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Top 5 Zodiac Signs That Lose Patience Fast

Everyone has little things that can bother them, but some zodiac signs get annoyed much faster than others. Here are the five zodiac signs that lose patience quickly, and the reasons why!

Aries

The Impatient Starter
Aries people have lots of energy and want things done fast. They get annoyed when things move slowly or when people take too long to decide. Waiting in line, slow drivers, or delays can make Aries irritated because they always want to keep moving.​

Virgo

The Perfectionist
Virgos like everything neat, clean, and in order. Small mistakes, messiness, or disorganized people can easily get on their nerves. If something is not perfect or done their way, Virgos can quickly get frustrated, even if others don’t notice the problem.​

Gemini

The Talkative Listener
Geminis love to talk and share stories. They get annoyed if someone interrupts them, doesn’t listen, or ignores what they are saying. Since Geminis have many ideas, they want others to be just as interested and involved.​

Taurus

The Stubborn One
Taurus people like things their way and don’t easily accept change. If someone tries to change their routine or disagrees with their plans, Tauruses can become quietly annoyed. Surprises or last-minute changes also irritate them.​

Scorpio

The Intense Analyst
Scorpios are private and serious. They get annoyed by people who are fake, dishonest, or nosy. Scorpios value honesty and loyalty, so lies or secrets from others quickly push their buttons.​

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Gochar Fal

मंगल का वृश्चिक राशि से गोचर 28 अक्टूबर 2025: जानिए विभिन्न राशियों पर पड़ने वाले प्रभाव

भूमि पुत्र मंगल जो कि नवग्रहों के सेनापति है शक्ति, ऊर्जा व पराक्रम के कारक ग्रह हैं और इनका वर्ण लाल होता है, मंगल मेष व वृश्चिक राशि के स्वामी होते हैं एवं मकर इनकी उच्च राशि और कर्क इनकी नीच राशि प्राप्त करते हैं “ऋषिकेश पंचांग (काशी) अनुसार मंगल 28 अक्टूबर 2025 को शाम 4 बजकर 24 मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेंगें और 7 दिसंबर 2025 की दोपहर 2 बजकर 37 मिनट पर धनु राशि में चले जाएंगे तो चलिए जानते हैं मंगल के इस गोचरकाल के दौरान विभिन्न राशियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

मेष राशि:-

मेष राशि वालों के लिए मंगल प्रथम और अष्टम भाव के स्वामी बनकर अष्टम भाव से ही गोचर करेंगे जिससे जीवन में अचानक बदलाव होंगे साथ ही किसी प्रकार का तनाव/भावनात्मक तनाव संभव है रहेगा साथ ही परिवार में स्वास्थ्य से संबंधित कुछ परेशानी रहने से मन में चिंता अनुभव हो सकती है, खान-पान का ध्यान दें और जोखिम लेने व जल्दबाजी में कोई निर्णय लेने से बचें।

उपाय:- हनुमान जी के मंदिर में किशमिश का भोग अर्पित कर के संकटमोचन हनुमाष्टक का नित्य पाठ करें।

वृषभ राशि:-

वृषभ राशि वालों के लिए मंगल सातम और द्वादश भाव के स्वामी बनकर सप्तम भाव से गोचर करेंगे और रूचक महापुरुष योग भी बनाएंगे जिस कारण से कुछ समझदारी व ठहराव के साथ लिए गए निर्णय लाभदायक सिद्ध होंगे व नौकरी में भी कुछ परिवर्तन के साथ उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहें व दाम्पत्य जीवन में व्यर्थ विवाद में पड़ने से बचिए, मुख/दंत रोग से जुड़ी थोड़ी समस्या या पेट के निचले हिस्से में थोड़ी समस्या अनुभव हो सकती है साथ ही अचानक खर्चों में वृद्धि संभव है।

उपाय:- मंगलवार के दिन छोटी कन्याओ को लाल मीठा और चिप्स गिफ्ट करें।

मिथुन राशि:- 

मिथुन राशि वालों के लिए मंगल षष्ठ और एकादश भाव के स्वामी बनकर षष्ठ/छठे भाव से गोचर करेंगे, छठे भाव से मंगल का गोचर लाभदायक होता है अतः आपके अंदर आत्मविश्वास की वृद्वि होगी और आपके अंदर नेतृत्व करने की क्षमता में भी अच्छी वृद्धि देखने को मिलेगी, करियर में नई दिशा और रुके हुए काम पूरे होने की संभावना रहेगी व स्वास्थ्य भी ठीक रहने से मन में स्फूर्ति बनी रहेगी और विरोधियों एवं शस्त्रों पर विजय प्राप्ति के योग रहेंगे।

उपाय:- गणेश अथर्वशीर्ष का नित्य पाठ करें।

कर्क राशि:-

कर्क राशि वालों के लिए मंगल पंचम व दशम भाव के स्वामी बनकर पंचम भाव से गोचर करेंगे अतः क्रोध व आवेश को नियंत्रण में रखकर लिए गए निर्णयों से अच्छा लाभ होगा व आय वृद्धि के नए माध्यम बनेंगे किंतु पेट से जुड़ी कुछ दिक्कत भी रह सकती है अतः अधिक मिर्च-मसाले वाले व्यंजनों से परहेज करे, आय के साथ व्यय में भी वृद्धि, यात्रा व वाहन खरीदने के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए मंगल का यह गोचर अच्छा रहेगा क्योंकि गुरु की दृष्टि भी मंगल पर रहेगी।

