मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर 2026: 27 नक्षत्रों पर प्रभाव और नवतारा चक्र Astrology Sutras

मंगल का पुष्य नक्षत्र में महागोचर: 25 सितंबर से 20 अक्टूबर 2026, जानें सभी 27 नक्षत्रों पर नवतारा चक्र का सटीक प्रभाव व अचूक उपाय

वैदिक ज्योतिष में साहस, पराक्रम, भूमि, रक्त और ऊर्जा के अधिपति ग्रह ‘मंगल देव’ का नक्षत्र परिवर्तन जनमानस और प्रकृति पर तीव्र प्रभाव डालता है। “ऋषिकेश पंचांग” की सूक्ष्म गणना के अनुसार, 25 सितंबर 2026 (शुक्रवार) की रात्रि 11:25 बजे मंगल देव शनि के स्वामित्व वाले और देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव वाले कल्याणकारी ‘पुष्य नक्षत्र’ में प्रवेश करेंगे। मंगल देव इस नक्षत्र में 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) की दोपहर 03:27 बजे तक संचरण करेंगे, जिसके पश्चात वे बुध के अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश कर जाएंगे। Astrology Sutras (ज्योतिर्विद पूषार्क जेतली जी) के इस विशेष शोधपरक आलेख में हम ‘नवतारा चक्र’ (तारा बल सिद्धांत) के आधार पर बहुत ही सरल भाषा में जानेंगे कि आपके जन्म नक्षत्र पर मंगल के इस 25 दिवसीय गोचर का क्या वास्तविक प्रभाव पड़ेगा और अशुभ फलों के शमन के अचूक शास्त्रीय उपाय क्या हैं।

💡 सबसे पहले समझें: अपना जन्म नक्षत्र कैसे ज्ञात करें?

कई पाठकों के मन में संशय रहता है कि उनका जन्म नक्षत्र कौन सा है। इसे देखना अत्यंत सरल है:

शास्त्रीय नियम: आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा (Moon) जिस नक्षत्र में स्थित (बैठा) होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र कहलाता है।

  • उदाहरण 1: यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र अश्विनी है।
  • उदाहरण 2: यदि चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र पुष्य कहलाएगा।
  • उदाहरण 3: यदि चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र में बैठा है, तो आपका जन्म नक्षत्र रोहिणी माना जाएगा।

👉 बस अपनी कुंडली में चंद्रमा का नक्षत्र देखें और नीचे दी गई तालिका में अपने नक्षत्र का सीधा फल पढ़ें!

🌌 1. ज्योतिषीय पृष्ठभूमि: मंगल और पुष्य नक्षत्र का संयोग

पुष्य नक्षत्र को 27 नक्षत्रों का राजा (नक्षत्र शिरोमणि) कहा जाता है। इसके स्वामी कर्मफलदाता शनि देव हैं और इसके अधिष्ठाता देवगुरु बृहस्पति हैं। पुष्य नक्षत्र कर्क राशि के अंतर्गत आता है, जो मंगल की नीच राशि है। जब अग्नि तत्व प्रधान मंगल, पोषण करने वाले पुष्य नक्षत्र में आते हैं, तो जातक के भीतर दबी हुई महत्वाकांक्षाएं तीव्र होती हैं। इस समय जल्दबाजी में लिए गए निर्णय नुकसान दे सकते हैं, किंतु धैर्य और अनुशासन से किए गए कार्य दीर्घकालिक लाभ प्रदान करते हैं।

📜 नवतारा चक्र का शास्त्रीय नियम (श्लोक व अर्थ)

महर्षि पाराशर के अनुसार जन्म नक्षत्र से गोचर नक्षत्र (पुष्य) तक गणना करके 9 ताराओं का निर्धारण किया जाता है:

नवतारा मूल श्लोक शास्त्रीय अर्थ व विधान

“जन्मसम्पद्विपत्क्षेमप्रत्यरी साधको वधः।
मित्रं परममित्रं च ताराबलमिदं स्मृतम्॥”

फलदीपिका (अध्याय 21)

अर्थ: जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यरि, साधक, वध (निधन), मित्र और अतिमित्र—ये 9 ताराएं होती हैं। इनमें संपत, क्षेम, साधक, मित्र और अतिमित्र ताराएं उत्तम फल देती हैं, जबकि जन्म, विपत, प्रत्यरि और वध तारा में विशेष सावधानी और उपाय आवश्यक होते हैं।

⭐ 2. सभी 27 नक्षत्रों पर मंगल के पुष्य गोचर का एक-नज़र में विवरण

नीचे दी गई तालिका से तुरंत जानें कि आपका जन्म नक्षत्र किस तारा वर्ग में आ रहा है:

