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भागवत महापुराण के अनुसार आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन एवं ब्रह्मांड के आविर्भाव की कथा

भागवत महापुराण के अनुसार आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन एवं ब्रह्मांड के आविर्भाव की कथा

 

आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन एवं ब्रह्मांड के आविर्भाव की कथा
आद्याशक्ति के प्रभाव का वर्णन एवं ब्रह्मांड के आविर्भाव की कथा

 

श्रीमद्देवी भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के द्वितीय अध्याय में व्यास जी कहते हैं कि:-

 

व्यास उवाच

यत्त्वया च महाबाहो पृष्टोऽहं कुरुसत्तम।
तान्प्रश्नान्नारद: प्राह मया पृष्टो मुनिश्वरः।।

 

अर्थात व्यास जी बोले हे महाबाहो! हे कुरुश्रेष्ठ! आपने मुझसे जो प्रश्न पूछे हैं, उन्ही प्रश्नों को मेरे द्वारा मुनिराज नारद जी से पूछे जाने पर उन्होंने इस विषय पर ऐसा कहा था:-

 

नारद उवाच

व्यास किं ते ब्रवीम्यद्य पुरायं संशयो मम।
उत्पन्नो हिर्दयेऽत्यर्थं संदेहसारपीड़ित:।।

गत्वाहं पितरं स्थाने ब्रम्हाणममितौजसम्।
अपृच्छं यत्त्वया पृष्टं व्यासाद्य प्रश्नमुत्तमम्।।

 

अर्थात नारद जी बोले हे व्यास जी! मैं आपसे इस समय क्या कहूँ? प्राचीन काल में यही शंका मेरे भी मन में उत्पन्न हुई थी और संदेह को बहुलता से मेरा मन उद्वेलित हो गया था, हे व्यास जी! तदन्तर मैंने ब्रह्म लोक में अपने अमित तेजस्वी पिता ब्रह्मा जी के पास पहुँचकर यही प्रश्न पूछा था जो उत्तम प्रश्न आपने मुझसे पूछा है।

 

पित: कुत: समुत्पन्नं ब्रह्मांडमखिलं विभो।
भवत्कृतेन वा सम्यक किं विष्णुकृतं तत्विदम्।।

रुद्रकृतं वा विश्वात्मन् ब्रूहि सत्यं जगत्पते।
आराधनीय: क: कामं सर्वोत्कृष्टश्च क: प्रभु:।।

 

अर्थात हे पिता जी! इस संपूर्ण ब्रह्मांड का आविर्भाव कैसे हुआ? हे विभो! इसका निर्माण आपने किया है अथवा विष्णु ने अथवा शिव ने इसकी रचना की है? हे विश्वात्मन्! मुझे सही-सही बताइए, हे जगत्पते! सर्वश्रेष्ठ ईश्वर कौन है और किसकी आराधना करनी चाहिए?

 

हे ब्रह्मन! वह सब बताइए और मेरे संदेहों को दूर करिए, हे निष्पाप! मैं असत्य तथा दुःख रूप संसार में डूबा हुआ हूँ, संदेहों से दोलायमान मेरा मन तीर्थों में, देवताओं में तथा अन्य साधनों में कहीं भी नही शांत हो पा रहा है, मैं किसका स्मरण करूँ, किसका यजन करूँ, कहाँ जायूँ, किसकी अर्चना करूँ और किसकी स्तुति करूँ? हे देव! मैं उस सर्वेश्वर परमात्मा को जानता भी नही हूँ, हे सत्यवतीतनय व्यास जी! मेरे द्वारा किए गए दुरूह प्रश्नों को सुनकर लोकपितामह ब्रह्मा जी ने तब मुझसे ऐसा कहा—

 

ब्राह्मोवाच

किं ब्रबीमि सुताद्याहं दुर्बोधनं प्रश्नमुक्तमम्।
त्वयाशक्यं महाभाग विष्णोरपि सुनिश्चयात्।।

रागी कोऽपि न जानाति संसारेऽस्मिन्महामते।
विरक्तश्च विजानाति निरीहो यो विमत्सरः।।

एकार्णवे पुरा जाते नष्टे स्थावरजङ्गमे।
भूतमात्रे समुत्पन्ने सञ्जज्ञे कमलादहम्।।

 

अर्थात ब्रह्मा जी बोले हे पुत्र! तुमने आज एक दुरूह तथा उत्तम प्रश्न किया है, उसके विषय में मैं क्या कहूँ हे महाभाग! साक्षात् विष्णु जी द्वारा भी इसका निश्चित उत्तर दिया जाना संभव नही है, हे महामते! इस संसार के क्रियाकलापों में आसक्त कोई भी ऐसा नही है जो इस तत्व का ज्ञान रखता हो कोई विरक्त, निःस्पृह तथा विद्वेषरहित ही इसे जान सकता है।

 

प्राचीनकाल में जल प्रलय होने पर स्थावर-जंगमादिक प्राणियों के नष्ट हो जाने तथा मात्र पंचमहाभूतों की उत्पत्ति होने पर मैं कमल में आविर्भूत हुआ तथा उस समय मैंने सूर्य, चंद्र, वृक्षों तथा पर्वतों को नही देखा और कमल कर्णिका पर बैठा हुआ विचार करने लगा:-

 

कस्मादहं सुमुद्भूत: सलिलेऽस्मिन्महार्णवे।
को मे त्राता प्रभु: कर्ता संहर्ता वा युगात्यये।।

 

अर्थात कि इस महासागर के जल में में मेरा प्रादुर्भाव किससे हुआ? मेरा निर्माण करने वाला, रक्षा करने वाला तथा युगांत के समय संहार करने वाला प्रभु कौन है? कहीं भूमि भी स्पष्ट नही दिखाई दे रही है, जिसके आधार पर यह जल टिका है तो फिर यह कमल कैसे उत्पन्न हुआ, जिसकी उत्पत्ति जल और पृथ्वी के संयोग से ही प्रसिद्ध है, आज मैं इस कमल का मूल आधार पंक अवश्य देखूँगा; और फिर उस पंक की आधार स्वरूपा भूमि भी अवश्य मिल जाएगी, इसमें संदेह नही है।

 

उत्तरन्सलिले तत्र यावद्वर्षसहस्त्रकम्।
अन्वेषामाणो धरणीं नावाप तां यदा तदा।।

तपस्तपेति चाकाशे वागभूदशरीरिणी।
ततो मया तपस्तप्तं पद्मे वर्षसहस्त्रकम्।।

 

अर्थात:- ब्रह्मा जी बोले, हे महामते! तदन्तर मैं जल में नीचे उतरकर हजारों वर्षों तक पृथ्वी को खोजता रहा, किंतु जब उसे नही पाया तब आकाशवाणी हुई कि “तपस्या करो” तत्पश्चात मैं उसी कमल पर आसीन होकर हजारों वर्षों तक घोर तपस्या करता रहा, इसके बाद पुनः एक अन्य आकाशवाणी उत्पन्न हुई “सृष्टि करो” इसे मैंने साफ-साफ सुना उसे सुनकर व्याकुल चित्त वाला मैं सोचने लगा किसका सृजन करूँ और किस प्रकार करूँ, उसी समय:-

 

तदा दैत्यावपि प्राप्तौ दारुणौ मधुकैटभौ।
ताभ्यां विभिषितश्चाहं युद्धाय मकरालये।।

 

मधु-कैटभ नाम वाले दो भयानक दैत्य मेरे सम्मुख आ गए, उस महासागर में युद्ध के लिए तत्पर उन दोनों दैत्यों से मैं अत्यधिक भयभीत हो गया तत्पश्चात मैं उसी कमल की नाल का आश्रय लेकर जल के भीतर उतरा और वहाँ एक अत्यंत अद्भुत पुरुष को मैंने देखा।

 

मेघश्यामशरीरस्तु पीत्वासाश्चतुर्भुज:।
शेषशायी जगन्नाथो वनमालाविभूषित:।।

 

अर्थात उनका शरीर मेघ के समान श्याम वर्ण वाला था, वे पीत वस्त्र धारण किए हुए थे और उनकी चार भुजाएं थीं, वे जगत्पति वनमाला से अलंकृत थे तथा शेषशय्या पर सो रहे थे, वे शंख, चक्र, गदा, पद्म आदि आयुध धारण किए हुए थे इस प्रकार मैंने शेषनाग की शय्या पर शयन करते हुए उन महाविष्णु को देखा।

 

हे नारद जी! योगनिद्रा के वशीभूत होने के कारण निष्पंद पड़े उन भगवान् अच्युत को शेषनाग के ऊपर सोया हुआ देखकर मुझे अद्भुत चिंता हुई और मैं सोचने लगा कि अब मैं क्या करूँ? तब मैंने निद्रास्वरूपा भगवती का स्मरण किया और मैं उनकी स्तुति करने लगा, मेरी स्तुति से वे कल्याणकारी भगवती विष्णु भगवान जी के शरीर से निकलकर आकाश में विराजमान हुईं, उस समय दिव्य आभूषणों से अलंकृत वे भगवती कल्पनाओं से परे विग्रह वाली प्रतीत हो रही थीं इस प्रकार विष्णु जी का शरीर तत्काल छोड़कर जब वे आकाश में विराजित हो गईं तब उनके द्वारा मुक्त किए गए अनंतात्मा वे जनार्दन उठ गए।

