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नवरात्रि के 9 दिनों के सिद्ध देवी मंत्र और उनके अचूक लाभ (शास्त्र प्रमाण सहित)

नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों के चमत्कारी मंत्र, श्लोक और जीवन में उनके अद्भुत प्रभाव

Astrology Sutras के सभी पाठकों को जय श्री राम! सनातन धर्म में नवरात्रि का पर्व शक्ति की उपासना का सबसे पवित्र और सिद्ध समय माना गया है। श्री मार्कण्डेय पुराण और श्री दुर्गा सप्तशती जैसे महान शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि नवरात्रि के दौरान माता के नौ स्वरूपों की विशिष्ट मंत्रों के साथ आराधना करने से मनुष्य के जीवन की हर बाधा नष्ट हो जाती है।

आज हम आपको उन प्रामाणिक श्लोकों और मंत्रों के बारे में विस्तार से बता रहे हैं, जिनका जाप नवरात्रि के प्रत्येक दिन किया जाना चाहिए।

नवरात्रि विशेषांक – यह भी पढ़ें:

1. प्रथम दिन: माँ शैलपुत्री

नवरात्रि का पहला दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री माँ शैलपुत्री को समर्पित है। यह स्वरूप स्थिरता और दृढ़ता का प्रतीक है।

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

अर्थ: मैं अपने अभीष्ट लाभ की प्राप्ति के लिए मस्तक पर अर्धचंद्र धारण करने वाली, वृषभ (बैल) पर सवार और हाथ में त्रिशूल धारण करने वाली यशस्विनी माँ शैलपुत्री की वंदना करता हूँ।

प्रभाव: इस श्लोक के जाप से मूलाधार चक्र जाग्रत होता है। जीवन में आने वाली अस्थिरता दूर होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है。

2. द्वितीय दिन: माँ ब्रह्मचारिणी

दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी का है, जो तपस्या और वैराग्य की देवी हैं।

दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

अर्थ: जिनके एक हाथ में अक्षमाला (रुद्राक्ष की माला) और दूसरे हाथ में कमंडल है, ऐसी सर्वोत्तम माँ ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।

प्रभाव: विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों के लिए यह अचूक है। इसके प्रभाव से एकाग्रता, संयम और ज्ञान में वृद्धि होती है。

3. तृतीय दिन: माँ चंद्रघंटा

तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा होती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है।

पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

अर्थ: जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं और अत्यंत क्रोधित मुद्रा में अनेक अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए हैं, वे माँ चंद्रघंटा मुझ पर अपनी कृपा करें।

प्रभाव: कुंडली में मंगल दोष या अकारण भय (Fear) होने पर इस मंत्र का जाप अद्भुत लाभ देता है। इससे साहस और पराक्रम की प्राप्ति होती है。

4. चतुर्थ दिन: माँ कूष्मांडा

ब्रह्मांड को उत्पन्न करने वाली माँ कूष्मांडा की पूजा चौथे दिन की जाती है।

सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥

अर्थ: जो अपने हाथों में मदिरा से भरा हुआ और रक्त से सना हुआ कलश धारण करती हैं, वे माँ कूष्मांडा मेरे लिए कल्याणकारी हों।

प्रभाव: यह स्वरूप सूर्य ग्रह का नियंत्रण करता है। स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं और रोगों के नाश के लिए इस मंत्र का प्रभाव स्वयं सिद्ध है。

5. पंचम दिन: माँ स्कंदमाता

भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है।

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

अर्थ: जो सदैव सिंहासन पर विराजमान रहती हैं और जिनके दोनों हाथों में कमल पुष्प सुशोभित हैं, वे यशस्विनी माँ स्कंदमाता सदा शुभ फल प्रदान करें।

प्रभाव: संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए यह श्लोक वरदान है। साथ ही, यह बुद्धि और विवेक को प्रखर करता है。

6. षष्ठम दिन: माँ कात्यायनी

महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में प्रकट हुईं माँ कात्यायनी छठे दिन पूजी जाती हैं।

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥

अर्थ: जिनके हाथों में चमकता हुआ चंद्रहास खड्ग है और जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं, वे दानवों का नाश करने वाली माँ कात्यायनी मेरा कल्याण करें।

प्रभाव: विवाह में आ रही अड़चनों (विशेषकर कन्याओं के विवाह में) को दूर करने के लिए बृहस्पति ग्रह को बल देने वाला यह श्लोक अत्यंत प्रभावशाली है。

7. सप्तम दिन: माँ कालरात्रि

अज्ञान और अंधकार का नाश करने वाली माँ कालरात्रि की पूजा सातवें दिन होती है।

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

अर्थ: खुले बालों वाली, गर्दभ (गधे) पर सवार, भयंकर रूप वाली और दुष्टों का नाश करने वाली माँ कालरात्रि हम सभी के भयों का अंत करें।

प्रभाव: शनि देव के दुष्प्रभावों, तंत्र-मंत्र की बाधाओं और गुप्त शत्रुओं के नाश के लिए यह सबसे उग्र और फलदायी प्रमाण है。

8. अष्टम दिन: माँ महागौरी

आठवें दिन माँ महागौरी की आराधना होती है, जो अत्यंत सौम्य और श्वेत वर्ण की हैं।

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥

अर्थ: श्वेत वृषभ पर सवार, श्वेत वस्त्र धारण करने वाली, अत्यंत पवित्र और भगवान शिव को आनंदित करने वाली माँ महागौरी मुझे शुभ फल दें।

प्रभाव: राहु ग्रह की शांति और दांपत्य जीवन में प्रेम व मिठास घोलने के लिए यह श्लोक रामबाण है। यह जीवन से सभी पापों को धो देता है。

9. नवम दिन: माँ सिद्धिदात्री

अंतिम दिन माँ सिद्धिदात्री का है, जो सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करती हैं।

सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥

अर्थ: सिद्धों, गंधर्वों, यक्षों, असुरों और देवताओं द्वारा भी सदा पूजित होने वाली, सिद्धियां प्रदान करने वाली माँ सिद्धिदात्री मुझ पर कृपा करें।

प्रभाव: केतु के बुरे प्रभावों को नष्ट करने और धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष—इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति के लिए यह श्लोक सर्वोच्च माना गया है。

Astrology Sutras का विशेष उपाय: नवरात्रि के इन नौ दिनों में यदि आप नियमित रूप से दुर्गा सप्तशती के सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ उपर्युक्त श्लोकों के साथ करते हैं, तो आपकी कुंडली के नौ ग्रह स्वतः ही शांत और अनुकूल हो जाते हैं।

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नवरात्रि मंत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: नवरात्रि के 9 दिनों के मंत्र क्या हैं?
उत्तर: नवरात्रि के 9 दिनों में माता के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के विशिष्ट श्लोकों का जाप किया जाता है, जिनका विस्तृत वर्णन श्री दुर्गा सप्तशती में मिलता है।
प्रश्न 2: क्या बिना दीक्षा के दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप कर सकते हैं?
उत्तर: जी हाँ, पूर्ण श्रद्धा और पवित्रता के साथ कोई भी जातक माता के मंत्रों का जाप कर सकता है। शास्त्रों के अनुसार, सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ बिना किसी विशेष दीक्षा या उत्कीलन के भी त्वरित फल प्रदान करता है।
प्रश्न 3: नवरात्रि में मंत्र जाप का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर: शास्त्रों और निर्णय सिंधु के अनुसार, किसी भी मंत्र जाप या अनुष्ठान के लिए ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:00 से 5:30 बजे तक) और गोधूलि वेला (संध्या काल) सबसे श्रेष्ठ और फलदायी माने गए हैं।
प्रश्न 4: क्या मासिक धर्म (Periods) में मानसिक जाप कर सकते हैं?
उत्तर: सनातन धर्म के शास्त्रों के अनुसार, सूतक-पातक या मासिक धर्म की अवस्था में मूर्ति स्पर्श और पूजा-पाठ वर्जित है, परंतु इष्ट देवता या माता का मानसिक जाप (मन ही मन मंत्र जपना) हर अवस्था में किया जा सकता है।
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वार्षिक राशिफल 2023: जानिए मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए 2023 कैसा रहेगा–Astrology Sutras

वर्षिक राशिफल 2023 मेष लग्न और मेष राशि
वर्षिक राशिफल 2023 मेष लग्न और मेष राशि

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए वर्ष 2023 सामान्य रूप से मिला-जुला रहेगा क्योंकि वर्ष पर्यंत मंगल की दोनों राशियाँ शनि के प्रभाव में रहेंगी और गुरु भी 30 अक्टूबर 2023 तक पीड़ित रहेंगे अतः मेष राशि वाले व्यक्तियों के जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी और मन में किसी प्रकार की चिंता व्याप्त रहेगी साथ ही स्वास्थ्य में भी कुछ असहज महसूस हो सकता है अतः स्वास्थ के प्रति सचेत रहें विशेषकर गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्कता बरतनी चाहिए, 1 जुलाई से 27 अगस्त का समय प्रेमियों व नव दंपत्तियों के लिए शुभ रहेगा, मन में नए विचार आ सकते हैं, 2 अप्रैल से 28 अप्रैल तक गुरु के अस्त रहने के कारण से भाग्य उन्नति में कुछ दिक्कतें अनुभव हो सकती है, वैवाहिक जीवन में कुछ तनाव रह सकते हैं, अनैतिक संबंध बनाने से बचें अन्यथा समाज में मान-प्रतिष्ठा में हानि या दाम्पत्य जीवन में बड़ा उतार-चढ़ाव रह सकता है, राहु 30 अक्टूबर से द्वादश स्थान में गोचर करेंगे जिस प्रकार से खर्चों में वृद्धि होगी, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें व वाहन और पशु से विशेष सावधानी बरतें।

 

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मेष राशि वाले व्यक्तियों के लिए वर्ष 2023 सामान्य रहेगा वर्ष की शुरुवात में शनि मकर, गुरु मीन और राहु मेष राशि से गोचर करेंगे जिस कारण से वर्ष के आरंभ में पिता से वैचारिक मतभेद की संभावना रहेगी व कार्यस्थल पर किसी प्रकार की चिंता मन में रह सकती है, किसी लंबी दूरी की यात्रा या विदेश यात्रा के योग रहेंगे, मंगल 12 जनवरी से मार्गी होकर जीवन में कुछ स्थिरता प्रदान करने वाले रहेंगे, मंगल का मार्गी होना मेष राशि व मेष लग्न वालों के लिए शुभ रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कुछ बात बन सकती है साथ ही किसी रुके हुए कार्य के पूर्ण होने से भी मन को प्रसन्नता अनुभव होगी।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

