अनेक ग्रंथों में सूर्यादि सभी ग्रहों के विभिन्न स्थानों में फल बताएं गए हैं पिछले लेख में मैंने भृगु सूत्र आधारित सूर्य के प्रथम भाव व द्वितीय में फल को बताया था अतः उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए सूर्य के तृतीय भाव में फल को लिख रहा हूँ:-
भृगु सूत्र आधारित प्रथम भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-
१. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति बुद्धिमान होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को अनुजों (छोटे भाइयों) का अभाव रहता है साथ ही बड़ा भाई तो होता है किंतु बड़े भाई के सुखों में त्रुटि रहती है और ऐसे व्यक्तियों को उम्र के ४, ५, ८ अथवा १२वें वर्ष में कुछ पीड़ा होती है।
२. यदि कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य पाप ग्रह से युक्त होकर बैठा हो तो व्यक्ति क्रूर कर्मों को करने वाला होता है तथा उसके दो भ्राता होते हैं साथ ही ऐसा व्यक्ति पराक्रमी तथा लड़ाई-झगड़े से न घबराने वाला और कीर्तिमान व अपने द्वारा अर्जित धन का भोग करने वाला होता है।
३. यदि तृतीय भाव में सूर्य शुभ ग्रहों से युक्त हो तो व्यक्ति के सहोदर भाइयों की अच्छी उन्नति व वृद्धि होती है।
४. यदि तृतीय भाव में सूर्य हो और तृतीयेश/पराक्रमेश बली अवस्था में बैठा हो या तृतीय भाव में सूर्य स्वराशि स्थित हो तो व्यक्ति अत्यंत पराक्रमी, खुद के पराक्रम से संपूर्ण सुख भोगने वाला, उच्च पद पर आसीन होने वाला, राजा या उच्चाधिकारी द्वारा सम्मानित होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाई दीर्घायु होते हैं।
५. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और तृतीयेश/पराक्रमेश पाप ग्रहों से युक्त व दृष्ट हों तो व्यक्ति आलस्य करने वाला व पाप कर्म करने वाला होता है तथा ऐसे व्यक्तियों के भाइयों का नाश होता है।
६. यदि तृतीय भाव में सूर्य स्थित हो और उस पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो तो व्यक्ति धनवान, भोगी तथा सुखी होता है।
भृगु सूत्र आधारित द्वितीय भाव में सूर्य के फल को पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं:-
18 जून 2020: 3 ग्रहों के बाद अब बुध भी होंगे वक्री जानें बुध के वक्री होने पर क्या सावधानी बरतनी चाहिए—–Astrology Sutras
बुध मिथुन राशि में वक्री
शनि, गुरु व शुक्र वर्तमान में वक्री अवस्था से गोचर कर रहे हैं और आज अर्थात 18 जून 2020 को प्रातः9 बजकर 52 मिनटपर बुध भी वक्री हो जाएंगे तथा 12 जुलाई को पुनः मार्गी हो जाएंगे बुध बुद्धि, वाणी, चेतना, व्यापार, रेडियो, मोबाइल और त्वचा के कारक होते हैं अतः बुध के वक्री होने से विभिन्न राशियाँ भी प्रभावित होंगी तो चलिए जानते हैं बुध के वक्री अवस्था में गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-
मेषादि 12 राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
मेष राशि:-
मेष राशिफल
मेष राशि वालों के लिए बुध तीसरे से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः बहुत सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें व जोखिम लेने से बचें, छोटे भाई-बहन के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें।
उपाय:- नित्य गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित कर गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व संकठा चतुर्थी और विनायक चतुर्थी का व्रत करें।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
वृषभ राशि वालों के लिए बुध दूसरे भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, कुछ परिश्रम के साथ सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे।
उपाय:- गणेश अथर्वशीर्ष का नित्य पाठ करें।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
मिथुन राशि वालों के लिए बुध लग्न से ही वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः तनाव लेने से बचें व स्वास्थ्य का ख्याल रखें, त्वचा संबंधित कोई समस्या संभव है, वाहन सुख प्राप्त हो सकता है, व्यय में वृद्धि होगी।
