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वृषभ राशि 2026: जानिए अवसर चुनौतियाँ व उपाय

वृषभ राशि वालों के लिए वर्ष 2026 मिश्रित फल देने वाला रहेगा जहाँ नए अवसरों के साथ अनेक चुनौतियाँ भी आएंगी, गुरु का मिथुन और कर्क राशि से गोचर निःसंदेह व्यवसाय में धनलाभ के योग को दर्शाता है साथ ही किसी संपत्ति के क्रय करने के भी योग बनेंगे और नौकरी पेशा वालों की पदोन्नति होने की अच्छी संभावना रहेगी साथ ही सहयोगियों का भी समर्थन प्राप्त होगा तो वहीं वजन पड़ने या पाचन क्रिया में कुछ दिक्कत की समस्या, तनाव, आकस्मिक धन खर्च में वृद्धि व घर के बड़े-बुजुर्ग या बच्चों की स्वास्थ्य को लेकर कुछ चिंता सी अनुभव हो सकती है, जनवरी माह में खर्चों में वृद्धि की संभावना दिखती है, किसी यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, व्यापारियों व नौकरी पेशा लोगों की स्थिति में सुधार भी जनवरी के मध्य भाग से संभव रहेगा और यश की प्राप्ति होगी तो फरवरी माह में ग्रहों की शुभ स्थिति के कारण से धन लाभ व राजकीय व न्यायालय से जुड़े कार्यों में सफलता प्राप्त होगी एवं व्यापार में भी कुछ सुधार होगा किंतु विपरीत परिस्थितियों में धैर्य की परीक्षा भी रहेगी।

मार्च व अप्रैल माह में स्त्री से सुख व सहयोग प्राप्त होगा और धन लाभ के भी साधन बनेंगे और शत्रु पक्ष भी थोड़ा कमजोर बना रहेगा एवं वाणी की चतुराई से कार्य सिद्ध होंगे, विद्यार्थी वर्ग के लिए भी यह समय अच्छा रहेगा और पारिवारिक कार्यों में भी सफलता प्राप्त होगी किंतु क्रोध की अधिकता या स्वाभिमान के वृद्धि के कारण से परिवार में क्षणिक तनाव भी संभव रहेगा, दूसरों के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ाने का यह अच्छा समय रहेगा और कुछ गुप्त युक्तियों के बल पर समाज में अच्छा मान प्राप्त होगा, मई व जून के महीने में स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं जैसे अपच, बुखार, मानसिक चिंता, वाहन या पशु आदि से चोट की संभावना रहेगी तो परिवार के सदस्य से अचानक कलह होने से मन में अशांति अनुभव हो सकती है, व्यवसाय में परिवर्तन जून के मध्य भाग बाद करना शुभ रहेगा और जून माह के प्रथम सप्ताह बाद से ग्रह स्थिति शुभ होने से नए अवसर प्राप्त होंगे एवं परिवार के अंदर भी सुख के साधनों में वृद्धि होगी और किसी प्रकार का शुभ समाचार भी प्राप्त हो सकता है।

वृषभ राशिफल 2026
वृषभ राशिफल 2026

जुलाई व अगस्त माह में व्यापारिक क्षेत्र में किसी मित्र का सहयोग व मित्र के सहयोग से आर्थिक लाभ के योग बनेंगे, भूमि पर निवेश करने के लिए यह अच्छा समय रहेगा, संभव है कि इस समय आप पर कुछ अतिरिक्त कार्यभार भी रहे और आप किसी विशेष विषय पर लोगों का नेतृत्व कर सकते हैं, वरिष्ठ व्यक्तितियों की सलाह से लाभ सम्भव है फिर भी सामाजिक मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करने हेतु कड़ा संघर्ष भी बना रहेगा, किसी भी प्रकार के आर्थिक लेन-देन में सावधानी बरतें, सितंबर व अक्टूबर माह में विशेष उथल-पुथल देखने को मिल सकती है और अत्यधिक व्यस्तता व कार्यभार के कारण से शरीर व मन में थकान अनुभव हो सकती है, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें और किसी भी परिस्थिति में धैर्य बनाए रखें, मुकदमे वगैरह में भी यह माह साधारण रहेगा फिर भी शत्रुओ पर प्रभाव बना रहेगा, अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव करने से बचें कुल मिलाकर सितंबर और अक्टूबर माह बहुत अच्छा नही है जिसमें क्लेश और मन को असंतोष के योग हैं अतः इस समय पर धैर्य व संयम के साथ लिए फैसले लाभकारी सिद्ध होंगे और गुप्त युक्तियों एवं बुद्धि-विवेक द्वारा लाभ प्राप्त होगा।

नवंबर माह से वृषभ राशि वालों को पुनः राहत मिलने लगेगी, परिवार के माहौल में सुख के साधन में वृद्धि होगी और आप भी कलात्मक कार्यों में रुचि लेंगे साथ ही किसी अनूठे कार्य की तरफ मन का खिंचाव भी संभव रहेगा साथ-साथ आपका आध्यात्मिक पक्ष भी मजबूत होगा और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी जिससे आर्थिक लाभ के योग बनेंगे, दिसंबर माह भी शुभ रहने से मन के अंदर कुछ स्थिरता अनुभव होगी व धन लाभ और किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, राजनीति क्षेत्र से जुड़े व्यक्तियों को विशेष लाभ होगा एवं शत्रु पक्ष कमजोर होंगे एवं वाणी की चतुराई द्वारा बड़ा मान प्राप्त होगा, अपनी दिनचर्या का ध्यान रखें।