उपाय:- किसी महिला को दूध व लाल पेड़ा मंगलवार के दिन दान करें।

सिंह राशि:- 

सिंह राशि वालों के लिए मंगल चतुर्थ व नवम भाव के स्वामी बनकर चतुर्थ भाव से गोचर करेंगे और रूचक महापुरुष योग का निर्माण करेंगे अतः भूमि-वाहन व संपत्ति खरीदने के योग बनेंगे क्योंकि गुरु की दृष्टि भी मंगल पर शुभ होने से कुछ लाभ प्राप्त होगा एवं कार्यक्षेत्र में भी कुछ प्रयास से बड़ी सफलता के योग बनेंगे किंतु चतुर्थ भाव से मंगल का गोचर बहुत शुभ नही होने के कारण से दाम्पत्य जीवन में उतार-चढ़ाव के योग रहेंगे, क्रोध पर नियंत्रण रखने का प्रयास करें, किसी पुरानी चली आ रही समस्या का कोई समाधान निकल सकता है या निकलने की कोई योजना या रास्ता बन सकता है, जमीन-जायदाद से जुड़े पुराने विवाद सुलझने की संभावना बनी रहेगी।

उपाय:- नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करें।

कन्या राशि:-

कन्या राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व अष्टम भाव के स्वामी बनकर तृतीय भाव से गोचर करेंगे जिससे आत्मविश्वास व पराक्रम में वृद्धि देखने को मिलेगी साथ ही छोटे भाई-बहन की भी उन्नति होगी एवं कारोबार/रोजगार में उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे किंतु तृतीय भाव से गोचर कर रहे मंगल की दृष्टि षष्ठ भाव पर भी है अतः शत्रुओं के द्वारा थोड़ी दिक्कतें आ सकती हैं किंतु मंगल की दृष्टि शुभ होने से शत्रुओं पर कुछ शांति व चतुराई के साथ लिए निर्णय से विजय मिलेगी, स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सचेत रहें।

उपाय:- गाय को नित्य रोटी-गुड़ खिलाएं।

तुला राशि:- 

तुला राशि वालों के लिए मंगल द्वितीय व सप्तम भाव के स्वामी बनकर द्वितीय भाव से गोचर करेंगे अतः क्रोध व वाणी पर नियंत्रण रखने से बड़ा लाभ और उन्नति प्राप्त होगी और भाग्य का भी सहयोग प्राप्त होगा फिर भी आर्थिक मामलों में कुछ उतार-चढ़ाव सा देखने को मिल सकता है और खर्चों में भी अचानक वृद्धि होने से मन में कुछ अशांति अनुभव हो सकती है, खान-पान का थोड़ा ध्यान दें।

उपाय:- मंगलवार के दिन गाय को पके हुए चावल में गुड़ मिलाकर खिलाएं।

वृश्चिक राशि:- 

वृश्चिक राशि वालों के लिए मंगल प्रथम और षष्ठ भाव के स्वामी बनकर प्रथम भाव से गोचर करेंगे व रूचक महापुरुष योग बनाएंगे जिससे निर्णय लेने की क्षमता में मजबूती आएगी और पिछले काफी समय से टूटा हुआ आत्मविश्वास पुनः प्राप्त होगा और गुरु की भी दृष्टि होने से स्वास्थ्य का लाभ मिलने से कार्य पर ध्यान केंद्रित करने और लक्ष्य प्राप्ति की तरह आगे बढ़ने में सफलता प्राप्त होगी लेकिन फिर भी थोड़ी लापरवाही मात्र से स्वास्थ्य में दिक्कत हो सकती है अतः खान-पान का ध्यान रखें और क्रोध पर नियंत्रण रखें।

उपाय:- नित्य सुंदरकांड का पाठ करें।

धनु राशि:- 

धनु राशि वालों के लिए मंगल द्वादश व पंचम भाव के स्वामी बनकर द्वादश भाव से गोचर करेंगे अतः खर्चों में वृद्धि होगी और यात्रा के योग बनेंगे, विद्यार्थियों के लिए यह समय उच्च शिक्षा प्राप्ति हेतु यात्रा करना अच्छा रहेगा, विदेश यात्रा के भी योग बनेंगे किंतु स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ दिक्कतें भी परेशान कर सकती हैं अतः स्वास्थ्य के प्रति थोड़ा सतर्क रहें, किसी भी प्रकार के दबाव में आजर निर्णय लेने से बचें, नौकरी परिवर्तन योग है।

उपाय:- मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर मेब सिंदूर, घी व किशमिश का भोग अर्पित कर हनुमान चालीसा का पाठ करें।

