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Changes that will Come in India and the world in November 2025

In November 2025, the planetary positions indicate good foreign relations for India. Improvements are expected in railway transportation and telecommunication services this month. However, there is a possibility of minor damage due to earthquakes or other natural disasters in seismic zones. Increasing cold winds will bring a drop in temperatures. Internal conflicts like military disputes, communal disturbances, fires, vandalism, and accidents may occur in some social areas and buildings. China may feel somewhat isolated in international politics, and situations in Central Asia might deteriorate suddenly.

With the Sun entering Scorpio on Sunday, prices of pulses, jaggery, sugar, sorghum, millet, and wheat are expected to remain stable. Prices of juicy fruits might slightly decrease. Gold, silver, textiles, cotton, and yarn prices are likely to stay steady. The stock market will experience moderate fluctuations. Most commodity prices will be stable, making this a favorable time for stockpiling goods.

Jai Shri Ram.

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नवंबर 2025 में भारत और दुनिया में आने वाले बदलाव

2025 के नवंबर माह में ग्रहों की स्थिति के आकलन अनुसार भारत के विदेशों से संबंध अच्छे रहेंगे साथ ही रेल यातयात और दूरसंचार व्यवस्थाओं या सेवाओ में सुधार देखने को मिलेगा, इस माह भूकंप प्रभावी क्षेत्रों में भूकंप आने की संभावना या अन्य किसी प्राकृतिक आपदा से थोड़ा नुकसान दिखता है, ठंडी हवाओं का जोर बढ़ने से मौसम में भी ठंडक बढ़ेगी एवं सामाजिक देशों में आंतरिक सैन्य संघर्ष, गृहयुद्ध, अग्निकांड, तोड़-फोड़ व साम्प्रदायिक उपद्रव होने या सामाजिक स्थानों व इमारतों में दुर्घटना होने की संभावना दिखती है, चीन अंतराष्ट्रीय राजनीति में खुद को कुछ अकेला अनुभव कर सकता है, मध्य एशिया में अचानक स्थिति कुछ बिगड़ने की भी संभावना दिखती है।

सूर्य की वृश्चिक संक्रांति रविवार के दिन पड़ने से स्थिरकारक रहेगी जिस कारण से दाल, गुड़, चीनी, ज्वार, बाजरा, गेहूँ के दामों में सम भाव देखने को मिलेगा तो वहीं रसीले पदार्थों के दामों में कुछ कमी दिखाई देगी, सोना-चाँदी, वस्त्र-रुई-कपास के दामों में स्थिरता देखने को मिल सकती है तो वहीं शेयर मार्केट में अच्छा उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा, अधिकांश वस्तुओं के दाम स्थिर रहेंगे अतः उनका संग्रह करने के लिए यह समय शुभ है।

जय श्री राम।

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मेष लग्न कुंडली के कुछ विशेष योग: क्या आपकी कुंडली में बन रहे यह योग

मेष लग्न कुंडली में कुछ ग्रहों का संबंध विशेष शुभफलदायी होता है चलिए आज उनमें से कुछ ग्रह संबंध को समझते हैं जो कि अनुभव में भी शत-प्रतिशत सही बैठते हैं:-

1. मेष लग्न कुंडली में मंगल-सूर्य या सूर्य-चंद्र दोनों का संबंध प्रबल राजयोगकारक होता है, क्योंकि सूर्य-चन्द्र व सूर्य-मंगल का संबंध त्रिकोण और केंद्र का होगा।

2. मेष लग्न कुंडली में गुरु-शनि का संबंध सामान्य राजयोग बनाएगा और व्यक्ति की उन्नति विशेष होगी लेकिन मेष लग्न कुंडली में गुरु व्ययेश अर्थात व्यय भाव के भी मालिक है और शनि आय भाव के मालिक है अतः आयेश-व्ययेश संबंध होने से इस राजयोग का प्रभाव कमजोर रहता है।

3. यदि मेष लग्न कुंडली के दूसरे, दसवें या ग्याहरवें घर में मंगल हो और सूर्य से संबंध बनाता हो तो व्यक्ति डॉक्टरी शिक्षा में विशेष निपुणता प्राप्त कर सफल और प्रसिद्ध डॉक्टर बनता है।

