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सिंह लग्न और आप: जानिए, सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

सिंह लग्न और आप: जानिए, सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व
सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के मुख की आकृति चौड़ी और हड्डी पुष्ट होती है, इनकी आँखे सुंदर और भाव प्रकट करने वाली और आकर्षक होती हैं ऐसे व्यक्ति नेत्रों के इशारे से भी अपनी बातें बड़ी सरलता से प्रकट कर लेते हैं तथा इनका जीवन आनंदमयी रहता है, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों पर शत्रुओं कभी हावी नही हो पाते तथा उनको कोई हानि नही पहुँचा पाते, सिंह लग्न वाले व्यक्ति निष्कपट और मनसा, स्पष्टवादी व पवित्रता का पालन करने वाले होते हैं और नीच कर्म से घृणा करते हैं तथा धैर्यवान और उदार होते हैं किंतु किसी के अधीन रहकर कार्य नही कर सकते इन्हें स्वतंत्रता प्रिय होती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति जिस कार्य को करते हैं उसे पूरी ईमानदारी एयर निपुणता के साथ करते हैं साथ ही अपनी मर्यादा के पालन में सर्वदा तत्पर रहते हैं और मित्रता में अटल तथा विश्वास पात्र होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति केवल दयालु ही नही होते अपितु सत्य की रक्षा के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं तथा दुःख के समय में अपनी सूझ-बूझ को काम में लाकर दुःख का निवारण करने में भी समर्थ होते हैं और शत्रुओं से झगड़ा जल्द नही करते अपितु धैर्य व युक्ति से उनसे मुक्ति पाने हेतु प्रयास भी करते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मेहनत का पूर्ण फल नही मिल पाता है किंतु समाज में अपने गुणों व व्यवहार के कारण से मान-सम्मान की प्राप्ति इन्हें अवश्य ही मिलती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति अपनी आज्ञा तथा रुचि के अनुसार अन्य मनुष्यों को चलाने में कुशल होते हैं तथा एक अच्छे नेता या राजनेता बनकर देश व समाज का कल्याण करने में भी सक्षम होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति या तो स्वम् का व्यवसाय करते हैं या किसी उच्च पद पर आसीन रहकर सेवा करते हैं, जीवन के उत्तरार्ध में इन्हें बड़ी सफलता प्राप्त होती है।

 

सिंह लग्न की यदि कोई महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त दुबली, पतली, कफ प्रकृति से पीड़ित, झगड़ालू, बचपन में शरीर के गुप्त भागों में वाहनादि द्वारा चोट से ग्रसित तथा तर्क में कुशल होती हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के दाम्पत्य जीवन में प्रायः उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को गर्म पदार्थों व मादक पदार्थों का सेवन कभी नही करना चाहिए, उत्तेजना और जल्दबाजी में कार्य करना इनके लिए कष्टप्रद रहता है, प्रायः इन्हें ज्वर आदि की समस्या भी रहती है जिसका सही समय पर औषधि सेवन कर इलाज करना अत्यंत आवश्यक होता है अन्यथा ज्वर की पीड़ा अति कष्टदाई रहती है, सिंह लग्न वालों के लिए मंगल विशेष शुभ ग्रह व राजयोगकारक ग्रह होते हैं, गुरु और मंगल का यदि कुंडली में संबंध बनें तो यह राजयोग समान फल देने वाला होता है, बृहस्पति और शुक्र का संबंध भी इनके लिए शुभ होता है किंतु अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति नही हो पाती है, चन्द्रमा का साधारण फल इन्हें मिलता है जिसके कारण इनके खर्चे अनियंत्रित रहते हैं और इनका मन जल्दी स्थिर नही हो पाता इनके मस्तिष्क में नित्य नए विचार आते रहते हैं, सिंह लग्न वालों के लिए शनि कष्टप्रद और बुध मारकेश होते हैं तथा सूर्य व बुध का संबंध बनाने से कार्य कुशल होते हैं, मंगल और शनि का द्वादश भाव में संबंध बने तो शनि की दशा के अंदर मंगल की अंतर्दशा आने पर इनके वैभव की उन्नति होती है, राहु व केतु यदि मारक भाव में बैठे हों तो अनिष्टकारी अर्थात मृत्युदाई होते हैं, बृहस्पति और शुक्र का संबंध इनके लिए राजयोग नही होता है, यदि सिंह का नवमांश हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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कर्क लग्न: जानिए, कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