तारा वर्ग संबंधित जन्म नक्षत्र गोचर का मुख्य फल
1. जन्म तारा पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद क्रोध व रक्तचाप से बचें, धैर्य रखें
2. संपत् तारा पुनर्वसु, विशाखा, पूर्वाभाद्रपद भूमि-संपत्ति लाभ, धन वृद्धि
3. विपत् तारा आर्द्रा, स्वाति, शतभिषा विवाद से बचें, वाहन संभलकर चलाएं
4. क्षेम तारा मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा आरोग्य लाभ, पराक्रम में वृद्धि
5. प्रत्यरि तारा रोहिणी, हस्त, श्रवण शत्रु बाधा, मानसिक अशांति
6. साधक तारा कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा प्रतियोगिता में विजय, सरकारी लाभ
7. वध (निधन) तारा भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा चोट-चपेट से बचें, जोखिम न लें
8. मित्र तारा अश्विनी, मघा, मूल भाइयों से सहयोग, साहस में वृद्धि
9. अतिमित्र तारा आश्लेषा, ज्येष्ठा, रेवती बौद्धिक कार्यों में जय, बड़ा लाभ

🔍 3. सभी 27 नक्षत्रों का विस्तृत व सरल फलादेश

अपने जन्म नक्षत्र के अनुसार विस्तार से जानें कि मंगल का पुष्य नक्षत्र में गोचर आपके जीवन पर क्या प्रभाव डालेगा:

1. पुष्य, अनुराधा एवं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र (जन्म तारा)

यदि आपका जन्म पुष्य, अनुराधा या उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘जन्म तारा’ के चक्र में हो रहा है। विशेषकर पुष्य नक्षत्र के जातकों के ठीक ऊपर से मंगल का संचरण होने के कारण स्वभाव में अचानक गुस्सा, अधीरता और उत्तेजना बढ़ सकती है। सिर में भारीपन, रक्तचाप अथवा पित्त से संबंधित परेशानी हो सकती है। कार्यक्षेत्र में अधिकारियों से विवाद न करें और इस 25 दिनों की अवधि में शांति बनाए रखें।

2. पुनर्वसु, विशाखा एवं पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र (संपत् तारा)

यदि आपका जन्म पुनर्वसु, विशाखा या पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘संपत् तारा’ के चक्र में हो रहा है। यह समय आपके लिए अचल संपत्ति, भूमि, भवन और वाहन सुख के लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा। यदि आपका कोई रियल एस्टेट या कोर्ट-कचहरी का मामला अटका था, तो उसमें आपको भारी आर्थिक लाभ मिलने के योग बनेंगे।

3. आर्द्रा, स्वाति एवं शतभिषा नक्षत्र (विपत् तारा)

यदि आपका जन्म आर्द्रा, स्वाति या शतभिषा नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘विपत् तारा’ के चक्र में हो रहा है। राहु के इन नक्षत्रों पर मंगल का यह प्रभाव अचानक दुर्घटना या बिजली/अग्नि से कष्ट दे सकता है। किसी भी नए निर्माण कार्य में जल्दबाजी न करें, कर्ज लेने-देने से बचें और वाहन चलाते समय गति पर नियंत्रण रखें।

4. मृगशिरा, चित्रा एवं धनिष्ठा नक्षत्र (क्षेम तारा)

यदि आपका जन्म मृगशिरा, चित्रा या धनिष्ठा नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘क्षेम तारा’ के चक्र में हो रहा है। चूंकि ये तीनों नक्षत्र स्वयं मंगल देव के हैं, इसलिए यह गोचर आपके स्वास्थ्य में सुधार लाएगा। आपके आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होगी। पुलिस, सेना, इंजीनियरिंग, खेलकूद और तकनीकी क्षेत्र के जातकों को विशेष सम्मान प्राप्त होगा।

5. रोहिणी, हस्त एवं श्रवण नक्षत्र (प्रत्यरि तारा)

यदि आपका जन्म रोहिणी, हस्त या श्रवण नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘प्रत्यरि तारा’ के चक्र में हो रहा है। चंद्रमा के इन नक्षत्रों पर मंगल की दृष्टि मानसिक बेचैनी और अनिद्रा पैदा कर सकती है। कार्यक्षेत्र में गुप्त शत्रु आपकी छवि बिगाड़ने का प्रयास करेंगे। किसी भी विवाद में स्वयं आगे न आएं और माता के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें।

6. कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी एवं उत्तराषाढ़ा नक्षत्र (साधक तारा)

यदि आपका जन्म कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी या उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘साधक तारा’ के चक्र में हो रहा है। सूर्य और मंगल की मित्रता के कारण यह समय आपकी योजनाएं सिद्ध करने वाला है। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीति से जुड़े जातकों को उच्च पद और प्रतिष्ठा प्राप्त होगी।

7. भरणी, पूर्वाफाल्गुनी एवं पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र (वध/निधन तारा)

