व राहु के हवनात्मक जप से भी पिशाच योग के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

 

४. नित्य शनि स्तोत्र का पाठ करने व अमावस्या के दिन सूर्यास्त के समय बहते पानी में नारियल प्रवाहित करने से भी पिशाच योग के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email- pooshark@astrologysutras.com

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भृगु सूत्र आधारित सूर्य का तृतीय भाव में फल

भृगु सूत्र आधारित सूर्य का तृतीय भाव में फल

 

तृतीय भाव में सूर्य का फल
तृतीय भाव में सूर्य का फल

 

अनेक ग्रंथों में सूर्यादि सभी ग्रहों के विभिन्न स्थानों में फल बताएं गए हैं पिछले लेख में मैंने भृगु सूत्र आधारित सूर्य के प्रथम भाव व द्वितीय में फल को बताया था अतः उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सूर्य के तृतीय भाव में फल को लिख रहा हूँ:-

 

 

भृगु सूत्र आधारित प्रथम भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-

 

भृगु सूत्र आधारित  प्रथम भाव में सूर्य का फल

 

१. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को अनुजों (छोटे भाइयों) का अभाव रहता है साथ ही बड़ा भाई तो होता है किंतु बड़े भाई के सुखों में त्रुटि रहती है और ऐसे व्यक्तियों को उम्र के ४, ५, ८ अथवा १२वें वर्ष में कुछ पीड़ा होती है।

 

२. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य पाप ग्रह से युक्त होकर बैठा हो तो व्यक्ति क्रूर कर्मों को करने वाला होता है तथा उसके दो भ्राता होते हैं साथ ही ऐसा व्यक्ति पराक्रमी तथा लड़ाई-झगड़े से न घबराने वाला और कीर्तिमान व अपने द्वारा अर्जित धन का भोग करने वाला होता है।

 

३. यदि तृतीय भाव में सूर्य शुभ ग्रहों से युक्त हो तो व्यक्ति के सहोदर भाइयों की अच्छी उन्नति व वृद्धि होती है।

 

४. यदि तृतीय भाव में सूर्य हो और तृतीयेश/पराक्रमेश बली अवस्था में बैठा हो या तृतीय भाव में सूर्य स्वराशि स्थित हो तो व्यक्ति अत्यंत पराक्रमी, खुद के पराक्रम से संपूर्ण सुख भोगने वाला, उच्च पद पर आसीन होने वाला, राजा या उच्चाधिकारी द्वारा सम्मानित होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाई दीर्घायु होते हैं।

 

५. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और तृतीयेश/पराक्रमेश पाप ग्रहों से युक्त व दृष्ट हों तो व्यक्ति आलस्य करने वाला व पाप कर्म करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाइयों का नाश होता है।

 

६. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनवान, भोगी तथा सुखी होता है।

 

भृगु सूत्र आधारित द्वितीय भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-

 

भृगु सूत्र आधारित सूर्य का द्वितीय भाव में फल

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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भौम प्रदोष व्रत कथा—Astrology Sutras

भौम प्रदोष व्रत कथा—Astrology Sutras

 

भौम प्रदोष व्रत
भौम प्रदोष व्रत

 

हर माह की त्रयोदशी तिथि के दिन प्रदोष व्रत रखा जाता है जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है तो उसे भौम प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है शास्त्रों के अनुसार भौम प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को कर्ज से शीघ्र मुक्ति मिलती है, शास्त्रों के अनुसार जो भी व्यक्ति भौम प्रदोष का व्रत करते हुए मंगल के २१ नामों का जप करते हुए व कथा पढ़ते हुए शिव जी व हनुमान जी की उपासना करता है उसके सभी अमंगल दूर हो जाते हैं तथा कर्ज से शीघ्र छुटकारा मिल जाता है।

 

व्रत विधि:-

 

भौम प्रदोष व्रत विधि व मंगल के २१ नाम

 

प्रातः स्नानादि कर दाहिने हाथ में लाल पुष्प, रोली, अक्षत, सुपाड़ी, जल व कुछ दक्षिणा लेकर व्रत का संकल्प लेना चाहिए तदोपरांत पूरे दिन निराहार व्रत रखना चाहिए और संध्या में प्रदोष काल के समय भगवान शिव जी और हनुमान जी की पूजा अर्चना करनी चाहिए और मंगल के २१ या १०८ नामों का उच्चारण व भौम प्रदोष व्रत कथा का वाचन करना चाहिए व प्रसाद के सेवन पश्चात अन्न ग्रहण करना चाहिए।

 