कर्क लग्न: जानिए, कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कर्क लग्न में जन्मे व्यक्ति न अधिक लंबे और न अधिक नाटे अर्थात मझोला कद वाले होते हैं इनकी गर्दन मोटी, मुख गोल और शरीर स्थूल अर्थात सामान्यतः मोटा होता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, आनंद और विलास प्रिय, सुंदर वस्तुओं को चाहने वाले, साफ-सफाई पसंद करने वाले, सत्य प्रिय, उत्तम भोजन की चाह रखने वाले, आभूषण आदि में रुचि रखने वाले, मधुर वाणी से सबको मोहित करने वाले, भ्रमण शील, प्रभावशाली, यशस्वी कर्तव्य परायण और श्रेष्ठ जन अर्थात गुरु तथा धार्मिक पुरुषों के प्रति भक्ति भाव रखने वाले होते हैं, कर्क लग्न वालों प्रायः आडंबर युक्त अर्थात ठाट-बाट वाला रहन-सहन पसंद होता है और यह धार्मिक होते हुए भी कपटी होने में रुचि रखते हैं तथा सिद्धांत रहित होते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में अस्थिरता बनी ही रहती है कहने का आशय यह है कि कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में उतार-चढ़ाव बना ही रहता है तथा यह जितनी तीव्रता से शिखर पर पहुँचते हैं उतनी ही तीव्रता से इनका पतन भी हो जाता है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों का मन अस्थिर रहता है तथा इन्हें सर्दी-जुकाम, कफ, ज्वर, मलेरिया, उदर संबंधित विकार अर्थात पाकस्थली के बिगड़ने से समस्या, अपच आदि की समस्या प्रायः बनी रहती है तथा कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर समस्या पर औषधि तुरंत लेना पसंद करते हैं जिसकी अधिक मात्रा से भी इनके उदर के किडनी में समस्या संभव होती है अतः कर्क लग्न वालों को अत्यधिक औषधि की अपेक्षा घरेलू उपचार पर अधिक ध्यान देना चाहिए, कर्क लग्न वाकई व्यक्ति अपने जीवनसाथी व संतानों से अत्यधिक प्रेम करते हैं तथा कभी-कभी इनका प्रेम इतना अधिक होने लगता है कि इनकी संतान व जीवनसाथी को उलझन अनुभव होती है जिस कारण से इनके घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने लगती है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो वह प्रत्येक बात पर टोक लगाने वाली होती है किंतु ऐसी महिला सुंदरी, शीलवती, विश्वसनीय, शांतिमयी, प्रभावशालिनी, अपने स्वजनों से अत्यधिक प्रेम करने वाली, सुखमयी और बहु संतान वाली होती हैं।

 

कर्क लग्न वाले व्यक्ति स्त्री सहवास में समर्थ तथा मिष्ठान प्रिय होते हैं और इनमें कामुकता अधिक रहती है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के मन में अपने सगे संबंधियों के प्रति सद्द्भाव रहता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति जिन्हें चाहते हैं उन्ही की बातों को तवज्जो देते हैं तथा जिसकी बात उनको नही पसंद आती है उसकी बात का अनुसरण नही करते हैं और उसके परामर्श को घृणा की दृष्टि से देखते है तथा उन व्यक्तियों पर अविश्वास रखते हैं केवल इतना ही नही अपितु ऐसे व्यक्तियों की संगति का भी परित्याग कर देते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर विषय की उपयोगिता और मोल का अनुमान उचित रीति से करने में निपुण होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः (कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुसार) प्रवासी रहते हैं परंतु गृह में रहने के इच्छुक होते हैं।

 

कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के लिए मंगल सबसे उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है जो कि इस कुंडली का राजयोगकारक ग्रह भी होता है और यदि व्यक्ति की कुंडली में मंगल पंचम, नवम या दशम भाव में हो तो यह राजयोग के समान फल देने वाली स्थितियों को निर्मित करता है, बृहस्पति भी कर्क लग्न वालों के लिए शुभ होता है तथा बृहस्पति यदि लग्न या नवम में हो तो बहुत शुभ देता है साथ ही यदि कुंडली में मंगल व गुरु में संबंध बने तो यह स्थिति व्यक्ति को उत्तम राजयोग देती है, शुक्र, शनि व बुध कर्क लग्न वालों के लिए बेहद अशुभ ग्रह होते हैं, सूर्य मारक भाव का स्वामी अर्थात मारकेश होकर भी मृत्यु नही देता है, चंद्रमा लग्नेश होने के नाते शुभ होता है तथा यदि लग्न में गुरु व चंद्र स्थित हों तो व्यक्ति अत्यंत धनी व अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करने वाला होता है, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति प्राकृतिक स्वभाव को पूर्ण रूप से दिखाता है।

 

जय श्री राम।

 

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मिथुन लग्न और आप: जानिए, मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व

मिथुन लग्न और आप: जानिए, मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व
मिथुन लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

मिथुन लग्न के व्यक्तियों के हाथ-पैर लंबे व दुबले और नेत्र सुंदर होते हैं जिनके चेहरे से तीक्ष्णता और प्रसन्नता व्यक्त होती रहती है, ऐसे व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि वाले, उत्तम वक्ता, अत्यंत मेहनती, वार्तालाप में कुशल, प्रत्येक बात की छान-बीन करने वाले, सुगमता से समझने वाले, बातों का मर्म व तत्व समझने वाले, कला व कौशल प्रेमी, बहस करने में निपुण व अपने तर्क रखने में कुशल, किसी कार्य में ज्यादा समय तक स्थिर न रहने वाले, कठिन से कठिन विषयों की व्याख्या सुगमता पूर्वक और स्पष्ट रूप से करने वाले, योग्यतापूर्ण लेख लिखने वाले, वाद-विवाद में निपुण, बुद्धिमान, चतुर कार्य कुशल, क्रोधी, कला तथा विज्ञान के प्रति रुचि रखने वाले, असंयमी तथा अधीर होने के कारण अस्वस्थ रहने वाले, कमजोर मनोबल वाले, संबंधियों से सहायता प्राप्त करने वाले व कई भाषाओं के जानकार होते हैं, बात-चीत में मुहावरे व कहावत आदि का प्रयोग करने वाले, कविताएं एवं शायरी करने वाले, गम्भीरता पूर्वक विचार करने वाले, तर्क में चतुर, दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने वाले और नृत्य व संगीत में आनंद लेने वाले होते हैं।

 