मकर राशि:-

मकर राशि वालों के लिए मंगल एकादश व चतुर्थ भाव स्वामी बनकर लाभ स्थान से गोचर करेंगे अतः किसी बड़ी और पुरानी योजना के सफल होने से उन्नति के योग बनेंगे व सहयोगियों से भी लाभ प्राप्त होगा व अंदर नेतृत्व करने की क्षमता का भी विकास होगा, कार्यस्थल पर कुछ नए अवसर प्राप्त हो सकते हैं, लोगों के बीच आपकी जान-पहचान बड़ सकती है और कुछ ऐसे व्यक्ति भी संपर्क में आ सकते हैं जिनसे आने वाले समय में अच्छा लाभ होगा, गर्म चीजों से थोड़ा परहेज करें।

उपाय:- मंगलवार के दिन शिवकृतम् दुर्गास्तोत्रम् का पाठ करें।

कुंभ राशि:-

कुंभ राशि वालों के लिए मंगल तृतीय व चतुर्थ भाव के स्वामी बनकर दशम भाव से गोचर करेंगे व रूचक महापुरुष योग बनाएंगे साथ ही दशम भाव में मंगल को दिग्बल भी प्राप्त होता है अतः करिअर में उन्नति के अवसर व समाज में मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होगी और नौकरी में पदोन्नति के अवसर भी प्राप्त होंगे या किसी नई शुरुवात के योग बनेंगे, गुरु की भी दृष्टि दशम भाव पर होने से कार्यस्थल पर सहयोगियों व उच्च अधिकारियों का भी सहयोग व उनसे प्रशंसा प्राप्त होगी, अधिक चिकनाई वाले व्यंजन व जंक फूड से थोड़ा परहेज करें।

उपाय:- मंगलवार के दिन गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।

मीन राशि:-

मीन राशि वालों के लिए मंगल नवम व द्वितीय भाव के स्वामी बनकर नवम भाव से गोचर करेंगे अतः भाग स्थान से मंगल का गोचर नेतृत्व क्षमता में वृद्धि का सूचक होगा एवं भाग्य का भी सहयोग प्राप्त होगा तथा धर्म पालन द्वारा नौकरी/कारोबार के मार्ग में उन्नति के अवसर प्राप्त होंगे, यात्रा पर जाने के योग बनते हैं, अचानक खर्च में वृद्धि संभव है जिस कारण से कुछ चिंता सी मन में अनुभव हो सकती है व घरेलू वातावरण में भी थोड़ा उतार-चढ़ाव सा देखने को मिल सकता है।

उपाय:- संकटमोचन हनुमाष्टक का नित्य पाठ करें।

जय श्री राम।

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दारिद्र्यनाशनं सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रम्

।।श्री गणेशाय नमः।।
ॐ अस्य श्रीसिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रस्य हिरण्यगर्भ ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, सिद्धिलक्ष्मीर्देवता, मम समस्त दुःखक्लेशपीडादारिद्र्यविनाशार्थं सर्वलक्ष्मीप्रसन्नकरणार्थं
महाकालीमहालक्ष्मीमहासरस्वतीदेवताप्रीत्यर्थं च
सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रजपे विनियोगः।
ॐ सिद्धिलक्ष्मी अङ्गुष्ठाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं विष्णुहृदये तर्जनीभ्यां नमः।
ॐ क्लीं अमृतानन्दे मध्यमाभ्यां नमः।
ॐ श्रीं दैत्यमालिनी अनामिकाभ्यां नमः।
ॐ तं तेजःप्रकाशिनी कनिष्ठिकाभ्यां नमः।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मी वैष्णवी माहेश्वरी
करतलकरपृष्ठाभ्यां नमः।
एवं हृदयादिन्यासः।
ॐ सिद्धिलक्ष्मी हृदयाय नमः।
ॐ ह्रीं वैष्णवी शिरसे स्वाहा।
ॐ क्लीं अमृतानन्दे शिखायै वौषट्।
ॐ श्रीं दैत्यमालिनी कवचाय हुम्।
ॐ तं तेजःप्रकाशिनी नेत्रद्वयाय वौषट्।
ॐ ह्रीं क्लीं श्रीं ब्राह्मीं वैष्णवीं फट्॥
अथ ध्यानम्
ब्राह्मीं च वैष्णवीं भद्रां षड्भुजां च चतुर्मुखाम्।
त्रिनेत्रां च त्रिशूलां च पद्मचक्रगदाधराम्॥१॥
पीताम्बरधरां देवीं नानालङ्कारभूषिताम्।
तेजःपुञ्जधरां श्रेष्ठां ध्यायेद्बालकुमारिकाम्॥२॥

ॐकारलक्ष्मीरूपेण विष्णोर्हृदयमव्ययम्।
विष्णुमानन्दमध्यस्थं ह्रींकारबीजरूपिणी॥३॥
ॐ क्लीं अमृतानन्दभद्रे सद्य आनन्ददायिनी।
ॐ श्रीं दैत्यभक्षरदां शक्तिमालिनी शत्रुमर्दिनी॥४॥

तेजः प्रकाशिनी देवी वरदा शुभकारिणी।
ब्राह्मी च वैष्णवी भद्रा कालिका रक्तशाम्भवी॥५॥
आकारब्रह्मरूपेण ॐ कारं विष्णुमव्ययम्।
सिद्धिलक्ष्मि परालक्ष्मि लक्ष्यलक्ष्मि नमोऽस्तुते॥६॥