उपाय:- गणेश स्तोत्र का पाठ करें।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः खर्चों पर नियंत्रण बना कर रखें, किसी से व्यर्थ विवाद में न पड़ें व लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, किसी नए कार्य के आरंभ के लिए यह अच्छा समय रहेगा।
उपाय:- गणेश गायत्री मंत्र का नित्य जाप करें।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
सिंह राशि वालों के लिए बुध एकादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यात्राओं पर धन व्यय होगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, बुआ व बड़ी बहन के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।
उपाय:- नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
कन्या राशि वालों के लिए बुध दशम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः मन में किसी न किसी प्रकार का भय बना रह सकता है, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यस्थल पर व्यर्थ के विवाद में न पड़ें।
उपाय:- नित्य गणेश गायत्री मंत्र का जाप करें।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
तुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः धार्मिक यात्राओं या धार्मिक कार्यों या कार्य के सिलसिले से की गई यात्राओं पर धन व्यय होगा, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, पिता के स्वास्थ्य में परेशानी संभव है, महिलाओं से व्यर्थ विवाद करने से बचें।
उपाय:- बुधवार के दिन कोई साग व शुक्रवार के दिन शकर मिश्रित चावल गाय को खिलाएं।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, व्यर्थ विवाद में न पड़ें व तनाव लेने से बचें, जीवनसाथी की वाणी में तेजी अनुभव होगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव है, निवेश करने से बचें।
उपाय:- संकठा चतुर्थी व विनायक चतुर्थी का व्रत करें व नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे अतः विवाह में कुछ दिक्कतें आएंगी, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, कार्यस्थल पर किसी से क्षणिक विवाद होने के कारण से तनाव रह सकता है, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे।
उपाय:- नित्य गणेश जी को दूर्वा घास अर्पित करें व अर्पित की हुई दूर्वा घास से कुछ अपने पर्स या जेब में रखें।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः तनाव लेने से बचें, जिन्हें न्यूरो से संबंधित समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, मामा पक्ष से वैचारिक मतभेद संभव है।
उपाय:- गणेश चालीसा व शनि स्तोत्र का नित्य पाठ करें।
कुंभ राशि:–
कुंभ राशिफल
कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए यह मिला-जुला समय रहेगा, संतान को कष्ट संभव है, अपने सीनियर से व्यर्थ विवाद में न पड़ें।
उपाय:- राम रक्षा स्तोत्र का नित्य पाठ करें व गणेश गायत्री मंत्र का नित्य जाप करें।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः माता से विवाद संभव रहेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, किसी अपरिचित की बातों में आने से बचें।
जुलाई 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा
मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य, बुध व राहु आपके तीसरे भाव से गोचर करेंगे अतः आवेश में आने से बचें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा 16 जुलाई को सूर्य गोचर बदलकर आपके चतुर्थ भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप माता के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, तनाव लेने से बचें, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो या जिन्हें छाती में दर्द की समस्या रहती हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, संतान पर धन व्यय होगा, माह के शुरुवात में मंगल का द्वादश भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें व जल्दबाजी में कोई भी निर्णय न लें क्योंकि इस माह आपके अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध हो सकते हैं अतः सोच-समझकर ही कोई निर्णय लें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, कोई भी रिस्क लेने से बचें, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें।