19 फरवरी 2023 को शनि गोचर बदलकर कुंभ राशि में आ जाएंगे जिससे मेष राशि वालों को कार्यक्षेत्र में किए गए प्रयासों में सफलता प्राप्त होगी, शनि का एकादश स्थान से गोचर अत्यंत शुभ होता है जिस कारण से पिछले काफी समय से चले आ रहे संघर्षों में कुछ कमी आएगी साथ ही जो लोग लंबे समय से घर लेने का सोच रहे हैं उनके लिए भी वर्ष 2023 शुभ रहेगा किंतु शनि के कुंभ राशि से गोचर के दौरान शनि की दृष्टि मंगल की दोनों राशियों पर रहेगी जिस कारण से क्रोध की अधिकता के कारण से किसी क्षति के योग रहेंगे, शनि के कुंभ राशि से गोचर के दौरान 30 अक्टूबर तक गुरु पीड़ित रहेंगे जिस कारण से स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहना शुभ रहेगा, जो लोग प्रॉपर्टी खरीदना चाहते हैं उनके लिए 20 अप्रैल के पहले का समय प्रोपर्टी खरीदना शुभ रहेगा, घर के किसी बुजुर्ग के स्वास्थ्य में भी कुछ उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं लेकिन उनके विवाह हेतु बात बनने में समस्या आ रही है तो उनके 30 मई 2023 के बाद का समय बेहद शुभ रहेगा, नवदंपत्तियों के लिए 30 मई 2023 के बाद संतान का प्लान करना अधिक शुभ रहेगा, वर्ष के आरंभ से 19 अप्रैल 2023 तक गोचर से गुरु पापकर्तरी में रहेंगे और 19 अप्रैल 2023 को गोचर बदलकर मेष राशि में राहु के साथ गोचर करेंगे जिन पर शनि की भी तीसरी दृष्टि रहेगी अतः व्यर्थ विवाद मे पड़ने से बचें, अचानक से आत्म सम्मान में हानि संभव है, दाम्पत्य जीवन में कुछ उतार-चढ़ाव वर्ष के आरंभ में बने रह सकते हैं, मेष राशि के गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के लिहाज से 2023 का गोचर थोड़ा मिला-जुला रहने वाला रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें व बाहर के बने भोजन से थोड़ा परहेज करें तो अधिक शुभ रहेगा, घर के बुजुर्गों या धार्मिक यात्रा या धार्मिक कार्यों में धन व्यय हो सकता है, विदेश यात्रा के योग रहेंगे, संतान से विचारों ने भिन्नता या वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, 19 अप्रैल को गुरु गोचर बदलकर मेष राशि में आ जाएंगे जिससे राहु, गुरु और शनि तीनों की दृष्टि पंचम भाव पर रहेगी जिस कारण से विपरीत लिंग के प्रति झुकाव बढ़ सकता है जिस कारण से आत्म सम्मान में किसी प्रकार की हानि के योग रहेंगे, 13 मार्च से 9 मई के समय भाई-बहन से संबंधों में कुछ मधुरता आएगी व पुराने चले आ रहे विवाद खत्म होंगे, 18 अगस्त से 2 अक्टूबर 2023 और 16 नवंबर से 27 दिसंबर 2023 का समय थोड़ा विशेष उतार-चढ़ाव और तनाव वाला रह सकता है, वर्ष पर्यंत नित्य विष्णु सहस्त्र नाम और संकटमोचन हनुमाष्टक का पाठ करना विशेष रूप से शुभ फलदाई रहेगा, यदि आप अपना पैसा किसी संपत्ति जैसे वाहन, भूमि, स्वर्ण/सोना खरीदना चाहते हैं तो 8 जनवरी, 5 फरवरी, 27 अप्रैल और 5 नवंबर को खरीदना बेहद शुभ रहेगा।

आगे हरि इच्छा प्रवल🙏

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 7007245896, 9919367470

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Akshaya Tritiya May 3, 2022: This time 5 great yogas are being made on Akshaya Tritiya

Akshay Tritiya 2022
Akshay Tritiya 2022

 

According to Jyotirvid Pooshark Jetly, Akshaya Tritiya is celebrated on Vaishakh Shukla Tritiya. Due to Vaishakh Shukla Tritiya date being on 3rd May 2022, this time Akshaya Tritiya will be celebrated on 3rd May 2022. This festival of auspicious bath donation for auspicious works. It will be celebrated in Rohini Nakshatra on Tuesday. According to Jyotirvid Pooshark Jaitley ji, this time an auspicious situation of 5 Mahayoga is being formed with 5 planets, which include Ubhayachari, Kedar, Vimal, Shubh Kartari and Sumukh Yoga, as well as the combination of date and constellation being complete day-night. And the whole day will be auspicious for investments etc.

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According to Jyotirvid Pooshark Jetly ji, this year on Akshaya Tritiya, Sun, Moon and Venus will remain in their exalted signs, Guru and Shani will remain in their own sign, that is, due to which two auspicious yogas named Matang and Shobhan are also being formed, due to which Akshaya Tritiya But this great coincidence is happening for the first time. According to astrological fabrication, due to Tritiya date on Tuesday, Siddhi Yoga is being formed, success is definitely achieved in every work done in this yoga, according to mythological beliefs, on the day of Akshaya Tritiya, Lord Shiva gave treasure to Kuber and wealth to Mother Lakshmi. She was given the boon of being a goddess.

It will be auspicious to buy property and gold and silver:-

 

 

According to Jyotirvid Pooshark Jetly Ji, Tritiya Tithi is also called Jaya Tithi i.e. the date of success. Lohitang i.e. son of land is the factor of Mars property, so on Akshaya Tritiya it is very auspicious to buy precious metals, land-buildings, vehicles, Jewellery, machinery, clothes, utensils, furniture and start a job or new business.

According to Jyotirvid Pooshark Jetly ji, the work done on Akshaya Tritiya gives renewable fruits, it is believed that the metal purchased on this day is never destroyed. According to the scriptures, buying gold and silver on the day of Akshaya Tritiya increases happiness and prosperity and there is always happiness in the family.

Note:- According to Jyotirvid Pooshark Jaitley ji, if there is Rohini Nakshatra on Vaishakh Shukla Tritiya Tithi, then the power of the wicked from the earth is weakened, as well as good yield of paddy, so this year, due to the combination of Rohini Nakshatra, there will be a good crop of paddy.

Long live Rama.

Astrologer Pooshark Jetly

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According to Astrology what is “Fate” and “Karma”?

What is Fate!!!


Is there a thing called fate? Or is it a screen behind which the clever, the unlawful, the weak-willed persons conceal their wrong doing by holding God or Karma responsible for their faults? Is fate a way of shedding responsibilities and claiming redressal for wrong doing by explanations that “Nature” or “Fate” compelled them to do what they did? Let’s look into this problem in the light of following facts:

• The universe is complicatedly arranged and diligently run functioning. The operations run evenly because every component of this vast operation is assigned a specific task(s). Each human birth takes place to carry out its devoted task in accordance with its Karma. This allocation of task(s) is “Fate” or “Destiny”.

