Loading...
Categories
Astrology Sutras/Logics

ज्योतिष के 7 सरल व प्रमाणित सूत्र by Astrologer Pooshark Jetly

ज्योतिष के 7 सरल व प्रमाणित सूत्र: कुंडली देखने की अचूक विधि

ज्योतिष शास्त्र अनंत है, जहाँ ग्रहों की स्थिति हमारे जीवन की दिशा निर्धारित करती है। आज मैं, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली, अपने वर्षों के शोध के आधार पर आपके समक्ष ज्योतिष के 7 ऐसे सूत्र प्रस्तुत कर रहा हूँ जो अत्यंत सरल होने के साथ-साथ शत-प्रतिशत प्रमाणित हैं।


🔍 ज्योतिष के 7 अनुभवसिद्ध सूत्र

1. महालक्ष्मी योग: यदि लग्न कुंडली के प्रथम भाव का स्वामी द्वितीय में हो, द्वितीय का एकादश में और एकादश का स्वामी लग्न में हो, तो महालक्ष्मी योग बनता है। ऐसे जातक अत्यंत धनी होते हैं।

2. गोचर शनि का प्रभाव: यदि गोचरवश शनि पंचम भाव में आ जाएं, तो यह साढ़ेसाती व ढैया से भी अधिक कष्टकारी फल देने वाले हो सकते हैं।

3. बाल्यकाल में भाग्योदय: यदि पंचम व नवम भाव के स्वामी सप्तम में हों और सप्तमेश केंद्र में बैठा हो, तो जातक का भाग्योदय बाल्यकाल में ही हो जाता है।

4. आर्थिक संघर्ष: यदि द्वितीय भाव में सूर्य हो और उसे शनि देखता हो, तो व्यक्ति को आर्थिक रूप से कड़ा संघर्ष करना पड़ता है।

5. शनि और सफलता: यदि तृतीय, षष्ठ व एकादश भाव में शनि हो, तो जातक 36 वर्ष की आयु तक संघर्ष करता है, किंतु उत्तरार्ध में अत्यंत धनी होता है।

6. गोचर शनि की उन्नति: जब गोचर में शनि तृतीय, छठे या ग्यारहवें भाव में आते हैं, तो नौकरी या स्थान परिवर्तन के साथ बड़ी उन्नति होती है।

7. विवाह उपरांत भाग्योदय: यदि पंचमेश सप्तम में, सप्तमेश नवम में और नवमेश एकादश भाव में हो, तो भाग्योदय विवाह के बाद और संतान के सहयोग से होता है।

ज्योतिषीय चर्चा और सटीक फलादेश!

अपनी कुंडली के गुप्त राजयोगों को जानने के लिए Astrology Sutras की VIP कम्युनिटी से जुड़ें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न: क्या ये सूत्र सभी कुंडलियों पर सटीक बैठते हैं?

उत्तर: हाँ, ये अनुभवसिद्ध सूत्र हैं, जो ग्रहों के आपसी संबंधों और भावों के स्वामित्व पर आधारित होने के कारण अत्यंत सटीक परिणाम देते हैं।

प्रश्न: शनि का तृतीय भाव में होना शुभ है या अशुभ?

उत्तर: तृतीय भाव का शनि जातक को पराक्रमी और मेहनती बनाता है, जिससे जीवन के उत्तरार्ध में बहुत बड़ी सफलता मिलती है।

जय श्री राम!
ज्योतिर्विद: पूषार्क जेतली

Categories
Astrology Sutras/Logics Recent Post

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग २

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल
चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि के फल मैंने दो भागों में विभक्त किया था जिसके पहले भाग की link को मैं इस पोस्ट में उपलब्ध करा रहा हूँ साथ ही उसी विषय पर आगे चर्चा करते हुए शनि के चतुर्थ भाव में विभिन्न स्थितियों में स्थित होने के फल को विस्तार से समझाते हुए पूर्ण करता हूँ।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि उच्च राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि केवल कर्क लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को अनुशासित करने में लगे रहते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की चाह होती है कि उनके इच्छा अनुसार लोग कार्य करें ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति पक्षियों को बंधन में रखने से सुखी होते हैं ऐसे व्यक्तियों को भूमि व वाहन सुख प्राप्त होता है साथ ही इनको बहुत मजबूत विचारों वाले जीवनसाथी की प्राप्ति होती है, यदि उच्च नवांश का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति माँसाहारी होते हैं तथा माँसाहार भोजन करने में इन्हें बहुत आनंद आता है।