 

पञ्चवर्षसहस्त्राणि कृतवान्युद्धमुक्तमम्।
तदा विलोकितौ दैत्यौ हरिणा विनिपातीतौ।।

 

अर्थात तत्पश्चात उन्होंने पाँच हजार वर्षों तक युद्ध किया, पुनः उन महामाया भगवती के दृष्टिपात से मोहित किए गए उन दोनों दैत्यों को भगवान विष्णु ने अपनी जांघों को विस्तृत कर के उनका वध कर दिया, उसी समय जहाँ हम दोनों थे वहीं पर शंकर जी भी आ गए, तब हम तीनों ने गगन-मंडल में विराजमान उन मनोहर देवी को देखा, हम लोगों के द्वारा उन परम शक्ति की स्तुति किए जाने पर अपनी पवित्र कृपा दृष्टि से हम लोगों को प्रसन्न कर के उन्होंने वहाँ स्थित हम लोगों से कहा:-

 

देवयुवाच

काजेशा: स्वानि कार्याणि कुरुध्वं समतन्द्रिता:।।

सृष्टिस्थितिविशिष्टानि हतावेतौ महासुरौ।
कृत्वा स्वानि निकेतानि वसध्यं विगतज्वरा:।।

प्रजाश्चतुर्विद्या: सर्वा: सृजध्वं स्वविभूतिभि:।

 

अर्थात देवी बोलीं- हे ब्रह्मा, विष्णु, महेश! अब आप लोग सृष्टि, पालन एवं संहार के अपने-अपने कार्य प्रमाद रहित होकर कीजिए अब आप लोग अपना-अपना निवास बनाकर निर्भीकता पूर्वक रहिए क्योंकि उन दोनों महादैत्यों का संहार हो गया है अतः आप लोग अपनी विभूतियों से अण्डज, पिण्डज, उद्भिज्ज और स्वदेज चारों प्रकार की प्रजाओं का सृजन कीजिए।

 

तब ब्रह्मा, विष्णु व महेश ने उन भगवती का वह मनोहर, सूखकर तथा मधुर वचन सुनकर उनसे कहा हे माता! हम लोग शक्तिहीन हैं, अतः इन प्रजाओं का सृजन कैसे करें? अभी विस्तृत पृथ्वी ही नही है और सभी ओर जल ही जल भरा हुआ है, सृष्टि कार्य के लिए आवश्यक पंचतत्व, गुण, तन्मात्राएँ और इन्द्रियाँ ये कुछ भी नही है हम लोगों के वचन सुनकर भगवती का मुखमंडल मुस्कान से भर उठा तथा उसी समय वहाँ आकाश से रमणी विमान आ पहुँचा तत्पश्चात् उन भगवती ने कहा हे देवताओं! आप लोग निर्भीक होकर इस विमान में इच्छानुसार बैठ जाएँ।

 

हे ब्रह्मा, विष्णु और शिव! मैं आप लोगों को आज इस विमान में एक अद्भुत दृश्य दिखाऊँगी, उनका यह वचन सुनकर हम तीनों उनकी बात स्वीकार कर के रत्नजटित, मोतियों की झालरों से शोभायान, घंटियों की ध्वनि से गुंजित तथा देव भवन के तुल्य उस रमणीक विमान पर संशय रहित भाव से चढ़कर बैठ गए तब भगवती ने हम जितेंद्रिय देवताओं को बैठा हुआ देखकर उस विमान को अपनी शक्ति से आकाशमण्डल में उड़ाया।

 

शेष इसके आगे की कथा अगले लेख में श्रीमद्देवी भागवत महापुराण के तृतीय स्कंध के तृतीय अध्याय भागवत महापुराण के अनुसार देवी लोक के दर्शन व ब्रह्मा, विष्णु और शिव जी का आश्चर्यचकित होना में…….

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

Astrology Sutras (Astro Walk Of Hope)

Mobile:- 9919367470, 7007245896

Email:- pooshark@astrologysutras.com

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मंगल का कर्क राशि से गोचर 4 जून 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras

मंगल का कर्क राशि से गोचर 4 जून 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras

 

मंगल का कर्क राशि से गोचरमंगल का कर्क राशि से गोचर
मंगल का कर्क राशि से गोचर

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार भूमि पुत्र मंगल, लोहितांग के नाम से भी जाने जाते हैं जो कि शिव जी के पसीने से उत्पन्न हुए थे और देवी पृथ्वी के आग्रह करने पर शिव जी ने उन्हें सौंपा था, मंगल ग्रह को नव ग्रहों में सेनापति के नाम से जाना जाता है जो कि शक्ति, पराक्रम व ऊर्जा के ग्रह हैं इनका वर्ण रक्त अर्थात लाल है यदि मंगल किसी व्यक्ति की कुंडली में द्वितीय, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम व द्वादश भाव में हो तो कुज दोष जिसे हम सभी मंगल दोष के नाम से जानते हैं बनता है जो कि दामपत्य जीवन के लिए शुभ नही माना जाता है किंतु यदि यही मंगल राजयोगकारक हो जाए तो अनेक प्रकार शुभ प्रभावी हो जाता है, मेष व वृश्चिक मंगल की स्वराशि है अर्थात मेष व वृश्चिक राशि का स्वामित्व मंगल ग्रह के पास है, मंगल ग्रह मकर राशि में उच्च के तो कर्क राशि में नीच के हो जाते हैं “ऋषिकेश पंचांग (काशी)” के अनुसार मंगल ग्रह ४ जून २०२१ को नवमी तिथि शुक्रवार के दिन प्रातः ०५:२० पर मिथुन राशि को छोड़कर अपनी नीच राशि कर्क जो कि चंद्रमा के स्वामित्व वाली राशि है में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं मंगल के कर्क राशि से गोचर के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेंगे:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए मंगल प्रथम भाव अर्थात लग्न एवं अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के कर्क राशि से गोचर के दौरान माता-पिता के स्वास्थ्य में समस्याएं उत्पन्न हो सकती है अतः माता-पिता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, घर के माहौल में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यदि आप घर खरीदने या बदलने का सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय रुक जाएं, जिन व्यक्तियों को स्किन से जुड़ी समस्या या रक्त जनित कोई समस्या हो उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना चाहिए, जीवनसाथी के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, व्यापारियों के लिए मंगल का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ उन्नति के अवसर प्रदान करने वाला रहेगा, बड़े भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा व उनकी उन्नति भी होगी।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए मंगल सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार छोटे भाई-बहन से वैचारिक मतभेद होने की संभावना रहेगी, आलस्य का त्याग करें, मंगल के इस गोचर काल के दौरान आप में क्रोध की अधिकता रहेगी व आप शीघ्र ही आवेश में आकर कोई ऐसा कार्य कर सकते हैं जिसका आपको बाद में अफसोस होगा अतः आवेश में आने से बचें, तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी अतः तनाव लेने से बचें, जो व्यक्ति सेना, पुलिस, ईंधन, विज्ञान या वैध के कार्यक्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, फोड़े-फुंसी व घाव के अतिरिक्त स्किन से जुड़ी एलर्जी एवं रक्त जनित कोई समस्या संभव रहेगी, भुजाओं में कुछ कमजोरी अनुभव हो सकती है, भाग्य वृद्धि हेतु अतिरिक्त परिश्रम करना होगा व अत्यधिक परिश्रम करने पर कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता प्राप्त होगी।

 

उपाय:- सिद्धकुंजिका स्तोत्र का नित्य पाठ करें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए मंगल षष्ठ एवं एकादश भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान मिथुन राशि वाले व्यक्तियों को अपनी वाणी पर विशेष नियंत्रण रखना चाहिए अन्यथा बनते हुए कार्य बिगड़ जाएंगे व लोग आपके शत्रु बन जाएंगे, दवाईयों व शत्रुओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, आय वृद्धि हेतु अधिक प्रयास करना पड़ेगा, अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी में कुछ कटुता आएगी जिस कारण से ससुराल पक्ष व जीवनसाथी के साथ विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा।

 

उपाय:- नित्य गणेश संकटनाशन स्तोत्र का पाठ करें व चतुर्थी का व्रत करें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए मंगल पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो आपके लग्न अर्थात प्रथम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपने क्रोध पर विशेष तौर पर नियंत्रण रखना होगा अन्यथा कलह-क्लेश व झगड़े-विवाद के साथ जेल यात्रा के योग बन सकते हैं, जीवनसाथी व ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी कुछ कटु अनुभव होगी, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए मंगल यह गोचर काल मिला-जुला फल देने वाला रहेगा, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, आय में वृद्धि के योग बनेंगे, वाहन सावधानी से चलाएं व स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, मंगल का यह गोचर काल बेरोजगारों को नौकरी के अवसर प्रदान करने वाला रहेगा।