• If events are not being determined in advance, they cannot be forecasted. The fact that something, some event, due to take place at a future date, can be predicted, gives credence to the existence of “Fate”.

• The circumstances and the environment of the house where one is born are pre-determined. To be born with a silver spoon in the mouth or in poor, poverty-laden circumstances is “Fate” or “Destiny”.

Conclusion: There is a force, call it what you may, that shapes human lives. Hindu Astrology takes a giant intellectual step and identifies this force as Karma. The present is conditioned by the past Karma and the Karma, which we do in the present, shapes our future.

 

What is the Karma theory!!!


The Vedas teach us “Do Not Fear” because our God bless us in “Abhaya Mudra” which is fearless posture. Upanishads tells us “Moksha is not for Cowards”. We fear death, we fear misfortune, we fear the unknown and we fear everything. Karma theory puts things in a perspective where we begin to realize that we are the part of a properly conceived, meticulously planned and brilliantly executed “grand design”. We are acting out our roles as sketched out by the great designer.
The karma theory rests on three pillars and they are:
• Reincarnation
• Man’s inescapable propensity to do Karma; an action less existence is not possible.
• Fruits of action have to be enjoyed/suffered. That is the only way in which the cycle of action and its results gets spent.

A man inevitably enjoys the good or bad results of his Karma, unspent they do not decrease even in eons.
These 3 pillars very subtly but in a very perceptible fashion encourage the human beings to grip up and fight the “fear” and attain “Moksha”, without reincarnation there can b no Astrology. For Astrology is merely reading the karmic patterns which has a link with the past life(s) and also with the future life(s).

The karmic pattern is woven skillfully in a horoscope, so as to indicate the balance of Karma that he native is carrying as well as his mission or task in this life. How is it done?

Let us see-

All of us are “a replica” of Universe. The five elements, fire, water, earth, air and ether (A very improper word for Aakash element) Constitutes the universe and we are also an amalgam of these five elements. It, therefore, stands to reason that we are a small part of a Grand Design, place in the fashion so that we can make our contribution. Each one of he humans has desires and wishes to fulfill them. Each one of us is motivated differently and reacts in a different manner to a given situation. It is outer manifestation of the Karmic pattern and the inner motivations to exhaust the fruits of past Karmas and to do Karma that lead to emancipation is seen in a horoscope when we divide it into four parts as under:
(A) Dharma (B) Artha (C) Kama (D) Moksha

In a horoscope houses 1st, 5th, 9th are the houses of Dharma; 2nd, 6th,10th are the Artha houses, 3rd, 7th, 11th are the Kama houses and 4th, 8th 12th are the Moksha houses.

The signs and planets occupying and influencing these houses indicate the Karma patterns. If the majority of planets are in Artha and Kama houses, the native’s inclinations and motivations are oriented in that direction. He has desires (Kama) and the money (Artha) and if they match at the right time in the native’s chronological growth, he can enjoy then to the full. This is the pattern, which is laid out in the horoscope. On the other hand, a native due to achieve emancipation would have a planetary distribution in his Dharma and Moksha segments. Various combinations are possible and that is why we see people having differing outlooks and Motivations.

Astrologer Pooshark Jetly

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विक्रम संवत्त 2079: जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव भाग:-१ Astrology Sutras

विक्रम संवत्त २०७९ का वार्षिक राशिफ़ल
विक्रम संवत्त २०७९ का वार्षिक राशिफ़ल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार विक्रम संवत्त २०७९ की शुरुवात में राहु वृषभ और केतु वृश्चिक राशि से गोचर करेंगे, ९ अप्रैल २०२२ की मध्य रात्रि ४:३१ पर राहु मेष राशि (कृत्तिका १ चरण) और केतु तुला राशि (विशाखा ३ चरण) में प्रवेश करेंगे तथा वर्ष पर्यन्त इन्ही राशि में रहेंगे साथ ही देव गुरु बृहस्पति वर्ष के आरंभ में कुंभ राशि से गोचर करेंगे जो कि ९ अप्रैल २०२२ को दिन के ८:२१ पर मीन राशि (पूर्वाभाद्रपद ४ चरण) में प्रवेश करेंगे और वर्ष पर्यन्त मीन राशि से गोचर करेंगे तो चलिए जानते हैं कि विक्रम संवत्त २०७९ विभिन्न राशियों के लिए कैसा रहेगा।

भाग:-१

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए यह वर्ष उन्नति कारक रहेगा, लंबी दूरी की यात्राएं संभव रहेंगी, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, मेष राशि वाले व्यक्तियों की इस वर्ष लोकप्रियता के साथ चिंताएं भी बढ़ने के योग रहेंगे, पित्त विकार या संधिवात से परेशानी संभव रहेगी, घर-परिवार में सामंजस्य बना रहेगा, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें व महिलाओं पर अधिक विश्वास करने से बचें, राज-समाज में मान सम्मान बढेगा, कारोबारी गतिविधियाँ अच्छे ढंग से चलती रहेंगी, कुटुंब में चले आ रहे तनाव कम होंगे, बड़े व्यवसायियों के मध्य मेल-जोल से नए व्यवसाय के मार्ग प्रशस्त होंगे, विद्यार्थियों के लिए अध्यन क्षेत्र में अभिरुचि कम होगी, दामपत्य जीवन में तालमेल बना रहेगा, नौकरी पेशा लोगों के लिए यह वर्ष थोड़ा संघर्ष पूर्ण रह सकता है, सितंबर मास के आस-पास गृहस्थी में खुशी रहेगी, गृहस्थ जीवन के लिए प्रतीक्षा कर रहे लोगों को शुभ समाचार प्राप्त होने की संभावना रहेगी किंतु मित्रों से धन की हानि संभव रहेगी, अक्टूबर मास में कोर्ट-कचहरी के मुकदमों से व्यथा संभव है, हिंदी मास के १, ३, ८, ११ मास कष्टदायक रह सकते हैं।

