होलाष्टक 2026 में शुभ कार्य वर्जित होने का सच, मुहूर्त चिंतामणि का प्रमाण और ज्योतिषीय उपाय - Astrology Sutras

होलाष्टक: क्या 8 दिनों तक सच में बंद हो जाते हैं शुभ कार्य? जानें शास्त्रीय सत्य

होलाष्टक का सच: क्या सचमुच 8 दिनों तक बंद रहते हैं शुभ कार्य? (मुहूर्त्त चिंतामणि के प्रमाण सहित)

Astrology Sutras के सभी पाठकों को जय श्री राम! ज्योतिष शास्त्र में ‘होलाष्टक’ (Holashtak) को लेकर अक्सर समाज में डर और संशय देखा जाता है। सोशल मीडिया पर कई ऐसी भ्रामक बातें फैलाई जाती हैं कि इन 8 दिनों में विवाह, मुंडन, या गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्य पूरी तरह वर्जित हैं। लेकिन क्या यह सत्य है? प्राचीन सनातन शास्त्रों और ‘मुहूर्त्त चिंतामणि’ के अनुसार, इसकी सच्चाई कुछ और ही है।

आइए, आज हम इस लेख में होलाष्टक से जुड़ी सभी भ्रांतियों को दूर करते हुए आपको इसका सटीक शास्त्रीय प्रमाण देते हैं।

🔥 होलाष्टक क्या है और 2026 में कब से शुरू है?

होलिका दहन से ठीक 8 दिन पहले के समय को ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इन 8 दिनों में नवग्रह (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु) थोड़े ‘उग्र’ (तेज) स्वभाव के हो जाते हैं, जिसके कारण साधना और मंत्र सिद्धि का फल कई गुना बढ़ जाता है।

  • होलाष्टक प्रारंभ: 23 फरवरी 2026 (सोमवार)
  • होलाष्टक समाप्ति: 2 मार्च 2026 (होलिका दहन के साथ)

📜 होलाष्टक की भ्रांतियां बनाम शास्त्रीय सत्य

प्रसिद्ध ज्योतिषीय ग्रंथ ‘मुहूर्त्त चिंतामणि’ और ‘शीघ्रबोध’ के अनुसार, होलाष्टक का नियम पूरी दुनिया या पूरे भारतवर्ष के लिए लागू नहीं होता है। इसके लिए महर्षियों ने एक अत्यंत स्पष्ट और विशेष श्लोक दिया है:

“शतद्रुयां विपाशायामैरावत्यां त्रिपुष्करे।
होलाष्टकं विवाहादौ त्याज्यमन्यत्र शोभनम्॥”

सरल अर्थ: होलाष्टक का दोष केवल सतलुज (शतद्रु), व्यास (विपाशा) और रावी (इरावती) नदियों के किनारे वाले क्षेत्रों और पुष्कर (राजस्थान) में ही प्रभावी होता है। श्लोक के अंत में अत्यंत स्पष्ट रूप से लिखा है—‘अन्यत्र शोभनम्’, जिसका अर्थ है कि इन विशेष स्थानों को छोड़कर बाकी सभी जगहों पर यह समय शुभ कार्यों के लिए एकदम श्रेष्ठ और शुभ है।

🚫 किन क्षेत्रों में लगता है होलाष्टक का दोष?

वैदिक प्रमाणों के अनुसार, होलाष्टक की पाबंदी और शुभ कार्यों की मनाही केवल इन राज्यों के कुछ विशिष्ट हिस्सों में ही मान्य है:

  • पंजाब: अमृतसर, लुधियाना, फिरोजपुर और आसपास के क्षेत्र।
  • हिमाचल प्रदेश: कांगड़ा और व्यास नदी के तटीय क्षेत्र।
  • राजस्थान: केवल अजमेर और पुष्कर क्षेत्र।

विशेष ध्यान दें: उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, मध्य प्रदेश, गुजरात, और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में होलाष्टक का कोई भी दोष नहीं लगता है।

🎓 ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी की विशेष राय (Expert Advice)

Astrology Sutras के संस्थापक और काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषी ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार, होलाष्टक को लेकर अनावश्यक भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया है कि:

“यदि आपके स्थानीय पंचांग में विवाह, द्विरागमन, मुंडन, नामकरण या गृह प्रवेश का शुभ मुहूर्त्त मौजूद है, तो बिना वजह होलाष्टक के भय से उसे रोकने की कोई आवश्यकता नहीं है। स्थानीय मुहूर्त्त की शुद्धता ही सबसे महत्वपूर्ण होती है।”

🙏 होलाष्टक में क्या करना सबसे ज्यादा फायदेमंद है?

आध्यात्मिक और तांत्रिक दृष्टि से ये 8 दिन (होलाष्टक) ऊर्जा के दृष्टिकोण से बहुत शक्तिशाली होते हैं। इस दौरान ग्रहों की उग्रता को शांत करने और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आप ये अचूक उपाय कर सकते हैं:

  • रोगों से मुक्ति और अकाल मृत्यु के भय को दूर करने के लिए महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप करें।
  • धन और सुख-शांति की प्राप्ति के लिए भगवान विष्णु के सिद्ध मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का पाठ करें।
  • यह समय ईश्वरीय साधना, ध्यान (Meditation) और मानसिक शांति प्राप्त करने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

✨ निष्कर्ष

होलाष्टक को लेकर अनावश्यक डर पालने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आप पंजाब, हिमाचल या पुष्कर के निवासी नहीं हैं, तो आप बेझिझक अपने सभी शुभ और मांगलिक कार्य संपन्न कर सकते हैं। शास्त्रों द्वारा दी गई छूट (‘अन्यत्र शोभनम्’) का सम्मान करें और भ्रामक जानकारियों से बचें।

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होलाष्टक 2026 से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: होलाष्टक 2026 में कब से कब तक है?
उत्तर: साल 2026 में होलाष्टक 23 फरवरी (सोमवार) से प्रारंभ होकर 2 मार्च (होलिका दहन के दिन) तक रहेगा।
प्रश्न 2: क्या होलाष्टक में सभी शुभ कार्य बंद हो जाते हैं?
उत्तर: नहीं, यह एक भ्रांति है। ‘मुहूर्त चिंतामणि’ शास्त्र के अनुसार होलाष्टक का दोष केवल पंजाब, हिमाचल के कुछ हिस्सों और राजस्थान के पुष्कर क्षेत्र में लगता है। भारत के अन्य राज्यों (जैसे यूपी, बिहार, एमपी, महाराष्ट्र आदि) में इस दौरान शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
प्रश्न 3: होलाष्टक के दौरान किन क्षेत्रों में दोष लगता है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, सतलुज (शतद्रु), व्यास (विपाशा) और रावी (इरावती) नदियों के किनारे वाले क्षेत्रों (पंजाब, हिमाचल) और पुष्कर (राजस्थान) में ही होलाष्टक का दोष प्रभावी होता है।
प्रश्न 4: होलाष्टक के 8 दिनों में क्या करना चाहिए?
उत्तर: आध्यात्मिक दृष्टि से होलाष्टक के 8 दिन तंत्र-मंत्र और साधना के लिए अत्यंत शक्तिशाली माने गए हैं। इन दिनों में महामृत्युंजय मंत्र और भगवान विष्णु के मंत्र ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप करना सर्वश्रेष्ठ होता है।