मेष राशिफल
माह के शुरुवात में शनि का दशम भाव से गोचर शश नामक योग बनाएगा किंतु शनि के वक्री अवस्था में गोचर करने के कारण से मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, यदि आपका फाइनेंस से जुड़ा हुआ कार्य है तो यह माह आपके लिए अच्छा रहेगा, शेयर बाजार में पैसा लगाने से बचें, माह के शुरूवात में गुरु व केतु का गोचर नवम भाव से रहेगा फलस्वरूप आध्यत्म की ओर झुकाव बड़ेगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, जो लोग उच्च शिक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए यह माह अच्छा सिद्ध होगा, 1 से 4 जुलाई व 12 जुलाई को विशेष सावधानी बरतें व इनमें कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें, धोखा मिल सकता है, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 5 से 10 जुलाई का समय आपके लिए अच्छा सिद्ध होगा इनमें जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे व नजदीकियाँ बढ़ेंगी, कोई नया अवसर प्राप्त हो सकता है, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात भी संभव रहेगी, 11 से 16 जुलाई का समय विशेष 12 जुलाई का समय अधिक शुभ नही है अतः यह समय थोड़ा सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, 17 से 23 जुलाई के मध्य आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा व धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे या धार्मिक अनुष्ठान पर धन व्यय होगा, यह समय विद्यार्थियों के लिए बहुत शुभ रहेगा, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व अपने प्रेम का इजहार करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा, 24 से 31 जुलाई तक का समय कार्यक्षेत्र के लिए सामान्य रहेगा जिसमें कार्य को लेकर लंबे समय से जो तनाव था उसमें राहत मिलेगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो 15 अगस्त तक इंतजार कर लें।
मेष राशिफल
कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जुलाई 2020 सामान्य रहेगा जिसमें पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से विवाद संभव रहेगा, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, आवेश में आने व तनाव लेने से बचें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, यदि आप लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं तो कुछ समय और रुक जाएं, कोई भी रिस्क लेने से बचें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझकर लें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है माह की 1, 2, 3, 4, 11, 12, 13, 14, 15 व 16 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि मंगलवार का व्रत कर हनुमान जी की उपासना करें व नित्य गाय को रोटी, गुड़ व चने की दाल खिलाएं तो लाभ होगा।
चतुर्थ भाव में स्थित शनि के फल मैंने दो भागों में विभक्त किया था जिसके पहले भाग की link को मैं इस पोस्ट में उपलब्ध करा रहा हूँ साथ ही उसी विषय पर आगे चर्चा करते हुए शनि के चतुर्थ भाव में विभिन्न स्थितियों में स्थित होने के फल को विस्तार से समझाते हुए पूर्ण करता हूँ।
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-
यदि उच्च राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि केवल कर्क लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को अनुशासित करने में लगे रहते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की चाह होती है कि उनके इच्छा अनुसार लोग कार्य करें ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति पक्षियों को बंधन में रखने से सुखी होते हैं ऐसे व्यक्तियों को भूमि व वाहन सुख प्राप्त होता है साथ ही इनको बहुत मजबूत विचारों वाले जीवनसाथी की प्राप्ति होती है, यदि उच्च नवांश का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति माँसाहारी होते हैं तथा माँसाहार भोजन करने में इन्हें बहुत आनंद आता है।