वर्ष 2026 के इन अशुभ दिनों पर रखें विशेष ध्यान

जनवरी:- 2, 3, 7 8, 12, 13, 26 व 27।
फरवरी:- 1, 2, 3, 11, 12, 13, 24, 25, 26, 27 व 28।
मार्च:- 1, 2, 11, 12, 15 व 26।
मई:- 2, 4, 6, 8, 10, 13, 15 व 29।
जून:- 3, 6, 9, 10, 13 व 14।
जुलाई:- 2, 6, 8, 10 व 28।
अगस्त:- 10, 13, 16 व 30।
सितंबर:- 3, 6, 9, 12, 15, 18 व 28।
नवंबर:- 3, 6, 9, 11, 17, 23 व 27।
दिसंबर:- 6, 12, 18, 24, 26, 28 व 29।

वर्ष 2026 के शुभ दिन करें नए कार्य की शुरुवात

अप्रैल:- 12, 14, 15, 28 व 29।
जून:- 16, 18, 21, 26, 29 व 30।
अक्टूबर:- 2, 5, 11, 13, 16, 21, 23, 26 व 29।

उपाय विशेष

1. नित्य विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
2. प्रदोष व्रत करें।
3. मंगलवार के दिन गाय को रोटी-गुड़ खिलाएं।

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तुला लग्न और आप: जानिए, तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

तुला लग्न और आप: जानिए, तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व
तुला लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

तुला लग्न में जन्मे व्यक्ति की आकृति कुछ लंबी व मुख सुंदर होता है तथा इनका कद भी सामान्यतः लंबा होता है, नेत्र ललित व दाँत विरल होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः सामान्य काठी अर्थात न बहुत मोटे और न बहुत दुबले होते हैं तथा यदि शुक्र या बृहस्पति लग्न में स्थित हों या लग्न को देखते हैं तो शरीर स्थूल होता है, विचार में तुला लग्न वाले व्यक्ति अव्यवस्थित चित्त तथा अनिश्चित विचार वाले होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों का चरित्र अव्यवस्थित होता है और ऐसे व्यक्ति खर्चीले स्वभाव के होते हैं, इनकी उदारता अत्यंत प्रशंसनीय होती है, तुला लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, सदा दूसरों की सहायता में तत्पर, मित्र बनाने में कुशल, चतुर, धार्मिक, मेधावी, सफाई में रहने वाले तथा घर-द्वार को साफ रखनेवक शौकीन, न्याय प्रिय, सत्यवादी, शांत और प्रफुल्लित चित्त, प्रत्येक कार्य को न्यायपूर्ण तरीके से करने वाले होते हैं किंतु इनकी क्रोधाग्नि बहुत जल्दी प्रज्वलित हो जाती है परंतु उतनी ही शीघ्रता से इनकी क्रोधाग्नि शांत भी हो जाती है, इनके मित्र और संरक्षक बहुत उच्च श्रेणी के प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति उच्चाधिकारी द्वारा सम्माननीय, विद्वान परंतु भीरु अर्थात डरपोक होते हैं, तुला लग्न वाले व्यक्ति वाणिज्य, न्यायकर्ता तथा पंचायती आदि प्रिय होते हैं और प्रायः इनके दो नाम होते हैं।

 

तुला लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त अहंकारी, क्रोधी, लालची, बदनाम और कृपण आदि होना ग्रंथकारों ने कहा है किंतु मेरे अनुभव के आधार पर ऐसी महिलाएं सुंदर, रूपवान, सुंदर नेत्र वाली, कमर पतली किंतु पैर मोटा और विलक्षण आकर्षक शक्ति वाली होती हैं यदि इनके चतुर्थ भाव में शुक्र हो तो कार्यस्थल पर इनके संबंध बनने की संभावना रहती है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों को कमर, गुर्दा, मूत्रस्थली आदि में समस्या रहती है अतः इन सभी स्थानों को शीत से बचाना इनके लिए लाभप्रद रहता है, शुद्ध जल व स्वच्छ वायु से इन्हें लाभ मिलता है, तुला लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शनि अत्यंत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होते हैं जो इन्हें भूमि, वाहन, वायुयान यात्रा व संतान का उत्तम सुख प्रदान करते हैं, बुध भी तुला लग्न वालों के लिए उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है, यदि कुंडली में बुध और चंद्र या शनि और बुध का संबंध बनता हो तो व्यक्ति को राजयोग तुल्य सुख प्राप्त होता है, मंगल, सूर्य व बृहस्पति इनके लिए अशुभ ग्रह होते हैं किंतु यदि मंगल का शनि या बुध से संबंध बनता हो तो व्यक्ति के वैभव में वृद्धि होती है, सूर्य और बृहस्पति मृत्यु प्रदान करने वाले ग्रह अर्थात प्रवल मारकेश होते हैं, मंगल तुला लग्न वालों को मारकेश होकर भी नही मारता, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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कन्या लग्न और आप: जानिए, कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

कन्या लग्न और आप: जानिए, कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व
कन्या लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कन्या लग्न में जन्मे व्यक्तियों के मुख की कांति से स्त्रीवर्गीय स्वभाव झलकता है इनके कंधे व बाहु थोड़े छोटे होते हैं तथा किस कार्य को कब और किस प्रकार से करना चाहिए यह कन्या लग्न के व्यक्ति विशेष रूप से जानते हैं, कन्या लग्न में जन्मे व्यक्ति सत्यवादी तथा न्याय प्रिय, दयालु, धैर्यवान और स्नेही होते हैं तथा बुद्धि व युक्ति लगाने में कुशल होते हैं किंतु व्यवहार में किसी दूसरे के सुख-दुःख की उपेक्षा नही करते हैं साथ ही दूसरों से कम लेने में भी नही हिचकिचाते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति किसी कार्य को करने में बड़े सावधान और चौकस रहते हैं तथा बिना विचारे कुछ भी नही करते साथ ही कन्या लग्न वाले व्यक्ति बातों को गुप्त रखने वाले और अपने भाव को दूसरों पर प्रकट नही करने वाले तथा वाणिज्य से जुड़े व्यवसाय में बड़े ही निपुण होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति मितव्ययी, सहनशील, दयालु, किसी भी कार्य को करने में दक्ष, धीर और साहसी होते हैं तथा अच्छे लोगों की सहायता व संरक्षता प्राप्त करने वाले होते हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्ति अन्य लोगों के पदार्थों और धन को भोगने वाले होते हैं परंतु ऐसे व्यक्ति कभी-कभी स्त्री विलास रसिक और इन्द्रिय लोलुप और विद्वान लोगों से प्रेम करने वाले होते हैं।

