Astrologer Pooshark Jetly is a Professional astrologer with 10 years experience. He has a strong interest in astrology, therefore he predicts a kundli with high accuracy. He is an expert in Vedic Astrology, Numerology, Face Reading, Palmistry, Vastu Shastra and Prashna Kundali. He holds degrees of both Jyotish Praveen and Jyotish Visharad. However, astrology runs through his veins because his father is also an astrologer. He learned the basics of astrology from his father. He is good enough in advising people on love relationships, marriage, career, job, business, black magic removal, health concerns, marriage troubles, legal issues, property & progeny related matters. Astrologer Pooshark Jetly helps many clients of different countries & has a huge number of clients who are actually benefitted by his accurate predictions & remedies, Moreover, the remedies provided by Astrologer Pooshark Jetly are very simple & proven to have a very positive impact in people's lives.
बहुत से व्यक्ति मेरे पास आते हैं कि उनके परिवार जन किसी भूत-प्रेत बाधा के प्रभाव में हैं जिससे उनकी बहुत ही दयनीय स्थिति हो गयी है और बहुत से तांत्रिक व अनेक विद्वानों के पास जाने से भी कोई राहत नही मिलती अतः उन सभी प्रेरणा व अपने आराध्य श्री हनुमान जी की कृपा से आज मैं कुछ ऐसे अचूक उपाय व अनुष्ठान बता रहा हूँ जिसको पूर्ण श्रद्धा से करने से भूत-प्रेत-पिशाच बाधा से तत्काल मुक्ति मिल जाती है तो चलिए जानते हैं उन उपायों के बारे में:-
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यानघन। जासु हिर्दय आगार बसहिं राम सर चाप धर।।
प्रतिदिन ११ माला के हिसाब से ४९ दिवस तक इसका जप करना चाहिए साथ ही श्री हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने बैठकर पंचोपचार से उनकी पूजा कर के कम से कम ७ शनिवार तक प्रत्येक शनिवार को हनुमान चालीसा का १०८ बार पाठ करना चाहिए।
६४ यंत्र
इस ६४ यंत्र को भोजपत्र पर लाल चंदन जिसे रक्त चंदन भी कहते हैं से लिखकर उसे मँढ़वा कर सभी कमरों में टाँग देना चाहिए व प्रेत की सद्गति हेतु भागवत का सप्ताह अनुष्ठान के रूप में एक पाठ और श्री विष्णु सहस्रनाम के १०८ पाठ कराने चाहिए।
श्री हनुमान जयंती विशेष जानिए हनुमान जी की कृपा प्राप्ति के लिए पूजा कब करनी चाहिए
सर्वसाधारण और अधिकतर महात्माओं के मुखारविन्द से सुनने में आता है कि “सवा पहर दिन चढ़ जाने के पहले श्री हनुमान जी का नाम-जप तथा हनुमान चालीसा का पाठ नही करना चाहिए” क्या यह बात यथार्थ है?? इसमें कितनी सच्चाई है?? चलिए इस विषय पर मैंने अपने गुरु से जो सीखा व जाना वह आप सभी के समक्ष रखता हूँ:-
सर्वप्रथम तो मैं अपने आराध्य श्री हनुमान जी के चरण कमलों में नमन करता हूँ कि उन्होंने मुझ जैसे तुच्छ दास को इस योग्य समझा कि मैं इस विषय पर लोगों की शंका का समाधान कर सकूँ, आज तक इस दास को न तो किसी ग्रंथ में ऐसा कहीं प्रमाण मिला है कि उपासक को किसी उपास्य देव के स्तोत्रों का पाठ या उनके नाम का जप आदि प्रातः काल सवा पहर तक न कर के उसके बाद करना चाहिए अपितु प्रत्येक ग्रंथ पर इसी बात का प्रमाण मिलता है कि सदा और निरंतर तैल धारावत् अजस्त्र, अखंड भजन-स्मरण करना चाहिए यथा:-
कवित्तरामायण रसना निसि बासर राम रटौ! सदा राम जपु राम जपु। जपहि नाम रघुनाथ को चर्चा दूसरी न चालू। तुलसी तू मेरे कहे रट राम नाम दिन-रात्रि।
इसी प्रकार श्री हनुमान जी के संबंध में भी सदा-सर्वदा भजन करने का ही प्रमाण मिलता है यथा:-
मंगलागार संसारभारापहर बानराकारबिग्रह पुरारी। राम संभ्राज सोभा सहित सर्बदा, तुलसी मानस रामपुर बिहारी।।
कदाचित् किसी को श्री हनुमान जी के इस वचन का ध्यान आ गया हो:-
प्रात जो लेइ जो नाम हमारा। तेहि दिन ताहि न मिले अहारा।।
परंतु कुछ अज्ञानी लोगों ने इसका गलत भावार्थ निकाल दिया जब कि यहाँ “हमारा” शब्द का संबंध ऊपर की चौपाई के “कपिकुल” अर्थात वानर योनि से है, न कि अपने शरीर (श्री हनुमान विग्रह) से वहाँ हनुमान जी कहते हैं:-
कहहु कवन मैं परम कुलीना। कपि चंचल सबहीं बिधि हीना।
अर्थात् विभीषण जी! आप अपने आपको राक्षस कुल का मानकर भय मत करें बताइए मैं ही कौन से बड़े श्रेष्ठ कुल का हूँ, वानर योनि तो चंचल और पशु होने से प्रत्येक प्रकार से हीन है हमारे कुल (वानर) का अगर कोई प्रातः काल नाम ले ले तो उस दिन उसे आहार का ही योग नही लगता:–
अस मैं अधम सखा सुनु मोहू पर रघुबीर। किन्हीं कृपा सुमिरि गुन भरे विलोचन नीर।।