4. मेष लग्न कुंडली के दशम भाव में गुरु अकेला हो और किसी प्रकार से किसी भी ग्रह से संबंध न रखता हो तो वह अपनी महादशा-अंतर्दशा में मारकेश होने का भी फल करेगा साथ ही रक्त/खून व हिर्दय से संबंधित प्रबलरोग भी देता है, गुरु-शनि साथ बैठे हों तो व्यक्ति सामान्य से अधिक अच्छी स्थिति में होता है।

5. मेष लग्न कुंडली में गुरु-शुक्र नवम भाव में हो तो व्यक्ति कलाकार होता है और उच्चस्तरीय ख्याति प्राप्त करता है, क्योंकि शुक्र धन भाव का मालिक बनकर भाग्य स्थान में भाग्येश गुरु के साथ बैठेंगे जो धन व मान-सम्मान की उत्तम स्थिति को दर्शाता है।

फ़िल्म अभिनेता दिलीप कुमार कुंडली
फ़िल्म अभिनेता दिलीप कुमार कुंडली

उदहारण के तौर पर दिलीप कुमार (प्रसिद्ध अभिनेता) की कुंडली में गुरु-शुक्र भाग्य स्थान पर बैठे हैं, दूसरा भाव वाणी और कला का होता है शुक्र जिनके कारक ग्रह भी है और भाग्येश के साथ भाग्य स्थान पर होने के कारण से दिलीप कुमार जी को अच्छा कलाकार और रंगमंच पर प्रसिद्धि देने के योग बनाता है।

6. मेष लग्न कुंडली में बुध-मंगल का संबंध मानसिक रोगी (न्यूरो पेशेंट) बनाता है, ऐसे व्यक्ति को अधिकतर सर दर्द की शिकायत देखने को मिलती है।

7. मेष लग्न कुंडली दूसरे भाव में मंगल, शुक्र व गुरु का संबंध व्यक्ति को श्रेष्ठ व्यापारी और अत्यंत धनी बनाता है किंतु जीवन के प्रारंभिक भाग में काफी कड़ा संघर्ष भी रहता है किंतु धन स्थान पर धनेश-भाग्येश-लग्नेश संबंध है तो व्यक्ति निश्चय ही प्रसिद्ध होगा।

“भावार्थ रत्नाकर” नामक ज्योतिष ग्रंथ में इस अनुभव की पुष्टि देखने को मिलती है उसमें कहा गया है कि:-

“मेषे जातस्य भौमस्तु गुरु-शुक्र समन्वित्।
द्वितीये यदि विद्येत योगदो भवति ध्रुवम्।।”

8. यदि मेष लग्न कुंडली के पंचम भाव में मंगल हो तो व्यक्ति मेडिकल एजेंट, चिकित्सक, डॉक्टर या चिकित्सा के क्षेत्र में निपुण होता है और मंगल अपनी महादशा में विशेष उन्नति प्रदान करने वाले ग्रह होंगे।

9. मेष लग्न कुंडली के अष्टम भाव में मंगल, शुक्र व सूर्य हो तो व्यक्ति विदेश यात्रा करता है क्योंकि दो कारक ग्रहों व मंगल का संबंध धनेश से होगा।

10. मेष लग्न कुंडली की महिला हो और प्रसवकाल निकट हो तो मंगल के प्रत्यंतर सूक्ष्म दशा में बच्चे के जन्म की अत्यधिक प्रबल संभावना बनती है।

जय श्री राम।

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Gochar Fal

शुक्र का तुला राशि से गोचर 1 नवंबर 2025: जानिए किन राशि वालों को मिलेगी राहत

ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार जीवन में जितने भी सुख-संसाधन होते हैं उन सब का विचार शुक्र ग्रह से किया जाता है शुक्र ग्रह प्रेम, विवाह, शैय्या सुख व अनेक चीजों के कारक होते हैं वृषभ इनकी स्वराशि, तुला मूलत्रिकोण, मीन उच्च राशि व कन्या नीच राशि होती है, “ऋषिकेश पंचांग” (काशी) अनुसार 1 नवंबर 2025 को अर्ध रात्रि 04:04 पर शुक्र अपनी नीच राशि कन्या राशि को छोड़कर तुला राशि में प्रवेश करेंगे साथ ही जब शुक्र राशि परिवर्तन कर रहे होंगे तब कन्या लग्न होगा और चंद्रमा राहु एवं शनि के साथ रहेंगे तथा राहु भी शुक्र पर दृष्टि रखेंगे तो चलिए जानते हैं शुक्र के इस गोचर परिवर्तन से विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