मंगल के कल्याणकारी २१ नाम:-

 

 

१. मंगल
२. भूमिपुत्र
३. ऋणहर्ता
४. धनप्रदा
५. स्थिरासन
६. महाकाय
७. सर्वकामार्थ साधक
८. लोहित
९. लोहिताक्ष
१०. सामगानंकृपाकर
११. धरात्मज
१२. कुंजा
१३. भूमिजा
१४. भूमिनंदन
१५. अंगारक
१६. भौम
१७. यम
१८. सर्वरोगहारक
१९. वृष्टिकर्ता
२०. पापहर्ता
२१. सर्वकामफलदाता।

 

भौम प्रदोष व्रत कथा:-

 

भौम प्रदोष व्रत कथा
भौम प्रदोष व्रत कथा

 

एक नगर में एक वृद्ध महिला अपने पुत्र के साथ रहती थी वृद्ध महिला को हनुमान जी के प्रति गहरी आस्था थी व वह प्रत्येक मंगलवार के दिन व्रत रखकर हनुमान जी की उपासना करती थीं एक बार हनुमान जी ने उस वृद्ध महिला की श्रद्धा व भक्ति भाव की परीक्षा लेने का सोचा और साधु रूप धारण कर वृद्ध महिला के घर पधारे और कहने लगे कि क्या कोई हनुमान जी भक्त है जो मेरी एक इच्छा पूर्ण करेगा यह वचन सुनकर वृद्ध महिला द्वार पर आ गयी और बोली हे साधु महाराज आज्ञा करें मैं आपकी किस प्रकार से सहायता कर सकती हूँ तब साधु वेशधारी हुनमान जी कहने लगे कि मुझे तीव्र क्षुधा लगी है, मैं भोजन करना चाहता हूँ अतः आप जमीन पर मिट्टी का लेप लगाकर चूल्हा तैयार कर दें इस पर वह वृद्ध महिला बोलीं कि हे साधु आप मिट्टी से जमीन को लीपने व गड्ढा खोदने के अतिरिक्त अन्य कोई आज्ञा दे दें मैं उसे अवश्य पूर्ण करूँगी।

 

साधु वेशधारी हनुमान जी ने वृद्ध महिला को तीन बार प्रतिज्ञा दिलवाई और कहा कि आप अपने पुत्र को बुला दीजिए मैं उसकी पीठ पर अग्नि प्रज्वलित कर भोजन बनाऊँगा इतना सुनते ही वृद्ध महिला घबरा गयीं किंतु प्रतिज्ञा में बँधे होने के कारण उन्होंने अपने पुत्र को बुलाकर साधु वेशधारी हनुमान जी को सौंप दिया व पुनः अंदर चली गयी कुछ समय पश्चात साधु वेशधारी हनुमान जी ने वृद्ध महिला को पुनः बुलाकर कहा कि भोजन तैयार हो गया है आप भी अपने पुत्र को बाहर बुला लें ताकि वो भी इस भोजन को ग्रहण कर सके यह सुनकर वृद्ध महिला हाथ जोड़कर निवेदन करने लगीं कि हे साधु महाराज मेरे मृत पुत्र का नाम लेकर मुझे और कष्ट न दें किंतु साधु महाराज के न मानने पर उन्होंने अपने पुत्र को आवाज दी और अपने पुत्र को जीवित पाकर अचंभित हो साधु वेशधारी हनुमान जी के चरणों में गिर पड़ीं तब हनुमान जी अपने मूल स्वरूप में आए व कहने लगे कि मैं आपकी श्रद्धा और भक्ति की परीक्षा लेने आया था और उसमें आप सफल हुईं व हनुमान जी ने उन महिला को सभी अमंगल से मुक्ति व अपनी भक्ति का आशीर्वाद दिया।

 

शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति कर्ज में डूब गया हो या उसके साथ निरंतर कुछ न कुछ अमंगल हो रहा हो तो उसे भौम प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए ऐसा करने से हनुमान जी व शिव जी की कृपा से व्यक्ति के सभी अमंगल दूर हो जातें हैं व वह कर्ज से शीघ्र ही मुक्त हो जाता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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भृगु सूत्र आधारित सूर्य का द्वितीय भाव में फल

भृगु सूत्र आधारित सूर्य का द्वितीय भाव में फल

 

द्वितीय भाव में सूर्य का फल
द्वितीय भाव में सूर्य का फल

 

अनेक ग्रंथों में सूर्यादि सभी ग्रहों के विभिन्न स्थानों में फल बताएं गए हैं पिछले लेख में मैंने भृगु सूत्र आधारित सूर्य के प्रथम भाव में फल को बताया था अतः उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सूर्य के द्वितीय भाव में फल को लिख रहा हूँ:-