यदि शुभ वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति खेती से जुड़े कार्य से सुख की प्राप्ति करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जहाँ कच्चे माल को बनाने या खरीदने-बेचने का कार्य होता हो वहाँ अधिक सफल होते हैं, यदि पाप वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति नकारात्मक चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति दोषों को अपनाकर सुख का अनुभव करते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों को कोई भी निर्णय बहुत सोच समझकर लेना चाहिए।
चतुर्थ भाव में शनि
यदि नीच राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि मकर लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति अधिकांश समय अकेले रहना पसंद करते हैं व इन्हें भूमि और वाहन का उत्तम सुख प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी उच्च पद पर नौकरी करते हैं, यदि नीच नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति बोलते कुछ व करते कुछ हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति वंचक होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति लोगों की मदद कर के सुख को अनुभव करते हैं।
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-
यदि चतुर्थ भाव में मित्र राशि का शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों का कार्यस्थल पर अधिक मन लगता है व ऐसे व्यक्ति परिवार से अधिक अपने कार्य को महत्व देते हैं, यदि शत्रु राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को ठगने से सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे सभी कार्य जिसमें बुद्धि-विवेक द्वारा मुनाफा अधिक कमाया जा सकता है उन सभी कार्यों जैसे मार्केटिंग, बिज़नेस में अधिक सफल होते हैं।
यदि मित्र नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के घरेलू सुख में कुछ तनाव की स्थिति बनी रहती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख अवश्य प्राप्त होता है, शत्रु नवांश का शनि चतुर्थ भाव हो तो ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर धनार्जन करते हैं अब आज के समय में dog cannel खोलना वगैरह इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।
यदि वर्गोत्तम स्थिति का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को हानि पहुँचा कर सुख का अनुभव करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति कुछ इस तरह का कार्य करते हैं जिससे दूसरों को हानि या दुःख पहुँचे उदाहरण के तौर पर जैसे वकालत का कार्य क्योंकि इसमें व्यक्ति अपने पक्ष के व्यक्ति को विजय दिलवाकर उनसे सुख के साधन प्राप्त करता है किंतु उसके इस कृत्य से दूसरे पक्ष को कुछ हानि व दुःख पहुँचता है।
यदि स्वराशिशनि चतुर्थ भाव में हो जो कि तुला व वृश्चिक लग्न की कुंडली में ही संभव है तो व्यक्ति रस पदार्थ बेचकर सुखी होता है कहने का आशय यह है कि ऐसा व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है जिससे दूसरों को सुख की अनुभूति हो साथ ही ऐसे व्यक्तियों भूमि सुख निश्चय ही प्राप्त होता है, यदि तुला लग्न की कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में हो तो अधिक लाभकारी होता है क्योंकि तुला लग्न की कुंडली में राजयोगकारक हो जाता है और दसवीं दृष्टि से लग्न को अपनी उच्च राशि में देखता है अतः तुला लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है व बड़ी सफलता दिलवाता है वहीं वृश्चिक लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों की परिश्रम अधिक करना पड़ेगा क्योंकि शनि तीसरे भाव अर्थात पराक्रम भाव का भी स्वामी होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यधिक परिश्रम कर के जीवन में बड़ी सफलता को प्राप्त करते हैं।
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-
नाड़ी दोष का सच: कुंडली में मृत्यु भय का योग और शास्त्रों में बताए गए अचूक परिहार।
नाड़ी दोष व उसका परिहार
नाड़ी दोष:-