मेष राशि

मेष राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय और सप्तम भाव के स्वामी बनकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे अतः दाम्पत्य जीवन में कुछ मधुरता आएगी लेकिन राहु का संबंध रहने से अचानक कुछ गलतफहमी या किसी दूसरे व्यक्ति के कारण से थोड़ा तनाव भी संभव रहेगा, जो व्यक्ति नौकरी का काफी समय से प्रयास कर रहे हैं उन्हें नौकरी के नए अवसर प्राप्त होंगे साथ ही कार्य के सिलसिले से यात्रा भी होंगी, विवाह योग्य व्यक्तियों के लिए विवाह हेतु अच्छे रिश्ते मिलेंगे, पार्टनरशिप में कोई भी काम शुरू करने से बचिए और महिलाओं के साथ (विशेष कार्यस्थल पर) व्यर्थ विवाद में पड़ने एवं अधिक विश्वास करने से बचिए।

उपाय:- शुक्रवार के दिन गाय को पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खिलाएं।

वृषभ राशि

वृषभ राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम और षष्ठ भाव के स्वामी बनकर षष्ठ भाव से गोचर करेंगे अतः कुछ चतुराई एवं गुप्त युक्ति के बल से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी किंतु किसी महिला के कारण से तनाव भी संभव है, स्वास्थ के प्रति थोड़ा सचेत रहें, गुप्तांग से जुड़ी या थाइरॉइड या हार्मोन्स से जुड़ी अन्य किसी भी प्रकार की थोड़ी समस्या संभव है, यात्रा या स्थान परिवर्तन के योग बन रहे हैं शुक्र का यह गोचर 10 नवंबर से 16 नवंबर तक उनके लिए विशेष लाभप्रद रहेगा जो विदेश जाने का प्रयास कर रहे हैं और उसी से संबंधित फ़ाइल जमा करने या वीजा का इंतजार कर रहे हों क्योंकि चतुर्थेश सूर्य और राशीश शुक्र का द्वादश भाव से स्पष्ट संबंध है फिर भी शुक्र व सूर्य पर राहु की दृष्टि है अतः कुंडली अनुसार वर्तमान ग्रह की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी, खर्चों में अभी कोई विशेष राहत नही दिखती, खान-पान का थोड़ा ध्यान दीजिए और अधिक तनाव लेने से बचिए।

उपाय:- नित्य सूर्य को जल अर्पित करें एवं किसी छोटी कन्या को चॉकलेट या चिप्स गिफ्ट करिए।

मिथुन राशि

मिथुन राशि वालों के लिए शुक्र पंचम और द्वादश भाव के स्वामी बनकर पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः खर्चों में वृद्धि के योग बनते हैं, शुक्र के इस गोचर के दौरान यात्राओं, महिलाओं व संतान पर धन खर्च के योग बनते है साथ ही राहु का भी पंचम भाव से संबंध किसी महिला के कारण से मन में चिंता दे सकता है, नौकरी परिवर्तन के लिए जो व्यक्ति लंबे समय से प्रयास कर रहे हैं उनके लिए यह अच्छा समय रहेगा और उच्च शिक्षा प्राप्ति के लिए विदेश जाने की योजना बनाने का भी यह अच्छा समय रहेगा, जो व्यक्ति संतान की कामना रखते हैं उन्हें संतान से जुड़ा शुभ समाचार भी प्राप्त होगा और चतुराई के साथ लिए गए निर्णयों से आय वृद्धि के माध्यम खुलेंगे।

उपाय:- नित्य लक्ष्मी जी को सफेद फूल, सफेद मीठा और घी का दीपक अर्पित कर के लक्ष्मी चालीसा का पाठ करिए।