 

 

१.यदि कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति प्रायः मुख के रोगों से पीड़ित रहता है साथ ही उसके जीवन के २५ वें वर्ष में राजदंड के कारण (न्यायालय की आज्ञा से) से धन की हानि होती है यह सामान्य फल है किंतु यदि सूर्य अपनी उच्च राशि (मेष) या स्वराशि (सिंह) का होकर द्वितीय भाव में स्थित हो तो मुख रोग तथा राजदंड से धन का नाश नही होता है।

 

२.यदि द्वितीय भाव में सूर्य के साथ पाप ग्रह बैठे हों तो व्यक्ति नेत्र रोगी होता है साथ ही थोड़ा विद्वान तथा रोगी शरीर वाला होता है।

 

३.यदि द्वितीय भाव में स्थित सूर्य पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनी होता है और उसकी कुंडली के अनेक दोषों (बुरे फल) का नाश हो जाता है तथा उसके नेत्रों में भी कोई रोग नही होता है।

 

४.यदि द्वितीय भाव में सूर्य अपनी उच्च राशि (मेष) या स्वराशि (सिंह) का होकर स्थित हो तो ऐसा व्यक्ति बहुत धनवान होता है और उसे प्रचुर सम्पन्नता तथा वैभव की प्राप्ति होती है।

 

५.यदि द्वितीय भाव में सूर्य के साथ बुध भी स्थित हो तो व्यक्ति शीघ्रता पूर्वक बोलता है (यहाँ मूल में पवनवाक शब्द का प्रयोग हुआ है इसका अर्थ है कि जैसे तेज हवा चलती है ठीक उसी प्रकार तेज रफ्तार से बातचीत करने वाला)

 

६.यदि द्वितीय भाव में सूर्य स्थित हो व द्वितीय भाव का स्वामी स्वराशि या उच्च राशि में स्थित हो तो व्यक्ति वाग्मी (वार्तालाप में कुशल) होता है साथ ही इस योग में जन्मा व्यक्ति विविध विज्ञानों एवं कलाओं में निष्णात होता है ऐसा व्यक्ति ज्ञानवान तथा अच्छे नेत्र दृष्टि वाला होता है और राजयोग का पूर्ण सुख प्राप्त करता है।

 

जय श्री राम।

 

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मकर सक्रांति के 10 अचूक उपाय—Astrology Sutras

मकर सक्रांति के 10 अचूक उपाय—Astrology Sutras

 

मकर सक्रांति के अचूक उपाय
मकर सक्रांति के अचूक उपाय

 

शास्त्रों के अनुसार सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से जाना जाता है जब सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर अर्थात मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मकर की सक्रांति अर्थात मकर सक्रांति का पर्व मनाया जाता है मकर सक्रांति के साथ ही खरमास का समापन व मांगलिक कार्यक्रमों का आरंभ हो जाता है चूँकि इस बार गुरु व शुक्र के अस्त रहने के कारण से मांगलिक कार्यक्रम के लिए शुभ मुहर्त 22 अप्रैल से प्राप्त होंगे, शास्त्रों में मकर सक्रांति के दिन कुछ विशेष उपायों का वर्णन मिलता है जिनसे अनेक परेशानियों से मुक्ति मिलती है तो चलिए जानते हैं कि ऐसे कौन से उपाय है जिनको करने से अनेक परेशानियों से मुक्ति मिलती है:-

 

१.  मकर सक्रांति के दिन सूर्योदय के पूर्व तिल स्नान (नहाने के पानी में तिल मिलाकर स्नान) करना चाहिए तथा उगते हुए सूर्य को ताँबे के पात्र में जल, कुमकुम, अक्षत, तिल, गुण व लाल पुष्प मिलाकर “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मन्त्र का जाप करने से सूर्य देव की कृपा से आरोग्यता की प्राप्ति होती है।

 

२.  मकर सक्रांति के दिन गरीबों व ब्राह्मणों को भोजन कराने से घर में अन्न की कभी कमी नही होती है।

 

३.  मकर सक्रांति के दिन गुण व कच्चा चावल बहते पानी में प्रवाहित करने से नजर दोष से मुक्ति व आरोग्यता की प्राप्ति होती है।

 

४.  मकर सक्रांति के दिन साफ लाल वस्त्र में गेहूँ और गुण को बाँधकर कुछ दक्षिणा के साथ ब्राह्मण व गरीबों को दान करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

 

