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जून 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

जून 2020: मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए कैसा रहेगा

 

मेष लग्न कुंडली
मेष लग्न कुंडली

 

मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जून 2020 मिला-जुला रहेगा माह के शुरुवात में गुरु व शनि का दशम भाव से गोचर रहेगा और यह दोनों ही ग्रह वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप कार्यक्षेत्र में तनाव की कुछ स्थिति उत्पन्न हो सकती है, अतिरिक्त कार्यभार के चलते कुछ थकान भी अनुभव होगी अतः तनाव लेने से बचें, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी 30 जून को गुरु पुनः धनु राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से 25 से 29 जून तक का समय विद्यार्थियों के लिए अच्छा समय रहेगा क्योंकि यह वह समय रहेगा जब गुरु पुनः अपनी राशि में गोचर करने आ रहे होंगे, यदि आप किसी से प्रेम करते हैं व उनको विवाह के लिए प्रपोज करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए अच्छा रहेगा, भाग्य वृद्धि हेतु कुछ अधिक प्रयास करना पड़ेगा, ससुराल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या उत्पन्न हो सकती है, माह के शुरुवात में दूसरे भाव से सूर्य व शुक्र का गोचर रहेगा जहाँ शुक्र वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयत्न करना होगा, जीवनसाथी पर धन व्यय होगा, दाईं आँख में कोई तकलीफ संभव रहेगी, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं 5 जून2020 को चंद्र ग्रहण है जो कि आपकी कुंडली के अष्टम भाव से रहेगा अतः 5 जून के दिन यदि संभव हो सके तो घर पर ही रहें बहुत ही आवश्यक होने पर ही सावधानी पूर्वक घर के बाहर निकलें, तनाव की स्थितियाँ बनेंगी, स्वास्थ्य में परेशानी भी संभव रहेगी 14 जून को सूर्य गोचर बदलकर आपके तीसरे भाव में आ जाएंगे फलस्वरूप पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें 21 जून को सूर्य ग्रहण है अतः उस दिन विशेष सावधानी बरतें, आवेश में आने से बचें।

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

माह के शुरुवात में बुध व राहु का तीसरे भाव से गोचर रहेगा अतः तनाव लेने से बचें क्योंकि बुध आपके छठे भाव जो कि रोग व शत्रु का भाव है उसका स्वामी भी है, छोटे भाई-बहन के स्वास्थ्य में भी समस्या रहेगी, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें 8 जून से 13 जून आपका पड़ोस के किसी मित्र के साथ अच्छा समय बीतेगा व पड़ोसियों से संबंध मधुर होंगे, 14 जून से 17 जून तक का समय कार्यक्षेत्र के लिए काफी अच्छा रहेगा, यात्राओं के योग बनेंगे व उन यात्राओं से लाभ भी प्राप्त होगा, माह के शुरुवात में मंगल का लाभ स्थान से गोचर रहेगा फलस्वरूप बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, क्रोध पर नियंत्रण रखें, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी 18 जून को मंगल गोचर बदलकर आपके द्वादश भाव में चले जाएंगे फलस्वरूप यात्राओं, बड़े भाई, संतान, दवाईयों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे साथ ही 18 जून को बुध भी वक्री हो जाएंगे अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, यदि आप नौकरी परिवर्तन का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं तो सितंबर तक रुक जाएं अन्यथा अचानक से कोई बड़ी समस्या आ सकती है, मित्रों का सहयोग मिलेगा, नवम भाव से केतु का गोचर भाग्य वृद्धि में कुछ दिक्कतें पैदा कर सकता है, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, जीवनसाथी के भाई-बहन के स्वास्थ्य में कोई परेशानी संभव रहेगा।

 

Mesh rashi
मेष राशि

 

कुल मिलाकर मेष लग्न व मेष राशि वालों के लिए जून 2020 मिला-जुला रहेगा जिसमें जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, माता-पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें 5 जून के दिन विशेष सावधानी बरतें, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगा, अचानक धन लाभ हो सकता है, जीवनसाथी, दवाईयों, संतान, यात्राओं पर धन व्यय होगा, 1 से 17 जून तक का समय आपके लिए अच्छा रहेगा किंतु 18 जून से आपको कार्यक्षेत्र में अधिक प्रयास करना होगा, अपने सीनियर के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें, 18 जून के बाद नौकरी परिवर्तन करने से बचें, तनाव लेने से बचें, माह की 1, 2, 5, 21, 30 तिथियों पर विशेष सावधानी बरतें, मेरे अनुसार यदि मेष लग्न व मेष राशि वाले व्यक्ति यदि नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र व सुंदरकांड और हनुमान बाहुक का पाठ करें तो लाभ होगा।

 

जय श्री राम।

Astrologer:- Pooshark Jetly

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14 मई 2020 को गुरु होंगे वक्री जानें, किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा –Astrology Sutras

14 मई 2020 को गुरु होंगे वक्री जानें, किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा –Astrology Sutras

 

गुरु के वक्री होने का फल
गुरु के वक्री होने का फल

 

14 मई 2020 को गुरुवार के दिन रात्रि के 7 बजकर 57 मिनट पर गुरु उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण व मकर राशि से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे तथा 13 सितंबर को प्रातः 6 बजकर 11 मिनट पर पुनः मार्गी हो जाएंगे इस 122 दिन वक्री अवस्था के दौरान गुरु शुरुवात में 46 दिन तक मकर राशि में गोचर करेंगे और उसके बाद 76 दिनों तक गुरु अपनी ही स्वामित्व वाली राशि धनु से वक्री अवस्था में गोचर करते हुए 13 सितंबर को धनु राशि में मार्गी होंगे तो चलिए जानते हैं गुरु के वक्री अवस्था में गोचर के दौरान किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