कर्क राशि

कर्क राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ और एकादश भाव के स्वामी बनकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे फलस्वरूप वाहन व घर खरीदने के योग बनेंगे साथ ही घर की सुंदरता को बनाए रखने के लिए योजनाएं बन सकती है, माता का सहयोग व लाभ प्राप्त होगा फिर भी कहीं न कहीं राहु का संबंध भी होने के कारण से घरेलू वातावरण में कुछ नीरसता अनुभव हो सकती है या घर के किसी सदस्य के स्वास्थ्य में कुछ चिंता सी देखने को मिल सकती है, कारोबारियों और नौकरी पेशा लोगों के लिए यह अच्छा समय रहेगा साथ ही समाज में अच्छा मान प्राप्त होगा, अच्छे वास्तु सलाहकार से विचार कर के घर खरीदना अधिक शुभ रहेगा।

उपाय:- दुर्गा जी को श्रृंगार का सामान और खीर का भोग शुक्रवार के दिन अर्पित करिए।

सिंह राशि

सिंह राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय और दशम भाव के स्वामी बनकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे अतः यात्राओं के योग बनेंगे व कार्य एवं धर्म से जुड़ी यात्रा होने की संभावना अधिक रहेगी, जो लोग काफी समय से नौकरी परिवर्तन का प्रयास कर रहे हैं उनके लिए यह समय अच्छा रहेगा एवं भाग्य का सहयोग भी प्राप्त होगा, स्थान परिवर्तन योग बन रहे हैं, विपरीत लिंग के प्रति आकर्षित होने से बचिए, हार्मोन्स या गुप्तांग से जुड़ी या डाइबिटीज की दिक्कत देखने को मिल सकती है।

उपाय:- नित्य लक्ष्मी स्तुति करिए औऱ छोटी कन्याओ को चॉकलेट गिफ्ट करिए।

कन्या राशि

कन्या राशि वालों के लिए शुक्र द्वितीय व नवम भाव के स्वामी बनकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे अतः भाग्य का सहयोग प्राप्त होगा व धन वृद्धि के कुछ माध्यम बनेंगे और परिवार में भी खुशी का कुछ माहौल सा बना रहेगा फिर भी स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता सी मन में अनुभव हो सकती है अतः खान-पान का ध्यान रखें व व्यर्थ महिला के साथ विवाद में पड़ने से बचें, शुक्र का सूर्य के साथ संबंध पूर्व में की गई गलतियों में सुधार करने के लिए अच्छा रहेगा क्योंकि सूर्य का अगला गोचर निश्चय ही भाग्य वृद्धि का सूचक होने से लाभप्रद रहेगा, गुरुजनों व मित्रों का सहयोग भी प्राप्त होगा, कारोबारियों के लिए यह अच्छा समय रहेगा, किसी संपत्ति पर धन खर्च के योग है, अचानक यात्रा के योग बन सकते हैं।

उपाय:- नित्य श्रीसूक्त का पाठ करिए।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए शुक्र प्रथम व अष्टम भाव के स्वामी बनकर प्रथम भाव से गोचर करेंगे जिससे आय वृद्धि के माध्यम बनेंगे व पिछले काफी समय से चले आ रहे तनाव में भी कुछ राहत अनुभव होगी, वाणी पर विशेष नियंत्रण रखें 16 नवंबर से सूर्य-मंगल का वाणी स्थान से संबंध वाणी में तेजी को दर्शाता है, अचानक यात्रा पर जाने के योग बनते दिखते हैं लेकिन शुक्र पर राहु की दृष्टि और चंद्र का दो क्रूर ग्रह से संबंध महिला से तनाव को दर्शाता है, दाम्पत्य जीवन में या घरेलू वातावरण या अन्य किसी भी स्थान पर महिला के साथ व्यर्थ विवाद में पड़ने से बचें व स्वास्थ्य के प्रति भी थोड़ा सचेत रहना शुभ रहेगा।

उपाय:- शुक्रवार का व्रत करें।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि वालों के लिए शुक्र द्वादश व सप्तम भाव के स्वामी बनकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे अतः यात्रा, विदेश यात्रा के योग बनेंगे, जो लोग काफी समय से नौकरी परिवर्तन या स्थान परिवर्तन का प्रयास कर रहे थे उनके लिए भी यह समय अच्छा रहेगा, अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखें व अपनी योजनाओं को गुप्त रखने से लाभ होगा एवं महिलाओं पर अधिक विश्वास करने से बचिए, खर्चों में वृद्धि के कारण से मन में थोड़ी चिंता संभव है, क्रोध पर विशेष नियंत्रण रखें व सोच-विचार कर निर्णय लीजिए लाभ होगा।