अर्थात:- ऐसे अधम कुल में मैं हूँ किंतु सखा! सुनिए, मुझ पर श्री राम जी ने कृपा की है इस विरद को स्मरण कर कहते-कहते श्री हनुमान जी के नेत्रों से आँसू भर आए अतः “हमारा” शब्द का भाव यह है कि कुल तो हमारा ऐसा नीच है कि “वानर” शब्द का ही प्रातः मुँह से निकलना अच्छा नही माना जाता परंतु उसी योनि में उत्पन्न मैं जब प्रभु का कृपा पात्र बना लिया गया तब तो—
राम कीन्ह आपन जब हीं तें, भयउँ भूषण तबही तें।।
मेरे हनुमान, महाबीर, बजरंगी, पवनकुमार आदि नाम प्रातः स्मरणीय हो गए इसका प्रमाण कुछ इस प्रकार से है—
अशुभ होई जिन्ह के सुमिरन तें बाहर रीछ बिकारी। बेद बिदित पावन किए ते सब महिमा नाथ तिहारी।।
अतएव श्री रामायण जी के उपर्युक्त पदों से श्री हनुमान जीका नाम प्रातः काल जपने का निषेध कदापि सिद्ध नही होता, उसका तात्पर्य “वानर” शब्द से ही है जो कुल की न्यूनता का घोतक है, स्वम् श्री हनुमान जी की न्यूनता का नहीं, कहीं-कहीं लोग ऐसा तर्क करते हैं कि श्री हनुमान जी रात्रि में जगने के कारण से प्रातः निद्रा मग्न रहते हैं, इसलिए सवा पहर वर्जित है, सो न तो इसका भी कोई प्रमाण इस तुच्छ दास को मिला है और न ही यह बात उचित मालूम होती है कि योगिराज, ज्ञानियों में अग्रगण्य श्री हनुमान जी प्रहर भर दिन चढ़ने तक निद्रा मग्न रहते हैं अथवा उनका अमित दिव्य विग्रह और अमोघ शक्ति वपु एक रूप से सेवा में तत्पर रहते हुए दूसरे अनेक रूपों से अपने भक्तों की सेवा स्वीकार करने में असमर्थ रहता है, जहाँ प्रेमपूर्वक श्री राम नाम का जप और श्री रामायण का पाठ होता है, वहाँ तो श्री मारुति जी सदा ही विद्यमान रहते हैं चाहे वह प्रातः काल हो या अन्य कोई काल हो, फिर इस झगड़े में पड़कर तो श्री हनुमान जी के आराम-विश्राम के लिए सवा प्रहर भगवद्भजन भी छोड़ना पड़ेगा, जिसका छूटना ही उनकी दृष्टि में विपत्तिजनक है—
कह हनुमान बिपति प्रभु सोई। जब तब सुमिरन भजन न होई।।
अतएव इस दीन तुच्छ दास के तुच्छ विचार से तो सवा प्रहर क्या, एक क्षण भी भाग्यवानों को श्री हनुमत् नाम-भजन और पाठ आदि से विमुख नही रहना चाहिए, प्रातः काल का समय तो भजन के लिए ही है, रुद्रांश श्री हनुमान जी सदा और सब काल में वंदनीय हैं।
मिथुन लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रहे फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।
मिथुन लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के दशम भाव पिता व राज्य स्थान पर अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली मीन राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को पिता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा और राज-समाज में अच्छा मान-सम्मान प्राप्त होगा तथा कारोबार के क्षेत्र में जातक/जातिका को बड़ी सफलता प्राप्त होगी और भाई-बहन का उत्तम सुख व सहयोग प्राप्त होगा साथ ही सूर्य के सातवीं दृष्टि से चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान को मित्र बुध के स्वामित्व वाली कन्या राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका अपनी पराक्रम शक्ति द्वारा सुख के साधनों की वृद्धि करने में सफल रहेंगे और अपने पुरुषार्थ द्वारा बड़ी भारी सफलता प्राप्त करेंगे तथा माता का उत्तम सुख व सहयोग प्राप्त करेंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के एकादश भाव लाभ स्थान पर अपनी उच्च राशि व मित्र मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका अपने पराक्रम द्वारा जीवन में बड़ी भारी उन्नति प्राप्त करेंगे तथा आमदनी की वृद्धि हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे और भाई-बहन का उत्तम सुख प्राप्त करेंगे तथा इन सभी कारणों से मन में उत्साह बना रहेगा और सूर्य के सातवीं दृष्टि से पंचम भाव विद्या व संतान स्थान को अपनी नीच राशि व शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली तुला राशि में देखने के कारण से संतान पक्ष से कुछ कष्ट अनुभव होगा और कुछ बाधाओं व कठिन परिस्थितियों से होते हुए शिक्षा पूर्ण होगी साथ ही लाभ के दृष्टिकोण से जातक/जातिका वाणी में कुछ रूखेपन से काम निकालेंगे तथा अत्यंत साहसी होंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के द्वादश भाव खर्च व बाहरी स्थान पर सूर्य के अपने शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली वृषभ राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को भाई-बहन के सुख-संबंधों में कुछ हानि व कमजोरी प्राप्त होगी और खर्चे की अधिकता के कारण से मन व्यथित रहेगा तथा पराक्रम में कुछ बंधन सा अनुभव होगा किंतु जन्म स्थान व पितृ स्थान से दूर परिश्रम से बड़ी भारी सफलता प्राप्त होगी फिर भी खर्च के वेग को जातक/जातिका रोक नही सकेंगे और सातवीं दृष्टि से सूर्य के षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान को मित्र मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका शत्रु पक्ष में प्रभाव और मिठास की शक्ति से काम लेंगे किंतु अपने अंदर की कमजोरी को छिपाकर बड़ी हिम्मत व परिश्रम से शत्रुओं पर विजय प्राप्त करेंगे फिर भी उत्साह में कुछ कमी अनुभव होगी।
मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव मे सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम, अष्टम व नवम भाव मे सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।
मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के सप्तम भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के सप्तम भाव स्त्री व रोजगार स्थान पर अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली धनु राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका तेजस्वी कर्म की शक्ति के द्वारा गृहस्थ सुख को प्राप्त करेंगे तथा रोजगार के मार्ग में कठिन परिश्रम से बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे साथ ही भाई-बहन का भी उत्तम सुख प्राप्त करेंगे और सूर्य के सातवीं दृष्टि से प्रथम भाव अर्थात लग्न (देह स्थान) को अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका के जीवनसाथी के स्वभाव में कुछ तेजी और गर्मी रहेगी और भोगादिक पक्ष में शक्ति प्राप्त करेंगे तथा उन्नति हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे और समाज में अच्छा मान-सम्मान व प्रभाव प्राप्त करेंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के अष्टम भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के अष्टम भाव आयु-मृत्यु व पुरातत्व स्थान पर सूर्य के अपने शत्रु शनि के स्वामित्व वाली मकर राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को भाई-बहन के सुख-संबंधों में कुछ हानि व कमी अनुभव होगी और पुरुषार्थ कर्म के मार्ग में असफलता व कमजोरी प्राप्त होगी तथा कठिन परिश्रम करने के कारण से जीवन में अशांति अनुभव होगी और अपने बाहुबल के कार्यों में निराशाओं के कारण से कभी-कभी जातक/जातिका हिम्मत हार जाएंगे और पुरातत्व संबंध की कुछ नीरसता युक्त शक्ति प्राप्त होगी साथ ही सूर्य के द्वितीय भाव धन व कुटुंब स्थान को मित्र चंद्र के स्वामित्व वाली कर्क राशि मे देखने के कारण से जातक/जातिका धन की वृद्धि करने के लिए थकान पाने वाले परिश्रम से सफलता प्राप्त करेंगे और उत्साह हीन कुटुंब का सुख प्राप्त करेंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के नवम भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के नवम भाव भाग्य व धर्म स्थान पर अपने शत्रु शनि के स्वामित्व वाली कुंभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को भाई-बहन का कुछ अरुचिकर सहयोग प्राप्त होगा और जातक/जातिका अपने पुरुषार्थ द्वारा भाग्य की वृद्धि करने में सफल रहेंगे और कुछ भेद भावना रखते हुए धर्म का पालन करेंगे एवं सूर्य के सातवीं दृष्टि से तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम स्थान को अपने स्वम् के स्वामित्व वाली सिंह राशि में देखने के कारण से भाग्य की कुछ अरुचिकर सहयोग शक्ति से पराक्रम द्वारा सफलता प्राप्त होगी तथा जातक/जातिका हिम्मत से काम लेंगे और पुरुषार्थ पर भाग्य की अपेक्षा अधिक विश्वास रखेंगे साथ ही भाई-बहन का कुछ सहयोग प्राप्त करेंगे तथा कुछ तेजस्वी कर्म द्वारा उन्नति प्राप्त करेंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ, पंचम व षष्ठ भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।
मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान पर सूर्य के अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली कन्या राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका पराक्रम शक्ति के द्वारा घरेलू सुख के साधनों में वृद्धि करने में सफल रहेंगे और भाई-बहन का सुख व सहयोग प्राप्त करेंगे और माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त करेंगे साथ ही भूमि व मकानादि का भी उत्तम सुख प्राप्त होगा और सूर्य के सातवीं दृष्टि से दशम भाव पिता व राज्य स्थान को अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली मीन राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका पराक्रम शक्ति द्वारा पिता-स्थान में सफलता प्राप्त करेंगे और राज-समाज में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे तथा कारोबार के मार्ग में बड़ी सफ़लता प्राप्त करेंगे और सुख पूर्वक पराक्रम शक्ति द्वारा अर्थात परिश्रम से उन्नति प्राप्त करेंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के पंचम भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के पंचम भाव विद्या व संतान स्थान पर अपनी नीच राशि व शत्रु शुक्र के स्वामित्व वाली तुला राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को संतान पक्ष में कुछ कष्ट अनुभव होगा और कठिन परिस्थितियों से होते हुए