सूर्य: एक परिचय व सूर्य जनित रोग
सूर्य ग्रह: एक विस्तृत परिचय, स्वभाव और सूर्य जनित रोग (Sun Analysis in Hindi)
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना गया है। वराहमिहिर जी ने सूर्य को शहद के समान लाल रंग का बताया है। जब कड़ी धूप में सूर्य को देखें तो ऐसा ही प्रतीत होता है, और यदि सूक्ष्म दृष्टि से धूप को देखें तो यह कुछ पीले-लाल रंग का दिखाई देता है।
जिन व्यक्तियों का सूर्य प्रधान होता है, उनकी दृष्टि बहुत तेज होती है। उनकी आंखों के कोने में लाल-लाल रेखाएं अधिक होती हैं और उनका शरीर चौकोर होता है।
🔥 सूर्य का प्रभाव:
सूर्य रूखा और उष्ण (गर्म) है, अतः ऐसे व्यक्तियों का पित्त प्रकृति का होना स्वभाविक है। सूर्य प्रधान व्यक्ति के शरीर पर केश/बाल बहुत कम होते हैं।
(विशेष: यदि सूर्य स्त्री राशि में हो तो केश नहीं होते, परंतु यदि सूर्य पुरुष राशि में हो तो केश होते हैं।)
सूर्य ग्रह के कारक और स्वरूप
सूर्य तो पूर्ण ब्रह्म है, अतः इसका निवास स्थान मंदिर व देवगृह ही होता है।
- धातु: तांबा (Copper)
- ऋतु: ग्रीष्म ऋतु का स्वामी
- दिशा: पूर्व दिशा (East)
- वर्ण: क्षत्रिय वर्ण
- गुण: सत्वगुणी (विशेष: सूर्य पाप फल भी देता है, अतः इसे रजोगुणी भी मानना चाहिए।)
मंत्रेश्वर महाराज जी के अनुसार: सूर्य पित्त प्रधान है और यह अस्थियों (हड्डियों) से बलवान है। इसकी भुजाएं लंबी-मोटी हैं तथा इसका देह चौकोर होता है। इसके वस्त्र लाल होते हैं।
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कुंडली में सूर्य कब बली होता है? (Strength of Sun)
ज्योतिषीय गणना के अनुसार सूर्य निम्नलिखित अवस्थाओं में अत्यंत बलवान होता है:
- उच्च राशि: मेष (Aries)
- स्वराशि: सिंह (Leo)
- वार: रविवार (Sunday)
- समय: दिन के मध्य भाग अर्थात दोपहर में।
- अवस्था: राशि में प्रवेश करते समय (एक राशि से दूसरी राशि में जाते समय)।
- स्थिति: मित्र ग्रहों के अंशों में और कुंडली के दशम भाव में (दिग्बली)।
- अयन: जब सूर्य उत्तरायण हो। (नोट: कुछ विद्वानों के अनुसार सूर्य दक्षिणायन में भी बली होते हैं।)