मिथुन लग्न वाले व्यक्ति धनी, दूसरों पर अपना प्रभाव छोड़ने वाले, परिवर्तन पसंद करने वाले, अच्छे व्यापारी, अच्छे ज्योतिषी, अपनी किस्मत स्वम् लिखने वाले, मित्र व संबंधियों की सहायता से भाग्योदय प्राप्त करने वाले, आत्मविश्वास की कमी के कारण चिंताग्रस्त रहने वाले, रोगपीडित, धन लोभी, लड़ाकू, स्त्री सुख भोगी, गुरुजनों के आज्ञापालक, ब्राह्मणों के सेवक, चुगलखोर, परदेश अथवा विदेश से धनार्जन करने वाले, कुटिल स्त्रियों के कारण या मित्रों पर धन व्यय करने वाले, सज्जनता व दुर्जनता दोनो का समन्वय रखने वाले, दांव-पेंच में निपुण, विरोधियों को षड्यंत्र से शांत रखने वाले, सामने से वार न करने वाले, सौंदर्य उपासक, विपरीत लिंग के प्रति विशेष आकर्षण रखने वाले, हमेशा कार्य को 2 प्रकार से करने का प्रयास करने वाले होते हैं तथ इनके मन में विचारों की अस्थिरता रहती है, यदि मिथुन लग्न की कन्या हो तो उपरोक्त फल के अतिरिक्त कठोर बात करने वाली, स्वभाव की कड़ी, अतिव्ययी अर्थात खर्चीले स्वभाव वाली और वायु तथा कफ प्रकृति से पीड़ित रहने वाली होती है, मिथुन लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः फेफड़े व स्नायु रोग की संभावना रावल रहती है अतः इनको उत्तेजना देने वाली क्रियाओं से बचना चाहिए साथ ही समयानुसार स्वम् को बदलना, बातों से पलट जाना इनका विशेष गुड़ होता है।

 

मिथुन लग्न वालों के लिए शुक्र सबसे शुभ ग्रह होता है, चन्द्रमाA, सूर्य व मंगल इनके लिए अशुभ ग्रह रहता है, शुक्र व बुध का संबंध यदि कुंडली में हो तो उत्तम भाग्योदय होता है, शनि व गुरु का संबंध होना अनिष्टकारी रहता है, यदि केतु के दूसरे, सप्तम अथवा द्वादश भाव में चंद्रमा के साथ हो तो केतु की दशा में चंद्र की अंतर्दशा मृत्यु अथवा मृत्यु तुल्य कष्ट अवश्य ही देती है ठीक इसी प्रकार यदि राहु द्वितीय भाव में गुरु के साथ हो तो राहु की दशा में गुरु की अंतर्दशा अनिष्ट करती है किंतु यदि सूर्य और बुध तृतीय भाव में हों तो बुध की दशा में सूर्य की अंतर्दशा शुभ फलदाई होती है, यदि चन्द्रमा द्वितीय स्थान में हो तो शुक्र की दशा में भाग्योन्नति होती है, राहु की दशा में रोग और बन्धनादि का भय रहता है किंतु मृत्यु नही होती है।

 

जय श्री राम।

 

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वृषभ लग्न और आप: जानिए, वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

वृषभ लग्न और आप: जानिए, वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व
वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृषभ लग्न वाले व्यक्ति तीव्र इच्छा शक्ति वाले, स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले, प्रकृति प्रेमी, प्रेम में विश्वास रखने वाले, विश्वसनीय, गोल मुख, छोटी गर्दन किंतु मोटी और पुष्ट जंघा वाले होते हैं साथ ही इनके चेहरे पर छोटी सी मुस्कान सदैव ही बनी रहती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्ति प्रायः दुबले होते हैं तथा इनके कंधे बलिष्ठ और उन्नत एवं बाहु छोटे एवं गठीले होते हैं, इनके चेहरे से सदैव ही प्रसन्नता का आभास होता है, वृषभ लग्न के व्यक्ति संगीत, मनोहर वस्तु और भ्रमण अर्थात घूमने-फिरने के प्रेमी होते है तथा इनका स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा किंतु शांति प्रिय, अत्यंत कामी, धीर, बड़े से बड़े दुःख में भी धैर्य रखने वाले, दयालु, धर्मानुरागी, कलात्मक दृष्टि वाले तथा कलात्मक वस्तुओं का संग्रह करने वाले और प्रत्येक बात में अपना विचार व्यक्त करने वाले होते हैं, दूसरों के परामर्श पर चलना इन्हें नही रास आता, ऐसे व्यक्ति सदाशय, विद्या विवाद में चतुर, भाग्यवान, चतुराई में निपुण, विद्वान, विभिन्न मंत्रों को जानने वाले, देवता व ब्राह्मण भक्त, भौतिक सुखों का इच्छुक, स्वादिष्ट भोजन करने वाले, अधिकांश खाली बैठे रहने वाले किंतु इनको कोई कार्य मिल जाए तो उसे पूर्ण किए बिना न रुकने वाले, शांत चित्त वाले किंतु क्रोध में तहस-नहस कर देने वाले, शत्रु विजयी, जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं और यदि वृषभ लग्न की स्त्रियां अच्छी पत्नी सिद्ध होती है तथा घर को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम और अनुशासित होती हैं।

 