शिक्षा पूर्ण होगी तथा बाहुबल की पराक्रम शक्ति में कुछ कमजोरी अनुभव होगी साथ ही जातक/जातिका बोल-चाल में कुछ छिपाव शक्ति से काम लेंगे और सूर्य के सातवीं दृष्टि से एकादश भाव लाभ स्थान को सूर्य के अपने उच्च राशि व मित्र मंगल के स्वामित्व वाली मेष राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका बुद्धि और बाहुबल की शक्ति से धन वृद्धि करने में विशेष रूप से सफल होंगे साथ ही धन वृद्धि हेतु कुछ झूठ और छिपाव शक्ति से काम लेंगे क्योंकि बुद्धि स्थान पर सूर्य नीच राशि में स्थित होकर लाभ भाव को उच्च भावना से देख रहा है, इसलिए लाभ के मुकाबले में जातक/जातिका लाभ के मुकाबले में शब्द शक्ति के सत्य-असत्य की परवाह नही करेंगे और अच्छा धन लाभ प्राप्त करेंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के षष्ठ भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान पर सूर्य के अपने मित्र मंगल के स्वामित्व वाली वृश्चिक राशि में बैठा होने के कारण से पराक्रम शक्ति द्वारा जातक/जातिका को शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी तथा विपक्षियों के सामने जातक/जातिका सदैव ही विजय प्राप्त करेंगे और प्रतियोगी परीक्षाओं को अपने पराक्रम द्वारा बड़ी ही सहजता से उत्तीर्ण करने में सफल रहेंगे किंतु भाई-बहन के सुख-संबंधों में कुछ वैमन्यस्ता प्राप्त करेंगे और सातवीं दृष्टि से सूर्य के द्वादश भाव अर्थात खर्च व बाहरी स्थान को अपने शत्रु शुक्र की वृषभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को खर्च के मार्ग में कुछ असंतोष रहेगा तथा बाहरी स्थानों में कुछ नीरसता प्राप्त होगी किंतु जातक/जातिका खर्च के मार्ग में शक्ति प्राप्त करने के लिए अत्यधिक कठिन परिश्रम करेंगे और खर्च हेतु धन की व्यवस्था करने में सफल रहेंगे।
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंडली का चतुर्थ भाव व्यक्ति की मानसिक स्थिति, सोच व पारिवारिक सुख को दर्शाता है और यदि चतुर्थेश पीड़ित होकर सप्तम भाव को देखता है तो माता के कारण से दाम्पत्य जीवन में कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होती हैं ग्रंथकारों का मत है कि:-
अर्थात:- यदि चतुर्थेश पाप ग्रहों से पीड़ित हो या नीच राशि का हो या शत्रु राशि का हो या अस्त ग्रहों से युत हो और शुभ ग्रहों से दृष्ट या युत न हो तो व्यक्ति अपने जाति से द्वेष करता है।
चलिए इसको एक उदाहरण कुंडली से समझने का प्रयास करते हैं:-
उदाहरण कुंडली:-१
इस कुंडली में उपरोक्त श्लोक के अनुसार चतुर्थेश सूर्य षष्ठ भाव में अपनी नीच राशि तुला में राहु व लग्नेश शुक्र से युत है यद्यपि यहाँ सूर्य का नीचभंग हो रहा है फिर भी सूर्य के अपने नीच राशि में स्थित होने के कारण से व मनोस्थिति के ग्रह सूर्य का षष्ठ भाव में जाना यह दर्शाता है कि व्यक्ति में द्वेष भावना अत्यधिक बली रहेगी और व्यक्ति प्रायः परेशान रहेंगे और इन्हें परिवार वालों के साथ तालमेल बैठाने में दिक्कतें आएंगी साथ ही लग्नेश का भी षष्ठ भाव में जाना भी इसी चीज को और बली करता है जिस कारण से व्यक्ति का स्वभाव भी लोगों से द्वेष करने वाला रहेगा और राहु से इन दोनों ग्रह (सूर्य व शुक्र) की युति होने के कारण से भ्रामक स्थितियों के कारण से व्यक्ति अपने परिवार से द्वेष करेगा और चिंतित रहेगा, अब यदि यहाँ बात इनके दाम्पत्य जीवन की करी जाए तो सप्तमेश मंगल सप्तम भाव में स्वराशि का चंद्र व गुरु से युत और शनि से दृष्ट है अतः इनके दामपत्य जीवन में भी कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी किंतु विवाह नही टूटेगा और जन्म स्थान से दूर जाकर व्यक्ति को बड़ी भारी सफलता प्राप्त होगी।
अर्थात:- यदि चतुर्थ भाव में बहुत से पाप ग्रह बैठे हों तथा चतुर्थेश और चतुर्थ का कारक भी पापयुक्त या पाप ग्रहों द्वारा दृष्ट हो तो इस योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति अपने बंधुओं से सम्मानित नही होता; वह नीच, तुच्छ तथा कुत्सित समझा जाता है।
चलिए इसको भी एक उदाहरण कुंडली से समझने का प्रयास करते हैं:-
उदाहरण कुंडली:-२
इस कुंडली में उपरोक्त श्लोक के अनुसार चतुर्थ भाव में दो पाप ग्रह सूर्य व शनि स्थित हैं जिनमें सूर्य अपनी नीच राशि और शनि अपनी उच्च राशि का है और चतुर्थेश तृतीय भाव में अपनी नीच राशि का स्थित है साथ ही चतुर्थ भाव का कारक ग्रह चंद्रमा अष्टम भाव में स्थित है जिस कारण से यह व्यक्ति अपने परिवार में अत्यंत दुखी व परिवार वालों द्वारा प्रताड़ित किए जाते थे यहाँ तक कि इनके परिवार वालों ने इन पर कई मुकदमें भी कर रखे थे जब यह व्यक्ति मेरे पास आए तो मैंने इनको एक ही सलाह दी कि आप मातृस्थान व पितृस्थान से जितने अधिक दूर रहेंगे उतनी अच्छी उन्नति करेंगे व सुखमय जीवन को व्यतीत करेंगे जिसके बाद यह व्यक्ति घर वालों से छुपकर विदेश गए और वहाँ उनको बड़ी सफलता मिली तथा आज सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं कुल मिलाकर यदि चतुर्थेश व चतुर्थ भाव और चतुर्थ भाव का कारक पीड़ित हो तो ऐसे व्यक्ति जब तक अपने परिवार वालों के साथ रहते हैं तब तक संघर्ष व अपमानजनक स्थितियों का सामना करते रहते हैं और इनको सुख न्यून के समान ही मिलता है।