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा स्वास्थ्य संबंधित सावधानियां रखें, परिवार में धार्मिक कार्य संपन्न होंगे, भाई-बहन से सहयोग प्राप्त होगा, नवीन संपत्ति खरीदने के योग बनेंगे, माता-पिता का सहयोग प्राप्त होगा, विद्यार्थी वर्ग का पढ़ाई के प्रति रुझान बढ़ेगा, संतान पक्ष से भावनात्मक लगाव बनेगा, अदालत के मामलों में धीमी गति से प्रगति होगी, वैवाहिक जीवन सुखी रहेगा, नौकरी पेशा लोगों की स्थिति में सुधार होगा, राजनीतिक क्षेत्र में मतभेद बढ़ेंगे, मन कुछ अशांत एवं बोझिल बना रहेगा, सरकारी कार्य पूर्ण होने से आगे का मार्ग प्रशस्त होगा, घर का वातावरण सुखद बना रहेगा, शेयर बाजार का व्यवसाय करने वालों को इस वर्ष अच्छा मुनाफा होगा, बढ़ती जिम्मेदारियों को संभालने में आप समय के साथ सक्षम होते जाएंगे, देश-विदेश से शुभ समाचार प्राप्त होंगे, हिंदी मास के २,५, १० मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों पर शनि की ढैया का प्रभाव रहेगा, कुछ कठिन परिश्रम से संघर्ष के बाद सफलता प्राप्त होगी, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, वर्ष के मध्य में लंबी दूरी की यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र की परेशानी के कारण से मानसिक परेशानी बढ़ने की संभावना रहेगी, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, भाई-बहनों के साथ सहयोगात्मक व्यवहार बनास रहेगा, भूमि-मकान-वाहन के क्रय-विक्रय के लिए लाभकारक स्थितियाँ बनेंगी, विद्यार्थियों को शिक्षा के क्षेत्र में अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता रहेगी, वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी के मध्य वैचारिक मतभेद बने रह सकते हैं, धार्मिक कार्यों से लाभ होगा, पड़ोसी के व्यवहार से अनंदाभूति का अनुभव होगा, कानूनी विवाद को मध्यस्थता से सुलझाने की कोशिश करें, नए कार्य में सावधानी बरतें, अकस्माक लाभ प्राप्त होने के योग बनेंगे, हिंदी मास के ४, ८, १२ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

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कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए यह वर्ष उत्तम रहेगा, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, धन लाभ में आने वाली परेशानियाँ कम होंगी, इष्ट मित्रों से सहयोग प्राप्त होगा, भौतिक सुख-साधनों पर अधिक खर्च होगा, घरेलू समस्याओं का समाधान होगा, माता-पिता के साथ अच्छे संबंध स्थापित होंगे, प्रतिष्ठित लोगों से मुलाकात होने की संभावना रहेगी, विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा, शिक्षा के प्रति मन में जिज्ञासा उत्पन्न होगी, संतान पक्ष के साथ सामान्य मतभेद हो सकते हैं, कोर्ट-कचहरी वाले मामलों में समाधान प्राप्त होगा, वैवाहिक जीवन में पति-पत्नी अपने दायित्वों के प्रति उदासीन न रहकर सकारात्मक विचार धारा मन में बैठाने का प्रयास करें, नौकरी पेशा लोगों के लिए यह उत्तम समय रहेगा, इच्छित वस्तु का सुख प्राप्त होगा, साझे काम से लाभ मिलेगा, सेहत पर मौसम का प्रभाव पड़ने से स्वास्थ्य में उतार चढ़ाव संभव रहेगा, परदेश से शुभ समाचार की प्राप्ति संभव है, बनते-बिगड़ते परिवेश से नए आयाम मिलेंगे, दीर्घकालीन विवाद सुलझने के योग बनेंगे, हिंदी मास के २, ३, ९ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए यह वर्ष उन्नतिकारक रहेगा, घर-परिवार में कही का वातावरण बनेगा, रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है, विदेश से लाभ होगा, आर्थिक उन्नति के लिए प्रयासरत रहें, संगीत, गायन, चित्रकला आदि मनोरंजन के साधनों में रुचि बढ़ेगी, भाई-बहनों का पारस्परिक सौहार्द बना रहेगा, नवीन संपत्तियों के क्रय-विक्रय करने के लिए अच्छी स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, विद्यार्थियों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा, प्रेमियों में एक-दूसरे के मध्य सामंजस्य बना रहेगा, संतान की उन्नति के मार्ग प्रशस्त होंगे, दामपत्य सुख में वृद्धि होगी, विरोधी पक्ष का दबाब कम होगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, व्यवसाय में उन्नति व नौकरी पेशा लोगों की पदोन्नति होने के योग बनेंगे, पुराने रोग-ऋणादि से छुटकारा मिल सकता है, मित्रों के साथ यात्रा का अवसर प्राप्त होने के योग बनेंगे, असफलता को परिश्रम से सफलता में बदलने में सफल होंगे, योजना पूर्ति में मदद मिलेगी, वाहनादि का सुख प्राप्त होगा, हिंदी मास के ३, ६, ११ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए यह वर्ष शांतिकारक रहेगा, अच्छे उद्देश्य हेतु किए गए प्रयासों में सफलता प्राप्त होगी, शल्य चिकित्सा के योग बनेंगे अतः स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, जीवन साथी के स्वास्थ्य में भी उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, विवादपूर्ण माहौल से दूरी बनाकर रखें, विद्यार्थियों को कुछ कठिन परिश्रम से सफलता प्राप्त होने के योग हैं, संतान पक्ष से थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता रहेगी, कोर्ट-कचहरी के मुकदमों में विजय प्राप्त होगी, दाम्पत्य जीवन में प्रेम बना रहेगा, भूमि-मकान आदि खरीदने के योग बनेंगे, भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, माता-पिता का स्वास्थ्य कुछ बाधायुक्त रह सकता है, उदर जनित समस्याएं रह सकती हैं अतः अत्यधिक मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से सावधानी बरतें, व्यवसायियों के लिए यह वर्ष अच्छा रहेगा, अपने बल-पौरुष द्वारा परिस्थितियों पर काबू पाने का प्रयास करें, नए संपर्क से लाभ होगा, मई माह के आस-पास रुका हुआ धन प्राप्त होने के योग बनेंगे, योजनाएं राजनीतिक सहयोग से पूर्ण होंगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, मन में नए विचारों का उदय होगा, चौराग्नि भय व्याप्त रहेगा, अकास्मिक लाभ के योग बनेंगे, पड़ोसियों के साथ संबंधों में सुधार होगा, आशा पर निराशा हावी हो सकती है अतः खुद को मजबूत बनाकर अपने प्रयासों में कमी न आने दें, राज-समाज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी, यात्राओं के योग बनेंगे, विरोधियों के कुचक्र रचना से बचें, जनवरी २०२३ के आस-पास बिगड़े काम बनने की पूर्ण आशा रहेगी, हिंदी मास के २, ४, ९ मास कष्टप्रद रह सकते हैं।