 

कन्या लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हो तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त बुद्धिमती, सुशीला, मिलनसार, उदार, धार्मिक और दानशीला होती हैं, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मानसिक अवस्थाओं पर पूर्ण ध्यान रखना चाहिए, उदर जनित रोग से यह प्रायः पीड़ित और दुःखी रहते हैं अतएव उत्तम भोजन करना इनके लिए श्रेयस्कर होता है, सांसारिक बातों में उपद्रव होने से भी इनके स्वास्थ्य पर प्रायः बुरा परिणाम होता है, कन्या लग्न वाले व्यक्तियों के लिए शुक्र और बुध शुभफलदाई होते हैं और इनमें भी शुक्र बेहद शुभ होता है तथा बुध व शुक्र के कुंडली में संबंध बनने पर उत्तम राजयोग के समान फल की प्राप्ति होती है, शनि थोड़े अंशों का हो तो शुभ होता है, यदि केतु व चंद्र की लगन में युति हो तो शुभफलदाई होती है परंतु मारक स्थितियाँ भी उत्पन्न करता है, सूर्य मृत्यु तुल्य कष्ट तो देता है किंतु मृत्यु नही देता, बृहस्पति और चंद्र इनकी कुंडली में शुभ फल नही देते हैं, मंगल, चंद्र और बृहस्पति सहायक (कारक) ग्रह होते हैं, शुक्र भी कभी-कभी मार्केशव्हो जाता है, धनु लग्न का यदि नवमांश हो तो व्यक्ति में प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

जय श्री राम।

 

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सिंह लग्न और आप: जानिए, सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

सिंह लग्न और आप: जानिए, सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व
सिंह लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के मुख की आकृति चौड़ी और हड्डी पुष्ट होती है, इनकी आँखे सुंदर और भाव प्रकट करने वाली और आकर्षक होती हैं ऐसे व्यक्ति नेत्रों के इशारे से भी अपनी बातें बड़ी सरलता से प्रकट कर लेते हैं तथा इनका जीवन आनंदमयी रहता है, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों पर शत्रुओं कभी हावी नही हो पाते तथा उनको कोई हानि नही पहुँचा पाते, सिंह लग्न वाले व्यक्ति निष्कपट और मनसा, स्पष्टवादी व पवित्रता का पालन करने वाले होते हैं और नीच कर्म से घृणा करते हैं तथा धैर्यवान और उदार होते हैं किंतु किसी के अधीन रहकर कार्य नही कर सकते इन्हें स्वतंत्रता प्रिय होती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति जिस कार्य को करते हैं उसे पूरी ईमानदारी एयर निपुणता के साथ करते हैं साथ ही अपनी मर्यादा के पालन में सर्वदा तत्पर रहते हैं और मित्रता में अटल तथा विश्वास पात्र होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति केवल दयालु ही नही होते अपितु सत्य की रक्षा के लिए भी सदैव तत्पर रहते हैं तथा दुःख के समय में अपनी सूझ-बूझ को काम में लाकर दुःख का निवारण करने में भी समर्थ होते हैं और शत्रुओं से झगड़ा जल्द नही करते अपितु धैर्य व युक्ति से उनसे मुक्ति पाने हेतु प्रयास भी करते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को अपनी मेहनत का पूर्ण फल नही मिल पाता है किंतु समाज में अपने गुणों व व्यवहार के कारण से मान-सम्मान की प्राप्ति इन्हें अवश्य ही मिलती है, सिंह लग्न वाले व्यक्ति अपनी आज्ञा तथा रुचि के अनुसार अन्य मनुष्यों को चलाने में कुशल होते हैं तथा एक अच्छे नेता या राजनेता बनकर देश व समाज का कल्याण करने में भी सक्षम होते हैं, सिंह लग्न के व्यक्ति या तो स्वम् का व्यवसाय करते हैं या किसी उच्च पद पर आसीन रहकर सेवा करते हैं, जीवन के उत्तरार्ध में इन्हें बड़ी सफलता प्राप्त होती है।

 