वृषभ लग्न के व्यक्ति चित्त के बड़े गंभीर होते हैं तथा दूसरों को अपने विचार ज्ञात नही होने देते हैं साथ ही वृषभ लग्न के व्यक्ति उतावलेपन में कभी कोई कार्य नही करते हैं तथा शांतिमय जीवन को जीने में विश्वास रखते हैं, इनके मित्रों की संख्या काफी अधिक होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों का भाग्य अचानक से होता है तथा इन्हें भूमि, वाहन व वायुयान यात्रा का उत्तम सुख प्राप्त होता है, वृषभ लग्न के व्यक्तियों का बचपन अनेक यातनाओं व पीड़ाओं से युक्त किंतु उत्तरार्ध में सभी समस्याओं व संकटों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति व सुख को प्राप्त करते हैं, वृषभ लग्न के व्यक्ति अपने कष्टों को छिपाने में निपुण तथा गृहस्थी का खर्च चलाने हेतु कोल्हू के बैल की भांति दिन-रात कार्य में जुटे रहते हैं साथ ही यदि किसी महिला का वृषभ लग्न हो तो वह बुद्धिमती, विदुषी, सुशीला, विश्वसनीय और कला कौशल को जानने वाली होती है और अपने पुरुष की आज्ञाकारिणी होकर पुरुष पर अपना अधिकार जताने वाली होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः कंठ, गले, छाती, मुख, उदर आदि की समस्या रहती है तथा उत्तेजक भोजन इनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अतः वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को नित्य व्यायाम व सादे भोजन को करना लाभप्रद रहता है।

 

वृषभ लग्न वालों के लिए शनि बहुत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होता है तथा यही शनि 36 वर्ष की आयु के आस-पास कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव के साथ या अत्यंत संघर्ष उपरांत बड़ी उन्नति प्रदान करने वाला ग्रह होता है इसी प्रकार सूर्य भी इनके लिए शुभ ग्रह होता है, मंगल, चंद्र और गुरु इनके लिए अशुभ ग्रह अर्थात मारकेश होते हैं, वृषभ लग्न वालों की कुंडली में यदि सूर्य व बुध या शनि व बुध का संबंध हो तो यह राजयोग समान सुख प्रदान करने वाला योग होता है, यदि नवमांश के पंचम भाव में वृषभ राशि हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव विशेष रूप से प्रकट होता है।

 

जय श्री राम।

 

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वक्री शनि 27 मई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के फल

वक्री शनि 27 मई 2021 जानें विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के फल

 

शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव
शनि के वक्री अवस्था में गोचर से विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

“ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसारकर्म व न्याय के देवता शनि 27 मई 2021 गुरुवार को दिन के ०७:०९ पर मकर राशिश्रवण नक्षत्र के द्वितीय चरण में वक्री हो जाएंगे तथा 29 सितंबर 2021 को रात्रि के ०१:२६ पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में मार्गी हो जाएंगे, शनि न्याय, नियम, कर्मादि के ग्रह हैं जिनके वक्री होने से विभिन्न राशियों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ेगा तो चलिए जानते हैं विभिन्न राशियों पर वक्री शनि के गोचर से क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शनि दशम व एकादश भाव के स्वामी होकर दशम भाव से ही वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस दौरान कार्यक्षेत्र में कुछ अड़चनें आ सकती है, कार्यक्षेत्र में मन लगाकर दैनिक नियमों का पालन करते हुए कार्य करें, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, सामाजिक कार्यों को पूर्ण निष्ठा से करें, छोटी यात्राओं के योग बनेंगे जो कि अनिष्टकारी सिद्ध होंगी अतः यात्राओं को टालने का प्रयास करें, विद्यार्थियों के लिए यह समय काफी अच्छा रहने वाला है, नियमों का पालन करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शनि नवम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर भाग्य स्थान से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे शनि विरक्ति का ग्रह है अतः इस दौरान धर्म-कर्म के क्षेत्र में मन में भटकाव रहेगा अतः पूजा-पाठ व जप-तप-दान आदि पूर्णतया नियम से करें, मन को एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, कार्यक्षेत्र के लिए शनि का वक्री अवस्था से गोचर शुभफलदाई रहेगा, दाम्पत्य जीवन में चले आ रहे विवाद खत्म होंगे, यदि आप पहले से घर लेने का सोच रहे हैं तो यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शनि अष्टम व नवम भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः सेहत का विशेष ख्याल रखें, कुछ देर ध्यान करें जिससे मन शांत रहेगा, भोजन आदि का विशेष ख्याल रखें, पशु-वाहन व हथियार से सावधानी बरतें, छोटे भाई-बहन व मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, कार्यक्षेत्र के लिहाज से शनि का वक्री अवस्था में गोचर मिला-जुला फल देगा, धर्म-कर्म व भाग्य में वृद्धि होगी, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी जिस कारण से कुछ तनाव रह सकता है अतः तनाव लेने से बचें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शनि सप्तम व अष्टम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है अतः जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें, दाम्पत्य जीवन की मर्यादाओं का पालन करें, इस दौरान आपको जीवनसाथी से सहयोग प्राप्त होता रहेगा, पैतृक संपत्ति प्राप्त होने या अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आप किसी नए कार्य का आरंभ करना चाहते हैं तो आपके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शनि षष्ठ व सप्तम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से आप जीवनसाथी के वशीभूत हो सकते हैं कहने का आशय यह है कि इस दौरान आपके जीवनसाथी आप पर हावी होने का प्रयास करेंगे, यदि आपके कोर्ट-कचहरी में कोई मुकदमा चल रहा है तो यह समय आपके लिए अशुभ रहने वाला है, स्वास्थ्य के लिहाज से आपके लिए यह अच्छा समय रहेगा, जो लोग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं उनको अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शनि पंचम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे जिस कारण से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे व्यक्तियों को और अधिक अत्यधिक प्रयास करना चाहिए क्योंकि आपका इसी समय के प्रयासों का आपको निकट भविष्य में शुभ फल की प्राप्ति कराएगा, प्रेमयों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन अप्रसन्न रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें विशेषतः उदर संबंधित जैसे अपच आदि की समस्या हो सकती है, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होने के कारण से आर्थिक स्थिति में उतार-चढ़ाव रहने के योग हैं, विद्यार्थियों के लिए यह समय बहुत ही शुभ रहने वाला है।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शनि चतुर्थ व पंचम के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर चतुर्थ भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे साथ ही लग्न को अपनी उच्च राशि तुला में देखने के कारण से यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा आपका स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, किसी संपत्ति को क्रय करने का विचार बना रहे हैं तो इस समय में खरीदना आपके लिए शुभ रहेगा, पारिवारिक निर्णयों को लेते वक्त थोड़ा सतर्क रहें, माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए इस समय बेहद शुभ रहेगा, आय वृद्धि के योग बनेंगे।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि तृतीय व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा स्थान परिवर्तन व नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, यदि आप कोई संपत्ति खरीदना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए शुभ रहेगा, आय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, शनि के मार्गी अवस्था में पुनः आने पर ही कार्यक्षेत्र में बदलाव करना शुभ रहेगा, छोटे भाई-बहन का ख्याल रखें, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वाले व्यक्तियों के लिए शनि द्वितीय व तृतीय भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः यह वक्री गोचर काल आपके लिए शुभ रहेगा नए मित्र बनेंगे व नए मित्रों से लाभ भी होगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग आपको प्राप्त होगा, आय के साथ व्यय में भी वृद्धि होगी, आध्यात्मिक उन्नति के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में बदलाव करने का सोच रहे हैं तो शनि के मार्गी होने तक रुक जाएं।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शनि प्रथम तथा द्वितीय भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः इस वक्री गोचर काल आपको सेहत का विशेष ख्याल रखना चाहिए, दैनिक दिनचर्या का पालन करें, मिर्च-मसले वाले व्यंजनों से परहेज करें, कार्यक्षेत्र में अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, अहंकार करने से बचें, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें अन्यथा दाम्पत्य जीवन में कलह-क्लेश की स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, पैतृक संपत्ति मिलने के योग बनेंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शमी प्रथम व द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे कारण वश व्यय में वृद्धि होगी, दान (सरसों तेल व काली उर्द) करें लाभ होगा, धर्म-कर्म से मन हटेगा अतः धर्म-कर्म के प्रति समर्पित रहें, आध्यात्म की ओर झुकाव रहेगा, स्वास्थ्य में पहले से बेहतर अनुभव करेंगे किंतु स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, कार्यक्षेत्र में बदलाव संभव है।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शनि एकादश व द्वादश भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे अतः आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, आपका धन आपके कार्य की वृद्धि में व्यय हो सकता है, मान-सम्मान व ख्याति में वृद्धि होगी, स्थान परिवर्तन करना बेहद शुभ रहेगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें, मन एकाग्र करने हेतु कुछ देर ध्यान करें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह वक्री गोचर काल बेहद शुभ रहेगा, विद्यार्थियों के लिए यह समय मिला-जुला रहेगा, संतान को कष्ट संभव है, संतान को समझने का प्रयास करें अन्यथा तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी।