५.  जिस किसी की कुंडली में सूर्य अशुभ स्थिति में हो उन्हें ताँबे का सिक्का या ताँबे का चौकोर टुकड़ा बहते पानी में सूर्य के मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जप करते हुए प्रवाहित करने से लाभ मिलता है।

 

६.  मकर सक्रांति के दिन तिल युक्त जल पितरों को अर्पित करने, तिल से अग्नि में हवन करने, गरीबों को तिल का दान व भोजन (तिल युक्त खिचड़ी) कराने से अनन्य पुण्य की प्राप्ति होती है।

 

७. मकर सक्रांति के दिन गाय को तिल युक्त खिचड़ी खिलाने से सभी ग्रहों से उत्पन्न दोषों से मुक्ति मिलती है।

 

८. यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में सूर्य नीच राशि के हैं तो उन्हें मकर सक्रांति के दिन सूर्य यंत्र की विधि पूर्वक स्थापना करनी चाहिए तथा उस यंत्र को नित्य ताँबे के पात्र में जल, अक्षत, कुमकुम व लाल पुष्प मिलाकर अर्पित करते हुए 501 की संख्या में सूर्य मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः” का जप करना चाहिए इस उपाय से लाभ अवश्य प्राप्त होगा व धन, स्वास्थ्य, रक्त जनित विकार जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी तथा सामाजिक प्रतिष्ठा व मान-सम्मान की प्राप्ति होगी।

 

९.  मकर सक्रांति के दिन गरीबों को खिचड़ी, कंबल, गरम वस्त्र, लकड़ी (अलाव जलाने हेतु), घी, दाल-चावल इत्यादि वस्तुओं का दान करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

 

१०.  मकर सक्रांति के दिन प्रातः स्नानादि कर के सूर्य को तांबे के पात्र से जल, कुमकुम, लाल पुष्प, अक्षत, तिल इत्यादि को मिलाकर अर्पित करने व अदित्यहिर्दय स्तोत्र का पाठ करने से सभी कष्टों से मुक्ति व कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

 

जय श्री राम।

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राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-४ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

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राहु व केतु राशि परिवर्तन
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राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-१ जानिए किन राशियों पर राहु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 20290: राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद ही नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु गोचर परिवर्तन से किन-किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी।

 

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मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर सामान्य रहेगा क्योंकि वर्तमान में अभी शनि के साढ़ेसाती का दूसरा चरण भी आपकी राशि पर चल रहा है हालांकि तुला, मकर व कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का उतना अशुभ प्रभाव नही पड़ता है किंतु यदि चंद्रमा का किसी भी प्रकार से शनि से संबंध बने तो साढ़ेसाती परेशानी देती है अन्यथा इन तीन राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती उतनी अशुभ नही होती हालांकि हम यहाँ राहु व केतु के गोचर परिवर्तन पर चर्चा कर रहे है अतः प्रेम संबंधों में कमी आएगी, प्रेमी व प्रेमिका से विवाद होते रहेंगे तथा यदि आप दोनों के मध्य काफी समय से विवाद चल रहा है तो वह विवाद संबधों को विच्छेद करा कर समाप्त होगा, प्रेमियों के मध्य गलतफहमियों के चलते विवाद होंगे, संतान को कष्ट, संतान से विवाद, संतान की शिक्षा में बाधाएं आएंगी, विद्यार्थियों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा शिक्षा में व्यवधान आएंगे, विद्यार्थियों के मन में क्या करें व क्या न करें को लेकर मन में संशय बना रहेगा, कुछ देर ध्यान करें इससे मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी हालांकि लाभ के लिहाज से यह गोचर शुभ सिद्ध होगा फलस्वरूप लाभ के अन्य माध्यम बनेंगे, लाभ में वृद्धि होगी, लंबे समय से कार्यक्षेत्र में (चाहे वह नौकरी पेशा व्यक्ति हों या व्यापारी) उन्नति के मार्ग में जो बाधाएं आ रही थी वह दूर होंगी, शेयर बाजार, जुआ व सट्टे से अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लाभ होगा आपकी वाणी का लोगों पर अच्छा प्रभाव भी पड़ेगा तथा उन्नति के अवसर भी प्राप्त होंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, पिता से वैचारिक मतभेद व पिता के स्वास्थ्य में समस्या रहेगी, भ्रम की स्थितियाँ बनेंगी, मकर राशि वाले जातक/जातिकाओं के लिए इस गोचर काल की सबसे बड़ी समस्या भ्रामक स्थिति रहेगी अतः धैर्य व संयम से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच समझ कर लें तथा आवेश में आने से बचें यदि आपने भ्रामक स्थिति न बनने दी तो राहु व केतु का यह गोचर आपके लिए शुभ सिद्ध होगा, आय में वृद्धि होगी, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा है तो आपको बुद्धि व विवेक से हर कार्य करना होगा क्योंकि राहु आपके चित्त को शांत नही होने देंगे जिससे बनते कार्य बिगड़ेंगे, वहिं केतु आपको सही दिशा में प्रयत्न नही करने देंगे जिससे व्यापार व दामपत्य जीवन के सुख में बाधाएं आएंगी, यह गोचर आपके लिए 48% शुभ तथा 52% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- सुंदरकांड व बटुक भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करें तथा जिनकी कुंडली में चंद्रमा शनि से संबंध रखता हो वह इन उपायों के साथ प्रत्येक शनिवार को 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें लाभ होगा।