यह तो बात थी कि कब परिवार वालों से अपमान मिलता है ठीक इसी प्रकार ग्रंथकारों ने कुछ ऐसे भी योग बताए हैं जिनमें परिवार से व्यक्ति को सम्मान की प्राप्ति होती है तथा व्यक्ति परिवार में भाग्यशाली समझा जाता है जिसे मैं अगले भाग में प्रकाशित करूँगा….
मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल
मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम, द्वितीय व तृतीय भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।
मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के प्रथम भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के प्रथम भाव अर्थात लग्न (देह स्थान) पर सूर्य के अपने मित्र बुध के स्वामित्व वाली मिथुन राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को दैहिक परिश्रम द्वारा समाज में मान-सम्मान प्राप्त होगा साथ ही जातक/जातिका अपने प्रतिष्ठा की वृद्धि हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे और भाई-बहन का पूर्ण सहयोग प्राप्त करेंगे साथ ही जातक/जातिका साहसी होंगे और सातवीं दृष्टि से सप्तम भाव स्त्री व रोजगार स्थान को अपने मित्र गुरु के स्वामित्व वाली धनु राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका गृहस्थ के भोगादिक पक्ष में पुरुषार्थ शक्ति द्वारा सफलता प्राप्त करेंगे और रोजगार के मार्ग में अत्यधिक परिश्रम से बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे और इसी सफलता के कारण से समाज में भाग्यशाली समझे जाएंगे साथ ही जातक/जातिका के देह के अंदर बड़ी हिम्मत और स्फूर्ति तथा क्रोध इत्यादि व्याप्त रहेगा।
मिथुन लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के द्वितीय भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के द्वितीय भाव धन व कुटुम्ब स्थान पर अपने मित्र चंद्र की कर्क राशि में स्थित होने के कारण से भाई-बहन के सुख-संबंधों में कुछ कमी रहेगी तथा जातक/जातिका पुरुषार्थ द्वारा धन की वृद्धि करने में सफल रहेंगे और कुटुंब का सुख प्राप्त करेंगे और धन की वृद्धि करने के कारण से देह के पुरुषार्थ में कुछ कमी अनुभव होगी कहने का आशय यह है कि जातक/जातिका के स्वास्थ्य में कुछ परेशानी या चिंता व्याप्त रहेगी और सातवीं दृष्टि से अष्टम भाव आयु-मृत्यु व पुरातत्व स्थान को अपने शत्रु शनि की मकर राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को जीवन की दिनचर्या में कुछ अशांति अनुभव होगी और पुरातत्व शक्ति का सहयोग कुछ अरुचिकर एवं असंतोष रूप में प्राप्त होगा और अत्यधिक परिश्रम से धन की वृद्धि करने में जातक/जातिका सफल होंगे।
मिथुन लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल:-
मिथुन लग्न कुंडली के तृतीय भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सूर्य के तृतीय भाव भाई-बहन व पराक्रम स्थान पर सूर्य के अपने स्वामित्व वाली सिंह राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका अत्यधिक पराक्रमी होंगे और पराक्रम शक्ति की सहायता से समाज में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त करेंगे तथा भाई-बहन का उत्तम सुख व पूर्ण सहयोग प्राप्त करेंगे साथ ही अपने पराक्रम पर पूर्ण विश्वास रखेंगे और सातवीं दृष्टि से नवम भाव भाग्य व धर्म स्थान को अपने शत्रु शनि की कुंभ राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को भाग्य के प्रति कुछ असंतोष रहेगा और धर्म के मार्ग में कुछ मतभेद समझने की वजह से अपने अलग ढंग से धर्म का पालन करेंगे और बहादुर स्वभाव होने के कारण से भाग्य की कुछ कमजोरी समझते रहने पर भी परवाह नही करेंगे और अपनी पराक्रम शक्ति से कठिन से कठिन कार्यों को भी पूर्ण करने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहेंगे।
वृषभ लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल
वृषभ लग्न कुंडली के दशम, एकादश व द्वादश भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी द्वारा लिखित यह ग्रह फल उनके स्वम् के अनुभव पर आधारित है यहाँ सिर्फ एक ही ग्रह के विभिन्न भावों में फल को बताया गया है अतः अन्य किसी ग्रह के युति व दृष्टि संबंध बनाने या नीचभंग राजयोग बनने से बताए गए फलों में कुछ बदलाव संभव रहेगा।
वृषभ लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल:-