सिंह लग्न की यदि कोई महिला हों तो उपरोक्त गुण के अतिरिक्त दुबली, पतली, कफ प्रकृति से पीड़ित, झगड़ालू, बचपन में शरीर के गुप्त भागों में वाहनादि द्वारा चोट से ग्रसित तथा तर्क में कुशल होती हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों के दाम्पत्य जीवन में प्रायः उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, सिंह लग्न वाले व्यक्तियों को गर्म पदार्थों व मादक पदार्थों का सेवन कभी नही करना चाहिए, उत्तेजना और जल्दबाजी में कार्य करना इनके लिए कष्टप्रद रहता है, प्रायः इन्हें ज्वर आदि की समस्या भी रहती है जिसका सही समय पर औषधि सेवन कर इलाज करना अत्यंत आवश्यक होता है अन्यथा ज्वर की पीड़ा अति कष्टदाई रहती है, सिंह लग्न वालों के लिए मंगल विशेष शुभ ग्रह व राजयोगकारक ग्रह होते हैं, गुरु और मंगल का यदि कुंडली में संबंध बनें तो यह राजयोग समान फल देने वाला होता है, बृहस्पति और शुक्र का संबंध भी इनके लिए शुभ होता है किंतु अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति नही हो पाती है, चन्द्रमा का साधारण फल इन्हें मिलता है जिसके कारण इनके खर्चे अनियंत्रित रहते हैं और इनका मन जल्दी स्थिर नही हो पाता इनके मस्तिष्क में नित्य नए विचार आते रहते हैं, सिंह लग्न वालों के लिए शनि कष्टप्रद और बुध मारकेश होते हैं तथा सूर्य व बुध का संबंध बनाने से कार्य कुशल होते हैं, मंगल और शनि का द्वादश भाव में संबंध बने तो शनि की दशा के अंदर मंगल की अंतर्दशा आने पर इनके वैभव की उन्नति होती है, राहु व केतु यदि मारक भाव में बैठे हों तो अनिष्टकारी अर्थात मृत्युदाई होते हैं, बृहस्पति और शुक्र का संबंध इनके लिए राजयोग नही होता है, यदि सिंह का नवमांश हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव का पूर्ण विकास होता है।

 

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कर्क लग्न: जानिए, कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

कर्क लग्न: जानिए, कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कर्क लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

कर्क लग्न में जन्मे व्यक्ति न अधिक लंबे और न अधिक नाटे अर्थात मझोला कद वाले होते हैं इनकी गर्दन मोटी, मुख गोल और शरीर स्थूल अर्थात सामान्यतः मोटा होता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति मिलनसार, आनंद और विलास प्रिय, सुंदर वस्तुओं को चाहने वाले, साफ-सफाई पसंद करने वाले, सत्य प्रिय, उत्तम भोजन की चाह रखने वाले, आभूषण आदि में रुचि रखने वाले, मधुर वाणी से सबको मोहित करने वाले, भ्रमण शील, प्रभावशाली, यशस्वी कर्तव्य परायण और श्रेष्ठ जन अर्थात गुरु तथा धार्मिक पुरुषों के प्रति भक्ति भाव रखने वाले होते हैं, कर्क लग्न वालों प्रायः आडंबर युक्त अर्थात ठाट-बाट वाला रहन-सहन पसंद होता है और यह धार्मिक होते हुए भी कपटी होने में रुचि रखते हैं तथा सिद्धांत रहित होते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में अस्थिरता बनी ही रहती है कहने का आशय यह है कि कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के जीवन में उतार-चढ़ाव बना ही रहता है तथा यह जितनी तीव्रता से शिखर पर पहुँचते हैं उतनी ही तीव्रता से इनका पतन भी हो जाता है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों का मन अस्थिर रहता है तथा इन्हें सर्दी-जुकाम, कफ, ज्वर, मलेरिया, उदर संबंधित विकार अर्थात पाकस्थली के बिगड़ने से समस्या, अपच आदि की समस्या प्रायः बनी रहती है तथा कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर समस्या पर औषधि तुरंत लेना पसंद करते हैं जिसकी अधिक मात्रा से भी इनके उदर के किडनी में समस्या संभव होती है अतः कर्क लग्न वालों को अत्यधिक औषधि की अपेक्षा घरेलू उपचार पर अधिक ध्यान देना चाहिए, कर्क लग्न वाकई व्यक्ति अपने जीवनसाथी व संतानों से अत्यधिक प्रेम करते हैं तथा कभी-कभी इनका प्रेम इतना अधिक होने लगता है कि इनकी संतान व जीवनसाथी को उलझन अनुभव होती है जिस कारण से इनके घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने लगती है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति यदि महिला हों तो वह प्रत्येक बात पर टोक लगाने वाली होती है किंतु ऐसी महिला सुंदरी, शीलवती, विश्वसनीय, शांतिमयी, प्रभावशालिनी, अपने स्वजनों से अत्यधिक प्रेम करने वाली, सुखमयी और बहु संतान वाली होती हैं।

 

कर्क लग्न वाले व्यक्ति स्त्री सहवास में समर्थ तथा मिष्ठान प्रिय होते हैं और इनमें कामुकता अधिक रहती है, कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के मन में अपने सगे संबंधियों के प्रति सद्द्भाव रहता है, कर्क लग्न वाले व्यक्ति जिन्हें चाहते हैं उन्ही की बातों को तवज्जो देते हैं तथा जिसकी बात उनको नही पसंद आती है उसकी बात का अनुसरण नही करते हैं और उसके परामर्श को घृणा की दृष्टि से देखते है तथा उन व्यक्तियों पर अविश्वास रखते हैं केवल इतना ही नही अपितु ऐसे व्यक्तियों की संगति का भी परित्याग कर देते हैं, कर्क लग्न वाले व्यक्ति हर विषय की उपयोगिता और मोल का अनुमान उचित रीति से करने में निपुण होते हैं तथा ऐसे व्यक्ति प्रायः (कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुसार) प्रवासी रहते हैं परंतु गृह में रहने के इच्छुक होते हैं।

 