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-२ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-२ जानिए, कर्क से कन्या राशि वालों के लिए राहु-केतु का यह गोचर कितना शुभ रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा हो उनके लिए मुश्किलें ज्यादा रहेंगी अतः घर में कलह-क्लेश होंगे, मानसिक अशांति अनुभव होगी, कार्यक्षेत्र में हानि संभव है, नौकरी पेशा लोग बहुत ही सतर्कता के साथ कार्य करें, आपको अपने प्रियजनों का सहयोग कम मिलेगा, वाणी में तेजी रहेगी अतः वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें, धैर्य व संयम से कार्य करें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं से सावधान रहें, किसी से ऋण लेने से बचें, जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध नही है उनके लिए यह गोचर कुछ राहत देगा, कार्यक्षेत्र में विकास होगा, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, जिनका कार्य कमीशन, फाइनेंस, बैंकिंग, टीचिंग से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह गोचर लाभप्रद सिद्ध होगा हालाँकि घर में कलह-क्लेश होते रहेंगे फिर भी चंद्रमा का शनि से संबंध न होने के कारण से आपकी सोच-विचार करने की शक्ति जागृत रहेगी, राजनीति से या सामाजिक वर्ग से जुड़े लोग अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण करें तथा शराब, माँसाहार का सेवन न करें क्योंकि इनका सेवन आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला सिद्ध होगा, शत्रुओं से सावधान रहें, यह गोचर आपके लिए 50% शुभ तथा 50% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- हनुमान जी, गणेश जी व भैरव जी की नित्य पूजा करें व गणेश अथर्वशीर्ष, संकटमोचन हनुमाष्टक और भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करने से लाभ होगा।

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-३ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020: *भाग:-३* राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु के गोचर परिवर्तन से तुला, वृश्चिक व धनु राशि में से किन पर राहु की कृपा बरसेगी व आपको क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए तथा उपाय।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर शुभ रहेगा बशर्ते आपकी कुंडली में राहु पीड़ित अवस्था में हो फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, भाग्य में वृद्धि होगी व भाग्य का पूर्ण सहयोग भी प्राप्त होगा, व्यापार में भी लाभ होगा व व्यापार की वृद्धि होगी, नए कार्य की शुरुवात होने के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आप क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, हॉकी, पुलिस, आर्मी से जुड़े हुए हैं तो यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ सिद्ध होगा, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, दामपत्य जीवन में क्षणिक विवाद होते रहेंगे, बड़े भाई-बहन का सम्मान करें, मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी अतः अपने विवेक से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझ कर ही लें, दिमाग आपका तेजी से कार्य करेगा, आपके ज्ञान में भी वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, रुका हुआ धन प्राप्त होगा व ऐसे सभी कार्य जो लंबे समय से रुके हुए हैं अब पूर्ण होंगे, सरकारी नौकरी की जो लोग लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं उन्हें सरकारी नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, यात्राएं चाहे लंबी हो या छोटी लाभप्रद सिद्ध होंगी, धर्म का पालन करें व अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, बीते समय में आपको जो भी नुकसान हुए अब उनकी भरपाई होने के योग बनेंगे, यह गोचर आपके लिए 80% शुभ व 20% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- दशांश करें यहाँ दशांश का तात्पर्य अपने कमाई का दसवाँ हिस्सा किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम में दान करने से हैं तथा शिव जी की पूजा व शिव परिवार की सेवा करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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शुक्र का कर्क राशि से गोचर 1 सितंबर 2020: जानें किस राशि वालों पर क्या प्रभाव पड़ेगा व किन राशि वालों की चमकेगी किस्मत