 

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें व गाय को गुड़ खिलाएं।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो कि आपके द्वादश भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपनी माता के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखना चाहिए, माता व धर्म से जुड़े कार्यों पर धन व्यय होगा, इस गोचरकल के दौरान आपको कार्यक्षेत्र में बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता होगी, धैर्य व संयम से कोई भी निर्णय लें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रेमियों और विद्यार्थियों के लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, कलह-क्लेश व झगड़े-झंझटों के कारण से आपका मन अशांत रहेगा हालांकि शत्रु आपका कुछ बिगाड़ नही पाएंगे फिर भी आपको घर-परिवार के साथ खुलकर जीवन का आनंद लेने में दिक्कतें आएंगी व आप खुद असहज अनुभव करेंगे, छोटे भाई-बहन से संबंध मधुर होंगे, जीवनसाथी को समझने का प्रयास करें।

 

उपाय:- नित्य गाय को रोटी और गुड़ खिलाएं व हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव अर्थात लाभ स्थान से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको अपने बड़े भाई के स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए, आय में कुछ परिश्रम से वृद्धि के योग बनेंगे, स्वभाव में कुछ तेजी आएगी, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, संतान से वैचारिक मतभेद संभव रहेंगे, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, स्थान परिवर्तन या नौकरी परिवर्तन हेतु किए जाने वाले प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, व्यय में वृद्धि होगी, किसी भी प्रकार के जुए व सट्टे में पैसा लगाने से बचें, पशु, हथियार, अग्नि एवं वाहनादि से चोट लगने की संभावना रहेगी।

 

उपाय:- नित्य गाय को रोटी व गुड़ खिलाएं।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान पिता को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र में अत्यधिक परिश्रम करने पर उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, किसी उच्चपदाधिकारी से मुलाकात संभव है, आपके जीवनसाथी की माता के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है साथ ही उनका स्वभाव भी कुछ चिड़चिड़ा सा अनुभव होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी, इस गोचर काल दौरान आपको अपने कार्यक्षेत्र में किसी भी विषय पर बहुत सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए क्योंकि मंगल का कर्म स्थान में नीच राशि से गोचर कुछ झंझटों को अचानक से उत्पन्न करने वाला रहेगा, प्रेम संबंधों में मधुरता आएगी, जीवनसाथी के साथ विवाद संभव रहेगा।

 

उपाय:- नित्य श्री सूक्त का पाठ करें।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल प्रथम भाव अर्थात लग्न व षष्ठ भाव के स्वामी होकर नवम भाव अर्थात भाग्य भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान शत्रु आपकी उन्नति में बाधक बनने का प्रयास करेंगे, पिता के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है, भाई-बहन के मध्य वैचारिक मतभेद उत्पन्न होंगे, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा, तनाव लेने से बचें, मंगल के इस गोचरकाल के दौरान आपके किए गए प्रत्येक प्रयास सार्थक सिद्ध होंगे, आलस्य का त्याग करें, मन को क्षणिक सुख देने वाले साधनों तथा वाहनादि पर धन व्यय होगा, उच्चपदाधिकारी व्यक्ति से मुलाकात संभव है जिनसे निकट भविष्य में आपके अटके हुए कार्य पूर्ण होंगे।

 

उपाय:- प्रत्येक मंगलवार हनुमान बाहुक व सुंदरकांड का पाठ करें।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए मंगल पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचर काल के दौरान आपको शत्रुओं से सतर्क रहना चाहिए तथा शीघ्र ही किसी की बातों में आने व लोगों पर अधिक विश्वास करने से बचना चाहिए, यात्राओं के योग बनेंगे, इस गोचरकल के दौरान यात्रा, दवा व परिवार पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, फोड़े-फुंसी, घाव, अग्नि भय, ज्वरादि की समस्या रह सकती है, खान-पान का विशेष ख्याल रखें व तेज मिर्च-मसाले वाले भोजन से परहेज करें, यदि आपने कहीं ऋण के लिए आवेदन किया हुआ है तो वह स्वीकृत हो जाएगा, दाम्पत्य जीवन में अनेक अवसर पर विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, जीवनसाथी के उदर व कमर के निचले हिस्सों में या एलर्जी की समस्या रह सकती है।

 

उपाय:- नित्य विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें व गाय को गुड़ खिलाएं।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस गोचरकाल के दौरान छोटे भाई-बहन के विवाह हेतु यदि कहीं बात चल रही है तो उसमें अचानक से कोई बाधा आ सकती है, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें अन्यथा काम त्रिकोण में अग्नि तत्व ग्रह के जल तत्व राशि से गोचर करने के कारण से जीवनसाथी के साथ क्षणिक विवाद होने की संभावना रहेगी, ससुराल पक्ष के लोगों से विवाद संभव रहेगा, जो लोग पार्टनरशिप में कोई कार्य करते हैं उनके लिए मंगल का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, स्वास्थ्य का ख्याल रखें, तेज ज्वर, सिर में पीड़ा, मूत्रेन्दीय संबंधित कोई समस्या संभव रहेगी, व्यापारियों के लिए मंगल का यह गोचर उन्नति के नए अवसर प्रदान करने वाला रहेगा, आप इस दौरान स्पष्ट रूप से वार्ता करने पर विश्वास रखेंगे जिस कारण से अनेक अवसर ओर आपकी कही हुई बातें लोगों को बुरी लग सकती है, उदर में कोई समस्या संभव है अतः तेज मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करें, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, वाहन सावधानी से चलाएं।

 

उपाय:- मंगलवार के दिन गाय को मसूर की दाल भीगा कर खिलाएं।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान आपको अपने क्रोध व वाणी पर विशेष रूप से नियंत्रण रखना चाहिए, सरकारी कर्मचारियों विशेषतः सुरक्षा बलों के साथ व्यर्थ विवाद में पड़ने से बचें अन्यथा जेल यात्रा के योग बनेंगे, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, विपरीत परिस्थितियों में कड़े संघर्ष के उपरांत उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, अकास्मिक व्यय में वृद्धि होने से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होगी अतः तनाव लेने से बचें, दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, स्वास्थ्य के लिहाज से मंगल का यह गोचर आपके लिए सामान्य रहेगा अतः स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें, मामा पक्ष में किसी को स्वास्थ्य जनित समस्या रह सकती है।

 

उपाय:- गाय को रोटी व गुड़ नित्य खिलाएं।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मंगल के इस गोचरकाल के दौरान प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी किंतु अनेक अवसर पर विवादपूर्ण स्थितियाँ भी उत्पन्न होंगी, संतान को किसी प्रकार का कष्ट संभव है, विद्यार्थियों का मन शिक्षा की जगह खेल-कूद या अन्य किसी मनोरंजन के साधनों पर लगेगा, क्रोध पर नियंत्रण रखें व शांत होकर धैर्य से काम लें, उदर जनित कोई समस्या संभव रहेगी, ससुराल पक्ष व जीवनसाथी की वाणी में कुछ तेजी अनुभव होगी जिस कारण उनसे विवाद होने की संभावना रहेगी, आय के साथ व्यय में वृद्धि होगी।

 

उपाय:- नित्य शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक करें व मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर अर्पित कर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

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लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य हो तो ग्रंथकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति शरीर से दुबले, छोटे नेत्रों वाले, क्रोधी किंतु उदार प्रकृति वाले, अल्प संतान वाले, नेत्र रोगी और दीर्घजीवी होते हैं तथा धनार्जन हेतु इनको अथक परिश्रम करना पड़ता है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के शत्रु अधिक होते हैं साथ ही यदि अष्टम स्थान का स्वामी बली ग्रह के साथ हो तो ऐसे व्यक्ति इच्छानुसार खेती करने वाले अर्थात कृषक होते हैं, यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति चतुर होता है और प्रायः इनको अनेक कष्ट भोगने पड़ते हैं और अनेक स्त्रियों से संबंध जोड़ने वाले होते है साथ ही अभक्ष्य वस्तुओं का सेवन करने वाले होते हैं तथा इनका धन शीघ्र चोरी हो जाता है एवं कभी-कभी ऐसे व्यक्तियों पर कठिन और गुप्त विपत्ति भी आ पड़ती है क्योंकि अष्टम भाव कुंडली का सबसे अशुभ स्थान होता है जिसे मृत्यु स्थान भी कहते है अतः इस भाव में सूर्य के स्थित होने के अशुभ फल ही मिलते हैं ऐसे व्यक्तियों को दूसरे को ठगने में बहुत आनंद आता है किंतु अष्टम भाव का सूर्य विदेश यात्रा भी करवाता है और ऐसे व्यक्ति अत्यधिक कामी होने के कारण से परदेश में परदेशीय स्त्रियों से अवैध संबंध भी जोड़ते हैं और स्त्रियों को प्रसन्न रखने के लिए या उनके कहने पर अभक्ष्य तथा अग्राह्य पदार्थों का आनंद लेते हैं जिस कारण इन्हें गुह्यरोग भी होने की संभावना रहती है, ऐसे व्यक्तियों की शक्ति क्षीण हो जाती है और ऐसे व्यक्ति आलस्य में डूबे रहते हैं और अपने आपकी व अपने धन की रक्षा कर सकने में असमर्थ रहते हैं जिस कारण से इनका धन भी चोरी होने की संभावना रहती है तथा यदि अष्टम भाव का स्वामी भी पीड़ित हो तो ऐसे व्यक्तियों की अकाल मृत्यु भी हो जाती है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति को थोड़ा धन व थोड़ी आयु प्राप्त होती है व इनके मित्र भी कम ही होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्तियों की नजर भी कमजोर होती है वहीं वैधनाथ जी ने कहा है कि यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति मनोहर होता है और लड़ने-झगड़ने में विशेष चतुर होता है किंतु ऐसे व्यक्ति कभी भी संतुष्ट नही होते हैं, मानसागरी में कहा गया है कि यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य हो तो:-