वक्री गुरु का फल

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना शुभ रहेगा जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं उनको अच्छे अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आपकी पूर्व की बनाई हुई योजनाएं भी सफल होंगी, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना मिला-जुला रहेगा मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, धार्मिक कार्यों में धन अधिक व्यय होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान को कष्ट संभव है, किसी संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे, कारोबार में सावधानी रखें और वाहन सावधानी से चलाएं, अचानक यात्राओं के योग बनेंगे, जिन्हें हिर्दय व रक्त से जुड़ी कोई समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना सामान्य रहेगा पिछले कुछ समय से चली आ रही परेशानियों से राहत मिलेगी, वाहन सुख प्राप्त होने के योग बनेंगे, कार्यस्थल पर लोग आपके खिलाफ षड्यंत्र रच सकते हैं अतः लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, व्यर्थ के विवाद में पड़ने से बचें, बड़े भाई यदि विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है आय वृद्धि के नए मार्ग बनेंगे।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना सामान्य रहेगा व्यापारियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, आय में वृद्धि होगी, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, यदि आप विवाह योग्य हो गए हैं तो कुछ मुश्किल के साथ कहीं रिश्ता पक्का हो सकता है, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, पिता व संतान पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना मिला-जुला रहेगा शत्रुओं से सावधान रहें, खर्चों पर नियंत्रण बनाकर रखें, यात्राओं के योग बनेंगे, किसी अप्रिय समाचार से मन व्यथित हो सकता है, वाहन सावधानी से चलाएं, कार्यक्षेत्र के लिए गुरु का वक्री होना शुभ रहेगा, उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, अचानक धन लाभ होने के योग बनेंगे।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना शुभ सिद्ध होगा पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, संतान की उन्नति होगी व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, प्रेमियों के लिए गुरु का वक्री होना मिला-जुला रहेगा।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना मिला-जुला रहेगा घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न होने से मन अशांत रहेगा, तनाव लेने से बचें, सामान चोरी होने के योग बनेंगे, व्यर्थ की यात्राएं टालने का प्रयास करें, किसी संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र के गुरु का वक्री होना सामान्य रहेगा, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना शुभ रहेगा आवेश में आने से बचें, मेहनत का पूर्ण फल प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होगी, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, जिन्हें हिर्दय से जुड़ी कोई समस्या हो वह अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, किसी रिश्तेदार या पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना शुभ रहेगा जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, अचानक धन लाभ हो सकता है, व्यर्थ के विवाद में न पड़ें, कार्यक्षेत्र में लोग आपके खिलाफ षड्यंत्र रच सकते हैं अतः लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, सीनियर का सहयोग प्राप्त होगा, प्रेमियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा, पुराने मित्रों से मुलाकात संभव है, क्रोध पर नियंत्रण रखें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना सामान्य रहेगा आवेश में आने से बचें, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, किसी संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन हो सकता है।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना सामान्य रहेगा योजनाएं सफल होंगी, उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी जिससे कुछ थकान अनुभव होगी, खर्चों पर नियंत्रण रखें, किसी को उधार पैसा देने से बचें, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, बड़े भाई का सहयोग प्राप्त होगा।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होना शुभ रहेगा व्यर्थ के विवाद में न पड़ें, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, लोगों की बातों में आने से बचें, रुका हुआ धन प्राप्त होने के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा फिर भी माता के स्वास्थ्य को लेकर बीच में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, प्रेमियों के लिए यह समय सामान्य रहेगा, नव दंपत्तियों के लिए संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव है, किसी स्थिर रहने वाली संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे।

 

जय श्री राम।

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सूर्य का वृषभ राशि से गोचर 14 मई 2020: जानें किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा

सूर्य का वृषभ राशि से गोचर 14 मई 2020: जानें किस राशि पर क्या प्रभाव पड़ेगा

 

सूर्य का वृषभ राशि से गोचर
सूर्य का वृषभ राशि से गोचर

 

सूर्य 14 मई 2020 को शाम के 5 बजकर 33 मिनट पर मेष राशि को छोड़कर वृषभ राशि में प्रवेश करेंगे जिस कारण से सूर्य की मेष की सक्रांति समाप्त होकर सूर्य की वृषभ की सक्रांति लगेगी, सूर्य के गोचर परिवर्तन को सूर्य की सक्रांति के नाम से भी जाना जाता है, सूर्य एक राशि में 30 दिन तक गोचर करते हैं जिसका विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है तो चलिए जानते हैं सूर्य के वृषभ राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