शुक्र का कर्क राशि से गोचर 1 सितंबर 2020: जानें किस राशि वालों पर क्या प्रभाव पड़ेगा व किन राशि वालों की चमकेगी किस्मत

 

शुक्र का कर्क राशि से गोचर
शुक्र का कर्क राशि से गोचर

 

वैदिक ज्योतिष में शुक्र को कला, वैभव, सौंदर्य, प्रेम, भौतिक सुख, का कारक माना गया है सामान्य शब्दों में समझा जाए तो हर प्रकार के सुख जिनसे प्राप्त होते हैं उन सभी के कारक शुक्र होते हैं यह देव गुरु वृहस्पति के भाई व दैत्यों के आचार्य हैं नव ग्रहों में एकमात्र शुक्र ही है जिन्हें मृत संजीवनी विद्या का ज्ञान है, 1 सितंबर 2020 मंगलवार को 2 बजकर 2 मिनट 01 सेकंड पर शुक्र गोचर बदलकर कर्क राशि में गोचर करेंगे जिसके कारण से विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार के फल प्राप्त होंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के कर्क राशि से गोचर के दौरान किन राशियों को क्या फल प्राप्त होंगे:-

 

शुक्र के कर्क राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव:-

 

दशा का भोग्यकाल ज्ञात करने की सरल विधि

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शुक्र दूसरे व सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा साथ ही घर के में माहौल में खुशी का वातावरण रहने से मन प्रसन्न रहेगा, प्रेमियों के जीवन में भावुकता हावी हो सकती है अतः भावनाओ पर नियंत्रण रखें, सर्दी-जुकाम की समस्या रह सकती है।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे, संगीत, कला के प्रति रुझान बढ़ेगा, आपके मन में कुछ नया करने की चाह उत्पन्न होगी, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ कहीं घूमना जाने का सोच रहे हैं तो शुक्र का यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ सिद्ध होगा जिससे संबंधों में मधुरता आएगी, पुराने मित्रों व करीबी लोगों से मुलाकात संभव है, विद्यार्थियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर काफी अच्छा रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, शिक्षा के क्षेत्र में आ रही बाधाएं दूर होंगी, परिवार का माहौल अच्छा रहने से मन प्रसन्न रहेगा, यदि आप किसी पारिवारिक व्यवसाय या साझेदारी में कोई व्यवसाय करते हैं तो शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ होगा, वाणी का लोगों पर प्रभाव पड़ेगा, यात्राओं के योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, नेत्रों में किसी प्रकार की समस्या संभव है, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, खाने-पीने व यात्राओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप बौद्धिक क्षमता से उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे व कला और संगीत के प्रति रुझान बढ़ेगा, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, जिनका कार्य मीडिया, सौंदर्य उत्पादों से जुड़ा हुआ है उनके लिए शुक्र का यह गोचर काफी अच्छा रहेगा, परिवार में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, शुक्र के इस गोचर के दौरान आप भौतिक सुखों को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत रहेंगे, स्वास्थ्य के लिहाज से भी शुक्र का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा फिर भी बाहर की चीजों का सेवन करने से परहेज करें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तीसरे व दसवें भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे द्वादश भाव में शुक्र शुभ फल देता है क्योंकि काल पुरुष के द्वादश भाव में ही शुक्र उच्च के होते हैं फलस्वरूप जो लोग विदेशों से जुड़ा व्यापार करते हैं या विदेशी कंपनियों में काम करते हैं उनके लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, विदेश/परदेश यात्रा के भी योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, किसी महिला या सुख के संसाधनों पर धन व्यय होगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, शुक्र के इस गोचर काल के दौरान आप आध्यात्मिक सुखों की जगह भौतिक सुखों को अधिक प्रधानता देंगे, बाईं नेत्र में किसी प्रकार की समस्या संभव है, स्वास्थ्य का भी विशेष ख्याल रखें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शुक्र दूसरे व नवम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे जो कि बेहद शुभ रहेगा फलस्वरूप धन लाभ होने के योग बनेंगे, नौकरी पेशा व व्यापारी वर्ग के लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर अच्छा सिद्ध होगा, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, परिवार के सदस्यों के साथ संबंध मधुर होंगे व घर के वातावरण में खुशियों का माहौल रहेगा, बड़ी बहन या किसी महिला से लाभ मिलने की संभावना रहेगी, लंबे समय से आपको जो स्वास्थ्य संबंधित समस्याएं थी उनसे राहत