 

निधनगतदिनेशे चंचल: त्यागशील: किलबुधगणसेवी सर्वदारोगयुक्त:।
वितथ बहुलभाषी भाग्यहीनों विशीलो मतियुतचिरंजीवी नीचसेवीप्रवासी।।

 

अर्थात जिस व्यक्ति के अष्टम भाव में सूर्य हो वह चंचल स्वभाव वाला, दानी, पंडित, विद्वानों की सेवा में रहने वाला, रोगी, मिथ्याभाषण करने वाला, अभागा, आचरणहीन, मतियुक्त तथा लंबी उम्र वाला होता है और ऐसे व्यक्तियों को नीचवृत्ति के लोगों की सेवा करनी पड़ती है साथ ही ऐसे व्यक्ति परदेश में वास करते हैं।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति किसी भी विषय पर जल्दी संतुष्ट नही होता जिस कारण से इनके पास धन होते हुए भी इन्हें धन संबंधी चिंता प्रायः बनी रहती है और इनका धन औषधि, पिता व परिवार पर अधिक व्यय होता है और यदि अष्टम भाव का स्वामी भी पीड़ित हो तो ऐसे व्यक्तियों को मध्यम आयु योग प्राप्त होता है और इन्हें कुछ वैमन्यस्ता के साथ पुत्र सुख प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों को प्रायः नेत्र व उदर संबंधित रोग के साथ-साथ मूत्रेन्दीय में भी कोई विकार संभव रहता है तथा इनके ससुराल पक्ष के लोगों की वाणी कुछ कटु होती है किंतु ऐसे व्यक्ति ज्ञानी, विद्वान, पंडित और ब्राह्मणों की सेवा करने वाले होते हैं तथा इन्हें पिता का पूर्ण सुख नही मिल पाता या इनके पिता को कोई कष्ट प्रायः बना ही रहता है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सभी ग्रंथकारों ने अष्टम भाव में स्थित सूर्य के अशुभ फल को देने वाला बताया है क्योंकि अष्टम भाव नाश-स्थान माना जाता है लेकिन ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सूर्य अष्टम भाव में मेष, सिंह व धनु राशि के हों तो बुरे फल अत्यधिक मिलते हैं किंतु मेष व सिंह राशि का सूर्य अष्टम भाव में हो तो आयुष्य की रक्षा होती है साथ ही यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य यदि मिथुन, तुला व कुंभ राशि का सूर्य हो तो बुरे फल कुछ कम मिलते हैं तथा यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य यदि स्त्री राशि का हो तो सामान्य फल मिलते हैं।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य यदि मिथुन, कर्क, धनु और मीन राशि का हो तो व्यक्ति की असावधानी के कारण उनकी मृत्यु होती है तथा यदि मेष व सिंह राशि का सूर्य अष्टम भाव में हों तो व्यक्ति की झटके से मृत्यु होती है किंतु यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य यदि शेष अन्य राशियों में हो तो व्यक्ति की किसी लंबी बीमारी के चलते मृत्यु होती है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य यदि पुरुष राशि का हो तो व्यक्ति के घर की गुप्त बातें नौकरों द्वारा बाहर निकल जाती है अथवा स्त्री के द्वारा भी गुप्त बातें दूसरे जान लेते हैं साथ ही यदि पुरुष राशि का सूर्य अष्टम भाव में हो तो अनुभव में आया है कि प्रायः स्त्री स्वम् पैसे के लिए अथवा पति की पैसे के जरूरत को पूरा करने के लिए या अपना कोई कार्य निकालने के लिए परपुरुषगामिनी भी होती है किंतु इसके लिए अन्य ग्रहों का भी सहयोग आवश्यक होता है, यदि किसी महिला की लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य हो तो उक्त महिला से पहले उसके पति की मृत्यु हो जाती है किंतु यदि किसी महिला की कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य हो तो उसे प्रायः अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होने की संभावना बली हो जाती है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि सूर्य अष्टम भाव में हो तो वृद्धावस्था में दरिद्रता योग उत्पन्न करता है अर्थात जैसे-जैसे सूर्य का अस्त होता है वैसे ही व्यक्ति के भाग्य का भी अस्त हो जाता है और ऐसा योग ५० वर्ष की आयु के बाद होना आरंभ होता है साथ ही स्त्री राशि का अष्टमस्थ सूर्य अधिक संतति व पुरुष राशि का अष्टमस्थ सूर्य कम संतति देता है।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो ग्रंथकारों का मत है कि व्यक्ति दुबला, मझोले कद वाला, भूरे रंग के केश और नेत्र से युक्त, चंचल, भय युत, स्त्री सहवास तथा सुख भोगने में आसक्त, स्त्रियों से विरोध करने वाला तथा स्त्रियों से अनादर पाने वाला, परस्त्री प्रेमी एवं परगृही भोजी होता है तथा ऐसे व्यक्तियों की प्रायः दो स्त्रियाँ होती है और विवाह विलंब से होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति धनहीन, राज कोप से दुःखी तथा कदन्न भोजी होते हैं तथा यदि ऐसे व्यक्तियों का शीघ्र विवाह हो तो १४ वें या ३४ वे वर्ष में स्त्री का नाश और २५ वें वर्ष में परदेश यात्रा होती है, यदि सप्तम भाव में सिंह राशि का सूर्य हो तो एक स्त्री होती है किंतु यदि सूर्य पर शत्रु ग्रह की दृष्टि हो अथवा सूर्य शत्रु ग्रह के साथ अथवा पाप ग्रह से युक्त हो तो बहुत सी स्त्रियाँ होती है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति राजा से विरोध रखता है अर्थात ऐसे व्यक्तियों के आचरण से राजा इनके विरुद्ध हो जाते हैं और ऐसा व्यक्ति राजा द्वारा दंड को प्राप्त करने वाला होता है जिससे ऐसे व्यक्तियों की प्रतिष्ठा धूल में मिल जाती है साथ ही ऐसे व्यक्ति पैदल चलते हैं और ऐसे व्यक्ति स्त्रीहीन या स्त्रियों से विरोध सहने वाला तथा स्त्री के अभाव में पुरुष धर्म-अर्थ और काम से वंचित रहता है, मानसागरी में कहा गया है कि यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो:-

 

युवतिभवन संस्थे भास्करे स्त्रीविलसी, न भवति सुखभागी चंचल: पापशील:।
उदरसमशरीरो नातिदीर्घो न ह्रस्व:, कपिलनयनरूप: पिंगकेश: कुमुर्ति:।।

 