सूर्यकोटिप्रतीकाशं चन्द्रकोटिसमप्रभम्।
तन्मध्ये निकरे सूक्ष्मं ब्रह्मरूपव्यवस्थितम्॥७॥
ॐ कारपरमानन्दं क्रियते सुखसम्पदा।
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके॥८॥

प्रथमे त्र्यम्बका गौरी द्वितीये वैष्णवी तथा।
तृतीये कमला प्रोक्ता चतुर्थे सुरसुन्दरी॥९॥
पञ्चमे विष्णुपत्नी च षष्ठे च वैष्णवी तथा।
सप्तमे च वरारोहा अष्टमे वरदायिनी॥१०॥

नवमे खड्गत्रिशूला दशमे देवदेवता।
एकादशे सिद्धिलक्ष्मीर्द्वादशे ललितात्मिका॥११॥
एतत्स्तोत्रं पठन्तस्त्वां स्तुवन्ति भुवि मानवाः।
सर्वोपद्रवमुक्तास्ते नात्र कार्या विचारणा॥१२॥

एकमासं द्विमासं वा त्रिमासं च चतुर्थकम्।
पञ्चमासं च षण्मासं त्रिकालं यः पठेन्नरः॥१३॥
ब्राह्मणाः क्लेशतो दुःखदरिद्रा भयपीडिताः।
जन्मान्तरसहस्रेषु मुच्यन्ते सर्वक्लेशतः॥१४॥

अलक्ष्मीर्लभते लक्ष्मीमपुत्रः पुत्रमुत्तमम्।
धन्यं यशस्यमायुष्यं वह्निचौरभयेषु च॥१५॥
शाकिनीभूतवेतालसर्वव्याधिनिपातके।
राजद्वारे महाघोरे सङ्ग्रामे रिपुसङ्कटे॥१६॥

सभास्थाने श्मशाने च कारागेहारिबन्धने।
अशेषभयसम्प्राप्तौ सिद्धिलक्ष्मीं जपेन्नरः॥१७॥
ईश्वरेण कृतं स्तोत्रं प्राणिनां हितकारणम्।
स्तुवन्ति ब्राह्मणा नित्यं दारिद्र्यं न च वर्धते॥१८॥

या श्रीः पद्मवने कदम्बशिखरे राजगृहे कुञ्जरे
श्वेते चाश्वयुते वृषे च युगले यज्ञे च यूपस्थिते।
शङ्खे देवकुले नरेन्द्रभवनी गङ्गातटे गोकुले
सा श्रीस्तिष्ठतु सर्वदा मम गृहे भूयात्सदा निश्चला॥१९॥

॥इति श्रीब्रह्माण्डपुराणे ईश्वरविष्णुसंवादे
दारिद्र्यनाशनं सिद्धिलक्ष्मीस्तोत्रं सम्पूर्णम्॥

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Jealousy Levels by Zodiac: Handle With Care!

Jealousy means feeling upset when you think someone else might take your loved one’s attention. Everyone feels jealousy sometimes. But some zodiac signs feel it more than others. Let’s see who gets jealous the most and how to stop feeling too jealous.

Most Jealous Signs and How to Handle It

Scorpio:- Scorpios love deeply and want to trust. They get jealous if they feel left out.
How to handle:- Be honest with them. Tell them you love them and make them feel safe.

Cancer:- Cancers feel love very strongly and want to be sure they are loved back.
How to handle:- Spend time with them and show you care a lot.

Leo:- Leos like to be noticed and praised. They get jealous if ignored.
How to handle:- Give them attention and tell them they are special.

Middle-Level Jealousy Signs and How to Handle

Taurus:- Taurus likes steady love. They may feel jealous if they think they will lose you.
How to handle:- Talk about your feelings and keep promises.

Aries:- Aries wants to be first in your heart and may get jealous quickly.
How to handle:- Stay calm, be honest, and tell them they matter.

Virgo:- Virgos worry a lot. They get jealous if they feel unsure about the relationship.
How to handle:- Be clear and kind. Help them feel safe.

Least Jealous Signs and How to Handle

Sagittarius:- Sagittarius loves freedom. They don’t get jealous easily.
How to handle:- Give them space and be honest.

Aquarius:- Aquarius values independence and talks about feelings differently.
How to handle:- Speak clearly and respect their way.

Gemini:- Geminis like meeting people but aren’t usually jealous.
How to handle:- Keep talking to them and show you care.

Libra:- Libra likes peace and trusts their partner.
How to handle:- Be fair and solve problems together.

Capricorn:- Capricorn is careful with feelings and gets jealous slowly.
How to handle:- Show you are serious and dependable.

Pisces:- Pisces is loving and trusts easily. They get jealous less often.
How to handle:- Be gentle and give them attention.