मिलेगी, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, मनोरंजन देने वाले साधनों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शुक्र पहले व अष्टम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात संभव है, नौकरी पेशा लोगों के लिए प्रमोशन के योग बनेंगे, व्यापार वृद्धि हेतु भी आप कोई योजना बना सकते हैं जिससे आपको भविष्य में लाभ होगा, आपकी वाणी से लोग प्रभावित होंगे जिससे आपके रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे व आपके लोगों से संबंध भी मधुर होंगे, विद्यार्थियों के लिए भी यह अच्छा समय रहेगा, पिता से चले आ रहे वैचारिक मतभेद समाप्त होंगे, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर होगा फलस्वरूप आध्यात्म के प्रति आपका रुझान अधिक बड़ेगा, किसी ज्ञानी व्यक्ति से आपकी मुलाकात संभव रहेगी, धर्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, दामपत्य जीवन अच्छा रहेगा, घर में बड़ों-बुजुर्गों के साथ समय बिताना आपको अच्छा लगेगा व उनके साथ आपका अच्छा समय भी बीतेगा, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए भी शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, जो लोग संगीत, कला, सौंदर्य प्रकाशन से जुड़े हुए हैं उनके लिए भी शुक्र का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा, यात्राओं के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, शुक्र के इस गोचर के दौरान आपके शत्रु सक्रिय रहेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, किसी भी महिला से व्यर्थ विवाद न करें, स्वास्थ्य के लिहाज से शुक्र का यह गोचर अच्छा सिद्ध होगा क्योंकि शुक्र ही इकलौता ऐसा ग्रह है जिसे मृत संजीवनी का ज्ञान है और अष्टम भाव आयु का विचार है अतः आपके स्वास्थ्य में सुधार होगा व लंबे समय से चली आ रही बीमारी से राहत मिलेगी फिर भी अधिक मिर्च-मसाले, तामसिक चीजों से परहेज करें अन्यथा पेट/उदर से संबंधित परेशानी संभव है, दामपत्य जीवन अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ संबंधों को मजबूत करने और उन्हें समझने का यह अच्छा समय रहेगा क्योंकि अष्टम भाव जीवनसाथी की वाणी का भी भाव है जहाँ शुक्र जैसा सौम्य ग्रह वाणी में मधुरता देता है, किसी को उधार पैसा देने से बचें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, जो लोग साझेदारी में व्यापार करते हैं उनके लिए शुक्र का यह गोचर काफी अच्छा रहेगा, दामपत्य जीवन अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ नजदीकियाँ बढ़ेंगी, मित्रों से मुलाकात संभव है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, प्रेमियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर अच्छा सिद्ध होगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनसे विवाह करना चाहते हैं तो यह समय अपने पार्टनर को प्रपोज करने के लिए शुभ रहेगा, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रमोशन के भी योग बनेंगे, आपका व्यक्तित्व आकर्षक रहेगा जिससे लोग आपकी ओर आकर्षित होंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, अधिक मिर्च-मसालों से बने पदार्थों से परहेज करें, कार्यक्षेत्र में अचानक से किसी समस्या के आने से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी अतः तनाव लेने से बचें व कार्य पर ध्यान दें, पिता के स्वास्थ्य में भी समस्या संभव है अतः पिता के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें, किसी महिला से व्यर्थ विवाद में पड़ें, शुक्र के इस गोचर के दौरान आपके शत्रु सक्रिय रहेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, मामा पक्ष से विवाद संभव रहेगा, अचानक यात्राओं के योग बनेंगे व यात्राओं पर धन व्यय होगा, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, शुक्र का यह गोचर आपके लिए अधिक शुभ नही है अतः नित्य लक्ष्मी चालीसा व श्रीसूक्त का पाठ करें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शुक्र तीसरे व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, बुद्धि बल द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, रचनात्मक कार्यों के प्रति झुकाव बड़ेगा, जो छात्र शोध कार्यों में लगे हैं उनके लिए भी शुक्र का यह गोचर शुभ सिद्ध होगा, संतान पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, प्रेमियों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, प्रेम जीवन में मधुरता आएगी किंतु अपने प्रेमी से अधिक वायदे करने से बचें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा।

 

जय श्री राम।

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घर की नकारात्मक ऊर्जा व ऊपरी बाधा दूर करने के 7 अचूक उपाय

घर की नकारात्मक ऊर्जा व ऊपरी बाधा दूर करने के 7 अचूक उपाय

 