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly
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Chaitra Navratri 2022: Know Ghat establishment, auspicious time and worship method

 

Chaitra Shukla Pratipada is considered a special festival to worship Mother Jagdamba, the presiding deity of Shakti. According to religious scriptures, on this day Brahma ji created the universe, this year Chaitra Navratri is starting from April 2, which will last for 9 days. The period from Chaitra Shukla Pratipada to Navami will be dedicated to the worship of Goddess Jagdamba, the presiding deity of Shakti. It is called Vasantik or Chaitra Navratri in the scriptures.

 

Mahanisha Puja:-

 

 

There is a method to perform Mahanisha Puja on the eighth day of Saptami. Nishith Vyapini Ashtami Yoga is being met on the night of 8th April in which Mahanisha Poojan etc. will be done.

Maha Ashtami fast will be kept on 9th April while Chaitra Shukla Navami is on 10th April till 12.08 pm. On this day, with the fasting of Mahanavami and Shri Ramnavami, the Praktyotsav of Shri Ram will be celebrated in the afternoon. Navratri will be done on 10th April and Navratri fasting will be done on 11th April.

 

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Arrival and Departure way:-

 

 

It is said in the scriptures:-

“Shashisurye Gajarudha, Shanibhoume Turangme.”

“Guro Shukre Cha Dolayam, Budhe Nauka Prakritta.”

This means, if the first day of Navratri is Sunday or Monday, then the mother comes riding on an elephant, if the first day is Saturday or Tuesday then the mother comes riding on a horse, if the first day is Thursday or Friday, then the mother comes from the palanquin. If the first day is Wednesday, then the mother comes in a boat and in the same way the mother travels on a buffalo on Sunday and Monday, on a rooster on Tuesday and Saturday, on an elephant on Wednesday and Friday and on a human shoulder on Thursday.

Ghat Establishment Vela:-

 

 

The morning Vela is considered auspicious for establishing Ghat. Auspicious time is coming from Ghatyadi 06|17 day (08:22) on 02 April 2022. There is a prohibition on the beginning of Navratri in Vaidhriti Yoga. Therefore, Kalash establishment worship can be done before 08:22 in the morning or in Abhijinmuhurta (days 11:35 to 12:25).

Shri Krishna had instructed Arjuna to worship the Mother Goddess:-

 

The power of soul is called goddess. Paramba Bhagwati Durga is the consciousness power that illuminates all the ghosts and the material world. Although, she is worshiped every day and Tridev worships them to protect the world. In order to get victory in the Mahabharata war, Lord Krishna himself had instructed Arjuna to worship Goddess Paramba. Vasantik Navratri is described in the scriptures, being a group of nine nights, it is called Navratri.

Worship Method:-

 

On the special day of Chaitra Shukla Pratipada, one should invoke Brahma ji after taking regular ritual bath in the morning, taking scent, intact, flowers and water in his hand. Should be worshiped with remedies of Arrival with Padya, Arghya, Achaman, Bath, Clothing, Yagyopaveet, Gandha, Akshat, Flowers, Incense, Deep, Naivedh, Tambul, Namaskar, Wreath and prayer etc.

From the new Panchang, hearing the results of the new year’s king, minister, army chief, Dhanadhip, Durgadhip, Samvatsar Niwas and Faladhip etc., the place of residence should be decorated with flag and pylon etc.

Long live Rama.

Astrologer:- Pooshark Jetly

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चैत्र नवरात्रि 2022: जानें घट स्थापना शुभ मुहर्त व पूजन विधि

चैत्र नवरात्रि 2022
चैत्र नवरात्रि 2022

 

शक्ति की अधिष्ठात्री माता जगदंबा की आराधना का विशेष पर्व चैत्र शुक्ल प्रतिपदा माना गया है धर्म शास्त्रों के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी इस वर्ष चैत्र नवरात्र २ अप्रैल से शुरू हो रहा है जो कि पूरे ९ दिन चलेगा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक की अवधि शक्ति की अधिष्ठात्री माँ जगदंबा की साधना-आराधना को समर्पित रहेगा इसे शास्त्रों में वासंतिक या चैत्र नवरात्र कहा गया है।

महानिशा पूजन:-

 

महानिशा पूजन
महानिशा पूजन

 