अर्थात यदि सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति को स्त्री का भोग-उपभोग मिलता है किंतु वह सुखी नही होता है तथा ऐसे व्यक्ति अस्थिर स्वभाव के और पापकर्म कर्ता होते हैं साथ ही इनके उदर और देह एक बराबर होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति न तो बहुत लंबा होता है और न ही बहुत छोटा होता है, ऐसे व्यक्तियों का रूप-रंग और आँखें कपिल होती हैं तथा केश कुछ पीले होते है मानसागरी के अनुसार सप्तम का सूर्य पति-पत्नी का सौमनस्य कायम रखता है अन्यथा व्यक्ति को स्त्री का उपभोग अच्छा मिलता है तो वहीं वराहमिहिर जी ने कहा है कि यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो “स्त्रीभी: गत: परिभवं मगदे पतंगे” अर्थात स्त्रियों से तिरस्कार अर्थात अनादर पाने वाला और स्त्रियों का घृणापात्र होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सप्तम भाव में सूर्य मेष, सिंह व मकर राशि का हो तो ही उपरोक्त ग्रंथकारों द्वारा बताए गए अशुभ फल प्राप्त होते हैं, यदि सप्तम भाव में सूर्य मिथुन, तुला या कुंभ राशि का हो तो व्यक्ति शिक्षा विभाग में अच्छी प्रगति करता है साथ ही कानून का विशेषज्ञ होता है और संगीत, नाट्य व रेडियो आदि साधनों में प्रगति करता है ऐसे व्यक्तियों को एक या दो ही संतान होती है, यदि मेष, सिंह या धनु राशि का सूर्य सप्तम भाव में हो तो प्रायः व्यक्ति के दो विवाह होते हैं या एक ही विवाह बहुत विलंब से होता है तथा ऐसे व्यक्ति स्वतंत्रता प्रिय होते हैं अर्थात ऐसे व्यक्ति नौकरी करना पसंद नही करते हैं, यदि सप्तम भाव में सूर्य वृषभ, कन्या या मकर राशि का हो तो ऐसे व्यक्तियों को व्यापार में अच्छा लाभ होता है और ऐसे व्यक्ति जनपद या विधानसभा चुनाव में भी विजयी होते हैं, यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य कर्क, वृश्चिक या मीन राशि का हो तो व्यक्ति वैध/डॉक्टर होता है या विज्ञान विषयक पदवी को प्राप्त करता है या किसी नहर का अधिकारी होता है, यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य वृषभ, कर्क, कन्या, वृश्चिक, मकर या मीन राशि का हो तो व्यक्ति ५० वें वर्ष तक अच्छी उन्नति प्राप्त करता है किंतु इसके उपरांत संघर्ष करता है, पुरुष राशि का सूर्य यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में स्थित हो तो व्यक्ति के जीवन में प्रायः उतार-चढ़ाव बने रहते हैं और ५०-५२ वर्ष की आयु के पास उनके जीवनसाथी की मृत्यु हो जाती है या मृत्यु तुल्य कष्ट प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्तियों को अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है साथ ही इन्हें संतान कम ही होती है किंतु स्त्री राशि का सूर्य लग्न कुंडली के सप्तम भाव में हो तो संतान अधिक होती है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति की पत्नी प्रभावशालिनी, व्यवहार और बर्ताव में अच्छी, विपत्ति के समय पति का साथ देने वाली, अतिथि सत्कार करने वाली, दयालु, नौकरों से अच्छा काम निकाल लेने वाली और धन प्रिया और रूपवती होती है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य मेष, सिंह, धनु और मीन राशि का हो तो व्यक्ति को प्रायः अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ता है और प्रेम विवाह होने के बाद भी पति-पत्नी में संबंध विच्छेद हो जाता है या पत्नी अपने पति को उनके श्वसुर के घर पर रहने को या पति के श्वसुर द्वारा दिए गए घर पर रहने को मजबूर करती है।

 

विशेष:-

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार आज से कई वर्ष पूर्व यवनराज्य सत्ता में अविवाहित लड़कियों का अपहरण हो जाने के कारण से कन्याओं का विवाह “अष्टवर्षा भवेद् गौरी दशवर्षा च रोहिणी” के अनुसार १०-१२ वर्ष में हो जाता था शायद इसी कारण से विभिन्न ग्रंथकारों ने सप्तमस्थ सूर्य के अशुभ फल को बताया है यहाँ एक विचारीय विषय यह है कि क्या केवल सप्तम भाव में सूर्य को देखकर यह फलकथन कहना उचित होता है? ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार भृगुसूत्र में बताया गया है कि यदि लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य हो तो विवाह देरी से होता है क्या यह पूर्णतया तर्क संगत लगता है?? यह एक विचारणीय विषय है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव के अनुसार यदि सिंह राशि का सूर्य सप्तम भाव में हो या सप्तम भाव को शुभ बली ग्रह देखते हों तो एक ही विवाह होता है।

 

जय श्री राम।

 

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बुध वक्री 30 मई 2021: जानिए विभिन्न राशियों पर इसके प्रभाव–Astrology Sutras

बुध वक्री 30 मई 2021: जानिए विभिन्न राशियों पर इसके प्रभाव–Astrology Sutras

 

मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव
मिथुन राशि में वक्री बुध का विभिन्न राशियों पर प्रभाव

 

३० मई २०२१ को बुध मध्य रात्रि १:१६ मिनट पर मिथुन राशि में वक्री हो जाएंगे, बुध को वैदिक ज्योतिष में बुध को राजकुमार का पद प्राप्त है जो कि हमेशा सूर्य के सानिध्य में रहते हैं साथ ही बुध को अस्त होने का भी दोष नही लगता है तो चलिए जानते हैं बुध के वक्री अवस्था से मिथुन राशि में गोचर करने से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए बुध तृतीय भाव से वक्री अवस्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप पराक्रम में कुछ कमी आएगी तथा आप बिना विचार किए कोई महत्वपूर्ण फैसला ले सकते हैं जिससे आपको आर्थिक नुकसान होने की संभावना रहेगी अतः कोई भी महत्वपूर्ण निर्णय सोच-विचार कर ही लें, छोटे भाई-बहन को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, बुआ के पक्ष में किसी के स्वास्थ्य की समस्या से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए बुध द्वितीय भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे जिस कारण से आपकी कहि हुई बात लोगों को बुरी लग सकती है अतः वाणी पर नियंत्रण रखें, मोबाइल फोन हैंग होने या मोबाइल फोन में अन्य किसी प्रकार की समस्या आ सकती है, घर के महत्वपूर्ण निर्णय बहुत सोच-विचार कर ही लें, ननिहाल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या रह सकती है, संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है अतः संतान के स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहें।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए बुध प्रथम भाव अर्थात लग्न से वक्री अवास्था में गोचर करेंगे फलस्वरूप घर में किसी चर्चा को लेकर विचारों में भिन्नता के कारण से क्षणिक विवाद होने की संभावना रहेगी, मन में अनेक प्रकार के विचार आएंगे, बुद्धि व विवेक द्वारा लिए गए निर्णय कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्रदान करेंगे, माता के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव संभव रहेगा, वाहन या किसी मशीनरी पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता आएगी, दूरसंचार, बैंकिंग, फाइनेंस आदि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए बुध द्वादश भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप व्यय में वृद्धि होगी, यात्रा या छोटी बहन या बुआ पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, मन में स्थिरता का अभाव रहेगा, शत्रुओं पर बुद्धि-विवेक द्वारा विजय प्राप्त होगी, बुध के वक्री होने से अकास्मिक खर्चों में वृद्धि तनाव का कारण बन सकता है, ननिहाल पक्ष से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने की संभावना रहेगी, प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए बुध वक्री होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए बुध का वक्री होना शुभ रहेगा, जीवनसाथी के साथ पूर्व से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, लोगों पर अधिक विश्वास करने से आपको बचना होगा अन्यथा किसी प्रकार से आर्थिक हानि हो सकती है, कोई संपत्ति क्रय करने के योग बनेंगे।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए बुध दशम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष आदि क्षेत्र से जुड़े हुए हैं उनकी उन्नति के प्रवल योग बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में अवश्य ही प्राप्त होगा, पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा किंतु माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, बुआ/मासी/बहन आदि के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए बुध नवम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी व धार्मिक कार्यों में धन व्यय होगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, गुरु की सलाह इस दौरान आपके लिए बेहद लाभदायक सिद्ध होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार हेतु कुछ नए विचार मन में आएंगे, नव दमपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार मिल सकता है।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए बुध अष्टम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दवाईयों पर धन व्यय हो सकता है, बड़ी बहन या बुआ के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव है, जिनका कार्य ज्योतिष, बैंकिंग, फाइनेंस, धर्म, टीचिंग आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ है उनके उन्नति हेतु नए अवसर बनेंगे जिसका लाभ निकट भविष्य में मिलेगा, स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहें, चर्म से जुड़ी कोई समस्या संभव है, मोबाइल/लैपटॉप आदि में कुछ परेशानी के कारण धन व्यय हो सकता है।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए बुध सप्तम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, यदि आप नौकरी परिवर्तन का सोच रहे हैं तो अभी कुछ समय रुक जाएं, पिता की उन्नति होगी व पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, प्रेमियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, व्यापारियों के कार्यक्षेत्र में कुछ वृद्धि होगी, जो लोग टीचिंग, बैंकिंग, फाइनेंस, ज्योतिष, धर्म आदि क्षेत्र से जुड़ा हुआ कार्य करते हैं उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, किसी उच्च अधिकारी से मुलाकात संभव है।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए बुध षष्ठ भाव से वक्री अवास्था से गोचर करेंगे फलस्वरूप शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए यह समय अधिक शुभ नही है अतः अपने प्रयासों में वृद्धि लाएं, बुआ व मासी के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी संभव है, नए मित्र बनेंगे।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए बुध पंचम भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप संतान के स्वास्थ्य में कुछ समस्या संभव रहेगी, गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहने की आवश्यकता होगी हालांकि आपके प्रथम भाव से गुरु का गोचर है अतः कोई गंभीर समस्या उत्पन्न होती नही दिख रही है, विद्यार्थियों व प्रेमियों के लिए यह समय सामान्य रहेगा, घर में किसी शुभ कार्य का आयोजन या किसी शुभ समाचार का आगमन संभव रहेगा, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए बुध चतुर्थ भाव से वक्री होकर गोचर करेंगे फलस्वरूप माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, संतान, यात्रा व परिवार पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, व्यापारियों के लिए यह समय अच्छा रहेगा, स्थान परिवर्तन संभव है, नवदंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य हो तो ग्रंथकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति विख्यात, गुणवान, बलवान, शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने वाले, सतोगुणी, उच्च अधिकारी या उच्च अधिकारी के बेहद खास, दंड देने का अधिकार रखने वाले, सुंदर वाहनों से युक्त, सुख विशिष्ट, तेजस्वी, बुद्धिमान, निष्पाप, अनेक वाहनों का सुख प्राप्त करने वाले व तेजस्वी होते हैं साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यंत धनी होते हैं और इनके अनेक शत्रु होते हैं, यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो ऐसे व्यक्तियों के नेत्र में अवश्य ही पीड़ा रहती है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति विख्यात तथा यशस्वी राजा होता है साथ ही सर्वगुणसम्पन्न, संपत्तिवान तथा विजयी होता है, मानसागरी में लिखा है कि यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो:-