सूर्य का वृषभ राशि में गोचरफल
सूर्य का वृषभ राशि में गोचरफल

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के सूर्य पंचम भाव के स्वामी होकर दूसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय वृद्धि के नए माध्यम बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, जो लोग फाइनेंस, बैंकिंग, मार्केटिंग से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनके लिए यह अच्छा समय रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें, दाहिने आँख में किसी प्रकार की कोई तकलीफ संभव है, कुटुंब से मतभेद संभव रहेगा, तामसिक चीजों के सेवन से परहेज करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए सूर्य चतुर्थ भाव के स्वामी होकर पहले भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे क्रोध पर नियंत्रण रखें, नौकरी पेशा लोगों के लिए अच्छा समय रहेगा, आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, आय में वृद्धि के नए माध्यम बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, किसी संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, सर दर्द की समस्या रह सकती है।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए सूर्य तीसरे भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, सरकारी कर्मचारियों से व्यर्थ विवाद में न पड़ें, खर्चों में वृद्धि होगी, कार्यस्थल पर तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, नेत्र में चोट लगने के योग बनेंगे, गर्म चीजों व अधिक चिकनाई वाली चीजों के सेवन से परहेज करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दूसरे भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे, आय में वृद्धि होगी, बड़े भाई का सहयोग प्राप्त होगा, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, रुका हुआ धन अचानक प्राप्त होने के योग बनेंगे, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, उड़ी आप सराफा व्यापारी है तो सूर्य का यह गोचर बेहद शुभ सिद्ध होगा, प्रेमियों के लिए सूर्य का यह गोचर मिला-जुला रहेगा।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए सूर्य पहले भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, घर के वातावरण में तनाव वाला माहौल रह सकता है अतः तनाव लेने से बचें, लंबे समय से रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन व प्रमोशन का इंतजार कर रहे हैं उनके लिए सूर्य का यह गोचर अच्छा सिद्ध होगा, स्वास्थ्य अच्छा रहेगा।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए सूर्य द्वादश भाव के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप रुके हुए कार्य पूर्ण होंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, पराक्रम में वृद्धि होगी, उन्नति के नए मार्ग बनेंगे, भाग्योदय हेतु अधिक प्रयास करना होगा, पिता व गुरु के साथ वैचारिक मतभेद संभव है, धार्मिक कार्यों में रुचि बड़ेगी।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए सूर्य एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप ससुराल पक्ष का सहयोग प्राप्त होगा, तामसिक चीजों व मदिरा या अन्य नशों से परहेज करें अन्यथा किसी गंभीर बीमारी के प्रभाव में आने के योग बनेंगे, बड़े भाई से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, धार्मिक कार्यों व दवाईयों पर धन व्यय होंगे।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवनसाथी से विवाद संभव रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह में दिक्कतें आएंगी, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें तो हालात काफी हद तक आपके पक्ष में होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्ति हेतु अत्यधिक प्रयत्न करना होगा, किसी पुरुष के सहयोग से अधूरे कार्य पूर्ण होंगे।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए सूर्य नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, किसी पुराने ऋण से मुक्ति मिलेगी, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए सूर्य अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान प्राप्ति के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, बड़े भाई से वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखें व अधिक कार्य करने से बचें, आय में वृद्धि होगी, किसी पुराने ऋण से मुक्ति मिलेगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, प्रेमियों के लिए सूर्य का यह गोचर सामान्य रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए सूर्य सप्तम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आपके कार्य से आपके सीनियर खुश रहेंगे व आपके कार्य की सराहना भी करेंगे और उनका सहयोग भी आपको प्राप्त होगा, सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन के योग बनेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, यदि आप स्थान परिवर्तन करना चाहते हैं तो उसके भी योग बनेंगे, भूमि-वाहन सुख प्राप्त होगा।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए सूर्य छठे भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आत्मविश्वास में वृद्धि होगी, पराक्रम बड़ा रहेगा अर्थात आप मेहनत से पीछे नही हटेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, भाग्य में वृद्धि होगी।

 

जय श्री राम।

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सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: २

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: २

 

शनि का सप्तम भाव में फल पढ़ने के लिए इस link पर जाएं।

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

 

विवाह भाव में विरक्ति कारक शनि
विवाह भाव में विरक्ति कारक शनि

 

यदि उच्च राशि का शनि सप्तम भाव में बैठा हो जो कि मेष लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी स्थूल शरीर के होते हैं, ऐसे व्यक्ति छोटे स्तर से शुरू कर के जीवन में एक बहुत बड़ी सफलता प्राप्त करते हैं तथा समाज में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, यदि उच्च नवांश का शनि सप्तम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी श्याम वर्ण के थोड़े जिद्दी स्वभाव वाले होते हैं।

 

यदि शुभ वर्ग का शनि सप्तम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी शुद्ध स्वभाव वाले होते हैं कहने का आशय यह है कि उनमें छलावा नही होता अर्थात वो आपको जैसे दिखते हैं वैसे ही अंदर से भी होते हैं, यदि पाप वर्ग का शनि सप्तम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी की विपरीत लिंग के प्रति अधिक रुचि रहती है कहने का आशय यह है कि विपरीत लिंग के व्यक्ति इनके अधिक दोस्त होते हैं।

 

शनि का सप्तम भाव में फल पढ़ने के लिए इस link पर जाएं।

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

 

 

यदि नीच राशि का शनि सप्तम स्थान में बैठा हो तो ऐसे व्यक्तियों को भूमि सुख अवश्य ही प्राप्त होता है तथा संतान का सुख भी प्राप्त होता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी का देह कठोर होता है, यदि नीच नवांश का शनि सप्तम भाव में बैठा हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी धर्म विरुद्ध आचरण करते हैं कहने का आशय यह है कि उनको हर कार्य सबसे अलग तरीके से करना पसंद करते हैं।

 