उपाय:- शुक्रवार के दिन पके हुए चावल में चीनी मिलाकर गाय को खिलाइए।

धनु राशि

धनु राशि वालों के लिए शुक्र एकादश भाव और षष्ठ भाव के स्वामी बनकर एकादश भाव से गोचर करेंगे हालांकि लाभ स्थान से सभी ग्रहों का गोचर अधिकांश लाभप्रद रहता है तो आय में वृद्धि के माध्यम बनेंगे व संतान की भी उन्नति होगी एवं बुद्धि के अंदर कुछ चतुराई के प्रयोग से सुख के साधन प्राप्त करने मे सफल रहेंगे फिर भी राहु की दृष्टि शुक्र पर रहने से मन के अंदर कुछ चिंता और उत्साह में थोड़ी कमी सी भी अनुभव होगी, जो लोग संतान की चाह रखते हैं उनके लिए यह समय अच्छा रहेगा, खर्चों भवन वृद्धि के योग व किसी महिला के कारण से क्षणिक तनाव संभव है।

उपाय:- लक्ष्मी स्तवन का नित्य पाठ करें।

मकर राशि

मकर राशि वालों के लिए शुक्र दो शुभ स्थान पंचम व दशम भाव के स्वामी बनकर दशम भाव से गोचर करेंगे अतः कारोबार के मार्ग में बड़ी सफलता प्राप्त होगी व चतुराई एवं बुद्धि-विवेक द्वारा समाज मे अच्छा मान भी प्राप्त होगा किंतु परिवार या कार्यस्थल पर किसी महिला के कारण से चिंता भी अनुभव हो सकती है या माता के स्वास्थ्य को लेकर थोड़ी चिंता अनुभव हो सकती है, गृहस्थ सुख में भी तनिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है हालांकि शुक्र का यह गोचर अधिकांश शुभ रहने से किसी संपत्ति के क्रय करने के योग बनते हैं, कारोबारियों के लिए शुक्र का यह गोचर अच्छा रहेगा, खान-पान का ध्यान दीजिए।

उपाय:- सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का नित्य पाठ करें।

कुंभ राशि

कुंभ राशि वालों के लिए शुक्र चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी बनकर भाग्य स्थान से गोचर करेंगे अतः भाग्य का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा एवं रोजगार के मार्ग में भी उन्नति के नए रास्ते खुलेंगे व किसी महिला के सहयोग से भविष्य में लाभ के रास्ते बनते दिखेंगे, यात्रा पर जाने के योग बनते हैं, पार्टनरशिप में भी काम शुरू करने के लिए यह समय ठीक रहेगा, किसी संपत्ति को क्रय करने की योजना मन में बन सकती हैं, घर में किसी मेहमान के आगमन की सूचना मिल सकती है, जो लोग विवाह योग्य हो गए हैं उन्हें अच्छा रिश्ता मिलने के योग बन रहे हैं साथ ही जिनका विवाह पक्का हो गया है उनका विवाह उपरांत बड़ा भाग्योदय होगा या कार्यक्षेत्र में कोई बड़ी उन्नति प्राप्त होगी, नव दंपत्तियों को संतान से जुड़ा शुभ समाचार प्राप्त हो सकता है।

उपाय:- नित्य दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिए शुक्र तृतीय व अष्टम भाव के स्वामी बनकर अष्टम भाव में गोचर करेंगे शुक्र का यह गोचर निःसंदेह विदेश यात्रा के योग को दर्शाता है किंतु स्वास्थ्य के लिहाज से शुक्र का यह गोचर लाभदायक नही है अतः स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें, अचानक खर्चों में वृद्धि के योग हैं, जो लोग काफी समय से नौकरी परिवर्तन का इंतजार कर रहे हैं उनके लिए प्रयास आरंभ करने का यह सही समय है, गुरुजनों व मित्रों का सहयोग प्राप्त होगा व चतुराई द्वारा शत्रुओं पर विजय प्राप्त होगी फिर भी मन मे असंतोष रहेगा और लग्जरी चीजों या किसी संपत्ति को क्रय करने में भी धन का खर्च होगा।