 

जय श्री राम।

 

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तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

तुला राशि: जानिए, तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
तुला राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

तुला राशि वाले व्यक्ति देवताओं और ब्राह्मणों के भक्त किंतु चंचल स्वभाव और कृश शरीर वाले होते हैं, ऐसे व्यक्तियों का कद सामान्यतः लंबा होता है तथा ऐसे व्यक्ति खरीद-फरोख्त में होशियार, धैर्यवान, इंसाफ पसंद करने वाले तथा प्रायः दो नाम वाले होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्ति घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं, इनकी संतान प्रायः कम ही होती है साथ ही तुला राशि वालों का भाग्योदय कुछ विलंब के साथ होता है, तुला राशि वाले व्यक्ति भोगी, धार्मिक, चतुर, बुद्धिमान, कला में कुशल, राजा प्रिय, पितृ सेवी, वस्तुओं का संग्रह करने वाले, विद्वान, धनी, अत्यंत बोलने वाले, मित्रों से युक्त, संगीत, कविता व युद्ध के प्रेमी, सभा-सोसाइटी और कंपनी इत्यादि में रुचि रखने वाले, अपने जीवन के प्रत्येक कार्य में अन्य किसी पर भरोसा रखने वाले, लंबे कद वाले, बलवान, उन्नत नासिका वाले और वायु प्रकृति से पीड़ित होते हैं, तुला राशि वाले व्यक्तियों को सर, उदर एवं चर्म रोग संभव रहता है साथ ही इन्हें जल भय भी रहता है, तुला राशि वाले व्यक्ति स्त्री के अधीन, बहु स्त्री भोगी अर्थात दो विवाह करने वाले, कृषि करने में चतुर तथा क्रय-विक्रय से लाभ प्राप्त करने वाले होते हैं।

 

तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए १, ३, ५, ६, १५, २५, २६, ३६, ४६ व ५६ वां वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में ज्वर, तृतीय वर्ष में अग्नि भय, वें वर्ष में ज्वर पीड़ा, १५ वें वर्ष में सामान्य पीड़ा और २५ वें वर्ष में अधिक पीड़ा रहती है, यदि चंद्रमा को शुभ ग्रह देखते हैं और आयु सुख को करने वाले अन्य योग न बनते हो और उपर्युक्त बताए गए वर्षों को पार कर लें तो ८५ वर्ष की औसत आयु प्राप्त करते हैं कुछ ग्रंथकारों के अनुसार तुला राशि वाले व्यक्तियों की आयु ६५ वर्ष ११ माह की होती है तथा इन्हें मृत्यु उपरांत ख्याति अवश्य ही मिलती है, तुला राशि वाले व्यक्तियों के लिए चतुर्थी, नवमी व चतुर्दशी तिथि अनिष्टकारी होती है तथा मिथुन, कन्या, मकर और कुंभ राशि वालों से मित्रता एवं कर्क व सिंह राशि वालों से शत्रुता रहती है, रत्नों में इनके लिए हीरा शुभदायी होता है, वैशाख मास, शुक्ल पक्ष, अष्टमी तिथि, शुक्रवार व आश्लेषा नक्षत्र और दिन का प्रथम प्रहर इनके लिए अनिष्टकारी होता है।