वृषभ लग्न कुंडली के दशम भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार दशम भाव पिता व राज्य स्थान पर सूर्य के अपने शत्रु शनि की कुंभ राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को कुछ नीरसता युक्त पिता का सुख प्राप्त होगा और कुछ कठिनाई के माध्यम से समाज में मान तथा प्रभाव प्राप्त होगा और कारोबार के मार्ग में बड़ी सफलता प्राप्त होगी किंतु सूर्य अंशों में जितना अधिक बली होगा उतनी कम उन्नति होगी परंतु सातवीं दृष्टि से सूर्य के चतुर्थ भाव माता व भूमि स्थान को अपने स्वामित्व वाली सिंह राशि में देखने के कारण से भूमि-मकानादि व माता का उत्तम सुख जातक/जातिका को प्राप्त होगा तथा घरेलू वातावरण में सुख शांति का माहौल रहेगा जिस कारण से जातक/जातिका सुखपूर्वक उन्नति प्राप्त करने हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे।
वृषभ लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल:-
वृषभ लग्न कुंडली के एकादश भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार एकादश भाव लाभ स्थान पर सूर्य के अपने मित्र गुरु की मीन राशि में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका को जीवन में बड़ी भारी सफलता प्राप्त होगी और अच्छी आमदनी रहेगी साथ ही भूमि, वाहन, मकान एवं वायुयान यात्रा का उत्तम सुख प्राप्त होगा और माता का उत्तम सुख प्राप्त होगा साथ ही घरेलू वातारण में भी सुख शांति का माहौल रहेगा और सुखेश होकर सूर्य के लाभ स्थान में बैठने के कारण से जातक/जातिका सुख पूर्वक उन्नति प्राप्त करने हेतु सदैव प्रयत्नशील रहेंगे तथा सातवीं दृष्टि से सूर्य के पंचम भाव विद्या व संतान स्थान को मित्र बुध की कन्या राशि में देखने के कारण से जातक/जातिका को संतान का उत्तम सुख प्राप्त होगा तथा बुद्धि में उत्तेजना और उच्च शिक्षा प्राप्त होगी।
वृषभ लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल:-
वृषभ लग्न कुंडली के द्वादश भाव में सूर्य का फल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार द्वादश भाव खर्च व बाहरी स्थान पर सूर्य के अपने उच्च राशि मेष में स्थित होने के कारण से जातक/जातिका खर्चा बहुत करेंगे तथा बाहरी स्थानों में सुख पूर्वक बड़ी सफलता प्राप्त करेंगे और जन्मस्थान से बाहर जातक/जातिका का भाग्योदय होगा किंतु घरेलू सुख संसाधनों में कुछ त्रुटि रहेगी और माता पक्ष में भी कुछ असंतोष बना रहेगा साथ ही भूमि-मकानादि के सुख संबंधों में हानि होगी और सातवीं दृष्टि से षष्ठ भाव रोग व शत्रु स्थान को सूर्य के अपनी नीच तुला में देखने के कारण से जातक/जातिका शत्रु पक्ष में कुछ पेचीदी शक्ति के द्वारा विजय प्राप्त करेंगे और देह के उदर, नेत्र व मूत्रेन्दीय स्थानों में कुछ विकार रहेगा।
21 जून 2021 शुक्र का कर्क राशि से गोचर इन राशि वालों के चमकेंगे सितारे–Astrology Sutras
शुक्र का कर्क राशि से गोचर
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वैदिक ज्योतिष में शुक्र को कला, सौंदर्य, प्रेम व भौतिक सुखों का कारक माना गया है सामान्य शब्दों में यदि समझा जाए तो हर प्रकार के सुख जिनसे प्राप्त होते हैं उन सभी के कारक शुक्र होते हैं यह देव गुरु बृहस्पति के भाई तथा दैत्यों के आचार्य हैं तथा नवग्रहों में शुक्र इकलौते ऐसे ग्रह हैं जिन्हें मृत संजीवनी विद्या प्राप्त है जिस कारण से कुंडली के अष्टम भाव जहाँ सभी ग्रह प्रायः अशुभ फल ही देते हैं वहाँ शुक्र यदि स्थित हों तो मनुष्य को काल के मुख से भी निकाल लाते हैं, २१ जून २०२१ को एकादशी तिथि की रात्रि के १०:३५ पर शुक्र ग्रह कर्क राशि में पुनर्वसु नक्षत्र के चतुर्थ चरण में प्रवेश करेंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र ग्रह के गोचर परिवर्तन से किन राशि वालों के सितारे चमकेंगे:-
मेष राशि:-
मेष राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मेष राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व चतुर्थ भाव के स्वामी होकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे चतुर्थ भाव में शुक्र दिग्बली भी हो जाते हैं अतः किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, यदि आप भूमि खरीदना या घर बदलना चाहते हैं तो शुक्र का यह गोचर आपके लिए बेहद शुभ रहेगा किंतु कभी-कभी घर में तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा, वाहन सावधानी से चलाएं, अत्यधिक परिश्रम करने पर उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, प्रेमियों के जीवन में भावुकता के हावी होने के कारण से कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती है, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी, जो लोग कोरोना काल में बेरोजगार हो गए थे उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे।
उपाय:- शुक्रवार के दिन गाय को चावल और चीनी मिलाकर खिलाएं।
वृषभ राशि:-