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श्री लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनाम स्तोत्रम्

देव्युवाच-

देवदेव! महादेव! त्रिकालज्ञ! महेश्वर!
करुणाकर देवेश! भक्तानुग्रहकारक!॥
अष्टोत्तर शतं लक्ष्म्याः श्रोतुमिच्छामि तत्त्वतः॥

ईश्वर उवाच-

देवि! साधु महाभागे महाभाग्य प्रदायकम्।
सर्वैश्वर्यकरं पुण्यं सर्वपाप प्रणाशनम्॥
सर्वदारिद्र्य शमनं श्रवणाद्भुक्ति मुक्तिदम्।
राजवश्यकरं दिव्यं गुह्याद्-गुह्यतरं परम्॥
दुर्लभं सर्वदेवानां चतुष्षष्टि कलास्पदम्।
पद्मादीनां वरान्तानां निधीनां नित्यदायकम्॥
समस्त देव संसेव्यं अणिमाद्यष्ट सिद्धिदम्।
किमत्र बहुनोक्तेन देवी प्रत्यक्षदायकम्॥
तव प्रीत्याद्य वक्ष्यामि समाहितमनाश्शृणु।
अष्टोत्तर शतस्यास्य महालक्ष्मिस्तु देवता॥
क्लीं बीज पदमित्युक्तं शक्तिस्तु भुवनेश्वरी।
अङ्गन्यासः करन्यासः स इत्यादि प्रकीर्तितः॥

ध्यानं

वन्दे पद्मकरां प्रसन्नवदनां सौभाग्यदां भाग्यदां
हस्ताभ्यामभयप्रदां मणिगणैः नानाविधैः भूषिताम् ।
भक्ताभीष्ट फलप्रदां हरिहर ब्रह्माधिभिस्सेवितां
पार्श्वे पङ्कज शङ्खपद्म निधिभिः युक्तां सदा शक्तिभिः॥

सरसिज नयने सरोजहस्ते धवल तरांशुक गन्धमाल्य शोभे।
भगवति हरिवल्लभे मनोज्ञे त्रिभुवन भूतिकरि प्रसीदमह्यम्॥

प्रकृतिं विकृतिं विद्यां सर्वभूत-हितप्रदाम्।
श्रद्धां विभूतिं सुरभिं नमामि परमात्मिकाम्॥१॥

वाचं पद्मालयां पद्मां शुचिं स्वाहां स्वधां सुधाम्।
धन्यां हिरण्ययीं लक्ष्मीं नित्यपुष्टां विभावरीम्॥२॥

अदितिं च दितिं दीप्तां वसुधां वसुधारिणीम्।
नमामि कमलां कान्तां कामाक्षीं क्रोधसम्भवाम् क्षीरोदसम्भवाम्॥३॥

अनुग्रहप्रदां बुद्धि-मनघां हरिवल्लभाम्।
अशोका-ममृतां दीप्तां लोकशोकविनाशिनीम्॥४॥

नमामि धर्मनिलयां करुणां लोकमातरम्।
पद्मप्रियां पद्महस्तां पद्माक्षीं पद्मसुन्दरीम्॥५॥

पद्मोद्भवां पद्ममुखीं पद्मनाभप्रियां रमाम्।
पद्ममालाधरां देवीं पद्मिनीं पद्मगन्धिनीम्॥६॥

पुण्यगन्धां सुप्रसन्नां प्रसादाभिमुखीं प्रभाम्।
नमामि चन्द्रवदनां चन्द्रां चन्द्रसहोदरीम्॥७॥

चतुर्भुजां चन्द्ररूपा-मिन्दिरा-मिन्दुशीतलाम्।
आह्लाद जननीं पुष्टिं शिवां शिवकरीं सतीम्॥८॥

विमलां विश्वजननीं तुष्टिं दारिद्र्यनाशिनीम्।
प्रीतिपुष्करिणीं शान्तां शुक्लमाल्याम्बरां श्रियम्॥९॥

भास्करीं बिल्वनिलयां वरारोहां यशस्विनीम्।
वसुन्धरा मुदाराङ्गां हरिणीं हेममालिनीम्॥१०॥

धनधान्यकरीं सिद्धिं स्त्रैणसौम्यां [सदासौम्यां] शुभप्रदाम्।
नृपवेश्मगतां नन्दां वरलक्ष्मीं वसुप्रदाम्॥११॥

शुभां हिरण्यप्राकारां समुद्रतनयां जयाम्।
नमामि मङ्गलां देवीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्॥१२॥

विष्णुपत्नीं, प्रसन्नाक्षीं नारायणसमाश्रिताम्।
दारिद्र्यध्वंसिनीं देवीं सर्वोपद्रववारिणीम्॥१३॥

नवदुर्गां महाकालीं ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकाम्।
त्रिकालज्ञानसम्पन्नां नमामि भुवनेश्वरीम्॥१४॥

लक्ष्मीं क्षीरसमुद्रराज तनयां श्रीरङ्गधामेश्वरीम्।
दासीभूत समस्तदेव वनितां लोकैक दीपाङ्कुराम्॥
श्रीमन्मन्द कटाक्ष लब्ध विभवद्-ब्रह्मेन्द्र गङ्गाधराम्।
त्वां त्रैलोक्य कुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥१५॥