ऋषि कश्यप के अनुसार यदि मित्र राशि का शनि सप्तम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी को क्रोध शीघ्र आता है, यदि मित्र नवांश का शनि सप्तम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी में अच्छे गुणों का अभाव रहता है किंतु मेरे मत व अनुभव के अनुसार मित्र राशि व मित्र नवांश का शनि यदि सप्तम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी न्याय प्रिय, शांत स्वभाव किंतु क्रोधित हो जाने पर कभी माफ न करने वाले, धर्म की मर्यादा में रहकर आचरण करने वाले, अच्छे गुणों से संपन्न, श्याम वर्ण, जिद्दी होते हैं।

 

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल
सप्तम भाव में स्थित शनि का फल

 

शनि का सप्तम भाव में फल पढ़ने के लिए इस link पर जाएं।

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

 

यदि वर्गोत्तमशनि सप्तम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी को चुगली करने की आदत होती है अर्थात ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी कोई भी बात गुप्त नही रख पाते हैं।

 

यदि स्वराशि शनि सप्तम भाव में स्थित हो जो कि कर्क लग्न व सिंह लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी मजबूत इरादों वाले होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों को अपने जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बैठाने में समय लगता है तथा ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी के पास पैसे की कमी बनी रहती है, यदि कर्क लग्न की कुंडली में स्वग्रही शनि सप्तम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी का स्वभाव अलगाववादी होगा, वाचाल/बोलना/बातें कम करेंगे, दामपत्य जीवन में नीरसता अनुभव होगी तथा अपनी बातों पर अडिग रहेंगे, यदि सिंह लग्न की कुंडली में स्वग्रही शनि सप्तम भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी समझदार व शिक्षित होते हैं साथ ही अपनी बातों पर अडिग रहते हैं।

 

शनि का सप्तम भाव में फल पढ़ने के लिए इस link पर जाएं।

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

 

जय श्री राम।

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11 मई 2020 शनि वक्री होकर करेंगे इन राशियों को प्रभावित जानें, किन राशि वालों पर वक्री शनि का क्या प्रभाव पड़ेगा— Astrology Sutras

11 मई 2020 शनि वक्री होकर करेंगे इन राशियों को प्रभावित जानें, किन राशि वालों पर वक्री शनि का क्या प्रभाव पड़ेगा— Astrology Sutras

 

शनि वक्री
शनि वक्री

 

11 मई 2020 को सोमवार के दिन प्रातः 9 बजकर 27 मिनट पर शनि वक्री होकर मकर राशि से गोचर करेंगे उस समय शनि का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के चतुर्थ चरण से गोचर रहेगा तथा शनि 142 दिन अर्थात 4 माह 18 दिन तक वक्री अवस्था में गोचर करने के बाद 29 सितंबर को उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के द्वितीय चरण के साथ पुनः मार्गी हो जाएंगे तो चलिए जानते हैं शनि के वक्री अवस्था में गोचर के दौरान किन राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

 

शनि वक्री
शनि वक्री

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ सिद्ध होगा जो लोग नौकरी परिवर्तन का लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं उनके लिए नौकरी परिवर्तन के अच्छे योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में व्यर्थ के विवाद से बचें, कार्य के सिलसिले से किसी छोटी यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, सीनियर आपके कार्य से प्रसन्न रहेंगे व आपके कार्य की सराहना करेंगे, माता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद संभव रहेगा।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना कुछ तनाव वाला रह सकता है, पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, परिवार व नौकरी के कारण से तनाव की स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, आवेश में आकर कोई भी निर्णय लेने से बचें, यदि आपका भ्रष्टाचार से जुड़ा हुआ है तो यह समय थोड़ा सतर्क रहें अन्यथा जेल यात्रा भी करनी पड़ सकती है, तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए यह समय अच्छा सिद्ध होगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना ज्यादा शुभ नही रहेगा स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, दामपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह में कुछ विघ्न आ सकते हैं, जिनका विवाह हो गया है उनका ससुराल पक्ष के लोगों से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, जोड़ों, कमर व पैर में दर्द की शिकायत संभव रहेगी वाहन सावधानी से चलाएं।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छा नही है अतः स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, व्यापारियों के लिए भी यह अच्छा समय सिद्ध होगा, दामपत्य जीवन उतार-चढ़ाव वाला रहेगा, जीवन मे। भागा-दौड़ी बनी रहेगी, भाग्य वृद्धि हेतु अत्यधिक प्रयास करना होगा, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, किसी संपत्ति के क्रय/खरीदने के योग बनेंगे।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा किसी पुराने रोग से छुटकारा मिल सकता है, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, वाहन सावधानी से चलाएं, अचानक यात्रा के योग बनेंगे, आवेश में आने से बचें, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, खर्चों में वृद्धि होगी, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा नही है अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान की उन्नति होगी व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा, जिनका विवाह हो गया है व संतान की चाह रखते हैं उनके लिए शनि का वक्री होना शुभ समाचार दे सकता है, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे थे वह अभी सितंबर तक रुक जाएं अन्यथा आय हेतु कड़ा संघर्ष करना पड़ सकता है, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद होंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा वाहन सुख प्राप्त होने के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा व उनका सहयोग भी प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, वाहन सावधानी से चलाएं, लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचें, जटिल कार्यों को करने में रुचि बढ़ेगी, संतान का सहयोग प्राप्त होगा, पिता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना बेहद शुभ रहेगा पराक्रम में वृद्धि होगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, धार्मिक यात्रा के योग बनेंगे, कार्यक्षेत्र में लोग आपके कार्य की सराहना करेंगे, सीनियर आपके कार्य से खुश रहेंगे, अत्यधिक परिश्रम करने पर एक बड़ी सफलता प्राप्ति के योग बनेंगे, यात्राओं के योग बनेंगे, संतान की उन्नति होगी व संतान का सहयोग भी प्राप्त होगा, आय में वृद्धि होने के योग बनेंगे।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना मिला-जुला रहेगा दामपत्य जीवन में कलह-क्लेश हो सकते हैं, ससुराल पक्ष के लोगों से भी वैचारिक मतभेद हो सकते हैं, आय वृद्धि हेतु अत्यधिक प्रयास करना होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, माता के स्वास्थ्य में सुधार होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, बड़े भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा परिवार के सदस्यों का सहयोग प्राप्त होगा, पराक्रम में वृद्धि होगी, छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे, जीवनसाथी से विचारों में भिन्नता रहेगी जिस कारण कुछ तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है अतः तनाव लेने से बचें, कार्यक्षेत्र में उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, प्रमोशन के योग बन रहे हैं, जो लोग लंबे समय से नौकरी परिवर्तन के लिए प्रयास कर रहे हैं उनके लिए अच्छे योग बन रहे हैं, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना सामान्य रहेगा खर्चों में वृद्धि होगी, शत्रुओं से सावधान रहें, फिजूल की यात्राओं पर धन व्यय करने से बचें, वाहन सावधानी से चलाएं, कुटुंब से मतभेद संभव है, किसी को पैसा देने व लेने से बचें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना शुभ रहेगा उच्च अधिकारियों से मुलाकात होगी व उनसे आपके संबंध मजबूत होंगे, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, विद्यार्थियों के लिए यह समय बहुत शुभ नही रहेगा, उदर में कोई रोग होने की संभावना रहेगी अतः खान-पान पर ध्यान दें, जटिल कार्यों को करने में रुचि बड़ेगी, वाहन सावधानी से चलाएं, आध्यात्म की ओर झुकाव बड़ेगा।