वृषभ राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम व षष्ठ भाव के स्वामी होकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व बिगड़े हुए कार्य पूर्ण होंगे, भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा किंतु भाई-बहन से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, महिला शत्रुओं से सावधान रहें, छोटी यात्राएं के योग बनेंगे, शुक्र के इस गोचरकाल के दौरान आपके मन में एक प्रकार का असंतोष बना रहेगा तथा आपके मन में कुछ नया करने के विचार उत्पन्न होंगे।
उपाय:- श्री सूक्त का पाठ करें।
मिथुन राशि:-
मिथुन राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व द्वादश भाव के स्वामी होकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप महिलाओं पर धन व्यय होगा, दाम्पत्य जीवन में कलहपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होने से मन व्यथित रहेगा, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, संतान की उन्नति होगी व सेहत में सुधार होगा, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, सुख-संसाधनों पर धन व्यय होगा, शत्रुओं पर कुछ धन की शक्ति व चतुराई युक्त पराक्रम से विजय प्राप्त होगी, शेयर बाजार मे निवेश करने से बचें।
उपाय:- शुक्रवार के दिन दूध और चावल कुछ दक्षिणा के साथ किसी महिला को दान करें।
कर्क राशि:-
कर्क राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व एकादश भाव के स्वामी होकर प्रथम भाव अर्थात लग्न से गोचर करेंगे फलस्वरूप चतुराई द्वारा आय वृद्धि के योग बनेंगे, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें, माता का सहयोग प्राप्त होगा, शुक्र के गोचरकाल में अकास्मिक कम से कम २ बार धन लाभ होने की संभावना रहेगी, किसी संपत्ति को क्रय करने के योग बनेंगे, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं से रिश्ता आ सकता है, कोरोना काल में जिन लोगों की नौकरी चली गयी थी उनको उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, बेरोजगारों को नौकरी प्राप्त होगी।
उपाय:- नित्य श्री सूक्त व सुंदरकांड का पाठ करें तथा मंगलवार के दिन गाय को गुड़ खिलाएं।
सिंह राशि:-
सिंह राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व दशम भाव के स्वामी होकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यात्राओं के योग बनेंगे, स्थान परिवर्तन एवं नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, व्यय में वृद्धि होगी, महिलाओं व सुख-संसाधनों से जुड़ी वस्तुओं पर धन व्यय होगा, प्रेमियों के लिए शुक्र का यह गोचर बेहद शुभ रहेगा, अनैतिक संबंध बनाने से बचें, शुक्र के इस गोचरकाल के दौरान आप आध्यात्मिक सुखों की जगह भौतिक सुखों को अधिक महत्व देंगे, बाईं नेत्रों में समस्या संभव है, वाहन सावधानी से चलाएं अन्यथा बड़ी दुर्घटना के योग बनेंगे।
उपाय:- नित्य दुर्गा कवच का पाठ करें साथ ही छोटी कन्याओं को शुक्रवार के दिन चॉकलेट-चिप्स दान करें।
कन्या राशि:-
कन्या राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कन्या राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व नवम भाव के स्वामी होकर एकादश भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप आय में वृद्धि होगी, भाग्य का पूर्ण सहयोग मिलेगा, आपकी वाणी का लोगों पर काफी अच्छा प्रभाव पड़ेगा, महिलाओं से लाभ प्राप्त होगा व किसी महिला के सहयोग से आय वृद्धि के माध्यम बनेंगे, दाम्पत्य जीवन में मधुरता आएगी व शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, परिवार व दवाईयों पर धन व्यय होगा, तनाव लेने से बचें अन्यथा दिल से जुड़ी कोई समस्या उत्पन्न हो सकती है, स्थान परिवर्तन या नौकरी परिवर्तन के योग बनेंगे, बड़े भाई-बहन से विवाद या उनके स्वास्थ्य में कोई समस्या रह सकती है।
उपाय:- नित्य श्री सूक्त का पाठ करें।
तुला राशि:-
तुला राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार तुला राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम भाव अर्थात लग्न और अष्टम भाव के स्वामी होकर दशम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम द्वारा कुछ झंझटों के साथ कार्यक्षेत्र में उन्नति के नए अवसर प्राप्त होंगे, माता का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, जो लोग घर लेने का लंबे समय से विचार कर रहे हैं उनके लिए यह समय बेहद शुभ रहेगा, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, वाहनादि का सुख प्राप्त होगा, वाहन सावधानी से चलाएं, पिता को किसी प्रकार का कष्ट या पिता से वैचारिक मतभेद संभव रहेगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, उदर, गले व मुख में किसी प्रकार की समस्या संभव है, वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें, मानसिक व्यथा रहेगी, व्यर्थ की यात्राओं को टालने का प्रयास करें, घर में किसी मेहमान का आगमन संभव रहेगा।