मातर्नमामि! कमले! कमलायताक्षि!
श्री विष्णु हृत्-कमलवासिनि! विश्वमातः!
क्षीरोदजे कमल कोमल गर्भगौरि!
लक्ष्मी! प्रसीद सततं समतां शरण्ये॥१६॥

त्रिकालं यो जपेत् विद्वान् षण्मासं विजितेन्द्रियः।
दारिद्र्य ध्वंसनं कृत्वा सर्वमाप्नोत्-ययत्नतः।
देवीनाम सहस्रेषु पुण्यमष्टोत्तरं शतम्।
येन श्रिय मवाप्नोति कोटिजन्म दरिद्रतः॥१७॥

भृगुवारे शतं धीमान् पठेत् वत्सरमात्रकम्।
अष्टैश्वर्य मवाप्नोति कुबेर इव भूतले॥
दारिद्र्य मोचनं नाम स्तोत्रमम्बापरं शतम्।
येन श्रिय मवाप्नोति कोटिजन्म दरिद्रतः॥१८॥

भुक्त्वातु विपुलान् भोगान् अन्ते सायुज्यमाप्नुयात्।
प्रातःकाले पठेन्नित्यं सर्व दुःखोप शान्तये।
पठन्तु चिन्तयेद्देवीं सर्वाभरण भूषिताम्॥१९॥

।।इति श्री लक्ष्म्यष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं सम्पूर्णं।।

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सूर्य षष्ठी 2025: जानिए व्रत का महत्व, तिथि‑मुहूर्त और संतान की मंगलकामना हेतु विशेष उपाय

सूर्य षष्ठी जिसे लोलार्क षष्ठी, ललही छठ व डाला छठ के नाम से भी जाना जाता है, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है यह चार दिवसीय पर्व कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन नहाय-खाय से इस महापर्व की शुरुवात होती है जो कि वर्ष 2025 में 25 अक्टूबर से होगी और इसी दिन से सूर्य षष्ठी व्रत का भी आरंभ हो जाएगा।

ब्रह्मवैवर्त पुराण के प्रकृति खण्ड के अनुसार, राजा प्रियव्रत और रानी मालिनी की कोई संतान नही थी तब महर्षि कश्यप की सलाह पर दोनों दंपत्तियों ने सूर्य षष्ठी व्रत किया जिससे ब्रह्मा की मानस पुत्री देवी षष्ठी अर्थात छठी माता प्रसन्न होकर राजा प्रियव्रत व रानी मालिनी को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया था वहीं महाभारत काल में भी द्रौपदी के द्वारा भी सूर्य षष्ठी का उल्लेख है जिसके फलस्वरूप द्रौपदी व पांडवों को कष्टों से मुक्ति मिली थी।

सूर्य षष्ठी पर्व विवरण:-

25 अक्टूबर 2025 सूर्य षष्ठी तीन दिवसीय व्रत आरंभ व नहाय-खाय की रस्म।

26 अक्टूबर 2025 सूर्य षष्ठी व्रत दूसरा दिन व खरना।

27 अक्टूबर 2025 सूर्य षष्ठी शाम सूर्यास्त के समय अर्थात अस्तांचल सूर्य को अर्घ देना।

27 अक्टूबर सूर्यास्त शाम 05:36 (काशी)

28 अक्टूबर 2025 सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ व सूर्य षष्ठी व्रत की पारणा।

28 अक्टूबर 2025 सूर्योदय 06:25 (काशी)।

सूर्य षष्ठी विशेष उपाय:-

संतान की मंगलकामना हेतु विशेष उपाय
संतान की मंगलकामना हेतु विशेष उपाय

1. संतान की उन्नति व भाग्य वृद्धि हेतु ताँबे के सूर्य यंत्र को घर के पूजा स्थल पर स्थापित कर नित्य धूप-दीप अर्पित कर सूर्य मंत्र का जप करें।
2. सूर्य षष्ठी के दिन सूखा नारियल, बादाम, किशमिश सूर्य मंदिर में संतान के भाग्य वृद्धि की कामना से सेवा के लिए देना उत्तम रहेगा।
3. संतान के स्वास्थ लाभ व दीर्घायु हेतु गाय को रोटी-गुड़ खिलाएं व पानी पिलाएं।
4. यदि संतान की भाग्य वृद्धि व उत्तम स्वास्थ्य हेतु किसी भिखारी को गेहूँ, लाल दाल व किशिमिश का दान करें।
5. समाज में मान व प्रतिष्ठा हेतु आदित्य हिर्दय स्तोत्र का पाठ करें व किसी 1 ब्राह्मण को भोजन करवाएं।

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वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की साफ-सफाई के कुछ नियम जिनका ध्यान रखने से घर में सुख शांति बनी रहती है

वास्तु शास्त्र के अनुसार जिस घर में रोज साफ-सफाई होती है वहाँ देवी लक्ष्मी का वास होता है अतः घर की साफ-सफाई हेतु वास्तु शास्त्र में कुछ नियम बताए गए हैं जिनका पालन किया जाए तो घर में सुख व समृद्धि के रास्ते खुल जाते हैं क्योंकि घर में रखी हर वस्तु का घर के सदस्यों की तरक्की, सेहत व मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है।