 

जय श्री राम।

 

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सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

सिंह राशि: जानिए, सिंह राशि वाले व्यक्तियों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों से जुड़ी मुख्य बातें

 

सिंह राशि वाले व्यक्तियों की चेहरा कुछ बड़ा और ठोड़ी कुछ मोटी होती है, ऐसे व्यक्ति अभिमानी, पराक्रमी, स्थिर बुद्धि वाले और अपनी माता के विशेष प्यारे होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति वनों और पहाड़ों वाले जगहों पर घूमने के शौंकीन होते है साथ ही इनमें क्रोध की अधिकता रहती है, सिंह राशि वाले व्यक्ति धन-धान्य से युक्त, लक्ष्मीवान, विद्वान, सभी कलाओं में निपुण, अहंकारी, निष्ठुर, सत्यवादी, विदेश यात्रा पसंद करने वाले, शत्रु पर विजय प्राप्त करने वाले, तीक्ष्ण स्वभाव, उदार, मानसिक दुःख से पीड़ित, बुद्धिमान, निष्कपट, माता के प्रेमी, वस्त्र व सुगंधित द्रव्यों में रुचि रखने वाले, कला, संगीत व चित्र प्रेमी, उच्च पद प्राप्ति हेतु प्रयत्नशील रहने वाले, किसी की अधीनता जल्द न स्वीकार करने वाले और कभी-कभी कुंडली में ग्रहों द्वारा चतुर्थ भाव को पीड़ित करने की अवस्था में बाल्यकाल में दो स्त्रियों द्वारा दुग्धपान कराए जाने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्ति शरीर से पुष्ट, पीठ पर तिल या मस्से से युक्त चिन्ह, पेट के वाम भाग में वात रोग, सर, दंत, गला एवं उदर रोग से पीड़ित, भूख-प्यास और मानसिक व्यथा से पीड़ित, स्त्रियों से शत्रुता व अनबन रखने वाले होते हैं, सिंह राशि वाले व्यक्तियों की संतान प्रायः कम होती है, चोर के माध्यम से सिंह राशि वालों को नुकसान उठाना पड़ता है तथा अग्नि से भय रहता है।

 

सिंह राशि वालों के लिए १, ५, ७, २०, २१, २८, ३० और ३२ वर्ष अनिष्टकारी होता है प्रथम वर्ष में प्रेत-पिशाच आदि बाधा से पीड़ा, पाँचवें वर्ष में अग्नि भय, सातवें वर्ष में ज्वर पीड़ा एवं विसूचिका रोग, २० वें वर्ष में सर्प भय, २१ वें वर्ष में पीड़ा, २८ वें वर्ष में अपवाद और ३२ वें वर्ष में पीड़ा होती है, यदि अष्टम, तृतीय, लग्न पर आशुभ ग्रहों का प्रभाव न हो और शनि या चंद्रमा या शुक्र में से कोई एक या दो या तीनों तृतीय व अष्टम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति की औसत आयु ८७ वर्ष तक रहती है वहीं कुछ ग्रंथकारों ने बताया है कि ऐसी स्थिति में व्यक्ति की आयु १०० से ११७ वर्ष तक होती है, सिंह राशि वालों के लिए तृतीया, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि अशुभ होती है, रविवार किसी भी कार्य के आरंभ हेतु शुभ होता है, मेष, मिथुन, कर्क, कन्या, वृश्चिक, धनु और मीन राशि वाले व्यक्ति सिंह राशि वालों के लिए शुभचिंतक व सहयोगी अर्थात अच्छे मित्र होते हैं किंतु तुला, मकर और कुंभ राशि वाले व्यक्तियों से प्रायः इनकी शत्रुता रहती है, फाल्गुन मास, कृष्ण पक्ष, तृतीया, पंचमी, अष्टमी और त्रयोदशी तिथि, मंगलवार, दोपहर का समय सिंह राशि वालों के लिए अनिष्टकारी रहता है साथ ही सिंह राशि वाले व्यक्तियों को जल से भी मृत्यु भय होता है।

 

जय श्री राम।

 

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कोरोना और ज्योतिष जानिए ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

कोरोना और ज्योतिष जानिए ज्योतिषीय आकलन के अनुसार कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

भाग:-१

 

कोरोना और ज्योतिष: जानिए, कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति
कोरोना और ज्योतिष: जानिए, कब मिलेगी कोरोना से मुक्ति

 

कोरोना एक ऐसी महामारी जिसने सिर्फ भारत ही नही अपितु पूरे विश्व में त्राहि-त्राहि मचा रखी है अनगिनत लोग इस महामारी के प्रभाव में आकर असमय ही काल के मुख में समा रहे हैं इस महामारी को लेकर हमारे पंचांगों ने पूर्व में ही सतर्क किया था कि “इस वर्ष (२०१९-२०२०) में विषाणु जनित महामारी का प्रकोप रहेगा।” किंतु यह महामारी इतनी भयानक होगी यह किसी ने नही सोचा था ३ मई २०२१ को प्रातः १० बजकर २१ मिनट पर मुझसे कई वर्षों से जुड़े एक सदस्य के मन में यह जिज्ञासा उत्पन्न हुई कि इस महामारी का अंत कब होगा और कब हम इन परिस्थितियों से बाहर आ सकेंगे तो उस समय के आधान लग्न व आजाद भारत की कुंडली की विवेचना करने का एक प्रयास करता हूँ।