महानिशा पूजन सप्तमी युक्त अष्टमी में करने का विधान है निशीथ व्यापिनी अष्टमी योग ८ अप्रैल की रात्रि को मिल रहा है जिसमें महानिशा पूजन आदि किया जाएगा, महाअष्टमी व्रत ९ अप्रैल को रखा जाएगा वहीं चैत्र शुक्ल नवमी १० अप्रैल की रात्रि १२ बजकर ०८ मिनट तक है इस दिन महानवमी व श्री रामनवमी के व्रत के साथ दोपहर में श्री राम का प्राकट्योत्सव मनाया जाएगा, नवरात्रि का होम आदि १० अप्रैल को किया जाएगा व नवरात्र व्रत का पारण ११ अप्रैल को किया जाएगा।

आगमन व प्रस्थान विधान:-

 

आगमन व प्रस्थान विधान
आगमन व प्रस्थान विधान

 

शास्त्रों में कहा गया है:-

 

“शशिसूर्ये गजारुढ़ा, शनिभौमे तुरंगमे।”
“गुरौ शुक्रे च डोलायाम, बुधे नौका प्रकीर्तिता।।”

 

अर्थात नवरात्र के प्रथम दिन रविवार या सोमवार हो तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं, यदि प्रथम दिन शनिवार या मंगलवार हो तो माता घोड़े पर सवार होकर आती हैं, प्रथम दिन गुरुवार या शुक्रवार हो तो माता पालकी से आती हैं, प्रथम दिन बुधवार हो तो माता नौका पर सवार होकर आती हैं तथा इसी प्रकार माता का गमन रविवार व सोमवार को भैंसा पर, मंगलवार व शनिवार को मुर्गा पर, बुधवार व शुक्रवार को हाथी पर और गुरुवार को मानव कंधे पर होता है।

घट स्थापना वेला:-

 

घट स्थापना बेला
घट स्थापना बेला

 

घट स्थापना के लिए प्रातः वेला शुभ मानी गयी है ०२ अप्रैल २०२२ को घट्यादि ०६|१७ दिन (०८:२२) से वैधृति योग आ रहा है, वैधृति योग में नवरात्रारम्भ का निषेध है अतः कलश स्थापना पूजन प्रातः ०८:२२ के पूर्व या अभिजिन्मुहूर्त्त (दिन ११:३५ से १२:२५) में किया जा सकता है।

श्री कृष्ण ने अर्जुन को दिया था देवी माँ की आराधना का निर्देश:-

 

 

आत्मा की शक्ति को देवी कहते हैं समस्त भूत, भौतिक जगत को प्रकाशित करने वाली चेतना शक्ति ही पराम्बा भगवती दुर्गा हैं वैसे तो इनकी उपासना हर दिन होती है और त्रिदेव जगत की रक्षा हेतु इनकी आराधना करते हैं, महाभारत युद्ध में विजय प्राप्ति के लिए स्वम् भगवान श्री कृष्ण जी ने अर्जुन को देवी माता पराम्बा की उपासना का निर्देश दिया था, वासंतिक नवरात्र शास्त्रों में वर्णित है, नौ रात्रियों का समूह होने से इसे नवरात्र कहा जाता है।

पूजन विधि:-

 

पूजन विधि
पूजन विधि

 

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि विशेष पर प्रातः नित्य कर्मादि-स्नानादि कर हाथ में गंध, अक्षत, पुष्प, जल लेकर संकल्पित होकर ब्रह्मा जी का आवहान करना चाहिए आगमन, पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेध, ताम्बूल, नमस्कार पुष्पांजलि व प्रार्थना आदि उपचारों से पूजन करना चाहिए, नवीन पंचांग से नव वर्ष के राजा, मंत्री, सेनाध्यक्ष, धनाधीप, दुर्गाधीप, संवत्सर निवास और फलाधीप आदि का फल श्रवण, निवास स्थान को ध्वजा, पताका व तोरण आदि से सुशोभित करना चाहिए।

जय श्री राम।
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विक्रम संवत् २०७९ का सम्वत्सर फल

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस वर्ष के प्रारंभ में “राक्षस” नामक संवत्सर रहेगा, वैशाख कृष्ण १३ गुरुवार दिनांक २८ अप्रैल २०२२ को २५|२९ इष्ट (दिन ३:४५) पर “नल” नामक संवत्सर का प्रवेश होगा किंतु वर्ष पर्यन्त संकल्पादि में “राक्षस” संवत्सर का ही विनियोग करना चाहिए, इस वर्ष के राजा “शनि” तथा मंत्री “गुरु” हैं, राजा तथा मंत्री में परस्पर समभाव है परंतु इस वर्ष राजा शनि है इसलिए प्रजा को कई प्रकार के कष्टों से गुजरना पड़ सकता है, जगल्लग्न के विचार से लग्नेश बुध, सूर्य व राहु के साथ हैं अतः प्रजा के कल्याण के लिए अनेक योजनाएं बनेंगी, अमेरिका को कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, गुरु पर शनि की दृष्टि से विमान दुर्घटना या भयंकर प्राकृतिक प्रकोप से हानि होगी, शनि व मंगल का द्विदादश योग विश्व के कुछ राष्ट्रों में किसी विषय को लेकर स्थिति उग्र रूप धारण कर सकती है मित्र देशों में भी राजनयिक संबंध अकस्मात बिगड़ सकते हैं ऐसी स्थिति में राष्ट्रों के ध्रुवीकरण की प्रवृत्ति जोर पकड़ेगी।

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ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वर्ष लग्न के विचार लग्नेश नीच राशि में है और शनि की दृष्टि होने से यह ग्रह स्थिति विश्व में अघटित घटना चक्र का आभास कराएगी और किसी राष्ट्र विशेष में भूकम्प, जलप्लव आदि प्राकृतिक प्रकोप से जन-धन की हानि होगी, यूरोपीय देशों की ग्रह स्थिति से पश्चिम जर्मनी, फ्रांस, इटली, रोम, स्प्रेन, ब्रिटेन, आयरलैंड में कहीं भूकम्प आदि प्राकृतिक प्रकोप होगा, मुस्लिम राष्ट्रों में आंतरिक संघर्ष से सत्ता परिवर्तन के योग हैं, नव वर्ष प्रवेश में भारत की प्रभाव राशि मकर है लेकिन वृश्चिक लग्न में नव वर्ष का उदय होने से पश्चिमी प्रांत विशेष में कहीं ९ मास तक दुर्भिक्ष की स्थिति बनी रहेगी, उत्तर में विपरीत जलवायु के कारण फसलें प्रभावित होंगी, सोना-चांदी धातु में महँगाई अधिक बढ़ेगी, लोगों में विविध प्रकार के रोगों की व्याप्ति अधिक होगी, चोरी-डकैती, लूटमार एवं भ्रष्टाचार की वारदातें अधिक घटित होंगी।