 

जय श्री राम।

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सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल भाग: १

 

विवाह भाव में विरक्ति कारक शनि
विवाह भाव में विरक्ति कारक शनि

 

सप्तम भाव से हम विवाह, जीवनसाथी, मित्र, साझेदारी, नौकरी का विचार करते हैं जहाँ बैठा हुआ विरक्ति का कारक शनि इन सभी को प्रभावित करता है, सप्तम भाव में शनि को दिग्बल भी प्राप्त होता है अतः सप्तम भाव में स्थित शनि दामपत्य जीवन के लिए बहुत शुभ नही कहा गया है ऐसे व्यक्तियों के दामपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है, ऐसे व्यक्ति अपने जीवनसाथी के प्रति जिम्मेदारियों को तो भली भांति समझते हैं किंतु शनि विरक्ति का कारक होने के कारण से किस प्रकार प्रेम किया जाए या किस कारण से प्रेम का इजहार किया जाए उनके लिए समझ पाना थोड़ा मुश्किल होता है ऐसे व्यक्ति जीवनसाथी की खुशी को अपना कर्तव्य समझकर उनकी खुशी के लिए सब करते तो हैं किंतु इनमें आंतरिक इच्छा की कमी रहती है सप्तम भाव में स्थित शनि व्यक्ति को मेहनती बनाता है तथा ऐसे व्यक्ति अपने लक्ष्य को पाने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं जिस कारण से भी इनके दामपत्य जीवन में वो रस नही रहता जो कि सामान्यतः होना चाहिए, शनि मंद गति से चलने वाला ग्रह है जिस कारण से सप्तम भाव में स्थित शनि विवाह में देरी कराता है किंतु यदि दूसरे ग्रहों का सप्तम भाव से अच्छा संबंध बन रहा हो तो विवाह जल्दी होता है, मेरे अनुभव के अनुसार सप्तम भाव में स्थित शनि तलाक नही होने देता किंतु यदि अन्य ग्रहों से तलाक होने के योग बनते हैं तो बहुत मुश्किल से तलाक हो पाता है, सप्तम भाव में स्थित शनि सीमित संख्या में मित्रों का होना भी दर्शाता है कहने का आशय यह है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि सप्तम भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के मित्र कम होते हैं अर्थात सीमित होते हैं, ऐसे व्यक्तियों के जीवनसाथी गंभीर स्वभाव के होते हैं तथा अपनी जिम्मेदारियों को निभाना जानते हैं और उन्हें रिश्तों को संजो कर रखना भी आता है।

 

विशेष:-

 

बहुत से लोगों का मानना रहता है कि सप्तम भाव में स्थित शनि हो तो विवाह नही होता किंतु मेरे मत व अनुभव के अनुसार सप्तम भाव में बैठा शनि विवाह में देरी करवाता है किंतु विवाह अवश्य ही होता है।

 

सप्तम भाव में स्थित शनि का फल
सप्तम भाव में स्थित शनि का फल

 