 

इस विवेचना को लिखने से पूर्व सर्वप्रथम मैं अपने इष्ट व अपने आराध्य जिन्हें मैं अपने गुरु रूप में भी पूजता हूँ उनके (श्री हनुमान जी व बाबा महादेव) चरण कमलों में नमन करता हूँ व इस महामारी से मुक्ति की प्राथना करता हूँ और साथ ही यह प्राथना करता हूँ कि मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि बनाएं जिससे मैं इस महामारी पर सही विवेचना कर सकूँ🙏🏻

प्रश्न कुंडली से फलकथन:-

 

प्रश्न लग्न कुंडली
प्रश्न लग्न कुंडली

 

३ मई २०२१ को प्रातः १०:२१पर कर्क लग्न जो कि चर लग्न है प्राप्त होता है जिनके स्वामी अर्थात लग्नेश चंद्रमा सप्तम भाव जिसे मारक स्थान भी कहते हैं वहाँ शनि के साथ स्थित होकर विष योग का सृजन कर रहे हैं साथ ही मंगल व राहु से दृष्ट भी हैं अतः इस वर्ष भी कोरोना महामारी को लेकर मन में तनाव, भय का संचार होता रहेगा चूँकि कर्क लग्न की कुंडली में मंगल राजयोगकारक हो जाता है अतः मंगल का सप्तम भाव को अपनी उच्च राशि मकर में देखने के कारण से भारत तकनीकी क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ेगा हालांकि बात कोरोना महामारी की हो रही है तो मंगल व राहु की दृष्टि सप्तम भाव पर आने से मारक स्थान पर एक साथ चार अशुभ योगों (शनि-चंद्र से विष योग, राहु-शनि से पिशाच योग, शनि-मंगल से द्वंद योग व राहु-चंद्र से ग्रहण योग) का बनना विपत्तियों व संघर्षों का सूचक है अतः इस वर्ष भारत को कोरोना महामारी के साथ-साथ अन्य बीमारियों व अनेक प्रकार की विपत्तियों जैसे आतंकवादी घटनाएं, भूकम्प, आग से जान-माल की हानि, तूफान आदि का सामना निकट भविष्य में करना पड़ सकता है हालांकि गुरु भाग्येश होकर अष्टम भाव में बैठे हैं तो यह कुछ हद तक विपरीत परिस्थितियों में कड़े संघर्ष व कुछ कठोर नियमों के साथ राहत प्रदान करने के योग बनाएंगे किंतु कर्क लग्न की कुंडली में गुरु षष्ठेश भी होते हैं अतः गुरु का अष्टम में होना लोगों को स्वास्थ्य जनित समस्याएं देता रहेगा, धन भाव का स्वामी सूर्य दशम भाव में दिग्बली होकर अपनी उच्च राशि मेष में अस्त ग्रह शुक्र के साथ बैठे हैं और चतुर्थ भाव में नीचभंग राजयोग बनने के कारण से भारत दवा व वैक्सीन के क्षेत्र में काफी तेजी से आगे बढ़ेगा और भारत के आर्थिक दृष्टिकोण से भी यह स्थिति शुभ रहेगी जिससे भारत की GDP में पिछले वर्ष की तुलना में कुछ वृद्धि होगी चंद्रमा का श्रवण नक्षत्र के प्रथम चरण से गोचर होने के कारण व वर्तमान में चन्द्र में मंगल की अंतर्दशा होने के कारण से अभी इस बीमारी से बड़ी राहत मिलती नही दिख रही है वर्तमान में १ मार्च २०२१ से १७ अगस्त २०२१ तक गोचर में राहु का प्रभाव काफी अधिक रहने वाला है जिस कारण से इन समय में कोरोना महामारी में अप्रत्याशित वृद्धि होती रहेगी हालांकि अन्य ग्रहों का गोचर में संचार बीच-बीच में ठीक होते रहने के कारण से लोग तेजी से स्वस्थ होते रहेंगे, अगस्त के मध्य भाग में राहु का प्रभाव गोचर में कम होने से कोरोना महामारी में कुछ कमी देखने को मिलेगी किंतु जल्द ही अर्थात १७ अक्टूबर २०२१ की रात्रि के ३ बजकर २७ मिनट पर सूर्य अपनी नीच राशि तुला से गोचर करेंगे व १८ अक्टूबर २०२१ को शुक्र दिन में ७ बजकर ४० मिनट से ज्येष्ठा नक्षत्र और शनि मार्गी अवस्था में उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण से गोचर करेंगे उस समय शुक्र व केतु की युति पुनः कोरोना वृद्धि का सूचक रहेगी जिसमें कोरोना में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिलेगी जिसे संसार कोरोना की तीसरी लहर के नाम से जानेगा।

 

निष्कर्ष:-

 

१३ फरवरी २०२२ को सूर्य दिन में ७ बजकर ३३ मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेंगे तब कोरोना महामारी में कुछ राहत अनुभव होगी हालांकि बीच-बीच में गोचर में ग्रहों की स्थिति ठीक होने पर कोरोना महामारी में कुछ अप्रत्याशित कमी भी देखने को मिल सकती है किंतु १३ फरवरी २०२२ से पूर्व इससे पूर्णतया लाभ मिलता नही दिख रहा है।

 