 

यदि शुभ वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति खेती से जुड़े कार्य से सुख की प्राप्ति करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जहाँ कच्चे माल को बनाने या खरीदने-बेचने का कार्य होता हो वहाँ अधिक सफल होते हैं, यदि पाप वर्ग का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति नकारात्मक चीजों की ओर जल्दी आकर्षित होते हैं ऋषि कश्यप का मत है कि ऐसे व्यक्ति दोषों को अपनाकर सुख का अनुभव करते हैं अतः ऐसे व्यक्तियों को कोई भी निर्णय बहुत सोच समझकर लेना चाहिए।

 

चतुर्थ भाव में शनि
चतुर्थ भाव में शनि

 

यदि नीच राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो जो कि मकर लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्ति अधिकांश समय अकेले रहना पसंद करते हैं व इन्हें भूमि और वाहन का उत्तम सुख प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी उच्च पद पर नौकरी करते हैं, यदि नीच नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति बोलते कुछ व करते कुछ हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति वंचक होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति लोगों की मदद कर के सुख को अनुभव करते हैं।

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

 

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

यदि चतुर्थ भाव में मित्र राशि का शनि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों का कार्यस्थल पर अधिक मन लगता है व ऐसे व्यक्ति परिवार से अधिक अपने कार्य को महत्व देते हैं, यदि शत्रु राशि का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को ठगने से सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे सभी कार्य जिसमें बुद्धि-विवेक द्वारा मुनाफा अधिक कमाया जा सकता है उन सभी कार्यों जैसे मार्केटिंग, बिज़नेस में अधिक सफल होते हैं।

 

यदि मित्र नवांश का शनि चतुर्थ भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के घरेलू सुख में कुछ तनाव की स्थिति बनी रहती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख अवश्य प्राप्त होता है, शत्रु नवांश का शनि चतुर्थ भाव हो तो ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर सुखी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति जीवों को बेचकर धनार्जन करते हैं अब आज के समय में dog cannel खोलना वगैरह इसके प्रत्यक्ष उदाहरण हैं।

 

Astrology Sutras

 

यदि वर्गोत्तम स्थिति का शनि चतुर्थ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति दूसरों को हानि पहुँचा कर सुख का अनुभव करते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति कुछ इस तरह का कार्य करते हैं जिससे दूसरों को हानि या दुःख पहुँचे उदाहरण के तौर पर जैसे वकालत का कार्य क्योंकि इसमें व्यक्ति अपने पक्ष के व्यक्ति को विजय दिलवाकर उनसे सुख के साधन प्राप्त करता है किंतु उसके इस कृत्य से दूसरे पक्ष को कुछ हानि व दुःख पहुँचता है।

 

यदि स्वराशि शनि चतुर्थ भाव में हो जो कि तुलावृश्चिक लग्न की कुंडली में ही संभव है तो व्यक्ति रस पदार्थ बेचकर सुखी होता है कहने का आशय यह है कि ऐसा व्यक्ति कोई ऐसा कार्य करता है जिससे दूसरों को सुख की अनुभूति हो साथ ही ऐसे व्यक्तियों भूमि सुख निश्चय ही प्राप्त होता है, यदि तुला लग्न की कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में हो तो अधिक लाभकारी होता है क्योंकि तुला लग्न की कुंडली में राजयोगकारक हो जाता है और दसवीं दृष्टि से लग्न को अपनी उच्च राशि में देखता है अतः तुला लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि व्यक्ति की मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि करता है व बड़ी सफलता दिलवाता है वहीं वृश्चिक लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में स्थित शनि दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों की परिश्रम अधिक करना पड़ेगा क्योंकि शनि तीसरे भाव अर्थात पराक्रम भाव का भी स्वामी होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यधिक परिश्रम कर के जीवन में बड़ी सफलता को प्राप्त करते हैं।

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग:-१ पढ़ने के लिए इस link पर जाएं:-

चतुर्थ भाव में स्थित शनि का फल भाग १

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470