मकर संक्रांति 2026

मकर संक्रांति विशेष: इन दो योगों की युति होगी विशेष शुभफलदायी

सूर्य के प्रत्येक राशि परिवर्तन को सूर्य की संक्रांति नाम से जाना जाता है और सूर्य की सभी द्वादश संक्रांति का महापर्व मकर संक्रांति होती है इसी दिन भगवान भास्कर अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और पूरे माह मकर राशि में रहते हैं और मकर की संक्रांति के दिन से ही उत्तरायण हो जाते हैं जिससे प्रकृति में भी परिवर्तन शुरू हो जाता है एवं शीत ऋतु का प्रकोप भी कम होता है साथ ही दिन की अवधि बढ़ने लगती है, मकर संक्रांति के दिन पवित्र तीर्थों में पवन नदी में स्नान-दान का विशेष महत्व होता है, वर्ष 2026 में सूर्य 14 जनवरी की रात्रि 09 बजकर 39 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे धर्मशास्त्रों के अनुसार सूर्य संक्रांति की घटना अत्यंत सूक्ष्म समय में होती है अतः हमारे मनीषियों ने संक्रांति से 8 से 16 घण्टे की अवधि को पुण्यकाल बतलाया है, जब सूर्य की संक्रांति दिन की हो तो 8 घण्टे व सूर्य की संक्रांति यदि रात की हो तो 16 घण्टे पुण्यकाल रहता है अतः मकर संक्रांति का पर्व 15 जुलाई को मनाया जाएगा एवं दोपहर 1 बजकर 39 मिनट तक मकर संक्रांति का पुण्य काल रहेगा।

Join Astrology Sutras Whatsapp Channel For All Updates

इन दो योगों की युति होगी विशेष शुभफलदायी

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी गुरुवार के दिन मनाया जाएगा सामान्य तौर पर गुरुवार के दिन खिचड़ी खाना व बनाना वर्जित होता है किंतु पर्व विशेष होने के कारण से गुरुवार के दिन खिचड़ी वर्जित होते हुए भी खिचड़ी का दान व भोजन शुभ रहेगा अतः लोग खिचड़ी बना सकते हैं, दान कर सकते हैं और खा भी सकते हैं।

मकर संक्रांति के दिन ही तिल द्वादशी भी पड़ रही है मान्यता है कि माघ मास के कृष्ण पक्ष की द्वादशी को भगवान विष्णु के शरीर से तिल की उत्पत्ति हुई थी, इस बार मकर संक्रांति के दिन तिल द्वादशी और वृद्धि योग की युति होने से यह अत्यंत शुभफलदाई होगा जो मकर संक्रांति के दिन किए गए स्नान-दान के पुण्यों में कई गुणा वृद्धि करेगा।

आप सभी को मकर संक्रान्ति की हार्दिक शुभकामनाएं।

जय श्री राम।