यदि आपका जन्म भरणी, पूर्वाफाल्गुनी या पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘वध (निधन) तारा’ के चक्र में हो रहा है। यह 25 दिन शारीरिक चोट, सर्जरी अथवा रक्त संबंधी रोगों से सावधान रहने के हैं। वैवाहिक जीवन में जीवनसाथी के साथ तीखी बहस से बचें। कोई भी नया जोखिम भरा आर्थिक निर्णय इस दौरान टाल देना ही समझदारी है।

8. अश्विनी, मघा एवं मूल नक्षत्र (मित्र तारा)

यदि आपका जन्म अश्विनी, मघा या मूल नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘मित्र तारा’ के चक्र में हो रहा है। छोटे भाइयों और घनिष्ठ मित्रों का भरपूर सहयोग मिलेगा। आपका पराक्रम बढ़ेगा और आप कठिन से कठिन चुनौतियों को पार कर लेंगे। धार्मिक यात्राओं के भी शुभ संयोग बनेंगे।

9. आश्लेषा, ज्येष्ठा एवं रेवती नक्षत्र (अतिमित्र तारा)

यदि आपका जन्म आश्लेषा, ज्येष्ठा या रेवती नक्षत्र में हुआ है: तो मंगल का यह गोचर आपके ‘अतिमित्र तारा’ के चक्र में हो रहा है। बुध के इन नक्षत्रों पर मंगल का प्रभाव व्यावसायिक डील्स में बड़ी सफलता दिलाएगा। आपकी तार्किक शक्ति और साहसिक निर्णयों की समाज में प्रशंसा होगी। आर्थिक स्थिति पहले से काफी सुदृढ़ होगी।

🛠️ 4. मंगल के अशुभ प्रभाव निवारण हेतु अचूक शास्त्रीय उपाय

जिन जातकों के लिए मंगल का यह गोचर जन्म, विपत, प्रत्यरि अथवा वध तारा में पड़ रहा है, उन्हें घबराने की आवश्यकता नहीं है। नीचे दिए गए सरल शास्त्रीय उपाय करके आप मंगल के अंगारक दोष और क्रोध को शांत कर सकते हैं:

सरल शास्त्रीय उपाय विधि एवं शास्त्रोक्त नियम
हनुमान चालीसा / सुंदरकांड पाठ मंगल के दोषों को शांत करने के लिए प्रतिदिन या प्रत्येक मंगलवार को चमेली के तेल का दीपक जलाकर श्री हनुमान चालीसा का 3 बार पाठ करें अथवा सुंदरकांड का पाठ करें।
मंगल बीज मंत्र जप प्रतिदिन लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” मंत्र की 1 माला (108 बार) जपें। इससे रक्त विकार और क्रोध शांत होता है।
मसूर दाल व गुड़ का दान मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल, गुड़ और तांबे का सिक्का किसी जरूरतमंद व्यक्ति या हनुमान मंदिर में दान करें।
शनि-मंगल संतुलन उपाय चूंकि पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं, अतः मंगलवार और शनिवार को बंदरों को गुड़-चना खिलाएं अथवा चींटियों को आटा डालें। इससे दोनों ग्रहों की समता बनी रहती है।

💡 5. मंगल-पुष्य गोचर: रोचक फैक्ट्स व अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

मुख्य प्रश्न प्रामाणिक ज्योतिषीय विश्लेषण
पुष्य में मंगल ‘नीच’ क्यों माना जाता है? पुष्य नक्षत्र कर्क राशि के 3°20′ से 16°40′ तक फैला है। कर्क राशि में मंगल 28° पर परम नीच के होते हैं। अतः पुष्य में गोचर के दौरान मंगल अपनी नीच राशि में रहते हैं, इसलिए इस समय जातक को अहंकार और आक्रामकता पर नियंत्रण रखना अनिवार्य होता है।
रियल एस्टेट व शेयर बाजार पर असर? मंगल भूमि-भवन के कारक हैं और पुष्य नक्षत्र स्थायी संपत्ति का। इस 25 दिनों में जमीन-जायदाद, सीमेंट, सरिया, रक्षा क्षेत्र और ऊर्जा से जुड़े शेयरों में दीर्घकालिक निवेश के बड़े अवसर उत्पन्न होंगे।
क्या नवतारा फल सभी पर लागू होता है? हाँ। नवतारा चक्र जातक के जन्म नक्षत्र (चंद्रमा की वास्तविक डिग्री) पर आधारित होता है। यह सामान्य राशि गोचर से कई गुना अधिक सटीक और व्यक्तिगत परिणाम प्रदान करता है।

निष्कर्ष: मंगल का पुष्य नक्षत्र में यह गोचर अनुशासन और धैर्य की परीक्षा लेने वाला है। नवतारा चक्र के अनुसार अपने तारा बल को पहचानें, सकारात्मक कर्म करें और प्रतिकूल फल वाले जातक मंगलवार को बताए गए सरल उपाय अवश्य करें।

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