कुंडली मिलान की प्रकिया में अष्ट कूट का मिलान किया है वह अष्ट कूट क्रमशः वर्ण, वश्य, तारा, योनी, ग्रह मैत्री, गण, भकूट और नाड़ी होते हैं इन अष्ट कूटों में प्रत्येक का अपना-अपना महत्व होता है, इस लेख में मैं नाड़ी पर चर्चा करता हूँ क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिसको अधिकतर लोग नजरअंदाज कर देते हैं जब कि नाड़ी न मिलने पर दामपत्य जीवन में अनेक प्रकार के दुष्प्रभाव देखने को मिलते हैं।
ज्योतिष ग्रंथों में नाड़ी तीन प्रकार की बताई गई है जो कि क्रमशः आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी के नाम से जानी जाती है अब प्रश्न यह उठता है कि यह कैसे ज्ञात किया जाए कि किस व्यक्ति का जन्म किस नाड़ी में हुआ है अतः इस पर मैं विस्तार से वर्णन करता हूँ।
हमारे ज्योतिष शास्त्र में कुल 27 नक्षत्र होते हैं और प्रत्येक नाड़ी में 9 नक्षत्र आते हैं जिसका निर्धारण व्यक्ति के जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में स्थित हो उसके आधार पर किया जाता है जिन्हें मैं विस्तार से लिख रहा हूँ।
आदि, मध्य और अंत्य नाड़ी में 27 नक्षत्रों का शास्त्र-सम्मत विभाजन।
१. आदि नाड़ी:-
अश्विनी, आद्रा, पुनर्वसु, उत्तराफाल्गुनी, हस्त, ज्येष्ठा, मूल, शतभिषा और पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर आदि नाड़ी प्राप्त होती है।
२. मध्य नाड़ी:-
भरणी, मृगशिरा, पुष्य, पूर्वाफाल्गुनी, चित्रा, अनुराधा, पूर्वाषाढ़ा, घनिष्ठा और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में जन्म लेने पर मध्य नाड़ी प्राप्त होती है।
३. अंत्य नाड़ी:-
कृतिका, रोहिणी, श्लेषा, मघा, स्वाती, विशाखा, उत्तराषाढ़ा, श्रवण और रेवती नक्षत्र में जन्म लेने पर अंत्य नाड़ी प्राप्त होती है।
नाड़ी दोष के परिहार:-
उक्त नाड़ी विचार में आदि व अंत्य नाड़ी में से कोई एक नाड़ी ही दोनों की हो तो कुछ विद्वानों का मत है कि रज्जूकूट अनुकूल हो, राशिकूट शुभ हो, दोनों का राशि स्वामी एक हो या दोनों राशियों में मैत्री हो तो नाड़ी दोष विशेष अनिष्टकारक नही होता है।
विशेष:-
मध्य नाड़ी एक हो तो पुरुष की मृत्यु तथा आदि अंत्य में स्त्री की मृत्यु होती है।
विशिष्ट नक्षत्रों के संयोग से नाड़ी दोष का कट जाना (दोष परिहार)।
विशाखा, अनुराधा, घनिष्ठा, रेवती, हस्त, स्वाती, आद्रा, पूर्वाभाद्रपद इन 8 नक्षत्रों में से किसी भी नक्षत्र में वर, कन्या या दोनों में से एक का ही जन्म हो तो विवाह शुभ होता है अर्थात नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है।
उत्तराभाद्रपद, रेवती, रोहिणी, विशाखा, आद्रा, श्रवण, पुष्य और मघा इन 8 नक्षत्रों में भी वर व कन्या का जन्म नक्षत्र पड़े तो नाड़ी दोष शांत हो जाता है, भरणी, मृगशिरा, शतभिषा, हस्त, पूर्वाषाढ़ा व श्लेषा इन नक्षत्रों में भी नाड़ी दोष नही रहता है।
वर व कन्या की एक राशि हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हो तो नाड़ी दोष नही होता है, एक नक्षत्र में भी चरण भेद होने पर अत्यावश्यकता में विवाह किया जा सकता है।
कृतिका, रोहिणी, घनिष्ठा, शतभिषा, पुष्य, श्लेषा ये नक्षत्र एक ही राशि में पड़ते हैं, तब भी इन जोड़े नक्षत्रों में यदि वर व कन्या के नक्षत्र हो तो इन्हें छोड़ना चाहिए।
रोहिणी, आद्रा, मघा, विशाखा, पुष्य, श्रवण, रेवती, उत्तराभाद्रपद में से किसी एक नक्षत्र में ही दोनो का जन्म हो तब भी नाड़ी दोष नही रहता, नक्षत्र चरण भेद आवश्यक है।
📌 FAQ: नाड़ी दोष से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: नाड़ी कितने प्रकार की होती है?
उत्तर: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नाड़ी तीन प्रकार की होती है— आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत्य नाड़ी।
प्रश्न 2: नाड़ी दोष कब लगता है?
उत्तर: विवाह के समय कुंडली मिलान (अष्टकूट मिलान) में जब वर और कन्या दोनों की नाड़ी एक ही (समान) होती है, तब नाड़ी दोष लगता है।
प्रश्न 3: क्या एक नाड़ी होने पर विवाह किया जा सकता है?
उत्तर: यदि वर व कन्या की राशि एक हो लेकिन जन्म नक्षत्र अलग हो, या जन्म नक्षत्र एक हों व राशियां भिन्न-भिन्न हों, या नक्षत्र चरण में भेद हो, तो नाड़ी दोष का परिहार हो जाता है और विवाह संभव है।