उपाय:- नित्य गाय को चावल और चीनी मिलाकर खिलाएं व सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
वृश्चिक राशि:-
वृश्चिक राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र सप्तम व द्वादश भाव के स्वामी होकर भाग्य स्थान से गोचर करेंगे फलस्वरूप भाग्य की वृद्धि होगी व महिलाओं से लाभ होगा, स्थान परिवर्तन के योग बनेंगे, कोरोना काल में जिनकी नौकरी चली गयी थी उन्हें पुनः उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, दाम्पत्य जीवन सामान्य रहेगा, जीवनसाथी का पूर्ण सहयोग मिलेगा, आवेश में आने से बचें, पराक्रम में वृद्धि होगी, घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ समय बिताना आपको अच्छा लगेगा, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, मन अस्थिर रहेगा, स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें।
उपाय:- नित्य दुर्गा कवच का पाठ करें।
धनु राशि:-
धनु राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार धनु राशि वालों के लिए शुक्र षष्ठ और एकादश भाव के स्वामी होकर अष्टम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप यह ऐसा समय रहेगा जिसमें आपके स्वास्थ्य में समस्या तो आएंगी किंतु वह उतनी ही तीव्रता से ठीक भी होंगी, आप इस दौरान अत्यधिक कामातुर हो सकते हैं, ससुराल पक्ष से संबंधों में मधुरता आएगी, वाणी पर नियंत्रण रखें, दाम्पत्य जीवन अच्छा रहेगा किंतु किसी गलतफहमी के चलते कभी-कभी तनावपूर्ण स्थितियाँ उत्पन्न होंगी, आय में वृद्धि होगी, यात्राओं के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें, किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, छुपे हुए शत्रुओं से सावधान रहें।
उपाय:- नित्य श्री सूक्त का पाठ करें व छोटी कन्याओं को शुक्रवार के दिन चॉकलेट-चिप्स दान करें।
मकर राशि:-
मकर राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मकर राशि वालों के लिए शुक्र पंचम व दशम भाव के स्वामी होकर कुंडली के राजयोगकारक ग्रह हो जाते हैं जो कि आपके सप्तम भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप जीवनसाथी से चले आ रहे विवाद समाप्त होंगे, कोरोना काल में जिनकी नौकरी चली गयी थी उनको उन्नति के पुनः अवसर प्राप्त होंगे, पराक्रम में वृद्धि होगी, कोई भी निर्णय सोच-समझ कर ही लें, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त होगा, शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी व भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उनके विवाह हेतु कहीं बात चल सकती है, नेत्रों व उदर में कोई समस्या संभव है, क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखें।
उपाय:- नित्य गाय को चावल और चीनी मिलाकर खिलाएं।
कुंभ राशि:-
कुंभ राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी होकर षष्ठ भाव में बैठेंगे फलस्वरूप चतुराई युक्त पराक्रम से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों के लिए शुक्र का यह गोचरकाल बेहद शुभ रहेगा, भाग्य में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, भूमि, वाहन या किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनेंगे, माता के स्वास्थ्य के प्रति पूर्णतया सचेत रहें, नवदम्पत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है, यदि आप नया घर लेने का विचार कर रहे हैं या घर बदलना चाहते हैं तो अभी रुक जाएं और यदि बहुत ही आवश्यक हो तो किसी अच्छे वास्तु सलाहकार से परामर्श अवश्य करें, अकास्मिक धन लाभ के योग बनेंगे, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, यदि आप मंत्र साधना करना चाहते हैं तो उसके आरंभ हेतु यह बहुत अच्छा समय रहेगा।
उपाय:- 2 मंगलवार व 2 शुक्रवार दुर्गा जी को 16 श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
मीन राशि:-
मीन राशिफल
ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार मीन राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व अष्टम भाव के स्वामी होकर पंचम भाव से गोचर करेंगे स्वास्थ्य के प्रति बेहद सतर्क रहें, कोई भी निर्णय बहुत सोच-विचार कर ही लें, इस दौरान आपके द्वारा लिए हुए अधिकतर निर्णय गलत सिद्ध हो सकते हैं, धर्म-आध्यात्म में रुचि बढ़ेगी, संतान को कष्ट संभव रहेगा, गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति पूर्ण सतर्क रहें अन्यथा बड़ी समस्या उत्पन्न हो सकती है, विद्यार्थियों के लिए शुक्र का यह गोचर शुभदायी रहेगा, प्रेमियों के मध्य तनावपूर्ण माहौल उत्पन्न होगा, आय में उतार-चढ़ाव बना रहेगा।
उपाय:- नित्य दुर्गा कवच व सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।