साफ-सफाई का समय:-

वास्तु शास्त्र के अनुसार सूर्यास्त के बाद और ब्रह्म मुहूर्त्त में झाड़ू नही लगाना चाहिए और यदि किसी कारण से घर की साफ-सफाई करनी पड़े तो सफाई में निकले कचरे को सुबह सूर्योदय के बाद घर से बाहर फेकना चाहिए।

घर के सभी कोनों की सफाई:-

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का ईशान कोण और वायव्य कोण और उत्तर दिशा हमेशा साफ और खाली रहना चाहिए क्योंकि इन स्थानों पर धन के देवता कुबेर का वास होता है ।

छत या बालकनी की सफाई:-

घर की छत और बालकनी पर कभी भी कबाड़ या टूटी-फूटी चीजें नही रखनी चाहिए ऐसा करने से घर में दरिद्रता और बीमारी आती है।

बाथरूम की साफ-सफाई:-

वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम को हमेशा साफ रखना चहिए और बाथरूम में कहीं भी मकड़ी के जाल नही होने चाहिए क्योंकि घर का बाथरूम गंदा होने पर भी वास्तु दोष उत्पन्न होता है।

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शिवकृतम् दुर्गास्तोत्रम्

रक्ष रक्ष महादेवि दुर्गे दुर्गतिनाशिनि।
मां भक्तमनुरक्तं च शत्रुग्रस्तं कृपामयि॥१॥

विष्णुमाये महाभागे नारायणि सनातनि।
ब्रह्मस्वरूपे परमे नित्यानन्दस्वरूपिणी॥२॥

त्वं च ब्रह्मादिदेवानामम्बिके जगदम्बिके।
त्वं साकारे च गुणतो निराकारे च निर्गुणात्॥३॥

मायया पुरुषस्त्वं च मायया प्रकृतिः स्वयम्।
तयोः परं ब्रह्म परं त्वं बिभर्षि सनातनि॥४॥

वेदानां जननी त्वं च सावित्री च परात्परा।
वैकुण्ठे च महालक्ष्मीः सर्वसम्पत्स्वरूपिणी॥५॥

मर्त्यलक्ष्मीश्च क्षीरोदे कामिनी शेषशायिनः।
स्वर्गेषु स्वर्गलक्ष्मीस्त्वं राजलक्ष्मीश्च भूतले॥६॥

नागादिलक्ष्मीः पाताले गृहेषु गृहदेवता।
सर्वसस्यस्वरूपा त्वं सर्वैश्वर्यविधायिनी॥७॥

रागाधिष्ठातृदेवी त्वं ब्रह्मणश्च सरस्वती।
प्राणानामधिदेवी त्वं कृष्णस्य परमात्मनः॥८॥

गोलोके च स्वयं राधा श्रीकृष्णस्यैव वक्षसि।
गोलोकाधिष्ठाता देवी वृन्दावनवने वने॥९॥

श्रीरासमण्डले रम्या वृन्दावनविनोदिनी।
शतश‍ृङ्गाधिदेवी त्वं नाम्ना चित्रावलीति च॥१०॥

दक्षकन्या कुत्र कल्पे कुत्रकल्पे च शैलजा।
देवमाता दितिस्त्वं च सर्वाधारा वसुन्धरा॥११॥

त्वमेव गङ्गा तुलसी त्वं च स्वाहा स्वधा सती।
त्वदंशांशांशकलया सर्वदेवादियोषितः॥१२॥

स्त्रीरूपं चापि पुरुषं देवि त्वं च नपुंसकम् ।
वृक्षाणां वृक्षरूपा त्वं सृष्टौ चाङ्कुररूपिणी॥१३॥

वह्नौ च दाहिका शक्तिर्जले शैत्यस्वरूपिणी।
सूर्ये तेजस्वरूपा च प्रभारूपा च सन्ततम्॥१४॥

गन्धरूपा च भूमौ च आकाशे शब्दरूपिणी।
शोभास्वरूपा चन्द्रे च पद्मसङ्घे च निश्चितम्॥१५॥

सृष्टौ सृष्टिस्वरूपा च पालने परिपालिका।
महामारी च संहारे जले च जलरूपिणी १६॥

क्षुत् त्वं दया त्वं निद्रा त्वं तृष्णा त्वं बुद्धिरूपिणी।
तुष्टिस्त्वं चपि पुष्टिस्त्वं श्रद्धा त्वं च क्षमा स्वयम्॥१७॥

शान्तिस्त्वं च स्वयं भ्रान्तिः कान्तिस्त्वं कीर्तिरेव च।
लज्जा त्वं च तथा माया भुक्तिमुक्तिस्वरूपिणी॥१८॥

सर्वशक्तिस्वरूपा त्वं सर्वसम्पत्प्रदायिनी।
वेदेऽनिर्वचनीया त्वं त्वां न जानाति कश्चन॥१९॥

सहस्रवक्त्रस्त्वां स्तोतुं न शक्तः सुरेश्वरि।
वेदाः न शक्ताः को विद्वान् न च शक्ता सरस्वती॥२०॥