 

अरिगृहगतमानौ योगशीलोमतिस्थो निजजन हितकारी ज्ञातिवर्गप्रमोदी।
कृशतनु: गृहमेघी चारुमूर्ति: विलासी, भवति च रिपुजेता कर्मपूज्यो दृढांग।।

 

अर्थात यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति योगी, मतिमान, अपने पक्ष के लोगों का हित चाहने वाला, अपने बंधु-बांधवों को खुश रखने वाला, दुबले-पतले शरीर वाला, सदा घर बनाकर गृहस्थी चलाने वाला, सुंदर तथा विलासी होता है, पाश्चात्य मत से यदि सूर्य षष्ठ भाव में हो तो ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य प्रायः अच्छा नही रहता और यदि सूर्य पीड़ित हो तो लंबे समय तक दवाईयों का खाने के योग बनते हैं और यदि सूर्य स्थिर राशि (वृषभ, सिंह, वृश्चिक, कुंभ) का हो तो व्यक्ति को गले से संबंधित समस्या प्रायः बनी ही रहती है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य हो तो बहुत ही शुभ होता है ऐसे व्यक्ति प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले, शत्रुओं पर विजय पाने वाले, मामा का सुख प्राप्त करने वाले होते हैं तथा इन्हें प्रायः गले, हिर्दय, कुक्षि, पीठ व मूत्रेन्दीय में कोई विकार रहता है, यदि सूर्य चर राशि का षष्ठ भाव में हो तो यकृत के रोग प्रायः बने रहते हैं तथा व्यक्ति की छाती कुछ दुर्बल होती है या शरीर पर कोई जख्म आदि से अत्यंत पीड़ा होती है, यदि लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में स्थित सूर्य पर शुब ग्रह की दृष्टि हो या सूर्य शुभ ग्रहों से युत हो तो व्यक्ति को नेत्र का रोग नही रहता और यदि षष्ठ भाव में सूर्य क्रूर ग्रहों से युत या दृष्ट हो तो २० वें वर्ष में प्रायः नेत्र रोग होता है या पिता को कष्ट होता है और यदि षष्ठ भाव में सूर्य स्वग्रही हो या षष्ठ भाव का स्वामी शुभ स्थिति में हो उपरोक्त बताए गए रोगादि अशुभ फलों में कमी आती है साथ ही ऐसा अनेक बार अनुभव में आया है कि यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो वें वर्ष में पिता को कोई कष्ट रहता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि षष्ठ भाव में सूर्य हो तो विष, शस्त्र, अग्निदाह, भूख, शत्रु आदि से प्रायः व्यक्ति को दुःख का अनुभव होता है और हिंसक जीवों या अन्य किसी कारण से शरीर पर चोटादि का चिन्ह होता है और यदि षष्ठ भाव में सूर्य व मंगल का संबंध बनाता हो तो चक्षु रोग, सूर्य व शनि का संबंध बनने से पिता-पुत्र में मतभेद के अतिरिक्त पत्थर पर गिरने से चोट या बिजली से कष्ट या पेट में वायु रोग से पीड़ा रहती है तथा यदि स्त्री राशि का सूर्य षष्ठ भाव में हो तो व्यक्ति प्रायः सुखी, प्रेमी और पवित्र होता है किंतु स्त्री राशि का षष्ठ भाव में स्थित सूर्य माता के लिए अशुभ होता है और यदि षष्ठ भाव में सूर्य पुरुष राशि का हो तो व्यक्ति सरकार या उच्च अधिकारी द्वारा उच्च पद की प्राप्ति करवाने के अतिरिक्त योगाभ्यासी होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति अत्यंत कामी, घमंडी, क्रोधी होते है और मामा पक्ष का कोई अनिष्ट व मौसी विधवा या पुत्रहीन होती है और ऐसा व्यक्ति अपने अधिकारियों से लड़ता रहता है किंतु यदि स्त्री राशि का सूर्य हो तो व्यक्ति मीठा संवाद करने वाला होता है व मामा और मौसी पक्ष के लिए भी शुभ होता है।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य हो तो शास्त्रकारों का मत है कि व्यक्ति सत्क्रिया शील, बुद्धिमान, अल्प संतान वाला, शरीर का मोटा, शिव-शक्ति की पूजा करने व उनमें रुचि रखने वाला, श्रेष्ठ कामों से विमुख, तथा सुत एवं धन से रहित होता है तथा ऐसे व्यक्तियों को वातस्थल में पीड़ा और पिता से भय होता है साथ ही यदि सूर्य स्थिर राशि (वृषभ, सिंह और वृश्चिक, कुंभ) का होकर पंचम भाव में हो तो व्यक्ति के प्रथम संतान की मृत्यु हो जाती है तथा यदि चर राशि (मेष, कर्क, तुला, मकर) का हो तो संतान का नाश नही होता है और यदि द्विस्वभाव राशि (मिथुन, कन्या, धनु, मीन) का हो तो संतान का नाश होता है साथ ही यदि सूर्य स्वग्रही हो तो भी संतान का नाश होता है किंतु ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव व मत के अनुसार ऐसा तभी हो सकता है जब पंचम भाव और पंचमाधिपति दोनो पापकर्तरी में हो व क्रूर ग्रह या अशुभ भावों के स्वामी से दृष्ट हो लेकिन इस अवस्था में भी सिर्फ एक ही संतान (ज्येष्ठ संतान) का नाश होता है किंतु यदि पंचम भाव का स्वामी शुभ ग्रहों से युत या दृष्ट हो या पंचमाधिपति यदि भाग्य स्थान में उच्च राशि का हो या पंचम भाव को शुभ ग्रह अपनी उच्च राशि में देखते हैं तो गर्भपात या संतान का नाश नही होता है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि पंचम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति सुखहीन, धनहीन, आयुहीन तथा पुत्रहीन होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों की बुद्धि अच्छी होती है और व्यक्ति जंगल व पहाड़ों में घूमने का शौकीन होता है वहीं मानसागरी में कहा गया है कि यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो:-

 

तनयगतदिनेशे शैशवे दुःखभागी न भवति धनभागी यौवने व्याधियुक्त:।
जनयति सुतमेकं चान्यगेहश्च शूर: चपलयतिविलासी क्रूरकर्मा कुचेता:।।

 