कर्क लग्न वाले व्यक्तियों के लिए मंगल सबसे उत्तम फल देने वाला ग्रह होता है जो कि इस कुंडली का राजयोगकारक ग्रह भी होता है और यदि व्यक्ति की कुंडली में मंगल पंचम, नवम या दशम भाव में हो तो यह राजयोग के समान फल देने वाली स्थितियों को निर्मित करता है, बृहस्पति भी कर्क लग्न वालों के लिए शुभ होता है तथा बृहस्पति यदि लग्न या नवम में हो तो बहुत शुभ देता है साथ ही यदि कुंडली में मंगल व गुरु में संबंध बने तो यह स्थिति व्यक्ति को उत्तम राजयोग देती है, शुक्र, शनि व बुध कर्क लग्न वालों के लिए बेहद अशुभ ग्रह होते हैं, सूर्य मारक भाव का स्वामी अर्थात मारकेश होकर भी मृत्यु नही देता है, चंद्रमा लग्नेश होने के नाते शुभ होता है तथा यदि लग्न में गुरु व चंद्र स्थित हों तो व्यक्ति अत्यंत धनी व अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करने वाला होता है, यदि मेष का नवमांश हो तो व्यक्ति प्राकृतिक स्वभाव को पूर्ण रूप से दिखाता है।

 

जय श्री राम।

 

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वृषभ लग्न और आप: जानिए, वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

वृषभ लग्न और आप: जानिए, वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व
वृषभ लग्न वालों का व्यक्तित्व

 

वृषभ लग्न वाले व्यक्ति तीव्र इच्छा शक्ति वाले, स्त्रियों को अपनी ओर आकर्षित करने वाले, प्रकृति प्रेमी, प्रेम में विश्वास रखने वाले, विश्वसनीय, गोल मुख, छोटी गर्दन किंतु मोटी और पुष्ट जंघा वाले होते हैं साथ ही इनके चेहरे पर छोटी सी मुस्कान सदैव ही बनी रहती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्ति प्रायः दुबले होते हैं तथा इनके कंधे बलिष्ठ और उन्नत एवं बाहु छोटे एवं गठीले होते हैं, इनके चेहरे से सदैव ही प्रसन्नता का आभास होता है, वृषभ लग्न के व्यक्ति संगीत, मनोहर वस्तु और भ्रमण अर्थात घूमने-फिरने के प्रेमी होते है तथा इनका स्वभाव कुछ चिड़चिड़ा किंतु शांति प्रिय, अत्यंत कामी, धीर, बड़े से बड़े दुःख में भी धैर्य रखने वाले, दयालु, धर्मानुरागी, कलात्मक दृष्टि वाले तथा कलात्मक वस्तुओं का संग्रह करने वाले और प्रत्येक बात में अपना विचार व्यक्त करने वाले होते हैं, दूसरों के परामर्श पर चलना इन्हें नही रास आता, ऐसे व्यक्ति सदाशय, विद्या विवाद में चतुर, भाग्यवान, चतुराई में निपुण, विद्वान, विभिन्न मंत्रों को जानने वाले, देवता व ब्राह्मण भक्त, भौतिक सुखों का इच्छुक, स्वादिष्ट भोजन करने वाले, अधिकांश खाली बैठे रहने वाले किंतु इनको कोई कार्य मिल जाए तो उसे पूर्ण किए बिना न रुकने वाले, शांत चित्त वाले किंतु क्रोध में तहस-नहस कर देने वाले, शत्रु विजयी, जीवन के उत्तरार्ध में बड़ी सफलता प्राप्त करने वाले होते हैं और यदि वृषभ लग्न की स्त्रियां अच्छी पत्नी सिद्ध होती है तथा घर को सुचारू रूप से चलाने में सक्षम और अनुशासित होती हैं।

 

वृषभ लग्न के व्यक्ति चित्त के बड़े गंभीर होते हैं तथा दूसरों को अपने विचार ज्ञात नही होने देते हैं साथ ही वृषभ लग्न के व्यक्ति उतावलेपन में कभी कोई कार्य नही करते हैं तथा शांतिमय जीवन को जीने में विश्वास रखते हैं, इनके मित्रों की संख्या काफी अधिक होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों का भाग्य अचानक से होता है तथा इन्हें भूमि, वाहन व वायुयान यात्रा का उत्तम सुख प्राप्त होता है, वृषभ लग्न के व्यक्तियों का बचपन अनेक यातनाओं व पीड़ाओं से युक्त किंतु उत्तरार्ध में सभी समस्याओं व संकटों पर विजय प्राप्त करते हुए उन्नति व सुख को प्राप्त करते हैं, वृषभ लग्न के व्यक्ति अपने कष्टों को छिपाने में निपुण तथा गृहस्थी का खर्च चलाने हेतु कोल्हू के बैल की भांति दिन-रात कार्य में जुटे रहते हैं साथ ही यदि किसी महिला का वृषभ लग्न हो तो वह बुद्धिमती, विदुषी, सुशीला, विश्वसनीय और कला कौशल को जानने वाली होती है और अपने पुरुष की आज्ञाकारिणी होकर पुरुष पर अपना अधिकार जताने वाली होती है, वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को प्रायः कंठ, गले, छाती, मुख, उदर आदि की समस्या रहती है तथा उत्तेजक भोजन इनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है अतः वृषभ लग्न वाले व्यक्तियों को नित्य व्यायाम व सादे भोजन को करना लाभप्रद रहता है।

 

वृषभ लग्न वालों के लिए शनि बहुत शुभ ग्रह अर्थात राजयोगकारक ग्रह होता है तथा यही शनि 36 वर्ष की आयु के आस-पास कार्यक्षेत्र में कुछ बदलाव के साथ या अत्यंत संघर्ष उपरांत बड़ी उन्नति प्रदान करने वाला ग्रह होता है इसी प्रकार सूर्य भी इनके लिए शुभ ग्रह होता है, मंगल, चंद्र और गुरु इनके लिए अशुभ ग्रह अर्थात मारकेश होते हैं, वृषभ लग्न वालों की कुंडली में यदि सूर्य व बुध या शनि व बुध का संबंध हो तो यह राजयोग समान सुख प्रदान करने वाला योग होता है, यदि नवमांश के पंचम भाव में वृषभ राशि हो तो व्यक्ति के प्राकृतिक स्वभाव विशेष रूप से प्रकट होता है।