स्वयं विधाता शक्तो न न च विष्णुः सनातनः।
किं स्तौमि पञ्चवक्त्रेण रणत्रस्तो महेश्वरि।
कृपां कुरु महामाये मम शत्रुक्षयं कुरु॥२१॥

॥इति शिवकृतम् दुर्गास्तोत्रम् सम्पूर्णम्॥

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नवंबर 2025 के प्रमुख व्रत, पर्व और त्यौहार

1 नवंबर 2025:- प्रबोधिनी एकादशी व्रत सभी के लिए, भद्रा दिन में 03:30 से रात्रि 02:56 तक, पंचक, भीष्मपंचक प्रारंभ।

2 नवंबर 2025:- मीन राशि के चंद्रमा दिन 08:12 पर, पंचक।

3 नवंबर 2025:- सोम प्रदोष व्रत, मूल प्रारंभ दिन में 11:58 पर, पंचक।

4 नवंबर 2025:- मेष राशि के चंद्र व पंचक समाप्ति दिन 11:49 पर, श्रीवैकुण्ठ चतुर्दशी व्रत, श्री काशी विश्वनाथ प्रतिष्ठा दिवस, श्री विश्वनाथ जी को तुलसी चढ़ाना, भद्रा प्रारंभ रात्रि 09:33 पर, मूल।

5 नवंबर 2025:- स्नान-दान-व्रत की पूर्णिमा, भीष्म पंचक समाप्ति, श्री गुरुनानक जयंती, देव दीपावली घाटों पर, दीपोत्सव व दीपदान (काशी), भद्रा समाप्ति दिन 08:25 पर।

6 नवंबर 2025:- वृषभ राशि के चंद्र दिन 02:17 पर, कार्तिक व्रत की पारणा।

7 नवंबर 2025:- भद्रा रात्रि 01:21 से प्रारंभ।

8 नवंबर 2025:- मिथुन राशि के चंद्र शाम 04:36 पर, श्री संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत, सौभाग्य सुंदरी व्रत, भद्रा समाप्ति दिन 12:13 पर।

9 नवंबर 2025:- यायीजयोग।

10 नवंबर 2025:- कर्क राशि के चंद्र रात्रि 07:41 पर, श्री अन्नपूर्णा जी का 17 दिवसीय व्रत आरंभ, भद्रा रात्रि शेष 06:21 से।

11 नवंबर 2025:- भद्रा शाम 05:42 तक।

12 नवंबर 2025:- सिंह राशि के चंद्र रात्रि 12:21 पर, श्री भैरवाष्टमी व्रत, श्री काल भैरव जी का वार्षिक श्रृंगार व जन्मोत्सव, मूल।

13 नवंबर 2025:- मूल समाप्ति रात्रि 11:50 पर।

14 नवंबर 2025:- भद्रा दिन 03:55 से अर्ध रात्रि 03:47 तक।

15 नवंबर 2025:- कन्या राशि के चंद्र दिन 07:23 पर, उत्पन्ना एकादशी व्रत सभी के लिए।

16 नवंबर 2025:- सूर्य की वृश्चिक संक्रांति, हेमन्त ऋतु प्रारंभ, श्री स्वामी कार्तिकेय जी की स्थापना व पूजन (बंगाल)।

17 नवंबर 2025:- तुला राशि के चंद्र शाम 04:49 पर, श्री सोम प्रदोष व्रत, श्री स्वामी कार्तिकेय जी की मूर्ति विसर्जन।

18 नवंबर 2025:- मास शिवरात्रि व्रत, भद्रा दिन में 07:02 से रात्रि 07:58 तक।

19 नवंबर 2025:- वृश्चिक राशि के चंद्रमा रात्रि शेष 04:07 पर, श्राद्ध की अमावस्या।

20 नवंबर 2025:- स्नान-दान की अमावस्या।

21 नवंबर 2025:- मूल प्रारंभ दिन 01:22 पर।

22 नवंबर 2025:- धनु राशि के चंद्र दिन 03:52 पर, मूल।

23 नवंबर 2025:- मूल समाप्ति दिन 05:21 पर, भद्रा प्रारंभ अर्ध रात्रि 05:37 पर।

24 नवंबर 2025:- मकर राशि के चंद्र रात्रि 02:17 पर, श्री वैनायकी गणेश चतुर्थी व्रत, भद्रा समाप्ति शाम 06:18 पर।

25 नवंबर 2025:- श्री राम विवाहोत्सव, जानकी मंगल।

26 नवंबर 2025:- श्री चम्पा षष्ठी, श्री अन्नपूर्णा जी के व्रत की समाप्ति व धान का श्रृंगार (काशी)।

27 नवंबर 2025:- कुंभ राशि के चंद्र व पंचक प्रारंभ दिन 09:32 पर, भद्रा प्रारंभ रात्रि 07:24 पर।

28 नवंबर 2025:- भद्रा समाप्ति प्रातः 07:04 पर, पंचक।

29 नवंबर 2025:- मीन राशि के चंद्र शाम 04:03 पर, नन्दा नवमी, पंचक।

30 नवंबर 2025:- भद्रा प्रारंभ रात्रि 03:15 पर, मूल प्रारंभ रात्रि 08:12 पर, पंचक।