आर्टिकल की लंबाई को ध्यान में रखते हुए आजाद भारत की कुंडली से कोरोना महामारी पर विवेचना अपने अगले आर्टिकल में प्रकाशित करूँगा।

 

जय श्री राम।

 

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होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या भाग-१

होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या भाग-१

 

होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम व मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या
होरा शास्त्र में द्वादश भावों की धर्म अर्थ काम व मोक्ष के अनुरूप संक्षिप्त व्याख्या

 

जैसा कि आप सब जानते हैं कि प्रत्येक कुंडली मे १२ भाव होते हैं और यदि इन भावों को तीन-तीन के समूह में चार भागों में बाँटा जाए तो विभाजन निम्न प्रकार से होता है:-

 

१. धर्म त्रिकोण भाव:-  प्रथम, पंचम व नवम भाव को धर्म त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

२. अर्थ त्रिकोण भाव:-  द्वितीय, षष्ठ व दशम भाव को अर्थ त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

३. काम त्रिकोण भाव:-  तृतीय, सप्तम व एकादश भाव को काम त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

४. मोक्ष त्रिकोण भाव:-  चतुर्थ, अष्टम व द्वादश भाव को मोक्ष त्रिकोण भाव कहते हैं।

 

इन स्थानों पर जो ग्रह तथा नक्षत्र होंगे वह अपने स्वभावानुसार उस व्यक्ति के कर्मों की गति स्पष्ट करते हैं उदाहरणार्थ:- यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में अशुभ या पापी ग्रह, अर्थ व काम अर्थात इच्छाओं के स्थान में बैठे हैं तो उस व्यक्ति की इच्छायें व प्रवृत्ति उसी तरफ अधिक होंगी और उसकी इच्छाएँ व अर्थ रूपये-पैसे संबंधी कार्य उसी समय पूरे होंगे जब उस कुण्डली की गणना के अनुसार उन ग्रहों का समय आयेगा वहीं दूसरी ओर, यदि कोई व्यक्ति धर्म व मोक्ष की प्राप्ति चाहता है, तो उसकी कुण्डली की कुंडली मे शुभ ग्रह धर्म व मोक्ष वाले स्थानों में अवश्य ही बैठे होंगें।

 

कुंडली के धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली के धर्म त्रिकोण भाव

 

अब कुंडली के प्रत्येक भावों का विश्लेषण उपरोक्त प्रकार से करते हैं, जैसा कि आप सब जानते हैं कि  इस संसार मे धर्म ही प्रधान है व्यक्ति धर्म का समुचित पालन करके ही जीवन के अंतिम उद्देश्य मोक्ष तक पहुँच सकता है
इस कारण से ही किसी भी कुंडली मे 1, 5, 9 स्थान को मूल त्रिकोण की संज्ञा दी गई है अतएव सर्वप्रथम धर्म भावों के बारे में विस्तार से जानते हैं:-

 

लग्न स्थान प्रथम धर्म त्रिकोण भाव:-

 

कुंडली का प्रथम धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली का प्रथम धर्म त्रिकोण भाव

 

इस भाव से व्यक्ति की शरीर पुष्टि, वात-पित्त-कफ प्रकृति, त्वचा का रंग, यश-अपयश, पूर्वज, सुख-दुख, आत्मविश्वास, अहंकार, मानसिकता आदि को जाना जाता है इससे हमें शारीरिक आकृति, स्वभाव, वर्ण चिन्ह, व्यक्तित्व, चरित्र, मुख, गुण व अवगुण, प्रारंभिक जीवन विचार, यश, सुख-दुख, नेतृत्व शक्ति, व्यक्तित्व, मुख का ऊपरी भाग, के संबंध में ज्ञान मिलता है।

पंचम भाव द्वितीय त्रिकोण भाव:-

 

कुंडली का द्वितीय धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली का द्वितीय धर्म त्रिकोण भाव

 

इस भाव से संतति, बच्चों से मिलने वाला सुख, विद्या बुद्धि, उच्च शिक्षा, विनय-देशभक्ति, पाचन शक्ति, कला, रहस्य शास्त्रों की रुचि, अचानक धन-लाभ, प्रेम संबंधों में यशनौकरी परिवर्तन आदि का विचार किया जाता है इससे हमें विद्या, विवेक, लेखन, मनोरंजन, संतान, मंत्र-तंत्र, प्रेम, सट्टा, लॉटरी, अकस्मात धन लाभ, पूर्वजन्म, गर्भाशय, मूत्राशय, पीठ, प्रशासकीय क्षमता, आय जानी जाती है।

नवम भाव तृतीय धर्म त्रिकोण भाव:-

 

कुंडली का तृतीय धर्म त्रिकोण भाव
कुंडली का तृतीय धर्म त्रिकोण भाव

 

इस भाव से आध्यात्मिक प्रगति, भाग्योदय, बुद्धिमत्ता, गुरु, परदेश गमन, ग्रंथपुस्तक लेखन, तीर्थ यात्रा, भाई की पत्नी, दूसरा विवाह आदि के बारे में बताया जाता है इससे हमें धर्म, भाग्य, तीर्थयात्रा, संतान का भाग्य, साला-साली, आध्यात्मिक स्थिति, वैराग्य, आयात-निर्यात, यश, ख्याति, सार्वजनिक जीवन, भाग्योदय, पुनर्जन्म, मंदिर-धर्मशाला आदि का निर्माण कराना, योजना विकास कार्य, न्यायालय से संबंधित कार्य का विचार किया जाता है।

 

पोस्ट की लंबाई को ध्यान रखते हुए अगला भाग जल्द ही प्रकाशित होगा।

 

जय श्री राम।

 

ज्योतिर्विद प्रवीण सिंह परमार

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