उपाय:- नित्य दुर्गा चालीसा का पाठ करें।

जय श्री राम।

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देवउठनी एकादशी व्रत कथा

एक राजा थे जिनके राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखा करते थे प्रजा, नौकर-चाकरों से लेकर पशुओं तक को एकादशी के दिन अन्न नहीं दिया जाता था, एक दिन किसी दूसरे राज्य का एक व्यक्ति राजा के पास आकर बोला हे महाराज! कृपा करके मुझे नौकरी पर रख लीजिए मुझे नौकरी की अत्यंत आवश्यकता है तब राजा ने उसके सामने एक शर्त रखी कि रोज तो तुम्हें खाने को सब कुछ मिलेगा, पर एकादशी के दिन अन्न नहीं मिलेगा यदि शर्त मंजूर हो तो तुम काम पर आ सकते हो।

उस व्यक्ति को उस समय काम की बहुत जरूरत थी जिस कारण से उनसे हाँ कर दिया, पर एकादशी के दिन जब उसे फलाहार का सामान दिया गया तो वह राजा के सामने जाकर गिड़गिड़ाने लगा: महाराज! इससे मेरा पेट नहीं भरेगा और मैं भूखा ही मर जाऊंगा, मुझे अन्न दे दो, राजा ने उसे शर्त की बात याद दिलाई, पर वह अन्न छोड़ने को तैयार नहीं हुआ, तब राजा ने उसे आटा-दाल-चावल आदि दिए वह नित्य की तरह नदी पर पहुँचा और स्नान कर भोजन पकाने लगा और जब भोजन बन गया तो वह भगवान को बुलाने लगा- हे प्रभु! भोजन तैयार है आप आकर भोजन कर लीजिए।

उसके बुलाने पर पीताम्बर धारण किए भगवान चतुर्भुज रूप में आ पहुँचे तथा प्रेम से उसके साथ भोजन करने लगे, भोजनादि करके जब भगवान अंतर्धान हो गए तथा वह अपने काम पर चला गया, पंद्रह दिन बाद अगली एकादशी को वह राजा से कहने लगा कि महाराज, मुझे दुगुना सामान दीजिए, उस दिन तो मैं भूखा ही रह गया था, राजा ने जब कारण पूछा तो उसने बताया कि मेरे साथ भगवान भी खाते हैं इसलिए हम दोनों के लिए यह भोजन पर्याप्त नहीं पड़ता।

यह सुनकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ और वह बोला मैं नहीं मान सकता कि भगवान तुम्हारे साथ भोजन करते हैं, मैं तो इतना व्रत रखता हूँ, पूजा करता हूँ, पर भगवान ने मुझे कभी दर्शन नहीं दिए, राजा की बात सुनकर वह बोला, महाराज! यदि आपको मुझपर विश्वास नही है तो आप साथ चलकर देख लीजिए, राजा ने उसकी बात मान ली और राजा उसी जगह पर एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया, उस व्यक्ति ने भोजन बनाया तथा भगवान को शाम तक पुकारता रहा, परंतु भगवान नही आए, अंत में उसने कहा हे प्रभु! यदि आप आज नहीं आए तो मैं भी नदी में कूदकर अपने प्राण त्याग दूँगा, लेकिन भगवान नहीं आए, तब वह प्राण त्यागने के उद्देश्य से नदी की तरफ बढ़ने लगा, प्राण त्यागने की उसकी दृढ़ इच्छा शक्ति को भगवान ने जानकर उसे दर्शन दिए तथा साथ बैठकर भोजन करने लगे और अंत में अंतर्धान हो गए, यह सब देखकर राजा ने सोचा कि व्रत-उपवास से तब तक कोई फायदा नहीं होता, जब तक मन शुद्ध न हो अतः राजा ने भी पूर्ण निष्ठा के साथ व्रत-उपवास करने लगा जिसके फलस्वरूप राजा को अंत में स्वर्ग प्राप्त हुआ।

जय श्री हरि🙏🏻

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देवउठनी एकादशी 2025: जानिए शुभ मुहूर्त्त व व्रत एवं पूजन विधि

कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवउठनी एकादशी के रूप में मनाते हैं जिसे हरि प्रोबिधिनी एकादशी भी कहते हैं, इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योग निद्रा से बाहर आते हैं जिससे चातुर्मास का अंत भी होता है तथा सभी मांगलिक कार्यक्रम जैसे विवाह व गृहप्रवेश जैसे कृत्य शुरू हो जाते हैं, साथ ही इस दिन तुलसी पूजन का भी विशेष महत्व है, देवउठनी एकादशी का विधिवत व्रत व तुलसी विवाह और दान-पुण्य करने वाले के जीवन में सुख, शांति व समृद्धि बनी रहती है।