 

जय श्री राम।

 

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राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-४ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

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राहु व केतु राशि परिवर्तन
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भाग:-४

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-१ जानिए किन राशियों पर राहु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 20290: राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद ही नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु गोचर परिवर्तन से किन-किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी।

 

राहु व केतु का 12 राशियों पर प्रभाव
राहु व केतु का 12 राशियों पर प्रभाव

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर सामान्य रहेगा क्योंकि वर्तमान में अभी शनि के साढ़ेसाती का दूसरा चरण भी आपकी राशि पर चल रहा है हालांकि तुला, मकर व कुंभ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती का उतना अशुभ प्रभाव नही पड़ता है किंतु यदि चंद्रमा का किसी भी प्रकार से शनि से संबंध बने तो साढ़ेसाती परेशानी देती है अन्यथा इन तीन राशि वालों के लिए शनि की साढ़ेसाती उतनी अशुभ नही होती हालांकि हम यहाँ राहु व केतु के गोचर परिवर्तन पर चर्चा कर रहे है अतः प्रेम संबंधों में कमी आएगी, प्रेमी व प्रेमिका से विवाद होते रहेंगे तथा यदि आप दोनों के मध्य काफी समय से विवाद चल रहा है तो वह विवाद संबधों को विच्छेद करा कर समाप्त होगा, प्रेमियों के मध्य गलतफहमियों के चलते विवाद होंगे, संतान को कष्ट, संतान से विवाद, संतान की शिक्षा में बाधाएं आएंगी, विद्यार्थियों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा शिक्षा में व्यवधान आएंगे, विद्यार्थियों के मन में क्या करें व क्या न करें को लेकर मन में संशय बना रहेगा, कुछ देर ध्यान करें इससे मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी हालांकि लाभ के लिहाज से यह गोचर शुभ सिद्ध होगा फलस्वरूप लाभ के अन्य माध्यम बनेंगे, लाभ में वृद्धि होगी, लंबे समय से कार्यक्षेत्र में (चाहे वह नौकरी पेशा व्यक्ति हों या व्यापारी) उन्नति के मार्ग में जो बाधाएं आ रही थी वह दूर होंगी, शेयर बाजार, जुआ व सट्टे से अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, राजनीति के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भी लाभ होगा आपकी वाणी का लोगों पर अच्छा प्रभाव भी पड़ेगा तथा उन्नति के अवसर भी प्राप्त होंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, पिता से वैचारिक मतभेद व पिता के स्वास्थ्य में समस्या रहेगी, भ्रम की स्थितियाँ बनेंगी, मकर राशि वाले जातक/जातिकाओं के लिए इस गोचर काल की सबसे बड़ी समस्या भ्रामक स्थिति रहेगी अतः धैर्य व संयम से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच समझ कर लें तथा आवेश में आने से बचें यदि आपने भ्रामक स्थिति न बनने दी तो राहु व केतु का यह गोचर आपके लिए शुभ सिद्ध होगा, आय में वृद्धि होगी, नौकरी पेशा लोगों के प्रमोशन के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा है तो आपको बुद्धि व विवेक से हर कार्य करना होगा क्योंकि राहु आपके चित्त को शांत नही होने देंगे जिससे बनते कार्य बिगड़ेंगे, वहिं केतु आपको सही दिशा में प्रयत्न नही करने देंगे जिससे व्यापार व दामपत्य जीवन के सुख में बाधाएं आएंगी, यह गोचर आपके लिए 48% शुभ तथा 52% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- सुंदरकांड व बटुक भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करें तथा जिनकी कुंडली में चंद्रमा शनि से संबंध रखता हो वह इन उपायों के साथ प्रत्येक शनिवार को 108 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें लाभ होगा।

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-२ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-२ जानिए, कर्क से कन्या राशि वालों के लिए राहु-केतु का यह गोचर कितना शुभ रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर मिला-जुला रहेगा जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध बन रहा हो उनके लिए मुश्किलें ज्यादा रहेंगी अतः घर में कलह-क्लेश होंगे, मानसिक अशांति अनुभव होगी, कार्यक्षेत्र में हानि संभव है, नौकरी पेशा लोग बहुत ही सतर्कता के साथ कार्य करें, आपको अपने प्रियजनों का सहयोग कम मिलेगा, वाणी में तेजी रहेगी अतः वाणी व क्रोध पर नियंत्रण रखें, धैर्य व संयम से कार्य करें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं से सावधान रहें, किसी से ऋण लेने से बचें, जिनकी कुंडली में चंद्रमा का शनि से संबंध नही है उनके लिए यह गोचर कुछ राहत देगा, कार्यक्षेत्र में विकास होगा, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, जिनका कार्य कमीशन, फाइनेंस, बैंकिंग, टीचिंग से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह गोचर लाभप्रद सिद्ध होगा हालाँकि घर में कलह-क्लेश होते रहेंगे फिर भी चंद्रमा का शनि से संबंध न होने के कारण से आपकी सोच-विचार करने की शक्ति जागृत रहेगी, राजनीति से या सामाजिक वर्ग से जुड़े लोग अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण करें तथा शराब, माँसाहार का सेवन न करें क्योंकि इनका सेवन आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला सिद्ध होगा, शत्रुओं से सावधान रहें, यह गोचर आपके लिए 50% शुभ तथा 50% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- हनुमान जी, गणेश जी व भैरव जी की नित्य पूजा करें व गणेश अथर्वशीर्ष, संकटमोचन हनुमाष्टक और भैरव स्तोत्र का नित्य पाठ करने से लाभ होगा।