ऊर्जा दो प्रकार की होती है एक सकारात्मक और दूसरी नकारात्मक जो कि क्रमशः देव और असुर की श्रेणी में आती है बहुत से लोग मेरे पास आते हैं कि मेरे घर में किसी ने कुछ कर दिया है या मेरे घर पर किसी की नजर लग गयी है या मेरे घर में कभी-कभी किसी और के होने का भी अहसास होता है तो आज मैं इसी संदर्भ में कुछ सरल से उपाय बताता हूँ जिनसे आप घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर कर सकते हैं तो चलिए जानते हैं वह कौन से उपाय हैं जिन्हें करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है:-

 

घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के उपाय
घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के उपाय

 

१. हनुमान जी की पंचमुखी मूर्ति या फोटो को घर के मुख्य द्वार पर लगाने से घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश नही होता है।

 

२. यदि आपके घर में किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा हो तो गोहरी (गाय की सूखी गोबर) में हल्का सा गंगाजल गायत्री मंत्र पढ़कर छिड़क दें तदोपरान्त उसमें सेंधा नमक, फिटकरी व कपूर का छोटा टुकड़ा डालकर जला दें तथा उससे जो धुंआ निकले उससे पूरे घर को गायत्री मंत्र पढ़ते हुए शुद्ध करें ऐसा करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

 

३. घर के मध्य भाग में तुलसी का पौधा लगाकर नित्य उसका पूजन करने से भी घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

 

४. जिस घर में नित्य सुंदरकांड का पाठ व हनुमान जी की आरती होती है वहाँ नकारात्मक ऊर्जा वास नही करती है।

 

५. घर के दक्षिण भाग में सूर्यास्त बाद नित्य पितरों को दीपक अर्पित करने से भी पितरों के आशीर्वाद से घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

 

६. नित्य घर में गंगाजल का छिड़काव करने से भी सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

 

७. नित्य पूजा घर में पूजन समय शंखनाद करने से भी सभी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।

 

जय श्री राम।

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सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

सितंबर 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरूवात में मंगल का लग्न से गोचर रूचक नामक पंचमहापुरुष योग बनाएगा जिस पर गुरु की दृष्टि भी रहेगी फलस्वरूप स्वास्थ्य में सुधार होगा, खुद को ऊर्जावान अनुभव करेंगे, नई चुनातियों का सामना करना पड़ सकता है व इन चुनौतियों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, 10 सितंबर को मंगल वक्री हो जाएंगे अतः स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ अनुभव होगी, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है जिस कारण से मन अप्रसन्न रहेगा, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद संभव रहेगा, माह के शुरुवात में सूर्य व बुध का पंचम भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किंतु संतान के स्वास्थ्य में कुछ परेशानियाँ संभव रहेगी, 2 सितंबर को बुध गोचर बदलकर आपके छठे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर बुद्धि व विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त होने के योग बनेंगे, 16 सितंबर को सूर्य भी गोचर बदलकर आपकी कुंडली के छठे भाव में आ जाएंगे अतः सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, ज्वर, सर दर्द, नेत्रों में जलन/दर्द की समस्या रह सकती है, 22 सितंबर को बुध पुनः गोचर बदलकर आपकी कुंडली के सप्तम भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जिनका कार्य बैंकिंग व फाइनेंस से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह समय काफी अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र का चतुर्थ भाव से गोचर रहेगा अतः घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, यदि आप अपने प्रेमी/प्रेमिका को प्रपोज करना चाहते हैं तो 14, 19, 20 व 21 सितंबर का दिन आपके लिए शुभ रहेगा।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा अतः मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए है उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, 23 सितंबर को राहु व केतु गोचर बदलकर क्रमशः दूसरे व अष्टम भाव से गोचर करेंगे अतः वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ सकते हैं, वाहन सावधानी से चलाएं, तामसिक चीजों से परहेज करें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, 25 सितंबर को अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 14 सितंबर को परिवार वालों के साथ अच्छा समय बीतेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, 19 से 21 सितंबर का समय भी आपके लिए अच्छा रहेगा, किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा।

 

Mesh rashi
मेष राशिफल

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए सितंबर 2020 सामान्य रहेगा जिसमें किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, घर में खुशियों का माहौल रहने से मन प्रसन्न रहेगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है 10 सितंबर के बाद स्वास्थ्य का ख्याल रखें व क्रोध और वाणी पर नियंत्रण रखें, दामपत्य जीवन अधिकांश ठीक रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, माह की 3, 4, 5, 17, 18, 21, 22 व 23 तिथियाँ अधिक शुभ नही है अतः इस दौरान कोई भी रिस्क लेने से बचें, मेरे अनुसार मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल दें व सुंदरकांड का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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