सप्तम भाव में स्थित शनि तीसरी दृष्टि से नवम भाव में रहेगी जो कि यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्तियों की धर्म-आध्यात्म में अच्छी रुचि रहती है साथ ही ऐसे व्यक्ति जीवन की शुरुवात में कुछ संघर्ष करते हुए जीवन के उत्तरार्ध में अच्छा जीवन जीते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों को भाग्योदय हेतु कड़ा संघर्ष करना पड़ता है, शनि की सप्तम दृष्टि लग्न पर पड़ेगी जो कि यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति अधिकतर अकेले रहना पसंद करते हैं व कम बोलते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति भीड़ वाली जगहों पर जाने से बचते हैं तथा इनके मित्र भी सीमित संख्या में होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति कर्म को भाग्य से अधिक तवज्जो देते हैं, शनि की दशम दृष्टि चतुर्थ भाव पर पड़ेगी जो कि यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति घर से बाहर रहना अधिक पसंद करते हैं तथा इनका अधिकतर समय कार्यस्थल पर ही बीतता है ऐसे व्यक्तियों के घर के वातावरण में गर्म माहौल रहता है।

 

इसका दूसरा भाग जल्द ही प्रकाशित करूँगा जिसमें शनि के विभिन्न स्थितियों में सप्तम भाव पर स्थित होने के फल बतायूँगा।

 

जय श्री राम।

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रोग भाव में स्थित शनि का फल

रोग भाव में स्थित शनि का फल

 

षष्ठ भाव में स्थित शनि का फल
षष्ठ भाव में स्थित शनि का फल

 

कुंडली के छठे भाव से हम रोग, शत्रु, ऋण, संघर्ष, मामा का विचार करते हैं जहाँ बैठा शनि इन सभी को प्रवाभित करता है ग्रंथकारों के अनुसार यदि शनि छठे भाव में स्थित हो तो शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है, अचानक धन प्राप्त होने के योग बनते हैं, छठे भाव में स्थित शनि दामपत्य जीवन के लिए भी अच्छा होता है कुल मिलाकर लगभग सभी ग्रंथकारों ने छठे भाव में शनि को शुभ बताया है, मानसागर के अनुसार यदि नीच राशि का शनि छठे भाव में स्थित हो तो वह उसके कुल के लिए अच्छा नही होता अर्थात ऐसे व्यक्तियों का कुल सीमित रह जाता है, मेरे अनुभव के अनुसार यदि शनि छठे भाव में स्थित हो तो व्यक्ति को कोई ऐसी बीमारी अवश्य रहती है जो उनके वंश में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही हो जैसे रक्त जनित कोई विकार, डाइबिटीज, ब्लडप्रेशर आदि-आदि, यदि शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के जीवन के शुरुवात में काफी उतार-चढ़ाव रहता है तथा अत्यधिक परिश्रम करने पर बड़ी सफलता प्राप्त होती है और जीवन के उत्तरार्ध में ऐसे व्यक्तियों के पास अच्छा धन रहता है, छठे भाव में स्थित शनि की तीसरी दृष्टि अष्टम भाव में होती है आयुष्य कारक ग्रह शनि की आयु भाव में दृष्टि आयु की वृद्धि करती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति दीर्घायु होते है किंतु यदि शनि अष्टम भाव में मेष, वृश्चिक, कर्क, सिंह राशि को देखते हों तो आयु सुख में कमी रहती है, छठे भाव में स्थित शनि की सप्तम दृष्टि द्वादश भाव में होती है द्वादश भाव विदेश यात्रा का भाव होता है जहाँ शनि की दृष्टि विदेश यात्रा के योग बनाती है, ऐसे व्यक्ति धन कम खर्च करते हैं अर्थात ऐसे व्यक्ति कंजूस होते हैं कहने का आशय यह है कि द्वादश भाव में शनि खर्चों/व्यय में कमी करता है किंतु यही शनि यदि द्वादश भाव या छठे भाव का स्वामी होकर छठे भाव में बैठा हो तो ऐसा व्यक्ति परिवार, शत्रुओं, यात्राओं, दवाईयों पर धन व्यय कराता है, छठे भाव में स्थित शनि की दसवीं दृष्टि तीसरे भाव में पड़ती है जो यह दर्शाता है कि ऐसे व्यक्ति पराक्रमी होते हैं व उन्नति प्राप्त करने हेतु निरंतर प्रयत्नशील रहते हैं और खुद की मेहनत से भाग्य की वृद्धि व उन्नति को प्राप्त करते हैं।

 

Saturn in sixth house
Saturn in sixth house

 

यदि उच्च राशि का शनि छठे भाव में हो जो कि वृषभ लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्तियों को भाग्योदय हेतु कड़ा संघर्ष करना पड़ता है तथा ऐसे व्यक्तियों के प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की संभावना और अधिक हो जाती है साथ ही ऐसे व्यक्ति शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं ऋषि कश्यप के अनुसार यदि उच्च राशि का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों के शत्रु अधिक होते हैं, यदि उच्च नवांश का शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति विरोधियों पर विजय प्राप्त करते हैं।

 

यदि शुभ वर्ग का शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति विनम्र स्वभाव वाले होते हैं तथा यदि यही शनि लग्नेश को देखे तो ऐसे व्यक्तियों का स्वभाव अति विनम्र होता है, यदि पाप वर्ग का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की कृषि कर्म में रुचि होती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति भूमि के नीचे से उत्पन्न होने वाली चीजों जैसे कृषि, तेल, खनिज से जुड़े कार्यों में अधिक रुचि रखते हैं साथ ही बिजली, लौह, वाहन से जुड़ा कार्य भी करते हैं।

 