 

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020 भाग:-३ जानिए किन राशियों पर राहु व केतु की कृपा बरसेगी

राहु व केतु गोचर परिवर्तन 23 सितंबर 2020: *भाग:-३* राहु को सदैव ही नियंत्रित करने वाले केतु इस बार खुद नियंत्रण के बाहर रहेंगे जिनको नियंत्रित राहु करेंगे जानिए, राहु व केतु के गोचर परिवर्तन से तुला, वृश्चिक व धनु राशि में से किन पर राहु की कृपा बरसेगी व आपको क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए तथा उपाय।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए राहु व केतु का यह गोचर शुभ रहेगा बशर्ते आपकी कुंडली में राहु पीड़ित अवस्था में हो फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, भाग्य में वृद्धि होगी व भाग्य का पूर्ण सहयोग भी प्राप्त होगा, व्यापार में भी लाभ होगा व व्यापार की वृद्धि होगी, नए कार्य की शुरुवात होने के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आप क्रिकेट, फुटबॉल, कबड्डी, हॉकी, पुलिस, आर्मी से जुड़े हुए हैं तो यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ सिद्ध होगा, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, दामपत्य जीवन में क्षणिक विवाद होते रहेंगे, बड़े भाई-बहन का सम्मान करें, मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न होगी अतः अपने विवेक से कार्य करें व कोई भी निर्णय बहुत सोच-समझ कर ही लें, दिमाग आपका तेजी से कार्य करेगा, आपके ज्ञान में भी वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए भी यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, रुका हुआ धन प्राप्त होगा व ऐसे सभी कार्य जो लंबे समय से रुके हुए हैं अब पूर्ण होंगे, सरकारी नौकरी की जो लोग लंबे समय से तैयारी कर रहे हैं उन्हें सरकारी नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, यात्राएं चाहे लंबी हो या छोटी लाभप्रद सिद्ध होंगी, धर्म का पालन करें व अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें, बीते समय में आपको जो भी नुकसान हुए अब उनकी भरपाई होने के योग बनेंगे, यह गोचर आपके लिए 80% शुभ व 20% अशुभ रहेगा।

 

उपाय:- दशांश करें यहाँ दशांश का तात्पर्य अपने कमाई का दसवाँ हिस्सा किसी अनाथालय या वृद्धाश्रम में दान करने से हैं तथा शिव जी की पूजा व शिव परिवार की सेवा करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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अगस्त 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

अगस्त 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

वृषभ लग्न
वृषभ लग्न

 

वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए अगस्त 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में सूर्य का तीसरे भाव से गोचर फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, माता छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, किसी बड़े अधिकारी से मुलाकात संभव रहेगी, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, आवेश में आने से बचें, 2 अगस्त को बुध गोचर बदलकर आपके तीसरे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप घर में खुशियों का माहौल रहेगा, माता का सहयोग प्राप्त होगा, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, 16 अगस्त को सूर्य और 17 अगस्त को बुध गोचर बदलकर आपके चतुर्थ भाव में आ जाएंगे घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा, किसी भी कारण से परिवार के सभी सदस्य एकत्रित होंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, जिनका कार्य बैंकिंग, फाइनेंस, टीचिंग, सौंदर्य प्रकाशन, धातु, तकनीकी क्षेत्र, कमीशन से जुड़ा हुआ है उनके लिए यह माह अच्छा रहेगा, माह के शुरुवात में शुक्र व राहु का द्वितीय स्थान से गोचर रहेगा अतः गलत तरह से धन अर्जित करने का प्रयास न करें, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें व महिलाओं से व्यर्थ विवाद न करें, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, माह के शुरुवात में गुरु व केतु का अष्टम भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, कोई भी रिस्क लेने से बचें, दवाईयों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, जिन्हें हिर्दय जनित कोई रोग हो व गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

माह के शुरुवात में शनि का भाग्य स्थान से गोचर रहेगा अतः भाग्य का सहयोग प्राप्त करने हेतु अधिक प्रयास करना होगा, लंबी यात्राओं के योग बनेंगे, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, पैरों या जोड़ों में दर्द की शिकायत रह सकती है, माह के शुरुवात में मंगल का एकादश भाव से गोचर रहेगा फलस्वरूप आय में वृद्धि के योग बनेंगे, यात्राओं पर धन व्यय होगा, जीवनसाथी का सहयोग प्राप्त होगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, संतान से विवाद या संतान को कष्ट संभव रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, 16 अगस्त को मंगल गोचर बदलकर आपके द्वादश भाव में चले जाएंगे अतः जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, यात्राओं के योग बनेंगे, छोटे भाई-बहन से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, 1 से 4 अगस्त के मध्य व्यय में वृद्धि होगी, कर्ज देने व लेने से बचें, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, किसी के साथ व्यर्थ विवाद न करें, 5 से 8 व 16 से 18 अगस्त का समय आपके लिए अच्छा रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, जीवनसाथी से नजदीकियाँ बढ़ेंगी, कार्य क्षेत्र के लिए यह अच्छा समय रहेगा, 9 से 11 अगस्त के मध्य मानसिक तनाव रह सकता है, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, इस दौरान कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय न लें, 12 से 15 अगस्त के मध्य आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, 19 से 21 अगस्त के मध्य धन लाभ के योग बनेंगे, मित्रों से मुलाकात संभव रहेगी व उनके साथ अच्छा समय बीतेगा, 22 से 25 अगस्त के मध्य स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होगी, कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से बचें, क्रोध व वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, 26 से 28 अगस्त तक का समय आपके लिए बेहद शुभ रहेगा जिसमें मानसिक शांति अनुभव होगी, धन लाभ के योग बनेंगे, 29 से 31 अगस्त के मध्य पारिवारिक मिलन (किसी भी कारण से) संभव रहेगा, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, 9, 15, 16, 22 व 29 अगस्त के दिन धन लाभ के अच्छे योग बनेंगे, 14 अगस्त के दिन विशेष सावधानी बरतें, तनाव लेने से बचें, किसी से भी व्यर्थ विवाद में न पड़ें, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें व वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