देवउठनी एकादशी 2025 शुभ मुहूर्त्त व पूजा विधि

“ऋषिकेश पंचांग” (काशी) अनुसार वर्ष 2025 में कार्तिक शुक्ल एकादशी तिथि 31 अक्टूबर की अर्ध रात्रि 04:03 पर लग रही है जो कि 1 नवंबर की ही अर्ध रात्रि 02:56 पर खत्म हो जाएगी अतः देवउठनी एकादशी व्रत व पूजा 1 नवंबर के दिन रहेगा और एकादशी व्रत पारणा 2 नवंबर को दोपहर 01:45 से 03:15 के मध्य करना अतिलाभकारी रहेगा।

पूजन व व्रत विधि

सर्वप्रथम स्नानादि कर पवित्र एवं स्वच्छ आसन पर बैठकर मन में गणेश जी का ध्यान कर गुरु वंदना करें पश्चात विष्णु जी और लक्ष्मी जी का ध्यान कर उन्हें गंगा जल या किसी पवित्र नदी के जल और पंचामृत से स्नान करवा कर पुनः जल से स्नान करवाएं औऱ तुलसी के पत्ते, पीले पुष्प, चंदन का तिलक और पीले मीठे का भोग व घी का दीपक अर्पित कर के विष्णु चालीसा, लक्ष्मी चालीसा, एकादशी व्रत कथा का पाठ कर विष्णु जी व लक्ष्मी जी के मंत्रों का जप करना चाहिए और इसके बाद तुलसी पूजन व तुलसी विवाह करवा कर सम्पूर्ण दिन-रात्रि व्रत का पालन करें और गरीबों को मिठाई (पीला मीठा) और केला दान करें।

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The Top 4 Zodiac Geniuses Who Shine With High IQs

Are you curious which zodiac signs are the smartest? Astrology suggests that some signs are known for having very high IQs and sharp minds. These signs are great thinkers, quick learners, and creative problem solvers. Let’s meet the top 4 zodiac signs famous for their intelligence!

Aquarius:- The Innovative Thinker

Aquarius is known for being a true genius. They think differently from others and love to come up with new ideas. Aquarian’s are curious and always explore new things. Their minds work fast, and they enjoy solving problems in creative ways. They are often inventors, scientists, or artists who want to change the world.

Gemini:- The Quick Learner

Gemini is very smart and adaptable. They learn new things quickly and can talk about many different subjects. Geminis love to share knowledge and communicate well with others. Their lively and curious nature helps them stay sharp and always ready to face new challenges.

Virgo:- The Detail-Oriented Thinker

Virgos are very good at paying attention to small details others might miss. They think carefully and like to organize their thoughts clearly. Virgos are practical and logical, which makes them excellent problem solvers. They do well in jobs that need accuracy, like research and science.

Scorpio:- The Deep Thinker

Scorpio has a strong and focused mind. They want to understand the truth behind things and are very good at digging deep to find answers. Scorpios have sharp instincts and a great ability to solve difficult problems. Their intelligence often helps them in careers like psychology, investigation, or research.

Why These Signs Are So Smart

These four zodiac signs stand out for their different types of intelligence. Aquarius shines with creativity and vision. Gemini impresses with quick thinking and communication. Virgo excels in detailed analysis and logic. Scorpio amazes with deep insight and focus. Together, they show how unique qualities can make each sign a genius in its own way.

If your zodiac sign is one of these, you might already know how clever you are! And if not, remember that everyone has special talents waiting to shine.

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Meet the 8 Zodiac Signs That Refuse to Quit on Their Dreams

Dreams keep us going, and some zodiac signs show amazing strength and determination when working toward theirs. If you want to know which signs never give up, here are eight that stand out for their drive and passion.

Capricorn:- The Patient Climber

Capricorns are like steady mountain climbers. They work hard, stay focused, and plan carefully. Even when the road is long or tough, they stay calm and keep going until they reach the top.

Aquarius:- The Visionary Dreamer

Aquarius loves thinking big and doing things differently. They believe in creating change and don’t let others’ doubts stop them. Their creativity and independent spirit help them reach their dreams in their own unique way.