यदि नीच राशि का शनि छठे भाव में जो कि वृश्चिक लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसे व्यक्तियों की परिवार के सदस्यों से बहुत कम बनती है ऋषि कश्यप के अनुसार ऐसे व्यक्ति खल स्वभाव के होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्ति नकारात्मक बातों को पहले सोचते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों में बदले की भावना भी रहती है, यदि नीच नवांश का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति क्रूर स्वभाव के होते हैं तथा इनकी सबके साथ नही बनती है।

 

रोग भाव में स्थित शनि का फल
रोग भाव में स्थित शनि का फल

 

यदि मित्र राशि का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति वर्णसंकर होते हैं अब प्रश्न यह उठता है कि वर्णसंकर क्या होता है, जब दो अलग-अलग कुल या जाति के व्यक्ति विवाह करते हैं तो उनसे जो संतान उत्पन्न होती है उसे वर्णसंकर कहा जाता है आज के समय में यह काफी प्रचलित भी है क्योंकि आज के समय में यह देखने में आता है कि एक वर्ण का व्यक्ति दूसरे वर्ण के व्यक्ति से प्रेम विवाह करते हैं इसको इस तरह से भी समझ सकते हैं कि जब दो अलग कम्युनिटी के लोग विवाह करते हैं तो उनकी संतान वर्णसंकर होती है, यदि मित्र नवांश का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति प्रायः व्यापारी होते हैं कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की व्यापार में अधिक रुचि होती है और यदि ऐसे व्यक्ति नौकर भी करते हैं तो उनका कार्य सेल्स व मार्केटिंग से जुड़ा होता है।

 

यदि वर्गोत्तम शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति धार्मिक स्वभाव वाले होते हैं कहने का आशय यह है कि इनकी धर्म-कर्म में अच्छी रुचि होती है तथा ऐसे व्यक्ति धर्म से जुड़े कार्य करना अधिक पसंद करते हैं, यदि शत्रु नवांश का शनि छठे भाव में हो तो ऐसे व्यक्तियों की संतान कठोर स्वभाव वाली होती है कहने का आशय यह है कि ऐसे व्यक्तियों की पहली संतान की वाणी कटु होती है।

 

यदि स्वराशि शनि छठे भाव में हो जो कि सिंह लग्न व कन्या लग्न की कुंडली में ही संभव है तो ऐसा व्यक्ति हास्य विनोद करने वाला तथा अभिनेता होता है तथा यह संभावना कन्या लग्न की कुंडली में अधिक होती है, यदि सिंह लग्न की कुंडली में शनि छठे भाव में स्वराशि स्थित हो तो ऐसे व्यक्तियों के दामपत्य जीवन में उतार-चढ़ाव बना रहता है तथा इन्हें कोई न कोई रोग प्रायः लगा ही रहता है साथ ही यदि सिंह लग्न की कुंडली में स्वराशि शनि पीड़ित हो तो व्यक्ति के रोगी होने की संभावना और अधिक हो जाती है वहीं यदि कन्या लग्न की कुंडली में स्वराशि शनि छठे भाव में स्थित हो तो ऐसे व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षा में सफल होकर उन्नति को प्राप्त करते हैं कहने का आशय यह है कि इनके प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होने की संभावना अधिक हो जाती है तथा किसी प्रतियोगिता में सफल होकर उन्नति को प्राप्त करते हैं।

 

जय श्री राम।

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9 मई 2020 बुध का वृषभ राशि से गोचर जानें बुध के इस गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा

9 मई 2020 बुध का वृषभ राशि से गोचर जानें बुध के इस गोचर के विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा

 

शुक्र का वृषभ राशि से गोचर

 

वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में ही रहते हैं, बुध 9 मई को प्रातः 9 बजकर 46 मिनट 58 सैकंड पर मेष राशि को छोड़कर मीन राशि में चले जाएंगे जहाँ 24 मई तक रहेंगे, बुध मिथुन व कन्या राशि के स्वामी होते हैं और कन्या राशि में ही उच्च के भी होते हैं मीन राशि बुध की नीच राशि होती है, बुध बुद्धि व विवेक के कारक होते हैं अतः बुध के वृषभ राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर विभिन्न प्रकार से प्रभाव पड़ेंगे तो चलिए जानते हैं बुध के इस गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तीसरे व छठे भाव के स्वामी होकर दूसरे से गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय होगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, शत्रुओं से सावधान रहें, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, किसी पुरानी चिंता से मुक्ति मिलने के योग बनेंगे।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध दूसरे व पंचम भाव के स्वामी होकर लग्न भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, वाणी के प्रभाव द्वारा मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, संतान की उन्नति होगी, प्रेमियों के लिए बुध का यह गोचर अच्छा रहेगा, जीवनसाथी के साथ संबंधों में मधुरता आएगी।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध पहले व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर व्यय भाव से गोचर करेंगे अतः स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जीवन में भागा-दौड़ी बनी रहेगी, माता से वैचारिक मतभेद संभव है, यात्राओं के योग बनेंगे, तनाव लेने से बचें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश व तीसरे भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी, आय में वृद्धि होगी, परिवार का सहयोग प्राप्त होगा, अचानक यात्राओं के योग बनेंगे, प्रेमियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध दूसरे व एकादश भाव के स्वमी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप उन्नति के नए मार्ग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, मान-प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी, माता की वाणी में कुछ तेजी अनुभव होगी, घर में अचानक तनाव का माहौल उत्पन्न हो सकता है अतः तनाव लेने से बचें, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, व्यापारियों के लिए बुध का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध पहले व दसवें घर के स्वामी होकर नवम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी, उन्नति के नए मार्ग प्राप्त होंगे, लंबे समय से रुके कार्य पूर्ण होने के योग बनेंगे, पिता का सहयोग प्राप्त होगा, छोटे भाई-बहन की वाणी के कारण से मन में अशांति अनुभव होगी, छोटी यात्राएं होने के योग बनेंगे, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप विपरीत परिस्थितियों से होते हुए उन्नति के मार्ग खुलेंगे, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, भाग्य वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना होगा, धार्मिक यात्राएं हो सकती हैं, ससुराल पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होने के योग बनेंगे, यदि आपका व्यवसाय पार्टनरशिप में है तो बुध का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, नए मित्र बनेंगे, जीवनसाथी से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे, वाणी पर नियंत्रण रखें, स्वास्थ्य का ख्याल रखें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम व दशम भाव के स्वामी होकर छठे भाव से गोचर करेंगे अतः जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद होंगे, तनाव लेने से बचें, मामा पक्ष से कोई शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह गोचर अच्छा रहेगा, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें, कार्यस्थल पर फालतू विवाद से बचें।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए बुध छठे व नवम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, संतान का सहयोग प्राप्त होगा किन्तु संतान पक्ष से किसी प्रकार का कष्ट भी संभव रहेगा, गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, बड़े भाई-बहन से वैचारिक मतभेद होने के योग बनेंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम व अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय सिद्ध होगा, संतान का सहयोग मिलेगा, माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव रहेगी, ससुराल पक्ष से संबंध मधुर होंगे, पिता से वैचारिक मतभेद संभव है, कार्यक्षेत्र में सीनियर का सहयोग प्राप्त होगा।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ व सातवें भाव के स्वामी होकर तीसरे भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से संबंध मधुर होंगे, नौकरी पेशा लोगों के लिए उन्नति के नए मार्ग खुलेंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, वाणी पर नियंत्रण रखें।

 

जय श्री राम।

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सूर्य: एक परिचय व सूर्य जनित रोग

सूर्य ग्रह: एक विस्तृत परिचय, स्वभाव और सूर्य जनित रोग (Sun Analysis in Hindi)

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। वराहमिहिर जी ने सूर्य को शहद के समान लाल रंग का बताया है। जब कड़ी धूप में सूर्य को देखें तो ऐसा ही प्रतीत होता है, और यदि सूक्ष्म दृष्टि से धूप को देखें तो यह कुछ पीले-लाल रंग का दिखाई देता है।

जिन व्यक्तियों का सूर्य प्रधान होता है, उनकी दृष्टि बहुत तेज होती है। उनकी आंखों के कोने में लाल-लाल रेखाएं अधिक होती हैं और उनका शरीर चौकोर होता है।

🔥 सूर्य का प्रभाव:

सूर्य रूखा और उष्ण (गर्म) है, अतः ऐसे व्यक्तियों का पित्त प्रकृति का होना स्वभाविक है। सूर्य प्रधान व्यक्ति के शरीर पर केश/बाल बहुत कम होते हैं।

(विशेष: यदि सूर्य स्त्री राशि में हो तो केश नहीं होते, परंतु यदि सूर्य पुरुष राशि में हो तो केश होते हैं।)

सूर्य ग्रह के कारक और स्वरूप

सूर्य तो पूर्ण ब्रह्म है, अतः इसका निवास स्थान मंदिर व देवगृह ही होता है।

  • धातु: तांबा (Copper)
  • ऋतु: ग्रीष्म ऋतु का स्वामी
  • दिशा: पूर्व दिशा (East)
  • वर्ण: क्षत्रिय वर्ण
  • गुण: सत्वगुणी (विशेष: सूर्य पाप फल भी देता है, अतः इसे रजोगुणी भी मानना चाहिए।)

मंत्रेश्वर महाराज जी के अनुसार: सूर्य पित्त प्रधान है और यह अस्थियों (हड्डियों) से बलवान है। इसकी भुजाएं लंबी-मोटी हैं तथा इसका देह चौकोर होता है। इसके वस्त्र लाल होते हैं।

💎 सूर्य का शुभ फल कब मिलेगा?

आपकी कुंडली में सूर्य की दशा शुरू होते समय सूर्य का दशा वाहन क्या था? अभी दशा वाहन केल्क्युलेटर से 2 मिनट में जानकारी प्राप्त करें।

विस्तृत जानकारी: [दशा वाहन कैलकुलेटर…अभी चेक करें।]

कुंडली में सूर्य कब बली होता है? (Strength of Sun)

ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य निम्नलिखित अवस्थाओं में अत्यंत बलवान होता है:

  • उच्च राशि: मेष (Aries)
  • स्वराशि: सिंह (Leo)
  • वार: रविवार (Sunday)
  • समय: दिन के मध्य भाग अर्थात दोपहर में।
  • अवस्था: राशि में प्रवेश करते समय (एक राशि से दूसरी राशि में जाते समय)।
  • स्थिति: मित्र ग्रहों के अंशों में और कुंडली के दशम भाव में (दिग्बली)।
  • अयन: जब सूर्य उत्तरायण हो। (नोट: कुछ विद्वानों के अनुसार सूर्य दक्षिणायन में भी बली होते हैं।)
जय श्री राम।