कुल मिलाकर वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए अगस्त 2020 सामान्य रहेगा जिसमें धन लाभ के योग बनेंगे, मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, धार्मिक यात्राओं के योग बनेंगे, आध्यात्म की ओर झुकाव बढ़ेगा, व्यर्थ विवाद में न पड़ें, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, सर दर्द, नेत्रों में चोट, दर्द या जलन की शिकायत संभव रहेगी, गुरु का अष्टम भाव से गोचर स्वास्थ्य, संतान व विद्या के लिए बहुत शुभ संकेतक नही है अतः थोड़ा सावधान रहें व कोई भी बड़े या महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच-विचार कर के ही करें तथा यदि आप नौकरी परिवर्तन का विचार कर रहे हैं तो नवंबर तक रुक जाए, माह की 1, 2, 3, 4, 9, 10, 11, 22, 23, 24 व 25 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि वृषभ लग्न व वृषभ राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य सूर्य को जल देकर अदित्यहिर्दय स्तोत्र व गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

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जून 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जून 2020: वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

वृषभ लग्न
वृषभ लग्न कुंडली

 

वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए जून 2020 सामान्य रहेगा माह के शुरुवात में शुक्र का लग्न से गोचर शुभ रहेगा अतः स्वास्थ्य अच्छा रहेगा, सुख प्रदान करने वाले संसाधनों पर धन व्यय होगा, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, महिलाओं के साथ विवाद में पड़ने से बचें माह के शुरुवात में सूर्य का भी लग्न से गोचर रहेगा चतुर्थेश अर्थात सुखेश सूर्य का लग्न से गोचर मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि के योग बनाएगा, आवेश में आने से बचें व क्रोध पर नियंत्रण रखें, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी के स्वभाव में कुछ तेजी अनुभव होगी किंतु क्षणिक विवाद के बाद संबंध पुनः मधुर हो जाएंगे, नौकरी पेशा लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा 14 जून को सूर्य गोचर बदलकर आपके दूसरे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा लोगों से संबंध खराब व बनते कार्य बिगड़ते दिखेंगे, गर्म चीजों के सेवन से बचें, कुटुंब/परिवार में गर्मी का माहौल अनुभव होगा माह के शुरुवात में दूसरे भाव से राहु व बुध का गोचर भी रहेगा अतः सोच-समझकर ही बोलें व तामसिक और नशीले पदार्थों के सेवन से परहेज करें, संतान की उन्नति होगी व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा किंतु उनके स्वास्थ्य में कोई परेशानी संभव रहेगी 18 जून से बुध के वक्री होने के कारण से धन व परिवार को लेकर कुछ तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें माह के शुरुवात में केतु का अष्टम भाव से गोचर रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहें व वाहन सावधानी से चलाएं और अग्नि से सावधानी बरतें।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

माह के शुरुवात में मंगल का गोचर दशम भाव से रहेगा फलस्वरूप सम्मान में वृद्धि होगी, नवदंपत्तियों के लिए संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता गया, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा 18 जून को मंगल गोचर बदलकर आपके लाभ स्थान में चले जायेंगे फलस्वरूप आय के साथ खर्चों में भी वृद्धि के योग बनेंगे, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी माह के शुरुवात में गुरु व शनि से बना नीचभंग राजयोग शुभ रहेगा फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, वजन बढ़ने के कारण से स्वास्थ्य में परेशानी संभव रहेगी, छोटे भाई-बहन से कुछ विचारों में भिन्नता के कारण वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, यदि आपका कार्य भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है तो थोड़ा सतर्क रहें अन्यथा जेल यात्रा भी करनी पड़ सकती है 30 जून को गुरु गोचर बदलकर आपके अष्टम भाव में आ जाएंगे अतः 24 जून से स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें, दवाईयों पर धन व्यय होगा, जिन्हें हिर्दय से जुड़ी कोई समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, पशु से सावधान रहें।

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

कुल मिलाकर वृषभ लग्न व वृषभ राशि वालों के लिए जून 2020 सामान्य रहेगा जिसमें माह के शुरुवात में स्वास्थ्य अच्छा रहेगा किंतु 16 जून से कुछ समस्या संभव रहेगी चूँकि शुक्र का लग्न से गोचर के कारण से कोई गंभीर समस्या नही होगी, जीवनसाथी के स्वभाव में तेजी अनुभव होगी, सम्मान में वृद्धि होगी, जीवनसाथी से क्षणिक विवाद के बाद संबंध मधुर होंगे, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें व तनाव लेने से बचें, नवदंपत्तियों के लिए संतान से जुड़ी खुशखबरी प्राप्त हो सकती है 16 जून से 30 जून तक थोड़ी सतर्कता बरतें, माह की 16, 18, 21, 22, 23 व 27 से 30 तिथियों पर विशेष सावधान रहें, मेरे अनुसार यदि वृषभ लग्न व वृषभ राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें व अमावस्या के दिन विष्णुसहस्त्र नाम का पाठ कर बहते पानी में नारियल प्रवाहित करें तो बेहद शुभ रहेगा।

 

जय श्री राम।

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