अर्थात यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति बचपन में दुःखी रहता है तथा इन्हें धन प्राप्ति नही होती है और यौवन में अनेक रोग से व्यक्ति पीड़ित होता है और इन्हें एक ही पुत्र होता है किंतु व्यक्ति शूर, चंचल बुद्धि वाला और विलासी होता है साथ ही ऐसा व्यक्ति बुरे कर्म करने वाला और बुरी सलाह देने वाला अर्थात दुष्ट होता है तो वहीं वैधनाथ जी ने पंचम भाव के सूर्य स्थित होने के शुभ फल बताए हैं उनके अनुसार “राजाप्रियः चंचलबुद्धियुक्त: प्रवासशील: सुतगेदिनेशे” अर्थात यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति राजा का प्यारा, चंचल बुद्धि वाला, पुत्र सुख प्राप्त करने वाला और परदेश जाने वाला होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति क्रोधी व मूर्ख होता है और व्यक्ति के ज्येष्ठ संतान चाहे वह पुत्र हो या पुत्री के लिए मारक होता है किंतु यदि ज्येष्ठ संतान की कुंडली में आयुष्य के योग हैं तो ऐसे व्यक्तियों की ज्येष्ठ संतान से नही बनती या ज्येष्ठ संतान को कोई रोग रहता है या व्यक्ति अपनी ज्येष्ठ संतान से दूर रहता है या फिर ज्येष्ठ संतान के साथ वैमनस्य, अनबन तथा नित्यप्रति कलह होता रहता है साथ ही ऐसा व्यक्ति दूसरों को ठगने से आनंद की प्राप्ति करता है और प्रमादी अर्थात असावधान और बेफिक्र अर्थात और अपने में मस्त रहता है साथ ही ऐसे व्यक्ति की मृत्यु प्रायः हिर्दय, फेफड़े, किडनी व मस्तिष्क पीड़ा से होती है और इन्हें धर्म में कम ही रुचि रहती है, यवनमत में भी कुछ इसी प्रकार का उल्लेख मिलता है यवनमत कि अनुसार यदि पंचम भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति मूर्ख, कम संतति वाला, क्रोधी, नास्तिक और धार्मिक कार्यों में विघ्न करने वाला होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार यदि पंचम भाव में सूर्य जल राशि का हो तो ऐसे व्यक्तियों के बच्चे कमजोर और बीमार होते हैं तथा यदि पंचम भाव में स्थित सूर्य की चंद्र, गुरु व शुक्र से युति या दृष्टि संबंध न हो तो प्रायः संतान की मृत्यु हो जाती है या संतान को मृत्यु तुल्य कष्ट रहता है, यदि पंचम भाव में सूर्य कर्क, वृश्चिक या मीन राशि का हो तो व्यक्ति को शारीरिक कष्ट और दुःख होता है तथा यदि पंचम भाव में सूर्य वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर व कुंभ राशि का हो तो व्यक्ति बुरी बुद्धि, बुरे कर्म, क्रोधी व बुरी संगति वाला होता है किंतु यदि सूर्य शुभ ग्रह से संबंध रखता हो तो अशुभ फलों में कमी होती है और ऐसे व्यक्ति कंजूस और स्वार्थी होते हैं, यदि पंचम भाव में सूर्य मेष, सिंह व धनु राशि का हो तो व्यक्ति को उच्च शिक्षा प्राप्त होती है व संतान कुछ दिक्कतों व सर्जरी के साथ होती है तथा कुछ ग्रंथकारों का मत है कि यदि मेष का सूर्य पंचम में हो तो संतान नही होती किंतु ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि पंचमाधिपति शुभ ग्रह हो और दिग्बली हो या भाग्येश पंचम भाव में स्थित हो या पंचम का स्वामी भाग्य स्थान या एकादश भाव में हो या पंचम भाव पर शुभ ग्रह की दृष्टि हो तो व्यक्ति को संतान अवश्य ही होती है, यदि सिंह राशि का सूर्य पंचम भाव में हो तो व्यक्ति को संतान तो अवश्य होती है किंतु संतान की शीघ्र ही मृत्यु हो जाती है या मृत्यु तुल्य कष्ट होता है या संतान विवाह उपरांत स्वम् घर छोड़ कर चली जाती है साथ ही ऐसे व्यक्तियों के लिए संतान शुभफलदाई नही होती और संतान का भाग्योदय भी जन्मस्थान व पितृस्थान से दूर ही होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों की संतान व्यवहार कुशल होती है।

 

जय श्री राम।

 

Astrologer:- Pooshark Jetly

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शुक्र का मिथुन राशि से गोचर 28 मई 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव–Astrology Sutras

शुक्र का मिथुन राशि से गोचर 28 मई 2021 जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

 

शुक्र का मिथुन राशि से गोचर
शुक्र का मिथुन राशि से गोचर

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार जीवन में जितने भी सुख-संसाधन होते हैं उन सब का विचार शुक्र ग्रह से किया जाता है शुक्र ग्रह प्रेम, विवाह, शैय्या सुख व अनेक चीजों के कारक होते हैं वृषभ इनकी स्वराशि, तुला मूलत्रिकोण, मीन उच्च राशि व कन्या नीच राशि होती है, ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार २८ मई २०२१ को प्रातः ०४:४५ पर शुक्र वृषभ राशि को छोड़कर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के इस गोचर परिवर्तन से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा:-

 

मेष राशि:-

 

मेष राशिफल
मेष राशिफल

 

मेष राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे महान चातुर्य का कारक ग्रह का पराक्रम भाव से गोचर बेहद शुभ फल देने वाला होगा फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम के द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है, पड़ोस के किसी विपरीत लिङ्ग व्यक्ति के प्रति आकर्षण हो सकता है, स्वास्थ्य उत्तम रहेगा फिर भी स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें क्योंकि मेष राशि वालों के लिए शुक्र मारक ग्रह होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी समस्या उत्पन्न कर सकती है, छोटे भाई-बहन का सहयोग प्राप्त होगा, भाग्य में वृद्धि होगी, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उन्हें नए अवसर प्राप्त होंगे, महिलाओं संग वाद-विवाद से बचें।

 

वृषभ राशि:-

 

वृषभ राशिफल
वृषभ राशिफल

 

वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व षष्ठ भाव के स्वामी होकर धन व कुटुंब स्थान अर्थात द्वितीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, चतुराई युक्त नीतियों से धन संचय करने में सहायता मिलेगी किंतु किसी महिला या दवाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें हालांकि शत्रु आपका अहित नही कर सकेंगे किंतु व्यर्थ में तनाव व धन व्यय में वृद्धि के सूचक हो सकते हैं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर अच्छा रहेगा।

 

मिथुन राशि:-

 

मिथुन राशिफल
मिथुन राशिफल

 

मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप बुद्धि-विवेक व चतुराई के द्वारा उन्नति के योग बनेंगे, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यात्राओं के योग बनेंगे, किसी महिला के कारण से तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, यात्राओं के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, नए मित्र बनेंगे, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, जिन्हें हार्मोन्स या शुगर या अन्य किसी प्रकार की रक्त संबंधित समस्या हो वह शुक्र के इस गोचर दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहें।

 

कर्क राशि:-

 

कर्क राशिफल
कर्क राशिफल

 

कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से व्यय में वृद्धि होगी, महिलाओं, सुख देने वाले संसाधनों, वाहन या अन्य किसी संपत्ति पर धन व्यय होने के योग हैं, फैशन से जुड़ी चीजों पर भी धन व्यय होने के योग बनेंगे, माता व बड़ी बहन के स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, शत्रुओं से सावधान रहें व किसी भी महिला के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें।

 

सिंह राशि:-

 

सिंह राशिफल
सिंह राशिफल

 

सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, शुक्र के इस गोचर के दौरान आप चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त करने में सफल होंगे, महिलाओं विशेषकर बहन व माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, यदि आपके पड़ोस में कोई ऐसी महिला हो जो उच्च पद पर आसीन हो तो उनसे भी लाभ मिलने की संभावना बनेगी, छोटे भाई-बहन यदि विवाह योग्य हो गए हैं तो उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, गुप्त शत्रुओं से सावधान रहें व ज्यादा चटपटे या गर्म पदार्थों के सेवन से परहेज करें।

 

कन्या राशि:-

 

कन्या राशिफल
कन्या राशिफल

 

कन्या राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर कर्म स्थान अर्थात दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर आपके लिए प्रत्येक प्रकार से शुभफलदाई सिद्ध होगा कारोबार में उन्नति होगी, आय में वृद्धि होगी, किसी महिला के माध्यम से भाग्य में वृद्धि होगी, कुटुंब का सहयोग प्राप्त होगा, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें, जिन व्यक्तियों की कोरोना काल में नौकरी चली गयी थी उनको नए अवसर प्राप्त होंगे, नौकरी परिवर्तन व स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे।

 

तुला राशि:-

 

तुला राशिफल
तुला राशिफल

 

तुला राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न व अष्टम भाव के स्वामी होकर भाग्य स्थान से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य में वृद्धि होगी व महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा किंतु किसी महिला के कारण से भाग्योन्नति में अड़चनें आएंगी, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, स्वास्थ्य में सुधार होगा फिर भी स्वास्थ्य हेतु सचेत रहें, पिता को किसी प्रकार का कष्ट संभव रहेगा, धार्मिक कार्यों पर धन व्यय होने के योग बनेंगे।

 

वृश्चिक राशि:-

 

वृश्चिक राशिफल
वृश्चिक राशिफल

 

वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे अर्थात शुक्र आपके लिए प्रवल मारक होकर आयुष्य भाव से गोचर करेंगे अतः शुक्र के इस गोचर काल के दौरान आपको स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा हालांकि अष्टम भाव से शुक्र का गोचर आयुष्य पर संकट नही देता फिर भी जरा सी लापरवाही आपके स्वास्थ्य में बड़ी चिंता का कारण बन सकती है, दाम्पत्य जीवन में विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, दवाईयों व महिलाओं पर धन व्यय होने के योग बनेंगे, महिलाओं के साथ व्यर्थ विवाद में न पड़ें, ससुराल पक्ष के किसी महिला के स्वास्थ्य में कुछ समस्या उत्पन्न हो सकती है, चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा कार्यक्षेत्र का विस्तार करने में सफल होंगे, जिनका कार्य सौंदर्य प्रकाशन, टीचिंग, ज्योतिष, लेखक आदि से जुड़ा हुआ है उनके लिए शुक्र का यह गोचर शुभफलदाई रहेगा।

 

धनु राशि:-

 

धनु राशिफल
धनु राशिफल

 

धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ व एकादश भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर कुछ झंझटों के साथ उन्नति प्रदान करने वाला होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, महिलाओं से सावधान रहें अन्यथा अपमानजनक स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, दाम्पत्य जीवन में कुछ झगड़े-झंझटों के योग बनते हैं किंतु आप उन पर अपनी चतुराई से विजय प्राप्त करने व दाम्पत्य जीवन को मधुर बनाने में सफल होंगे, कार्यक्षेत्र में अवरोध उत्पन्न होंगे जिन्हें आप चतुराई से दूर करने में सफल होंगे, पुराने मित्रों से मुलाकात या वार्ता संभव रहेगी जिससे आपको प्रसन्नता की अनुभूति होगी, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा क्योंकि आपकी राशि के लिए शुक्र रोग, रिपु व ऋण के भाव का स्वामी होता है, जीवनसाथी के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, जिन्हें हार्मोन्स या रक्त विकार से जुड़ी समस्या हो उनको अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहना होगा, भाग्य की वृद्धि होगी, अचानक धन लाभ के योग बनेंगे, महिलाओं से लाभ होगा, बड़ी बहन के ससुराल पक्ष में किसी के स्वास्थ्य में समस्या संभव है।

 

मकर राशि:-

 

मकर राशिफल
मकर राशिफल

 

मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे जिस कारण से प्रेमियों के मध्य विवादपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, संतान के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर मिला-जुला रहेगा, कार्यक्षेत्र का विस्तार होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, अचानक किसी यात्रा के योग बनेंगे, व्यय में वृद्धि होगी, कार्यक्षेत्र के विस्तार, दवाईयों, संतान, माता-पिता व महिलाओं पर धन व्यय होगा, किसी अपरिचित व्यक्ति की बातों में आने से बचें, सुख प्रदान करने वाले संसाधनों पर भी धन व्यय होगा, जिन्हें हिर्दय, रक्त विकार, हार्मोन्स या उदर संबंधित समस्या हो वह अपने स्वास्थ्यबक प्रति पूर्ण सतर्क रहें, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभफलदाई रहेगा।

 

कुंभ राशि:-

 

कुंभ राशिफल
कुंभ राशिफल

 

कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व सप्तम भाव के स्वामी अर्थात राजयोगकारक ग्रह होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप शुक्र का यह गोचर प्रत्येक प्रकार से आपके लिए शुभफलदाई रहने वाला होगा नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, प्रेमियों के मध्य प्रेम संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी, महिलाओं का सहयोग प्राप्त होगा, घर में किसी मेहमान के आगमन के योग बनेंगे, भाग्य में वृद्धि होगी, विद्यार्थियों के लिए भी शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ फल प्रदान करने वाला रहेगा, संतान के स्वास्थ्य में सुधार होगा, जो लोग धार्मिक कार्यों से जुड़े हुए हैं उनके लिए यह शुक्र का गोचर उन्नति के नए अवसर प्रदान करेगा, जीवनसाथी से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे व दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी तथा जीवनसाथी के साथ किसी रोमैंटिक यात्रा पर जाने के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है।

 

मीन राशि:-

 

मीन राशिफल
मीन राशिफल

 

मीन राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे अतः माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, घर में तनवपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन प्रसन्न रहेगा, कार्यस्थल पर अनैतिक संबंध बनने के योग है अतः अनैतिक संबंध बनाने से बचें अन्यथा निकट भविष्य में बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, घर में किसी सदस्य के स्वास्थ्य में समस्या चिंता का मुख्य कारण बनेगी, ससुराल पक्ष से विवाद संभव रहेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, छोटे भाई-बहन की उन्नति होगी, खान-पान का विशेष ख्याल रखें, संतान से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, कार्यक्षेत्र में उन्नति प्राप्त करने हेतु आपको धैर्य रखते हुए चतुराई भरे बड़े पराक्रम से सफलता प्राप्त होगी।

 

जय श्री राम।

 

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लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल–Astrology Sutras

 

लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल

 

यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो शास्त्रकारों का मत है कि ऐसे व्यक्ति दुबले, मानसिक चिंता से ग्रस्त, अकारण विवाद प्रिय, आत्मीय जनों से घृणा करने वाले, घमंडी, कपटी, संग्राम में निश्चल, बहुत स्त्री वाले, प्रतिष्ठित, विख्यात तथा सुख, धन, यान आदि रहित, पिता के धन को खर्च करने वाले व भ्रमणशील होते हैं और ऐसे व्यक्तियों के बन्धु-बांधव और वाहनादि के नाश का भी भय होता है किंतु ऐसे व्यक्तियों को शोभायुक्त अधिकार अवश्य प्राप्त होता है और ऐसे व्यक्ति परदेश या विदेश में वास करते हैं तथा इनका चित्त किसी भी समय शांत नही रहता है।

 

मंत्रेश्वर महाराज जी ने फलदीपिका में कहा है कि यदि लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य सुखहीन, बंधुहीन, भूमिहीन, मित्र रहित तथा भवनहीन होता है, ऐसे व्यक्तियों को राजसेवा प्राप्त होती है तथा ऐसे व्यक्ति संपत्ति को नष्ट करने वाले होते हैं, आचार्य वराहमिहिर जी ने कहा है कि “विसुख: पीड़ित मानस: चतुर्थे” अर्थात चतुर्थ भाव का सूर्य हो तो व्यक्ति सुखहीन तथा अशांत चित्त वाला होता है मानसागरी में लिखा है:-

 

विविधजनविहारी बंधुसंस्थ: दिनेशो भवति च मृदुचेता: गीतवाद्यानुरक्त:।
समरशिरसि युद्धे नास्ति भंग: कदाचित्त प्रचुरधनकलत्री पाठीवानां प्रियश्च।।

 

अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो मनुष्य लोकप्रिय तथा सर्वजनप्रिय होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति कोमल हिर्दय वाले होते हैं और इनका प्रेम गीत व वाद्यकलाओं में होता है साथ ही ऐसे व्यक्ति युद्ध में आगे होकर लड़ते हैं और कभी पीठ नही दिखाते साथ ही ऐसे व्यक्तियों को स्त्री सुख और विपुल धन सुख मिलता है और ऐसे व्यक्ति राजप्रिय होते हैं।

 

सूर्य के चतुर्थ भाव के अनेक शास्त्रकारों ने अपने-अपने मत रखे हैं जिनमे समानता का अभाव देखने को मिलता है कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल तो कुछ ग्रंथकारों ने चतुर्थ भाव में सूर्य के निकृष्ट फल बताए हैं चलिए एक और ग्रंथकार के मत को देखते हैं वैधनाथ जी ने चतुर्थ भाव के फल में लिखा है कि “हिर्दय रोगी धन-धान्य-बुद्धि रहित: क्रूर: सुखस्थे रवौ” अर्थात यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति हिर्दय के रोग से पीड़ित और धन-धान्य व बुद्धि से हीन और क्रूर होता है।

 

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के मत व अनुभव के अनुसार चतुर्थ भासव से व्यक्ति के सुखों व माता का विचार किया जाता है जहाँ सूर्य (क्रूर ग्रह) बैठा हो तो उससे यह तो निश्चित हो जाता है कि व्यक्ति को जीवन में सुख प्राप्ति हेतु अत्यंत परिश्रम करना पड़ता है ऊपर अनेक ग्रंथकारों के मत पर चर्चा की गई है जिसमें मानसागरी ने चतुर्थ भाव में सूर्य के शुभ फल को बताया है तो वहीं अन्य ग्रंथकारों ने इसे निकृष्ट फल देने वाला बताया है किंतु मेरे अनुभव में अब तक यही आया है कि यदि चतुर्थ भाव में सूर्य यदि वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि का हो तो अशुभ फल मिलते हैं और यदि चतुर्थ भाव में सूर्य मेष या कर्क राशि का हो तो व्यक्ति संशयी, म्लान चेहरे वाला और वैश्यागामी होता है किंतु चतुर्थ भाव में सूर्य यदि मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर और मीन राशि का हो तो शुभ फल मिलते हैं, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार यदि चतुर्थ भाव में सूर्य हो तो व्यक्तियों को बचपन में अनेक प्रकार के कष्ट होते हैं किंतु २८ से ५० वर्ष की आयु में व्यक्ति अनेक प्रकार के सुखों को प्राप्त करता है, लग्न कुंडली के यदि चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति पहली अवस्था में दुःखी, मध्य में सुख व वृद्धावस्था में पुनः दुःखी होता है तथा विभिन्न ग्रंथकारों द्वारा बताए गए अशुभ फल कुछ विशेष राशियों जैसा कि मैंने ऊपर लिखा है या सूर्य के अन्य क्रूर से संबंध बनाने पर ही मिलता है, ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुभव व मत के अनुसार यदि चतुर्थ भाव के स्वामी बली ग्रहों से युक्त हो या चतुर्थ भाव का स्वामी केंद्र अथवा त्रिकोण में हो या सूर्य चतुर्थ भाव में सिंह राशि का हो तो ऐसी स्थिति में सूर्य के शुभ फल मिलते हैं तथा व्यक्ति को वाहनादि का सुख प्राप्त होता है किंतु यदि चतुर्थ भाव का स्वामी भी पीड़ित हो प्रायः सभी सुखों का नाश होता है।

 

जय श्री राम।

 

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