Pisces:- The Hopeful Creator

Pisces are emotional and imaginative. Their dreams often connect to their feelings and inner growth. Even when life gets hard, they find strength in kindness, creativity, and faith in a better future.

Aries:- The Fearless Warrior

Aries is bold, energetic, and always ready for a challenge. They take risks and never back down. Once they set their mind on something, they pursue it with courage and passion.

Taurus:- The Steadfast Achiever

Taurus moves slowly but never stops. They are patient, loyal, and determined. Once they choose a goal, they stick with it until they succeed. Their persistence makes them one of the strongest signs.

Leo:- The Ambitious Performer

Leo shines with confidence and loves to stand out. Their energy and optimism push them to chase their dreams with excitement. Even after setbacks, they recover quickly and keep going strong.

Scorpio:- The Intense Reformer

Scorpio feels deeply and focuses completely on what matters most to them. Their willpower and resilience help them overcome any obstacle. When they want something, they give it everything they’ve got.

Sagittarius:- The Optimistic Explorer

Sagittarius is driven by adventure and curiosity. They believe anything is possible with enough hope and effort. Their positive attitude helps them stay motivated, no matter how long the journey.

Why These Signs Keep Going

These eight signs all share one thing: belief in their dreams. Whether it’s Capricorn’s patience, Aries’ boldness, or Pisces’ imagination, each of them shows how determination and faith can lead to success.

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सोलह सोमवार व्रत-कथा और उद्यापन विधि

सोलह सोमवार व्रत भगवान शिव व माँ गौरी की कृपा प्राप्त करने का मुख्य व्रत है जिससे जीवन में सुख-शांति, आर्थिक समृद्धि, वैवाहिक खुशहाली और सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है विशेषकर अविवाहित कन्याएं मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए और विवाहित महिलाएं अपने दाम्पत्य जीवन में मधुरता तथा पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत का पालन करती हैं ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी के अनुसार इस व्रत को श्रावण मास से प्रारंभ करना उत्तम रहता है।

व्रत विधि

श्रावण माह की प्रतिपदा तिथि के दिन स्नानादि कर के शिव जी व माँ गौरी के समक्ष एक घी का दीपक अर्पित कर शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत से स्नान करवा कर भोग अर्पित करना चाहिए और हाथ में जल लेकर अपना नाम, गोत्र, व्रत उद्देश्य बोलकर सोलह सोमवार व्रत का संकल्प लेना चाहिए और नित्य शिव जी व माँ गौरी की पूजा करनी चाहिए तथा प्रथम सोमवार से 16 सोमवार का व्रत आरंभ करना चाहिए जो कि 4 माह तक चलता है।

सोलह सोमवार व्रत पौराणिक कथा

एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक ब्राह्मण ने सोलह सोमवार के व्रत का पालन किया तो उसे देवी पार्वती की कृपा प्राप्त हुई और उसके घर सुंदर पुत्र का जन्म हुआ, पुत्र ने भी यही व्रत किया और उसे राजगद्दी मिली और इसके बाद राजा ने अपनी रानी के साथ नियमित रूप से यह व्रत किया एक दिन रानी ने आलस्यवश मंदिर नहीं जाकर पूजा सामग्री नौकर के हाथ भेज दी, जिससे राजा को आकाशवाणी हुई कि या तो रानी को त्याग दें या तुम्हारा सर्वनाश हो जाएगा इस आकाशवाणी से चिंतित होकर राजा ने रानी को महल से निकाल दिया जिस कारण से रानी अनेक वर्षों तक भटकती रही और उसने सोलह सोमवार व्रत पूर्ण निष्ठा से किया जिससे उसके सत्कर्मों को देखकर भगवान शिव की कृपा हुई और रानी को सभी सुख पुनः प्राप्त हुआ।

सोलह सोमवार व्रत उद्यापन विधि

16 सोमवार व्रत पूर्ण हो जाने के बाद 17 वें सोमवार के दिन सुबह स्नानादि कर भगवान शिव व माँ गौरी की पूजा करनी चाहिए तथा “ॐ रुद्राय नमः” मंत्र का जप करना चाहिए साथ ही शिव जी का रुद्राभिषेक व ब्राह्मण को भोजनादि दान करना चाहिए।