 

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार आर्द्राप्रवेशाङ्ग के विचार से आर्द्रा प्रवेश कुंडली में धनु लग्न है, लग्नेश गुरु सुख भाव में जलराशि में हैं एवं चंद्र भी जल राशि में है भारत के पश्चिमी एवं पूर्वी भागों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश, हरियाणा व पंजाब आदि के अधिक क्षेत्रों में गर्मी का तापमान अधिक रहेगा व भीषण गर्मी पड़ेगी, पश्चिमी-पूर्वी भारत में मानसून की वर्षा तय समय पर होगी तो कहीं दुर्भिक्ष सूखा पड़ेगा इसलिए समाज व सरकार को सावधान रहने की आवश्यकता है, जलीय ग्रह शुक्र स्वराशि होकर बुध के साथ हैं अतः कहीं भूस्खलन आदि प्राकृतिक प्रकोप से हानि होगी, शारदधान्य एवं ग्रैष्मिकधान्य के विचार से शरद ऋतु की फसलें पर्याप्त होंगी, ग्रीष्मकाल की फसलों में प्राकृतिक प्रकोप से हानि संभव है।

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अश्विनी नक्षत्र एवं उसका फलादेश

अश्विनी नक्षत्र एवं उसका फलादेश
अश्विनी नक्षत्र एवं उसका फलादेश

 

अश्विनी नक्षत्र जिसे अंग्रेजी में केस्टर और पोलोक्स कहा जाता है यह 27 नक्षत्रों में प्रथम नक्षत्र है जिसका विस्तार मेष राशि में 0 से 13 अंश 20 कला तक है इनके स्वामी मंगल व दशा स्वामी केतु होते हैं तथा इनके देवता अश्विनी कुमार है, अश्विनी नक्षत्र क्षत्रिय वर्ण, चतुष्पद वश्य व देव गण के अंतर्गत आता है इसकी योनि अश्व है जो कि महिषी से वैर रखता है, अश्विनी नक्षत्र का रंग रक्त समान लाल और नामाक्षर चू, चे, चो, ला है तथा अश्विनी नक्षत्र का प्रतीक अश्व का सिर है।

अश्विनी नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति अच्छा व्यवहार करने वाले, सुंदर, बड़े नेत्रों वाले, बड़े माथे वाले, बुद्धिमान, भगवान से डरने वाले, सामान्य नाक वाले, निर्णय लेने में सशक्त किंतु बच्चों जैसा व्यवहार करने वाले, त्वरित क्रियान्वन वाले होते हैं तथा इनका कर्मक्षेत्र प्रायः चिकित्सक (विशेष अनुभव पर आधारित), साहसिक कार्य, खेलों से संबंधित कार्य, सैन्य व सेना से संबंधित और कानून से संबंधित कार्य करने वाले होते हैं।

अश्विनी नक्षत्र के व्यक्ति ऊर्जावान होने के साथ-साथ उत्साहित रहते हैं और इन्हें छोटे-मोटे कामों से संतुष्टि नही मिल पाती, इन्हें बड़े और अत्यधिक कार्यों को करने में अत्यंत आनंद आता है तथा प्रत्येक कार्य को अति शीघ्र संपन्न करने में रुचि रहती है, अश्विनी नक्षत्र के व्यक्ति अत्यंत रहस्मई होते हैं साथ ही इनमें क्रोध की भी अधिकता रहती है, अश्विनी नक्षत्र के व्यक्तियों को प्रेम से अपने वश में किया जा सकता है किंतु इन्हें क्रोध दिखाने या क्रोध से इन्हें आने वश में करने के प्रयास में व्यक्ति खुद की हानि कर बैठते हैं, अश्विनी नक्षत्र के व्यक्ति खुद के द्वारा लिए गए निर्णयों से कभी पीछे नही हटते और किसी अन्य की बातों में आकर अपने कार्यशैली में बदलाव नही लाते और लोगों की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, अश्विनी नक्षत्र के व्यक्ति अच्छे मित्र होते हैं तथा गुप्तचर विभाग, कलाकार, प्रशिक्षण, अध्यापन आदि क्षेत्र से भी धनार्जन करते हैं साथ ही चिकित्सा, सुरक्षा विभाग, साहित्य और संगीत में भी इन्हें अत्यंत रुचि रहती है और अपने जीवनकाल में एकाधिक माध्यम से धनार्जन करते हैं, अश्विनी नक्षत्र के व्यक्तियों के जीवन में 30 वर्ष की आयु तक प्रायः उतार-चढ़ाव बने रहते हैं।

अश्विनी नक्षत्र के लिए विनाशकारी नक्षत्र धनिष्ठा नक्षत्र जिसका स्वामी मंगल होता है इसके अतिरिक्त कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, विपत्त और मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा प्रतियरी नक्षत्र होते हैं साथ ही पुनर्वसु, विशाखा और पूर्वाभाद्रपद बाधाओं वाले नक्षत्र होते हैं, अश्विनी नक्षत्र वालों के लिए पुष्य, अश्लेषा, अनुराधा, ज्येष्ठा, उत्तराभाद्रपद व रेवती मित्र और अतिमित्र नक्षत्र होते हैं।

ॐ नमो भगवते रुद्राय।

Astrologer:- Praveen Kumar Singh
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